samacharsecretary.com

सम्राट चौधरी सरकार का बड़ा फैसला: बिहार के लोकसेवकों की CBI जांच अब सरकार की मंजूरी के बाद

पटना बिहार सरकार के लोकसेवकों या राज्य सरकार के स्वामित्व वाले किसी संस्थान की सीबीआई जांच को लेकर सम्राट चौधरी सरकार ने नया गाइडलाइन जारी किया है। इनमें आपराधिक जांच से पहले केंद्रीय जांच ब्यूरो (सीबीआई) को बिहार सरकार से अनुमति लेनी होगी। सरकार के नये नियम के मुताबिक सीबीआई से मिले प्रस्ताव के आधार पर राज्य सरकार हर मामले पर अलग-अलग विचार कर जांच की शक्ति देने पर निर्णय लेगी। बिहार सरकार के गृह विभाग (आरक्षी शाखा) ने प्रधान सचिव कुंदन कुमार के हस्ताक्षर से इससे संबंधित निर्णय की अधिसूचना जारी कर दी गई है। हालांकि, राज्य की सीमा में संचालित भारत सरकार या भारत सरकार के अधीनस्थ सार्वजनिक क्षेत्र के उपक्रमों के कर्मियों और निजी व्यक्तियों के संबंध में अनुमति की आवश्यकता नहीं होगी। नई अधिसूचना के मुताबिक, इस विषय पर पूर्व की सभी अधिसूचनाओं को हटा दिया गया है। केंद्र सरकार या उसके अधीनस्थ कर्मियों और निजी व्यक्तियों द्वारा किये जाने अपराध के मामले में जांच को लेकर सीबीआई को दी गयी शक्तियां व उनके अधिकार क्षेत्र में विस्तार पर सहमति दी गयी है। सीबीआई भारतीय न्याय संहिता (बीएनएस), भारतीय नागरिक सुरक्षा संहिता (बीएनएसएस), भारतीय साक्ष्य अधिनियम और आईटी एक्ट से जुड़े अपराध के साथ ही साइबर अपराध एवं भ्रष्टाचार निवारण अधिनियम से जुड़े कांडों में जांच कर सकेगी। लेकिन, जब यह अपराध बिहार सरकार के कार्य से संबंधित नियुक्त लोकसेवकों, बिहार सरकार द्वारा नियंत्रित कोई निगम, कंपनी या बैंक, बिहार सरकार से वित्तीय सहायता प्राप्त कर चुके संस्थान द्वारा किया जाता है तो ऐसे मामलों में सीबीआई को जांच से पहले बिहार सरकार से अनुमति लेनी होगी। इसके लिए सीबीआई को प्रस्ताव भेजना होगा। समीक्षा के बाद सरकार से अनुमति मिलने पर ही सीबीआई कोई ऐक्शन ले पाएगी। सरकार ऐसे मामलों में केस टू केस अलग-अलग फैसला लेने के लिए स्वतंत्र है। सीबीआई भारत सरकार की सर्वोच्च और सर्वाधिक विश्वसनीय मानी जाने वाली जांच एजेंसी है। इसकी स्थापना 1 अप्रैल 1963 में गृह मंत्रालय के प्रस्ताव पर की गयी थी। सीबीआई का संचालन गृह मंत्रालय द्वारा ही किया जाता है। सीबीआई का मुख्यालय दिल्ली में है। राज्यों के मुख्यालय में इसकी इकाई होती है। यह एजेंसी भ्रष्टाचार या अपराध के गंभीर व सनसनीखेज मामलों में कार्रवाई करती है। कई बार सुप्रीम कोर्ट या राज्यों के हाईकोर्ट के आदेश पर भी मामलों की सीबीआई जांच होती है।

बिहार में बाढ़ से हाहाकार: 200 से अधिक सड़कें डूबीं, 120 स्कूल बंद, हजारों एकड़ फसल बर्बाद

पटना   बिहार के 13 जिलों में बाढ़ की स्थिति गंभीर बनी हुई है। विभिन्न स्रोतों से मिली जानकारी के अनुसार 52 प्रखंडों की 270 पंचायतों की करीब 28 लाख आबादी बाढ़ से प्रभावित है। हालांकि, आपदा प्रबंधन विभाग ने लगभग 8 लाख आबादी को ही बाढ़ से प्रभावित माना है। गंगा, गंडक, सोन, कोसी समेत अन्य नदियां उफान पर हैं। पटना, भोजपुर, सारण, बेगूसराय और वैशाली जिले में कई इलाके बाढ़ की चपेट में हैं। बक्सर, जहानाबाद, अरवल, रोहतास, नालंदा और कैमूर में भी गांवों और खेतों में पानी फैल गया है। उत्तर बिहार के दरभंगा, समस्तीपुर और पश्चिम चंपारण में बाढ़ का प्रकोप जारी है। 200 सड़कों पर आवागमन बाधित है। कई जगह नाव ही आवाजाही का सहारा बनी हुई है। हजारों एकड़ में धान समेत अन्य फसलें डूब गई हैं। भोजपुर और बेगूसराय में 120 स्कूलों को बंद कर दिया गया है। भागलपुर शहर में बाढ़ का पानी घुस गया है। सुल्तानगंज के अजगैवीनाथ मंदिर में भी पानी फैल गया है। पटना सहित जिले के अन्य 14 स्थानों पर नदियों का पानी खतरे के निशान को पार कर गया है। इसमें केवल गंगा नदी ही 7 स्थानों पर खतरे के निशान से ऊपर बह रही है। बाढ़ की भयावहता को देखते हुए 693 नावें चलाई जा रही हैं। साथ ही सामुदायिक किचन को भी शुरू कर दिया गया है। 7107 पॉलीथीन शीट का वितरण किया गया है। पटना, पश्चिमी चम्पारण एवं वैशाली जिले में 1764 ड्राई राशन पैकेट का वितरण किया गया है। गंगा के जलस्तर में बढ़ोतरी होने से पटना के 9 प्रखंडों में दो लाख 32 हजार से अधिक लोग बाढ़ की चपेट में आ गए हैं। भोजपुर में 25 रोड और 60 स्कूल बंद भोजपुर जिले के 6 प्रखंडों की 45 पंचायतें बाढ़ से जलमग्न हैं। करीब दो लाख आबादी प्रभावित है। दो हजार एकड़ से अधिक में धान और करीब 500 एकड़ में भदई फसल एवं सब्जियां डूब गई हैं। 25 मुख्य एवं ग्रामीण सड़कों पर पानी के तेज बहाव के कारण आवागमन बंद है। 60 से अधिक स्कूल बंद किए गए हैं। 20 सामुदायिक रसोई में छह हजार से अधिक लोगों को भोजन दिया जा रहा है। छपरा में डेढ़ लाख आबादी प्रभावित सारण जिले के छपरा सदर, दिघवारा, रिविलगंज और सोनपुर की करीब 25 पंचायतें बाढ़ से प्रभावित हैं। लगभग डेढ़ लाख आबादी पर बाढ़ का असर है। कई लोगों ने ऊंचे बांध और रिश्तेदारों के यहां शरण ली है। ग्रामीण सड़कों पर पानी आने से यातायात प्रभावित है। अकिलपुर-दिघवारा संपर्क भी बाधित है और कई जगह नाव से आवागमन हो रहा है। दो दर्जन से अधिक स्कूलों को दूसरे विद्यालयों से टैग किया गया है। बेगूसराय में भी 60 स्कूल बंद गंगा के बढ़ते जलस्तर से बेगूसराय के मटिहानी, साहेबपुर कमाल, बखरी और बलिया की 20 पंचायतों की करीब दो लाख आबादी प्रभावित है। प्रशासन 87 नावें चला रहा है। फिलहाल बड़े पैमाने पर विस्थापन नहीं हुआ है। जलभराव और आवागमन की परेशानी के कारण 60 से अधिक स्कूलों में पढ़ाई बंद है। वैशाली में हालात गंभीर वैशाली के छह प्रखंडों की 26 पंचायतें और हाजीपुर नगर परिषद के छह वार्ड प्रभावित हैं। राघोपुर की 12, सहदेई-देसरी की छह और बिदुपुर की चार सड़कों पर पानी चढ़ा है। यानी कम से कम 22 सड़कों पर आवागमन प्रभावित है। राघोपुर की कई सड़कों पर नाव चल रही है। गनियारी जाने वाली दो सड़कें डूब गई हैं। प्रभावित लोग गांधी सेतु के पुराने टोल प्लाजा सहित ऊंचे स्थानों पर शरण लिए हुए हैं। बक्सर में फसलें बर्बाद इसी तरह बक्सर में गंगा खतरे के निशान से 19 सेंटीमीटर ऊपर बह रही है। चार अंचलों के कई गांवों में करीब दस हजार आबादी प्रभावित है। 1761 हेक्टेयर फसल बाढ़ की चपेट में है। दो प्राथमिक स्कूलों में पानी घुस गया है। प्रशासन ने 33 नाव और राहत सामग्री उपलब्ध कराई है। जहानाबाद शहर में आफत जहानाबाद में मोरहर, दरधा और बलदइया नदियों का पानी निचले इलाकों में फैल गया है। तीन प्रखंडों की 15 पंचायतें प्रभावित हैं। शहर की तीन सड़कों—हवाई अड्डा-एसएस कॉलेज रोड, सट्टी मोड़-जाफरगंज रोड और जहानाबाद-शकूराबाद मुख्य मार्ग पर पानी है। दो पुलों पर भी पानी चढ़ा है अरवल में पुनपुन की बाढ़ अरवल में पुनपुन नदी के उफान से तीन प्रखंडों की 12 पंचायतों के बधार प्रभावित हैं और करीब दो हजार एकड़ फसल को नुकसान की आशंका है। रोहतास में दो दर्जन घर टूटे रोहतास जिले में लगातार बारिश से संझौली, रोहतास, नौहट्टा और चेनारी प्रभावित हैं। कृषि विभाग ने करीब एक से डेढ़ हजार हेक्टेयर भूमि प्रभावित होने का अनुमान जताया है। नौहट्टा की 9 पंचायतों में करीब 10 हजार एकड़ धान डूबने की सूचना है। चेनारी में करीब 50 एकड़ फसल बर्बाद हुई है और दो दर्जन मकान क्षतिग्रस्त हुए हैं। नालंदा में कटाव से दहशत नालंदा जिले के अस्थावां में जिरायन नदी के तटबंध का 25 फीट कटाव बढ़कर करीब 70 फीट हो गया है। पांच गांवों में पानी फैलने से ढाई हजार बीघे में धान, मक्का और सब्जियों की फसल डूब गई है। बिहारशरीफ के सोहसराय अड्डापर में छिलका के ऊपर से करीब डेढ़ फीट पानी बह रहा है। कैमूर में सड़कें और स्कूल डूबे कैमूर में दुर्गावती, कर्मनाशा और कुदरा नदियों के उफान से दुर्गावती, रामपुर, नुआंव और रामगढ़ प्रभावित हैं। 10 से 12 हजार आबादी परेशान है। कई सड़कें और स्कूल परिसर जलमग्न हैं। कुछ इलाकों में पानी कम होने से जनजीवन धीरे-धीरे पटरी पर लौटने लगा है। गंगा, कोसी, सोन उफान पर केंद्रीय जल आयोग के अनुसार गंगा नदी दीघा, गांधीघाट, हाथीदह, भागलपुर, कहलगांव, बक्सर और मुंगेर में खतरे के निशान से ऊपर बह रही है। जबकि गंडक नदी डुमरियाघाट, हाजीपुर, कोसी नदी बलतारा और कुरसेला, बूढ़ी गंडक खगड़िया, पुनपुन नदी श्रीपालपुर तो घाघरा नदी दरौली में खतरे के निशान से ऊपर बह रही है। मुंगेर में बाढ़ में डूबा मंदिर सोन नदी का डिस्चार्ज पांच लाख 23 हजार क्यूसेक रहा। सोन के जलस्तर में आने वाले दिनों में कमी आने की संभावना है। गंगा नदी के जलस्तर में भी कमी का रुझान रहने का अनुमान है। प्रयागराज में गंगा के जलस्तर में कमी शुरू हो गई है, जिसका असर … Read more

कम विस्थापन, कम पर्यावरणीय नुकसान और हजारों रोजगार, झारखंड के लिए विंजिंहम पोर्ट से बड़ी सीख

रांची  झारखंड की ही तरह केरल भी हरे भरे जंगलों से भरा है। अरब सागर के किनारे केरलम के शहर त्रिवेंद्रम से 40 किलोमीटर की दूरी पर अडानी विंजिंहम समुद्र परिवहन परियोजना एक रोल मॉडल है। झारखंड में खनन और उद्योग दोनों में पर्यावरण और विस्थापन का सवाल उभर कर सामने आता है। लेकिन विंजिंहम सी पोर्ट यानि बंदरगाह के निर्माण में कम से कम विस्थापन हुआ और समुद्र के आसपास की पारिस्थितिकी को बग़ैर कोई नुकसान पहुंचाए तीन किलोमीटर लंबी दीवार खड़ी कर दी गई। इसका परिणाम यह है कि भारत आने वाले बड़े जहाजों को अब सामान उतारने के लिए दुबई, कोलंबो, सिंगापुर या एमस्टडर्म नहीं जाना पडता है। देश को हजारों करोड़ का राजस्व मिलता है और 20 हजार से अधिक लोगों को रोजगार मिला है। झारखंड में नए लगने वाले उद्योगों को इस मॉडल के जरिए पर्यावरण ऑडिट के जरिए अर्थव्यवस्था में योगदान करने वाला बनाया जा सकता है। कोयला परिवहन में परिवहन का माडल है उपयोगी झारखंड में कोयला, लौह और बाक्साइट खनन के बाद उनका परिवहन वन क्षेत्र से ही होता है। विंजिंहम सी पोर्ट ऐसे तो समुद्र में संचालित होता है लेकिन 18 मीटर की गहराई होने की वजह से जल के अंदर एक पूरा वनस्पति और जीव तंत्र रहता है। इसकी डिजिटल मैपिंग कर यह सुनिश्चित किया जाता है कि किसी वनस्पति और जीव जंतु को नुकसान नहीं पहुंचे। इसी तरह खनिजों के परिवहन में भी डिजिटल सेंसिंग उपकरणों का प्रयोग हो सकता है। 2028 तक समुद्री व्यापार को तीन गुणा बढ़ाएगा विंजिंहम 1विंजिंहम सी पोर्ट अभी पहले ही चरण में है। तीन किलोमीटर के बैक वाटर में अभी 40 मीटर तक के जहाज पहुंच रहे हैं। खास बात यह है कि अंतरराष्ट्रीय समुद्री सीमा ये इस बंदरगाह की दूरी मात्र 10 नाटिकल मील है। लेकिन बंदरगाह बन जाने के बाद यहां अंतरराष्ट्रीय और भारतीय जहाज आधे घंटे में पहुंच सकते हैं। 2028 तक बैक वाटर की लंबाई चार किलोमीटर तक हो जाएगी। इससे यहां एक समय में एक लाख तक कंटेनर रखे जा सकेंगे। अभी यहां 35 हजार कंटेनर रखे जा रहे हैं। पूरी तरह ऑटोमैटिक है कंटेनर का उतार-चढ़ाव विंजिंहम सी पोर्ट पर तीस से अधिक उच्च क्षमता के क्रेन लगे हैं। इनका संचालन पूरी तरह से ऑटोमैटिक है जो कंट्रोल रूम में एक सॉफ्टवेयर सिस्टम के जरिए होता है। कोयला और लौह अयस्क परिवहन में कन्वेयर बेल्ट को इस तकनीक से संचालित करने पर प्रदूषण की संभावना कम होगी। पहले भारत का 75 प्रतिशत कंटेनर देश गये बाहर उतरता था विंजिंहम सी पोर्ट के संचालित होने से पहले भारत का 75 प्रतिशत समुद्री कंटेनर परिवहन दूसरे देशों से होता था। देश में 17 मीटर से अधिक गहराई को कोई बड़ा पोर्ट नहीं था। अब देश में भी इतनी गहराई की क्षमता का पोर्ट बन जाने से कंटेनर यहीं उतर रहे हैं।  

बिहार में वाहन चालकों को बड़ी राहत, 19,691 लंबित ई-चालान लोक अदालत में होंगे निपटाए

 मुजफ्फरपुर वाहन चालकों के लंबित ई-चालानों के निपटारे के लिए 12 सितंबर 2026 को राष्ट्रीय लोक अदालत (National Lok Adalat 2026) का आयोजन होगा। 'एकमुश्त समाधान योजना 2026' के तहत जुर्माने की राशि में छूट का लाभ मिलेगा। इसको लेकर राज्य परिवहन आयुक्त आरिफ अहसन ने पत्र जारी किया है। टोल प्लाजा से कटे ई-चालानों के लिए कहा गया है कि जिस जिले में टोल प्लाजा है, उसी जिले में उससे जुड़े लंबित चालानों का निपटारा होगा। लोक अदालत से पहले प्री-रजिस्ट्रेशन अनिवार्य किया गया है। जिला विधिक सेवा प्राधिकार में पांच सितंबर से परिवहन व यातायात पुलिस के दो-दो काउंटर बनाए जाएंगे। यहां चालान की छाया प्रति व अन्य कागजात जमा करना होगा। वाहन मालिकों को टोकन दिया जाएगा। परिवहन-यातायात पुलिस जुर्माने के चालान का वेरिफिकेशन लोक अदालत से पहले ही करेगी। इससे लोक अदालत में वाहन मालिकों को जुर्माने की राशि जमा करने में अधिक समय नहीं लगेगा। साथ ही तेजी से मामले का निपटारा होगा। लोक अदालत में 31 मई 2026 से पूर्व कटे ई-चालान का ही समझौते के तहत निपटारा होगा। जिला परिवहन पदाधिकारी प्रियंका सिन्हा ने कहा कि आदेशानुसार मामले का निपटारा होगा। वाहन मालिकों की सुविधा का विशेष ध्यान रखा जाएगा। प्राधिकार व विभाग के निर्देशों का शत प्रतिशत पालन होगा। लोक अदालत में जुर्माने से राहत के लिए टोकन के साथ चालान की छाया प्रति, आधार कार्ड, आरसी आदि देना होगा। परिवहन विभाग करेगा 19 हजार 691 चालान का निपटारा: राष्ट्रीय लोक अदालत में परिवहन विभाग 19 हजार 691 चालान का समझौते के तहत निपटारा करेगा। इससे करीब 28.46 करोड़ रुपये की वसूली होगी। परिवहन विभाग द्वारा 2019 से मई 2026 तक 37,515 चालान किए गए। 56.15 करोड़ जुर्माना किया गया। इसमें से अब तक 17,824 वाहन मालिकों ने चालानों की राशि जमा की। इससे विभाग को 27.69 करोड़ रुपये राजस्व की प्राप्ति हुई। जबकि अब भी 19,691 चालान लंबित हैं।  

अब स्कूलों में पढ़ेंगे AI, कोडिंग और डेटा साइंस, झारखंड में सिलेबस तैयार करने की प्रक्रिया शुरू

 रांची  राज्य के प्लस टू उच्च विद्यालयों में आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस एंड कोडिंग, साइबर सिक्योरिटी एंड डेटा साइंस, कंप्यूटर साइंस, अप्लाइड इंग्लिश जैसे विषयों में पढ़ाई शुरू करने के लिए सिलेबस तैयार करने की कार्रवाई शुरू कर दी गई है। स्कूली शिक्षा एवं साक्षरता विभाग ने इसकी जिम्मेदारी झारखंड शैक्षिक अनुसंधान एवं प्रशिक्षण परिषद (जेसीईआरटी) को सौंपी है। प्रयास है कि शैक्षणिक सत्र 2027-28 से इन विषयों का सिलेबस तैयार हो ताकि इन विषयों की पढ़ाई शुरू की जा सके। जेसीईआरटी को नौवीं से 12वीं कक्षा के लिए इन विषयों का सिलेबस तैयार करना है। स्कूली शिक्षा एवं साक्षरता विभाग ने इन विषयों के लिए माध्यमिक आचार्य के पद पहले ही स्वीकृत कर लिए हैं। झारखंड कर्मचारी चयन आयोग से इन विषयों में माध्यमिक आचार्य के पदों पर नियुक्ति की अनुशंसा भी विभाग को मिल चुकी है। अनुशंसित अभ्यर्थियों के प्रमाणपत्रों की जांच की प्रक्रिया पूरी की जा रही है। उम्मीद की जा रही है कि शीघ्र ही शिक्षकों की नियुक्ति प्लस टू विद्यालयों में हो जाएगी। इधर, स्कूली शिक्षा एवं साक्षरता विभाग ने जेसीईआरटी को कमेटी गठित कर सिलेबस का प्रारुप तैयार करने के निर्देश दिए हैं। इसमें विशेषज्ञ शिक्षकों का भी सहयोग लेने का निर्देश दिया गया है। एनसीईआरटी के दिशा-निर्देशों तथा सीबीएसई स्कूलों में लागू पाठ्यक्रमों को ध्यान में रखते हुए राज्य के लिए सिलेबस तैयार किया जाएगा। सिलेबस तैयार करने के लिए कई कार्यशालाएं भी आयोजित की जाएंगी। उल्लेखनीय है कि राज्य के प्लस टू विद्यालयों के लिए पहली बार माध्यमिक आचार्य के पद सृजित किए गए हैं।

अब 50.43 सीएफटी मिट्टी कटाई पर मिलेगी एक दिन की मजदूरी

 रांची राज्य में वीबी जीरामजी योजना के तहत कार्यरत अकुशल श्रमिकों के लिए कार्य की मात्रा पूर्व की तुलना में कम कर दी गई है। इस योजना के अंतर्गत कार्यरत श्रमिकों को अब मिट्टी कटाई के कार्य में पूर्व निर्धारित 73 सीएफटी के स्थान पर औसतन 50.43 सीएफटी कार्य करने पर एक दिन की मजदूरी दिए जाने का प्रविधान किया गया है। इसके तहत महिलाओं के लिए इसकी सीमा 46.97 सीएफटी ही रखी गई है। राज्य सरकार यह व्यवस्था कर रही है कि निर्धारित सॉफ्टवेयर सेक्योर साफ्ट में नई दरों को शीघ्र ही अपलोड किया जाए। इससे कार्य की मात्रा एवं मजदूरी भुगतान के बीच बेहतर समन्वय स्थापित होगा। मजदूरी भुगतान व्यवस्था को अधिक वैज्ञानिक, न्यायसंगत एवं श्रमिक हितैषी बनाने की दिशा में यह पहल की गई है। ग्रामीण विकास मंत्रालय, भारत सरकार द्वारा निर्धारित प्रक्रिया के तहत विभिन्न श्रेणियों के श्रमिकों की कार्यक्षमता, कार्य की प्रकृति, श्रम एवं निर्धारित कार्यदिवस में किए जा सकने वाले कार्य की मात्रा का आकलन किया गया है। झारखंड में वर्तमान व्यवस्था के तहत एक दिन की मजदूरी के भुगतान के लिए 73 सीएफटी मिट्टी कटाई का कार्य निर्धारित था। टाइम एंड मोशन के आधार पर अब विभिन्न श्रेणियों के श्रमिकों के लिए कार्य-मात्रा को युक्तिसंगत बनाया गया है। इसके माध्यम से यह सुनिश्चित किया गया है कि निर्धारित कार्य-मात्रा एक सामान्य श्रमिक द्वारा सामान्य कार्यदिवस में वास्तविक रूप से पूरी की जा सके। ग्रामीण विकास मंत्रालय के दिशा-निर्देशों में महिलाओं, बुजुर्गों तथा दिव्यांग श्रमिकों के लिए अलग दर निर्धारित करने का भी प्रविधान है। निर्धारित दरों को लेकर मंत्रालय से अनुमोदन प्राप्त हो चुका है।

बिहार की पढ़ाई में AI की एंट्री, Google देगा शिक्षकों को ट्रेनिंग; छात्रों को भी मिलेगा फायदा

पटना  गूगल फाॅर एजुकेशन इंडिया बिहार के शिक्षकों को समूह में एआई का प्रशिक्षण उपलब्ध कराएगा। गूगल के रिसाेर्स पर्सन क्षेत्रवार प्रशिक्षण देंगे। सभी शिक्षकों को इस प्रशिक्षण में शामिल में होने को ले शिक्षा मंत्री के स्तर से पत्र भी लिख जा रहा। शिक्षकों के इस प्रशिक्षण के मूल मे है कि AI के उपयोग की ट्रेनिंग लेकर विद्यार्थियों को एआई में दक्ष कर सकें। गूगल एजुकेशन फाॅर इंडिया के कंट्री हेड ने अपनी टीम के साथ हाल ही में शिक्षा मंत्री मिथिलेश तिवारी के साथ इस संबंध में बैठक की थी। शनिवार को शिक्षक दिवस के मौके पर इस संबंध में गूगल एजुकेशन फाॅर इंडिया का शिक्षा विभाग के साथ एमओयू पर हस्ताक्षर होना है। रिसोर्स पर्सन को बिहार में तैनात करेगा गूगल इस संबंध में मिली जानकारी के अनुसार सहमति पत्र हस्ताक्षर होने के बाद गूगल अपने रिसोर्स पर्सन को प्रशिक्षण के लिए बिहार में तैनात करेगा। यह पहली बार हो रहा जब शिक्षकों के तकनीकी प्रशिक्षण खासकर एआई के लिए शिक्षा विभाग गूगल एजुकेश फार इंडिया के साथ किसी तरह का एमओयू कर रहा। शिक्षा विभाग पहले जिला स्तर पर शिक्षकों का चयन कर उन्हें मास्टर ट्रेनर के रूप में तैयार करेगा। गूगल अपने एआई प्लेटफाॅर्म पर इन शिक्षकों को यह ट्रेनिंग देगा कि एआई का उपयोग कितनी सहजता से किया जा सकता है। छात्रों को एआई में दक्ष बनाने की पहल किसी विषय पर सूचना के लिए किस तरह से प्रांप्ट लिखना है यह ट्रेनिंग का खास हिस्सा है। विद्यार्थियों की जरूरत के हिसाब से शिक्षकों को यह ट्रेनिंग दी जाएगी कि वे तय पाठ्यक्रम को और कैसे बेहतर कर सकते हैं। इस पूरी कवायद के मूल में शिक्षा विभाग की यह योजना है कि विद्यार्थियों को एआई के उपयोग में दक्ष बनाया जाए। माध्यमिक विद्यालय में पढ़ने वाले विद्यार्थी इसके केंद्र में हैं। शिक्षक एआई की मदद से सभी विषयों पर खास तरीके से विद्यार्थियों को उपलब्ध कराएंगे। मास्टर ट्रेनर के माध्यम से अलग-अलग विद्यालय के शिक्षकों को एआई में प्रशिक्षित किया जाएगा।  

खेल विभाग में बंपर भर्ती की तैयारी, 1006 पदों से जिलों से लेकर अकादमी तक मजबूत होगा सिस्टम

 पटना  राज्य में खेल प्रतिभाओं को तराशने और उन्हें राष्ट्रीय-अंतरराष्ट्रीय स्तर की प्रतिस्पर्धा के लिए तैयार करने के लिए खेल विभाग राज्य में विभिन्न स्तरों पर 1006 पदों पर नियुक्ति की प्रक्रिया चल रही है। इनमें 33 जिला खेल पदाधिकारी, स्टेडियमों के लिए 380 प्रशिक्षक, राजगीर राज्य खेल अकादमी के लिए 48 कोच, बिहार राज्य खेल प्राधिकरण के 301 और बिहार खेल विश्वविद्यालय के 244 पद शामिल हैं। खेल प्राधिकरण व राजगीर खेल विश्वविद्यालय में भी 545 पदों पर नियुक्ति की तैयारी जिला खेल पदाधिकारियों की नियुक्ति अंतिम चरण में है। प्रशिक्षकों की नियुक्ति के लिए परीक्षा की प्रक्रिया आगे बढ़ रही है। खेल व्यवस्था को सुचारु करने के लिए संविदा पर लिपिकीय कर्मियों की नियुक्ति और प्रतिनियुक्ति के माध्यम से आवश्यक मानव संसाधन उपलब्ध कराने की तैयारी है। नियुक्तियां पूरी होने के बाद जिला स्तर से लेकर राज्य स्तरीय खेल संस्थानों तक प्रशासनिक व्यवस्था और प्रशिक्षण तंत्र को मजबूती मिलेगी। खेल मंत्री श्रेयसी सिंह ने कहा कि जिलों में खेल पदाधिकारियों, स्टेडियमों में प्रशिक्षकों, राजगीर राज्य खेल अकादमी के प्रशिक्षकों के साथ-साथ खेल प्राधिकरण और खेल विश्वविद्यालय में नियुक्तियों से खेल व्यवस्था को नई मजबूती मिलेगी। जिलों में 33 पदाधिकारी संभालेंगे खेल की कमान जिला स्तर पर खेल गतिविधियों को गति देने के लिए 33 जिला खेल पदाधिकारियों की नियुक्ति की जा रही है। इसके लिए बीपीएससी परीक्षा ले चुका है और अब साक्षात्कार की प्रक्रिया पूरी की जानी है। नियुक्ति के बाद जिलों में खिलाड़ियों की पहचान, खेल प्रतियोगिताओं के आयोजन, प्रशिक्षण कार्यक्रमों और विभागीय योजनाओं के क्रियान्वयन की जिम्मेदारी को बेहतर तरीके से संभाला जा सकेगा। स्टेडियमों में 380 प्रशिक्षक बढ़ाएंगे खेल प्रतिभाओं की धार राज्य में तैयार हो रहे इंडोर और आउटडोर स्टेडियमों को केवल खेल आयोजन स्थल नहीं, बल्कि नियमित प्रशिक्षण केंद्र के रूप में विकसित करने की तैयारी है। इसके लिए विभिन्न खेल विधाओं में 380 प्रशिक्षकों की बहाली होगी। इन पदों के लिए बिहार कर्मचारी चयन आयोग के माध्यम से परीक्षा आयोजित की जाएगी। राजगीर अकादमी में 48 प्रशिक्षक देंगे हाई परफार्मेंस ट्रेनिंग राजगीर में विकसित हो रही आधुनिक खेल सुविधाओं को मजबूत प्रशिक्षण व्यवस्था से जोड़ने के लिए राज्य खेल अकादमी में 48 प्रशिक्षकों की नियुक्ति होगी। अकादमी में उपलब्ध खेल सुविधाओं के साथ प्रशिक्षित मानव संसाधन मिलने से खिलाड़ियों को नियमित और वैज्ञानिक तरीके से प्रशिक्षण देने में मदद मिलेगी। खेल प्राधिकरण में 301 पद, विश्वविद्यालय में 244 बिहार राज्य खेल प्राधिकरण के प्रशासनिक और खेल संबंधी कार्यों को मजबूत करने के लिए 301 पदों पर नियुक्ति की प्रक्रिया जारी है। खेल शिक्षा, प्रशिक्षण और प्रशासनिक व्यवस्था को संस्थागत मजबूती देने के लिए बिहार खेल विश्वविद्यालय में 244 पदों पर नियुक्ति की कार्रवाई चल रही है। संविदा और प्रतिनियुक्ति से भी मजबूत होगा सिस्टम खेल विभाग की विभिन्न इकाइयों में कामकाज को सुचारु रखने के लिए संविदा पर लिपिकीय कर्मियों की नियुक्ति के साथ जरूरत के अनुसार प्रतिनियुक्ति के माध्यम से भी मानव संसाधन उपलब्ध कराया जाएगा।  

रांची के करीब होने के बावजूद मेसरा स्टेशन धनबाद मंडल में, रांची मंडल ने फिर उठाई मांग

 रांची  मेसरा स्टेशन को अपने अधीन लेने की रांची रेल मंडल की वर्षों पुरानी मांग अभी पूरी नहीं हुई है। स्टेशन तो धनबाद रेल मंडल के पास ही रहा, लेकिन मंडल के सीमांकन में बदलाव के बाद रांची रेल मंडल को करीब 400 मीटर का अतिरिक्त रेल क्षेत्र जरूर मिल गया। यानी स्टेशन नहीं मिला, मगर उसकी ओर जाने वाले रास्ते में रेल मंडल का अधिकार क्षेत्र थोड़ा बढ़ गया। मेसरा स्टेशन वर्तमान में धनबाद रेल मंडल के अधीन है। इसे रांची रेल मंडल में शामिल करने की मांग पिछले कई वर्षों से उठती रही है। रांची रेल मंडल ने भी इस दिशा में पहल करते हुए मुख्यालय को पत्र भेजा है। स्थानीय यात्री संघों और सांसदों की ओर से भी रेलवे तथा रेल मंत्रालय के स्तर पर स्टेशन को रांची मंडल में शामिल करने की मांग रखी गई है। मेसरा स्टेशन रांची मंडल मुख्यालय से मात्र 19 किलोमीटर की दूरी है पर रांची रेल मंडल का तर्क है कि मेसरा स्टेशन मंडल मुख्यालय से करीब 19 किलोमीटर की दूरी पर है। ऐसे में स्टेशन को रांची मंडल के अधीन किए जाने से इसका बेहतर प्रबंधन, सुरक्षा व्यवस्था और यात्री सुविधाओं का विस्तार किया जा सकेगा। भविष्य में यहां ट्रेनों की संख्या बढ़ने की संभावना को देखते हुए भी मंडल स्तर पर बेहतर समन्वय हो सकेगा। मेसरा स्टेशन को और विकसित किया जाता और रांची रेलवे स्टेशन और हटिया स्टेशन की तरह ही भविष्य में इस स्टेशन का विकास होता। मेसरा की ओर से आने वाले यात्रियों को रांची स्टेशन तक आने की आवश्यकता नहीं पड़ती है। इसी तरह पिस्का स्टेशन को विकसित किया जा रहा है। ताकि रांची स्टेशन और हटिया स्टेशन से यात्रियों का दबाव कम हो सकेगा। स्टेशन नहीं बदला, सीमांकन जरूर बदल गया इधर, रेलवे बोर्ड ने रांची और धनबाद रेल मंडल के बीच बरकाकाना की ओर सीमांकन में बदलाव किया है। रांची-बरकाकाना रेलखंड पर मंडलीय सीमा पहले 198.918 किलोमीटर पर थी, जिसे अब 198.515 किलोमीटर पर निर्धारित किया गया है। इस बदलाव के बाद करीब 400 मीटर का रेल क्षेत्र रांची रेल मंडल की परिसीमा में आया है। इसका एक दिलचस्प पहलू यह है कि मेसरा स्टेशन को रांची मंडल में लेने की मांग के बीच स्टेशन तो अब भी धनबाद मंडल के अधीन है, लेकिन बदली हुई सीमा के कारण रांची मंडल को संबंधित क्षेत्र में एक प्वाइंट के रखरखाव की जिम्मेदारी निभानी होगी। यानी अधिकार का विस्तार हुआ, लेकिन जिस स्टेशन के लिए मांग चल रही थी, उसका नियंत्रण अभी भी नहीं बदला। पांच ट्रेनों का हो रहा परिचालन मेसरा स्टेशन से वर्तमान में करीब पांच ट्रेनों का परिचालन हो रहा है। इनमें हटिया-सांकी पैसेंजर की दोनों सेवाएं, रांची-पटना वंदे भारत एक्सप्रेस, हटिया-आसनसोल एक्सप्रेस समेत अन्य ट्रेनें शामिल हैं। यात्रियों की संख्या और भविष्य में रेल सेवाओं के विस्तार को देखते हुए स्टेशन को रांची मंडल में शामिल करने की मांग लगातार उठती रही है। फैसला रेलवे बोर्ड के स्तर पर मेसरा को रांची मंडल में शामिल करना रेलवे बोर्ड का नीतिगत मामला है। मंडलीय क्षेत्राधिकार में बदलाव के लिए संबंधित दोनों जोन और मंत्रालय स्तर पर सहमति आवश्यक होती है। ऐसे में रांची मंडल की ओर से भेजे गए पत्र और जनप्रतिनिधियों की मांग के बाद अब रेलवे बोर्ड के स्तर पर निर्णय का इंतजार है। फिलहाल मेसरा स्टेशन धनबाद मंडल के अधीन ही है, जबकि बदले सीमांकन के कारण रांची मंडल की जिम्मेदारी करीब 400 मीटर क्षेत्र तक जरूर बढ़ गई है।

नेपाल से आने-जाने वाले रेल यात्रियों की होगी जांच, जयनगर-इनरवा में बनेगी आव्रजन चौकी

 पटना भारत-नेपाल अंतरराष्ट्रीय रेल नेटवर्क पर यात्रियों की निगरानी और जांच के लिए बिहार से लगने वाली सीमा पर इमिग्रेशन पोस्ट बनाया जाएगा। जयनगर-इनरवा रेलखंड पर बनने वाली इस आव्रजन चौकी का निर्माण आइबी (इंटेलिजेंस ब्यूरो) के नेतृत्व में होगा। नेपाल सीमा की संवेदनशीलता को देखते हुए केंद्र सरकार के निर्देश पर इसके निर्माण की स्वीकृति दी गई है। रेल यात्रियों के दस्तावेज और सामान की होगी जांच इमिग्रेशन पोस्ट के साथ जयनगर-इनरवा समेत सीमावर्ती जिलों से जुड़े रेलखंड की सुरक्षा ऑडिट भी कराई जाएगी। डीजीपी विनय कुमार की अध्यक्षता में हुई रेलवे की राज्यस्तरीय सुरक्षा समिति की बैठक में इमिग्रेशन पोस्ट समेत कई महत्वपूर्ण मुद्दों पर निर्णय लिए गए। बैठक में पुलिस और रेलवे सुरक्षा से जुड़े वरिष्ठ अधिकारी मौजूद रहे। बंगाल मॉडल पर चलेगा बिहार का इमिग्रेशन पोस्ट रेलवे इमिग्रेशन पोस्ट की सुविधा उन चुनिंदा स्टेशनों पर होती है, जहां से दूसरे देशों के लिए ट्रेनें चलती हैं। पश्चिम बंगाल में बांग्लादेश जाने वाली ट्रेनों के लिए ऐसी व्यवस्था पहले से है। बिहार में भी इसी मॉडल पर इमिग्रेशन पोस्ट का संचालन किया जाएगा। इसमें आरपीएफ, राजकीय रेल पुलिस और जिला पुलिस की टीमें तैनात रहेंगी। अवैध घुसपैठ और तस्करी पर भी रहेगी नजर इमिग्रेशन पोस्ट पर अंतरराष्ट्रीय सीमा पार करने वाले यात्रियों के नागरिकता संबंधी दस्तावेज और सामान की जांच होगी। देश में प्रवेश करने और बाहर जाने वाले यात्रियों का कंप्यूटरीकृत डाटाबेस भी तैयार किया जाएगा। इससे नेपाल से ट्रेन के जरिए अवैध घुसपैठ, हथियारों और मादक पदार्थों की तस्करी जैसी गतिविधियों पर रोक लगाने में मदद मिलेगी। जनकपुर से अयोध्या तक चल सकती है ट्रेन भारत-नेपाल मैत्री परियोजना के तहत जयनगर से जनकपुर, कुर्था होते हुए बर्दीवास तक 67 किलोमीटर रेलखंड पर फिलहाल ट्रेन सेवा चल रही है। परियोजना के दो फेज का काम पूरा हो चुका है, जबकि तीसरे फेज का काम बाकी है। इसी रूट के जरिए जनकपुर से अयोध्या तक ट्रेन चलाने की भी योजना है। अगले वर्ष अप्रैल तक सेवा शुरू होने की संभावना जताई गई है। बिहार में आधा दर्जन नए रेलखंड होंगे अधिसूचित गृह विभाग की आरक्षी शाखा ने जयनगर से नेपाल सीमा इनरवा तक के रेलखंड को रेल जिला मुजफ्फरपुर के रेल थाना जयनगर के अंतर्गत अधिसूचित किया है। इसके अलावा आधा दर्जन से अधिक नए रेलखंड भी जल्द अधिसूचित किए जाएंगे। इनमें सरायगढ़-निर्मली, आरा-सासाराम, हाजीपुर-वैशाली, दनियावां-बिहारशरीफ, राजगीर-तिलैया और दरौंधा-महाराजगंज रेलखंड शामिल हैं। रेल सुरक्षा व्यवस्था को और मजबूत करने की तैयारी राज्यस्तरीय सुरक्षा समिति की बैठक में अंतरराष्ट्रीय रेल नेटवर्क के साथ बिहार के अन्य रेलखंडों की सुरक्षा व्यवस्था को मजबूत करने पर भी जोर दिया गया। नए रेलखंडों के अधिसूचित होने से संबंधित क्षेत्रों में रेल पुलिस की निगरानी और सुरक्षा व्यवस्था को और व्यवस्थित करने में मदद मिलेगी।