samacharsecretary.com

वन मंत्री कश्यप ने 809.71 लाख रुपए के विकास कार्यों का किया भूमिपूजन व लोकार्पण

रायपुर वन मंत्री  कश्यप ने 809.71 लाख रुपए के विकास कार्यों का किया भूमिपूजन व लोकार्पण बस्तर जिले के नारायणपुर विधानसभा क्षेत्र के विकास को नई ऊंचाई देने के उद्देश्य से प्रदेश के वन एवं जलवायु परिवर्तन  केदार कश्यप ने आज नारायणपुर क्षेत्रवासियों को बड़ी सौगात दी।  कश्यप ने कहा कि सड़क, शिक्षा और बुनियादी सुविधाओं का विस्तार हमारी सरकार की सर्वोच्च प्राथमिकता है।            मंत्री  कश्यप ने विधानसभा क्षेत्र के अंतर्गत बनियागांव और भानपुरी क्लस्टर में आयोजित भव्य कार्यक्रमों में कुल 8 करोड़ 09 लाख 71 हजार रुपए की लागत वाले विभिन्न बुनियादी ढांचागत कार्यों का भूमिपूजन और लोकार्पण संपन्न किया।              वन मंत्री  केदार कश्यप ने बनियागांव में सुबह आयोजित कार्यक्रम में क्षेत्र की कनेक्टिविटी सुधारने हेतु एक करोड़ 47 लाख 76 हजार रुपए के कार्यों की आधारशिला रखी और पूर्ण हो चुके कार्यों को जनता को समर्पित किया। इसमें मुख्य रूप से प्रधानमंत्री ग्रामीण सड़क योजना के अंतर्गत एक करोड़ 27 लाख 76 हजार रुपए की लागत से बनने वाली बनियागांव से कुच्चीगुड़ा सड़क का भूमिपूजन शामिल रहा, जबकि बस्तर विकास प्राधिकरण के माध्यम से पूर्ण हुए तुरपुरा की सीसी सड़क और केशरपाल के अहाता निर्माण कार्य का लोकार्पण किया गया।          वन मंत्री अपने भ्रमण के दौरान दोपहर भानपुरी में आयोजित द्वितीय चरण के कार्यक्रम में विकास की एक बड़ी झड़ी लगी। यहां कुल 6 करोड़ 61 लाख 95 हजार रुपए की विकास परियोजनाओं पर मुहर लगी, जिसमें 6 करोड़ 23 लाख 09 हजार रुपए की लागत से बनने वाली प्रधानमंत्री ग्रामीण सड़क योजना के तहत भानपुरी से पदरपारा, फरसागुड़ा से खासपारा और भानपुरी- चित्रकोट मार्ग से धनवाड़पारा तक सड़कों का जाल बिछाया जाएगा। साथ ही मुरकुची हाई स्कूल में प्रार्थना शेड निर्माण का भूमिपूजन करने के साथ-साथ विधायक निधि और विकास प्राधिकरण के अंतर्गत भानपुरी, तारागांव और विश्रामपुरी क्लस्टर में नवनिर्मित सीसी सड़कों एवं पुलिया निर्माण कार्यों का लोकार्पण कर क्षेत्रवासियों को बड़ी राहत दी गई। इस अवसर पर ग्रामीणों को संबोधित करते हुए वन मंत्री  ने अपने उद्बोधन में जोर देते हुए कहा कि हमारा लक्ष्य केवल घोषणाएं करना नहीं, बल्कि धरातल पर विकास को उतारना है। आज जिन सड़कों और भवनों का भूमिपूजन हुआ है, वे आने वाले समय में इस क्षेत्र की आर्थिक और सामाजिक तस्वीर बदल देंगे। अच्छी सड़कें न केवल आवागमन को सुगम बनाती हैं, बल्कि शिक्षा और स्वास्थ्य सेवाओं तक ग्रामीणों की पहुंच को भी आसान बनाती हैं। वन मंत्री  कश्यप ने कहा कि नारायणपुर विधानसभा का प्रत्येक गांव विकास की मुख्यधारा से जुड़े, इसके लिए हम निरंतर प्रयासरत हैं। उन्होंने राज्य सरकार की जनहितैषी योजनाओं का जिक्र करते हुए ग्रामीणों को भरोसा दिलाया कि विकास कार्यों को ग्रामीणों की मंशानुरूप पूरा किया जाएगा। उन्होंने स्थानीय जनप्रतिनिधियों और ग्रामीणों से विकास कार्यों की गुणवत्ता पर नजर रखने की भी अपील की, ताकि शासन की योजनाओं का लाभ जनता को लंबे समय तक मिल सके। कार्यक्रम के दौरान जनपद पंचायत अध्यक्ष  संतोष बघेल, सहित क्षेत्रीय जनप्रतिनिधिगण एवं बड़ी संख्या में ग्रामीण जन उपस्थित थे, जिन्होंने इन विकास कार्यों के लिए हर्ष व्यक्त किया।

जिला चिकित्सालय में 07 वर्षीय गौरव का हुआ सफल टॉन्सिल ऑपरेशन

रायपुर मुंगेली जिला चिकित्सालय में विशेषज्ञ चिकित्सकों की टीम ने 07 वर्षीय बालक गौरव साहू को लंबे समय से चली आ रही गंभीर समस्या से राहत दिलाई। जिला बेमेतरा के ग्राम बंदी निवासी गौरव साहू पिछले एक वर्ष से टॉन्सिल में बार-बार संक्रमण की समस्या से परेशान था। इस कारण उसे निगलने में कठिनाई होती थी और उसका वजन भी लगातार कम हो रहा था। परिजन उसे उपचार के लिए जिला चिकित्सालय लेकर पहुंचे, जहां ओपीडी में कान, नाक एवं गला रोग विशेषज्ञ डॉ. कमलेश सत्यपाल को दिखाया गया। जांच के बाद डॉक्टरों ने गौरव को क्रॉनिक टॉन्सिलाइटिस से पीड़ित बताया और शीघ्र ऑपरेशन (टॉन्सिलेक्टॉमी) की सलाह दी। इसके पश्चात डॉ. कमलेश सत्यपाल (ईएनटी विशेषज्ञ), डॉ. राजेश कुमार बेलदार (निश्चेतना विशेषज्ञ) एवं ओटी स्टाफ की टीम द्वारा सफलतापूर्वक ऑपरेशन किया गया। ऑपरेशन के बाद बालक पूरी तरह स्वस्थ है और उसकी स्थिति में पहले से काफी सुधार हुआ है। अब उसे खाने-पीने में कोई परेशानी नहीं हो रही है और उसका स्वास्थ्य लगातार बेहतर हो रहा है। जिला चिकित्सालय में उपलब्ध विशेषज्ञ सेवाओं और आधुनिक चिकित्सा सुविधाओं के कारण अब स्थानीय स्तर पर ही जटिल उपचार संभव हो रहे हैं, जिससे मरीजों को बड़े शहरों में जाने की आवश्यकता कम हो रही है। यह सफलता स्वास्थ्य सेवाओं की गुणवत्ता और डॉक्टरों की दक्षता का प्रमाण है।

29 अप्रैल को होगा खेल कौशल का परीक्षण, आज पंजीयन, दस्तावेज सत्यापन, मेडिकल और शारीरिक दक्षता का हुआ परीक्षण

रायपुर 29 अप्रैल को होगा खेल कौशल का परीक्षण, आज पंजीयन, दस्तावेज सत्यापन, मेडिकल और शारीरिक दक्षता का हुआ परीक्षण राज्य शासन के खेल एवं युवा कल्याण विभाग द्वारा संचालित आवासीय खेल अकादमी में प्रवेश के लिए 28 अप्रैल से 1 मई तक चयन ट्रायल का आयोजन किया गया है। चयन ट्रायल के पहले दिन आज रायपुर के कोटा स्थित स्वामी विवेकानंद स्टेडियम में तीरंदाजी, फुटबॉल और वेटलिफ्टिंग के खिलाड़ी शामिल हुए। इसमें छत्तीसगढ़ एवं अन्य राज्यों के तीरंदाजी में 68 बालक और 27 बालिका, फुटबॉल में 91 बालिका, वेटलिफ्टिंग में 7 बालक और 11 बालिका सहित कुल 204 खिलाड़ियों ने हिस्सेदारी की।  चयन ट्रायल के पहले दिन आज खिलाड़ियों का पंजीयन, दस्तावेज सत्यापन, मेडिकल और शारीरिक दक्षता का परीक्षण किया गया। ट्रायल के दूसरे दिन 29 अप्रैल को खिलाड़ियों के खेल कौशल का परीक्षण किया जाएगा। यह चयन ट्रायल 13 वर्ष से 17 वर्ष आयु वर्ग के खिलाड़ियों के लिए आयोजित है। इसमें चयनित खिलाड़ी खेल एवं युवा कल्याण विभाग द्वारा संचालित आवासीय खेल परिसर में निःशुल्क प्रशिक्षण हासिल करेंगे। प्रशिक्षण के दौरान अकादमी में खिलाड़ियों को निःशुल्क आवास, भोजन, शैक्षणिक व्यय, खेल परिधान, प्लेइंग किट और दुर्घटना बीमा जैसी सुविधाएं उपलब्ध कराई जाती है। 

वैवाहिक सीजन में गन्ना किसानों को मिली बड़ी राहत

रायपुर वैवाहिक सीजन में गन्ना किसानों को मिली बड़ी राहत वैवाहिक सीजन एवं आगामी फसल की तैयारियों के बीच गन्ना किसानों के लिए राहत भरी खबर सामने आई है। उप मुख्यमंत्री  विजय शर्मा के विशेष प्रयासों से भोरमदेव सहकारी शक्कर उत्पादक कारखाना, राम्हेपुर (कवर्धा) द्वारा किसानों को 13.80 करोड़ की राशि जारी की गई है। इसके साथ ही चालू पेराई सत्र में अब तक कुल 71.29 करोड़ का भुगतान किसानों को किया जा चुका है।              कलेक्टर एवं कारखाने के प्राधिकृत अधिकारी  गोपाल वर्मा के मार्गदर्शन में भुगतान प्रक्रिया लगातार जारी है। समयबद्ध भुगतान से सहकारी व्यवस्था में किसानों का विश्वास और अधिक मजबूत हुआ है। चालू पेराई सत्र में कारखाने ने उपलब्धि हासिल की है, जिसमें 2,55,818 मीट्रिक टन गन्ना पेराई एवं 3,09,120 क्विंटल शक्कर उत्पादन किया गया है। यह सफलता किसानों के सहयोग, प्रशासनिक मार्गदर्शन और कारखाने की कुशल कार्यप्रणाली का परिणाम है।           भोरमदेव शक्कर कारखाना किसानों और श्रमिकों के हित में निरंतर कार्य कर रहा है। इसमें एफआरपी के अतिरिक्त रिकवरी आधारित भुगतान, शासन द्वारा प्रदत्त बोनस वितरण, रियायती दर पर शक्कर उपलब्धता, उन्नत बीज एवं कृषि मार्गदर्शन, नियमित प्रशिक्षण कार्यक्रम जैसी सुविधाएं शामिल हैं। साथ ही सामाजिक उत्तरदायित्व के तहत किसानों के लिए सर्वसुविधायुक्त “बलराम सदन” तथा मात्र 5 रूपए में गरम भोजन की कैंटीन सुविधा भी उपलब्ध कराई जा रही है।                    भोरमदेव सहकारी शक्कर कारखाना जिले की अर्थव्यवस्था का मजबूत आधार बनकर उभरा है। यह किसानों को न्यूनतम मूल्य की गारंटी, फसल विविधता को बढ़ावा, हजारों लोगों को रोजगार तथा पीडीएस के लिए सस्ती दर पर शक्कर उपलब्ध कराने में महत्वपूर्ण भूमिका निभा रहा है। समय पर भुगतान, बेहतर प्रबंधन और किसान-केंद्रित योजनाओं के चलते यह कारखाना सहकारी मॉडल की सफलता का उत्कृष्ट उदाहरण बन गया है, जिससे किसानों की आर्थिक स्थिति मजबूत होने के साथ-साथ जिले के समग्र विकास को भी गति मिल रही है।

29 अप्रैल को रायपुर में प्राचीन “सोमनाथ ज्योतिर्लिंग छत्तीसगढ़ वासियों के जनदर्शन हेतु कार्यक्रम

रायपुर पूज्य गुरु देव श्री श्री रविशंकर जी के आर्ट ऑफ लिविंग रायपुर परिवार की ओर से राजधानी रायपुर में एक भव्य एवं दिव्य आध्यात्मिक कार्यक्रम “एक शाम शिव के नाम” का आयोजन किया जा रहा है।  कार्यक्रम में सोमनाथ ज्योतिर्लिंग की पावन प्रेरणा से तैयार प्रतिरूप के दर्शन, रुद्राभिषेक एवं सत्संग का आयोजन किया जाएगा, जिससे श्रद्धालु शिव भक्ति में लीन होकर आध्यात्मिक ऊर्जा का अनुभव कर सकेंगे। वैदिक धर्म संस्थान की राज्य समन्वय श्रीमती रचना चतुर्वेदी ने बताया यह  यह कार्यक्रम दिनांक 29 अप्रैल 2026 (बुधवार) को मुक्त आकाश मंच, घड़ी चौक, रायपुर में सायं 5:00 बजे से 8:00 बजे तक आयोजित होगा। आयोजकों ने बताया कि यह आयोजन शहरवासियों के लिए एक दुर्लभ आध्यात्मिक अवसर है, जिसमें सभी श्रद्धालुओं को सपरिवार आमंत्रित किया गया है। कार्यक्रम के माध्यम से शांति, प्रेम और आध्यात्मिक जागरूकता का संदेश दिया जाएगा। पूजा संकल्प एवं अधिक जानकारी के लिए इच्छुक श्रद्धालु निम्न संपर्क नंबरों पर संपर्क कर सकते हैं: 📞 8889082111, 7879041460, 8085751001, 9300834800  

सम्मान, सुरक्षा और आत्मनिर्भरता की दिशा में प्रभावी पहल

रायपुर छत्तीसगढ़ शासन द्वारा वरिष्ठ नागरिकों के सम्मान, सुरक्षा और समग्र कल्याण को सर्वाेच्च प्राथमिकता दी जा रही है। मुख्यमंत्रीविष्णु देव साय के नेतृत्व में राज्य सरकार ने वृद्धजनों के लिए एक मजबूत और संवेदनशील सामाजिक सुरक्षा तंत्र विकसित किया है, वहीं समाज कल्याण मंत्री श्रीमती लक्ष्मी राजवाड़े के मार्गदर्शन में विभागीय योजनाएँ प्रभावी रूप से धरातल पर क्रियान्वित हो रही हैं। इन प्रयासों से वरिष्ठ नागरिकों को आर्थिक, सामाजिक और भावनात्मक रूप से सशक्त बनाया जा रहा है। सरल प्रक्रिया, सहज लाभ राज्य में वरिष्ठ नागरिकों को योजनाओं का लाभ प्राप्त करने के लिए किसी अलग “सीनियर सिटीजन कार्ड” की आवश्यकता नहीं है। आधार कार्ड एवं अन्य वैध दस्तावेजों के माध्यम से आयु और पात्रता का सत्यापन कर सीधे लाभ प्रदान किया जा रहा है, इससे पूरी प्रक्रिया पारदर्शी, सरल और सुलभ बनी है। वृद्धाश्रम :- सम्मानजनक जीवन का आधार प्रदेश के राजधानी रायपुर सहित विभिन्न जिलों में संचालित 27 वृद्धाश्रम निराश्रित एवं असहाय वरिष्ठ नागरिकों के लिए सुरक्षित आश्रय बनकर उभरे हैं। वर्तमान में यहां 675 वृद्धजन लाभान्वित हो रहे हैं। यहाँ निःशुल्क आवास, पौष्टिक भोजन, वस्त्र और अन्य आवश्यक सुविधाएँ नियमित रूप से उपलब्ध कराई जा रही हैं, जिससे उन्हें गरिमापूर्ण जीवन जीने का अवसर मिल रहा है। पैलिएटिव केयर (प्रशामक गृह) :- विशेष देखभाल की व्यवस्था गंभीर रूप से बीमार एवं बिस्तर पर आश्रित वृद्धजनों के लिए राज्य में 13 प्रशामक गृह संचालित हैं। वर्तमान में रायपुर, कबीरधाम, दुर्ग, बालोद, रायगढ़ एवं बेमेतरा में 140 वरिष्ठ नागरिक लाभान्वित हो रहे हैं। इन केंद्रों में निरंतर देखभाल, उपचार सहयोग और आवश्यक सेवाएँ प्रदान की जाती हैं, जिससे संवेदनशील स्थिति में भी उन्हें मानवीय और सम्मानजनक जीवन मिल सके। वृद्धावस्था पेंशन :- आर्थिक संबल का आधार सामाजिक सुरक्षा के तहत पात्र वृद्धजनों को नियमित पेंशन दी जा रही है। बीपीएल एवं एसईसीसी वंचन समूह के वृद्धजनों को 500 रुपए प्रतिमाह तथा 80 वर्ष से अधिक आयु के नागरिकों को 680 रुपए प्रतिमाह पेंशन प्रदान की जा रही है। यह सहायता उनके दैनिक जीवन में आत्मनिर्भरता और आत्मसम्मान को मजबूती देती है। सहायक उपकरण और तीर्थ यात्रा :- नई ऊर्जा का संचार वरिष्ठ नागरिक को सहायक उपकरण प्रदाय योजना के अंतर्गत राज्य शासन द्वारा गरीबी रेखा के नीचे जीवन यापन करने वाले 60 वर्ष या उससे अधिक आयु के निराश्रित वृद्धजनों को उनकी आवश्यकता के अनुसार सहायक उपकरण उपलब्ध कराए जा रहे हैं। इस योजना के तहत चिकित्सकीय परामर्श के आधार पर अधिकतम 6900 रुपए तक के उपकरण जैसे व्हीलचेयर, वॉकर, बैसाखी, छड़ी, श्रवण यंत्र, चश्मा, ट्राइसाइकिल सहित अन्य आवश्यक सामग्री प्रदान की जाती है, जिससे उनका जीवन अधिक सहज बन सके। 19 प्रमुख तीर्थ स्थलों की तीर्थ यात्रा योजना के माध्यम से उन्हें आध्यात्मिक और मानसिक संतुलन का अवसर मिल रहा है, जो उनके जीवन में नई ऊर्जा का संचार करता है। वित्तीय वर्ष 2025-26 में 14 यात्राओं के माध्यम से 10 हजार 694 हितग्राहियों को लाभान्वित किया गया है। समग्र कल्याण की दिशा में निरंतर प्रयास छत्तीसगढ़ शासन का लक्ष्य केवल सहायता प्रदान करना नहीं, बल्कि वरिष्ठ नागरिकों को समाज की मुख्यधारा में सक्रिय भागीदारी के लिए प्रेरित करना है। पेंशन, स्वास्थ्य देखभाल, आवास, सहायक सुविधाओं और सामाजिक जुड़ाव के माध्यम से राज्य अपने वरिष्ठ नागरिकों के लिए एक सशक्त, संवेदनशील और समग्र सामाजिक सुरक्षा तंत्र स्थापित कर रहा है। मुख्यमंत्रीविष्णु देव साय और मंत्री श्रीमती लक्ष्मी राजवाड़े के नेतृत्व में यह प्रयास आने वाले समय में और अधिक प्रभावी रूप से वृद्धजनों के जीवन को गरिमामय बनाने की दिशा में आगे बढ़ते रहेंगे।  

अनोखी शादी: अंगारों पर चलकर दूल्हा-दुल्हन ने पूरी की रस्में, सदियों पुरानी परंपरा बरकरार

रायगढ़. छत्तीसगढ़ के रायगढ़ जिले में एक ऐसी अनोखी शादी चर्चा का विषय बनी हुई है, जिसमें दूल्हा-दुल्हन ने पारंपरिक सात फेरों के साथ-साथ जलते अंगारों पर चलकर विवाह की रस्में पूरी कीं। यह परंपरा कोई नई नहीं, बल्कि दशकों से आदिवासी समाज में चली आ रही है, जिसे आज भी पूरी आस्था और विश्वास के साथ निभाया जा रहा है। जानकारी के अनुसार, जिला मुख्यालय से करीब 20 किलोमीटर दूर स्थित बिलासपुर गांव में राठिया परिवार के गंधेल गोत्र में यह अनोखी परंपरा आज भी जीवित है। शादी के बाद जब दुल्हन को घर लाया जाता है, तो घर के देवी-देवताओं की पूजा-अर्चना के बाद मंडप में जलते अंगारे बिछाए जाते हैं। इसके बाद दूल्हा-दुल्हन के साथ परिवार के सदस्य नंगे पांव इन अंगारों पर चलकर रस्में पूरी करते हैं। घर के मुखिया पर देवता सवार होने की मान्यता परंपरा के अनुसार, मंडप में बकरे की बलि देने के बाद घर के मुखिया पर देवता सवार होने की मान्यता है। इसके बाद वे नाचते-गाते हुए मंडप में अंगारे बिछाते हैं और पूरे अनुष्ठान का नेतृत्व करते हैं। इस दौरान दूल्हा-दुल्हन समेत कई लोग अंगारों पर चलते हैं, लेकिन हैरानी की बात यह है कि किसी के पैरों में जलन या चोट नहीं होती। परिवार के सदस्य रखते हैं उपवास परिवार के सदस्यों का कहना है कि इस परंपरा के दौरान कई लोग उपवास रखते हैं और पानी तक ग्रहण नहीं करते। दुल्हन के घर आने के बाद सबसे पहले एक बकरे की बलि देकर उसके खून से तिलक लगाया जाता है, फिर घर में प्रवेश कराया जाता है। इसके बाद मंडप में दूसरी बलि दी जाती है और फिर अंगारों पर चलने की रस्म पूरी होती है। परंपरा नहीं निभाई गई, तो देवी-देवता होंगे नाराज गांव के बुजुर्गों के अनुसार, यह परंपरा कई पीढ़ियों से चली आ रही है। हर शादी में इस रस्म को निभाना अनिवार्य माना जाता है। ग्रामीणों का मानना है कि अगर यह परंपरा नहीं निभाई गई, तो देवी-देवता नाराज हो सकते हैं और परिवार पर विपत्ति आ सकती है। अनोखी शादी को देखने उमड़ती है भीड़ इस अनोखी शादी को देखने के लिए न केवल गांव, बल्कि आसपास के क्षेत्रों से भी बड़ी संख्या में लोग पहुंचते हैं। जलते अंगारों पर चलते दूल्हा-दुल्हन का यह दृश्य लोगों के लिए कौतूहल और आस्था का केंद्र बना हुआ है। फिलहाल यह अनोखी शादी सोशल मीडिया पर भी तेजी से वायरल हो रही है और लोग इस परंपरा को लेकर तरह-तरह की प्रतिक्रियाएं दे रहे हैं।

6 गायों से शुरू हुआ डेयरी का सफर, आज 25 उन्नत पशुओं के साथ लिख रहे सफलता की इबारत

रायपुर दंतेवाड़ा जिले में दुग्ध उत्पादन के क्षेत्र में हो रही अभूतपूर्व वृद्धि बस्तर संभाग में एक नई 'श्वेत क्रांति' का संकेत दे रही है। कभी संघर्षों के लिए पहचाने जाने वाले इस अंचल में अब पशुपालन और डेयरी व्यवसाय ग्रामीण आत्मनिर्भरता का मुख्य आधार बन रहे हैं। छत्तीसगढ़ सरकार के प्रयासों से न केवल किसानों की आर्थिक स्थिति सुदृढ़ हो रही है, बल्कि यह पहल स्थानीय स्तर पर कुपोषण के विरुद्ध लड़ाई में भी एक महत्वपूर्ण कड़ी साबित हो रही है। मजदूरी से 'मल्टी-फार्मिंग' तक का प्रेरणादायक सफर दंतेवाड़ा के गीदम विकासखंड के ग्राम गुमड़ा के रहने वाले 36 वर्षीय ललित यादव की कहानी अटूट साहस और संघर्ष की मिसाल है। एक समय था जब ललित अपनी आजीविका के लिए दूसरों के खेतों और निर्माण कार्यों में मजदूरी करने को विवश थे। वर्ष 2013 में उन्होंने महज 6 गायों के साथ पशुपालन की शुरुआत की। आज उनके वैज्ञानिक दृष्टिकोण और कड़ी मेहनत का परिणाम है कि उनके पास 25 गायों का एक विशाल और आधुनिक डेयरी फार्म है। तकनीक और आधुनिक नस्लों से आया बड़ा बदलाव ललित की सफलता का मुख्य आधार पारंपरिक खेती के साथ आधुनिक तकनीक का समावेश है: •    उन्नत नस्लें: पशुपालन विभाग के मार्गदर्शन में उन्होंने जर्सी और एचएफ (HF) क्रॉस जैसी उन्नत नस्लों को अपनाया। •    उत्पादन: वर्तमान में उनके फार्म से प्रतिदिन 70 से 80 लीटर दूध का उत्पादन हो रहा है, जो ₹70 प्रति लीटर की दर से बाजार में बिक रहा है। •    लागत में कमी: चारे की समस्या से निपटने के लिए उन्होंने नेपियर घास की खेती शुरू की, जिससे पशुओं को साल भर पौष्टिक चारा उपलब्ध रहता है और बाहरी खर्चों में भारी कटौती हुई है। 'मल्टी-फार्मिंग' मॉडल: आय के विविध स्रोत ललित ने केवल डेयरी तक सीमित न रहकर 'मल्टी-फार्मिंग' का एक सफल मॉडल तैयार किया है: •    विविधता: डेयरी के साथ-साथ वे कुक्कुट (मुर्गी) पालन और सब्जी उत्पादन भी कर रहे हैं, जिससे उन्हें नियमित नकद आय प्राप्त होती है। •    मूल्य संवर्धन (Value Addition): दूध की अधिकता होने पर वे उच्च गुणवत्ता वाला पनीर तैयार करते हैं, जो 400 प्रति किलो की दर से हाथों-हाथ बिक जाता है। •    जैविक खाद: उनके फार्म के गोबर की इतनी मांग है कि अन्य जिलों के किसान 3000 से 3500 प्रति ट्रैक्टर की दर से जैविक खाद खरीदने उनके घर तक पहुँचते हैं। शासन की योजनाओं और पारिवारिक संस्कारों का संगम ललित की इस प्रगति में शासन की कल्याणकारी योजनाओं और बैंकिंग सुविधाओं का विशेष योगदान रहा। उन्होंने डेयरी शेड और फेंसिंग के लिए लिए गए 3 लाख के बैंक ऋण को समय से पूर्व चुकाकर अपनी विश्वसनीयता और व्यावसायिक कुशलता का परिचय दिया है। ललित अपनी सफलता का श्रेय अपनी माँ के संघर्षों और संस्कारों को देते हैं। उनकी माँ ने एक आंगनबाड़ी सहायिका के रूप में विपरीत परिस्थितियों में उन्हें शिक्षा दिलाई। आज ललित न केवल स्वयं आत्मनिर्भर हैं, बल्कि पूरे क्षेत्र के किसानों के लिए एक 'प्रेरक प्रकाश स्तंभ' बनकर उभरे हैं। उनकी कहानी इस बात का जीवंत प्रमाण है कि सही मार्गदर्शन, ईमानदारी और मेहनत से ग्रामीण अंचलों में भी खुशहाली का नया अध्याय लिखा जा सकता है।

मनमानी पर लगाम: निजी स्कूलों की फीस वृद्धि पर कार्रवाई, किताबों के व्यापार पर भी रोक

खैरागढ़. निजी स्कूलों की बढ़ती मनमानी पर आखिरकार प्रशासन ने शिकंजा कस दिया है। अभिभावकों की जेब पर भारी पड़ रही फीस वृद्धि और महंगी निजी किताबों के खेल पर रोक लगाने के लिए जिला शिक्षा अधिकारी मुकुल साव ने सख्त आदेश जारी किया है। यह फैसला ऐसे समय आया है, जब लंबे समय से पालक वर्ग निजी स्कूलों की मनमर्जी से परेशान था और लगातार शिकायतें सामने आ रही थीं। जारी निर्देशों में साफ कहा गया है कि जिले के सभी निजी विद्यालयों को छत्तीसगढ़ अशासकीय विद्यालय अधिनियम के नियमों का कड़ाई से पालन करना होगा। अब बिना ठोस कारण फीस बढ़ाना आसान नहीं होगा। खास तौर पर 8 प्रतिशत से ज्यादा फीस बढ़ाने वाले स्कूलों को इसका पूरा हिसाब देना पड़ेगा कि क्यों बढ़ाई, किस आधार पर बढ़ाई और किस बैठक में इसकी मंजूरी मिली। प्रशासन ने यह भी स्पष्ट कर दिया है कि हर स्कूल की फीस समिति में नोडल प्राचार्य की भूमिका अब महज औपचारिक नहीं रहेगी, बल्कि उन्हें पूरी निगरानी करनी होगी। सबसे बड़ा वार उस किताब सिंडिकेट पर किया गया है, जिसकी आड़ में सालों से अभिभावकों से मोटी रकम वसूली जाती रही है। आदेश में साफ निर्देश है कि कक्षा 1 से 8 तक के बच्चों को केवल एनसीईआरटी की किताबों से ही पढ़ाया जाएगा। किसी भी निजी प्रकाशन की किताब थोपना अब सीधे नियमों का उल्लंघन माना जाएगा। वहीं 9वीं से 12वीं तक के छात्रों को भी किसी खास दुकान या प्रकाशन से किताब खरीदने के लिए मजबूर नहीं किया जा सकेगा। नियमों का उल्लंघन करने पर होगी कड़ी कार्रवाई : डीईओ प्रशासन ने यह भी साफ किया है कि शिकायतों को अब अनदेखा नहीं किया जाएगा। एक पारदर्शी शिकायत निवारण प्रणाली विकसित करने के निर्देश दिए गए हैं, ताकि पालकों की आवाज सीधे प्रशासन तक पहुंचे और उस पर तत्काल कार्रवाई हो सके। डीईओ मुकुल साव ने दो टूक कहा है कि नियमों का उल्लंघन करने वाले निजी स्कूलों पर कड़ी कार्रवाई की जाएगी। इस कार्रवाई को शिक्षा के नाम पर चल रहे कमाई के खेल पर बड़ा प्रहार माना जा रहा है। अगर आदेश जमीनी स्तर पर सख्ती से लागू होता है, तो यह न सिर्फ अभिभावकों को राहत देगा बल्कि शिक्षा व्यवस्था में पारदर्शिता भी लाएगा।

CGBSE Result 2026: 29 अप्रैल को आएंगे 10वीं-12वीं के नतीजे, ऐसे देखें अपना स्कोर

 रायपुर छत्तीसगढ़ माध्यमिक शिक्षा मंडल (CGBSE) की 10वीं और 12वीं बोर्ड परीक्षाओं में शामिल लाखों छात्रों का इंतजार अब खत्म होने जा रहा है। बोर्ड द्वारा कक्षा 10वीं और 12वीं के नतीजे बुधवार, 29 अप्रैल 2026 को घोषित किए जाएंगे। परिणाम दोपहर 2:30 बजे जारी होगा। इस वर्ष 10वीं बोर्ड परीक्षा में करीब 3.21 लाख और 12वीं बोर्ड परीक्षा में लगभग 2.45 लाख छात्र-छात्राएं शामिल हुए थे। सभी परीक्षार्थी अपने रिजल्ट का बेसब्री से इंतजार कर रहे हैं। दोपहर 2:30 बजे होगा परिणाम घोषित हाई स्कूल और हायर सेकेंडरी परीक्षा परिणाम का औपचारिक ऐलान दोपहर 2:30 बजे किया जाएगा। छात्र-छात्रा परिणाम को आसानी से देख सकते हैं। परीक्षा का परिणाम कैसे चेक कर सकते हैं हम उसकी जानकारी आपको दे रहे हैं। ऐसे चेक करें छत्तीसगढ़ बोर्ड रिजल्ट 2026 छात्र अपना रिजल्ट छत्तीसगढ़ बोर्ड (Chhattisgarh Board Result 2026) की आधिकारिक वेबसाइट cgbse.nic.in (इस लिंक को क्लिक कर सीधे वेबसाइट पर जा सकते हैं) पर जाकर देख सकते हैं। इसके लिए रोल नंबर की आवश्यकता होगी। रिजल्ट चेक करने के आसान स्टेप्स     सबसे पहले आधिकारिक वेबसाइट cgbse.nic.in पर जाएं।     होमपेज पर CGBSE 10वीं रिजल्ट 2026 या CGBSE 12वीं रिजल्ट 2026 लिंक पर क्लिक करें।     अब अपना रोल नंबर दर्ज कर सबमिट करें।     आपकी मार्कशीट स्क्रीन पर दिखाई देगी।     भविष्य के लिए रिजल्ट डाउनलोड कर प्रिंट आउट निकाल लें। छात्रों को सलाह दी जाती है कि वे रिजल्ट जारी होने के समय वेबसाइट पर ट्रैफिक अधिक होने की स्थिति में धैर्य बनाए रखें और कुछ समय बाद दोबारा प्रयास करें।