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CBSE रिवैल्यूएशन पोर्टल में तकनीकी खामी, आवेदन के दौरान छात्रों को हो रही दिक्कत

नई दिल्ली सीबीएसई बोर्ड की परेशानियां थमने का नाम नहीं ले रही हैं। चार दिन के लंबे इंतजार के बाद जब पुनर्मूल्यांकन और सत्यापन पोर्टल एक्टिव हुआ तो छात्र खुशी से फूले नहीं समाए, लेकिन उनकी खुशी बहुत ज्यादा देर नहीं टिक सकी। पोर्टल लॉन्च होने के कुछ देर बाद ही सोशल मीडिया पर शिकायतें आने लगी, लेकिन अब बोर्ड ने वापस से पोर्टल को सक्रिय कर दिया है। हालांकि, कुछ समय पहले अधिकांश छात्रों को अपने सभी लॉगिन विवरण अपलोड करने के बाद स्क्रीन फ्रीज होने की समस्या का सामना करना पड़ा। इसके साथ ही कुछ छात्रों ने आॅनलान पाई गई गलतियों का वीडियो भी शेयर किया है। वहीं, कुछ ने तो पोर्टल पर लॉगिन को लेकर शिकायतें दर्ज की है। दरअसल, सीबीएसई की ओर से 12वीं क्लास की कॉपियों के लिए पुनर्मूल्यांकन के लिए पोर्टल आज यानी मंगलवार से फिर से ओपन कर दिया गया है। जिन छात्रों ने री-इवैल्यूएशन के लिए स्कैन कॉपी प्राप्त करने के लिए आवेदन किया था और उनको कॉपी में अंकों की गड़बड़ी है वे अब कॉपी को रीचेक करवाने के लिए आॅनलाइन माध्यम से फॉर्म भर सकते हैं। एप्लीकेशन फॉर्म भरने की लास्ट डेट 6 जून 2026 तय की गई है। 10-12 बार ट्राई क‍िया पर नहीं खुल रहा पोर्टल सीबीएसई की एक छात्रा की मां ने बताया कि उनकी बेटी कॉमर्स की छात्रा है. उन्होंने 10 से 12 बार लॉग‍िन करने की कोश‍िश की, कैप्चा कोर्ड भरने के बाद पेज क्रैश हो जाता है।  स्कैन कॉपी या फिजिकल कॉपी? पेज नंबर को लेकर छात्रों का कन्फ्यूजन हुआ दूर सीबीएसई 12वीं पुनर्मूल्यांकन का फॉर्म भरते समय छात्रों के सामने एक नया तकनीकी असमंजस खड़ा हो गया है. छात्र लगातार पूछ रहे हैं कि री-इवैल्युएशन फॉर्म में उन्हें 'स्कैन की गई डिजिटल कॉपी' का पेज नंबर लिखना है या उनकी 'मूल (फिजिकल) उत्तर पुस्तिका' का? उदाहरण के लिए, यदि कोई उत्तर डिजिटल कॉपी में पेज 7 पर है और असल कॉपी में पेज 4 पर, तो क्या भरें? सीबीएसई के नियमों और पूर्व मूल्यांकन एक्सपर्ट्स के मुताबिक, छात्रों को फॉर्म में स्कैन की गई डिजिटल कॉपी (Scanned Copy Page Number) का ही पेज नंबर लिखना चाहिए. इसकी वजह यह है कि जो परीक्षक आपकी कॉपी की दोबारा जांच करेगा, उसके सामने आपकी फिजिकल कॉपी नहीं, बल्कि कंप्यूटर स्क्रीन पर वही 'स्कैन की गई डिजिटल कॉपी' होगी. अगर आप स्कैन कॉपी के अनुसार पेज नंबर (जैसे- पेज 7) लिखेंगे, तो परीक्षक को उस विवादित उत्तर या 'अनचेक्ड सवाल' तक तुरंत पहुंचने में आसानी होगी. छात्रों को सलाह दी जाती है कि वे किसी भी गफलत से बचने के लिए स्कैन की गई पीडीएफ (PDF) के पेज नंबर को ही आधार बनाएं.  एक-एक नंबर के लिए मची है जंग, छात्र बोले- हमारे साथ मत खेलो कक्षा 12वीं के छात्रों के लिए यह पुनर्मूल्यांकन कोई मामूली प्रक्रिया नहीं है. दिल्ली यूनिवर्सिटी (DU) सहित देश के तमाम बड़े विश्वविद्यालयों में दाखिले के लिए दशमलव के अंकों की भी भारी अहमियत होती है. ऐसे में सिस्टम की तकनीकी गड़बड़ियों या परीक्षकों की लापरवाही के कारण जिन छात्रों के 5 से 10 नंबर कम हुए हैं, उनका पूरा साल और करियर दांव पर लग गया है. छात्र बोर्ड से त्वरित न्याय की गुहार लगा रहे हैं।  फीस…25 से 100 रुपए अगर कोई छात्र किसी एक प्रश्न को रीचेक करवाने के लिए आवेदन करेगा तो उसे 25 रुपए का भुगतान करना होगा। इसके अलावा पूरी कॉपी का पुनर्मूल्यांकन/ री-टोटलिंग करवाने के लिए 100 रुपए फीस जमा करनी होगी। सीबीएसई ने साझा की डिटेल इधर, सीबीएसई ने सोशल मीडिया एक्स पर जानकारी साझा की है। सीबीएसई ने लिखा- प्रिय विद्यार्थियों, मूल्यांकन और पुनर्मूल्यांकन पोर्टल अब सक्रिय हो गया है। अंकों के सत्यापन और पुनर्मूल्यांकन के लिए आवेदन करने की प्रक्रिया के चरण-दर-चरण निर्देशो के लिए कृपया वीडियो को ध्यानपूर्वक देखें। पोर्टल लिंक: https://postresult.cbseit.in/pvr/  अगले साल से डिजीलॉकर रखेंगे कॉपियां इधर, दावार किया जा रहा है कि सीबीएसई बोर्ड अगले साल से बड़े बदलाव पर विचार कर रहा है। इसमें स्टूडेंट्स को सीधे डिजीलॉकर पर रिजल्ट के साथ ही स्कैन की हुई कॉपी भी उपलब्ध करवा दी जाएगी। इस योजना का उद्देश्य पूरी परीक्षा के लिए पारदर्शिता और स्टूडेंट के बीच भरोसा बनाने का है। 

प्राइवेट स्कूलों को पछाड़ सरकारी स्कूल आगे, CBSE 12वीं में भोपाल रीजन देशभर में 19वें स्थान पर

भोपाल  केंद्रीय माध्यमिक शिक्षा बोर्ड (CBSE) 12वीं परीक्षा 2026 के नतीजों ने मध्य प्रदेश के स्कूल शिक्षा की वास्तविक तस्वीर सामने ला दी है। जहां सरकारी मॉडल पर संचालित जवाहर नवोदय विद्यालय (JNV) और केंद्रीय विद्यालय (KV) ने शानदार परिणाम देकर बेहतर शैक्षणिक योग्यता दिखाई।  खास बात यह है कि इन निजी स्कूलों की फीस आमतौर पर JNV और KV की तुलना में कहीं अधिक होती है। शिक्षा विशेषज्ञों का मानना है कि निजी स्कूलों के कमजोर प्रदर्शन का असर भोपाल रीजन की रैंकिंग पर भी पड़ा है। इसी कारण मध्य प्रदेश का भोपाल रीजन देश के 22 सीबीएसई रीजन में 19वें स्थान पर पहुंच गया। वहीं हर श्रेणी में छात्राओं ने छात्रों से बेहतर प्रदर्शन किया और भोपाल रीजन में लड़कियां करीब पांच प्रतिशत अंकों से आगे रहीं। नवोदय विद्यालय सबसे आगे सीबीएसई के आंकड़ों के मुताबिक, मध्य प्रदेश में सबसे बेहतर प्रदर्शन जवाहर नवोदय विद्यालयों का रहा। JNV का कुल पास प्रतिशत 98.16% दर्ज किया गया। लड़कों का परिणाम 97.81% और लड़कियों का 98.73% रहा। विशेषज्ञों के अनुसार, नवोदय विद्यालयों की रेजिडेंशियल व्यवस्था, अनुशासित माहौल और नियमित अकादमिक मॉनिटरिंग इसकी बड़ी वजह है। ग्रामीण और दूरस्थ क्षेत्रों के विद्यार्थियों को गुणवत्तापूर्ण शिक्षा देने वाला यह मॉडल लगातार सफल साबित हो रहा है। केंद्रीय विद्यालयों ने भी कायम रखी बढ़त केंद्रीय विद्यालयों का प्रदर्शन भी मजबूत रहा। इनका कुल पास प्रतिशत 97.90% दर्ज किया गया। लड़कों का परिणाम 97.66% और लड़कियों का 98.11% रहा। विशेषज्ञों का कहना है कि प्रशिक्षित शिक्षक, राष्ट्रीय स्तर का पाठ्यक्रम और नियमित मूल्यांकन केंद्रीय विद्यालयों की सफलता का आधार हैं। यही वजह है कि इनके परिणाम लगातार राष्ट्रीय औसत से बेहतर बने रहते हैं। आदिवासी छात्रों के स्कूलों ने भी किया बेहतर प्रदर्शन एकलव्य मॉडल रेजिडेंशियल स्कूल (EMRS) का कुल पास प्रतिशत 85.47% रहा। लड़कों का परिणाम 83.46% और लड़कियों का 86.89% दर्ज किया गया। सीमित संसाधनों और सामाजिक चुनौतियों के बावजूद यह प्रदर्शन सकारात्मक माना जा रहा है। यहां भी छात्राओं ने छात्रों से बेहतर परिणाम देकर बढ़ती शैक्षणिक जागरूकता का संकेत दिया। सरकारी स्कूलों के सामने संसाधनों की चुनौती सरकारी स्कूलों का कुल पास प्रतिशत 80.60% रहा। लड़कों का रिजल्ट 79.86% और लड़कियों का 80.88% दर्ज किया गया। शिक्षा क्षेत्र से जुड़े विशेषज्ञों का कहना है कि शिक्षकों की कमी और बुनियादी संसाधनों की चुनौतियों के बावजूद यह प्रदर्शन संतोषजनक है। हालांकि, इंफ्रास्ट्रक्चर और डिजिटल संसाधनों में सुधार से परिणाम बेहतर हो सकते हैं। सबसे ज्यादा छात्र, फिर भी सबसे कमजोर निजी स्कूल सबसे चिंताजनक तस्वीर निजी स्कूलों की रही। सीबीएसई से संबद्ध इंडिपेंडेंट स्कूलों में सबसे अधिक 61,419 छात्रों ने रजिस्ट्रेशन कराया था और 61,242 छात्र परीक्षा में शामिल हुए। इसके बावजूद इन स्कूलों का कुल पास प्रतिशत केवल 76.85% रहा, जो सभी श्रेणियों में सबसे कम है। लड़कों का परिणाम 74.12% और लड़कियों का 80.02% दर्ज किया गया। विशेषज्ञों का मानना है कि व्यावसायिक दबाव, बोर्ड परीक्षा की अपर्याप्त तैयारी और छात्रों पर बढ़ता मानसिक तनाव निजी स्कूलों के कमजोर प्रदर्शन के कारण हो सकते हैं। इससे शिक्षा की गुणवत्ता पर भी सवाल खड़े हुए हैं। लड़कों का पास प्रतिशत 76.87, लड़कियों का 82.19 पूरे परिणाम में एक समान ट्रेंड देखने को मिला हर श्रेणी में छात्राओं ने छात्रों को पीछे छोड़ा। भोपाल रीजन में लड़कों का पास प्रतिशत 76.87% रहा, जबकि लड़कियों का परिणाम 82.19% दर्ज किया गया। विशेषज्ञों के मुताबिक, नियमित अध्ययन, परीक्षा के प्रति गंभीरता और करियर को लेकर बढ़ती जागरूकता छात्राओं की सफलता के प्रमुख कारण हैं। 12% से ज्यादा छात्र सभी विषयों में फेल भोपाल रीजन के नतीजों में एक गंभीर तथ्य भी सामने आया। कुल परीक्षार्थियों में 12.14% छात्र ऐसे रहे, जो सभी विषयों में असफल हो गए। शिक्षा विशेषज्ञ इसे केवल छात्रों की तैयारी का नहीं, बल्कि स्कूलों की अकादमिक निगरानी और सीखने की गुणवत्ता से जुड़ा मुद्दा मानते हैं। कोविड के बाद सीखने के स्तर में आई गिरावट, डिजिटल डिस्ट्रैक्शन और नियमित पढ़ाई में कमी को भी इसकी वजह माना जा रहा है। देश का दूसरा सबसे बड़ा सीबीएसई रीजन भोपाल रीजन देश के सबसे बड़े सीबीएसई रीजन में शामिल है। यहां सीबीएसई से संबद्ध 1291 स्कूल संचालित हैं। स्कूलों की संख्या के लिहाज से यह 1483 स्कूलों वाले लुधियाना रीजन के बाद देश का दूसरा सबसे बड़ा रीजन है। इतने बड़े स्तर पर परीक्षा संचालन और परिणाम प्रबंधन को बड़ी प्रशासनिक चुनौती माना जाता है।

रांची की बेटी का देशभर में डंका! भव्या रंजन ने 99.8% लाकर किया टॉप

रांची रांची की छात्रा भव्य रंजन ने CBSE 12वीं परीक्षा में शानदार प्रदर्शन करते हुए 99.8 प्रतिशत अंक हासिल किए हैं. रांची के ऑक्सफोर्ड पब्लिक स्कूल की छात्रा भव्या अब तक सामने आए परिणामों के अनुसार नेशनल टॉपर्स की सूची में शामिल मानी जा रही हैं. ऑक्सफोर्ड पब्लिक स्कूल  की छात्रा आर्ट्स स्ट्रीम की नेशनल टॉपर के रूप में सामने आई हैं. उनकी इस सफलता से स्कूल, परिवार और शहर में खुशी की लहर है. भव्या ने इंग्लिश, हिस्ट्री, पॉलिटिकल साइंस और पेंटिंग में 100 में 100 नंबर हासिल किए हैं।  भव्या की सफलता ने एक बार फिर से साबित कर दिया है कि मेहनत, अनुशासन और सही मार्गदर्शन के दम कोई भी मुकाम हासिल कर सकता है।  अपनी उपलब्धि पर क्या बोलीं भव्या?  अपनी उपलब्धि के बारे में बताते हुए छात्रा ने कहा कि वह पढ़ाई को घंटों में नहीं बांटती थीं बल्कि प्रोडक्टिव स्टडी पर फोकस करती थीं. उन्होंने कहा कि रोजाना पढ़ाई, सही प्लानिंग और खुद पर भरोसा उनका सफलता बनीं. उन्होंने अपनी सफलता का श्रेय माता-पिता, शिक्षकों और दोस्तों को दिया।  स्कूल से हमेशा मिला सहयोग बात करते हुए भव्या ने बताया कि स्कूल के शिक्षकों ने उनका हर कदम पर साथ दिया. परीक्षा के समय किसी भी तरह की परेशानी में उनके शिक्षकों ने दूर करने में मदद की. भव्या ने इस बात पर भी ध्यान दिया कि केवल पढ़ाई करना ही जरूरी नहीं है बल्कि मानसिक संतुलन बनाए रखना भी जरूरी है।    भविष्य की योजना  बता दें कि भव्या की मां टीचर हैं जबकि उनके पिता बिजनेसमैन हैं. परिवार के अनुसार भव्या रोजाना 10 से 12 घंटे नियमित पढ़ाई करती थीं. भव्या का अगला लक्ष्य  UPSC परीक्षा पास कर सिविल सर्विसेज में जाना चाहती हैं और देश की सेवा करना चाहती हैं।  क्या बोले स्कूल के डयरेक्टर?  स्कूल के अकादमिक डयरेक्टर सिम्मी मेहता ने कहा कि भव्या जैसी छात्रा देश के उज्ज्वल भविष्य की पहचान हैं और उनकी सफलता अन्य छात्रों के लिए प्रेरणा है। 

CBSE बोर्ड का 12वीं रिजल्ट जारी: इस बार घटा पास प्रतिशत, SMS से मिनटों में करें स्कोर चेक

नई दिल्ली CBSE यानी सेंट्रल बोर्ड ऑफ सेकेंडरी एजुकेशन ने 12वीं का रिजल्ट जारी कर दिया है। कुल 85.20% स्‍टूडेंट्स पास हुए हैं। यह पिछले साल से 3% कम है। कुल 94,028 छात्रों ने 90% से ज्‍यादा नंबर स्‍कोर किए हैं। वहीं, 17,113 बच्‍चों ने 95% से ज्‍यादा नंबर स्‍कोर किए हैं। इस बार कॉपियां ऑन-स्क्रीन मार्किंग सिस्टम के तहत चेक की गई हैं। कैंडिडेट्स cbse.gov.in पर अपना रिजल्ट चेक कर सकते हैं। अगर स्टूडेट्स के मोबाइल में इंटरनेट न हो या सर्वर डाउन हो तो सब्जेक्ट वाइज अंक जानने के लिए एसएमएस भेजकर रिजल्ट प्राप्त कर सकते हैं। हालांकि, ऑनलाइन स्कोर कार्ड मान्य नहीं होगा। छात्रों के लिए अपने स्कूल से ओरिजिनल मार्कशीट लेना जरूरी है। मेरिट लिस्‍ट जारी नहीं होगी CBSE बोर्ड मेरिट लिस्‍ट जारी नहीं करता है। इसके अलावा रिजल्‍ट में कोई टॉपर भी घोषित नहीं किया जाता है। बोर्ड सभी स्‍कूलों और शैक्षणिक संस्‍थानों को ये निर्देश देता है कि किसी भी बच्‍चे को स्‍कूल या जिले का टॉपर घोषित न करें। लड़कियों का रिजल्‍ट लड़कों से 6.73% बेहतर लड़कियों का रिजल्‍ट 88.86% रहा है, जबकि लड़कों का रिजल्‍ट 82.23% रहा है। लड़कियों का रिजल्‍ट लड़कों से 6.73% बेहतर रहा है। ट्रांसजेंडर स्‍टूडेंट्स का रिजल्‍ट 100% है। त्रिवेंद्रम का रिजल्‍ट फिर बेस्‍ट, प्रयागराज फिर सबसे पीछे त्रिवेंद्रम रीजन में 95.62% स्टूडेंट पास हुए। जो देशभर में सबसे ज्यादा है। वहीं, प्रयागराज रीजन 72.43% रिजल्‍ट के साथ सबसे नीचे रहा है। पिछले साल भी त्रिवेंद्रम का रिजल्‍ट सबसे ज्‍यादा और प्रयागराज का सबसे कम रहा था। अपार आईडी न होने पर क्या करें यदि किसी के पास APAAR ID नहीं है, तो उन्हें अपना अकाउंट बनाना होगा। हालांकि, जिन छात्रों की APAAR ID CBSE से लिंक है, उन्हें रिजल्ट जारी होने के बाद डिजिलॉकर के 'Issued Documents' सेक्शन में अपनी मार्कशीट मिल जाएगी। कितनों की आई कंपार्टमेंट सीबीएसई 12वीं कक्षा के परिणाम घोषित हो गए हैं. इस साल  1,63,800 बच्चों की कंपार्टमेंट आई है जिसमे प्रयागराज सबसे ऊपर है.  प्रयागराज — 16.76% दिल्ली ईस्ट — 12.57% बेंगलुरु — 12.14% पंचकूला — 12.30% लुधियाना — 11.42% रायपुर — 10.35% रांची — 9.67% लखनऊ — 9.30% चेन्नई — 9.23% पटना — 9.13% पुणे — 8.66% अजमेर — 8.44% नोएडा — 8.06% गुवाहाटी — 7.35% दिल्ली वेस्ट — 5.65% विजयवाड़ा — 5.44% अहमदाबाद — 5.41% गुरुग्राम — 4.52% देहरादून — 4.30% तिरुवनंतपुरम — 3.38%  टॉप 0.1% विद्यार्थियों को मेरिट सर्टिफिकेट मिलेगा सीबीएसई ने इस बार भी टॉपर्स की लिस्ट नहीं जारी करने का फैसला लिया है और न ही मेरिट लिस्ट जारी की जाएगी. जिन छात्रों ने अपने विषयों में सबसे अधिक अंक हासिल किए हैं, उनमें से टॉप 0.1% विद्यार्थियों को मेरिट सर्टिफिकेट दिया जाएगा.  किस स्कूल का पास प्रतिशत है सबसे ज्यादा  केंद्रीय विद्यालय– 98.55% जवाहर नवोदय विद्यालय – 98.47% सरकारी विद्यालय – 89.55% सरकारी सहायता प्राप्त – 86.07% एकलव्य मॉडल रेजिडेंशियल स्कूल – 85.55% स्वतंत्र विद्यालय – 84.22% शामिल हुए थे इतने लोग  सीबीएसई 12वीं क्लास में 17,80,365 छात्रों ने रजिस्ट्रेशन कराया था, जिनमें से 17,68,968 छात्र परीक्षा में शामिल हुए और 15,07,109 छात्र पास हो गए हैं. इस साल पास प्रतिशत 85.20% रहा है. यह पिछले साल के पास प्रतिशत से कम है. पिछले साल पास प्रतिशत 88.39% था.  यहां देखें CBSE 12वीं का रिजल्‍ट     cbse.gov.in     results.nic.in     results.digilocker.gov.in     umang.gov.in     DigiLocker, UMANG ऐप ऐसे चेक करें SMS से रिजल्ट     अपने फोन में मैसेज बॉक्स ओपन करें।     इसमें सीबीएसई 12वीं रिजल्ट 2026 (रोल नंबर) टाइप करें और 7738299899 पर भेज दें।     कुछ ही सेकंड में 12वीं का रिजल्ट मोबाइल के इनबॉक्स में दिखाई देगा। ऐसे चेक करें डिजिलॉकर से रिजल्ट     डिजिलॉकर ऐप डाउनलोड करें या इसकी वेबसाइट पर जाएं।     अपने मोबाइल नंबर या आधार से साइन अप/लॉगिन करें।     “Education” सेक्शन में जाएं और CBSE को चुनें।     “Class XII Marksheet 2026” क्लिक करें।     अपना रोल नंबर और अन्य जरूरी जानकारी दर्ज करें।     “Get Document” या “Fetch” बटन पर क्लिक करें।     डिजिटल मार्कशीट स्क्रीन पर आ जाएगी। इसे डाउनलोड या सेव करके रखें। हर विषय में 33% अंक लाना जरूरी सीबीएसई 12वीं बोर्ड परीक्षा पास करने के लिए छात्रों को कुल अंको के साथ हर विषय में कम से कम 33% अंक लाना होगा। इससे कम अंक आने पर उन्हें उस विषय में फेल माना जाएगा। जो छात्र 1 सब्जेक्ट में फेल होंगे, उन्हें कंपार्टमेंट परीक्षा में शामिल होकर साल बचाने का मौका दिया जाएगा। लेकिन 2 या उससे अधिक सब्जेक्ट में फेल होने वाले छात्रों को दोबारा 12वीं क्लास में बैठना होगा। सीबीएसई 12वीं 2025 में 88.39% अंक प्राप्त किए थे। जिसमें साल 2024 की तुलना में 0.41% की बढ़ोतरी हुई थी। CBSE के 18 लाख से ज्यादा छात्रों को इंतजार  सीबीएसई 12वीं के 18.5 लाख से ज्यादा छात्रों को रिजल्ट का बेसब्री से इंतजार है. इस साल बोर्ड परीक्षाओं की शुरुआत 17 फरवरी से हुई थी, जो 10 अप्रैल तक चलीं. बोर्ड ने बताया कि पहली बार 12वीं की कॉपियां डिजिटल तरीके से चेक हो रही हैं. ऐसे में छात्रों को उम्मीद थी कि रिजल्ट जल्दी जारी हो सकता है, हालांकि ऐसा नहीं हुआ।  CBSE 12वीं में कुल इतने छात्रों ने हासिल किया 90-95% स्कोर सीबीएसई ने आज रिजल्ट जारी कर दिया है. इस साल लड़कियों ने फिर बाजी मारी है. आपको बता दें कि इस साल  95 प्रतिशत से ज्यादा नंबर हासिल करने वाले छात्रों की संख्या 17113 है. वहीं 90 प्रतिशत से ज्यादा नंबर लाने वाले कुल छात्र 94028 हैं।     फेल छात्रों को मिलेगा दूसरा मौका एक या अधिक विषयों में पास नहीं होने वाले छात्रों को इस बार भी कंपार्टमेंट परीक्षा का मौका मिलेगा। इससे उनका साल खराब नहीं होगा और वे अपने अंक सुधार सकेंगे। बोर्ड जल्द ही कंपार्टमेंट परीक्षा का शेड्यूल जारी करेगा, जिसके बाद आवेदन प्रक्रिया शुरू होगी।

CBSE स्कूलों में नया बदलाव, विद्यार्थियों के लिए लिया गया बड़ा फैसला

लुधियाना   सैंट्रल बोर्ड ऑफ सैकेंडरी एजुकेशन (सी.बी.एस.ई.) ने विद्यार्थियों की पढ़ाई की क्वालिटी और सुधारों के उद्देश्य से बड़े बदलाव किए हैं। स्कूलों के पारंपरिक क्लासरूम, जो अब तक केवल चार दीवारी और ब्लैक बोर्ड तक सीमित थे, अब स्किल लैब के रूप में नजर आएंगे। सी.बी.एस.ई. ने सत्र 2026-27 के लिए यह बड़े बदलाव किए हैं जिससे विद्यार्थी किताबी दुनिया से निकलकर जीवन की चुनौतियों के लिए तैयार हो सकेंगे। नए बदलावों के तहत अब रटने की आदत को खत्म करने का प्रयास किया जा रहा है और पढ़ाई को पूरी तरह प्रैक्टिकल नॉलेज पर फोकस किया जाएगा। बोर्ड ने कक्षा तीसरी से ही आर्टिफिशियल इंटैलीजैंस (एआई) और कोडिंग को अनिवार्य कर दिया है। विद्यार्थी अब इंटरडिसीप्लिनरी प्रोजैक्ट्स के माध्यम से सीखेंगे कि अलग-अलग विषय एक-दूसरे से कैसे जुड़े हैं। उदाहरण के तौर पर स्मार्ट सिटी जैसे प्रोजैक्ट पर काम करते समय वे बजट कैलकुलेशन के लिए मैथ्स, एनर्जी मैनेजमेंट के लिए साइंस और शहरी नियोजन के लिए सोशल साइंस का एक साथ प्रयोग करेंगे। इसके अलावा, 'स्किल सैटरडे' जैसे नवाचारों के जरिए बच्चों में फाइनेंशियल लिटरेसी और पब्लिक स्पीकिंग जैसे जीवन कौशल विकसित किए जाएंगे। परीक्षा का नया पैटर्न : रटने की आदत होगी खत्म  बोर्ड ने परीक्षा के तनाव को कम करने और योग्यता को परखने के लिए इवैल्यूएशन पैटर्न में भी बड़ा बदलाव किया है। अब पेपर में 50 प्रतिशत सवाल कॉम्पिटैंसी यानी योग्यता और व्यावहारिक प्रयोग पर आधारित होंगे। अब किताब के पीछे दिए गए प्रश्नों को रटकर अच्छे मार्क्स लाना मुश्किल होगा। मनोचिकित्सकों के अनुसार, एक्टिविटी बेस्ड लर्निंग और इस नए परीक्षा पैटर्न से विद्यार्थियों का आत्मविश्वास बढ़ेगा और मानसिक तनाव कम होगा। व्यावहारिक होगी गणित  गणित की जटिलताओं को दूर करने के लिए स्कूलों में 'रियल लाइफ मैथ सिमुलेशन' का सहारा लिया जाएगा। इसके तहत स्कूलों में मिनी मार्कीट बनाए जाएंगे, जहां विद्यार्थी खुद दुकानदार और ग्राहक बनेंगे। इस एक्टिविटी से वे डिस्काऊंट, प्रॉफिट और लॉस जैसे कठिन समीकरणों को रटने के बजाय प्रैक्टिकली हल करना सीखेंगे।

प्रोत्यूष बालापुरे ने 10वीं CBSE बोर्ड में हासिल किए 99% अंक, स्व-अध्ययन और दृढ़ संकल्प से रचा कीर्तिमान

सिवनी मालवा प्रोत्यूष बालापुरे (कक्षा 10वीं, CBSE) ने बोर्ड परीक्षा में उत्कृष्ट प्रदर्शन करते हुए 495 अंक प्राप्त कर 99% अंक हासिल किए हैं। जिस के लिए उनके सागर पब्लिक स्कूल भोपाल ने उन्हें 135000.00  छात्रवत्ति भी प्रदान की है।  इस उपलब्धि के पीछे छात्र का दृढ़ संकल्प, स्व-अध्ययन तथा परिवार और शिक्षकों का सहयोग प्रमुख रहा। छात्र के पिता डॉ. सतीश बालापुरे, शासकीय कन्या महाविद्यालय, सिवनी मालवा में पदस्थ हैं, जबकि माता सुमना बालापुरे मत्स्य विभाग में क्षेत्रीय प्रबंधक, भोपाल  के रूप में कार्यरत हैं। छात्र ने बताया कि उसने 10वीं कक्षा की शुरुआत से ही यह तय कर लिया था कि उसे बोर्ड परीक्षा में 99% अंक प्राप्त करने हैं। इस लक्ष्य को ध्यान में रखते हुए उसने अपने नाम के साथ सभी विषयों में पूरे अंक लिखकर कई स्टिकी नोट्स बनाए और उन्हें अपने PC, स्टडी टेबल, ड्रेसिंग मिरर, यहाँ तक कि अपनी पानी की बोतल पर भी चिपका दिया। सिलेबस की शुरुआत अच्छी रही, जिसका पूरा श्रेय शिक्षकों को जाता है। पढ़ाई के साथ-साथ छात्र ने क्विज़ और एलोक्यूशन जैसी गतिविधियों में भाग लेकर अपनी अन्य क्षमताओं को भी निखारा। छात्र के अनुसार, उसके शिक्षक अत्यंत सहयोगी रहे और किसी भी कॉन्सेप्ट में कठिनाई होने पर उन्होंने तुरंत सहायता प्रदान की। पूरे वर्ष छात्र ने स्व-अध्ययन जारी रखा, हालांकि बीच-बीच में उतार-चढ़ाव भी आए। प्री-बोर्ड 1 में अपेक्षित अंक नहीं मिलने पर छात्र ने इसे चुनौती के रूप में लिया और अपने कमजोर पक्षों को मजबूत करने पर ध्यान केंद्रित किया। परीक्षाओं से पहले छात्र ने अपने सीनियर्स से पिछले वर्षों के प्रश्न-पत्र (PYQs) और तैयारी सामग्री एकत्र की, जिससे उसे CBSE के प्रश्नों के पैटर्न को समझने में सहायता मिली। प्रत्येक PYQ पर उसने स्वयं नोट्स तैयार किए, जिसमें प्राप्त अंक, गलतियाँ और सुधार के बिंदु शामिल थे। अंतिम दो महीनों में छात्र ने पूरी तरह से PYQs पर ध्यान केंद्रित किया, जिससे उसका आत्मविश्वास बढ़ा। विशेष रूप से उत्तर लेखन और कॉन्सेप्ट क्लैरिटी पर कार्य किया गया। हाल ही में घोषित परिणाम में छात्र ने 495 अंक प्राप्त कर 99% अंक हासिल किए। इस सफलता में माता-पिता, दादी, चाचा, बड़े पापा   का महत्वपूर्ण योगदान रहा। छात्र के अनुसार, कठिन समय में माता-पिता ने उसे प्रेरित किया और उसका हौसला बढ़ाया। माता ने विभिन्न स्थानों से अध्ययन सामग्री जुटाकर सहायता की, जबकि पिता ने कठिन वैज्ञानिक विषयों को सरलता से समझाया। बहन श्रुष्टि एवं  देव्यानी  ने भी मार्गदर्शन और सहयोग प्रदान किया। शिक्षकों के मार्गदर्शन तथा पिछले 10 वर्षों के प्रश्न-पत्रों का अभ्यास करने से छात्र को उत्तर लेखन शैली और समय प्रबंधन में विशेष लाभ मिला। छात्र ने आगे की पढ़ाई के लिए कॉमर्स विषय का चयन किया है और उसका लक्ष्य एक अंतरराष्ट्रीय वित्तीय सलाहकार बनना है, जिसके लिए वह निरंतर प्रयासरत है।

CBSE की स्कूलों को सख्त चेतावनी, सख्त कार्रवाई की तैयारी में बोर्ड

लुधियाना सेंट्रल बोर्ड ऑफ सेकेंडरी एजुकेशन (सीबीएसई) के नोटिस में यह गंभीर मामला आया है कि कई राज्यों में स्कूल एलओसी (लिस्ट ऑफ कैंडिडेट्स) जमा करने के नाम पर विद्यार्थियों से ट्यूशन फीस की मांग कर रहे हैं। बोर्ड ने इसे पूरी तरह से नियम विरुद्ध बताते हुए स्पष्ट किया है कि पहले चरण में एलओसी के लिए कोई अतिरिक्त फीस नहीं ली जाएगी। बोर्ड के अनुसार, स्कूलों द्वारा केवल वही परीक्षा फीस ली जा सकती है जो सर्कुलर में पहले से तय है। नियमों का उल्लंघन करने वाले स्कूलों के खिलाफ बोर्ड सख्त कार्रवाई करने की तैयारी में है। जानकारी के अनुसार बोर्ड ने अभी सिर्फ एलओसी मांगी है ताकि परीक्षा में बैठने वाले विद्यार्थियों की सही संख्या का पता चल सके। जब विद्यार्थी अपने सब्जेक्ट्स का चयन करेंगे, तभी उन्हें तय किया गया फीस देनी होगी। मई में होगी दूसरी बोर्ड परीक्षा नई शिक्षा नीति 2020 के तहत पहली बार मई में दूसरी बोर्ड परीक्षा आयोजित होने जा रही है। इस परीक्षा में विद्यार्थी विज्ञान, गणित, सामाजिक विज्ञान और भाषा जैसे अधिकतम 3 सब्जेक्ट्स में अपना स्कोर सुधारने (इम्प्रूवमेंट) के लिए आवेदन कर सकते हैं। एलओसी प्रक्रिया का पहला चरण 31 मार्च तक था, जबकि दूसरा चरण मुख्य परीक्षा का रिजल्ट आने के बाद शुरू होगा। इसके बाद तीसरे चरण में लेट फीस के साथ विद्यार्थियों को एक और मौका दिया जाएगा। परीक्षा के लिए एलिजिबिल्टी और नियम इस विशेष परीक्षा में केवल वही विद्यार्थी बैठ सकते हैं जो पहली मुख्य परीक्षा में शामिल हुए हों और जिन्होंने कम से कम तीन सब्जेक्ट्स की परीक्षा दी हो। बोर्ड ने साफ किया है कि जो छात्र मुख्य परीक्षा में तीन या अधिक सब्जेक्ट्स में फेल या एब्सेंट रहे हैं, वे इस परीक्षा के पात्र नहीं होंगे। कंपार्टमेंट वाले विद्यार्थी भी इसमें शामिल हो सकते हैं, लेकिन एलओसी में किसी भी नए विद्यार्थी का नाम नहीं जोड़ा जा सकेगा। यदि कोई छात्र फॉर्म भरने के बाद परीक्षा में शामिल नहीं होता है, तो मुख्य परीक्षा के अंकों के आधार पर ही उसका फाइनल रिजल्ट घोषित किया जाएगा। 

CBSE 12वीं मैथ्स पेपर में गड़बड़ी? QR कोड स्कैन करने पर निकला इंग्लिश गाना, छात्र हैरान

नई दिल्ली सीबीएसई बोर्ड परीक्षा का प्रश्न पत्र एक बार फिर विवादों में आ गया है। लेकिन इस बार मामला कठिनता के स्तर का नहीं, बल्कि कुछ अलग है। केंद्रीय माध्यमिक शिक्षा बोर्ड (सीबीएसई) ने सोमवार को 12वीं कक्षा की गणित विषय की परीक्षा आयोजित की थी। पेपर के फौरन बाद छात्रों ने दावा किया कि उनकी गणित की परीक्षा के प्रश्न पत्र के पहले पेज पर छपे क्यूआर (QR) कोड को स्कैन करने पर यह इंग्लिश गाना खुल रहा था। छात्रों ने कहा कि क्यूआर कोर्ड स्कैन करने पर ब्रिटिश गायक रिक एस्टली (Rick Astley) के 1987 के प्रसिद्ध गीत “Never Gonna Give You Up” के यूट्यूब वीडियो पर ले जा रहा है। आमतौर पर ये क्यूआर कोड ऑथेंटिकेशन और सिक्योरिटी वेरिफिकेशन के लिए होते हैं इसलिए आधिकारिक दस्तावेज पर ऐसी त्रुटि ने बोर्ड की कार्यप्रणाली पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं। आपको बता दें कि इस बार सीबीएसई 10वीं का गणित का पेपर अपनी अत्यधिक कठिनता के स्तर को लेकर विवादों में आया था। हालांकि यह अभी स्पष्ट नहीं है कि यह गड़बड़ी सभी प्रश्नपत्रों में थी या नहीं, लेकिन इस घटना के वीडियो और स्क्रीनशॉट इंटरनेट पर तेजी से वायरल हो रहे हैं। एक के बाद एक छात्रों ने अपने अनुभव साझा करना शुरू कर दिया है, कुछ ने तो अधिकारियों से सुरक्षा में संभावित चूक को लेकर सवाल भी पूछे। सीबीएसई पेपर में इस कथित चूक को लेकर छात्रों और अभिभावकों के बीच चिंता है। सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म एक्स पर मीम्स की बाढ़ आ गई है। सीबीएसई पर तंज कसते हुए एक यूजर ने लिखा, "सीबीएसई ने सच में क्लास 12 के मैथ के पेपर में सिर्फ हमें 'रिकरोल' करने के लिए क्यूआर कोड डाल दिया… मैं वहां बैठकर इंटीग्रल्स हल करने की कोशिश कर रहा हूं, और बोर्ड 'Never Gonna Give You Up' बजा रहा है। 2026 में सच में एग्जामिनर्स ने हमें ट्रोल कर दिया। कुछ लोगों ने तो अधिकारियों से यह वेरिफाई करने के लिए सवाल पूछना भी शुरू कर दिया है कि क्या यह खबर सच है। "@cbseindia29, कई वायरल वीडियो और रिपोर्ट दावा कर रही हैं कि आपने 12वीं क्लास के स्टूडेंट्स को उनके मैथ्स के पेपर में "rickrolled" किया है। क्या आप कन्फर्म कर सकते हैं कि क्या सच में ऐसा हुआ है? इतने सारे वीडियो फेक नहीं हो सकते, क्या आप समझा सकते हैं?'यूजर अपने ट्वीट में शिक्षा मंत्रालय, सीबीएसई, और शिक्षा मंत्री धर्मेन्द्र प्रधान को टैग कर रहे हैं। अभी तक CBSE ने इस मामले पर कोई जवाब नहीं दिया है। पेपर सेट्स पर QR कोड क्यों लगाए जाते हैं? पेपर सेट्स पर QR कोड लगाना एक ऑथेंटिकेशन और लीक प्रूफ उपाय है। चूंकि हर QR कोड पेपर सेट के लिए यूनिक होता है, जो यह वेरिफाई करने में मदद करता है कि पेपर ऑफिशियल है या नहीं, इसलिए कई स्टूडेंट्स और पेरेंट्स को संभावित लीक का डर सता रहा है, क्योंकि कोड स्टूडेंट्स को ऑफिशियल निर्देशों या संबंधित जानकारी के बजाय एक म्यूजिक वीडियो पर रीडायरेक्ट कर रहा है। इसके अलावा क्यूआर ट्रैकिंग, रिकॉर्ड रखने और जालसाजी को रोकने में मदद करता है। स्टूडेंट्स लगातार अधिकारियों को टैग कर रहे हैं और जांच की मांग कर रहे हैं, क्योंकि उनका मानना ​​है कि पेपर के साथ छेड़छाड़ की गई थी और इस पर कार्रवाई की जानी चाहिए।

CBSE देगा बोर्ड परीक्षाओं से पहले छात्रों को मुफ्त मेंटल हेल्थ काउंसलिंग सेवा

चंडीगढ़. बोर्ड परीक्षाओं के दबाव और छात्रों की मानसिक सेहत को प्राथमिकता देते हुए केंद्रीय माध्यमिक शिक्षा बोर्ड (CBSE) ने कक्षा 10वीं और 12वीं के विद्यार्थियों के लिए मुफ्त साइको-सोशल काउंसलिंग सेवा की शुरुआत कर दी है। यह सेवा वर्ष 2026 की बोर्ड परीक्षाओं को ध्यान में रखते हुए शुरू की गई है और 1 जून 2026 तक जारी रहेगी। CBSE द्वारा जारी जानकारी के अनुसार, यह काउंसलिंग सुविधा बोर्ड की वार्षिक पहल का पहला चरण है, जिसका उद्देश्य छात्रों और अभिभावकों को परीक्षा से जुड़े तनाव, डर और भावनात्मक समस्याओं से उभरने में मदद करना है। टेली-काउंसलिंग सेवा के तहत विद्यार्थी और माता-पिता सोमवार से शुक्रवार सुबह 9:30 बजे से शाम 5:30 बजे तक विशेषज्ञों से बात कर सकते हैं। इस कार्यक्रम के तहत कुल 73 अनुभवी प्रशिक्षित विशेषज्ञ छात्रों का मार्गदर्शन करेंगे। इनमें CBSE से जुड़े स्कूलों के प्रिंसिपल, प्रशिक्षित काउंसलर, स्पेशल एजुकेटर और मनोवैज्ञानिक शामिल हैं। इनमें से 61 विशेषज्ञ भारत में सेवाएं दे रहे हैं, जबकि 12 काउंसलर नेपाल, जापान, कतर, ओमान और यूएई जैसे देशों से जुड़े हुए हैं। यह सेवा शनिवार और रविवार को उपलब्ध नहीं रहेगी। CBSE का कहना है कि इस पहल का मुख्य उद्देश्य छात्रों को मानसिक रूप से मजबूत बनाना है, ताकि वे फरवरी में शुरू होने वाली बोर्ड की थ्योरी परीक्षाओं का सामना बिना तनाव और घबराहट के कर सकें। बोर्ड के अनुसार, मानसिक संतुलन और सकारात्मक सोच परीक्षा प्रदर्शन में अहम भूमिका निभाते हैं। इसके अलावा, छात्र और अभिभावक टोल-फ्री नंबर 1800-11-8004 पर कॉल कर 24×7 आईवीआरएस सुविधा का लाभ भी उठा सकते हैं। यह सेवा हिंदी और अंग्रेजी दोनों भाषाओं में उपलब्ध है, जिसमें परीक्षा तैयारी, समय प्रबंधन, तनाव नियंत्रण और CBSE से जुड़ी जरूरी जानकारियां दी जाती हैं। CBSE ने यह भी स्पष्ट किया है कि तनाव प्रबंधन और प्रभावी पढ़ाई से जुड़े कई उपयोगी संसाधन बोर्ड की आधिकारिक वेबसाइट cbse.gov.in पर उपलब्ध हैं, जिन्हें छात्र किसी भी समय एक्सेस कर सकते हैं।

गांवों में शिक्षा सुधार की पहल, छत्तीसगढ़ में खुलेंगे CBSE स्कूल; सरकार देगी आर्थिक प्रोत्साहन

रायपुर  छत्तीसगढ़ (Chhattisgarh) सरकार ग्रामीण और पिछड़े शहरी इलाकों को विकसित करने के लिए कई प्रयास और योजनाएं चला रही है। इसी कड़ी में अब राज्य सरकार शिक्षा की गुणवत्ता बढ़ाने के लिए एक और कदम उठा रही है। गांव में आज भी उच्च शिक्षा का अभाव देखा जाता है तो वहीं गांवों के बच्चों को इंग्लिश मीडियम जैसे स्कूलों में पढ़ने के लिए शहर की जाना पड़ता है। ऐसे में अब राज्य सरकार छत्तीसगढ़ निजी विद्यालय प्रोत्साहन नियम 2025 तैयार किया है। इस नीति के तहत अब गांव में CBSE स्कूल खोले जाएंगे। इसके लिए सरकार भी प्रोत्साहित करेगी। बता दें कि इस अधिनियम के तहत गांवों में भी शहर जैसी आधुनिक और गुणवत्तापूर्ण शिक्षा उपलब्ध कराई जाएगी। सरकार ऐसे निवेशकों को भारी सब्सिडी देगी जिन्हें औद्योगिक विकास नीति के दायरे में भी शामिल किया गया है। इससे गांवों में केंद्रीय माध्यमिक शिक्षा बोर्ड (CBSE) वाले स्कूल खोले जाएंगे। जो विद्यालय विकासखंड मुख्यालय से 10 किलोमीटर की परिधि में या सीमित सुविधाओं वाले नगरीय क्षेत्रों में खोले जाएंगे, उन्हें निवेश प्रोत्साहन मिलेगा। इनमें कम से कम 500 छात्रों की क्षमता और कक्षा पहली से बारहवीं तक CBSE मान्यता अनिवार्य होगी। स्कूल में रहेंगी ये सुविधाएं स्कूल में बच्चों के लिए कई सुविधाएं दी जाएंगी। परिसर में छात्रावास, पुस्तकालय, स्मार्ट क्लास, प्रयोगशाला और खेल सुविधा की व्यवस्था अनिवार्य है। इच्छुक निवेशकों को उद्यम आकांक्षा प्रमाण पत्र और विस्तृत परियोजना के साथ आवेदन जमा करना होगा। प्रस्ताव में परियोजना की संक्षिप्त रूपरेखा, निवेश लागत का विवरण, स्थल चयन, आर्किटेक्चरल प्लान और संभावित रोजगार के आंकड़े शामिल होने चाहिए। निवेश की गणना लोक निर्माण विभाग की दर अनुसूची या 2,000 प्रति वर्गफुट, जो न्यूनतम हो, के आधार पर की जाएगी। कैसे मिलेगी सब्सिडी? छत्तीसगढ़ सरकारा ने इस अधिनियम को लेकर कड़े नियम बनाए हैं। निवेशकों के आवेदन आने के बाद उद्योग संचालनालय सैद्धांतिक स्वीकृति जारी करेगा। इसके बाद इकाई औद्योगिक विकास नीति 2024-30 के परिशिष्ट 7/8 के अंतर्गत निवेश प्रोत्साहन के लिए पात्र होगी। इस नीति के तहत ब्याज सब्सिडी, पूंजी लागत सब्सिडी, स्टांप ड्यूटी छूट, बिजली शुल्क छूट जैसे प्रोत्साहन उपलब्ध हैं। हालांकि, भूमि, कार्यशील पूंजी और प्रारंभिक व्यय को इसमें नहीं गिना जाएगा।