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मुख्यमंत्री विष्णु देव साय ने कहा-यह केवल दस्तावेज नहीं, संकल्प है, दिशा है, विकसित छत्तीसगढ़ की नींव है

रायपुर छत्तीसगढ़ की विकास यात्रा में आज का दिन ऐतिहासिक बन गया, जब मुख्यमंत्री विष्णु देव साय ने “छत्तीसगढ़ अंजोर विज़न@2047” दस्तावेज को प्रदेश की जनता को समर्पित किया। नवा रायपुर अटल नगर में आयोजित भव्य कार्यक्रम में राज्य मंत्रिमंडल के सदस्यगण, नीति आयोग भारत सरकार, विषय विशेषज्ञ, जनप्रतिनिधि और वरिष्ठ अधिकारी उपस्थित रहे। इस अवसर पर मुख्यमंत्री ने कहा कि यह दस्तावेज केवल शब्दों का संकलन नहीं, बल्कि आत्मनिर्भर, समृद्ध और विकसित छत्तीसगढ़ के निर्माण का एक ठोस संकल्प और स्पष्ट दिशा है। उन्होंने कहा कि यह विज़न प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी जी के विकसित भारत@2047 के संकल्प से प्रेरित है और छत्तीसगढ़ को भारत के अग्रणी एवं विकसित राज्य में शामिल करने के लिए मार्गदर्शन प्रदान करेगा। मुख्यमंत्री ने कहा कि जहां सोच बड़ी हो, दिशा स्पष्ट हो और जन-जन की भागीदारी हो, वहाँ विकास तय होता है। आज हम अपने राज्य का विज़न डाक्यूमेंट – छत्तीसगढ़ अंजोर विज़न@2047 प्रदेशवासियों को समर्पित कर रहे हैं। यह हमारे लिए गर्व की बात है कि छत्तीसगढ़ उन चुनिंदा राज्यों में है जिन्होंने यह विज़न तैयार किया है। मुख्यमंत्री ने बताया कि उन्होंने स्वयं पिछले माह प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी जी की अध्यक्षता में हुई नीति आयोग की बैठक में इस विज़न की जानकारी दी, जिसे विशेष रूप से सराहा गया। उन्होंने कहा कि श्रद्धेय पूर्व प्रधानमंत्री स्वर्गीय अटल बिहारी वाजपेयी जी ने हमारे राज्य की नींव रखी थी, और प्रधानमंत्री मोदी जी के नेतृत्व में यह आगे बढ़ा है। ऐसे ऐतिहासिक अवसर पर, जब हम राज्य की स्थापना के रजत जयंती और अटल निर्माण वर्ष मना रहे हैं, यह विज़न जनता को समर्पित किया जाना अत्यंत सार्थक है। उन्होंने कहा कि यह दस्तावेज जनभागीदारी का प्रतीक है, जिसमें प्रदेश के तीन करोड़ लोगों के सपने और संकल्प समाहित हैं। इसे तैयार करने में न केवल विशेषज्ञों और विभागों का सहयोग रहा, बल्कि वर्किंग ग्रुप्स, संभाग स्तरीय जनसंवाद और मोर सपना मोर विकसित छत्तीसगढ़ पोर्टल के माध्यम से जनता के सुझाव भी शामिल किए गए। मुख्यमंत्री ने कहा कि प्रधानमंत्री मोदी जी के दूरदर्शी नेतृत्व में जब भारत वैश्विक आशाओं का केंद्र बन चुका है, तब छत्तीसगढ़ भी विकसित भारत की दिशा में अग्रणी भूमिका निभाने को तैयार है। हम आतंकवाद और नक्सलवाद के विरुद्ध जीरो टॉलरेंस नीति के साथ विकास के नए कीर्तिमान रच रहे हैं। उन्होंने कहा कि ऊँचा लक्ष्य रखना और मेहनत करना हमने मोदी जी से सीखा है। पहले कहते थे मोदी हैं तो मुमकिन है, अब कहते हैं मोदी हैं तो निश्चित है – 2047 तक का लक्ष्य अब हमारी साझा दिशा है। मुख्यमंत्री ने इस बात पर विशेष बल दिया कि विकसित भारत की भव्य इमारत को ऊर्जावान बनाने में छत्तीसगढ़ पावर हाउस की भूमिका निभाएगा। हमारा स्टील, इस लक्ष्य को फौलादी बनाएगा। उन्होंने बताया कि स्टील उत्पादन को वर्ष 2030 तक 28 मिलियन टन से बढ़ाकर 45 मिलियन टन किया जाएगा, और यह गर्व का विषय है कि जम्मू-कश्मीर में चिनाब नदी पर बने देश के सबसे ऊंचे ब्रिज में छत्तीसगढ़ के स्टील का उपयोग हुआ है। इसी तरह, कोयला उत्पादन को 207 मिलियन टन से बढ़ाकर 437 मिलियन टन, विद्युत उत्पादन को वर्तमान 30 हजार मेगावाट से देश में शीर्ष स्थान तक पहुँचाया जाएगा। आयरन ओर उत्पादन को 46 से बढ़ाकर 100 मिलियन टन किया जाएगा। छत्तीसगढ़ देश का पहला राज्य बना है, जहां लिथियम खनिज ब्लॉक की सफल नीलामी हुई है। मुख्यमंत्री ने मल्टी-मॉडल कनेक्टिविटी को संसाधनों के प्रबंधन का सबसे अहम आधार बताया। उन्होंने कहा कि राज्य में वर्ष 1853 से 2014 तक केवल 1100 रूट किलोमीटर रेलमार्ग बने थे, जिन्हें वर्ष 2030 तक दोगुना किया जाएगा। बोधघाट परियोजना जैसी योजनाओं से सिंचाई और बिजली उत्पादन को नया विस्तार मिलेगा। उन्होंने बताया कि यह विज़न स्पष्ट कार्ययोजना के साथ तैयार किया गया है, जिसमें 2030 तक अल्पकालिक, 2035 तक मध्यकालिक और वर्ष 2047 तक दीर्घकालिक लक्ष्य रखे गए हैं।  राज्य के 13 प्रमुख क्षेत्रों में 10 मिशनों के माध्यम से संतुलित विकास किया जाएगा मुख्यमंत्री ने कहा कि इस अंजोर विज़न @2047 के माध्यम से राज्य के 13 प्रमुख क्षेत्रों में 10 मिशनों के माध्यम से आर्थिक, सामाजिक और सांस्कृतिक विकास को संतुलित रूप से आगे बढ़ाया जाएगा, इनमें  कृषि, मैन्युफैक्चरिंग, पर्यटन, संस्कृति, लॉजिस्टिक्स और आईटी से लेकर जैविक खेती और शिक्षा तक का समावेश है। रायपुर की भौगोलिक स्थिति को ध्यान में रखते हुए लॉजिस्टिक्स नीति तैयार की गई है जो ई-कॉमर्स को गति देगी। राज्य की जीडीपी 5 लाख करोड़ रूपए से बढ़ाकर 75 लाख करोड़ करने का लक्ष्य उन्होंने बताया कि इस विजन के माध्यम से राज्य की जीडीपी को 5 लाख करोड़ रूपए से वर्ष 2030 तक 11 लाख करोड़ और वर्ष 2047 तक 75 लाख करोड़ रुपए तक करने का महत्वाकांक्षी लक्ष्य है। कृषि आधारित अर्थव्यवस्था को मजबूती देने के लिए कृषि उन्नति मिशन, जैविक खेती, निर्यात आधारित संभावनाएं और किसान सम्मान निधि जैसी योजनाएं प्रभावी होंगी। वर्ष 2047 तक किसानों की आय में 10 गुना से अधिक वृद्धि का लक्ष्य रखा गया है। स्वास्थ्य, शिक्षा और जीवन प्रत्याशा के क्षेत्र में भी ठोस योजनाएँ बनाई गई हैं। आयुष्मान भारत योजना के तहत 87 प्रतिशत लोग पहले ही कवर हो चुके हैं, लक्ष्य 100 प्रतिशत का है। नवा रायपुर में मेडीसिटी, बस्तर-सरगुजा में सुपर स्पेशियलिटी अस्पताल तथा राज्य में कई मेडिकल कॉलेज स्थापित किए जा रहे हैं। युक्तियुक्तकरण के बाद अब कोई भी विद्यालय शिक्षकविहीन नहीं है। 5 हजार नई शिक्षक भर्ती, 1 हजार पीएमस्कूल, 36 आदर्श कॉलेज और ग्लोबल स्किल यूनिवर्सिटी की स्थापना पर काम हो रहा है। मुख्यमंत्री ने कहा कि राज्य में बेरोजगारी दर 2.7 प्रतिशत है, जिसे 2047 तक 1 प्रतिशत से कम लाने का लक्ष्य है। पैन-आईआईटी संस्थानों के सहयोग से स्किल डेवलपमेंट को नई दिशा दी जा रही है। आईटी सेक्टर में सेमीकंडक्टर प्लांट और एआई डाटा सेंटर पार्क विकसित किए जा रहे हैं। पिछले डेढ़ वर्षों में 350 से अधिक नीतिगत और प्रशासनिक सुधार किए गए हैं और 6.75 लाख करोड़ के निवेश प्रस्ताव प्राप्त हुए हैं। सिंगल विंडो सिस्टम 2.0 से उद्योगों को एक क्लिक पर मंजूरी उन्होंने बताया कि सिंगल विंडो सिस्टम 2.0 के माध्यम से उद्योगों को एक क्लिक पर मंजूरी दी जा रही है। पर्यटन को … Read more

मुख्यमंत्री साय बोले – बस्तर का हर गांव बनेगा आपका अच्छा गांव

  मुख्यमंत्री साय ने बीजापुर के युवा ग्रेजुएट पंच का बढ़ाया हौसला बीजापुर जिले के युवाओं से मुख्यमंत्री साय ने की आत्मीय मुलाकात रायपुर मुख्यमंत्री विष्णुदेव साय ने आज यहां छत्तीसगढ़ विधानसभा परिसर में स्वामी विवेकानंद युवा प्रोत्साहन योजना के तहत राजधानी रायपुर के भ्रमण पर आए बीजापुर जिले युवाओं से मुलाकात की। मुख्यमंत्री श्री साय इन युवाओं से बहुत आत्मीयता से मिले और उनसे राजधानी रायपुर भ्रमण के अनुभवों को जाना। मुख्यमंत्री ने कहा कि बस्तर का हर गांव आपका अच्छा गांव बनेगा। बस्तर के विकास को अब कोई नहीं रोक सकता। बस्तर का युवा आज आत्मविश्वास से भरा है। मुख्यमंत्री श्री साय ने बीजापुर जिले की विभिन्न ग्राम पंचायतों से आये युवाओं से उनका हाल-चाल जाना और आत्मीय चर्चा की। मुख्यमंत्री ने युवाओं से पूछा कि वे विगत डेढ़ वर्षों में क्या परिवर्तन महसूस कर रहे हैं ? युवाओं ने बताया कि बहुत परिवर्तन है। अब हमारे क्षेत्र में सड़कें बन रही हैं, बिजली की व्यवस्था हुई है और आंगनबाड़ी केंद्र भी खुल रहे हैं। मुख्यमंत्री ने कहा कि बस्तर का विकास हमारी सरकार की प्राथमिकता है। मुख्यमंत्री श्री साय ने युवाओं से उनकी पढ़ाई-लिखाई और गतिविधियों के विषय में जानकारी ली। बीजापुर के एक युवा ने मुख्यमंत्री श्री साय को बताया कि वह जूलॉजी विषय से बीएससी कर चुका है और वर्तमान में वह अपने गांव का पंच है। उसका एक साथी भी पंच निर्वाचित हुआ है। मुख्यमंत्री ने इन युवाओं के जज्बे की सराहना की और उनका हौसला बढ़ाया। इस दौरान उपमुख्यमंत्री श्री विजय शर्मा ने बच्चों से पूछा- कितने बच्चे इंस्टाग्राम चलाते हैं ? जब इस प्रश्न पर कई बच्चों ने हाथ उठाया तो मुख्यमंत्री ने आश्चर्यमिश्रित मुस्कान के साथ कहा- अब बस्तर के हमारे बच्चे भी समय के साथ हाईटेक हो रहे हैं। ये सुनकर ठहाके गूंज उठे। मुख्यमंत्री ने इस बात पर खुशी जाहिर की कि युवा अपडेट हैं और तकनीक को समझ रहे हैं। युवाओं ने बताया कि उनके गांव में अब मोबाइल टावर भी लग रहे हैं। युवाओं ने मुख्यमंत्री को बताया कि वे कल राजधानी रायपुर आये हैं। उन्होंने मुक्तांगन, जंगल सफारी सहित अन्य जगहें देखी हैं। मुख्यमंत्री श्री साय ने युवाओं से कहा कि वे राजधानी रायपुर के भ्रमण के अनुभव का पूरा लाभ उठाएं। उल्लेखनीय है कि स्वामी विवेकानंद युवा प्रोत्साहन योजना के तहत बीजापुर जिले के नियद नेल्लानार ग्राम पंचायतों के 100 युवा राजधानी रायपुर के भ्रमण पर आये हैं। जिसके अंतर्गत  आज ये युवा छत्तीसगढ़ विधानसभा पहुंचे। इस अवसर पर वनमंत्री श्री केदार कश्यप, विधायक श्री किरण देव, श्री संपत अग्रवाल, श्री ईश्वर साहू सहित गणमान्यजन उपस्थित थे।

खाद-बीज की उपलब्धता से खेती-किसानी का काम जोरों पर

सरकार की मदद से खेती में खुशहाली, किसानों का कहना-अब खेती मुनाफे का सौदा बिलासपुर, खरीफ सीजन में इन दिनों खेती किसानी ने जोर पकड़ लिया है। रोपा और बियासी का काम तेजी से जारी है। ऐसे में शासन द्वारा समय पर खाद बीज की उपलब्धता से किसानों का उत्साह दोगुना हो गया है। बिल्हा ब्लॉक के बैमा-नगोई के किसानों के चेहरे भी खिल उठे है। उन्हे न तो लंबी कतारों में लगना पड़ रहा है और न ही मंहगे दामों पर बाजारों से बीज या खाद खरीदने की मजबूरी है। नगोई सहकारी समिति में खाद लेने आए किसान प्रदीप कुमार शास्त्री भी इस बार अच्छी फसल को लेकर आश्वस्त है। सरकारी मदद ने उनके उत्साह को और बढ़ा दिया है। श्री शास्त्री ने बताया कि वे 6 एकड़ में खेती किसानी करते है। समिति से खाद-बीज आसानी से मिल गया। बिना किसी लंबी कतार के उन्हें यूरिया, डीएपी, नैनो डीएपी मिला है। समय पर खाद बीज की उपलब्धता से उन्हें बड़ी मदद मिली है। यह खाद रियायती दर पर होने के साथ ही गुणवत्ता में भी बेहतर है। उन्हें पूरी उम्मीद है कि इस बार बेहतर पैदावर होगी। कुछ इसी प्रकार की खुशी जाहिर करते हुए किसान श्री कालिका प्रसाद पाण्डेय ने बताया कि वे 4 एकड़ में खेती किसानी करते है। इस बार बारिश भी अच्छी हुई है और सरकार द्वारा समय पर खाद बीज उपलब्ध कराया गया है। उन्होंने बताया कि परिस्थितियां अनुकूल होने के कारण वे जोर-शोर से खेती किसानी में जुट गए है। इसी गांव के श्री राजेन्द्र प्रसाद गुरूदीवान ने बताया कि समिति से खाद बीज लेने में किसी प्रकार की कोई दिक्कत नहीं हो रही है। समिति द्वारा किसानों के लिए एक वाट्सअप ग्रुप बनाया गया है जिसमें सारी जानकारी मिल जाती है और वे समिति आकर खाद बीज ले लेते है। किसानों ने बताया कि उन्हें पीएम किसान सम्मान निधि, कृषक उन्नति योजना का भी लाभ मिल रहा है। किसानों ने कहा कि सरकारी मदद से खेती किसानी अब मुनाफे का सौदा बन गया है।

भ्रष्टाचार पर करारा प्रहार: ACB ने पकड़ा घूसखोर पटवारी

जांजगीर-चांपा छत्तीसगढ़ के लगातार भ्रष्टाचार पर एंटी करप्शन ब्यूरो (ACB) की टीम कार्रवाई कर रही है। इसी कड़ी में आज ACB की टीम ने जांजगीर-चांपा जिले के पटवारी कार्यालय में छापामार कार्रवाई करते हुए एक पटवारी को रिश्वत लेते हुए रंगे हाथ गिरफ्तार किया है। पुतपुरा और धाराशिव गांव के प्रभारी पटवारी बाल मुकुंद राठौर को 20 हजार रुपये की घूस लेते हुए पकड़ा गया। जानकारी के अनुसार, जांजगीर पुरानी बस्ती के रहने वाले सत्येंद्र कुमार राठौर ने एंटी करप्शन ब्यूरो से पटवारी के खिलाफ शिकायत की थी। प्रार्थी सत्येंद्र कुमार राठौर ने अपनी शिकायत में बताया कि उनकी पुश्तैनी 4 एकड़ से अधिक जमीन पुटपुरा गांव में है, जिसका खाता बनवाने के लिए अपनी बहनों का हक छोड़ आवेदन पेश कर अपने नाम कराने के लिए डेढ़ साल से पटवारी का चक्कर काट रहा था और पटवारी उसे घुमाता रहा। पटवारी ने खाता दुरुस्त करने के एवज में 20 हजार रुपये घूस की मांग की। पटवारी के घूस मांगने और काम नहीं करने से परेशान होकर ACB से शिकायत की। सत्येंद्र राठौर की शिकायत की पुष्टि करने के बाद रेड की तैयारी की गई, और आज दोपहर 12 बजे सत्येंद्र राठौर पटवारी कार्यालय पहुंचकर पटवारी बाल मुकुंद राठौर को 20 हजार रुपये दिए। पटवारी द्वारा घूस की राशि लेने के बाद ACB की टीम ने तत्काल रेड की कार्रवाई की और पटवारी के पास से केमिकल लगे नोट बरामद किए। ACB थाना प्रभारी योगेश कुमार राठौर ने बताया कि विधिवत कार्रवाई करते हुए आरोपी पटवारी बाल मुकुंद राठौर को हिरासत में ले लिया गया है और न्यायिक हिरासत में भेज दिया गया है।

गायों पर टूटा मौत का पहिया: ट्रक की टक्कर से 6 की जान गई, कई की हालत गंभीर

सूरजपुर तेज रफ्तार ट्रक अनियंत्रित होकर सड़क किनारे बैठे मवेशियों को रौंद दिया. इस हादसे में 6 गायों की मौके पर ही मौत हो गई. वहीं कई मवेशी घायल हुए हैं. घटना के बाद ट्रक चालक फरार हो गया. यह घटना अंबिकापुर-बनारस मार्ग पर गोंदा गांव के पास हुई. पुलिस आरोपी चालक की तलाश में जुटी है. किसान सुरेश कुमार ने बताया कि सड़क किनारे 19 गाय बैठे थे. ट्रक चढ़ने से 6 गाय की मौके पर ही मौत गई. वहीं कई गाय घायल हुए हैं. घटना के बाद ट्रक चालक गाड़ी छोड़कर फरार हो गया. घटना की जानकारी मिलने के बाद प्रतापपुर पुलिस मौके पर पहुंची और दुर्घटनाग्रस्त ट्रक को जब्त कर पुलिस आरोपी चालक की तलाश में जुटी है.

सुपर स्वच्छता लीग में छत्तीसगढ़ के तीन शहरों ने बनाई जगह, रायपुर राज्य का प्रॉमिसिंग स्वच्छ शहर

मुख्यमंत्री विष्णु देव साय और उप मुख्यमंत्री अरुण साव ने राष्ट्रीय स्तर पर पुरस्कृत नगरीय निकायों को दी बधाई रायपुर. केन्द्रीय आवास और शहरी कार्य मंत्रालय के स्वच्छ सर्वेक्षण 2024-25 में छत्तीसगढ़ के सात शहरों ने अपनी स्वच्छता की चमक बिखेरी है। बिल्हा नगर पंचायत 20 हजार से कम आबादी वाले शहरों में अब देश का सबसे साफ-सुथरा शहर बन गया है। स्वच्छ सर्वेक्षण में 20 हजार से कम आबादी वाले शहरों की श्रेणी में बिल्हा ने देशभर में प्रथम स्थान हासिल किया है। तीन लाख से दस लाख जनसंख्या वाले शहरों में बिलासपुर को पूरे देश में दूसरा और 20 हजार से 50 हजार आबादी वाले शहरों में कुम्हारी को तीसरा स्थान मिला है। राष्ट्रपति श्रीमती द्रौपदी मुर्मु ने आज नई दिल्ली के विज्ञान भवन में आयोजित भव्य समारोह में इन तीनों नगरीय निकायों के साथ ही स्वच्छ सर्वेक्षण में उत्कृष्ट प्रदर्शन करने वाले राज्य के कुल सात नगरीय निकायों को पुरस्कृत किया। उप मुख्यमंत्री तथा नगरीय प्रशासन एवं विकास मंत्री श्री अरुण साव, संबंधित निकायों के महापौर, अध्यक्षों और अधिकारियों ने ये पुरस्कार ग्रहण किए। केन्द्रीय आवास और शहरी कार्य मंत्री श्री मनोहर लाल और केन्द्रीय आवास और शहरी कार्य राज्य मंत्री श्री तोखन साहू भी पुरस्कार समारोह में शामिल हुए। भारत सरकार के स्वच्छ सर्वेक्षण 2024-25 में अंबिकापुर, पाटन, विश्रामपुर और रायपुर ने भी राष्ट्रीय स्तर पर छत्तीसगढ़ का मान बढ़ाया है। स्वच्छ सर्वेक्षण में पहली बार शामिल नई श्रेणी 'स्वच्छता सुपर लीग' (एसएसएल) में अंबिकापुर, पाटन और विश्रामपुर ने जगह बनाई है। यह सम्मान उन शहरों को दिया गया, जो पिछले तीन वर्षों में कम से कम एक बार शीर्ष तीन में रहे हैं और वर्तमान वर्ष में शीर्ष 20 शहरों में शामिल हैं। अंबिकापुर ने 50 हजार से तीन लाख जनसंख्या श्रेणी में तथा पाटन और विश्रामपुर ने 20 हजार से कम आबादी वाले शहरों की श्रेणी में एसएसएल में अपना स्थान सुनिश्चित किया है। इनके अतिरिक्त, राजधानी रायपुर को छत्तीसगढ़ का 'प्रॉमिसिंग (Promising) स्वच्छ शहर' का पुरस्कार मिला है। मुख्यमंत्री श्री विष्णु देव साय ने सभी विजेता नगरीय निकायों को बधाई देते हुए कहा कि यह उपलब्धि राज्य के लिए गर्व का क्षण है। उन्होंने इन शहरों में स्वच्छता के प्रति नागरिकों, स्थानीय निकायों और प्रशासन के सामूहिक प्रयासों की सराहना करते हुए कहा कि ये पुरस्कार राज्य के अन्य शहरों को भी अपने शहर को सुंदर और स्वच्छ बनाने के लिए प्रेरित करेंगे। उप मुख्यमंत्री तथा नगरीय प्रशासन एवं विकास मंत्री श्री अरुण साव ने भी आज पुरस्कृत नगरीय निकायों को बधाई दी और कहा कि यह छत्तीसगढ़ के लिए केवल एक सम्मान ही नहीं, बल्कि स्वच्छता के प्रति निरंतर प्रयासों का प्रमाण है। आने वाले समय में अन्य नगरीय निकायों को भी स्वच्छता के लिए राष्ट्रीय पुरस्कार प्राप्त होंगे। शहरी सरकारों से लेकर राज्य और केंद्र की सरकार शहरों को स्वच्छ, सुंदर और सुविधापूर्ण बनाने के लिए कई नवाचारों के साथ सतत काम कर रहे हैं।

बदहाल NH 343 पर सफर नहीं सज़ा, हर मोड़ पर मौत का डर

बलरामपुर छत्तीसगढ़ को झारखंड से जोड़ने वाले महत्वपूर्ण राष्ट्रीय राजमार्ग-343 (NH 343) की हालत बरसात के दिनों में बद से बदतर हो चुकी है. गड्ढों में सड़क या सड़क पर गड्ढे इसका अनुमान लगाना मुश्किल है. हालत यह है कि रोज सड़क पर बैलगाड़ी से भी कम रफ्तार में वाहनों की आवाजाही और दुर्घटनाग्रस्त वाहनों की लगातार लगने वाले जाम की वजह से बस चालक बायपास से होते हुए बस चलाने को मजबूर हैं. अंबिकापुर से रामानुजगंज तक करीब 120 किलोमीटर का सफर अब जगह- जगह बने जानलेवा गड्ढों के कारण कई घंटों में पूरा होता है. सबसे ज्यादा खराब स्थिति बलरामपुर से रामानुजगंज तक की है, जिससे रायपुर-बिलासपुर रूट की सारी बस का परिचालन बंद हो गया है. कुछ बसें रूट डायवर्ट कर वाड्रफनगर होकर चलने को मजबूर हैं, जिससे राजधानी जाने के लिए बलरामपुर के लोगों को सोचना पड़ रहा है. बस के लिए करना पड़ता है घंटों इंतजार जर्जर सड़क की वजह से सार्वजनिक परिवहन व्यवस्था चरमरा गई है, यात्रियों को जहां पहले हर 10 मिनट में बसें मिला करती थीं, अब यात्रियों को 2-2 घंटे तक बस का इंतजार करना पड़ रहा है. कई बसें इस मार्ग पर चलना ही बंद कर चुकी हैं. जो वाहन चल भी रहे हैं, उन्हें भारी नुकसान उठाना पड़ रहा है. खनिज परिवहन पर भी असर दरअसल, नेशनल हाइवे की बदहाली के पीछे बड़ी वजह सड़क पर रोजाना खनिज संपदा से लदे भारी ट्रकों का आवागमन है. लेकिन सड़क खराब होने के बाद अब इनका चलना भी दूभर हो गया है. जर्जर सड़क की वजह से सिर्फ आर्थिक नुकसान ही नहीं हो रहा है, बल्कि दुर्घटनाओं की संख्या में भी इज़ाफा हुआ है. जवाब देने से कतरा रहे जनप्रतिनिधि जिला प्रशासन से लेकर जनप्रतिनिधि भी मीडिया के सामने जवाब देने में कतरा रहे हैं. खतरनाक हो चुकी सड़क पर रात को चलना नामुमकिन हो गया है. कई बार ट्रक और छोटे वाहन भी पलट जाते हैं जिससे लोगों को अपनी जान गंवानी पड़ रही है. लोगों का कहना है कि अगर सरकार नई सड़क नहीं बना सकती, तो कम से कम इन गड्ढों को तत्काल भरने की व्यवस्था की जाए जिससे आवागमन सुचारू हो सके. जनता का सवाल — कब होगा सुधार? लोगों का साफ कहना है कि यह मार्ग कभी प्रदेश के विकास की पहचान था, लेकिन अब वह जनता की परेशानी का कारण बन चुका है सवाल यह है कि क्या प्रशासन तब तक सोता रहेगा जब तक कोई बड़ा हादसा न हो जाए. खराब रोड पर बस चलाने का दबाव छत्तीसगढ़ यातायात महासंघ प्रदेश अध्यक्ष सैय्यद अनवर अली ने लल्लूराम डॉट कॉम से चर्चा में कहा कि रामानुजगंज जिला मुख्यालय होने के बाद भी रोड का सुधार नहीं हो रहा है. धरना-प्रदर्शन, चक्काजाम के बाद भी कलेक्टर खराब रोड पर बस चलाने का दबाव बना रहे हैं. ऐसी में अगर गाड़ियां पलटती हैं, जान-माल की क्षति होती है, तो इसका जिम्मेदार कौन होगा. परिवहन विभाग को बता दिया गया है कि जब तक मार्ग की मरम्मत नहीं होगी, तब तक मार्ग बदलकर बस संचालन किया जाएगा. मौसम खुलने पर करेंगे मरम्मत बलरामपुर अपर कलेक्टर आरएस लाल ने लल्लूराम डॉट कॉम से चर्चा में कहा कि इस बात को ठेकेदार और संबंध विभाग के अधिकारियों के साथ कलेक्टर की चर्चा हुई है. बरसात के दिनों में आवागमन बाधित न हो इसकी व्यवस्था करेंगे. बहरहाल, लगातार बारिश होने की वजह से सुधार के बाद भी सड़क पर गड्ढा यथावत हो जा रहा है. जैसे ही थोड़ा सा मौसम खुलेगा, तब गड्ढों को ठीक तरह से भरेंगे, जिससे आवागमन सुचारू तरीके से हो सके.

पंचायत प्रतिनिधि लापता: इलाज का बहाना बनाकर घर से निकली, थाने में दर्ज हुई रिपोर्ट

कोंडागांव छत्तीसगढ़ के कोंडागांव जिले में एक 45 वर्षीय महिला जनपद सदस्य अचानक लापता हो गई है. महिला फरसगांव जनपद पंचायत की सदस्य है. वह 8 दिन पहले अपने घर से बिना कुछ कहे निकली थी और फिर न वो घर लौटी और न ही उसकी कोई खबर मिल सकी है. महिला का फोन भी 8 दिनों से स्विच ऑफ है. जानकारी के मुताबिक, फरसगांव जनपद पंचायत के वार्ड क्रमांक 8 से जनपद सदस्य रैयमती कोर्राम (45 वर्ष) के पति ने पुलिस में आज गुमशूदगी की शिकायत दर्ज कराई है. उसने बताया कि रैयमती 9 जुलाई की दोपहर 3:30 बजे घर से बिना कुछ बताए निकली और बाद में फोन कर के कहा कि वह जिला अस्पताल में इलाज कराने के लिए गई हुई है. लेकिन इसके बाद से वह अब तक घर नहीं लौटी. पिरजनों ने कई बार उससे संपर्क करने की कोशिश की, लेकिन फोन नंबर अब तक स्विच ऑफ आ रहा है. महिला के वापिस घर नहीं आने पर परिजनों ने जिला अस्पताल जाकर पूछताछ की और सभी रिश्तेदारों से संपर्क कर पतासाजी की. लेकिन कहीं से रैयमती कोई खबर नहीं मिली. अंत में महिला के पति ने फरसगांव थाने में गुमशूदगी की शिकायत दर्ज कराई है. शिकायतकर्ता (पति) ने बताया कि महिला ने 9 जुलाई को लाल रंग की साड़ी पहनी थी. उसने बैग में कपड़े रखे थे, गले में सोने का मंगलसूत्र, कानों में सोने के टॉप्स और नाक में सोने की फूली पहनी हुई थी. उनका रंग सांवला और कद करीब 5 फुट है. वह हिंदी, हल्बी और छत्तीसगढ़ी भाषा बोलने में सक्षम हैं. पुलिस जांच में जुटी फिलहाल पुलिस मामला दर्ज कर सुराग जुटाने में लगी है. परिजनों ने भी आमजन से अपील की है कि यदि रैयमती कोर्राम के बारे में कोई जानकारी मिले तो नजदीकी पुलिस थाने में सूचना दें.

अंधेरे से उजाले की ओर: पूवर्ती गांव के अर्जुन की उड़ान

रायपुर नक्सलवाद से प्रभावित बस्तर अंचल का एक नाम जो आज उम्मीद और बदलाव की मिसाल बनकर उभरा है – वह है माडवी अर्जुन। सुकमा जिले के अति-दुर्गम और माओवादी हिंसा से वर्षों त्रस्त रहे पूवर्ती गांव के इस बालक ने जवाहर नवोदय विद्यालय, पेंटा (दोरनापाल) में छठवीं कक्षा में चयन पाकर इतिहास रच दिया है। यह केवल एक छात्र की जीत नहीं, बल्कि उस उम्मीद का संकेत है जो अब बस्तर के कोने-कोने में अंकुरित हो रही है।  माडवी अर्जुन जिस पूवर्ती गांव का रहने वाला है , दरअसल वह नक्सलियों के कमांडर हिड़मा का पैतृक गांव है। एक दौर था, जब  पूवर्ती नक्सलियों का गढ़ माना जाता था। यहाँ माओवादी जन अदालत लगाकर आतंक और ग्रामीणों भाग्य का फैसला सुनाते थे। अब वही पूवर्ती गांव,  शिक्षा और विकास के नए सूरज की किरणें देख रहा है। अर्जुन की इस उपलब्धि ने यह दिखा दिया है कि परिस्थितियां कितनी भी कठिन हों, अगर अवसर और मार्गदर्शन मिले तो सफलता जरूर मिलती है। अर्जुन वर्तमान में बालक आश्रम सिलगेर में पढ़ाई कर रहा था। उसके घर में न बिजली है, न पक्की छत। उसके माता-पिता खेती और मजदूरी कर किसी तरह घर चलाते हैं। फिर भी, अर्जुन ने कठिन परिस्थितियों को पीछे छोड़ते हुए अपनी मेहनत और आश्रम शिक्षकों के समर्पण से यह उपलब्धि अर्जित की। बीते डेढ़ वर्षों में छत्तीसगढ़ सरकार द्वारा चलाए जा रहे नक्सल उन्मूलन अभियान ने बस्तर के दूरस्थ क्षेत्रों में परिवर्तन की नींव रखी है। पूवर्ती जैसे क्षेत्र जहां पहले सड़क, स्वास्थ्य, शिक्षा, बिजली जैसी मूलभूत सुविधाएं नहीं थीं, अब वहां सड़क निर्माण, सुरक्षा बलों के कैंप, गुरुकुल विद्यालय, स्वास्थ्य सेवाएं और उचित मूल्य दुकानें शुरू हो चुकी हैं। पूवर्ती में अब बच्चों की पढ़ाई के लिए सुरक्षा बलों की देखरेख में चल रहे  गुरुकुल ने एक प्रेरणादायी माहौल देना शुरू किया है। अर्जुन की सफलता इसी सतत प्रयास की पहली बड़ी उपलब्धि है। जिला कलेक्टर श्री देवेश ध्रुव ने कहा कि पूवर्ती जैसे दुर्गम और माओवाद प्रभावित गांव से नवोदय विद्यालय में चयन, न केवल अर्जुन की मेहनत का परिणाम है, बल्कि यह जिले की शिक्षा व्यवस्था में सकारात्मक परिवर्तन का भी संकेत है। हम हर बच्चे को आगे बढ़ाने का मौका देना चाहते हैं। मुख्यमंत्री श्री विष्णु देव साय ने कहा है कि माडवी अर्जुन की सफलता छत्तीसगढ़ की बदलती तस्वीर का प्रतीक है। यह उस नव-छत्तीसगढ़ की झलक है, जहाँ अंधेरे की जगह अब उजाले की बातें हो रही हैं। पूवर्ती जैसे गांव से राष्ट्रीय स्तर के नवोदय स्कूल  तक का सफर दर्शाता है कि हमने जो बीज शिक्षा, सुरक्षा और विकास का बोया है, वह अब फल देने लगा है। अर्जुन को मेरी ओर से ढेरों बधाई और शुभकामनाएं। अब पूवर्ती क्षेत्र से केवल एक अर्जुन नहीं, हजारों अर्जुन निकलेंगे और छत्तीसगढ़ के भविष्य को संवारेंगे। राज्य सरकार हर बच्चे के सपनों को पंख देने के लिए कटिबद्ध है। माडवी अर्जुन की यह यात्रा केवल एक छात्र की कहानी नहीं, बल्कि यह उस बदलाव की दास्तान है, जिसे बस्तर जी रहा है। नक्सलवाद की दीवारें अब दरक रही हैं और शिक्षा की रोशनी बस्तर के घर-आंगनों में फैल रही है।बदलते बस्तर की यह शुरुआत है। अब अर्जुनों की कतार लगेगी और पूवर्ती जैसे गांव विकास की नई इबारत लिखेंगे।

अंधेरे से उजाले की ओर: पूवर्ती गांव के अर्जुन की उड़ान

रायपुर नक्सलवाद से प्रभावित बस्तर अंचल का एक नाम जो आज उम्मीद और बदलाव की मिसाल बनकर उभरा है – वह है माडवी अर्जुन। सुकमा जिले के अति-दुर्गम और माओवादी हिंसा से वर्षों त्रस्त रहे पूवर्ती गांव के इस बालक ने जवाहर नवोदय विद्यालय, पेंटा (दोरनापाल) में छठवीं कक्षा में चयन पाकर इतिहास रच दिया है। यह केवल एक छात्र की जीत नहीं, बल्कि उस उम्मीद का संकेत है जो अब बस्तर के कोने-कोने में अंकुरित हो रही है।  माडवी अर्जुन जिस पूवर्ती गांव का रहने वाला है , दरअसल वह नक्सलियों के कमांडर हिड़मा का पैतृक गांव है। एक दौर था, जब  पूवर्ती नक्सलियों का गढ़ माना जाता था। यहाँ माओवादी जन अदालत लगाकर आतंक और ग्रामीणों भाग्य का फैसला सुनाते थे। अब वही पूवर्ती गांव,  शिक्षा और विकास के नए सूरज की किरणें देख रहा है। अर्जुन की इस उपलब्धि ने यह दिखा दिया है कि परिस्थितियां कितनी भी कठिन हों, अगर अवसर और मार्गदर्शन मिले तो सफलता जरूर मिलती है। अर्जुन वर्तमान में बालक आश्रम सिलगेर में पढ़ाई कर रहा था। उसके घर में न बिजली है, न पक्की छत। उसके माता-पिता खेती और मजदूरी कर किसी तरह घर चलाते हैं। फिर भी, अर्जुन ने कठिन परिस्थितियों को पीछे छोड़ते हुए अपनी मेहनत और आश्रम शिक्षकों के समर्पण से यह उपलब्धि अर्जित की। बीते डेढ़ वर्षों में छत्तीसगढ़ सरकार द्वारा चलाए जा रहे नक्सल उन्मूलन अभियान ने बस्तर के दूरस्थ क्षेत्रों में परिवर्तन की नींव रखी है। पूवर्ती जैसे क्षेत्र जहां पहले सड़क, स्वास्थ्य, शिक्षा, बिजली जैसी मूलभूत सुविधाएं नहीं थीं, अब वहां सड़क निर्माण, सुरक्षा बलों के कैंप, गुरुकुल विद्यालय, स्वास्थ्य सेवाएं और उचित मूल्य दुकानें शुरू हो चुकी हैं। पूवर्ती में अब बच्चों की पढ़ाई के लिए सुरक्षा बलों की देखरेख में चल रहे  गुरुकुल ने एक प्रेरणादायी माहौल देना शुरू किया है। अर्जुन की सफलता इसी सतत प्रयास की पहली बड़ी उपलब्धि है। जिला कलेक्टर श्री देवेश ध्रुव ने कहा कि पूवर्ती जैसे दुर्गम और माओवाद प्रभावित गांव से नवोदय विद्यालय में चयन, न केवल अर्जुन की मेहनत का परिणाम है, बल्कि यह जिले की शिक्षा व्यवस्था में सकारात्मक परिवर्तन का भी संकेत है। हम हर बच्चे को आगे बढ़ाने का मौका देना चाहते हैं। मुख्यमंत्री श्री विष्णु देव साय ने कहा है कि माडवी अर्जुन की सफलता छत्तीसगढ़ की बदलती तस्वीर का प्रतीक है। यह उस नव-छत्तीसगढ़ की झलक है, जहाँ अंधेरे की जगह अब उजाले की बातें हो रही हैं। पूवर्ती जैसे गांव से राष्ट्रीय स्तर के नवोदय स्कूल  तक का सफर दर्शाता है कि हमने जो बीज शिक्षा, सुरक्षा और विकास का बोया है, वह अब फल देने लगा है। अर्जुन को मेरी ओर से ढेरों बधाई और शुभकामनाएं। अब पूवर्ती क्षेत्र से केवल एक अर्जुन नहीं, हजारों अर्जुन निकलेंगे और छत्तीसगढ़ के भविष्य को संवारेंगे। राज्य सरकार हर बच्चे के सपनों को पंख देने के लिए कटिबद्ध है। माडवी अर्जुन की यह यात्रा केवल एक छात्र की कहानी नहीं, बल्कि यह उस बदलाव की दास्तान है, जिसे बस्तर जी रहा है। नक्सलवाद की दीवारें अब दरक रही हैं और शिक्षा की रोशनी बस्तर के घर-आंगनों में फैल रही है।बदलते बस्तर की यह शुरुआत है। अब अर्जुनों की कतार लगेगी और पूवर्ती जैसे गांव विकास की नई इबारत लिखेंगे।