samacharsecretary.com

सड़क सुरक्षा के साथ पर्यावरण पर जोर, ट्रैफिक कर्मियों को बांटी गई सेफ्टी जैकेट

रायपुर. ऑटोमोबाइल डीलर्स एसोसिएशन (RADA) द्वारा सामाजिक दायित्व (CSR) गतिविधि के अंतर्गत ट्रैफिक विभाग को रिफ्लेक्टिव सेफ्टी जैकेट वितरण कार्यक्रम का आयोजन ट्रैफिक थाना, कालीबाड़ी चौक में किया गया। कार्यक्रम में रायपुर कमिश्नर संजीव शुक्ल एवं राडा अध्यक्ष रविंदर भसीन द्वारा ट्रैफिक पुलिस कर्मियों को सेफ्टी जैकेट वितरित किए गए। इस अवसर पर राडा की ओर से अमर परवानी, मनीष राज सिंघानिया, शशांक शाह, विवेक गर्ग, कैलाश खेमानी, विवेक अग्रवाल, सूरज परवानी एवं अभिनव ऋषि उपस्थित रहे। इस अवसर पर राडा अध्यक्ष रविंदर भसीन ने कहा कि उन्हें रायपुर ट्रैफिक पुलिस पर गर्व है, जो भीषण गर्मी में भी 24X7 शहर की यातायात व्यवस्था को सुचारू रूप से संचालित करने में लगे रहते हैं। उन्होंने रायपुर कमिश्नर एवं ट्रैफिक विभाग को आश्वस्त किया कि सड़क सुरक्षा एवं जनहित के किसी भी कार्यक्रम में राडा हमेशा उनके साथ खड़ा रहेगा। कार्यक्रम के दौरान रायपुर कमिश्नर संजीव शुक्ला ने राडा से पर्यावरण संरक्षण को ध्यान में रखते हुए अधिक से अधिक वृक्षारोपण करने की अपील की। इस पर राडा के उपाध्यक्ष कैलाश खेमानी ने आश्वासन दिया कि वृक्षारोपण हेतु शासन से भूमि की मांग की जाएगी तथा हर वर्ष बड़े स्तर पर पौधारोपण किया जाएगा। साथ ही राडा द्वारा लगाए गए पौधों की पूरी देखरेख एवं संरक्षण की जिम्मेदारी भी निभाई जाएगी। यह कार्यक्रम सड़क सुरक्षा, सामाजिक जिम्मेदारी एवं पर्यावरण संरक्षण के प्रति राडा की प्रतिबद्धता को दर्शाता है।

बाइक पर सवार होकर नक्सलियों के गढ़ रहे गांवों में पहुंचे कलेक्टर-सीईओ

बदलते बस्तर की नई तस्वीर, बंदूक के साए से सुशासन की छांव तक बाइक पर सवार होकर नक्सलियों के गढ़ रहे गांवों में पहुंचे कलेक्टर-सीईओ पहुँचविहीन गांव मैलासुर, दंतेषपुरम, गछनपल्ली और बुर्कलंका में ग्रामीणों को दी सौगात स्कूल, अस्पताल, सड़क, पुल-पुलिया निर्माण की तत्काल स्वीकृति रायपुर बस्तर के सुदूर वनांचलों से डर और उपेक्षा का अंधेरा अब छंटने लगा है, और इसकी गवाह बनी सुकमा की वो तस्वीरें जहां जिले के मुखिया खुद दुर्गम रास्तों की परवाह किए बिना जनता के द्वार पहुंचे रहे हैं। कलेक्टर अमित कुमार और जिला सीईओ मुकुन्द ठाकुर ने कोंटा विकासखंड के धुर नक्सल प्रभावित रहे और पहुंचविहीन गांवों भेज्जी, मैलापुर, दंतेशपुरम, बुर्कलंका, गछनपल्ली, बोदराजपदर और डब्बाकोंटा का ऐतिहासिक दौरा किया। सालों से मुख्यधारा से कटे इन गांवों के उबड़-खाबड़ और पथरीले रास्तों पर जब अधिकारियों का काफिला मोटरसाइकिल पर सवार होकर निकला, तो यह सिर्फ एक निरीक्षण नहीं, बल्कि ग्रामीणों के मन में प्रशासनिक व्यवस्था के प्रति अटूट विश्वास जगाने का सफर बन गया। आजादी के बाद पहली बार किसी कलेक्टर को अपने बीच पाकर ग्रामीणों के चेहरे खुशी से खिल उठे। चौपाल पर संवाद और श्सुशासन परिसरश् की सराहना अधिकारियों ने बुर्कलंका में बन रहे श्सुशासन परिसरश् का बारीकी से निरीक्षण किया। कलेक्टर अमित कुमार ने दुर्गम घने जंगलों के बीच बसे इस गांव में बने परिसर की मुक्तकंठ से सराहना करते हुए इसे प्रेरणादायी बताया। इस बहुद्देशीय परिसर में एक ही बाउंड्रीवाल के भीतर स्कूल, आंगनबाड़ी, पंचायत भवन, पीडीएस सेंटर और सामुदायिक भवन को समेटा गया है, जो ग्रामीणों को एक ही छत के नीचे सारी मूलभूत सुविधाएं देने का बेहतरीन मॉडल है। सुशासन शिविर के दौरान मैलासुर पंचायत में अधिकारियों ने जमीन पर बैठकर सरपंच, पटेल, मुखिया और ग्रामीणों से सीधा संवाद किया, सरकारी योजनाओं की जमीनी हकीकत जानी और निर्माणाधीन कार्यों को समय पर पूरा करने का संकल्प दोहराया। स्वास्थ्य और शिक्षा के क्षेत्र में बड़ी सौगातें प्रशासन का सबसे बड़ा फोकस ग्रामीणों की सेहत और बच्चों की शिक्षा पर रहा। कलेक्टर ने संवेदनशील पहल करते हुए भेज्जी पंचायत में उप स्वास्थ्य केंद्र की प्रशासकीय स्वीकृति दी गई, जबकि मैलासुर में इसके लिए तत्काल जगह चिन्हित करने के निर्देश दिए। गछनपाल्ली में स्वास्थ्य कर्मियों के रहने के लिए स्टाफ क्वार्टर को मंजूरी दी गई, ताकि चौबीसों घंटे इलाज की सुविधा मिल सके। शिक्षा की लौ को मजबूत करने के लिए दंतेषपुरम में निर्माणाधीन प्राथमिक शाला भवन को बारिश के मौसम से पहले हर हाल में पूरा करने का निर्देश शिक्षा विभाग को दिया गया, साथ ही अंदरूनी इलाकों के स्कूलों में शिक्षकों की उपस्थिति को लेकर सख्त रुख अपनाया गया। पेयजल, आजीविका और कृषि को मिला नया जीवन गांवों में खुशहाली और आत्मनिर्भरता लाने के लिए कलेक्टर ने आजीविका के नए द्वार खोले। मैलासुर और दंतेषपुरम के ग्रामीणों की मांग पर मछली पालन को बढ़ावा देने के लिए तालाबों का चिन्हाँकन किया गया और ग्रामीणों को मछली बीज उपलब्ध कराने का निर्देश दिया गया। पानी की किल्लत को दूर करने के लिए दंतेषपुरम में एक नए डैम और तालाब निर्माण की बड़ी स्वीकृति दी गई, साथ ही क्रेड़ा विभाग को पानी टंकी बनाने के निर्देश दिए गए। मैलासुर और बोदराजपदर में पेयजल संकट को खत्म करने के लिए नए हैंडपंप और बोरिंग की तत्काल मंजूरी दी गई। पीएचई विभाग को स्पष्ट निर्देश दिए गए कि जिन गांवों में जल जीवन मिशन का काम पूरा हो चुका है, वहां बिना देरी किए तत्काल जलापूर्ति शुरू की जाए। और जहाँ काम पूरा नहीं हुआ है वहां तेजी से कार्य पूरा कर ग्रामीणों को स्वच्छ पेयजल उपलब्ध कराया जाये।  कलेक्टर अमित कुमार ने बताया कि दूरस्थ और पहुंचविहीन गांवों में श्सुशासन परिसरश् और बुनियादी सुविधाओं का निर्माण वाकई प्रेरणादायी है। कलेक्टर ने कहा कि हमारा मुख्य उद्देश्य नक्सलवाद के प्रभाव से मुक्त हो चुके इन अंतिम छोर के गांवों तक विकास की रफ्तार पहुंचाना है। बारिश से पहले स्कूल, अस्पताल, सड़क, पुल-पुलिया और जल जीवन मिशन से जुड़े सभी निर्माण कार्यों को पूरी गुणवत्ता के साथ समयसीमा में पूरा किया जाएगा, ताकि हर ग्रामीण तक शासन की योजनाओं का सीधा लाभ पहुंच सके। सड़कों से जुड़ेंगे दिल और रास्ते, विकास की रफ्तार होगी तेज बस्तर के विकास में सबसे बड़ी बाधा रहे पहुंचविहीन रास्तों को अब पक्की सड़कों की मजबूती मिलने जा रही है। कलेक्टर ने बोदराजपदर, मैलासुर, दंतेशपुरम, गछनपल्ली और बुर्कलंका को मुख्य सड़कों से जोड़ने के लिए प्रधानमंत्री ग्राम सड़क योजना (पीएमजेएसवाई) का तत्काल प्रस्ताव तैयार कर आवश्यक कार्रवाई करने के कड़े निर्देश विभागीय अधिकारीयांे को दिए। आरईएस विभाग द्वारा डब्बाकोंटा में निर्माणाधीन आश्रम का भी मुआयना किया गया। मोटरसाइकिल के पहियों से शुरू हुआ प्रशासन का यह सफर सुकमा के इन दूरस्थ अंचलों में विकास की नई इबारत लिख गया है, जो यह साबित करता है कि नक्सलवाद के खात्मे के बाद अब बस्तर की पहचान बंदूक से नहीं, बल्कि सुशासन और समृद्धि से हो रही है। केलक्टर के निरीक्षण के दौरान एसडीएम कोंटा सुभाष शुक्ला, जनपद सीईओ सुमित ध्रुव, एडिशनल एसपी मनोज तिर्की, कार्यपालन अभियंता पीएमजेएसवाई रविंद्र ताती, महिला एवं बाल विकास अधिकारी रितिश टंडन, बीएमओ डॉ. दीपेश चंद्राकर सहित अन्य जिलाधिकारी मौके पर उपस्थित थे।

परंपरागत फसलों के स्थान पर उद्यानकी और नकद फसलों पर दे रहे हैं जोर

जशपुर के किसान खेती में बना रहे हैं अलग पहचान परंपरागत फसलों के स्थान पर उद्यानकी और नकद फसलों पर दे रहे हैं जोर चाय, नाशपाती, लीची, स्ट्रॉबेरी के बाद अब सेब की खेती में आजमा रहे हैं हाथ रायपुर जशपुर हमेशा फसल विविधताओं के लिए जाना जाता रहा है। यहां के किसान परंपरागत फसलों के साथ उद्यानकी और नकद फसलों पर भी जोर दे रहे हैं। मुख्यमंत्री श्री विष्णुदेव साय जशपुर में उद्यानिकी फसलों के लिए अनुकूल वातावरण को देखते हुए किसानों को उद्यानिकी और नगद फसलों के लिए लगातार  प्रोत्साहित कर रहे हैं। मुख्यमंत्री श्री साय के निर्देश पर स्थानीय जिला प्रशासन, नाबार्ड और उद्यानिकी  विभाग द्वारा इस दिशा में विशेष प्रयास किया जा रहा है। किसानों  को उद्यानिकी फसलों के लिए विशेष प्रशिक्षण और तकनीकी मार्गदर्शन उपलब्ध कराया जा रहा है। इन समन्वित प्रयासों से पिछले दो-ढाई सालों में यहाँ के किसान परंपरागत फसलों के स्थान पर उद्यानिकी एवं नगदी फसलों में रुचि लेने लगे हैं। जशपुर के किसान अब चाय, लीची, स्ट्राबेरी, नाशपाती के साथ सेब के बगान भी तैयार कर रहे हैं। जिला प्रशासन, उद्यानिकी विभाग, रूरल एजुकेशन एंड डेवलपमेंट सोसाइटी (त्म्।क्ै) व नाबार्ड के समन्वित प्रयासों से जशपुर ने फलोत्पादन व बागवानी में नई पहचान बनाई है। इन पहलों से स्थानीय किसानों की आय सुदृढ़ हुई है। कृषि-आधारित अर्थव्यवस्था को मजबूती मिली है।  जशपुर में सेब उत्पादन वर्ष 2023 में आरंभ हुआ। सेब खेती अब लगभग 410 एकड़ में विस्तारित है, जिसमें लगभग 410 किसान सेब की खेती कर रहे हैं। जिले के मनोर व बगीचा विकासखंड तथा शैला, छतौरी, करदना व छिछली जैसे पंचायतों में लगाए गए सेब के वृक्षों ने इस वर्ष उत्कृष्ट गुणवत्ता व आकार के फल दिए हैं। । स्थानीय किसान बताते हैं कि जशपुर के सेब स्वाद और गुणवत्ता के लिहाज से कश्मीर व हिमाचल के सेबों के समकक्ष हैं। रूरल डेव्हलपमेंट एंड डेव्हलपमेंट सोसायटी के अध्यक्ष श्री राजेश गुप्ता ने बताया कि जशपुर जिले के 410 किसानों ने अपने 1-1 एकड़ जमीन पर सेब की खेती कर रहे हैं।  इसी तरह जिले में नाशपाती के बाग लगभग 3,500 एकड़ में फैले हुए हैं, जहाँ 3,500 से अधिक किसान नाशपाती की खेती कर रहे हैं। जिले के सन्ना, पंडरापाठ, कंवई, महुआ, सोनक्यारी, मनोरा, धवईपाई, गीधा आदि लाखों में नाशपाती की खेती हो रही है। यहीं से नाशपाती पैक कर दिल्ली, उत्तरप्रदेश और उड़ीसा सहित दूसरे राज्यों में भेजी जाती है। नाशपाती का वार्षिक उत्पादन लगभग 1,75,000 क्विंटल तक पहुँच चुका है। किसानों को नाशपाती से प्रति एकड़ वार्षिक आमदनी लगभग एक से डेढ़ लाख रुपये मिल रहा है। उद्यान विभाग के अधिकारियों के अनुसार राष्ट्रीय बागवानी मिशन के अंतर्गत प्रशिक्षण, तकनीकी सहयोग और बाजार पहुँच जैसी योजनाएँ हैं, जिनसे किसान आत्मनिर्भर बने हैं और नई फसल विविधिकरण के माध्यम से आर्थिक सशक्तिकरण प्राप्त कर रहे हैं। जशपुर में चाय की खेती पहले से होती आ रही है और यहां की चाय पत्ती की गुणवत्ता अच्छी है। अब जशपुर में सेब व नाशपाती उत्पादन के सफल विकास से जशपुर न केवल नए बाजारों के रूप में स्थापित हुआ है बल्कि स्थानीय किसानों के जीवन स्तर में भी उल्लेखनीय सुधार आया है। भविष्य में इन फसलों का दायरा और विस्तारित करने की योजना है।

कांग्रेस की अंदरूनी लड़ाई पर खुशवंत साहेब का तंज, ‘जनसेवा नहीं, जेब सेवा चाहिए’

रायपुर. कांग्रेस प्रदेश अध्यक्ष को लेकर टीएस सिंहदेव और दीपक बैज में ठन गई है. इस पर दोनों के बीच चल रही बयानबाजी पर खुशवंत साहेब ने तंज कसते हुए कहा कि कांग्रेस में कई गुट हैं. टीएस सिंहदेव गुट, दीपक बैज गुट, भूपेश गुट ना जाने और इनके कितने गुट सामने आएंगे कांग्रेस में. लगातार गुटबाजी चल रही है. जब चुनाव होता है, तब कांग्रेस में कुर्सी तोड़ कार्यक्रम चलता है. ये सिर्फ भ्रष्टाचार जानते हैं. खुशवंत साहेब ने कहा कि कांग्रेस हमेशा परिवारवाद की पार्टी रही है. ये अपने परिवार को ही नहीं संभाल पा रहे और देश संभालने की बात करते हैं. भारत जोड़ने की बात करते हैं, पहले अपनी पार्टी को तो जोड़ लें. आपस में युद्ध कर रहे हैं. इससे पता चलता है कि इनके पास कोई विचारधारा, कोई सोच नहीं है. जेब भरने और भ्रष्टाचार करने के लिए सरकार में आना चाहते हैं. सीएम के दिल्ली दौरे पर मंत्री खुशवंत साहेब ने कहा कि मुख्यमंत्री विष्णुदेव साय दिल्ली विकास और उन्नति के लिए जाते हैं. पीएम मोदी और गृहमंत्री अमित शाह से मुलाकात करते हैं. छत्तीसगढ़ के लिए सौगात लेकर आते हैं. कांग्रेस पहले खुद को संभाल ले. केंद्र सरकार के 12 साल पूरे होने पर बीजेपी के घर-घर संपर्क अभियान चलाए जाने पर मंत्री खुशवंत साहेब ने कहा कि हमारा तो सुशासन तिहार चारों तरफ चल रहा है. जन चौपाल लगाकर सीधे जनता से बात कर रहे हैं. जनता खुश है. वहीं कांग्रेस के पिटाई वाले बयान पर उन्होंने कहा कि जनता उन्हें पहले ही पिट चुकी है. 2023 और 2024 के चुनाव में भी पिट चुके हैं. आने वाले 2028 के चुनाव में भी जनता इन्हें कूटेगी-पिटेगी. इनके कार्यकर्ता और नेता ही एक-दूसरे को पिट रहे हैं. पेट्रोल-डीजल के दामों में वृद्धि पर खुशवंत साहेब ने कहा कि दूसरे देशों से तुलना करें, वहां कीमतें कैसे बढ़ रही हैं, और भारत में कीमत कितनी बढ़ रही हैं. पीएम मोदी चाहते हैं कि जनता को ज्यादा दिक्कत न हो, इसलिए ज्यादा दाम नहीं बढ़ रहे. कांग्रेस को समझना चाहिए कि युद्ध की स्थिति के कारण समस्याएं आ रही हैं. पढ़े-लिखे हैं, तो समझना चाहिए. भाजपा प्रशिक्षण शिविर को लेकर कैबिनेट मंत्री गुरु खुशवंत साहेब ने कहा कि भाजपा एक विचारधारा पर चलने वाली पार्टी है, अनेकों प्रकार के संगठनात्मक कार्य चलते रहते हैं. आज जिला प्रशिक्षण शिविर चल रहा है. प्रत्येक जिले में प्रशिक्षण शिविर लग रहा. कार्यकर्ताओं का प्रशिक्षण होगा, उन्हें जानकारी मिलेगी.

आजीवन कारावास के बाद ग्रामीण कृषि विस्तार अधिकारी पर गिरी गाज, सेवा से बर्खास्त

दुर्ग. विशेष न्यायालय (एससी/एसटी अत्याचार निवारण अधिनियम) रायपुर द्वारा गंभीर आपराधिक प्रकरण में आजीवन कारावास की सजा सुनाए जाने के बाद कड़ा रुख अपनाते हुए संभागीय संयुक्त संचालक कृषि, संभाग- दुर्ग श्रीमती गोपिका गभेल ने त्वरित शासकीय प्रक्रिया के तहत गंभीर कदाचरण के दोषी ग्रामीण कृषि विस्तार अधिकारी देवनारायण साहू को तत्काल प्रभाव से शासकीय सेवा से पदच्युत (बर्खास्त कर दिया गया है। शासन के नियमों के तहत नौकरी से निष्कासित किए जाने के बाद अब वे भविष्य में किसी भी शासकीय नियोजन (सरकारी नौकरी) के लिए पूरी तरह से अयोग्य होंगे। इसके साथ ही, दोषसिद्धि की तिथि से उन्हें किसी भी प्रकार के शासकीय सेवा परिलाभों की पात्रता नहीं होगी। ज्ञात हो कि विकासखण्ड मानपुर, जिला मोहला- मानपुर – अं. चौकी के क्षेत्र सीतागांव में पदस्थ रहे ग्रामीण कृषि विस्तार अधिकारी देवनारायण साहू, पिता रोहित साहू के विरुद्ध नगर पुलिस अधीक्षक माना, जिला रायपुर द्वारा भारतीय न्याय संहिता, 2023 एवं अनुसूचित जाति एवं अनुसूचित जनजाति (अत्याचार निवारण) अधिनियम, 1989 की विभिन्न संगीन धाराओं के तहत प्रकरण दर्ज कर 08 जनवरी 2026 को गिरफ्तार किया गया था। इस हेतु उन्हें पूर्व में उप संचालक कृषि, जिला मोहला मानपुर- अं. चौकी द्वारा तत्काल प्रभाव से निलंबित भी किया गया था। इस गंभीर आपराधिक मामले में अंतिम फैसला सुनाते हुए विशेष न्यायाधीश, एससी/एसटी एक्ट रायपुर द्वारा 02 मई 2026 को देवनारायण साहू को भारतीय न्याय संहिता की धारा 64 (2) (ड), धारा 69 और एससी/एसटी अधिनियम की धारा 3 (2) (ट) के तहत दोषी पाते हुए क्रमशः 10-10 वर्ष के कठोर कारावास तथा एससी/एसटी एक्ट के तहत आजीवन कारावास सहित अर्थदंड से दंडित किया गया है।

अंतर्राष्ट्रीय जैव विविधता दिवस पर कोपरा जलाशय में जागरूकता कार्यक्रम, संरक्षण का दिया संदेश

अंतर्राष्ट्रीय जैव विविधता दिवस पर कोपरा जलाशय में जागरूकता कार्यक्रम स्वच्छता अभियान, बर्ड वॉक और सीड बॉल निर्माण से दिया पर्यावरण संरक्षण का संदेश रायपुर अंतर्राष्ट्रीय जैव विविधता दिवस के अवसर पर कोपरा रिजर्वायर परिसर में पर्यावरण संरक्षण एवं जैव विविधता संवर्धन को लेकर जनजागरण कार्यक्रम आयोजन किया गया। कार्यक्रम का उद्देश्य जैव विविधता के महत्व के प्रति जागरूकता बढ़ाना और प्रकृति संरक्षण के लिए सामूहिक सहभागिता को प्रोत्साहित करना था।         आयोजकों ने कहा कि जैव विविधता का संरक्षण केवल सरकारी प्रयासों से संभव नहीं है। इसके लिए समाज के प्रत्येक व्यक्ति की सक्रिय भागीदारी आवश्यक है। स्वच्छता से हुई शुरुआत             कार्यक्रम की शुरुआत क्लीनलीनेस ड्राइव से हुई। नागरिकों, स्वयंसेवकों और पर्यावरण प्रेमियों ने जलाशय परिसर में स्वच्छता अभियान चलाकर पर्यावरण संरक्षण का संदेश दिया। प्रतिभागियों ने स्वच्छ और हरित वातावरण बनाए रखने का संकल्प लिया। बर्ड वॉक में पक्षियों का अवलोकन              इसके बाद आयोजित बर्ड वॉक में प्रतिभागियों ने क्षेत्र में पाए जाने वाले विभिन्न पक्षियों का अवलोकन किया। विशेषज्ञों ने बताया कि प्राकृतिक संतुलन बनाए रखने में पक्षियों की अहम भूमिका है। उन्होंने पक्षियों और जैव विविधता के पारस्परिक संबंधों की जानकारी दी। सीड बॉल निर्माण बना आकर्षण             वृक्षारोपण और हरित आवरण बढ़ाने के उद्देश्य से आयोजित सीड बॉल निर्माण गतिविधि आकर्षण का केंद्र रही। प्रतिभागियों ने उत्साहपूर्वक सीड बॉल तैयार किए। यह पहल वन क्षेत्र विस्तार और पर्यावरण संरक्षण की दिशा में महत्वपूर्ण कदम है। हस्ताक्षर अभियान से जताई प्रतिबद्धता             जैव विविधता संरक्षण, प्रकृति संवर्धन और वन्यजीव सुरक्षा के प्रति उपस्थित लोगों ने हस्ताक्षर अभियान के माध्यम से   अपनी प्रतिबद्धता जताई। सभी ने पर्यावरण बचाने और भावी पीढ़ियों के लिए प्राकृतिक संसाधनों को सुरक्षित रखने का संकल्प लिया।            कार्यक्रम में सामाजिक संगठनों, विद्यार्थियों, नागरिकों और प्रकृति प्रेमियों ने उत्साहपूर्वक भाग लिया।कार्यक्रम का समापन पर्यावरण संरक्षण, जैव विविधता संवर्धन और सतत विकास के संदेश के साथ हुआ।

रेलवे मेंटेनेंस का असर, गोंदिया यार्ड में काम के चलते 6 लोकल ट्रेनें बंद

राजनांदगांव. दो दिनों से आधा दर्जन से अधिक लोकल ट्रेनों के नहीं चलने के कारण यात्रियों की परेशानियां बढ़ रहीं। विशेष रूप से दैनिक यात्री काफी अधिक परेशान हो रहे हैं। गोंदिया रेलवे स्टेशन में मेंटेनेंस का कार्य चल रहा है। ज्ञात हो कि दक्षिण पूर्व मध्य रेलवे के नागपुर मंडल अंतर्गत आने वाले गोंदिया यार्ड में अधोसंरचना के मद्देनजर निर्माण कार्य किए। मेंटेनेंस कार्य के चलते 21 एवं 22 मई को विशेष ट्रैफिक एवं इंजीनियरिंग ब्लॉक लिया गया। इस कार्य के कारण आधा दर्जन से अधिक लोकल ट्रेन में रद्द रहीं, जिससे यात्रियों की दो दिनों से परेशानियां बढ़ी रहीं। रेलवे सूत्रों से मिली जानकारी के मुताबिक, निर्धारित कार्यक्रम के अनुसार दोनों दिनों में कुल 08 घंटे 30 मिनट का ब्लॉक लिया। इसमें इंजीनियरिंग विभाग द्वारा स्विच नवीनीकरण एवं पॉइंट सेटिंग सहित आवश्यक कार्य हेतु 06 घंटे का ब्लॉक रखा गया। इसके उपरांत सिग्नल एवं दूरसंचार विभाग द्वारा वायरिंग डिस्कनेक्शन, परीक्षण एवं संबंधित तकनीकी कार्यों के लिए 02 घंटे का ब्लॉक लिया। साथ ही विद्युत विभाग द्वारा ओएचई परीक्षण हेतु अतिरिक्त 30 मिनट का ब्लॉक लिया। निर्माण कार्य के चलते गाड़ी संख्या 68817 गोंदिया- गढ़ा मेमू पैसेंजर, 21 एवं 22 मई को रद्द रही। गाड़ी संख्या 68818 गढ़ा-गोंदिया मेमू पैसेंजर, 21 एवं 22 मई को रद्द रही. गाड़ी संख्या 68861गोंदिया-झारसुगुड़ा मेमू पैसेंजर, 21 एवं 22 मई को रद्द रही। गाड़ी संख्या 68862 झारसुगुड़ा- गोंदिया मेमू पैसेंजर, 22 एवं 23 मई को 68721 रद्द है। गाड़ी संख्या रायपुर – डोंगरगढ़ मेमू पैसेंजर, 21 मई को रद्द रही. गाड़ी संख्या 68723 डोंगरगढ़-गोंदिया मेमू पैसेंजर, 21 मई को रद्द रही. गाड़ी संख्या 68724 गोंदिया-दुर्ग मेमू पैसेंजर, 22 मई को रद्द रही। दो दिनों से लोकल ट्रेनों के नहीं चलने से यात्री परेशान रहे।

सहकार से समृद्धि की नई राह, नवा रायपुर में छह राज्यों की क्षेत्रीय सहकारिता कार्यशाला संपन्न

सहकार से समृद्धि की ओर: नवा रायपुर में छह राज्यों की क्षेत्रीय सहकारिता कार्यशाला संपन्न डेयरी, मत्स्य और बहुउद्देशीय पैक्स को सशक्त बनाने पर मंथन, अनाज भंडारण योजना की प्रगति की समीक्षा रायपुर प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की “सहकार से समृद्धि” की संकल्पना को धरातल पर उतारने के लिए केंद्रीय सहकारिता मंत्रालय द्वारा नवा रायपुर में पूर्वी क्षेत्र के छह राज्यों की एक दिवसीय क्षेत्रीय कार्यशाला आयोजित की गई। यह कार्यशाला सहकारिता मंत्रालय, भारत सरकार और नेशनल डेयरी डेवलपमेंट बोर्ड के संयुक्त तत्वावधान में संपन्न हुई। सचिव डॉ. भूटानी ने की अध्यक्षता             कार्यशाला की अध्यक्षता केन्द्रीय सहकारिता मंत्रालय के सचिव डॉ. आशीष कुमार भूटानी ने की। इसमें सहकारिता क्षेत्र को आधुनिक, आत्मनिर्भर और रोजगारोन्मुख बनाने पर विस्तृत चर्चा हुई। बिहार, छत्तीसगढ़, मध्यप्रदेश, झारखंड, ओडिशा और पश्चिम बंगाल के वरिष्ठ अधिकारी कार्यशाला में शामिल हुए।           यह कार्यशाला ग्रामीण विकास, किसानों की आय वृद्धि और सहकारी संस्थाओं को सशक्त बनाने की दिशा में महत्वपूर्ण पहल मानी जा रही है। सहकारिता आधारित योजनाओं से गांवों में आर्थिक गतिविधियों को बढ़ावा मिलेगा तथा किसान, पशुपालक और मत्स्य पालक आत्मनिर्भर बनेंगे। केंद्रीय योजनाओं की हुई समीक्षा            बैठक में केंद्रीय सहकारिता मंत्री अमित शाह की पहल पर संचालित योजनाओं की प्रगति की समीक्षा की गई। सहकारी संस्थाओं को ग्रामीण अर्थव्यवस्था का मजबूत आधार बनाने की रणनीति पर विचार-विमर्श हुआ। पैक्स को बहुउद्देशीय बनाने पर जोर               डेयरी, मत्स्य एवं बहुउद्देशीय प्राथमिक कृषि साख सहकारी समितियों (पैक्स) के गठन और सुदृढ़ीकरण पर विशेष जोर दिया गया। देशभर में 2 लाख नई डेयरी, मत्स्य एवं बहुउद्देशीय पैक्स समितियों के गठन की दिशा में हो रही प्रगति की समीक्षा की गई। साथ ही विश्व की सबसे बड़ी सहकारी अनाज भंडारण योजना के क्रियान्वयन पर भी विस्तार से चर्चा हुई।             विशेषज्ञों ने बताया कि पैक्स समितियों को केवल ऋण वितरण तक सीमित न रखकर बहुउद्देशीय ग्रामीण सेवा केंद्र के रूप में विकसित किया जा रहा है। इसके तहत खाद-बीज वितरण, धान खरीदी, सार्वजनिक वितरण प्रणाली, डेयरी, मत्स्य पालन, वेयरहाउसिंग और ग्रामीण उद्यमिता जैसी गतिविधियों को बढ़ावा दिया जा रहा है। इससे किसानों और ग्रामीणों को गांव स्तर पर ही बेहतर सुविधाएं और रोजगार के अवसर मिलेंगे। व्यवसायिक विस्तार पर मंथन                कार्यशाला में पैक्स समितियों के बिजनेस डायवर्सिफिकेशन यानी व्यवसायिक विस्तार पर सार्थक चर्चा हुई। अधिकारियों ने पैक्स समितियों को आर्थिक रूप से मजबूत और आत्मनिर्भर बनाने पर गहन मंथन किया, ताकि ग्रामीण अर्थव्यवस्था को नई गति मिल सके।             कार्यक्रम में केन्द्रीय सहकारिता मंत्रालय के अपर सचिव सिद्धार्थ जैन, संयुक्त सचिव रमन कुमार, छत्तीसगढ़ शासन के सचिव सहकारिता डॉ. सी. आर. प्रसन्ना, आयुक्त सहकारिता एवं पंजीयक महादेव कावरे, एनडीडीबी आनंद, गुजरात के डॉ. वी. श्रीधर एवं सीनियर मैनेजर ऋषिकेश कुमार उपस्थित रहे। इसके अलावा अपर पंजीयक श्रीमती सावित्री भगत, संयुक्त पंजीयक यू.बी.एस. राठिया, नाबार्ड के मुख्य महाप्रबंधक डी.के. गवली, डीजीएम ध्रुप राज सिंह, सहायक प्रबंधक मयूर चव्हाण, अपेक्स बैंक के महाप्रबंधक युगल किशोर, मार्कफेड के महाप्रबंधक दिलीप जायसवाल, अपेक्स बैंक के डीजीएम भूपेश चंद्रवंशी, एजीएम अरुण पुरोहित, एल.के. चौधरी तथा प्रबंधक अभिषेक तिवारी सहित सहकारिता, नाबार्ड, भारतीय खाद्य निगम, नाफेड, वेयरहाउसिंग, डेयरी एवं मत्स्य विभाग के वरिष्ठ अधिकारी शामिल हुए।

रेवाडीह जंगल में पेड़ों का कत्लेआम! 116 एकड़ में रातभर गूंजती रहीं कुल्हाड़ियां

छुईखदान/ राजनांदगांव. छुईखदान के रेवाडीह जंगल मे इन दिनो हरियाली नही बल्कि कुल्हाड़ियो और कटर मशीनो की आवाज गूंज रही है क्षेत्र के फेफड़े कहे जाने वाले इस घने जंगल के बीचो बीच बड़े पैमाने पर पेड़ो की कटाई ने पूरे इलाके में सनसनी फैला दी है। स्थानीय सूत्रो की माने तो लगभग 116 एकड़ निजी भूमि की आड़ लेकर सैकड़ो हरे भरे और उखाड़ा जा रहा है। हैरान करने वाली बात यह है कि जिस जगह पर इतनी बड़ी संख्या मे पेड़ो की कटाई की जा रही है वहा अब तक किसी भी प्रकार की विभागीय अनुमति या ट्रांजिट परमिट टीपी जारी होने की पुष्टि नही हुई है यही वजह है कि अब यह मामला केवल अवैध कटाई तक सीमित नही रहा बल्कि पूरे प्रशासनिक तंत्र की कार्यप्रणाली पर सवाल खड़े कर रहा है। सीमांकन के तुरंत बाद शुरू हुआ जंगल सफाया जानकारी के मुताबिक कुछ दिन पहले ही राजस्व विभाग द्वारा इस इलाके मे सीमांकन की कार्रवाई पूरी की गई थी सीमांकन खत्म होते ही जंगल के भीतर अचानक भारी मशीने और मजदूर सक्रिय इसके बाद साजा बीजा तीनसा बांस हो गए और भीरा जैसे कीमती एवं संरक्षित पेड़ो की अंधाधुंध कटाई शुरू हो गई ग्रामीणो का कहना है कि जिस तेजी से जंगल उजाड़ा जा रहा है उससे पूरा क्षेत्र धूल और वीरानी मे बदलता जा रहा है। वन अमले को जानकारी फिर भी कार्रवाई नही सूत्र बताते है कि स्थानीय वन अमले को पूरे घटनाक्रम की जानकारी है मैदानी कर्मचारियो यानी बीट गार्डो ने भी इस मामले की सूचना अपने उच्च अधिकारियो तक पहुंचाने की बात कही है बावजूद इसके अब तक मौके पर न तो कोई बड़ी जांच टीम पहुंची और न ही कटाई रोकने की ठोस कार्रवाई दिखाई दी वही जमीन से जुड़े रिकॉर्ड और सीमांकन प्रक्रिया के अहम किरदार हल्का पटवारी भी पूरे मामले पर खुलकर कुछ बोलने से बचते नजर आए ऐसे में सवाल उठ रहा है कि आखिर इतनी बड़ी कटाई किसके संरक्षण मे चल रही है प्रशासन की चुप्पी से बढ़ा संदेह । ग्रामीणो और पर्यावरण प्रेमियो का आरोप है कि यदि समय रहते कार्रवाई नही हुई तो आने वाले दिनो मे पूरा इलाका बंजर होने की कगार पर पहुंच जाएगा जंगल खत्म होने से वन्यजीवो के अस्तित्व पर भी खतरा मंडराने लगा है। नहीं ली गई कोई अनुमति इस परे मामले में एसडीएम अविनाश ठाकुर ने कहा कि खमारडीही जंगल में हो रही पेड़ कटाई की जानकारी मिलते ही जांच के लिए आरआई पटवारी और वन विभाग की टीम भेजी गई है जांच में जो तथ्य सामने आएंगे उनके आधार पर नियमानुसार कार्रवाई की जाएगी उन्होने यह भी स्पष्ट किया कि जिस स्थान पर बड़े पैमाने पर कटाई हो रही है वहा किसी भी प्रकार की विभागीय अनुमति नही ली गई। है । अब सबसे बड़ा सवाल यही है। यदि अनुमति नही ली गई तो आखिर जंगल में यह हरा कत्लेआम किसके इशारे पर चल रहा है।

पेट्रोल-डीजल कीमतों ने बढ़ाई टेंशन, पंजाब में तीसरी बार बढ़े दाम

लुधियाना. पेट्रोल और डीजल की बढ़ती कीमतों ने आम लोगों की चिंता और बढ़ा दी है। तेल कंपनियों की ओर से नौ दिनों के भीतर तीसरी बार ईंधन के दाम बढ़ाए गए हैं। लगातार हो रही इस बढ़ोतरी का असर अब सीधे तौर पर आम आदमी की जेब पर दिखाई देने लगा है। निजी वाहन चलाने वालों से लेकर ऑटो, टैक्सी और ट्रांसपोर्ट कारोबार से जुड़े लोगों तक सभी पर इसका अतिरिक्त आर्थिक बोझ पड़ रहा है। शुक्रवार को जारी नई दरों के अनुसार पेट्रोल की कीमत 102.16 रुपये प्रति लीटर से बढ़कर 103.01 रुपये प्रति लीटर पहुंच गई है। वहीं डीजल का रेट 91.93 रुपये प्रति लीटर से बढ़ाकर 92.83 रुपये प्रति लीटर कर दिया गया है। इससे पहले 15 मई को पेट्रोल और डीजल की कीमतों में करीब तीन रुपये प्रति लीटर की बड़ी बढ़ोतरी की गई थी। इसके बाद 19 मई को 86 पैसे प्रति लीटर और अब 23 मई को फिर करीब 85 पैसे प्रति लीटर की वृद्धि की गई है। घरेलू बजट प्रभावित होने लगा लगातार बढ़ रही कीमतों से लोगों का घरेलू बजट प्रभावित होने लगा है। रोजाना निजी वाहन से काम पर जाने वाले लोगों को अब पहले की तुलना में अधिक खर्च करना पड़ रहा है। वहीं ऑटो और टैक्सी चालकों का कहना है कि ईंधन महंगा होने से उनकी आमदनी पर असर पड़ रहा है। कई चालकों का कहना है कि किराया बढ़ाए बिना खर्च निकालना मुश्किल होता जा रहा है। ट्रांसपोर्ट कारोबार से जुड़े लोगों ने भी चिंता जताई है। उनका कहना है कि डीजल की कीमत बढ़ने से माल ढुलाई की लागत बढ़ेगी। इसका असर आने वाले दिनों में बाजार में बिकने वाली रोजमर्रा की वस्तुओं पर भी दिखाई दे सकता है। उद्योगों को कच्चा माल और तैयार सामान पहुंचाने में अतिरिक्त खर्च आएगा, जिसका असर आम उपभोक्ताओं तक पहुंचेगा। ग्राहकों की बढ़ी चिंता कुबेर पेट्रो के राजू शर्मा ने बताया कि तेल कंपनियों की ओर से जारी नई दरों को तुरंत प्रभाव से लागू कर दिया गया है। उन्होंने कहा कि लगातार तीसरी बार हुई बढ़ोतरी से ग्राहकों में चिंता बढ़ी है। पेट्रोल पंपों पर आने वाले लोग लगातार दाम बढ़ने को लेकर सवाल कर रहे हैं और इसे आम जनता पर अतिरिक्त बोझ बता रहे हैं। विशेषज्ञों का मानना है कि यदि आने वाले दिनों में भी ईंधन की कीमतों में इसी तरह बढ़ोतरी जारी रही तो महंगाई और बढ़ सकती है। परिवहन खर्च बढ़ने से खाद्य सामग्री, निर्माण सामग्री और अन्य जरूरी वस्तुओं की कीमतों पर भी असर पड़ने की संभावना जताई जा रही है।