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पूर्णिया के मखाने की विदेशों में धूम, ग्रीस भेजी गई 1 टन की खेप; 8 जिलों में 37,440 टन उत्पादन

भागलपुर बिहार के सीमांचल की मिट्टी और पानी से उपजे 'सफेद मोती' यानी मखाने का डंका अब सात समंदर पार बज रहा है। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने रविवार को अपने मासिक रेडियो कार्यक्रम ‘मन की बात’ में बिहार के पूर्णिया के मखाने की बढ़ती अंतरराष्ट्रीय लोकप्रियता और विदेशी बाजारों में इसके सीधे निर्यात का विशेष तौर पर उल्लेख किया। प्रधानमंत्री की इस सराहना के बाद अंतरराष्ट्रीय खाद्य बाजार में पूर्णिया और कोसी-सीमांचल के मखाने को नई ब्रांडिंग और व्यापक वैश्विक पहचान मिलने की उम्मीदें काफी बढ़ गई हैं। गौरतलब है कि पिछले महीने आयोजित ब्रिक्स (BRICS) शिखर सम्मेलन में विभिन्न देशों से आए राष्ट्राध्यक्षों और राजनयिकों को पूर्णिया का विशेष 'अचारी फ्लेवर' वाला मखाना उपहार स्वरूप भेंट किया गया था, जिसकी अंतरराष्ट्रीय स्तर पर काफी तारीफ हुई थी। मुंद्रा पोर्ट से ग्रीस के पिरियस बंदरगाह पहुंची व्यावसायिक खेप अक्टूबर 2026 की शुरुआत में केंद्रीय वाणिज्य एवं उद्योग मंत्रालय तथा एपीडा (कृषि और प्रसंस्कृत खाद्य उत्पाद निर्यात विकास प्राधिकरण) द्वारा जारी आधिकारिक आंकड़ों के अनुसार, पूर्णिया से मखाने का संस्थागत विदेशी निर्यात अब नई ऊंचाइयों पर पहुंच चुका है। पूर्णिया के बेलौरी स्थित इंडो ग्लोबल एक्सपोर्ट द्वारा तैयार एक टन मखाने की पहली व्यावसायिक खेप सीधे यूरोपीय देश ग्रीस भेजी गई। इस निर्यात की नोडल एजेंसी नई दिल्ली की एसएस फूड्स एक्सपोर्ट्स प्राइवेट लिमिटेड रही, जिसने गुजरात के मुंद्रा बंदरगाह से कंटेनर के जरिए यह कंसाइनमेंट ग्रीस के प्रमुख पिरियस बंदरगाह तक पहुंचाया। 18 से अधिक देशों में धमक, 60 फीसदी उपज का निर्यात आधिकारिक रिपोर्ट के अनुसार, खाड़ी देशों के अलावा यूरोपीय संघ सहित 18 से अधिक देशों में सीमांचल के मखाने की सीधी आपूर्ति हो रही है। इनमें ग्रीस के अलावा संयुक्त राज्य अमेरिका, ब्रिटेन, कनाडा, ऑस्ट्रेलिया, यूएई (दुबई), कतर, सिंगापुर, ब्राजील, मलेशिया, पाकिस्तान, बांग्लादेश और नेपाल प्रमुख आयातक देश बन चुके हैं। कोसी-सीमांचल मखाना: वैश्विक निर्यात एक नजर में पीएम का संबोधन: ‘मन की बात’ कार्यक्रम। ताजा व्यावसायिक निर्यात: 1 टन मखाना बेलौरी (पूर्णिया) से ग्रीस के पिरियस पोर्ट भेजा गया। सप्लाई चेन: उत्पादक- इंडो ग्लोबल एक्सपोर्ट (पूर्णिया); निर्यातक- एसएस फूड्स एक्सपोर्ट्स प्राइवेट लिमिटेड (नई दिल्ली); प्रस्थान- मुंद्रा बंदरगाह (गुजरात)। वैश्विक मंच पर उपस्थिति: ब्रिक्स सम्मेलन में अतिथियों को भेंट किया गया था अचारी फ्लेवर मखाना। निर्यात गंतव्य (18+ देश): ग्रीस, अमेरिका, इंग्लैंड, कनाडा, ऑस्ट्रेलिया, संयुक्त अरब अमीरात (दुबई), कतर, सिंगापुर, ब्राजील, मलेशिया, पाकिस्तान, बांग्लादेश, नेपाल आदि। निर्यात हिस्सेदारी: कुल क्षेत्रीय उत्पादन का लगभग 60 प्रतिशत। गुणवत्ता व खासियत: बड़े आकार का लावा, अत्यधिक कुरकुरा और शुद्ध दूधिया सफेद रंग। कृषि व व्यापार विशेषज्ञों का कहना है कि कोसी और सीमांचल के जलजमाव वाले प्राकृतिक क्षेत्रों में उत्पादित मखाने की सबसे बड़ी यूएसपी (USP) इसका बड़ा आकार और स्वाभाविक दूधिया सफेद रंग है। अपनी इसी उच्च गुणवत्ता और न्यूट्रिशन वैल्यू के कारण यहां उत्पादित कुल मखाने का लगभग 60 प्रतिशत हिस्सा वैश्विक बाजार में हाथों-हाथ खप रहा है। वर्ष 2025-26: कोसी-सीमांचल के 8 जिलों में मखाना उत्पादन की स्थिति जिला     खेती का क्षेत्रफल (हेक्टेयर में)     लावा (पॉप्ड मखाना) उत्पादन (टन में) कटिहार     7,527                                  8,950 पूर्णिया     7,204                                    8,565 सहरसा     4,046                                   4,810 सुपौल     3,814                                    4,534 अररिया     2,714                                   3,227 मधेपुरा     2,553                                    3,036 किशनगंज     2,470                                2,926 खगड़िया     1,170                                 1,392 कुल योग     31,498 हेक्टेयर                   37,440 टन कोसी-सीमांचल के 8 जिलों में 37440 टन रिकॉर्ड उत्पादन वाणिज्यिक और सरकारी आंकड़ों के मुताबिक, वित्तीय वर्ष 2025-26 के दौरान कोसी-सीमांचल क्षेत्र के आठ जिलों में कुल 31,498 हेक्टेयर क्षेत्रफल में मखाने की वैज्ञानिक खेती की गई, जिससे कुल 37,440 टन उन्नत मखाना लावा का उत्पादन दर्ज किया गया है। उत्पादन के मामले में कटिहार जिला 7,527 हेक्टेयर में 8,950 टन उत्पादन के साथ पहले स्थान पर रहा, जबकि पूर्णिया जिला 7,204 हेक्टेयर में 8,565 टन उत्पादन के साथ दूसरे नंबर पर रहा। इसके अलावा सहरसा, सुपौल, अररिया, मधेपुरा, किशनगंज और खगड़िया में भी हजारों मीट्रिक टन मखाने की बंपर पैदावार दर्ज की गई। स्थानीय स्तर पर बेहतर ग्रेडिंग, फ्लेवरिंग और अंतरराष्ट्रीय मानकों की पैकेजिंग मिलने से अब किसानों को बिचौलियों के बजाय सीधे एक्सपोर्टर्स से बेहतर दाम मिल रहे हैं, जिससे इलाके की ग्रामीण अर्थव्यवस्था में क्रांतिकारी बदलाव आ रहा है।  

झारखंड में घरेलू गैस कनेक्शन का विस्तार, रांची में 35 हजार घरों में PNG चालू; 34 CNG स्टेशन भी सक्रिय

रांची राजधानी रांची में पाइपलाइन के जरिए घरेलू प्राकृतिक गैस (पीएनजी ) पहुंचाने की योजना को गति दी जा रही है। गेल (इंडिया) लिमिटेड शहर में सिटी गैस डिस्ट्रीब्यूशन (सीजीडी ) नेटवर्क का विस्तार कर रहा है। वर्तमान में रांची में लगभग 35 हजार घरेलू पीएनजी कनेक्शन चालू हो चुके हैं। अगले छह महीनों में करीब 40 हजार अतिरिक्त घरेलू उपभोक्ताओं को पीएनजी सुविधा से जोड़ने का लक्ष्य रखा गया है। इससे शहर के अधिक परिवारों को रसोई गैस की सुविधाजनक आपूर्ति उपलब्ध कराने में मदद मिलेगी। वहीं गेल के उप महाप्रबंधक प्रशांत कुमार सिंह ने बताया कि रांची के विभिन्न इलाकों में पाइपलाइन नेटवर्क का विस्तार चरणबद्ध तरीके से किया जा रहा है। इसके लिए आवश्यक आधारभूत संरचना विकसित करने पर जोर दिया जा रहा है, ताकि ज्यादा से ज्यादा घरों तक प्राकृतिक गैस की सुविधा पहुंचाई जा सके। 14 क्षेत्रों में नेटवर्क विस्तार की योजना आने वाले महीनों में शहर के 14 क्षेत्रों में पीएनजी नेटवर्क के विस्तार की योजना है। इसमें हेहल, चुटिया, नोवागढ़/नोव नगर, काजू बागान, पुलिस लाइन, लालपुर, मेन रोड, बहू बाजार, वीर कुंवर सिंह कालोनी, महावीर नगर, रांची सेल नगर, पहाड़ी मंदिर क्षेत्र, किशोरगंज और महिलौंग शामिल हैं। इन इलाकों में नेटवर्क विस्तार और आधारभूत संरचना से जुड़े कार्य चरणबद्ध तरीके से आगे बढ़ाए जाएंगे। इससे संबंधित क्षेत्रों में रहने वाले उपभोक्ताओं को पाइपलाइन से गैस उपलब्ध कराने का रास्ता तैयार होगा। रांची में 34 सीएनजी स्टेशन चालू घरेलू पीएनजी के साथ परिवहन क्षेत्र में इस्तेमाल होने वाली सीएनजी की उपलब्धता बढ़ाने पर भी काम किया जा रहा है। गेल के अनुसार, वर्तमान में रांची में 34 सीएनजी स्टेशन चालू हैं। शहर और आसपास के इलाकों में सीएनजी नेटवर्क को मजबूत करने के लिए नए स्टेशन स्थापित करने की योजना बनाई जा रही है। स्मार्ट सिटी से तुपुदाना तक विस्तार की तैयारी नई योजना के तहत धुर्वा स्थित स्मार्ट सिटी, रिंग रोड के गागी चौक, बुढमू चौक और तुपुदाना सहित प्रमुख क्षेत्रों में नए सीएनजी स्टेशन स्थापित करने की दिशा में काम किया जा रहा है। इसके अलावा कुछ मौजूदा डाटर बूस्टर स्टेशन को आनलाइन सीएनजी स्टेशन में बदलने की योजना है। इससे गैस की उपलब्धता और आपूर्ति व्यवस्था को बेहतर बनाने में मदद मिलेगी। स्वच्छ ईंधन को बढ़ावा देने पर जोर पीएनजी और सीएनजी नेटवर्क के विस्तार का उद्देश्य घरेलू, वाणिज्यिक, औद्योगिक और परिवहन क्षेत्र में प्राकृतिक गैस की पहुंच बढ़ाना है। पाइपलाइन से घरों तक गैस पहुंचने पर उपभोक्ताओं को सिलिंडर की बुकिंग और उसे रखने की जरूरत से राहत मिल सकती है। वहीं, सीएनजी नेटवर्क मजबूत होने से वाहनों के लिए गैस की उपलब्धता बढ़ेगी। हालांकि, नए कनेक्शन और स्टेशनों की सुविधा संबंधित क्षेत्रों में नेटवर्क निर्माण, तकनीकी तैयारी और परियोजना की प्रगति पर निर्भर करेगी।

झारखंड में धान खरीदी पर संकट, सरकारी पंजीकरण से किसानों की दूरी; बिचौलियों पर लगाम लगाने की तैयारी

रांची झारखंड के किसानों के लिए मुख्य फसल धान है और इसके लिए किसानों से लेकर सरकार तक लगातार चिंतित रहती है लेकिन कहीं ना कहीं कोई ऐसी बात है कि सरकार को प्रयासों का फल नहीं मिल रहा है। खेतों तक अभी भी सिंचाई के साधन नहीं पहुंच सके हैं तो पूरा वातावरण बिचौलियों से पटा पड़ा है। किसान धान उत्पादन करते हैं तो बिक्री नहीं कर पाते हैं। व्यवस्था में पंजीकरण को लेकर सरकारी आदेश से परेशानी बढ़ने की बात भी कही जा रही है। यही कारण है कि जहां राज्य में लगभग 29 लाख किसान चिह्नित हैं, वहीं महज 1.65 लाख से कुछ अधिक किसानों ने धान बेचने के लिए पंजीकरण कराया है। धान उत्पादक किसानों की यह संख्या देखकर विभाग भी हतप्रभ है। झारखंड में धान बेचने के लिए निबंधित किसानों को पारदर्शी व्यवस्था सुनिश्चित करने के उद्देश्य से विभाग ने कई बदलाव किए हैं। इस कारण से कुछ किसानों और बिचौलियों ने धान बेचने की प्रक्रिया से दूरी बना ली है। पूर्व में भी झारखंड में किसानों के नाम पर कई बिचौलियों ने लाखों के धान बेचे हैं। अब सरकार ने आनलाइन व्यवस्था बनाई है जिसके तहत किसानों के खेती योग्य जमीन की जानकारी के साथ-साथ बैंक पासबुक भी जुड़ा रहता है। इससे धान के एवज में मिलनेवाला भुगतान सीधे किसानों के खाते में चला जाएगा। इसकी प्रक्रिया बहुत ही सरल बनाई गई है। निर्धारित फार्म में जानकारी साझा करने के बाद किसान एक-एक कर सभी भूखंडों की जानकारी डाल सकेंगे। एक भूखंड को एक ही किसान अपने हिस्से में दर्ज करा सकता है। विभाग से तमाम जानकारी को पुष्ट करने के बाद किसानों का पंजीकरण होगा और इसके साथ ही उन्हें निबंधित मोबाइल पर एसएमएस भेजा जाएगा। किसानों को धान विक्रय केंद्रों की जानकारी भी एसएमएस के माध्यम से मिलेगी। धान जमा कराने के बाद किसानों को एक रसीद दी जाएगी और दो से सात दिनों के अंदर भुगतान कर दिया जाएगा।

मोदी को सत्ता से हटाने वाले बयान पर खरगे घिरे, BJP-JDU का हमला; बिहार की राजनीति में बढ़ा तनाव

पटना पटना में कांग्रेस अध्यक्ष मल्लिकार्जुन खरगे के बयान ने बिहार की राजनीति में नया विवाद खड़ा कर दिया है। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और बिहार के पूर्व मुख्यमंत्री नीतीश कुमार को लेकर की गई उनकी टिप्पणियों पर भाजपा और जदयू ने तीखी प्रतिक्रिया दी है। भाजपा नेताओं ने खरगे के बयान को राजनीतिक मर्यादा के खिलाफ बताते हुए कांग्रेस नेतृत्व से माफी की मांग की है। वहीं, जदयू ने नीतीश कुमार पर टिप्पणी करने के खरगे के अधिकार और राजनीतिक हैसियत पर सवाल उठाए हैं। श्रीकृष्ण सिंह जयंती समारोह से शुरू हुआ विवाद विवाद रविवार को पटना में बिहार के पहले मुख्यमंत्री श्रीकृष्ण सिंह की 139वीं जयंती पर आयोजित कार्यक्रम के दौरान सामने आया। भाषण में खरगे चुनावी धांधली के आरोपों का जिक्र कर रहे थे। इसी बीच भीड़ से आवाज आने के बाद उनकी प्रतिक्रिया ने राजनीतिक तूल पकड़ लिया। उनके बयान को लेकर भाजपा और जदयू ने कांग्रेस पर हमला बोल दिया। सम्राट चौधरी ने उठाया भाषा की मर्यादा का सवाल मुख्यमंत्री सम्राट चौधरी ने खरगे की टिप्पणी को अमर्यादित बताते हुए कहा कि प्रधानमंत्री के दिवंगत पिता के प्रति इस तरह की भाषा स्वीकार्य नहीं है। उन्होंने खरगे और राहुल गांधी से देश से माफी मांगने की मांग की। भाजपा नेताओं ने भी कहा कि राजनीतिक विरोध अपनी जगह है, लेकिन व्यक्तिगत टिप्पणी और सार्वजनिक भाषा की मर्यादा का ध्यान रखा जाना चाहिए। भाजपा का आरोप-गांधी परिवार की स्क्रिप्ट पढ़ रहे खरगे भाजपा प्रदेश अध्यक्ष संजय सरावगी ने खरगे के बयान को गांधी परिवार की राजनीतिक रणनीति से जोड़ते हुए कांग्रेस पर निशाना साधा। उन्होंने चुनाव में हार और वोट चोरी के आरोपों को लेकर कांग्रेस की आलोचना की। सरावगी का दावा है कि कांग्रेस को अपनी राजनीतिक स्थिति की समीक्षा करनी चाहिए, न कि अपनी विफलताओं का ठीकरा दूसरी पार्टियों पर फोड़ना चाहिए। नित्यानंद राय ने कांग्रेस पर साधा निशाना केंद्रीय गृह राज्य मंत्री नित्यानंद राय ने आरोप लगाया कि लगातार चुनावी हार के कारण कांग्रेस नेतृत्व हताश है और इसी वजह से आपत्तिजनक बयान दिए जा रहे हैं। उन्होंने कहा कि प्रधानमंत्री के खिलाफ इस तरह की टिप्पणी लोकतांत्रिक मर्यादाओं के अनुरूप नहीं है। राय ने दावा किया कि जनता ऐसे बयानों का जवाब लोकतांत्रिक तरीके से देगी। ऋतुराज सिन्हा बोले-राजनीतिक बहस में व्यक्तिगत हमला उचित नहीं भाजपा नेता ऋतुराज सिन्हा ने भी खरगे की टिप्पणी की आलोचना की। उन्होंने कहा कि चुनावी नतीजों और जनहित के मुद्दों पर बहस करने के बजाय व्यक्तिगत हमले करना उचित नहीं है। सिन्हा ने प्रधानमंत्री के दिवंगत पिता को राजनीतिक बयानबाजी में शामिल करने पर आपत्ति जताते हुए खरगे और कांग्रेस नेतृत्व से बिना शर्त माफी की मांग की। नीतीश कुमार पर टिप्पणी को लेकर जदयू ने कांग्रेस को घेरा जदयू प्रदेश अध्यक्ष उमेश सिंह कुशवाहा ने नीतीश कुमार को समाजवादी विचारधारा का प्रमुख नेता बताते हुए कहा कि उनके लंबे राजनीतिक जीवन पर टिप्पणी करने से पहले कांग्रेस को अपने राजनीतिक रिकॉर्ड पर विचार करना चाहिए। उन्होंने खरगे के बयान को लेकर कांग्रेस नेतृत्व पर निशाना साधा और कहा कि नीतीश कुमार को किसी के प्रमाणपत्र की जरूरत नहीं है। संजय झा की मांग-खरगे माफी मांगें, कांग्रेस ले जिम्मेदारी जदयू के कार्यकारी अध्यक्ष संजय झा ने सोशल मीडिया मंच एक्स पर प्रतिक्रिया देते हुए खरगे से बिना शर्त माफी मांगने की मांग की। उन्होंने कहा कि प्रधानमंत्री के खिलाफ की गई व्यक्तिगत टिप्पणी को सामान्य राजनीतिक आलोचना नहीं माना जा सकता। झा ने कांग्रेस से भी इस मामले में जवाबदेही लेने को कहा। बयानबाजी से बढ़ा राजनीतिक टकराव खरगे की टिप्पणी के बाद भाजपा और जदयू ने कांग्रेस को निशाने पर लेते हुए माफी की मांग तेज कर दी है। भाजपा नेताओं ने इसे राजनीतिक मर्यादा का मुद्दा बनाया, जबकि जदयू ने नीतीश कुमार पर टिप्पणी को लेकर कांग्रेस पर पलटवार किया। इस पूरे घटनाक्रम ने बिहार में सियासी बयानबाजी को और तेज कर दिया है। हालांकि, नेताओं की ओर से लगाए गए आरोप और राजनीतिक प्रतिक्रियाएं उनके अपने दावे हैं।

JPSC परीक्षा में बड़ा खेल? खाली OMR पर 292 अंक मिलने का दावा, CCTV फुटेज से खुलासे

रांची झारखंड लोक सेवा आयोग (जेपीएससी) की 14वीं संयुक्त सिविल सेवा प्रारंभिक परीक्षा में कथित धांधली की जांच कर रही अपराध अनुसंधान विभाग को कई अहम साक्ष्य मिले हैं। परीक्षा केंद्रों के सीसीटीवी फुटेज, अभ्यर्थियों की ओएमआर शीट और कार्बन कॉपी के मिलान में ऐसे अंतर सामने आए हैं, जिनसे परीक्षा की निष्पक्षता पर सवाल खड़े हो गए हैं। जांच के अनुसार, कुछ सफल अभ्यर्थी परीक्षा के दौरान सोते और जम्हाई लेते दिखाई दिए, जबकि उनकी ओएमआर शीट में बड़ी संख्या में उत्तर दर्ज मिले। सोते रहे ओम प्रकाश, ओएमआर में मिले 91 और 92 सही जवाब सीआईडी की जांच में ओम प्रकाश राणा का मामला सामने आया है। वह 14वीं जेपीएससी प्रारंभिक परीक्षा में सफल हुए थे। सीसीटीवी फुटेज के अवलोकन में उनके परीक्षा के दौरान सोने और जम्हाई लेने की बात सामने आई। वहीं, उनकी दोनों पेपर की ओएमआर शीट की जांच में क्रमशः 91 और 92 सही उत्तर मिलने का उल्लेख है। इससे परीक्षा के दौरान उनके प्रदर्शन और ओएमआर में दर्ज उत्तरों के बीच अंतर को लेकर सवाल उठे हैं। वंदना ने हल किए कम प्रश्न, ओएमआर में मिले ज्यादा उत्तर सफल अभ्यर्थी वंदना कुमारी के मामले में भी सीसीटीवी फुटेज और ओएमआर शीट के बीच कथित विसंगति मिली। जांच के मुताबिक, उन्होंने दोनों पेपर में लगभग 49 और 30 प्रश्न ही हल किए थे, जबकि ओएमआर शीट में क्रमशः 98 और 92 उत्तर दर्ज पाए गए। जांच एजेंसी इन तथ्यों को परीक्षा में संभावित गड़बड़ी के साक्ष्य के रूप में देख रही है। खाली ओएमआर के बावजूद अरविंद को मिले 292 अंक अरविंद कुमार का मामला भी जांच के दायरे में है। सीसीटीवी फुटेज में वह परीक्षा के दौरान सोते और जम्हाई लेते दिखे। जांच के अनुसार, उनकी ओएमआर शीट में कोई गोला भरा हुआ नहीं मिला, इसके बावजूद उन्हें 292 अंक मिले। आरोप है कि पूछताछ में अरविंद ने ओएमआर खाली छोड़ने और कार्बन कॉपी जलाने की बात स्वीकार की। कार्बन कॉपी और मूल ओएमआर में भी अंतर एफआरओ परीक्षा के सफल अभ्यर्थी रक्षक सिंह की कार्बन कॉपी में केवल 31 उत्तर दर्ज थे, जबकि मूल ओएमआर में 147 उत्तर मिलने की बात सामने आई है। उनके मोबाइल वीडियो में मूल प्रति स्ट्रांग रूम के बाहर टीडीपीएल कर्मियों के पास दिखाई देने का भी दावा किया गया है। जांच में अभय तिवारी, उसके स्वजन और एजेंटों के माध्यम से अभ्यर्थियों की सफलता को लेकर भी आरोपों की पड़ताल की जा रही है। एक एजेंट के लैपटॉप में परिणाम घोषित होने से दो महीने पहले 24 अभ्यर्थियों की सूची मिलने की बात सामने आई है। सीआईडी के अनुसार, ओएमआर शीट और उत्तर पुस्तिकाओं की स्कैनिंग वाले स्थानों पर सीसीटीवी कैमरे काम नहीं कर रहे थे या निगरानी नहीं थी। इससे दस्तावेजों में कथित छेड़छाड़ की आशंका और गहरी हुई है। जांच एजेंसी इन सभी कड़ियों को जोड़कर परीक्षा में हुई संभावित अनियमितताओं और टीडीपीएल की भूमिका की पड़ताल कर रही है।

बिहार में नया रेल बाइपास शुरू, पटना जंक्शन पर बंद नहीं होंगी सभी ट्रेनें; यात्रियों को मिलेगी राहत

 पटना बिहार में रेल यात्रियों के लिए नए बाइपास रूट को लेकर बड़ी खबर है। नेउरा-जटडुमरी रेलखंड को परिचालन की मंजूरी मिलने के बाद पटना के व्यस्त रेलमार्ग को राहत मिलने की उम्मीद बढ़ गई है। हालांकि, इसका मतलब यह नहीं है कि पटना जंक्शन से सभी ट्रेनें गुजरना बंद हो जाएंगी। नई रेललाइन से मुख्य रूप से मालगाड़ियों को पटना बाइपास करके चलाने की सुविधा मिलेगी, जबकि भविष्य में कुछ यात्री और पैसेंजर ट्रेनों के परिचालन की संभावनाएं भी बनेंगी। साथ ही आपको बता दे कि पटना जक्शन पर तभी ट्रेने नहीं रुकेगी जब ब्लॉक या ट्रेन वहां नहीं रुकती हो, बाकि समय ट्रेने हमेशा की तरह रुकेगी। सभी ट्रेनें नहीं होंगी डायवर्ट, चुनिंदा ट्रेनों पर ही नजर नेउरा-दनियावां रेललाइन को लेकर यात्रियों के बीच यह सवाल उठ रहा है कि क्या दिल्ली-हावड़ा रूट की सभी ट्रेनें अब पटना जंक्शन आना बंद कर देंगी। ऐसा नहीं है। नई लाइन का प्रमुख उद्देश्य मालगाड़ियों को वैकल्पिक रास्ता देना और व्यस्त मुख्य रेलखंड पर दबाव कम करना है। यात्री ट्रेनों को इस रूट से चलाने का फैसला रेलवे की परिचालन योजना के अनुसार होगा। इसलिए पटना जंक्शन, दानापुर या राजेंद्रनगर में ठहरने वाली सभी ट्रेनों के बंद होने की खबर को सही नहीं मानें। नेउरा से जटडुमरी, दनियावां होते हुए मिलेगा वैकल्पिक रास्ता नई रेललाइन के जरिए ट्रेनें नेउरा से जटडुमरी, दनियावां, बिहारशरीफ, बरबीघा और शेखपुरा होते हुए किऊल की ओर जा सकेंगी। इससे उन मालगाड़ियों को पटना के व्यस्त रेलखंड से होकर गुजरने की जरूरत नहीं होगी, जिन्हें पटना या दानापुर में माल उतारना नहीं है। इस वैकल्पिक मार्ग से दानापुर-पटना-किऊल-झाझा रेलखंड पर ट्रेनों की आवाजाही का दबाव कम करने में मदद मिलेगी। कुछ पैसेंजर ट्रेनों के परिचालन की भी बढ़ेगी संभावना नई रेललाइन से केवल मालगाड़ियों का रास्ता बदलने का ही फायदा नहीं होगा। मुख्य रेलखंड पर जगह उपलब्ध होने से भविष्य में अतिरिक्त पैसेंजर ट्रेनों के परिचालन की संभावना भी बढ़ सकती है। इस रूट के आसपास रहने वाले यात्रियों को नए स्टेशन और हॉल्ट से सुविधा मिलने की उम्मीद है। हालांकि, कौन-सी पैसेंजर ट्रेन कब से चलेगी और किन स्टेशनों पर रुकेगी, इसकी जानकारी रेलवे की आधिकारिक घोषणा के बाद ही स्पष्ट होगी। पटना जंक्शन पर ट्रेनों के दबाव में आएगी कमी दानापुर-पटना-किऊल-झाझा रेलखंड दिल्ली-हावड़ा मुख्य रेलमार्ग का महत्वपूर्ण और व्यस्त हिस्सा है। इस पर मालगाड़ियों की आवाजाही के कारण कई बार यात्री ट्रेनों के परिचालन पर भी असर पड़ता है। वैकल्पिक बाइपास शुरू होने से मालगाड़ियों के लिए अलग रास्ता उपलब्ध होगा। इससे सिग्नल और आउटर पर इंतजार कम करने तथा यात्री ट्रेनों के परिचालन को बेहतर बनाने में मदद मिल सकती है। नेउरा, जटडुमरी और दनियावां के यात्रियों को भी फायदा नई रेललाइन से पटना, नालंदा, शेखपुरा और लखीसराय के बीच रेल संपर्क को बेहतर बनाने में मदद मिलेगी। नेउरा-जटडुमरी के बीच गोनपुरा स्टेशन और अधपा, चामाचक तथा वाजिदपुर हॉल्ट बनाए गए हैं। इन इलाकों के यात्रियों को भविष्य में नई ट्रेन सेवाएं मिलने पर लंबी दूरी की यात्रा के लिए अधिक विकल्प मिल सकते हैं। इससे स्थानीय स्तर पर आवागमन और क्षेत्रीय विकास को भी बढ़ावा मिलने की उम्मीद है।

साइबर ठगी से बचने के लिए बड़ा कदम, बिहार में लाखों सिम बंद; पटना के 6.70 लाख नंबर भी शामिल

पटना  पटना के 6.70 लाख समेत बिहार के 15,69, 122 उपभोक्ताओं ने सिमकार्ड बंद करा दिए हैं। इन नंबरों का कोई और इस्तेमाल कर रहा था। संचार साथी ऐप से इसकी जानकारी मिलने पर सिम बंद करवाने के लिए आवेदन दिया गया। दरअसल, साइबर अपराध और धोखाधड़ी के मामलों की जांच के दौरान ऐसे कई सिम कार्ड मिले, जो दूसरे व्यक्ति के नाम पर जारी थे, लेकिन उनका इस्तेमाल कोई और कर रहा था। इसकी जानकारी सिम धारकों को भी नहीं थी। जब असली सिम धारकों को जानकारी मिली तो उन्होंने दूरसंचार विभाग से संपर्क कर सिम बंद करवाए। संचार साथी ऐप पर राज्यभर से 33 लाख छह हजार 298 मोबाइल धारकों ने अपने नाम पर जारी सिम कार्ड की जानकारी प्राप्त करने के लिए आवेदन किया था। इनमें से 15 लाख 69 हजार ने पाया कि उनके नाम पर जारी सिम का इस्तेमाल कोई दूसरा कर रहा था। दूरसंचार विभाग की जांच में भी ऐसे नंबरों के दूसरे व्यक्तियों द्वारा इस्तेमाल किए जाने की पुष्टि हुई। 7.33 लाख लोगों ने अतिरिक्त सिम कार्ड बंद करवाए एक व्यक्ति के नाम पर अधिकतम नौ सिम कार्ड रखने का नियम लागू है। वर्ष 2024 से अब तक सात लाख 33 हजार लोगों ने अपने नाम पर नौ से अधिक जारी सिम कार्ड बंद करवाए। इसके लिए दूरसंचार विभाग ने पहले ऐसे लोगों की पहचान की, जिनके नाम पर नौ से अधिक सिम कार्ड थे। इसके बाद संबंधित कंपनियों के माध्यम से मोबाइल धारकों को अतिरिक्त सिम बंद करवाने के लिए संदेश भेजे गए। फर्जी तरीके से सिम लेने पर 50 लाख रुपये तक जुर्माना अगर कोई व्यक्ति किसी दूसरे के नाम पर फर्जी तरीके से सिम कार्ड लेकर उसका इस्तेमाल करता है, तो उस पर 50 लाख रुपये तक का जुर्माना लगाया जा सकता है। तीन साल तक की जेल भी हो सकती है। दूरसंचार विभाग ने सभी दूरसंचार कंपनियों के माध्यम से ग्राहकों को इसकी जानकारी दी है। सिम कार्ड रखने के नियम ● कोई भी अपने नाम पर अधिकतम नौ सिम कार्ड रख सकता है। ● नया सिम कार्ड लेने के लिए बायोमेट्रिक सत्यापन अनिवार्य है। ● यदि आपके नाम पर जारी सिम कार्ड का इस्तेमाल साइबर अपराध में होता है, तो आप भी जांच के दायरे में आ सकते हैं। ● यदि आप किसी सिम कार्ड का इस्तेमाल नहीं कर रहे, तो तुरंत बंद करवा दें। कब कितने सिम बंद साल – बंद सिम 2021-22 – 6.20 लाख 2022-23 – 9.50 लाख 2023-24 – 12.80 लाख 2024-25 – 16.10 लाख

रांची में फुटपाथ दुकानदारों को मिलेगी स्थायी दुकान, 1 एकड़ में बन रहा वेंडिंग जोन; नगर आयुक्त ने दिए निर्देश

 रांची मोरहाबादी में फुटपाथ दुकानदारों को स्थायी और व्यवस्थित कारोबार स्थल उपलब्ध कराने के लिए 3.26 करोड़ रुपये की लागत से आधुनिक वेंडिंग जोन विकसित किया जा रहा है। रजिस्ट्री कार्यालय के समीप करीब एक एकड़ जमीन पर बन रहे इस वेंडिंग जोन में 205 दुकानदारों के लिए जगह उपलब्ध होगी। इससे सड़क किनारे दुकान लगाने की मजबूरी कम होगी और क्षेत्र में जाम व अव्यवस्था से भी राहत मिलने की उम्मीद है। शनिवार को नगर आयुक्त सुशांत गौरव ने निर्माणाधीन वेंडिंग जोन का निरीक्षण कर कार्य की प्रगति का जायजा लिया। अधिकारियों ने बताया कि परिसर में एक मंजिला शेड बनाया जा रहा है। इसके अलावा पेयजल, शौचालय, पैदल पथ, नाली, वर्षा जल संचयन, हरियाली, बिजली और सुरक्षा कक्ष की व्यवस्था की जाएगी। धीमी निर्माण गति पर जताई नाराजगी निरीक्षण के दौरान निर्माण कार्य की धीमी प्रगति पर नगर आयुक्त ने नाराजगी जताई। उन्होंने संबंधित अभियंताओं को काम में तेजी लाने और अगले सात दिनों के भीतर चारदीवारी का निर्माण पूरा करने का निर्देश दिया। परिसर में पेवर ब्लाक व्यवस्थित करने के साथ नाली, पैदल पथ और पुलिया का काम भी बेहतर तरीके से पूरा करने को कहा। प्रवेश और निकास की समुचित व्यवस्था सुनिश्चित करने का निर्देश दिया गया। नगर आयुक्त ने स्पष्ट किया कि निर्माण में गुणवत्ता से समझौता नहीं होना चाहिए। निर्धारित समय-सीमा में काम पूरा नहीं होने पर संबंधित लोगों के खिलाफ नियमानुसार कार्रवाई की जाएगी। उन्होंने वेंडिंग जोन को केवल दुकानदारों के कारोबार का स्थल नहीं, बल्कि स्वच्छता और बेहतर शहरी व्यवस्था की पहचान के रूप में विकसित करने पर जोर दिया। निरीक्षण के दौरान उप नगर आयुक्त रविंद्र कुमार, कार्यपालक अभियंता संजीव कुमार सहित अन्य अधिकारी मौजूद थे।  

बिहार की अस्मिता की प्रेरक कहानी, ₹50,000 से शुरू किया बिजनेस; अब महिलाओं को दे रहीं रोजगार

शेरघाटी (गया) हुनर, मेहनत और आत्मविश्वास के बल पर शेरघाटी प्रखंड के नवादा गांव की अस्मिता कुमारी ग्रामीण आत्मनिर्भरता की मिसाल बन रही हैं। स्नातक तक पढ़ाई करने वाली अस्मिता ने गुजरात के गांधीधाम-अंजार में सिलाई का हुनर सीखा और गांव लौटकर रेडीमेड कपड़ों का कारोबार शुरू किया। आज वह कपड़ा निर्माण इकाई, रेडीमेड दुकान और सुधा दूध संग्रह केंद्र संचालित कर रही हैं। उनके प्रयास से 2 दर्जन गांवों के किसानों को दूध बेचने का माध्यम मिला है, जबकि महिलाएं काज-बटन का काम कर आमदनी अर्जित कर रही हैं। 50 हजार रुपये से शुरू किया कारोबार अस्मिता वर्ष 2017 में अपने पति अजित कुमार के साथ रोजगार की तलाश में गुजरात गई थीं। वहां कलेक्शन इंडिया लिमिटेड में सिलाई का प्रशिक्षण लेकर दोनों महीने में 30 से 40 हजार रुपये तक कमाने लगे। सितंबर 2019 में गांव लौटने के बाद उन्होंने स्थानीय स्तर पर रोजगार शुरू करने का निर्णय लिया। जीविका समूह से जुड़कर ऋण और करीब 50 हजार रुपये की पूंजी से तीन फरवरी 2020 को ‘पटेल शर्ट मेकर’ की शुरुआत की। पहले महीने 268 शर्ट तैयार कर बाजार में बेची गईं। लॉकडाउन में टूटी रफ्तार, फिर संभाला कारोबार कारोबार शुरू होने के कुछ समय बाद कोरोना संक्रमण और लॉकडाउन ने उनकी मुश्किलें बढ़ा दीं। कच्चे माल की कमी और काम बंद होने से आर्थिक संकट पैदा हुआ। हालांकि, अस्मिता और उनके पति ने हिम्मत नहीं हारी। दोबारा काम शुरू कर स्कूली बच्चों की पोशाक बनाने सहित कारोबार का विस्तार किया। वर्तमान में इकाई में सिलाई, कटिंग और प्रेस की मशीनें उपलब्ध हैं। पूंजी और मशीनों की कमी बनी चुनौती अस्मिता कारोबार को बड़े स्तर पर ले जाना चाहती हैं। इसके लिए उन्हें करीब दस लाख रुपये की पूंजी की जरूरत है। उनके पति अजित कुमार के अनुसार, शर्ट बनाने का कपड़ा कोलकाता से मंगाना पड़ता है, जबकि मशीनें और अन्य सामग्री गुजरात से लानी पड़ती हैं। काज-बटन के काम को आसान बनाने वाली एम्ब्रॉयडरी मशीन की कीमत भी करीब तीन से पांच लाख रुपये है। महिलाओं को रोजगार देने का लक्ष्य जीविका समूह से जुड़ी महिलाएं काज-बटन का काम कर घरेलू खर्च में योगदान दे रही हैं। अस्मिता अपनी निर्माण इकाई का पंजीकरण कराने और ट्रेडमार्क हासिल करने का प्रयास कर रही हैं। उन्हें उम्मीद है कि वित्तीय सहायता और आधुनिक मशीनें मिलने पर कारोबार का विस्तार होगा और अधिक लोगों को रोजगार मिलेगा। उनका प्रयास है कि गांव की महिलाओं को स्थानीय स्तर पर काम मिले, जिससे वे आर्थिक रूप से आत्मनिर्भर बन सकें।  

‘फॉर्म 47 सरकार’ कहकर भारत ने पाकिस्तान को घेरा, PoK खाली करने की दोटूक मांग

 नई दिल्ली संयुक्त राष्ट्र महासभा (UNGA) की तीसरी समिति में अल्पसंख्यकों से जुड़े मुद्दों पर चर्चा के दौरान भारत ने पाकिस्तान पर आरोप लगाया कि वह भारत की छवि खराब करने के लिए गलत जानकारी फैला रहा है और अपने देश की समस्याओं से ध्यान भटकाने के लिए अंतरराष्ट्रीय मंचों का इस्तेमाल कर रहा है। संयुक्त राष्ट्र में भारत के स्थायी मिशन के प्रथम सचिव रघु पुरी ने पाकिस्तानी प्रशासन को 'फॉर्म 47 सरकार' बताया। उन्होंने कहा कि इस्लामाबाद में बैठी इस कठपुतली सरकार के असली मालिक देश के फौजी जनरल हैं, जिनके आदेशों को टालने की हिम्मत वहां के किसी नेता में नहीं है। इसके साथ ही भारत ने पाकिस्तान के कश्मीर का राग अलापने पर कहा कि जम्मू-कश्मीर पर अब कोई विवाद नहीं है, सिवाय इसके कि पाकिस्तान PoK खाली करे। पाकिस्तान में सेना ही असली मालिक- रघु पुरी रघु पुरी ने कहा कि पाकिस्तान में सेना का प्रभाव सबसे ऊपर है। उन्होंने बताया कि पाकिस्तान की अर्थव्यवस्था दबाव में है, कानून-व्यवस्था की स्थिति बहुत खराब है और खैबर पख्तूनख्वा से लेकर बलूचिस्तान तक मानवाधिकारों के उल्लंघन के आरोप लग रहे हैं। फिर भी मौजूदा सरकार में सेना के निर्देशों को चुनौती देने की ताकत नहीं है। उन्होंने तंज कसते हुए कहा कि भारत, पाकिस्तानी प्रतिनिधि की राजनीतिक बेबसी को अच्छी तरह समझता है, क्योंकि वहां लोकतंत्र सिर्फ एक दिखावा है और हमेशा सेना के हितों को प्राथमिकता दी जाती है। उन्होंने पाकिस्तान की सरकार के लिए ‘Form 47 सरकार’ शब्द का इस्तेमाल किया। पाकिस्तान में, 'फॉर्म 47' एक आधिकारिक चुनावी दस्तावेज है, जिसका उपयोग किसी निर्वाचन क्षेत्र में मतदान के प्रोविजनल रिजल्ट दर्ज करने के लिए किया जाता है। वहां फरवरी 2024 के आम चुनावों के बाद चुनावी धांधली और अनियमितताओं के आरोप लगे थे। विपक्ष ने आरोप लगाया था कि मौजूदा सरकार को जबरन सत्ता में लाने के लिए इस विशेष फॉर्म में हेरफेर की गई थी। कश्मीर पर भी पाकिस्तान को दिया जवाब जम्मू-कश्मीर का मुद्दा उठाने की पाकिस्तान की कोशिश पर कड़ा रुख अपनाते हुए रघु पुरी ने कहा कि जम्मू-कश्मीर और लद्दाख भारत का अभिन्न, अटूट और अविभाज्य हिस्सा हैं। उन्होंने कहा कि इस पूरे मामले में अब केवल एक ही काम बचा है, पाकिस्तान उन भारतीय क्षेत्रों (PoK) को बिना शर्त खाली करे, जिन पर उसने अवैध रूप से कब्जा कर रखा है। भारतीय राजनयिक ने पाकिस्तानी प्रतिनिधि को सलाह दी कि वे सेना के इशारों पर नाचना और दूसरों को उपदेश देना बंद करें। इसके बजाय, वे अपने ही देश के समझदार नागरिकों की बात सुनें, अपने कार्यों पर विचार करें और अपने लोगों की भलाई पर ध्यान दें। अल्पसंख्यकों के मुद्दे पर प्रतिक्रिया अल्पसंख्यकों के अधिकारों को लेकर पाकिस्तान द्वारा उठाए गए सवालों पर रघु पुरी ने कहा कि आजादी के बाद से पाकिस्तान में अल्पसंख्यकों की आबादी जिस तेजी से घटी है, वह ऐतिहासिक और अंतरराष्ट्रीय स्तर पर पूरी तरह दर्ज है। इसके विपरीत भारत दुनिया का सबसे बहु-धार्मिक, बहु-सांस्कृतिक और बहुभाषी समाज है, जिसकी बुनियाद ही विविधता पर टिकी है। उन्होंने कहा कि भारतीय संविधान अल्पसंख्यकों के अधिकारों की पूरी गारंटी देता है। अल्पसंख्यक समुदायों के लोग न केवल सर्वोच्च संवैधानिक पदों पर आसीन हैं, बल्कि सरकार, न्यायपालिका, सशस्त्र बलों और कॉर्पोरेट क्षेत्र में भी शीर्ष पदों पर हैं, जिसकी बराबरी पाकिस्तान कभी नहीं कर सकता।