samacharsecretary.com

रायपुर : प्रदेश में अब तक 655.6 मि.मी. औसत वर्षा दर्ज

 रायपुर,  छत्तीसगढ़ में 1 जून से अब तक 655.6 मि.मी. औसत वर्षा रिकार्ड की जा चुकी है। राजस्व एवं आपदा प्रबंधन विभाग द्वारा स्थापित राज्य स्तरीय बाढ़ नियंत्रण कक्ष से प्राप्त जानकारी के अनुसार प्रदेश में अब तक बलरामपुर जिले में सर्वाधिक 1100.3 मि.मी. वर्षा रिकार्ड की गई है। बेमेतरा जिले में सबसे कम 334.4 मि.मी. वर्षा दर्ज हुई है। रायपुर संभाग में रायपुर जिले मे 595.7 मि.मी., बलौदाबाजार में 557.6 मि.मी., गरियाबंद में  537.0 मि.मी., महासमुंद में 543.2 मि.मी. और धमतरी में 520.1 मि.मी. औसत वर्षा दर्ज हुई है। बिलासपुर संभाग में बिलासपुर जिले में 689.9 मि.मी., मुंगेली में 689.1 मि.मी., रायगढ़ मंे 807.5 मि.मी., जांजगीर-चांपा में 875.1 मि.मी., कोरबा में 723.5 मि.मी., गौरेला-पेण्ड्रा-मरवाही 647.6 मि.मी., सारंगढ़-बिलाईगढ़ में 597.5 मि.मी., सक्ती में 735.5 मि.मी. औसत वर्षा दर्ज हुई है। दुर्ग संभाग में दुर्ग जिले में 522.1 मि.मी., कबीरधाम में 485.9 मि.मी., राजनांदगांव में 563.9 मि.मी., बालोद में 628.2 मि.मी., मोहला-मानपुर-अंबागढ़ चौकी में 814.1 मि.मी., खैरागढ़-छुईखदान-गंडई में 464.7 मि.मी. औसत वर्षा दर्ज हुई है। सरगुजा संभाग में सरगुजा जिले में 498.5 मि.मी., सूरजपुर में 829.3 मि.मी., जशपुर में 751.7 मि.मी., कोरिया में 768.7 मि.मी. और मनेन्द्रगढ़-चिरमिरी-भरतपुर में 719.3 मि.मी. औसत वर्षा दर्ज हुई है। बस्तर संभाग में बस्तर जिले में 775.8 मि.मी., कोंडागांव में 498.6 मि.मी., नारायणपुर में 677.6 मि.मी., बीजापुर में 815.4 मि.मी., सुकमा में 504.7 मि.मी., कांकेर में 661.6 मि.मी., दंतेवाड़ा में 700.3 मि.मी. और औसत वर्षा रिकार्ड की जा चुकी है।

रायपुर के गाँव में शिक्षा सुधार की नई मिसाल, युक्तियुक्तकरण से बदलाव

रायपुर बिलासपुर जिला के कोटा ब्लॉक का छोटा सा ग्राम खरगा अब शिक्षा की नई रोशनी से जगमगा रहा है। इस गाँव के शासकीय प्राथमिक विद्यालय की छात्रा पूनम धृतलहरे की आंखों में अब आत्मविश्वास और उम्मीद दोनों चमकते हैं। मेहनती और होशियार पूनम शुरू से पढ़ाई में आगे रही है, लेकिन लंबे समय से यह विद्यालय एकल शिक्षकीय था, जिससे उसकी और उसके साथियों की शिक्षा प्रभावित हो रही थी। कठिन सवालों के उत्तर न मिल पाने से बच्चे धीरे-धीरे उत्साह खोने लगे थे और कुछ तो स्कूल छोड़ने की सोच भी रहे थे। मुख्यमंत्री श्री विष्णु देव साय के नेतृत्व में राज्य सरकार द्वारा किए गए युक्तियुक्तकरण ने इस गाँव के बच्चों की जिंदगी में नई दिशा दी। विद्यालय में पहले से कार्यरत शिक्षक श्री संतोष कुमार खांडे के साथ अब श्री मुकेश कुमार यादव की नियुक्ति होने से कक्षाओं में नई ऊर्जा और बेहतर शिक्षण वातावरण आया। दो शिक्षकों की मौजूदगी ने न केवल पढ़ाई की गुणवत्ता सुधारी, बल्कि बच्चों का स्कूल से जुड़ाव भी बढ़ाया। पूनम और उसके सहपाठियों का कहना है कि अब वे कठिन से कठिन प्रश्न हल करना सीख गए हैं और पढ़ाई में मजा आने लगा है। पालकों ने भी मुख्यमंत्री के इस निर्णय की सराहना करते हुए कहा कि अब उनके बच्चों को नियमित और गुणवत्तापूर्ण शिक्षा मिल रही है, जिससे वे भी शहर के बच्चों की तरह बड़े सपने देख और पूरे कर सकेंगे। खरगा जैसे छोटे गाँवों में जब शिक्षक समय पर पहुँचते हैं, तो यह बदलाव केवल एक स्कूल तक सीमित नहीं रहता, बल्कि पूरे गाँव के भविष्य को दिशा देता है। आज पूनम और उसके साथी न सिर्फ मन लगाकर पढ़ रहे हैं, बल्कि आने वाले समय में अपने गाँव और राज्य का नाम रोशन करने के लिए तैयार हैं।

रायपुर : उपमुख्यमंत्री विजय शर्मा ने माँ दंतेश्वरी की पूजा-अर्चना कर प्रदेशवासियों की खुशहाली की कामना की

रायपुर उपमुख्यमंत्री विजय शर्मा ने आज अपने दंतेवाड़ा प्रवास के दौरान बस्तर की आराध्य देवी माँ दंतेश्वरी की पूजा-अर्चना कर प्रदेशवासियों के सुख-समृद्धि एवं खुशहाली की कामना की।  इस मौके पर विधायक चौतराम अटामी, जिला पंचायत अध्यक्ष नंदलाल मुड़ामी, जिला पंचायत उपाध्यक्ष अरविंद कुंजाम, नगर पालिका अध्यक्ष श्रीमती पायल गुप्ता सहित अन्य जनप्रतिनिधिगण, सचिव पंचायत एवं ग्रामीण विकास विभाग भीम सिंह, कमिश्नर बस्तर डोमन सिंह, आईजी बस्तर रेंज सुंदरराज पी.,डीआईजी कमलोचन कश्यप, कलेक्टर कुणाल दुदावत, पुलिस अधीक्षक गौरव रॉय, जिला पंचायत सीईओ जयंत नाहटा, अपर कलेक्टर राजेश पात्रे सहित वरिष्ठ अधिकारीगण मौजूद थे।

AIIMS रायपुर और अन्य अस्पतालों की दयनीय स्थिति पर छत्तीसगढ़ हाईकोर्ट ने सरकार से सवाल

बिलासपुर  बिलासपुर हाई कोर्ट ने राजधानी रायपुर के अखिल भारतीय आयुर्विज्ञान संस्थान (एम्स) सहित प्रदेश के सरकारी अस्पतालों में व्याप्त अव्यवस्था, लापरवाही और घटिया स्वास्थ्य सेवाओं पर गंभीर नाराजगी जताते हुए राज्य सरकार से जवाब मांगा है। चीफ जस्टिस रमेश सिन्हा की डिवीजन बेंच ने कहा कि प्रदेश की अधिकांश जनता निजी अस्पतालों में महंगा इलाज कराने में सक्षम नहीं। ये सभी सरकारी स्वास्थ्य सेवाओं पर निर्भर है। ऐसे में वहां की बदहाली बेहद चिंताजनक और गंभीर है। अदालत ने राज्य सरकार को आदेश दिया कि स्वास्थ्य सचिव के शपथ पत्र के साथ विस्तृत जवाब पेश किया जाए। अस्पताल में लंबी कतारें लगी रहती हैं। जांच के बाद सर्जरी के लिए 4 महीने रुकना पड़ता है। एक्स-रे जैसी साधारण जांच के लिए भी 3 घंटे का इंतजार करना पड़ता है। कोर्ट ने इन अव्यवस्थाओं के लिए राज्य सरकार से जवाब मांगा है। कोर्ट ने कहा कि राज्य की अधिकांश आबादी निजी अस्पतालों में महंगा इलाज कराने में सक्षम नहीं है और उनकी स्वास्थ्य सेवाओं का मुख्य आधार सरकारी अस्पताल हैं। ऐसे में वहां की लापरवाही और अव्यवस्था बेहद गंभीर है। एम्स में रजिस्ट्रेशन के बाद 48 घंटे इंतजार दरअसल, रायपुर के एम्स में मरीजों को डॉक्टर से मिलने के लिए रजिस्ट्रेशन के बाद करीब 48 घंटे तक इंतजार करने जैसी अव्यवस्थाओं को लेकर मीडिया रिपोर्ट्स को हाईकोर्ट ने जनहित याचिका मानकर सुनवाई शुरू की है। खबरों के मुताबिक अस्पताल में लंबी कतारें लगी रहती हैं, जिससे मरीजों का समय और ऊर्जा दोनों बर्बाद हो रहे हैं। जांच के बाद सर्जरी के लिए चार-चार महीने की देरी हो रही है, जबकि एक्स-रे जैसी साधारण जांच के लिए भी तीन घंटे का इंतजार करना पड़ता है। स्वास्थ्य विभाग की कार्यप्रणाली पर सवाल हाईकोर्ट ने कहा कि गर्भावस्था जांच किट के गलत परिणाम, घटिया गुणवत्ता की सर्जिकल सामग्री और दवाओं की आपूर्ति जैसे मामले सामने आए हैं। यहां तक कि कुछ जीवन रक्षक दवाएं लैब परीक्षण में फेल होने के बावजूद बाजार में बिक रही थीं। हाईकोर्ट ने टिप्पणी की कि इस तरह की खबरें सही हैं तो यह राज्य के स्वास्थ्य विभाग और छत्तीसगढ़ मेडिकल सर्विसेज कॉर्पोरेशन की कार्यप्रणाली पर गंभीर प्रश्नचिन्ह लगाता है। डॉक्टरों की लापरवाही पर हाईकोर्ट सख्त बिलासपुर जिले के एक सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र का भी कोर्ट ने जिक्र किया, जहां रिकॉर्ड में 15 डॉक्टर दर्ज थे। लेकिन, सुबह 11 बजे तक वहां कोई भी डॉक्टर मौजूद नहीं था। 250 से अधिक मरीज सुबह से कतार में खड़े रहे, जबकि एक्स-रे यूनिट जैसी महत्वपूर्ण मशीनें एक साल से अधिक समय से बंद पड़ी थीं। रीएजेंट की सप्लाई नहीं होने से हमर लैब भी बंद पड़ी थी। इन गंभीर खामियों और लापरवाहियों को लेकर हाईकोर्ट ने स्वास्थ्य विभाग के सचिव को व्यक्तिगत शपथपत्र प्रस्तुत करने के निर्देश दिए हैं। बता दें कि चीफ जस्टिस रमेश कुमार सिन्हा की डिवीजन बैंच ने सुनवाई की। अब इस मामले की अगली सुनवाई 12 अगस्त को होगी। डिवीजन बेंच ने यह टिप्पणी मीडिया में प्रकाशित रिपोर्ट पर स्वत: संज्ञान लेते हुए की। मीडिया रिपोर्ट के अनुसार, एम्स रायपुर में मरीजों को डॉक्टर से मिलने के लिए रजिस्ट्रेशन के बाद करीब 48 घंटे तक इंतजार करना पड़ रहा है। अस्पताल में लंबी कतारें लगी रहती हैं, जिससे मरीजों का समय, ऊर्जा और स्वास्थ्य तीनों प्रभावित हो रहा है। कोर्ट ने कहा कि यदि ये तथ्य सही हैं तो यह न केवल राज्य के स्वास्थ्य विभाग, बल्कि छत्तीसगढ़ मेडिकल सर्विसेज कॉर्पोरेशन की कार्यप्रणाली पर भी गंभीर प्रश्नचिह्न लगाता है। इन अव्यवस्थाओं की ओर खींचा ध्यान- जांच के बाद सर्जरी के लिए चार-चार महीने तक की देरी हो रही है। साधारण एक्स-रे जांच के लिए भी मरीजों को तीन घंटे तक इंतजार करना पड़ रहा है। गर्भावस्था जांच किट के गलत परिणाम सामने आ रहे हैं। गुणवत्ताविहीन सर्जिकल सामग्री और दवाओं की सप्लाई हो रही है। कुछ जीवन रक्षक दवाएं लैब परीक्षण में फेल होने के बावजूद बाजार में बिक रही हैं। डॉक्टरों की अनुपस्थिति और बंद मशीनों पर सवाल- सुनवाई के दौरान हाई कोर्ट ने बिलासपुर जिले के एक सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र का भी उल्लेख किया, जहां 15 डॉक्टर पदस्थ हैं, लेकिन सुबह 11:15 बजे तक एक भी डॉक्टर मौजूद नहीं थे। इस दौरान 250 से अधिक मरीज सुबह से कतार में खड़े रहे। यहां अस्पताल की एक्स-रे यूनिट एक साल से अधिक समय से बंद थी। इसके अलावा रीएजेंट सप्लाई नहीं होने से हमर लैब भी लंबे समय से काम नहीं कर रहा था। अदालत ने इस पर नाराजगी जताते हुए कहा कि सरकारी अस्पतालों में इस तरह की लापरवाही अस्वीकार्य है और यह आम नागरिकों के मौलिक स्वास्थ्य अधिकारों का उल्लंघन है। कोर्ट की टिप्पणी, तुरंत उठाएं ठोस कदम- हाई कोर्ट ने राज्य सरकार को स्पष्ट निर्देश दिया कि शपथ पत्र के साथ विस्तृत जवाब दें और बताए कि एम्स रायपुर सहित सरकारी अस्पतालों में अव्यवस्था को दूर करने और स्वास्थ्य सेवाओं में सुधार के लिए अब तक क्या कदम उठाए गए हैं। अदालत ने चेतावनी दी कि यदि समय रहते ठोस कार्रवाई नहीं की गई तो यह जनता के भरोसे को तोड़ देगा और स्वास्थ्य व्यवस्था पर गंभीर असर डालेगा।

युवाओं के सपनों को लगेंगे पंख, बनेंगे 34 नए नालंदा परिसर

सुकमा, दंतेवाड़ा, नारायणपुर, सूरजपुर, बैकुंठपुर, चिरमिरी, कुनकुरी, जशपुर, बलरामपुर, पेंड्रा जैसे दूरस्थ शहरों में भी खुलेंगी सेंट्रल लाइब्रेरी युवाओं को प्रतियोगी परीक्षाओं की तैयारी के लिए मिलेगा अच्छा माहौल उच्च शिक्षा और प्रतियोगी परीक्षाओं के लिए मिलेंगी अच्छी पुस्तकें, युवाओं के करियर निर्माण में अहम साबित होंगी सेंट्रल लाइब्रेरी नगरीय प्रशासन विभाग ने नालंदा परिसरों के लिए मंजूर किए हैं 237.58 करोड़ रायपुर छत्तीसगढ़ सरकार उच्च शिक्षा हासिल कर रहे तथा प्रतियोगी परीक्षाओं की तैयारी कर रहे युवाओं के सपनों को पर देने 34 नए नालंदा परिसर बना रही है। ये नालंदा परिसर केवल रायपुर, बिलासपुर, दुर्ग, भिलाई, रायगढ़ जैसे बड़े शहरों में ही नहीं बन रहे, बल्कि दूरस्थ वनांचलों के सुकमा, दंतेवाड़ा, नारायणपुर, सूरजपुर, बैकुंठपुर, चिरमिरी, कुनकुरी, जशपुर, बलरामपुर, पेंड्रा जैसे शहरों में भी बन रहे हैं। नगरीय प्रशासन एवं विकास विभाग ने पिछले दो वर्षों में 33 नए नालंदा परिसरों के लिए राशि स्वीकृत की है। वहीं रायगढ़ में सीएसआर से 700 सीटर सेंट्रल लाइब्रेरी का काम प्रगति पर है। इसके लिए रायगढ़ नगर निगम और एनटीपीसी (National Thermal Power Corporation) के बीच 42 करोड़ 56 लाख रुपए का करार हुआ है। यह प्रदेश का सबसे बड़ा नालंदा परिसर होगा।  इन सेंट्रल लाइब्रेरीज-सह-रीडिंग जोन्स से प्रदेशभर के युवाओं को विभिन्न प्रतियोगी परीक्षाओं की तैयारी के लिए अच्छा माहौल मिलेगा। उच्च शिक्षा और प्रतियोगी परीक्षाओं के लिए अच्छी पुस्तकें भी मिलेंगी। प्रदेश के हर वर्ग के युवाओं के करियर निर्माण में ये लाइब्रेरीज काफी मददगार और अहम साबित होंगे। इन सर्वसुविधायुक्त, अत्याधुनिक लाइब्रेरीज में युवाओं को ऑनलाइन और ऑफलाइन पढ़ाई की सुविधा मिलेगी। नगरीय प्रशासन विभाग ने पिछले दो वर्षों में 33 नालंदा परिसरों के लिए 237 करोड़ 57 लाख 95 हजार रुपए मंजूर किए हैं। विभाग द्वारा चालू वित्तीय वर्ष 2025-26 में 17 नगरीय निकायों में 18 नालंदा परिसरों के लिए 125 करोड़ 88 लाख रुपए स्वीकृत किए गए हैं। वहीं पिछले वित्तीय वर्ष 2024-25 में अलग-अलग शहरों में 15 नालंदा परिसरों के लिए 111 करोड़ 70 लाख रुपए मंजूर किए गए हैं। इनमें से 11 नालंदा परिसरों के लिए निविदा प्रक्रिया पूर्ण कर संबंधित निर्माण एजेंसीज को कार्यादेश भी जारी किए जा चुके हैं। ये जल्द ही आकार लेना शुरू कर देंगे।  नगरीय प्रशासन विभाग ने 11 नालंदा परिसरों के लिए जारी किए 19.15 करोड़ उप मुख्यमंत्री तथा नगरीय प्रशासन एवं विकास मंत्री श्री अरुण साव के अनुमोदन के बाद विभाग ने 11 नगरीय निकायों में नालंदा परिसरों के निर्माण के लिए प्रथम किस्त के रूप में कुल 19 करोड़ 14 लाख 87 हजार रुपए इसी महीने जारी किए हैं। विभाग द्वारा दुर्ग, राजनांदगांव और अंबिकापुर नगर निगम को प्रत्येक को दो करोड़ 85 लाख 57 हजार रुपए की प्रथम किस्त जारी की गई है। वहीं बलौदाबाजार, बालोद, बेमेतरा, कवर्धा, कांकेर और जांजगीर नगर पालिका तथा कुनकुरी नगर पंचायत को प्रत्येक को एक करोड़ दस लाख 37 हजार रुपए प्रथम किस्त के रूप में जारी किए गए हैं। नालंदा परिसर के निर्माण के लिए जशपुर नगर पालिका को दो करोड़ 85 लाख 57 हजार रुपए की पहली किस्त जारी की गई है।  दस शहरों में 500 सीटर और 22 में 250 सीटर लाइब्रेरी बनेंगी राज्य के युवाओं को प्रतियोगी परीक्षाओं और उच्च शिक्षा के अनुकूल माहौल देने के लिए दस नगरीय निकायों में 500 सीटर और 22 शहरों में 250 सीटर लाइब्रेरी बनाए जाएंगे। दुर्ग, राजनांदगांव, अंबिकापुर, जगदलपुर, बिलासपुर और भिलाई नगर निगम तथा जशपुर, लोरमी एवं गरियाबंद नगर पालिका में 500-500 सीटर नालंदा परिसरों का निर्माण किया जाएगा। वहीं धमतरी और चिरमिरी नगर निगम, कवर्धा, जांजगीर-नैला, बालोद, बलौदाबाजार, बेमेतरा, कांकेर, नारायणपुर, बलरामपुर, मुंगेली, खैरागढ़, सक्ती, पेंड्रा, सारंगढ़, सूरजपुर, बैकुंठपुर, दंतेवाड़ा एवं सुकमा नगर पालिका तथा कुनकुरी, बसना और अंबागढ़-चौकी नगर पंचायत में 250-250 सीटर सेंट्रल लाइब्रेरी-सह-रीडिंग जोन बनाए जाएंगे।   रायपुर में अभी तीन लाइब्रेरी संचालित, दो और बनेंगे राजधानी रायपुर में अभी तीन सेंट्रल लाइब्रेरी-सह-रीडिंग जोन संचालित हैं। इनमें एक हजार सीटर नालंदा परिसर-सह-ऑक्सी रीडिंग जोन, 800 सीटर तक्षशिला सेंट्रल लाइब्रेरी-सह-स्मार्ट रीडिंग जोन और 500 सीटर सेंट्रल लाइब्रेरी शामिल हैं। पिछले पांच वर्षों में नालंदा परिसर में पढ़ाई करने वाले 400 युवाओं ने विभिन्न प्रतियोगी परीक्षाओं में चयनित होकर न केवल अच्छी नौकरियां हासिल की हैं, बल्कि प्रतिष्ठित उच्च शिक्षण संस्थानों में प्रवेश भी प्राप्त किया है। रायपुर में जल्दी ही एक हजार सीटर और 500 सीटर नई लाइब्रेरी का काम प्रारंभ होगा। नगरीय प्रशासन विभाग द्वारा इनके लिए क्रमशः 22 करोड़ 80 लाख रुपए और 11 करोड़ 28 लाख रुपए मंजूर किए गए हैं। नालंदा परिसर सिर्फ इमारत नहीं, युवाओं के उज्ज्वल भविष्य की बुनियाद – श्री विष्णु देव साय मुख्यमंत्री श्री विष्णु देव साय ने रायपुर के नालंदा परिसर की सफलता का उल्लेख करते हुए कहा कि छत्तीसगढ़ सरकार युवाओं के सपनों को उड़ान देने का काम कर रही है। छत्तीसगढ़ के हर क्षेत्र के युवाओं को गुणवत्तापूर्ण उच्च शिक्षा और प्रतियोगी परीक्षाओं की तैयारी का अवसर मिले, इसके लिए हम अलग-अलग क्षेत्र के शहरों में नालंदा परिसरों का निर्माण कर रहे हैं। सुकमा से लेकर सूरजपुर और रायगढ़ से लेकर कवर्धा तक – हर कोने में अत्याधुनिक सेंट्रल लाइब्रेरी-सह-रीडिंग जोन खोले जा रहे हैं। ये नालंदा परिसर सिर्फ इमारत नहीं, युवाओं के उज्ज्वल भविष्य की बुनियाद हैं।  छत्तीसगढ़ सरकार युवाओं के सपनों को साकार करने सभी सुविधाएं मुहैया कराने प्रतिबद्ध – श्री अरुण साव उप मुख्यमंत्री श्री अरुण साव ने प्रदेशभर में नालंदा परिसरों के विस्तार के बारे में कहा कि सरकार युवाओं के सपनों को साकार करने सभी सुविधाएं मुहैया कराने के लिए प्रतिबद्ध है। सर्वसुविधायुक्त ये लाइब्रेरियां उच्च शिक्षा हासिल कर रहे तथा प्रतियोगी परीक्षाओं की तैयारी कर रहे विद्यार्थियों को पढ़ाई का अनुकूल माहौल उपलब्ध कराने के साथ ही उत्कृष्ट अध्ययन सामग्री भी प्रदान करेंगी। राज्य के युवाओं की मेहनत को उनके इच्छित मुकाम तक पहुंचाने में नालंदा परिसर बड़ी भूमिका निभाएंगे। यहां वे पूरे फोकस, लगन और समर्पण के साथ अपने लक्ष्यों को हासिल करने की दिशा में आगे बढ़ सकेंगे।

हिड़मा की गार्ड रही महिला ने मनाया राखी पर्व, गृहमंत्री और IG को बांधा रक्षा सूत्र

दंतेवाड़ा  बस्तर के नक्सल प्रभावित दंतेवाड़ा में रक्षाबंधन डिप्टी सीएम विजय शर्मा ने सरेंडर महिला नक्सलियों और दंतेश्वरी फाइटर्स की कमांडो से राखी बंधवाई और उनकी रक्षा का वचन दिया.दंतेवाड़ा में डिप्टी सीएम: डिप्टी सीएम विजय शर्मा शुक्रवार को दंतेवाड़ा पहुंचे. दौरे के दूसरे दिन शनिवार को रक्षाबंधन के दिन सबसे पहले वह दंतेश्वरी मंदिर पहुंचे. वहां दंतेश्वरी माई के दर्शन कर प्रदेश की खुशहाली की कामना की. उसके बाद गृह मंत्री राखी का त्योहार मनाने सर्किट हाउस के लिए रवाना हुए.जगदलपुर में नक्सलियों के सेंट्रल कमेटी मेंबर और हार्डकोर इनामी नक्सली हिड़मा की सुरक्षा गार्ड समेत अन्य सरेंडर्ड नक्सलियों ने गृहमंत्री विजय शर्मा को राखी बांधी है।  दंतेश्वरी मंदिर में डिप्टी सीएम विजय शर्मा  दंतेश्वरी फाइटर्स के साथ राखी का त्योहार: सर्किट हाउस में डिप्टी सीएम के साथ मंत्री केदार कश्यप भी मौजूद रहे. जहां पहले से ही दंतेश्वरी फाइटर्स की महिला कमांडो मौजूद थी. प्रदेश के गृह मंत्री को राखी बांधने को लेकर महिला कमांडो काफी उत्साहित दिखी. दंतेश्वरी फाइटर्स की जवान सुंदरी कोर्राम ने बताया कि डिप्टी सीएम को राखी बांधने को लेकर बहुत अच्छा लग रहा है. सुंदरी कोर्राम ने आग्रह किया कि नक्सल मोर्च पर तैनात डीआरजी जवानों की महिला बहनों को भी गृह मंत्री को राखी बांधने का मौका मिलना चाहिए. इससे उनका भी उत्साह वर्धन होगा. दंतेश्वरी फाइटर्स की महिला जवानों ने गृह मंत्री को बांधी राखी  सरेंडर नक्सली महिलाओं और दंतेश्वरी फाइटर्स के साथ राखी का त्योहार: सर्किट हाइस में डिप्टी सीएम शर्मा ने सरेंडर नक्सली महिलाओं से बात की. उन्हें पूरी तरह से सुरक्षा मुहैया कराने का आश्वासन दिया. साथ ही ये भी कहा कि नक्सलवाद खत्म करने उनका और उनके क्षेत्र का विकास होगा. इसके बाद उन्होंने सरेंडर महिला नक्सलियों से राखी बंधवाई. इसके बाद विजय शर्मा दंतेश्वरी फाइटर्स की महिला जवानों से राखी बंधवाने पहुंचे. उन्होंने महिला जवानों का हौसला बढ़ाया और जंगल में विपरीत परिस्थतियों में भी नक्सलियों से लोहा लेने के लिए उनका आभार जताया. दंतेवाड़ा में डिप्टी सीएम ने मनाया रक्षाबंधन  उपमुख्यमंत्री ने महिला कमांडो का हौसला बढ़ाते हुए कहा, "छत्तीसगढ़ की महिला जवान कंधे से कंधा मिलाकर सुरक्षा में योगदान दे रही हैं, जो अपने आप में इतिहास है. राज्य सरकार विकास, विश्वास और सुरक्षा की तर्ज पर कार्य कर रही है और 2026 तक पूरे छत्तीसगढ़ को नक्सलमुक्त करने का लक्ष्य पूरा होता दिख रहा है." सरेंडर महिला नक्सलियों और दंतेश्वरी फाइटर्स जवानों से राखी बंधवाने के बाद विजय शर्मा ने मीडिया से बात की. उन्होंने कहा "नक्सलवाद के मार्ग को छोड़कर समाज की मुख्यधारा से जुड़ने वाली बहनों से राखी बंधवाई. मेरे साथ केदार कश्यप, जिला पंचायत अध्यक्ष, कमिश्नर, आईजी और कलेक्टर दंतेवाड़ा ने राखी बंधवाई. इसका सिर्फ एक ही संदेश है कि चाहे सरेंडर महिला नक्सली हो या नक्सलियों से लड़ने वाली महिला जवान, सरकार हर कदम पर उनके साथ है." शर्मा ने आत्मसमर्पित नक्सली महिलाओं को भरोसा दिलाया कि राज्य सरकार की पुनर्वास नीति के तहत उन्हें सभी योजनाओं का लाभ दिलाया जाएगा. विजय शर्मा के अलावा दंतेवाड़ा में मंत्री केदार कश्यप, बस्तर IG सुंदरराज पी, दंतेवाड़ा कलेक्टर कुणाल दुदावत ने भी आत्म समर्पित बहनों से रक्षा सूत्र बंधवाया है। उनकी रक्षा का वचन दिया। इस दौरान सभी नेता और अधिकारियों ने बहनों को तोहफा दिया है। हिंसा का रास्ता छोड़ा दरअसल, महिला नक्सली सुंदरी, तुलसी समेत अन्य कई सालों से नक्सल संगठन में थीं। नक्सली कमांडर हिड़मा के सुरक्षा टीम में सक्रिय थीं। तुलसी PLGA बटालियन 1 में सक्रिय थी। तुलसी मेडिकल टीम प्रभारी थी। इन दोनों पर 8-8 रुपए का इनाम घोषित था। लेकिन कुछ साल पहले ही इन्होंने आत्म समर्पण कर दिया। अब दंतेश्वरी फाइटर्स में शामिल होकर नक्सलवाद के खात्मे के लिए लड़ाई लड़ रही हैं। ऑपरेशन पर भी निकलती हैं। कई नक्सलियों का एनकाउंटर किया है। दंतेवाड़ा पहुंचने पर विजय शर्मा का स्वागत      जो भी बहनें भटककर नक्सल दिशा में है और वापस आती है तो पूरा समाज उन्हें बहन मानेगा और उनकी सुरक्षा करेगा- विजय शर्मा, डिप्टी सीएम, छत्तीसगढ़ इससे पहले शुक्रवार को विजय शर्मा गीदम विकासखंड अन्तर्गत ग्राम हिरानार में स्थित वंनाचल शिक्षा सेवा प्रकल्प संस्था पहुंचे. वहां शालेय परिसर का निरीक्षण किया और अधिकारियों और प्राचार्य से चर्चा कर शैक्षणिक दृष्टि और अन्य सुविधायों की जानकारी ली. 23 एकड़ में विस्तारित इस संस्था में अंत्योदय वनवासी परिवारों के बच्चों को आवासीय शिक्षा और संस्कार की मुलभूत सुविधा उपलब्ध कराई जाती है. वर्तमान में एलकेजी से कक्षा 10वीं तक की पढ़ाई की सुविधा यहां दी जा रही है. संस्था की प्राचार्य अनिता सोरी ने बताया कि इस शिक्षा सत्र में तीन नक्सल प्रभावित छात्रों ने यहां प्रवेश लिया है. वर्तमान में 102 छात्र यहां पढ़ाई कर रहे हैं.

ईमानदारी और निष्ठा से निभाई गई जिम्मेदारी देती है सकारात्मक परिणाम – मुख्यमंत्री विष्णुदेव साय

मुख्यमंत्री श्री साय ने IIM रायपुर के सुशासन फेलोशिप छात्रों से आत्मीय संवाद में साझा किए अपने अनुभव जीवन के अनुभवों से सिखाए सुशासन के गुर, विद्यार्थियों के जिज्ञासापूर्ण प्रश्नों के दिए प्रेरक उत्तर जब मुख्यमंत्री ने कहा – “मैं पहले आप बच्चों का नाना हूँ, बाद में मुख्यमंत्री” रायपुर मुख्यमंत्री श्री विष्णुदेव साय ने कहा कि ईमानदारी और निष्ठा से निभाई गई जिम्मेदारी हमेशा सकारात्मक परिणाम देती है। जनसेवा में ईमानदारी और समर्पण के साथ लगे रहने  पर जनता का स्नेह और आशीर्वाद अवश्य ही प्राप्त हुआ। मुख्यमंत्री श्री साय आज मंत्रालय महानदी भवन के पंचम तल स्थित नवनिर्मित सभागार में आयोजित ‘मुख्यमंत्री सुशासन संवाद’ कार्यक्रम को संबोधित कर रहे थे। यह आयोजन IIM रायपुर में अध्ययनरत मुख्यमंत्री सुशासन फेलोशिप के विद्यार्थियों के साथ हुआ, जिसमें मुख्यमंत्री ने आत्मीय संवाद करते हुए उन्हें सुशासन की बारीकियों से अवगत कराया और उनके प्रश्नों के प्रेरणादायक उत्तर दिए। मुख्यमंत्री श्री साय ने कहा कि छत्तीसगढ़ देश का पहला राज्य है, जिसने सुशासन एवं अभिसरण विभाग की स्थापना की है। प्रदेश में ई-ऑफिस प्रणाली लागू की गई है, जिससे सभी फाइलें डिजिटलीकृत हो रही हैं। इससे शासन की कार्यप्रणाली पारदर्शी बनी है और फाइलों की ट्रैकिंग भी सहज हुई है। उन्होंने कहा कि सरकार की मंशा भ्रष्टाचार के सभी मार्गों को बंद करने की है। मुख्यमंत्री श्री साय ने कहा कि जनता को शासन की योजनाओं का वास्तविक लाभ मिले, यही असली सुशासन है। योजनाएं सोच-समझकर बननी चाहिए, क्योंकि इसके पीछे जनता की गाढ़ी कमाई लगती है। जब योजनाएं जमीनी स्तर तक प्रभावी रूप से क्रियान्वित होती हैं, तभी आमजन को उसका सीधा लाभ मिलता है। मुख्यमंत्री श्री साय ने सुशासन फेलोशिप के विद्यार्थियों से संवाद के दौरान उनके जिज्ञासु सवालों के बेझिझक और प्रेरणाप्रद उत्तर दिए। आरंग के फेलो हर्षवर्धन ने जब मुख्यमंत्री से उनके ग्राम बगिया के पंच से लेकर मुख्यमंत्री बनने के सफर की सबसे महत्वपूर्ण सीख पूछी, तो मुख्यमंत्री श्री साय ने अपने राजनीतिक और पारिवारिक संघर्षों को साझा करते हुए कहा – "बहुत कम उम्र में पिता के निधन के बाद परिवार की जिम्मेदारी मेरे कंधों पर आ गई। मैंने कभी कल्पना नहीं की थी कि मैं पंच भी बनूंगा, लेकिन जो भी जिम्मेदारी मिली, उसे पूरी निष्ठा से निभाया।" उन्होंने आगे कहा – “ईमानदारी और निष्ठा से जब कार्य करते हैं, तो सकारात्मक परिणाम मिलते हैं। मैंने कभी कर्तव्यपथ नहीं छोड़ा, और जनसेवा को जीवन का लक्ष्य बनाया। जनता ने मुझे पंच, सरपंच, विधायक, सांसद, राज्य मंत्री और अब मुख्यमंत्री तक का दायित्व सौंपा।” बिलासपुर के फेलो मनु पांडेय ने जब यह पूछा कि 2047 तक विकसित भारत के सपने में छत्तीसगढ़ की क्या भूमिका होगी, तो मुख्यमंत्री ने बताया – "प्रधानमंत्री श्री नरेन्द्र मोदी जी ने 2047 तक विकसित भारत का जो संकल्प लिया है, उसमें छत्तीसगढ़ की भूमिका अत्यंत महत्वपूर्ण है। 2014 से पहले भारत अर्थव्यवस्था में दसवें स्थान पर था, जो अब चौथे स्थान पर पहुंच गया है। हमने भी विकसित छत्तीसगढ़ के लिए ‘विजन डॉक्यूमेंट’ तैयार किया है। वर्तमान में हमारी जीएसडीपी 5 लाख करोड़ रुपये है, जिसे 2047 तक 75 लाख करोड़ रुपये तक ले जाने का लक्ष्य है।" मुख्यमंत्री श्री साय ने कहा कि यह लक्ष्य कोई कल्पना नहीं, बल्कि एक ठोस योजना है, जिसे हम अवश्य प्राप्त करेंगे।  मुख्यमंत्री श्री साय ने कहा कि छत्तीसगढ़ एक सम्पन्न राज्य है – यहाँ लोहा, टिन, लिथियम, बॉक्साइट, सोना और हीरे जैसे बहुमूल्य खनिजों के भंडार हैं। राज्य का 44% भूभाग वनों से आच्छादित है, जहां सैकड़ों प्रकार के लघु वनोपज हैं। यहाँ की उर्वरा मिट्टी और मेहनतकश लोग ही छत्तीसगढ़ की असली ताकत हैं। मुख्यमंत्री ने युवाओं को प्रेरित करते हुए कहा – “आप जैसे युवाओं के संकल्प और कौशल से हम विकसित छत्तीसगढ़ जरूर बनाएंगे।” जब मुख्यमंत्री ने कहा – “मैं पहले आप बच्चों का नाना हूँ, बाद में मुख्यमंत्री” संवाद के दौरान फेलो भास्कर सिदार ने एक ऐसा प्रश्न किया, जिसका उत्तर सुनकर पूरा सभागार हर्ष और आत्मीयता से भर गया। भास्कर ने मुख्यमंत्री को बताया कि वह रायगढ़ के ग्राम बांसडांड का निवासी है और जब उसने अपने पिता का नाम बताया, तो मुख्यमंत्री ने तुरंत उसके परिवार को पहचान लिया। मुख्यमंत्री ने कहा – “मैं तुम्हारे घर भी गया हूँ। तब तुम बहुत छोटे थे।” उन्होंने आगे बताया – “तुम्हारे नानाजी, स्वर्गीय प्रेम सिंह सिदार, लैलूंगा से विधायक थे और मैंने उनके साथ काम किया है।” इस पर भास्कर ने मुस्कराते हुए पूछा – “क्या मैं आपको नानाजी कह सकता हूँ?” मुख्यमंत्री ने मुस्कुराते हुए उत्तर दिया – “मैं पहले आप बच्चों का नाना हूँ, बाद में मुख्यमंत्री।” मुख्यमंत्री के इस जवाब पर सभागार तालियों और हंसी से गूंज उठा। यह क्षण मुख्यमंत्री श्री साय की सहजता, आत्मीयता और जनता से गहरे जुड़ाव का प्रमाण था। फेलोशिप का उद्देश्य – भविष्य के उत्तरदायी सुशासक तैयार करना कार्यक्रम में सुशासन एवं अभिसरण विभाग के सचिव श्री राहुल भगत ने फेलोशिप योजना की रूपरेखा पर पावर पॉइंट प्रेजेंटेशन प्रस्तुत किया। उन्होंने बताया कि मुख्यमंत्री सुशासन फेलोशिप का उद्देश्य राज्य के प्रतिभाशाली युवाओं को गवर्नेंस की उच्च स्तरीय शिक्षा और व्यावहारिक अनुभव प्रदान कर एक दक्ष एवं उत्तरदायी प्रशासनिक पीढ़ी तैयार करना है।  

मुख्यमंत्री विष्णु देव साय बोले – छत्तीसगढ़ में शिक्षा, नवाचार और कौशल विकास के नए युग की शुरुआत

छत्तीसगढ़ शासन, आईआईएम, एनआईटी और मोतीलाल ओसवाल फाउंडेशन के त्रिपक्षीय एमओयू पर हस्ताक्षर हस्ताक्षर के साक्षी बने मुख्यमंत्री विष्णु देव साय फाउंडेशन द्वारा आईआईएम एवं एनआईटी को 172 करोड़ रुपये का योगदान रायपुर,  मुख्यमंत्री विष्णु देव साय के नेतृत्व में आज छत्तीसगढ़ में शिक्षा, कौशल विकास और नवाचार के क्षेत्र में एक नए युग की शुरुआत हुई। मुख्यमंत्री श्री साय आज राजधानी स्थित पं. दीनदयाल उपाध्याय ऑडिटोरियम में आयोजित विशेष कार्यक्रम में छत्तीसगढ़ शासन, भारतीय प्रबंधन संस्थान (आईआईएम) रायपुर, राष्ट्रीय प्रौद्योगिकी संस्थान (एनआईटी) रायपुर और मोतीलाल ओसवाल फाउंडेशन के मध्य हुए त्रिपक्षीय एमओयू पर हस्ताक्षर के साक्षी बने। इस समझौते के अंतर्गत स्थापित होने वाले उद्यमिता केंद्र का निर्माण वर्ष 2025-26 में प्रारंभ होगा तथा इसे वर्ष 2027-28 तक पूर्ण रूप से क्रियाशील करने का लक्ष्य निर्धारित किया गया है। गांव-गांव तक पहुंचेगी शिक्षा, कौशल और नवाचार की क्रांति: मुख्यमंत्री साय मुख्यमंत्री विष्णु देव साय ने इस अवसर पर कहा कि आज हस्ताक्षरित एमओयू से "छत्तीसगढ़ अंजोर विजन" को साकार करने में महत्वपूर्ण सहायता प्राप्त होगी। इस साझेदारी से प्रदेश में गांव-गांव तक शिक्षा, कौशल विकास और नवाचार की क्रांति पहुंचेगी, जो युवाओं को आगे बढ़ने के लिए प्रेरित करेगी। मुख्यमंत्री ने कहा कि इस त्रिपक्षीय समझौते के तहत "श्रीमती मिथिलेश अग्रवाल नवाचार एवं उद्यमिता उत्कृष्टता केंद्र" की स्थापना की जाएगी, जो युवाओं को शोध, प्रयोग और उद्यमिता के माध्यम से आत्मनिर्भर बनाने का कार्य करेगा। उन्होंने यह भी कहा कि यह उत्कृष्टता केंद्र केवल आईआईएम या एनआईटी के विद्यार्थियों तक सीमित न रहे, बल्कि गांव-गांव के युवाओं को भी लाभान्वित करे। मुख्यमंत्री ने उद्योग जगत से भी इस शिक्षा और कौशल विकास के आंदोलन से जुड़ने का आग्रह किया। संसाधन-आधारित नहीं, नवाचार-आधारित अर्थव्यवस्था का नेतृत्व करेगा छत्तीसगढ़: मुख्यमंत्री साय मुख्यमंत्री साय ने आगे कहा कि छत्तीसगढ़ अब कोर सेक्टर के साथ-साथ सेमीकंडक्टर, आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस, फार्मा, डिफेंस, एयरोस्पेस और ग्रीन हाइड्रोजन जैसे अत्याधुनिक क्षेत्रों में तेज़ी से अग्रसर हो रहा है। बीते 20 महीनों में किए गए साढ़े तीन सौ से अधिक सुधारों के परिणामस्वरूप राज्य में निवेश का अनुकूल वातावरण निर्मित हुआ है और केवल आठ माह में 6.75 लाख करोड़ रुपये से अधिक के निवेश प्रस्ताव प्राप्त हुए हैं। मुख्यमंत्री ने प्रदेशवासियों से आह्वान किया कि हम सभी यह संकल्प लें कि छत्तीसगढ़ को संसाधन-आधारित नहीं, बल्कि नवाचार-आधारित अर्थव्यवस्था का नेतृत्व करने वाला राज्य बनाएंगे – जहाँ युवा बदलाव के वाहक बनें और उद्यमिता से समाज को दिशा दें। किसानों के लिए बनेगा देश का सबसे बड़ा प्रशिक्षण केंद्र मोतीलाल ओसवाल फाउंडेशन के सह-संस्थापक एवं चेयरमैन श्री रामदेव अग्रवाल ने कार्यक्रम में रायपुर में किसानों हेतु देश का सबसे बड़ा प्रशिक्षण केंद्र स्थापित करने की घोषणा की। उन्होंने कहा कि छत्तीसगढ़ एक अत्यंत समृद्ध प्रदेश है, जिसमें विकास की अपार संभावनाएं हैं। उनका फाउंडेशन इस विकास यात्रा में पूर्णतः समर्पित है। श्री अग्रवाल ने बताया कि फाउंडेशन ने अपनी कुल निधि का 10 प्रतिशत समाज कल्याण के लिए समर्पित करने का निर्णय लिया है, जिसका उपयोग शिक्षा, कौशल और कृषि से संबंधित कार्यों में किया जाएगा। मोतीलाल ओसवाल फाउंडेशन का 172 करोड़ रुपये का योगदान मोतीलाल ओसवाल फाउंडेशन ने आईआईएम रायपुर एवं एनआईटी रायपुर को कुल 172 करोड़ रुपये का दान देने की घोषणा की है। इसमें से 101 करोड़ रुपये आईआईएम रायपुर को तथा 71 करोड़ रुपये एनआईटी रायपुर को प्रदान किए जाएंगे। इस दानराशि से आईआईएम रायपुर में "ओसवाल छात्रावास" के 202 कमरे और "दाऊ राम गोपाल अग्रवाल नॉलेज सेंटर" की स्थापना की जाएगी। इसके अतिरिक्त अमेरिका, ब्रिटेन, फ्रांस और जर्मनी की शीर्ष संस्थाओं के सहयोग से छह अंतरराष्ट्रीय एमबीए कार्यक्रम प्रारंभ किए जाएंगे। इसी प्रकार, एनआईटी रायपुर में "श्रीमती मिथिलेश अग्रवाल सेंटर ऑफ एक्सीलेंस" की स्थापना की जाएगी, जो आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस, रोबोटिक्स, इंटरनेट ऑफ थिंग्स, ब्लॉकचेन और क्लीन एनर्जी जैसे डीप-टेक क्षेत्रों पर कार्य करेगा। यह केंद्र वर्ष 2030 तक 10,000 से अधिक युवाओं को प्रशिक्षण देगा, 250 से अधिक स्टार्टअप्स को इनक्यूबेट करेगा और 5,000 से अधिक कुशल नौकरियों का सृजन करेगा। यह पहल छत्तीसगढ़ की औद्योगिक आवश्यकताओं – विशेषकर खनन, इस्पात और मैन्युफैक्चरिंग क्षेत्रों – के अनुरूप विकसित की गई है, और यह स्थानीय उद्योगों के साथ मिलकर वास्तविक समस्याओं के समाधान पर केंद्रित रहेगी। इस अवसर पर प्रमुख सचिव निहारिका बारीक, उच्च शिक्षा एवं कौशल विकास विभाग के सचिव एस. भारतीदासन, छत्तीसगढ़ राज्य कौशल विकास प्राधिकरण के मुख्य कार्यपालन अधिकारी विजय दयाराम के, एनआईटी रायपुर के चेयरमैन डॉ. सुरेश हावरे, आईआईएम रायपुर के चेयरमैन पुनीत डालमिया, एनआईटी के निदेशक एन. वी. प्रसन्ना राव, आईआईएम रायपुर के प्रभारी निदेशक डॉ. संजीव पाराशर, प्रशासनिक अधिकारी, शिक्षाविद एवं बड़ी संख्या में छात्र-छात्राएं उपस्थित थे।

युवतियों से ठगी के आरोप में Snapchat गिरोह के 3 विदेशी ठग पकड़े गए, दिल्ली में चल रहा था फर्जीवाड़ा

राजनांदगांव विदेशी उपहार और पाउंड पार्सल भेजने के नाम पर महिलाओं से लाखों रुपये की ठगी करने वाले तीन अंतरराष्ट्रीय साइबर ठगों को पुलिस ने दिल्ली से गिरफ्तार किया है। पकड़े गए आरोपियो में दो नाइजीरियन व एक दक्षिण अफ्रीका मूल का नागरिक शामिल है। आरोपी युवतियों से स्नैपचैट के जरिए दोस्ती कर स्वयं को विदेश में रहने वाला धनाढ्य बताकर भरोसे में लेते थे। इसके बाद पार्सल छुड़ाने के नाम पर मोटी रकम ऐंठते थे। बता दें कि इस गिरोह ने जिले के चिचोला थाना क्षेत्र की एक युवती से 1,23,700 रुपये की आनलाइन ठगी की थी। इस पर साइबर सेल व पुलिस चौकी चिचोला की संयुक्त टीम ने छानबीन कर आरोपियों को नई दिल्ली के जनकपुरी और उत्तम नगर इलाके से गिरफ्तार किया। तीनों को ट्रांजिट रिमांड पर द्वारका कोर्ट से राजनांदगांव लाया गया है। इस तरह दिया गया था ठगी को अंजाम प्रार्थिया ने पांच मई को पुलिस चौकी चिचोला में रिपोर्ट दर्ज कराई थी कि इंटरनेट मीडिया पर स्नैपचेट प्लेटफार्म पर डा केंड्रीक25 और कालिन्स लियो24 नामक अकाउंट से उससे संपर्क कर दोस्ती की गई। फिर स्वयं को विदेश में रहने वाला आर्थिक रूप से संपन्न व्यक्ति बताकर महंगे गिफ्ट व पाउंड भेजने का झांसा दिया गया। इसके बाद एयरपोर्ट कस्टम में पार्सल पकड़े जाने की बात कहकर 1,23,700 रुपये की मांग की गई और यह रकम ऑनलाइन ट्रांसफर करा ली गई। मामले में धारा 318(4), 3(5) बीएनएस, 66(सी), 66(डी) आईटी एक्ट के अंतर्गत अपराध दर्ज कर विवेचना प्रारंभ की गई। साइबर सेल की जांच में आरोपितों के मोबाइल लोकेशन उत्तम नगर (नई दिल्ली) में पाई गई, जिसके बाद टीम को दिल्ली रवाना किया गया। पुलिस ने आरोपियों के कब्जे से दो लैपटाप, 14 एंड्रायड मोबाइल, छह की-पैड मोबाइल, पांच बंद मोबाइल, पांच एटीएम कार्ड और 32 सिम कार्ड जब्त किए गए। इसमें से 11 सिम अंतर्राष्ट्रीय नंबर हैं। मामले में स्टीफन उर्फ लक्की डेडन जो (30) आइवरी कोस्ट (दक्षिण अफ्रीका) और नाइजीरिया के किंग्सले (35) और जार्ज चुक्चुमेका शामिल हैं। तीनों आरोपियों ने स्वीकार किया कि वे दिल्ली में रहते हुए भारतीय महिलाओं से सोशल मीडिया और मैट्रिमोनियल साइट्स के माध्यम से संपर्क कर ठगी करते थे। महिलाओं को गिफ्ट व विदेशी मुद्रा भेजने का झांसा देकर कस्टम क्लीयरेंस के नाम पर रकम ट्रांसफर कराते थे। दूतावास को दी गई सूचना आरोपितों की गिरफ्तारी की सूचना उनके संबंधित देशों के दूतावास को दी गई है। पुलिस का कहना है कि गिरोह का नेटवर्क काफी बड़ा है और इसकी गहराई से जांच की जा रही है। प्रारंभिक पूछताछ में यह भी सामने आया है कि ये लोग भारत के अलग-अलग हिस्सों में कई महिलाओं को निशाना बना चुके हैं।

बिलासपुर में दर्दनाक मामला: नगर निगम ले गई गाय, पेट में मिली 40 किलो पन्नी से मौत

बिलासपुर नगर निगम की कथित लापरवाही के चलते रुद्र विहार निवासी मनीष कुमार सिंह की एक गाय की मौत हो गई। गाय के शव का जब पोस्टमार्टम किया गया तो उसके पेट से 40 किलो पन्नी निकला, मवेशी मालिक का आरोप है कि नगर निगम के गोठान में मवेशियों को चारा नहीं दिया जा रहा, बल्कि कचरे में ही उन्हें छोड़ दिया जा रहा है। पीड़ित ने निश्पक्ष जांच की मांग की हैं। रूद्ध विहार निवासी मनीष कुमार सिंह ने बताया कि उन्होंने एसबीआई व्यापार विहार शाखा से 1 लाख 40 हजार रुपए का लोन लेकर दो गायें खरीदी थीं। कुछ समय पहले रवि रेसिडेंसी स्थित उनके प्लांट में बने शेड में बंधी गाय को नगर निगम के कर्मचारी पड़ोसियों की शिकायत पर ले गए और शेड को तोड़ दिया। उन्होंने बताया कि वे 22 दिनों तक गायों को छुड़ाने के लिए जोन-7 कार्यालय और मोपका चौकी के चक्कर लगाए, लेकिन कोई सुनवाई नहीं हुई। आखिरकार 22वें दिन उन्हें मोपका थाने से पाटले नामक एक अधिकारी का फोन आया और बताया गया कि उनकी एक गाय की मृत्यु हो चुकी है, पहचान के लिए गोठान पहुंचें। मनीष जब वहां पहुंचे, तो उन्हें एक मृत गाय सौंपी गई, जबकि दूसरी गाय अब भी निगम के पास है। इस पूरे मामले में मनीष का आरोप है कि उन्हें गाय छोड़ने का झांसा देकर 22 दिन तक दौड़ाया गया और जब वे जवाब मांगने जोन कार्यालय पहुंचे तो वहां बैठे एक शास्त्री नामक व्यक्ति (जिनका पूरा नाम या पद ज्ञात नहीं) ने उन्हें रूपए और चेक में राशि देकर समझौता करने का प्रलोभन भी दिया। पीड़ित ने कलेक्टर संजय अग्रवाल से मामले में निष्पक्ष जांच कर दोषियों के खिलाफ कड़ी कार्रवाई की मांग की है। कार्रवाई के नाम पर हो रही गायों की हत्या पीड़ित मनीष कुमार सिंह ने नगर निगम व गौठान प्रबंधन पर आरोप लगाया कि उनकी गाय की मौत उचित भोजन न मिलने की वजह से हुई है। गोठान में निगम कार्रवाई के नाम पर मवेशियों को ले जाती है। उनके खाने व पीने की वहां पर कोई व्यवस्था नहीं है। उन्होंने बताया कि नगर निगम के कर्मचारी गायों को कार्रवाई के नाम के लिए पकड़ते हैं। उचित भोजन न मिलने के आभाव में मवेशियों की मौत हो रही है। मनीष सिंह ने गाय की मौत के लिए जोन कमिश्नर सहित निगम के संबंधित अधिकारियों और गोठान कर्मचारियों को जिम्मेदार ठहराया है। गलती छुपाने के लिए किया एफआईआर मनीष सिंह का कहना है कि उनकी गायों को निजी जमीन पर बांधा गया था, तो उन्हें जब्त करने का क्या अधिकार था। अगर वे मवेशी सड़क पर छोड़ते तो समझ में आता। उन्होंने यह भी कहा कि नगर निगम के कर्मचारी अपनी गलती छुपाने के लिए उन पर जबिरया एफआईआर की कार्रवाई करवा दी। पीड़ित ने थाने व निगम में कहा कि चलान कोर्ट में पेश कर दे वे कोर्ट में जवाब देकर मवेशी छुड़ा लेंगे। लेकिन जब तक उनकी एक मवेशी की मौत हो गई, वहीं दूसरा अब भी निगम के कब्जे में है।