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CBSE देगा बोर्ड परीक्षाओं से पहले छात्रों को मुफ्त मेंटल हेल्थ काउंसलिंग सेवा

चंडीगढ़. बोर्ड परीक्षाओं के दबाव और छात्रों की मानसिक सेहत को प्राथमिकता देते हुए केंद्रीय माध्यमिक शिक्षा बोर्ड (CBSE) ने कक्षा 10वीं और 12वीं के विद्यार्थियों के लिए मुफ्त साइको-सोशल काउंसलिंग सेवा की शुरुआत कर दी है। यह सेवा वर्ष 2026 की बोर्ड परीक्षाओं को ध्यान में रखते हुए शुरू की गई है और 1 जून 2026 तक जारी रहेगी। CBSE द्वारा जारी जानकारी के अनुसार, यह काउंसलिंग सुविधा बोर्ड की वार्षिक पहल का पहला चरण है, जिसका उद्देश्य छात्रों और अभिभावकों को परीक्षा से जुड़े तनाव, डर और भावनात्मक समस्याओं से उभरने में मदद करना है। टेली-काउंसलिंग सेवा के तहत विद्यार्थी और माता-पिता सोमवार से शुक्रवार सुबह 9:30 बजे से शाम 5:30 बजे तक विशेषज्ञों से बात कर सकते हैं। इस कार्यक्रम के तहत कुल 73 अनुभवी प्रशिक्षित विशेषज्ञ छात्रों का मार्गदर्शन करेंगे। इनमें CBSE से जुड़े स्कूलों के प्रिंसिपल, प्रशिक्षित काउंसलर, स्पेशल एजुकेटर और मनोवैज्ञानिक शामिल हैं। इनमें से 61 विशेषज्ञ भारत में सेवाएं दे रहे हैं, जबकि 12 काउंसलर नेपाल, जापान, कतर, ओमान और यूएई जैसे देशों से जुड़े हुए हैं। यह सेवा शनिवार और रविवार को उपलब्ध नहीं रहेगी। CBSE का कहना है कि इस पहल का मुख्य उद्देश्य छात्रों को मानसिक रूप से मजबूत बनाना है, ताकि वे फरवरी में शुरू होने वाली बोर्ड की थ्योरी परीक्षाओं का सामना बिना तनाव और घबराहट के कर सकें। बोर्ड के अनुसार, मानसिक संतुलन और सकारात्मक सोच परीक्षा प्रदर्शन में अहम भूमिका निभाते हैं। इसके अलावा, छात्र और अभिभावक टोल-फ्री नंबर 1800-11-8004 पर कॉल कर 24×7 आईवीआरएस सुविधा का लाभ भी उठा सकते हैं। यह सेवा हिंदी और अंग्रेजी दोनों भाषाओं में उपलब्ध है, जिसमें परीक्षा तैयारी, समय प्रबंधन, तनाव नियंत्रण और CBSE से जुड़ी जरूरी जानकारियां दी जाती हैं। CBSE ने यह भी स्पष्ट किया है कि तनाव प्रबंधन और प्रभावी पढ़ाई से जुड़े कई उपयोगी संसाधन बोर्ड की आधिकारिक वेबसाइट cbse.gov.in पर उपलब्ध हैं, जिन्हें छात्र किसी भी समय एक्सेस कर सकते हैं।

डॉ. बलबीर सिंह ने बताया: पंजाब में सिर्फ 4 महीनों में 10,000+ महिलाओं को मिली मुफ्त अल्ट्रासाउंड सुविधा

पंजाबः मात्र 4 महीनों में 10,000 से अधिक गर्भवती महिलाओं ने करवाए मुफ्त अल्ट्रासाउंड- डॉ. बलबीर सिंह चंडीगढ़  आने वाली पीढ़ियों की स्वास्थ्य सुरक्षा को सुनिश्चित बनाने की दिशा में महत्वपूर्ण कदम उठाते हुए मुख्यमंत्री भगवंत सिंह मान के नेतृत्व वाली पंजाब सरकार ने प्रसूति स्वास्थ्य देखभाल को सफलतापूर्वक विकेंद्रित किया है और आम आदमी क्लीनिक (ए.ए.सी.) गर्भवती महिलाओं के लिए नई जीवन रेखा के रूप में उभर रहे हैं। एक विशेष प्रोटोकॉल-आधारित गर्भावस्था देखभाल मॉडल शुरू करने के मात्र चार महीनों के अंदर सेवाएं हासिल करने वालों की संख्या में भारी वृद्धि दर्ज की गई है और हर महीने लगभग 20,000 गर्भवती महिलाएं इन क्लीनिकों में पहुंच रही हैं। इस पहल की सफलता को साझा करते हुए पंजाब के स्वास्थ्य एवं परिवार कल्याण मंत्री डॉ. बलबीर सिंह ने बताया कि इस कार्यक्रम के तहत पहले ही एक यूनिक रैफरल सिस्टम के माध्यम से 10,000 से अधिक महिलाओं को मुफ्त अल्ट्रासाउंड सेवाएं प्रदान की गई हैं। इसके साथ ही लगभग 500 निजी डायग्नोस्टिक सेंटरों को सूचीबद्ध करके राज्य सरकार ने यह सुनिश्चित किया है कि महिलाओं को विभिन्न स्कैन: जिनकी कीमत आम तौर पर 800 रुपये से 2,000 रुपये के बीच होती है – की सुविधा पूरी तरह मुफ्त दी जा रही है। इस सुविधा से मात्र 120 दिनों के छोटे समय में पंजाबी परिवारों को अनुमानित 1 करोड़ रुपये की बचत हुई है। आधिकारिक आंकड़े बताते हैं कि पंजाब में 70 प्रतिशत से कम गर्भवती महिलाओं ने अपना पहला एंटे-नेटल चेक-अप करवाया है और लगभग 60 प्रतिशत से कम ने सिफारिश अनुसार पूरे चार चेक-अप करवा लिए हैं, जबकि राज्य में माताओं की मृत्यु दर प्रति एक लाख जीवित जन्मों पर 90 रही है, जो राष्ट्रीय औसत से अधिक है। इन आंकड़ों ने राज्य भर में एक व्यापक, पहुंचयोग्य गर्भावस्था देखभाल मॉडल की तुरंत आवश्यकता को उजागर किया। पंजाब में हर साल लगभग 4.3 लाख प्रसव होते हैं, जिससे माताओं और बच्चों की स्वास्थ्य रक्षा के लिए जल्दी पता लगाना, नियमित निगरानी और समय पर रैफरल बहुत महत्वपूर्ण हो जाता है। पिछले तीन सालों में, मान सरकार ने 881 आम आदमी क्लीनिक स्थापित किए हैं, जो पंजाब की प्राथमिक स्वास्थ्य देखभाल प्रणाली की रीढ़ के रूप में उभरे हैं, जिसमें 4.6 करोड़ से अधिक ओपीडी विजिट और रोजाना लगभग 70,000 मरीजों का इलाज किया जा रहा है। इस बुनियादी ढांचे का लाभ उठाते हुए, सरकार ने लगभग चार महीने पहले ए.ए.सीज़. के माध्यम से एक विस्तृत, प्रोटोकॉल-संचालित गर्भावस्था देखभाल मॉडल शुरू किया। इस सुधार के तहत, सभी जरूरी एंटे-नेटल चेक-अप अब आम आदमी क्लीनिकों में उपलब्ध हैं। इनमें एच.आई.वी. और साइफिलिस स्क्रीनिंग, खून के सभी टेस्ट, शुगर, थायरॉइड, हेपेटाइटिस, भ्रूण की दिल की धड़कन, कोलेस्ट्रॉल और हीमोग्लोबिन मूल्यांकन जैसे रूटीन और महत्वपूर्ण टेस्ट शामिल हैं। यदि अल्ट्रासाउंड की आवश्यकता होती है तो ए.ए.सी. डॉक्टर द्वारा रैफरल स्लिप जारी की जाती है, जिसके माध्यम से गर्भवती महिलाएं मुफ्त अल्ट्रासाउंड सेवाएं प्राप्त कर सकती हैं। यहां महत्वपूर्ण बात यह है कि, लगभग 5,000 महिलाओं को हर महीने उच्च-जोखिम वाली गर्भावस्थाओं के रूप में पहचाना जा रहा है ताकि निरंतर ट्रैकिंग, केंद्रित सहायता और विशेषज्ञ देखभाल के लिए उच्च चिकित्सा सुविधाओं के लिए समय पर रैफरल किया जा सके। इस सुधार से मरीज के अनुभव में भी काफी सुधार हुआ है। महिलाएं अब गर्भावस्था से संबंधित ज्यादातर टेस्ट अपने घरों के नजदीक ही करवा सकती हैं, जिससे बड़े अस्पतालों में जाना और लंबी कतारों की परेशानी से बचते हुए मिनटों में चिकित्सकीय सलाह ले सकती हैं और बिना किसी वित्तीय बोझ के अल्ट्रासाउंड सेवाओं तक पहुंच कर सकती हैं। जन्म से पहले की पहली जांच से लेकर जन्म के बाद के फॉलो-अप तक, यह पहल तकनीकी, मानक क्लीनिकल प्रोटोकॉल, रैफरल प्रणालियों और कम्युनिटी-स्तरीय सहायता को एकीकृत करके पूरी गर्भावस्था देखभाल को मजबूत बनाती है। स्वास्थ्य मंत्री डॉ. बलबीर सिंह ने इस महत्वपूर्ण उपलब्धि पर कहा कि यह पहल जच्चा-बच्चा स्वास्थ्य के प्रति पंजाब सरकार की प्रतिबद्धता को दर्शाती है। उन्होंने कहा, “मुख्यमंत्री भगवंत सिंह मान की दूरदर्शी अगुवाई के तहत, पंजाब एक स्वास्थ्य देखभाल प्रणाली का निर्माण कर रहा है, जो यह सुनिश्चित करता है कि हर मां को घर के नजदीक मानक देखभाल मिले। सालाना 4.3 लाख गर्भावस्थाओं के साथ, आम आदमी क्लीनिकों में गर्भावस्था देखभाल सेवाओं का विस्तार एक परिवर्तनकारी कदम है और भारत में प्राथमिक स्वास्थ्य देखभाल के लिए एक नया मानक स्थापित कर रहा है।” सरकार का मानना है कि यह पहल पिछले कुछ सालों में माताओं और बच्चे के स्वास्थ्य में पंजाब के सबसे महत्वपूर्ण निवेशों में से एक है, जिसका उद्देश्य यह सुनिश्चित करना है कि कोई भी महिला भौगोलिक स्थिति, आय या जागरूकता की कमी के कारण इस लाभ से वंचित न रहे। इसके साथ ही राज्य भर में माताओं और नवजात शिशुओं के लिए स्वास्थ्य परिणामों में लगातार सुधार किया जा रहा है।

तरनतारन में पुलिस और नशा तस्करों के बीच एनकाउंटर में एक घायल

चंडीगढ़/तरनतारन. नशे के खिलाफ चलाई जा रहे अभियान के तहत बुधवार को तड़कसर थाना सिटी की पुलिसवा दो नशा तस्करों के बीच एनकाउंटर हुआ जिसमें एक नशा तस्कर गोली लगने से घायल हो गया पूछने दोनों को विरासत में लेकर उनके कब्जे से एक पिस्तौल एक कर 770 ग्राम हीरोइन ड्रग मनी बरामद की है। डीएसपी इन्वेस्टिगेशन जगजीत सिंह चाहल ने बताया कि एसएसपी सुरेंद्र लांबा के आदेश पर जिले भर में नाकाबंदी करवाई गई। बुधवार को तड़कसर मोहल्ला गुरु का खुह क्षेत्र में नाकाबंदी दौरान थाना सिटी की पुलिस ने एक फॉर्च्यूनर गाड़ी को रुकने का इशारा किया। रुकने की बजाय गाड़ी में सवार लोगों ने पुलिस पर गोलियां बरसाना शुरू कर दी। थाना प्रभारी हरप्रीत सिंह विर्क की अगवाई में पुलिस ने जवाबी कार्रवाई दौरान गोलियां चलाई। गाड़ी में सवार अवतार सिंह उर्फ बाबा निवासी गांव सुर सिंह घायल हो गया।उसके कब्जे से एक रिवॉल्वर ,770 ग्राम हैरोइन बरामद की गई जबकि बाबा के साथी जजप्रीत सिंह के कब्जे से 12000 की ड्रग मनी व एक इलेक्ट्रॉनिक कंडा बरामद हुआ है।दोनों के खिलाफ कई आपराधिक मामले दर्ज है।घायल तस्कर अवतार सिंह उर्फ बाबा को इलाज लिए सिविल अस्पताल में भर्ती करवा दिया गया है।

पंजाब में बच्चों को चाइना डोर से पतंग उड़ाते पकड़ा तो माता-पिता पर होगी कानूनी कार्रवाई

चंडीगढ़. चाइना डोर की बिक्री को लेकर पुलिस प्रशासन ने सख्त कदम उठाते हुए अब अहम फैसला लिया है कि अगर बच्चा चाइना डोर के साथ पतंग उड़ाते पकड़ा गया तो उसके माता-पिता के खिलाफ कानूनी कार्रवाई की जाएगी। यह शब्द डी.एस.पी. वरिंदर सिंह खोसा ने पत्रकारों के साथ बीत करते कहे । उन्होंने कहा कि पुलिस प्रशासन द्वारा चाइना डोर बेचने वाले दुकानदारों के खिलाफ नकेल कसी गई है और पुलिस द्वारा छापेमारी जारी है। डी.एस.पी. खोसा ने बताया कि चाइना डोर जानवरों, पक्षियों और इंसानी जानों के लिए जानलेवा है इसलिए जो बच्चे छतों पर जाकर पतंग उड़ाते हैं उनकी डोर चैक करने के लिए अब पुलिस मुलाजम छतों पर जाकर डोर की चैकिंग करेंगे ताकि किसी का जान-माल का नुकसान न हो। अगर बच्चा चाइना डोर के साथ पतंग उड़ाते पकड़ा गया तो माता-पिता के खिलाफ मामला दर्ज किया जाएगा क्योंकि माता-पिता ही बच्चों को पतंग उड़ाने के लिए डोर लाकर देते हैं। उन्होंने बताया कि शहर में पिछले कई दिनों में कई बच्चे और व्यक्ति चाइना डोर का शिकार हुए हैं और उन्हें जान जोखिम में डालकर दुख भोगना पड़ा है। उन्हें कई खुफिया जानकारी मिली हैं, उनके आधार पर ही चाइना डोर को जब्त करने के लिए छापेमारी की जा रही है। इस मौके डी.एस.पी. खोसा ने पंचों, सरपंचों, पार्षदों और आम लोगों से अपील की कि चाइना डोर से पतंग उड़ाने वाले बच्चों के खिलाफ सूचना थाना दाखा को दें। उनका नाम और पता गुप्त रखा जाएगा, ऐसा करने से चाइना डोर से पतंग उड़ाने वाले और बेचने वाले जल्द पकड़ लिया जाएगा। उन्होंने एक बार फिर दुकानदारों और चाइना डोर से पतंग उड़ाने वालों को कड़ी चेतावनी देते हुए कहा कि उनके लिए हमारे पास कोई भी अपील या दलील नहीं है, इसलिए वह चाइना डोर का गोरख धंधा और पतंगबाजी करना बंद कर दें।

सीमा पर नाकाम हुई तस्करी: पंजाब पुलिस और BSF ने हेरोइन के साथ 4 आरोपियों को किया गिरफ्तार

चंडीगढ़ पंजाब में नशे और संगठित अपराध के खिलाफ पुलिस की बड़ी कार्रवाई लगातार जारी है। पंजाब पुलिस के डीजीपी गौरव यादव ने मंगलवार को सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म एक्स पर बताया कि अंतरराष्ट्रीय ड्रग तस्करी नेटवर्क के खिलाफ एक बड़ी सफलता हाथ लगी है। डीजीपी पंजाब पुलिस के अनुसार, एंटी-नारकोटिक्स टास्क फोर्स (एएनटीएफ) बॉर्डर रेंज ने सीमा सुरक्षा बल (बीएसएफ) के साथ संयुक्त अभियान चलाकर ट्रांस-बॉर्डर स्मगलिंग के एक बड़े नेटवर्क का भंडाफोड़ किया है। इस कार्रवाई में करीब 19.980 किलोग्राम हेरोइन बरामद की गई है। पुलिस ने इस मामले में चार आरोपियों को गिरफ्तार किया है, जिनमें ड्रग सप्लाई चेन को संचालित करने वाला एक मुख्य आरोपी भी शामिल है। डीजीपी ने बताया कि प्रारंभिक जांच में सामने आया है कि गिरफ्तार आरोपी पाकिस्तान स्थित हैंडलर्स के संपर्क में था और सीमा पार से आने वाली मादक पदार्थों की खेप की डिलीवरी और पूरे इलाके में इसके वितरण का समन्वय कर रहा था। पुलिस का कहना है कि इस नेटवर्क के तार अंतरराष्ट्रीय स्तर तक जुड़े हुए हैं। मामले में एनडीपीएस एक्ट के तहत एफआईआर दर्ज कर ली गई है। फिलहाल जांच जारी है, जिसमें सीमा पार मौजूद हैंडलर्स की पहचान, सप्लाई रूट्स का पता लगाने और पूरे ड्रग नेटवर्क को जड़ से खत्म करने पर फोकस किया जा रहा है। डीजीपी गौरव यादव ने आगे कहा कि पंजाब पुलिस राज्य को नशा मुक्त बनाने और सीमापार से संचालित नार्को नेटवर्क को ध्वस्त करने के लिए वह पूरी तरह प्रतिबद्ध है। इससे पहले भी पंजाब पुलिस ने संगठित अपराध के खिलाफ बड़ी कार्रवाई की थी। 1 जनवरी को डीजीपी ने जानकारी दी थी कि पटियाला पुलिस ने एक संगठित आपराधिक गिरोह का पर्दाफाश करते हुए नौ आरोपियों को गिरफ्तार किया है। ये आरोपी हत्या, जबरन वसूली और टारगेट किलिंग जैसी गंभीर आपराधिक गतिविधियों में शामिल थे। इस कार्रवाई के दौरान पुलिस ने नौ पिस्तौल (.32 बोर) और एक पीएक्स5 पिस्तौल (.30 बोर) बरामद की थी। प्रारंभिक जांच में यह भी खुलासा हुआ था कि सभी आरोपी एक व्यवस्थित आपराधिक नेटवर्क का हिस्सा हैं और किसी बड़ी वारदात को अंजाम देने की योजना बना रहे थे। इस मामले में भी एफआईआर दर्ज कर आगे की जांच की जा रही है। पंजाब पुलिस ने स्पष्ट किया है कि राज्य में शांति और सुरक्षा बनाए रखने के लिए नशा तस्करों, गैंगस्टरों और संगठित अपराध से जुड़े तत्वों के खिलाफ सख्त कार्रवाई आगे भी जारी रहेगी।

पंजाब के CBSE स्कूलों के प्रिंसीपल्स करेंगे प्रतिष्ठित संस्थानों का शैक्षणिक एक्सपोजर दौरा

लुधियाना. सैंट्रल बोर्ड ऑफ सैकेंडरी एजुकेशन (सी.बी.एस.ई.) से संबद्ध स्कूलों के प्रिंसीपल्स को देश के प्रतिष्ठित संस्थानों में कौशल, अनुभव आधारित शिक्षा और उभरते शैक्षणिक ट्रैंड्स से रू-ब-रू होने का अवसर मिलेगा। इसके लिए सी.बी.एस.ई. देश के चुनिंदा संस्थानों में प्रिंसीपल्स का एक्सपोजर दौरा कराएगा। यह दौरा 22 जनवरी से 30 जनवरी तक आयोजित किया जाएगा जिसमें भाग लेने के लिए प्रिंसीपल्स को रजिस्ट्रेशन कराना होगा। सी.बी.एस.ई .राष्ट्रीय शिक्षा नीति-2020 के अनुरूप अपने संबद्ध स्कूलों में कौशल और व्यावसायिक शिक्षा को बढ़ावा देने पर जोर दे रहा है। इसी दिशा में बोर्ड ने 2 वर्ष पहले प्रिंसीपल्स के लिए एक्सपोजर विजिट योजना शुरू की थी जिसके तहत समय-समय पर देश के नामचीन संस्थानों का चयन किया जाता है। देशभर से चुने गए ये 5 संस्थान इस बार बोर्ड द्वारा देशभर से 5 प्रमुख संस्थानों को चुना गया है। चयनित संस्थानों में मुमबई की एटलस स्किल टैक यूनिवर्सिटी, पंजाब की लवली प्रोफैशनल यूनिवर्सिटी, असम स्थित टाटा इंस्टीच्यूट ऑफ सोशल साइंसेज, झारखंड का बिरला इंस्टीच्यूट ऑफ टैक्नोलॉजी और पश्चिम बंगाल स्थित फुटवियर डिजाइन एंड डिवैल्पमैंट इंस्टीच्यूट शामिल हैं। इन दौरों के माध्यम से प्रिंसीपल्स को आधुनिक शिक्षा पद्धतियों को समझने और उन्हें अपने स्कूलों में लागू करने का मौका मिलेगा। नई तकनीकों को देखने का अवसर डॉ. सत्वंत कौर भुल्लर, प्रिं. डीएवी स्कूल, पक्खोवाल रोड ने कहा कि “सी.बी.एस.ई. की यह योजना बेहद सराहनीय है, क्योंकि इससे प्रिंसीपल्स को नई और उभरती तकनीकों को प्रत्यक्ष रूप से देखने का अवसर मिलेगा। उन्होंने कहा कि प्रतिष्ठित संस्थानों का यह दौरा न केवल शैक्षणिक ज्ञान को बढ़ाएगा बल्कि स्कूलों में व्यावसायिक शिक्षा और कौशल विकास के नए आयाम स्थापित करने में भी मील का पत्थर साबित होगा।”

हिमाचल सरकार के नए हाइड्रो पावर सेस से पंजाब पर पड़ेगा 200 करोड़ का अतिरिक्त बोझ!

चंडीगढ़. हिमाचल प्रदेश सरकार के फैसले ने पंजाब पर अतिरिक्त आर्थिक बोझ डाल दिया है। हिमाचल प्रदेश सरकार द्वारा हाइड्रो पावर परियोजनाओं पर नया लैंड रेवेन्यू सेस लगाने का फैसला लिया गया है। इसके बाद पंजाब को हर साल करीब 200 करोड़ रुपये का अतिरिक्त खर्च उठाना पड़ सकता है। जानकारी के अनुसार हिमाचल सरकार ने जलविद्युत परियोजनाओं पर 2 प्रतिशत लैंड रेवेन्यू सेस लागू किया है। इससे भाखड़ा ब्यास मैनेजमेंट बोर्ड (BBMB) के तहत आने वाली तीन बड़ी परियोजनाओं पर कुल 433 करोड़ रुपये से ज्यादा का वार्षिक बोझ बढ़ जाएगा। इस अतिरिक्त खर्च को पंजाब, हरियाणा और राजस्थान को सांझा रूप से वहन करना होगा। इस फैसले को लेकर BBMB ने हिमाचल सरकार के समक्ष आपत्ति दर्ज कराई है। 3 जनवरी को हुई एक बैठक में हिमाचल के मुख्यमंत्री ने स्पष्ट किया कि यह सेस सभी हाइड्रो प्रोजेक्ट्स पर लागू किया जाएगा। इससे पहले वर्ष 2023 में हिमाचल सरकार ने जल उपकर लगाया था, जिसे केंद्र सरकार ने अवैध करार दिया था। अब हिमाचल सरकार ने 12 दिसंबर 2025 को एक अधिसूचना जारी कर लैंड रेवेन्यू सेस लागू किया है और इससे जुड़े राज्यों से आपत्तियां भी मांगी गई हैं। पंजाब सरकार ने 24 दिसंबर को अपना पक्ष रखते हुए कहा कि ये परियोजनाएं व्यावसायिक नहीं बल्कि जनहित से जुड़ी हैं और भूमि अधिग्रहण के समय मुआवजा पहले ही दिया जा चुका है।

पंजाब के NRI को ई-सनद पोर्टल से घर बैठे मिलेंगी 27 सेवाएं

चंडीगढ़. पंजाब की आम आदमी पार्टी सरकार ने प्रवासी पंजाबियों और एनआरआई समुदाय के लिए एक क्रांतिकारी कदम उठाते हुए ‘एनआरआई ई-सनद पोर्टल’ लॉन्च किया है। इस डिजिटल पहल के तहत विदेशों में रह रहे पंजाबियों को अब 27 महत्वपूर्ण सरकारी सेवाएं ऑनलाइन मुहैया कराई जाएंगी। मुख्यमंत्री भगवंत मान की इस पहल का उद्देश्य एनआरआई समुदाय को दस्तावेज़ीकरण और प्रशासनिक सेवाओं के लिए बार-बार पंजाब आने की मजबूरी से मुक्ति दिलाना है। यह पोर्टल खासतौर पर उन प्रवासी पंजाबियों के लिए वरदान साबित होगा जो कनाडा, अमेरिका, ब्रिटेन, ऑस्ट्रेलिया और यूरोपीय देशों में निवास करते हैं और अपने मूल प्रदेश से जुड़े रहना चाहते हैं। इस पोर्टल के माध्यम से एनआरआई अब जन्म प्रमाण पत्र, मृत्यु प्रमाण पत्र, निवास प्रमाण पत्र, आय प्रमाण पत्र, जाति प्रमाण पत्र, विवाह पंजीकरण प्रमाण पत्र सहित कई अन्य दस्तावेज़ घर बैठे प्राप्त कर सकेंगे। पहले एनआरआई को इन दस्तावेज़ों के लिए या तो भारत आना पड़ता था या फिर रिश्तेदारों के माध्यम से लंबी प्रक्रिया पूरी करनी होती थी, जिसमें महीनों लग जाते थे। लेकिन अब मात्र कुछ क्लिक में और डिजिटल वेरिफिकेशन के बाद ये सभी सेवाएं उपलब्ध हो जाएंगी। सरकार ने यह सुनिश्चित किया है कि पोर्टल यूज़र-फ्रेंडली हो और पंजाबी, अंग्रेजी दोनों भाषाओं में उपलब्ध रहे। इससे न केवल समय और पैसे की बचत होगी बल्कि पारदर्शिता भी सुनिश्चित होगी। पंजाब सरकार ने वर्ष 2026 में एनआरआई पंजाबियों के लिए ‘एनआरआई मिलनी’ नामक एक विशेष अंजुमन की योजना की भी घोषणा की है। इस अनूठी पहल के तहत विश्वभर में बसे पंजाबियों को एक मंच पर लाया जाएगा, जहां वे अपनी सांस्कृतिक पहचान को बरकरार रखते हुए राज्य के विकास में सक्रिय भागीदारी निभा सकेंगे। यह मिलनी प्रवासी पंजाबियों और मातृभूमि के बीच एक सशक्त सेतु का काम करेगी। इस आयोजन में व्यापार, शिक्षा, कृषि, स्वास्थ्य और तकनीक जैसे क्षेत्रों में सहयोग के अवसर तलाशे जाएंगे। सरकार का मानना है कि एनआरआई समुदाय पंजाब की अर्थव्यवस्था में महत्वपूर्ण योगदान देता है और उन्हें सम्मानित करना राज्य का दायित्व है। आंकड़ों के अनुसार, पंजाब से सबसे ज्यादा प्रवासन हुआ है और दुनियाभर में लगभग 30 लाख से अधिक पंजाबी मूल के लोग बसे हुए हैं। ये प्रवासी भारतीय हर साल अरबों रुपये की विदेशी मुद्रा अपने परिवारों को भेजते हैं, जिससे राज्य की आर्थिक स्थिति मजबूत होती है। लेकिन प्रशासनिक सेवाओं में जटिलताओं के कारण वे अक्सर असुविधा का सामना करते थे। मुख्यमंत्री भगवंत मान ने कहा, “हमारे प्रवासी भाई-बहन पंजाब की धड़कन हैं। उनके लिए सेवाओं को सरल और सुलभ बनाना हमारी प्राथमिकता है। ई-सनद पोर्टल उसी दिशा में एक ठोस कदम है।” उन्होंने यह भी बताया कि सरकार भविष्य में इस पोर्टल पर और अधिक सेवाएं जोड़ने की योजना बना रही है। एनआरआई कल्याण मंत्रालय के सूत्रों के अनुसार, इस पोर्टल के माध्यम से संपत्ति से जुड़े दस्तावेज़, पेंशन संबंधी सेवाएं और कानूनी प्रमाणपत्रों की सुविधा भी शीघ्र ही शामिल की जाएगी। राज्य सरकार ने विदेशों में भारतीय दूतावासों और उच्चायोगों के साथ समन्वय स्थापित किया है ताकि दस्तावेज़ों का सत्यापन तेज़ी से हो सके। डिजिटल हस्ताक्षर, आधार आधारित प्रमाणीकरण और ओटीपी वेरिफिकेशन जैसी आधुनिक तकनीकों का उपयोग कर पोर्टल को पूर्णतः सुरक्षित बनाया गया है। विशेषज्ञों का मानना है कि यह कदम अन्य राज्यों के लिए भी मिसाल बन सकता है जहां बड़ी संख्या में प्रवासी समुदाय मौजूद हैं। कैनेडा में रहने वाले जसविंदर सिंह ने इस पहल का स्वागत करते हुए कहा, “यह हमारे लिए बहुत बड़ी राहत है। अब हर छोटे-मोटे काम के लिए टिकट काटकर भारत नहीं आना पड़ेगा। पंजाब सरकार ने हमारी समस्याओं को समझा और उसका समाधान किया।” वहीं, लंदन में व्यवसाय करने वाली हरप्रीत कौर ने कहा कि इस तरह की डिजिटल सुविधाओं से प्रवासी पंजाबी अपनी जड़ों से और मजबूती से जुड़े रह सकेंगे। सोशल मीडिया पर भी इस घोषणा को लेकर एनआरआई समुदाय में खुशी की लहर देखी गई है। कई लोगों ने इसे ‘गेम चेंजर’ और ‘ऐतिहासिक कदम’ बताया है। विशेषज्ञों का कहना है कि डिजिटल गवर्नेंस की दिशा में यह एक सराहनीय प्रयास है जो न केवल भ्रष्टाचार को कम करेगा बल्कि सेवाओं की गुणवत्ता में भी सुधार लाएगा। तकनीकी विशेषज्ञ डॉ. अमनदीप सिंह ने कहा, “पंजाब सरकार का यह कदम दूरदर्शी है। ऐसे पोर्टल विकसित देशों में आम हैं लेकिन भारत में राज्य स्तर पर यह पहल उल्लेखनीय है।” उन्होंने कहा कि अगर इसे सही तरीके से लागू किया गया तो यह प्रवासी भारतीयों और मातृभूमि के बीच के संबंधों को नई ऊंचाई देगा। साथ ही, इससे निवेश और सांस्कृतिक आदान-प्रदान को भी बढ़ावा मिलेगा। पंजाब सरकार ने यह भी सुनिश्चित किया है कि ग्रामीण क्षेत्रों में रहने वाले एनआरआई परिवारों के बुजुर्ग सदस्यों को भी इस सेवा का लाभ मिल सके। इसके लिए सभी तहसील और जिला स्तर के कार्यालयों में हेल्प डेस्क स्थापित किए गए हैं। यहां प्रशिक्षित कर्मचारी नागरिकों की सहायता करेंगे और ऑनलाइन आवेदन प्रक्रिया में मदद करेंगे। सरकार ने टोल-फ्री हेल्पलाइन नंबर भी जारी किया है जिस पर एनआरआई किसी भी समस्या के लिए संपर्क कर सकते हैं। भाषा की बाधा को दूर करने के लिए अंग्रेजी और पंजाबी दोनों में सहायता उपलब्ध कराई जा रही है। इस पहल से जुड़े अधिकारियों का कहना है कि पहले महीने में ही हजारों एनआरआई ने पोर्टल पर रजिस्ट्रेशन करवा लिया है। सरकार ने लक्ष्य रखा है कि अगले छह महीनों में सभी 27 सेवाएं पूरी तरह से चालू हो जाएं और एनआरआई समुदाय को किसी भी प्रकार की असुविधा का सामना न करना पड़े। राजस्व विभाग, स्वास्थ्य विभाग, शिक्षा विभाग और पुलिस विभाग समेत सभी संबंधित विभागों को इस पोर्टल से जोड़ा जा रहा है। डेटा सुरक्षा और गोपनीयता को सर्वोच्च प्राथमिकता दी गई है और अंतरराष्ट्रीय मानकों के अनुसार एन्क्रिप्शन का उपयोग किया गया है। पंजाब सरकार की यह पहल निश्चित रूप से प्रवासी पंजाबियों और उनकी मातृभूमि के बीच के संबंधों को मजबूत करने में मील का पत्थर साबित होगी। विशेषकर युवा पीढ़ी, जो विदेशों में जन्मी और पली-बढ़ी है, वह भी अब आसानी से अपनी जड़ों से जुड़ सकेगी। डिजिटल युग में इस तरह की पहल न केवल सुविधाजनक है बल्कि समय की मांग भी है। आने वाले समय में जब … Read more

फ्री हेल्थ इंश्योरेंस स्कीम में 65 लाख गरीब परिवारों को इलाज को विधायक ने बताया वरदान

चंडीगढ़. पायल से आम आदमी पार्टी के विधायक मनविंदर सिंह ग्यासपुरा ने कहा कि नए साल के मौके पर पंजाब की मान सरकार ने प्रदेश के लोगों को बड़ा तोहफा देकर एक और वादा पूरा किया है। उन्होंने कहा कि आम आदमी पार्टी सरकार ने सत्ता में आने से पहले जो वादे जनता से किए थे, उन्हें एक-एक करके पूरा किया जा रहा है। सेहत क्रांति के तहत आम आदमी क्लीनिक बनाए गए। डॉक्टर्स भर्ती किए गए। स्टाफ भर्ती किया गया। अब 10 लाख तक इलाज मुफ्त बीमा योजना लागू होने जा रही है। ग्यासपुरा ने बताया कि बहुत जल्द सेहत मंत्री हेल्थ कार्ड पंजाब के लोगों के हाथों में होगा। इस हेल्थ कार्ड के तहत हर परिवार को 10 लाख रुपये तक का फ्री हेल्थ इंश्योरेंस मिलेगा। इससे गंभीर बीमारियों के इलाज के दौरान लोगों पर पड़ने वाला आर्थिक बोझ खत्म होगा। उन्होंने कहा कि अब महंगे इलाज के डर से किसी परिवार को कर्ज लेने की मजबूरी नहीं रहेगी, क्योंकि मान सरकार ने लोगों की इस बड़ी चिंता को खत्म कर दिया है। उन्होंने कहा कि इस अहम स्कीम का फायदा पंजाब के करीब 65 लाख परिवारों को मिलेगा। इस योजना को लागू करने के लिए इंश्योरेंस कंपनी की तरफ से प्रक्रिया लगभग पूरी कर ली गई है और अब सिर्फ अंतिम तैयारियां बाकी हैं। इसके साथ ही जिन सरकारी और प्राइवेट अस्पतालों में इस स्कीम के तहत मरीजों का इलाज किया जाएगा, उनकी सूची तैयार की जा रही है, ताकि लोगों को बिना किसी परेशानी के बेहतर इलाज मिल सके। मनविंदर सिंह ग्यासपुरा ने कहा कि यह फ्री हेल्थ इंश्योरेंस स्कीम 15 जनवरी से पूरे पंजाब में लागू कर दी जाएगी। उन्होंने कहा कि इस योजना से समाज के हर वर्ग को बिना किसी भेदभाव के इलाज की सुविधा मिलेगी। विधायक ग्यासपुरा ने आगे कहा कि मान सरकार का मकसद सिर्फ सत्ता हासिल करना नहीं है, बल्कि लोगों की सेहत, शिक्षा और भलाई को सबसे ऊपर रखना है। यह हेल्थ इंश्योरेंस स्कीम आम आदमी पार्टी की जनहितैषी सोच और ईमानदार नीयत को साफ तौर पर दर्शाती है।

शिरोमणि अकाली दल के वर्चस्व को AAP की चुनौती?

चंडीगढ़. पंजाब की राजनीति में लंबे समय तक पंथक सियासत शिरोमणि अकाली दल के इर्द-गिर्द घूमती रही है। सिख पंथ से जुड़े धार्मिक, सांस्कृतिक और भावनात्मक मुद्दों पर अकाली दल की पकड़ मजबूत मानी जाती थी लेकिन बीते कुछ वर्षों में यह समीकरण तेजी से बदलता दिख रहा है। आम आदमी पार्टी की सरकार की ओर से आनंदपुर साहिब में विधानसभा सत्र आयोजित करना और श्री गुरु ग्रंथ साहिब के 328 स्वरूपों के गायब होने के मामले में तीखी कार्रवाई ने पंथक राजनीति में आप की गंभीर एंट्री का संकेत दिया है। वहीं, श्री अकाल तख्त साहिब ने मुख्यमंत्री भगवंत मान को पंथक मामले में तलब करके मामले को और गरमा दिया है। अकाली दल का जन्म ही पंथक आंदोलन से हुआ। गुरुद्वारा सुधार आंदोलन से लेकर एसजीपीसी पर नियंत्रण तक, अकाली दल ने सिख धार्मिक संस्थाओं के माध्यम से अपनी राजनीतिक पकड़ मजबूत की। ग्रामीण पंजाब, खासकर माझा और मालवा के पंथक बहुल क्षेत्रों में अकाली दल लंबे समय तक स्वाभाविक विकल्प रहा। पंजाब के कुल मतदाताओं में करीब 30-35 फीसदी ऐसे हैं, जो सीधे या अप्रत्यक्ष रूप से पंथक मुद्दों से प्रभावित होते हैं। इनमें से अधिकांश का झुकाव ऐतिहासिक रूप से अकाली दल की ओर रहा। आप सरकार के तीन बड़े कदम पंथक सियासत में नई तस्वीर पेश कर रहे हैं। आनंदपुर साहिब में विधानसभा सत्र केवल एक प्रशासनिक फैसला नहीं था, बल्कि सिख इतिहास और अस्मिता को संवैधानिक सम्मान देने का संदेश था। वहीं, श्री गुरु ग्रंथ साहिब के 328 स्वरूप गायब होने के मामले में तेज जांच और कार्रवाई ने पंथक मतदाताओं में यह धारणा बनाई कि सरकार केवल बयानबाजी नहीं, बल्कि जवाबदेही तय करने को तैयार है। तीसरा कदम तीन शहरों को धार्मिक दर्जा देने का रहा, जो पंथक वोटर के लिए सकारात्मक संकेत माना गया। अकाली दल पहले ही नेतृत्व संकट, परिवारवाद और सीमित नेतृत्व विकल्पों से जूझ रहा है। विधानसभा और लोकसभा में उसकी सीटें घटकर बहुत कम रह गई हैं। बेअदबी प्रकरणों में निर्णायक कार्रवाई न होना और युवा पंथक मतदाताओं से भावनात्मक दूरी ने उसकी विश्वसनीयता कमजोर की है। ऐसे में जो पंथक वोटर कभी अकाली दल के साथ खड़ा होता था, अब विकल्प तलाश रहा है। सियासी जानकार भी इस बात को स्वीकार करते हैं कि अगर पंथक वोटर का केवल 10-15 फीसदी हिस्सा भी अकाली दल से खिसकता है, तो इसका सीधा असर 15–20 विधानसभा सीटों पर पड़ सकता है। माझा क्षेत्र के अमृतसर, तरनतारन, गुरदासपुर, आनंदपुर साहिब, फतेहगढ़ साहिब, मोगा, बठिंडा और बरनाला में अकाली दल की पारंपरिक पकड़ कमजोर होने लगी है जबकि आप ने पंथक वोटरों पर सेंधमारी कर ली है। अकाली दल की ऐतिहासिक भूमिका से इन्कार नहीं किया जा सकता, लेकिन अब उसका पंथक एकाधिकार कमजोर हुआ है। आम आदमी पार्टी ने प्रशासनिक और नीतिगत कदमों के जरिए पंथक राजनीति में नए समीकरण खड़े किए हैं। पंजाब की पंथक राजनीति अब केवल विरासत से नहीं, बल्कि प्रदर्शन और विश्वसनीयता से तय होगी। यही अकाली दल की सबसे बड़ी परीक्षा है और आम आदमी पार्टी के लिए नया राजनीतिक अवसर। इस वर्ष को चुनावी साल के तौर पर देखा जा रहा है। ऐसे में किसी भी तरह के पंथक मामले को सियासत से जोड़ कर देखा जाना स्वाभाविक है।