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बिहार के बड़े पुलों से गुजरना होगा महंगा, 94 पुलों पर टोल वसूली की तैयारी

पटना बिहार मं अब 250 मीटर से अधिक लंबे पुलों से गुजरने पर टोल टैक्स चुकाना होगा। जी हां, सरकार ने इसके लिए सर्वेे का काम शुरू भी कर दिया है। दरअसल सरकार स्टेट हाईवे के उन पुलों पर ही टोल टैक्स की वसूली करेगी, जो 250 मीटर से अधिक लंबे हैं। पथ निर्माण विभाग के अधीन ऐसे पुलों की संख्या 94 है। विभाग इन पुलों का सर्वे करा रहा है, जिसके बाद यह तय किया जाएगा कि इनमें किन-किन पुलों पर टोल टैक्स लिया जाएगा। पुलों की लंबाई के आधार पर टोल टैक्स की राशि तय की जाएगी। सर्वे के दौरान पुल के साथ-साथ उसके एप्रोच रोड की लंबाई भी मापी जाएगी। राज्य मंत्रिमंडल ने एक जुलाई की बैठक में राज्य की सड़कों और पुलों के बेहतर रखरखाव के लिए ‘बिहार पथ उपयोगकर्ता शुल्क (दरों का निर्धारण एवं संग्रहण) नियमावली’ को मंजूरी दी है। इसके तहत राष्ट्रीय उच्चपथ की तर्ज पर राज्य के स्वामित्व वाली सड़कों और बड़े पुलों पर भी टोल टैक्स वसूला जाएगा। छोटे वाहनों के लिए टोल की दर 1.25 रुपये प्रति किलोमीटर तय की गई है। विभाग से मिली जानकारी के अनुसार, हर एक पुल का अध्ययन किया जा रहा है। इसमें यह देखा जा रहा है कि कितने वाहन इन पुलों पर से रोज गुजरते हैं। इनमें कितने शहर में हैं। राष्ट्रीय राजमार्ग के टोल प्लाजा से इन पुलों की दूरी कितनी है। इन सभी को ध्यान में रखते हुए निर्णय लिया जाएगा, किन-किन पुलों पर से टोल टैक्स लेना है। टोल टैक्स वसूलने की जिम्मेदारी निजी एजेंसियों को दी जाएगी। 250 मीटर से ज्यादा लंबाई वाले पुलों की संख्या गया और पटना जिले में ज्यादा हैं। पटना के आसपास ही दो बड़े पुल कच्ची दरगाह-बिदुपुर और बख्तियारपुर-ताजपुर पुल है। राज्य सरकार को सबसे अधिक राजस्व देने वाली एजेंसी को यह जिम्मेवारी मिलेगी। इसके लिए स्टेट हाईवे और बड़े पुलों की नीलामी होगी। अधिक दबाव वाली सड़क और पुलों का चयन टोल के लिए किया जाएगा। टोल प्लाजा के समीप रहने वालों को पथकर में रियायत देगी राज्य सरकार विभागीय पदाधिकारी के मुताबिक, भविष्य में सड़कों का रख-रखाव और बेहतरीन ढंग से हो, नई-नई सड़कें विकसित हों, इसी मकसद से टोल टैक्स वसूलने की नीति बनायी गई है। जहां भी टोल टैक्स के लिए केंद्र बनेगा, वहां के आस-पास के लोगों को इससे राहत दी जाएगी। टोल प्लाजा के 20 किलोमीटर के दायरे में रहने वाले लोगों को रियायती पास जारी किये जाएंगे। नियमित दौर पर सफर करने वालों के वाहनों के लिए एकमुश्त राशि लेकर वार्षिक पास भी जारी किये जायेंगे। देश के सभी विकसित और बड़े राज्यों में उनकी अपनी टोल टैक्स की नीति लागू है। इनमें महाराष्ट्र, गुजरात, कर्नाटक, उत्तर प्रदेश, मध्य प्रदेश आदि राज्य शामिल हैं। इन बड़े पुलों पर चुकाना होगा टोल 1. कच्चीदरगाह-बिदुपुर पुल 2.बख्तियारपुर-ताजपुर पुल 3.दरभंगा-करेह नदी पुल 4.नवगछिया- कोसी नदी पुल 5.फुलतौरा घाट-खगड़िया 6.गया-फल्गु नदी पुल 7.नालंदा – सकरी नदी पुल 8.आरा-छपरा गंगा नदी पुल 9.सहरसा में बलुआहा घाट 10.गोपालगंज और बेतिया

भागलपुर, मुजफ्फरपुर, छपरा और सीतामढ़ी में जमीन की खरीद-बिक्री और निर्माण पर प्रतिबंध

पटना बिहार में बनने वाले अलग-अलग टाउनशिप को लकर सम्राट चौधरी सरकार बेहद गंभीर नजर आ रही है। अब बिहार सरकार ने राज्य की चार ग्रीनफील्ड सेटेलाइट टाउनशिप में जमीन खरीद-बिक्री पर रोक लगा दी है। इसके तहत भागलपुर, मुजफ्फरपुर, छपरा और सीतामढ़ी में बनने वाले सेटेलाइनट टाउनशिप में यह रोक 30 जून 2027 तक प्रभावी रहेगी। बिहार सरकार के नगर विकास विभाग ने इस संबंध में अधिसूचना जारी कर दी है। यह भी कहा गया है कि इस प्रतिबंध के दौरान अगर जमीन की किसी तरह की कोई खरीद-फरोख्त की जाती है तो इसपर कड़ी कार्रवाई की जाएगी। नगर विकास विभाग ने इस दौरान टाउनशिप में किसी प्रकार के नए निर्माण कार्यों पर भी रोक लगा दी है। जमीन खरीद-बिक्री पर रोक लगाने के साथ ही अब चारों टाउनशिप के मास्टर प्लान बनाने का काम शुरू होगा। विभाग ने शनिवार (4 जुलाई) को इस संबंध मं अधिसूचना जारी करते हुए कहा है कि प्रतिबंध के दौरान अधिसूचित क्षेत्रों में जमीन की खरीद-बिक्री, जमीन हस्तांतरण, भूमि के विकास और भवन निर्माण से संबंधित किसी भी प्रकार के कार्य नहीं किए जा सकेंगे। नियम तोड़ने पर होगी कार्रवाई यह भी कहा गया है कि प्रतिबंधित क्षेत्रों में नियम का उल्लंघन करने पर नियमानुसार कार्रवाई की जाएगी। विभाग ने यह कार्यवाही शहरी आयोजना तथा विकास अधिनियम, 2012 की धारा 9(7) तथा बिहार शहरी आयोजना तथा विकास नियमावली, 2014 के तहत की है। इस निर्णय का उद्देश्य चारों शहरों के प्रस्तावित टाउनशिप क्षेत्रों का योजनाबद्ध विकास सुनिश्चित करना और भविष्य की शहरी जरूरतों के अनुरूप आधारभूत संरचना विकसित करना है। बता दें कि डेहरी सहित कुल 12 टाउनशिप विकसित किया जा रहा है। सात शहरों में पहले लग चुकी है रोक बता दें कि इससे पहल राज्य सरकार ने इससे पहले 23 अप्रैल को 11 टाउनशिप में जमीन खरीद-बिक्री पर रोक लगाई थी। उसके बाद 24 अप्रैल को सात शहरों पटना, सोनपुर, गयाजी, दरभंगा, सहरसा, पूर्णिया और मुंगेर में 31 मार्च 2027 तक रोक का आदेश जारी किया गया था। तब जमीन मालिकों ने आर्थिक जरूरत में जमीन बेचने की अनुमति मांगी। सरकार ने जून 2026 में राहत देते हुए आवास बोर्ड को जमीन खरीदने के लिए अधिकृत किया था। यानी इच्छुक किसान आवास बोर्ड मुख्यालय पटना में एमडी के नाम से जमीन बेचने का आवेदन दे सकते हैं। दस्तावेज की जांच के बाद संबधित जिलाधिकारी जमीन का मूल्य तय करेंगे। अब विभाग ने 4 जुलाई को चार टाउनशिप में जमीन खरीद-बिक्री पर रोक की अधिसूचना जारी की है।

भागलपुर में 50 से अधिक शिक्षकों पर खतरा: शिक्षा विभाग ने सूची तैयार करने के दिए आदेश

भागलपुर  बिहार में तीसरे चरण की शिक्षक नियुक्ति (TRE-3) में 18 माह के डीएलएड (डिप्लोमा इन एलीमेंट्री एजुकेशन) के आधार पर नियुक्त शिक्षकों की सेवा समाप्त करने की प्रक्रिया तेजी से शुरू हो गई है। प्राथमिक शिक्षा निदेशक के सख्त निर्देश के बाद भागलपुर जिला शिक्षा विभाग पूरी तरह सक्रिय हो गया है। विभाग ने साफ किया है कि विज्ञापन की शर्तों के अनुसार यह डिग्री अब मान्य नहीं होगी। एनआईओएस की डिग्री वाले शिक्षक निशाने पर शिक्षा विभाग के 7 दिसंबर 2023 के आदेश और शिक्षक नियुक्ति विज्ञापन संख्या 22/2024 की शर्तों के अनुसार, एनआईओएस (NIOS) से प्राप्त 18 माह की डीएलएड उपाधि विद्यालय अध्यापक पद के लिए वैध नहीं है। इसी आधार पर सभी जिलों को ऐसे शिक्षकों की सेवा तत्काल समाप्त करने का निर्देश दिया गया है। जिला शिक्षा विभाग ने सभी प्रखंड शिक्षा पदाधिकारियों (BEOs) को सूची सौंपने को कहा है। विज्ञापन की शर्तों के तहत बड़ा फैसला     तीसरे चरण (TRE-3) में बहाल हुए शिक्षकों में से जिन्होंने एनआईओएस (NIOS) से 18 महीने का डीएलएड किया है, उनकी सेवा समाप्त होगी।     शिक्षा विभाग के पुराने आदेश और विज्ञापन संख्या 22/2024 की शर्तों के तहत यह प्रशिक्षण अब विद्यालय अध्यापक पद के लिए मान्य नहीं है। प्रखंड स्तर पर सूची बनाने के निर्देश     प्राथमिक शिक्षा निदेशक के निर्देश पर भागलपुर जिला शिक्षा विभाग पूरी तरह सक्रिय हो गया है।     सभी प्रखंड शिक्षा पदाधिकारियों को अपने-अपने क्षेत्रों में कार्यरत ऐसे शिक्षकों की भौतिक जांच कर जल्द से जल्द सूची सौंपने का आदेश दिया गया है। भागलपुर में 50 से अधिक शिक्षकों पर गाज प्रखंड शिक्षा पदाधिकारी अपने-अपने क्षेत्रों में कार्यरत उन शिक्षकों का भौतिक सत्यापन कर जल्द ही अंतिम रिपोर्ट जिला मुख्यालय को उपलब्ध कराएंगे, जिन्होंने इस प्रशिक्षण के आधार पर नौकरी पाई थी। प्रारंभिक जानकारी के अनुसार, अकेले भागलपुर जिले में ही 50 से अधिक शिक्षक इस बड़ी कार्रवाई की जद में आ सकते हैं, जिससे शिक्षा विभाग में हड़कंप मचा है। राज्यभर में तीन हजार शिक्षकों की जाएगी नौकरी इस प्रशासनिक आदेश के बाद राज्य स्तर पर करीब तीन हजार शिक्षकों की नौकरी पर इसका सीधा और बड़ा असर पड़ने की संभावना जताई जा रही है। कोर्ट और विभाग के पुराने आदेशों का हवाला देते हुए अब इन शिक्षकों की छंटनी की उल्टी गिनती शुरू हो चुकी है, जिससे टीआरई-3 के तहत बहाल हुए अभ्यर्थियों की मुश्किलें बेहद बढ़ गई हैं।  

‘विकसित बिहार 2037’ का रोडमैप: सम्राट चौधरी ने नए आयोग के गठन की घोषणा की

पटना बिहार के मुख्यमंत्री सम्राट चौधरी ने शनिवार को कहा कि प्रदेश सरकार केंद्र के नीति आयोग की तर्ज पर एक आयोग गठित करेगी, जो राज्य के दीर्घकालिक विकास के लिए एक दृष्टिपत्र तैयार करेगा। उन्होंने यहां योजना एवं विकास विभाग की उच्चस्तरीय समीक्षा बैठक को संबोधित करते हुए यह घोषणा की। मुख्यमंत्री कार्यालय (सीएमओ) द्वारा जारी एक बयान के अनुसार, चौधरी ने राज्य की प्रमुख योजनाओं की प्रगति की समीक्षा की और उनके प्रभावी क्रियान्वयन एवं निगरानी के लिए अधिकारियों को आवश्यक निर्देश दिए। मुख्यमंत्री सम्राट चौधरी करेंगे आयोग का गठन मुख्यमंत्री ने कहा कि यह आयोग बिहार के दीर्घकालिक विकास के लिए रूपरेखा तैयार करेगा, विकास योजनाओं के क्रियान्वयन की निगरानी करेगा, विभागों के बीच समन्वय को बेहतर बनाएगा और समय-समय पर नीति संबंधी सुझाव देगा। उन्होंने कहा कि योजना एवं विकास विभाग का उद्देश्य केवल योजनाएं बनाना नहीं होना चाहिए, बल्कि उनके प्रभावी क्रियान्वयन, सतत मूल्यांकन और ठोस परिणाम सुनिश्चित करना भी होना चाहिए। नीति आयोग की तर्ज पर बिहार में आयोग चौधरी ने अधिकारियों को विधायकों और विधान पार्षदों के लिए एक समर्पित ऑनलाइन पोर्टल विकसित करने के निर्देश दिए, जिससे जनप्रतिनिधियों द्वारा संचालित योजनाओं की पारदर्शिता और निगरानी बेहतर हो सके। उन्होंने कब्रिस्तान घेराबंदी योजना के तहत संवेदनशील स्थलों की सूची तैयार करने और लंबित कार्यों को शीघ्र पूरा करने का भी निर्देश दिया। जिला के लिए विशेष बजट प्रावधानों पर जोर मुख्यमंत्री ने जिला-विशिष्ट बजट योजना तैयार करने पर भी बल दिया, जो स्थानीय आवश्यकताओं, संसाधनों और संभावनाओं पर आधारित हो। उन्होंने कहा कि हमें वर्ष 2037 तक ‘विकसित बिहार’ का दीर्घकालिक विजन तैयार करना होगा, जब राज्य अपने गठन के 125 वर्ष पूरे करेगा।  

ग्रामीणों को अब 125 दिन रोजगार की गारंटी, बिहार को मिला ₹1,663.56 करोड़ का फंड

पटना विकसित भारत-गारंटी फॉर रोजगार एंड आजीविका मिशन ग्रामीण (VB-G RAMG) के तहत केंद्र सरकार ने बिहार के लिए 1,663.56 करोड़ रुपये की पहली किस्त (मदर सैंक्शन) जारी कर दी है। यह राशि योजना के सफल क्रियान्वयन के लिए राज्य को पूर्व में स्वीकृत 6,715.83 करोड़ रुपये के अंतरिम बजट का हिस्सा है। रविवार को केंद्रीय ग्रामीण विकास मंत्री शिवराज सिंह चौहान ने वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग के माध्यम से सभी राज्यों के ग्रामीण विकास मंत्रियों और विभागीय अधिकारियों के साथ बैठक कर इसकी जानकारी दी। तीन माह के ल‍िए है यह राश‍ि बैठक में बिहार ग्रामीण विकास विभाग के अधिकारी भी शामिल हुए। विभागीय अधिकारियों के अनुसार, केंद्र से जारी यह राशि अगले तीन माह की जरूरतों को ध्यान में रखते हुए उपलब्ध कराई गई है। राज्य सरकार इसमें अपना अंश जोड़कर पंचायतों में विकास योजनाओं को गति देगी। इससे विभिन्न विकास कार्यों के साथ-साथ अकुशल श्रमिकों को समय पर रोजगार और मजदूरी भुगतान सुनिश्चित करने में मदद मिलेगी। अधिकारियों ने बताया कि VB-G RAMG योजना में पूर्व की मनरेगा की तुलना में कई महत्वपूर्ण बदलाव किए गए हैं। सबसे बड़ा बदलाव यह है कि अब पात्र अकुशल श्रमिकों को 100 दिन के बजाय 125 दिन के रोजगार की गारंटी मिलेगी। बेरोजगारी भत्‍ते का भी है प्रावधान वहीं, यदि काम मांगने के बावजूद निर्धारित समय में रोजगार उपलब्ध नहीं कराया जाता है, तो बेरोजगारी भत्ता देने का भी प्रावधान किया गया है। योजना के तहत पंचायतों में होने वाले विकास कार्यों के वित्तपोषण की व्यवस्था में भी बदलाव किया गया है। अब विकास कार्यों पर होने वाले कुल खर्च का 40 प्रतिशत हिस्सा राज्य सरकार वहन करेगी, जबकि शेष राशि केंद्र देगा। ग्रामीण विकास विभाग का मानना है कि केंद्र और राज्य सरकार के संयुक्त निवेश से ग्राम पंचायतों में आधारभूत ढांचे का विकास तेज होगा। इससे रोजगार के अवसर बढ़ेंगे और ग्रामीण अर्थव्यवस्था को नई गति मिलेगी। इससे गांवों में आर्थिक गतिविधियां बढ़ने के साथ स्थानीय स्तर पर आजीविका के नए अवसर भी सृजित होंगे।

महिलाओं को मिलेगा ज्यादा लाभ: नई वस्त्र नीति में ₹6,000 तक रोजगार सब्सिडी का प्रावधान

रांची झारखंड सरकार की नई वस्त्र नीति 2026 (टेक्स्टाइल पॉलिसी) का ड्राफ्ट इंटरनेट पर साझा करते हुए उद्योग विभाग ने सभी स्टेक होल्डर्स से आपत्तियां तलब की हैं। यह नीति हाल के महीनों में चर्चा का विषय रही है। ज्ञात हो कि झारखंड की पिछली वस्त्र नीति सितंबर 2023 में समाप्त हो गई थी, और तब से राज्य में कोई नई औपचारिक नीति लागू नहीं थी। नई वस्त्र नीति 2026 का मसौदा अब तैयार कर लिया गया है और इसे कैबिनेट की मंजूरी मिल गई है। यह नीति 8-9 जुलाई 2026 को नई दिल्ली में आयोजित राष्ट्रीय हितधारक परामर्श में सार्वजनिक चर्चा के लिए रखी जाएगी। यह नीति विशेष रूप से संताल परगना क्षेत्र के औद्योगिक विकास पर केंद्रित है, जो अब तक औद्योगिक गतिविधियों से दूर रहा है। इस क्षेत्र में निवेश के लिए विशेष प्रोत्साहन और राहत देने की योजना है। रोजगार सृजन पर जोर नीति का मुख्य उद्देश्य 20,000 से अधिक अतिरिक्त रोजगार सृजित करना है, विशेष रूप से महिलाओं और ग्रामीण समुदायों के लिए। नीति में महिला कर्मचारियों के लिए पुरुषों की तुलना में ₹1,000 अधिक मासिक सब्सिडी का प्रावधान है। नए केंद्रों की तलाश में केंद्रीय वस्त्र मंत्रालय केंद्रीय वस्त्र मंत्रालय पारंपरिक केंद्रों (सूरत, तिरुपुर) से हटकर नए राज्यों में विनिर्माण को बढ़ावा देना चाहता है। इसके लिए छत्तीसगढ़, केरल और झारखंड के साथ बातचीत चल रही है। विभिन्न प्रोडक्शन-लिंक्ड इंसेंटिव (पीएलआई) योजना के तहत अधिक निवेश आकर्षित करना इस पहल का उद्देश्य है। इसके साथ ही नए वस्त्र केंद्रों का विकास करना, रोजगार के अवसर बढ़ाना पीएलआई योजना का प्रमुख उद्देश्य है। नीति की विशेषताएं     पूंजी सब्सिडी : कुल लागत के हिसाब से 20 प्रतिशत (₹50 करोड़ तक), SC/ST/महिलाओं को 5% अतिरिक्त लाभ     ब्याज सब्सिडी 7% प्रति वर्ष या 50% (₹3करोड़ तक), 5 वर्षों के लिए     स्टेट जीएसटी प्रतिपूर्ति पहले 7 वर्षों के लिए 100%, अगले 3 वर्षों के लिए 40%     रोजगार सब्सिडी पुरुषों के लिए पांच हजार रुपये प्रति माह और महिलाओं के लिए छह हजार रुपये मासिक

अब बाहर से महंगी दवा खरीदने की जरूरत नहीं, रिम्स में शुरू होगी अमृत फार्मेसी

 रांची  राजधानी रांची स्थित रिम्स के ट्रॉमा सेंटर में भर्ती मरीजों और उनके परिजनों को जल्द बड़ी राहत मिलने वाली है। अब इलाज के दौरान महंगी दवाओं के लिए बाहर की निजी मेडिकल दुकानों के चक्कर नहीं लगाने पड़ेंगे। ट्रॉमा सेंटर परिसर में अमृत फार्मेसी शुरू करने की सभी तैयारियां पूरी हो चुकी हैं। औषधि लाइसेंस मिलते ही इसका संचालन शुरू कर दिया जाएगा। अब बाहर से महंगी दवा खरीदने की मजबूरी होगी खत्म फिलहाल ट्रॉमा सेंटर में भर्ती मरीजों को कई जरूरी दवाएं रिम्स के दवा भंडार में उपलब्ध नहीं होने के कारण बाहर की निजी दुकानों से खरीदनी पड़ती है। इन दवाओं की कीमत अधिक होने से मरीज और उनके परिजनों पर अतिरिक्त आर्थिक बोझ पड़ता है। अमृत फार्मेसी शुरू होने के बाद यह समस्या काफी हद तक खत्म हो जाएगी। डॉक्टरों की सूची के आधार पर उपलब्ध होगी दवाएं रिम्स प्रबंधन ने योजना बनाई है कि डॉक्टरों से उन दवाओं की सूची ली जाएगी, जिनकी सबसे अधिक जरूरत पड़ती है और जिन्हें अक्सर बाहर से खरीदना पड़ता है। इसी सूची के आधार पर अमृत फार्मेसी में पर्याप्त मात्रा में दबे उपलब्ध कराई जाएगी ताकि मरीजों को समय पर इलाज मिल सके। रिम्स के अधीक्षक डॉ. हिरेंद्र बिरुआ ने बताया कि अमृत फार्मेसी की दुकान पूरी तरह तैयार है। फिलहाल औषधि लाइसेंस की प्रक्रिया चल रही है। लाइसेंस मिलते ही दुकान का संचालन शुरू कर दिया जाएगा। यहां मरीजों को अच्छी कंपनियों की जेनेरिक और ब्रांडेड दवाएं रियायती दरों पर उपलब्ध कराई जाएगी। रिम्स परिसर में निजी दवा दुकानों की बढ़ गई है संख्या रिम्स ट्रॉमा सेंटर ओर सेंट्रल इमरजेंसी के आसपास पिछले कुछ वर्षों में कई निजी दवा दुकानें खुल चुकी हैं। गंभीर मरीजों के परिजन अक्सर इन्हीं दुकानों से दवाएं खरीदते है ऐसे में अमृत फार्मेसी शुरू होने से मरीजों को एक सस्ता और भरोसेमंद विकल्प मिलेगा। जल्द शुरू होगा संचलन रिम्स प्रबंधन में अमृत फार्मेसी संचालक को लाइसेंस की प्रक्रिया जल्द पूरी करने का निर्देश दिया है। उम्मीद है कि सभी औपचारिकताएं पूरी होते ही ट्रॉमा सेंटर में मरीजों को कम कीमत पर गुणवत्तापूर्ण दवाएं मिलने लगेगी, जिससे इलाज का खर्च कम होगा और परिजनों को भी बड़ी राहत मिलेगी।  

पटना समेत पूरे बिहार में हाईटेक बस डिपो की तैयारी, यात्रियों को मिलेंगी मॉल-होटल जैसी सुविधाएं

पटना राजधानी पटना समेत बिहार के कई प्रमुख शहरों में जल्द ही विश्वस्तरीय बस डिपो और आधुनिक बस टर्मिनल विकसित किए जाएंगे। बिहार राज्य पथ परिवहन निगम (BSRTC) ने इसके लिए पटना और आसपास के क्षेत्रों सहित 30 से अधिक स्थानों पर सरकारी जमीन चिह्नित कर ली है। इन परियोजनाओं को सार्वजनिक-निजी भागीदारी (पीपीपी) मॉडल के तहत विकसित किया जाएगा, जहां यात्रियों को दिल्ली और मुंबई जैसे महानगरों के बस टर्मिनलों जैसी अत्याधुनिक सुविधाएं उपलब्ध होंगी। पटना में करीब पांच एकड़ भूमि पर नया बस डिपो प्रस्तावित है। इसके अलावा पालीगंज, मोकामा और नौबतपुर में लगभग एक-एक एकड़ सरकारी भूमि चिह्नित की गई है। इन स्थानों पर डिपो निर्माण के लिए विभागीय प्रक्रियाएं जारी हैं। 30 से अधिक शहरों में बनेंगे आधुनिक बस टर्मिनल बीएसआरटीसी के अनुसार, औरंगाबाद में 5.57 एकड़, मुजफ्फरपुर में 5.11 एकड़, गया में 4.95 एकड़, जमुई में 4.72 एकड़ और नवादा में 4.57 एकड़ भूमि पर बड़े बस डिपो विकसित किए जाएंगे। इसके अलावा बिहारशरीफ, पूर्णिया, मुंगेर (तारापुर), दरभंगा समेत कई जिलों में तीन एकड़ से अधिक सरकारी भूमि पहले ही चिह्नित की जा चुकी है। वहीं भागलपुर, सहरसा, मधुबनी, किशनगंज, मोतिहारी, छपरा, सुल्तानगंज, बरबीघा, चकाई, सीतामढ़ी, आरा, जहानाबाद, संग्रामपुर, भदौनी और राजगीर जैसे प्रमुख शहरों में भी बस टर्मिनल विकसित किए जाएंगे। मल्टी-मॉडल हब के रूप में होंगे विकसित सभी बस डिपो और टर्मिनलों को मल्टी-मॉडल ट्रांसपोर्ट हब के रूप में विकसित किया जाएगा, ताकि यात्रियों को एक ही परिसर में परिवहन और अन्य जरूरी सुविधाएं मिल सकें इन परिसरों में बस संचालन के साथ व्यावसायिक गतिविधियों को भी बढ़ावा दिया जाएगा, जिससे परियोजनाएं आर्थिक रूप से आत्मनिर्भर बन सकें। पांच मंजिला होंगे बस डिपो निगम के अनुसार, सभी नए बस डिपो पांच मंजिला होंगे। ग्राउंड फ्लोर पर बस पार्किंग, प्लेटफॉर्म और अत्याधुनिक वर्कशॉप की व्यवस्था होगी। ऊपरी मंजिलों पर निगम कार्यालय, एसी और नॉन-एसी प्रतीक्षालय, कैफेटेरिया, दुकानें, डॉर्मेटरी, गेस्ट रूम, महिलाओं के लिए फीडिंग रूम, बैंक्वेट हॉल, शॉपिंग मॉल, होटल और एंटरटेनमेंट जोन जैसी सुविधाएं विकसित की जाएंगी। परियोजना का उद्देश्य बस यात्रा को केवल आवागमन का माध्यम नहीं, बल्कि यात्रियों के लिए सुविधाजनक और बेहतर अनुभव बनाना है। स्थानीय अर्थव्यवस्था को भी मिलेगा बढ़ावा परिवहन मंत्री दामोदर रावत ने कहा कि राज्य सरकार परिवहन व्यवस्था को आधुनिक बनाने की दिशा में तेजी से काम कर रही है। पटना सहित पूरे बिहार में विश्वस्तरीय बस डिपो और टर्मिनल विकसित किए जा रहे हैं, जिससे यात्रियों को बेहतर सुविधाएं मिलेंगी और सार्वजनिक परिवहन अधिक आकर्षक बनेगा। उन्होंने कहा कि इन परियोजनाओं से केवल परिवहन व्यवस्था ही मजबूत नहीं होगी, बल्कि स्थानीय स्तर पर रोजगार और व्यावसायिक गतिविधियों को भी बढ़ावा मिलेगा। सरकार का लक्ष्य प्रत्येक जिला मुख्यालय में आधुनिक बस टर्मिनल विकसित करना है, ताकि यात्री सुविधाओं के साथ-साथ स्थानीय अर्थव्यवस्था को भी नई मजबूती मिल सके।  

स्टेट हाईवे पर टोल वसूली की तैयारी तेज, ट्रैफिक सर्वे के बाद तय होगी दरें

 पटना  राज्य उच्च पथों से गुजरने वाले वाहनों से टोल लिए जाने की प्रक्रिया इस वर्ष नवंबर से पहले संभव नहीं दिखती। पथ निर्माण विभाग फिलहाल यह आकलन कर रहा कि एक महीने में किसी राज्य उच्च पथ (एसएच) पर कितने वाहनों की आवाजाही है। दो महीने तक इसका अध्ययन संभावित है। इसके बाद उक्त रिपोर्ट के आधार पर संबंधित सड़क के लिए टोल एजेंट नियुक्त करने की प्रक्रिया निविदा के आधार पर आगे बढ़ेगी। सड़कों के दोनों छोर पर कैमरे लगाकर वाहनों की संख्या की गिनती हो रही। वार्षिक संग्रह क्षमता के आधार पर तय होगा मामला पथ निर्माण विभाग आयी टोल पालिसी में सबसे महत्वपूर्ण विषय किसी भी सड़क की एनुअल पोटेंशियल कलेक्शन यानी वार्षिक संग्रह क्षमता है। इसके माध्यम से यह देखा जाएगा कि एक एसएच पर माह भर में औसत कितने वाहन गुजरे। इस हिसाब से संबंधित सड़क की टोल संग्रह क्षमता तय होगी। टोल संग्रह की राशि का अंदाजा होने के बाद उसमें टोल एजेंट का खर्च और रख रखाव की राशि जोड़ी जाएगी। इस राशि को जोड़कर संबंधित सड़क के लिए एक रकम तय कर उसकी निविदा होगी। इस प्रक्रिया के माध्यम से संबंधित सड़क के लिए टोल एजेंट तय हो जाएंगे। एक वर्ष में वाहनों की संख्या में पांच प्रतिशत बढ़ोतरी पथ निर्माण विभाग की टोल पालिसी में यह प्राविधान किया गया है कि एक राज्य उच्च पथ पर वर्तमान में जितने वाहनों की आवाजाही हो रही उसमें पांच प्रतिशत की बढ़ोतरी संभव है। टोल एजेंट को नियुक्त करते में समय इसका भी ख्याल रखा जाएगा। इसके अतिरिक्त टोल फ्री वाहनों की संख्या भी जोड़ी जाएगी। अधिसूचना के बाद यह सूचना सार्वजनिक होगी कि संबंधित सड़क पर कितना टोल लगेगा टोल लागू किए जाने की अधिसूचना के बाद यह तय हाेगा कि संबंधित राज्य उच्च पथ से गुजरने पर टोल के मद में कितनी राशि लगेगी। अधिकतम 20 किमी की दूरी को टोल में शामिल किए जाने पर चर्चा चल रही। राज्य कैबिनेट की बैठक के बाद अभी सिर्फ यह तय हुआ है कि प्रति किमी कितनी राशि टोल मद में ली जाएगी।  

वाल्मीकि से कावर झील तक, बिहार बना रहा इको-टूरिज्म का नया पर्यटन हब

 पटना राज्य सरकार पर्यटन क्षेत्र को नई ऊंचाइयों पर ले जाने के लिए इको-टूरिज्म को प्राथमिकता दे रही है। आने वाले समय में इको टूर‍िज्‍म का व्‍यापक व‍िस्‍तार होगा। वर्तमान में बिहार में 10 से 15 सक्रिय इको-टूरिज्म स्थल हैं, जबकि 24 से अधिक प्रमुख स्थलों का विकास तेजी से किया जा रहा है। इनमें वन्यजीव अभयारण्य, राष्ट्रीय उद्यान, झीलें, जलप्रपात और पहाड़ी क्षेत्र शामिल हैं। सरकार ने 50 से अधिक नए संभावित इको-टूरिज्म स्थलों की पहचान भी की है। लक्ष्य है कि अगले पांच वर्षों में राज्य में इको-टूरिज्म स्थलों की संख्या बढ़ाकर 60 से 70 तक पहुंचाई जाए। विभाग के अनुसार बिहार के प्रमुख इको-टूरिज्म स्थलों में वाल्मीकि टाइगर रिजर्व (पश्चिम चंपारण) सबसे महत्वपूर्ण है। यह राज्य का एकमात्र टाइगर रिजर्व है। कैमूर को टाइगर र‍िजर्व के रूप में क‍िया जा रहा वि‍कसित यह तराई के घने जंगलों, बाघों, हाथियों और अन्य वन्यजीवों के लिए प्रसिद्ध है। नेपाल की सीमा से सटा हुआ है। बड़ी संख्‍या में पर्यटक यहां पहुंचते हैं। इसके अलावा कैमूर वन्यजीव अभयारण्य, जिसे झरनों और ट्रेकिंग के लिए जाना जाता है, दूसरे टाइगर रिजर्व के रूप में विकसित किया जा रहा है। भीमबांध वन्यजीव अभयारण्य, गौतम बुद्ध वन्यजीव अभयारण्य, विक्रमशिला गंगा डॉल्फिन अभयारण्य, कावर झील पक्षी अभयारण्य, राजगीर का पहाड़ी क्षेत्र, ककोलत जलप्रपात, घोड़ा कटोरा, बराबर-गुरुपा पहाड़ियां और सूरजपुर वेटलैंड भी राज्य के प्रमुख इको-टूरिज्म स्थलों में शामिल हैं। विशेष रूप से विक्रमशिला गंगा डॉल्फिन अभयारण्य में नाव से डॉल्फिन देखने का अनूठा अनुभव मिलता है, जबकि कावर झील, जो एशिया की सबसे बड़ी मीठे पानी की झीलों में शामिल है, सर्दियों में हजारों प्रवासी पक्षियों का बसेरा बनती है। 2026-27 तक कई परियोजनाएं होंगी पूरी सरकार ने सहरसा स्थित मत्स्यगंधा झील के समग्र विकास की योजना बनाई है। यहां सॉवेनियर शॉप, सुपर ट्री, ग्लास ब्रिज, एक्सपीरियंस सेंटर समेत कई आधुनिक पर्यटन सुविधाओं का निर्माण वर्ष 2026 तक पूरा करने का लक्ष्य रखा गया है। वहीं, पश्चिम चंपारण के लव-कुश पार्क और वाल्मीकिनगर आइकॉनिक टूरिज्म पार्क के व्यापक विकास कार्य को वर्ष 2027 तक पूरा करने की योजना है। इसके अलावा मां मुंडेश्वरी धाम में धर्मशाला के बेहतर उपयोग के लिए आसपास जंगल सफारी और अन्य इको-टूरिज्म गतिविधियों को भी बढ़ावा दिया जाएगा। आधुनिक सुविधाओं से लैस होंगे पर्यटन स्थल पर्यटकों को बेहतर अनुभव देने के लिए विकसित किए जा रहे सभी इको-टूरिज्म स्थलों पर नेचर ट्रेल, वॉच टावर, इको-कॉटेज, होमस्टे, डिजिटल साइनेज और इंटरप्रिटेशन सेंटर जैसी आधुनिक सुविधाएं विकसित की जाएंगी। इससे पर्यटकों को प्राकृतिक वातावरण के बीच सुरक्षित और सुविधाजनक पर्यटन का अनुभव मिलेगा। स्थानीय रोजगार और अर्थव्यवस्था को मिलेगा बल पर्यटन मंत्री केदार प्रसाद गुप्ता ने कहा कि बिहार इको-टूरिज्म के क्षेत्र में तेजी से आगे बढ़ रहा है। सरकार का उद्देश्य सतत (सस्टेनेबल) पर्यटन को बढ़ावा देना है, ताकि स्थानीय लोगों के लिए रोजगार के अवसर बढ़ें और ग्रामीण अर्थव्यवस्था मजबूत हो। उन्होंने कहा कि इन प्रयासों से न केवल देश-विदेश के पर्यटक बिहार की ओर आकर्षित होंगे, बल्कि राज्य की प्राकृतिक और सांस्कृतिक धरोहर का संरक्षण भी सुनिश्चित होगा। पर्यटन विभाग ने अगले पांच वर्षों में पर्यटन क्षेत्र के माध्यम से 20 लाख रोजगार सृजित करने का लक्ष्य निर्धारित किया है।