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दिवाली-छठ की खरीदारी के लिए पटना एक्सपो में उमड़ेगा बाजार, कश्मीरी केसर से फर्नीचर तक मिलेंगे सामान

पटना  दीवाली और छठ की खरीदारी के लिए पटना के गांधी मैदान में पटना एक्सपो 2026 सज चुका है। यहां एक ही जगह पर देश के अलग-अलग राज्यों के उत्पादों की झलक देखने को मिल रही है। कपड़े, ज्वेलरी, हैंडीक्राफ्ट, फर्नीचर, घरेलू सजावट और खानपान से लेकर ऑटोमोबाइल तक के विकल्प मौजूद हैं। करीब चार लाख वर्ग फीट में फैले इस एक्सपो में 500 से अधिक स्टॉल लगाए गए हैं। खास बात यह है कि यहां 10 रुपये से लेकर लाखों रुपये तक के उत्पाद उपलब्ध हैं। चार हैंगरों में सजे 500 से ज्यादा स्टॉल पटना एक्सपो को चार वातानुकूलित हैंगरों में व्यवस्थित किया गया है, जहां अलग-अलग श्रेणियों के उत्पादों के स्टॉल लगाए गए हैं। इससे लोगों को अपनी जरूरत के सामान देखने और उनकी कीमतों की तुलना करने का मौका मिल रहा है। त्योहारों के दौरान घर सजाने, कपड़े खरीदने और उपहार तलाशने वालों के लिए यहां कई विकल्प हैं। आयोजकों के मुताबिक, यह एक्सपो 13 दिनों तक चलेगा। खरीदारी के साथ मनोरंजन और खानपान की सुविधाएं भी लोगों को आकर्षित कर रही हैं। कश्मीरी केसर से केरल के चिप्स तक, देशभर के उत्पाद एक्सपो में देश के अलग-अलग हिस्सों की खासियत देखने को मिल रही है। पंजाब के सूट और कपड़ों के साथ मधुबनी कला से सजे परिधान भी उपलब्ध हैं। कश्मीर के पारंपरिक उत्पाद, केसर और खजूर के स्टॉल लोगों के लिए आकर्षण का केंद्र हैं। वहीं, केरल के विभिन्न प्रकार के चिप्स समेत दूसरे राज्यों के उत्पाद भी यहां मिल रहे हैं। इस तरह स्थानीय बाजारों से अलग-अलग जगहों के उत्पाद एक ही परिसर में देखने का अवसर मिल रहा है। कपड़े-ज्वेलरी से लेकर फर्नीचर तक की खरीदारी त्योहारों के मौसम में घर और पहनावे को नया लुक देने के लिए एक्सपो में कई तरह के विकल्प मौजूद हैं। यहां कपड़ों, ज्वेलरी, हैंडीक्राफ्ट और घरेलू उपयोग की वस्तुओं के स्टॉल लगाए गए हैं। घर की सजावट और फर्नीचर में रुचि रखने वालों के लिए कान्हा फर्नीचर का पूरा हैंगर भी उपलब्ध है। अलग-अलग स्टॉलों पर उत्पादों की विविधता के साथ छूट के ऑफर भी दिए जा रहे हैं। हालांकि, छूट और कीमतें संबंधित स्टॉल के अनुसार अलग-अलग हो सकती हैं गाड़ी खरीदने की सोच रहे हैं तो यहां भी विकल्प पटना एक्सपो सिर्फ त्योहारों की खरीदारी तक सीमित नहीं है। यहां ऑटोमोबाइल, रियल एस्टेट, बैंकिंग और एजुकेशन सेक्टर से जुड़े स्टॉल भी लगाए गए हैं। रॉयल एनफील्ड और टीवीएस रिवर ईवी जैसे ब्रांडों की मौजूदगी से वाहन खरीदने की योजना बना रहे लोगों को भी विकल्प देखने का मौका मिल रहा है। इसके अलावा, विभिन्न कंपनियों और संस्थानों के स्टॉल के जरिए लोग संबंधित सेवाओं और उत्पादों की जानकारी हासिल कर सकते हैं। शॉपिंग के बीच बरिस्ता, पिज्जा हट और केएफसी का स्वाद मेले में खरीदारी के साथ खाने-पीने की व्यवस्था भी की गई है। यहां बरिस्ता, पिज्जा हट और केएफसी जैसे ब्रांडों के विकल्प मौजूद हैं। परिवार और दोस्तों के साथ आने वाले लोग खरीदारी के बीच खानपान का आनंद ले सकते हैं। इससे एक्सपो में खरीदारी के साथ मनोरंजन और घूमने-फिरने का अनुभव भी मिलता है। त्योहारों की तैयारियों के बीच एक ही जगह पर कई तरह की गतिविधियां लोगों के लिए आकर्षण बन सकती हैं। बच्चों और युवाओं को प्रतिभा दिखाने का मौका पटना एक्सपो में खरीदारी के अलावा बच्चों और युवाओं के लिए विभिन्न प्रतियोगिताएं भी आयोजित की जा रही हैं। इनमें सोलो डांस, ग्रुप डांस, गायन, चित्रकला और फैंसी ड्रेस जैसी गतिविधियां शामिल हैं। आयोजकों की ओर से इन प्रतियोगिताओं के लिए निशुल्क रजिस्ट्रेशन की सुविधा दी गई है। इससे प्रतिभागियों को अपनी कला और हुनर दिखाने का मंच मिल रहा है। परिवार के साथ मेले में पहुंचने वाले लोगों के लिए ये गतिविधियां अतिरिक्त आकर्षण का केंद्र हैं। गेट नंबर 7 से एंट्री, टिकट की कीमत 20 रुपये गांधी मैदान में आयोजित पटना एक्सपो 2026 में प्रवेश के लिए गेट नंबर 7 का इस्तेमाल किया जा सकता है। मेले में एंट्री टिकट की कीमत 20 रुपये रखी गई है। इसके बाद लोग अलग-अलग हैंगरों में जाकर अपनी पसंद और जरूरत के अनुसार उत्पाद देख सकते हैं। कपड़ों और ज्वेलरी से लेकर घरेलू सामान और खानपान तक के विकल्प यहां मौजूद हैं।

झारखंड में धान खरीद की तैयारी तेज, किसानों को MSP के साथ बढ़ा बोनस; कैबिनेट बैठक में लग सकती है मुहर

 रांची झारखंड में सरकारी केंद्रों पर धान बेचनेवाले किसानों को अब बढ़ा हुआ बोनस मिलेगा। खाद्य आपूर्ति विभाग ने किसानों को धान के न्यूनतम समर्थन मूल्य (एमएसपी) पर 84 रुपये के बोनस को 25 रुपये प्रति क्विंटल बढ़ाने का निर्णय लिया है। किसानों को अब धान बिक्री पर प्रति क्विंटल 109 रुपये बोनस मिलेगा। मंगलवार को होनेवाली कैबिनेट की बैठक में इसपर सहमति मिल सकती है। सरकार के इस निर्णय से राज्य सरकार पर 43.60 करोड़ रुपये का अतिरिक्त बोझ पड़ेगा। इसके अलावा कैबिनेट की बैठक में लगभग तीन दर्जन प्रस्तावों पर चर्चा होगी। इनमें सड़क निर्माण, ग्रामीण विकास और नगर विकास विभाग के कई प्रस्ताव हैं। कैबिनेट की बैठक में नवंबर के पहले सप्ताह में झारखंड विधानसभा के विशेष सत्र बुलाने पर भी निर्णय हो सकता है। इस सत्र में खान एवं खनिज (विकास एवं विनियमन) संशोधन अधिनियम, 2026 के विरोध में प्रस्ताव पारित कराने की तैयारी है। कैबिनेट की बैठक में जेपीएससी के अध्यक्ष एवं सदस्यों की नियुक्ति पर भी निर्भर हो सकता है। झारखंड में धान अधिप्राप्ति का लक्ष्य संशोधित भी किया गया है। अब यह लक्ष्य 40 लाख क्विंटल निर्धारित किया गया है। दैनिक जागरण पहले ही बता चुका है कि 50 लाख क्विंटल धान अधिप्राप्ति का लक्ष्य कम किया जाएगा। हालांकि बाद में हुए विभागीय आकलन के अनुसार, केंद्र सरकार के एनएफएसए सेंट्रल पूल के लिए 19.60 लाख क्विंटल तथा झारखंड राज्य खाद्य सुरक्षा योजना के लिए 19,79,412 क्विंटल धान की आवश्यकता का अनुमान लगाया गया। इसी कारण से यह लक्ष्य कम हुआ। महत्वपूर्ण जानकारियां सरकार के नियमों के अनुसार, किसान न्यूनतम समर्थन मूल्य पर प्रति एकड़ अधिकतम 16 क्विंटल और एक किसान कुल जोत के आधार पर अधिकतम 200 क्विंटल तक धान बेच सकता है। किसानों के इसके पूर्व ही ई-उपार्जन पोर्टल पर अपना निबंधन कराना होगा और जमीन का सत्यापन कराते हुए और ई-केवाइसी कराना अनिवार्य होगा। कीमत : 2,550 रुपये प्रति क्विंटल और ग्रेड ए धान पर 2,570 रुपये प्रति क्विंटल की दर से किसानों को भुगतान किया जाएगा। किसान अपने नजदीकी धान अधिप्राप्ति केंद्र पर सुबह 10 बजे से शाम चार बजे के बीच धान बेच सकते हैं। झारखंड सरकार किसानों के हितों और उनके आर्थिक सशक्तीकरण के लिए पूरी प्रतिबद्धता के साथ काम कर रही है। मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन के निर्देश पर किसानों को लाभ देने का प्रयास किया गया है। – डॉ. इरफान अंसारी, मंत्री, खाद्य एवं आपूर्ति विभाग।  

Makhana Farming: बिहार के 5 जिलों में होती है मखाने की खेती, जानिए कैसे कीचड़ से निकलता है करोड़ों का सुपरफूड

 पटना  Makhana Farming in Bihar: किसी तालाब या दलदली पोखर के ऊपर तैरते कांटों से भरे बड़े-बड़े हरे पत्तों को देखकर कोई अंदाजा भी नहीं लगा सकता कि पानी की गहराइयों में एक अनमोल खजाना छिपा है। यह कहानी है मिथिला के ‘सफेद मोती’ यानी मखाना की, जिसे आज पूरी दुनिया ‘सुपरफूड’ के रूप में पहचानती है। दुनियाभर में दबदबा भारत दुनिया का 90 प्रतिशत मखाने का उत्पादन करता है और इसमें से 85 से 90 प्रतिशत से भी अधिक हिस्सा अकेले बिहार (खासकर दरभंगा, मधुबनी, पूर्णिया, कटिहार और सहरसा) में पैदा होता है। बिहार के तालाबों के कीचड़ से निकलकर यह न्यूयॉर्क और लंदन के सुपरमार्केट्स में करोड़ों का 'सुपरफूड' बन चुका है। यह सिर्फ एक सूखा मेवा नहीं, बल्कि मिथिला की संस्कृति, पूजा-हवन की परंपरा और लगभग 50,000 किसान परिवारों की आजीविका की रीढ़ है। पानी में पलता है सुपरफूड (Makhana Farming) मखाने का कुरकुरा और सफेद रूप किसी जादू से कम नहीं है, लेकिन इसके पीछे किसान की हाड़-तोड़ मेहनत और तपस्या छिपी होती है। मखाने की खेती पारंपरिक रूप से तालाबों में या आधुनिक तरीके से उथले खेतों में की जाती है। बीज डालने के बाद पानी के भीतर से बड़े-बड़े कांटेदार गोल पत्ते सतह पर फैल जाते हैं। इन्हीं में बैंगनी-गुलाबी रंग के सुंदर फूल खिलते हैं, जो बाद में कांटेदार फल बन जाते हैं। पूरी तरह पकने के बाद फल पानी के भीतर ही फट जाता है। शुरुआत में बीजों के ऊपर लाल रंग का गूदा (अरिल) होता है, जिसके सहारे वे पानी पर तैरते हैं, लेकिन 2-3 दिन बाद गूदा गलते ही भारी काले बीज तालाब या खेत की तलहटी (कीचड़) में बैठ जाते हैं। दलदल से दुनिया की थाली का सफर (Makhana Processing) मखाने के औषधीय गुण और कुरकुरा रूप किसी जादू से कम नहीं है, लेकिन इसके पीछे किसान की कठिनमेहनत और तपस्या छिपी होती है। तालाब की तलहटी से खोज: कांटेदार पौधों के नीचे से किसान पानी में डुबकी लगाकर काले बीजों (गुड़ी) को कीचड़ से बाहर निकालते हैं। धूप में सुखाना और छंटाई: निकाले गए बीजों को धूप में सुखाया जाता है और आकार के अनुसार अलग-अलग छांटा जाता है। आग की भट्टी में तपना: इसके बाद शुरू होती है सबसे कठिन परीक्षा। मिट्टी की हांडी या लोहे की कड़ाही में इन बीजों को 250 से 320 के खौलते तापमान पर भुना जाता है। हथौड़े की थाप और लावा का जन्म: भूनते ही गरम-गरम बीजों को लकड़ी की थापी (हथौड़े) से बड़ी तेजी से फोड़ा जाता है। एक पल की भी देरी हो जाए तो मखाना खराब हो सकता है। किसानों के हाथों पर पड़ने वाले गर्म छालों और पसीने की इसी भट्टी से फूटकर निकलता है सफेद, हल्का और फूला हुआ ‘मखाना लावा’। फिर इसकी पॉलिशिंग कर पैकिंग की जाती है और फिर देश-विदेश भेजा जाता है। सेहत का खजाना आज की भागदौड़ भरी जिंदगी में जब लोग सेहतमंद खान-पान की तलाश कर रहे हैं, तो मखाना सबसे पसंदीदा स्नैक बनकर उभरा है। वजन घटाने में मददगार: 100 ग्राम मखाने में फैट (वसा) की मात्रा न के बराबर (सिर्फ 0.1 ग्राम) होती है, जबकि इसमें 9.7 ग्राम प्रोटीन और प्रचुर मात्रा में फाइबर मिलता है। ताकतवर अमीनो एसिड: इसका अमीनो एसिड इंडेक्स (89% से 93%) दूध, गेहूं और चावल से भी बेहतर माना गया है। दिल और उम्र का रखवाला: इसमें मौजूद खास एंटीऑक्सीडेंट्स और फ्लेवोनोइड्स दिल को मजबूत रखने और बढ़ती उम्र के असर को धीमा करने (एंटी-एजिंग) में मदद करते हैं। स्वादिष्ट रूप अनेक: चाहे व्रत की मखाना खीर हो, शाम की चाय के साथ देसी घी में भुना हुआ नमकीन मखाना, या फिर आज के दौर की मखाना कुकीज और फ्लेक्स हर स्वाद में लाजवाब लगता है।

28 अक्टूबर को आंध्र प्रदेश तट से टकरा सकता है चक्रवात, झारखंड में जलजमाव और बाढ़ को लेकर प्रशासन अलर्ट

 रांची  बंगाल की खाड़ी में सक्रिय चक्रवाती तूफान अर्णब लगातार शक्तिशाली होता जा रहा है। मौसम विभाग के अनुसार, तूफान पश्चिम-मध्य और उससे लगे पूर्व-मध्य बंगाल की खाड़ी के ऊपर केंद्रित है। इसके अगले दो दिनों में और अधिक तीव्र होने की आशंका है। मौसम विभाग ने आंध्र प्रदेश और उससे लगे दक्षिण ओडिशा तटों के लिए चक्रवात चेतावनी का रेड अलर्ट जारी किया है। वहीं मौसम विभाग के अनुसार, चक्रवाती तूफान अर्णब पिछले छह घंटों के दौरान लगभग 13 किमी प्रति घंटे की रफ्तार से पश्चिम की ओर बढ़ा है। सोमवार सुबह 11:30 बजे यह 15.5 डिग्री उत्तरी अक्षांश और 88.2 डिग्री पूर्वी देशांतर के पास स्थित था। 28 अक्टूबर को तट से टकराने की आशंका मौसम विभाग के पूर्वानुमान के अनुसार, तूफान आगे उत्तर-पश्चिम दिशा में बढ़ेगा। इसके 28 अक्टूबर की पूर्वाह्न तक आंध्र प्रदेश के तट पर बापटला और विशाखापत्तनम के बीच यनम के निकट पहुंचने की बहुत अधिक संभावना है। इस दौरान अधिकतम निरंतर हवा की गति 115 से 125 किमी प्रति घंटे रह सकती है। हवा के झोंकों की रफ्तार 140 किमी प्रति घंटे तक पहुंचने का अनुमान है। तट से टकराने के समय तूफान अति प्रचंड चक्रवाती तूफान की श्रेणी में रह सकता है। समुद्र में बनी रहेगी खतरनाक स्थिति तूफान की स्थिति पर मौसम विभाग लगातार नजर रख रहा है। इसके प्रभाव से समुद्र में तेज हवाएं और ऊंची लहरें उठने की आशंका है। तटीय क्षेत्रों में रहने वाले लोगों को मौसम विभाग और स्थानीय प्रशासन की चेतावनियों का पालन करने की सलाह दी गई है। मछुआरों और समुद्र में जाने वाले लोगों को विशेष सतर्कता बरतने की जरूरत है। जिला प्रशासन ने सभी नागरिकों से अनुरोध किया है कि वे मौसम विभाग एवं प्रशासन द्वारा जारी सलाह का पालन करें तथा सतर्क रहें। स्थिति पर निरंतर नजर रखी जा रही है तथा आवश्यकतानुसार आगे के निर्देश जारी किए जाएंगे। मौसम विभाग के अनुसार, चक्रवात ‘अर्नब’ के प्रभाव से दिनांक 28 अक्टूबर से 30 अक्टूबर तक लगातार वर्षा होने की संभावना है। इसके कारण रांची में जलजमाव की स्थिति उत्पन्न हो सकती है। जिसको लेकर जिला प्रशासन अलर्ट मोड में है। शहर के निचले इलाकों एवं सड़कों पर जलजमाव की संभावना है। कच्चे मकान, झुग्गी-झोपड़ियां तथा कमजोर मकानों को आंशिक या भारी नुकसान पहुंच सकता है। नदियां एवं बड़े नाले उफान पर आ सकते हैं। निचले क्षेत्रों में बाढ़ जैसी स्थिति बनने की आशंका है। खेतों में पानी जमा होने से खड़ी फसलों को नुकसान पहुंचाने की संभावना भी व्यक्त की गई है। उपायुक्त ने सभी संबंधित अधिकारियों को सख्त निर्देश दिए हैं कि वे स्थिति पर निरंतर नजर बनाए रखें तथा आवश्यक तैयारी सुनिश्चित करें। जिला प्रशासन द्वारा जारी दिशा निर्देश – आपदा प्रबंधन, राजस्व, नगर निगम, पुलिस, स्वास्थ्य, विद्युत, जल संसाधन एवं संबंधित विभागों के अधिकारी 28 से 30 अक्टूबर तक लगातार निगरानी रखें। – निचले क्षेत्रों, जलजमाव प्रवण क्षेत्रों, नदियों एवं बड़े नालों की नियमित मानिटरिंग की जाए। – सड़कों, नालियों एवं जल निकासी व्यवस्था को साफ रखा जाए। – कच्चे मकानों, झुग्गी-झोपड़ियों एवं कमजोर संरचनाओं वाले क्षेत्रों में विशेष सतर्कता बरती जाए तथा आवश्यकता पड़ने पर लोगों को सुरक्षित स्थानों पर स्थानांतरित करने की व्यवस्था सुनिश्चित की जाए। – खेतों में जलजमाव की स्थिति से फसलों की सुरक्षा के लिए किसानों को उचित सलाह दी जाए। आम नागरिकों से अपील – निचले क्षेत्रों एवं जलजमाव वाले क्षेत्रों में रहने वाले नागरिक विशेष सावधानी बरतें। – अनावश्यक बाहर न निकलें। – कच्चे मकानों में रहने वाले परिवार आवश्यक सावधानी अपनाएं तथा स्थानीय प्रशासन के निर्देशों का पालन करें। – नदियों, नालों एवं जलभराव वाले क्षेत्रों के निकट न जाएं। – किसी भी आपात स्थिति में स्थानीय प्रशासन, पुलिस या आपदा नियंत्रण कक्ष से संपर्क करें। ये दिए गए सुरक्षा के दिशा निर्देश – वर्षा और आंधी के दौरान आकाशीय बिजली गिरने की भारी आशंका है। गरज-चमक शुरू होने पर तुरंत किसी पक्के मकान या सुरक्षित स्थान पर शरण लें। – तेज हवाओं के कारण पुराने पेड़, बिजली के खंभे और होर्डिंग्स गिर सकते हैं। अपनी गाड़ियों को इनके नीचे पार्क न करें। – शहर के निचले शहरी क्षेत्रों में भारी वर्षा से पानी भर सकता है। जलभराव वाली सड़कों पर वाहन चलाने से बचें। – घरों में बिजली के उतार-चढ़ाव या शार्ट सर्किट से बचने के लिए आंधी-तूफान के समय मुख्य स्विच बंद कर दें और कीमती इलेक्ट्रानिक सामानों के प्लग निकाल दें। जिला प्रशासन ने सभी नागरिकों से अनुरोध किया है कि वे मौसम विभाग एवं प्रशासन द्वारा जारी सलाह का पालन करें तथा सतर्क रहें। स्थिति पर निरंतर नजर रखी जा रही है तथा आवश्यकता के अनुसार आगे के निर्देश जारी किए जाएंगे।  

बिहार में बाढ़ से बर्बाद खेतों को फिर खेती योग्य बनाने की तैयारी, किसानों को मिलेगी आर्थिक सहायता

पटना  मुख्यमंत्री सम्राट चौधरी ने बिहार में बाढ़ प्रभावित किसानों को बड़ा तोहफा दिया है। दरअसल सरकार ने बाढ़ की वजह से खेतों में जमी गाद, रेत और बालू से त्रस्त किसानों को सरकार ने राहत देने का फैसला किया है। इसके तहत पटना समेत प्रदेश के 22 जिलों के बाढ़ प्रभावित किसानों को सरकार कृषि योग्य भूमि और मत्स्य प्रक्षेत्रों पर जमा बालू, रेत एवं गाद हटाने के लिए सहायता राशि देगी। मुख्यमंत्री सम्राट चौधरी ने सोमवार को सोशल मीडिया एक्स पर पोस्ट कर इसकी जानकारी दी। इस पहल का उद्देश्य बाढ़ से प्रभावित किसानों को उनकी जमीन को दोबारा खेती योग्य बनाने में सहायता करना है। मुख्यमंत्री ने कहा कि इस प्रावधान के तहत संबंधित किसान को प्रति हेक्टेयर 18 हजार रुपये की सहायता राशि दी जाती है। साथ ही, प्रत्येक पात्र किसान को न्यूनतम 2200 रुपये की सहायता उपलब्ध कराई जायेगी। इससे बाढ़ के बाद खेतों में बालू, रेत और गाद जमा होने के कारण हो रही दिक्कतों को दूर करने में मदद मिलेगी। सरकार की इस पहल से किसान अपनी जमीन को अगली फसल की बुआई के लिए तैयार कर सकेंगे। मुख्यमंत्री के निर्देश पर आपदा प्रबंधन विभाग ने संबंधित 22 जिलों के जिलाधिकारियों को प्रभावित कृषि योग्य भूमि तथा मत्स्य प्रक्षेत्रों का स्थलीय सत्यापन कराने का निर्देश दिया है। सत्यापन के दौरान जमीन पर जमा बालू, रेत एवं गाद के जमाव का आकलन किया जाएगा। इसके आधार पर जिले की ओर से एसडीआरएफ या एनडीआरएफ के निर्धारित सहायता मानकों के तहत राशि की मांग करनी होगी। गौर हो कि इस साल गंगा, सोन, गंडक, कोसी सहित अन्य नदियों में आई बाढ़ का पानी उतरने के बाद खेतों में बालू, रेत एवं गाद जमा होने की समस्या सामने आयी है। इससे जमीन को दोबारा खेती के अनुकूल बनाने में किसानों को अतिरिक्त खर्च उठाना पड़ सकता है। लाखों किसानों को जगी उम्मीद सरकार हर वर्ष बाढ़ प्रभावित इलाकों के किसानों को कृषि इनपुट अनुदान देती है। इस वर्ष भी अनुदान बांटे गए हैं। लेकिन, कृषि इनपुट अनुदान उन्हीं किसानों को मिलता है, जिनकी फसल को बाढ़ से क्षति पहुंची हो। उन किसानों की कोई मदद नहीं मिल पाती है, जिनके खेतों में रेत या गाद जमा हो जाती है। ऐसे किसानों को अब उम्मीद जगी है। इन जिलों में आकलन पटना, भोजपुर, सारण, वैशाली, भागलपुर, बेगूसराय, बक्सर, समस्तीपुर, मुंगेर, कटिहार, लखीसराय, खगड़िया, पूर्णिया, मधेपुरा, अरवल, पश्चिम चम्पारण, पूर्वी चम्पारण, गोपालगंज, दरभंगा, मुजफ्फरपुर, सुपौल एवं सहरसा।

बिहार में राशन कार्ड पर बड़ा एक्शन! 35 लाख फर्जी कार्ड निरस्त, 7.40 लाख परिवारों को मिली खुशखबरी

 पटना राज्य में नए राशन कार्ड के लिए 13 लाख 93 हजार 704 आवेदन आए हैं। इनमें से 7 लाख 40 हजार 925 नए राशन कार्ड पात्र परिवारों को जारी किए जा चुके हैं और इससे 14 लाख 61 हजार 286 नए सदस्य जुड़े हैं। शेष आवेदनों का निष्पादन प्रक्रियाधीन है। राष्ट्रीय खाद्य सुरक्षा अधिनियम के तहत राज्य में 2 करोड़ 9 लाख राशन कार्डों के माध्यम से 8.45 करोड़ लोग लाभान्वित हैं। इनमें से 6.54 करोड़ लाभुकों का ई-केवाइसी पूरा हो चुका है, जो लगभग 80.07 प्रतिशत है। राज्य में 1.85 करोड़ राशन कार्डों पर खाद्यान्न वितरण किया जा रहा है। अक्टूबर 2026 में वन नेशन, वन राशन कार्ड व्यवस्था के तहत बिहार के 3.65 लाख राशन कार्डधारियों ने दूसरे राज्यों में खाद्यान्न प्राप्त किया है। सोमवार को खाद्य एवं उपभोक्ता संरक्षण मंत्री अशोक चौधरी की अध्यक्षता में आयोजित राज्य स्तरीय सतर्कता समिति की बैठक में यह जानकारी दी गई। जन वितरण प्रणाली दुकानों की 4,910 रिक्तियों के विरुद्ध आए 50 हजार आवेदन समीक्षा में यह बात भी सामने आई कि राज्य में जन वितरण प्रणाली दुकानों की 4,910 रिक्तियां हैं। इसकी अनुज्ञप्ति (लाइसेंस) जारी करने के लिए विज्ञापन दिया गया जिसके विरुद्ध 50,031 आवेदन आए हैं। इनमें से अबतक 1,237 राशन दुकानों के लिए पात्र आवेदकों को अनुज्ञप्ति जारी की जा चुकी हैं। शेष मामलों का समयबद्ध निष्पादन करने तथा पात्र आवेदकों को निर्धारित प्रक्रिया के अनुसार अनुज्ञप्ति जारी करने का निर्देश दिया गया। बैठक में शिकायतों के निवारण की समीक्षा की गई। कुल 4,069 शिकायतों में से 3,383 का निष्पादन किया जा चुका है, जो 83.14 प्रतिशत है। शिकायत निवारण प्रणाली को फ्लाइंग स्क्वाड गठित होगा खाद्य एवं उपभोक्ता संरक्षण विभाग में शिकायत निवारण प्रणाली को और सुदृढ़ करने के लिए फ्लाइंग स्क्वाड गठित किया जाएगा। ताकि, शिकायतों का त्वरित एवं प्रभावी निवारण सुनिश्चित हो सके। इससे योजनाओं के क्रियान्वयन की निगरानी और शिकायतों के निष्पादन को अधिक प्रभावी बनाया जा सकेगा। बता दें कि पूर्व में केंद्र सरकार द्वारा बिहार को संदिग्ध 57 लाख एक हजार राशन का डाटा उपलब्ध कराया गया था। इस डाटा को सभी अनुमंडल पदाधिकारी के लागिन में उपलब्ध कराया गया और इसका सत्यापन में 17 लाख 69 हजार राशन कार्ड को सही पाया गया है। जबकि, 35 लाख 36 हजार राशन कार्ड को रद करने की कार्रवाई की गई। बैठक में ये लोग थे शामिल पंचायती राज मंत्री दीपक प्रकाश, पिछड़ा वर्ग एवं अतिपिछड़ा वर्ग कल्याण मंत्री रमा निषाद, अनुसूचित जाति एवं अनुसूचित जनजाति कल्याण मंत्री लखेन्द्र कुमार रौशन, सांसद सुनील कुमार, विधान पार्षद डा.संजीव कुमार सिंह, वीरेन्द्र नारायण यादव एवं रविन्द्र प्रसाद सिंह, विधायक मुरारी प्रसाद गौतम, खाद्य सचिव अभय कुमार सिंह, सहकारिता सचिव धर्मेन्द्र सिंह, निदेशक (उपभोक्ता संरक्षण) विभूति रंजन चौधरी, विशेष सचिव उपेन्द्र कुमार, बिहार राज्य खाद्य एवं असैनिक आपूर्ति निगम के एमडी अभय झा।  

बिहार की पिंकी ने बदली परिवार की किस्मत, जीविका से कर्ज लेकर शुरू की पेवर ब्लॉक यूनिट

गयाजी हौसला मजबूत हो और कुछ कर गुजरने का जज्बा हो, तो मुश्किल परिस्थितियां भी सफलता की राह नहीं रोक सकतीं। नीमचक बथानी प्रखंड की नैली पंचायत स्थित गोवडीहा गांव की पिंकी कुमारी ने अपनी मेहनत और आत्मविश्वास से इसे साबित किया है। कभी आर्थिक तंगी से जूझने वाली पिंकी आज पेवर ब्लॉक निर्माण के कारोबार से अपनी पहचान बना चुकी हैं। उनकी इकाई परिवार की आर्थिक स्थिति मजबूत करने के साथ करीब एक दर्जन लोगों को रोजगार भी दे रही है। एक लाख रुपये के ऋण से रखी कारोबार की नींव पिंकी कुमारी के लिए कारोबार शुरू करने का सफर आसान नहीं था। वर्ष 2013 में जब वह संगम जीविका महिला स्वयं सहायता समूह से जुड़ीं, उस समय परिवार की आर्थिक स्थिति अच्छी नहीं थी। उनके पति पिंटू कुमार के पास भी रोजगार का कोई स्थायी साधन नहीं था। परिवार की जरूरतें पूरी करना चुनौती बना हुआ था। ऐसे में पिंकी ने परिस्थितियों के सामने हार मानने के बजाय आत्मनिर्भर बनने का फैसला किया। जीविका समूह से उन्हें एक लाख रुपये का ऋण मिला। इसी आर्थिक सहयोग से उन्होंने पति के साथ पेवर ब्लॉक निर्माण का काम शुरू किया। शुरुआत में कारोबार स्थापित करने और बाजार में अपनी जगह बनाने के लिए काफी मेहनत करनी पड़ी, लेकिन उन्होंने हिम्मत नहीं हारी। मेहनत से बढ़ी मांग, मजबूत हुई आर्थिक स्थिति पेवर ब्लॉक का इस्तेमाल सड़क किनारे, घरों के आंगन, पार्क, परिसर और अन्य खुले स्थानों पर फर्श बनाने में होता है। निर्माण कार्यों में इसकी उपयोगिता को देखते हुए पिंकी ने कारोबार को आगे बढ़ाने पर ध्यान दिया। धीरे-धीरे उनके उत्पादों की मांग बढ़ने लगी और आसपास के क्षेत्रों में उनकी पहचान बनने लगी। कारोबार से होने वाली आमदनी का उपयोग उन्होंने परिवार की जरूरतें पूरी करने के साथ व्यवसाय को मजबूत बनाने में भी किया। जरूरत पड़ने पर स्वयं सहायता समूह से ऋण लेकर काम को आगे बढ़ाया। समय के साथ अनुभव बढ़ा और परिवार की आर्थिक स्थिति में सुधार आया। महिलाओं के लिए बनीं प्रेरणा पिंकी का कहना है कि जीविका से जुड़ना उनके जीवन का महत्वपूर्ण मोड़ साबित हुआ। आर्थिक सहयोग नहीं मिलता तो निर्माण इकाई शुरू करना मुश्किल होता। आज वह अपने पति के साथ कारोबार का और विस्तार करना चाहती हैं। उनकी सफलता बताती है कि आर्थिक सहायता, अवसर और मेहनत के बल पर ग्रामीण महिलाएं आत्मनिर्भर बनने के साथ दूसरों के लिए रोजगार भी सृजित कर सकती हैं। पिंकी की यह उपलब्धि उन महिलाओं के लिए प्रेरणा है, जो आर्थिक कठिनाइयों के बावजूद अपना व्यवसाय शुरू करने का सपना देखती हैं।

औरंगाबाद में कृषि कॉलेज बनाने की तैयारी तेज, जमीन सत्यापन अंतिम चरण में; छात्रों को मिलेगा बड़ा फायदा

औरंगाबाद जिले में कृषि महाविद्यालय (Agriculture Collge) के स्थापना की स्वीकृति मिलने के बाद इस दिशा में पहल तेज हो गई है। महाविद्यालय के निर्माण के लिए जमीन की तलाश पूर्ण हो गई है। हसपुरा प्रखंड के डिंडीर में पांच एकड़ जमीन चिह्नित की गई है। पूरी प्रक्रिया अंतिम चरण में पहुंच गई है। वर्तमान में चिह्नित जमीन के सत्यापन का कार्य किया जा रहा है। प्रशासनिक स्तर पर यह प्रक्रिया पूरी होने के बाद आगे की कार्रवाई की उम्मीद है। हसपुरा प्रखंड के डिंडिर में बनने की संभावना कृषि महाविद्यालय की स्थापना होने से जिले में कृषि शिक्षा को बढ़ावा मिलेगा और छात्र-छात्राओं को कृषि से संबंधित उच्च शिक्षा प्राप्त करने का अवसर मिल सकेगा। करीब पांच माह पहले उच्च विभागीय अधिकारियों के द्वारा जमीन का निरीक्षण किया गया था। इसी जमीन को चयन होने की बात कही गई थी। परंतु यह अब अंतिम चरण में पहुंच गया है। एक सप्ताह के अंतिम अधिकारियों द्वारा निरीक्षण कर जमीन सत्यापन का कार्य कर लिया जाएगा। जमीन सत्यापन की प्रक्रिया पूरी होने के बाद महाविद्यालय की स्थापना से संबंधित आगे की प्रक्रिया को गति मिलने की संभावना है। हालांकि, निर्माण कार्य शुरू होने की समयसीमा को लेकर अभी स्पष्ट जानकारी सामने नहीं आई है। कृषि शिक्षा को मिलेगा बढ़ावा कृषि महाविद्यालय की स्थापना से जिले के विद्यार्थियों को कृषि के क्षेत्र में पढ़ाई करने के लिए बेहतर अवसर मिल सकेंगे। वर्तमान में कृषि से संबंधित उच्च शिक्षा प्राप्त करने के इच्छुक विद्यार्थियों को दूसरे जिलों या अन्य स्थानों का रुख करना पड़ता है। जिले में ही कृषि महाविद्यालय खुलने से विद्यार्थियों को स्थानीय स्तर पर शिक्षा प्राप्त करने की सुविधा मिल सकती है। इससे कृषि क्षेत्र में करियर बनाने की इच्छा रखने वाले युवाओं को भी प्रोत्साहन मिलेगा। किसानों को भी होगा फायदा कृषि महाविद्यालय की स्थापना का लाभ केवल विद्यार्थियों तक सीमित नहीं रहेगा, बल्कि जिले के किसानों को भी इससे फायदा मिलने की उम्मीद है। कृषि क्षेत्र में शोध और नई तकनीकों के विकास के अवसर उपलब्ध हो सकते हैं। इसके माध्यम से किसानों को आधुनिक खेती, उन्नत बीज, फसल प्रबंधन और उत्पादन बढ़ाने के नए तरीकों की जानकारी देने की संभावनाएं विकसित होंगी। स्थानीय जलवायु और मिट्टी के अनुकूल खेती की तकनीकों पर अनुसंधान से भी किसानों को लाभ मिल सकता है। औरंगाबाद कृषि प्रधान जिला है। ऐसे में यहां कृषि महाविद्यालय की स्थापना को कृषि शिक्षा, अनुसंधान और किसानों की आय बढ़ाने की दिशा में महत्वपूर्ण पहल माना जा रहा है। अब जमीन सत्यापन की प्रक्रिया पूरी होने और स्थापना से संबंधित आगे की कार्रवाई शुरू होने का इंतजार है। जमीन चयन की प्रक्रिया अंतिम चरण में है। जमीन सत्यापन का कार्य होते ही आगे का कार्य शुरु हो जाएगा।     रितेश यादव, वरीय उपसमाहर्ता औरंगाबाद  

मुड़मा जतरा मेले में जुटेंगे लाखों श्रद्धालु, 4 सेक्टरों में बंटा परिसर; 8 जगहों पर ट्रैफिक पुलिस तैनात

रांची  मांडर प्रखंड के प्रसिद्ध ऐतिहासिक मुड़मा जतरा मेले को लेकर जिला प्रशासन ने सुरक्षा की व्यापक तैयारी की है। 27 और 28 अक्टूबर को आयोजित होने वाले इस मेले में लाखों श्रद्धालुओं और लोगों के जुटने की संभावना है। मेले की संवेदनशीलता, पारंपरिक बोंगा और भूत पूजा तथा परिसर के आसपास कब्रिस्तान और ईदगाह की मौजूदगी को देखते हुए प्रशासन ने विधि-व्यवस्था और सांप्रदायिक सौहार्द बनाए रखने के लिए विशेष सतर्कता बरतने का निर्णय लिया है। इस संबंध में उपायुक्त-सह-जिला दंडाधिकारी और वरीय पुलिस अधीक्षक की ओर से संयुक्त आदेश जारी किया गया है। मेले की गतिविधियां 26 अक्टूबर की दोपहर से ही शुरू होने के मद्देनजर दंडाधिकारियों और पुलिस बलों की प्रतिनियुक्ति कर दी गई है। सुरक्षा और प्रशासनिक व्यवस्था की निगरानी ग्रामीण एसपी और सदर अनुमंडल पदाधिकारी करेंगे। चार सेक्टरों में बांटा गया मेला क्षेत्र सुरक्षा व्यवस्था को मजबूत बनाने के लिए पूरे मेला क्षेत्र को चार सेक्टरों में बांटा गया है। प्रत्येक सेक्टर में पुलिस अधिकारियों के साथ पर्याप्त संख्या में पुरुष और महिला लाठी बल की तैनाती होगी। 26 अक्टूबर की सुबह से मेला समाप्त होने तक लगातार काम करने वाला विशेष नियंत्रण कक्ष भी बनाया गया है। यहां दंडाधिकारी और पुलिस अधिकारी तैनात रहेंगे। मेले में ड्रोन और सीसीटीवी कैमरों से निगरानी की जाएगी। इसके अलावा मेला परिसर और आसपास के रास्तों पर नजर रखने के लिए 21 गश्ती दल तैनात किए गए हैं। ये दल मोटरसाइकिल और चारपहिया वाहनों से लगातार गश्त करेंगे। असामाजिक तत्वों, छेड़खानी करने वालों और अफवाह फैलाने वालों पर विशेष नजर रखने का निर्देश दिया गया है। पूर्व में नक्सलियों द्वारा पुलिस बल को निशाना बनाए जाने की घटनाओं को देखते हुए सुरक्षा बलों को विशेष सतर्कता बरतने और निर्धारित दूरी बनाए रखने का निर्देश भी दिया गया है। आपात स्थिति से निपटने के लिए विशेष इंतजाम आपातकालीन परिस्थितियों से निपटने के लिए रैपिड एक्शन पुलिस, हिट टीम और बम निरोधक एवं निष्क्रियकरण दस्ता अलर्ट पर रहेगा। मेला परिसर में वाटर कैनन, आंसू गैस दस्ता और अग्निशमन विभाग की दो बड़ी गाड़ियां तैनात रहेंगी। चिकित्सा सुविधा के लिए चिकित्सकों की टीम के साथ चार एंबुलेंस उपलब्ध रहेंगी। सेंट्रल यूनिवर्सिटी, ब्रांबे के गेस्ट हाउस को सुरक्षित आश्रय स्थल के रूप में चिह्नित किया गया है। वहां भी सशस्त्र बलों की तैनाती रहेगी। आठ प्रमुख चौक-चौराहों पर अतिरिक्त यातायात पुलिस मेले में लाखों की भीड़ को देखते हुए रांची-मांडर मार्ग पर यातायात व्यवस्था सुचारू रखने की जिम्मेदारी यातायात एसपी संभालेंगे। काठीटांड़ चौक, मुड़मा चौक और तिलता चौक समेत आठ प्रमुख चौक-चौराहों पर अतिरिक्त यातायात पुलिस की तैनाती की गई है। वाहनों के लिए आठ अलग-अलग पार्किंग स्थल बनाए गए हैं। मुख्य मार्गों पर अनधिकृत वाहनों के प्रवेश को रोकने के लिए ड्रॉप गेट और बैरिकेडिंग की व्यवस्था की गई है। प्रशासन ने सभी प्रतिनियुक्त अधिकारियों और जवानों को निर्धारित समय पर ड्यूटी संभालने तथा पूरे मेले के दौरान सतर्क रहने का निर्देश दिया है।

कृषि इनपुट अनुदान योजना: छपरा में 20,661 आवेदनों में से 12,395 को मिली अंतिम मंजूरी, 218 लंबित

छपरा सारण जिले में कृषि इनपुट अनुदान योजना के तहत किसानों को राहत राशि देने की प्रक्रिया तेज हो गई है। कृषि विभाग की 24 अक्टूबर 2026 की प्रगति रिपोर्ट के अनुसार, जिले की 31 चिह्नित पंचायतों से प्राप्त कुल 20,661 आवेदनों में से 12,395 को जिला कृषि पदाधिकारी (डीएओ) स्तर से अंतिम मंजूरी मिल चुकी है। इससे बाढ़ और अन्य प्राकृतिक आपदाओं से प्रभावित किसानों को अनुदान राशि मिलने की उम्मीद बढ़ गई है। विभागीय आंकड़ों के अनुसार, योजना के तहत किसानों ने ऑनलाइन आवेदन किया था। कृषि समन्वयकों के स्तर पर भौतिक सत्यापन के बाद 14,860 आवेदनों को स्वीकृति दी गई। इस चरण में 8,83,890.5 रकबे से संबंधित प्रविष्टियों की जांच और सत्यापन का विवरण दर्ज किया गया। वहीं, पात्रता और निर्धारित नियमों के अनुरूप नहीं पाए जाने पर 3,511 आवेदन निरस्त कर दिए गए, जबकि 2,290 आवेदन लंबित रखे गए थे। इसके बाद अनुमंडल कृषि पदाधिकारी (एसएओ) स्तर पर आवेदनों की समीक्षा की गई। इस स्तर पर 12,616 आवेदनों को स्वीकृति मिली, जबकि 584 आवेदन अस्वीकृत किए गए और 1,660 लंबित रहे। अंतिम जांच के बाद जिला कृषि पदाधिकारी ने 12,395 आवेदनों को मंजूरी दे दी है। जिला स्तर पर अब केवल 218 आवेदन लंबित बताए गए हैं। ये आवेदन सोनपुर प्रखंड की नगरमीरा पंचायत से संबंधित हैं। डुमरी और शिकारपुर से मिले सर्वाधिक आवेदन प्रखंडवार आंकड़ों में छपरा, सोनपुर, दिघवारा, गरखा, दरियापुर, रिविलगंज और मांझी की पंचायतों से बड़ी संख्या में आवेदन प्राप्त हुए हैं। सोनपुर प्रखंड की शिकारपुर पंचायत से सर्वाधिक 2,137 आवेदन आए, जबकि छपरा प्रखंड की डुमरी पंचायत से 1,948 किसानों ने आवेदन किया था। इनमें डुमरी के 1,766 और शिकारपुर के 926 आवेदनों को जिला कृषि पदाधिकारी स्तर पर अंतिम मंजूरी मिली है। गड़खा प्रखंड की पचपटिया, इतवा और कोठिया पंचायतों से भी बड़ी संख्या में किसानों ने अनुदान के लिए दावा किया था। स्वीकृत किसानों को डीबीटी से मिलेगी राशि कृषि विभाग के अनुसार, शेष लंबित आवेदनों के निष्पादन की प्रक्रिया जारी है। अंतिम मंजूरी मिलने के बाद पात्र किसानों के बैंक खातों में प्रत्यक्ष लाभ अंतरण (डीबीटी) के माध्यम से अनुदान राशि भेजी जाएगी।