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बेहतर विभागीय समन्वय से कार्यों में लाएं तेजी : सचिव बंसल

रायपुर.  लोक निर्माण विभाग के सचिव  मुकेश कुमार बंसल ने आज मुंगेली जिले का दौरा कर निर्माणाधीन कार्यों का निरीक्षण और समीक्षा की। उन्होंने विभागीय अधिकारियों से कहा कि निर्माण कार्यों में किसी भी स्तर पर ढिलाई बर्दाश्त नहीं की जाएगी। उन्होंने सभी अधिकारियों को पूरी जिम्मेदारी के साथ फील्ड में उतरकर निर्माण कार्यों में तेजी लाने के निर्देश दिए।  बंसल ने निर्माणाधीन लोरमी बायपास सड़क का निरीक्षण कर विभागीय अधिकारियों और ठेकेदारों को इसे समय-सीमा में पूर्ण करने के निर्देश दिए।     विभागीय सचिव ने मुंगेली सर्किट हाउस में आयोजित बैठक में कहा कि निर्माण कार्यों में गुणवत्ता और तेजी दोनों सुनिश्चित करना विभाग की सर्वोच्च प्राथमिकता है। इनमें कोई कोताही नहीं बरती जाए। उन्होंने नगरीय निकायों तथा अन्य विभागों से समन्वय के साथ सड़क निर्माण के कार्यों में तेजी लाने के निर्देश दिए। उन्होंने खराब सड़कों में पैच-वर्क कराने भी कहा।  बंसल ने सुगम यातायात को शासन की प्राथमिकता बताते हुए गांवों को बारहमासी सड़कों से जोड़ने के लिए प्रस्ताव तैयार कर तत्काल शासन को भेजने के निर्देश दिए। उन्होंने फील्ड का नियमित दौरा कर चल रहे कार्यों का बारीकी से निरीक्षण कर गुणवत्ता और समय-सीमा में कार्य पूर्णता सुनिश्चित करने के निर्देश दिए।  मुंगेली के कलेक्टर  कुन्दन कुमार, डीएफओ  अभिनव कुमार, जिला पंचायत के सीईओ  प्रभाकर पाण्डेय, लोक निर्माण विभाग के प्रमुख अभियंता  वी.के. भतपहरी, बिलासपुर परिक्षेत्र के मुख्य अभियंता  आर.के. रात्रे, राष्ट्रीय राजमार्ग परिक्षेत्र के  मुख्य अभियंता  ज्ञानेश्वर कश्यप,  अधीक्षण अभियंता  के.पी. संत, कार्यपालन अभियंता सर्व शरद सतपथी, आर.के. खामरा और  नीतिश तिवारी भी बैठक में मौजूद थे।

निर्माण कार्यों में देरी पर जताई नाराजगी, संबंधित एजेंसियों को नोटिस जारी करने के निर्देश

रायपुर  लोक निर्माण विभाग के सचिव  मुकेश कुमार बंसल ने आज कबीरधाम जिले में निर्माणाधीन पोड़ी-बिलासपुर राष्ट्रीय राजमार्ग-130ए का स्थल निरीक्षण कर निर्माण कार्यों की प्रगति, गुणवत्ता एवं तकनीकी पहलुओं की विस्तृत समीक्षा की। निरीक्षण के दौरान उन्होंने मुख्य मार्ग के साथ बायपास मार्ग का भी अवलोकन किया तथा अधिकारियों और निर्माण एजेंसी से कार्यों की वर्तमान स्थिति की जानकारी ली। सचिव  बंसल ने निरीक्षण के दौरान स्पष्ट निर्देश देते हुए कहा कि निर्माण कार्यों में किसी भी प्रकार की लापरवाही या गुणवत्ता में कमी स्वीकार नहीं की जाएगी। उन्होंने कहा कि सड़क निर्माण कार्य निर्धारित मानकों एवं तय समय-सीमा के भीतर पूर्ण होना चाहिए। उन्होंने जिन स्थानों पर सुधार की आवश्यकता है, वहां तत्काल सुधारात्मक कार्रवाई सुनिश्चित करने को कहा।  बंसल ने कहा कि निर्माण कार्यों में गुणवत्ता नियंत्रण के सभी मापदंडों का कड़ाई से पालन किया जाए तथा प्रत्येक चरण में तकनीकी जांच सुनिश्चित की जाए, ताकि भविष्य में किसी प्रकार की समस्या उत्पन्न न हो। उन्होंने अधिकारियों को निर्माण कार्यों में तेजी लाने और नियमित मॉनिटरिंग के निर्देश दिए। उन्होंने अधिकारियों को नियमित रूप से फील्ड में पहुंचकर निरीक्षण करने व गुणवत्ता परीक्षण सुनिश्चित करने को कहा। फील्ड निरीक्षण से पहले लोक निर्माण विभाग के सचिव ने कवर्धा सर्किट हाउस में लोक निर्माण विभाग, राष्ट्रीय राजमार्ग तथा सेतु संभाग के अधिकारियों के साथ कार्यों की समीक्षा की। उन्होंने इस दौरान कवर्धा जिले में चल रहे भवनों, सड़कों एवं पुलों के निर्माण की प्रगति की समीक्षा कर सभी कार्यों को समय-सीमा के भीतर पूर्ण करने के निर्देश दिए। उन्होंने जिन परियोजनाओं में लंबे समय से प्रगति नहीं हुई है या कार्य प्रारंभ करने में अनावश्यक देरी हो रही है, उन मामलों में संबंधित एजेंसियों एवं जिम्मेदार पक्षों को नोटिस जारी करने को कहा। उन्होंने कहा कि विकास कार्यों में अनावश्यक विलंब और लापरवाही किसी भी स्थिति में बर्दाश्त नहीं की जाएगी। सचिव  बंसल ने सड़क निर्माण या अन्य प्रस्तावित विकास कार्यों में संबंधित अधिकारियों को पहले स्थल का निरीक्षण कर तकनीकी जांच व अन्य सभी आवश्यक पहलुओं का परीक्षण करने के बाद आगे की कार्रवाई सुनिश्चित करने को कहा। यदि किसी निर्माण कार्य में तकनीकी बाधा, स्थल संबंधी समस्या या अन्य कठिनाई आ रही हो तो उसकी जानकारी तत्काल वरिष्ठ स्तर पर उपलब्ध कराई जाए। इससे समस्या का निराकरण कर कार्यों की प्रगति को प्रभावित होने से बचाया जा सकता है। कवर्धा के कलेक्टर  गोपाल वर्मा, लोक निर्माण विभाग के प्रमुख अभियंता  व्ही.के. भतपहरी, दुरेग परिक्षेत्र के मुख्य अभियंता  नागेश जयंत, राष्ट्रीय राजमार्ग परिक्षेत्र के मुख्य अभियंता  ज्ञानेश्वर कश्यप और कवर्धा संभाग के कार्यपालन अभियंता  रंजीत घाडगे भी मौजूद थे।

बहू ने निभाया रिश्ते का फर्ज, वृद्ध सास को पीठ पर ढोकर दिलाई पेंशन

अंबिकापुर सरगुजा जिले के मैनपाट विकासखंड अंतर्गत शुक्रवार को कुनिया के जंगलपारा की रहने वाली सुखमनिया अपनी 90 साल की सास सोनवारी को पीठ पर लादकर करीब तीन किलोमीटर दूर सेंट्रल बैंक पहुंची। यहां बैंक ने उसे तीन महीने की रुकी हुई पेंशन के 1500 रुपए दिए, जबकि खाते में चार महीने के कुल दो हजार रुपए जमा थे। स्वजन के अनुसार वृद्धा के दो पुत्र हैं जो काम करने चले जाते हैं। पेंशन नहीं मिलने के कारण परेशान बहू आखिरकार अपनी सास को पीठ पर लादकर बैंक तक का सफल पैदल तय की। बैंक पहुंची बहू सुखमनिया ने बताया कि पहले बैंक मित्र तपेश घर आकर पेंशन दे जाता था, लेकिन बाद में उसने घर पर पैसा देने से मना कर दिया। यही वजह है कि तीन महीने से भटकने के बाद उसे मजबूरी में सास को ढोकर बैंक लाना पड़ा। जंगलपारा के रास्ते में नाला पड़ने के कारण वहां कोई गाड़ी नहीं चलती, इसलिए वह पैदल ही बैंक पहुंची। बुजुर्ग सोनवारी को महतारी वंदन योजना का लाभ भी नहीं मिलता, उन्हें सिर्फ वृद्धावस्था पेंशन के 500 रुपए ही मिलते हैं। कुनिया ग्राम के जंगलपारा स्थित घर से डेढ़ किलोमीटर दूर एक नाला पड़ता है, जिसके कारण वहां कोई गाड़ी नहीं पहुंच पाती है। इसके बाद डेढ़ किलोमीटर का रास्ता और तय करना पड़ता है। महज 500 रुपए की पेंशन के लिए बुजुर्ग सास को इस तरह पीठ पर लादकर ले जाने का वीडियो भी सोशल मीडिया में वायरल रहा है। परिवार बेहद जरूरतमंद है। बहू ने बताया कि पहले बैंक मित्र घर पर ही पेंशन देने आता था, जिससे उन्हें सहूलियत होती थी। लेकिन पिछले कुछ महीनों से उसने घर आना बंद कर दिया। वहीं केवाईसी पूरा नहीं होने के कारण भी कई महीनों से पेंशन अटकी हुई थी। इसी वजह से शुक्रवार को बहू को मजबूरी में अपनी बुजुर्ग सास को पीठ पर लादकर पांच किलोमीटर दूर सेंट्रल बैंक तक पैदल लाना पड़ा। बैंक मैनेजर बोले- घर पर ही पेंशन देने की व्यवस्था इस पूरे मामले पर नर्मदापुर सेंट्रल बैंक के मैनेजर मिर्जा अल्ताफ बेग का कहना है कि मैनपाट इलाके में वृद्धावस्था पेंशन घर तक पहुंचाने की व्यवस्था है और इसके लिए बैंक के आठ बैंक मित्र काम कर रहे हैं। उन्होंने बताया कि जिन्हें भी पैसा निकालना होता है, उनके स्वजन अगर बैंक में सूचना दे दें तो बैंक मित्र को उनके घर भेज दिया जाता है।  

राज्य में 3.94 करोड़ लीटर पेट्रोल व 8.09 करोड़ लीटर डीजल का स्टॉक

रायपुर  छत्तीसगढ़ में पेट्रोल और डीजल का पर्याप्त भंडार उपलब्ध है और आम उपभोक्ताओं को घबराकर अतिरिक्त खरीदी या संग्रहण करने की आवश्यकता नहीं है। प्रदेश में ईंधन की आपूर्ति पूरी तरह सामान्य है तथा किसानों और आवश्यक सेवाओं को प्राथमिकता देते हुए नियमित सप्लाई सुनिश्चित की जा रही है। यहां यह उल्लेखनीय है कि प्रदेश में वर्तमान समय में 3 करोड़ 94 लाख 7 हजार 700 लीटर पेट्रोल तथा 8 करोड़ 8 लाख 83 हजार लीटर डीजल का स्टॉक उपलब्ध है। राज्य में पेट्रोल और डीजल की आपूर्ति के लिए कुल 2516 पेट्रोल पंप संचालित हो रहे हैं। खाद्य विभाग के अनुसार रबी फसल की कटाई और खरीफ सीजन की तैयारी के कारण डीजल की मांग में वृद्धि को देखते हुए ऑयल कंपनियों के लखौली और मंदिर हसौद (रायपुर) तथा गोपालपुर (कोरबा) स्थित डिपो से जिलों को लगातार आवश्यकतानुसार आपूर्ति की जा रही है। गौरतलब है कि 22 मई 2026 को ही प्रदेश को 21 लाख 83 हजार लीटर पेट्रोल और एक करोड़ 29 लाख 75 हजार लीटर डीजल प्राप्त हुआ है। इसके साथ ही प्रतिदिन नियमित रूप से पेट्रोल और डीजल की आपूर्ति जारी है। खाद्य सचिव ने राज्य में ईंधन की उपलब्धता और वितरण व्यवस्था की समीक्षा के लिए 20 मई 2026 को सभी ऑयल कंपनियों के अधिकारियों के साथ बैठक भी की थी। बैठक में निर्देश दिए गए कि जिन पेट्रोल पंपों में स्टॉक खत्म होने की स्थिति बन रही हो, वहां डिपो से तत्काल आपूर्ति सुनिश्चित की जाए ताकि किसी भी क्षेत्र में उपभोक्ताओं को परेशानी न हो। राज्य शासन ने 22 मई 2026 से प्रदेश के सभी पेट्रोल और डीजल पंपों पर ड्रम और जरीकेन में पेट्रोल-डीजल देने पर प्रतिबंध लगा दिया है। हालांकि किसानों तथा कलेक्टर द्वारा चिन्हित अत्यावश्यक सेवाओं को इस प्रतिबंध से छूट दी गई है। राज्य शासन ने आम नागरिकों से अपील की है कि वे किसी भी तरह की अफवाह या भ्रम में आकर पैनिक खरीदी अथवा इसका संग्रहण न करें। जरूरत के अनुसार सभी उपभोक्ताओं को पेट्रोल और डीजल की सुगम उपलब्धता सुनिश्चित करने के लिए राज्य स्तर पर सभी आवश्यक व्यवस्थाएं की गई हैं।

20 करोड़ से बनेगा भव्य रुद्रेश्वर धाम कॉरिडोर

रायपुर धमतरी शहर से लगे रुद्री स्थित प्राचीन रुद्रेश्वर महादेव मंदिर अब केवल एक धार्मिक स्थल भर नहीं रहेगा, बल्कि आने वाले समय में यह प्रदेश की सांस्कृतिक पहचान और धार्मिक पर्यटन का नया केंद्र बनकर उभरेगा। लगभग 20 करोड़ रुपये की लागत से प्रस्तावित रुद्रेश्वर धाम कॉरिडोर परियोजना के माध्यम से मंदिर परिसर का समग्र विकास किया जाएगा। इस महत्वाकांक्षी परियोजना को भारत सरकार के संस्कृति एवं पर्यटन मंत्रालय के सहयोग से तीन चरणों में विकसित करने की योजना तैयार की गई है। विशेष बात यह है कि पूरे विकास कार्य में मंदिर की मूल संरचना और उसकी आध्यात्मिक गरिमा को अक्षुण्ण रखा जाएगा। बिना किसी बड़े विध्वंस या संरचनात्मक क्षति के मंदिर परिसर को आधुनिक सुविधाओं और पारंपरिक भारतीय स्थापत्य शैली के समन्वय से नया स्वरूप दिया जाएगा। प्रस्तावित डिजाइन में शिखर, त्रिशूल, ओम् प्रतीक, तोरण द्वार, अलंकृत स्तंभ, नंदी प्रतिमा, दीप स्तंभ और जाली कार्य जैसे पारंपरिक तत्व शामिल किए गए हैं। प्राकृतिक सैंडस्टोन क्लैडिंग और पत्थर आधारित फिनिश मंदिर परिसर को भव्य, आकर्षक और कालातीत स्वरूप प्रदान करेंगे। परियोजना का उद्देश्य केवल मंदिर सौंदर्यीकरण तक सीमित नहीं है, बल्कि श्रद्धालुओं और पर्यटकों को विश्वस्तरीय सुविधाएं उपलब्ध कराना भी है। इसके तहत चौड़े पैदल मार्ग, सुव्यवस्थित प्रवेश और निकास द्वार, परिक्रमा पथ, घाट, मंडप और सार्वजनिक उपयोग के क्षेत्रों का सुनियोजित विकास किया जाएगा। परिसर में डिजिटल सूचना स्क्रीन, प्रसाद एवं स्मृति चिन्ह दुकानें, फूड कोर्ट, विश्राम क्षेत्र, शिशु आहार कक्ष, भुगतान आधारित स्वच्छ शौचालय और प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्र जैसी सुविधाएं विकसित होंगी। आधुनिक तकनीक के उपयोग के तहत एआई आधारित हेल्थ चेकअप कियोस्क भी स्थापित किए जाएंगे। वृद्धजनों और दिव्यांगजनों के लिए रैम्प आधारित बाधारहित आवागमन व्यवस्था परियोजना का महत्वपूर्ण हिस्सा होगी। घाट क्षेत्र को भी विशेष रूप से विकसित किया जाएगा। यहां रेलिंग युक्त विसर्जन कुंड, सुरक्षित सीढ़ियां और श्रद्धालुओं के बैठने के लिए पर्याप्त व्यवस्था की जाएगी, ताकि धार्मिक गतिविधियां सुरक्षित और व्यवस्थित ढंग से संचालित हो सकें। इसके अलावा गार्डन, सांस्कृतिक मंडप, खुला मंच, रिवर फ्रंट कॉटेज और भविष्य में विकसित होने वाली मेरीन ड्राइव जैसी अवधारणाएं इस परियोजना को धार्मिक पर्यटन के साथ-साथ सांस्कृतिक और पारिवारिक पर्यटन का भी प्रमुख केंद्र बनाएंगी। पूरे लेआउट को वास्तु सिद्धांतों, प्राकृतिक वेंटिलेशन, खुले प्रांगण और श्रद्धालुओं की क्रमिक आध्यात्मिक यात्रा की अवधारणा को ध्यान में रखते हुए तैयार किया गया है। डिजाइन में सोमनाथ मंदिर, काशी विश्वनाथ कॉरिडोर और जगन्नाथ मंदिर की स्थापत्य अवधारणाओं से प्रेरणा ली गई है। पर्यावरण संरक्षण को भी परियोजना का अहम हिस्सा बनाया गया है। इसके तहत सौर ऊर्जा आधारित पार्किंग शेड, ईवी चार्जिंग स्टेशन, वर्षा जल संचयन, प्राकृतिक प्रकाश और वायु संचार आधारित डिजाइन, हरित क्षेत्र विकास तथा वैज्ञानिक अपशिष्ट प्रबंधन जैसी व्यवस्थाएं प्रस्तावित हैं। स्थानीय और टिकाऊ निर्माण सामग्री के उपयोग से पर्यावरणीय प्रभाव कम करने के साथ स्थानीय कारीगरों और रोजगार को भी बढ़ावा मिलेगा। कलेक्टर  अबिनाश मिश्रा के अनुसार यह परियोजना केवल अधोसंरचना निर्माण नहीं, बल्कि धमतरी की धार्मिक आस्था, सांस्कृतिक विरासत और पर्यटन संभावनाओं को नई पहचान देने वाला प्रयास है। आने वाले समय में रुद्रेश्वर धाम प्रदेश के प्रमुख आध्यात्मिक और सांस्कृतिक पर्यटन केंद्रों में शामिल होगा

अवैध खनन माफिया पर शिकंजा, बिलासपुर में लगातार कार्रवाई से मचा हड़कंप

बिलासपुर. कलेक्टर संजय अग्रवाल के निर्देश पर जिले में अवैध बोर खनन और बिना रॉयल्टी खनिज परिवहन के खिलाफ प्रशासन लगातार सख्त कार्रवाई कर रहा है। बीते दो दिनों में बड़ी कार्रवाई करते हुए कुल 8 वाहनों को जब्त किया गया है। प्रशासन ने 4 बोर मशीनों और 4 हाइवा वाहनों पर कार्रवाई कर अवैध गतिविधियों में शामिल लोगों में हड़कंप मचा दिया है। जानकारी के मुताबिक ग्राम बसिया में देर रात अवैध रूप से बोर खनन किया जा रहा था। कार्रवाई के दौरान वहां से दो बोर मशीनें जब्त की गईं।इसके अलावा तिफरा क्षेत्र में भी प्रशासन ने दबिश देकर दो और बोर मशीनों को पकड़ा। बिना रॉयल्टी मुरूम और गिट्टी ढो रहे थे हाइवा राजस्व विभाग की टीम ने बिना रॉयल्टी मुरूम और गिट्टी का परिवहन कर रहे 4 हाइवा वाहनों को भी जब्त किया। अधिकारियों के अनुसार सभी वाहनों को आगे की कार्रवाई के लिए सिरगिट्टी और तोरवा थाना पुलिस को सौंप दिया गया है। तहसीलदार के नेतृत्व में हुई संयुक्त कार्रवाई यह पूरी कार्रवाई तहसीलदार प्रकाश साहू के नेतृत्व में राजस्व विभाग की संयुक्त टीम ने की। प्रशासन का कहना है कि जिले में अवैध खनन और अवैध परिवहन के खिलाफ अभियान लगातार जारी रहेगा।कलेक्टर ने अधिकारियों को स्पष्ट निर्देश दिए हैं कि नियम तोड़ने वालों के खिलाफ सख्त कार्रवाई की जाए और अवैध गतिविधियों पर पूरी तरह रोक लगाई जाए।

जल जीवन मिशन 2.0 में पेयजल योजनाओं को पूर्ण करने लोक स्वास्थ्य यांत्रिकी विभाग ने बनाया रोडमैप

रायपुर  उप मुख्यमंत्री तथा लोक स्वास्थ्य यांत्रिकी मंत्री  अरुण साव ने आज लोक स्वास्थ्य यांत्रिकी विभाग के कार्यों की समीक्षा की। उन्होंने मंत्रालय में वरिष्ठ विभागीय अधिकारियों तथा मैदानी अधिकारियों की बैठक लेकर जल जीवन मिशन के कार्यों, नक्सल प्रभावित रहे क्षेत्रों की पेयजल योजनाओं एवं प्रदेश में ग्रीष्म काल में पेयजल व्यवस्था की समीक्षा की। राज्य के सभी जिलों के अधिकारी वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग से बैठक में शामिल हुए। लोक स्वास्थ्य यांत्रिकी विभाग के सचिव तथा जल जीवन मिशन के संचालक  मोहम्मद कैसर अब्दुलहक और प्रमुख अभियंता  के.के. मरकाम भी बैठक में मौजूद थे। उप मुख्यमंत्री  अरुण साव ने जल जीवन मिशन के कार्यों को प्राथमिकता से पूर्ण करने आगामी दो वर्षों के रोडमैप पर चर्चा करते हुए अधिकारियों को मिशन के शेष कार्यों को गंभीरता, सक्रियता और तेजी से पूर्ण करने के निर्देश दिए। उन्होंने कहा कि मैदानी स्तर पर काम की गति और पूर्णता से ही केंद्र सरकार एवं राज्य सरकार द्वारा कार्यों के लिए राशि जारी की जाएगी। जल जीवन मिशन के शेष कार्यों को और ज्यादा फोकस एवं बारीकी से करना है। उन्होंने कहा की वर्तमान समय में पेयजल आपूर्ति अधिकांशतः शासकीय व्यवस्था पर ही आश्रित है। जल आपूर्ति की अपर्याप्त व्यवस्था या इसमें किसी तरह की बाधा आने पर लोगों को बड़ी परेशानी का सामना करना पड़ता है। इसके लिए विभाग को दूरदृष्टि एवं पूर्वानुमान के साथ काम करने की जरूरत है। उप मुख्यमंत्री  साव ने बैठक में हर गांव की पेयजल व्यवस्था की समय-समय पर जांच करने और किसी तरह की दिक्कत होने पर तत्काल समाधान करने के निर्देश दिए। उन्होंने जहां-जहां जल जीवन मिशन के काम पूरे हो गए हैं, वहां हर घर जल का सत्यापन कराकर योजनाओं के संचालन-संधारण की जिम्मेदारी ग्राम पंचायत को सौंपने को कहा। उन्होंने विभाग के सभी मुख्य अभियंताओं और अधीक्षण अभियंताओं को कलेक्टरों से चर्चा कर प्रत्येक योजना की प्रगति पर कड़ी नजर रखने के निर्देश दिए। उन्होंने कार्यपालन अभियंताओं के कार्यों में सक्रिय सहयोग कर योजनाओं को समय-सीमा में पूर्ण कराना सुनिश्चित करने को कहा।  उप मुख्यमंत्री ने ग्रीष्म काल में प्रदेश की पेयजल व्यवस्था की समीक्षा करते हुए खराब हैंडपंपों की तत्काल मरम्मत करने और जलस्तर के नीचे चले जाने के कारण सूख चुके हैंडपंपों में राइजर पाइप बढ़ाकर जलापूर्ति दुरूस्त करने के निर्देश दिए। उन्होंने जरूरत पड़ने पर तत्परता से नया ट्यूबवेल भी खोदने को कहा।  साव ने आगामी वर्षा ऋतु को देखते हुए जलजनित रोगों से बचाव के लिए भी पूरी तैयारी सुनिश्चित करने के निर्देश दिए। उन्होंने इसके लिए गंदे पानी की आपूर्ति रोकने, नालियों से गुजरने वाले पाइपलाइनों को बदलने तथा जल की गुणवत्ता का नियमित परीक्षण करने को कहा। उप मुख्यमंत्री  साव ने विभागीय अधिकारियों से लोगों को बारिश के पानी को संचित करने, वृक्षारोपण, जलस्रोतों के संरक्षण-संवर्धन और रेन-वाटर हार्वेस्टिंग के लिए प्रेरित करने को कहा। भविष्य में जल की पर्याप्त उपलब्धता के लिए ये बहुत जरूरी है। उन्होंने बैठक में नक्सल प्रभावित रहे जिलों में पेयजल आपूर्ति की स्थिति की भी समीक्षा की। उन्होंने जल जीवन मिशन के कार्यों को गति देते हुए पहुंचविहीन एवं दूरस्थ वनांचलों में भी स्वच्छ एवं सुरक्षित पेयजल की उपलब्धता सुनिश्चित करने को कहा। बैठक में जल जीवन मिशन 2.0 के विभिन्न प्रावधानों पर भी चर्चा की गई। जल जीवन मिशन के अतिरिक्त मिशन संचालक  ओंकेश चंद्रवंशी और लोक स्वास्थ्य यांत्रिकी विभाग के अधीक्षण अभियंता  एस.एल. पाण्डेय भी समीक्षा बैठक में मौजूद थे। वर्ष 2026-27 में 13,183 और 2027-28 में 7352 योजनाओं को पूर्ण करने का लक्ष्य लोक स्वास्थ्य यांत्रिकी विभाग के अधिकारियों ने बैठक में बताया कि चालू वित्तीय वर्ष 2026-27 में जल जीवन मिशन के तहत प्रगतिरत 13 हजार 183 योजनाओं को पूर्ण करने का लक्ष्य रखा गया है। वहीं 2027-28 में 7352 योजनाओं को पूर्ण किया जाएगा। इस दौरान क्रमशः 22 और 48 समूह जल प्रदाय …

स्वामित्व योजना बनी सहारा, हितग्राही दिलीप वर्मा को मिली अपने घर की नई उम्मीद

​रायपुर. "मुख्यमंत्री स्वामित्व योजना से मुझे ज़मीन का मालिकाना हक मिल गया है। अब मुझे अपना खुद का पक्का आवास बनाने में बहुत आसानी होगी। इस मदद के लिए छत्तीसगढ़ शासन को मेरा बहुत-बहुत धन्यवाद।" यह भावुक और कृतज्ञता भरे शब्द बलौदाबाजार के करहीबाजार में आयोजित 'सुशासन तिहार' के दौरान हितग्राही दिलीप कुमार वर्मा ने मुख्यमंत्री श्री विष्णु देव साय से कहे। ​सुशासन तिहार में सीधे संवाद से बढ़ी खुशियां राजस्व विभाग की 'स्वामित्व योजना' ग्रामीण क्षेत्रों के लिए वरदान साबित हो रही है। करहीबाजार में आयोजित समाधान शिविर  में मुख्यमंत्री श्री विष्णु देव साय ने योजना के तहत लाभान्वित हितग्राहियों से सीधा संवाद किया। इसी कड़ी में जब मुख्यमंत्री ने दिलीप कुमार वर्मा से बात की, तो दिलीप ने अपनी खुशी साझा करते हुए बताया कि ज़मीन का कानूनी हक मिलने से उनके जीवन की सबसे बड़ी चिंता दूर हो गई है और अब वे बिना किसी अड़चन के अपना आशियाना बना सकेंगे हर गरीब का हो अपना पक्का मकान: मुख्यमंत्री हितग्राही दिलीप वर्मा की बात सुनकर मुख्यमंत्री श्री विष्णु देव साय ने उन्हें सहर्ष बधाई दी और उज्ज्वल भविष्य के लिए शुभकामनाएं दीं। मुख्यमंत्री ने इस मौके पर कहा कि हमारी सरकार का मुख्य ध्येय अंतिम व्यक्ति तक सुशासन का लाभ पहुंचाना है। स्वामित्व योजना के माध्यम से ग्रामीणों को उनकी संपत्ति का असली हक मिल रहा है, जिससे न केवल उन्हें बैंक लोन मिलने में आसानी होगी, बल्कि प्रधानमंत्री आवास योजना के तहत पक्का मकान बनाने की राह भी आसान होगी। दिलीप कुमार जी जैसे लाखों परिवारों के चेहरे पर आई यह मुस्कान ही हमारी सरकार की असली ताकत है। सुशासन का मतलब ही यही है कि हर नागरिक को उसका अधिकार बिना किसी परेशानी के मिले।

बाइक पर सवार होकर नक्सलियों के गढ़ रहे गांवों में पहुंचे कलेक्टर-सीईओ

रायपुर. बस्तर के सुदूर वनांचलों से डर और उपेक्षा का अंधेरा अब छंटने लगा है, और इसकी गवाह बनी सुकमा की वो तस्वीरें जहां जिले के मुखिया खुद दुर्गम रास्तों की परवाह किए बिना जनता के द्वार पहुंचे रहे हैं। कलेक्टर अमित कुमार और जिला सीईओ मुकुन्द ठाकुर ने कोंटा विकासखंड के धुर नक्सल प्रभावित रहे और पहुंचविहीन गांवों भेज्जी, मैलापुर, दंतेशपुरम, बुर्कलंका, गछनपल्ली, बोदराजपदर और डब्बाकोंटा का ऐतिहासिक दौरा किया। सालों से मुख्यधारा से कटे इन गांवों के उबड़-खाबड़ और पथरीले रास्तों पर जब अधिकारियों का काफिला मोटरसाइकिल पर सवार होकर निकला, तो यह सिर्फ एक निरीक्षण नहीं, बल्कि ग्रामीणों के मन में प्रशासनिक व्यवस्था के प्रति अटूट विश्वास जगाने का सफर बन गया। आजादी के बाद पहली बार किसी कलेक्टर को अपने बीच पाकर ग्रामीणों के चेहरे खिल उठे। चौपाल पर संवाद और 'सुशासन परिसर' की सराहना अधिकारियों ने बुर्कलंका में बन रहे 'सुशासन परिसर' का बारीकी से निरीक्षण किया। कलेक्टर श्री अमित कुमार ने दुर्गम घने जंगलों के बीच बसे इस गांव में बने परिसर की मुक्तकंठ से सराहना करते हुए इसे प्रेरणादायी बताया। इस बहुद्देशीय परिसर में एक ही बाउंड्रीवाल के भीतर स्कूल, आंगनबाड़ी, पंचायत भवन, पीडीएस सेंटर और सामुदायिक भवन को समेटा गया है, जो ग्रामीणों को एक ही छत के नीचे सारी मूलभूत सुविधाएं देने का बेहतरीन मॉडल है। सुशासन शिविर के दौरान मैलासुर पंचायत में अधिकारियों ने जमीन पर बैठकर सरपंच, पटेल, मुखिया और ग्रामीणों से सीधा संवाद किया, सरकारी योजनाओं की जमीनी हकीकत जानी और निर्माणाधीन कार्यों को समय पर पूरा करने का संकल्प दोहराया। स्वास्थ्य और शिक्षा के क्षेत्र में बड़ी सौगातें प्रशासन का सबसे बड़ा फोकस ग्रामीणों की सेहत और बच्चों की शिक्षा पर रहा। कलेक्टर ने संवेदनशील पहल करते हुए भेज्जी पंचायत में उप स्वास्थ्य केंद्र की प्रशासकीय स्वीकृति दी गई, जबकि मैलासुर में इसके लिए तत्काल जगह चिन्हित करने के निर्देश दिए। गछनपाल्ली में स्वास्थ्य कर्मियों के रहने के लिए स्टाफ क्वार्टर को मंजूरी दी गई, ताकि चौबीसों घंटे इलाज की सुविधा मिल सके। शिक्षा की लौ को मजबूत करने के लिए दंतेषपुरम में निर्माणाधीन प्राथमिक शाला भवन को बारिश के मौसम से पहले हर हाल में पूरा करने का निर्देश शिक्षा विभाग को दिया गया, साथ ही अंदरूनी इलाकों के स्कूलों में शिक्षकों की उपस्थिति को लेकर सख्त रुख अपनाया गया। पेयजल, आजीविका और कृषि को मिला नया जीवन गांवों में खुशहाली और आत्मनिर्भरता लाने के लिए कलेक्टर ने आजीविका के नए द्वार खोले। मैलासुर और दंतेषपुरम के ग्रामीणों की मांग पर मछली पालन को बढ़ावा देने के लिए तालाबों का चिन्हाँकन किया गया और ग्रामीणों को मछली बीज उपलब्ध कराने का निर्देश दिया गया। पानी की किल्लत को दूर करने के लिए दंतेषपुरम में एक नए डैम और तालाब निर्माण की बड़ी स्वीकृति दी गई, साथ ही क्रेड़ा विभाग को पानी टंकी बनाने के निर्देश दिए गए। मैलासुर और बोदराजपदर में पेयजल संकट को खत्म करने के लिए नए हैंडपंप और बोरिंग की तत्काल मंजूरी दी गई। पीएचई विभाग को स्पष्ट निर्देश दिए गए कि जिन गांवों में जल जीवन मिशन का काम पूरा हो चुका है, वहां बिना देरी किए तत्काल जलापूर्ति शुरू की जाए। जहाँ काम पूरा नहीं हुआ है वहां तेजी से कार्य पूरा कर ग्रामीणों को स्वच्छ पेयजल उपलब्ध कराया जाये। कलेक्टर अमित कुमार ने बताया कि दूरस्थ और पहुंचविहीन गांवों में 'सुशासन परिसर' और बुनियादी सुविधाओं का निर्माण वाकई प्रेरणादायी है। कलेक्टर ने कहा कि हमारा मुख्य उद्देश्य नक्सलवाद के प्रभाव से मुक्त हो चुके इन अंतिम छोर के गांवों तक विकास की रफ्तार पहुंचाना है। बारिश से पहले स्कूल, अस्पताल, सड़क, पुल-पुलिया और जल जीवन मिशन से जुड़े सभी निर्माण कार्यों को पूरी गुणवत्ता के साथ समयसीमा में पूरा किया जाएगा, ताकि हर ग्रामीण तक शासन की योजनाओं का सीधा लाभ पहुंच सके। सड़कों से जुड़ेंगे दिल और रास्ते, विकास की रफ्तार होगी तेज बस्तर के विकास में सबसे बड़ी बाधा रहे पहुंचविहीन रास्तों को अब पक्की सड़कों की मजबूती मिलने जा रही है। कलेक्टर ने बोदराजपदर, मैलासुर, दंतेशपुरम, गछनपल्ली और बुर्कलंका को मुख्य सड़कों से जोड़ने के लिए प्रधानमंत्री ग्राम सड़क योजना (पीएमजेएसवाई) का तत्काल प्रस्ताव तैयार कर आवश्यक कार्रवाई करने के कड़े निर्देश विभागीय अधिकारियों को दिए। आरईएस विभाग द्वारा डब्बाकोंटा में निर्माणाधीन आश्रम का भी मुआयना किया गया। मोटर साइकिल के पहियों से शुरू हुआ प्रशासन का यह सफर सुकमा के इन दूरस्थ अंचलों में विकास की नई इबारत लिख गया है, जो यह साबित करता है कि नक्सलवाद के खात्मे के बाद अब बस्तर की पहचान बंदूक से नहीं, बल्कि सुशासन और समृद्धि से हो रही है। केलक्टर के निरीक्षण के दौरान एसडीएम कोंटा सुभाष शुक्ला, जनपद सीईओ सुमित ध्रुव, एडिशनल एसपी मनोज तिर्की, कार्यपालन अभियंता पीएमजेएसवाई रविंद्र ताती, महिला एवं बाल विकास अधिकारी रितिश टंडन, बीएमओ डॉ. दीपेश चंद्राकर सहित अन्य जिलाधिकारी मौके पर उपस्थित थे।

भूजल संरक्षण की बड़ी पहल, गांव-गांव के कुएं और बोरवेल होंगे डिजिटल रिकॉर्ड में शामिल

दुर्ग. भीषण गर्मी और लगातार गिरते भूजल स्तर को देखते हुए जिले में अब गांवों के कुओं और बोरवेल की जल स्थिति का वैज्ञानिक सर्वे किया जाएगा। ग्रामीण विकास मंत्रालय के निर्देशानुसार जिले की सभी ग्राम पंचायतों में 25 मई से 15 जून तक “जलदूत” मोबाइल एप के माध्यम से विशेष प्री-मानसून भूजल सर्वे अभियान संचालित किया जाएगा। अभियान के तहत चयनित खुले कुओं एवं बोरवेल में उपलब्ध पानी की गहराई मापकर उसका डिजिटल डेटा ऑनलाइन एप में दर्ज किया जाएगा। जिला प्रशासन द्वारा तकनीकी अमले को निर्देशित किया गया है कि ग्राम पंचायतों में जलदूत एप के माध्यम से बोरवेल के वाटर लेवल की भी जांच सुनिश्चित की जाए। सर्वे के दौरान जलस्तर मापन प्रक्रिया पूरी तरह वैज्ञानिक तरीके से की जाएगी ताकि ग्रामीण क्षेत्रों में भूजल की वास्तविक स्थिति का सटीक आंकलन हो सके। इस अभियान का मुख्य उद्देश्य ग्रामीण क्षेत्रों में भूजल की उपलब्धता, जलस्तर में गिरावट और जल संकट की संभावित स्थिति का आकलन करना है। जलदूत एप के माध्यम से एकत्र किए गए आंकड़ों के आधार पर भविष्य में जल संरक्षण संरचनाओं की योजना, वर्षा जल संचयन कार्यों की प्राथमिकता तय करने तथा जल संकट वाले क्षेत्रों की पहचान करने में सहायता मिलेगी। अभियान के तहत वर्ष में दो बार डेटा संग्रह किया जाएगा। पहली बार बारिश पूर्व यानी प्री-मानसून अवधि में तथा दूसरी बार बारिश के बाद पोस्ट- मानसून अवधि में कुओं का जलस्तर मापा जाएगा। इससे वर्षा के बाद भूजल स्तर में हुए सुधार का तुलनात्मक अध्ययन भी संभव हो सकेगा। जिला प्रशासन ने सभी जनपद पंचायतों एवं ग्राम पंचायतों को अभियान की तैयारी समय पर पूर्ण करने के निर्देश दिए हैं। मापन अधिक वैज्ञानिक और एकरूप मुख्य कार्यपालन अधिकारी जिला पंचायत दुर्ग बजरंग कुमार दुबे ने बताया कि ग्रामीण विकास मंत्रालय द्वारा जारी गाइडलाइन के अनुसार इस बार भूजल स्तर मापन की प्रक्रिया को अधिक वैज्ञानिक और एकरूप बनाया गया है। सभी ग्राम पंचायतों को निर्देश दिए गए हैं कि कुओं की माप केवल मेजरिंग टेप के माध्यम से ही की जाए, ताकि आंकड़ों की शुद्धता और विश्वसनीयता बनी रहे। सर्वे में सूखे कुएं भी शामिल सीईओ जिला पंचायत ने बताया कि इस बार ऐसे सूखे कुएं, जिनमें पानी उपलब्ध नहीं है, उन्हें भी सर्वे में शामिल किया जाएगा। इन मामलों में जलस्तर के स्थान की कुल गहराई दर्ज की जाएगी। इसके लिए मंत्रालय ने प्री-मानसून 2026 पर कुएं सर्वे में “कुएं की कुल गहराई” नामक नया पैरामीटर जलदूत मोबाइल एप में जोड़ा है। इससे भूजल संरचना, जल उपलब्धता तथा जलस्तर में होने वाले बदलावों का अधिक विस्तृत विश्लेषण किया जा सकेगा।