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पुलिस थानों में महिला शौचालय और तय ड्यूटी टाइम की मांग हाई कोर्ट पहुंची, पंजाब-हरियाणा सरकार को नोटिस

चंडीगढ़  पंजाब एवं हरियाणा हाई कोर्ट में पुलिस सुधारों को लेकर दाखिल जनहित याचिका पर सुनवाई हुई। अदालत ने कहा कि पुलिस सुधारों पर फैसला कोर्ट नहीं, बल्कि सरकार और प्रशासन को लेना चाहिए। हालांकि हाई कोर्ट ने पंजाब, हरियाणा और चंडीगढ़ प्रशासन को इन मुद्दों पर दो महीने में निर्णय लेने के निर्देश दिए हैं। इस मामले में दायर याचिका में मांग की गई कि पुलिसकर्मियों से लगातार लंबी ड्यूटी न कराई जाए, थानों में महिलाओं के लिए अलग और साफ शौचालय हों, आरोपितों को मीडिया के सामने परेड न कराया जाए और पुलिस व्यवस्था को पूरी तरह डिजिटल बनाया जाए। चीफ जस्टिस शील नागू और जस्टिस संजीव बेरी की खंडपीठ ने हालांकि इन मांगों पर सीधे आदेश जारी करने से इन्कार कर दिया, लेकिन पंजाब, हरियाणा और यूटी चंडीगढ़ के मुख्य सचिवों को इन मुद्दों पर विचार कर फैसला लेने के निर्देश जरूर दे दिए। सरकार को करना होगा फैसला अदालत ने कहा कि ये विषय नीतिगत और प्रशासनिक प्रकृति के हैं, जिन पर फैसला सरकार और सक्षम अधिकारियों को ही करना है।यह जनहित याचिका मोहाली निवासी निकिल सराफ ने दायर की थी। याचिका में कहा गया कि पुलिसकर्मियों, खासकर कांस्टेबलों के लिए पदोन्नति के अवसर बेहद सीमित हैं, जिससे पूरे करियर में ठहराव की स्थिति बन जाती है। मांग रखी गई कि प्रत्येक कांस्टेबल को सेवा के दौरान कम से कम तीन प्रमोशन दिए जाएं। साथ ही पुलिसकर्मियों के लिए बेहतर आवास, पर्याप्त अवकाश, मेडिकल जांच और कठिन ड्यूटी के बदले अतिरिक्त वेतन जैसी सुविधाएं देने की भी मांग उठाई गई। महिलाओं के लिए अलग शौचालय नहीं याचिका में पुलिस थानों और चौकियों की स्थिति को लेकर भी गंभीर सवाल उठाए गए। कहा गया कि कई जगह महिलाओं के लिए अलग शौचालय तक नहीं हैं। लाकअप की हालत भी मानवाधिकार मानकों के अनुरूप नहीं है। अदालत से मांग की गई कि थानों में साफ-सुथरे और रोशनी वाले लॉकअप बनाए जाएं तथा पुलिस शिकायत प्राधिकरणों की जानकारी हर थाने में प्रमुखता से प्रदर्शित की जाए। इसके अलावा पुलिस बल के डिजिटलीकरण और संसाधनों के बेहतर उपयोग का मुद्दा भी उठाया गया। याचिका में कहा गया कि वरिष्ठ अधिकारियों और नेताओं की सुरक्षा में बड़ी संख्या में पुलिसकर्मियों की तैनाती के कारण आम पुलिसिंग प्रभावित होती है। सोशल ऑडिट करवाने की मांग  इस व्यवस्था का स्वतंत्र सोशल ऑडिट कराने की मांग भी रखी गई।सुनवाई के दौरान अदालत को बताया गया कि याचिका में उठाए गए कई मुद्दे पहले से ही सुप्रीम कोर्ट ऑफ इंडिया में लंबित एक अन्य मामले में विचाराधीन हैं। इसके बाद हाई कोर्ट ने केवल उन बिंदुओं पर सुनवाई की जो वहां लंबित नहीं हैं। अंत में हाई कोर्ट ने याचिकाकर्ता को 30 दिन के भीतर हरियाणा, पंजाब व चंडीगढ़ प्रशासन को विस्तृत मांग पत्र देने की छूट देते हुए कहा कि संबंधित सरकार और प्रशासन दो महीने के भीतर उस पर स्पीकिंग ऑर्डर पारित कर निर्णय लें।

इंदर कौर हत्याकांड में पुलिस को मिले अहम सबूत, फरार आरोपी पर शिकंजा तेज

लुधियाना पंजाबी सिंगर इंदर कौर के लुधियाना में हुए मर्डर केस में हत्यारे सुखविंदर सिंह सुक्खा के खिलाफ पुलिस ने LOC जारी करने की प्रक्रिया शुरू कर दी है। पुलिस के हाथ कई अहम सबूत भी लगे है जिससे सुक्खा को कनाडा से लुधियाना लाया जाएगा। नेपाल से भी पुलिस कई लिंक खंगाल रही है। इस केस में अभी तक और किन लोगों की शमूलियत है इसे लेकर भी पुलिस जांच कर रही है। फिलहाल पुलिस इस मामले की गहनता से जांच में जुटी है। उधर, इंदर कौर के शव का पोस्टमॉर्टम होने के बाद ये सामने आया है कि सिंगर के दो गोलियां लगी है। एक गोली उसकी छाती के दाहिनी तरफ आर पार हुई है और दूसरी गोली माथे में फंसी थी। क्या था पूरा मामला पंजाबी सिंगर इंदर कौर उर्फ यशइंदर कौर की उसके NRI बॉयफ्रेंड सुखविंदर सिंह उर्फ सुक्खी बराड़ ने हत्या कर दी। शादी न करने पर उसने इंदर को लुधियाना में समराला के नजदीक नीलो नहर के किनारे कार में गोली मारी। इसके बाद लाश नीलो नहर और उसकी कार रामपुर गांव के पास नहर में फेंक दी। इंदर कौर की लाश समराला पुलिस को बंद पड़े टोल प्लाजा से 50 मीटर दूर नहर में पड़े सूखे पेड़ से फंसी हुई मिली। जहां लाश बरामद हुई है उससे 7 किलोमीटर दूर रामपुर गांव में नहर से थाना जमालपुर की पुलिस को इंदर की फोर्ड फिगो कार बरामद हुई। आरोपियों ने जहां रात के अंधेरे में कार को नहर में फेंका वहां पर दिन में भी जाने से लोग कतराते हैं। जब पुलिस कार को बरामद करने पहुंची तो गांव के लोग भी सहम गए। उनका कहना है कि इस रास्ते कोई अंजान आदमी आ ही नहीं सकता। उनका कहना है कि जो भी रात को यहां कार फेंकने आए हैं निश्चित तौर पर वो पहले भी आए होंगे। हत्या वाली जगह से 1 किलोमीटर दूर मिली लाश जानकारी के मुताबिक 13 मई की रात को करीब 8:30 बजे इंदर कौर अपनी सफेद रंग की फोर्ड फिगो कार से राशन लेने बाजार गई थी। 9 बजे सुखविंदर ने साजिश के तहत इंदर कौर को फोन करके नीलो नहर के पुल पर बुलाया। वहां सुखविंदर, उसका पिता प्रीतम सिंह और उसके दो दोस्त करमजीत सिंह और रविंदर सिंह रवि पहले से मौजूद थे। बंदूक के दम पर इंदर को कार समेत किया था किडनैप इन सबने मिलकर बंदूक के दम पर इंदर को कार समेत किडनैप कर लिया। इसके बाद उन्होंने इंदर की गोलियां मारकर हत्या कर दी और फिर लाश नहर में फेंक दी। 19 मई को इंदर कौर की लाश नीलो पुल से करीब आधा किमी दूर बंद टोल प्लाजा के पास नहर में पड़े सूखे पेड़ के पास फंसी हुई मिली। 6 दिन पानी में पड़े रहने के कारण शव फूला शव 6 दिन से पानी में पड़े रहने के कारण फूल गया था। इसलिए उसके बाहर निकालने में भी पुलिस को परेशानी हुई। पुलिस की टीम ने जब शव को बाहर निकाला तो उसके लिए उन्हें मेडिकल ग्लव्स पहनने पड़े। नहर के किनारे ग्लव्स अब भी पड़े हुए हैं। नहर में जहां से पुलिस को शव बरामद हुआ वहां पर न तो खून के निशान थे और न ही झाड़ियां टूटी हुई मिलीं।  

नशा तस्करी पर हाईकोर्ट का बड़ा एक्शन, ड्रोन नेटवर्क की निगरानी पर NCB को निर्देश

चंडीगढ़. पंजाब में लगातार बढ़ रहे नशे के कारोबार, सीमा पार से ड्रोन के जरिए हो रही तस्करी और हथियारों की सप्लाई को लेकर पंजाब एवं हरियाणा हाई कोर्ट ने बेहद सख्त रुख अपनाया है। अदालत ने पंजाब, हरियाणा और यूटी चंडीगढ़ के पुलिस महानिदेशकों के साथ-साथ नारकोटिक्स कंट्रोल ब्यूरो को आदेश जारी किए हैं। आदेशों में साफ कहा है कि वे हर तीन महीने में ड्रग तस्करी से जुड़े मामलों, बरामदगी, नशे के निस्तारण और नशा मुक्ति अभियानों की विस्तृत रिपोर्ट अदालत में दाखिल करें। अदालत ने स्पष्ट किया कि यदि रिपोर्ट में किसी प्रकार की लापरवाही, कमी या गंभीर स्थिति सामने आती है तो मामले को दोबारा सुनवाई के लिए सूचीबद्ध किया जाएगा। चीफ जस्टिस शील नागू और जस्टिस संजीव बेरी की खंडपीठ ने यह महत्वपूर्ण आदेश उस जनहित याचिका का निपटारा करते हुए पारित किया, जिसे अदालत ने स्वयं संज्ञान लेते हुए शुरू किया था। हाई कोर्ट ने लिया था स्वत: संज्ञान अदालत ने एक समाचार पत्र में प्रकाशित एक खबर के आधार पर स्वतः संज्ञान लिया था। खबर में सीमा सुरक्षा बल द्वारा पंजाब में बढ़ती ड्रग तस्करी और सीमा पार से ड्रोन के जरिए भेजे जा रहे नशीले पदार्थों को लेकर गंभीर चिंता जताई गई थी। समाचार रिपोर्ट में बताया गया था कि बीएसएफ ने पंजाब पुलिस को 75 ऐसे व्यक्तियों की सूची सौंपी थी, जो कथित रूप से ड्रग तस्करी में शामिल पाए गए थे। इसके साथ ही यह भी सामने आया था कि वर्ष 2023 के दौरान सीमा क्षेत्र में ड्रोन के माध्यम से भारत भेजे जा रहे लगभग 755 किलोग्राम नशीले पदार्थ बरामद किए गए। इतना ही नहीं, तस्करी के इस नेटवर्क के साथ हथियारों की सप्लाई भी जुड़ी हुई मिली और कई राइफल तथा पिस्तौल भी जब्त की गईं। सरकारों व एनसीबी ने दी थी स्टेटस रिपोर्ट मामले की सुनवाई के दौरान पंजाब, हरियाणा और नारकोटिक्स कंट्रोल ब्यूरो की ओर से अदालत में स्टेटस रिपोर्ट दाखिल की गई। इन रिपोर्टों में बताया गया कि राज्य सरकारों और एजेंसियों द्वारा नशे की रोकथाम, ड्रग तस्करों के खिलाफ कार्रवाई, जब्त मादक पदार्थों के सुरक्षित निस्तारण और युवाओं को नशे से दूर रखने के लिए विभिन्न अभियान चलाए जा रहे हैं। अदालत ने इन रिपोर्टों का अवलोकन करने के बाद कहा कि नशे के खिलाफ कार्रवाई केवल कागजों तक सीमित नहीं रहनी चाहिए, बल्कि इसकी लगातार निगरानी और जवाबदेही भी तय होनी चाहिए। हर तीन महीने में देंगे विस्तृत रिपोर्ट खंडपीठ ने अपने आदेश में कहा कि पंजाब, हरियाणा और यूटी चंडीगढ़ के डीजीपी व नारकोटिक्स कंट्रोल ब्यूरो के महानिदेशक नियमित रूप से यह जानकारी देंगे कि कितने मामलों में एफआईआर दर्ज हुई, कितनी मात्रा में नशीले पदार्थ बरामद हुए, उनका निस्तारण कैसे किया गया और नशा मुक्ति के लिए क्या कदम उठाए गए। अदालत ने यह जिम्मेदारी हाई कोर्ट के रजिस्ट्रार जनरल के माध्यम से तय की है ताकि भविष्य में इन रिपोर्टों की न्यायिक समीक्षा की जा सके।

हीटवेव के बीच पंजाब सरकार का बड़ा फैसला, दफ्तरों के नए टाइम टेबल से लोगों को मिलेगी राहत

चंडीगढ़  भीषण गर्मी के मद्देनजर लोगों को राहत देने के उद्देश्य से अहम फैसला लेते हुए पंजाब के मुख्यमंत्री भगवंत सिंह मान ने आज पंजाब सरकार के सभी दफ्तरों, स्कूलों और कॉलेजों का समय बदलने की घोषणा की है। जनहित में नए समय के अनुसार कामकाज का समय मौजूदा सुबह 9:00 बजे से शाम 5:00 बजे की बजाय सुबह 7:30 बजे से दोपहर 1:30 बजे तक होगा। 25 मई से लागू होगा बदला हुआ समय इस फैसले की घोषणा करते हुए मुख्यमंत्री भगवंत सिंह मान ने बताया कि बदला हुआ समय 25 मई से लागू होगा और अगले आदेशों तक जारी रहेगा। उन्होंने कहा, "यह फैसला आम लोगों की सुविधा के लिए लिया गया है ताकि वे पूरे पंजाब में पड़ रही भीषण गर्मी के दौरान सरकारी दफ्तरों में आसानी से अपने काम करवा सकें। हर किसी की भलाई सुनिश्चित करने के लिए सभी भागीदारों के साथ विचार-विमर्श के बाद यह फैसला लिया गया है।" छुट्टी लिए बिना पूरे होंगे सरकारी काम मुख्यमंत्री भगवंत सिंह मान ने आगे कहा कि बदले हुए समय से लोग अपने काम से छुट्टी लिए बिना सुबह-सुबह अपने सरकारी काम पूरे कर सकेंगे। उन्होंने कहा, "इस कदम से कर्मचारियों को भी बड़ा फायदा होगा, क्योंकि वे दिन में तापमान बढ़ने से पहले अपनी ड्यूटी खत्म कर सकेंगे।" मुख्यमंत्री ने यह भी बताया कि अब कर्मचारियों को अपने बच्चों के साथ बिताने के लिए अधिक समय मिलेगा, जो स्कूलों और कॉलेजों के बदले हुए समय के कारण लगभग उसी समय घर लौटेंगे। उन्होंने कहा, "यह फैसला पंजाब सरकार की लोक-पक्षीय पहुंच और नागरिकों के दैनिक जीवन को बेहतर बनाने की प्रतिबद्धता को दर्शाता है।" बिजली बचाने के लिए उठाया गया कदम मुख्यमंत्री भगवंत सिंह मान ने बताया कि यह नया समय प्रदेश भर के स्कूलों व कॉलेजों के साथ-साथ पंजाब सरकार के सभी दफ्तरों पर लागू होगा। उन्होंने आगे कहा, "पंजाब स्टेट पावर कॉर्पोरेशन लिमिटेड (पी.एस.पी.सी.एल.) के आंकड़ों के अनुसार बिजली का पीक लोड दोपहर 1:00 बजे के बाद शुरू होता है, इसलिए दफ्तरों का नया समय बिजली की खपत को कम करने और बिजली के बुनियादी ढांचे पर दबाव को घटाने में भी मदद करेगा।" समाज के हर वर्ग की भलाई के लिए पंजाब सरकार की प्रतिबद्धता को दोहराते हुए मुख्यमंत्री भगवंत सिंह मान ने जोर देकर कहा कि जनता की सुविधाओं की रक्षा और लोगों की भलाई सुनिश्चित करने में कोई कसर बाकी नहीं छोड़ी जाएगी।

Fake CLU Scam में बड़ा खुलासा, ED के रडार पर गमाडा अधिकारी; जालंधर में एक्शन तेज

जालंधर  प्रवर्तन निदेशालय यानी ED ने जालंधर में बड़ी कार्रवाई करते हुए शुक्रवार शाम इंडियन कोऑपरेटिव हाउस बिल्डिंग सोसाइटी के सचिव अजय सहगल को गिरफ्तार किया है। यह कार्रवाई फर्जी सहमति पत्र के आधार पर धोखाधड़ी से भूमि उपयोग परिवर्तन यानी सीएलयू हासिल करने और मनी लांड्रिंग के आरोप में की गई है। ईडी ने यह जांच पंजाब पुलिस द्वारा दर्ज एफआईआर के आधार पर शुरू की थी। किसानों ने शिकायत दी थी कि सीएलयू प्राप्त करने के लिए उनकी सहमति में फर्जीवाड़ा किया गया है। जांच में खुलासा हुआ कि सहगल ने 15 भूस्वामियों की 30.5 एकड़ जमीन को लेकर फर्जी सहमति पत्र तैयार किए थे। किसानों के फर्जी हस्ताक्षर से हासिल किया सीएलयू इन फर्जी सहमति पत्रों के आधार पर आरोपियों को 'सनटेक सिटी' नामक रियल एस्टेट मेगा प्रोजेक्ट विकसित करने के लिए सीएलयू दिया गया। सीएलयू लेने के लिए भूस्वामियों के फर्जी हस्ताक्षर और अंगूठे के निशान का इस्तेमाल हुआ। इससे पहले ईडी ने 7 मई को इंडियन कोऑपरेटिव हाउस बिल्डिंग सोसाइटी और एबीएस टाउनशिप प्राइवेट लिमिटेड से जुड़े आठ परिसरों पर तलाशी अभियान चलाया था। बालकनी से फेंके 21 लाख रुपये, बिना मंजूरी बेचे फ्लैट तलाशी के दौरान बालकनी की जाली से 21 लाख रुपये नकद नीचे सड़क पर फेंके गए, जिन्हें बाद में ईडी अधिकारियों ने बरामद कर लिया। अजय सहगल ने फर्जी सहमति पत्रों से प्राप्त सीएलयू के आधार पर ला कैनेला आवासीय बहुमंजिला परिसर और डिस्ट्रिक्ट 7 वाणिज्यिक परिसर भी विकसित किए। ईडी की जांच में यह भी सामने आया कि इन परियोजनाओं में रेरा पंजीकरण और मंजूरी से पहले ही इकाइयों की बिक्री की जा रही थी। गमाडा के शीर्ष अधिकारी भी जांच के दायरे में अजय सहगल ने आज तक आर्थिक रूप से कमजोर वर्ग यानी ईडब्ल्यूएस के लिए प्लाट एस्टेट अधिकारी गमाडा को स्थानांतरित नहीं किए हैं। इसके अलावा पंजाब और हरियाणा हाईकोर्ट में हुई चर्चाओं के विपरीत, सनटेक सिटी को फायदा पहुंचाने के लिए केवल 30 एकड़ भूमि के लिए आंशिक सीएलयू रद्द किया गया। ईडी इस मामले में कुछ और गिरफ्तारियां करने की तैयारी में है। गमाडा के शीर्ष अधिकारी और अन्य सरकारी कर्मचारी जिन्होंने इस धोखाधड़ी में अजय सहगल का समर्थन किया और बदले में रिश्वत ली, वे भी जांच के रडार पर हैं। जांच में गमाडा और नगर एवं ग्राम नियोजन विभाग में बड़े पैमाने पर अनियमितताएं सामने आई हैं, जहां गरीब किसानों की कीमत पर रियल एस्टेट डेवलपर्स को फायदा पहुंचाया गया।

मनी लॉन्ड्रिंग केस में ईडी की छापेमारी, सोसाइटी सचिव गिरफ्त में

चंडीगढ़. कोऑपरेटिव हाउस बिल्डिंग सोसायटी के सचिव अजय सहगल को एनफोर्समेंट डायरेक्टरेट(ईडी) ने गिरफ्तार कर लिया है। ईडी की जांच अब सिर्फ एक बिल्डर या प्रोजेक्ट तक सीमित नहीं रही बल्कि गमाड़ा , टाउन एंड कंट्री प्लानिंग विभाग और रियल एस्टेट मंजूरी प्रक्रिया के पूरे सिस्टम पर सवाल खड़े हो गए हैं। ईडी ने शुक्रवार शाम अजय सहगल को मनी लॉन्ड्रिंग मामले में गिरफ्तार किया। एजेंसी का आरोप है कि किसानों और जमीन मालिकों के फर्जी सहमति पत्र तैयार कर करीब 30.5 एकड़ जमीन का सीएलयू हासिल किया गया। जांच में सामने आया है कि 15 जमीन मालिकों के नाम पर नकली हस्ताक्षर और अंगूठे लगाए गए थे। इन्हीं दस्तावेजों के आधार पर सनटेक सिटी जैसे बड़े रियल एस्टेट प्रोजेक्ट को मंजूरी मिली और बाद में करोड़ों रुपये का कारोबार खड़ा कर दिया गया। सूत्रों के मुताबिक ईडी अब यह पता लगाने में जुटी है कि आखिर इतने बड़े स्तर पर फर्जीवाड़ा होने के बावजूद विभागीय अधिकारियों ने आंखें कैसे मूंदे रखीं। एजेंसी को शक है कि मंजूरियों के दौरान कई स्तरों पर मिलीभगत हुई और कुछ अधिकारियों ने कथित तौर पर अवैध लाभ लेकर नियमों को नजरअंदाज किया। इसी कारण अब गमाड़ा और टाउन प्लानिंग विभाग के कुछ अफसर भी एजेंसी के रडार पर आ गए हैं। इस पूरे मामले की शुरुआत पंजाब पुलिस में दर्ज एफआईआर से हुई थी। किसानों ने शिकायत दी थी कि उनकी जानकारी के बिना उनकी जमीनों के सहमति पत्र तैयार किए गए और बाद में उन्हीं दस्तावेजों के जरिए प्रोजेक्ट को मंजूरी मिल गई। मामला सामने आने के बाद ईडी ने मनी लॉन्ड्रिंग एक्ट के तहत जांच शुरू की। 7 मई को ईडी ने इंडियन कोऑपरेटिव हाउस बिल्डिंग सोसायटी और एबीएस टाउनशिप प्राइवेट लिमिटेड से जुड़े आठ ठिकानों पर छापेमारी की थी। इस दौरान एक परिसर की बालकनी से 21 लाख रुपये नकद नीचे सड़क पर फेंक दिए गए थे। नीचे लगी नेट से टकराकर नोट सड़क पर बिखर गए। बाद में ईडी अधिकारियों ने पूरी रकम कब्जे में ले ली। इस घटना ने जांच को और चर्चित बना दिया। जांच एजेंसी के अनुसार अजय सहगल ने विवादित सीएलयू के आधार पर केवल सनटेक सिटी ही नहीं, बल्कि ‘ला कैनेला’ नामक मल्टीस्टोरी रिहायशी प्रोजेक्ट और ‘डिस्ट्रिक्ट-7’ कमर्शियल कॉम्प्लेक्स भी विकसित किए। जांच में यह भी सामने आया है कि कई यूनिटों की बिक्री रेरा से मंजूरी और पंजीकरण मिलने से पहले ही शुरू कर दी गई थी, जो नियमों का उल्लंघन माना जा रहा है। ईडी को यह भी जानकारी मिली है कि आर्थिक रूप से कमजोर वर्ग (ईडब्ल्यूएस) के लिए आरक्षित प्लॉट अब तक जीएमाडा को ट्रांसफर नहीं किए गए। वहीं पंजाब एवं हरियाणा हाईकोर्ट में सुनवाई के दौरान जिन अनियमितताओं का उल्लेख हुआ था, उसके बावजूद केवल आंशिक सीएलयू रद्द किए जाने पर भी सवाल उठ रहे हैं। एजेंसी यह जांच रही है कि आखिर किन परिस्थितियों में परियोजना के खिलाफ सख्त कार्रवाई की बजाय सीमित कार्रवाई की गई। सूत्रों का कहना है कि जांच में कुछ ऐसे वित्तीय लेन-देन भी सामने आए हैं, जिनसे संकेत मिल रहे हैं कि कथित तौर पर प्रभावशाली लोगों और अधिकारियों तक लाभ पहुंचाया गया। ईडी अब बैंक खातों, प्रॉपर्टी निवेश और मंजूरी प्रक्रिया से जुड़े दस्तावेजों की गहन जांच कर रही है। आने वाले दिनों में कई और लोगों को पूछताछ के लिए बुलाया जा सकता है। मामले ने पंजाब के रियल एस्टेट सेक्टर में भी हलचल पैदा कर दी है। बिल्डर लॉबी में इस बात को लेकर चिंता बढ़ गई है कि अगर जांच और गहराई तक गई तो कई पुराने प्रोजेक्ट और मंजूरियां भी जांच के दायरे में आ सकती हैं।

EVM की मांग पर हाईकोर्ट सख्त, बोला- अब बहुत देर हो चुकी; पंजाब निकाय चुनाव पर बड़ा फैसला

चंडीगढ़  पंजाब में नगर निकाय चुनाव प्रक्रिया के अंतिम दौर में पहुंचने के चलते पंजाब-हरियाणा हाईकोर्ट ने इसमें हस्तक्षेप करने से साफ इन्कार कर दिया। अब मतदान बैलेट पेपर से होगा।  अदालत ने स्पष्ट कहा कि चुनाव कार्यक्रम 13 मई को ही जारी हो चुका था, नामांकन वापस लेने की अंतिम तिथि 19 थी और अब केवल मतदान बाकी है। कोर्ट ने कहा कि इस चरण में ईवीएम पर कोई आदेश पारित करना उचित नहीं होगा। जनहित याचिका दाखिल करते हुए पंजाब-हरियाणा हाईकोर्ट से पंजाब में निकाय चुनाव ईवीएम से करवाने की मांग की गई थी। याची ने सुप्रीम कोर्ट के आदेश का हवाला देते हुए कहा था कि पारदर्शी व निष्पक्ष चुनाव सुनिश्चित करने के लिए ईवीएम का इस्तेमाल जरूरी है।  26 मई को होना है मतदान पंजाब में 105 नगर निगम, नगर परिषद और नगर पंचायत के लिए 26 मई को मतदान होगा। मतदान बैलेट पेपर से करवाने के फैसले को हाईकोर्ट में चुनौती दी गई थी।   हम ब्लेम गेम का हिस्सा नहीं बन सकते इस मामले में हाईकोर्ट में इलेक्शन कमीशन ऑफ इंडिया व पंजाब राज्य चुनाव आयोग आमने सामने आ गए थे। ईसीआई ने कहा था कि समय रहते ईवीएम की मांग नहीं की गई थी। इसके जवाब में पंजाब राज्य चुनाव आयोग ने कहा था कि उन्हें वह मशीनें नहीं उपलब्ध करवाई जा रही थी जिसकी उन्होंने मांग की थी। वहीं ट्रेनिंग व व्यवस्था के लिए समय को लेकर भी दोनों ने अदालत के समक्ष अपनी दलीलें रखीं। कोर्ट ने स्पष्ट कहा कि ईसीआई व राज्य चुनाव आयोग आपस में ब्लेम गेम खेल रहे हैं और हम इस गेम का हिस्सा नहीं बनना चाहते। याचिकाकर्ता देर से आए कोर्ट ने कहा कि हम सुप्रीम कोर्ट से सहमत हैं कि बैलेट पेपर की तरफ वापस जाना सही नहीं है लेकिन याचिकाकर्ता अदालत के समक्ष बहुत देर से पहुंचे हैं। इसी आधार पर अदालत ने संबंधित याचिकाओं को खारिज कर दिया। हालांकि, कोर्ट ने याचिकाकर्ताओं को राहत देते हुए यह स्वतंत्रता भी दी कि यदि उन्हें चुनाव प्रक्रिया या परिणाम को चुनौती देनी है तो वे कानून के अनुसार चुनाव याचिका दायर कर सकते हैं। समाज में अशिक्षा के चलते बनाए रखा गया है बैलेट पेपर का प्रावधान हाईकोर्ट ने कहा कि हमारे समाज में, जहां अशिक्षा आज भी बड़ी आबादी को प्रभावित करती है, नियम बनाने वाले प्राधिकरण ने जानबूझकर मतपत्र और मतपेटियों से संबंधित प्रावधानों को बरकरार रखा और नगर निकाय चुनावों में ईवीएम की अवधारणा लागू करते समय इन्हें समाप्त नहीं किया। ऐसी परिस्थितियां उत्पन्न हो सकती हैं, जब ईसीआई या राज्य निर्वाचन आयोग को पुनः पारंपरिक प्रणाली अर्थात मतपत्र और मतपेटियों के माध्यम से चुनाव कराना पड़े।  

गर्मी से मिली राहत, लेकिन ज्यादा दिन नहीं! पंजाब में आज भी बारिश का अलर्ट, फिर बढ़ेगा पारा

लुधियाना  पंजाब में शुक्रवार को हीट वेव के प्रकोप के बीच कुछ जगहों पर हल्की बारिश के साथ तेज हवाएं चलीं। इससे तापमान में 3.4 डिग्री की गिरावट दर्ज की गई और अब यह सामान्य के नजदीक हो गया है।  44 डिग्री के साथ बठिंडा सबसे गर्म रहा। इसी बीच मौसम विभाग ने शनिवार के लिए पंजाब के छह जिलों में 30 से 40 किलोमीटर की रफ्तार से तेज हवाएं चलने और हल्की से मध्यम बारिश का अलर्ट जारी कर दिया है। इनमें पठानकोट, गुरदासपुर, अमृतसर, होशियारपुर, नवांशहर और रूपनगर जिले शामिल हैं। इसके साथ ही हीट वेव चलने की भी चेतावनी जारी हुई है।  विभाग के मुताबिक रविवार से पंजाब में मौसम शुष्क हो जाएगा और भीषण लू चलेगी। विभाग ने रविवार से चार दिनों के लिए ऑरेंज अलर्ट जारी किया है और इस दौरान तापमान में 3 से 4 डिग्री तक की वृद्धि दर्ज की जा सकती है। पंजाब के न्यूनतम तापमान में 0.8 डिग्री की गिरावट दर्ज की गई। यह सामान्य से 3.1 डिग्री ऊपर हो गया है। सबसे कम 22.3 डिग्री का न्यूनतम पारा पठानकोट का दर्ज किया गया। अमृतसर का अधिकतम पारा 39.1 डिग्री, लुधियाना का 42.0 डिग्री, पटियाला का 42.3 डिग्री, पठानकोट का 38.6 डिग्री, फाजिल्का का 39.9 डिग्री, फिरोजपुर का भी 39.9 डिग्री, एसबीएस नगर का 36.0 डिग्री और रूपनगर का 37.4 डिग्री दर्ज किया गया। अमृतसर का न्यूनतम पारा 25.6 डिग्री, लुधियाना का 27.8 डिग्री, पटियाला का 29.0 डिग्री, बठिंडा का 28.2 डिग्री, फाजिल्का का 26.1 डिग्री, फिरोजपुर का 26.2 डिग्री, होशियारपुर का 23.5 डिग्री और रूपनगर का 27.0 डिग्री दर्ज किया गया। सबसे ज्यादा टेंपरेचर कहां पर 22 मई 2026 तक मध्य भारत, उससे सटे उत्तर प्रदेश, हरियाणा, पूर्वी और उत्तरी प्रायद्वीपीय भारत में दिन में अधिकतम तापमान 45-47 डिग्री सेल्सियस के बीच रहा, जबकि पूर्वोत्तर भारत, पश्चिमी हिमालय क्षेत्र और पश्चिमी दक्षिणी प्रायद्वीपीय भारत को छोड़कर देश के बाकी हिस्सों का तापमान 40-45 डिग्री सेल्सियस के बीच दर्ज किया गया. सबसे ज्यादा अधिकतम तापमान 47.2 डिग्री सेल्सियस ब्रह्मपुरी (विदर्भ) में दर्ज हुआ।  दुनिया के 100 सबसे गर्म जगहों में नोएडा, गाजियाबाद एक्यूआई डॉट इन के आंकड़ों के मुताबिक, 22 मई को रात 10 बजे के आंकड़ों के  हिसाब से दुनिया की 50 सबसे गर्म जगहों में 35 भारत के शहर शामिल हैं.  इसमें रायपुर, दुर्ग, भिलाई, चंद्रपुर, नागपुर, बांदा, अकोला, बुरहानपुर, अमरावती, नोएडा, सोनीपत, गाजियाबाद और गुरुग्राम समेत कई शहर शामिल हैं. अगले एक हफ्ते तक तापमान में गिरावट की संभावना नहीं है. लेकिन पहाड़ी इलाकों में जल्द राहत मिल सकती है।   

पक्षियों से गुलजार हुई सुखना सेंचुरी, तेंदुओं की मौजूदगी ने बढ़ाई वन्यजीव समृद्धि

चंडीगढ़. सुखना वाइल्डलाइफ सेंचुरी पक्षी और जानवरों को पसंद आ रही है। यहां वन्यजीवों का कुनबा बढ़ा है। पक्षियों की संख्या दोगुनी हो गई है और तेंदुओं ने भी यहां अपना ठिकाना बना लिया है। प्रशासन के वन एवं वन्यजीव विभाग ने वाइल्डलाइफ इंस्टीट्यूट ऑफ इंडिया (डब्ल्यूआईआई) के सहयोग से सुखना वाइल्ड लाइफ सेंचुरी और आसपास के वन क्षेत्रों में कराए गए व्यापक वन्यजीव सर्वेक्षण में जैव विविधता की समृद्ध तस्वीर सामने आई है। नवंबर 2025 में किए गए इस सर्वे में पक्षियों, तितलियों, स्तनधारियों, वनस्पतियों और सरीसृपों की बड़ी संख्या दर्ज की गई है। 2021 के सर्वे की तुलना में इस बार जैव विविधता के आंकड़ों में उल्लेखनीय बढ़ोतरी दर्ज की गई। स्तनधारी प्रजातियां 14 से बढ़कर 16 और पक्षी प्रजातियां 67 से बढ़कर 132 हो गईं। पहली बार तितलियों और सरीसृपों को भी सर्वे में शामिल किया गया। वन एवं वन्यजीव विभाग ने कहा कि इस सर्वे के निष्कर्ष चंडीगढ़ के वन क्षेत्रों में जैव विविधता संरक्षण, आवास प्रबंधन और वन्यजीव निगरानी को और मजबूत करने में मददगार साबित होंगे। रात में कैद हुई तेंदुए की गतिविधियां कैमरा ट्रैप सर्वे के दौरान 18 कैमरा ट्रैप स्टेशनों से 466 स्वतंत्र वन्यजीव रिकार्डिंग मिलीं। खास बात यह रही कि सर्वे में दो वयस्क नर तेंदुओं की मौजूदगी की पुष्टि हुई, जिनकी पहचान उनके शरीर पर अलग-अलग रोसेट पैटर्न के आधार पर की गई। तेंदुओं की गतिविधियां मुख्य रूप से रात के समय दर्ज की गईं। 43 पेड़ के साथ 22 जड़ी बूटी प्रजाति मिली सर्वेक्षण में 79 पौधों की प्रजातियां दर्ज की गईं, जिनमें 43 पेड़, 14 झाड़ियां और 22 जड़ी-बूटी प्रजातियां की शामिल हैं। वहीं सरीसृप और उभयचर वर्ग में 13 प्रजातियां दर्ज की गईं, जिनमें मेंढक, कछुए, सांप और छिपकलियां शामिल हैं। 73 प्रजातियों की तितलियां मिलीं तितली सर्वेक्षण में पांच परिवारों की 73 प्रजातियां दर्ज की गईं। इनमें येलो आरेंज टिप सबसे अधिक संख्या में पाई गई, जबकि पी ब्लू, कामन ओनिक्स और इंडिगो फ्लैश जैसी महत्वपूर्ण प्रजातियां भी दर्ज की गईं। 132 प्रजाजितयों के पक्षी पक्षी सर्वे में 132 प्रजातियों की पहचान की गई, जिनमें 13 शेड्यूल-1 और 117 शेड्यूल-2 की प्रजातियां शामिल हैं। आइयूसीएन संरक्षण स्थिति के अनुसार इनमें दो संकटग्रस्त, एक संवेदनशील और तीन निकट संकटग्रस्त प्रजातियां भी दर्ज की गईं। ह्यूम्स वार्बलर सबसे अधिक संख्या में पाया गया पक्षी रहा। 16 तरह के स्तनधारी स्तनधारी सर्वे में 16 प्रजातियां दर्ज की गईं, जिनमें सांभर, नीलगाय और जंगली सूअर प्रमुख रहे। सर्वे के अनुसार सांभर हिरण की घनत्व 22.34 ± 8.07 प्रति वर्ग किलोमीटर आंकी गई। सर्वे में यह एरिया रहे शामिल यह सर्वे 20 से 27 नवंबर 2025 के दौरान सुखना वाइल्डलाइफ सेंचुरी, लेक बीट, पटियाला की राव, सुखना चौ फाॅरेस्ट, बाॅटेनिकल गार्डन, बटरफ्लाई पार्क और सिटी बर्ड सेंचुरी जैसे पर्यावरणीय दृष्टि से महत्वपूर्ण क्षेत्रों में किया गया। इसमें वन विभाग के अधिकारियों, शोधकर्ताओं, स्वयंसेवकों, एनजीओ और अन्य हितधारकों ने भाग लिया।

सत्ता के सेमीफाइनल में पंजाब की सियासत गरमाई, निकाय चुनाव में सभी दलों की साख दांव पर

चंडीगढ़  सत्ता का सेमीफाइनल माने जाने वाले पंजाब के निकाय चुनाव में सभी दलों के दिग्गज खूब पसीना बहा रहे हैं क्योंकि उनकी साख दांव पर है।  भाजपा, कांग्रेस, शिअद और आप के सभी वरिष्ठ नेता, मंत्री, विधायक व सांसद चुनावी रण में अपने-अपने प्रत्याशियों को जितवाने लिए पूरा जोर लगा रहे हैं। चूंकि अब चुनाव को सिर्फ तीन दिन बचे हैं लिहाजा सभी दिग्गज अपने साथियों के साथ प्रचार अभियान में जुटे हैं। पंजाब में 26 मई को 105 नगर निकायों के चुनाव होने हैं इनमें 8 नगर निगम और 97 नगर परिषद और नगर पंचायतें शामिल हैं। 29 मई को परिणाम आएगा जो करीब आठ महीने बाद सूबे में होने वाले विधानसभा चुनाव के लिए सभी राजनीतिक पार्टियों के लिए एक आधार तय करेगा। चूंकि यह पूरा चुनाव शहरी वोटर पर आधारित है इसलिए राजनीतिक पार्टियां ज्यादा सतर्क हैं। वे जानती हैं कि ये चुनाव पंचायती चुनाव की तरह जातियों व समुदायों की सियासत के घेरे से बाहर रहेंगे। दलों ने उतारी दिग्गजों की फाैज राजनीतिक मामलों के जानकार परमजीत सिंह भी कहते हैं कि शहरी वोटर पढ़ा-लिखा व विकास का पक्षधर होता है। शहर की बुनियादी सुविधाएं उनकी बड़ी अपेक्षाओं में शामिल होती हैं और वे जाति-लिंग की सीमाओं को पार करते हुए मतदान करता है इसीलिए सभी दलों ने शहरी वोटरों को रिझाने के लिए अपने दिग्गजों की फौज उतारी है। भाजपा की रणनीतिक बैठकें, सुखबीर ने खुद संभाला मोर्चा भाजपा ने अपने प्रदेश स्तरीय सभी पदाधिकारियों और कार्यकारिणी सदस्यों को विभिन्न जिलों के निकायों की जिम्मेदारियां सौंपी रखी हैं। इनके अलावा पंजाब भाजपा के अध्यक्ष सुनील जाखड़, राष्ट्रीय महासचिव तरुण चुघ व केंद्रीय राज्य मंत्री रवनीत बिट्टू भी बतौर स्टार प्रचारक विभिन्न जिलों में रणनीतिक बैठकें कर प्रत्याशियों व कार्यकर्ताओं की मेहनत को जीत में बदलने की कोशिशों में लगे हैं। शिरोमणि अकाली दल के अध्यक्ष सुखबीर बादल ने खुद मोर्चा संभाला हुआ है। उनके साथ उपाध्यक्ष डॉ. दलजीत सिंह चीमा और बिक्रम सिंह मजीठिया को भी कई जिलों की जिम्मेदारियां सौंपी गई है। सुखबीर तो प्रत्याशियों के बुलावे पर जनसभाएं कर मतदाताओं को अकाली दल के पक्ष में करने का प्रयास कर रहे हैं। उधर, कांग्रेस के प्रदेश प्रभारी भूपेश बघेल, प्रदेशाध्यक्ष अमरिंदर सिंह राजा वड़िंग, सांसद एवं पूर्व डिप्टी सीएम सुखजिंदर सिंह रंधावा, नेता प्रतिपक्ष प्रताप सिंह बाजवा, राष्ट्रीय सचिव एवं विधायक परगट सिंह समेत अन्य विधायक और सांसद भी अपने प्रत्याशियों को जितवाने के लिए भागदौड़ कर रहे हैं। आप के मंत्रियों, विधायक की परफॉर्मेंस होगी तय निकाय चुनाव आम आदमी पार्टी के मंत्रियों व विधायकों की परफाॅर्मेंस तय करेंगे। पार्टी सूत्रों के अनुसार सभी विधायकों और मंत्रियों को उनके हलकों में स्थित निकायों को जितवाने की जिम्मेदारी दी गई है। इसी जीत या हार से पार्टी यह मालूम करना चाहती है कि उनके विधायकों व मंत्रियों की साढ़े चार साल में अपने-अपने क्षेत्रों के मतदाताओं पर कितनी पकड़ है। कुछ माह पूर्व हुए पंचायत चुनाव और अब निकाय चुनाव के परिणामों को आधार बनाकर ही आप आगामी विधानसभा चुनाव में टिकटों का बंटवारा करेगी। खराब प्रदर्शन वाले वाले विधायकों का टिकट भी कट सकता है।