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श्रमिक सुविधाओं को बढ़ावा: रायपुर में मॉडल व डिजिटल लेबर चौक बनाने का निर्णय

रायपुर : मॉडल लेबर चौक एवं डिजिटल लेबर चौक का निर्माण कराने का निर्णय 73,868 निर्माण श्रमिकों के खाते में 25.66 करोड़ रूपए की राशि अंतरित छत्तीसगढ़ भवन एवं अन्य सन्निर्माण कर्मकार कल्याण मंडल की बैठक आयोजित रायपुर श्रम मंत्री  लखनलाल की अध्यक्षता में  नवा रायपुर स्थित छत्तीसगढ़ भवन एवं अन्य सन्निर्माण कर्मकार कल्याण मंडल कार्यालय में संचालक मंडल की बैठक आयोजित की गई। इस दौरान 73 हजार 868 निर्माण श्रमिकों एवं उनके परिवारजनों को 25 करोड़ 66 लाख रूपए की राशि डीबीटी के माध्यम से सीधे श्रमिकों के बैंक खाते में अंतरित की गई। इस अवसर पर छत्तीसगढ़ भवन एवं अन्य सन्निर्माण कर्मकार कल्याण मंडल के अध्यक्ष डॉ. रामप्रताप सिंह, श्रम विभाग के सचिव सह श्रमायुक्त  हिमशिखर गुप्ता, छत्तीसगढ़ भवन एवं अन्य सन्निर्माण कर्मकार कल्याण मंडल के सचिव  गिरीश रामटेके सहित अन्य प्रतिनिधि उपस्थित थे।  सचिव  रामटेके द्वारा छत्तीसगढ़ भवन एवं अन्य सन्निर्माण कर्मकार कल्याण मंडल द्वारा पूर्व बैठक में निर्माण श्रमिकों के हित में लिए गये निर्णय के पालन प्रतिवेदन के सभी बिन्दुओ पर कार्यवाही पूर्ण होने के संबंध में अवगत कराते हुये नवीन एजेंडा बिन्दु प्रस्तावित किया गया। संचालक मंडल द्वारा प्रदेश के निर्माण श्रमिकों के कल्याण हेतु विभिन्न बिन्दुओं पर निर्णय लेते हुये प्रदेश में मॉडल लेबर चौक एवं डिजिटल लेबर चौक का निर्माण कराने के साथ-साथ मुख्यमंत्री द्वारा 17 सितंबर 2025 को मंडल में संचालित दीदी ई-रिक्शा सहायता योजना एवं मुख्यमंत्री निर्माण श्रमिक आवास सहायता योजना के तहत प्रदाय की जाने वाली राशि रूपये 1 लाख से 1लाख 50 हजार दिये जाने की घोषणा की गई थी जिसे संचालक मंडल द्वारा सर्वसम्मिति से पारित किया गया।  बैठक में उपस्थित श्रम मंत्री  लखन लाल देवांगन द्वारा प्रसन्नता व्यक्त करते हुये निर्माण श्रमिकों को बधाई देने के साथ-साथ यह भी कहा गया कि अब प्रदेश के निर्माण श्रमिक उक्त योजनांर्तगत अधिक सहायता राशि प्राप्त कर सकेंगे एवं उनकी आय में भी वृद्धि हो सकेगी। साथ ही श्रममंत्री महोदय द्वारा मंडल में संचालित विभिन्न कल्याणकारी योजनाओं की सराहना की गई। इस अवसर सचिव श्रम, वित्त विभाग के उप सचिव, कल्याण आयुक्त भारत सरकार श्रम एवं रोजगार मंत्रालय अन्य शासकीय विभाग के पदेन सदस्य तथा विभागीय अधिकारी उपस्थित थे।

ऐतिहासिक पल: राष्ट्रपति मुर्मु को मिली धरती आबा बिरसा मुंडा की बस्तर कला प्रतिमा, रायपुर में हुआ भव्य समारोह

रायपुर : जनजातीय गौरव दिवस समारोह का ऐतिहासिक क्षण : मुख्यमंत्री श्री विष्णु देव साय ने राष्ट्रपति श्रीमती द्रौपदी मुर्मु को भेंट की धरती आबा भगवान बिरसा मुंडा की बस्तर आर्ट प्रतिमा रायपुर जनजातीय गौरव दिवस के अवसर पर अंबिकापुर में आयोजित कार्यक्रम में एक प्रेरक एवं गरिमामय क्षण देखने को मिला, जब मुख्यमंत्री श्री विष्णुदेव साय ने राष्ट्रपति श्रीमती द्रौपदी मुर्मु को बस्तर आर्ट में निर्मित धरती आबा भगवान बिरसा मुंडा की प्रतिमा स्मृति-चिह्न के रूप में भेंट की। यह प्रतिमा जनजातीय विरासत, शौर्य और छत्तीसगढ़ की सांस्कृतिक अस्मिता का प्रतीक मानी जाती है। मुख्यमंत्री श्री साय द्वारा भेंट की गई यह मूर्ति भगवान बिरसा मुंडा के बलिदान और जनजातीय समाज की गौरवपूर्ण परंपराओं को सम्मानपूर्वक स्मरण कराने वाला एक सशक्त प्रतीक है। कार्यक्रम स्थल पर मौजूद दर्शकों ने इस भावनात्मक क्षण का गर्मजोशी से स्वागत किया। मुख्यमंत्री श्री साय ने कहा कि राज्य सरकार आदिवासी समाज की समृद्ध परंपराओं, कला, इतिहास और स्वतंत्रता संग्राम में उनके अप्रतिम योगदान को संरक्षित और प्रोत्साहित करने के लिए प्रतिबद्ध है। उन्होंने कहा कि हमारी सरकार जनजातीय समाज की विरासत, संस्कृति और अमूल्य योगदान को संजोने, संरक्षित करने और सशक्त रूप से आगे बढ़ाने के लिए पूर्ण प्रतिबद्धता के साथ कार्य कर रही है।  मुख्यमंत्री श्री साय ने कहा कि हमारा संकल्प है कि आदिवासी समाज के स्वाभिमान को नई ऊंचाइयों तक पहुँचाया जाए, ताकि उनकी गौरवशाली पहचान आने वाली पीढ़ियों के लिए एक प्रेरणा बने।

देश की पहली क्वालिटी सर्टिफाइड लैब पंडरी IPHL, बलौदाबाजार बनी दूसरी—छत्तीसगढ़ का गौरव

रायपुर  छत्तीसगढ़ ने स्वास्थ्य सेवाओं की गुणवत्ता को लेकर एक और ऐतिहासिक उपलब्धि हासिल की है। जिला अस्पताल पंडरी रायपुर और जिला अस्पताल बलौदाबाजार की इंटिग्रेटेड पब्लिक हेल्थ लैब (IPHL) को भारत सरकार के नेशनल क्वालिटी एश्योरेंस कार्यक्रम (NQAS) के अंतर्गत राष्ट्रीय स्तर का गुणवत्ता प्रमाणपत्र प्राप्त हुआ है। इनमें पंडरी रायपुर की IPHL देश की प्रथम, जबकि बलौदाबाजार की IPHL देश एवं राज्य की द्वितीय प्रमाणित लैब बनी है। यह उपलब्धि छत्तीसगढ़ में गुणवत्तापूर्ण स्वास्थ्य सेवाओं के विस्तार और वैज्ञानिक मानकों पर आधारित लैब सुविधाओं के सुदृढ़ीकरण को प्रमाणित करती है। राज्य में स्वास्थ्य सेवाओं को मजबूत बनाने की दिशा में छत्तीसगढ़ सरकार द्वारा निरंतर किए जा रहे प्रयासों का यह सीधा परिणाम है कि जनवरी 2024 से नवंबर 2025 के बीच राज्य की कुल 832 स्वास्थ्य संस्थाओं का राष्ट्रीय मानकों के आधार पर मूल्यांकन और प्रमाणीकरण किया गया है। इनमें दंतेवाड़ा के दूरस्थ क्षेत्र चिंतागुफा जैसे दुर्गम इलाकों के स्वास्थ्य केंद्र भी शामिल हैं। उल्लेखनीय है कि देश में पहली बार किसी राज्य में लैब्स की इतनी बड़ी और व्यवस्थित श्रृंखला का मूल्यांकन एवं प्रमाणीकरण हुआ है, जिसने छत्तीसगढ़ को राष्ट्रीय स्तर पर विशिष्ट स्थान दिलाया है। दोनो लैब्स का मूल्यांकन भारत सरकार, स्वास्थ्य एवं परिवार कल्याण मंत्रालय, नई दिल्ली द्वारा नामित विशेषज्ञ मूल्यांकनकर्ताओं की टीमों ने किया। पंडरी रायपुर की IPHL का मूल्यांकन 10 सितंबर 2025, जबकि बलौदाबाजार की IPHL का मूल्यांकन 11 सितंबर 2025 को किया गया। दोनों टीमों ने लैब की कार्यप्रणाली, मरीज केंद्रित सेवाएँ, गुणवत्ता नियंत्रण, समयबद्ध रिपोर्टिंग और सुरक्षा प्रक्रियाओं की गहन समीक्षा की। मूल्यांकन उपरांत, पंडरी रायपुर IPHL को 90% और बलौदाबाजार IPHL को 88% स्कोर के साथ प्रमाणन प्राप्त हुआ। यह स्कोर स्वास्थ्य गुणवत्ता के राष्ट्रीय मानकों में उत्कृष्ट श्रेणी में आता है। इंटिग्रेटेड पब्लिक हेल्थ लैब की अवधारणा का मूल उद्देश्य यह सुनिश्चित करना है कि मरीजों को एक ही छत के नीचे पैथोलॉजी, बायोकैमिस्ट्री और माइक्रोबायोलॉजी से संबंधित सभी प्रकार की जांच सुविधाएं उपलब्ध हों। इससे न केवल जांच की गति और विश्वसनीयता बढ़ती है, बल्कि लोगों को महंगी निजी जांच लैब्स पर अनावश्यक निर्भरता से भी राहत मिलती है। एकीकृत मॉडल होने के कारण, मरीजों को एक ही स्थान पर किफायती और सटीक जांच रिपोर्ट उपलब्ध हो पाती है।

किसानों और नागरिकों के हित में साय सरकार ने गाइडलाइन दरों की समीक्षा की

रायपुर मुख्यमंत्री विष्णु देव साय के दूरदर्शी नेतृत्व में छत्तीसगढ़ सरकार ने पूरे राज्य के लिए गाइडलाइन दरों का व्यापक, वैज्ञानिक और तर्कसंगत पुनरीक्षण करते हुए ऐतिहासिक कदम उठाया है। यह निर्णय जनता के हित, पारदर्शिता, उचित बाजार मूल्यांकन और नागरिकों की सहूलियत को ध्यान में रखते हुए लिया गया है। गाइडलाइन नियम 2000 के अनुसार दरों का प्रतिवर्ष पुनरीक्षण आवश्यक है, परंतु वर्ष 2017-18 के बाद से दरों में किसी प्रकार का संशोधन नहीं हुआ था। इस कारण वास्तविक बाजार मूल्य और गाइडलाइन दरों में भारी अंतर पैदा हो गया था—जिसका प्रतिकूल प्रभाव किसानों, भूमिस्वामियों, संपत्ति धारकों और आम नागरिकों पर पड़ रहा था। राज्य में गाइडलाइन दरों के पिछले ढांचे नगरीय क्षेत्रों में दरों में भारी विसंगतियाँ थीं। एक ही सड़क, वार्ड या आसपास के क्षेत्रों में अनुपातहीन अंतर दिखाई देता था। एक ही सड़क पर स्थित संपत्तियों की दरें अलग-अलग थीं, जिससे नागरिकों को वास्तविक मूल्यांकन में कठिनाई होती थी। ग्रामीण क्षेत्रों में भी एक ही मार्ग पर स्थित गाँवों की दरों में अतार्किक भिन्नता थी, जिससे किसानों को मुआवज़ा और बैंक लोन में नुकसान होता था। पिछले सात वर्षों में बने नए हाईवे, कॉलोनी, औद्योगिक क्षेत्र आदि की दरें निर्धारित नहीं थीं, जिससे नागरिकों को संपत्ति मूल्य जानने में कठिनाई हो रही थी। वाणिज्यिक कर (पंजीयन) मंत्री ओपी चौधरी के दिशानिर्देश पर गाइडलाइन दरों को पुर्ननिर्धारित करते हुए पूरी प्रक्रिया को वैज्ञानिक, पारदर्शी और जनसुलभ बनाया गया है। नगरीय क्षेत्रों में गाइडलाइन को रोड-वाइज तैयार किया गया है, ताकि एक सड़क और समान परिस्थितियों वाले क्षेत्रों की दरें समान हों। अत्यधिक कंडिकाओं को समायोजित कर संख्या कम की गई, ताकि नागरिकों को मूल्य समझने में सरलता हो। ग्रामीण क्षेत्रों में सभी गाँवों की दरों को नक्शे में प्रविष्ट कर, समान मार्ग और समान परिस्थितियों वाले गाँवों की दरें यथासंभव समान और तर्कसंगत की गईं।वर्तमान दरों की वैज्ञानिक मैपिंग कर रैशनलाइज़्ड बेस रेट तैयार किए गए और इन्हीं के आधार पर नई दरें प्रस्तावित की गईं है। नवीन दरें – जनता को सीधा लाभ नगरीय क्षेत्रों में लगभग 20% की तर्कसंगत वृद्धि की गई है। ग्रामीण क्षेत्रों में किसानों के हित में दरों में 50% से 300% तक वृद्धि की गई है—जिससे किसानों को भूमि अधिग्रहण आदि में 3 गुना तक अधिक मुआवज़ा मिलेगा। नवीन दरों से किसानों/भूमिस्वामियों को उनकी भूमि का अधिक एवं न्यायसंगत मुआवज़ा प्राप्त होगा। संपत्ति के विरुद्ध बैंक से अधिक राशि का लोन स्वीकृत होगा। आम नागरिकों के लिए अपनी संपत्ति की गाइडलाइन दर स्पष्ट और समझने में आसान होगी। वाणिज्यिक कर (पंजीयन) मंत्री ओ. पी. चौधरी ने कहा कि गाइडलाइन दरों का यह व्यापक और वैज्ञानिक पुनरीक्षण जनता के हितों को सर्वोपरि रखते हुए पूरी पारदर्शिता के साथ किया गया है। उन्होंने कहा कि 2017-18 के बाद दरों में संशोधन न होने से राज्य में वास्तविक बाजार मूल्य और गाइडलाइन दरों में गंभीर असंतुलन पैदा हो गया था, जिससे किसान, भूमिस्वामी और सामान्य नागरिक प्रतिकूल रूप से प्रभावित हो रहे थे। नई गाइडलाइन दरें रोड-वाइज और वैज्ञानिक मैपिंग के आधार पर तैयार की गई हैं, ताकि हर क्षेत्र में दरें तर्कसंगत, समान और समझने में सरल हों। उन्होंने कहा कि ग्रामीण क्षेत्रों में 50% से 300% तक की वृद्धि किसानों को उचित मुआवज़ा और अधिक बैंक लोन प्राप्त करने में बड़ा लाभ देगी, नगरीय क्षेत्रों में 20% की तार्किक वृद्धि मूल्य-विसंगतियाँ दूर करेगी। चौधरी ने कहा कि विभाग भविष्य में भी विकास, नई बसाहटों, बाजार प्रवृत्तियों और क्षेत्रीय आवश्यकताओं के आधार पर नियमित समीक्षा करता रहेगा, ताकि किसी भी नागरिक को उनकी संपत्ति के वास्तविक मूल्य से वंचित न होना पड़े। उल्लेखनीय है कि लंबे अंतराल के बाद गाइडलाइन दरों का यह व्यापक और महत्त्वपूर्ण संशोधन किया गया है। भविष्य में भी विभाग द्वारा जिले स्तर पर उस क्षेत्र में हो रहे विकास, नए निर्माण, क्षेत्रीय परिस्थितियों, बाजार प्रवृत्तियों तथा नई बसाहटों/कॉलोनियों के विस्तार का नियमित आकलन किया जाता रहेगा। इसी आधार पर गाइडलाइन दरों में समय-समय पर आवश्यक, तर्कसंगत और जनहितकारी संशोधन किए जाते रहेंगे, ताकि नागरिकों को उनकी संपत्ति के वास्तविक मूल्य का लाभ निर्बाध रूप से मिलता रहे और किसी भी प्रकार की मूल्य-विसंगतियाँ उत्पन्न न हों। "गाइडलाइन दरों का वैज्ञानिक और तर्कसंगत पुनरीक्षण राज्य के किसानों, भूमिस्वामियों और आम नागरिकों के हित में उठाया गया अत्यंत महत्त्वपूर्ण कदम है। पिछले कई वर्षों से दरों में संशोधन न होने के कारण वास्तविक बाजार मूल्य और गाइडलाइन दरों में बड़ा अंतर पैदा हो गया था। नई दरें न केवल न्यायसंगत मूल्यांकन सुनिश्चित करेंगी, बल्कि किसानों को भूमि अधिग्रहण में अधिक मुआवज़ा, नागरिकों को संपत्ति का सही मूल्य और बैंक से अधिक ऋण प्राप्त करने में भी सहायता प्रदान करेंगी। शासन की मंशा स्पष्ट है—हर नागरिक को उसकी संपत्ति का उचित मूल्य मिले और किसी भी प्रकार की विसंगतियाँ या भ्रम की स्थिति उत्पन्न न हो। यह निर्णय प्रदेश के आर्थिक परिवेश को अधिक पारदर्शी, संतुलित और जनहितकारी बनाएगा।" – CM विष्णु देव साय  

कबीरधाम में सहकारी समिति प्रबंधकों और ऑपरेटर्स की हड़ताल स्थगित

कलेक्टर गोपाल वर्मा को संघ ने हड़ताल स्थगन का सौंपा पत्र, 21 नवंबर लौटेंगे काम पर          रायपुर, कबीरधाम जिले में बीते 3 नवंबर से चल रही जिला सहकारी संघ की अनिश्चितकालीन हड़ताल स्थगित हो गई है।  संघ के पदाधिकारियों ने कलेक्टर श्री गोपाल वर्मा से मुलाकात कर हड़ताल स्थगन का पत्र सौंपा। जिला सहकारी संघ की ओर से कहा गया कि शासन द्वारा 15 नवंबर से धान खरीदी प्रारंभ कर दी गई है। किसानों के हित को देखते हुए जिला सहकारी संघ के समस्त कर्मचारी अपनी अनिश्चितकालीन हड़ताल को स्थगित करते हैं और 21 नवंबर, शुक्रवार से अपने कार्य पर लौट जाएंगे। इस अवसर पर जिला पंचायत अध्यक्ष श्री ईश्वरी साहू, संयुक्त कलेक्टर श्री आर बी देवांगन, उप पंजीयक सहकारिता श्री जी एस शर्मा, खाद्य अधिकारी श्री सचिन मरकाम, डीएमओ श्री अभिषेक मिश्रा, सीसीबी नोडल श्री आर पी मिश्रा सहित अन्य अधिकारी व जिला सहकारी संघ के सदस्य उपस्थित रहे।

जमीन गाइडलाइन बढ़ाने के फैसले पर कांग्रेस बरसी, धनेंद्र साहू ने कहा—सरकार कर रही है उपभोक्ताओं की लूट

रायपुर जमीन की नई गाइडलाइन दर जारी होते ही सियासी बयान सामने आने लगे हैं. पूर्व छत्तीसगढ़ कांग्रेस अध्यक्ष धनेंद्र साहू ने इसे आम उपभोक्ताओं और किसानों को लूटने जैसा कृत्य करार दिया है. वहीं पूर्व कांग्रेस विधायक विकास उपाध्याय ने इसे भू-माफिया के अनुसार बनाया कानून बताया है. पूर्व छत्तीसगढ़ कांग्रेस अध्यक्ष धनेंद्र साहू ने कहा कि यह आम उपभोक्ताओं और किसानों को लूटने जैसा कृत्य है. हमारी सरकार ने सरकारी कीमतों में 30% की कमी की थी, लेकिन वर्तमान सरकार ने वह छूट समाप्त कर दी है. इससे जमीन और मकान दोनों महंगे हो गए हैं. उन्होंने अव्यावहारिक तरीके से गाइडलाइन दर बढ़ाए जाने का आरोप लगाते हुए कहा कि इससे जमीन के दाम कई गुना बढ़ जाएंगे. इससे किसान के साय़थ आम लोग नुकसान में रहेंगे. यह फैसला सिर्फ सरकार के राजस्व बढ़ाने के लिए है, इसमें आम उपभोक्ता और किसान लाभान्वित नहीं होंगे, इससे भूमाफिया को फायदा मिलेगा. वहीं जमीन की नई दरों को लेकर कांग्रेस के पूर्व विधायक विकास उपाध्याय ने कहा कि बीजेपी लोगों को बेरोजगार करना चाहती है. कभी छोटे-छोटे जमीन लेने वाले लोगों की रजिस्ट्री को रोकने का प्रयास करती है, तो कभी खरीदी-बिक्री में अलग-अलग प्रयोग से शुल्क बढ़ाकर नुकसान पहुंचाने का काम करती है. उन्होंने कहा कि कांग्रेस की सरकार में भूपेश बघेल ने रियायत देने का काम किया था. इस सरकार में तो जमीन का व्यापार करने वाले लोग जुड़े हुए है. अब भू-माफियाओं के अनुसार नियम-कानून को बनाया जा रहा है, आम लोगों को आने वाले समय में बहुत परेशानी होने वाली है, यह गाइडलाइन लोगों का काम छीनने वाला है.

विकास कार्यों में बाधाएं देख भड़के डिप्टी सीएम साव: कहा— ‘किंतु-परंतु छोड़ें, विकास को दें प्राथमिकता’

मुंगेली मुंगेली नगर पालिका क्षेत्र डिप्टी मुख्यमंत्री एवं नगरीय प्रशासन मंत्री अरुण साव के गृह जिले में आता है, इसलिए नगर विकास के लिए उन्होंने क्षेत्र में कई विकास परियोजनाओं की झड़ी लगा दी है। बीते 20 महीनों में इस नगर पालिका क्षेत्र को विभिन्न मदों और कार्यों के लिए कुल 92 करोड़ रुपये की स्वीकृति मिल चुकी है। 19 नवंबर को आयोजित एक कार्यक्रम में डिप्टी सीएम ने लगभग 30 करोड़ रुपये के नए विकास कार्यों का शिलान्यास और भूमिपूजन भी किया। इसके बावजूद, नगरीय प्रशासन की धीमी कार्यशैली के कारण पुराने स्वीकृत परियोजनाओं में से कई कार्य अभी तक शुरू नहीं हो पाए हैं। मुंगेली नगर पालिका में कई परियोजनाओं के लिए जमीन का चयन या स्थान का निर्धारण भी नहीं हो पाया है। इस धीमी गति के लिए नगर पालिका के सीएमओ, अध्यक्ष, उपाध्यक्ष और पार्षदों की टीम को जिम्मेदार माना जा रहा है। नाराज डिप्टी सीएम अरुण साव ने सार्वजनिक मंच से न सिर्फ अपनी नाराजगी व्यक्त की, बल्कि अधिकारियों और जनप्रतिनिधियों को विकास कार्यों में तेजी लाने के निर्देश भी दिए। नगर विकास में कौन बना रोड़ा? मुंगेली नगर पालिका में वर्तमान में कांग्रेस के रोहित शुक्ला अध्यक्ष हैं, जबकि उपाध्यक्ष भाजपा के जय प्रकाश मिश्रा हैं। डिप्टी सीएम ने क्षेत्र में विकास कार्यों के लिए बड़े पैमाने पर धनराशि जारी की है, लेकिन अधोसंरचना विकास की गति कछुए की चाल जैसी धीमी बनी हुई है। इससे कई परियोजनाएं ठप पड़ी हैं और नागरिक अपेक्षित विकास का लाभ नहीं उठा पा रहे हैं। महत्वपूर्ण परियोजनाओं में देरी नवीन नगर पालिका कार्यालय भवन और नालंदा परिसर जैसी कई बड़ी परियोजनाओं को स्वीकृति मिलने के बावजूद अब तक कार्य शुरू नहीं हुए हैं। भूमि का चयन न होना और परियोजनाओं के लिए ठोस कार्ययोजना न बनना इस देरी का मुख्य कारण है। अब सवाल यह उठता है कि इस स्थिति के लिए दोषी कौन है—क्या नगर पालिका के अधिकारी सीएमओ होरी सिंह ठाकुर, या जनप्रतिनिधि? यदि अधिकारी दोषी हैं, तो उन पर तत्काल कार्रवाई की जानी चाहिए। वहीं, यदि जिम्मेदारी जनप्रतिनिधियों की है, तो उन्हें डिप्टी सीएम की नसीहत मानकर आपसी सामंजस्य के साथ कार्य करना चाहिए। डिप्टी सीएम की नसीहत: “किंतु-परंतु छोड़ो, विकास पर ध्यान दो” डिप्टी सीएम अरुण साव ने सार्वजनिक मंच से कहा कि मुंगेली नगर पालिका के लिए धन की कोई कमी नहीं है, केवल कार्ययोजना बनाने में देरी है। उन्होंने स्पष्ट किया कि पहले से स्वीकृत कार्यों को शीघ्र पूरा कराना अत्यंत आवश्यक है। चाहे वह नगरीय प्रशासन विभाग हो, खेल विभाग, पीडब्ल्यूडी या पीएचई—मुंगेली क्षेत्र के विकास में किसी भी प्रकार की कमी नहीं रहने दी जाएगी। जानकारों का कहना है कि कांग्रेस अध्यक्ष और भाजपा उपाध्यक्ष के बीच आपसी खींचतान या दूरी भी विकास कार्यों को प्रभावित कर रही हो सकती है। डिप्टी सीएम ने इस पर जोर देते हुए कहा कि नगर विकास के लिए आपसी तालमेल और सहयोग सबसे जरूरी है। उन्होंने नगर पालिका अध्यक्ष को भी नसीहत दी कि उन्हें “किंतु–परंतु” की सोच छोड़कर केवल और केवल नगर के विकास पर ध्यान केंद्रित करना चाहिए। अधिकारियों के साथ तालमेल की कमी नगर पालिका अध्यक्ष और उपाध्यक्ष के राजनीतिक भेदभाव के कारण अधिकारियों और कर्मचारियों के साथ अपेक्षित तालमेल नहीं बन पा रहा है। समय-समय पर जनता ने इसकी झलक देखी और महसूस की है। इसके अलावा सवाल यह भी उठता है कि कहीं जनप्रतिनिधि अपने पसंदीदा ठेकेदारों को फायदा पहुंचाने के चक्कर में विकास कार्यों को प्रभावित तो नहीं कर रहे। यह विषय मुंगेली की जनता के लिए गंभीर चिंता का विषय बन गया है। डिप्टी सीएम अरुण साव ने स्पष्ट किया कि नगर पालिका में क्या चल रहा है, उनसे कुछ भी छिपा नहीं है। अब सभी अधिकारियों और जनप्रतिनिधियों की जिम्मेदारी बनती है कि वे आपसी तालमेल के साथ विकास कार्यों को समय पर पूरा करें और मुंगेली को एक आधुनिक और व्यवस्थित नगर बनाने में योगदान दें।

सरगुजा में जनजातीय गौरव दिवस: राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू का जोर—परंपराओं को जीवित रखना बेहद जरूरी

सरगुजा छत्तीसगढ़ के सरगुजा जिला के अंबिकापुर पीजी कॉलेज ग्राउंड में जनजातीय गौरव दिवस समारोह में गुरुवार को राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू शामिल हुईं। उन्होंने कार्यक्रम को संबोधित करते हुए कहा कि आदिवासी संस्कृति को जीवित रखना बहुत जरूरी है। छत्तीसगढ़ के जनजाति समाज के लोग अपनी संस्कृति और परंपरा को बनाए रखे हुए हैं, इसके लिए मैं उन्हें धन्यवाद देती हूं। मैं भी जनजाति समाज की बेटी हूं और जनजाति परिवार में जन्म लेने पर मुझे बहुत गर्व है। जनजाति समाज की परंपरा को मैं पहले भी जीती थी और अब भी जीती हूं। शिक्षा, स्वास्थ्य, जल, जंगल और जमीन के साथ आदिवासी संस्कृति को बढ़ावा देने की जरूरत है। साथ ही बोलीं, केंद्र और राज्य सरकारों के प्रयासों से वामपंथी उग्रवाद का उन्मूलन सुनिश्चित होगा। राष्ट्रपति ने कहा कि जनजाति समाज का इस देश में बहुत बड़ा योगदान है। आदिवासी संस्कृति और सभ्यता को आगे बढ़ाने की जरूरत है, क्योंकि यह बेहद खूबसूरत और सुंदर है। ऐसे कार्यक्रमों में मैं जब जाती हूं तो जनजाति परिवार के लोगों से मुलाकात करती हूं। जनजाति महिलाओं से मुलाकात करने पर मुझे गर्व महसूस होता है। स्थानीय स्तर पर भी जनजाति समाज की संस्कृति और उनके विकास को प्राथमिकता से ध्यान देने की जरूरत है। राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू ने आगे कहा है कि छत्तीसगढ़ राज्य 25 साल का हो गया है। छत्तीसगढ़ के रहने वाले सभी लोगों को मैं बधाई देती हूं। भगवान बिरसा मुंडा के इस कार्यक्रम में शामिल होने और उनकी प्रतिमा पर माल्यार्पण करने का मुझे सौभाग्य प्राप्त हुआ है। अंबिकापुर में व्यापक स्तर पर 15 नवंबर से लेकर 20 नवंबर तक जनजाति गौरव दिवस मनाया गया है। छत्तीसगढ़ और ओडिशा के लोगों में रोटी और बेटी का रिश्ता राष्ट्रपति ने कहा कि छत्तीसगढ़ और ओडिशा की सीमा एक दूसरे लगी हुई है ,छत्तीसगढ़ और ओडिशा के लोगों में रोटी और बेटी का संबंध है। छत्तीसगढ़ के लोग ओडिशा में शादी करते हैं और ओडिशा वाले छत्तीसगढ़ में शादी करते हैं। ओडिशा और छत्तीसगढ़ की दोस्ती बहुत पुरानी है। झारखंड, छत्तीसगढ़ और ओडिशा के जनजाति समाज की विरासत बहुत गहरी है।  

पीएम जनमन योजना में उत्कृष्ट प्रदर्शन: जनजातीय गौरव दिवस पर सीएम साय ने दी राज्य को बधाई

अंबिकापुर राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू सरगुजा संभाग के मुख्यालय अंबिकापुर में आयोजित जनजातीय गौरव दिवस के समापन समारोह में मुख्य अतिथि के रूप में शामिल हुईं। यह भव्य कार्यक्रम पीजी कॉलेज ग्राउंड में चल रहा है। इसे बिरसा मुंडा की जयंती के अवसर पर मनाया जा रहा है। कार्यक्रम में केंद्रीय मंत्री जुएल ओरांव, राज्यपाल रमेन डेका और मुख्यमंत्री विष्णुदेव साय सहित अन्य गणमान्य उपस्थित हैं। जनजातीय गौरव दिवस कार्यक्रम में राष्ट्रपति मुर्मू मुख्यमंत्री ग्राम अखरा विकास योजना का शुभारंभ करेंगी। इसके साथ ही जनजातीय समुदाय के प्रमुखों का सम्मान और जनजातीय विद्रोहों के नायकों व स्वतंत्रता संग्राम सेनानियों के परिवारों को भी सम्मानित किया जाएगा। कार्यक्रम में जनजातीय विकास प्रदर्शनी और क्राफ्ट मेले का भी आयोजन किया गया है। कार्यक्रम में मुख्यमंत्री विष्णुदेव साय ने अपने संबोधन में कहा कि छत्तीसगढ़ के नक्सल पीड़ित लोगों ने राष्ट्रपति से मुलाकात की थी और यह देखकर वे बहुत खुश थे। ऐसे लोग जो पहले रायपुर नहीं देख पाए थे, वे राष्ट्रपति भवन पहुंचे थे। उन्होंने आगे कहा कि छत्तीसगढ़ में लगातार जनजातीय समुदाय के विकास के लिए काम किया जा रहा है। पीएम जनमन योजना में उत्कृष्ट कार्य के लिए राज्य को सम्मान भी मिला है। बस्तर इलाके में नक्सलवाद की कमर टूट गई है। वहां सुदूर इलाकों में सड़क बिजली पानी जैसी मूलभूत सुविधाएं मिल रही है।

फ्लाई ऐश डंपिंग और जल प्रदूषण पर प्रशासन का संज्ञान, विभागों को जांच के निर्देश

​जांजगीर-चांपा जिले के बिरगहनी ग्राम पंचायत में चूना पत्थर खदान संचालकों द्वारा किए जा रहे अवैध खनन से भूजल प्रदूषण और भूजल स्तर में भारी गिरावट के साथ उत्पन्न गंभीर पर्यावरणीय और जन स्वास्थ्य संकट पर जिला प्रशासन ने संज्ञान लिया है. ​खनिज अधिकारी ने कार्यपालन अभियंता, जल संसाधन विभाग और क्षेत्रीय अधिकारी, पर्यावरण संरक्षण मंडल को शीघ्र जांच कर की गई कार्रवाई से अवगत कराने का निर्देश दिया है. जिला प्रशासन ने यह कार्रवाई आरटीआई कार्यकर्ता विकास शर्मा द्वारा राज्यपाल, मुख्यमंत्री और मुख्यमंत्री के सलाहकार को भेजे गए ई-मेल के संदर्भ में की है. इस ई-मेल में चूना पत्थर खदान संचालकों द्वारा अवैध खनन के साथ ही फ्लाई ऐश की अवैध डंपिंग से हो रहे गंभीर पर्यावरणीय खतरों का उल्लेख किया गया था. ​प्रमुख कार्रवाई और निर्देश कार्यपालन अभियंता, जल संसाधन विभाग, जांजगीर-चांपा को चूना पत्थर खदान संचालकों द्वारा अवैध खनन, भूजल प्रदूषण और भूजल स्तर में गिरावट से संबंधित बिंदुओं की शीघ्र जांच कर की गई कार्रवाई से अवगत कराने का निर्देश दिया है. वहीं ​क्षेत्रीय अधिकारी, पर्यावरण संरक्षण मंडल, बिलासपुर को अवैध खनन और फ्लाई ऐश की अवैध डंपिंग से उत्पन्न पर्यावरणीय संकट के बिंदुओं पर शीघ्र जांच करने और विभाग द्वारा की गई कार्रवाई की जानकारी खनिज शाखा को प्रेषित करने का निर्देश दिया है. ​खनिज अधिकारी ने संबंधित विभागों को निर्देशित किया है कि वे जल्द से जल्द अपनी जांच रिपोर्ट प्रस्तुत करें, ताकि मामले में वैधानिक और कठोर कार्रवाई सुनिश्चित की जा सके और जन स्वास्थ्य एवं पर्यावरण को हो रहे नुकसान को रोका जा सके.