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कोयला घोटाले मामले में ED की कार्रवाई को सूर्यकांत तिवारी और सौम्या चौरसिया ने दी चुनौती

बिलासपुर प्रदेश के बहुचर्चित कोयला घोटाले मामले में प्रवर्तन निदेशालय (ED) की सूर्यकांत तिवारी और सौम्या चौरसिया सहित परिवार के लोगों की संपत्ति अटैच किए जाने को हाइकोर्ट में चुनौती दी है। वहीं केजेएसएल कोल पावर और इंद्रमणि मिनरल्स ने अपने अधिवक्ता के माध्यम से याचिका लगाई है। जिस पर लगातार सुनवाई के बाद सभी 10 याचिकाओं पर फैसला सुरक्षित रख लिया गया है। हाईकोर्ट के चीफ जस्टिस रमेश कुमार सिन्हा और जस्टिस विभू दत्त गुरु की डबल बेंच में सभी पहलुओं पर लंबी बहस के बाद फैसला सुरक्षित रखा गया है। दरअसल, ईडी रायपुर ने अवैध कोयला लेवी घोटाले से संबंधित मामले में सूर्यकांत तिवारी और अन्य से संबंधित पीएमएलए, 2002 के प्रावधानों के तहत 30/01/2025 को कुल मिलाकर 49.73 करोड़ रुपये मूल्य की 100 से अधिक चल और अचल संपत्तियों को अनंतिम रूप से कुर्क किया है, जिसमें बैंक बैलेंस, वाहन, नकदी, आभूषण और जमीन शामिल हैं। इसके साथ ही सूर्यकांत तिवारी के भाई रजनीकांत तिवारी, कैलाशा तिवारी, दिव्या तिवारी की भी संपति अटैच की गई है। वहीं सौम्या चौरसिया उनके भाई अनुराग चौरसिया, मां शांति देवी, समीर विश्नोई और अन्य ने अस्थायी नियंत्रण के खिलाफ याचिकाएं लगाई। कोर्ट में संबंधित अपीलकर्ताओं के वकील हर्षवर्धन परगनिहा, निखिल वार्ष्णेय, शशांक मिश्रा, अभ्युदय त्रिपाठी और अन्य को सुना। जिसके बाद प्रतिवादी के वकील डॉ. सौरभ कुमार पांडे को भी सुना गया। सभी पक्षों को सुनने के बाद कोर्ट ने फैसला सुरक्षित रख लिया है। बता दें कि सौम्या चौरसिया को बीते दिनों हाइकोर्ट से जमानत मिल चुकी है और कोर्ट ने उन्हें राज्य से बाहर रहने का आदेश दिया है। वहीं सूर्यकांत तिवारी अभी भी जेल में बंद हैं। क्या है कोयला लेवी मामला ED की जांच में सामने आया कि कुछ लोगों ने राज्य के वरिष्ठ राजनेताओं और नौकरशाहों से मिलीभगत के बाद ऑनलाइन मिलने वाले परमिट को ऑफलाइन कर कोयला ट्रांसपोर्ट करने वालों से अवैध वसूली की। जुलाई 2020 से जून 2022 के बीच कोयले के हर टन पर 25 रुपये की अवैध लेवी वसूली गई। 15 जुलाई 2020 को इसके लिए आदेश जारी किया गया था। खनिज विभाग के तत्कालीन संचालक IAS समीर बिश्रोई ने आदेश जारी किया था। यह परमिट कोल परिवहन में कोल व्यापारियों को दिया जाता है। पूरे मामले का मास्टरमाइंड किंगपिन कोल व्यापारी सूर्यकांत तिवारी को माना गया। इसमें जो व्यापारी पैसे देता उसे ही खनिज विभाग से पीट और परिवहन पास जारी होता था, यह रकम 25 रुपये प्रति टन के हिसाब से सूर्यकांत के कर्मचारियों के पास जमा होती थी। इस तरह से स्कैम कर कुल 570 करोड़ रुपये की वसूली की गई। कहां खर्च की अवैध कमाई जांच में सामने आया है कि इस घोटाले की राशि को सरकारी अधिकारियों और राजनेताओं को रिश्वत देने में खर्च किया गया। साथ ही चुनावी खर्चों के लिए भी इस अवैध राशि का इस्‍तेमाल किया गया। आरोपियों ने इससे कई चल-अचल संपतियों को खरीदा।

मुख्यमंत्री साय ने कहा किसानों को परेशान होने की जरूरत नहीं, डीएपी की कमी पूरा करने पुख्ता वैकल्पिक व्यवस्था

रायपुर, देश में डीएपी खाद के आयात में कमी के चलते चालू खरीफ सीजन में राज्य में डीएपी की आपूर्ति प्रभावित होने का वैकल्पिक मार्ग छत्तीसगढ़ सरकार ने निकाल लिया है। किसानों को डीएपी खाद की किल्लत के चलते परेशान होने की जरूरत नहीं है। डीएपी के बदले किसानों को भरपूर मात्रा में इसके विकल्प के रूप में एनपीके और एसएसपी खाद की उपलब्धता सोसायटियों के माध्यम सुनिश्चित की जा रही है। डीएपी की कमी को पूरा करने के लिए छत्तीसगढ़ सरकार ने एनपीके (20ः20ः013) और एनपीके (12ः32ः13) के वितरण लक्ष्य में 3.10 लाख मेट्रिक टन तथा एसएसपी के वितरण लक्ष्य में 1.80 लाख मेट्रिक टन की वृद्धि करने के साथ ही इसके भण्डारण एवं वितरण की भी पुख्ता व्यवस्था सुनिश्चित की है। एनपीके और एसएसपी के लक्ष्य में वृद्धि होने के कारण चालू खरीफ सीजन में विभिन्न प्रकार के रासायनिक उर्वरकों का वितरण लक्ष्य 14.62 लाख मेट्रिक टन से 17.18 लाख मेट्रिक टन हो गया है। मुख्यमंत्री श्री विष्णु देव साय ने कहा है कि डीएपी खाद की कमी को लेकर किसानों को परेशान होने की जरूरत नहीं है। इसके विकल्प के रूप में छत्तीसगढ़ सरकार द्वारा अन्य रासायनिक उर्वरक जैसे-एनपीके और एसएसपी की भरपूर व्यवस्था सुनिश्चित की गई है। इंदिरा कृषि विश्वविद्यालय के कृषि वैज्ञानिकों और कृषि विभाग के अधिकारियों के सुझाव के अनुरूप किसान डीएपी के बदले उक्त उर्वरकों का प्रयोग कर बेहतर उत्पादन प्राप्त कर सकते हैं। सोसायटियों से किसानों को उनकी डिमांड के अनुसार खाद-बीज की उपलब्धता सुनिश्चित हो, इस पर कड़ी निगाह रखी जा रही है। किसानों की समस्याओं का समाधान सरकार की सर्वोच्च प्राथमिकता है। यहां यह उल्लेखनीय है कि चालू खरीफ सीजन में 14.62 लाख मेट्रिक टन उर्वरक वितरण का लक्ष्य कृषि विभाग द्वारा निर्धारित किया गया था, जिसमें यूरिया 7.12 लाख मेट्रिक टन, डीएपी 3.10 लाख मेट्रिक टन, एनपीके 1.80 लाख मेट्रिक टन, एमओपी 60 हजार मेट्रिक टन, एसएसपी 2 लाख मेट्रिक टन शामिल था। डीएपी के कमी को देखते हुए कृषि विभाग ने इस लक्ष्य को संशोधित किया है। डीएपी की आपूर्ति की कमी चलते इसके लक्ष्य को 3.10 लाख मेट्रिक टन से कमकर 1.03 लाख मेट्रिक टन किया गया है, जबकि एनपीके के 1.80 लाख मेट्रिक टन के लक्ष्य को बढ़ाकर 4.90 लाख मेट्रिक टन और एसएसपी के 2 लाख मेट्रिक टन को बढ़ाकर 3.53 लाख मेट्रिक टन कर दिया गया है। यूरिया और एमओपी के पूर्व निर्धारित लक्ष्य को यथावत् रखा गया है। इस संशोधित लक्ष्य के चलते रासायनिक उर्वरकों के वितरण की मात्रा 14.62 लाख मेट्रिक टन से बढ़कर अब 17.18 लाख मेट्रिक टन हो गई है। कृषि विशेषज्ञों का कहना है कि डीएपी की कमी को अन्य उर्वरकों के निर्धारित मात्रा का उपयोग कर पूरी की जा सकती है और फसल उत्पादन बेहतर किया जा सकता है। फसलों के लिए जरूरी पोषक तत्व जैसे नाइट्रोजन, फास्फोरस, पोटाश सहित मात्रा में मिले तो उपज में कोई कमी नहीं आती है। डीएपी की कमी को देखते हुए किसानों को अन्य फॉस्फेट खादों के उपयोग की सलाह दी है। डीएपी के प्रत्येक बोरी में 23 किलोग्राम फॉस्फोरस और 9 किलोग्राम नाइट्रोजन होता है। इसके विकल्प के रूप में तीन बोरी एसएसपी और एक बोरी यूरिया का उपयोग करने से पौधों को पर्याप्त मात्रा में फॉस्फोरस, कैल्सियम, नाइट्रोजन और सल्फर मिल जाता है। एसएसपी उर्वरक पौधों की वृद्धि के साथ-साथ जड़ों के विकास में भी सहायक है, इसके उपयोग से फसल की क्वालिटी और पैदावार बढ़ाने में मदद मिलती है। डीएपी की कमी को दूर करने के लिए किसान जैव उर्वरकों का भी उपयोग कर सकते हैं। कृषि विभाग से प्राप्त जानकारी के अनुसार खरीफ-2025 में किसानों को विभिन्न प्रकार के रासायनिक उर्वरकों की उपलब्धता सुनिश्चित करने के लिए 12.13 लाख मेट्रिक टन उर्वरकों का भण्डारण कराया गया है, जिसमें से 7.29 लाख मेट्रिक टन का वितरण किसानों को किया जा चुका है। राज्य में वर्तमान में सहकारी और निजी क्षेत्र में 4.84 लाख मेट्रिक टन खाद वितरण हेतु उपलब्ध है।

रायपुर में स्थापित होगा अत्याधुनिक बायोटेक इंक्युबेशन सेंटर: मुख्यमंत्री साय की विशेष पहल पर 20.55 करोड़ की स्वीकृति

रायपुर मुख्यमंत्री विष्णु देव साय के दूरदर्शी नेतृत्व में छत्तीसगढ़ राज्य जैव प्रौद्योगिकी के क्षेत्र में एक महत्वपूर्ण उपलब्धि की ओर अग्रसर हो रहा है। भारत सरकार एवं राज्य शासन के सहयोग से रायपुर में जैव प्रौद्योगिकी पार्क परियोजना की स्थापना की जा रही है। इस परियोजना के प्रथम चरण के अंतर्गत इंदिरा गांधी कृषि विश्वविद्यालय परिसर में अत्याधुनिक बायोटेक इंक्युबेशन सेंटर का निर्माण किया जाएगा। इस सेंटर की स्थापना के लिए भारत सरकार, राज्य शासन एवं इंदिरा गांधी कृषि विश्वविद्यालय के मध्य त्रिपक्षीय अनुबंध पर हस्ताक्षर किए गए हैं। परियोजना की क्रियान्वयन एजेंसी कृषि एवं जैव प्रौद्योगिकी विभाग के अधीन छत्तीसगढ़ जैव प्रौद्योगिकी प्रोत्साहन सोसायटी है। इस बायोटेक इंक्युबेशन सेंटर का मुख्य उद्देश्य राज्य में जैव संसाधनों के दोहन के साथ-साथ नवाचार और स्टार्टअप संस्कृति को बढ़ावा देना है। यहां युवाओं को जैव प्रौद्योगिकी आधारित उद्योगों की स्थापना हेतु प्रशिक्षण, तकनीकी सहायता एवं बुनियादी सुविधाएं प्रदान की जाएंगी। इस इंक्युबेशन सेंटर में कुल 23 आधुनिक प्रयोगशालाएं स्थापित की जाएंगी, जिनमें बीएस-4 स्तर की जैव सुरक्षा सुविधाएं उपलब्ध होंगी। साथ ही दो सेंट्रल इंस्ट्रूमेंटेशन एवं एनालिटिकल टेस्टिंग लैब की भी स्थापना की जा रही है। इंक्युबेशन सेंटर में 17 सूक्ष्म एवं लघु और 6 वृहद उद्योगों के संचालन की व्यवस्था की जाएगी। कुल 23 स्टार्टअप कंपनियों के लिए कार्यालय स्थापित किए जाएंगे, जो तीन वर्षों तक सेंटर में कार्यरत रह सकेंगी। कृषि और फार्मा बायोटेक्नोलॉजी से संबंधित स्टार्टअप को विशेष प्राथमिकता दी जाएगी। मुख्यमंत्री विष्णु देव साय के निर्देश पर बायोटेक इंक्युबेशन सेंटर के निर्माण एवं फर्निशिंग कार्य के लिए 20 करोड़ 55 लाख रुपये की द्वितीय पुनरीक्षित प्रशासकीय स्वीकृति भी प्रदान की गई है। मुख्यमंत्री विष्णु देव साय की इस पहल से छत्तीसगढ़ जैव प्रौद्योगिकी के क्षेत्र में एक अग्रणी राज्य के रूप में उभरेगा। इससे जहां एक ओर शोध और उद्योगों के बीच समन्वय स्थापित होगा, वहीं दूसरी ओर रोजगार और उद्यमिता के नए द्वार खुलेंगे। यह परियोजना न केवल वैज्ञानिक दृष्टिकोण से महत्वपूर्ण है, बल्कि छत्तीसगढ़ की अर्थव्यवस्था और युवाओं के भविष्य को भी नई दिशा देगी।

छत्तीसगढ़ हाईकोर्ट का फैसला दो डिग्रियों की परीक्षा तिथि में संशोधन की याचिका पर विचार का अधिकार नहीं

बिलासपुर  छत्तीसगढ़ हाई कोर्ट ने परीक्षा कार्यक्रम बदलवाने की याचिका के मामले में एक अहम निर्णय दिया है। निर्णय में स्पष्ट किया है कि दो शैक्षणिक पाठ्यक्रमों की पढ़ाई कर रहे छात्रों को परीक्षा कार्यक्रम में बदलाव के लिए विश्वविद्यालयों को निर्देश देने का कोई वैधानिक अधिकार नहीं है। अदालत ने याचिका को रिट क्षेत्राधिकार के अंतर्गत विचार योग्य नहीं मानते हुए खारिज कर दिया। यह आदेश 20 जून 2025 को न्यायमूर्ति अरविंद कुमार वर्मा की एकलपीठ ने पारित किया। याचिका सत्येन्द्र प्रकाश सूर्यवंशी द्वारा दायर की गई थी, जो स्वयं कोर्ट में उपस्थित हुए। उन्होंने बताया कि वे पं. सुंदरलाल शर्मा (ओपन) विश्वविद्यालय से एमएसडब्ल्यू और अटल बिहारी वाजपेयी विश्वविद्यालय से एलएलबी (तृतीय वर्ष, द्वितीय सेमेस्टर) की पढ़ाई साथ-साथ कर रहे हैं। ऐसे में दोनों संस्थानों में एक साथ परीक्षा होने से समस्या हो रही है। लेकिन जब परीक्षा का समय आया, तो दोनों विश्वविद्यालयों की चार परीक्षाएं एक ही दिन और समय पर आ गईं. सत्येन्द्र के सामने एक बड़ी दुविधा थी कि अब वह किस परीक्षा में बैठे? इस पर उन्होंने कोर्ट का दरवाजा खटखटाया और अदालत ने छात्र के खिलाफ फैसला लिया. कोर्ट में दायर की याचिका समस्या का समाधान ढूंढते हुए सत्येन्द्र ने छत्तीसगढ़ हाई कोर्ट का दरवाजा खटखटाया. उन्होंने कोर्ट में खुद उपस्थित होकर अपनी बात रखी. सत्येन्द्र ने यूजीसी की अधिसूचना और राष्ट्रीय शिक्षा नीति 2020 का हवाला दिया, जिसमें कहा गया है कि एक-साथ दो डिग्रियां ली जा सकती हैं. इतना ही नहीं, याचिकाकर्ता ने बताया कि एक-साथ दोनों एग्जाम डेट का होना उनके जीवन और व्यक्तिगत स्वतंत्रता (अनुच्छेद 21) का उल्लंघन है. विश्वविद्यालयों और राज्य का पक्ष राज्य सरकार और दोनों विश्वविद्यालयों के वकीलों ने याचिका का कड़ा विरोध किया. उनका कहना था कि परीक्षा कार्यक्रम बनाना विश्वविद्यालय का प्रशासनिक अधिकार है और इसमें दखल देना न्यायालय के अधिकार क्षेत्र में नहीं आता है. कोर्ट का फैसला: अधिकार की सीमाएं 20 जून 2025 को न्यायमूर्ति अरविंद कुमार वर्मा की एकलपीठ ने इस याचिका पर फैसला सुनाते हुए साफ किया कि यदि कोई छात्र एक साथ दो शैक्षणिक पाठ्यक्रमों की पढ़ाई कर रहा है, तो उसे यह अधिकार नहीं है कि वह परीक्षा तिथियों में टकराव होने पर विश्वविद्यालयों से बदलाव की मांग करे. अदालत ने यह भी कहा कि इस प्रकार की मांग को लेकर दाखिल की गई रिट याचिका न्यायिक क्षेत्राधिकार के अंतर्गत विचार योग्य नहीं है. याचिका खारिज, लेकिन सवाल कायम अंततः सत्येन्द्र की याचिका खारिज कर दी गई. हालांकि, इस फैसले ने उन हजारों छात्रों के सामने बड़ा सवाल खड़ा कर दिया है, जो एक साथ दो डिग्रियां करने का सपना देख रहे हैं. क्या भविष्य में विश्वविद्यालय ऐसे छात्रों के लिए परीक्षा कार्यक्रम में लचीलापन दिखाएंगे? यह तो वक्त ही बताएगा.

छत्तीसगढ़ में महिला ने 3 बच्चों को दिया जन्म, 2 अलग-अलग अस्पतालो में हुआ प्रसव

अंबिकापुर  बलरामपुर जिले के रामानुजगंज क्षेत्र के एक छोटे से गांव देवीगंज की रहने वाली सूरजमणी ने हाल ही में एक जटिल परिस्थिति में तीन शिशु को जन्म दिया। इस प्रसव को चिकित्सकीय दृष्टिकोण से रेयर केस माना जा रहा है। महिला ने 3 बच्चों को जन्म दिया, उससे खास बात यह है कि प्रसूता ने 3 बच्चों को दो अलग-अलग अस्पतालों में जन्म दिया है। बता दें, इस महिला ने एक शिशु को बलरामपुर जिला अस्पताल में जन्म दिया और दो अन्य शिशुओं को अंबिकापुर के नए बस स्टैंड स्थित संजीवनी अस्पताल में जन्म दिया है। तीनों बच्चे स्वस्थ हैं और प्रसूता भी स्वस्थ है। तीनों बच्चों को पाकर पूरा परिवार गदगद है। यह परिवार पूर्व महापौर डॉक्टर अजय तिर्की के गृह ग्राम के हैं। जटिल परिस्थितियों में लाया गया अंबिकापुर डॉक्टर अजय तिर्की ने बताया कि प्रसव की जिम्मेदारी संजीवनी अस्पताल की डॉ भावना गार्डिया की टीम ने संभाली थी। नर्सिंग स्टाफ की तत्परता और अनुभव ने इस चुनौतीपूर्ण केस को सफल बनाया। इससे पहले सुरजमणी का पहला प्रसव बलरामपुर में हुआ था, लेकिन स्थिति काफी जटिल थी। लेकिन परिस्थिति की जटिलता को देखते हुए प्रसूता को जल्दी से अंबिकापुर लाया गया। डॉक्टरों के अनुसार, ग्रामीण परिवेश, सीमित संसाधनों और चिकित्सा सुविधाओं की कमी के बावजूद बलरामपुर के डाक्टरों की सूझबूझ के कारण एक बच्चा वहीं जन्म लिया, किंतु गंभीर स्थिति को देखते हुए अंबिकापुर रेफर किया गया। स्थिति की गंभीरता को देखते हुए यहां के चिकित्सकों ने प्रसूता के साथ बच्चों की भी जान बचाई है। जच्चा-बच्चा दोनों सुरक्षित अब मां और बच्चा दोनों सुरक्षित हैं। तीनों बच्चे व प्रसूता को लेकर परिवार वापस लौट गया है। स्थानीय लोगों ने डाक्टरों और स्वास्थ्यकर्मियों की प्रशंसा की है। इसे इस क्षेत्र की स्वास्थ्य सेवाओं के लिए एक मिसाल बताया है। प्रसूता की डिलीवरी करवाने वाली डॉक्टर भावना गार्डिया ने बताया कि यह एक बड़ा चुनौती भरा काम था। ऐसा केस कम ही आता है कि एक शिशु 80 किलोमीटर दूर अस्पताल में जन्में और दो शिशु दूसरे अस्पताल में जन्में, लेकिन समय रहते उचित निर्णय और टीम की मेहनत से सब कुछ ठीक हुआ।

खैरागढ़ में मजदूरों से भरी तेज रफ्तार पिकअप वाहन हादसे का शिकार, , 21 घायल, 3 गंभीर

खैरागढ़ छत्तीसगढ़ के खैरागढ़ जिले में मजदूरों से भरी तेज रफ्तार पिकअप वाहन हादसे का शिकार हो गई. बुधवार शाम ग्राम बोरई के उदयपुर रोड मोड़ पर पिकअप वाहन अनियंत्रित होकर जा पलटी. घटना के बाद मौके पर चीख-पुकार मच गई. इस हादसे में गाड़ी में सवार 24 मजदूर घायल हो गए. घायलों में 3 की हालत गंभीर बनी हुई है. घटना की सूचना मिलने पर पुलिस मौके पर पहुंची और सभी घायलों को अस्पताल पहुंचाया. फिलहाल सभी का इलाज जारी है. जानकारी के अनुसार, शुरुआती जांच में पता चला है कि पिकअप चालक तेजी से गाड़ी चला रहा था और मोड़ पर ब्रेक नहीं लगाई. इससे तेज रफ्तार पिकअप अनियंत्रित हुई और पलट गई. साथ ही इस हादसे का बड़ा कारण यातायात नियमों का उल्लंघन करना भी है. जिन गाड़ियों का काम सामान ढोने का है, उन्हीं में मजदूरों को भरकर लाया जा रहा था. ऐसे मालवाहक में सवारी कराना कानूनी तौर पर गलत है और जान के लिए खतरा भी है. वहीं घायल मजदूरों ने अस्पताल प्रबंधन पर भी लापरवाही का आरोप लगाया है. घायलों ने अस्पताल पर आरोप लगाते हुए बताया कि डॉक्टर ने रात में एक बार आकर उन्हें देखा. लेकिन इसके बाद अब तक कोई पूछने तक नहीं आया. BMO और जिम्मेदार डॉक्टरों की गैरमौजूदगी ने इलाज में लापरवाही की पोल खोल दी है. ग्रामीणों ने प्रशासन से मोड़ पर स्पीड ब्रेकर लगाने, घायल मजदूरों का अच्छे से इलाज कराने और तेज रफ्तार से गाड़ी चलाने वाले चालक पर सख्त कार्रवाई करने की मांग की है. हादसा बता गया कि रफ्तार और लापरवाही का खेल कई घरों की खुशियां छीन लेता है, और इसे रोकना जरूरी है.

श्रीमंत झा ने प्रदेश का नाम किया रोशन, नेशनल पैरा आर्म-रेसलिंग चैंपियनशिप में जीता गोल्ड

त्रिशूर छत्तीसगढ़ के होनहार पैरा खिलाड़ी श्रीमंत झा ने एक बार फिर प्रदेश का नाम रोशन किया है। केरल के त्रिशूर में आयोजित नेशनल पैरा आर्म-रेसलिंग चैंपियनशिप में उन्होंने 85 किलोग्राम वजन वर्ग में शानदार प्रदर्शन करते हुए स्वर्ण पदक अपने नाम किया। प्रतियोगिता में देशभर के शीर्ष पैरा आर्म-रेसलर खिलाड़ियों ने भाग लिया था। बता दें कि फाइनल मुकाबले में श्रीमंत ने तमिलनाडु के खिलाड़ी को हराकर गोल्ड मेडल जीता। खास बात यह रही कि उन्होंने अपनी यह जीत अहमदाबाद प्लेन क्रैश में जान गंवाने वाले लोगों को समर्पित की, जो उनके संवेदनशील और मानवीय पक्ष को दर्शाता है। उनकी इस उपलब्धि पर छत्तीसगढ़ प्रदेश आम रेसलिंग एसोसिएशन ने हर्ष जताया है। संगठन के प्रेसिडेंट जी. सुरेश बाबा, जनरल सेक्रेटरी श्रीकांत, कृष्णा साहू सहित अन्य पदाधिकारियों ने श्रीमंत को शुभकामनाएं दीं और भविष्य के लिए ढेर सारी सफलताओं की कामना की। इस गौरवपूर्ण उपलब्धि के बाद यह उम्मीद जताई जा रही है कि छत्तीसगढ़ शासन द्वारा उन्हें राजीव गांधी खेल सम्मान से नवाजा जा सकता है। श्रीमंत झा की यह सफलता न केवल छत्तीसगढ़ के लिए गर्व का विषय है, बल्कि प्रदेश के युवाओं के लिए भी एक प्रेरणास्रोत बन गई है। उनके समर्पण और संघर्ष की यह कहानी प्रदेश के अन्य खिलाड़ियों को भी अपनी मेहनत से ऊंचाइयों तक पहुंचने का हौसला देगी।

छत्तीसगढ़ में दुष्कर्म पीड़िताओं के लिए 40 करोड़ रुपए स्वीकृत, वितरण की प्रक्रिया शुरू

बिलासपुर प्रदेश में दुष्कर्म की घटनाओं से प्रभावित महिलाओं को मुआवजा न मिलने को लेकर दायर जनहित याचिका पर छत्तीसगढ़ हाई कोर्ट ने  अंतिम सुनवाई की है । हाई कोर्ट ने मामले का निराकरण कर दिया है। कोर्ट ने दुष्कर्म पीड़िताओं को मुआवजा वितरण के लिए प्रक्रिया शुरू करने के निर्देश दिए हैं। कोर्ट को सूचित किया गया कि राज्य शासन ने 40 करोड़ रुपये की राशि जारी कर दी है, जो अब जिलों के जरिए पीड़िताओं को प्रदान की जाएगी। केंद्र सरकार ने वर्ष 2018 में दुष्कर्म पीड़ित महिलाओं के लिए एक विशेष मुआवजा योजना लागू की थी, जिसका उद्देश्य उनके पुनर्वास और सहायता सुनिश्चित करना था। योजना के तहत प्रदेश में अब तक लगभग 6,000 आवेदन प्राप्त हुए थे, लेकिन बड़ी संख्या में पीड़ितों को अब तक मुआवजा नहीं मिल पाया था। शासन की ओर से इस योजना को राष्ट्रीय विधिक सेवा प्राधिकरण की जिम्मेदारी बताते हुए शुरुआत में अपेक्षित ध्यान नहीं दिया गया। केवल उन्हीं पीड़ितों को मुआवजा मिल सका जिन्होंने अदालत का दरवाजा खटखटाया। 36 मामलों के आधार पर दायर हुई थी जनहित याचिका समाजसेवी सत्यभामा अवस्थी ने अधिवक्ता देवेश कुमार के माध्यम से हाई कोर्ट में जनहित याचिका दायर कर मांग की थी कि 2018 की इस योजना का पूर्ण और प्रभावी क्रियान्वयन सुनिश्चित किया जाए। याचिका में यह भी बताया गया कि प्रदेश में ऐसे 36 मामले सामने आए हैं, जिनमें पीड़िताओं को मुआवजा नहीं मिल पाया। जिस पर सुनवाई करते हुए हाई कोर्ट ने उसका निराकरण किया। गृह सचिव ने बताया, प्रक्रिया हुई शुरू बुधवार को चीफ जस्टिस रमेश सिन्हा और न्यायमूर्ति की डिवीजन बेंच में इस मामले की सुनवाई हुई। इस दौरान राज्य शासन की ओर से गृह सचिव ने एक शपथपत्र दाखिल किया। जिसमें कोर्ट को अवगत कराया कि राज्य विधिक सेवा प्राधिकरण (सालसा) के निर्देश पर पीड़ित महिलाओं के मुआवजे के लिए 40 करोड़ रुपये की राशि स्वीकृत की गई थी। इस राशि को अब सभी जिलों में वितरित करने की प्रक्रिया शुरू हो चुकी है। राज्य शासन ने बताया कि यह राशि संबंधित जिलों के जिला विधिक सेवा प्राधिकरणों को भेज दी गई है। वे आवेदनकर्ताओं को मुआवजा प्रदान करने की प्रक्रिया में लगे हैं। याचिकाकर्ता की ओर से बताया गया कि वर्ष 2018 से अब तक कुल 5,500 आवेदन सालसा को प्राप्त हुए हैं, जिनमें से अधिकांश पर अब कार्रवाई की जा रही है।

सर्वसम्मति से निर्णय लिया कि फीस में किसी भी प्रकार की वृद्धि नहीं की जाएगी: स्टेट फार्मेसी काउंस‍िल

रायपुर छत्तीसगढ़ स्टेट फार्मेसी काउंसिल के द्वारा 8 मई 2025 को आयोजित आम सभा में नए पंजीयन एवं नवीनीकरण सहित अन्य फीस को बढ़ाने का निर्णय लिया गया था। इस निर्णय को 1 जून 2025 से लागू कर दिया गया था। फीस वृद्धि के बाद राज्य के विभिन्न फार्मासिस्ट संगठन तथा दवा व्यापारी संगठनों ने फीस वृद्धि पर पुनर्विचार करने का आग्रह किया था। स्वास्थ्य मंत्री श्याम बिहारी जायसवाल ने भी युवाओं और व्यापारी वर्ग के हितों का ध्यान रखते हुए फीस वृद्धि को लेकर काउंसिल के सदस्यों को सुझाव दिया था। यह जानकारी आज गुरुवार काे जनसंपर्क विभाग ने विज्ञप्ति जारी कर दी है। बढ़ी हुई फीस पर पुनर्विचार के लिए बुधवार 2 जुलाई 2025 को काउंसिल का विशेष सम्मेलन नवीन विश्राम गृह रायपुर में आयोजित किया गया। इस विशेष बैठक में उपस्थित सभी सदस्यों ने उक्त बढ़ी हुई फीस पर विभिन्न बिन्दुओं पर पुनर्विचार किया और अंत में सर्वसम्मति से निर्णय लिया कि फीस में किसी भी प्रकार की वृद्धि नहीं की जाएगी। यह भी निर्णय लिया गया कि केवल कोविड महामारी काल में घटाए गए पंजीयन नवीनीकरण शुल्क को 300 रूपये के स्थान पर पुनः 500 रूपये किया जाए। इस तरह पूर्व में लागू फीस ही याथावत रहेगी। इसके साथ ही 1 जून 2025 से जिनसे भी बढ़ी फीस को लिया गया है उन फार्मासिस्टों को अतिरिक्त फीस को वापस किये जाने का निर्णय लिया गया है।  

राजनांदगांव के 18 ग्रामों को 1 करोड़ से अधिक के विकास कार्यों का उपहार, विस अध्यक्ष डॉ रमन सिंह ने मुख्यमंत्री साय और गृह मंत्री विजय शर्मा को जताया आभार

राजनांदगांव जिले में मुख्यमंत्री समग्र ग्रामीण विकास योजना 2025-26 के तहत 2 करोड़ 13 लाख से अधिक की स्वीकृति, ग्रामों में शेड, सीसी रोड, नाली व सामुदायिक भवन का होगा निर्माण राजनांदगांव, राजनांदगांव विधायक एवं विधानसभा अध्यक्ष डॉ. रमन सिंह के अथक प्रयासों से मुख्यमंत्री समग्र ग्रामीण विकास योजना वर्ष 2025–26 के अंतर्गत राजनांदगांव जिले के विभिन्न ग्रामों में लगभग 2 करोड़ 13 लाख रुपए की लागत से कुल 60 विकास कार्यों की स्वीकृति मिली है। इसमें राजनांदगांव विधानसभा क्षेत्र के 18 ग्रामों के लिए 1 करोड़ से अधिक की राशि स्वीकृत की गई है। इनमे निम्नलिखित विकास कार्य प्रस्तावित हैं: ग्राम मुड़पार में 10 लाख, रानीतराई एवं भोथीपार खुर्द में 3 लाख की लागत से शेड निर्माण। ग्राम बरगा, इंदामारा, फरहद में 6.5 लाख की लागत से सामुदायिक भवन निर्माण। ग्राम पार्रीखुर्द एवं जंगलेसर में 7.80 लाख की लागत से और ग्राम सुकुलदैहान, बम्हनी, भानपुरी व रीवागहन में 5.20 लाख की लागत से सीसी रोड निर्माण। ग्राम जंगलेसर, रीवागहन व रवेली में 5.20 लाख की लागत से निर्मला घाट निर्माण के साथ ग्राम धनगांव व बरगा में 5.91 लाख, ग्राम बॉकल में 3.94 लाख की लागत से नाली निर्माण का कार्य किया जायेगा। राजनांदगांव विधानसभा क्षेत्र के ग्रामीणों ने इन 18 विकास कार्यों की स्वीकृति पर हर्ष व्यक्त करते हुए विधानसभा अध्यक्ष व क्षेत्रीय विधायक डॉ. रमन सिंह का आभार व्यक्त करते हुए कहा कि डॉ. रमन ने हमेशा गांवों की ज़रूरतों को प्राथमिकता दी है। इन विकास कार्यों से गांवों में आधारभूत ढांचे को मजबूती मिलेगी और जीवनस्तर ऊँचा होगा। यह हमारे क्षेत्र के समग्र विकास की दिशा में एक बड़ा कदम है। विधानसभा अध्यक्ष एवं राजनांदगांव विधायक डॉ. रमन सिंह जी ने “मुख्यमंत्री समग्र ग्रामीण विकास योजना” के अंतर्गत स्वीकृत इन विकास कार्यों के लिए मुख्यमंत्री विष्णुदेव साय जी एवं ग्रामीण विकास मंत्री  विजय शर्मा जी के प्रति आभार व्यक्त करते हुए कहा, “यह स्वीकृति भाजपा सरकार की ग्रामोन्मुख नीतियों और समावेशी विकास के प्रति प्रतिबद्धता का प्रमाण है। मुख्यमंत्री  विष्णुदेव साय जी एवं गृह मंत्री विजय शर्मा जी के कुशल नेतृत्व में छत्तीसगढ़ के गांवों को एक नई दिशा और ऊर्जा मिल रही है। यह योजनाएँ संरचनात्मक विकास नहीं, ग्रामीणों के जीवन में आशा और विश्वास का संचार हैं।”