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बिहार विधान परिषद चुनाव में NDA की एकजुटता का दिखा असर, BJP को फायदा; RJD और जन सुराज ने खोला खाता

पटना बिहार विधान परिषद की शिक्षक और स्नातक कोटे की कुल आठ सीटों के चुनाव नतीजों और चल रही मतगणना के रुझान का संक्षेप संदेश है कि आपसी झगड़े में महागठबंधन के घटक कांग्रेस और सीपीआई समेत विपक्ष से जन सुराज पार्टी ने अपनी-अपनी सिटिंग एमएलसी सीटें गंवा दी, जबकि एकजुटता और बगावत पर डंडा चलाकर बीजेपी-जेडीयू के नेतृत्व वाले एनडीए गठबंधन ने लाज बजा ली। जिन 8 सीटों पर चुनाव हुए थे, उनमें मौजूदा एमएलसी के हिसाब से 2 सीट बीजेपी, 1-1 सीट जेडीयू, कांग्रेस, सीपीआई और जन सुराज पार्टी, जबकि 3 सीटें निर्दलीय के पास थी। 6 सीट के नतीजे घोषित हो गए हैं, जबकि बाकी 2 पर आगे चल रहे कैंडिडेट की ही जीत मानकर बात करें तो भाजपा एक सीट के फायदे से 3 पर पहुंच गई है। राजद और जन सुराज पार्टी का खाता खुला है। सीपीआई और कांग्रेस साफ हो गई है। निर्दलीय 1 घटकर 2 पर पहुंच रहे हैं। हालांकि निर्दलीय की दलीय निष्ठा देखें तो पिछली बार के 3 निर्दलीय में 1-1 भाजपा और जन सुराज के थे। इस बार भी जो 2 निर्दलीय जीत रहे हैं, उनमें 1 भाजपा का बागी है। तालमेल नहीं होने के कारण महागठबंधन को मुंह की खानी पड़ी। नई सीटों पर जीत हासिल करने की बात कौन कहे, घटक दल जीती सीट भी नहीं बचा पाये। कांग्रेस के दिग्गज नेता मदन मोहन झा कई बार से जीत रहे दरभंगा शिक्षक सीट नहीं बचा सके। सीपीआई के संजय सिंह तिरहुत टीचर से हार गए। राजद के संजीव सिंह ने पटना टीचर सीट बीजेपी के नवल किशोर यादव से छीनकर बड़ा उलटफेर किया, क्योंकि यादव लगातार 5 बार से जीत रहे थे। दरभंगा स्नातक सीट पर भी राजद का कैंडिडेट दमदार प्रदर्शन कर रहा है, लेकिन भाजपा कैंडिडेट सर्वेश कुमार के पीछे है। चुनाव की घोषणा के साथ ही महागठबंधन में बिखराव दिखने लगा था। राजद ने सहयोगी दलों से बात किए बिना प्रत्याशियों की घोषणा कर दी थी। इस पर बिफरी कांग्रेस ने भी राजद प्रत्याशियों के सामने पटना शिक्षक, पटना स्नातक, कोसी स्नातक और दरभंगा स्नातक सीटों से अपने उम्मीदवार उतार दिए। सीपीआई भी दोस्ताना संघर्ष में कूद गई। आठ में से महज दो सीटें ही ऐसी दिखीं, जहां महागठबंधन के दल आपस में नहीं लड़ रहे थे। विपक्ष के नेता तेजस्वी यादव ने जब सफाई दी तो भी यही कहा कि पिछली बार की तरह सभी अलग-अलग लड़ रहे हैं। एनडीए की रणनीति कारगर दिखी एनडीए के घटक दलों में शुरू से ही एकता नजर आई और यह परिणामों में भी परिणत हुई। आरंभ में ही तय हो गया कि चुनाव में एनडीए की ओर से जदयू और भाजपा के 4-4 उम्मीदवार लड़ेंगे। हम, लोजपा (आर) और रालोमो ने समर्थन किया और पंचायत, प्रखंड, जिला से राज्य मुख्यालय तक के नेता एकजुट नजर आए। इसने स्नातक और शिक्षक सीटों के मतदान में बड़ा असर डाला। एनडीए दलों के समर्थक वोटरों में कोई बिखराव नहीं हुआ और नतीजा एनडीए की बढ़त के रूप में सामने आया। इस चुनाव को लेकर एनडीए की व्यापक रणनीति भी दिखी। भाजपा और जदयू के दफ्तरों में घटक दलों की कई बैठकें हुईं। हालांकि, जदयू को पटना स्नातक सीट पर अपने ही विधायक अनंत सिंह की बगावत से किरकिरी झेलनी पड़ी। जेडीयू ने संभाल ली अनंत सिंह की बगावत पर अंत-अंत तक जदयू ने इस सीट को संभाल लिया। साथ ही, मतदान के बाद अनंत सिंह को दल से निकाल कर अपने समर्थकों के बीच वह संदेश देने में भी कामयाब रहा। वहीं, सारण शिक्षक सीट से रालोमो के रामपुकार सिन्हा चुनाव में कूदे तो दल के तीन विधायकों ने उनका समर्थन कर दिया। लेकिन, दल और गठबंधन के कहने पर रामपुकार ने अपनी दावेदारी वापस ले ली। यह दीगर है कि तब भी जदयू के आनंद पुष्कर अपने दूसरे प्रयास में भी कामयाब नहीं हो पाए। यह सीट बीजेपी के बागी निर्दलीय राहुल राज ने जीत ली। जन सुराज पार्टी की विधान परिषद में हुई इंट्री बांकीपुर विधानसभा उप-चुनाव के बाद एमएलसी इलेक्शन भी जन सुराज के लिए बेहतर नतीजा लेकर आया। पिछली बार सारण शिक्षक सीट से निर्दलीय जीतकर आए अफाक अहमद पार्टी का सिम्बल लेकर उतरे। हालांकि वे जीत नहीं पाए। लेकिन, जन सुराज ने सभी सीटों पर जीतने वालों को सीधी टक्कर दी या लड़ाई का तीसरा कोना बने। जन सुराज के सुरेश प्रसाद राय ने दरभंगा में शिक्षक सीट से दिग्गज कांग्रेसी मदन मोहन झा को हराकर जन सुराज की बिहार विधान परिषद में भी एंट्री करा दी। जन सुराज ने सभी आठ सीटों पर प्रत्याशी उतारे थे। सुरेश राय की जीत के साथ अब बिहार विधानमंडल के दोनों सदनों में पार्टी के एक-एक सदस्य हो गए हैं, जिसमें एक प्रशांत किशोर ही हैं।

ट्रेन दुर्घटना में टिकट नहीं मिला तो भी मिलेगा मुआवजा! झारखंड हाई कोर्ट ने स्पष्ट किया अधिकार

 रांची  हाई कोर्ट के जस्टिस एसके द्विवेदी की अदालत ने कहा कि ट्रेन दुर्घटना में किसी यात्री की मौत होने पर उसके शव से रेलवे टिकट नहीं मिलने के आधार पर मुआवजे का दावा खारिज नहीं किया जा सकता। अदालत ने रेलवे को बनमाली गोप के स्वजनों को आठ लाख रुपये मुआवजा देने का आदेश दिया है। अदालत ने कहा कि मुआवजे से जुड़े नियमों को उदारता से समझना चाहिए, ताकि दुर्घटना के शिकार परिवारों को न्याय मिल सके। केवल तकनीकी कारणों से किसी परिवार को मुआवजे से वंचित करना उचित नहीं है। अदालत ने रेलवे दावा अधिकरण के उस फैसले को निरस्त कर दिया, जिसमें टिकट नहीं मिलने के कारण मुआवजे का दावा खारिज कर दिया गया था। मामला बनमाली गोप की मौत से जुड़ा है। उनके स्वजनों ने आठ लाख रुपये मुआवजे की मांग की थी, लेकिन अधिकरण ने 12 सितंबर 2023 को दावा खारिज कर दिया था। इसके बाद स्वजनों ने हाई कोर्ट में अपील की। भीड़ में धक्का लगने से ट्रेन से गिरे थे बनमाली स्वजनों के अनुसार, एक सितंबर 2017 को बनमाली गोप पलामू के झींकपानी रेलवे स्टेशन से टाटा-बड़बिल पैसेंजर ट्रेन में सवार हुए थे। उन्हें केंदपोसी जाना था। ट्रेन में काफी भीड़ थी और वह खड़े होकर यात्रा कर रहे थे।  

‘बॉस-मैम’ बोलने और नजरें झुकाने का फरमान! NMCH में रैगिंग पर बड़ी कार्रवाई, सीनियर बैच निलंबित

 पटना सिटी  नालंदा मेडिकल कॉलेज में एमबीबीएस वर्ष 2026 में नामांकित छात्र-छात्राओं के साथ वर्ष 2025 के विद्यार्थियों द्वारा तथाकथित रैगिंग किए जाने के आरोप में पूरे बैच को तीन महीनों के लिए कक्षा से निलंबित करने का मामला तूल पकड़ लिया है। इस मामले में कॉलेज के छात्रावास में रहने वाली वर्ष 2023-24 की छात्राओं पर भी कार्रवाई की गई है। आरोप के घेरे में आए सभी विद्यार्थियों को 24 घंटे में छात्रावास खाली करने का भी आदेश दिया गया है। इस फैसले के खिलाफ बुधवार को कॉलेज में गहमा-गहमी बढ़ी रही। राष्ट्रीय चिकित्सा आयोग (एनएमसी), ऑल इंडिया एंटी रैगिंग कमेटी और बिहार ग्रीवांस सेल तक पहुंचे रूलबुक-2026 के पीडीएफ में सीनियर छात्र-छात्राओं को बास-मैम कह कर संबोधित करने, उनके सामने विशेष मुद्रा में खड़े रहने, उनकी आंखों में सीधे नहीं देखने, सीनियर और शिक्षकों से बहस न करने जैसे निर्देश शामिल हैं। राष्ट्रीय आयोग ने इन अहम सवालों पर स्पष्टीकरण मांगा राष्ट्रीय चिकित्सा आयोग ने रूलबुक-2026 के पीडीएफ की जांच कराने, पीडीएफ कॉलेज परिसर, छात्रावास, विद्यार्थियों के समूह या अन्य माध्यमों से प्रसारित हुई, यदि हां तो डीडीएफ के निर्माण एवं प्रसार के स्रोत की जांच की जाए। कॉलेज में रैगिंग रोकने के लिए क्या-क्या कदम उठाए गए, विद्यार्थियों की सुरक्षा सुनिश्चित करने के लिए क्या व्यवस्था की गयी, एंटी रैगिंग स्क्वाड, शिकायत निवारण व्यवस्था तथा विद्यार्थियों को रैगिंग के विरुद्ध जागरूक करने के लिए क्या कदम उठाए गए, अब तक कॉलेज को रैगिंग की कितनी शिकायतें प्राप्त हुई, उन पर क्या कार्रवाई की गई, शिकायत करने वाले विद्यार्थी की पहचान गोपनीय रखी जाए, किसी भी प्रकार के प्रतिरोध या उत्पीड़न से उसकी सुरक्षा सुनिश्चित की जाए। प्राचार्य और तीन विभाग के शिक्षकों का फोटो। वर्ष 2025 बैच के सभी विद्यार्थियों के नाम। छात्र और छात्रा के लिए अलग-अलग ड्रेस कोड। एप्रन संबंधित गाइडलाइन। पंद्रह गोल्डन रूल्स। प्रणाम बॉस-मैन कहते हुए अपना परिचय देने का हिंदी में फॉर्मेट। डॉक्टर सैम की तरह अच्छा व्यवहार करने का उल्लेख है। अंत में ऑल द बेस्ट 2025 बैच लिखा है। आज छात्राओं और कल छात्रों का पक्ष सुनेगा कॉलेज प्रशासन नालंदा मेडिकल कॉलेज की प्राचार्या प्रो. डॉ. उषा कुमारी ने बुधवार को बताया कि सामने आई रैगिंग से जुड़ी शिकायतों के आलोक में गुरुवार को वर्ष 2023, 2024 एवं 2025 की छात्रावास में रहने वाली छात्राओं को अपना पक्ष रखने के लिए बुलाया गया है। शुक्रवार को आरोपित बैच 2025 के सभी छात्रों को बुलाया गया है। सभी का पक्ष सुनने के बाद प्राप्त शिकायतों की सत्यता की जांच करते हुए सुनिश्चित किया जाएगा कि किसी बेकसूर विद्यार्थी को किसी तरह का नुकसान न हो।

बिहार विधान परिषद में उलटफेर: RJD जीती, फिर भी घट गई ताकत; ‘49’ के नंबर की चर्चा तेज

पटना Bihar MLC Election Result: एक सीट पर राजद की जीत के बावजूद विधान परिषद में महागठबंधन की हैसियत अपेक्षाकृत कम होगी। परिषद में उसके अभी 19 सदस्य हैं। मध्य नवंबर के बाद उनकी संख्या 18 रह जाएगी, क्योंकि 16 नवंबर को उन आठ सीटों के प्रतिनिधियों का कार्यकाल पूरा हो जाएगा, जिन पर चुनाव हुआ है। इस चुनाव ने ऊपरी सदन में एनडीए को एक सीट की बढ़त दिलाई है। शिक्षक और स्नातक कोटे की इन सीटों के प्रतिनिधियों में से चार चुनाव हार चुके हैं। 19 से घटकर 18 हुई ऊपरी सदन में महागठबंधन की सदस्य संख्या पराजित होने वालों में भाजपा के नवल किशोर यादव, निर्दलीय आफाक आलम के साथ कांग्रेस के डाॅ. मदन मोहन झा और भाकपा के प्रो. संजय कुमार सिंह हैं। दल अभी आगे भाजपा 25 26 जदयू 20 20 हम 01 01 रालोमो 01 01 लोजपा–रा 01 01 रालोजपा 01 01 राजद 15 16 कांग्रेस 02 01 माले 01 01 भाकपा 01 00 जसुपा 00 01 निर्दलीय 07 06 कुल 75 75 कांग्रेस और भाकपा महागठबंधन के घटक हैं। इन चारों की सीटों से नए चेहरे विधान परिषद पहुंचेंगे। उनमें पटना शिक्षक सीट पर राजद का परचम लहराने वाले डाॅ. संजीव कुमार भी हैं। उन्हें लेकर ऊपरी सदन में राजद की सदस्य संख्या 16 हो जाएगी। कांग्रेस दो से एक हो जाएगी और भाकपा शून्य। वहीं एनडीए 49 पर पहुंच गया है।  भाकपा (माले) की शशि यादव को लेकर महागठबंधन के सदस्यों की कुल संख्या 18 होगी। इस तरह राजद तो बढ़त में रहेगा, लेकिन समग्रता में महागठबंधन पहले से कम होगा। एनडीए का पलड़ा हुआ भारी इस चुनाव ने 75 सदस्यीय विधान परिषद में भाजपा की हैसियत बढ़ा दी है। जदयू यथावत है। दोनों चार–चार सीटों पर लड़े थे। उनमें भाजपा की दो सिटिंग सीटें थीं और एक जदयू की। जदयू ने पटना (स्नातक) की अपनी सीट बचा ली है और तीन पर मात खाई है। भाजपा ने पटना (शिक्षक) सीट गंवाई है, लेकिन दो नई (शिक्षक कोटे की तिरहुत और स्नातक कोटे की दरभंगा) के साथ कुल तीन सीटें जीती हैं। तीसरी उसकी सिटिंग सीट कोसी (स्नातक) है। पिछली बार भी दो निर्दलीय विजयी हुए थे और इस बार भी। उनमें से एक भाजपा से बगावत कर विजयी हुए राहुल राज हैं। स्वाभाविक है कि उनका आकर्षण भाजपा के प्रति हो। दूसरे वंशीधर ब्रजवासी के बारे में बताते हैं कि उनका जन सुराज पार्टी से मोहभंग हो गया है। इस तरह ऊपरी सदन में एनडीए का पलड़ा अपेक्षाकृत भारी हुआ है। तेजस्‍वी–तेज प्रताप के बाद फ‍िर सदन में दो सगे भाई विधान परिषद में कांग्रेस के एकमात्र सदस्य राजीव कुमार रह जाएंगे। राजद के डाॅ. संजीव कुमार उनके सगे भाई हैं, जो पूर्व मंत्री आरएन सिंह के पुत्र हैं। इससे पहले विधानसभा में ऐसा संयोग 2015 और 2020 के चुनाव से बना था। तब लालू प्रसाद के दोनों पुत्र (तेजप्रताप यादव और तेजस्वी यादव) विधायक चुने गए थे। 2025 में तेजप्रताप पराजित हो गए।  

Bihar MLC Election Result: कांग्रेस का स्ट्राइक रेट शून्य, RJD और जन सुराज ने एक-एक सीट पर दर्ज की जीत

 पटना बिहार विधान परिषद चुनाव के नतीजों में कांग्रेस को बड़ा झटका लगा है. पार्टी ने पांच सीटों पर चुनाव लड़ा, लेकिन किसी भी सीट पर जीत दर्ज नहीं कर सकी. कांग्रेस का स्ट्राइक रेट 0 प्रतिशत रहा. वहीं, RJD और जन सुराज पार्टी ने एक-एक सीट जीतकर अपना खाता खोला।  दरभंगा शिक्षक सीट पर कांग्रेस के मौजूदा MLC और पूर्व प्रदेश अध्यक्ष मदन मोहन झा चुनाव हार गए. उन्हें जन सुराज पार्टी के डॉ. सुरेश प्रसाद राय ने 324 वोटों से हराया. इस जीत के साथ जन सुराज ने बिहार विधान परिषद चुनाव में अपना खाता खोला।  वहीं, पटना शिक्षक सीट पर RJD के डॉ. संजीव कुमार ने बीजेपी के मौजूदा MLC नवल किशोर यादव को हराया. इस सीट पर भी कांग्रेस को जीत नहीं मिली.कांग्रेस ने पटना शिक्षक, पटना स्नातक, दरभंगा शिक्षक, दरभंगा स्नातक और कोसी स्नातक निर्वाचन क्षेत्रों में अपने उम्मीदवार उतारे थे. पार्टी को इन सभी पांचों सीटों पर हार का सामना करना पड़ा।  RJD एक सीट जीती RJD ने सात सीटों पर चुनाव लड़ा और एक सीट जीती. वहीं, जन सुराज पार्टी ने सभी आठ सीटों पर उम्मीदवार उतारे और दरभंगा शिक्षक सीट पर जीत हासिल की. पार्टीवार स्ट्राइक रेट की बात करें तो कांग्रेस पांच में से एक भी सीट नहीं जीत सकी. उसका स्ट्राइक रेट 0 प्रतिशत रहा. RJD ने सात में से एक सीट जीतकर करीब 14.3 प्रतिशत, जबकि जन सुराज ने आठ में से एक सीट जीतकर 12.5 प्रतिशत स्ट्राइक रेट दर्ज किया.राष्ट्रीय पार्टी होने के बावजूद कांग्रेस इन चुनावों में अपना खाता नहीं खोल पाई. इसके उलट, RJD और जन सुराज दोनों ने कम से कम एक सीट पर जीत दर्ज की। 

अनंत सिंह का सियासी दांव पड़ा उल्टा, पटना स्नातक सीट पर नीरज कुमार की जीत से JDU को मजबूती

पटना  बिहार विधान परिषद (एमएलसी) के पटना स्नातक निर्वाचन क्षेत्र के चुनाव नतीजों ने सूबे की राजनीति में 'मसल पावर' और 'संगठनात्मक साख' की जंग पर मुहर लगा दी है. मोकामा के बाहुबली विधायक अनंत सिंह, जिन्होंने अपनी ही पार्टी जेडीयू के अधिकृत उम्मीदवार और वरिष्ठ नेता नीरज कुमार के खिलाफ खुला मोर्चा खोला था, वे इस सियासी बाजी में पूरी तरह पस्त नजर आए।  अनंत सिंह के खुला विरोध और जन सुराज समर्थित प्रत्याशी अनुज कुमार का समर्थन करने के बावजूद, जेडीयू के नीरज कुमार ने अपनी जीत का परचम फहरा दिया है. पटना स्नातक सीट से जेडीयू के नीरज कुमार ने आरजेडी के उम्मीदवार को हराया. अनंत सिंह जिस अनुज कुमार के समर्थन में खड़े थे, वह तीसरे नंबर पर रहे।  पटना स्नातक सीट पर नीरज कुमार की जीत के बाद सवाल उठता है कि आखिर उनके पास वह कौन सी राजनीतिक और सांगठनिक ताकत थी, जिससे टकराकर 'छोटे सरकार' के नाम से मशहूर अनंत सिंह क्लीन बोल्ड हो गए. अनंत सिंह को न केवल चुनावी शिकस्त की कसक झेलनी पड़ी, बल्कि पार्टी से 6 साल के लिए निष्कासन का सामना भी करना पड़ा।  नीरज कुमार ने दिया अनंत सिंह को झटका बिहार का एमएलसी चुनाव नीरज कुमार के लिए प्रतिष्ठा का प्रश्न बन गया था, क्योंकि उनकी ही पार्टी के विधायक अनंत सिंह ने उन्हें हराने की कसम तक खा ली थी. इसके बाद अनंत सिंह जन सुराज समर्थित उम्मीदवार अनुज सिंह के समर्थन में खुलकर उतर गए और नीरज कुमार को हराने के लिए दिन-रात एक कर दिया. इसके चलते अनंत सिंह को जेडीयू से बाहर भी होना पड़ा।  नीरज कुमार के लिए चुनाव हारने का मतलब था कि उनकी प्रतिष्ठा पर बड़ा सवाल खड़ा होता, लेकिन नीरज कुमार इन तमाम विरोध के बाद भी अपनी सीट बचा ले गए. जीत के बाद नीरज कुमार ने अपनी जीत का श्रेय मुख्यमंत्री नीतीश कुमार सहित एनडीए नेताओं को दिया. नीरज कुमार की जीत के पीछे वह वोटर थे, जिनका उन पर भरोसा बरकरार रहा।  अनंत फ्लावर समझे, फायर निकले नीरज कुमार मोकामा के बाहुबली विधायक अनंत सिंह ने अपनी पुरानी सियासी रंजिश के चलते जेडीयू के अधिकृत प्रत्याशी और अनुभवी नेता नीरज कुमार के खिलाफ खुला मोर्चा खोला था. उन्हें शायद यह गुमान था कि उनके एक इशारे पर समीकरण बदल जाएंगे और वह अपने विरोधी को चारों खाने चित कर देंगे, लेकिन धरातल पर नतीजे इसके बिल्कुल उलट आए।  अनंत सिंह जिस जन सुराज समर्थित प्रत्याशी के समर्थन में अपनी पूरी ताकत झोंके हुए थे, वह तीसरे पायदान पर सिमट गया, जबकि नीरज कुमार ने तमाम विरोध और बगावत को दरकिनार करते हुए शानदार जीत का परचम लहरा दिया. यह मुकाबला महज़ दो नेताओं की व्यक्तिगत प्रतिष्ठा का नहीं, बल्कि 'मसल पावर' बनाम 'पॉलिटिकल सॉलिडिटी' की एक बड़ी वैचारिक जंग बन गया था. नीरज सिंह ने अनंत सिंह के सारे दावे को हवा में उड़ा दिया।  बेदाग छवि और स्नातकों के बीच गहरी पैठ नीरज कुमार लंबे समय से पटना स्नातक क्षेत्र का प्रतिनिधित्व करते आ रहे हैं. वह तीन बार से एमएलसी रह चुके हैं और उन्होंने लगातार अपने मतदाता जोड़े हैं. इस चुनाव के मतदाता वर्ग में वकील, डॉक्टर, प्रोफेसर, शिक्षक और शिक्षित युवा शामिल हैं. नीरज कुमार की पहचान एक पढ़े-लिखे, तार्किक और प्रखर वक्ता की रही है।  दबंगई की राजनीति से इतर उन्होंने बौद्धिक वर्ग से संवाद का जो सेतु बनाया था, उसने बाहुबल के प्रभाव को मतदाता तक पहुंचने से पहले ही बेअसर कर दिया. अनंत सिंह के अनुज सिंह के समर्थन में उतरने से पटना सीट का पढ़ा-लिखा तबका और दूर हो गया, जिसके चलते वह तीसरे नंबर पर रहे।  'पार्टी कैडर' और एनडीए का मजबूत संगठन अनंत सिंह का व्यक्तिगत प्रभाव एक खास इलाके और जातीय समीकरण तक सीमित रहा है, लेकिन नीरज कुमार के पीछे जेडीयू और एनडीए का पूरा संगठनात्मक ढांचा खड़ा था. चुनाव में जदयू के जमीनी कार्यकर्ताओं ने बूथ स्तर पर मोर्चा संभाला. वहीं, अनंत सिंह द्वारा पार्टी से बगावत करने पर एनडीए कैडर ने एकजुट होकर नीरज कुमार के पक्ष में गोलबंदी की. यह चुनाव सिर्फ एक इलाके तक सीमित नहीं था, बल्कि इसमें पटना प्रमंडल के तहत आने वाले अन्य जिले भी शामिल थे।  नीरज कुमार जेडीयू के मुख्य प्रवक्ता हैं और नीतीश कुमार के सबसे भरोसेमंद सहयोगियों में गिने जाते हैं. जब अनंत सिंह ने बगावत की, तो पार्टी ने जरा भी हिचकिचाहट नहीं दिखाई. जदयू ने न केवल अनंत सिंह और उनकी पत्नी नीलम देवी को पार्टी से बाहर का रास्ता दिखाया, बल्कि उनकी विधानसभा सदस्यता रद्द करने की भी सिफारिश कर दी. इस सख्त फैसले से यह साफ संदेश गया कि पार्टी नीरज कुमार के साथ मजबूती से खड़ी है, जिसका पूरा लाभ नीरज कुमार को मिला।  नीरज कुमार की सबसे बड़ी ताकत उनकी वाकपटुता और बेबाक शैली है. अनंत सिंह के व्यक्तिगत हमलों और 'पेटी भरकर वोट' दिलाने के दावों के सामने नीरज कुमार ने मुद्दे आधारित राजनीति रखी. उन्होंने सार्वजनिक मंचों पर साफ कहा कि बिहार में अब बाहुबल का दौर खत्म हो चुका है. इसके अलावा नीरज कुमार और अनंत सिंह दोनों ही भूमिहार समुदाय से आते हैं, लेकिन एमएलसी चुनाव में मतदाताओं ने नीरज कुमार की कार्यशैली के पक्ष में खुलकर मतदान किया।  अनंत सिंह का दांव कैसे पड़ गया उल्टा 2015 के मोकामा चुनाव और 2019 के हथियार मामले के वक्त से ही अनंत सिंह और नीरज कुमार के बीच कड़वाहट चली आ रही थी. इस बार एमएलसी चुनाव में अनंत सिंह ने पुरानी खुन्नस निकालने के लिए जन सुराज के प्रत्याशी डॉ. अनुज सिंह को अपना समर्थन दिया और दावा किया कि वह नीरज कुमार की जमानत जब्त करा देंगे, लेकिन सियासी बाजी पूरी तरह नीरज कुमार के नाम रही।  एमएलसी चुनाव के नतीजों ने साबित कर दिया कि स्नातक और बौद्धिक मतदाता किसी बाहुबली के एक इशारे पर अपना मत नहीं बदलते. अनंत सिंह का यह दांव न सिर्फ उल्टा पड़ा, बल्कि इसने उनकी खुद की राजनीतिक साख को गहरा धक्का पहुंचाया है।  पटना स्नातक सीट पर नीरज कुमार की जीत यह संदेश देती है कि बिहार की राजनीति में अब 'रंगदारी' और 'बाहुबल' के बल पर पढ़े-लिखे वर्ग का जनादेश नहीं … Read more

बिहार की चारों शिक्षक MLC सीटों पर बदला समीकरण, पटना से सारण तक सिटिंग उम्मीदवारों की हार

  पटना बिहार विधान परिषद के शिक्षक निर्वाचन क्षेत्र के चुनाव में बड़ा बदलाव देखने को मिला है. यहां पटना से लेकर तिरहुत, दरभंगा और सारण तक सभी चारों सीटों पर मौजूदा एमएलसी को हार का सामना करना पड़ा है. इन नतीजों में आरजेडी, बीजेपी, जन सुराज और निर्दलीय उम्मीदवार ने जीत दर्ज की है. खास बात यह है कि चारों सीटों पर अलग-अलग उम्मीदवारों ने बाजी मारी है।  पटना में आरजेडी, तिरहुत में बीजेपी को जीत पटना शिक्षक निर्वाचन क्षेत्र में बीजेपी के मौजूदा एमएलसी नवल यादव चुनाव हार गए. इस सीट पर आरजेडी के डॉ. संजीव कुमार ने जीत दर्ज की है. वहीं, तिरहुत शिक्षक निर्वाचन क्षेत्र में लेफ्ट के सिटिंग एमएलसी संजय कुमार सिंह को हार का सामना करना पड़ा. यहां बीजेपी के नरेंद्र सिंह विजयी रहे।  दरभंगा शिक्षक निर्वाचन क्षेत्र में कांग्रेस के मौजूदा एमएलसी मदन मोहन झा अपनी सीट नहीं बचा सके. इस सीट पर जन सुराज के सुरेश राय ने जीत हासिल की. दूसरी ओर, सारण शिक्षक निर्वाचन क्षेत्र में जन सुराज के सिटिंग एमएलसी आफाक अहमद चुनाव हार गए. यहां निर्दलीय उम्मीदवार राहुल राज ने जीत दर्ज की।  इन नतीजों में सबसे अहम बात यह रही कि चारों शिक्षक निर्वाचन क्षेत्रों में मौजूदा एमएलसी को हार मिली. पटना में आरजेडी, तिरहुत में बीजेपी, दरभंगा में जन सुराज और सारण में निर्दलीय उम्मीदवार की जीत हुई है. चुनाव परिणामों ने बिहार विधान परिषद की इन चारों सीटों पर प्रतिनिधित्व का समीकरण बदल दिया है।  सभी MLC के हारने के पीछे क्या ये है वजह? मौजूदा चारों MLC के चुनाव हारने के पीछे की अगर वजह को तलाशा जाए तो माना जा रहा है कि इसमें शिक्षकों से जुड़े मुद्दे जैसे वेतनमान, प्रमोशन, तबादले और सेवा से जुड़ी मांगें अहम फैक्टर साबित हुई हैं. NDA ने सारण में JDU के आनंद पुष्कर को उम्मीदवार बनाया था. BJP के पूर्व नेता राहुल राज निर्दलीय चुनाव लड़े और जीत गए. उन्हें NDA उम्मीदवार से ज्यादा वोट मिले।  टिकट बंटवारे से नाराजगी और शिक्षकों के बीच उनकी स्थानीय पकड़ को जीत की बड़ी वजह माना जा रहा है. दरभंगा में जन सुराज के डॉ. सुरेश प्रसाद राय ने कांग्रेस के मौजूदा MLC मदन मोहन झा को हराया. माना जा रहा है कि शिक्षक राजनीति में उनकी सक्रियता और स्थानीय संपर्क ने उनकी जीत में बड़ी भूमिका अदा की है।  वहीं पटना में करीब तीन दशक से MLC रहे नवल किशोर यादव की हार से सीट पर समीकरण पूरी तरीके से बदल गया है. नवल किशोर यादव के चुनावी हार को सरकार के खिलाफ शिक्षकों की नाराजगी से जोड़कर भी देखा जा रहा है. तिरहुत में BJP के नरेंद्र प्रसाद सिंह ने निर्दलीय भूषण झा को 594 वोटों से हराया. इस सीट पर CPI और जन सुराज के उम्मीदवार भी मैदान में थे और माना जा रहा है कि वोटों के बंटवारे का फायदा भाजपा प्रत्याशी को मिला। 

स्टील-सीमेंट उद्योगों को मिलेगी स्वच्छ बिजली, भारत विकसित करेगा स्वदेशी स्मॉल मॉड्यूलर रिएक्टर

जमशेदपुर देश के भारी उद्योगों को प्रदूषणमुक्त बनाने और वर्ष 2047 तक 100 गीगावाट परमाणु ऊर्जा के लक्ष्य को भेदने के लिए भारत अब छोटी आणविक इकाइयों की राह पर तेजी से कदम बढ़ा रहा है। न्यूक्लियर पावर कॉरपोरेशन ऑफ इंडिया लिमिटेड (एनपीसीआइएल) और भाभा परमाणु अनुसंधान केंद्र (बीएआरसी) ने संयुक्त रूप से स्वदेशी भारत स्माल माड्यूलर रिएक्टर (बीएसएमआर) विकसित करने का बीड़ा उठाया है। एनपीसीआइएल के कॉरपोरेट संचार प्रमुख उमेद यादव ने जानकारी साझा करते हुए बताया कि यह नवाचार देश के इस्पात, एल्युमिनियम और सीमेंट जैसे बुनियादी उद्योगों के लिए गेम चेंजर साबित होगा। कारखानों के मुहाने पर पैदा होगी स्वच्छ बिजली यादव ने रेखांकित किया कि पारंपरिक 700 मेगावाट क्षमता वाले विशाल प्रेशराइज्ड हेवी वाटर रिएक्टरों (पीएचडब्ल्यूआर) को लगाने में व्यापक भूखंड, भारी पूंजी और लंबा समय लगता है। इसके विपरीत, फैक्ट्री-निर्मित बीएसएमआर और भारत स्मॉल रिएक्टर्स (बीएसआर) को बहुत कम जगह तथा न्यूनतम लागत पर खड़ा किया जा सकता है। इन्हें सीधे औद्योगिक परिसरों या कैप्टिव पावर क्लस्टरों के निकट स्थापित किया जा सकेगा। इससे ट्रांसमिशन लाइन बिछाने का झंझट खत्म होगा और ग्रिड पर निर्भरता के बिना संयंत्रों को 24 घंटे विश्वसनीय, सुरक्षित और शून्य-कार्बन ऊर्जा हासिल होगी। निजी क्षेत्र की पूंजी से कार्बन मुक्ति को गति प्रस्तुति के आंकड़ों के मुताबिक, केंद्र सरकार ने सघन जीवाश्म ईंधन खपत वाले उद्योगों के डी-कार्बोनाइजेशन के लिए इस क्षेत्र में निजी निवेश के रास्ते खोल दिए हैं। वर्ष 2047 तक नियोजित कुल 100 गीगावाट क्षमता में से लगभग 39 से 42 गीगावाट बिजली निजी कंपनियों और अन्य सार्वजनिक उपक्रमों की साझेदारी से तैयार की जानी है। टाटा, रिलायंस और अडाणी समूह जैसे प्रमुख उद्योग घराने इस तकनीक में अपनी व्यावसायिक दिलचस्पी दिखा रहे हैं। 2047 तक एनपीसीआईएल देगा 54 गीगावाट ऊर्जा उमेद यादव ने स्पष्ट किया कि एनपीसीआईएल अकेले 53,508 मेगावाट (करीब 54 गीगावाट) परमाणु ऊर्जा का योगदान देगा। वर्तमान में 8,780 मेगावाट क्षमता वाले 24 रिएक्टर क्रियाशील हैं, जबकि 7,500 मेगावाट के नौ रिएक्टर निर्माणाधीन हैं। इसके अलावा 9,800 मेगावाट के 14 रिएक्टर पूर्व-परियोजना चरण में हैं। वर्ष 2031-32 तक देश की परमाणु क्षमता 22 गीगावाट पार कर जाएगी। उन्होंने कहा कि फ्लीट मोड के बड़े रिएक्टरों के समानांतर छोटे मॉड्यूलर रिएक्टर मिलकर 2070 के नेट-जीरो कार्बन संकल्प को सिद्धि तक पहुंचाएंगे।

पनीर में फॉर्मलिन की आशंका से बढ़ी चिंता, भागलपुर में खाद्य पदार्थों की जांच धीमी

भागलपुर  जिले के लोगों को मिलावटी खाद्य पदार्थों से बचाने के लिए करीब छह साल पहले उपलब्ध कराया गया फूड सेफ्टी ऑन व्हील्स वाहन अब चालक के अभाव में परेशानी का सामना कर रहा है। श्रावणी मेला समेत महत्वपूर्ण पर्व-त्योहारों के दौरान खाद्य पदार्थों की जांच के लिए मुख्यालय से इस वाहन के इस्तेमाल का निर्देश दिया जाता है। वाहन के लिए तकनीशियन की व्यवस्था है, लेकिन चालक के सेवानिवृत्त होने से इसके नियमित संचालन पर संकट खड़ा हो गया है। ऐसे में खाद्य पदार्थों की मौके पर जांच प्रभावित होने की आशंका है। संविदा पर चालक की नियुक्ति के लिए निकला विज्ञापन खाद्य सुरक्षा पदाधिकारी राजहंस कुमार ने बताया कि वाहन चालक के सेवानिवृत्त होने से संचालन में परेशानी हो रही है। हालांकि, सरकार की ओर से संविदा पर चालक की नियुक्ति के लिए विज्ञापन निकाला गया है। चालक की नियुक्ति होने के बाद वाहन का नियमित संचालन आसान हो सकेगा। सप्ताह में दो दिन जांच का निर्देश खाद्य निरीक्षक अशोक कुमार सिन्हा ने बताया कि मुख्यालय से इस वाहन के माध्यम से सप्ताह में दो दिन खाद्य पदार्थों की जांच करने का निर्देश है। चालक नहीं रहने से इसमें परेशानी आ रही है। जब तक नए चालक की व्यवस्था नहीं हो जाती, तब तक उपलब्ध संसाधनों के आधार पर काम करने का प्रयास किया जाएगा। अशोक कुमार सिन्हा के पास भागलपुर के साथ मुंगेर जिले का भी प्रभार है। मौके पर होती है सामान्य जांच, रासायनिक जांच पटना में फूड सेफ्टी ऑन व्हील्स वाहन में उपलब्ध प्रयोगशाला से खाद्य पदार्थों की सामान्य जांच की जाती है। राजहंस कुमार ने बताया कि वाहन से सभी तरह की जांच संभव नहीं है। मौके पर मिठाई में फफूंद, असामान्य गंध और खराब होने के अन्य लक्षणों की जांच की जाती है। जरूरत पड़ने पर खाद्य पदार्थों के नमूने लेकर रासायनिक जांच के लिए पटना भेजा जाता है। प्रयोगशाला की रिपोर्ट के आधार पर आगे की कार्रवाई की जाती है। अगस्त से अब तक आधा दर्जन दुकानदारों पर कार्रवाई राजहंस कुमार के अनुसार, अगस्त से अब तक जिले में करीब आधा दर्जन दुकानदारों के खिलाफ कार्रवाई की गई है। जांच के दौरान विभिन्न इलाकों में खराब खाद्य पदार्थ बेचने के मामले सामने आए। खाद्य पदार्थों में मिलावट की पुष्टि होने पर नियमानुसार मामला आगे की कार्रवाई के लिए भेजा जाता है। मामले की प्रकृति और मिलावट की गंभीरता के आधार पर सक्षम प्राधिकारी जुर्माना लगा सकते हैं। गंभीर मामलों में न्यायालय की प्रक्रिया भी अपनाई जाती है। नियमों के तहत खाद्य कारोबार का लाइसेंस निलंबित या रद करने की कार्रवाई भी हो सकती है। पनीर में फॉर्मलिन मिलाने की आशंका खाद्य सुरक्षा पदाधिकारी राजहंस कुमार ने बताया कि जांच के दौरान पनीर में मिलावट का मामला सामने आया है। उनके अनुसार, कुछ दुकानदार पनीर को अधिक दिनों तक खराब होने से बचाने के लिए फॉर्मलिन समेत अन्य रसायनों का इस्तेमाल करते हैं। इससे पनीर सामान्य परिस्थितियों में जितने समय तक सुरक्षित रह सकता है, उससे अधिक समय तक खराब होने के लक्षण स्पष्ट नहीं दिखते। हालांकि, इसकी पुष्टि प्रयोगशाला जांच से ही की जा सकती है। फॉर्मलिन स्वास्थ्य के लिए हानिकारक है। इसके संपर्क या सेवन से गंभीर नुकसान हो सकता है। ऐसे रसायनों का खाद्य पदार्थों में अवैध इस्तेमाल लोगों के स्वास्थ्य के लिए खतरा है। इसके अलावा मिठाइयों में अनधिकृत रंगों के इस्तेमाल की आशंका को देखते हुए भी नमूने लिए जाते हैं। खाद्य सुरक्षा विभाग का कहना है कि नियमानुसार नमूने लेकर जांच कराई जाती है और गड़बड़ी की पुष्टि होने पर कार्रवाई की जाती है।  

Jharkhand News: शराब तस्करों की बढ़ेगी मुश्किलें, अवैध निर्माण और बिक्री रोकने के लिए ड्रोन तकनीक का इस्तेमाल

रांची  झारखंड में अवैध शराब का कारोबार करने वालों की मुश्किलें बढ़ने वाली है। अब शराब माफिया की गतिविधियों पर जमीन के साथ आसमान से भी नजर रखने की तैयारी है। राज्य का उत्पाद एवं मद्य निषेध विभाग अवैध शराब के निर्माण, भंडारण और बिक्री पर अंकुश लगाने के लिए ड्रोन तकनीक का सहारा लेने की योजना बना रहा है। इसके लिए विभाग ने ड्रोन से निगरानी की तकनीक का प्रदर्शन करने के लिए कंपनियों को आमंत्रित किया है। प्रदर्शन के दौरान तकनीक की उपयोगिता और निगरानी की क्षमता का आकलन किया जाएगा। उत्पाद एवं मद्य निषेध मंत्री योगेंद्र प्रसाद ने बताया कि राज्य में अवैध शराब के कारोबार को पूरी तरह समाप्त करना सरकार का लक्ष्य है। इसके लिए आधुनिक तकनीक का इस्तेमाल करने की दिशा में पहल की जा रही है। ड्रोन से निगरानी की व्यवस्था अवैध कारोबार के खिलाफ कार्रवाई को अधिक प्रभावी बनाने में सहायक हो सकती है। जंगल और दुर्गम इलाकों में भी होगी निगरानी राज्य के कई इलाकों में जंगलों, नदी किनारे और दुर्गम स्थानों पर अवैध शराब बनाने की शिकायतें मिलती रही हैं। ऐसे स्थानों तक पहुंचने में उत्पाद विभाग की टीम को परेशानियों का सामना करना पड़ता है। ड्रोन तकनीक से संदिग्ध गतिविधियों और स्थानों की पहचान करने में मदद मिल सकती है। इससे छापेमारी की योजना बनाने और अवैध शराब के ठिकानों तक पहुंचने में आसानी होगी। अवैध कारोबार पर रोक से सरकार और आम लोगों को फायदा अवैध शराब के कारोबार पर अंकुश लगने से सरकार को कई स्तरों पर लाभ होगा। अवैध बिक्री के कारण होने वाली राजस्व हानि कम हो सकती है। वैध दुकानों से शराब की बिक्री बढ़ने पर उत्पाद शुल्क से मिलने वाले राजस्व में वृद्धि की संभावना रहेगी। वहीं, मिलावटी और जहरीली शराब की बिक्री रोकने से लोगों के स्वास्थ्य और जीवन की सुरक्षा होगी। अवैध शराब से जुड़े आपराधिक नेटवर्क और तस्करी पर भी अंकुश लगेगा। इससे कानून-व्यवस्था मजबूत होने के साथ उत्पाद विभाग की प्रवर्तन कार्रवाई अधिक प्रभावी हो सकेगी।