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2027 तक पूरा होगा काम: उपमुख्यमंत्री सिन्हा ने भूमि सर्वे के लिए ‘लास्ट चांस’ योजना को किया लॉक

पटना  बिहार में जमीन से जुड़े विवादों और उलझनों को हमेशा के लिए खत्म करने की दिशा में सरकार ने बड़ा और निर्णायक कदम उठाया है. उपमुख्यमंत्री सह राजस्व एवं भूमि सुधार मंत्री विजय कुमार सिन्हा ने साफ शब्दों में एलान किया है कि राज्य में चल रहा विशेष भूमि सर्वेक्षण किसी भी हाल में वर्ष 2027 तक पूरा कर लिया जाएगा. इस लक्ष्य में अब कोई ढिलाई, बहाना या लापरवाही बर्दाश्त नहीं होगी. 2011 में रखी गई नींव, अब दिखेगा जमीन पर असर विजय कुमार सिन्हा ने याद दिलाया कि मुख्यमंत्री नीतीश कुमार ने वर्ष 2011 में बिहार विशेष भूमि सर्वेक्षण की नींव रखी थी. उद्देश्य स्पष्ट था—भूमि अभिलेखों को दुरुस्त करना, मालिकाना हक को साफ करना और दशकों से चले आ रहे जमीन विवादों का समाधान निकालना. अब सरकार चाहती है कि यह लंबित काम तय समय सीमा में अपने अंजाम तक पहुंचे. उपमुख्यमंत्री ने आम नागरिकों को भरोसा दिलाया कि सर्वेक्षण की पूरी प्रक्रिया पारदर्शी होगी. यदि किसी भी स्तर पर गड़बड़ी, त्रुटि या मनमानी सामने आती है तो लोग विभाग में लिखित शिकायत दर्ज करा सकते हैं. ऐसी शिकायतों पर तत्काल संज्ञान लिया जाएगा और दोषी अधिकारियों की जवाबदेही तय की जाएगी. उनका कहना साफ था—सर्वे सुधार का माध्यम बने, विवाद का नहीं. पहले चरण में लगभग पूरा, दूसरे चरण में रिकॉर्ड स्वघोषणाएं सरकारी आंकड़ों के मुताबिक पहले चरण में 20 जिलों के 89 अंचलों में किस्तवार का काम 99.92 प्रतिशत और खानापुरी 94.4 प्रतिशत तक पूरा हो चुका है. करीब 31 प्रतिशत गांवों में अंतिम अधिकार अभिलेख प्रकाशित किए जा चुके हैं. वहीं दूसरे चरण में 36 जिलों के 444 अंचलों में हवाई सर्वेक्षण और ग्राम सभा की प्रक्रिया पूरी हो चुकी है और रैयतों से 2.70 करोड़ से अधिक स्वघोषणाएं प्राप्त हुई हैं. जमीन से जुड़ी अनिश्चितता खत्म करने की कोशिश भू-अभिलेख एवं परिमाप निदेशालय के अनुसार शुरुआती दौर में तकनीकी मार्गदर्शिका में देरी से काम प्रभावित हुआ, लेकिन अब प्रक्रिया रफ्तार पकड़ चुकी है. सरकार का दावा है कि सर्वे पूरा होते ही जमीन से जुड़े मुकदमे, धोखाधड़ी और भ्रम की बड़ी समस्या का समाधान संभव हो सकेगा.

बिहार में अश्लील गानों पर होगी FIR, सम्राट चौधरी ने दिया सख्त निर्देश

पटना  बिहार में अश्लील गाना बजाने पर अब कार्रवाई होगी. अगर कोई इसे हल्के में लिया तो ऐक्शन तय है. सार्वजनिक जगहों पर दोहरे अर्थ वाले अश्लील गाना बजाने पर एफआईआर की चेतावनी दी गई है. यह आदेश बिहार के डिप्टी सीएम सह गृह विभाग के मंत्री सम्राट चौधरी ने दिया है. उन्होंने इस संबंध में पुलिस को सख्त कार्रवाई करने का आदेश दिया है.  आदेश का पालन नहीं किया तो जाना पड़ेगा जेल डिप्टी सीएम सम्राट चौधरी ने चेतावनी दी है कि बस, ट्रक, ऑटो रिक्शा या सार्वजनिक स्थलों पर अश्लील और दोहरे अर्थ वाले भोजपुरी, मगही, मैथिली या अन्य भाषाओं के गाने बजाने पर कड़ी कार्रवाई की जाएगी. ऐसे में अब साफ हो गया है कि इस आदेश का पालन नहीं करने वालों को जेल की हवा भी खानी पड़ सकती है. समाज और बच्चों पर पड़ता है बुरा प्रभाव इस विषय पर सम्राट चौधरी का कहना है कि सार्वजनिक तौर पर बजने वाले अश्लील गानों से समाज व बच्चों को बुरा प्रभाव पड़ता है. इन अश्लील गाने से न केवल महिलाओं की सुरक्षा और गरिमा को ठेस पहुंचाते हैं, बल्कि समाज में फूहड़ता को भी बढ़ावा मिलता है. उन्होंने यह भी कहा कि बच्चों पर इन गानों का नकारात्मक प्रभाव पड़ रहा है, जिससे उनके मानसिकता पर गलत असर पड़ रहा है. इसके अलावा महिला के सुरक्षा के लिए भी अश्लील गानों पर लोग लगाना अनिवार्य हो गया है. सभी जिलों में विशेष अभियान चलाने का निर्देश सम्राट चौधरी ने अश्लील गानों पर रोक लगाने के लिए सभी जिलों के पुलिस अधिकारियों को विशेष अभियान चलाने का निर्देश दिया है. साथ ही उन्होंने इसका उल्लंघन करने वालों के खिलाफ  पुलिस को सख्त कानूनी कार्रवाई करने का आदेश दिया है. बता दें कि बिहार में खास कर भोजपुरी भाषा में दो अर्थ वाले गाने सुनने को मिल जाते हैं. लिखने वाले चोली-भौजी जैसे शब्दों का इस्तेमाल कर गाना लिख देते हैं और पटना में कुकुरमुत्ते की तरह खुले स्टूडियो में इसकी रिकॉर्डिंग हो जाती है. ऐसे में अगर लोग इस तरह के गानों को सुनना बंद कर दें तो इस पर रोक लग सकती है. अब देखना होगा कि नए आदेश का बिहार में कितना असर होता है.

बिहार में मजदूरी को लेकर हुआ विवाद, 200 ब्राह्मणों पर SC-ST एक्ट के तहत मामला दर्ज

दरभंगा  दरभंगा जिले के हरिनगर गांव में मजदूरी भुगतान के विवाद ने बड़ा रूप ले लिया है. इसी विवाद के बाद गांव के ब्राह्मण समुदाय के 200 से अधिक लोगों के खिलाफ SC/ST एक्ट सहित कई गंभीर धाराओं में FIR दर्ज की गई है जिसमें नामजद अभियुक्त बनाए गए हैं. मामले में अब तक 12 लोगों को पुलिस ने हिरासत में लिया है और गांव में सुरक्षा बढ़ा दी गई है. गांव के ही एक दलित परिवार ने आरोप लगाया कि घर के निर्माण कार्य के लिए की गई मजदूरी की लगभग ₹2.5 लाख की राशि का भुगतान नहीं किया गया. इसको लेकर गांव में 30 जनवरी को पंचायत भी हुई थी लेकिन मामला नहीं सुलझा. इसी बात को लेकर 31 जनवरी दोनों पक्षों में तीखी नोकझोंक और फिर मारपीट की घटना सामने आई. गौरतलब है, 30 जनवरी को ही ब्राह्मणों के तरफ से पुलिस में शिकायत भी की गई थी लेकिन आरोप है कि पुलिस ने कोई कार्रवाई नहीं की. SC ST समुदाय के लोगों ने शिकायत में जातीय गालियों और धमकी देने का भी आरोप लगाया गया है. जो गांव में नहीं रहते उन पर भी FIR  पीड़ित पक्ष ने अपनी शिकायत में 70 लोगों के नाम स्पष्ट रूप से दर्ज कराए, जबकि 140 से अधिक “अज्ञात” का उल्लेख किया. इस आधार पर पुलिस ने गांव के बड़े हिस्से खासकर ब्राह्मण समुदाय को FIR में शामिल कर लिया. चौंकाने वाली बात यह है कि कई ऐसे नाम भी FIR में हैं जो वर्षों से गांव में रहते ही नहीं हैं, जिसके बाद मामला और विवादित हो गया है. अब तक 12 लोगों को पूछताछ के लिए हिरासत में लिया गया है. गांव में अतिरिक्त पुलिस बल तैनात किया गया है ताकि किसी भी प्रकार की तनावपूर्ण स्थिति न बने. पुलिस का कहना है कि मामला संवेदनशील है और 'साक्ष्य के आधार पर ही आगे गिरफ्तारी होगी.' ग्रामीणों की प्रतिक्रिया गांव के लोगों का कहना है कि यह सिर्फ एक आर्थिक विवाद था, लेकिन इसे जातीय रंग देकर पूरे समुदाय पर मुकदमा कर दिया गया. कई लोगों ने FIR में शामिल किए गए नामों पर आपत्ति जताई है और आरोप लगाया है कि “बिना जांच के सामूहिक रूप से नाम जोड़ दिए गए.”  पुलिस अधिकारियों के अनुसार, “मामला गंभीर है. SC/ST एक्ट के तहत दर्ज शिकायत की जांच की जा रही है. किसी निर्दोष को परेशान नहीं किया जाएगा, लेकिन कानून के अनुसार कार्रवाई होगी.”दरभंगा पुलिस लगातार दोनों पक्षों से बयान ले रही है और घटना से जुड़े वीडियो व अन्य सबूतों की भी जांच कर रही है. प्रशासन स्थिति शांत बनाए रखने के लिए गांव में राउंड लगाता रहा.  

धनबाद में कड़ी सुरक्षा व्यवस्था के बीच बोर्ड परीक्षा शुरू

धनबाद. झारखंड के कोयलांचल क्षेत्र धनबाद में बुधवार 4 फरवरी से बोर्ड परीक्षाएं शुरू हो गई हैं. परीक्षा को शांतिपूर्ण और नकलमुक्त कराने के लिए जिला प्रशासन और शिक्षा विभाग पूरी तरह सतर्क नजर आया. धनबाद के विभिन्न परीक्षा केंद्रों पर सुरक्षा के पुख्ता इंतजाम किए गए हैं, ताकि किसी भी तरह का व्यवधान परीक्षा प्रक्रिया में न आए. परीक्षा केंद्रों के आसपास निषेध धारा लागू बोर्ड परीक्षा को लेकर सभी परीक्षा केंद्रों के चारों ओर 100 मीटर की परिधि में निषेध धारा लागू कर दी गई है. इस दौरान अनावश्यक भीड़, फोटो स्टेट मशीन, मोबाइल फोन और किसी भी तरह के इलेक्ट्रॉनिक उपकरण पर सख्त प्रतिबंध लगाया गया है. पुलिस बल की तैनाती के साथ-साथ मजिस्ट्रेट भी केंद्रों पर मौजूद रहे, ताकि नियमों का कड़ाई से पालन हो सके. शहीद शक्ति नाथ महतो इंटर कॉलेज में विशेष व्यवस्था धनबाद के शहीद शक्ति नाथ महतो इंटर कॉलेज परीक्षा केंद्र पर अलग ही दृश्य देखने को मिला. यहां परीक्षा देने पहुंचे छात्र-छात्राओं का गुलदस्ता देकर स्वागत किया गया. कॉलेज प्रबंधन की इस पहल से परीक्षार्थियों का मनोबल बढ़ा और वे आत्मविश्वास के साथ परीक्षा हॉल में प्रवेश करते नजर आए. सघन जांच के बाद ही मिला प्रवेश परीक्षा केंद्रों में प्रवेश से पहले छात्र-छात्राओं की बारी-बारी से सघन जांच की गई. इस दौरान बैग, घड़ी, मोबाइल फोन, इलेक्ट्रॉनिक गैजेट्स और चिट-पुर्जा की गहन तलाशी ली गई. जांच के बाद ही परीक्षार्थियों को स्कूल कैंपस में प्रवेश की अनुमति दी गई. महिला परीक्षार्थियों की जांच के लिए महिला कर्मियों की भी तैनाती की गई थी. सैकड़ों छात्र-छात्राएं परीक्षा में हुए शामिल बोर्ड परीक्षा के पहले दिन सैकड़ों छात्र-छात्राएं विभिन्न केंद्रों पर परीक्षा में शामिल हुए. प्रशासन और स्कूल प्रबंधन के समन्वय से परीक्षा शांतिपूर्ण माहौल में संपन्न कराने की पूरी कोशिश की जा रही है. अधिकारियों का कहना है कि परीक्षा अवधि के दौरान सुरक्षा और निगरानी इसी तरह सख्त बनी रहेगी.

जमशेदपुर के नामी स्कूल में 7वीं के बच्चे ने साथी को मारा बका

जमशेदपुर. सिदगोड़ा थाना क्षेत्र स्थित रामकृष्ण मिशन स्कूल में मंगलवार को सातवीं कक्षा के दो छात्रों के बीच हुआ मामूली विवाद देखते ही देखते हिंसक झगड़े में बदल गया। झगड़े के दौरान एक छात्र ने दूसरे छात्र पर चापड़ से हमला कर दिया, जिससे स्कूल परिसर में अफरा-तफरी मच गई। इस घटना में एक छात्र घायल हो गया। घटना की जानकारी मिलते ही स्कूल के शिक्षक और कर्मचारियों ने तत्काल हस्तक्षेप कर दोनों छात्रों को अलग किया और स्थिति को नियंत्रित किया। इसके बाद सिदगोड़ा थाना की पुलिस को सूचना दी गई। सूचना पाकर पुलिस मौके पर पहुंची और दोनों छात्रों को अपने साथ थाना ले गई, जहां उनसे पूछताछ की गई। हमला करने वाले छात्र ने चापड़ को अपने मोजे में छिपाकर रखा था। किसी बात को लेकर दोनों छात्रों के बीच विवाद हो गया था। पुलिस ने घटनास्थल से चापड़ बरामद कर लिया है। घायल छात्र को इलाज के लिए अस्पताल में भर्ती कराया गया, जहां प्राथमिक उपचार के बाद उसकी हालत स्थिर बताई गई। इलाज के बाद छात्र को पुनः स्कूल लाया गया। पुलिस ने दोनों छात्रों के अभिभावकों को थाना बुलाया। आपसी बातचीत के बाद और बच्चों के भविष्य को ध्यान में रखते हुए अभिभावकों ने आपसी सहमति से मामले में सुलह कर ली। हालांकि, स्कूल प्रबंधन ने इस घटना को अनुशासनहीनता का गंभीर मामला मानते हुए दोनों छात्रों को नोटिस जारी किया है। पुलिस पूरे मामले की जांच कर रही है और यह पता लगाने का प्रयास कर रही है कि छात्र के पास चापड़ कैसे पहुंचा और विवाद की असली वजह क्या थी। गौरतलब है कि शहर में हाल के दिनों में चापड़बाजी की घटनाएं लगातार सामने आ रही हैं। इससे पहले कदमा थाना क्षेत्र और बिष्टुपुर स्थित मोतीलाल नेहरू पब्लिक स्कूल में भी छात्रों के आपसी विवाद के दौरान इस तरह की घटनाएं हो चुकी हैं। चापड़ क्या है और क्यों खतरनाक? चापड़ (या चापड़बाजी) एक छोटा, छिपाने में आसान तेज धार वाला हथियार है, जो अक्सर स्कूलों में छात्रों के बीच झगड़ों में इस्तेमाल होता है। यह चाकू से भी ज्यादा खतरनाक हो सकता है क्योंकि इसे आसानी से छिपाया जा सकता है और एक झटके में गहरी चोट पहुंचा सकता है। शहर में हाल के महीनों में ऐसी घटनाएं बढ़ रही हैं, जो जुवेनाइल हिंसा और स्कूल सेफ्टी की बड़ी समस्या दर्शाती हैं। जमशेदपुर में गलत ट्रेंड यह पहली घटना नहीं है। हाल ही में कदमा थाना क्षेत्र और बिष्टुपुर के मोतीलाल नेहरू पब्लिक स्कूल में भी छात्रों के विवाद में चापड़/चाकू जैसी घटनाएं सामने आई हैं। इससे साफ है कि शहर के कुछ स्कूलों में छोटे-छोटे विवाद हिंसक रूप ले रहे हैं, जिसके पीछे एंगर मैनेजमेंट की कमी, पीयर प्रेशर, सोशल मीडिया प्रभाव या घरेलू माहौल जैसी वजहें हो सकती हैं।

मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन झामुमो के 54वें स्थापना दिवस समारोह में शामिल

धनबाद. झारखंड मुक्ति मोर्चा (JMM) आज बुधवार को अपना 54वां स्थापना दिवस मना रहा है। 4 फरवरी, 1973 को धनबाद में झामुमो की स्थापना हुई थी। इस खास माैके पर धनबाद के रणधीर वर्मा स्टेडियम (गोल्फ ग्राउंड) में आयोजित समारोह में भाग लेने के लिए झारखंड मुक्ति मोर्चा के केंद्रीय अध्यक्ष व राज्य के मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन धनबाद पहुंचे हैं। रांची से धनबाद पहुंचने पर मुख्यमंत्री का धनबाद हवाईपट्टी पर स्वागत किया गया। मुख्यमंत्री के साथ मंत्री हफीजुल हसन भी धनबाद पहुंचे थे। झारखंड मुक्ति मोर्चा का स्थापना दिवस समारोह इस बार भव्य तरीके से मनाया जाएगा। धनबाद स्थित गोल्फ मैदान में विशाल और आकर्षक पंडाल तैयार किया जा रहा है, जहां करीब 5 हजार से अधिक लोगों के बैठने की व्यवस्था की गई है। समारोह की तैयारियों को लेकर बीते मंगलवार को गोल्फ मैदान में झामुमो जिला कमेटी की एक अहम बैठक आयोजित की गई। बैठक का नेतृत्व सचेतक सह टुंडी विधायक मथुरा प्रसाद महतो ने किया। बैठक में पार्टी समर्थित प्रत्याशी चंद्रशेखर अग्रवाल, जिलाध्यक्ष लखी सोरेन, जिला सचिव मन्नू आलम समेत कई नेता और कार्यकर्ता मौजूद रहे।

बिहार के 3 जिलों में शुरू होगा डिजिटल तारामंडल का निर्माण

पटना. नए वित्तीय वर्ष में तीन जिलों में डिजिटल तारामंडल का निर्माण आरंभ हो जाएगा। विज्ञान, प्रावैधिकी एवं तकनीकी विकास विभाग ने अपने नए वित्तीय वर्ष के बजट में यह जानकारी दी है कि पूर्वी चंपारण, जमुई व पूर्णिया में केंद्र सरकार की सहायता से डिजिटल तारामंडल तथा स्पेस एंड एस्ट्रोनामी एजुकेशन सेंटर की स्थापना की जाएगी। इसके लिए 39 करोड़ रुपये की प्रशासनिक स्वीकृति प्रदान की गई है। इसका निर्माण कार्य वित्तीय वर्ष 2026-27 में शुरू करने की तैयारी है। वित्तीय वर्ष 2025-26 में पश्चिम चंपारण जिले के बगहा अनुमंडल में राजकीय पालिटेक्निक के निर्माण कार्य के लिए 73.04 करोड़ रुपये की प्रशासनिक स्वीकृति प्रदान की गई। इसका निर्माण 2026-27 में आरंभ किया जाएगा। पटना में इनक्यूबेशन सेंटर राज्य में स्थापित राजकीय अभियंत्रण महाविद्यालयों एवं एनआइटी, पटना के स्टार्टअप को सभी प्रकार की सुविधाएं जैसे तकनीकी सपोर्ट, लीगल डाक्यूमेंटेशन सपोर्ट, नेटवर्क बिजनेस कनेक्शन आदि प्रदान करने के लिए 47.76 करोड़ रुपये की लागत से एनआइटी, पटना में इनक्यूबेशन सेंटर की स्थापना की जानी है। वहीं, अभियंत्रण महाविद्यालयों में परंपरागत विधाओं के अतिरिक्त स्नातक स्तर पर आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस, इंटरनेट ऑफ थिंग्स, मशीन लर्निंग, डेटा साइंस, साइबर सुरक्षा, ब्लॉक चेन टेक्नोलॉजी, नेटवर्क, सिविल इंजीनियरिंग विथ कंप्यूटर एप्लीकेशन, थ्रीडी एनिमेशन एंड ग्राफिक्स जैसी नवीनतम विद्याओं में पाठ्यक्रमों का संचालन किया गया है।

बिहार CM के बेटे निशांत कुमार ई-रिक्शा से घूम रहे वृंदावन

पटना. धार्मिक नगरी वृंदावन में बुधवार को मुख्यमंत्री नीतीश कुमार के बेटे निशांत कुमार अपने परिवार के साथ दर्शन-पूजन के लिए पहुंचे। यह यात्रा किसी राजनीतिक या औपचारिक कार्यक्रम का हिस्सा नहीं थी, बल्कि पूरी तरह निजी और आध्यात्मिक रही। निशांत कुमार की इस यात्रा की सबसे खास बात उनका सादा अंदाज रहा। वृंदावन की गलियों में वे ई-रिक्शा से घूमते नजर आए। न कोई भारी सुरक्षा व्यवस्था, न VIP प्रोटोकॉल और न ही किसी तरह का तामझाम दिखा। स्थानीय लोगों ने उन्हें आम श्रद्धालु की तरह सहज रूप में घूमते देखा। मंदिर दर्शन और आध्यात्मिक माहौल में समय वृंदावन प्रवास के दौरान निशांत कुमार ने परिवार के साथ विभिन्न मंदिरों में दर्शन किए। उन्होंने आध्यात्मिक वातावरण में समय बिताया और कृष्ण नगरी की शांति को नजदीक से महसूस किया। यात्रा के दौरान वे पैदल घूमते और जल निकायों के आसपास भ्रमण करते भी नजर आए। तस्वीरें आए सामने निशांत कुमार की वृंदावन यात्रा की कुछ तस्वीरें और वीडियो सोशल मीडिया पर सामने आई हैं। इनमें वे ई-रिक्शा में सफर करते, गलियों में टहलते और आम श्रद्धालुओं के बीच बिना किसी विशेष पहचान के नजर आ रहे हैं। यही सादगी लोगों के बीच चर्चा का विषय बनी हुई है। लाइमलाइट से दूरी, निजी जीवन को प्राथमिकता निशांत कुमार आमतौर पर सार्वजनिक मंचों और लाइमलाइट से दूर रहते हैं। वे बहुत कम सार्वजनिक कार्यक्रमों में नजर आते हैं और निजी जीवन में सादगी पसंद माने जाते हैं। राजनीति से भी उन्होंने अब तक दूरी बनाए रखी है, हालांकि बिहार की राजनीति में उनके नाम को लेकर समय-समय पर चर्चाएं होती रहती हैं। परिवार और शिक्षा का परिचय निशांत कुमार मुख्यमंत्री नीतीश कुमार और मंजू सिन्हा के इकलौते बेटे हैं। उनकी मां एक समय स्कूल शिक्षिका थीं, जिनका निधन 2007 में हुआ था। निशांत की प्रारंभिक पढ़ाई पटना के सेंट कैरेंस स्कूल से हुई, इसके बाद उन्होंने मसूरी के मानव भारती इंडिया इंटरनेशनल स्कूल से शिक्षा ली। इंजीनियरिंग से अध्यात्म तक का सफर निशांत कुमार ने बिरला इंस्टीट्यूट ऑफ टेक्नोलॉजी (बीआईटी), मेसरा, रांची से सॉफ्टवेयर इंजीनियरिंग की पढ़ाई की है और वे पेशे से इंजीनियर हैं। राजनीति से दूर रहकर वे अधिकतर समय निजी और आध्यात्मिक गतिविधियों में बिताना पसंद करते हैं। सादगी ही पहचान वृंदावन यात्रा में दिखा निशांत कुमार का यह अंदाज एक बार फिर उनकी सादगी और निजी जीवन के प्रति झुकाव को दर्शाता है। बिना किसी विशेष व्यवस्था के धार्मिक स्थल पर पहुंचना और आम श्रद्धालु की तरह भ्रमण करना लोगों के लिए एक अलग और सकारात्मक संदेश के रूप में देखा जा रहा है।

CM नीतीश के काफिले में सेफ्टी बढ़ाने शामिल होंगी हाईटेक एसयूवी

पटना. अब तक सादगी भरी जीवनशैली और सीमित सुविधाओं वाली गाड़ियों के लिए पहचाने जाने वाले मुख्यमंत्री नीतीश कुमार जल्द ही रेंज रोवर जैसी लग्जरी और हाई-एंड एसयूवी में सफर करेंगे। यह बदलाव स्टाइल या शौक नहीं, बल्कि सुरक्षा जरूरतों के अनुरूप लिया गया प्रशासनिक फैसला बताया जा रहा है। बिहार सरकार मुख्यमंत्री के काफिले के लिए चार नई रेंज रोवर गाड़ियां शामिल करने की तैयारी में है। 2.5 करोड़ की रेंज रोवर क्यों बनी पसंद सूत्रों के मुताबिक, एक रेंज रोवर की कीमत 2.5 करोड़ रुपये से अधिक होगी। रेंज रोवर को दुनिया की सबसे सुरक्षित VVIP गाड़ियों में गिना जाता है। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी सहित कई शीर्ष संवैधानिक पदों पर बैठे नेता इसी श्रेणी की हाई-सिक्योरिटी गाड़ियों का उपयोग करते हैं। इसी मानक पर मुख्यमंत्री के लिए भी इसका चयन किया गया है। सुरक्षा का अभेद्य कवच रेंज रोवर की सबसे बड़ी खासियत इसकी बुलेट प्रूफ बॉडी और मजबूत संरचना है। इसमें मल्टी-लेयर आर्मर, बुलेट रेजिस्टेंट ग्लास और धमाके से बचाव की तकनीक होती है। आपात स्थिति में सुरक्षित एस्केप के लिए एडवांस सेफ्टी सिस्टम और हाई-ग्रेड सस्पेंशन दिया जाता है, जिससे किसी भी परिस्थिति में वाहन संतुलन बनाए रखे। एडवांस सेफ्टी और टेक्नोलॉजी इस हाईटेक एसयूवी में एडवांस कम्युनिकेशन सिस्टम, सैटेलाइट फोन सपोर्ट, नाइट विजन, 360-डिग्री कैमरा और एडास (ADAS) जैसे फीचर्स शामिल होते हैं। इसके साथ ही रन-फ्लैट टायर, ऑटोमैटिक फायर सप्रेशन सिस्टम और इलेक्ट्रॉनिक स्टेबिलिटी कंट्रोल जैसी तकनीकें इसे VVIP मूवमेंट के लिए बेहद भरोसेमंद बनाती हैं। कंफर्ट का भी रखा गया पूरा ध्यान सुरक्षा के साथ-साथ रेंज रोवर कंफर्ट के मामले में भी बेजोड़ मानी जाती है। इसमें लग्जरी सीटिंग, मल्टी-जोन क्लाइमेट कंट्रोल, साउंडप्रूफ केबिन और स्मूथ राइड क्वालिटी मिलती है। लंबे सफर के दौरान थकान कम करने के लिए एर्गोनॉमिक डिजाइन और हाई-एंड इंटीरियर का खास ख्याल रखा गया है। अभी किन गाड़ियों का करते हैं इस्तेमाल वर्तमान में मुख्यमंत्री नीतीश कुमार पटना के भीतर करीब 50 लाख रुपये की हुंडई आयोनिक 5 इलेक्ट्रिक कार से चलते हैं, जो बुलेटप्रूफ नहीं है। पटना से बाहर के दौरों में वह बुलेटप्रूफ टाटा सफारी का इस्तेमाल करते हैं। रेंज रोवर के शामिल होने से काफिले की सुरक्षा व्यवस्था एक नए स्तर पर पहुंच जाएगी। जल्द काफिले में होंगी शामिल प्रशासनिक सूत्रों के अनुसार, रेंज रोवर की खरीद प्रक्रिया तेज कर दी गई है। तकनीकी जांच और सुरक्षा मानकों की पुष्टि के बाद इन गाड़ियों को जल्द मुख्यमंत्री के काफिले में शामिल किया जाएगा। सरकार का स्पष्ट कहना है कि इसका उद्देश्य केवल मुख्यमंत्री की सुरक्षा को और अधिक मजबूत करना है, न कि लग्जरी का प्रदर्शन।

बिहार में मद्य निषेध और रजिस्ट्रेशन विभाग का बजट बढ़ा

पटना. बिहार विधानसभा में आज वित्त मंत्री विजेंद्र यादव ने वर्ष 2026-27 का बजट पेश किया. सरकार का कहना है कि वह सभी वर्गों का सम्मान करते हुए लोगों का जीवन आसान बनाने की दिशा में काम कर रही है. इस बार बिहार का बजट 3 लाख 47 करोड़ रुपये से ज्यादा का है, जो पिछले कुछ वर्षों की तुलना में काफी बड़ा है. सरकार के अनुसार, भारत दुनिया की सबसे तेज़ी से बढ़ती अर्थव्यवस्था है और बिहार भी दूसरे राज्यों के मुकाबले तेजी से आगे बढ़ रहा है.  2026-27 के लिए बिहार का कुल बजट 3,47,589.76 करोड़ रुपये है, जो पिछले साल से करीब 30,694 करोड़ ज्यादा है. बजट का मकसद बिहार को आर्थिक रूप से मजबूत और हर क्षेत्र में विकसित राज्य बनाना है. केंद्र सरकार से मिले सहयोग से राज्य की कई विकास योजनाओं को गति मिली है. सात निश्चय-3 (2025-2030) के तहत बिहार को देश के अग्रणी राज्यों में शामिल करने का लक्ष्य है. योजना का फोकस प्रति व्यक्ति आय दोगुनी करना, 1 करोड़ रोजगार देना और महिलाओं को सशक्त बनाना है.  1.56 करोड़ से ज्यादा महिलाओं वाले स्व-सहायता समूहों को पहले 10,000 रुपये मिल चुके हैं, आगे कारोबार बढ़ाने के लिए 2 लाख तक मदद मिलेगी.  अनुसूचित जाति के 94 लाख गरीब परिवारों को सूक्ष्म उद्यमी बनाने की योजना है. कृषि, डेयरी और पशुपालन जैसे क्षेत्रों में आय बढ़ाने के लिए 50,000 करोड़ रुपये का निजी निवेश लाने का लक्ष्य रखा गया है. हर प्रखंड में डिग्री और इंजीनियरिंग कॉलेज खोलने पर जोर है. जिला अस्पतालों को सुपर स्पेशियलिटी स्तर तक अपग्रेड किया जाएगा, ताकि बेहतर इलाज जिले में ही मिल सके. 5 नए एक्सप्रेस-वे और बिजली ढांचे के विस्तार से बुनियादी सुविधाएं मजबूत होंगी. शहरी गरीबों के लिए बड़ी संख्या में बहुमंजिला पक्के घर बनाए जाएंगे. बुजुर्गों को घर पर स्वास्थ्य सेवाएं और जन्म-मृत्यु जैसी सुविधाएं देने की योजना है. 2004-05 में 23,885 करोड़ से बढ़कर बजट अब 3.47 लाख करोड़ पहुंच गया है, जो राज्य की बढ़ती आर्थिक क्षमता दिखाता है. कुल खर्च में 35.14% राजस्व और 64.86% पूंजीगत व्यय है, यानी इंफ्रास्ट्रक्चर पर ज्यादा जोर. पुराने कर्ज चुकाने के लिए 22,664.83 करोड़ रुपये रखे गए हैं. कुल कर राजस्व 2,85,277.12 करोड़ रुपये रहने का अनुमान है. राज्य अपने करों से करीब 65,800 करोड़ रुपये कमाएगा, जिसमें सबसे बड़ा हिस्सा GST का होगा. बजट में राजकोषीय घाटा 39,111.80 करोड़ रुपये (लगभग 2.99%) है, जो तय सीमा के अंदर है.