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पंजाब में दर्दनाक हादसा, जालंधर-पठानकोट हाईवे पर दो कारें भिड़ीं, 4 लोगों की मौत

जालंधर. जालंधर-पठानकोट राष्ट्रीय राजमार्ग पर किशनगढ़ के पास सोमवार सुबह करीब साढ़े पांच बजे दो कारों की आमने-सामने टक्कर में चार लोगों की मौत हो गई, जबकि पांच अन्य गंभीर रूप से घायल हो गए। सड़क सुरक्षा फोर्स (एसएसएफ) के प्रभारी एएसआइ रणजीत सिंह ने बताया कि सुबह करीब साढ़े पांच बजे उन्हें सूचना मिली कि किशनगढ़ अड्डे से आगे एक ढाबे के सामने दो कारों की भीषण टक्कर हुई है, जिसमें चार लोगों की मौके पर ही मौत हो गई है और पांच लोग घायल हैं। सूचना मिलते ही एसएसएफ की टीम मौके पर पहुंची। जांच में पता चला कि पीबी-07-सीए-1510 नंबर की एक मारुति बलेनो कार भोगपुर की ओर से जालंधर जा रही थी। किशनगढ़ अड्डा पार करने के बाद कार अचानक अनियंत्रित होकर डिवाइडर पार कर दूसरी लेन में चली गई और सामने से आ रही उत्तर प्रदेश नंबर की क्रेटा से टकरा गई। टक्कर इतनी भीषण थी कि बलेनो कार में सवार चार लोगों की मौके पर ही मौत हो गई। मृतकों की पहचान रुपिंदर सिंह पुत्र सुरिंदर सिंह, निवासी होशियारपुर, हरप्रीत कौर पत्नी रुपिंदर सिंह, अर्शदीप सिंह पुत्र रुपिंदर सिंह तथा संतोष कौर के रूप में हुई है। वहीं, क्रेटा कार में सवार पांच लोग गंभीर रूप से घायल हो गए। स्थानीय लोगों ने एसएसएफ टीम के पहुंचने से पहले ही उन्हें उपचार के लिए नजदीकी निजी अस्पताल में भर्ती करा दिया। घायलों की पहचान अलीना खान पुत्री अब्दुल सईद खान, अब्दुल सईद खान, परवीन खान पुत्र अब्दुल सईद खान, अब्दुल फैसल खान पुत्री अब्दुल सईद खान तथा मैनाल खान पुत्री अब्दुल सईद खान के रूप में हुई है। सभी घायल बरेली (उत्तर प्रदेश) के निवासी हैं।

BSF की सराहनीय पहल, ओडिशा से भटके युवक को सुरक्षित परिवार तक पहुंचाया

अमृतसर. सीमा सुरक्षा बल (BSF) ने मानवता और सामाजिक जिम्मेदारी का परिचय देते हुए छह महीने से अपने परिवार से बिछड़े ओडिशा के एक युवक को खोजकर उसके परिजनों से मिलाया। मानसिक रूप से अस्वस्थ बताए जा रहे युवक बिकाश देहुरी को सुरक्षित उसके पिता और भाई के सुपुर्द किया गया। युवक को लेने के लिए उसके परिजन ओडिशा के बालासोर से अमृतसर पहुंचे। लंबे समय बाद बेटे को सुरक्षित देखकर परिवार की आंखें नम हो गईं। सीमा सुरक्षा बल की 100वीं बटालियन के अनुसार बिकाश देहुरी करीब छह महीने पहले अमृतसर रेलवे स्टेशन पर पहुंचा था। मानसिक स्थिति ठीक नहीं होने के कारण वह रेलवे स्टेशन से भटक गया। इसके बाद कुछ लोग उसे अपने साथ ले गए और वह अमृतसर के गांव मुल्लाकोट में रहने लगा। परिवार को उसके बारे में कोई जानकारी नहीं थी और वह लंबे समय से उसकी तलाश कर रहा था। BSF ने परिवार से साधा संपर्क मामले की जानकारी सीमा सुरक्षा बल की मुल्लाकोट चौकी को मिली तो जवानों ने इसे गंभीरता से लिया। युवक की पहचान स्थापित करने और उसके परिवार का पता लगाने के लिए विशेष प्रयास शुरू किए गए। जांच के दौरान सीमा सुरक्षा बल की टीम गांव मुल्लाकोट में एक ग्रामीण के घर पहुंची, जहां युवक सुरक्षित मिला। पहचान की पुष्टि होने के बाद सीमा सुरक्षा बल ने उसके परिजनों से संपर्क किया। सूचना मिलने पर युवक के पिता और भाई ओडिशा के बालासोर से अमृतसर पहुंचे। सभी आवश्यक औपचारिकताएं पूरी करने के बाद सीमा सुरक्षा बल ने युवक को उसके परिजनों के हवाले कर दिया।  BSF 100वीं बटालियन की मेहनत रंग लाई यह पूरा अभियान 100वीं बटालियन के कमांडेंट अजय कुमार तिवारी के निर्देशन में चलाया गया। अभियान का नेतृत्व सहायक कमांडेंट अमित पांडेय ने किया। उनके साथ दो अधीनस्थ अधिकारी, नौ जवान और यूनिट निरीक्षक (जी) ने भी सक्रिय भूमिका निभाई। सभी ने मिलकर युवक की पहचान, परिवार से संपर्क और सुरक्षित सुपुर्दगी की प्रक्रिया को सफल बनाया। सीमा सुरक्षा बल के निरीक्षक कुलवंत सांगरा ने बताया कि युवक की मानसिक स्थिति सामान्य नहीं थी। रेलवे स्टेशन से भटकने के बाद वह मुल्लाकोट क्षेत्र में पहुंच गया था। जैसे ही इसकी सूचना चौकी को मिली, तुरंत कार्रवाई शुरू की गई। काफी प्रयासों के बाद युवक की पहचान स्थापित की गई और उसके परिवार तक सूचना पहुंचाई गई। जरूरतमंदों की सहायता करना भी कर्तव्य उन्होंने कहा कि सीमा सुरक्षा बल केवल देश की सीमाओं की सुरक्षा ही नहीं करता, बल्कि जरूरतमंद लोगों की सहायता और सामाजिक जिम्मेदारियों का निर्वहन भी पूरी संवेदनशीलता के साथ करता है। इस अभियान ने एक बार फिर साबित किया कि समय पर की गई पहल किसी परिवार की बिछड़ी खुशियां वापस लौटा सकती है। छह महीने बाद बेटे को सुरक्षित पाकर परिवार ने सीमा सुरक्षा बल का आभार जताया और इस मानवीय प्रयास की सराहना की।

पंजाब सरकार का बड़ा फैसला, ‘मावां धीयां दा सत्कार योजना’ के लिए 13,900 करोड़ का लोन लेगी सरकार

चंडीगढ़. पंजाब सरकार द्वारा वित्तीय वर्ष 2026-27 की दूसरी तिमाही में 13,900 करोड़ रुपये का कर्ज उठाएगी। रिजर्व बैंक आफ इंडिया की ओर से 2026 की जुलाई-सितंबर तिमाही के दौरान राज्यों और केंद्र शासित प्रदेशों द्वारा मार्केट से कर्ज उठाने के लिए जारी इंडिकेटिव कैलेंडर में इसका जिक्र किया गया है। इससे पहले पंजाब ने पहली तिमाही के दौरान 9,500 करोड़ रुपये का कर्ज उठाने का प्लान बनाया था, लेकिन राज्य सरकार ने करीबन 7,800 करोड़ रुपये का ही कर्ज लिया। ध्यान रहे कि पंजाब में आने वाले विधानसभा चुनाव से पहले राज्य सरकार हर स्कीम को फाइनेंशियली बूस्ट देना चाहती है। मावां धीया सत्कार योजना 1 जुलाई से शुरू हो रही है, जिसके लिए मौजूदा फाइनेंशियल ईयर में 9,300 करोड़ रुपये का बजट रखा गया है। पंजाब में विपक्षी पार्टियों ने कर्ज के मुद्दे पर राज्य सरकार को घेरना शुरू कर दिया है और कर्ज को चुनावी मुद्दा बनाए जाने की संभावना है। दूसरी तिमाही में पंजाब सरकार उठाएगी करोड़ों का कर्ज जानकारी के मुताबिक दूसरी तिमाही में पंजाब सरकार जुलाई महीने के दौरान 5,500 करोड़ रुपये का कर्ज उठाएगी। इसी तरह, सरकार अगस्त महीने में 3,500 करोड़ रुपये और सितंबर महीने में 4,000 करोड़ रुपये का कर्ज उठाएगी। यह कर्ज मुख्य रूप से योजनागत और विकास प्रोजेक्टों के लिए कैपिटल खर्च के तौर पर उठाया जा रहा है। आरबीआइ के मुताबिक दूसरी तिमाही के दौरान देश के राज्यों और केंद्र शासित प्रदेशों द्वारा कुल 3.18 लाख करोड़ रुपये जुटाए जाने हैं, जिसमें पंजाब का हिस्सा 4.35 प्रतिशत है। आरबीआइ के मुताबिक चालू वित्तीय वर्ष की दूसरी तिमाही के दौरान पड़ोसी राज्य हरियाणा सरकार 19,000 हजार करोड़ रुपये का कर्ज उठाएगी, जबकि हिमाचल प्रदेश सरकार 2,100 करोड़ रुपये का लोन उठाएगी। ध्यान रहे कि वर्ष 2022 में पंजाब का कुल कर्ज 2.82 लाख करोड़ रुपये को पार कर गया था, जबकि 31 मार्च 2027 तक यह कर्ज 4.47 लाख करोड़ रुपये तक पहुंचने का अनुमान है। राज्य के वित्त मंत्री हरपाल सिंह चीमा शुरू से कहते आ रहे हैं कि विरासत में मिले कर्ज को चुकाने के लिए ही कर्ज लिया जा रहा है। वह फाइनेंशियल सुधारों की भी बात करते हैं। यह भी तर्क दिया जाता है कि वह तय लिमिट में ही कर्ज ले रहे हैं। मावां धीयां सत्कार योजना के अलावा पंजाब सरकार मेरी रसोई स्कीम के तहत हर घर में फ्री राशन भी भेज रही है। 15 अगस्त से सरपंचों को सैलरी मिलना शुरू होने से करीब 158 करोड़ रुपये का सालाना खर्च और बढ़ने वाला है।

चंडीगढ़ प्रशासन को मिला नया सचिव, IAS हरप्रीत सिंह सूदन की तीन साल के लिए नियुक्ति

 चंडीगढ़  केंद्र सरकार की कैबिनेट की नियुक्ति समिति (एसीसी) ने पंजाब कैडर के आईएएस अधिकारी हरप्रीत सिंह सूदन (2013 बैच) की तीन वर्ष के लिए चंडीगढ़ प्रशासन में सचिव (सुपर टाइम स्केल से नीचे) के पद पर नियुक्ति को मंजूरी दे दी है। उनकी नियुक्ति इंटर-कैडर डेप्युटेशन के तहत पंजाब कैडर से एजीएमयूटी (AGMUT) कैडर में की गई है। कार्मिक एवं प्रशिक्षण विभाग (डीओपीटी) द्वारा जारी आदेश के अनुसार गृह मंत्रालय के प्रस्ताव पर कैबिनेट की नियुक्ति समिति ने मंजूरी प्रदान की है। आदेश के तहत हरप्रीत सिंह सूदन को तीन वर्ष की अवधि के लिए चंडीगढ़ प्रशासन में सचिव के रूप में नियुक्त किया गया है। हरप्रीत सिंह सूदन वर्तमान में पंजाब सरकार में खेल निदेशक के पद पर कार्यरत हैं। अब वे पंजाब कैडर से डेप्युटेशन पर चंडीगढ़ प्रशासन में अपनी नई जिम्मेदारी संभालेंगे। प्रशासनिक हलकों में इस नियुक्ति को महत्वपूर्ण माना जा रहा है। चंडीगढ़ प्रशासन में सचिव स्तर पर उनकी नियुक्ति से विभिन्न विभागों के प्रशासनिक कार्यों को गति मिलने की उम्मीद जताई जा रही है। डीओपीटी ने नियुक्ति संबंधी आदेश गृह मंत्रालय, पंजाब सरकार तथा संबंधित अधिकारियों को भी भेज दिए हैं।

गर्मी बढ़ते ही पंजाब में बिजली की रिकॉर्ड डिमांड, 16 हजार मेगावाट तक पहुंची खपत

पटियाला. पंजाब में भीषण गर्मी और धान की रोपाई के चरम सीजन ने बिजली व्यवस्था पर भारी दबाव डाल दिया है। सोमवार को राज्य में बिजली की अधिकतम मांग नया रिकॉर्ड बनाते हुए 16,130 मेगावाट तक पहुंच गई। बढ़ती मांग को पूरा करने के लिए पंजाब स्टेट पावर कॉरपोरेशन लिमिटेड को केंद्रीय पूल से निर्धारित सीमा से अधिक बिजली लेनी पड़ रही है। इसके बावजूद कई इलाकों में किसानों और घरेलू उपभोक्ताओं को पर्याप्त बिजली नहीं मिल पा रही है। बिजली विभाग के अनुसार सोमवार दोपहर करीब 12 बजे राज्य में बिजली की मांग 16,130 मेगावाट दर्ज की गई। यह इस सीजन की अब तक की सबसे अधिक मांग है। बढ़ते तापमान और धान की फसल के लिए लगातार सिंचाई की जरूरत के कारण बिजली की खपत तेजी से बढ़ी है। बाहरी ग्रिड से मांगी गई सप्लाई जानकारी के अनुसार पंजाब की निर्धारित ड्रॉअल सीमा 10,350 मेगावाट है, जबकि राज्य वर्तमान में लगभग 10,605 मेगावाट बिजली बाहरी ग्रिड से प्राप्त कर रहा है। इसके अलावा राज्य के विभिन्न बिजली संयंत्रों और अन्य स्रोतों से करीब 5,361 मेगावाट बिजली का उत्पादन किया जा रहा है। इसके बावजूद मांग और आपूर्ति के बीच अंतर बना हुआ है। राज्य के ताप बिजलीघरों में लहरा मोहब्बत संयंत्र से लगभग 556 मेगावाट, गोइंदवाल संयंत्र से 490 मेगावाट, रोपड़ ताप बिजलीघर से 520 मेगावाट, राजपुरा ताप बिजलीघर से 1,326 मेगावाट तथा तलवंडी साबो संयंत्र से 1,581 मेगावाट बिजली का उत्पादन हो रहा है। वहीं, जलविद्युत परियोजनाओं से लगभग 440 मेगावाट बिजली मिल रही है। ऊंची कीमतों पर खरीदनी पड़ रही बिजली बिजली विभाग के सामने सबसे बड़ी चुनौती यह है कि बढ़ती मांग और कुछ उत्पादन इकाइयों के प्रभावित होने के कारण अतिरिक्त बिजली बिजली एक्सचेंज से ऊंची कीमतों पर खरीदनी पड़ रही है। इससे बिजली आपूर्ति व्यवस्था पर आर्थिक दबाव भी बढ़ गया है। इसका सबसे अधिक असर किसानों पर दिखाई दे रहा है। धान की फसल के लिए इस समय नियमित सिंचाई जरूरी है, लेकिन कई क्षेत्रों में पिछले कुछ दिनों से पर्याप्त बिजली नहीं मिलने के कारण किसान परेशान हैं। कई स्थानों पर किसानों ने बिजली ग्रिडों के बाहर धरना-प्रदर्शन शुरू कर दिया है और सरकार से निर्बाध बिजली आपूर्ति सुनिश्चित करने की मांग की है। शहरों में भी बार-बार हो रही बिजली कटौती बिजली संकट का असर केवल खेती तक सीमित नहीं है। कई शहरों और कस्बों में घरेलू उपभोक्ताओं को भी बार-बार बिजली कटौती और अनियमित आपूर्ति का सामना करना पड़ रहा है। भीषण गर्मी के बीच लंबे बिजली कट लोगों की परेशानी बढ़ा रहे हैं। घरों में पेयजल आपूर्ति, कूलर और अन्य आवश्यक उपकरण भी प्रभावित हो रहे हैं।

चंडीगढ़ को मिले नए सचिव, IAS हरप्रीत सिंह सूदन की 3 साल के लिए नियुक्ति

चंडीगढ़. केंद्र सरकार की कैबिनेट की नियुक्ति समिति (एसीसी) ने पंजाब कैडर के आईएएस अधिकारी हरप्रीत सिंह सूदन (2013 बैच) की तीन वर्ष के लिए चंडीगढ़ प्रशासन में सचिव (सुपर टाइम स्केल से नीचे) के पद पर नियुक्ति को मंजूरी दे दी है। उनकी नियुक्ति इंटर-कैडर डेप्युटेशन के तहत पंजाब कैडर से एजीएमयूटी (AGMUT) कैडर में की गई है। कार्मिक एवं प्रशिक्षण विभाग (डीओपीटी) द्वारा जारी आदेश के अनुसार गृह मंत्रालय के प्रस्ताव पर कैबिनेट की नियुक्ति समिति ने मंजूरी प्रदान की है। आदेश के तहत हरप्रीत सिंह सूदन को तीन वर्ष की अवधि के लिए चंडीगढ़ प्रशासन में सचिव के रूप में नियुक्त किया गया है। हरप्रीत सिंह सूदन वर्तमान में पंजाब सरकार में खेल निदेशक के पद पर कार्यरत हैं। अब वे पंजाब कैडर से डेप्युटेशन पर चंडीगढ़ प्रशासन में अपनी नई जिम्मेदारी संभालेंगे। प्रशासनिक हलकों में इस नियुक्ति को महत्वपूर्ण माना जा रहा है। चंडीगढ़ प्रशासन में सचिव स्तर पर उनकी नियुक्ति से विभिन्न विभागों के प्रशासनिक कार्यों को गति मिलने की उम्मीद जताई जा रही है। डीओपीटी ने नियुक्ति संबंधी आदेश गृह मंत्रालय, पंजाब सरकार तथा संबंधित अधिकारियों को भी भेज दिए हैं।

अकाल तख्त के समक्ष बेअदबी कानून पर सुनवाई, नंगे पैर पहुंचे पंजाब सरकार के मंत्री और विधायक

अमृतसर. पंजाब सरकार की ओर से पारित जागत ज्योत श्री गुरु ग्रंथ साहिब सत्कार (संशोधन) एक्ट-2026 को लेकर सोमवार को श्री अकाल तख्त साहिब में अहम धार्मिक सुनवाई शुरू हुई। अकाल तख्त के आदेश के बाद पंजाब सरकार के सभी सिख मंत्री और विधायक नंगे पैर श्री अकाल तख्त साहिब पहुंचे और पांच सिंह साहिबानों के समक्ष पेश हुए। सभी मंत्री और विधायक अपने साथ लिखित स्पष्टीकरण भी लेकर पहुंचे, जिसे सुनवाई के दौरान प्रस्तुत किया गया। इस दौरान केवल सत्तारूढ़ आम आदमी पार्टी के मंत्री और विधायक ही नहीं, बल्कि कांग्रेस, शिरोमणि अकाली दल तथा निर्दलीय विधायक भी श्री अकाल तख्त साहिब पहुंचे। पूरे घटनाक्रम पर धार्मिक और राजनीतिक दोनों वर्गों की नजर बनी हुई है। तख्तों के जत्थेदार करेंगे सुनवाई सुनवाई शुरू होने से पहले श्री अकाल तख्त साहिब सचिवालय में गुरु साहिब की हजूरी में अरदास की गई। इसके बाद पांच सिंह साहिबानों ने बेअदबी कानून में किए गए संशोधन को लेकर विचार-विमर्श की प्रक्रिया शुरू की। धार्मिक मर्यादा के अनुसार सभी आवश्यक धार्मिक परंपराओं का पालन किया गया। अरदास में श्री अकाल तख्त साहिब के कार्यकारी जत्थेदार एवं तख्त श्री केसगढ़ साहिब के जत्थेदार ज्ञानी कुलदीप सिंह गड़गज, श्री हरिमंदिर साहिब के ग्रंथी ज्ञानी बलजीत सिंह, ज्ञानी केवल सिंह, तख्त श्री दमदमा साहिब के जत्थेदार ज्ञानी टेक सिंह तथा श्री अकाल तख्त साहिब के पांच प्यारों में से ज्ञानी मंगल सिंह उपस्थित रहे। सभी पक्षों की बात सुन कर होगा विचार सुनवाई से पहले मीडिया से बातचीत करते हुए ज्ञानी कुलदीप सिंह गड़गज ने कहा कि लंबे समय से खालसा पंथ की सहमति लिए बिना और सिख संस्थाओं को दरकिनार करते हुए वर्ष 2008 के कानून में संशोधन किया गया है। उनका कहना था कि इस संशोधन के बाद गुरु और सिख के बीच सरकार कानून के माध्यम से आ गई है। उन्होंने आरोप लगाया कि सरकार ने सिख धर्म के धार्मिक मामलों और श्री अकाल तख्त साहिब की परंपरागत अधिकारिता में हस्तक्षेप किया है। ज्ञानी कुलदीप सिंह गड़गज ने कहा कि इसी विषय पर स्पष्टीकरण प्राप्त करने के लिए पंजाब सरकार के सिख मंत्रियों और विधायकों को श्री अकाल तख्त साहिब में बुलाया गया है। पांच सिंह साहिबान अब सभी पक्षों की बात सुनकर इस पूरे मामले पर विचार करेंगे। एक्ट पास होने के बाद उठे सवाल उल्लेखनीय है कि पंजाब सरकार द्वारा पारित जागत ज्योत श्री गुरु ग्रंथ साहिब सत्कार (संशोधन) एक्ट-2026 को लेकर धार्मिक संगठनों और सिख समुदाय के एक वर्ग की ओर से लगातार सवाल उठाए जा रहे हैं। इसी क्रम में श्री अकाल तख्त साहिब ने इस मामले को अपने संज्ञान में लेते हुए संबंधित जनप्रतिनिधियों को तलब किया है। अब सभी की नजर इस बात पर टिकी है कि पांच सिंह साहिबान सुनवाई के बाद इस संवेदनशील धार्मिक मुद्दे पर क्या फैसला या अगला निर्देश जारी करते हैं।

पाकिस्तान से जुड़े जासूसी नेटवर्क पर कार्रवाई, पंजाब में 5 आरोपी गिरफ्तार, 15 संदिग्धों पर नजर

जालंधर. पाकिस्तान के लिए जासूसी करने के आरोप में गिरफ्तार तीन युवकों से पूछताछ और काल डिटेल रिकार्ड तथा डिजिटल गतिविधियों की पड़ताल कर पुलिस ने 15 से अधिक ऐसे लोगों को चिन्हित किया है, जो पिछले कुछ समय से आरोपितों के लगातार संपर्क में थे। इनमें आरोपितों के रिश्तेदार, करीबी परिचित और अन्य संदिग्ध शामिल हैं। संदिग्धों की पहचान अभी सार्वजनिक नहीं की गई है, लेकिन उनकी तलाश में पंजाब के विभिन्न जिलों और अन्य राज्यों में छापेमारी की जा रही है। जांच एजेंसियां यह पता लगाने में जुटी हैं कि इन लोगों का जासूसी नेटवर्क से कोई संबंध था या नहीं। इसी कड़ी में पांच लोगों को पूछताछ के लिए हिरासत में लिया गया है, हालांकि पुलिस अधिकारियों ने इसकी आधिकारिक पुष्टि नहीं की है। फिलहाल हिरासत में लिए गए आरोपितों के मोबाइल से कई महत्वपूर्ण जानकारियां भी मिली हैं। पुलिस आरोपितों के बैंक खातों, डिजिटल ट्रांजेक्शन और विदेशी नंबरों से संपर्क की भी जांच कर रही है। यदि किसी बड़े नेटवर्क की पुष्टि होती है, तो और गिरफ्तारियां संभव हैं। बता दें कि हाल ही में गिरफ्तार किए गए आरोपितों में सचिन खोसला, भारत वर्मा उर्फ सन्नी और प्रदीप सिंह शामिल हैं, जो पाकिस्तान में गैंग्सटर शहजाद भट्टी और हमास गुज्जर के संपर्क में थे। आरोपित सरकारी कार्यालयों और संवेदनशील स्थानों से सूचनाएं जुटाकर पाकिस्तान भेज रहे थे। पुलिस ने उनके मोबाइल फोन और डिजिटल उपकरण जब्त कर लिए हैं।

सुखना झील मानसून के लिए तैयार, गाद हटाने का काम पूरा, पर्यटकों को मिलेगा बेहतर अनुभव

चंडीगढ़. सुखना झील की जल भंडारण क्षमता बढ़ाने और पारिस्थितिकी तंत्र को मजबूत करने यूटी इंजीनियरिंग विभाग ने रेगुलेटरी एंड पर चल रहे डी-सिल्टिंग (गाद हटाने) अभियान के तहत करीब 34 हजार घनमीटर मिट्टी की खुदाई का लक्ष्य पूरा कर लिया है। हालांकि मानसून आने तक यह कार्य जारी रहेगा। मुख्य अभियंता सीबी ओझा ने बताया कि डी-सिल्टिंग परियोजना का लगभग 80 प्रतिशत कार्य पूरा हो चुका है। आईआईटी रुड़की, डब्ल्यूडब्ल्यूएफ और वन विभाग की तकनीकी सिफारिशों के आधार पर एक माह पहले झील के सूखे हिस्से में गाद हटाने का कार्य शुरू किया गया था। उन्होंने बताया कि रेगुलेटरी एंड पर लगभग 351 मीटर स्तर तक खुदाई की जा रही है। निकाली गई मिट्टी का वैज्ञानिक तरीके से उपयोग झील के किनारों (तटबंधों) और पैदल मार्गों को मजबूत एवं ऊंचा करने में किया जा रहा है। कार्य को समयबद्ध ढंग से पूरा करने के लिए हुआ ये काम कार्य को समयबद्ध ढंग से पूरा करने के लिए चार चेन-माउंटेड एक्सकेवेटर, जेसीबी मशीनें और टिप्परों का बेड़ा लगाया गया है। विभाग का मानना है कि डी-सिल्टिंग और तटबंधों को मजबूत करने से झील की जलधारण क्षमता बढ़ेगी, पारिस्थितिकी तंत्र को मजबूती मिलेगी और पर्यटकों के लिए भी सुविधाएं बेहतर होंगी। सुखना झील में अंतिम बार डी-सिल्टिंग का कार्य चार वर्ष से अधिक समय पहले किया गया था। गर्मियों में सबसे पहले रेगुलेटरी एंड का हिस्सा सूखता है, जिससे इस क्षेत्र में गाद हटाने का कार्य संभव हो पाता है। गौरतलब है कि गाद जमने से झील की जल भंडारण क्षमता लगातार प्रभावित हो रही है। इसी चुनौती से निपटने के लिए यूटी प्रशासन ने पिछले वर्ष डब्ल्यूडब्ल्यूएफ के सहयोग से सुखना झील के समग्र विकास के लिए पांच वर्षीय एकीकृत प्रबंधन योजना (इंटीग्रेटेड मैनेजमेंट प्लान) तैयार की थी। इस योजना में जल स्तर बनाए रखने, जलीय जीवों के संरक्षण, झील की स्वच्छता, पर्यटकों के लिए सुविधाओं का विस्तार तथा सौर ऊर्जा चालित नौकाओं की संख्या बढ़ाने जैसे प्रावधान शामिल हैं। करीब 565 एकड़ क्षेत्र में फैली सुखना वेटलैंड का कैचमेंट एरिया लगभग 10,395 एकड़ है। वर्ष 1988 में केंद्र सरकार ने इसे राष्ट्रीय वेटलैंड घोषित किया था। इसके कैचमेंट क्षेत्र में सुखना वन्यजीव अभयारण्य भी स्थित है। यदि चाहें तो इसे और संक्षिप्त कर फ्रंट पेज या सिटी पेज की अखबारी शैली में भी तैयार किया जा सकता है।

भगवंत मान की श्री अकाल तख्त साहिब में पेशी क्यों? जानिए क्या है अकाल तख्त और इसके प्रमुख अधिकार

चंडीगढ़  पंजाब के सीएम भगवंत मान श्री अकाल तख्त साहिब के सामने आज अपना पक्ष रखेंगे. वह पंजाब सरकार के सभी मंत्रियों, विधायकों और विधानसभा अध्यक्ष के साथ जाएंगे. मान एक वीडियो को लेकर विवाद पर हैं. उन पर गुरु द्रोही औ पंथ विरोधी होने के आरोप हैं. इसके अलावा पंजाब सरकार के ईशनिंदा से जुड़े एक अधिनियम को भी पंथ की सलाह के बिना पारित किए जाने से नाराजगी है।  अकाल तख्त के सामने भगवंत मान इससे पहले भी पेश हो चुके हैं, जब उन्होंने वीडियो को फर्जी बताया था. उन्होंने दावा किया था कि वीडियो को आर्टिफिशियल इंटेलीजेंस से बनाया गया है. हालांकि मामले की सुनवाई के बाद अकाल तख्त के जत्थेदार कुलदीप सिंह गरगज ने 15 जून को एक आदेश जारी करते हुए मान को गुरुद्रोही और खालसा पंथ का विरोधी घोषित किया था. ऐसा दावा किया गया है कि फोरेंसिक जांच में वीडियो सही पाया गया है. इसीलिए पंजाब सरकार के सभी मंत्रियों विधायकों को अकाल तख्त के सामने पेश होकर अपना पक्ष रखने को कहा गया है।  श्री अकाल तख्त साहिब क्या है? श्री अकाल तख्त साहिब सिख धर्म की सर्वोच्च संस्था है.सरल शब्दों में कहें तो यह सिख समुदाय की सर्वोच्च धार्मिक और नैतिक अदालत है. यह अमृतसर स्थित स्वर्ण मंदिर परिसर में है और सिखों के पांच तख्तों में सबसे प्रमुख मानी जाती है. इसका अर्थ है अकाल का सिंहासन, जिसका उद्देश्य सिर्फ आध्यात्मिक मार्गदर्शन तक सीमित नहीं है, यह समाज, न्याय और समुदाय से जुड़े मामलों में भी फैसला सुनाता है।  सिख नेट के मुताबिक जब गुरु हरगोबिंद के पिता और पांचवें सिख गुरु अर्जन देव को मुगल सम्राट जहांगीर ने शहीद करवाया तो उसके जवाब में गुरु हरगोबिंद ने इसकी स्थापना की थी. जब उन्होंने अकाल तख्त के मंच का अनावरण किया था तो उन्होंने दो तलवारें धारण की थीं. इनमें एक आध्यात्मिक शक्ति पीरी का संकेत देती थी ओर दूसरी सांसारिक शक्ति मीरी का. यह पीरी और मीरी दर्शन ही अकाल तख्त की आत्मा है. जो ये विचार देता है कि धर्म और न्याय अलग नहीं हैं. यानी एक हाथ में आस्था और दूसरे में अत्याचार के विरुद्ध खड़े होने की शक्ति।  क्या करता है अकाल तख्त?     अकाल तख्त हुक्मनामा यानी धार्मिक आदेश जारी करता है. यह हुक्मनामा दुनिया भर के सिखों पर लागू होता है।      अकाल तख्त सिख हितों के लिए गलत बात करने वाला या हानिकारक कदम उठाने वाले को धार्मिक दंड दे सकती है।      तख्त किसी भी व्यक्ति की सेवा या उसके बलिदानों की सराहना भी कर सकता है जो सिख हितों के लिए काम करते हैं।      यह सिख समुदाय से जुड़े विवादों और महत्वपूर्ण मामलों पर मार्गदर्शन भी देता है।  जत्थेदार होता है अकाल तख्त का मुखिया अकाल तख्त का प्रमुख जत्थेदार ही उसका मुखिया होता है. जत्थेदार को ही दुनिया भर के सिखों का सर्वोच्च प्रवक्ता और प्रमुख माना जाता है. यह एक धार्मिक नेता की तरह होते हैं जिनसे अपेक्षा की जाती है कि वे किसी भी राजनीतिक दबाव से मुक्त रहें. वर्तमान में कुलदीप सिंह गरगज कार्यवाहक जत्थेदार हैं.इनकी नियुक्त शिरोमणि गुरुद्वारा प्रबंधक कमेटी की ओर से 2025 में की गई थी. हालांकि तकनीकी तौर पर अकाल तख्त एक स्वतंत्र धार्मिक संस्था है।  अकाल तख्त के सामने बुलाए जाने का अर्थ क्या? श्री अकाल तख्त साहिब के जत्थेदार अगर किसी को पेश होने का आदेश देते हैं तो यह एक तरह का धार्मिक समन है. जो आरेापी व्यक्ति को अपना पक्ष रखने का मौका देता है. जो भी व्यक्ति इसकी अनदेखी करता है वह सिख समुदाय की नजर में अपनी विश्वसनीयता खो देता है. आरोपी अगर पेश होता है तो उसका पक्ष सुनकर अकाल तख्त फैसला करता है कि उसे क्लीनचिट देनी है या फिर प्रायश्चित का आदेश देना है. इसे तनखाह कहा जाता है. यह धार्मिक दंड है. आम तौर पर तनखाह में सेवा कार्य, सार्वजनिक माफी की सजा दी जाती है।  सुखबीर सिंह बादल को मिला था धार्मिक दंड श्री अकाल तख्त साहिब ने 2024 में पंजाब के पूर्व उप मुख्यमंत्री सुखबीर सिंह बादल को तनखैया घोषित किया था. उन्हें तनखाह यानी धार्मिक सजा सुनाई गई थी. उन पर आरोप था कि 2007 से 2027 तक पंजाब की शिरोमणि अकाली दल सरकार में कुछ ऐसे फेसले हुए जिनसे पंथक हितों को नुकसान पहुंचा है. इसमें बेअदबी का माला भी शामिल था. सुखबीर सिंह बादल ने अपनी गलतियों के लिए बिना शर्त माफी मांगी थी. इसके बाद उने तनखाह सुनाई गई थी. उन्हें स्वर्ण मंदिर के बाद सेवादार की वर्दी पहनकर सेवा करनी पड़ी थी।  अकाल तख्त सबसे ऊपर क्यों? सिखों के पांच तख्त हैं. तख्त का अर्थ सिंहासन या सत्ता का आसन होता है. यह सिख धर्म का आध्यात्मिक और सांसारिक केंद्र है. पहला केंद्र श्री अकाल तख्त साहिब है, जो अमृतसर में है. दूसरा तख्त श्री केशगढ़ साहिब है जो आनंदपुर साहिब में है. तीसरा तख्त श्री दमदमा साहिब (तलवंडी साबो) और चौथा तख्त श्री पटना साहिब तथा पांचवां तख्त श्री हजूर साहिब नांदेड़ में है. अकाल तख्त सर्वोच्च इसलिए है, क्योंकि ये पहला तख्त है।