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HTLS मंच से रेखा गुप्ता का संदेश: प्रदूषण पर तेजी से हो रहा काम, समाधान भी जल्द

नई दिल्ली  दिल्ली की सीएम रेखा गुप्ता ने कहा कि दिल्ली में पलूशन और स्मॉग है लेकिन यह आज ही है ऐसा नहीं है। यह एक वर्षों से चली आ रही समस्या है। इसमें कई सारे फैक्टर काम करते हैं। इसको बढ़ाने में परिवहन, ओपन बर्निंग, डस्ट तमाम फैक्टर काम करते हैं। ऐसा नहीं है कि कुछ जादू की छड़ी घूमने से झटके में पलूशन खत्म हो जाने वाला है। पलूशन खत्म करना एक रेगुलर प्रॉसेस है। सीएम रेखा गुप्ता समिट 2025 में बोल रही थीं। उनसे पूछा गया कि दिल्ली से पलूशन कब खत्म होगा। सीएम रेखा गुप्ता ने कहा कि दिल्ली में पलूशन एक लिगेसी प्रॉब्लम है। यह बरसों बरस से चली आ रही समस्या है। दिल्ली में पलूशन बढ़ने की कई वजहें हैं। सीएम ने आगे कहा कि दिल्ली एक बड़ा शहर है जिसकी आबादी लगातार बढ़ रही है। इसी तरह पहले जो ट्रैफिक हुआ करता था आज यह उसके कई गुना ज्यादा है। पहले जितनी गाड़ियों का रजिस्ट्रेशन हुआ करता था आज उससे तीन गुना ज्यादा हुआ करता है। ये सारी स्थितियां लगातार चल रही हैं। पलूशन में कोई एक इनपुट काम नहीं करता है। सीएम रेखा गुप्ता ने कहा कि इसमें ओपन बर्निंग भी काम करती है। इसमें डस्ट भी काम करती है। इसमें ट्रैफिक भी काम करता है। इस तरह मिलकर एक बड़ी समस्या के रूप में पलूशन बन जाता है। ऐसा भी नहीं कि आज कोई जादू की छड़ी घूम जाने से यह समस्या खत्म हो जाने वाली है। पलूशन को खत्म करने की एक सतत प्रक्रिया है। आप इस दिशा में आज कुछ करते हैं, कल उससे ज्यादा ताकत से इस पर काम करते हैं। इस तरह एक प्रक्रिया है। समिट में बोलते हुए दिल्ली की CM रेखा गुप्ता ने कहा कि इस तरह से बीते 10 महीनों में हमारी सरकार ने वो तमाम कदम उठाए जो जरूरी थे। हमने पलूशन खत्म करने की दिशा में वो तमाम काम किए जो पिछली सरकारों ने नहीं किए। शायद इसीलिए यह लिगेसी प्रॉब्लम के तौर पर यह समस्या आज भी हमारे सामने है। अन्यथा यह खत्म हो गई होती। दिल्ली की सीएम रेखा गुप्ता ने कहा कि कांग्रेस सरकारों के जमाने में भी ऐसे ही पलूशन होता था।

14 एनर्जी स्टेशनों के साथ तैयार हो रहा भारत का सबसे लंबा ई-हाईवे दिल्ली-गुरुग्राम-जयपुर

नई दिल्ली देश में पहली बार सोलर, पवन, थर्मल और हाइड्रोजन स्रोतों से बिजली उत्पन्न कर ई-वाहनों को चार्ज करने की सुविधा उपलब्ध कराई जाएगी। इसके लिए नेशनल हाईवे फॉर ईवी (NHEV) 3जी एनर्जी स्टेशन स्थापित करेगा। यह पहल दिल्ली-एनसीआर में प्रदूषण कम करने में मददगार साबित होगी और साथ ही बिजली की बचत भी सुनिश्चित करेगी। गुरुग्राम के ग्वाल पहाड़ी स्थित नेशनल इंस्टीट्यूट ऑफ सोलर एनर्जी (NISE) में शुक्रवार को एनएचईवी वर्किंग कमेटी की सातवीं बैठक आयोजित होगी। इस बैठक में दिल्ली-गुरुग्राम-जयपुर और दिल्ली-फरीदाबाद-आगरा कॉरिडोर पर पहले चरण में 14 अत्याधुनिक 3जी एनर्जी स्टेशनों का अंतिम रोडमैप तैयार किया जाएगा। इन चार्जिंग स्टेशनों पर 200 से 500 किलोवॉट तक के अल्ट्रा-फास्ट चार्जर लगाए जाएंगे, जिससे कोई भी इलेक्ट्रिक वाहन केवल 30 मिनट में 100 से 200 किलोमीटर तक चलने के लिए चार्ज हो सकेगा। नवीकरणीय ऊर्जा स्रोतों से संचालित होने के कारण प्रत्येक स्टेशन से सालाना लगभग 8,000 टन कार्बन डाइऑक्साइड उत्सर्जन कम होगा। तीन हजार 200 किलोवॉट क्षमता वाले हाइब्रिड सर्विस हब सोलर, पवन, थर्मल और हाइड्रोजन माइक्रो-इलेक्ट्रोलाइज़र से संचालित होंगे। भविष्य में इन्हें पूरी तरह हाइड्रोजन आधारित तकनीक में बदला जाएगा। दिल्ली-जयपुर और दिल्ली-आगरा को जोड़ने वाले विश्व के सबसे बड़े ईवी कॉरिडोर के निर्माण के लिए शुक्रवार की बैठक में विस्तृत योजना तैयार की जाएगी।  अभिजीत सिन्हा, निदेशक, एनएचईवी एनएचईवी का उद्देश्य देश के लगभग 5,000 किलोमीटर लंबे हाईवे को इलेक्ट्रिक वाहनों के लिए उपयुक्त बनाना है। पहले चरण में यह पहल दिल्ली-गुरुग्राम-जयपुर और दिल्ली-फरीदाबाद-आगरा हाईवे पर शुरू की जाएगी। इस कदम से यात्रियों को यात्रा में आसानी और सुविधा प्राप्त होगी। दिल्ली में प्रदूषण से निपटने के लिए 5 ट्रक हब बनेंगे दिल्ली-एनसीआर में प्रदूषण कम करने के लिए एनएचईवी पांच बड़े इलेक्ट्रिक ट्रक चार्जिंग हब भी स्थापित करेगा। ये नए हब गुरुग्राम, फरीदाबाद, सोनीपत, नोएडा और गाजियाबाद में बनाए जाएंगे। वर्तमान में रोजाना लगभग 15,000 डीजल ट्रक राजधानी में प्रवेश करते हैं, जो वायु प्रदूषण का बड़ा कारण हैं। नई चार्जिंग सुविधाओं की मदद से 24 घंटे में करीब 10,000 इलेक्ट्रिक ट्रकों को चार्ज किया जा सकेगा। इससे डीजल ट्रकों का प्रवेश धीरे-धीरे कम होगा और दिल्ली की वायु गुणवत्ता में महत्वपूर्ण सुधार आएगा। इस पहल से नागरिकों को प्रदूषण से राहत मिलने की उम्मीद है। गुरुग्राम होकर गुजरेगा विश्व का सबसे लंबा ई-हाईवे: वर्तमान में जर्मनी के बर्लिन में 109 किमी लंबा ई-हाईवे है। देश का पहला ई-हाईवे दिल्ली के इंडिया गेट से जयपुर के अलबर्ट पिंटो हॉल तक घोषित किया गया है। लगभग 280 किमी लंबा यह हाईवे पूरी तरह तैयार होने के बाद विश्व का सबसे लंबा ई-हाईवे बन जाएगा। पहले इसका प्रारंभिक बिंदु गुरुग्राम था, जिसे बाद में इंडिया गेट तक बढ़ाया गया। दिल्ली-गुरुग्राम-जयपुर और फिर दिल्ली-आगरा कॉरिडोर के पूरा होने पर यह हाईवे लगभग 500 किमी लंबा हो जाएगा। 3 प्वाइंट में समझें 3G चार्जिंग स्टेशन ग्रीन एनर्जी: ये चार्जिंग स्टेशन 100% नवीकरणीय ऊर्जा (Renewable Energy) से संचालित होंगे। इसमें सोलर पैनल, पवन टरबाइन, हाइड्रोजन और स्टोरेज बैटरी से पावर जनरेट की जाएगी, और कोई ग्रिड कनेक्शन नहीं होगा। प्रत्येक स्टेशन से सालाना लगभग 8,000 टन CO₂ उत्सर्जन बचाया जा सकेगा, जिससे हाईवे पर चलने वाली ईवी वास्तविक रूप से शून्य उत्सर्जन (Zero Emission) वाली होंगी। यह भारत का पहला ऐसा प्रोजेक्ट है जो थर्मल पावर को पूरी तरह बायपास करेगा। गिगानटिक क्षमता: इस पहल के तहत 3.2 मेगावॉट क्षमता वाले विशाल चार्जिंग स्टेशन बनाए जाएंगे। एक ही स्थान पर 60-120 kW फास्ट चार्जर, ट्रक और बस के लिए 600 kW पैंटोग्राफ, वायरलेस चार्जिंग पैड, बैटरी स्वैप सिस्टम और हाइड्रोजन डिस्पेंसर जैसी सुविधाएं उपलब्ध होंगी। चार 800 kWh के सब-स्टेशन मिलाकर कुल 3,200 kWh बिजली उत्पन्न की जाएगी, जिससे एक साथ लगभग 300 कारें या 50 ट्रक-बसे चार्ज हो सकेंगी। जेनरेशन नेक्स्ट: ये चार्जिंग स्टेशन 5G नेटवर्क, AI आधारित लोड मैनेजमेंट और जियो रूट प्लानिंग से लैस होंगे। वाहन अपने आप यह जानकारी देगा कि अगला 3G स्टेशन कहां है, कितनी चार्जिंग बची है और कितनी देर रुकना है। भविष्य में, 2047 तक इन स्टेशनों को 6.4 मेगावॉट क्षमता वाले 5G स्टेशन में अपग्रेड किया जाएगा। पर्यटन और लॉजिस्टिक्स को बूस्ट: यह प्रोजेक्ट भारत सरकार के ईज़ ऑफ डूइंग बिजनेस (EODB) पायलट का हिस्सा है, जो नेशनल हाईवे को ई-हाईवे (NHEV) में बदलने पर केंद्रित है। विशेषज्ञों का कहना है कि इस पहल से इलेक्ट्रिक टैक्सी और टूरिस्ट बसों की संख्या बढ़ेगी। वर्तमान में अधिकांश लोग पेट्रोल-डीजल वाहन ही चुनते हैं क्योंकि चार्जिंग स्टेशन न मिलने का डर रहता है। अब हर 50 किमी पर चार्जिंग उपलब्ध होने से लोग EV से निश्चिंत होकर यात्रा कर सकेंगे। इसके साथ ही लॉजिस्टिक्स कंपनियां भी इलेक्ट्रिक ट्रक चलाने की तैयारी कर रही हैं।

कोर्ट में AI का इस्तेमाल अभी नीतिगत दायरे से बाहर, कानून मंत्री का बड़ा खुलासा

नई दिल्ली  केंद्र सरकार ने शुक्रवार को लोकसभा में बताया कि न्यायपालिका में आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (एआई) के उपयोग को लेकर अभी तक कोई औपचारिक नीति या दिशानिर्देश तैयार नहीं किए गए हैं। हालांकि सुप्रीम कोर्ट ने न्यायिक क्षेत्र में एआई के इस्तेमाल की संभावनाएं तलाशने के लिए एक एआई कमेटी बनाई है, लेकिन सभी एआई-आधारित समाधान अभी नियंत्रित पायलट चरण में ही हैं। कानून मंत्री अर्जुन राम मेघवाल ने बताया कि न्यायपालिका फिलहाल केवल उन्हीं क्षेत्रों में एआई का उपयोग कर रही है, जिन्हें ई-कोर्ट फेज-3 की विस्तृत परियोजना रिपोर्ट में मंजूरी दी गई है। उन्होंने कहा, "न्यायपालिका एआई को अपनाने में कई बड़ी चुनौतियों को ध्यान में रख रही है, जैसे एल्गोरिद्म में पक्षपात का खतरा, भाषा और अनुवाद संबंधी समस्याएं, डेटा गोपनीयता और सुरक्षा और एआई द्वारा तैयार सामग्री की मैनुअल जांच की आवश्यकता।" मेघवाल ने बताया कि ई-कमेटी की अध्यक्ष, सुप्रीम कोर्ट जज की निगरानी में छह हाई कोर्ट जजों और तकनीकी विशेषज्ञों वाली एक सब-कमेटी बनाई गई है। यह कमेटी सुरक्षित कनेक्टिविटी, डेटा संरक्षण, प्रमाणीकरण व्यवस्था और ई-कोर्ट परियोजना के तहत मौजूद डिजिटल ढांचे की मजबूती का आकलन कर रही है। कानून मंत्री ने बताया कि न्यायिक अनुसंधान में मदद के लिए कानूनी अनुसंधान विश्लेषण सहायक (एलईजीआरएए) नाम का एआई टूल विकसित किया गया है। यह जजों को कानूनी दस्तावेजों और निर्णयों के विश्लेषण में सहायता करता है। इसके अलावा डिजिटल कोर्ट 2.1 नाम का एक और एआई आधारित प्लेटफॉर्म तैयार किया गया है। यह जजों और न्यायिक अधिकारियों के लिए केस से जुड़ी सभी जानकारी एक ही विंडो में उपलब्ध कराता है। इस सिस्टम में एएसआर-श्रुति (वॉयस-टू-टेक्स्ट) और पाणिनी (अनुवाद) जैसी सुविधाएं भी जोड़ी गई हैं, जिससे आदेश और फैसलों की डिक्टेशन आसान होती है। उन्होंने बताया कि अब तक पायलट फेज में इन एआई समाधानों में किसी तरह की सिस्टमैटिक बायस या गलत सामग्री जैसी समस्या सामने नहीं आई है। मेघवाल ने बताया कि हाल के दिनों में अदालतों में मॉर्फ्ड या फर्जी डिजिटल सामग्री जमा कराए जाने के मामलों में वृद्धि हुई है। न्यायपालिका ने इसे गंभीर खतरे के रूप में पहचाना है, क्योंकि यह न सिर्फ न्यायिक प्रक्रिया बल्कि सार्वजनिक धारणा को भी प्रभावित कर सकता है। उन्होंने जानकारी दी कि ऐसे मामलों में सूचना प्रौद्योगिकी अधिनियम 2000 की विभिन्न धाराओं के तहत कार्रवाई होती है, जैसे पहचान की चोरी (66सी), कंप्यूटर संसाधन का उपयोग कर धोखाधड़ी (66डी), अश्लील या आपत्तिजनक सामग्री (67, 67ए, 67बी) का प्रकाशन या प्रसारण। इसी तरह भारतीय न्याय संहिता, 2023 की धाराएं भी इन अपराधों पर लागू होती हैं।

इंडिगो का बड़ा फ्लाइट कैंसिलेशन: दिल्ली से सभी उड़ानें रद्द, 550 फ्लाइट एक दिन में कैंसल

नई दिल्ली  देश की सबसे बड़ी एयरलाइन इंडिगो के परिचालन में व्यवधान लगातार चौथे दिन भी जारी है। जानकारी के मुताबिक इंडिगो ने शुक्रवार को दिल्ली और देश के अन्य एयरपोर्ट्स से कम से कम 550 उड़ानें रद्द कर दी हैं। इसके चलते एयरपोर्ट्स पर अफरा-तफरी का माहौल है। कई यात्रियों ने असुविधा के साथ ही सामान गायब होने की भी शिकायतें की हैं। इससे पहले गुरुवार को 550 से ज्यादा घरेलू और अंतरराष्ट्रीय उड़ानों को रद्द कर दिया गया था। दिल्ली एयरपोर्ट के अधिकरियों के मुताबिक यहां से उड़ान भरने वाली 135 और आने वाली 90 उड़ानों को रद्द किया गया है। बेंगलुरु एयरपोर्ट से संचालित होने वाली कम से कम 102 उड़ानों को रद्द किया गाय है। वहीं हैदराबाद से 92 फ्लाइट्स को कैंसल कर दिया गाय है। अब तक चार दिनों में 1000 से ज्यादा फ्लाइट कैंसल हो चुकी हैं। मुंबई एयरपोर्ट से उड़ान भरने वाली 53 और यहां आने वाली 51 फ्लाइट्स को कैंसल किया गया है। इस तरह मुंबई एयरपोर्ट से संचालिन होने वाली कुल 104 उड़ानें रद्द हो गई हैं। इंडिगो हाल के दिनों में चालक दल की भारी किल्लत का सामना कर रहा है। दरअसल उड़ान ड्यूटी की सीमा तय करने वाले नए एफडीटीएल नियम लागू होने के बाद से ही एयरलाइन चालक दल की कमी का सामना कर रही है। नए नियमों के तहत पायलटों के लिए साप्ताहिक विश्राम समय बढ़ाया गया है और रात में लैंडिंग की संख्या सीमित की गई है ताकि उड़ान सुरक्षा को मजबूत किया जा सके। बड़ी संख्या में पायलट्स अनिवार्य रेस्ट पीरियड के चलते फ्लाइट नहीं ले जा पा रहे हैं। इंडिगो ने डीजीसीए को बताया है कि 8 दिसंबर से विमानों का संचालन कम कर दिया जाएगा। उम्मीद है कि 10 फरवरी से संचालन स्थिर हो जाए। इंडिगो ने डीजीसीए से एफडीटीएल के नियमें रात्रिकालीन संचालन से जुड़े कुछ बदलावों को लेकर 10 फरवरी तक छूट की मांग की है। इंडिगो का कहना है कि एफडीएल नियमों के लागू होने की वजह से उन्हें ज्यादा पायलट्स की जरूरत है। एफडीटीएल नियमों के तहत साप्ताहिक आराम के घंटों को 36 से बढ़ाकर 48 घंटे कर दिया गया है। इसे अलावा एक पायलट हफ्तेभऱ में दो से ज्यादा नाइट लैंडिंग नहीं कर सकता है। केवल दो ही लगातार नाइट ड्यूटी लगाई जा सकती हैं। इंडिगो का कहना है कि अगले कुछ दिनों तक उड़ानों की संख्या में कमी करनी पड़ेगी। एयरलाइन ने यात्रियों से असुविधा के लिए माफी मांगी है। इंडिगो ने कहा है कि विमानों के संचालन को पटरी पर लाने में समय लगेगा। ऐसे में आने वाले समय के लिए भी यात्रियों को तैयार रहना है। घर से निकलने से पहले वे फ्लाइट का शेड्यूल जरूर चेक करें। केंद्रीय मंत्री की हाई लेवल बैठक सिविल एविएशन मिनिस्टर के राममोहन नायडू ने गुरुवार को हालात का जायजा लेने के लिए उच्च स्तरीय बैठक आयोजित की थी। उन्होंने इंडिगो को किराया बढ़ाने को लेकर भी चेतावनी दी। केंद्रीय मंत्री ने एयरपोर्ट अथॉरिटी ऑफ इंडिया और डीजीसीए को हालात पर नजर रखने का निर्देश दिया है। इसके अलावा एयरपोर्ट्स पर फंसे यात्रियों की मदद का आश्वासन दिया है।  

राजघाट पर श्रद्धांजलि, फिर मोदी से मुलाकात: भारत दौरे पर पुतिन का अहम दिन

नई दिल्ली  भारत यात्रा पर आए रूसी राष्ट्रपति व्लादीमीर पुतिन ने शुक्रवार सुबह राजघाट जाकर महात्मा गांधी को श्रद्धासुमन अर्पित किए। पुतिन ने बापू की समाधि पर सिर झुकाया और परिक्रमा की। उन्होंने एक पुष्प चक्र चढ़ाया और बापू के प्रति अपनी कृतज्ञता प्रकट की। उन्होंने राजघाट पर रखी स्मारिका में भी दस्तखत किए। इसके बाद राष्ट्रपति भवन में उन्हें गार्ड ऑफ ऑनर दिया गया। यहां से प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के साथ पुतिन सीधे हैदराबाद हाउस पहुंचे जहां दोनों के बीच अहम द्विपक्षीय वार्ता होनी है। हैदराबाद हाउस में पीएम मोदी ने कहा, आपके स्वागत करने का मौका मिला है। कल से ही डेलिगेशन कई बैठकों में व्यस्त रहें। आपकी यात्रा बहुत ही ऐतिहासिक है। 2001 में जब आपने कार्यभार संभाला था तभी दोनों देशों के बीच संबंधों की एक मजबूत नींव रखी गई थी। यूक्रेन को लेकर पुतिन से क्या बोली पीएम मोदी वार्ता शुरू होने से पहले पीएम मोदी ने कहा, 'मैं मानता हूं कि 2001 में आपने जो भूमिका अदा की, एक विजिनरी लीडर कैसे सोचता है और संबंधों को कहां तक पहुंचा सकता है। इसका एक उत्तम उदाहरण भारत और रूस के संबंध हैं। यूक्रेन संकट के बाद हमारी लगातार चर्चा होती रही है।आपने इस विषय पर हमें अवगत भी कराया है। सबका कल्याण शांति के मार्ग पर है। हम सबको मिलकर शांति का रास्ता तलाशना चाहिए। पिछले दिनों से जो प्रयास चल रहे हैं, उससे हमें विश्वास है कि विश्व एक बार फिर शांति के रास्ते पर लौटेगा।' पीएम मोदी ने कहा, पिछले दिनों विश्व समुदाय के नेताओं से मेरी बात हुई है। मैंने हमेशा कहा है कि भारत न्यूट्रल नहीं है। भारत का पक्ष है और वह है शांति का है। हम शांति के पक्ष का समर्थन करते हैं और हर प्रयास के लिए कंधे से कंधा मिलाकर खड़े हैं। हमें विश्वास है कि विश्व बहुत जल्दी चिंतामुक्त हो जाएगा। मुझे पूरा भरोसा है कि हम आज जिन विषयों पर चर्चा करने वाले हैं, उससे दोनों देशों के संबंध नई ऊंचाई को प्राप्त करेंगे। व्लादिमीर पुतिन ने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी को यूक्रेन के मुद्दे पर ध्यान देने के लिए शुक्रिया कहा।  

दिल्ली में BJP का मास्टरस्ट्रोक: दो सीट कम, पर बढ़त सबसे दमदार!

नई दिल्ली दिल्ली नगर निगम (एमसीडी) की 12 सीटों पर हुए उपचुनाव में भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) ने 7 जीतकर अपना दबदबा कायम रखा। भाजपा दिल्ली में सरकार बनने के बाद हुई अपनी पहली परीक्षा में 'टॉप' करके गदगद है तो आम आदमी पार्टी यह कहकर उसकी जीत को कमतर कर रही है कि सत्ताधारी के पास मौजूद रहीं 9 सीटों पर उपचुनाव हुआ था और वह अब सात ही जीत पाई है। हालांकि, आंकड़ों के विश्लेषण से पता चलता है कि भाजपा ने वोट शेयर के मामले में बड़ी छलांग लगाई है और उसकी खुशी की असली वजह भी यही है।   2022 में हुए नगर निगम चुनाव में भाजपा को हार का सामना करना पड़ा था। तब पार्टी को 39 फीसदी वोट शेयर हासिल हुए थे, जबकि 42 फीसदी वोट शेयर लेकर अरविंद केजरीवाल की अगुआई वाली वाली 'आप' पहली बार निगम में काबिज हुई थी। हालांकि, विधानसभा चुनाव के बाद आप के कई पार्षदों ने मिलकर नया गुट बना लिया और भाजपा ने दोबारा एमसीडी पर कब्जा कर लिया। इस उपचुनाव में भाजपा के वोट शेयर में बड़ा उछाल देखने को मिला है। 45 फीसदी वोटर्स ने भाजपा के पक्ष में मतदान किया है। 2022 के मुकाबले पार्टी को 6 फीसदी अधिक वोट मिले हैं। जनसमर्थन में हुई इस वृद्धि से निश्चित तौर पर पार्टी गदगद है। चुनाव नतीजों के बाद प्रदेश अध्यक्ष वीरेंद्र सचदेवा से जब दो सीटें कम होने पर सवाल किया गया तो उन्होंने कहा कि स्थानीय समीकरणों की वजह से ऐसा हुआ होगा, लेकिन उन्हें आम आदमी पार्टी से करीब 10 फीसदी अधिक वोट मिले हैं। आम आदमी पार्टी को बड़ा झटका आप भले ही अपने प्रदर्शन को बरकरार रख पाई, लेकिन वोट शेयर के मामले में उसे बड़ा नुकसान हुआ है। जिन सीटों पर उपचुनाव हुए हैं उनमें से आप के पास पहले तीन सीटें थीं और अब भी पार्टी इतनी ही सीटें जीत पाई है और इसे गिनाकर वह अपना संतोष जाहिर कर रही है। हालांकि, वोट शेयर के मामले में उसे 7 फीसदी का नुकसान झेलना पड़ा है। 2022 में 42 फीसदी वोट शेयर हासिल करने वाली आप को अस बार 35 फीसदी वोटर्स ने ही चुना है। कांग्रेस के वोट शेयर में भी वृद्धि इस उपचुनाव में कांग्रेस भी एक सीट पर जीत हासिल करने में सफल रही। तब कांग्रेस को 11.68 फीसदी वोट मिले थे तो इस बार 13.4 फीसदी वोट मिले हैं।  

वोटों की हार और पार्टी की तकरार! AAP विधायक खुलकर बागी, केजरीवाल की मुश्किलें बढ़ीं

नई दिल्ली दिल्ली की सत्ता जाने के बाद अपने सबसे बड़े गढ़ में आम आदमी पार्टी (आप) की मुश्किलें कम नहीं हो रही हैं। पूर्व विधायक राजेश गुप्ता ने पार्टी छोड़ी, पटपड़गंज से चुनाव हारे अवध ओझा साथ छोड़ गए और अब एक मुस्लिम विधायक ने बागी तेवर अपना लिए हैं। मटियामहल से 'आप' विधायक आले मोहम्मद इकबाल ने पार्टी को एमसीडी चुनाव में मिले जख्म पर नमक रगड़ दिया है। ये वही आले मोहम्मद हैं जिन्हें अरविंद केजरीवाल ने डिप्टी मेयर का पद दिया था और फिर विधानसभा का टिकट दिया।   आले के पिता और दिग्गज नेता शोएब इकबाल ने पिछले महीने ही 'आप' छोड़ने का ऐलान कर दिया था और ऑल इंडिया फॉरवर्ड ब्लॉक के उम्मीदवार मोहम्मद इमरान के समर्थन में खुलकर काम करते हुए उनकी जीत में अहम भूमिका निभाई। अब आले ने इस पर खुशी जाहिर करके बड़ा संकेत दे दिया है। आले इकबाल के एक्स प्रोफाइल पर उनकी तस्वीर अब पार्टी प्रमुख अरविंद केजरीवाल के संग नहीं बल्कि पिता शोएब इकबाल के साथ दिखती है। जिस पर लिखा है, 'हमारा काम ही हमारी पहचान।' पहले की तरह अब वह ना तो वह तस्वीरों में पार्टी सिंबल का इस्तेमाल कर रहे हैं और ना ही 'आप' की नीतियों, कामकाज और नेताओं के भाषणों को शेयर करते हैं। चादंनी महल में आप की हार और मोहम्मद इमरान की जीत के बाद आले मोहम्मद इकबाल ने जो प्रतिक्रिया दी उससे उनके बागी तेवर साफ हो गए हैं। उन्होंने लिखा, ‘यह जीत मेरे इलाके के शेरों की है। साजिश करने वाले हार गए। हक की जीत हुई, बातिल की हार हुई। जो काम करने वाले थे, वही जीतकर आए। शोएब इकबाल की मोहब्बत को सलाम- अहंकारी, पैसे वाले, शोहरत वाले, ताकतवर- सबके मुंह काले हो गए। शेर आ गया- अल्हमदुल्लिलाह!’ एक तरफ आले ने पिता शोएब इकबाल की मोहब्बत को सलाम लिखा तो दूसरी तरफ पूर्व विधायक शोएब इकबाल विजेता उम्मीदवार मोहम्मद इमरान के साथ जश्न मनाते, उन्हें गले लगाते दिखे। आम आदमी पार्टी की ओर से अभी इस प्रतिक्रिया नहीं आई है। माना जा रहा है कि पार्टी आले पर ऐक्शन ले सकती है। आले मोहम्मद इकबाल ने कहा- साजिश करने वाले हार गए। पूर्व विधायक शोएब इकबाल ने 9 नवंबर को 'आप' छोड़ने की घोषणा की थी। चांदनी महल वार्ड में पसंद के उम्मीदवार को टिकट नहीं दिए जाने से वह नाराज थे। शोएब इकबाल ने तब कहा था, ‘मैं आम आदमी पार्टी की नीतियों से नाखुश हूं। पार्टी एक आंदोलन से उपजी थी, लेकिन अब यह अपनी राह से भटक गई है। मैंने पार्टी से इस्तीफा दे दिया है और अब कभी वापस नहीं लौटूंगा।’ उन्होंने चांदनी महल वार्ड के लिए पार्टी द्वारा चुने गए उम्मीदवार पर भी नाखुशी जताई। पार्टी ने इस क्षेत्र से मुद्दसिर उस्मान कुरैशी को मैदान में उतारा था। शोएब ने कहा, ‘मैं इस इलाके से छह बार विधायक रहा हूं। मेरा बेटा पार्षद था और सबसे ज्यादा मतों के अंतर से जीता था। जब उसने विधानसभा चुनाव लड़ा, तो सबसे ज्यादा अंतर से जीता। पार्टी ने (एमसीडी उपचुनाव के लिए) जिस उम्मीदवार को टिकट दिया है, उसे कोई नहीं जानता।’ शोएब इकबाल ने तब संकेत दिया था कि और लोग पार्टी छोड़ सकते हैं।

दिल्ली में गड्ढों पर वार: 72 घंटे की डेडलाइन, उल्लंघन पर भारी जुर्माना—पलूशन कंट्रोल मोड में सरकार

नई दिल्ली  दिल्ली में विकराल होती पलूशन की समस्या को गंभीरता से लेते हुए आज केंद्रीय मंत्री भूपेंद्र यादव के नेतृत्व में बैठक हुई थी। इसमें दिल्ली के पर्यावरण मंत्री मनजिंदर सिरसा भी थे। सिरसा ने मीटिंग के बाद प्रेस कॉन्फ्रेंस की जिसमें दिल्ली में प्रदूषण के खिलाफ लिए फैसलों के बारे में बताया। सिरसा के बताए अनुसार, सभी सड़कों को गड्ढामुक्त कर उन्हें धूल मुक्त भी किया जाएगा। इसके साथ एंटी स्मॉग गन और पानी का छिड़काव चलते रहेंगे। मीचिंग में हरियाली को लेकर भी कदम उठाए गए हैं जिसमें वृक्षारोपण बढ़ाने पर जोर होगा। दिल्ली के पर्यावरण मंत्री मनजिंदर सिंह सिरसा ने बताया कि सुबह केंद्रीय पर्यावरण मंत्री भूपेंद्र यादव के नेतृत्व में एक बैठक हुई। इस बैठक में उत्तर भारत के सभी राज्यों ने भाग लिया। इस बैठक के बाद यह आदेश दिया गया कि नोएडा, फरीदाबाद, गुड़गांव, गाजियाबाद और ग्रेटर नोएडा में मैकेनाइज्ड रोड स्वीपर्स (मशीनीकृत सड़क सफाईकर्मी), एंटी-स्मॉग गन और पानी के स्प्रिंकलर चलाए जाने चाहिए। यह भी तय किया गया कि सड़कों पर मौजूद गड्ढों को 72 घंटों के भीतर पहचान कर ठीक किया जाएगा। पर्यावरण मंत्री मनजिंदर सिंह सिरसा ने कहा कि बैठक में यह तय किया गया कि सभी स्थानीय निकाय जनता को शामिल करते हुए वृक्षारोपण पर ध्यान केंद्रित करेंगे। यह आदेश दिया गया कि दिल्ली-NCR क्षेत्र में पार्कों और सड़कों के किनारे के क्षेत्रों को सघन रूप से पेड़ों से कवर किया जाएगा। दिल्ली सरकार तूफानी जल निकासी के साथ सड़क योजना के लिए केंद्र सरकार के 'गौरव पथ' मॉडल को अपनाएगी। मुख्यमंत्री के नेतृत्व में, हम ई-ऑटो को शामिल करके मेट्रो रेल तक अंतिम-मील कनेक्टिविटी (Last-Mile Connectivity) बढ़ाने पर काम कर रहे हैं। सिरसा ने कहा कि दिल्ली के मुख्यमंत्री ने कहा है कि प्रदूषण विरोधी उपायों और नियमों का उल्लंघन करते पाए जाने पर किसी भी एजेंसी को बख्शा नहीं जाएगा, चाहे वह सरकारी हो या निजी। निर्माण और विध्वंस स्थलों पर धूल कम करने के लिए उचित बाड़बंदी की जानी चाहिए, और वहां पानी का छिड़काव किया जाना चाहिए। MCD (नगर निगम) को आदेश दिया गया है कि उसकी सभी 8000 किमी सड़कें गड्ढों से मुक्त और धूल-मुक्त होनी चाहिए।  

दिल्ली की ‘छोटी सरकार’ में बड़ा उलटफेर: बीजेपी की बढ़त से AAP की मुश्किलें बढ़ीं

नई दिल्ली  राजधानी दिल्ली में सर्दी के मौसम में सियासी पारा अचानक चढ़ गया है। एमसीडी उपचुनाव के नतीजे सामने आ गए हैं। इन नतीजों ने दिल्ली की 'छोटी सरकार' यानी एमसीडी का गणित पूरी तरह बदल दिया है। 12 वार्डों पर हुए इस 'मिनी संग्राम' में भारतीय जनता पार्टी (BJP) ने बड़ी जीत दर्ज करते हुए यह साबित कर दिया है कि दिल्ली के स्थानीय मुद्दों पर उनकी पकड़ फिर मजबूत हो रही है। ये जीत बीजेपी के लिए काफी अहम मानी जा रही है। उपचुनाव के नतीजे आम आदमी पार्टी (AAP) के लिए अच्छे साबित नहीं हुए। 12 सीटों में से बीजेपी ने 7 पर कब्जा जमाया है, जबकि आम आदमी पार्टी केवल 3 सीटों पर सिमट गई । यह नतीजे इसलिए भी चौंकाने वाले हैं क्योंकि 2022 के एमसीडी चुनाव में AAP की लहर थी, लेकिन 2025 के खत्म होते-होते वह लहर अब कमजोर पड़ती दिख रही है।​ सदन का नया 'गणित' इन नतीजों का सबसे बड़ा असर एमसीडी सदन के नंबर गेम पर पड़ा है। आपको याद होगा कि 2022 में बीजेपी 104 सीटों पर रुक गई थी। MCD में कुल 250 सीटें हैं। हालिया विधानसभा चुनावों के बाद कुछ काउंसलरों के विधायक बनने से 12 सीटें खाली हो गई थीं। भले ही एमसीडी में बीजेपी का मेयर है, लेकिन पार्टी अभी भी बहुमत से काफी दूर थी। उपचुनाव होने से पहले तक बीजेपी के कुल 115 और आम आदमी के 99 पार्षद थे। लेकिन अब उपचुनाव की 7 सीटें जीतने और पिछले कुछ समय में हुए सियासी बदलावों के बाद, बीजेपी के पास सदन में 122 पार्षद हो गए हैं ।​ वहीं, 134 सीटों के साथ प्रचंड बहुमत से सत्ता में आई AAP का आंकड़ा अब घटकर 102 के करीब रह गया है। यानी सदन के भीतर अब बीजेपी 'सबसे बड़ी पार्टी' बनकर उभरी है। कांग्रेस का कैसा रहा प्रदर्शन? इन नतीजों में दो और कहानियां छिपी हैं। कांग्रेस ने संगम विहार जैसी सीट जीतकर अपनी वापसी के संकेत दिए हैं और अपना कुल आंकड़ा 9 पर पहुंचा दिया है।​ लेकिन सबसे बड़ा 'शॉक' दिया है वामपंथी दल ऑल इंडिया फॉरवर्ड ब्लॉक (AIFB) ने। दिल्ली की राजनीति में जहां लेफ्ट का कोई नामलेवा नहीं बचा था, वहां एक सीट जीतकर उन्होंने सियासी पंडितों को हैरान कर दिया है ।​ मेयर चुनाव पर सस्पेंस भले ही मेयर का चुनाव अभी दूर हो, लेकिन इन आंकड़ों ने भविष्य की पटकथा लिख दी है। 250 सदस्यों वाले सदन में बहुमत का जादुई आंकड़ा 126 है। बीजेपी अब 122 पर खड़ी है, जो बहुमत से सिर्फ 4 कदम दूर है। ऐसे में आने वाले दिनों में एमसीडी की बैठकों में हंगामा और शक्ति प्रदर्शन देखने को मिल सकता है।  

RSS की विचारधारा से प्रभावित हुए अवध ओझा, कहा—अन्य पार्टियों में चिंतन की जगह चापलूसी

नई दिल्ली  आम आदमी पार्टी छोड़ने के साथ और राजनीति से संन्यास की घोषणा करने वाले मशहूर कोचिंग गुरु अवध ओझा ने भाजपा और दूसरे दलों में एक अंतर बताते हुए कहा है कि जब तक ऐसा है उसे कोई हरा नहीं पाएगा। उन्होंने आरएसएस की तारीफ करते हुए कहा कि उसके विद्वान किसी नेता की जी हुजूरी नहीं करते हैं। उन्होंने बिना किसी का नाम लिए कहा कि दूसरी पार्टियों में चिंतक ही चाटुकार हैं।   पिछले साल दिसंबर में आम आदमी पार्टी में शामिल हुए अवध ओझा ने ठीक एक साल बाद मंगलवार को आम आदमी पार्टी के साथ ही राजनीति छोड़ने का आधिकारिक ऐलान कर दिया। उन्होंने अरविंद केजरीवाल को महान नेता बताते हुए उन्हें धन्यवाद दिया और कहा कि राजनीति छोड़ने का उनका फैसला व्यक्तिगत है। हालांकि, आप के कुछ नेताओं-कार्यकर्ताओं ने अवध ओझा के इस फैसले पर नाराजगी भी जाहिर की। इस बीच अवध ओझा ने आरएएसएस को भाजपा का सलाहकार परिवार बताते हुए कहा कि उनके विद्वानों को पद और पैसे का कोई लालच नहीं है। ओझा कहा कि दूसरे दलों में चिंतक चाटुकार हैं और बॉस को भी यही पसंद होता है। उन्होंने कहा, ‘बीजेपी का एक सलाहकार परिवार है-RSS, जिसके विद्वान किसी नेता की जी हुजूरी नहीं करते क्योंकि उन्हें पद और पैसे का कोई लालच नहीं। बाकी पार्टियों में चिंतक ही चाटुकार है, नहीं तो बॉस भगा देंगे। जबतक ये चलेगा बीजेपी को कोई हरा नहीं पाएगा। जय हिंद।’ बाकी दल एक पैर के सहारे: अवध ओझा कुछ दिन पहले भी अवध ओझा ने भाजपा की सफलता के पीछे आरएसएस को असली वजह बताते हुए कहा था कि राजनीतिक दलों के दो संगठन होने चाहिए, एक जो राजनीति करे और दूसरा सामाजिक काम। उन्होंने एक्स पर लिखा था,'राजनीतिक दलों के पास दो दल अनिवार्य होते हैं, राजनीतिक पार्टी, सामाजिक संगठन। उदाहरण बीजेपी और आरएसएस। दोनों एक दूसरे के क्षेत्र में दखल नहीं करते, बीजेपी पांच साल राजनीति करेगी, आरएसएस समाज से जुड़ा रहेगा और यही उसकी ताकत है। भारत के बाकी दल अपंग है सिर्फ एक पैर के सहारे हैं।'