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दिल्ली को मिलेगा नया मेडिकल कॉलेज, 250 MBBS सीटों के साथ बढ़ेगी सुविधा

नई दिल्ली दिल्ली सरकार ने राजधानी के हेल्थ इन्फ्रास्ट्रक्चर को मजबूत करने के लिए द्वारका में नया सुपर स्पेशियलिटी मेडिकल कॉलेज बनाने का फैसला किया है। मुख्यमंत्री रेखा गुप्ता की अध्यक्षता में गुरुवार को हुई व्यय वित्त समिति (EFC) की बैठक में द्वारका स्थित इंदिरा गांधी अस्पताल परिसर में अत्याधुनिक मेडिकल कॉलेज और हॉस्टल निर्माण परियोजना को मंजूरी दे दी गई। इस महत्वाकांक्षी योजना पर 805.99 करोड़ रुपये खर्च किए जाएंगे। मेडिकल कॉलेज के निर्माण को वर्ष 2025 तक पूरा करने का लक्ष्य रखा है। सीएम रेखा गुप्ता के मुताबिक मेडिकल कॉलेज को राष्ट्रीय आयुर्विज्ञान आयोग (NMC) के मानकों के अनुरूप विकसित किया जाएगा। इसके बनने से हर साल 250 एमबीबीएस सीटों पर दाखिले बढ़ेंगे। 150 छात्रों के साथ शुरू की जाएगी पढ़ाई उन्होंने कहा कि शुरुआती चरण में 150 छात्रों के साथ पढ़ाई शुरू की जाएगी। परियोजना के पहले चरण में अकैडमिक ब्लॉक, स्टूडेंट्स के अलग हॉस्टल और फैकल्टी के लिए रेजिडेंशल ब्लॉक बनाए जाएंगे। इसके निर्माण से स्वास्थ्य सेवाएं और मजबूत होंगी। उन्होंने कहा कि सरकार का लक्ष्य दिल्ली को मेडिकल एजुकेशन का प्रमुख केंद्र बनाना है। 1.17 लाख वर्ग मीटर क्षेत्र में किया जाएगा निर्माण सीएम ने बताया कि मेडिकल कॉलेज, हॉस्टल और रेजिडेंशल ब्लॉक का निर्माण करीब 1.17 लाख वर्ग मीटर क्षेत्र में होगा, जिसमें बेसमेंट पार्किंग और अन्य सुविधाएं भी रहेंगी। प्रोजेक्ट में ग्रीन बिल्डिंग मानकों का पालन किया जाएगा।     परिसर में सोलर पावर रेन वॉटर हार्वेस्टिंग, वॉटर रीसाइक्लिंग, प्राकृतिक रोशनी और वेंटिलेशन जैसी आधुनिक सुविधाएं विकसित की जाएंगी। बिल्डिंग को भूकंपरोधी और दिव्यांगों के अनुकूल बनाया जाएगा।  सरकार के मुताबिक, निर्माण कार्य की गुणवत्ता और समयसीमा पर विशेष निगरानी रखी जाएगी। लोक निर्माण विभाग (PWD) निर्माण कार्य करेगा, जबकि स्वास्थ्य एवं परिवार कल्याण विभाग परियोजना की मॉनिटरिंग करेगा। दिल्ली को एक नया मेडिकल कॉलेज मिलने से बड़ा फायदा होगा। पहला, छात्रों के लिए MBBS की सीटों में इजाफा होगा। दूसरा, दिल्ली सरकार के अस्पतालो में डॉक्टरों की कमी को पूरा करने में भी मदद मिलेगी। द्वारका के जिस इंदिरा गांधी सुपर स्पेशियलिटी अस्पताल परिसर में यह कॉलेज बनेगा, वहां भी डॉक्टर्स की कमी है। इसके चलते अस्पताल पूरी क्षमता से काम नही कर रहा है। मेडिकल कॉलेज बनने, एमबीबीएस छात्रों की पढ़ाई शुरू होने के साथ अस्पताल को भी पूरी क्षमता के साथ चलाने में भी मदद मिलेगी। द्वारका के साथ-साथ दिल्ली के आसपास के इलाकों, बाहरी दिल्ली के इलाकों से आने वाले लोगों के लिए मेडिकल सुविधाएं बढ़ेगी।  

स्वास्थ्य ढांचे को मजबूती: किशनगंज में मेडिकल कॉलेज के लिए जमीन का प्रस्ताव भेजा गया

किशनगंज. किशनगंज में स्वीकृत मेडिकल कॉलेज का निर्माण ठाकुरगंज के कृषि मैदान के समीप हो सकता है। जमीन का चयन कर जिला से इसका प्रस्ताव भेजा गया है। हालांकि, फिलहाल इसकी स्वीकृति की सूचना जिला प्रशासन को नहीं मिली है। जानकारी के अनुसार बिहार सरकार के मंत्रीपरिषद में किशनगंज में मेडिकल कॉलेज बनाने की स्वीकृति प्रदान की थी। जिस आलोक में बीएसएएसआईसीएस के प्रबंध निदेशक ने डीएम को पत्र भेजकर राजकीय चिकित्सा महाविद्यालय व अस्पताल के निर्माण के लिए जमीन का चयन कर प्रस्ताव मांगा था। इसमें कहा गया था कि वर्तमान में 13 मेडिकल कॉलेज संचालित हैं। सरकार से 20 जिलो में नये मेडिकल कॉलेज के निर्माण की स्वीकृति प्राप्त है। इसको लेकर जमीन उपलब्ध कराने के दिशा में पहल हो रही है। 11 मार्च को पहुंचे थे सीएम नीतीश कुमार उल्लेखनीय है कि 11 मार्च को मुख्यमंत्री नीतीश कुमार ठाकुरगंज पहुंचे थे। मुख्यमंत्री के पहुंचने पर ठाकुरगंज के लोगों में मेडिकल कॉलेज के नींव डालने की उम्मीद थी। लेकिन वह पूरी नहीं हो सकी। सभा के दौरान मेडिकल कॉलेज ठाकुरगंज में बनने को लेकर नारेबाजी भी की गई। स्थानीय विधायक गोपाल कुमार अग्रवाल ने अपने संबोधन में कई मांगों के साथ मेडिकल कॉलेज ठाकुरगंज में खोलने की मांग की थी। उन्होंने कहा था कि मेडिकल कॉलेज खुलने से कई प्रखंडों के लोगों को फायदा होगा। हालांकि अपने संबोधन के क्रम में गृहमंत्री सम्राट चौधरी ने ठाकुरगंज में मेडिकल कॉलेज खोलने की बात कही थी। बावजूद, लोग शिलान्यास नहीं होने से निराश थे। लोगों को मिलेगा फायदा भाजपा के जिला प्रवक्ता कौशल किशोर यादव ने बताया कि ठाकुरगंज में मेडिकल कॉलेज की स्थापना से कई प्रखंड के साथ ही पड़ोसी राज्य बंगाल के लोगों को भी काफी लाभ होगा। जिस जमीन का चयन किया गया है वह एनएच के समीप स्थित है। जिससे आपातकालीन स्थिति में लोगों को काफी फायदा मिल सकता है। उन्होंने कहा कि यहां जल्द मेडिकल कॉलेज निर्माण कराने की जरूरत है। उल्लेखनीय है कि मेडिकल कॉलेज अपने इलाके में खोलने के लिए विधायक सरवर आलम, तौसीफ आलम ने भी पत्राचार किया था। जमीन का चयन कर प्रस्ताव भेजा – मेडिकल कालेज के लिए ठाकुरगंज में जमीन का चयन कर प्रस्ताव भेजा गया है। अन्य दूसरी जगह उपयुक्त जमीन उपलब्ध नहीं हो रही है। हालांकि चयनित जमीन की स्वीकृति विभाग द्वारा दी गई है या नहीं इसकी सूचना अबतक नहीं आई है। – विशाल राज, डीएम

बिहार के दो जिलों में पीपीपी मोड पर बनेंगे सरकारी मेडिकल कॉलेज

पटना. बिहार की स्वास्थ्य व्यवस्था को एक नई उंचाइयों पर ले जाने के लिए नीतीश सरकार ने बड़ा दांव खेला है. राज्य में अब नए सरकारी मेडिकल कॉलेज अस्पतालों का निर्माण लोक निजी भागीदारी (PPP) मोड पर पर खोलने का निर्णय लिया हैं. सात निश्चय पार्ट-3 के तहत सरकार ने इन जिलों में अत्याधुनिक मेडिकल कॉलेज बनाने की प्रक्रिया को तेज कर दिया है. अब सहरसा और गोपालगंज के छात्रों को डॉक्टर बनने और मरीजों को बेहतर इलाज के लिए दूसरे शहरों का रुख नहीं करना होगा. PPP मोड पर बनेगा हेल्थ इंफ्रास्ट्रक्चर सरकार का लक्ष्य है कि राज्य के अधिक से अधिक जिलों में मेडिकल शिक्षा और उन्नत इलाज की सुविधा उपलब्ध हो. इसी रणनीति के तहत नए मेडिकल कॉलेजों का निर्माण PPP मॉडल पर कराया जाएगा, ताकि निजी निवेश के जरिए आधुनिक ढांचा और बेहतर प्रबंधन सुनिश्चित हो सके. जिन जिलों में नए मेडिकल कॉलेज बनने हैं, वहां जमीन चिह्नित कर उसे स्वास्थ्य विभाग को हस्तांतरित करने की प्रक्रिया जारी है. यह कदम परियोजनाओं को तय समयसीमा में पूरा करने के उद्देश्य से उठाया गया है. गोपालगंज में जमीन चिह्नित स्वास्थ्य मंत्री मंगल पांडेय ने बताया कि गोपालगंज जिले में मेडिकल कॉलेज के लिए मांझा प्रखंड में 24 एकड़ 37 डिसमील जमीन चिह्नित की गई है. जिला प्रशासन द्वारा जमीन का हस्तांतरण भी किया जा चुका है. सरकार ने इस जमीन की तकनीकी जांच के लिए बिहार चिकित्सा सेवाएं एवं आधारभूत संरचना निगम लिमिटेड के तकनीकी दल को स्थल निरीक्षण करने का निर्देश दिया है. निरीक्षण रिपोर्ट के आधार पर आगे की निर्माण प्रक्रिया शुरू की जाएगी. यह स्थान जिले के लिए एक बड़ा ‘हेल्थ हब’ साबित होगा. जमीन की तकनीकी जांच के लिए बिहार चिकित्सा सेवाएं एवं आधारभूत संरचना निगम लिमिटेड (BMSICL) की एक एक्सपर्ट टीम को स्थल निरीक्षण का निर्देश दिया गया है. टीम की रिपोर्ट आते ही पीपीपी मोड पर निर्माण के लिए टेंडर प्रक्रिया शुरू कर दी जाएगी. सहरसा में भी तैयारी अंतिम चरण में सहरसा जिले में भी मेडिकल कॉलेज खोलने की मांग लंबे समय से हो रही थी. राज्य सरकार की योजना अगले पांच सालों में चरणबद्ध तरीके से उन सभी जिलों को कवर करने की है जहां अभी तक मेडिकल कॉलेज नहीं हैं. पीपीपी मोड पर बनने वाले ये कॉलेज न केवल सरकारी नियंत्रण में होंगे, बल्कि निजी निवेश के आने से यहां विश्वस्तरीय सुविधाएं और आधुनिक मशीनें जल्द उपलब्ध हो सकेंगी. अगले पांच वर्षों में चरणबद्ध तरीके से नए मेडिकल कॉलेज अस्पतालों का निर्माण राज्य की स्वास्थ्य व्यवस्था को नई दिशा देगा. इससे स्थानीय स्तर पर विशेषज्ञ डॉक्टर, आधुनिक इलाज और मेडिकल शिक्षा के अवसर उपलब्ध होंगे. सरकार का मानना है कि इन परियोजनाओं के पूरा होने से न सिर्फ मरीजों को बड़े शहरों की ओर पलायन से राहत मिलेगी, बल्कि रोजगार के नए अवसर भी सृजित होंगे.

मेडिकल कॉलेजों में फैकल्टी की सैलरी बढ़ाई जाएगी, शिक्षकों को भरने के लिए नया फॉर्मूला तैयार

भोपाल मध्य प्रदेश में सरकारी मेडिकल कॉलेजों की संख्या तो बढ़ रही है, लेकिन इसमें डॉक्टर्स की नियुक्ति सरकार के लिए किसी चुनौती से कम नहीं है. इसके लिए लगातार कोशिशें की जा रही हैं. राज्य सरकार अब दूर-दराज के मेडिकल कॉलेजों में डॉक्टर्स की कमी को पूरा करने के लिए उन्हें स्पेशल अलाउंस देने की भी तेयारी कर रही है. इन डॉक्टर्स को बड़े शहरों के आसपास स्थित सरकारी मेडिकल कॉलेजों की तुलना में 20 फीसदी अधिक प्रोत्साहन राशि दिए जाने की तैयारी चल रही है. इसके लिए स्वास्थ्य विभाग मापदंड तैयार कर रही है. मेडिकल कॉलेज खुले, पद खाली प्रदेश में सरकारी मेडिकल कॉलेजों की संख्या लगातार बढ़ रही है, लेकिन इनमें फैकल्टी की कमी पूरी करने में सरकारी को पसीना आ रहा है. सिंगरौली मेडिकल कॉलेज में तकरीबन 90 फीसदी फैकल्टी के पद खाली पड़े हैं. यहां स्वीकृत पदों की संख्या 116 है, लेकिन भर्ती मुश्किल से डेढ़ दर्जन पदों पर ही हो सकी है. कमोवेश यही स्थिति प्रदेश के श्योपुर जिले में बनाए गए सरकारी मेडिकल कॉलेज की है. इसमें फैकल्टी के 116 पद हैं, लेकिन यहां भी मुश्किल से 15 पदों को ही भरा जा सका है. इन कॉलेजों में पढ़ने के लिए स्टूडेंट्स तो पहुंच गए, लेकिन पढ़ाने वाले शिक्षक मौजूद नहीं हैं. इसकी वजह से ऑनलाइन क्लास के जरिए इन्हें पढ़ाया जा रहा है. फैकल्टी के मामले में सबसे ज्यादा समस्या नए मेडिकल कॉलेजों में हैं. श्योपुर, सिंगरौली, नीचम, मंदसौर और सिवनी में 50 से लेकर 90 फीसदी तक फैकल्टी के पद खाली हैं. कैबिनेट में लाया जाएगा प्रस्ताव इससे निपटने के लिए राज्य सरकार अब इन दूर-दराज के मेडिकल कॉलेजों में पदस्थ होने वाली फैकल्टी को स्पेशल अलाउंस देने की तैयारी कर रही है. उप मुख्यमंत्री राजेन्द्र शुक्ला ने हाल ही में स्वास्थ्य विभाग के अधिकारियों के साथ बैठक कर इसका प्रस्ताव तैयार कर कैबिनेट के पास भेजने के लिए कहा है. इन डॉक्टर्स को अलाउंस देने के लिए मापदंड तैयार किए जा रहे हैं. उपमुख्यमंत्री के मुताबिक मेडिकल कॉलेजों में खाली पदों को भरने के लिए प्रक्रिया चल रही है. जल्द ही सभी पदों को भरने की कार्रवाई की जाएगी. तीन नए मेडिकल कॉलेज और होने जा रहे शुरू मध्य प्रदेश में इस सत्र से तीन और नए मेडिकल कॉलेज शुरू होने जा रहे हैं. ये मेडिकल कॉलेज सीहोर जिले के बुधनी, छतरपुर और दमोह में खोले जा रहे हैं. इन मेडिकल कॉलेजों में फैकल्टी के लिए व्यवस्थाएं शुरू कर दी गई हैं. तीन नए मेडिकल कॉलेज के बाद प्रदेश में सरकारी मेडिकल कॉलेजों की संख्या बढ़कर 17 हो जाएगी. इसके अलावा मंडल और राजगढ़ में भी मेडिकल कॉलेज खोलने की तैयारियां चल रही हैं. प्रदेश में मेडिकल कॉलेजों की संख्या है 17 मध्य प्रदेश में अभी 17 मेडिकल कॉलेज हैं. इनमें गांधी मेडिकल कॉलेज भोपाल, गजराराजा मेडिकल कॉलेज ग्वालियर, महात्मा गांधी मेमोरियल मेडिकल कॉलेज इंदौर, नेताजी सुभाष चंद्र बोस मेडिकल कॉलेज जबलपुर, श्याम शाह मेडिकल कॉलेज रीवा. बुंदेलखंड मेडिकल कॉलेज सागर, शासकीय मेडिकल कॉलेज दतिया, अटल बिहारी वाजपेयी शासकीय मेडिकल कॉलेज विदिशा, शासकीय मेडिकल कॉलेज रतलाम, नंद कुमार सिंह चौहान मेडिकल कॉलेज खंडवा शामिल हैं. इनके अलावा शासकीय मेडिकल कॉलेज शहडोल, छिंदवाड़ा मेडिकल कॉलेज, श्रीमंत रानी लक्ष्मीबाई सिंधिया मेडिकल कॉलेज शिवपुरी, शासकीय मेडिकल कॉलेज सतना, सुंदरलाल पटवा शासकीय मेडिकल कॉलेज मंदसौर, शासकीय मेडिकल कॉलेज सिवनी, वीरेंद्र कुमार सखलेचा शासकीय मेडिकल कॉलेज नीमच शामिल हैं. 

सागर: बुंदेलखंड मेडिकल कॉलेज में एक साथ बनेंगे 10 मॉड्यूलर ऑपरेशन थिएटर

सागर  बुंदेलखंड मेडिकल कॉलेज (बीएमसी) सागर में स्वास्थ्य सुविधाओं के विस्तार की दिशा में महत्वपूर्ण कदम उठाए जा रहे हैं। सागर विधायक शैलेंद्र जैन के सतत प्रयासों से अस्पताल परिसर में एक साथ 10 मॉड्यूलर ऑपरेशन थिएटर का निर्माण किया जा रहा है, जिससे एक ही समय में 10 अलग-अलग विधाओं के ऑपरेशन संभव हो सकेंगे। 16 करोड़ रुपये की लागत से निर्माण विधायक जैन ने बताया कि इस परियोजना के अंतर्गत लगभग 16 करोड़ रुपये की लागत से 60,000 वर्गफुट क्षेत्रफल में आधुनिक स्ट्रक्चर का निर्माण किया जा रहा है। इसके अतिरिक्त 10 मॉड्यूलर ऑपरेशन थिएटर की स्थापना के लिए लगभग 15 करोड़ रुपये की अतिरिक्त राशि से अत्याधुनिक सुविधाओं का निर्माण प्रस्तावित है। सागर के स्वास्थ्य क्षेत्र में बड़ी उपलब्धि साबित होगी उन्होंने कहा कि यह परियोजना सागर के स्वास्थ्य क्षेत्र में एक बड़ी उपलब्धि साबित होगी। विधायक जैन ने बताया कि वर्तमान में ऑपरेशन थिएटर की कमी के कारण कई मरीजों को अपने ऑपरेशन के लिए कई दिनों तक प्रतीक्षा करनी पड़ती है। 10 नए मॉड्यूलर ओटी के निर्माण से न केवल मरीजों को समय पर उपचार मिलेगा, बल्कि चिकित्सकों को भी बेहतर और सुगम कार्य वातावरण उपलब्ध होगा। विभिन्न प्रकार के रोगियों के ऑपरेशन एक साथ इससे विभिन्न प्रकार के रोगियों के ऑपरेशन एक साथ और अधिक प्रभावी ढंग से किए जा सकेंगे। मंगलवार को विधायक जैन ने बुंदेलखंड मेडिकल कॉलेज के डीन डॉ. पीएस ठाकुर के साथ निर्माणाधीन ऑपरेशन थिएटर भवन का निरीक्षण किया। निरीक्षण के दौरान उन्होंने निर्माण कार्य की प्रगति की समीक्षा करते हुए ठेकेदार को कार्य शीघ्र, गुणवत्तापूर्ण एवं समयसीमा में पूर्ण करने के निर्देश दिए। इस अवसर पर मेडिकल कॉलेज के अधिकारी, चिकित्सक एवं निर्माण एजेंसी के प्रतिनिधि भी उपस्थित रहे। परियोजना के पूर्ण होने पर क्षेत्र के हजारों मरीजों को बेहतर स्वास्थ्य सेवाओं का सीधा लाभ मिलेगा।

मेडिकल कॉलेज के जेल वार्ड से दो बंदी लापता, प्रशासन में मचा हड़कंप

अम्बिकापुर छत्तीसगढ़ के अम्बिकापुर के मेडिकल कॉलेज के जेल वार्ड से दो कैदियों के फरार होने की घटना ने सुरक्षा व्यवस्था पर सवाल खड़े कर दिए हैं। इलाज के लिए मेडिकल कॉलेज के जेल वार्ड में कैदी दिवाली की रात तीन बजे सुरक्षाकर्मियो को चकमा देकर फरार हो गए थे। इस मामले में जिले के एसपी ने नाराजगी जाहिर करते हुए बंदी की देखरेख में शामिल दो पुलिसकर्मियों को सस्पेंड कर दिया है।   दरअसल, अंबिकापुर मेडिकल कॉलेज के जेल वार्ड से दो कैदी दीवाली के दिन फरार हो गए थे। यह घटना देर रात करीब तीन बजे की समीप की बताई जा रही थी, उस वक्त दोनों ने ही सुरक्षा में तैनात सुरक्षाकर्मियों को चकमा देकर भागने में कामयाब हो गए थे।  इस वारदात से जेल प्रशासन और पुलिस विभाग में हड़कंप मच गया।

हिंदी में मेडिकल पढ़ाई की शुरुआत, जबलपुर में खुल रहा पहला हिंदी माध्यम कॉलेज

 जबलपुर  मध्य प्रदेश आयुर्विज्ञान विश्वविद्यालय जल्द ही जबलपुर में देश का पहला हिंदी चिकित्सा कॉलेज आरंभ करने जा रहा है। एमबीबीएस की 50 सीटों के साथ यह कालेज शैक्षिक सत्र 2027-28 से आरंभ होगा। इसमें पढ़ाई हिंदी माध्यम से कराई जाएगी। आयुर्विज्ञान विश्वविद्यालय ने प्रस्ताव मध्य प्रदेश सरकार को भेजा विश्वविद्यालय कार्य परिषद की हरी झंडी मिलने के बाद प्रस्ताव राज्य सरकार को भेजा गया है। इसके लिए एक करोड़ रुपये का प्रारंभिक बजट भी प्रस्तावित किया गया है। विश्वविद्यालय ने मातृभाषा हिंदी में इसे कॉलेज ऑफ एक्सीलेंस के रूप में विकसित करने की योजना बनाई है। अभी तक विश्वविद्यालय स्वयं कोई कॉलेज संचालित नहीं करता है। सिर्फ संबद्धता और परीक्षा संबंधी कार्य ही विश्वविद्यालय के जिम्मे होते हैं। अब विश्वविद्यालय का अपना कालेज होने से अकादमिक गुणवत्ता भी निखरेगी। हिंदी में चिकित्सा की पढ़ाई से ग्रामीण व आदिवासी अंचल से आने वाले छात्रों को सुविधा हो जाएगी। यह प्रस्ताव विश्वविद्यालय की कार्य परिषद की बैठक में पारित हुआ है। जबलपुर के सुभाषचंद्र बोस मेडिकल कॉलेज से रहेगा संबद्ध यह कॉलेज, जबलपुर स्थित नेताजी सुभाषचंद्र बोस मेडिकल कॉलेज से संबद्ध रहेगा और एनएमसी के सभी मानकों के अनुरूप तैयार किया जाएगा। कॉलेज को पूरी तरह आवासीय बनाया जाएगा। राज्य शासन से मंजूरी और एनएमसी से मान्यता के बाद निर्माण व फैकल्टी चयन की प्रक्रिया शुरू होगी। विश्वविद्यालय अपना जनरल हिंदी में प्रकाशित करेगामध्य प्रदेश आयुर्विज्ञान विश्वविद्यालय (एमयू) अपना जनरल भी हिंदी में प्रकाशित करेगा। कॉलेज के शुरू होने के साथ भाषाई दिक्कत शिक्षकों व छात्रों को न आए, इस दिशा में एमयू लगातार कार्य में जुटा हुआ है। हिंदी पाठ्यक्रम को ध्यान में रखते हुए एमयू ऐसी लाइब्रेरी पर काम कर रहा है जिसमें कोर्स से संबंधित पाठ्य पुस्तकें हिंदी में अनुवादित होंगी। नए कॉलेज का मसौदा राज्य सरकार को भेज दिया     कार्य परिषद की स्वीकृति के बाद नए कॉलेज का मसौदा राज्य सरकार को भेज दिया गया है। वहां से अनुमति के बाद इस दिशा में कार्य और तेज हो सकेगा। उम्मीद है जल्द ही सरकार इस पर फैसला लेगी। यह अपनी तरह का देश में पहला कालेज होगा, जहां चिकित्सा की पढ़ाई हिंदी में होगी। -डॉ पुष्पराज सिंह बघेल, कुलसचिव, मप्र आयुर्विज्ञान विश्वविद्यालय जबलपुर