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हजारों पंचायतों की बदली तस्वीर

रायपुर छत्तीसगढ़ में बेटियों की सुरक्षा, शिक्षा और सम्मान को केंद्र में रखकर शुरू किया गया बाल विवाह मुक्त छत्तीसगढ़ अभियान अब सामाजिक बदलाव की बड़ी मिसाल बनती जा रही है। मुख्यमंत्री श्री विष्णु देव साय के नेतृत्व में राज्य सरकार ने इस अभियान को केवल सरकारी योजना तक सीमित न रखते हुए जनभागीदारी का व्यापक आंदोलन बना दिया है। गांव-गांव में जागरूकता और सामाजिक सहभागिता के जरिए बाल विवाह जैसी कुरीति पर प्रभावी नियंत्रण की दिशा में लगातार ठोस परिणाम सामने आ रहे हैं। 10 मार्च 2024 से शुरू हुए इस अभियान का उद्देश्य सिर्फ बाल विवाह रोकना नहीं, बल्कि समाज में बेटियों के प्रति सकारात्मक सोच विकसित करना भी है। महिला एवं बाल विकास मंत्री  लक्ष्मी राजवाड़े के मार्गदर्शन में आंगनबाड़ी कार्यकर्ता, पंचायत प्रतिनिधि, शिक्षक, मितानिनें और महिला स्व-सहायता समूह लगातार जमीनी स्तर पर लोगों को जागरूक करने में जुटे हुए हैं। यही वजह है कि अभियान अब प्रशासनिक कार्यक्रम से आगे बढ़कर सामाजिक चेतना का हिस्सा बनता दिखाई दे रहा है। राज्य सरकार ने वर्ष 2028-29 तक पूरे छत्तीसगढ़ को बाल विवाह मुक्त बनाने का लक्ष्य तय किया है। चरणबद्ध योजना के तहत 2025-26 तक 40 प्रतिशत, 2026-27 तक 60 प्रतिशत, 2027-28 तक 80 प्रतिशत और 2028-29 तक सभी ग्राम पंचायतों तथा नगरीय निकायों को बाल विवाह मुक्त घोषित करने की तैयारी है। अभियान की प्रगति भी उत्साहजनक रही है।  31 मार्च 2026 तक राज्य की 11 हजार 693 ग्राम पंचायतों में से 7 हजार 498 पंचायतें बाल विवाह मुक्त घोषित की जा चुकी हैं, जो कुल पंचायतों का लगभग 64 प्रतिशत है। वहीं 196 नगरीय निकायों में से 85 निकाय इस श्रेणी में शामिल हो चुके हैं। राज्य के बालोद जिले ने इस दिशा में सबसे बड़ी उपलब्धि हासिल करते हुए खुद को पूर्णतः बाल विवाह मुक्त घोषित कराया है। प्रशासन और समाज के संयुक्त प्रयासों से मिली यह सफलता अब दूसरे जिलों के लिए प्रेरणा बन रही है। मुख्यमंत्री श्री विष्णु देव साय लगातार यह संदेश दे रहे हैं कि विकसित छत्तीसगढ़ की मजबूत नींव शिक्षित और आत्मनिर्भर बेटियां ही होंगी। इसी सोच के साथ सरकार बालिकाओं की शिक्षा, स्वास्थ्य, पोषण और सुरक्षा से जुड़ी योजनाओं को प्राथमिकता के साथ लागू कर रही है।  कम उम्र में विवाह होने से बालिकाओं की पढ़ाई प्रभावित होती है, स्वास्थ्य संबंधी जोखिम बढ़ते हैं और उनके भविष्य की संभावनाएं सीमित हो जाती हैं। यही कारण है कि अभियान के तहत किशोरियों और अभिभावकों को लगातार जागरूक किया जा रहा है ताकि समाज में स्थायी बदलाव लाया जा सके। पंचायत आधारित जनभागीदारी, सतत निगरानी और सामाजिक जागरूकता के प्रभावी मॉडल के कारण बाल विवाह मुक्त छत्तीसगढ़ अभियान अब राष्ट्रीय स्तर पर भी चर्चा का विषय बनता जा रहा है। राज्य सरकार का यह प्रयास केवल एक सामाजिक कुरीति को समाप्त करने तक सीमित नहीं है, बल्कि यह बेटियों के सम्मान और सशक्तिकरण का व्यापक संकल्प बनकर उभर रहा है।

लोक निर्माण विभाग के सचिव ने निर्माणाधीन कार्यों का निरीक्षण कर कार्यों की प्रगति की समीक्षा की

रायपुर  लोक निर्माण विभाग के सचिव श्री मुकेश कुमार बंसल ने आज संभागीय मुख्यालय दुर्ग में लोक निर्माण विभाग के दुर्ग परिक्षेत्र के मुख्य अभियंता, अधीक्षण अभियंता तथा कार्यपालन अभियंताओं की बैठक लेकर भवनों, सड़कों और पुलों के निर्माण की प्रगति की समीक्षा की। उन्होंने दुर्ग और पाटन में तीन कार्यस्थलों पर जाकर कार्यों का निरीक्षण भी किया। श्री बंसल ने बैठक में अधिकारियों को भविष्य की जरुरतों के अनुरूप सभी सड़क खंडों पर फ्लाई-ओवर्स की समग्र योजनाओं के साथ काम करने के निर्देश दिए। उन्होंने दुर्ग परिक्षेत्र के लोक निर्माण विभाग के सभी संभागों में प्रगतिरत कार्यों में तेजी लाते हुए समय-सीमा में काम पूर्ण करने को कहा। लोक निर्माण विभाग के प्रमुख अभियंता श्री वी.के. भतपहरी भी बैठक में मौजूद थे। लोक निर्माण विभाग के सचिव ने निविदा प्रक्रिया पूर्ण होने के 15 दिनों के भीतर चयनित एजेंसी से अनुबंध की कार्यवाही पूर्ण करने के निर्देश दिए। उन्होंने कहा कि गुणवत्ता और समय-सीमा में काम सरकार की सर्वोच्च प्राथमिकता है। विभागीय अधिकारी अपने सुव्यवस्थित और समयबद्ध कार्यों से नागरिकों और जनप्रतिनिधियों के बीच विभाग की अच्छी छवि बनाएं। सभी कार्यों को पूरी जवाबदेही, सक्रियता और गंभीरता से अंजाम दें। सचिव श्री बंसल ने सभी अधिकारियों को मुख्यालय में रहकर निर्माणाधीन कार्यों की पुख्ता और नियमित मॉनिटरिंग के निर्देश दिए। उन्होंने अधिकारियों को अपने कार्यक्षेत्र के सड़कों की स्थिति की पूरी जानकारी रखते हुए परफार्मेंस गारंटी वाली सड़कों में सुधार की जरूरत पर संबंधित ठेकेदारों से तत्काल मरम्मत कराने को कहा। उन्होंने मैदानी स्तर पर भू-अर्जन में आ रही बाधाओं से वरिष्ठ कार्यालयों को अवगत कराने को कहा, ताकि निराकरण की कार्यवाही उच्च स्तर पर यथासमय की जा सके। उन्होंने इनके निराकरण में किसी भी प्रकार की देरी नहीं करने को कहा। लोक निर्माण विभाग के सचिव ने शासकीय भवनों के निर्माण के लिए भूमि की उपलब्धता एवं उपयोगिता के अनुरूप हॉरिजांटल की जगह वर्टिकल निर्माण को बढ़ावा देते हुए आधुनिक डिजाइनों और नई तकनीकों से निर्माण की कार्ययोजना बनाने पर जोर दिया। उन्होंने भवनों के निर्माण के दौरान निर्माण सामग्री से लेकर टाइल्स, पुट्टी और पेंट अच्छी गुणवत्ता का उपयोग करने को कहा। उन्होंने भूजल स्तर को रिचार्ज करने सभी भवनों में रेन वॉटर हार्वेस्टिंग की भी व्यवस्था के निर्देश दिए। कार्यस्थलों का दौरा कर कार्यों की देखी प्रगति  लोक निर्माण विभाग के सचिव श्री मुकेश कुमार बंसल ने दुर्ग के साइंस कॉलेज में बन रहे 750 सीटर आडिटोरियम के कार्यों का बारीकी से निरीक्षण किया। उन्होंने कार्यों में तेजी लाते हुए जल्द इसका निर्माण पूर्ण करने के निर्देश दिए। उन्होंने जेल तिराहा से मिनीमाता चौक पुलगांव तक के सड़क चौड़ीकरण कार्य का भी अवलोकन किया और अधिकारियों को आवश्यक निर्देश दिए। लोक निर्माण विभाग के सचिव ने पाटन शासकीय कॉलेज के निर्माणाधीन भवन के कार्यों का भी निरीक्षण किया। उन्होंने यहां नए भवन में क्लास-रुम, लैब, शौचालय इत्यादि का अवलोकन किया। उन्होंने विभागीय अधिकारियों को कॉलेज प्रबंधन से मिलकर विद्यार्थियों की जरूरतों और उपयोगिता के मुताबिक सभी कार्यों को संपादित करने के निर्देश दिए। उन्होंने पूरे कॉलेज परिसर को हरा-भरा, सुंदर और सुव्यवस्थित करने को कहा।

अड़ेंगा शिविर ग्रामीणों के लिए रहा लाभकारी

रायपुर  सुशासन तिहार अंतर्गत आज शुक्रवार को कोंडागांव जिले के केशकाल विकासखंड अंतर्गत ग्राम अड़ेंगा में आयोजित शिविर में जिले के प्रभारी मंत्री एवं प्रदेश के उद्योग, वाणिज्य आबकारी व श्रम विभाग मंत्रीलखनलाल देवांगन मुख्य अतिथि के रूप में शामिल हुए। प्रभारी मंत्री ने शिविर में शासन की जनकल्याणकारी योजनाओं के तहत विभिन्न हितग्राहियों को सामग्री वितरित किए और लगभग 01 करोड़ 06 लाख रूपए की लागत के विभिन्न विकास कार्यों का भूमिपूजन भी किया। इस अवसर पर कांकेर सांसदभोजराज नाग, केशकाल विधायकनीलकंठ टेकाम सहित कलेक्टर श्रीमती नुपूर राशि पन्ना और स्थानीय जनप्रतिनिधिगण उपस्थित रहे।  शिविर में विभिन्न मांगों एवं समस्याओं को लेकर कुल 210 आवेदन प्राप्त हुए। प्रभारी मंत्री ने 31 बच्चों को जाति प्रमाण पत्र प्रदाय किया और दसवीं बारहवीं के 05 मेधावी विद्यार्थियों क़ो सम्मानित किया। साथ ही 12 श्रम पंजीयन कार्ड, 30 आधार कार्ड, प्रधानमंत्री आवास योजना के तहत 25 हितग्राहियों को चाबी, 15 जॉब कार्ड, 17 जाति प्रमाण पत्र, 30 लखपति दीदी प्रमाण पत्र, 06 किसान क्रेडिट कार्ड, 24 आयुष्मान कार्ड, 10 जन्म प्रमाण पत्र, 20 डिजिटल किसान कार्ड, राजस्व विभाग द्वारा 15 जाति प्रमाण पत्र और 10 निवासी प्रमाण पत्र, 11 राशन कार्ड, उद्यानिकी विभाग द्वारा 200 पौधों का वितरण, समाज कल्याण विभाग द्वारा 04 मोटराईज्ड सायकल, मत्स्य पालन विभाग द्वारा 01 मत्स्य जाल, 04 जन्म प्रमाण पत्र, राष्ट्रीय परिवार सहायता पेंशन 03 को और क्रेडा विभाग द्वारा 01 हितग्राही को सौर सुजला योजना से लाभान्वित किया गया। इसके अलावा स्वास्थ्य विभाग द्वारा 128 व्यक्तियों की स्वास्थ्य जांच की गई।  शिविर को संबोधित करते हुए मंत्रीदेवांगन ने कहा कि मुख्यमंत्रीविष्णुदेव साय के नेतृत्व में इन दो वर्षों में जन समस्याओं के समाधान हेतु सुशासन तिहार का आयोजन किया जा रहा है। राज्य सरकार ने मोदी की गारंटी को अल्प समय में पूरा किया। महतारी वंदन योजना, कृषि उन्नति योजना जैसे जनमानस के कल्याण हेतु कई योजनाएं संचालित की जा रही है। केंद्र और राज्य सरकार की कई योजनाएं शिविर के माध्यम से आपके द्वार तक पहुंच रही है। नागरिकों के समस्याओं का त्वरित निराकरण का प्रयास किया जा रहा है। केंद्र और राज्य सरकार ने बस्तर क्षेत्र में शांति बहाल कर विकास के मार्ग में आगे बढ़ाने का कार्य कर रही है।  सांसदभोजराज नाग ने कहा कि मुख्यमंत्रीविष्णु देव साय सुशासन तिहार अंतर्गत गांव गांव में आयोजित शिविर में जाकर जनता से संवाद कर उनकी समस्याएं और मांगो को सुन रहे हैं और त्वरित निराकरण भी की जा रही है। प्रधानमंत्रीनरेंद्र मोदी ने विकसित भारत की और मुख्यमंत्री ने विकसित छत्तीसगढ़ की संकल्पना की है इसमें सभी की सहभागिता जरूरी है। उन्होंने कहा कि शिविर में ज़रूरतमंद हितग्राही को अधिक से अधिक लाभ उठाएं।  विधायकनीलकंठ टेकाम ने कहा कि प्रदेश के संवेदनशील मुख्यमंत्रीविष्णु देव साय गांव, महिला, किसान और गरीब परिवार के हित की चिंता करती है और उनके विकास के लिए प्रतिबद्ध है। उन्होंने कहा कि सरकार द्वारा क्षेत्र के सुदूर गांवों में सड़कों का जाल बिछाया जा रहा है, जिससे यहां विकास के साथ साथ पर्यटन को भी बढ़ावा मिलेगा। उन्होंने बताया कि मुख्यमंत्री स्वस्थ बस्तर अभियान से गांव गांव तक स्वास्थ्य सेवा पहुंच रही है। सुशासन तिहार के माध्यम योजना गांव गांव तक पहुंच रहा है और शिविर में आवेदनों का निराकरण किया जा रहा है। कार्यक्रम में पूर्व विधायकसेवकराम नेताम ने भी संबोधित किया।  इस अवसर पर जनपद पंचायत अध्यक्ष श्रीमती नंदनी पोटाई, नगर पंचायत अध्यक्षबिहारी लाल शोरी,धीरेन्द्र बघेल,राजकिशोर राठी,लंबोदर सलाम सहित सरपंचभूपेन्द्र ध्रुव, जिला पंचायत सीईओअविनाश भोई, एसडीएम सुश्री आकांक्षा नायक, तहसीलदारगणेश सिदार उपस्थित रहे।

मुख्यमंत्री श्विष्णु देव साय ने उच्च स्तरीय बैठक लेकर तैयारियों की समीक्षा की

रायपुर मुख्यमंत्रीविष्णु देव साय ने आज मंत्रालय महानदी भवन में बस्तर में आयोजित होने वाली मध्य क्षेत्रीय परिषद की 26वीं बैठक की तैयारियों को लेकर उच्च स्तरीय समीक्षा बैठक की। यह महत्वपूर्ण बैठक केंद्रीय गृहमंत्री अमित शाह की अध्यक्षता में आयोजित होगी, जिसमें मध्यप्रदेश, उत्तरप्रदेश, उत्तराखंड और छत्तीसगढ़ के मुख्यमंत्री शामिल होंगे।  बैठक के दौरान अधिकारियों ने प्रस्तुतीकरण (पीपीटी) के माध्यम से राज्य सरकार द्वारा परिषद की बैठक में उठाए जाने वाले विभिन्न विषयों की जानकारी मुख्यमंत्री को दी। मुख्यमंत्री ने सभी बिंदुओं की विस्तार से समीक्षा करते हुए आवश्यक दिशा-निर्देश भी दिए। मुख्यमंत्रीसाय ने वरिष्ठ प्रशासनिक अधिकारियों को विभिन्न जिम्मेदारियां सौंपते हुए निर्देश दिए कि आयोजन की तैयारियों में किसी प्रकार की कमी न रहे और सभी व्यवस्थाएं गंभीरता एवं समन्वय के साथ सुनिश्चित की जाएं।       मुख्यमंत्रीसाय ने कहा कि विकसित भारत के निर्माण में मध्य क्षेत्रीय परिषद के राज्यों की भूमिका अत्यंत महत्वपूर्ण है। उन्होंने कहा कि यह परिषद देश की ऐसी क्षेत्रीय परिषद है जहां सदस्य राज्यों के बीच किसी प्रकार का विवाद नहीं है, जो आपसी सहयोग और समन्वय का उत्कृष्ट उदाहरण है। उन्होंने कहा कि क्षेत्रीय परिषदें राज्यों तथा केंद्र और राज्यों के बीच विभिन्न विषयों पर संवाद, सहयोग और समन्वय को मजबूत करने का प्रभावी मंच बन चुकी हैं। मुख्यमंत्री ने कहा कि “मजबूत राज्य ही मजबूत राष्ट्र का निर्माण करते हैं” और इसी भावना के साथ क्षेत्रीय परिषदें विकास, प्रशासनिक समन्वय और राष्ट्रीय एकता को नई दिशा प्रदान कर रही हैं। उन्होंने कहा कि पिछले कुछ वर्षों में इन परिषदों ने राज्यों के बीच स्वस्थ सहयोग और विकासोन्मुखी सोच को बढ़ावा देने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई है।                  मुख्यमंत्रीसाय ने कहा कि बस्तर में इस महत्वपूर्ण बैठक का आयोजन प्रदेश के लिए गौरव का विषय है। उन्होंने कहा कि बस्तर में शांति स्थापना के बाद इस स्तर की राष्ट्रीय बैठक का आयोजन यह दर्शाता है कि राज्य सरकार क्षेत्र के विकास और नई संभावनाओं को लेकर पूरी तरह संकल्पित है। मुख्यमंत्रीसाय ने कहा कि प्रधानमंत्रीनरेन्द्र मोदी और केंद्रीय गृहमंत्रीअमित शाह के नेतृत्व में नक्सल उन्मूलन से क्षेत्र में शांति स्थापित हुई है तथा अब बस्तर विकास की नई राह पर आगे बढ़ रहा है। उन्होंने विश्वास जताया कि इंद्रावती की गोद से बस्तर विकास की नई गाथा लिखेगा और मध्य क्षेत्रीय परिषद की यह बैठक क्षेत्र के विकास को नई गति प्रदान करेगी।

भारत सरकार के भूमि संसाधन सचिव ने छत्तीसगढ़ के मुख्य सचिव से की अहम मुलाकात

भारत सरकार के भूमि संसाधन सचिव ने छत्तीसगढ़ के मुख्य सचिव से की सौजन्य भेंट विभागीय कार्यों की विस्तृत समीक्षा जलग्रहण प्रबंधन, पीएम सिंचाई योजना, डिजिटल राजस्व सुधार और ई-पंजीयन की प्रगति पर हुई चर्चा रायपुर, भारत सरकार, भूमि संसाधन विभाग के सचिव नरेन्द्र भूषण ने आज मंत्रालय (महानदी भवन) में छत्तीसगढ़ के मुख्य सचिव विकासशील से सौजन्य भेंट की। इस दौरान छत्तीसगढ़ में सुशासन के अंतर्गत जलग्रहण प्रबंधन, प्रधानमंत्री कृषि सिंचाई योजना, भुईयां पोर्टल, ई-कोर्ट और पंजीयन एवं स्टाम्प विभाग द्वारा किए जा रहे नवाचारों पर विस्तार से चर्चा की गई। भूषण ने राजस्व एवं आपदा प्रबंधन, वाणिज्यिक कर (पंजीयन) और राज्य जलग्रहण क्षेत्र प्रबंधन एजेंसी के वरिष्ठ अधिकारियों के साथ समीक्षा बैठक कर विभागीय प्रगति का जायजा लिया। राजस्व विभाग डिजिटलीकरण और ई-सुशासन            बैठक में राजस्व एवं आपदा प्रबंधन विभाग की सचिव श्रीमती शम्मी आबिदी ने छत्तीसगढ़ में भू-अभिलेखों के आधुनिकीकरण पर प्रस्तुतीकरण दिया। डिजिटल रिकॉड्स। के रूप में राज्य में भू-अभिलेखों का पूर्ण कंप्यूटरीकरण कर मॉडर्न रिकॉर्ड रूम स्थापित किए गए हैं। भू-नक्शा डिजिटलीकरण के तहत सभी भू-नक्शों को डिजिटल स्वरूप दिया गया है। भुईयां पोर्टल के माध्यम से डिजिटल किसान किताब अपडेट की गई है, जिसे भूमि स्वामी कभी भी डाउनलोड कर सकते हैं। उन्होंने बताया कि राजस्व प्रकरणों के निराकरण के लिए रेवेन्यू ई-कोर्ट का प्रभावी उपयोग किया जा रहा है। साथ ही, भूमि का ऑटो डायवर्सन ऑनलाइन माध्यम से संपन्न हो रहा है। पंजीयन एवं स्टाम्प पारदर्शी और पेपरलेस रजिस्ट्री           वाणिज्यिक कर (पंजीयन) विभाग द्वारा तकनीक के समावेश से रजिस्ट्री प्रक्रिया को सरल बनाया गया है। ई-पंजीयन के तहत दस्तावेजों की रजिस्ट्री अब पूर्णतः ऑनलाइन और पेपरलेस मोड में की जा रही है। पारदर्शिता बढ़ाने के लिए व्हाट्सएप के माध्यम से अपॉइंटमेंट से लेकर रजिस्ट्री पूर्ण होने तक के अपडेट्स क्रेता-विक्रेता को भेजे जा रहे हैं। रजिस्ट्री की प्रति भी व्हाट्सएप से डाउनलोड करने की सुविधा दी गई है। प्रधानमंत्री कृषि सिंचाई योजना, जलग्रहण क्षेत्र विकास          छत्तीसगढ़ राज्य जलग्रहण क्षेत्र प्रबंधन एजेंसी (REWARD) के अधिकारियों ने पीएमकेएसवाई (WDC 2.0) की प्रगति साझा की। वर्ष 2021-22 में स्वीकृत 45 परियोजनाओं के तहत 27 जिलों के 387 माइक्रो वाटरशेड में कार्य जारी है। 2.50 लाख हेक्टेयर क्षेत्र के उपचार हेतु कुल 613.66 करोड़ रुपये की लागत तय है (केंद्र-राज्य अनुपात 60-40 प्रतिशत है)। भारत सरकार द्वारा हाल ही में (28 अप्रैल 2026) 30.14 करोड़ रुपये की केंद्रांश राशि जारी करते हुए परियोजना की अवधि 30 सितंबर 2026 तक बढ़ा दी गई है।          बैठक में वाणिज्यिक कर (पंजीयन) विभाग के सचिव भुवनेश यादव, संयुक्त सचिव भारत सरकार भूमि संसाधन विभाग नितिन खाडे, संचालक भूमि संसाधन भारत सरकार श्याम कुमार सहित छत्तीसगढ़ शासन के राजस्व एवं आपदा प्रबंधन, पंजीयन एवं स्टाम्प, छत्तीसगढ़ राज्य जलग्रहण क्षेत्र प्रबंधन एजेन्सी के वरिष्ठ अधिकारी शामिल हुये।

गांवों को मिलेगी नई ताकत! ‘जी राम जी अधिनियम 2025’ से बदलेगी ग्रामीण छत्तीसगढ़ की तस्वीर

विकसित भारत-जी राम जी अधिनियम 2025 ग्रामीण छत्तीसगढ़ के सशक्तिकरण का नया अध्याय 1 जुलाई 2026 से लागू होगी नई रोजगार गारंटी व्यवस्था, अब 100 के बजाय मिलेंगे 125 दिन का काम रायपुर भारत सरकार द्वारा ग्रामीण आजीविका और समग्र विकास को नई ऊंचाई देने के उद्देश्य से श्विकसित भारत-जी राम जी (VB-G RAM G) अधिनियम, 2025 अधिसूचित किया गया है। यह क्रांतिकारी कानून 1 जुलाई 2026 से पूरे देश में प्रभावी होगा और वर्तमान मनरेगा  का स्थान लेगा। छत्तीसगढ़ सरकार ने इस नई व्यवस्था को प्रदेश में पूरी तत्परता से लागू करने की तैयारी शुरू कर दी है। मुख्यमंत्री विष्णुदेव साय का संदेश           मुख्यमंत्री विष्णुदेव साय ने इस अधिनियम को ग्रामीण समृद्धि का आधार बताते हुए कहा कि प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी के नेतृत्व में विकसित भारत-2047 के संकल्प को सिद्ध करने की दिशा में यह अधिनियम एक मील का पत्थर है। छत्तीसगढ़ जैसे कृषि प्रधान राज्य के लिए 125 दिनों के सुनिश्चित रोजगार की कानूनी गारंटी हमारे ग्रामीण भाई-बहनों के जीवन में आर्थिक स्थिरता और खुशहाली का नया सवेरा लेकर आएगी। हमारी सरकार इस व्यवस्था को पूरी पारदर्शिता के साथ लागू करने के लिए प्रतिबद्ध है, ताकि विकास का लाभ समाज के अंतिम व्यक्ति तक पहुँचे। अधिनियम की प्रमुख विशेषताएँ और लाभ          125 दिनों के रोजगार की गारंटी नई व्यवस्था के तहत अब प्रत्येक ग्रामीण परिवार के इच्छुक वयस्क सदस्यों को प्रति वित्तीय वर्ष 125 दिनों के अकुशल शारीरिक श्रम की वैधानिक गारंटी मिलेगी। यह वर्तमान 100 दिनों की सीमा से 25 प्रतिशत अधिक है। केंद्र सरकार ने वित्तीय वर्ष 2026-27 के लिए इस योजना हेतु 95 हजार 692.31 करोड़ रुपये का रिकॉर्ड बजट प्रावधान किया है। राज्यों के अंशदान सहित कुल परिव्यय 1.51 लाख करोड़ रुपये से अधिक होगा। मजदूरी का भुगतान सीधे श्रमिकों के खातों में (DBT) साप्ताहिक आधार पर या मस्टर रोल बंद होने के 15 दिनों के भीतर सुनिश्चित किया जाएगा। देरी होने पर श्रमिक श्विलंब क्षतिपूर्तिश् के हकदार होंगे। यदि काम की मांग करने के निर्धारित समय के भीतर रोजगार उपलब्ध नहीं कराया जाता है, तो शासन द्वारा संबंधित श्रमिकों को बेरोजगारी भत्ता दिया जाएगा। पंचायतों को स्थानीय आवश्यकताओं के अनुरूप कार्यों के चयन के लिए अधिक अधिकार दिए गए हैं, जिससे गांवों में स्थायी परिसंपत्तियों (जैसे जल संरक्षण, कृषि अधोसंरचना) का निर्माण होगा। सुगम संक्रमण  की व्यवस्था          श्रमिकों और प्रशासन की सुविधा के लिए निम्नलिखित व्यवस्थाएं की गई हैं। वर्तमान ई-केवाईसी सत्यापित मनरेगा जॉब कार्ड तब तक मान्य रहेंगे जब तक नए ग्रामीण रोजगार गारंटी कार्ड जारी नहीं हो जाते। 30 जून 2026 तक मनरेगा के तहत चल रहे सभी कार्य बिना किसी रुकावट के जारी रहेंगे और 1 जुलाई से स्वतः नई व्यवस्था में समाहित हो जाएंगे। नए श्रमिक ग्राम पंचायत स्तर पर सहजता से अपना पंजीयन करा सकेंगे। विकसित भारत 2047 का आधार          यह अधिनियम केवल एक रोजगार योजना नहीं, बल्कि ग्रामीण भारत को आत्मनिर्भर और उत्पादक बनाने का महा-अभियान है। छत्तीसगढ़ में इस योजना के प्रभावी क्रियान्वयन से ग्रामीण अधोसंरचना, जल संरक्षण और कृषि सुधार को अभूतपूर्व गति मिलेगी, जो राज्य को विकसित छत्तीसगढ़ की दिशा में तेजी से आगे ले जाएगी। * धनंजय राठौर, संयुक्त संचालक * सुनील त्रिपाठी, सहायक संचालक

छत्तीसगढ़ में रीडेवलपमेंट योजनाओं को मिलेगी रफ्तार, सरकार स्तर पर मंथन जारी

रायपुर, छत्तीसगढ़ गृह निर्माण एवं अधोसंरचना विकास मंडल द्वारा राज्य के प्रमुख शहरों में आधुनिक और सुव्यवस्थित आवासीय परिसरों के निर्माण हेतु पुनर्विकास योजनाओं पर युद्धस्तर पर कार्य किया जा रहा है। इस महत्वाकांक्षी पहल के अंतर्गत मंडल ने अब तक पाँच महत्वपूर्ण योजनाओं के प्रस्ताव राज्य शासन को अनुमोदन हेतु प्रेषित किए हैं। प्रक्रियात्मक प्रगति और तकनीकी तैयारी         शासन द्वारा प्रस्तावों के सूक्ष्म परीक्षण के दौरान विस्तृत परियोजना प्रतिवेदन(DPR), निविदा दस्तावेज (RFP)और अन्य तकनीकी जानकारियां मांगी गई थीं। मंडल ने तत्परता दिखाते हुए ये सभी आवश्यक दस्तावेज निर्धारित समय-सीमा के भीतर शासन को उपलब्ध करा दिए हैं। वर्तमान में, शासन के नवीन दिशा-निर्देशों के आधार पर इन प्रस्तावों का पुनर्मूल्यांकन किया जा रहा है, ताकि इन्हें और अधिक आधुनिक एवं जनोपयोगी बनाया जा सके। परियोजना के लाभ और उद्देश्य         पुनर्विकास की ये योजनाएं वर्तमान में शासन स्तर पर अंतिम निर्णय की प्रक्रिया में हैं। इन परियोजनाओं के पूर्ण होने से नागरिकों को निम्नलिखित लाभ प्राप्त होंगे। पुराने परिसरों के स्थान पर आधुनिक सुविधाओं से लैस घर बनाए जा रहे हैं। बेहतर सड़कें, ड्रेनेज सिस्टम और हरित क्षेत्र। नियोजित शहरी विकास शहरों के स्वरूप में व्यापक सुधार और सुव्यवस्थित वातावरण बनायसा जा रहा है। मंडल की प्रतिबद्धता        छत्तीसगढ़ गृह निर्माण एवं अधोसंरचना विकास मंडल राज्य के नागरिकों को उच्च गुणवत्तापूर्ण आवास और वैश्विक स्तर की शहरी सुविधाएं प्रदान करने के लिए संकल्पित है। मंडल के अनुसार सभी आगामी योजनाओं को शासन के दिशा-निर्देशों के अनुरूप पूरी पारदर्शिता और गति के साथ क्रियान्वित किया जा रहा है।

प्रदेश के लाल का दुनिया में डंका! दिव्यांशु देवांगन ने जूनियर वर्ल्ड कप में बनाया वर्ल्ड रिकॉर्ड

छत्तीसगढ़ के लाल दिव्यांशु देवांगन ने रचा इतिहास जूनियर वर्ल्ड कप में बनाया विश्व रिकॉर्ड, जीता स्वर्ण पदक वित्त मंत्री ओपी चौधरी ने फोन पर दी बधाई, कहा खेल राष्ट्र गौरव का सबसे सशक्त माध्यम रायपुर  छत्तीसगढ़ के रायगढ़ जिले के होनहार अंतरराष्ट्रीय निशानेबाज दिव्यांशु देवांगन ने वैश्विक पटल पर भारत का परचम लहराया है। मिस्र की राजधानी काहिरा में आयोजित जूनियर वर्ल्ड कप की 10 मीटर एयर राइफल मिक्स्ड डबल्स स्पर्धा में दिव्यांशु ने न केवल स्वर्ण पदक जीता, बल्कि एक नया वर्ल्ड रिकॉर्ड भी स्थापित किया है। वित्त मंत्री ओ.पी. चौधरी ने कहा कि खेल केवल जीत-हार का माध्यम नहीं, बल्कि अनुशासन और राष्ट्र के प्रति समर्पण का सबसे सशक्त मार्ग है।  वित्त मंत्री ने दी बधाई पूरे प्रदेश के लिए गर्व का क्षण            दिव्यांशु की इस अभूतपूर्व सफलता पर छत्तीसगढ़ के वित्त मंत्री ओपी चौधरी ने उन्हें फोन कर व्यक्तिगत रूप से बधाई दी। बातचीत के दौरान उन्होंने इस जीत के महत्व को साझा किया। चौधरी ने कहा कि यह सफलता छत्तीसगढ़ के लाखों युवाओं के लिए प्रेरणा स्रोत है। यह साबित करता है कि अटूट संकल्प से इतिहास रचा जा सकता है। उन्होंने कहा कि उन्होंने खेल को अनुशासन, धैर्य और आत्मविश्वास का सर्वश्रेष्ठ शिक्षक बताया। उन्होंने जोर दिया कि खेलों के माध्यम से ही युवा शक्ति अंतरराष्ट्रीय मंच पर देश का मान बढ़ा सकती है। राज्य सरकार का समर्थन और भविष्य की राह           वित्त मंत्री ने दिव्यांशु को आश्वासन दिया कि राज्य सरकार प्रदेश की खेल प्रतिभाओं को निखारने और उन्हें हर संभव सहायता प्रदान करने के लिए पूरी तरह प्रतिबद्ध है। उन्होंने विश्वास जताया कि दिव्यांशु भविष्य में भी अंतरराष्ट्रीय स्तर पर देश और प्रदेश का नाम रोशन करते रहेंगे। दिव्यांशु ने जताया आभार          स्वर्ण पदक विजेता दिव्यांशु देवांगन ने वित्त मंत्री का आभार व्यक्त करते हुए कहा कि प्रदेशवासियों के स्नेह और निरंतर प्रोत्साहन ने ही उन्हें इस मुकाम तक पहुँचाने की ऊर्जा दी है।

जहां मोबाइल और दस्तावेज रखना था मना, उसी अबूझमाड़ से पहली बार लाइसेंस के लिए पहुंचे ग्रामीण

नारायणपुर. कभी नक्सलियों की दहशत, बंदूक की छाया और बाहरी दुनिया से कटे रहने के लिए पहचाना जाने वाला अबूझमाड़ अब धीरे-धीरे बदलाव की नई कहानी लिख रहा है। जिन गांवों में वर्षों तक मोबाइल रखना, सरकारी दस्तावेज बनवाना और प्रशासन से संपर्क रखना तक गुनाह माना जाता था, वहां अब ग्रामीण खुद आगे बढ़कर ड्राइविंग लाइसेंस बनवा रहे हैं। नारायणपुर पुलिस द्वारा चलाए जा रहे माड़ मैत्री अभियान के तहत जिला मुख्यालय में आयोजित ड्राइविंग लाइसेंस शिविर में यह बदलाव साफ तौर पर देखने को मिला। शिविर में 300 से अधिक ग्रामीण पहुंचे, जिनमें अबूझमाड़ के दूरस्थ गांवों के लोग और आत्मसमर्पित नक्सली भी शामिल रहे। शिविर की सबसे खास तस्वीर तब सामने आई, जब अबूझमाड़ के पदमकोट गांव से युवा गजानंद वड्डे लाइसेंस बनवाने पहुंचा। गजानंद ने बताया कि उसके गांव में वर्षों तक नक्सलियों का प्रभाव इतना गहरा था कि लोग सरकारी योजनाओं से दूर रहते थे। गांव में मोबाइल रखने, पहचान पत्र बनवाने और प्रशासनिक प्रक्रियाओं में शामिल होने पर नक्सलीयों द्वारा रोक जैसी स्थिति थी। गजानंद ने बताया कि गांव में पुलिस कैंप खुलने के बाद हालात बदलने लगे हैं। अब ग्रामीणों में डर कम हुआ है और लोग सरकारी योजनाओं का लाभ लेने के लिए आगे आने लगे हैं। उन्होंने कहा कि वह अपने गांव का पहला युवा है, जिसके पास मोटरसाइकिल है और अब वह उसका वैध ड्राइविंग लाइसेंस बनवाने जिला मुख्यालय पहुंचा है। लाइसेंस बनवाने आत्मसमर्पित नक्सली भी पहुंचे शिविर शिविर में एक और भावुक तस्वीर तब देखने को मिली, जब 10 से अधिक आत्मसमर्पित नक्सली भी लाइसेंस बनवाने पहुंचे। इनमें आत्मसमर्पित नक्सली अरब भी शामिल था। उन्होंने बताया कि शासन की पुनर्वास नीति से प्रभावित होकर उसने हथियार छोड़ मुख्यधारा में लौटने का फैसला किया। पहले जंगल और हिंसा की जिंदगी के अलावा कोई रास्ता नजर नहीं आता था, लेकिन आत्मसमर्पण के बाद शासन की योजनाओं का लाभ मिलने लगा। उसे रोजगार उपलब्ध कराया गया, जिससे उसने मोटरसाइकिल खरीदी और अब वह कानूनी रूप से वाहन चलाने के लिए लाइसेंस बनवा रहा है। अलग-अलग इलाकों में लगाए जाएंगे शिविर : एसपी एक समय ऐसा था जब नक्सली संगठन युवाओं के हाथों में हथियार थमाते थे, लेकिन अब वही युवा रोजगार, पहचान और सामान्य जीवन की ओर लौटते दिखाई दे रहे हैं। नारायणपुर एसपी रॉबिंसन गुड़िया ने बताया कि माड़ मैत्री अभियान के तहत लगातार अलग-अलग क्षेत्रों में शिविर लगाए जा रहे हैं। जिला मुख्यालय में आयोजित इस शिविर में अबूझमाड़ के कई गांवों से ग्रामीण पहुंचे हैं। 300 से अधिक लोग ड्राइविंग लाइसेंस बनवाने आए हैं। एसपी ने कहा कि कई ऐसे ग्रामीण भी शिविर में पहुंचे हैं, जिनके गांव में पहली बार किसी व्यक्ति का ड्राइविंग लाइसेंस बनने जा रहा है। आने वाले समय में भी ऐसे शिविर अलग-अलग इलाकों में लगाए जाएंगे, ताकि दूरस्थ गांवों के लोग शासन की सुविधाओं और कानूनी प्रक्रियाओं से जुड़ सकें।

कोर्ट परिसर में सुरक्षा जांच के दौरान बड़ा खुलासा, 2 युवक चाकू समेत गिरफ्तार; 8 संदिग्ध हिरासत में

रायपुर. राजधानी रायपुर के न्यायालय परिसर में सुरक्षा व्यवस्था मजबूत करने और अपराधों पर अंकुश लगाने के उद्देश्य से पुलिस ने शुक्रवार को बड़ा आकस्मिक चेकिंग अभियान चलाया। यह विशेष अभियान न्यायालय की अनुमति से डीसीपी सेंट्रल जोन एवं क्राइम के निर्देश पर संचालित किया गया। अभियान में मध्य जोन के विभिन्न थानों का स्टाफ, एसीसीयू, पुलिस लाइन के 100 से अधिक जवान और बीडीएस टीम शामिल रही। पुलिस ने न्यायालय परिसर में संदिग्ध गतिविधियों पर नजर रखते हुए व्यापक तलाशी अभियान चलाया। चेकिंग के दौरान परिसर में संदिग्ध रूप से घूमते और उपद्रव की आशंका वाले 6 लोगों के खिलाफ प्रतिबंधात्मक धाराओं के तहत कार्रवाई की गई। सभी आरोपियों के खिलाफ थाना सिविल लाइन में कार्रवाई के बाद एसीपी कोर्ट में पेश किया गया, जहां से उन्हें जेल भेज दिया गया। इन लोगों पर हुई कार्रवाई – आशुतोष साहू उर्फ अमन, निवासी दलदल सिवनी विराज सेन्द्रे, निवासी आमापारा भुवनेश्वर चौधरी उर्फ बिट्टू, निवासी न्यू राजेन्द्र नगर गोलू नेताम उर्फ कामता, निवासी कुशालपुर पवन कोसरिया, निवासी खरोरा दुन्नो कुल्हरिया, निवासी न्यू राजेन्द्र नगर दो युवकों को चाकू के साथ किया गया गिरफ्तार अभियान के दौरान दो युवकों के पास से अवैध चाकू भी बरामद किए गए। पुलिस ने मयंक सोनी और विनोद सारथी को गिरफ्तार कर उनके कब्जे से 1-1 चाकू जब्त किया। दोनों आरोपियों के खिलाफ थाना सिविल लाइन में आर्म्स एक्ट के तहत अपराध दर्ज किया गया है। पुलिस अधिकारियों के मुताबिक न्यायालय परिसर की सुरक्षा को ध्यान में रखते हुए आगे भी इस तरह के विशेष चेकिंग अभियान लगातार चलाए जाएंगे, ताकि किसी भी अप्रिय घटना को रोका जा सके।