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महिला ने पुलिस के सामने जड़ा थप्पड़, भिलाई के मारुति शोरूम CEO पर गंभीर आरोप

भिलाई भिलाई में मारुति सुजुकी शोरूम के सीईओ पर महिला कर्मचारी ने स्याही फेंक दी। छेड़छाड़ से परेशान महिला कर्मचारी ने पुलिस के सामने सीईओ को थप्पड़ जड़ दिया और लात भी मारी। मौके पर मौजूद पुलिस ने किसी तरह समझाकर महिला को शांत कराया। इस पूरे घटनाक्रम का वीडियो इंटरनेट मीडिया में वायरल हो रहा है। घटना भिलाई चौहान ऑटोमोबाइल मारुति सुजुकी शोरूम की है। मिली जानकारी के अनुसार शोरूम में कार्यरत महिला ने शोरूम के सीईओ के खिलाफ छेड़छाड़ का मामला दर्ज करवाया है। महिला का आरोप है कि सीईओ अंकित आनंद उसे अश्लील मैसेज भेजते थे और गलत तरीके से बात करते थे। महिला का गुस्सा फूट पड़ा मामले की जांच के दौरान जब पुलिस अधिकारी अंकित आनंद को लेकर शोरूम पहुंचे, तभी महिला का गुस्सा फूट पड़ा। जैसे ही सीईओ ऑफिस के अंदर पहुंचे, सामने से आई महिला कर्मचारी ने उनके चेहरे और शर्ट पर स्याही फेंक दी। स्याही फेंकने के तुरंत बाद महिला सीधे सीईओ के सामने पहुंची और उन्हें थप्पड़ मार दिया। इसके बाद उसने लात भी चलाई। मौके पर मौजूद पुलिस अधिकारी बीच-बचाव की कोशिश करते रहे, लेकिन महिला काफी गुस्से में थी। इस दौरान वहां कोई महिला पुलिसकर्मी मौजूद नहीं थी, जिसकी वजह से पुलिस सिर्फ समझाइश देती नजर आई। मामले में भिलाई नगर पुलिस ने आरोपित अंकित आनंद के खिलाफ छेड़छाड़ का मामला दर्ज कर उसे गिरफ्तार कर लिया है। पुलिस अधिकारियों का क्या कहना महिला की शिकायत पर मारुति सुजुकी शोरूम भिलाई के सीईओ अंकित आनंद के खिलाफ छेड़छाड़ का अपराध दर्ज कर उसे गिरफ्तार कर लिया गया है। आरोपित पर महिला ने अश्लील मैसेज भेजने का आरोप लगाया है। सत्यप्रकाश तिवारी, सीएसपी भिलाई नगर

जन भागीदारी सबसे दूर सबसे पहले अभियान के तहत विशेष पिछड़ी जनजाति पहाड़ी कोरवा परिवारों को मिली बड़ी राहत

रायपुर  सबसे दूर सबसे पहलेष् एक प्रमुख प्रशासनिक और सामाजिक अभियान है, जिसका मुख्य उद्देश्य सबसे दुर्गम, सुदूर और पिछड़े क्षेत्रों (विशेष रूप से जनजातीय और आदिवासी बहुल गांवों) तक सरकारी सुविधाओं और विकास योजनाओं को सबसे पहले पहुँचाना है। दूरस्थ जनजातीय अंचलों तक शासन की जनकल्याणकारी योजनाओं का सीधा लाभ पहुंचाने के उद्देश्य से बलरामपुर-रामानुजगंज जिले में जन भागीदारी सबसे दूर सबसे पहले अभियान चलाया जा रहा है। इस अभियान के अंतर्गत आयोजित जनजातीय गरिमा उत्सव शिविरों के माध्यम से जनजातीय समुदायों को स्वास्थ्य, सामाजिक सुरक्षा, राजस्व और किसान हितैषी योजनाओं का लाभ एक ही स्थान पर उपलब्ध कराया जा रहा है। इसी कड़ी में विकासखंड राजपुर के ग्राम पतरापारा और विकासखंड रामचंद्रपुर के ग्राम बराहनगर में विशेष शिविरों का सफल आयोजन किया गया, जहां अधिकारियों ने ग्रामीणों से सीधा संवाद कर उनकी समस्याओं के त्वरित निराकरण की पहल की। पतरापारा शिविर-विशेष पिछड़ी जनजातियों को चौपाल पर राहत            जनपद पंचायत सीईओ श्री संजय दुबे के नेतृत्व में ग्राम पंचायत पतरापारा में आयोजित शिविर में पतरापारा सहित डिगनगर, अमदरी, चंद्रगढ़ एवं करजी से बड़ी संख्या में विशेष पिछड़ी जनजाति पहाड़ी कोरवा परिवार पहुंचे। शिविर की मुख्य उपलब्धियां रहीं स्वास्थ्य विभाग की मेडिकल टीम द्वारा 71 ग्रामीणों का निःशुल्क स्वास्थ्य परीक्षण कर दवाइयां दी गईं। गंभीर बीमारियों के निःशुल्क इलाज के लिए मौके पर ही 21 पात्र नागरिकों के आयुष्मान कार्ड बनाए गए। कृषि क्षेत्र को आधुनिक बनाने की दिशा में 11 स्थानीय किसानों का एग्री स्टैक पोर्टल पर डिजिटल पंजीयन किया गया। बराहनगर शिविर- राजस्व और सामाजिक सुरक्षा योजनाओं से सीधा लाभ           रामचंद्रपुर विकासखंड के ग्राम बराहनगर में जनपद सीईओ श्री रणवीर साय के नेतृत्व में आयोजित शिविर में ग्रामीणों को विभिन्न विभागीय सेवाओं से सीधा लाभान्वित किया गया। राजस्व एवं नागरिक सेवाएं के तहत राजस्व विभाग द्वारा मौके पर ही 6 जाति, 6 आय और 6 निवास प्रमाण पत्रों सहित कुल 27 जन्म एवं मृत्यु प्रमाण पत्र जारी किए गए। खाद्य एवं श्रम विभाग के द्वारा खाद्य विभाग द्वारा 37 पात्र परिवारों को नए राशन कार्ड वितरित किए गए तथा श्रम विभाग के अंतर्गत 10 श्रमिकों के श्रम कार्ड बनाए गए।              पशुधन एवं कृषि कल्याण विभाग द्वारा पशुधन विकास विभाग द्वारा 68 पशुपालकों को निःशुल्क पशु दवाओं का वितरण किया गया। कृषि विभाग ने पीएम किसान सम्मान निधि के 6 लंबित प्रकरणों का सुधार किया, 2 किसानों का एग्री स्टैक पंजीयन किया तथा 1 मृदा परीक्षण सैंपल लिया।  शिविर में 157 ग्रामीणों का स्वास्थ्य परीक्षण कर 2 नए आयुष्मान कार्ड जारी किए गए। साथ ही सामाजिक सुरक्षा के तहत 2 हितग्राहियों को पेंशन तथा 1 हितग्राही को परिवार सहायता योजना की राशि स्वीकृत की गई। दूरस्थ क्षेत्रों तक शासन की पहुंच सुनिश्चित- जिला प्रशासन          गौरतलब है कि भारत सरकार के जनजातीय कार्य मंत्रालय के निर्देशानुसार, कलेक्टर श्रीमती चंदन संजय त्रिपाठी के मार्गदर्शन एवं जिला पंचायत सीईओ के नेतृत्व में इन शिविरों का संपादन किया जा रहा है। इस अभियान का मुख्य फोकस पहाड़ी कोरवा जैसे विशेष रूप से कमजोर जनजातीय समूहों को मुख्यधारा से जोड़ना है। जिला प्रशासन की इस संवेदनशील पहल से जिले के अत्यंत दूरस्थ और दुर्गम क्षेत्रों तक सुशासन की पहुंच सुनिश्चित हो सकी है।

बारनवापारा अभयारण्य के देवपुर नेचर कैंप में छत्तीसगढ़ और मध्यप्रदेश के 65 से अधिक प्रतिभागी हुए शामिल

रायपुर छत्तीसगढ़ के बलौदा बाजार-भाटापारा जिले के वारनवापारा अभ्यारण्य के पास देवपुर में बच्चों के लिए विशेष नेचर कैंप का आयोजन किया गया है। नौतपा से पहले आयोजित इस समर नेचर कैंप में बच्चों ने रोमांच के साथ-साथ पक्षी दर्शन (बर्ड वॉचिंग) और पर्यावरण से जुड़ी कई महत्वपूर्ण सीख प्राप्त की।  बच्चों को प्रकृति के करीब लाने, पर्यावरण संरक्षण की जानकारी देने और स्थानीय वन्यजीवों व पक्षियों के बारे में रोमांचक तरीके से सिखाने के लिए इस विशेष कैंप का आयोजन किया जाता है।                        वनमण्डलाधिकारी  धम्मशील गणवीर के दिशा-निर्देशानुसार बारनवापारा अभयारण्य अंतर्गत देवपुर नेचर कैंप में एक विशेष समर कैंप का सफल आयोजन किया गया। 16 मई से 22 मई तक चले इस अनूठे कैंप का मुख्य उद्देश्य बच्चों को किताबी ज्ञान से बाहर निकालकर प्रकृति के बीच व्यावहारिक रूप से सीखने, समझने और नए अनुभवों को आत्मसात करने का अवसर प्रदान करना था। छत्तीसगढ़ और मध्यप्रदेश के 65 से अधिक प्रतिभागी हुए शामिल                 इस समर कैंप में वन विभाग के मैदानी स्टाफ के बच्चों सहित छत्तीसगढ़ और मध्य प्रदेश के 65 से अधिक प्रतिभागियों ने बड़े उत्साह के साथ हिस्सा लिया। सभी बच्चों ने प्रकृति की गोद में रहकर साहसिक व रचनात्मक गतिविधियों का आनंद लिया और इस कैंप को अपने लिए बेहद यादगार बताया। पढ़ाई के तनाव से दूर बच्चों को कला और खेल-कूद के माध्यम से रचनात्मक बनाया जाता है। जंगल ट्रेकिंग, बर्ड वाचिंग और एडवेंचर एक्टिविटीज                कैंप के दौरान बच्चों के बौद्धिक और शारीरिक विकास के लिए प्रतिदिन सुबह कई प्रकार की गतिविधियां आयोजित की गईं । बच्चों को प्रतिदिन सुबह जंगल ट्रेक और बर्ड वाचिंग (पक्षियों को देखने) के लिए ले जाया जाता था, जहां उन्होंने वन्यजीवों के प्राकृतिक आवास, जंगल की अनूठी संरचना और विभिन्न पक्षियों को करीब से पहचाना। टेंट कैंपिंग, आउटडोर एडवेंचर गेम्स और विभिन्न रचनात्मक गतिविधियों के माध्यम से बच्चों में आपसी टीम भावना, आत्मविश्वास और प्रकृति के प्रति संवेदनशीलता का विकास किया गया। बारनवापारा सफारी और सिरपुर का शैक्षणिक भ्रमण               बच्चों के ज्ञानवर्धन के लिए उन्हें बारनवापारा अभयारण्य में वाइल्डलाइफ सफारी कराई गई, जिससे वे वन्यजीवों की दुनिया से रूबरू हो सके। इसके अतिरिक्त, अंचल की ऐतिहासिक, सांस्कृतिक एवं पुरातात्विक धरोहरों से परिचित कराने के लिए उन्हें ऐतिहासिक नगरी सिरपुर का शैक्षणिक भ्रमण भी कराया गया। बच्चों को कम्युनिटी एंगेजमेंट (सामुदायिक सहभागिता) गतिविधियों से भी जोड़ा गया, जिससे वे स्थानीय वनांचल समुदायों और प्रकृति के गहरे अंतर्संबंधों को समझ सके। विश्व जैव विविधता दिवस पर जाना औषधीय पौधों का महत्व        कैंप के दौरान विश्व जैव विविधता दिवस के विशेष अवसर पर बच्चों को बायोडायवर्सिटी ट्रेल (जैव विविधता पथ) पर ले जाया गया। यहाँ स्थानीय पारंपरिक वैद्यों द्वारा बच्चों को वनों में पाए जाने वाले दुर्लभ औषधीय पौधों और जड़ी-बूटियों की लाइव जानकारी दी गई। इस गतिविधि ने बच्चों को हमारे पारंपरिक ज्ञान, जैव विविधता के संरक्षण और प्रकृति के महत्व से गहराई से अवगत कराया गया।

शिविर में मिला स्वास्थ्य सुरक्षा का कवच, आयुष्मान कार्ड मिलने से दूर हुई इलाज की चिंता

रायपुर शासन की जनकल्याणकारी योजनाएं जब दूरस्थ जनजातीय अंचलों तक पहुंचती हैं, तो वे केवल कागजी सुविधा नहीं, बल्कि लोगों के जीवन में बदलाव की एक नई सुबह लेकर आती हैं, जिनमें पात्र व्यक्तियों को आधार पंजीयन, बैंकिंग सेवाएं, राशन कार्ड, सामाजिक सुरक्षा पेंशन, आयुष्मान भारत योजना, प्रधानमंत्री आवास योजना सहित अन्य शासकीय योजनाओं से जोड़ने के लिये पात्रता परीक्षण, आवेदन एवं मौके पर निराकरण की कार्रवाई की जा रही है। शिविर के माध्यम से स्थानीय समस्याओं का अवलोकन, ग्रामीणों के साथ बैठक एवं योजनाओं का प्रचार-प्रसार, पात्र हितग्राहियों की पहचान, स्वास्थ्य परीक्षण एवं जागरूकता कार्यक्रम, जन सुनवाई तथा शिकायतों के निराकरण के लिये विभागीय कार्रवाई की जा रही है। इसका एक प्रत्यक्ष और जीवंत उदाहरण बलरामपुर-रामानुजगंज जिले की  रोन्ही पहाड़ी कोरवा हैं, जिनके जीवन में प्रशासन की एक संवेदनशील पहल से बेहद सकारात्मक परिवर्तन आया है। सीमित संसाधन और अंधविश्वास के बीच बीत रही थी जिंदगी            विकासखंड राजपुर के सुदूर ग्राम पंचायत पतरापारा की निवासी  रोन्ही अपने परिवार के साथ बेहद सीमित संसाधनों में जीवनयापन करती हैं। परिवार की आर्थिक स्थिति कमजोर होने के कारण छोटी-छोटी बीमारियों के इलाज के लिए भी उन्हें भारी परेशानियों का सामना करना पड़ता था। आधुनिक स्वास्थ्य सुविधाओं की समुचित जानकारी और संसाधनों के अभाव में, कई बार मजबूरीवश उन्हें उपचार के लिए स्थानीय बैगा-गुनिया के सहारे रहना पड़ता था।बीमारी बढ़ने की स्थिति में अस्पताल तक पहुंचना और शहर जाकर इलाज कराना उनके लिए मानसिक और आर्थिक रूप से अत्यंत कष्टकारी साबित होता था। अस्पताल आने-जाने और महंगी दवाइयों में उनकी मेहनत की गाढ़ी कमाई का एक बड़ा हिस्सा खर्च हो जाता था, जिससे परिवार की रोजमर्रा की बुनियादी जरूरतों को पूरा करना भी दूभर हो जाता था। चौपाल पर मिला आयुष्मान का वरदान             रोन्ही के जीवन के इस ढर्रे को बदलने का माध्यम बना जिला प्रशासन द्वारा संचालित ?जनभागीदारी सबसे दूर सबसे पहले अभियान। इसके तहत पतरापारा में आयोजित जनजातीय गरिमा उत्सव शिविर में स्वास्थ्य विभाग की टीम ने रोन्ही की समस्या को समझा और मौके पर ही उनका श्आयुष्मान भारत कार्डश् बनाकर उन्हें सौंप दिया। आयुष्मान कार्ड मिलने के बाद अब रोन्ही और उनके पूरे परिवार को इलाज पर होने वाले भारी-भरकम खर्च की चिंता से हमेशा के लिए मुक्ति मिल गई है। अब वे किसी भी आपातकालीन स्थिति या बीमारी में अनुबंधित अस्पतालों में जाकर निःशुल्क एवं बेहतर स्वास्थ्य सुविधाओं का लाभ उठा सकेंगी। शासन-प्रशासन के प्रति जताया आभार            अपनी खुशी साझा करते हुए  रोन्ही बताती हैं, पहले हमारे लिए बीमारी का मतलब सिर्फ मानसिक चिंता और कर्ज का बोझ होता था। लेकिन अब यह आयुष्मान कार्ड हमारे पास है, जिससे हमें एक बड़ी स्वास्थ्य सुरक्षा का एहसास हुआ है। अब मैं अपने परिवार के स्वास्थ्य और उनके भविष्य को लेकर पूरी तरह निश्चिंत हूँ। उन्होंने जनजातीय गरिमा उत्सव शिविर को दूरस्थ अंचल के ग्रामीणों के लिए एक अत्यंत उपयोगी और जीवनदायिनी पहल बताते हुए राज्य सरकार एवं जिला प्रशासन के प्रति सहृदय आभार व्यक्त किया है।

अधिकारियों ने पैदल भ्रमण कर जानी ज़मीनी हकीकत; जाटलूर, धोबे और हरवेल में उमड़ा जनसैलाब

रायपुर. छत्तीसगढ़ के सुदूर वनांचलों में इन दिनों शासन की संवेदनशीलता और सक्रियता का एक अनूठा उदाहरण देखने को मिल रहा है, जिसने प्रशासन और जनता के बीच की दूरी को पूरी तरह पाट दिया है। राज्य सरकार के निर्देशानुसार आयोजित ‘सुशासन तिहार’, ‘जनजातीय गरिमा उत्सव’ एवं ‘जनभागीदारी अभियान’ के तहत ओरछा विकासखंड के ग्राम जाटलूर, धोबे और हरवेल सहित कई अंदरूनी गाँवों में उत्सव जैसा माहौल है। इस विशेष अभियान का मुख्य उद्देश्य जनजातीय समाज को सशक्त बनाना और विकास की मुख्यधारा से छूटे अंतिम व्यक्ति तक सरकारी योजनाओं का शत-प्रतिशत लाभ पहुँचाना है। एसी कमरों से निकलकर ज़मीन पर उतरा प्रशासन इस अभियान की सबसे प्रभावशाली तस्वीर तब सामने आई, जब कलेक्टर के दिशा-निर्देशन में प्रशासनिक अधिकारियों और स्थानीय जनप्रतिनिधियों की संयुक्त टीम ने सुदूर गाँवों का पैदल भ्रमण किया। उबड़-खाबड़ रास्तों और भौगोलिक चुनौतियों के बीच जब पूरी प्रशासनिक टीम ग्रामीणों के मोहल्लों और मजरों तक पहुँची, तो जनता में यह मजबूत संदेश गया कि सरकार अब सिर्फ बंद कमरों से आदेश जारी नहीं कर रही, बल्कि खुद जमीन पर आकर हकीकत परख रही है। जिले के आला अधिकारियों को अपने बीच इतनी सादगी से उपस्थित पाकर ग्रामीणों के चेहरे खुशी से खिल उठे। चौपाल पर ही मिलीं डिजिटल सेवाएँ और स्वास्थ्य सुविधाएं इन विशेष शिविरों के माध्यम से ग्रामीणों को बहुत बड़ी राहत मिली है। अब उन्हें छोटे-मोटे शासकीय कार्यों के लिए ब्लॉक मुख्यालयों के चक्कर काटने और आर्थिक बोझ उठाने से मुक्ति मिल गई है। शिविर स्थल पर ही आधार कार्ड, पहचान पत्र व अन्य जरूरी सरकारी दस्तावेजों में सुधार और नए दस्तावेज बनाने की सुविधा तत्काल प्रदान की गई। स्वास्थ्य विभाग की टीम ने सक्रियता दिखाते हुए बुजुर्गों, महिलाओं और बच्चों का मौके पर ही स्वास्थ्य परीक्षण किया और निःशुल्क दवाइयां वितरित कीं गई। इसी तरह कृषि, महिला एवं बाल विकास और पंचायती राज जैसे विभिन्न विभागों के स्टॉलों के जरिए जल, जंगल, जमीन के संरक्षण के साथ-साथ शिक्षा और पोषण की महत्वपूर्ण जानकारियां दी गईं। जनविश्वास से सज रही सुशासन की नई इबारत जब सरकार की मंशा विशुद्ध रूप से जनहित की हो, तो सुशासन केवल कागजी शब्द नहीं रहता, बल्कि गाँव-गाँव की सूरत बदलने वाली एक जीवंत ताकत बन जाता है। शिविरों में ग्रामीणों की यह भारी और स्वस्फूर्त भागीदारी इसी सकारात्मक बदलाव की गवाह है। विभिन्न विभागों के आपसी समन्वय से आयोजित इस महा-अभियान ने न केवल वनांचल के भाई-बहनों में शासन-प्रशासन के प्रति अटूट भरोसा जगाया है, बल्कि बस्तर के अंदरूनी क्षेत्रों में विकास की एक नई और व्यावहारिक इबारत लिख दी है।

राष्ट्रीय जनजाति सांस्कृतिक समागम में मुख्यमंत्री विष्णुदेव साय बोले – जनजातीय समाज दुनिया को सिखा सकता है प्रकृति संग विकास

नई दिल्ली   देश की राजधानी दिल्ली के ऐतिहासिक लाल किला मैदान में रविवार को जनजातीय अस्मिता, सांस्कृतिक गौरव और सामाजिक चेतना का विराट संगम देखने को मिला, जब भगवान बिरसा मुंडा की 150वीं जयंती वर्ष के अवसर पर आयोजित राष्ट्रीय जनजाति सांस्कृतिक समागम में देशभर से हजारों जनजातीय प्रतिनिधि, युवा, सामाजिक कार्यकर्ता तथा पारंपरिक समुदायों के लोग एक मंच पर एकत्र हुए। जनजाति सुरक्षा मंच एवं जनजाति जागृति समिति द्वारा आयोजित इस भव्य कार्यक्रम में केंद्रीय गृह मंत्री  अमित शाह मुख्य अतिथि के रूप में उपस्थित रहे। छत्तीसगढ़ के मुख्यमंत्री  विष्णुदेव साय की उपस्थिति ने कार्यक्रम को विशेष महत्व प्रदान किया। मुख्यमंत्री  साय के साथ छत्तीसगढ़ सरकार के मंत्री  केदार कश्यप एवं  रामविचार नेताम भी उपस्थित थे।  कार्यक्रम स्थल पर दिल्ली की मुख्यमंत्री मती रेखा गुप्ता ने मुख्यमंत्री  विष्णुदेव साय से सौजन्य भेंट की। लाल किले की ऐतिहासिक पृष्ठभूमि, पारंपरिक वेशभूषा, लोक वाद्ययंत्रों और जनजातीय संस्कृति के विविध रंगों से सजा यह आयोजन केवल सांस्कृतिक कार्यक्रम नहीं, बल्कि भारत की मूल सांस्कृतिक चेतना और जनजातीय पहचान के संरक्षण का राष्ट्रीय संदेश बनकर उभरा। मुख्यमंत्री  विष्णुदेव साय ने कार्यक्रम में देशभर से आए जनजातीय समाज के प्रतिनिधियों और लोगों से आत्मीय मुलाकात की तथा अपने संबोधन में कहा कि जनजातीय समाज केवल प्रकृति का रक्षक नहीं, बल्कि भारत की सांस्कृतिक आत्मा का सबसे प्राचीन और जीवंत स्वरूप है। उन्होंने कहा कि सदियों से जल, जंगल और जमीन की रक्षा करते हुए जनजातीय समाज ने प्रकृति और मानव जीवन के बीच संतुलन बनाए रखने का कार्य किया है। आज जब पूरी दुनिया पर्यावरण संकट और असंतुलित विकास की चुनौतियों से जूझ रही है, तब जनजातीय जीवन दर्शन मानवता को टिकाऊ और प्रकृति-सम्मत विकास का रास्ता दिखा सकता है। मुख्यमंत्री ने कहा कि जनजातीय समाज सदियों से प्रकृति के साथ सहअस्तित्व और संतुलन का जीवन जीता आया है तथा उनकी संस्कृति और परंपराएं भारत की अमूल्य धरोहर हैं। मुख्यमंत्री  साय ने कहा कि छत्तीसगढ़ की पहचान उसकी समृद्ध जनजातीय संस्कृति से गहराई से जुड़ी हुई है। छत्तीसगढ़ में  लगभग 44 प्रतिशत भू-भाग वनाच्छादित है, जो केवल प्राकृतिक संपदा का प्रतीक नहीं, बल्कि जनजातीय जीवन, संस्कृति और परंपरा का जीवंत आधार भी है। उन्होंने कहा कि स्वतंत्रता आंदोलन से लेकर राष्ट्र निर्माण तक जनजातीय समाज का योगदान अतुलनीय रहा है। भगवान बिरसा मुंडा तथा छत्तीसगढ़ के अमर शहीद वीर नारायण सिंह जैसे महानायकों ने अपनी संस्कृति, स्वाभिमान और अधिकारों की रक्षा के लिए संघर्ष, साहस और बलिदान का अद्वितीय इतिहास रचा है, जो नई पीढ़ी के लिए प्रेरणा का स्रोत है। मुख्यमंत्री  विष्णुदेव साय ने कहा कि उनकी सरकार जनजातीय संस्कृति, परंपराओं और जीवन मूल्यों के संरक्षण तथा संवर्धन के लिए निरंतर कार्य कर रही है। उन्होंने बताया कि ‘आदि परब’, बस्तर पंडुम और बस्तर ओलंपिक जैसे आयोजन केवल सांस्कृतिक कार्यक्रम नहीं, बल्कि जनजातीय प्रतिभा, परंपरा, खेलकौशल और पहचान को राष्ट्रीय मंच देने का सशक्त प्रयास हैं। उन्होंने कहा कि इन आयोजनों के माध्यम से जनजातीय समाज की सांस्कृतिक शक्ति, सामूहिकता और प्रतिभा को नई पहचान मिल रही है तथा युवा पीढ़ी को अपनी जड़ों से जुड़ने की प्रेरणा भी प्राप्त हो रही है। मुख्यमंत्री  साय ने कहा कि किसी भी समाज की संस्कृति उसकी भाषा से जीवित रहती है, इसलिए छत्तीसगढ़ सरकार जनजातीय भाषाओं और सांस्कृतिक विरासत के संरक्षण को सर्वोच्च प्राथमिकता दे रही है। उन्होंने बताया कि गोंडी, हल्बी और सादरी जैसी जनजातीय भाषाओं में बच्चों को प्रारंभिक शिक्षा देने की दिशा में विशेष पहल की जा रही है, ताकि नई पीढ़ी अपनी मातृभाषा, सांस्कृतिक जड़ों और पारंपरिक ज्ञान से जुड़ी रह सके। उन्होंने कहा कि भाषा केवल संवाद का माध्यम नहीं होती, बल्कि वह किसी समाज की पहचान, इतिहास और सामूहिक स्मृति का आधार भी होती है। मुख्यमंत्री  विष्णुदेव साय ने आगे कहा कि बस्तर से सरगुजा तक देवगुड़ी जैसे पारंपरिक आस्था केंद्रों के संरक्षण और विकास का कार्य तेजी से किया जा रहा है। उन्होंने कहा कि जनजातीय समाज की आध्यात्मिक और सांस्कृतिक विरासत को संरक्षित करना केवल परंपरा को बचाने का कार्य नहीं, बल्कि आने वाली पीढ़ियों को अपनी जड़ों से जोड़ने और उनकी पहचान को मजबूत बनाने की दिशा में एक महत्वपूर्ण प्रयास है। राज्य सरकार इस दिशा में संवेदनशीलता और प्रतिबद्धता के साथ कार्य कर रही है। कार्यक्रम के दौरान देश के विभिन्न राज्यों से आए जनजातीय कलाकारों ने पारंपरिक नृत्य, लोक संगीत और सांस्कृतिक प्रस्तुतियों के माध्यम से भारत की समृद्ध जनजातीय विरासत की जीवंत झलक प्रस्तुत की। लाल किला मैदान  मांदर, ढोल, पारंपरिक लोकधुनों और सांस्कृतिक उत्साह से गूंजता रहा। विविध जनजातीय परंपराओं, रंगों, वेशभूषाओं और सांस्कृतिक अभिव्यक्तियों से सजा यह आयोजन देश की विविधता में एकता और सांस्कृतिक समृद्धि का प्रभावशाली प्रतीक बनकर सामने आया। मुख्यमंत्री  विष्णुदेव साय ने कहा कि जनजातीय समाज केवल अतीत की विरासत नहीं, बल्कि भारत के भविष्य की भी महत्वपूर्ण शक्ति है। उन्होंने कहा कि जनजातीय समाज का जीवन दर्शन, प्रकृति के प्रति सम्मान, सामुदायिक जीवन की भावना और सांस्कृतिक अनुशासन आधुनिक विकास मॉडल को मानवीय और संतुलित दिशा दे सकते हैं। लाल किला मैदान में आयोजित यह राष्ट्रीय जनजाति सांस्कृतिक समागम केवल एक आयोजन बनकर सीमित नहीं रहा, बल्कि जनजातीय समाज की एकता, स्वाभिमान, सांस्कृतिक पुनर्जागरण और प्रकृति-सम्मत विकास के राष्ट्रीय संकल्प का सशक्त घोष बनकर उभरा।

समय-सीमा में कार्य पूर्ण करने के निर्देश, जनप्रतिनिधियों से समन्वय पर ज़ोर

रायपुर वित्त मंत्री एवं जशपुर जिले के प्रभारी मंत्री  ओपी चौधरी ने कड़े लहजे में अधिकारियों से कहा कि जशपुर मुख्यमंत्री का गृह जिला है, इसलिए सभी अधिकारी अपने दायित्वों का गंभीरता से निर्वहन करते हुए निर्माण कार्यों को निर्धारित समय-सीमा में पूर्ण करना सुनिश्चित करें। प्रभारी मंत्री  चौधरी ने आज जशपुर जिला पंचायत सभाकक्ष में जिला स्तरीय अधिकारियों की उच्च स्तरीय समीक्षा बैठक ली। इस दौरान उन्होंने विभिन्न विभागीय योजनाओं और जारी विकास कार्यों की विस्तार से समीक्षा की।  शिलापट्ट स्थापना में लापरवाही पर सख्त रुख          प्रभारी मंत्री  चौधरी ने कहा कि पिछले दस वर्षों की तुलना में वर्तमान सरकार द्वारा जशपुर जिले में रिकॉर्ड संख्या में विकास कार्य स्वीकृत किए गए हैं। उन्होंने अधिकारियों को कड़े निर्देश देते हुए कहा कि जिन विकास कार्यों का लोकार्पण एवं भूमिपूजन हो चुका है, उनके शिलापट्ट संबंधित गांवों में स्थानीय जनप्रतिनिधियों की गरिमामय उपस्थिति में अनिवार्य रूप से स्थापित किए जाएं। शिलापट्ट लगाने की पूरी जिम्मेदारी संबंधित विभागीय अधिकारियों की होगी। यदि कहीं भी यह शिकायत मिलती है कि शिलापट्ट उपेक्षित पड़ा है या स्थापित नहीं किया गया है, तो जिम्मेदार अधिकारी के विरुद्ध तत्काल कड़ी दंडात्मक कार्रवाई की जाएगी। महिला सशक्तिकरण और आत्मनिर्भर खेती पर विशेष ध्यान          वित्त मंत्री ने ग्रामीण अर्थव्यवस्था को मजबूत करने के लिए दो प्रमुख वर्गों पर ध्यान केंद्रित करने को कहा कि महिला सशक्तिकरण के लिए महतारी वंदन योजना के तहत मिल रही एक हजार रूपए की मासिक सहायता का उपयोग महिलाएं बच्चों के भविष्य के लिए, समृद्धि सुकन्या योजना जैसी बचत योजनाओं में करें। इसके अलावा स्वरोजगार के लिए महतारी शक्ति ऋण योजना के अंतर्गत कम ब्याज दर पर 25 हजार रूपए तक का ऋण त्वरित उपलब्ध कराया जाए। पारंपरिक खेती से हटकर किसानों को अधिक मुनाफे वाले फलोत्पादन (विशेषकर केला और लीची की खेती) तथा आधुनिक मत्स्य पालन के लिए प्रोत्साहित किया जाए। साथ ही कृषि विभाग खरीफ सीजन के लिए समितियों में पर्याप्त खाद-बीज की उपलब्धता सुनिश्चित करे। जिले की प्रमुख विकास परियोजनाओं की प्रगति            बैठक में कलेक्टर  रोहित व्यास ने जिले में चल रहे महत्वपूर्ण प्रोजेक्ट्स की अद्यतन स्थिति साझा की। उन्होंने बताया कि मेडिकल कॉलेज, शासकीय नर्सिंग कॉलेज, शासकीय प्राकृतिक चिकित्सा केंद्र, क्रिटिकल केयर सेंटर और अखिल भारतीय कल्याण आश्रम द्वारा संचालित अस्पताल का निर्माण तेजी से जारी है। सन्ना विकासखंड के ग्राम पंडरापाठ में विशेष पिछड़ी जनजाति पहाड़ी कोरवा बच्चों के लिए विशेष तीरंदाजी केंद्र का निर्माण शुरू हो चुका है। इसके अतिरिक्त कुनकुरी और जशपुर में नालंदा परिसर तथा सलियाटोली में एडवेंचर स्पोर्ट्स परियोजना पर कार्य चल रहा है। कानून व्यवस्था और जन-जागरूकता            वरिष्ठ पुलिस अधीक्षक डॉ. लाल उमेद सिंह ने सुरक्षा व्यवस्था को मजबूत करने के लिए प्रमुख चौक-चौराहों पर सीसीटीवी कैमरे लगाने की आवश्यकता जताई। उन्होंने बताया कि जिले में सोशल मीडिया के माध्यम से एक अनूठा हेलमेट जागरूकता अभियान चलाया जा रहा है, जिसमें अब तक 2 हजार से अधिक नागरिकों के अपील वीडियो जारी किए जा चुके हैं। व्यापक विभागीय समीक्षा            प्रभारी मंत्री ने बैठक में सुशासन तिहार, मनरेगा, प्रधानमंत्री आवास योजना (ग्रामीण), पीएम सूर्य घर मुफ्त बिजली योजना, लोक स्वास्थ्य यांत्रिकी, महिला एवं बाल विकास, जल संसाधन और प्रधानमंत्री ग्राम सड़क योजना सहित दो दर्जन से अधिक विभागों के कल्याणकारी कार्यों की गहन समीक्षा की।           बैठक में जशपुर विधायक मती रायमुनि भगत, पत्थलगांव विधायक मती गोमती साय, जिला पंचायत अध्यक्ष  सालिक साय, नगर पालिका अध्यक्ष  अरविंद भगत, जिला पंचायत उपाध्यक्ष  शौर्य प्रताप सिंह जूदेव, जिला पंचायत सीईओ  अभिषेक कुमार, डीएफओ  शशि कुमार सहित सभी जिला स्तरीय अधिकारी व जनप्रतिनिधि उपस्थित थे।

सारंगढ़ में जनजातीय कारीगर हैंडीक्राफ्ट मेला आयोजित

​रायपुर   जनजातीय संस्कृति और शिल्प को बढ़ावा देने के उद्देश्य से 'जनजातीय गरिमा उत्सव' के अंतर्गत सारंगढ़ के साहू धर्मशाला में एक भव्य हस्तनिर्मित (हैंडीक्राफ्ट) वस्तु प्रदर्शनी सह विक्रय मेले का आयोजन किया गया। ट्राइबल कोऑपरेटिव मार्केटिंग डेवलपमेंट फेडरेशन ऑफ इंडिया लिमिटेड (ट्राइफेड) द्वारा आयोजित इस मेले में जिला सारंगढ़-बिलाईगढ़ के, विशेषकर ग्राम बैगीनडीह के जनजातीय कारीगरों ने बड़ी संख्या में हिस्सा लिया और अपने हुनर का प्रदर्शन किया। ​  ​  ग्राम बैगीनडीह का झारा शिल्प      ​ इस मेले में ग्राम बैगीनडीह के शिल्पकारों द्वारा तैयार किए गए झारा शिल्प और बेलमेटल (घंटी धातु) उत्पाद ग्राहकों और आगंतुकों के लिए मुख्य आकर्षण रहे। प्रदर्शनी में शामिल अधिकांश महिला शिल्पकार पंचायत एवं ग्रामीण विकास विभाग के राष्ट्रीय आजीविका मिशन (बिहान) के अंतर्गत गठित 'कात्यायनी' और 'भारत माता' जैसे स्व-सहायता समूहों (SHGs) से जुड़ी हुई हैं। इन समूहों के माध्यम से वे अपने पारंपरिक हुनर को आजीविका का मजबूत जरिया बना रही हैं। ​ट्राइफेड (TRIFED): शिल्पकारों की तरक्की का नया मार्ग       ​ सारंगढ़-बिलाईगढ़ के बैगीनडीह जैसे कई शिल्प ग्रामों के कारीगर ट्राइफेड से जुड़कर अपने जीवन स्तर को बेहतर बना सकते हैं। ​ ज्ञात हो कि ट्राइफेड अर्थात 'ट्राइबल को-ऑपरेटिव मार्केटिंग डेवलपमेंट फेडरेशन ऑफ इंडिया लिमिटेड' भारत सरकार के जनजातीय कार्य मंत्रालय के प्रशासनिक नियंत्रण में काम करने वाली एक राष्ट्रीय स्तर की शीर्ष संस्था है। यह संस्था जंगलों से लघु वनोपज (MFP) इकट्ठा करने वाले और हस्तशिल्प बनाने वाले आदिवासी समुदायों को उनकी मेहनत का उचित मूल्य दिलाता है। इसके साथ ही यह संस्था आदिवासी उत्पादों (जैसे प्राकृतिक शहद, हस्तशिल्प, कपड़े, जैविक उत्पाद) की ब्रांडिंग करती है और इनके लिए राष्ट्रीय व अंतर्राष्ट्रीय स्तर पर बाजार तलाशती है।      ​वनधन माइक्रो उद्यमों को बढ़ावा        ​ ट्राइफेड ने 50-100 राज्य स्तरीय निर्माता कंपनियों के माध्यम से वनधन माइक्रो उद्यमों को बढ़ावा देने के लिए बड़े कदम उठाए हैं। इन वनधन निर्माता कंपनियों का मुख्य उद्देश्य है ​उत्पादकता में वृद्धि और लागत में कमी लाना,​कुशल एकत्रीकरण और मूल्य संवर्धन (Value Addition) के लिए बड़े पैमाने पर प्रसंस्करण (Processing) करना और ​उत्पादों का बेहतर उपयोग और कुशल विपणन (Marketing) सुनिश्चित करना है। ​ट्राइफेड का हिस्सा बनने का खुला अवसर        ​ट्राइफेड केवल कारीगरों के लिए ही नहीं, बल्कि एक बड़ा नेटवर्क बनाने के लिए वैश्विक स्तर पर अवसर प्रदान करता है। इससे कॉर्पोरेट जगत, आदिवासी समाज, वैज्ञानिक, विभिन्न संस्थान, प्रशिक्षक, संसाधन व्यक्ति, विषय विशेषज्ञ, सलाहकार, कार्यान्वयन एजेंसियां, उपकरण निर्माता, खरीदार (Buyers) और डिजाइनर्स सभी जुड़कर एक साथ काम कर सकते हैं।

मुख्यमंत्री विष्णुदेव साय ने अधिकारियों को समन्वय कर हरसंभव सहायता सुनिश्चित करने के दिए निर्देश

रायपुर  जांजगीर-चांपा जिले की होनहार पर्वतारोही अमिता वास ने विश्व की सबसे ऊंची चोटी माउंट एवरेस्ट (8848 मीटर) को 22 मई 2026 को सफलतापूर्वक फतह कर छत्तीसगढ़ का नाम राष्ट्रीय एवं अंतरराष्ट्रीय स्तर पर गौरवान्वित किया है। उनकी इस ऐतिहासिक उपलब्धि पर मुख्यमंत्री  विष्णु देव साय ने कहा कि अमिता ने अपने साहस, दृढ़ संकल्प और अथक मेहनत से प्रदेश के युवाओं के लिए प्रेरणा का नया अध्याय रचा है। मुख्यमंत्री  साय ने कहा कि यह पूरे छत्तीसगढ़ के लिए गर्व का विषय है कि छत्तीसगढ़ की बेटी ने विश्व की सर्वोच्च चोटी पर तिरंगा और हमारे प्रदेश का गौरव बढ़ाया।  मुख्यमंत्री  विष्णु देव साय ने सोशल मीडिया हैंडल एक्स पर पोस्ट कर कहा कि समिट के बाद बेस कैंप लौटने के दौरान अत्यधिक ऊंचाई, शून्य से लगभग 40 डिग्री सेल्सियस नीचे तापमान और ऑक्सीजन की कमी के कारण अमिता वास की तबीयत बिगड़ने की जानकारी मिली है। उन्हें हेलीकॉप्टर के माध्यम से रेस्क्यू कर काठमांडू स्थित नॉर्विक इंटरनेशनल हॉस्पिटल में भर्ती कराया गया है, जहां उनका उपचार जारी है। चिकित्सकों के अनुसार उन्हें गंभीर फ्रॉस्टबाइट एवं हाई एल्टीट्यूड संबंधी स्वास्थ्य समस्याएं हुई हैं। मुख्यमंत्री ने कहा कि जानकारी मिलते ही राज्य शासन के वरिष्ठ अधिकारियों को आवश्यक समन्वय स्थापित कर हरसंभव सहायता सुनिश्चित करने के निर्देश दे दिए गए हैं। उन्होंने कहा कि राज्य सरकार अमिता वास और उनके परिवार के साथ खड़ी है तथा उनके बेहतर उपचार के लिए निरंतर संपर्क और सहयोग सुनिश्चित किया जा रहा है। मुख्यमंत्री  साय ने अमिता के शीघ्र स्वास्थ्य लाभ की कामना करते हुए कहा कि अमिता बिटिया शीघ्र पूर्ण रूप से स्वस्थ होकर अपने घर लौटें, यही हमारी कामना है। उनका साहस, धैर्य और हौसला हजारों युवाओं के लिए प्रेरणास्रोत बनेगा। छत्तीसगढ़ को उन पर गर्व है।

Vishnu Deo Sai से आदिवासी समाज की अहम मुलाकात, जनहित के मुद्दों पर हुई बातचीत

रायपुर. छत्तीसगढ़ के वरिष्ठ मंत्री केदार कश्यप के नेतृत्व में सर्व आदिवासी समाज के प्रतिनिधि मंडल ने नई दिल्ली स्थित छत्तीसगढ़ सदन में मुख्यमंत्री विष्णुदेव साय से सौजन्य मुलाकात की। इस अवसर पर प्रतिनिधिमंडल और मुख्यमंत्री के बीच सामाजिक समरसता, जनकल्याण तथा छत्तीसगढ़ के समग्र विकास से जुड़े विभिन्न मुद्दों पर सकारात्मक चर्चा हुई। प्रतिनिधि मंडल ने मुख्यमंत्री विष्णु देव साय के नेतृत्व में प्रदेश में संचालित विकास कार्यों और जनहितकारी योजनाओं की सराहना करते हुए उन्हें शुभकामनाएं भी दीं। मुख्यमंत्री ने भी समाज के प्रतिनिधियों का स्वागत करते हुए कहा कि राज्य सरकार आदिवासी समाज के विकास, संस्कृति के संरक्षण और सामाजिक सशक्तिकरण के लिए निरंतर कार्य कर रही है। मुलाकात के प्रमुख बिंदु – आदिवासी उत्थान और विकास: मुख्यमंत्री ने जोर दिया कि छत्तीसगढ़ सरकार आदिवासी समाज के समग्र विकास और उत्थान के लिए पूर्ण रूप से प्रतिबद्ध है. जनकल्याणकारी योजनाएं: प्रतिनिधिमंडल के साथ शासन की विभिन्न जनकल्याणकारी योजनाओं की समीक्षा की गई, ताकि उनका अधिकतम लाभ समाज के अंतिम छोर तक पहुंचाया जा सके. सांस्कृतिक संरक्षण: चर्चा में आदिवासी संस्कृति, परंपराओं और विरासत को बढ़ावा देने और सहेजने पर सहमति बनी.