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बिहार में विकास परियोजनाओं की समीक्षा, आमस-दरभंगा सड़क 2027 तक और साइंस सिटी का काम 2028 तक पूरा होगा

 पटना  सीएम सम्राट चौधरी ने मंगलवार को लोकसेवक आवास स्थित 'संकल्प' सभागार में 'बिहार गति' के अंतर्गत राज्य में 100 करोड़ रपये से अधिक की परियोजनाओं एवं केंद्र की विभिन्न योजनाओं की प्रगति की समीक्षा की। बैठक में सीएम ने संबंधित विभागों के अधिकारियों को विकास परियोजनाओं के क्रियान्वयन में तेजी लाने, समय-सीमा का पालन सुनिश्चित करने तथा जनकल्याणकारी योजनाओं का लाभ पात्र लाभुकों तक पहुंचाने के निर्देश दिए। मुख्यमंत्री ने पटना के राजेंद्र नगर स्थित डॉ. एपीजे अब्दुल कलाम साइंस सिटी में विभिन्न गैलरियों के प्रदर्शों का निर्माण कार्य वर्ष 2028 तक पूर्ण करने का निर्देश दिया। 2027 तक पूर्ण करें आमस-श‍िवरामपुर खंड का निर्माण NH-119D के अंतर्गत आमस-दरभंगा मार्ग के पैकेज-1 में 55 किलोमीटर लंबे आमस-शिवरामपुर खंड की समीक्षा के दौरान कहा कि इसे वर्ष 2027 तक पूर्ण करें। उन्होंने बिहार जलाशय पुनर्स्थापन एवं गाद प्रबंधन नीति के तहत भारतीय राष्ट्रीय राजमार्ग प्राधिकरण (NHAI) से आवश्यक समझौता करने की कार्रवाई आगे बढ़ाने का निर्देश दिया। बैठक में प्रधानमंत्री आवास योजना (ग्रामीण) की प्रगति की समीक्षा के दौरान मुख्यमंत्री ने निर्देश दिया कि आवास के लिए सर्वेक्षण की प्रक्रिया में तेजी लाई जाए। तथा प्राप्त आपत्तियों का त्वरित एवं पारदर्शी तरीके से निराकरण किया जाए, ताकि पात्र परिवारों को योजना का लाभ समय पर मिल सके। पीएम आवास योजना के तहत सर्वेक्षण एवं आपत्तियों का निराकरण करें   प्रधानमंत्री आवास योजना (ग्रामीण) के तहत 12 लाख आवास निर्माण के लक्ष्य को जल्द पूर्ण करें साथ ही बाढ़ पीड़ित परिवारों को प्राथमिकता सूची में रखें। प्रधानमंत्री जनजाति आदिवासी न्याय महाभियान की समीक्षा के दौरान विशेष रूप से कमजोर जनजातीय समूहों के पात्र परिवारों को पक्का आवास उपलब्ध कराने के उद्देश्य पर जोर दिया गया। विशेष अभियान चलाकर आदिवासी परिवारों को पक्का आवास दें निर्देश दिया कि विशेष अभियान चलाकर आदिवासी परिवारों को इसका लाभ दिलायें। मुख्यमंत्री वास स्थल क्रय सहायता योजना के तहत पात्र लाभार्थियों को आवास निर्माण के लिए भूमि उपलब्ध कराने से संबंधित स्थिति की समीक्षा की। मुख्यमंत्री ने जिलों के प्रभारी सचिव को निर्देश दिया कि सरकारी भूमि की उपलब्धता की अंचलवार समीक्षा की जाए तथा पात्र लाभार्थियों को सहायता उपलब्ध कराने में आनेवाली समस्याओं के समाधान के लिए आवश्यक कार्रवाई करें। मुख्यमंत्री ग्रामीण आवास योजना की प्रगति की समीक्षा के दौरान सीएम ने संबंधित अधिकारियों को योजना के क्रियान्वयन की नियमित निगरानी करने तथा पात्र लाभार्थियों को प्रावधानों के अनुसार लाभ उपलब्ध कराने का निर्देश दिया। अंतिम व्‍यक्‍त‍ि तक लाभ पहुंचाने को प्रत‍िबद्ध मुख्यमंत्री ने कहा कि राज्य सरकार विकास परियोजनाओं को समयबद्ध तरीके से पूरा करने तथा जनकल्याणकारी योजनाओं का लाभ अंतिम पंक्ति में खड़े व्यक्ति तक पहुंचाने के लिए प्रतिबद्ध है। उन्होंने अधिकारियों को निर्देश दिया कि परियोजनाओं एवं योजनाओं की नियमित समीक्षा करते हुए लंबित कार्यों को प्राथमिकता के आधार पर पूरा किया जाए तथा क्रियान्वयन में किसी भी प्रकार की अनावश्यक देरी न होने दी जाए। बैठक में मुख्य सचिव प्रत्यय अमृत, विकास आयुक्त मिहिर कुमार सिंह, ग्रामीण विकास विभाग के अपर मुख्य सचिव एचआर श्रीनिवास, आरसीडी के सचिव पंकज कुमार पाल, मुख्यमंत्री के सचिव लोकेश कुमार सिंह व संजय कुमार सिंह, भवन निर्माण विभाग के सचिव प्रणव कुमार, हिमांशु शर्मा सहित अन्य वरीय अधिकारी उपस्थित थे।  

गिरिडीह उपचुनाव में जीत के लिए भाजपा सक्रिय, चंपाई सोरेन और बाबूलाल मरांडी संभालेंगे मोर्चा

 रांची  अगले चार महीने में होने वाले गिरिडीह विधानसभा उपचुनाव के लिए भाजपा ने तैयारियां शुरू कर दी हैं। प्रदेश कार्यसमिति की दो दिन चली बैठक में बनी रणनीति को पार्टी सबसे पहले गिरिडीह में आजमाएगी। भाजपा सामान्य वर्ग और ओबीसी समुदाय के बीच मजबूत रही है। हालांकि, पीरटांड़ के आदिवासी बहुल बूथों पर पार्टी पिछले दो विधानसभा चुनाव से पिछड़ रही है। इसे देखते हुए इस बार भाजपा अपने आधार वोटबैंक को बंटने से रोकने और आदिवासी मतदाताओं का समर्थन हासिल करने पर ध्यान दे रही है। वैश्य समुदाय को भी एकजुट रखने की योजना है। कार्यसमिति में पंचायत चुनाव में ओबीसी आरक्षण की मांग उठाकर पार्टी ने इस दिशा में पहल की है। पीरटांड़ में बढ़त के लिए भाजपा ने पूर्व मुख्यमंत्री चम्पाई सोरेन और नेता प्रतिपक्ष बाबूलाल मरांडी को सक्रिय करने की योजना बनाई है। संताल आदिवासी बहुल इस क्षेत्र में दोनों नेता छठ के बाद प्रचार करेंगे। गिरिडीह उपचुनाव के लिए किसी प्रदेश महामंत्री को प्रभारी बनाया जाएगा। सह संगठन प्रभारी सौरभ सिंह भी त्योहार के बाद वहां कैंप करेंगे। कार्यसमिति की बैठक में शामिल राष्ट्रीय अध्यक्ष नितिन नवीन ने उपचुनाव में जीत के लिए ठोस योजना बनाने की सलाह दी है। गिरिडीह में कार्यकर्ताओं से मिल चुके हैं सौदान सिंह राष्ट्रीय सह संगठन महामंत्री सौदान सिंह अपने सप्ताह भर के प्रवास के दौरान गिरिडीह में भाजपा कार्यकर्ताओं से मिल चुके हैं। चुनाव हार चुके एक पूर्व प्रत्याशी से उन्होंने कहा कि गिरिडीह पार्टी की जीती हुई सीट थी, जिसे बरकरार नहीं रखा जा सका। उन्होंने कार्यकर्ताओं से उपचुनाव में जीत के लिए पूरी मेहनत करने की अपील की।  

Ranchi Kali Puja 2026: कुसई में 15 लाख बोतलों से बनेगा पंडाल, 40 लाख रुपये होंगे खर्च

 रांची  झारखंड की राजधानी रांची में काली पूजा की तैयारियां तेज हो गई हैं। शहर के अलग-अलग इलाकों में पूजा समितियां इस बार श्रद्धालुओं को आकर्षित करने के लिए अनूठे पंडालों का निर्माण करा रही हैं। कहीं काल्पनिक पंडाल में मां काली के दर्शन होंगे, तो कहीं अमेरिका के प्रसिद्ध स्वामी नारायण मंदिर की झलक देखने को मिलेगी। कुसई कालोनी में 15 लाख प्लास्टिक की बोतलों और चम्मचों से पंडाल बनाने की तैयारी है। वहीं, निवारणपुर में चंदन नगर की आकर्षक विद्युत सज्जा श्रद्धालुओं को आकर्षित करेगी। चुटिया के मकचुंद टोली में कुटिया के स्वरूप में पंडाल बनाकर झारखंड की कला-संस्कृति को प्रदर्शित किया जाएगा। कड़रू के कपिलदेव मैदान में काल्पनिक पंडाल के साथ मां काली की प्रतिमा स्थापित होगी। पूजा समितियां धार्मिक आयोजनों के साथ सांस्कृतिक कार्यक्रम, मीना बाजार, झूले और भोग वितरण की भी व्यवस्था कर रही हैं। 1. कडरू में काल्पनिक पंडाल में विराजेंगी 16 फीट ऊंची मां काली कडरू स्थित कपिलदेव मैदान में शक्ति क्लब काली पूजा समिति की ओर से इस वर्ष काल्पनिक पूजा पंडाल का निर्माण कराया जा रहा है। पंडाल में 16 फीट ऊंची मां काली की प्रतिमा स्थापित की जाएगी। मां के दरबार को बंगाली पूजा पद्धति के अनुरूप सजाया जाएगा। समिति की ओर से वर्ष 1987 से लगातार काली पूजा का आयोजन किया जा रहा है। शुरुआती वर्षों में पूजा पंडाल का स्वरूप और बजट सीमित था, लेकिन समय के साथ आयोजन का विस्तार हुआ है। समिति के अनुसार, पूजा पंडाल का उद्घाटन आठ नवंबर को किया जाएगा। इसके बाद नौ नवंबर को संगीत कार्यक्रम, 10 नवंबर को सांस्कृतिक कार्यक्रम और 11 नवंबर को आर्केस्ट्रा का आयोजन होगा। श्रद्धालुओं और स्थानीय लोगों के मनोरंजन के लिए मीना बाजार भी लगाया जाएगा। यहां खाने-पीने के स्टाल के साथ विभिन्न प्रकार के झूले उपलब्ध रहेंगे। समिति की ओर से पूरे आयोजन पर लगभग 20 लाख रुपये खर्च किए जाने का अनुमान है। 2. लोअर चुटिया में दिखेगा अमेरिका के स्वामी नारायण मंदिर का प्रारूप लोअर चुटिया स्थित महावीर मंदिर परिसर में नव जागृति संघ काली पूजा समिति की ओर से इस बार अमेरिका के स्वामी नारायण मंदिर के प्रारूप पर आधारित पंडाल बनाया जा रहा है। इसकी सजावट को लेकर श्रद्धालुओं में उत्सुकता है। समिति के अध्यक्ष अमन साहू ने बताया कि पंडाल के अंदर कांच और शीशे की नक्काशी की जाएगी। मां काली की 15 फीट ऊंची प्रतिमा स्थापित होगी और दरबार को स्वर्ण आभूषणों जैसी सजावट दी जाएगी। समिति वर्ष 1968 से काली पूजा करती आ रही है। इस बार पूजा पर करीब 25 लाख रुपये खर्च किए जा रहे हैं। नौ नवंबर से पंडाल परिसर में खीर, खिचड़ी और हलवा-पूड़ी सहित विभिन्न प्रकार के भोग चढ़ाए जाएंगे। बच्चों के मनोरंजन के लिए मिक्की माउस और जंपिंग जैसे झूले भी लगाए जाएंगे। मंदिर के प्रारूप, आकर्षक सजावट और भोग वितरण के कारण यह पंडाल पूजा के प्रमुख आकर्षणों में शामिल रहने की उम्मीद है। 3. मकचुंद टोली में कुटिया के स्वरूप में बनेगा पूजा पंडाल चुटिया के मकचुंद टोली में नवीन यूथ क्लब की ओर से इस वर्ष कुटिया के स्वरूप में भव्य पूजा पंडाल का निर्माण कराया जा रहा है। पंडाल की सजावट के माध्यम से श्रद्धालुओं को झारखंड की कला और संस्कृति की झलक दिखाने की तैयारी है। समिति का उद्देश्य स्थानीय सांस्कृतिक पहचान को पूजा आयोजन के साथ जोड़ना है। समिति के पदाधिकारी सिद्धार्थ पांडेय ने बताया कि पंडाल में श्रद्धालुओं की आवाजाही को व्यवस्थित रखने के लिए प्रवेश और निकास के अलग-अलग द्वार बनाए जाएंगे। इसके साथ ही विशेष विद्युत सज्जा की व्यवस्था की जा रही है। पूजा के दौरान प्रतिदिन भोग का वितरण भी किया जाएगा। समिति इस आयोजन पर करीब नौ लाख रुपये खर्च कर रही है। 4. कुसई में 15 लाख प्लास्टिक बोतलों और चम्मचों से बनेगा पंडाल कुसई कालोनी काली पूजा समिति की ओर से इस वर्ष प्लास्टिक की बोतलों और चम्मचों का इस्तेमाल कर पूजा पंडाल बनाया जा रहा है। समिति के अनुसार, पंडाल के निर्माण में लगभग 15 लाख प्लास्टिक बोतलों और चम्मचों का उपयोग किया जाएगा। इसकी खासियत 11 तोरण द्वार होंगे, जिन पर भगवान श्रीकृष्ण के जन्म से लेकर महाभारत युद्ध तक की झलक दिखाई जाएगी। समिति की सचिव मणिभूषण झा ने बताया कि पंडाल में मां काली की 15 फीट ऊंची प्रतिमा स्थापित की जाएगी। समिति इस वर्ष काली पूजा का 42वां आयोजन कर रही है। पांच दिवसीय पूजा के दौरान मीना बाजार भी लगाया जाएगा। श्रद्धालुओं के लिए झूलों और भोग की व्यवस्था रहेगी आयोजन को भव्य बनाने के लिए करीब 40 लाख रुपये खर्च किए जा रहे हैं। प्लास्टिक की बोतलों और चम्मचों से तैयार होने वाला पंडाल इस बार शहर में विशेष आकर्षण का केंद्र बन सकता है। 5. निवारणपुर में चंदन नगर की लाइटिंग से जगमगाएगा पंडाल अनंतपुर-निवारणपुर काली पूजा कमेटी की ओर से इस वर्ष काल्पनिक पंडाल का निर्माण कराया जा रहा है। यहां मां श्यामा काली की 10 फीट ऊंची प्रतिमा स्थापित की जाएगी। पंडाल परिसर को चंदन नगर की आकर्षक विद्युत सज्जा से रोशन किया जाएगा। समिति पूजा के साथ सामाजिक और सांस्कृतिक गतिविधियों को भी आयोजन का हिस्सा बना रही है। 11 नवंबर को रक्तदान शिविर लगाया जाएगा, जिसमें स्थानीय लोग रिम्स के मरीजों के लिए रक्तदान करेंगे। बच्चों के लिए चित्रांकन और शंख बजाने की प्रतियोगिता आयोजित की जाएगी। महिलाओं के लिए कैंडल लाइट भोग की व्यवस्था होगी। इसके अलावा दूसरे दिन खीर, तीसरे दिन हलवा और अंतिम दिन खिचड़ी का भोग वितरित किया जाएगा। समिति के अनुसार, विसर्जन शोभायात्रा 12 नवंबर को शाम चार बजे तपोवन मंदिर मैदान से शुरू होकर बड़ा तालाब की ओर जाएगी। पूरे पूजा आयोजन पर करीब 10 लाख रुपये खर्च होने का अनुमान है।  

Bihar Weather: तूफान ‘अर्णब’ से बिगड़ेगा मौसम, रोहतास से चंपारण तक भारी बारिश की चेतावनी जारी

पटना  Bihar Weather News बंगाल की खाड़ी में उठा चक्रवाती तूफान 'अर्णब' से बिहार में मौसम का मिजाज बिगाड़ने वाला है। इसके प्रभाव से 29 और 30 अक्टूबर को राज्य के कई हिस्सों में तेज हवा, भारी से अति भारी वर्षा और वज्रपात को लेकर चेतावनी जारी की है। अगले चार दिनों के मौसम का मिजाज को देखते हुए लोगों से सतर्क रहने की अपील की गई है। 28 अक्टूबर की सुबह से एक नवंबर तक राज्य के विभिन्न हिस्सों में चक्रवात का असर देखने को मिलेगा। इस दौरान बादलों की आवाजाही बढ़ने के साथ अधिकतम तापमान में गिरावट आएगी, जबकि न्यूनतम तापमान में वृद्धि होने की संभावना है। इसके लिए प्रदेश में यलो अलर्ट जारी किया गया है। राज्य के ज्यादातर भागों में बादलों की आवाजाही के साथ हल्के से मध्यम दर्जे की वर्षा के आसार हैं। 29 और 30 अक्टूबर को चक्रवात का प्रभाव अधिक रहने का अनुमान है। रोहतास और भभुआ में बुधवार और गुरुवार को भारी एवं 30 अक्टूबर को गोपालगंज और चंपारण के भागों में भारी वर्षा को लेकर चेतावनी जारी की गई है। एक नवंबर से चक्रवात का प्रभाव कम होने के साथ प्रदेश में छिटपुट वर्षा की संभावना है। आंध्रप्रदेश के तट से टकराएगा चक्रवात मौसम विभाग के अनुसार, 28 अक्टूबर की सुबह बापटला और विशाखापत्तनम के बीच यानम के पास आंध्र प्रदेश तट को चक्रवात पार करेगा। इस दौरान हवा की गति 115-125 किमी प्रतिघंटा रहने की संभावना है, जबकि, 140 किमी प्रतिघंटा झोंके के साथ चलने की संभावना है। अगले 24 घंटे के दौरान प्रदेश के अलग-अलग भागों में बादलों की आवाजाही के साथ कुछ स्थानों पर छिटपुट वर्षा के साथ मौसम सामान्य बना रहेगा। तापमान में आएगी गिरावट तापमान में गिरावट आने से मौसम अनुकूल बना रहेगा। सोमवार को पटना सहित 17 जिलों के अधिकतम तापमान में वृद्धि दर्ज की गई। पटना का अधिकतम तापमान 33.0 डिग्री सेल्सियस एवं 35.4 डिग्री सेल्सियस के साथ सुपौल एवं कैमूर का सर्वाधिक तापमान दर्ज किया गया। जबकि, शेष जिलों के तापमान में थोड़ी गिरावट दर्ज की गई। सोमवार को प्रदेश का मौसम शुष्क और सामान्य बना रहा।  

दिवाली-छठ की खरीदारी के लिए पटना एक्सपो में उमड़ेगा बाजार, कश्मीरी केसर से फर्नीचर तक मिलेंगे सामान

पटना  दीवाली और छठ की खरीदारी के लिए पटना के गांधी मैदान में पटना एक्सपो 2026 सज चुका है। यहां एक ही जगह पर देश के अलग-अलग राज्यों के उत्पादों की झलक देखने को मिल रही है। कपड़े, ज्वेलरी, हैंडीक्राफ्ट, फर्नीचर, घरेलू सजावट और खानपान से लेकर ऑटोमोबाइल तक के विकल्प मौजूद हैं। करीब चार लाख वर्ग फीट में फैले इस एक्सपो में 500 से अधिक स्टॉल लगाए गए हैं। खास बात यह है कि यहां 10 रुपये से लेकर लाखों रुपये तक के उत्पाद उपलब्ध हैं। चार हैंगरों में सजे 500 से ज्यादा स्टॉल पटना एक्सपो को चार वातानुकूलित हैंगरों में व्यवस्थित किया गया है, जहां अलग-अलग श्रेणियों के उत्पादों के स्टॉल लगाए गए हैं। इससे लोगों को अपनी जरूरत के सामान देखने और उनकी कीमतों की तुलना करने का मौका मिल रहा है। त्योहारों के दौरान घर सजाने, कपड़े खरीदने और उपहार तलाशने वालों के लिए यहां कई विकल्प हैं। आयोजकों के मुताबिक, यह एक्सपो 13 दिनों तक चलेगा। खरीदारी के साथ मनोरंजन और खानपान की सुविधाएं भी लोगों को आकर्षित कर रही हैं। कश्मीरी केसर से केरल के चिप्स तक, देशभर के उत्पाद एक्सपो में देश के अलग-अलग हिस्सों की खासियत देखने को मिल रही है। पंजाब के सूट और कपड़ों के साथ मधुबनी कला से सजे परिधान भी उपलब्ध हैं। कश्मीर के पारंपरिक उत्पाद, केसर और खजूर के स्टॉल लोगों के लिए आकर्षण का केंद्र हैं। वहीं, केरल के विभिन्न प्रकार के चिप्स समेत दूसरे राज्यों के उत्पाद भी यहां मिल रहे हैं। इस तरह स्थानीय बाजारों से अलग-अलग जगहों के उत्पाद एक ही परिसर में देखने का अवसर मिल रहा है। कपड़े-ज्वेलरी से लेकर फर्नीचर तक की खरीदारी त्योहारों के मौसम में घर और पहनावे को नया लुक देने के लिए एक्सपो में कई तरह के विकल्प मौजूद हैं। यहां कपड़ों, ज्वेलरी, हैंडीक्राफ्ट और घरेलू उपयोग की वस्तुओं के स्टॉल लगाए गए हैं। घर की सजावट और फर्नीचर में रुचि रखने वालों के लिए कान्हा फर्नीचर का पूरा हैंगर भी उपलब्ध है। अलग-अलग स्टॉलों पर उत्पादों की विविधता के साथ छूट के ऑफर भी दिए जा रहे हैं। हालांकि, छूट और कीमतें संबंधित स्टॉल के अनुसार अलग-अलग हो सकती हैं गाड़ी खरीदने की सोच रहे हैं तो यहां भी विकल्प पटना एक्सपो सिर्फ त्योहारों की खरीदारी तक सीमित नहीं है। यहां ऑटोमोबाइल, रियल एस्टेट, बैंकिंग और एजुकेशन सेक्टर से जुड़े स्टॉल भी लगाए गए हैं। रॉयल एनफील्ड और टीवीएस रिवर ईवी जैसे ब्रांडों की मौजूदगी से वाहन खरीदने की योजना बना रहे लोगों को भी विकल्प देखने का मौका मिल रहा है। इसके अलावा, विभिन्न कंपनियों और संस्थानों के स्टॉल के जरिए लोग संबंधित सेवाओं और उत्पादों की जानकारी हासिल कर सकते हैं। शॉपिंग के बीच बरिस्ता, पिज्जा हट और केएफसी का स्वाद मेले में खरीदारी के साथ खाने-पीने की व्यवस्था भी की गई है। यहां बरिस्ता, पिज्जा हट और केएफसी जैसे ब्रांडों के विकल्प मौजूद हैं। परिवार और दोस्तों के साथ आने वाले लोग खरीदारी के बीच खानपान का आनंद ले सकते हैं। इससे एक्सपो में खरीदारी के साथ मनोरंजन और घूमने-फिरने का अनुभव भी मिलता है। त्योहारों की तैयारियों के बीच एक ही जगह पर कई तरह की गतिविधियां लोगों के लिए आकर्षण बन सकती हैं। बच्चों और युवाओं को प्रतिभा दिखाने का मौका पटना एक्सपो में खरीदारी के अलावा बच्चों और युवाओं के लिए विभिन्न प्रतियोगिताएं भी आयोजित की जा रही हैं। इनमें सोलो डांस, ग्रुप डांस, गायन, चित्रकला और फैंसी ड्रेस जैसी गतिविधियां शामिल हैं। आयोजकों की ओर से इन प्रतियोगिताओं के लिए निशुल्क रजिस्ट्रेशन की सुविधा दी गई है। इससे प्रतिभागियों को अपनी कला और हुनर दिखाने का मंच मिल रहा है। परिवार के साथ मेले में पहुंचने वाले लोगों के लिए ये गतिविधियां अतिरिक्त आकर्षण का केंद्र हैं। गेट नंबर 7 से एंट्री, टिकट की कीमत 20 रुपये गांधी मैदान में आयोजित पटना एक्सपो 2026 में प्रवेश के लिए गेट नंबर 7 का इस्तेमाल किया जा सकता है। मेले में एंट्री टिकट की कीमत 20 रुपये रखी गई है। इसके बाद लोग अलग-अलग हैंगरों में जाकर अपनी पसंद और जरूरत के अनुसार उत्पाद देख सकते हैं। कपड़ों और ज्वेलरी से लेकर घरेलू सामान और खानपान तक के विकल्प यहां मौजूद हैं।

झारखंड में धान खरीद की तैयारी तेज, किसानों को MSP के साथ बढ़ा बोनस; कैबिनेट बैठक में लग सकती है मुहर

 रांची झारखंड में सरकारी केंद्रों पर धान बेचनेवाले किसानों को अब बढ़ा हुआ बोनस मिलेगा। खाद्य आपूर्ति विभाग ने किसानों को धान के न्यूनतम समर्थन मूल्य (एमएसपी) पर 84 रुपये के बोनस को 25 रुपये प्रति क्विंटल बढ़ाने का निर्णय लिया है। किसानों को अब धान बिक्री पर प्रति क्विंटल 109 रुपये बोनस मिलेगा। मंगलवार को होनेवाली कैबिनेट की बैठक में इसपर सहमति मिल सकती है। सरकार के इस निर्णय से राज्य सरकार पर 43.60 करोड़ रुपये का अतिरिक्त बोझ पड़ेगा। इसके अलावा कैबिनेट की बैठक में लगभग तीन दर्जन प्रस्तावों पर चर्चा होगी। इनमें सड़क निर्माण, ग्रामीण विकास और नगर विकास विभाग के कई प्रस्ताव हैं। कैबिनेट की बैठक में नवंबर के पहले सप्ताह में झारखंड विधानसभा के विशेष सत्र बुलाने पर भी निर्णय हो सकता है। इस सत्र में खान एवं खनिज (विकास एवं विनियमन) संशोधन अधिनियम, 2026 के विरोध में प्रस्ताव पारित कराने की तैयारी है। कैबिनेट की बैठक में जेपीएससी के अध्यक्ष एवं सदस्यों की नियुक्ति पर भी निर्भर हो सकता है। झारखंड में धान अधिप्राप्ति का लक्ष्य संशोधित भी किया गया है। अब यह लक्ष्य 40 लाख क्विंटल निर्धारित किया गया है। दैनिक जागरण पहले ही बता चुका है कि 50 लाख क्विंटल धान अधिप्राप्ति का लक्ष्य कम किया जाएगा। हालांकि बाद में हुए विभागीय आकलन के अनुसार, केंद्र सरकार के एनएफएसए सेंट्रल पूल के लिए 19.60 लाख क्विंटल तथा झारखंड राज्य खाद्य सुरक्षा योजना के लिए 19,79,412 क्विंटल धान की आवश्यकता का अनुमान लगाया गया। इसी कारण से यह लक्ष्य कम हुआ। महत्वपूर्ण जानकारियां सरकार के नियमों के अनुसार, किसान न्यूनतम समर्थन मूल्य पर प्रति एकड़ अधिकतम 16 क्विंटल और एक किसान कुल जोत के आधार पर अधिकतम 200 क्विंटल तक धान बेच सकता है। किसानों के इसके पूर्व ही ई-उपार्जन पोर्टल पर अपना निबंधन कराना होगा और जमीन का सत्यापन कराते हुए और ई-केवाइसी कराना अनिवार्य होगा। कीमत : 2,550 रुपये प्रति क्विंटल और ग्रेड ए धान पर 2,570 रुपये प्रति क्विंटल की दर से किसानों को भुगतान किया जाएगा। किसान अपने नजदीकी धान अधिप्राप्ति केंद्र पर सुबह 10 बजे से शाम चार बजे के बीच धान बेच सकते हैं। झारखंड सरकार किसानों के हितों और उनके आर्थिक सशक्तीकरण के लिए पूरी प्रतिबद्धता के साथ काम कर रही है। मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन के निर्देश पर किसानों को लाभ देने का प्रयास किया गया है। – डॉ. इरफान अंसारी, मंत्री, खाद्य एवं आपूर्ति विभाग।  

Makhana Farming: बिहार के 5 जिलों में होती है मखाने की खेती, जानिए कैसे कीचड़ से निकलता है करोड़ों का सुपरफूड

 पटना  Makhana Farming in Bihar: किसी तालाब या दलदली पोखर के ऊपर तैरते कांटों से भरे बड़े-बड़े हरे पत्तों को देखकर कोई अंदाजा भी नहीं लगा सकता कि पानी की गहराइयों में एक अनमोल खजाना छिपा है। यह कहानी है मिथिला के ‘सफेद मोती’ यानी मखाना की, जिसे आज पूरी दुनिया ‘सुपरफूड’ के रूप में पहचानती है। दुनियाभर में दबदबा भारत दुनिया का 90 प्रतिशत मखाने का उत्पादन करता है और इसमें से 85 से 90 प्रतिशत से भी अधिक हिस्सा अकेले बिहार (खासकर दरभंगा, मधुबनी, पूर्णिया, कटिहार और सहरसा) में पैदा होता है। बिहार के तालाबों के कीचड़ से निकलकर यह न्यूयॉर्क और लंदन के सुपरमार्केट्स में करोड़ों का 'सुपरफूड' बन चुका है। यह सिर्फ एक सूखा मेवा नहीं, बल्कि मिथिला की संस्कृति, पूजा-हवन की परंपरा और लगभग 50,000 किसान परिवारों की आजीविका की रीढ़ है। पानी में पलता है सुपरफूड (Makhana Farming) मखाने का कुरकुरा और सफेद रूप किसी जादू से कम नहीं है, लेकिन इसके पीछे किसान की हाड़-तोड़ मेहनत और तपस्या छिपी होती है। मखाने की खेती पारंपरिक रूप से तालाबों में या आधुनिक तरीके से उथले खेतों में की जाती है। बीज डालने के बाद पानी के भीतर से बड़े-बड़े कांटेदार गोल पत्ते सतह पर फैल जाते हैं। इन्हीं में बैंगनी-गुलाबी रंग के सुंदर फूल खिलते हैं, जो बाद में कांटेदार फल बन जाते हैं। पूरी तरह पकने के बाद फल पानी के भीतर ही फट जाता है। शुरुआत में बीजों के ऊपर लाल रंग का गूदा (अरिल) होता है, जिसके सहारे वे पानी पर तैरते हैं, लेकिन 2-3 दिन बाद गूदा गलते ही भारी काले बीज तालाब या खेत की तलहटी (कीचड़) में बैठ जाते हैं। दलदल से दुनिया की थाली का सफर (Makhana Processing) मखाने के औषधीय गुण और कुरकुरा रूप किसी जादू से कम नहीं है, लेकिन इसके पीछे किसान की कठिनमेहनत और तपस्या छिपी होती है। तालाब की तलहटी से खोज: कांटेदार पौधों के नीचे से किसान पानी में डुबकी लगाकर काले बीजों (गुड़ी) को कीचड़ से बाहर निकालते हैं। धूप में सुखाना और छंटाई: निकाले गए बीजों को धूप में सुखाया जाता है और आकार के अनुसार अलग-अलग छांटा जाता है। आग की भट्टी में तपना: इसके बाद शुरू होती है सबसे कठिन परीक्षा। मिट्टी की हांडी या लोहे की कड़ाही में इन बीजों को 250 से 320 के खौलते तापमान पर भुना जाता है। हथौड़े की थाप और लावा का जन्म: भूनते ही गरम-गरम बीजों को लकड़ी की थापी (हथौड़े) से बड़ी तेजी से फोड़ा जाता है। एक पल की भी देरी हो जाए तो मखाना खराब हो सकता है। किसानों के हाथों पर पड़ने वाले गर्म छालों और पसीने की इसी भट्टी से फूटकर निकलता है सफेद, हल्का और फूला हुआ ‘मखाना लावा’। फिर इसकी पॉलिशिंग कर पैकिंग की जाती है और फिर देश-विदेश भेजा जाता है। सेहत का खजाना आज की भागदौड़ भरी जिंदगी में जब लोग सेहतमंद खान-पान की तलाश कर रहे हैं, तो मखाना सबसे पसंदीदा स्नैक बनकर उभरा है। वजन घटाने में मददगार: 100 ग्राम मखाने में फैट (वसा) की मात्रा न के बराबर (सिर्फ 0.1 ग्राम) होती है, जबकि इसमें 9.7 ग्राम प्रोटीन और प्रचुर मात्रा में फाइबर मिलता है। ताकतवर अमीनो एसिड: इसका अमीनो एसिड इंडेक्स (89% से 93%) दूध, गेहूं और चावल से भी बेहतर माना गया है। दिल और उम्र का रखवाला: इसमें मौजूद खास एंटीऑक्सीडेंट्स और फ्लेवोनोइड्स दिल को मजबूत रखने और बढ़ती उम्र के असर को धीमा करने (एंटी-एजिंग) में मदद करते हैं। स्वादिष्ट रूप अनेक: चाहे व्रत की मखाना खीर हो, शाम की चाय के साथ देसी घी में भुना हुआ नमकीन मखाना, या फिर आज के दौर की मखाना कुकीज और फ्लेक्स हर स्वाद में लाजवाब लगता है।

28 अक्टूबर को आंध्र प्रदेश तट से टकरा सकता है चक्रवात, झारखंड में जलजमाव और बाढ़ को लेकर प्रशासन अलर्ट

 रांची  बंगाल की खाड़ी में सक्रिय चक्रवाती तूफान अर्णब लगातार शक्तिशाली होता जा रहा है। मौसम विभाग के अनुसार, तूफान पश्चिम-मध्य और उससे लगे पूर्व-मध्य बंगाल की खाड़ी के ऊपर केंद्रित है। इसके अगले दो दिनों में और अधिक तीव्र होने की आशंका है। मौसम विभाग ने आंध्र प्रदेश और उससे लगे दक्षिण ओडिशा तटों के लिए चक्रवात चेतावनी का रेड अलर्ट जारी किया है। वहीं मौसम विभाग के अनुसार, चक्रवाती तूफान अर्णब पिछले छह घंटों के दौरान लगभग 13 किमी प्रति घंटे की रफ्तार से पश्चिम की ओर बढ़ा है। सोमवार सुबह 11:30 बजे यह 15.5 डिग्री उत्तरी अक्षांश और 88.2 डिग्री पूर्वी देशांतर के पास स्थित था। 28 अक्टूबर को तट से टकराने की आशंका मौसम विभाग के पूर्वानुमान के अनुसार, तूफान आगे उत्तर-पश्चिम दिशा में बढ़ेगा। इसके 28 अक्टूबर की पूर्वाह्न तक आंध्र प्रदेश के तट पर बापटला और विशाखापत्तनम के बीच यनम के निकट पहुंचने की बहुत अधिक संभावना है। इस दौरान अधिकतम निरंतर हवा की गति 115 से 125 किमी प्रति घंटे रह सकती है। हवा के झोंकों की रफ्तार 140 किमी प्रति घंटे तक पहुंचने का अनुमान है। तट से टकराने के समय तूफान अति प्रचंड चक्रवाती तूफान की श्रेणी में रह सकता है। समुद्र में बनी रहेगी खतरनाक स्थिति तूफान की स्थिति पर मौसम विभाग लगातार नजर रख रहा है। इसके प्रभाव से समुद्र में तेज हवाएं और ऊंची लहरें उठने की आशंका है। तटीय क्षेत्रों में रहने वाले लोगों को मौसम विभाग और स्थानीय प्रशासन की चेतावनियों का पालन करने की सलाह दी गई है। मछुआरों और समुद्र में जाने वाले लोगों को विशेष सतर्कता बरतने की जरूरत है। जिला प्रशासन ने सभी नागरिकों से अनुरोध किया है कि वे मौसम विभाग एवं प्रशासन द्वारा जारी सलाह का पालन करें तथा सतर्क रहें। स्थिति पर निरंतर नजर रखी जा रही है तथा आवश्यकतानुसार आगे के निर्देश जारी किए जाएंगे। मौसम विभाग के अनुसार, चक्रवात ‘अर्नब’ के प्रभाव से दिनांक 28 अक्टूबर से 30 अक्टूबर तक लगातार वर्षा होने की संभावना है। इसके कारण रांची में जलजमाव की स्थिति उत्पन्न हो सकती है। जिसको लेकर जिला प्रशासन अलर्ट मोड में है। शहर के निचले इलाकों एवं सड़कों पर जलजमाव की संभावना है। कच्चे मकान, झुग्गी-झोपड़ियां तथा कमजोर मकानों को आंशिक या भारी नुकसान पहुंच सकता है। नदियां एवं बड़े नाले उफान पर आ सकते हैं। निचले क्षेत्रों में बाढ़ जैसी स्थिति बनने की आशंका है। खेतों में पानी जमा होने से खड़ी फसलों को नुकसान पहुंचाने की संभावना भी व्यक्त की गई है। उपायुक्त ने सभी संबंधित अधिकारियों को सख्त निर्देश दिए हैं कि वे स्थिति पर निरंतर नजर बनाए रखें तथा आवश्यक तैयारी सुनिश्चित करें। जिला प्रशासन द्वारा जारी दिशा निर्देश – आपदा प्रबंधन, राजस्व, नगर निगम, पुलिस, स्वास्थ्य, विद्युत, जल संसाधन एवं संबंधित विभागों के अधिकारी 28 से 30 अक्टूबर तक लगातार निगरानी रखें। – निचले क्षेत्रों, जलजमाव प्रवण क्षेत्रों, नदियों एवं बड़े नालों की नियमित मानिटरिंग की जाए। – सड़कों, नालियों एवं जल निकासी व्यवस्था को साफ रखा जाए। – कच्चे मकानों, झुग्गी-झोपड़ियों एवं कमजोर संरचनाओं वाले क्षेत्रों में विशेष सतर्कता बरती जाए तथा आवश्यकता पड़ने पर लोगों को सुरक्षित स्थानों पर स्थानांतरित करने की व्यवस्था सुनिश्चित की जाए। – खेतों में जलजमाव की स्थिति से फसलों की सुरक्षा के लिए किसानों को उचित सलाह दी जाए। आम नागरिकों से अपील – निचले क्षेत्रों एवं जलजमाव वाले क्षेत्रों में रहने वाले नागरिक विशेष सावधानी बरतें। – अनावश्यक बाहर न निकलें। – कच्चे मकानों में रहने वाले परिवार आवश्यक सावधानी अपनाएं तथा स्थानीय प्रशासन के निर्देशों का पालन करें। – नदियों, नालों एवं जलभराव वाले क्षेत्रों के निकट न जाएं। – किसी भी आपात स्थिति में स्थानीय प्रशासन, पुलिस या आपदा नियंत्रण कक्ष से संपर्क करें। ये दिए गए सुरक्षा के दिशा निर्देश – वर्षा और आंधी के दौरान आकाशीय बिजली गिरने की भारी आशंका है। गरज-चमक शुरू होने पर तुरंत किसी पक्के मकान या सुरक्षित स्थान पर शरण लें। – तेज हवाओं के कारण पुराने पेड़, बिजली के खंभे और होर्डिंग्स गिर सकते हैं। अपनी गाड़ियों को इनके नीचे पार्क न करें। – शहर के निचले शहरी क्षेत्रों में भारी वर्षा से पानी भर सकता है। जलभराव वाली सड़कों पर वाहन चलाने से बचें। – घरों में बिजली के उतार-चढ़ाव या शार्ट सर्किट से बचने के लिए आंधी-तूफान के समय मुख्य स्विच बंद कर दें और कीमती इलेक्ट्रानिक सामानों के प्लग निकाल दें। जिला प्रशासन ने सभी नागरिकों से अनुरोध किया है कि वे मौसम विभाग एवं प्रशासन द्वारा जारी सलाह का पालन करें तथा सतर्क रहें। स्थिति पर निरंतर नजर रखी जा रही है तथा आवश्यकता के अनुसार आगे के निर्देश जारी किए जाएंगे।  

बिहार में बाढ़ से बर्बाद खेतों को फिर खेती योग्य बनाने की तैयारी, किसानों को मिलेगी आर्थिक सहायता

पटना  मुख्यमंत्री सम्राट चौधरी ने बिहार में बाढ़ प्रभावित किसानों को बड़ा तोहफा दिया है। दरअसल सरकार ने बाढ़ की वजह से खेतों में जमी गाद, रेत और बालू से त्रस्त किसानों को सरकार ने राहत देने का फैसला किया है। इसके तहत पटना समेत प्रदेश के 22 जिलों के बाढ़ प्रभावित किसानों को सरकार कृषि योग्य भूमि और मत्स्य प्रक्षेत्रों पर जमा बालू, रेत एवं गाद हटाने के लिए सहायता राशि देगी। मुख्यमंत्री सम्राट चौधरी ने सोमवार को सोशल मीडिया एक्स पर पोस्ट कर इसकी जानकारी दी। इस पहल का उद्देश्य बाढ़ से प्रभावित किसानों को उनकी जमीन को दोबारा खेती योग्य बनाने में सहायता करना है। मुख्यमंत्री ने कहा कि इस प्रावधान के तहत संबंधित किसान को प्रति हेक्टेयर 18 हजार रुपये की सहायता राशि दी जाती है। साथ ही, प्रत्येक पात्र किसान को न्यूनतम 2200 रुपये की सहायता उपलब्ध कराई जायेगी। इससे बाढ़ के बाद खेतों में बालू, रेत और गाद जमा होने के कारण हो रही दिक्कतों को दूर करने में मदद मिलेगी। सरकार की इस पहल से किसान अपनी जमीन को अगली फसल की बुआई के लिए तैयार कर सकेंगे। मुख्यमंत्री के निर्देश पर आपदा प्रबंधन विभाग ने संबंधित 22 जिलों के जिलाधिकारियों को प्रभावित कृषि योग्य भूमि तथा मत्स्य प्रक्षेत्रों का स्थलीय सत्यापन कराने का निर्देश दिया है। सत्यापन के दौरान जमीन पर जमा बालू, रेत एवं गाद के जमाव का आकलन किया जाएगा। इसके आधार पर जिले की ओर से एसडीआरएफ या एनडीआरएफ के निर्धारित सहायता मानकों के तहत राशि की मांग करनी होगी। गौर हो कि इस साल गंगा, सोन, गंडक, कोसी सहित अन्य नदियों में आई बाढ़ का पानी उतरने के बाद खेतों में बालू, रेत एवं गाद जमा होने की समस्या सामने आयी है। इससे जमीन को दोबारा खेती के अनुकूल बनाने में किसानों को अतिरिक्त खर्च उठाना पड़ सकता है। लाखों किसानों को जगी उम्मीद सरकार हर वर्ष बाढ़ प्रभावित इलाकों के किसानों को कृषि इनपुट अनुदान देती है। इस वर्ष भी अनुदान बांटे गए हैं। लेकिन, कृषि इनपुट अनुदान उन्हीं किसानों को मिलता है, जिनकी फसल को बाढ़ से क्षति पहुंची हो। उन किसानों की कोई मदद नहीं मिल पाती है, जिनके खेतों में रेत या गाद जमा हो जाती है। ऐसे किसानों को अब उम्मीद जगी है। इन जिलों में आकलन पटना, भोजपुर, सारण, वैशाली, भागलपुर, बेगूसराय, बक्सर, समस्तीपुर, मुंगेर, कटिहार, लखीसराय, खगड़िया, पूर्णिया, मधेपुरा, अरवल, पश्चिम चम्पारण, पूर्वी चम्पारण, गोपालगंज, दरभंगा, मुजफ्फरपुर, सुपौल एवं सहरसा।

बिहार में राशन कार्ड पर बड़ा एक्शन! 35 लाख फर्जी कार्ड निरस्त, 7.40 लाख परिवारों को मिली खुशखबरी

 पटना राज्य में नए राशन कार्ड के लिए 13 लाख 93 हजार 704 आवेदन आए हैं। इनमें से 7 लाख 40 हजार 925 नए राशन कार्ड पात्र परिवारों को जारी किए जा चुके हैं और इससे 14 लाख 61 हजार 286 नए सदस्य जुड़े हैं। शेष आवेदनों का निष्पादन प्रक्रियाधीन है। राष्ट्रीय खाद्य सुरक्षा अधिनियम के तहत राज्य में 2 करोड़ 9 लाख राशन कार्डों के माध्यम से 8.45 करोड़ लोग लाभान्वित हैं। इनमें से 6.54 करोड़ लाभुकों का ई-केवाइसी पूरा हो चुका है, जो लगभग 80.07 प्रतिशत है। राज्य में 1.85 करोड़ राशन कार्डों पर खाद्यान्न वितरण किया जा रहा है। अक्टूबर 2026 में वन नेशन, वन राशन कार्ड व्यवस्था के तहत बिहार के 3.65 लाख राशन कार्डधारियों ने दूसरे राज्यों में खाद्यान्न प्राप्त किया है। सोमवार को खाद्य एवं उपभोक्ता संरक्षण मंत्री अशोक चौधरी की अध्यक्षता में आयोजित राज्य स्तरीय सतर्कता समिति की बैठक में यह जानकारी दी गई। जन वितरण प्रणाली दुकानों की 4,910 रिक्तियों के विरुद्ध आए 50 हजार आवेदन समीक्षा में यह बात भी सामने आई कि राज्य में जन वितरण प्रणाली दुकानों की 4,910 रिक्तियां हैं। इसकी अनुज्ञप्ति (लाइसेंस) जारी करने के लिए विज्ञापन दिया गया जिसके विरुद्ध 50,031 आवेदन आए हैं। इनमें से अबतक 1,237 राशन दुकानों के लिए पात्र आवेदकों को अनुज्ञप्ति जारी की जा चुकी हैं। शेष मामलों का समयबद्ध निष्पादन करने तथा पात्र आवेदकों को निर्धारित प्रक्रिया के अनुसार अनुज्ञप्ति जारी करने का निर्देश दिया गया। बैठक में शिकायतों के निवारण की समीक्षा की गई। कुल 4,069 शिकायतों में से 3,383 का निष्पादन किया जा चुका है, जो 83.14 प्रतिशत है। शिकायत निवारण प्रणाली को फ्लाइंग स्क्वाड गठित होगा खाद्य एवं उपभोक्ता संरक्षण विभाग में शिकायत निवारण प्रणाली को और सुदृढ़ करने के लिए फ्लाइंग स्क्वाड गठित किया जाएगा। ताकि, शिकायतों का त्वरित एवं प्रभावी निवारण सुनिश्चित हो सके। इससे योजनाओं के क्रियान्वयन की निगरानी और शिकायतों के निष्पादन को अधिक प्रभावी बनाया जा सकेगा। बता दें कि पूर्व में केंद्र सरकार द्वारा बिहार को संदिग्ध 57 लाख एक हजार राशन का डाटा उपलब्ध कराया गया था। इस डाटा को सभी अनुमंडल पदाधिकारी के लागिन में उपलब्ध कराया गया और इसका सत्यापन में 17 लाख 69 हजार राशन कार्ड को सही पाया गया है। जबकि, 35 लाख 36 हजार राशन कार्ड को रद करने की कार्रवाई की गई। बैठक में ये लोग थे शामिल पंचायती राज मंत्री दीपक प्रकाश, पिछड़ा वर्ग एवं अतिपिछड़ा वर्ग कल्याण मंत्री रमा निषाद, अनुसूचित जाति एवं अनुसूचित जनजाति कल्याण मंत्री लखेन्द्र कुमार रौशन, सांसद सुनील कुमार, विधान पार्षद डा.संजीव कुमार सिंह, वीरेन्द्र नारायण यादव एवं रविन्द्र प्रसाद सिंह, विधायक मुरारी प्रसाद गौतम, खाद्य सचिव अभय कुमार सिंह, सहकारिता सचिव धर्मेन्द्र सिंह, निदेशक (उपभोक्ता संरक्षण) विभूति रंजन चौधरी, विशेष सचिव उपेन्द्र कुमार, बिहार राज्य खाद्य एवं असैनिक आपूर्ति निगम के एमडी अभय झा।