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थोक अपशिष्ट उत्पादकों पर सख्ती, सीपीसीबी पोर्टल पर रजिस्ट्रेशन जरूरी

पटना केंद्रीय प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड (सीपीसीबी) का केंद्रीय पोर्टल शुरू होने के बाद नगर निगम ने शहर के सभी थोक अपशिष्ट उत्पादकों की पहचान और उनका ऑनलाइन पंजीकरण अनिवार्य कराने के लिए अभियान शुरू किया है। इसी कड़ी में गुरुवार को नगर निगम मुख्यालय के सभागार में चिह्नित थोक अपशिष्ट उत्पादकों के लिए विशेष प्रशिक्षण-सह-हैंडहोल्डिंग कार्यक्रम आयोजित किया गया। कार्यक्रम का उद्देश्य संस्थानों को ठोस अपशिष्ट प्रबंधन नियमों, कानूनी प्रावधानों और आनलाइन पंजीकरण प्रक्रिया की विस्तृत जानकारी देना था, ताकि नियमों का प्रभावी क्रियान्वयन सुनिश्चित हो सके। कार्यक्रम में शहर के प्रमुख संस्थानों और प्रतिष्ठानों ने भाग लिया। इनमें आइजीआइएमएस, रूबन अस्पताल, ताज होटल, एवीआर, विंडसर, चाणक्य होटल, पारस अस्पताल, सिटी सेंटर माल और कुर्जी फैमिली अस्पताल समेत करीब 35 बड़े संस्थान शामिल रहे। विशेषज्ञों ने सीपीसीबी के केंद्रीकृत पोर्टल पर पंजीकरण की पूरी प्रक्रिया का लाइव डेमो दिया। साथ ही प्रतिभागियों के तकनीकी और प्रक्रियागत सवालों का समाधान भी किया गया। प्रशिक्षण सत्र का संचालन जर्मनी की सरकारी विकास सहयोग संस्था जीआइजेड के विशेषज्ञ और सीपीसीबी के राष्ट्रीय स्वच्छ वायु कार्यक्रम के परामर्शी बी सौरभ ने किया। ऐसे सभी प्रतिष्ठान, भवन या परिसर, जहां प्रतिदिन 100 किलोग्राम या उससे अधिक ठोस अपशिष्ट उत्पन्न होता है, अथवा प्रतिदिन 40,000 लीटर या उससे अधिक जल का उपभोग किया जाता है, या जिनका कुल निर्मित क्षेत्रफल 20,000 वर्ग मीटर अथवा उससे अधिक है, उन्हें थोक अपशिष्ट उत्पादक की श्रेणी में रखा गया है। इस श्रेणी में बड़े आवासीय अपार्टमेंट, शॉपिंग माल, वाणिज्यिक परिसर, होटल, अस्पताल, मैरिज हाल, शैक्षणिक संस्थान तथा अन्य बड़े प्रतिष्ठान शामिल हैं। नए नियमों में कचरा प्रबंधन से संबंधित जवाबदेही सीधे तौर पर इन्हीं पर तय की गई है। ऐसे करें पंजीकरण निश्शुल्क पंजीकरण के लिए लिंक https://uatswm.cpcb.gov.in/register का उपयोग किया जा सकता है। ऑनलाइन पंजीकरण के उपरांत नगर निगम की टीम संबंधित स्थल का निरीक्षण कर पोर्टल पर उपलब्ध कराई गई सूचनाओं एवं आंकड़ों का सत्यापन करेगी। पंजीकरण नहीं कराने पर होगी कार्रवाई ठोस अपशिष्ट प्रबंधन नियमावली के तहत पंजीकरण नहीं कराने वाले थोक अपशिष्ट उत्पादकों पर पर्यावरणीय क्षतिपूर्ति के रूप में जुर्माना लगाया जा सकता है। नियमों के उल्लंघन की स्थिति में स्थानीय निकायों द्वारा प्रति उल्लंघन 5,000 से 25,000 रुपये तक का जुर्माना निर्धारित किया जा सकता है। इसके अतिरिक्त लगातार नियमों की अनदेखी करने वाले प्रतिष्ठानों के विरुद्ध कचरा संग्रहण सेवा बंद करने, वैधानिक कार्रवाई प्रारंभ करने तथा अन्य दंडात्मक कदम उठाने का भी प्रविधान है।

नशामुक्त समाज की दिशा में पहल, ग्रामीणों को अफीम खेती से दूर रहने की अपील

 खूंटी मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन के निर्देशानुसार पुलिस अधीक्षक खूंटी ऋषभ गर्ग के नेतृत्व में खूंटी जिला अंतर्गत सभी थाना क्षेत्र में अवैध अफीम खेती के विरुद्ध जागरूकता अभियान चलाया गया. ग्रामीणों को नशा मुक्त समाज के निर्माण के उद्देश्य से थाना क्षेत्र अंतर्गत अवैध अफीम की खेती की रोकथाम और खत्म करने को लेकर व्यापक जन-जागरूकता अभियान चलाया गया. अफीम की खेती पर पुलिस का जागरूकता अभियान अभियान के दौरान थाना प्रभारी और पुलिस पदाधिकारियों द्वारा विभिन्न गांवों में जनसंपर्क स्थापित कर ग्रामीणों को अफीम की अवैध खेती से होने वाले कानूनी, सामाजिक और आर्थिक दुष्परिणामों की विस्तृत जानकारी दी गई. ग्रामीणों को बताया गया कि अफीम की खेती करना एक गंभीर अपराध है और इसमें संलिप्त पाए जाने पर एनडीपीएस अधिनियम के तहत कठोर कानूनी कार्रवाई की जाती है. पूर्व आरोपियों ने अभियान में लिया हिस्सा विशेष रूप से ऐसे व्यक्तियों को भी जागरूकता अभियान में शामिल किया गया जो पूर्व में एनडीपीएस कांडों में आरोपपत्रित रह चुके हैं और वर्तमान में जमानत पर बाहर हैं. उक्त व्यक्तियों ने भी अभियान में भाग लेते हुए ग्रामीणों से अवैध अफीम की खेती नहीं करने और कानून का पालन करने की अपील की. उनके द्वारा अपने अनुभव साझा करते हुए बताया गया कि अवैध मादक पदार्थों से संबंधित गतिविधियों में संलिप्तता व्यक्ति, परिवार और समाज के लिए हानिकारक है. अवैध अफीम खेती न करने की पुलिस की अपील पुलिस टीम द्वारा ग्रामीणों से अपील की गई कि वे अपने खेतों में किसी भी प्रकार की अवैध अफीम की खेती न करें और कहीं भी ऐसी खेती की सूचना मिलने पर इसकी जानकारी तत्काल स्थानीय थाना या पुलिस प्रशासन को दें. साथ ही किसानों को वैकल्पिक और लाभकारी फसलों की खेती के लिए प्रेरित किया गया. अभियान के दौरान ग्रामीणों ने अवैध अफीम खेती के विरुद्ध पुलिस प्रशासन को पूर्ण सहयोग देने और नशामुक्त एवं अपराधमुक्त समाज के निर्माण में सक्रिय भूमिका निभाने का संकल्प लिया.

फीस से लेकर शिक्षकों तक का ब्योरा ऑनलाइन करना होगा, पटना में स्कूलों पर सख्ती

 पटना जिले के निजी स्कूलों को शिक्षा विभाग के वेबसाइट पर सभी आवश्यक जानकारी सार्वजनिक करनी होगी। इसके लिए अंतिम तिथि 30 जून निर्धारित की गई है। जिला शिक्षा कार्यालय को शिकायत मिली है कि कई स्कूल नियमों का पालन नहीं कर रहे हैं। स्कूलों की वेबसाइट से अभिभावकों को पूरी जानकारी नहीं मिल पाती है। जिला शिक्षा कार्यालय की ओर से सभी स्कूलों को वेबसाइट पर शिक्षकों की संख्या, उनकी योग्यता, शैक्षणिक संरचना, बुनियादी सुविधा और अन्य आवश्यक जानकारियों को अनिवार्य रूप से अपडेट करने को कहा गया है। यदि कोई स्कूल 30 जून तक अपनी वेबसाइट पर अनिवार्य जानकारी अपलोड नहीं करता है, तो उसके विरुद्ध सख्त कार्रवाई की जा सकती है। स्कूलों को फीस स्ट्रक्चर और बसों की संख्या का देना होगा विवरण निजी स्कूलों को अपनी वेबसाइट पर स्कूल में पढ़ने वाले बच्चों की कुल संख्या और प्रति कक्षा विद्यार्थी के अनुसार शिक्षकों की संख्या का विवरणी वेबसाइट पर अपलोड करना है। इसके साथ ही निर्धारित शिक्षण शुल्क के बारे में भी जानकारी देनी होगी। निजी स्कूलों द्वारा परिवहन का विवरण भी वेबसाइट पर देना होगा। जिसमें स्कूलों में चल रहे वैन या मिनी बस व बड़ी बसों की कुल संख्या साझा करनी है। इसके अलावा निजी स्कूलों बोर्ड से मिली मान्यता और इसकी लेटेस्ट अपडेट भी वेबसाइट पर साझा करना होगा। एक जुलाई से 31 जुलाई तक चलेगा जांच अभियान जिले में संचालित निजी स्कूलों की जांच के लिए जुलाई माह से सघन अभियान चलाया जाएगा। इसके लिए जिला शिक्षा कार्यालय की ओर से एक से 31 जुलाई तक विशेष जांच अभियान चलाई जाएगी। शिक्षा के अधिकार अधिनियम के तहत बिहार राज्य के बच्चों की मुफ्त एवं अनिवार्य शिक्षा नियमावली लागू है। अधिकृत अधिकारियों को नियमों का पालन नहीं करने वाले स्कूलों पर कार्रवाई करने का निर्देश दिया गया है। इसके साथ स्कूली बच्चों की आधार और अपार डिटेल को भी बारीकी से जांच करने को कहा गया है। जिला शिक्षा कार्यालय की ओर से सभी प्रखंड शिक्षा पदाधिकारियों को इस संबंध में पत्र भेज दिया गया है।

सम्राट चौधरी ने दिल्ली में उठाई बिहार की आवाज, जल जीवन मिशन समेत कई योजनाओं के लिए मांगा फंड

पटना  बिहार के मुख्यमंत्री सम्राट चौधरी ने नई दिल्ली में आयोजित नीति आयोग की महत्वपूर्ण बैठक में राज्य के विकास और बुनियादी ढांचों को मजबूत करने के लिए पुरजोर आवाज उठाई। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की मौजूदगी में हुई इस बैठक में मुख्यमंत्री सम्राट चौधरी ने कहा कि बिहार सरकार ने अपने संसाधनों से निवेश कर 'जल जीवन मिशन' के राष्ट्रीय लक्ष्य को समय से पहले हासिल किया है। हालांकि, कुछ कारणों से इस योजना की केंद्रीय राशि अब तक राज्य को प्राप्त नहीं हो सकी है। इसी को ध्यान में रखते हुए बिहार ने केंद्र के समक्ष अपनी लंबित और भावी योजनाओं के लिए बड़ी वित्तीय मांग रखी है। 18 हजार करोड़ की वित्तीय मदद की गुहार बिहार के मुख्यमंत्री सम्राट चौधरी ने बैठक में बताया कि राज्य ने हर घर तक स्वच्छ पानी पहुंचाने के लिए बड़े पैमाने पर निवेश किया है। इस निवेश की भरपाई और वर्तमान योजनाओं को सुचारू रूप से चलाने के लिए उन्होंने केंद्र से कुल 18 हजार करोड़ रुपये जारी करने का अनुरोध किया। इस मांग के तहत उन्होंने खर्च हो चुकी राशि के केंद्रांश के रूप में 13 हजार करोड़ रुपये और वर्तमान में चल रही योजनाओं के क्रियान्वयन के लिए 5 हजार करोड़ रुपये की सहायता राशि देने की अपील की। राज्य ने हर घर तक स्वच्छ पानी पहुंचाने के लिए बड़े पैमाने पर निवेश किया है। इसकी भरपाई और वर्तमान योजनाओं को सुचारू रूप से चलाने के लिए केंद्र से कुल 18 हजार करोड़ रुपये जारी करने का अनुरोध किया। कौशल विकास और नए संस्थानों के लिए विशेष फंड बिहार में युवाओं के हुनर को निखारने और रोजगार के अवसर बढ़ाने के लिए मुख्यमंत्री ने केंद्र सरकार के सामने कई प्रस्ताव रखे। उन्होंने राज्य में चल रहे कौशल विकास कार्यों का ब्योरा देते हुए वित्तीय मदद की मांग की।     आर्यभट्ट अंतरराष्ट्रीय कौशल हब के तहत पटना में 640 करोड़ की लागत से अत्याधुनिक केंद्र की स्थापना की जा रही है।     पीएम-सेतु योजना के माध्यम से 75 आईटीआई को मजबूत करने के लिए 3,615 करोड़ की डिमांड केंद्र से की गई।     'इंटिग्रेटेड स्कीम इन स्कीलिंग आर्किटेक्चर' पायलट प्रोजेक्ट के लिए 750 करोड़ की मांग सम्राट सरकार ने की।     जननायक कर्पूरी ठाकुर कौशल विश्वविद्यालय के लिए 1,500 करोड़ की मांग केंद्र सरकार से की गई।     भागलपुर में नेशनल स्किल ट्रेनिंग इंस्टीट्यूट की स्थापना के लिए राशि की मांग भी सम्राट सरकार ने की है। पीएम-विश्वकर्मा योजना में बिहार की प्रगति रिपोर्ट बैठक के दौरान राज्य में चल रही जनकल्याणकारी योजनाओं की प्रगति रिपोर्ट भी पेश की गई। मुख्यमंत्री ने बताया कि केंद्र सरकार की महत्वाकांक्षी 'पीएम-विश्वकर्मा योजना' के अंतर्गत बिहार में अब तक 1.18 लाख पारंपरिक कारीगरों और शिल्पकारों को सफलतापूर्वक प्रशिक्षित किया जा चुका है। इससे जमीन पर रोजगार के नए अवसर सृजित हो रहे हैं और स्थानीय अर्थव्यवस्था को मजबूती मिल रही है। हॉकी विश्व कप और राष्ट्रीय खेलों की मेजबानी के लिए मदद मुख्यमंत्री सम्राट चौधरी ने बिहार को खेल के क्षेत्र में आगे ले जाने के लिए केंद्र से विशेष सहयोग की अपेक्षा जताई। उन्होंने बताया कि वर्ष 2028 में बिहार 'नेशनल यूथ गेम्स', वर्ष 2030 में 'हॉकी विश्व कप' और वर्ष 2031 में 'राष्ट्रीय खेल' (National Games) की मेजबानी करने के लिए तैयार है। अंत में उन्होंने प्रधानमंत्री को आश्वस्त किया कि बिहार 'सबका साथ, सबका विकास' के मूल मंत्र पर चलते हुए 'विकसित भारत' के लक्ष्य को प्राप्त करने के लिए निरंतर काम कर रहा है।  

बेगूसराय हादसे से पुलिस महकमे में शोक, तीन थानेदारों सहित 4 लोगों ने गंवाई जान

बेगूसराय बिहार के बेगूसराय जिले से एक बडे़ हादसे की खबर सामने आई है. यहां साहेबपुर कमाल में हुए एक हादसे में मधेपुरा पुलिस के तीन अधिकारी सहित 4 लोगों की मौत हो गई. ये सभी लोग पटना से प्रशिक्षण लेकर लौट रहे थे. बीती रात साहेबपुर कमाल के बखड्डा के पास एनएच 31 पर पुलिस अधिकारियों की कार ने एक ट्रक को पीछे से तेज टक्कर मार दी. इससे कार में सवार मधेपुरा पुलिस के तीन अलग-अलग थानों के SHO और गाड़ी के ड्राइवर की मौत हो गई. बीती रात तेज रफ्तार कार ने ट्रक में जबरदस्त टक्कर मार दी. हादसा इतना तेज था कि कार के अगले हिस्से के परखच्चा निकल गया. इस हादसे के बाद मौके पर अफरातफरी का माहौल हो गया. सूचना मिलते ही बेगूसराय की एसपी मनीष कुमार एवं सदर डीएसपी आनंद पांडेय सहित भारी संख्या में पुलिस घटनास्थल पर पहुंचे।  रतवारा, बेलारी और आरर थाना प्रभारी की मौत मृतकों की पहचान साजन पासवान रतवारा थाना प्रभारी, नीरज कुमार बेलारी थाना प्रभारी, ज्ञानेंद्र अमरेंद्र आरर थाना प्रभारी एवं ज्योतिष कुमार प्राइवेट कार चालक के रूप में की गई है. बताया जा रहा है कि पटना से एकदिवसीय प्रशिक्षण लेकर एक ही गाड़ी पर सवार होकर मधेपुरा जिला लौट रहे थे. तभी तेज रफ्तार कार अनियंत्रित हो गया और ट्रक से पीछे से टकरा गया।  दो की मौके पर ही मौत, दो ने हॉस्पिटल में तोड़ा दम हादसा इतना जबरदस्त था कि दो थाना प्रभारी ज्ञानेंद्र अमर एवं नीरज कुमार और ड्राइवर नीरज कुमार की घटनास्थल पर ही मौत हो गई. जबकि एक थाना प्रभारी साजन पासवान को स्थानीय लोगों ने घायल अवस्था में उसे जगह से उठाकर आनन-फानन में सदर अस्पताल बेगूसराय लाया जहां इलाज के दौरान कुछ ही देर के बाद मौत हो गई।  इस तीन पुलिस अधिकारी समेत चार कि मौत की खबर लगते ही पुलिस महकमे में खलबली मच गई. हालांकि इस घटना की सूचना मिलते ही बेगूसराय के एसपी मनीष कुमार घटनास्थल पर पहुंचकर पूरे मामले की जांच पड़ताल में जुटी।  SP ने बताया कि मृतकों में तीन सर्विंग SHO, एक प्राइवेट ड्राइवर  घटना के संबंध में बेगूसराय एसपी मनीष कुमार ने बताया कि देर रात ये एक्सीडेंट हुआ है. इसमें चार लोगों की मौत हो गई है. जिसमें तीन पुलिस मधेपुरा पुलिस के सर्विंग SHO हैं और एक जो ड्राइवर जो गाड़ी से लौटते एक्सीडेंट हुआ है. इन्वेस्टिगेशन जारी है. पोस्टमार्टम के बाद जो भी वैधानिक प्रक्रिया है, उसे फॉलो किया जा रहा है। 

धर्म बदलवाने का दबाव और हैवानियत की हदें, पति-पत्नी की साजिश का सनसनीखेज मामला आया सामने

कैमूर बिहार के कैमूर में धर्मांतरण के लिए रची गई खौफनाक साजिश का खुलासा हुआ है. दरअसल कैमूर में एक मुस्लिम कपल ने धर्मांतरण के लिए एक महिला को निशाना बनाकर बेहद घिनौनी साजिश रची. महिला को कथित तौर पर नशीला पदार्थ खिलाकर उसके साथ दुष्कर्म किया गया. सबसे चौंकाने वाली बात यह है कि जब आरोपी महिला के साथ दुष्कर्म कर रहा था, तब उसकी पत्नी मोबाइल फोन से पूरी घटना का वीडियो बना रही थी. इसके बाद वीडियो वायरल करने की धमकी देकर महिला पर धर्म परिवर्तन का दबाव बनाया गया और ब्लैकमेलिंग का खेल शुरू हुआ।  क्या है पूरा मामला? मामला कैमूर जिले के रामगढ़ थाना क्षेत्र का बताया जा रहा है. पीड़ित महिला की शिकायत के अनुसार आरोपी एकराम अंसारी ने उसे नशीला पदार्थ दिया, जिससे वह अचेत हो गई. आरोप है कि बेहोशी की हालत का फायदा उठाकर आरोपी ने उसके साथ जबरन शारीरिक संबंध बनाए. इस दौरान आरोपी की पत्नी शाहिदा बेगम मौके पर मौजूद रही और उसने मोबाइल फोन से पूरी घटना का वीडियो रिकॉर्ड किया। वीडियो बनाकर ब्लैकमेलिंग का खेल! पीड़िता का आरोप है कि घटना के बाद आरोपी दंपति ने वीडियो को हथियार बना लिय. महिला को धमकी दी गई कि यदि उसने उनकी बात नहीं मानी और धर्म परिवर्तन नहीं किया तो वीडियो सोशल मीडिया पर वायरल कर दिया जाएगा. लगातार मिल रही धमकियों और दबाव से परेशान होकर महिला ने पुलिस का दरवाजा खटखटाया।  पुलिस ने खोला साजिश का राज शिकायत मिलने के बाद पुलिस ने मामले की जांच शुरू की. जांच के दौरान सामने आया कि कथित दुष्कर्म और वीडियो रिकॉर्डिंग की घटना में पति-पत्नी दोनों की भूमिका थी. पुलिस अधिकारियों के अनुसार महिला को नशीला पदार्थ दिए जाने, दुष्कर्म और वीडियो बनाकर ब्लैकमेल करने के आरोपों की जांच की गई, जिसके बाद कार्रवाई करते हुए आरोपी दंपति को गिरफ्तार कर लिया गया।  दोनों आरोपी गिरफ्तार पुलिस ने आरोपी एकराम अंसारी और उसकी पत्नी शाहिदा बेगम को गिरफ्तार कर लिया है. अधिकारियों का कहना है कि मामले में सभी पहलुओं की गहन जांच की जा रही है. इलेक्ट्रॉनिक साक्ष्यों और मोबाइल फोन की भी जांच की जा रही है ताकि पूरे घटनाक्रम की सच्चाई सामने लाई जा सके।  इलाके के लोग हैरान! वहीं इस घटना सामने आने के बाद पूरे इलाके में सनसनी फैल गई है. स्थानीय लोग इस वारदात को लेकर स्तब्ध हैं. नशीला पदार्थ, दुष्कर्म, वीडियो रिकॉर्डिंग, ब्लैकमेलिंग और धर्म परिवर्तन के दबाव जैसे गंभीर आरोपों ने मामले को और संवेदनशील बना दिया है. पुलिस का कहना है कि जांच के आधार पर आगे की कानूनी कार्रवाई की जाएगी। 

डिजिटल जमीन रिकॉर्ड का अंचल अधिकारी करेगा सत्यापन, गलतियों पर जताई चिंता

रांची  झारखंड हाई कोर्ट के जस्टिस आनंद सेन की अदालत ने राज्य में आनलाइन भूमि अभिलेखों में लगातार हो रही त्रुटियों और विसंगतियों पर चिंता जताते हुए बुधवार को महत्वपूर्ण निर्देश जारी किए हैं। अदालत ने कहा है कि आनलाइन भूमि रिकार्ड भौतिक अभिलेखों की हूबहू कापी होनी चाहिए। इसके लिए अब सभी डिजिटल भूमि अभिलेखों का संबंधित अंचल अधिकारियों (सीओ) द्वारा सत्यापन किया जाएगा और सत्यापन के बाद ही उन्हें डिजिटल हस्ताक्षर के साथ पोर्टल पर प्रदर्शित किया जाएगा। अदालत ने राजस्व, निबंधन एवं भूमि सुधार विभाग के सचिव को आदेश का तत्काल अनुपालन सुनिश्चित करने तथा सभी संबंधित अधिकारियों को आवश्यक प्रशासनिक निर्देश जारी करने को कहा है। वहीं, प्रार्थी को तीन सप्ताह के भीतर अंचल अधिकारी कुड़ू के समक्ष आवेदन देने का निर्देश देते हुए कहा गया कि मामले का निष्पादन 12 सप्ताह के भीतर किया जाए। अदालत ने प्रार्थी राम प्रकाश भगत की याचिका की सुनवाई के दौरान यह आदेश दिया। प्रार्थी ने शिकायत की थी कि उसके पूर्वजों के नाम दर्ज भूमि का रिकार्ड भौतिक दस्तावेजों में सही है, लेकिन आनलाइन रजिस्टर और डिजिटल रिकार्ड में किसी अन्य व्यक्ति का नाम दर्ज हो गया है, जिसके कारण उसे परेशानी का सामना करना पड़ रहा है। सुनवाई के दौरान अदालत ने पाया कि राज्य में बड़ी संख्या में रैयत इसी तरह की शिकायतों के साथ हाई कोर्ट में याचिका दाखिल कर रहे हैं। अदालत ने कहा कि डेटा एंट्री में हुई मानवीय त्रुटियों और पर्याप्त सत्यापन तंत्र के अभाव में आनलाइन रिकार्ड और भौतिक अभिलेखों के बीच अंतर उत्पन्न हो रहा है, जिससे नागरिकों को अनावश्यक मुकदमेबाजी करनी पड़ रही है।

एलपीजी शवदाह गृह से लकड़ी पर निर्भरता घटेगी, शहर को मिलेगी बड़ी सुविधा

 मुंगेर  मुंगेर नगर निगम क्षेत्र के लोगों के साथ साथ आसपास के ग्रामीण इलाकों के लिए जल्द ही अंतिम संस्कार की आधुनिक एवं सुविधाजनक व्यवस्था उपलब्ध होने वाली है। शहर में एलपीजी (गैस) आधारित आधुनिक मोक्षधाम के निर्माण की तैयारी शुरू कर दी गई है। प्रस्तावित मोक्षधाम का निर्माण दोमंठ घाट के निकट किया जाएगा। इसके लिए नगर निगम ने जिला प्रशासन से लगभग एक एकड़ भूमि उपलब्ध कराने का अनुरोध किया है। प्रशासनिक प्रक्रिया पूरी होने के बाद यह परियोजना धरातल पर उतरेगी जिससे लोगों को पारंपरिक व्यवस्थाओं और तकनीकी समस्याओं से काफी राहत मिलने की उम्मीद है। जानकारी के अनुसार, राज्य सरकार के नगर विकास एवं आवास विभाग की पहल पर बिहार के कई प्रमुख शहरों में गैस आधारित शवदाह गृह स्थापित करने की योजना बनाई गई है। इस योजना में मुंगेर के अलावा पटना, गयाजी, सहरसा, सारण, भागलपुर और बेगूसराय को भी शामिल किया गया है। विभाग का मानना है कि एलपीजी आधारित शवदाह गृह पर्यावरण के अनुकूल होने के साथ-साथ अंतिम संस्कार की प्रक्रिया को अधिक व्यवस्थित, स्वच्छ और समयबद्ध बनाएगा। इससे लकड़ी की खपत में कमी आएगी और पर्यावरण संरक्षण को भी बढ़ावा मिलेगा। नगर निगम द्वारा जिला प्रशासन को भेजे गए प्रस्ताव में कहा गया है कि शहर की बढ़ती आबादी और नागरिक सुविधाओं की आवश्यकता को देखते हुए आधुनिक मोक्षधाम का निर्माण जरूरी हो गया है। विभागीय मानकों के अनुसार परियोजना के लिए एक एकड़ भूमि की आवश्यकता है। भूमि उपलब्ध होते ही निर्माण से संबंधित अन्य प्रक्रियाओं को आगे बढ़ाया जाएगा। नगर निगम के अधिकारियों का कहना है कि सरकार की प्राथमिकता के अनुरूप इस परियोजना को जल्द से जल्द अमलीजामा पहनाने का प्रयास किया जा रहा है। उल्लेखनीय है कि पूर्व में दोमंठ घाट पर इलेक्ट्रिक शवदाह गृह स्थापित करने की योजना पर विचार किया गया था लेकिन अब विभागीय स्तर पर एलपीजी आधारित प्रणाली को प्राथमिकता दी जा रही है। नई तकनीक के माध्यम से अंतिम संस्कार की प्रक्रिया अधिक सरल और तकनीकी रूप से बेहतर होगी। इससे लोगों को कम समय में सुविधाजनक सेवा मिल सकेगी। वहीं शहर के लाल दरवाजा स्थित मुक्ति धाम में पहले से इलेक्ट्रिक शवदाह गृह संचालित है लेकिन पुराना हो जाने के कारण वह अक्सर खराब रहता है। इसके कारण अंतिम संस्कार के लिए आने वाले लोगों को मजबूरन लकड़ी का सहारा लेना पड़ता है। इससे आर्थिक बोझ बढ़ने के साथ-साथ कई तरह की परेशानियों का भी सामना करना पड़ता है। ऐसे में नए गैस आधारित मोक्षधाम को शहर की एक बड़ी आवश्यकता माना जा रहा है। नगर विकास एवं आवास विभाग के निर्देश के अनुसार नए गैस आधारित शवदाह गृह का निर्माण पहले से संचालित मोक्षधाम के आसपास किए जाने को प्राथमिकता दी जा रही है। इसके लिए विभिन्न विभागों के बीच समन्वय स्थापित कर भूमि चयन एवं अन्य औपचारिकताएं पूरी की जा रही हैं। शहरवासियों का कहना है कि आधुनिक मोक्षधाम के निर्माण से न केवल नगर निगम क्षेत्र बल्कि आसपास के ग्रामीण क्षेत्रों के लोगों को भी बड़ी सुविधा मिलेगी। अब लोगों की निगाहें प्रशासनिक स्वीकृति और निर्माण कार्य शुरू होने पर टिकी हैं।

बिहार में पेयजल व्यवस्था होगी मजबूत, हजारों परिवारों को मिलेगा घर-घर पानी

पटना केंद्र प्रायोजित अटल नवीकरण एवं शहरी परिवर्तन मिशन (अमृत 2.0) के तहत बिहार सरकार ने दो शहरों की जलापूर्ति व्यवस्था को मजबूत करने के लिए कुल 259.33 करोड़ रुपये की दो महत्वपूर्ण परियोजनाएं स्वीकृत की हैं। इनमें एक योजना हाजीपुर जलापूर्ति से संबंधित है तो दूसरी सहरसा से। इन योजनाओं के पूरा होने से दोनों शहरों के करीब 37 हजार परिवारों को घर-घर साफ पीने का पानी उपलब्ध हो जाएगा। हाजीपुर जलापूर्ति परियोजना नगर विकास एवं आवास विभाग से मिली जानकारी के अनुसार, हाजीपुर जलापूर्ति परियोजना पर 131.88 करोड़ रुपये खच होंगे। योजना के तहत 19,436 घरों को पेयजल की सुविधा दी जाएगी। परियोजना में तात ट्यूबवेल, सात क्लोरीनेटर प्रणाली युक्त पंप हाउस, छह जलमीनार तथा 212.70 किलोमीटर जल वितरण नेटवर्क का निर्माण होगा। सहरसा जलापूर्ति परियोजना वहीं, सहरसा जलापूर्ति परियोजना पर 127.45 करोड़ रुपये खर्च होंगे। योजना के अंतर्गत 17,454 घरों को पेयजल की आपूर्ति होगी। परियोजना में 12 ट्यूबवेल, 12 क्लोरीनेटर युक्त पंप हाउस, आठ आयरन रिमूवल प्लांट, आठ जलमीनार और 186.49 किलोमीटर जल वितरण नेटवर्क का निर्माण शामिल है। सरकार का कहना है कि इन परियोजनाओं के पूरा होने से हाजीपुर और सहरसा के शहरी क्षेत्रों में रहने वाले लोगों को नियमित एवं सुरक्षित पेयजल उपलब्ध होगा। साथ ही शहरों की आधारभूत जलापूर्ति व्यवस्था भी अधिक सुदृढ़ और आधुनिक बनेगी।

योग दिवस पर 45 मिनट का अभ्यास, शिक्षकों का विशेष प्रशिक्षण शुरू

जमशेदपुर अंतरराष्ट्रीय योग दिवस के मौके पर इस वर्ष झारखंड के सरकारी और सरकारी सहायता प्राप्त स्कूलों में योग का व्यापक अभियान चलाया जाएगा. राज्य सरकार ने 21 जून को 12वें अंतरराष्ट्रीय योग दिवस को योगमय झारखंड 2026-27 के रूप में मनाने का निर्णय लिया है. रविवार होने के बावजूद राज्य के सभी स्कूल सामान्य दिनों की तरह खुले रहेंगे और स्टूडेंट्स, टीचर्स और कर्मियों की सामूहिक भागीदारी सुनिश्चित की जाएगी. 12 से 15 जून तक शिक्षकों का विशेष प्रशिक्षण स्कूली शिक्षा एवं साक्षरता विभाग के सचिव उमा शंकर सिंह द्वारा जारी निर्देश के अनुसार इस वर्ष अंतरराष्ट्रीय योग दिवस की थीम “स्वस्थ वृद्धावस्था के लिए योग” निर्धारित की गई है. कार्यक्रम को सफल बनाने के लिए झारखंड शिक्षा परियोजना परिषद ने एसओपी जारी की है. योजना के तहत 12 से 15 जून तक जिला, प्रखंड और संकुल (क्लस्टर) स्तर पर शिक्षकों का विशेष ट्रेनिंग कार्यक्रम होगा. वहीं स्कूलों में योग के प्रति जागरूकता बढ़ाने के लिए राष्ट्रीय योग ओलंपियाड के अंतर्गत पोस्टर, स्लोगन, कविता और निबंध लेखन प्रतियोगिताएं भी आयोजित होंगी. चयनित एंट्रीज को प्रखंड, जिला और राज्य स्तर पर मूल्यांकन के बाद एनसीइआरटी के राष्ट्रीय पोर्टल पर अपलोड किया जाएगा. 16 से 20 जून तक रोजाना योग अभ्यास 16 से 20 जून तक सभी स्कूलों में प्रतिदिन सुबह 7:15 बजे से 8:00 बजे तक 45 मिनट का सामूहिक योगाभ्यास कराया जाएगा. इसमें स्टूडेंट्स के साथ सभी टीचर और अन्य कर्मियों की भागीदारी अनिवार्य होगी. इसके अलावा 17 जून को सभी स्कूलों में सात सदस्यीय योग क्लब का पुनर्गठन भी किया जाएगा, जो पूरे साल योग से जुड़ी गतिविधियों का संचालन करेगा. क्लास शुरू होने से पहले होगा दो मिनट का मेडिटेशन स्कूली शिक्षा एवं साक्षरता विभाग ने निर्देश जारी करते हुए निर्देश दिया है कि अब स्कूलों में हर दिन पहली क्लास शुरू होने से पहले क्लास टीचर दो मिनट का ध्यान (मेडिटेशन) कराएंगे. शिक्षा विभाग का मानना है कि इससे स्टूडेंट्स में एकाग्रता, मानसिक संतुलन और सीखने की क्षमता में सकारात्मक सुधार आएगा. साथ ही स्कूल स्तर की प्रतियोगिताओं में प्रथम, द्वितीय और तृतीय स्थान हासिल करने वाले स्टूडेंट्स को 21 जून को सम्मानित किया जाएगा. कार्यक्रम पर होने वाला खर्च समग्र शिक्षा के कॉम्पोजिट स्कूल ग्रांट मद से उठाया जाएगा. विभाग ने स्पष्ट किया है कि योग दिवस कार्यक्रम के सफल आयोजन और शत-प्रतिशत भागीदारी सुनिश्चित करने की जिम्मेदारी संबंधित स्कूल के प्रिंसिपल की होगी.