samacharsecretary.com

देशभर में फैला साइबर ठगी नेटवर्क ध्वस्त, बैंक अफसर भी निकला गिरोह का हिस्सा!

नई दिल्ली अपराध शाखा की साइबर सेल ने एक बड़े साइबर फ्रॉड गिरोह का पर्दाफाश किया है। यह गिरोह देश में फैले नेटवर्क के जरिए नागरिकों से ठगी कर रहा था। इस गिरोह का संचालन दुबई में बैठे एक भारतीय हैंडलर टॉम के इशारे पर किया जा रहा था। साइबर सेल की कार्रवाई में आरबीएल बैंक के एक अधिकारी सहित पांच आरोपियों को गिरफ्तार किया गया है। ये आरोपी फर्जी कंपनियां बनाकर और जाली खातों के जरिए ठगी की रकम को इधर-उधर ट्रांसफर करने का काम कर रहे थे। गिरफ्तार किए गए आरोपियों में मंजीत सिंह (28), मनश्वी (23), मनीष मेहरा (33), सोमबीर (43) और अनुप (35) शामिल हैं।  अपराध शाखा की जांच ई-एफआईआर संख्या 60000097/2025 (4/2025) दिनांक 23 जून के तहत शुरू हुई थी, जिसमें नोएडा और गुरुग्राम से संचालित एक संगठित साइबर गिरोह की संलिप्तता सामने आई। तकनीकी निगरानी और डिजिटल फुटप्रिंट के आधार पर टीम ने 27 अक्टूबर को गुरुग्राम स्थित एक आवासीय परिसर में छापेमारी की। इस दौरान तीन आरोपी मंजीत, मनश्वी और सोमबीर को गिरफ्तार किया गया, जिनके पास से 10 मोबाइल फोन, एक लैपटॉप और कई चेकबुक बरामद की गईं। इसके बाद मिली जानकारी के आधार पर मनीष मेहरा और बैंक अधिकारी अनुप को भी गिरफ्तार किया गया। जांच में खुलासा हुआ कि गिरोह में हर सदस्य की अलग-अलग भूमिका थी। मंजीत और मनश्वी फर्जी कंपनियां बनाकर कई चालू खाते खोलते थे। सोमबीर अकाउंटेंट की भूमिका में खर्च का लेखा-जोखा रखता और दुबई स्थित हैंडलर को रिपोर्ट भेजता था। मनीष मेहरा ओटीपी एक्सेस प्रदान करता और डेबिट-क्रेडिट लेनदेन को संचालित करता था, जबकि बैंक अधिकारी अनुप फर्जी खातों के खोलने में सहायता करता था और खाते फ्रीज होने या शिकायत दर्ज होने की जानकारी गिरोह को पहले ही लीक कर देता था। प्रत्येक आरोपी को एक फर्जी खाते के बदले 1.5 लाख रुपए कमीशन दिया जाता था। पूछताछ में सामने आया कि आरोपियों ने तीन फर्जी कंपनियां बनाईं और आठ चालू खाते खोले थे। इन खातों में ठगी की रकम को जमा कर कई अन्य खातों में घुमाया गया और अंततः इसे यूएसडीटी क्रिप्टोकरेंसी में बदलकर अंतरराष्ट्रीय ट्रांसफर के लिए उपयोग किया गया। आरोपियों के कब्जे से 18 मोबाइल फोन, 36 सिम कार्ड, 3 डेबिट/क्रेडिट कार्ड, कई बैंकों की चेकबुक और एक लैपटॉप बरामद हुआ। बरामद लैपटॉप से यूएसडीटी वॉलेट्स से जुड़े डेटा, 274 पीडीएफ बैंक स्टेटमेंट और टेलीग्राम ग्रुप्स के माध्यम से फंड ट्रांजैक्शन के साक्ष्य मिले। एनसीआरपी से बरामद चेकबुक की जांच में 12 राज्यों से जुड़ी 52 साइबर फ्रॉड शिकायतों का पता चला। इंस्पेक्टर संदीप सिंह के नेतृत्व में और एसीपी अनिल शर्मा के पर्यवेक्षण में यह कार्रवाई की गई। टीम में एसआई राकेश मलिक, एएसआई संजय, एएसआई संदीप त्यागी, एचसी कपिल, एचसी अक्षय, एचसी विकास, एचसी भूपेंद्र, एचसी सचिन और एचसी मोहित तोमर शामिल थे। पुलिस के अनुसार, यह कार्रवाई साइबर अपराध के संगठित नेटवर्क के खिलाफ एक बड़ी सफलता है। गिरोह के दो मुख्य सदस्य अभी फरार हैं, जो दुबई से ऑपरेट कर रहे हैं। पुलिस उनकी तलाश में जुटी हुई है और आगे की जांच जारी है।

केजरीवाल के ‘नए शीशमहल’ पर सियासी संग्राम! AAP बोली – झूठ साबित करो या माफी मांगो

नई दिल्ली दिल्ली के पूर्व मुख्यमंत्री और आम आदमी पार्टी (आप) के राष्ट्रीय संयोजक अरविंद केजरीवाल पर भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) ने एक और 'शीशमहल' बनवाने का आरोप लगाया है। दिल्ली भाजपा ने 'गूगल अर्थ' वाली एक सैटेलाइट तस्वीर शेयर करते हुए आरोप लगाया कि अरविंद केजरीवाल ने अब पंजाब में शीशमहल तैयार करवा लिया है। आप की राज्यसभा सांसद स्वाति मालीवाल ने भी इसे साझा करते हुए इसी तरह के आरोप लगाए हैं। वहीं, आम आदमी पार्टी ने इसे फर्जी दावा बताते हुए अलॉटमेंट लेटर दिखाने का चैलेंज दिया है।   दिल्ली भाजपा ने एक बंगले की सैटेलाइट इमेज को साझा करते हुए एक्स पर लिखा, ' Big Breaking- आम आदमी का ढोंग करने वाले केजरीवाल ने तैयार करवाया एक और भव्य शीशमहल। दिल्ली का शीश महल ख़ाली होने के बाद पंजाब के सुपर सीएम अरविंद केजरीवाल जी ने पंजाब में दिल्ली से भी शानदार शीश महल तैयार करवा लिया है। चंडीगढ़ के सेक्टर 2 में CM कोटे की 2 एकड़ की आलीशान 7 स्टार सरकारी कोठी अरविंद केजरीवाल जी को मिल गई है।' दिल्ली भाजपा के अध्यक्ष वीरेंद्र सचदेवा ने कहा किदिल्ली में शीशमहल के बाद अब केजरीवाल ने चंडीगढ़ में भी शीशमहल बनाया है। दिल्ली को लूटने के बाद अब पंजाब को भी लूटने की तैयारी कर रहे हैं। AAP बोली- फर्जी दावा, अलॉटमेंट लेटर दिखाओ भाजपा के दावों को आम आदमी पार्टी ने फर्जी करार दिया और अलॉटमेंट लेटर दिखाने की चुनौती दी। दिल्ली आप के एक्स हैंडल पर कहा गया, 'जब से प्रधानमंत्री की फर्जी यमुना की कहानी पकड़ी गई है, बीजेपी बौखला सी गई है। और बौखलाहट में बीजेपी आजकल सबकुछ फर्जी कर रही है। फर्जी यमुना, फर्जी प्रदूषण के आंकडे, फर्जी बारिश के दावे, और अब फर्जी 7 स्टार दावा। बीजेपी का फर्जी दावा है कि चंडीगढ़ में 7 स्टार घर बनवा दिया, लेकिन चंडीगढ़ का एडमिनिस्ट्रेशन तो बीजेपी के पास है। वही कुछ बनवा सकते हैं कोई और नहीं। बीजेपी का फर्जी दावा है कि केजरीवाल जी को कोई घर अलॉट हो गया है, तो कहां है अलाटमेंट लेटर? सीएम के कैंप ऑफिस की तस्वीर साझा करके कुछ भी फर्जी दावा कर रही है बौखलाई हुई बीजेपी।'  

DDA Housing Scheme 2025: अब राजधानी में मिलेगा ‘अपना घर’, कीमत मात्र ₹11.8 लाख से शुरू!

नई दिल्ली  दिल्ली जैसी महंगी राजधानी में घर खरीदना आज किसी सपने से कम नहीं। रियल एस्टेट की बढ़ती कीमतों ने आम आदमी की पहुंच से छत को लगभग दूर कर दिया है। लेकिन अब वही सपना दिल्ली विकास प्राधिकरण (DDA) हकीकत में बदलने जा रहा है। डीडीए ने अपनी जन साधारण आवास योजना 2025 (फेज-2) लॉन्च की है, जिसके तहत सिर्फ ₹11.8 लाख से शुरू होने वाले किफायती फ्लैट्स उपलब्ध कराए जा रहे हैं। इस स्कीम का मकसद है – उन परिवारों को घर देना जो दिल्ली में रहते और काम तो करते हैं, पर ऊंची संपत्ति दरों के कारण अपना घर नहीं खरीद पाते। किसके लिए है यह योजना? यह योजना मुख्य रूप से आर्थिक रूप से कमजोर वर्ग (EWS) और निम्न आय वर्ग (LIG) के लोगों के लिए बनाई गई है। इसका फोकस उन परिवारों पर है जो किराए की ऊँची लागत से परेशान हैं और स्थायी घर की तलाश में हैं। यह कोई लग्ज़री प्रोजेक्ट नहीं, बल्कि ज़रूरतमंदों के लिए व्यावहारिक और सुलभ आवास विकल्प है। कीमत और बजट में बड़ा फर्क DDA स्कीम की सबसे बड़ी खासियत इसकी कीमत है — EWS फ्लैट्स की शुरुआती कीमत केवल ₹11.8 लाख LIG फ्लैट्स की कीमत ₹32.7 लाख तक जाती है दिल्ली-एनसीआर के प्रॉपर्टी मार्केट में जहां छोटे अपार्टमेंट भी ₹40–90 लाख से ऊपर मिलते हैं, वहीं यह स्कीम मध्यम और निम्न आय वर्ग के लिए राहत की सांस है। कहां-कहां मिलेंगे ये फ्लैट किफायती दाम का मतलब अब दूर-दराज इलाकों से नहीं है। DDA ने इस बार अपने फ्लैट्स बेहतर कनेक्टिविटी और सुविधाओं वाले इलाकों में बनाए हैं — EWS फ्लैट्स: नरेला, रोहिणी, रामगढ़ कॉलोनी और शिवाजी मार्ग LIG फ्लैट्स: रोहिणी सेक्टर 34–35 और जहांगीरपुरी के पास रामगढ़ कॉलोनी इन सभी स्थानों से मेट्रो और अन्य सार्वजनिक परिवहन आसानी से उपलब्ध हैं।   बुकिंग कब और कैसे जन साधारण आवास योजना 2025 के दूसरे चरण के लिए आवेदन प्रक्रिया 7 नवंबर 2025 से शुरू होगी। बुकिंग 'पहले आओ, पहले पाओ' (First Come, First Serve) के आधार पर होगी। आवेदन प्रक्रिया पूरी तरह ऑनलाइन होगी, जिससे पारदर्शिता और सुविधा दोनों सुनिश्चित होंगी। क्यों खास है यह योजना डीडीए की यह पहल सिर्फ एक हाउसिंग स्कीम नहीं, बल्कि दिल्ली में बढ़ते किराया संकट का समाधान भी है। ऐसे समय में जब राजधानी में जमीन और मकान की कीमतें आम नागरिक की पहुंच से बाहर हो चुकी हैं, यह योजना “अपना घर” के सपने को फिर से जिंदा करने वाली साबित हो सकती है।  

सरकारी अस्पतालों में दवाओं की किल्लत, सौरभ भारद्वाज बोले—‘प्रणाली को ठीक करना जरूरी’

नई दिल्ली  आम आदमी पार्टी के नेताओं ने रियलिटी चेक कर दिल्ली सरकार पर आरोप लगाया कि दिल्ली में भाजपा सरकार आने के बाद सरकारी अस्पतालों की हालत लगातार बिगड़ती जा रही है। मुफ्त दवा, टेस्ट और सर्जरी जैसी मूलभूत सुविधाएं अब केवल नाम मात्र की रह गई हैं। 'आप' दिल्ली प्रदेश संयोजक सौरभ भारद्वाज ने बीते गुरुवार को राजीव गांधी अस्पताल का निरीक्षण किया था, वहीं शुक्रवार को कोंडली के विधायक कुलदीप कुमार ने लाल बहादुर शास्त्री (एलबीएस) अस्पताल का दौरा किया। उन्होंने दावा किया कि यहां मरीजों को निर्धारित दवाइयों का आधा हिस्सा भी अस्पताल से नहीं मिल रहा है और ज्यादातर महंगी दवाएं बाहर से खरीदनी पड़ रही हैं। कुलदीप कुमार ने बताया कि डॉक्टरों द्वारा मरीजों को 8 से 10 दवाइयां लिखी जा रही हैं, लेकिन अस्पताल से केवल 1 या 2 सस्ती दवाइयां ही दी जा रही हैं। उन्होंने कहा कि यह स्थिति भाजपा सरकार की नाकामी को उजागर करती है। केजरीवाल सरकार के समय में महंगी से महंगी दवाइयां, टेस्ट और सर्जरी पूरी तरह मुफ्त हुआ करती थीं। आम आदमी पार्टी के नेताओं का आरोप है कि निरीक्षण के दौरान कई मरीजों ने अपनी शिकायतें बताईं। एक बुजुर्ग मरीज ने कहा कि उन्हें केवल दो दवाइयां दी गईं, जबकि बाकी पर ‘कट’ लगाकर बाहर से लाने को कहा गया। एक अन्य मरीज ने शिकायत की कि सात दवाइयों में से केवल एक मिली, बाकी छह बाहर से खरीदनी पड़ीं। कुछ मरीजों ने यह भी बताया कि पहले सभी दवाइयां अस्पताल में मिल जाती थीं, पर अब 'बाहर से लो' कहकर भेज दिया जाता है। कुलदीप कुमार ने कहा कि इमरजेंसी में भी दवाइयों की भारी कमी है और मरीजों को जन औषधि केंद्र की ओर भेजा जा रहा है। उन्होंने आरोप लगाया कि सरकार ने इन दुकानों को अस्पतालों के बाहर जानबूझकर खुलवाया है ताकि गरीब मरीजों से पैसे वसूले जा सकें। सौरभ भारद्वाज ने कहा कि भाजपा राज में सरकारी अस्पताल खुद बीमार हो गए हैं। प्रदूषण से बढ़ती बीमारियों और अस्पतालों में दवाइयां नहीं मिलने से दिल्लीवासियों पर दोहरी मार पड़ रही है। उन्होंने कहा कि केजरीवाल सरकार में मरीजों को दवा, टेस्ट और सर्जरी सब कुछ मुफ्त मिलता था, जबकि अब वर्तमान सरकार ने गरीबों की जेब पर बोझ बढ़ा दिया है। विधायक कुलदीप कुमार ने कहा कि जमीनी सच्चाई यह है कि मरीजों को न दवाइयां मिल रही हैं, न टेस्ट फ्री हो रहे हैं। गरीब लोग सुबह से लाइन में लगते हैं और दोपहर तक दवा के लिए भटकते रहते हैं। 

ED का समन रद्द, सुप्रीम कोर्ट ने लगाई लगाम — अब इन नए नियमों से चलेगी एजेंसी

नई दिल्ली  उच्चतम न्यायालय ने ED यानी प्रवर्तन निदेशालय द्वारा दो वरिष्ठ वकीलों को जारी समन को रद्द कर दिया तथा जांच एजेंसियों को मुवक्किलों को दी गई कानूनी सलाह के बारे में पूछताछ के लिए वकीलों को बुलाने से रोकने के लिए दिशानिर्देश जारी किए। भारत के प्रधान न्यायाधीश बी आर गवई और न्यायमूर्ति के विनोद चंद्रन तथा न्यायमूर्ति एन वी अंजारिया की पीठ ने ईडी द्वारा धन शोधन जांच के सिलसिले में वरिष्ठ अधिवक्ता अरविंद दातार और प्रताप वेणुगोपाल को तलब किए जाने के बाद स्वत: संज्ञान मामले में यह फैसला सुनाया।   फैसला सुनाते हुए न्यायमूर्ति चंद्रन ने कहा कि पीठ ने वकीलों की सुरक्षा के लिए 'नियम में छूट को सुसंगत बनाने' का अनुरोध था और जांच एजेंसियों के अनुचित दबाव से कानूनी पेशे की रक्षा के लिए नए निर्देश जारी किए। पीठ ने कहा कि जांच एजेंसियां ​​किसी भी वकील को मुवक्किलों का विवरण मांगने के लिए समन जारी नहीं करेंगी, जब तक कि यह संबंधित कानून के दायरे में न आता हो। उसने कहा कि वकीलों के डिजिटल उपकरणों को केवल संबंधित अधिकार क्षेत्र वाली अदालत के समक्ष ही जब्त किया जा सकता है और आपत्तियों के खारिज होने के बाद ही उन्हें उनकी उपस्थिति में तथा पक्षकारों के समक्ष ही खोला जा सकता है। ईडी द्वारा वकीलों को भेजे गए समन को खारिज करते हुए उच्चतम न्यायालय ने कहा कि यह उन आरोपियों के मौलिक अधिकारों का उल्लंघन है जिन्होंने वकीलों को अपनी पैरवी के लिए चुना था। पीठ ने कहा, 'समन के परिणामस्वरूप उन आरोपियों के मौलिक अधिकारों का उल्लंघन हो सकता है, जिन्होंने वकील पर भरोसा जताया था।' पीठ ने ऐसी कार्रवाई को वैधानिक सुरक्षा उपायों का उल्लंघन बताया। न्यायालय ने भारतीय साक्ष्य अधिनियम 2023 का हवाला देते हुए कहा, 'जांच अधिकारी किसी भी वकील को मुवक्किल का विवरण मांगने के लिए समन जारी नहीं करेंगे, जब तक कि यह धारा 132 के अपवादों के अंतर्गत न आता हो।' उच्चतम न्यायालय ने 12 अगस्त को खुद को देश के सभी नागरिकों का 'संरक्षक' बताया था और मामलों में मुवक्किलों का प्रतिनिधित्व करते समय जांच एजेंसियों द्वारा वकीलों को तलब किए जाने के संबंध में स्वत: संज्ञान मामले में अपना फैसला सुरक्षित रख लिया था। ईडी द्वारा दातार और वेणुगोपाल को तलब किए जाने के बाद न्यायालय ने इस मामले में सुनवाई शुरू की थी। दातार और वेणुगोपाल को समन भेजे जाने की सुप्रीम कोर्ट बार एसोसिएशन और सुप्रीम कोर्ट एडवोकेट्स-ऑन-रिकॉर्ड एसोसिएशन ने तीखी आलोचना की थी और इसे कानूनी पेशे को कमजोर करने के लिए 'परेशान करने वाली प्रवृत्ति' बताया था। विवाद के बाद ईडी ने 20 जून को आंतरिक निर्देश जारी कर अपने अधिकारियों को निदेशक की पूर्व स्वीकृति और भारतीय साक्ष्य अधिनियम की धारा 132 के अनुपालन के अलावा धन शोधन के मामलों में वकीलों को तलब करने से रोक दिया था।  

हाई कोर्ट ने कहा, बहू को घर में रहने का अधिकार, संपत्ति का नहीं

 नई दिल्ली दिल्ली हाईकोर्ट ने शुक्रवार को एक ऐसा फैसला सुनाया जो परिवार के झगड़ों में बुजुर्ग माता-पिता की शांति को सबसे ऊपर रखता है। कोर्ट ने कहा कि बुजुर्गों को अपने घर में शांति और गरिमा से रहने का पूरा अधिकार है। परिवारिक विवाद में भी यह हक कोई नहीं छीन सकता। कोर्ट ने ट्रायल कोर्ट के आदेश को बरकरार रखा। इसमें बहू को सास-ससुर के स्व-अर्जित घर से बाहर निकालने का निर्देश था। बहू का घर में रहने का हक कोर्ट ने घरेलू हिंसा से महिलाओं की रक्षा कानून (PWDV एक्ट) के तहत बहू के रहने के अधिकार को माना, लेकिन जोर देकर कहा कि यह सिर्फ 'कब्जे का हक' है, मालिकाना हक नहीं। जजों की बेंच ने टिप्पणी की, "कानून को ऐसा चलना चाहिए कि सुरक्षा भी बनी रहे और शांति भी।" अदालत ने दोनों पक्षों के हक को संतुलित करने पर जोर दिया गया। क्या है मामला? विवादित संपत्ति एक ही मकान थी। इसमें सीढ़ियां और रसोई साझा थे। कोर्ट ने कहा कि ऐसे में अलग रहना व्यावहारिक नहीं है। बुजुर्ग दंपति ने बहू के लिए वैकल्पिक घर का प्रस्ताव दिया। इसमें 65,000 रुपये मासिक किराया, मेंटेनेंस, बिजली-पानी बिल और सिक्योरिटी डिपॉजिट शामिल थे। सब खर्च वे खुद वहन करेंगे। कोर्ट ने अपील खारिज करते हुए कहा, “हक टकराने पर नाजुक संतुलन जरूरी है। किसी की गरिमा या सुरक्षा प्रभावित न हो।” PWDV एक्ट महिलाओं को बेघर होने से बचाता है। लेकिन बुजुर्गों को जीवन के अंतिम वर्ष शांतिपूर्वक बिताने का हक भी मजबूत है। कोर्ट ने निर्देश दिया कि चार हफ्तों में बहू के लिए दो कमरों वाला फ्लैट ढूंढा जाए। इलाका पुराने घर जैसा हो। उसके दो हफ्ते बाद बहू को विवादित घर खाली करना होगा।

छठी मैया का अपमान नहीं सहेगा देश — राहुल गांधी के बयान पर सीएम रेखा गुप्ता का करारा जवाब

दरभंगा लोकसभा में विपक्ष के नेता राहुल गांधी के छठ महापर्व संबंधी बयान पर दिल्ली की मुख्यमंत्री रेखा गुप्ता ने पलटवार किया है। उन्होंने कहा कि यदि कोई व्यक्ति छठी मैया का अपमान कर और पूर्वांचल के भाइयों-बहनों का अनादर कर वोट बैंक की राजनीति करना चाहता है तो अब भारत में यह राजनीति नहीं चलेगी। सीएम रेखा गुप्ता ने बातचीत में कहा कि देश की जनता, पूर्वांचल की जनता और बिहार की जनता समझती है कि राहुल गांधी वोट बैंक की राजनीति के लिए छठी मैया का अपमान कर रहे हैं। यह त्योहार आस्था, श्रद्धा और संस्कृति का प्रतीक है और इसके अपमान को देश कभी स्वीकार नहीं करेगा। मुख्यमंत्री ने कहा कि जिन लोगों को इस बात की तकलीफ है कि पिछले 27 सालों में जो काम कांग्रेस और आम आदमी पार्टी (आप) की सरकारों में नहीं हो पाए, वे अब भाजपा सरकार में हो रहे हैं, उनकी तकलीफ जारी रहेगी। उन्होंने कहा कि हम दिल्ली की जनता की सेवा कर रहे हैं और करते रहेंगे। जनता की समस्याओं का समाधान हमारी सर्वोच्च प्राथमिकता है। राहुल गांधी द्वारा प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के खिलाफ की गई अभद्र टिप्पणी पर भी सीएम गुप्ता ने तीखी प्रतिक्रिया दी।  उन्होंने कहा कि पीएम मोदी लगातार देश की सेवा में जुटे हुए हैं। कई लोग इस बात को पचा नहीं पा रहे हैं कि भारत आज वैश्विक स्तर पर एक सशक्त नेतृत्व के रूप में उभर रहा है। उन्होंने राहुल गांधी पर निशाना साधते हुए कहा कि वे चुनावी मौसम के मेंढक की तरह हैं, जो केवल चुनाव के समय थोड़ी देर के लिए बाहर आते हैं, बयान देते हैं और फिर गायब हो जाते हैं, लेकिन देश की जनता, खासकर बिहार की जनता, उनके असली चरित्र को भलीभांति जानती है। उन्होंने न पहले कभी जनता के हित में काम किया, न आगे करेंगे।

सुप्रीम कोर्ट में दिल्ली पुलिस का दावा – देशभर में दंगा भड़काने और गैर-मुसलमानों को मारने की थी योजना

नई दिल्ली  दिल्ली दंगों के आरोपी उमर खालिद, शरजील इमाम और अन्य की ओर से सुप्रीम कोर्ट में दायर जमानत याचिका का विरोध करते हुए पुलिस ने कई बड़े दावे किए हैं। दिल्ली पुलिस ने 389 पन्नों का हलफनामा दायर करते हुए दलीलें पेश की हैं कि क्यों आरोपियों को जमानत नहीं मिलनी चाहिए। दिल्ली पुलिस ने दस्तावेजी और तकनीकी सबूतों के आधार पर आरोप लगाया है कि सांप्रदायिक आधार पर पूरे देश में दंगों की साजिश रची गई थी। बार एंड बेंच की एक रिपोर्ट के मुताबिक दिल्ली पुलिस ने 8 बड़े आरोप लगाते हुए जमानत का विरोध किया है।   1. सत्ता परिवर्तन का ऑपरेशन दिल्ली पुलिस ने कहा है कि आरोपियों ने सांप्रदायिक सद्भाव को खत्म करके देश की एकता और संप्रभुता पर चोट करने के लिए साजिश रची थी। वे भीड़ को ना सिर्फ सार्वजनिक व्यवस्था बिगाड़ने के लिए उकसाना चाहते थे बल्कि सशस्त्र विद्रोह चाहते थे। गौरतलब है कि पिछले कुछ सालों में अंतरराष्ट्रीय स्तर पर विकसित इस तरह की थ्योरी को 'रिजीम चेंज ऑपरेशन' कहा जाता है। पुलिस का यह भी कहना है कि दंगे को पूरे देश में फैलाने की साजिश थी। 2 सोच-समझकर ट्रंप दौरे वाला समय चुना गया पुलिस ने कहा कि रिकॉर्ड में मौजूद चैट्स से साबित होता है कि सोच-समझकर इसे उस समय अंजाम देने की साजिश रची गई जब अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप भारत आने वाले थे। इसका मकसद अंतरराष्ट्रीय मीडिया का ध्यान खींचकर CAA को वैश्विक मुद्दा बनाना था और इसे मुसलमानों के खिलाफ हिंसा के रूप में पेश करना था। 3. यूएपीए मामलों में ‘जेल ही नियम है’ पुलिस ने यह भी दलील दी है कि यूएपीए जैसे अपराध में 'जेल ही नियम' माना गया है। अदालत के अनुसार आरोप प्रथम दृष्टया सही हैं और इन्हें गलत साबित करने की जिम्मेदारी याचिकाकर्ताओं पर थी, जो वे नहीं कर सके। अपराध की गंभीरता देखते हुए सिर्फ देरी के आधार पर जमानत नहीं दी जा सकती। 4. सुनवाई में देरी के लिए आरोपी खुद जिम्मेदार पुलिस ने कहा कि हाई कोर्ट और विशेष अदालत दोनों ने पाया कि आरोपियों ने मिलकर आरोप तय होने की प्रक्रिया में लगातार अड़चनें डालीं। सेक्शन 207 की प्रक्रिया भी अपीलीय अदालत के हस्तक्षेप से मुश्किल से पूरी हो सकी। रोजाना सुनवाई के आदेश के बावजूद आरोपियों ने दो साल तक ट्रायल को टालते रहे। 5. 900 नहीं, सिर्फ 155 गवाह पुलिस ने कहा कि 900 गवाहों के होने की वजह से ट्रायल जल्दी पूरा नहीं होने की दलील ना केवल अपरिपक्व है, बल्कि जमानत प्राप्त करने के लिए बनाया गया एक भ्रामक तर्क भी है। पुलिस ने कहा कि रिकॉर्ड में करीब 155 सार्वजनिक गवाह हैं, जिनमें से 58 ने अदालत में बयान दिए हैं। 47 गवाहों को सुरक्षा दी गई है, जिनमें 38 ने धारा 164 और बाकी ने धारा 161 के तहत बयान दर्ज कराए हैं। 6. उमर खालिद ने सुप्रीम कोर्ट से अपनी जमानत याचिका वापस ली थी पुलिस ने कहा कि फरवरी 2024 में उमर खालिद ने सुप्रीम कोर्ट से अपनी जमानत याचिका वापस ले ली थी। इसलिए हाई कोर्ट के निष्कर्ष अब अंतिम हो चुके हैं और उन्हें दोबारा खोलने या नई जमानत अर्जी के जरिए चुनौती नहीं दी जा सकती। 7. चक्का जाम का उद्देश्य गैर-मुसलमानों पर हमला दिल्ली पुलिस के अनुसार चक्का जाम का असली मकसद पुलिसकर्मियों और गैर-मुसलमानों को निशाना बनाकर दंगे भड़काना और सरकारी-संपत्ति को नुकसान पहुंचाना था। पुलिस ने कहा कि शरजील इमाम ने दंगों पर थीसिस लिखी थी और उनके भाषणों में इसका असर साफ दिखता है। 8. व्हाट्सऐप ग्रुप और बैठकें पुलिस ने कहा कि JCC नामक व्हाट्सऐप ग्रुप बनाया गया, जो फर्जी दस्तावेजों से लिए गए नंबर पर चलाया गया था। इसके अलावा 'मुस्लिम स्टूडेंट्स ऑफ JNU' नाम से भी एक सांप्रदायिक ग्रुप बनाया गया था, जिसे उमर खालिद के निर्देश पर शुरू किया गया।  

दिल्ली में पार्किंग फीस में उछाल: NDMC ने ऑफ-रोड व इनडोर पार्किंग का शुल्क दोगुना किया — 29 अक्टूबर से

नई दिल्ली  पलूशन की मार के बीच दिल्लीवालों के लिए ये खबर टेंशन बढ़ा सकती है। CAQM के आदेश को मानते हुए नई दिल्ली नगर पालिका परिषद ने पार्किंग शुल्क को बढ़ाकर दोगुना कर दिया है। नई दरें आज यानी 29 अक्टूबर से ही लागू हो गई हैं। आदेश के अनुसार,यह तब तक लागू रहेगा जब तक ग्रेडेड रिस्पांस एक्शन प्लान (GRAP) का चरण-II हटाया नहीं जाता।   यह बढ़ोतरी NDMC क्षेत्र के सभी ऑफ-रोड और इनडोर पार्किंग स्थलों पर लागू होगी। यह फैसला ग्रेडेड रिस्पांस एक्शन प्लान (GRAP) के चरण-II के लागू होने के बाद लिया गया है,जो राजधानी में हवा की गुणवत्ता बिगड़ने के कारण शुरू हुआ है। एक नोटिस के अनुसार वायु गुणवत्ता प्रबंधन आयोग (CAQM) ने दिल्ली-एनसीआर में चरण-II ('बहुत खराब' हवा की गुणवत्ता) के उपायों को सख्ती से लागू करने का निर्देश दिया है। एक वरिष्ठ एनडीएमसी (NDMC) अधिकारी ने न्यूज एजेंसी को बताया कि वायु गुणवत्ता प्रबंधन आयोग (CAQM) की ओर से जारी आदेश के पालन में NDMC की तरफ से प्रबंधित पार्किंग (ऑफ-रोड/इनडोर) के लिए पार्किंग शुल्क को मौजूदा दरों से दोगुना कर दिया गया है। यह बढ़ोतरी 29 अक्टूबर से GRAP के चरण-II के हटने तक जारी रहेगी। कहां लागू होगा यह फैसला? अधिकारी ने बताया कि NDMC वर्तमान में 126 पार्किंग स्थलों का प्रबंधन करती है। इन 126 साइट्स में 99 ऑफ-रोड, 3 इनडोर/मल्टी-लेवल कार पार्क और 24 ऑन-स्ट्रीट साइट्स शामिल हैं। अधिकारी ने कहा,"पार्किंग शुल्क बढ़ाने के फैसले से कुल 102 पार्किंग स्थल प्रभावित होंगे।" वाहन प्रकार     वर्तमान फीस (रुपये में)    नई फीस (रुपये में) चार पहिया वाहन     20    40 दो पहिया वाहन     10    20 बस                             150    300 कार (इंडोर)            10    20 स्कूटर (इंडोर)            5    10

वोटर सुविधा में बड़ा कदम: अब कॉल पर मिलेगा बीएलओ से तुरंत समाधान

नई दिल्ली  भारत निर्वाचन आयोग (ईसीआई) ने मतदाताओं की चुनाव संबंधी हर छोटी-बड़ी शिकायत और सवालों के त्वरित निपटारे के लिए दो प्रमुख सुविधाओं को और मजबूत किया है। राष्ट्रीय मतदाता हेल्पलाइन 1950 और नई 'बीएलओ के साथ बुक-अ-कॉल' सुविधा अब पूरे देश में सक्रिय हैं, जिसका उद्देश्य यह है कि कोई भी मतदाता चुनाव प्रक्रिया में असमंजस या परेशानी का शिकार न हो। आयोग के अनुसार टोल-फ्री नंबर 1800-11-1950 पर सुबह 8 बजे से रात 8 बजे तक प्रशिक्षित अधिकारी मतदाताओं के फोन का जवाब देते हैं। चाहे नाम जोड़ना हो, वोटर आईडी में सुधार, मतदान केंद्र की जानकारी या कोई शिकायत, सब कुछ यहीं सुलझाया जाता है। यह केंद्र सभी 36 राज्यों और केंद्र शासित प्रदेशों के लिए केंद्रीय हेल्पलाइन का काम करता है। समय पर और स्थानीय स्तर की प्रतिक्रिया के लिए हर राज्य में राज्य संपर्क केंद्र (एससीसी) और हर जिले में जिला संपर्क केंद्र (डीसीसी) स्थापित किए गए हैं। ये केंद्र कार्य दिवसों में कार्यालय समय के दौरान खुले रहते हैं और क्षेत्रीय भाषाओं में सहायता देते हैं ताकि कोई मतदाता भाषा की बाधा से वंचित न रहे। हर शिकायत और सवाल को राष्ट्रीय शिकायत सेवा पोर्टल (एनजीएसपी 2.0) पर दर्ज किया जाता है। मतदाता ऑनलाइन स्टेटस चेक कर सकते हैं। आयोग ने सभी मुख्य निर्वाचन अधिकारियों (सीईओ), जिला निर्वाचन अधिकारियों (डीईओ) और निर्वाचन रजिस्ट्रीकरण अधिकारियों (ईआरओ) को निर्देश दिए हैं कि 48 घंटे के अंदर हर अनुरोध का निपटारा हो। अब मतदाता ईसीआईएनईटी प्लेटफॉर्म या ईसीआईनेट ऐप के जरिए अपने बूथ लेवल अधिकारी (बीएलओ) से अपॉइंटमेंट बुक कर सकते हैं। 'बुक-अ-कॉल विद बीएलओ' सुविधा से घर बैठे बीएलओ से फोन पर बात हो जाएगी। यह खास तौर पर ग्रामीण और दूरदराज के मतदाताओं के लिए उपयोगी है। यदि फोन नहीं करना चाहते, तो आयोग के आधिकारिक कंप्लेंट ईमेल पर शिकायत भेजें। हर मैसेज का जवाब दिया जाएगा। निर्वाचन आयोग ने सभी मतदाताओं से अपील की है कि चुनाव से जुड़ी कोई भी जानकारी, सुझाव, फीडबैक या शिकायत के लिए 1950 हेल्पलाइन या बीएलओ अपॉइंटमेंट का इस्तेमाल करें। आयोग का दावा है कि यह पहल लोकतंत्र को और मजबूत बनाती है, जहां हर मतदाता की आवाज सुनी जाए।