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फर्जी प्रमाण पत्रों पर लगेगी रोक, बिहार सरकार ने आवेदन के साथ सभी दस्तावेज ऑनलाइन अपलोड करना किया जरूरी

पटना  बिहार सरकार ने जाति, आय और निवास प्रमाण पत्र बनाने के नियमों को बदल दिया है. अब आवेदन करते समय सभी जरूरी दस्तावेज ऑनलाइन अपलोड करना अनिवार्य होगा. अगर कोई व्यक्ति बिना जरूरी कागजात के आवेदन करता है, तो उसका आवेदन खारिज कर दिया जाएगा. इस नए नियम का मकसद फर्जी प्रमाण पत्र बनाने पर रोक लगाना और प्रक्रिया को पारदर्शी बनाना है. नए नियम के तहत निवास प्रमाण पत्र के लिए अब सिर्फ पहचान पत्र देना काफी नहीं होगा. आवेदक को अपने पते से जुड़ा कोई वैध दस्तावेज या जमीन से संबंधित कागज भी देना होगा. यानी अब यह साबित करना जरूरी होगा कि आप वास्तव में उसी जगह के निवासी हैं. क्या- क्या अनिवार्य आय प्रमाण पत्र बनवाने के लिए भी नियम बदल दिया गया है. पहचान पत्र के साथ-साथ आय से जुड़े सैलरी स्लिप, आय प्रमाण या अन्य संबंधित डॉक्यूमेंट देने होंगे. इससे गलत जानकारी देकर आय प्रमाण पत्र बनवाने पर रोक लगेगी. जाति प्रमाण पत्र के लिए भी अब नया नियम लागू किया गया है. इसमें पहचान पत्र के साथ जमीन का खतियान देना अनिवार्य कर दिया गया है. अगर जमीन आवेदक के नाम पर नहीं है और पिता, दादा या परिवार के किसी अन्य सदस्य के नाम पर है, तो उस स्थिति में वंशावली देना जरूरी होगा. इससे यह पता चलेगा कि आवेदक का उस परिवार से क्या संबंध है. कम होगा फर्जीवाड़ा सरकार ने खतियान, दान पत्र, जमीन के अन्य कागजात और भूमिहीनों को मिली जमीन के दस्तावेज को भी मान्य माना है. यानी अलग-अलग तरह के राजस्व रिकॉर्ड अब आवेदन के लिए स्वीकार किए जाएंगे. हालांकि जिन लोगों के पास जमीन या इससे जुड़े कागजात नहीं हैं, उनके लिए भी व्यवस्था रखी गई है. ऐसे आवेदक आवेदन के समय जगह निरीक्षण का विकल्प चुन सकते हैं. इसके बाद राजस्व कर्मी मौके पर जाकर जांच करेंगे और सही पाए जाने पर ही प्रमाण पत्र जारी किया जाएगा. सरकार के इस फैसले से अब प्रमाण पत्र बनवाने की प्रक्रिया थोड़ी सख्त जरूर हो गई है. इससे फर्जीवाड़ा कम होगा और सही लोगों को ही इसका लाभ मिलेगा.

नीतीश कुमार 11 अप्रैल को दिल्ली में प्रधानमंत्री मोदी से करेंगे मुलाकात और बिहार में नई सरकार के गठन पर होगी चर्चा

पटना बिहार के मुख्यमंत्री नीतीश कुमार अब बस चंद दिनों तक ही सीएम रहेंगे. नई सरकार की सुगबुगाहट प्रदेश में तेज हो गई है. एक तरफ नीतीश कुमार राज्यसभा की शपथ लेंगे तो दूसरी ओर बिहार को नया मुख्यमंत्री मिलेगा. कौन होगा इसकी तस्वीर साफ नहीं हुई है लेकिन कुछ ही दिनों में सब कुछ सामने होगा. खबर है कि नीतीश कुमार 09 अप्रैल को दिल्ली के रवाना होंगे. वहीं 10 अप्रैल को राज्यसभा सदस्य के तौर पर वे शपथ लेंगे. 11 अप्रैल को पीएम मोदी से दिल्ली में बिहार में बनने वाली नई सरकार पर चर्चा के लिए मुलाकात हो सकती है. इसके बाद नीतीश कुमार 11 अप्रैल की शाम या फिर 12 अप्रैल को पटना लौट आएंगे. 13 अप्रैल को हो सकती है पटना में बैठक सूत्रों की मानें तो बिहार में बनने वाली नई सरकार पर रायशुमारी, चर्चा के लिए 13 अप्रैल को पटना में एनडीए की बैठक हो सकती है. 14 अप्रैल को खरमास समाप्त होने के बाद नीतीश मुख्यमंत्री पद से इस्तीफा दे सकते हैं. इसके बाद एनडीए विधानमंडल की बैठक बुलायी जाएगी जिसमें नेता चुना जाएगा. 18 अप्रैल के आसपास बिहार में नई सरकार का गठन हो सकता है. इस तारीख से अगर देखें तो अब नीतीश कुमार कुछ ही दिनों तक मुख्यमंत्री बने रहेंगे. प्रदेश के कामकाज को नहीं छोड़ रहे नीतीश बता दें कि एक तरफ जहां नई सरकार की तैयारी हो रही है और नीतीश कुमार को सीएम पद छोड़ना है इन सबके बीच वे प्रदेश के विकास कार्यों को पूरा करने में जुटे हैं. गुरुवार (02 अप्रैल, 2026) को नीतीश कुमार ने शहर की विभिन्न निर्माणाधीन योजनाओं का निरीक्षण किया. वे पाटलिपुत्रा कॉलोनी में निर्माणाधीन पार्क नंबर 113 का निरीक्षण करने पहुंचे. यहां लोगों के घूमने-फिरने, जिम, बच्चों के खेल-कूद की सुविधाएं सहित अन्य व्यवस्थाओं की जानकारी ली. इसके बाद पाटलि पथ पर रूककर नेहरू पथ को पाटलिपथ से जोड़ने के लिए किए जा रहे निर्माण कार्य के संबंध में जानकारी ली. रूपसपुर नहर के समीप रूककर खगौल नेहरू पथ-अशोक राजपथ को जोड़नेवाले रूपसपुर नहर पथ के प्रस्तावित फोरलेन चौड़ीकरण कार्य एवं मजबूतीकरण कार्य के संबंध में जानकारी ली. सगुना मोड़ के पास रूककर रूपसपुर नहर से सगुना मोड़ तक नेहरू पथ के दोनों तरफ भूमिगत नाला के साथ पथ के चौड़ीकरण के संबंध में जानकारी ली.  

ट्रेन फूड से परेशानी: वंदे भारत में सफर के दौरान मां-बेटे की हालत खराब

रांची. प्रीमियम ट्रेनों में बेहतर सुविधा और गुणवत्ता के दावों के बीच वंदे भारत एक्सप्रेस के खाने को लेकर एक गंभीर मामला सामने आया है। Vande Bharat Express में यात्रा कर रही रांची की एक महिला यात्री ने आरोप लगाया है कि ट्रेन में परोसे गए भोजन के बाद उन्हें तेज एलर्जी हो गई, जबकि उनके दो वर्षीय बच्चे को भी दस्त की शिकायत हो गई। प्राप्त जानकारी के अनुसार, रांची निवासी आयुषी सिंह 27 मार्च को ट्रेन संख्या 22500 (वाराणसी–देवघर वंदे भारत एक्सप्रेस) के कोच E1 में यात्रा कर रही थीं। उन्होंने सोशल मीडिया पर पोस्ट कर बताया कि यात्रा के दौरान भोजन करने के बाद उनकी तबीयत अचानक बिगड़ गई और उन्हें गंभीर एलर्जी की समस्या हो गई। साथ ही, उनके बच्चे की भी तबीयत खराब हो गई। भोजन की गुणवत्ता पर उठाए सवाल महिला यात्री ने अपनी शिकायत में ट्रेन के भोजन की गुणवत्ता और स्वच्छता पर सवाल उठाते हुए इसे गंभीर मामला बताया है। उन्होंने यह भी आरोप लगाया कि शिकायत के बावजूद ट्रेन स्टाफ का रवैया संवेदनशील नहीं था। आयुषी ने अपने दावे के समर्थन में अस्पताल की पर्ची और कुछ तस्वीरें भी साझा की हैं। बताया गया है कि फिलहाल उनका इलाज रांची के मां राम प्यारी सुपर स्पेशलिटी हॉस्पिटल में चल रहा है। यात्री ने यह भी कहा कि ट्रेन में दिया गया पानी का स्वाद असामान्य था, जिससे उन्हें स्वच्छता को लेकर और संदेह हुआ। क्या बोला IRCTC? इस पूरे मामले पर आईआरसीटीसी की ओर से प्रतिक्रिया भी सामने आई है। आईआरसीटीसी ने बयान जारी कर कहा कि 27 मार्च को ट्रेन संख्या 22500 (वाराणसी-देवघर वंदे भारत एक्सप्रेस) में परोसे गए लंच की जांच की गई थी और वह संतोषजनक पाया गया। वहीं, आरसीटीसी रांची के संयुक्त महाप्रबंधक एस.जे सोरेंग ने स्पष्ट किया कि यह ट्रेन वाराणसी-देवघर रूट की है, इसलिए इस मामले में संबंधित रूट के अधिकारी ही विस्तृत जानकारी दे सकेंगे। इस घटना के बाद एक बार फिर ट्रेनों में परोसे जाने वाले भोजन की गुणवत्ता और निगरानी व्यवस्था पर सवाल खड़े हो गए हैं। यात्रियों ने भी इंटरनेट मीडिया पर इस मुद्दे को गंभीरता से उठाते हुए रेलवे से सख्त कार्रवाई और बेहतर निगरानी की मांग की है।

शिक्षा व्यवस्था में बदलाव की गाज और बेरोजगार हुए इंटर शिक्षकों के भविष्य पर संकट, समायोजन का सरकारी वादा अब भी अधूरा

जमशेदपुर झारखंड के डिग्री कॉलेजों में इंटर की पढ़ाई अब पूरी तरह बंद कर दी गई है। 31 मार्च को सभी कॉलेजों में इंटर के शिक्षकों का आखिरी कार्यदिवस रहा। इसके बाद उन्हें कॉलेज नहीं आने को कह दिया गया है। सभी शिक्षकों की सेवा को तत्काल प्रभाव से समाप्त कर दिया गया है। शिक्षकों के साथ साथ इंटर सेक्शन के शिक्षकेतर कर्मचारियों को भी अल्टीमेटम दे दिया गया है। उन्हें जून के बाद काम से हटा दिया जाएगा। इस घटनाक्रम के बाद राज्य की शिक्षा व्यवस्था के साथ हजारों शिक्षकों के चूल्हे पर संकट के बादल मंडरा रहे हैं। 31 मार्च की वह तारीख, जो अक्सर वित्तीय वर्ष के समापन और नई शुरुआत का प्रतीक होती है, इस बार झारखंड के अंगीभूत महाविद्यालयों में कार्यरत पांच हजार से अधिक शिक्षकों और कर्मचारियों के लिए ब्लैक डे साबित हुआ है। नई शिक्षा नीति का अनुपालन नई शिक्षा नीति के अनुपालन और राज्य सरकार के कड़े रुख के बीच डिग्री कॉलेजों में इंटरमीडिएट की पढ़ाई पर स्थायी रूप से पूर्ण विराम लग गया है। इस फैसले ने न केवल कॉलेजों के बड़े शैक्षणिक ढांचे को ध्वस्त कर दिया है, बल्कि उन संविदा शिक्षकों के भविष्य को भी अधर में लटका दिया है, जिन्होंने अपने जीवन के दो-तीन दशक इन्हीं कक्षाओं में छात्रों का भविष्य संवारने में खपा दिए। आज स्थिति यह है कि इन शिक्षकों के पास न नौकरी बची है और न ही आने वाले कल की कोई स्पष्ट उम्मीद। ईएमआई भरने का कोई जरिया नहीं बचा कॉलेजों में इंटरमीडिएट सेक्शन के बंद होने का असर इतना व्यापक है कि इसने एक साथ हजारों घरों की आर्थिक रीढ़ तोड़ दी है। वे शिक्षक, जो कल तक गौरव के साथ कक्षाओं में व्याख्यान देते थे, आज इन शिक्षकों की माली हालत इस कदर खराब हो चुकी है कि घर का राशन जुटाना, बच्चों की स्कूल फीस भरना और बुजुर्ग माता-पिता की दवाइयों का खर्च उठाना बड़ी चुनौती बन गया है। कई शिक्षकों ने जमा-पूंजी घर बनाने या बच्चों की उच्च शिक्षा के लिए कर्ज लेने में लगा दी थी, लेकिन अब उनके सामने बैंक की ईएमआई भरने का कोई जरिया नहीं बचा है। स्कूलों में समायोजित करने का आश्वासन सरकार की ओर से पिछले दिनों बार-बार यह आश्वासन दिया गया था कि डिग्री कॉलेजों से इंटरमीडिएट की पढ़ाई हटने की स्थिति में इन अनुभवी शिक्षकों और कर्मचारियों को सरकारी प्लस टू (उच्च माध्यमिक) स्कूलों में समायोजित किया जाएगा। शिक्षा विभाग के गलियारों में इस नीति को लेकर कई बार चर्चाएं हुईं और मंत्रियों द्वारा सार्वजनिक मंचों से यह घोषणा भी की गई कि किसी भी कर्मचारी को सड़क पर नहीं आने दिया जाएगा। लेकिन 31 मार्च की समय सीमा बीतने के बाद भी समायोजन की वह फाइल कहीं दबी हुई है। आश्वासन की जिस घुट्टी के सहारे ये शिक्षक अबतक काम कर रहे थे, वह अब कड़वी हकीकत में बदल चुकी है। शिक्षक-कर्मचारी खाली हाथ इस पूरे घटनाक्रम के बीच बड़ा सवाल महाविद्यालयों के इंटरमीडिएट सेक्शन के बैंक खातों में जमा करोड़ों रुपये को लेकर भी उठ रहे हैं। झारखंड अंगीभूत महाविद्यालय इंटरमीडिएट शिक्षक संघ ने इस मुद्दे पर सरकार और विश्वविद्यालय प्रशासन को घेरना शुरू कर दिया है। आंकड़ों के मुताबिक, कोल्हान भर के कॉलेजों के इंटर सेक्शन के खातों में छात्रों के नामांकन और अन्य शुल्कों से जमा करोड़ों की आंतरिक राशि मौजूद है। संघ का स्पष्ट कहना है कि जब यह पैसा इन्हीं शिक्षकों और कर्मचारियों की मेहनत और छात्रों के माध्यम से जमा हुआ है तो इसे केवल बैंक खातों में सड़ाने या किसी और मद में खर्च करने के बजाय उन शिक्षकों को सम्मानजनक विदाई राशि के रूप में क्यों नहीं दिया जा रहा है, जो आज दाने-दाने को मोहताज हैं। समायोजन का सरकार का वादा अब भी अधूरा आज राज्य के हजारों शिक्षकों और इंटर कर्मचारियों के चेहरे पर छाई मायूसी केवल एक नौकरी जाने का दुख नहीं है, बल्कि उस भरोसे के टूटने का दर्द है, जो उन्होंने व्यवस्था पर किया था। सरकार का प्लस टू स्कूलों में समायोजन का वादा अब चुनावी जुमले जैसा प्रतीत होने लगा है। बेरोजगार हुए इन शिक्षकों में महिला शिक्षकों की संख्या भी अधिक है, जिनके लिए इस उम्र में दोबारा करियर शुरू करना पहाड़ जैसा कठिन है। कई शिक्षकों का कहना है कि उन्होंने अपनी पूरी जवानी इन कॉलेजों को दे दी, इस उम्मीद में कि कभी न कभी उनकी सेवा स्थायी होगी या उन्हें बेहतर विकल्प मिलेगा, लेकिन बदले में उन्हें केवल अनिश्चितता और अपमान मिला है।

सदर अस्पताल रांची में 10 और 11 अप्रैल को लगेगा मेगा हेल्थ कैंप, दिल की बीमारी से जूझ रहे बच्चों की स्क्रीनिंग और ऑपरेशन की सुविधा

रांची झारखंड में जन्मजात हृदयरोग से ग्रसित बच्चों का मुफ्त उपचार किया जाएगा। राष्ट्रीय बाल स्वास्थ्य कार्यक्रम (आरबीएसके) के तहत पीड़ित बच्चों को राज्य के बाहर भेजकर ख्यात अस्पतालों में मुफ्त सर्जरी करायी जाएगी। सर्जरी के बाद फॉलोअप भी किया जाएगा। बच्चों को यह सुविधा उपलब्ध कराने के लिए बीते फरवरी में राष्ट्रीय स्वास्थ्य मिशन, झारखंड ने श्री सत्य साईं संजीवनी ट्रस्ट और अमृता हॉस्पिटल, कोच्चि के साथ एमओयू किया है। दोनों संस्थानों को अलग-अलग जिलों की जिम्मेवारी दी गयी है। राष्ट्रीय स्वास्थ्य मिशन, झारखंड के अभियान निदेशक शशि प्रकाश झा ने बताया कि 10 और 11 अप्रैल को सदर अस्पताल रांची में मेगा कैंप का आयोजन किया जा रहा है। इस विशेष शिविर में विशेषज्ञों द्वारा ईको व अन्य जांच के माध्यम से बच्चों के हृदय रोगों का परीक्षण किया जाएगा। जांच के उपरांत जिन बच्चों में सर्जरी की आवश्यकता पाई जाएगी, उनका निःशुल्क ऑपरेशन अमृता हॉस्पिटल, कोच्चि में कराया जाएगा। कार्यक्रम के सफल संचालन के लिए राज्य स्तर पर आरबीएसके समन्यवक मुकेश कुमार (मोबाइल 7250364329) और अमृता हॉस्पिटल के प्रतिनिधि आदित्य कुमार (मो. 9162999702) को जिम्मेदारी सौंपी गई है। सर्जरी, फॉलोअप के साथ अभिभावक के आने-जाने की भी मुफ्त सुविधा अमृता हॉस्पिटल, कोच्चि द्वारा चयनित बच्चों को अमृता हॉस्पिटल में ले जाकर मुफ्त सर्जरी की जाएगी। फॉलोअप भी किया जाएगा। जबकि, श्री सत्यसाईं संजीवनी ट्रस्ट के द्वारा सर्जरी के लिए योग्य पाए गए बच्चों को ट्रस्ट द्वारा संचालित अहमदाबाद, गुजरात, पलबेल, दिल्ली, गोवा समेत पांच अस्पतालों में ले जाकर मुफ्त सर्जरी की जाएगी। बच्चों के साथ उनके अभिभाविकों को भी जाने-आने ठहरने आदि की मुफ्त सुविधा उपलब्ध कराई जाएगी। वहीं, ऑपरेशन के बाद बच्चों का फॉलोअप भी मुफ्त किया जाएगा। इसके लिए जमशेदपुर में ट्रस्ट के द्वारा एक केंद्र संचालित है। 3 से 4 माह के अंतराल में जिलों में होगी स्क्रीनिंग एनएचएम के साथ किए गए एमओयू के तहत दोनों संस्थाओं को अलग-अलग जिलों का जिम्मेवारी सौंपी गयी है। श्री सत्य साईं संजीवनी ट्स्ट को जहां रांची, रामगढ़, धनबाद, बोकारो, चतरा, लातेहार, पलामू, हजारीबाग, गिरिडीह, सरायकेला एवं पूर्वी सिंहभूम की जिम्मेवारी सौंपी गयी है। वहीं, अमृता हॉस्पिटल, कोच्चि को शेष जिले आवंटित किए गए हैं। इसके साथ ही रांची, जमशेदपुर, धनबाद व गिरिडीह में दोनों संस्थाओं के द्वारा कैंप लगाए जाएंगे। ये संस्थाएं 3-4 माह के अंतराल में अलग-अलग जिलों में स्क्रीनिंग कैंप लगागर बच्चों का चयन करेंगे। अपील: पीड़ित नवजात की सूचना साझा करें एनएचएम के आईईसी कोषांग के राज्य नोडल पदाधिकारी डॉ राहुल किशोर सिंह ने आमजनों से अपील की है कि इस शिविर का लाभ लेने हेतु यथाशीघ्र अपने नजदीकी सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र अथवा सदर अस्पताल में संपर्क करें। उन्होंने नगर निकाय और नगर पंचायत के सभी सम्मानित जनप्रतिनिधियों से भी आग्रह किया है कि अपने आस-पड़ोस में हृदय रोग से ग्रसित नवजात या बच्चों के अभिभावकों से इस शिविर की जानकारी साझा करें।

राजनीतिक हलचल तेज: नीतीश कुमार देंगे इस्तीफा, 14 अप्रैल को नया मुख्यमंत्री संभालेगा पद

पटना. बिहार में नई सरकार (Bihar New Government Formation) के गठन की प्रक्रिया अगले दस दिनों बाद शुरू हो जाएगी। नीतीश कुमार 12 अप्रैल को मुख्यमंत्री पद से इस्तीफा देंगे। संभावना है कि 14 अप्रैल को बिहार में नए मुख्यमंत्री पद का शपथ होगा। नए मुख्यमंत्री के साथ नए मंत्रिमंडल का भी शपथग्रहण होगा। नौ अप्रैल को दिल्ली के लिए हो रहे रवाना मुख्यमंत्री नीतीश कुमार नौ अप्रैल को दिल्ली के लिए रवाना होंगे। इस बाबत मिली जानकारी के अनुसार, दस अप्रैल को वह राज्यसभा के सदस्य के रूप में शपथ लेंगे। इसके बाद 11 अप्रैल को वह दिल्ली लौटेंगे और अगले दिन यानी 12 अप्रैल को उनका इस्तीफा होगा। 13 अप्रैल को एनडीए की बैठक में नए मुख्यमंत्री के नाम पर मुहर एनडीए सूत्रों से मिली जानकारी के अनुसार, 13 अप्रैल को एनडीए विधायक दल की बैठक में नए मुख्यमंत्री के नाम पर विधिवत मुहर लग जाएगी। इस दौरान भाजपा के कई दिग्गज भी मौजूद रहेंगे। उसी दिन एनडीए के नए विधायक दल के नेता राज्यपाल को अपनी सरकार बनाने का दावा भी पेश करेंगे। राष्ट्रीय अध्यक्ष के नए कार्यकाल का इसी महीने आरंभ जदयू के राष्ट्रीय अध्यक्ष का चौथा कार्यकाल मुख्यमंत्री नीतीश कुमार इसी महीने आरंभ करेंगे। इस बाबत मिली जानकारी के अनुसार देश भर के विभिन्न प्रदेशों से जदयू के पदाधिकारी पटना पहुंचेंगे और राष्ट्रीय कार्यकारिणी की बैठक में भाग लेंगे। राष्ट्रीय परिषद की बैठक भी होनी है। राष्ट्रीय कार्यकारिणी की बैठक में नीतीश कुमार का संबोधन होगा। यह पहली बार होगा जब वह मुख्यमंत्री पद पर रहे बिना जदयू की राष्ट्रीय कार्यकारिणी की बैठक को संबोधित करेंगे। 16 मार्च को राज्यसभा का सदस्य चुने गए थे नीतीश नीतीश कुमार इसी महीने की 16 तारीख को राज्यसभा का सदस्य निर्वाचित हुए थे। संवैधानिक प्राविधानों के अनुसार राज्यसभा का सदस्य चुने जाने के बाद उन्हें अगले 14 दिनों के अंदर इस्तीफा देना था। इस संवैधानिक वजहों से 30 मार्च को नीतीश कुमार ने विधान परिषद की सदस्यता से इस्तीफा दे दिया था। उसी दिन कुछ ही घंटे के भीतर उनका इस्तीफा स्वीकार भी कर लिया गया था।

श्रद्धा के नाम पर खिलवाड़, मंदिर में मची भगदड़ के बाद प्रशासन सख्त, 20 नामजद आरोपियों पर एफआईआर

नांलदा बिहारशरीफ के मघड़ा मेला हादसे में पुलिस ने चार पुजारियों को गिरफ्तार कर जेल भेज दिया। मेले में श्रद्धा के नाम पर घिनौना खेल उजागर हुआ है। रुपये लेकर पूजा करवाने और महिलाओं पर डंडे चलाने का आरोप पुजारियों पर लगा है। दीपनगर थाने की दारोगा मौसमी कुमारी के बयान पर इस बाबत एफआईआर दर्ज हुई है। इसमें 20 नामजद व कई अज्ञात को आरोपी बनाया गया है। नामजदों में 18 पंडा समाज के लोग और उनके दो सहयोगी शामिल हैं। बुधवार को एसपी भारत सोनी ने प्रेस कांफ्रेंस में बताया कि आरोपितों में अनुज कुमार, अवधेश कुमार मिश्रा, विवेकानंद पांडेय व निरंजन कुमार पांडेय को गिरफ्तार कर जेल भेजा गया है। एसपी ने बताया कि पूजा करने जाने के क्रम में नूरसराय के एक गांव की 17 वर्षीया किशोरी के गायब होने का मामला प्रकाश में आया है। हालांकि, किशोरी के भाई ने दीपनगर थाने में प्राथमिकी दर्ज कर आरोप लगाया है कि गांव का एक किशोर बहला-फुसलाकर उसे अपने साथ ले गया है। मामले की जांच चल रही है। गौर हो कि मंगलवार को सुबह करीब सवा नौ बजे शीतला माता मंदिर में मची भगदड़ में आठ श्रद्धालुओं की मौत हो गई थी, जबकि आठ घायल हो गए थे। घायलों में तीन का इलाज पटना में चल रहा है। गेट पर बांध दिया था बांस प्राथमिकी के अनुसार, दारोगा मौसमी कुमारी को थानाध्यक्ष राजमणि ने 10 बजकर पांच मिनट पर जल्द मंदिर पहुंचने का आदेश दिया। मंदिर के पास मौजूद लोगों ने बताया कि कुछ पंडा रुपये लेकर पूजा करा रहे थे। गेट पर बांस बांध दिया था। बांस को उठाकर गर्भगृह में घुसने के क्रम में सीढ़ी पर बेहोश होकर महिलाएं गिर गयीं। अफरा-तफरी के बीच लोग उन महिलाओं के ऊपर से गुजरने लगे। इससे उनकी मौत हो गयी। हादसे के बाद जागा प्रशासन मघड़ा शीतला माता मंदिर में मंगलवार को हुए बड़े हादसे के बाद पुलिस व जिला प्रशासन पूरी तरह जाग गया है। घटना से हुई क्षति, चूक व वसूली की छूट से सबक लेते हुए डीएम कुंदन कुमार व एसपी भारत सोनी ने कलेक्ट्रेट में बुधवार को जिलेभर के पुलिस-प्रशासनिक अधिकारियों संग मैराथन बैठक की। इसमें आगामी पर्व-त्योहार, प्रतियोगिता परीक्षा, स्थानीय मेला, हाट आदि में लगने वाली भीड़ को नियंत्रित करने से संबंधित विस्तृत गाइडलाइन बनायी। साथ ही, डीएम ने आपदा प्रबंधन एडीएम को कर्मियों और अधिकारियों को प्रशिक्षित करने का आदेश दिया। धार्मिक संस्थानों व अन्य कार्यक्रम स्थलों पर हर हाल में सीसीटीवी कैमरे लगाने का फरमान जारी किया गया। सीसीटीवी कैमरे कियाशील हैं या नहीं, इसकी जांच की जाएगी। किसी भी प्रकार के कार्यक्रम की सूचना अग्निशमन, स्वास्थ्य, बिजली, पीएचईडी व जिला आपदा विभाग के अधिकारियों को देना अनिवार्य होगा। जन-सुरक्षा सर्वोच्च प्राथमिकता डीएम डीएम ने स्पष्ट रूप से कहा कि किसी तरह के आयोजन में जन-सुरक्षा सर्वोच्च प्राथमिकता है। इसमें किसी तरह की लापरवाही व शिथिलता बर्दाश्त नहीं की जा सकती है। स्नान-दान, चैती पूर्णिमा, हनुमान जयंती, गुड फ्राइडे व आने आने वाले अन्य पर्व-त्योहारों में भीड़-भाड़ वाले स्थानों को चिह्रित कर समुचित तैयारी की जाएगी। बिना अनुमति व अनुज्ञप्ति के किसी भी तरह के कार्यक्रम के आयोजन पर समिति के विरुद्ध कड़ी कार्रवाई होगी। बीडीओ की जिम्मेवारी तय डीएम ने एसडीओ व बीडीओ को आदेश दिया कि अपने-अपने क्षेत्रों के ‘इवेंट कैलेंडर’ तैयार कर संभावित भीड़ के पूर्वानुमान के आधार पर सभी तरह का पुख्ता प्रबंध करें। कार्यक्रमों के आयोजन से पहले समिति के सदस्यों को पुलिस व प्रशासनिक अधिकारियों के साथ समन्वय बैठक करना अनिवार्य होगा।

दस्तावेजों पर सख्ती: पहचान पत्र के साथ भूमि प्रमाण देना अनिवार्य

पटना/सहरसा. बिहार सरकार की ओर से जाति, आय एवं निवास प्रमाण पत्र बनाने की प्रक्रिया को लेकर नियमों को और सख्त कर दिया गया है। अब आवेदन के दौरान सभी आवश्यक दस्तावेजों को ऑनलाइन अपलोड करना अनिवार्य कर दिया गया है। बिना जरूरी कागजात के किए गए आवेदन को सीधे अस्वीकार कर दिया जाएगा। नए प्रावधान के तहत निवास प्रमाण पत्र के लिए आवेदक को पहचान पत्र के साथ पते से संबंधित वैध दस्तावेज या भूमि से संबंधित वैध दस्तावेज प्रस्तुत करना होगा। वहीं, आय प्रमाण पत्र के लिए पहचान पत्र के साथ आय से जुड़े प्रमाण देना अनिवार्य किया गया है। इसी प्रकार जाति प्रमाण पत्र के लिए पहचान पत्र के साथ जमीन का खतियान देना जरूरी होगा। खतियान के साथ वंशावली संलग्न करना जरूरी प्रशासन की ओर से यह भी स्पष्ट किया गया है कि यदि जमीन आवेदक के पिता, दादा या परिवार के अन्य सदस्य के नाम पर है, तो ऐसी स्थिति में खतियान के साथ वंशावली संलग्न करना अनिवार्य होगा। इससे पारिवारिक संबंध की पुष्टि की जा सकेगी। सरकार ने खतियान, दान पत्र, भूमि संबंधी अन्य दस्तावेज, भूमिहीनों को आवंटित जमीन के कागजात सहित विभिन्न राजस्व अभिलेखों को मान्य दस्तावेज की श्रेणी में रखा है। वहीं, जिन आवेदकों के पास भूमि या राजस्व से संबंधित दस्तावेज उपलब्ध नहीं हैं, उन्हें आवेदन के समय स्थल निरीक्षण का विकल्प दिया गया है। ऐसे मामलों में राजस्व कर्मियों द्वारा जांच के बाद ही प्रमाण पत्र निर्गत किया जाएगा। फर्जीवाड़ा पर लगेगी रोक इस संबंध में सिमरीबख्तियारपुर की राजस्व अधिकारी खुशबू कुमारी ने बताया कि नई व्यवस्था लागू होने से फर्जी प्रमाण पत्र बनने की प्रवृत्ति पर रोक लगेगी और पूरी प्रक्रिया अधिक पारदर्शी बनेगी। उन्होंने आवेदकों से अपील की है कि आवेदन करने से पूर्व सभी आवश्यक दस्तावेज तैयार रखें, ताकि किसी प्रकार की असुविधा न हो। उल्लेखनीय है कि पूर्व में कई बार बिना उचित जांच के फर्जी प्रमाण पत्र के आवेदन सामने आते रहे हैं, जिसे देखते हुए सरकार ने यह सख्त कदम उठाया है। नई व्यवस्था से अब प्रमाण पत्र निर्गमन प्रक्रिया अधिक विश्वसनीय और पारदर्शी होने की उम्मीद जताई जा रही है।

आरा जंक्शन पर नई व्यवस्था: ‘क्यू-मित्र’ से पारदर्शी होगी Tatkal टिकट बुकिंग

आरा/भोजपुर. दानापुर रेल मंडल के अंतर्गत आरा जंक्शन पर यात्रियों को जल्द ही अत्याधुनिक 'क्यू-मित्र' सुविधा मिलने जा रही है। हाजीपुर रेलवे जोन के मुख्य जनसंपर्क पदाधिकारी सरस्वती चंद्र ने इसकी जानकारी दी। उन्होंने बताया कि भारतीय रेल के मूल सिद्धांत, यात्री सुविधा, निष्पक्षता और पारदर्शिता को मजबूत करने के उद्देश्य से यह डिजिटल पहल शुरू की जा रही है। सोनपुर मंडल में इसके सफल क्रियान्वयन के बाद अब इसे आरा जंक्शन पर लागू करने की तैयारी है। इससे यात्रियों को टिकट लेने की प्रक्रिया में बड़ा बदलाव देखने को मिलेगा। तत्काल टिकट में अव्यवस्था से मिलेगी राहत अब तक तत्काल टिकट लेने के दौरान यात्रियों को लंबी कतारों, अव्यवस्था और धांधली जैसी समस्याओं का सामना करना पड़ता था। 'पहले आओ-पहले पाओ' का नियम कई बार टूट जाता था। इसके कारण यात्रियों में असंतोष और विवाद की स्थिति बनती थी। 'क्यू-मित्र' प्रणाली इन समस्याओं को दूर करने का प्रभावी समाधान बनकर सामने आई है। इसके लागू होने से टिकट प्रक्रिया पूरी तरह व्यवस्थित और पारदर्शी होगी। क्या है ‘क्यू-मित्र’ प्रणाली 'क्यू-मित्र' एक स्व-सेवा, कियोस्क आधारित डिजिटल कतार प्रबंधन प्रणाली है। इसमें यात्री स्वयं जाकर टोकन प्राप्त करते हैं। इस प्रक्रिया में किसी कर्मचारी की सीधी भूमिका नहीं होती, जिससे पारदर्शिता बनी रहती है। आधार आधारित सत्यापन और चेहरे की पहचान के जरिए हर यात्री की पहचान सुनिश्चित की जाती है। टोकन पर यात्री का फोटो, आधार के अंतिम चार अंक, टोकन संख्या और समय दर्ज रहता है। कैसे काम करेगा यह सिस्टम कियोस्क पर पहुंचते ही कैमरा यात्री का चेहरा कैप्चर करता है और आधार कार्ड स्कैन किया जाता है। इसके बाद एआई आधारित प्रणाली तुरंत टोकन जारी कर देती है। तत्काल टिकट काउंटर खुलने से करीब 30 मिनट पहले कर्मचारियों द्वारा फोटो और आधार का मिलान कर सत्यापन किया जाएगा। इसके बाद निर्धारित क्रम के अनुसार ही टिकट जारी किए जाएंगे, जिससे किसी प्रकार की गड़बड़ी की गुंजाइश नहीं रहेगी। सुरक्षा और पारदर्शिता की पुख्ता व्यवस्था इस प्रणाली में एक आधार कार्ड से प्रतिदिन केवल एक ही टोकन जारी किया जा सकेगा। चेहरे की पहचान तकनीक से दुरुपयोग की संभावना लगभग समाप्त हो जाएगी। एसी तत्काल टिकट सुबह 10 बजे और नॉन-एसी टिकट सुबह 11 बजे जारी किए जाएंगे। क्यू-मित्र में हिंदी और अंग्रेजी दोनों भाषाओं का विकल्प रहेगा। नेटवर्क बाधित होने पर भी यह सिस्टम ऑफलाइन मोड में काम करेगा और बाद में डेटा स्वतः सिंक हो जाएगा। यात्रियों और कर्मचारियों को होगा लाभ जहां-जहां यह प्रणाली लागू की गई है, वहां तत्काल टिकट प्रक्रिया पूरी तरह पारदर्शी और विवाद-मुक्त हो गई है। कतार में धांधली की शिकायतें लगभग खत्म हो गई हैं। स्टेशन परिसर में भीड़भाड़ कम हुई है और यात्रियों का रेलवे पर भरोसा बढ़ा है। साथ ही कर्मचारियों को भी अनावश्यक आरोपों और दबाव से राहत मिली है, जिससे कार्यप्रणाली अधिक सुचारू हुई है।

‘टाइम ऑफ डे टैरिफ’ लागू: अब समय के हिसाब से बदलेगा बिजली बिल

भागलपुर. बिजली विभाग ने टाइम ऑफ डे टैरिफ लागू कर दिया है। नई व्यवस्था के तहत सुबह नौ बजे से शाम पांच बजे तक यानी आठ घंटे के लिए निर्धारित बिजली दर से 20 प्रतिशत सस्ती बिजली मिलेगी। फिर शाम पांच बजे से रात 11 बजे तक यानी छह घंटे बिजली महंगी होगी। जबकि रात 11 से सुबह नौ बजे तक सामान्य बिजली दर लागू होगा। बता दें कि इस नई व्यवस्था से कृषि फीडर वाले सभी उपभोक्ताओं को बाहर रखा गया है। साउथ बिहार पावर डिस्ट्रीब्यूशन कंपनी लिमिटेड, भागलपुर आपूर्ति क्षेत्र के कार्यपालक अभियंता (शहरी) पंकज कुमार के अनुसार इस व्यवस्था से उपभोक्ताओं के खर्च कम होंगे। बिजली व्यवस्था पर दबाव कम होगा और सौर ऊर्जा के बेहतर उपयोग को बढ़ावा मिलेगा। उन्होंने बताया कि 10 किलोवाट से अधिक लोड वाले घरेलू व व्यवसायिक उपभोक्ताओं को निर्धारित बिजली दर से 10 प्रतिशत अधिक शुल्क लगेगा। जबकि एक किलोवाट या फिर इससे अधिक लोड वाले सिर्फ स्मार्ट मीटर वाले उपभोक्ताओं पर ही यही नियम लागू होगा। समय के अनुसार आएगा बिल दिन को तीन भागों में बांटा गया है। सुबह 9 बजे से शाम 5 बजे तक ऑफ-पीक समय है। इस दौरान बिजली 20 प्रतिशत सस्ती रहेगी। घरेलू उपभोक्ताओं को सामान्य दर 7.42 रुपये प्रति यूनिट की जगह केवल 5.94 रुपये प्रति यूनिट देना होगा। जबकि शाम 5 बजे से रात 11 बजे तक पीक आवर है। घरेलू उपभोक्ताओं के लिए 10 प्रतिशत ज्यादा यानी 8.16 रुपये प्रति यूनिट लगेगा। व्यावसायिक और औद्योगिक उपभोक्ताओं को 20 प्रतिशत ज्यादा यानी 120 प्रतिशत दर चुकानी पड़ेगी। रात 11 बजे से सुबह 9 बजे तक सामान्य दर 7.42 रुपये प्रति यूनिट ही रहेगी।