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मानसून बना किसानों का सहारा, झारखंड के खेतों में लौटी हरियाली और उम्मीद

 रांची मानसून की सक्रियता और लगातार हो रही बारिश ने पंच परगना क्षेत्र (सिल्ली, बुण्डू, बरेंदा, राहे और तमाड़) के किसानों के चेहरे पर मुस्कान लौटा दी है. पिछले दो दिनों से हुई अच्छी बारिश के बाद खेतों में पर्याप्त पानी जमा होने लगा है. इसके साथ ही धान की रोपाई का कार्य भी रफ्तार पकड़ चुका है. ग्रामीण इलाकों में खेतों की रौनक लौट आई है और किसान पूरे उत्साह के साथ खेती-किसानी में जुट गए हैं. सुबह से शाम तक खेतों में जुटे किसान इन दिनों सुबह से लेकर शाम तक किसान परिवार के सदस्य और खेतिहर मजदूर धान रोपाई में लगे हुए हैं. खेतों में महिलाएं धान की पौध रोप रही हैं, जबकि पुरुष जुताई, पाटा चलाने और अन्य कृषि कार्यों में व्यस्त हैं. गांवों का माहौल पूरी तरह खेती-किसानी के रंग में रंग गया है. नर्सरी से निकाली जा रही धान की पौध पंच परगना क्षेत्र की विभिन्न पंचायतों और गांवों में किसानों ने पहले से तैयार नर्सरी से धान की पौध निकालकर रोपाई शुरू कर दी है. वहीं, कुछ स्थानों पर अभी खेतों की अंतिम तैयारी की जा रही है, ताकि अगले कुछ दिनों में रोपाई पूरी की जा सके. अच्छी बारिश से बेहतर उत्पादन की उम्मीद किसानों का कहना है कि यदि आने वाले दिनों में नियमित रूप से बारिश होती रही तो इस वर्ष धान की अच्छी पैदावार होने की उम्मीद है. उनका मानना है कि समय पर बारिश होने से खेती की लागत भी कम होगी और सिंचाई पर अतिरिक्त खर्च नहीं करना पड़ेगा. कृषि विशेषज्ञों ने बताया मौसम अनुकूल कृषि विशेषज्ञों के अनुसार धान की रोपाई के लिए खेतों में पर्याप्त नमी और पानी का होना जरूरी है. वर्तमान मौसम धान की खेती के लिए अनुकूल है. समय पर रोपाई पूरी होने से फसल की वृद्धि बेहतर होगी और उत्पादन पर सकारात्मक असर पड़ेगा. हालांकि किसानों का कहना है कि खेती पूरी तरह मौसम पर निर्भर है. यदि बीच सीजन में लंबे समय तक बारिश नहीं हुई तो फसल प्रभावित हो सकती है. गांवों की आर्थिक गतिविधियों को भी मिली रफ्तार खेती शुरू होने के साथ ही कृषि कार्यों से जुड़े मजदूरों को भी रोजगार मिलने लगा है. गांवों में आर्थिक गतिविधियां तेज हो गई हैं. कृषि उपकरण, खाद और बीज की दुकानों पर किसानों की भीड़ बढ़ने लगी है. किसान धान की खेती के लिए आवश्यक उर्वरक, बीज और अन्य कृषि सामग्री की खरीदारी में जुटे हैं.

झारखंड में निवेश को बढ़ावा देने के लिए शिक्षा और स्वास्थ्य क्षेत्र में बड़े प्रोत्साहन का ड्राफ्ट जारी

रांची  झारखंड में नई उद्योग नीति के तहत सुपर स्पेशियलिटी अस्पताल पर अधिकतम 30 करोड़ रुपये तक सब्सिडी (अनुदान) देने का प्रस्ताव दिया गया है। इसके साथ ही झारखंड की नई उद्योग नीति 2026 के तहत माइक्रो उद्योगों को 25 लाख रुपये तक का ब्याज अनुदान देने का प्रस्ताव दिया गया है। राज्य में औद्योगिक विकास को गति देने के लिए सरकार ने झारखंड औद्योगिक निवेश प्रोत्साहन नीति-2026 का ड्राफ्ट जारी किया है, जिसमें शिक्षा और स्वास्थ्य सेवा बुनियादी ढांचे की स्थापना को प्रोत्साहित करने के लिए वित्तीय प्रोत्साहनों में बड़ी बढ़ोतरी की गई है नए प्रस्तावित ड्राफ्ट में मुख्य रूप से कैपिटल इन्वेस्टमेंट (पूंजी निवेश) पर दी जाने वाली सब्सिडी की अधिकतम सीमा को काफी बढ़ा दिया गया है, जबकि अन्य प्रोत्साहन जैसे कि स्टाम्प ड्यूटी और रजिस्ट्रेशन फीस की 100% प्रतिपूर्ति को बरकरार रखा गया है। शैक्षणिक संस्थानों को बड़ा लाभ, पूंजी निवेश सब्सिडी को डेढ़ गुना बढ़ाया गया झारखंड औद्योगिक निवेश प्राेत्साहन नीति के तहत 2021 में 20 करोड़ रुपये की सीमा थी, जिसे नए ड्राफ्ट में डेढ़ गुना बढ़ाकर 30 करोड़ रुपये (भूमि को छोड़कर) कर दिया गया है। यह सब्सिडी कुल निवेश के 25% तक होगी। इसके साथ ही ब्याज सब्सिडी पांच साल की अवधि के लिए पांच प्रतिशत की ब्याज सब्सिडी दी जाएगी, जिसकी अधिकतम सीमा पांच करोड़ रुपये निर्धारित की गई है (2021 में इसकी कोई अलग सीमा नहीं थी)। सरकार की ओर से प्रस्तावित इस सुविधा को लेने के लिए उद्योगों को न्यूनतम सौ सीटें और इंजीनियरिंग की कम से कम पांच स्ट्रीम के साथ पर्याप्त बुनियादी ढांचा होने की शर्त को अनिवार्य किया गया है। स्वास्थ्य सुविधाओं के लिए मिलेगी बढ़ी हुई सहायता ड्राफ्ट में अस्पतालों और नर्सिंग कालेजों की स्थापना के लिए सब्सिडी की लीमिट में भी बढ़ोतरी की गई है। पूंजी निवेश पर 25 प्रतिशत की सब्सिडी अब अलग-अलग श्रेणियों में इस प्रकार होगी :     मल्टी-स्पेशियलिटी हास्पिटल (ग्रेड 1) : पांच करोड़ रुपये से बढ़ाकर 10 करोड़ रुपये।     मल्टी-स्पेशियलिटी हॉस्पिटल (ग्रेड II) : 12.5 करोड़ रुपये से बढ़ाकर 15 करोड़ रुपये।     सुपर-स्पेशियलिटी हास्पिटल : 25 करोड़ रुपये से बढ़ाकर 30 करोड़ रुपये।     नर्सिंग कालेज : पहले की तरह अधिकतम 1 करोड़ रुपये सब्सिडी का प्रविधान बरकरार रहेगा। इन बुनियादी सुविधाओं के लिए भी पांच साल के लिए 5 प्रतिशत की ब्याज सब्सिडी दी जाएगी, जिसकी नई अधिकतम सीमा तीन करोड़ रुपये (2021 में इस पर कोई निर्धारित सीमा नहीं थी) रखी गई है। इसके अलावा, पूर्ण स्टाम्प ड्यूटी और रजिस्ट्रेशन फीस की 100 प्रतिशत वापसी का प्रविधान भी यथावत रखा गया है। सरकार के इस ड्राफ्ट का उद्देश्य राज्य में निजी निवेश को आकर्षित करना और क्षेत्र में गुणवत्तापूर्ण शिक्षा तथा बेहतर चिकित्सा सुविधाओं का विस्तार करना है।

आठ जिलों में 60 करोड़ की लागत से आदिवासी छात्रावास निर्माण का फैसला

पटना  राज्य सरकार जनजातीय समुदाय के छात्र-छात्राओं को बेहतर शैक्षणिक सुविधाएं देने हेतु आठ जिलों में 19 छात्रावास का निर्माण कराने जा रही है। इस पर चालू वित्तीय वर्ष 2026-27 में 60 करोड़ 42 लाख रुपये खर्च होंगे। यह राशि जल्द ही पश्चिम चंपारण, कटिहार, बांका, भागलपुर, जमुई, कैमूर, रोहतास और पूर्णिया जिले को आवंटित की जाएगी। इस राशि में केंद्र सरकार का अंश 36 करोड़ 25 लाख रुपये है, जबकि राज्यांश 24 करोड़ 17 करोड़ रुपये है। प्रत्येक छात्रावास में 100 छात्रों के लिए सुविधा उपलब्ध करायी जाएगी। इन छात्रावासों का संचालन कस्तूरबा गांधी बालिका विद्यालय और नेताजी सुभाष चंद्र बोस छात्रावास की तर्ज पर किया जाएगा। ताजी सुभाष चंद्र बोस छात्रावास की तर्ज पर संचालन मिली जानकारी के मुताबिक राज्य सरकार ने विशेष रूप से कमजोर जनजातीय समूहों के विद्यार्थियों को बेहतर शैक्षणिक सुविधाएं उपलब्ध कराने के लिए महत्वपूर्ण निर्णय लिया है। प्रधानमंत्री जनजातीय आदिवासी न्याय महाअभियान के तहत छात्रावासों का निर्माण कराने का फैसला लिया गया है। इस महाअभियान का उद्देश्य विशेष रूप से कमजोर जनजातीय समूहों तक शिक्षा सहित विभिन्न आधारभूत सुविधाओं की पहुंच सुनिश्चित करना है। केंद्र सरकार के स्कूली शिक्षा एवं साक्षरता मंत्रालय के सहयोग से इन छात्रावासों का संचालन नेताजी सुभाष चंद्र बोस छात्रावास की तर्ज पर किया जाएगा। इन छात्रावासों में 15 से 18 वर्ष आयु वर्ग के विद्यार्थियों को आवासीय सुविधा उपलब्ध कराई जाएगी, जिससे उन्हें पढ़ाई के लिए बेहतर वातावरण और आवश्यक संसाधन मिल सकेंगे।

जिला स्तरीय टेस्टिंग और असेसमेंट से 2100 स्कूलों में परीक्षा सुधार अभियान तेज

रांची  जिला स्तरीय प्रोजेक्ट टीम (टेस्टिंग, इवेल्यूएशन, असेसमेंट एंड मेंटरिंग) से सरकारी विद्यालयों की रूपरेखा बदल रही है। पहली जुलाई को जिले के 2100 सरकारी विद्यालयों में प्रोजेक्ट टीम के तहत आयोजित परीक्षा में डेढ़ लाख बच्चे शामिल हुए। शिक्षा विभाग द्वारा शुरू की गई इस पहल का फलाफल सामने आने लगा है। प्रोजेक्ट टीम के तहत विद्यालयों में टेस्टिंग, इवेल्युएशन, असेसमेंट एंड मेंटरिंग को गति दी जा रही है। इसके तहत प्रोजेक्ट टीम का गठन भी किया गया है, जिसकी मदद से लगातार विद्यालयों की मानिटरिंग की जा रही है। जिला स्तरीय नोडल पदाधिकारी चिन्हित इस प्रोजेक्ट को नियंत्रित और निर्देशित करने के लिए जिला स्तरीय नोडल पदाधिकारी भी चिन्हित किए गए हैं, जिन्हें नामित करते हुए निर्देशित कार्यों में सहयोग करने के लिए प्राधिकृत किया गया है। नोडल पदाधिकारी विभिन्न गतिविधियों के माध्यम से प्रोजेक्ट टीम को संचालित कर रहे हैं। बता दें कि राज्य द्वारा संचालित रेल (रेगुलर असेसमेंट फार इंप्रूव्ड लर्निंग), एसए 1, एसए 2, आठवीं बोर्ड एवं जिले द्वारा संचालित विभिन्न परीक्षाओं जैसे प्री-एसए 1, एसए 2 और प्री-आठवीं बोर्ड की परीक्षा के सफल संचालन एवं शत प्रतिशत छात्रों की उपस्थिति, प्रश्नपत्रों को विद्यालयों को उपलब्ध कराने के उद्देश्य से कार्यक्रम में प्राथमिकता के आधार पर समाहित किया गया है। मासिक मूल्यांकन में हो रही ये पहलें     जांच परीक्षा, जेसीईआरटी के द्वारा उपलब्ध कराई गई समय सारिणी एवं प्रश्नपत्र के अनुसार संचालन     आइडियल एनईपी 2020 के पाठ्यक्रम को ससमय पूर्ण कराते हुए रेल परीक्षा के लिए छात्रों को तैयार करना     शत प्रतिशत छात्रों की उपस्थिति, छात्रों की संख्या की प्रविष्टि ई-विद्यावाहिनी ऐप पोर्टल के संबंधित खंड में समाहित करना     परीक्षा के बाद छात्र-छात्राओं की उत्तर पुस्तिकाओं का मूल्यांकन परीक्षा समाप्ति के एक सप्ताह के अंदर करते हुए प्राप्तांकों को रजिस्टर और ई-विद्यावाहिनी ऐप पोर्टल में अनिवार्य रूप से अपलोड करना     छात्र-छात्राओं के परीक्षाफल से संबंधित जानकारी पीटीएम में साझा करना     परीक्षा में निम्न प्रदर्शन करने वाले छात्र-छात्राओं के लिए शिक्षकों द्वारा विशेष शिक्षण योजना तैयार कर क्रियान्वित करना     परीक्षा में छात्रों की उपस्थिति से संबंधित डेटा का विद्यालय वार समीक्षा प्रखंड के नोडल के द्वारा करते हुए जिला नोडल पदाधिकारी के माध्यम से विभाग को उपलब्ध कराना     डीडीओ, डिस्ट्रिक्ट एपीओ, डिस्ट्रिक्ट एमआइएस, ब्लाक नोडल टीचर, बीपीओ, बीआरपीएस, सीआरपी द्वारा परीक्षा अवधि में विद्यालय भ्रमण करते हुए प्रतिवेदन नोडल पदाधिकारी के माध्यम से विभाग को उपलब्ध कराना शामिल है। इस पहल से ये मिल रहा लाभ इस पहल से सभी विद्यालयों में परीक्षा सुनिश्चित कराने में जहां मदद मिल रही है वहीं, शत-प्रतिशत छात्रों की उपस्थिति भी अनिवार्य रूप से मानिटर हो पा रही है। क्वेश्चन सेटर ग्रुप के द्वारा सभी वर्गों के लिए विषयवार प्रश्न पत्रों का निर्माण कराया जा रहा है। परीक्षा के लिए प्रश्नपत्र व्हाट्सएप ग्रुप के माध्यम से सभी विद्यालयों को उपलब्ध कराया जा रहा है। सभी विद्यालय अपने उपलब्ध संसाधन के अनुसार छात्रों को प्रश्नपत्र उपलब्ध करा रहे हैं, या ब्लैकबोर्ड पर लिखकर बच्चों के समक्ष दे रहे हैं। परीक्षा के बाद छात्र-छात्राओं की उत्तर पुस्तिकाओं का मूल्यांकन परीक्षा समाप्ति के तीन दिनों के अंदर करते हुए प्राप्तांकों को विद्यालय के रजिस्टर और विभाग को भेजा जाएगा। डेटा का विद्यालयवार समीक्षा परीक्षा में छात्रों की उपस्थिति से संबंधित डेटा का विद्यालयवार समीक्षा प्रखंड के नोडल के द्वारा करते हुए जिला नोडल पदाधिकारी के माध्यम से विभाग को उपलब्ध कराया जा रहा है। जिला नोडल पदाधिकारी, जिले के नामित विषय विशेषज्ञ शिक्षकों के साथ समन्वय स्थापित करते हुए प्रश्न पत्रों का निर्माण कराने के लिए प्राधिकृत हैं। इसका सीधा लाभ आठवीं बोर्ड के वैसे परीक्षार्थियों को भी मिलेगा जिन्हें किसी कारणवश प्रश्न पत्र या अंकपत्र नहीं मिलने की शिकायत रहती है।  

नन्हे इनोवेटर की बड़ी उपलब्धि, 7वीं के छात्र ने बनाया ऐसा सॉफ्टवेयर जो टीचर का मोबाइल करेगा लॉक

बक्सर. प्रतिभा संसाधनों की मोहताज नहीं होती। जब जिज्ञासा, मेहनत और कुछ नया करने का जुनून साथ हो, तो छोटे गांव का एक विद्यार्थी भी बड़े सपनों को हकीकत में बदल सकता है। जिले के बरुणा गांव के महज 13 वर्षीय आकाश मौर्य ने ऐसा ही उदाहरण पेश किया है। अपने गांव के एक निजी स्कूल में सातवीं कक्षा के छात्र आकाश ने 'कमांड सेंटर और लाइव लिंक' नामक एक ऐसा सॉफ्टवेयर तैयार किया है, जो विद्यालयों की पूरी व्यवस्था को डिजिटल प्लेटफॉर्म पर संचालित करने का दावा करता है। इस सॉफ्टवेयर के माध्यम से शिक्षक की उपस्थिति, विद्यार्थियों की पढ़ाई, फीस, परीक्षा परिणाम, अभिभावकों से संवाद और विद्यालय प्रबंधन जैसे कई कार्य एक ही प्लेटफॉर्म से संचालित किए जा सकते हैं। इतनी कम उम्र में तकनीक के क्षेत्र में आकाश की यह उपलब्धि न केवल बक्सर, बल्कि पूरे प्रदेश के लिए प्रेरणा का विषय बन गई है। डिजिटल स्कूल का सपना, गांव से हुई शुरुआत बरुणा निवासी आकाश मौर्य, श्याम जी सिंध के पुत्र तथा पूर्व मुखिया रामजी सिंध के पौत्र हैं। सातवीं कक्षा में अध्ययनरत आकाश का सपना देश के हर विद्यालय को तकनीक से जोड़ना है। उनका कहना है कि शिक्षा व्यवस्था को सरल, पारदर्शी और आधुनिक बनाने के उद्देश्य से इस सॉफ्टवेयर का निर्माण किया गया है। शिक्षक की उपस्थिति से मोबाइल लॉक तक की सुविधा आकाश ने बताया कि विद्यालय परिसर में प्रवेश करते ही शिक्षक की उपस्थिति स्वत: दर्ज हो जाएगी। पढ़ाई के दौरान शिक्षक का मोबाइल लॉक रहेगा, जिससे सोशल मीडिया का उपयोग नहीं हो सकेगा और कक्षा में पढ़ाई प्रभावित नहीं होगी। इससे अनुशासन और गुणवत्तापूर्ण शिक्षण को बढ़ावा मिलेगा। एक ही एप पर स्कूल की पूरी व्यवस्था इस सॉफ्टवेयर के माध्यम से अभिभावक बच्चों की उपस्थिति, परीक्षा परिणाम, होमवर्क, ऑनलाइन नोट्स, विद्यालय की गतिविधियां और ऑनलाइन प्रवेश आवेदन की जानकारी प्राप्त कर सकेंगे। इसके अलावा विद्यालय त्याग प्रमाण-पत्र, चरित्र प्रमाण-पत्र, मार्कशीट और प्रवेश-पत्र भी इसी प्लेटफॉर्म से प्राप्त किए जा सकेंगे। फीस भुगतान और एआई आधारित निगरानी इस ऐप के जरिए अभिभावक बार कोड स्कैन कर घर बैठे फीस जमा कर सकेंगे। भुगतान की आटोमैटिक रसीद भी तुरंत उपलब्ध होगी। एआई तकनीक यह भी बताएगी कि किन अभिभावकों द्वारा फीस जमा करने में लगातार विलंब किया जा रहा है। विद्यालय प्रबंधन आय-व्यय और शिक्षक वेतन भुगतान की निगरानी भी आसानी से कर सकेगा। पांच भाषाओं में काम कर रहा सॉफ्टवेयर आकाश के अनुसार फिलहाल यह सॉफ्टवेयर हिंदी, अंग्रेजी, तमिल, बांग्ला और मराठी भाषा में उपलब्ध है। अभिभावक ऑनलाइन शिकायत और सुझाव भी दर्ज कर सकते हैं। बच्चों की शैक्षणिक प्रगति और विद्यालय की हर गतिविधि की जानकारी उन्हें समय-समय पर मिलती रहेगी। छह से अधिक स्कूलों में सफल प्रयोग छात्र आकाश ने बताया कि प्रयोग के तौर पर इस सॉफ्टवेयर को छह से अधिक निजी विद्यालयों में शुरू किया जा चुका है। वहां से सकारात्मक परिणाम मिलने के बाद अब इसे बड़े स्तर पर लागू करने की योजना है। उनका लक्ष्य देशभर के विद्यालयों को इस तकनीक से जोड़ना है। टीमवर्क बना सफलता की ताकत इस कार्य में राहुल कुमार, अंकित कुमार और अजीत कुमार भी आकाश के साथ जुड़े हैं। सभी मिलकर सॉफ्टवेयर को लगातार बेहतर बनाने में जुटे हैं। टीम का मानना है कि तकनीक के माध्यम से शिक्षा व्यवस्था में बड़ा बदलाव लाया जा सकता है। जुड़वा भाई भी बना रहा अलग पहचान: आकाश का जुड़वा भाई अंकू मौर्य भी महज 13 वर्ष की उम्र में यूपीएससी की तैयारी कर रहा है। एक ही परिवार के दो बच्चों की असाधारण सोच और लक्ष्य आज क्षेत्र के विद्यार्थियों के लिए प्रेरणा का स्रोत बन गए हैं।

श्यामा प्रसाद मुखर्जी की जयंती पर सीएम ने सड़क और पार्क नामकरण का ऐलान किया

पटना आने वाले दिनों में बिहार में अगर किसी सड़क का नाम श्याम प्रसाद मुखर्जी मार्ग हो तो आपको चौंकने की जरुरत बिल्कुल नहीं है। दरअसल बिहार की सम्राट चौधरी सरकार ने डॉ. श्याम प्रसाद मुखर्जी के नाम पर बिहार में सड़कों के नामकरण का ऐलान किया है। भारतीय जनसंघ के संस्थापक श्यामा प्रसाद मुखर्जी की 125वीं जयंती पर उन्हें कई हस्तियों ने श्रद्धांजलि दी है। बिहार के मुख्यमंत्री सम्राट चौधरी ने भी डॉ. श्यामा प्रसाद मुखर्जी को श्रद्धांजलि दी। इस मौके पर अपने आधिकारिक ऐक्स हैंडल पर एक बेहद ही खास ऐलान भी किया। मुख्यमंत्री सम्राट चौधरी ने घोषणा की है कि अखण्ड भारत के लिए सर्वोच्च बलिदान देने वाले युगपुरुष, भारत सरकार के पूर्व मंत्री डॉ श्यामा प्रसाद मुखर्जी जी के नाम पर जिला मुख्यालयों में महत्वपूर्ण पार्क/सड़क का निर्माण एवं नामकरण किया जाएगा। इससे पहले एक अन्य ट्वीट में सीएम ने लिखा, 'राष्ट्रीय एकता के धरातल पर ही सुनहरे भविष्य की नींव रखी जा सकती है। – डॉ श्यामा प्रसाद मुखर्जी। एक मजबूत और एकजुट भारत निर्माण के दृढ़ निश्चयी, मानवता के उपासक, जनसंघ के संस्थापक, हमारे प्रेरणा पुंज परम श्रद्धेय डॉ. श्यामा प्रसाद मुखर्जी जी की जयंती पर उन्हें कोटिश नमन!' PM मोदी ने भी श्यामा प्रसाद मुखर्जी को दी श्रद्धांजलि प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी ने भी सोमवार को भारतीय जनसंघ के संस्थापक डॉ. श्यामा प्रसाद मुखर्जी की 125वीं जयंती पर उन्हें श्रद्धांजलि दी है। पीएम नरेंद्र मोदी ने डॉ मुखर्जी को भारत के प्रमुख राष्ट्र-निर्माताओं में से एक बताया एवं कहा कि शिक्षा, उद्योग, मानवीय सेवा और राष्ट्रीय एकता में उनके योगदान देश को विकसित भारत बनाने की दिशा में आगे बढ़ने के लिए प्रेरित करते रहते हैं। 'एक्स' पर एक पोस्ट में प्रधानमंत्री ने कहा, 'आज, डॉ. श्यामा प्रसाद मुखर्जी की 125वीं जयंती पर मैं भारत के सबसे असाधारण राष्ट्र-निर्माताओं में से एक को नमन करता हूं, जिनका जीवन विद्वता, साहस एवं राष्ट्र सेवा के प्रति अटूट समर्पण से प्रेरित रहा। उन्होंने खुद को भारत की एकता, सम्मान और प्रगति के लिए समर्पित कर दिया था।' डॉ मुखर्जी की बहुआयामी विरासत का उल्लेख करते हुए प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने कहा कि शिक्षा, शासन एवं औद्योगिक विकास जैसे विभिन्न क्षेत्रों में उनका योगदान रहा है। प्रधानमंत्री ने कहा, ‘डॉ. मुखर्जी का कई क्षेत्रों में योगदान रहा। वह एक बेहतरीन विचारक एवं शिक्षाविद् थे जिन्होंने नवाचार और भविष्य की आवश्यकता के हिसाब से सीखने-सिखाने की प्रक्रिया का समर्थन किया। उद्योग मंत्री के रूप में उन्होंने औद्योगिक आत्मनिर्भरता की नींव रखी और साथ ही यह भी सुनिश्चित किया कि पारंपरिक क्षेत्र और लोगों की आजीविका फलती-फूलती रहे। बंगाल के अकाल के दौरान उनके मानवीय प्रयासों से मुसीबत में घिरे लोगों के प्रति उनकी गहरी संवेदना झलकती थी। सबसे बढ़कर, भारत की एकता एवं अखंडता के प्रति उनकी अटूट प्रतिबद्धता प्रेरणा का एक स्थायी स्रोत बनी हुई है।’

चलते ई-रिक्शा अचानक बंद होने की समस्या खत्म, 20 हजार चालकों ने ली राहत की सांस

 रांची  शहर के ई-रिक्शा चालकों को बड़ी राहत मिली है। कथित रूप से ई-रिक्शों को दूर से नियंत्रित कर बंद करने वाले बीएटी-बीएमएस मोबाइल एप के बंद होने के बाद अब चालकों ने राहत की सांस ली है। पिछले कुछ दिनों से शहर में कई ई-रिक्शा चालकों ने शिकायत की थी कि उनके वाहन चलते-चलते अचानक बंद हो जा रहे हैं, जिससे यात्रियों और चालकों दोनों को परेशानी का सामना करना पड़ रहा था। वहीं रांची के कई ई-रिक्शा चालकों ने बताया कि किसी का वाहन तीन बार तो किसी का छह से सात बार तक अचानक बंद हो गया। सड़क पर चलते वाहन के अचानक रुक जाने से न केवल आय प्रभावित हो रही थी, बल्कि यात्रियों की सुरक्षा को लेकर भी चिंता बढ़ गई थी। कई बार व्यस्त सड़कों पर ई-रिक्शा रुकने से जाम और अफरा-तफरी की स्थिति भी बन रही थी। चालकों ने खुद निकाला समाधान चालकों के अनुसार जब उन्हें इस एप के बारे में जानकारी मिली, तो कई लोगों ने स्वयं एप डाउनलोड कर लिया। इसके बाद वाहन बंद होने पर वे उसी माध्यम से ई-रिक्शा को दोबारा चालू करने लगे। राजधानी के ज्याचालकों का कहना है कि कुछ असामाजिक तत्व इस तकनीक का दुरुपयोग कर रहे थे, जिससे उन्हें आर्थिक नुकसान उठाना पड़ रहा था। सरकार की कार्रवाई से मिली राहत मामला तेजी से फैलने के बाद भारत सरकार ने संबंधित एप पर कार्रवाई की। एप के बंद होने के बाद अब ऐसी शिकायतें लगभग समाप्त हो गई हैं। ई-रिक्शा चालकों का कहना है कि इससे काफी राहत मिली है और वे पहले की तरह सामान्य रूप से अपना काम कर पा रहे हैं। चालकों ने बताया कि यह एप मुख्य रूप से लिथियम बैटरी से संचालित ई-रिक्शों पर असर डालता था। हालांकि वर्तमान में समस्या खत्म हो गई है, लेकिन चालकों को आशंका है कि यदि भविष्य में इसी तरह का कोई दूसरा एप सामने आया तो परेशानी फिर बढ़ सकती है। रांची में करीब 20 हजार से अधिक ई-रिक्शा विभिन्न मार्गों पर संचालित होते हैं। ऐसे में समय रहते कार्रवाई नहीं होती तो यह समस्या बड़े स्तर पर परिवहन व्यवस्था और यात्रियों की सुरक्षा के लिए चुनौती बन सकती थी। बढ़ गई थी परेशानी     बीएटी-बीएमएस एप की वजह से मेरी ई-रिक्शा तीन बार चलते-चलते बंद हो गई थी। यात्री भी घबरा जाते थे। एप बंद होने के बाद अब राहत मिली है। सरकार ने समय रहते कार्रवाई की, नहीं तो चालकों की परेशानी और बढ़ जाती।     -दीपक कुमार, ई-रिक्शा चालक     मेरी गाड़ी छह-सात बार अचानक रुक गई थी। पहले समझ नहीं आया कि दिक्कत क्या है। बाद में एप के बारे में जानकारी मिली और खुद डाउनलोड कर गाड़ी चालू करनी पड़ी। अब एप बंद होने से निश्चिंत होकर काम कर रहे हैं।     -रणवीर कुमार, ई-रिक्शा चालक     चलते वाहन का अचानक बंद हो जाना बहुत खतरनाक था। इससे यात्रियों की सुरक्षा भी प्रभावित हो रही थी। एप बंद होने के बाद स्थिति सामान्य हुई है। उम्मीद है कि भविष्य में ऐसी किसी तकनीक का दुरुपयोग रोकने के लिए सख्त व्यवस्था होगी।     -विकास सिंह, ई-रिक्शा चालक  

ट्रेन में सफर के दौरान हड़कंप, आर्मी जवान पर अश्लील हरकत का आरोप, जीआरपी ने पकड़ा

पटना ट्रेन में सफर करने के दौरान यात्रियों और खासकर महिला यात्रियों की सुरक्षा एक बड़ा मुद्दा रहा है। रेल विभाग ट्रेन में यात्रियों के सुरक्षित सफर के लिए हर मुमकिन प्रयास करने का दावा करता है। लेकिन कई बार यात्रियों की सुरक्षा को लेकर हैरान कर देने वाली घटनाएं ट्रेन के अंदर ही हो जाती हैं। गोरखपुर-रांची साप्ताहिक एक्सप्रेस में भी ऐसा हुआ है। इस ट्रेन में एक महिला के साथ गंदी हरकत हुई और सबसे ज्यादा हैरानी की बात है कि इसका आरोप आर्मी के एक जवान पर लगा। ट्रेन संख्या 18630 गोरखपुर-रांची साप्ताहिक एक्सप्रेस में सेना के जावन द्वारा अकेली सफर कर रही एक युवती से छेड़खानी का मामला उजागर होने से हड़कंप मच गया है। आरोप है कि सेना का यह जवान अकेली युवती को देखकर उससे छेड़खानी कर रहा था। घटना की सूचना के बाद जीआरपी ने मोकामा स्टेशन पर आर्मी जवान सचिन तवर (34) को गिरफ्तार कर लिया। आरोपित जवान मध्य प्रदेश के इंदौर के मंगलेया थाने के छिपरा गांव का रहने वाला है। वर्तमान में वह रांची में कार्यरत है। जीआरपी ने युवती की लिखित शिकायत पर केस दर्ज कर उसे न्यायिक हिरासत में भेज दिया है। पीड़ित युवती ट्रेन संख्या 18630 गोरखपुर-रांची साप्ताहिक एक्सप्रेस के कोच संख्या बी-6 में सफर कर रही थी। उसी में सेना का जवान सचिन तवर भी सवार था। युवती का बर्थ 20 और सचिन का बर्थ-18 था। पीड़िता का आरोप है कि पटना से ट्रेन के खुलने के बाद अकेली देखकर आर्मी जवान उसे अश्लील इशारे कर रहा था। विरोध के बाद भी जवान ने बुरी नियत से उसके साथ अभद्रता करता रहा। उसकी गंदी हरकतों से परेशान होकर युवती ने इसकी शिकायत रेल कंट्रोल में कर दी। रेल कंट्रोल ने घटना की सूचना जीआरपी को दी। जिसके बाद मोकामा रेल पुलिस ने रात करीब 11:30 बजे ट्रेन के मोकामा पहुंचते ही आर्मी जवान सचिन तवर को गिरफ्तार कर लिया। मोकामा रेल थानाध्यक्ष नीतीश कुमार के अनुसार कोच में पहुंचने पर घटना के संबंध में टीटीई एवं अन्य यात्रियों ने भी पुष्टि की है। पूछताछ में पता चला कि आरोपित रांची में कार्यरत आर्मी का जवान है। अकेली यात्रा कर रही युवती को देखकर वह उसके साथ गलत हरकत कर रहा था। युवती के लिखित आवेदन पर आरोपित पर केस दर्ज किया गया है। ट्रेन में दारोगा दंपती और बच्चे को पीटा इधर नवादा जिले में केजी रेलखंड पर रविवार को गया-हावड़ा एक्सप्रेस ट्रेन की एसी बोगी में सफर कर रहे दारोगा दंपती और उनके बच्चे के साथ शरारती युवकों ने मारपीट की। एसी बोगी में जबरन सीट पर बैठने का विरोध करने पर काशीचक रेलवे स्टेशन पर शरारती तत्वों ने वैक्यूम काट कर ट्रेन को रोका और दंपती के साथ मारपीट की। इसके बाद दारोगा दंपती ने ट्रेन के इंजन के आगे खड़े होकर विरोध जताया और शरारती युवकों पर कार्रवाई की मांग की। दारोगा दंपती गयाजी के डेल्हा निवासी हरिओम कुमार और उनकी पत्नी पूजा हैं। दोनों झारखंड के पाकुड़ जिले में पदस्थापित हैं।

मतदाता सूची पुनरीक्षण में सिमडेगा आगे, गोड्डा सबसे पीछे, डिजिटल अपलोड की धीमी रफ्तार

रांची  राज्य में चल रहे मतदाता सूची के गहन पुनरीक्षण (एसआईआर) के तहत अब तक 34.62 प्रतिशत मतदाताओं को बीएलओ द्वारा गणना प्रपत्र दिए जा चुके हैं। हालांकि मतदाताओं द्वारा भरा हुआ तथा हस्ताक्षरित गणना प्रपत्र अभी 3.53 मतदाताओं के ही डिजिटली अपलोड हुए हैं। गणना प्रपत्र अपलोड करने में सिमडेगा सबसे आगे हैं, जहां 15 प्रतिशत मतदाताओं के गणना प्रपत्र डिजिटलाइज्ड कर दिए गए हैं। सबसे पीछे गोड्डा है, जहां एक भी प्रतिशत मतदाताओं के गणना प्रपत्र अभी तक अपलोड नहीं किए जा सके हैं। पांच जिलों में पांच प्रतिशत काम पूरा मतदाताओं द्वारा भरे हुए तथा हस्ताक्षरित गणना प्रपत्र अपलोड करने की बात करें तो पांच अन्य जिले ऐसे हैं, जहां पांच प्रतिशत मतदाताओं के ये कार्य पूरे किए जा चुके हैं। रामगढ़ में लगभग 10 प्रतिशत, पश्चिमी सिंहभूम में नौ प्रतिशत, कोडरमा में आठ प्रतिशत, लोहरदगा में सात प्रतिशत तथा दुमका में छह प्रतिशत मतदाताओं के गणना प्रपत्र अपलोड कर दिए गए हैं। अन्य जिलों में एक से चार प्रतिशत मतदाताओं के ही गणना प्रपत्र अपलोड हुए हैं। रांची में 2.33 प्रतिशत मतदाताओं का यह कार्य पूरा हुआ है। बताते चलें कि एसआइआर के तहत 29 जुलाई तक गणना चरण चलेगा, जिसमें मतदाताओं से गणना प्रपत्र भराए जाएंगे। प्रारूप मतदाता सूची का प्रकाशन पांच अगस्त को जिन मतदाताओं के गणना प्रपत्र जमा होंगे तथा अपलोड किए जाएंगे, उनके नाम प्रारूप मतदाता सूची में प्रकाशित होगा। प्रारूप मतदाता सूची का प्रकाशन पांच अगस्त होगा प्रारूप मतदाता सूची पर चार सितंबर तक आपत्तियां ली जाएंगी तथा तीन अक्टूबर तक आपत्तियां का निपटारा होगा। अंतिम मतदाता सूची का प्रकाशन सात अक्टूबर को होगा     वर्तमान में राज्य में कुल मतदाता : 2,64,63,236     जितने मतदाताओं को मिल चुके गणना प्रपत्र : 91,62,749     जितने मतदाताओं के गणना प्रपत्र हो चुके अपलोड 9,34,998  

झारखंड में सामान्य से 50% कम बारिश, खेती और जलाशयों पर गहराया संकट

रांची झारखंड में अलनीनो का असर गहराता जा रहा है. बीते साल राज्य में मॉनसून बेहतर था. पिछले साल अब तक राज्य में 417 मिमी बारिश हो गई थी. इस वर्ष अब तक मात्र 129 मिमी ही बारिश हुई है. राज्य में कम बारिश का असर खेती-बारी के साथ-साथ जलाशयों में भी दिख रहा है. बीते साल इस समय से खरीफ में करीब 31 फीसदी खेतों में रोपा हो गया था. इस वर्ष अब तक जिलों में रोपा भी शुरू नहीं हो पाया है. विभागीय मंत्री हर 15 दिनों में खरीफ खेती की तैयारी की समीक्षा कर रही है. रांची में 205, गढ़वा जिले में सिर्फ 18 मिमी बारिश बीते साल रांची और पश्चिम सिंहभूम में जुलाई के पहले सप्ताह तक 600 मिमी से अधिक बारिश हो गयी थी. इस वर्ष रांची में अब तक 205 मिमी बारिश हुई है. वहीं, पश्चिम सिंहभूम में अब तक मात्र 136 मिमी ही बारिश हुई है. इस वर्ष तो गढ़वा में मात्र 18 मिमी ही बारिश हुई है. वहीं, इस वर्ष राज्य में सामान्य से भी करीब 45 मिमी बारिश हुई थी. राज्य के एक भी जिले में सामान्य बारिश नहीं हुई है. सभी जिलों की स्थिति खराब है. झारखंड में बारिश की कमी से धान की रोपाई हुई कम बीते साल (2025) में जुलाई के पहले सप्ताह में 95 हजार हेक्टेयर में धान लग गया था. इस वर्ष राज्य के अधिसंख्य जिलों में अब तक धान लगना चालू भी नहीं हुआ है. अब तक मात्र तीन हजार हेक्टेयर में ही धान लग पाया है. यह संताल परगना के जिले हैं. कृषि विभाग के आंकड़ों के अनुसार 2025 में दक्षिणी छोटानागपुर प्रमंडल में 70 हजार हेक्टेयर में धान का रोपा जुलाई के पहले सप्ताह में ही हो गया था. कोल्हान में भी करीब 14 हजार हेक्टेयर में धान लग गया था. क्या कहना है मंत्री का ? कृषि मंत्री शिल्पी नेहा तिर्की ने कहा है कि अलनीनो के कारण झारखंड में सामान्य से लगभग 50 प्रतिशत कम वर्षा दर्ज की गयी है. यह चिंता का विषय है. हालांकि सरकार ने समय रहते सभी आवश्यक तैयारियां पूरी कर ली है और स्थिति पर लगातार नजर रखी जा रही है. झारखंड देश का पहला राज्य है, जिसने संभावित सुखाड़ को देखते हुए सबसे पहले अपना कंटिन्जेसी प्लान केंद्र सरकार को उपलब्ध कराया है.