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बिहार कैबिनेट विस्तार: पीएम मोदी और अमित शाह के शामिल होने की चर्चा

पटना  कंफर्म हो गया, प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और गृह मंत्री अमित शाह बिहार आ रहे हैं। सीएम सम्राट चौधरी के मंत्रिमंडल विस्तार में शामिल होंगे। पटना के गांधी मैदान में वाटरप्रूफ पंडाल बनाए जा रहे हैं। डेढ़ लाख लोगों के लिए तैयारी है। 7 मई को फर्स्ट हाफ का वक्त तय है। बीजेपी के प्रदेश अध्यक्ष संजय सरावगी ने भी इसकी पुष्टि कर दी। उन्होंने मंत्रिमंडल विस्तार की तारीख सात मई पर भी मुहर लगा दी। बीजेपी के प्रदेश अध्यक्ष संजय सरावगी ने ये भी बताया कि पीएम के अलावा और कौन नेता मंत्रिमंडल विस्तार में शामिल होंगे। यानी तैयारी अब पूरी हो चुकी है। कौन किस दल से मंत्री बनेगा, ये भी तय है। 6 मई से मंत्री बनने वालों को फोन जाने शुरू हो जाएंगे। गांधी मैदान में बन रहा वाटरप्रूफ पंडाल दरअसल, जो जश्न 15 अप्रैल को बंगाल चुनाव की वजह से नहीं मनाया जा सका, वो अब मंत्रिमंडल विस्तार में मनाया जाएगा। गांधी मैदान में बड़ी तैयारी हो रही है। डेढ़ लाख लोगों के बैठने का इंतजाम किया जा रहा है। 3000 जवानों को सुरक्षा में लगाया जाएगा। पीएम को आना है, इसलिए तैयारी भी उसी स्तर की हो रही है। गांधी मैदान में वाटरप्रूफ बड़ा पंडाल लगाया जा रहा है। पटना के गांधी मैदान में बन रहे वाटर फ्रूफ पंडाल को 6 मई शाम तक तैयार कर देना है। उसी हिसाब से गांधी मैदान में काम चल रहा है। पटना का गांधी मैदान फिर बड़े समारोह का गवाह बनने जा रहा है। इससे पहले 20 नवंबर को जब मुख्यमंत्री के तौर पर नीतीश कुमार ने शपथ ली थी, तब भी बड़ी तैयारी गांधी मैदान में हुई थी। अब 6 महीने बाद बदली सरकार के मंत्रिमंडल विस्तार की उससे भी बड़ी तैयारी हो रही है। कैबिनेट में विस्तार में शामल होंगे पीएम मोदी और शाह     प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी     गृह मंत्री अमित शाह     बीजेपी अध्यक्ष नितिन नवीन     बिहार के सभी केंद्रीय मंत्री     पूर्व मुख्यमंत्री नीतीश कुमार     एनडीए से जुड़े सभी बड़े नेता बिहार में 7 मई को मंत्रिमंडल विस्तार बिहार में सीएम सम्राट चौधरी के कैबिनेट का विस्तार 7 मई को होगा। गांधी मैदान में शपथ ग्रहण होने जा रहा है। इसके लिए गांधी मैदान को तैयार किया जा रहा है। राज्य मंत्रिमंडल में विस्तार के साथ मंत्रियों की संख्या 30 के करीब हो जाएगी। सीएम समेत 36 तक मंत्री राज्य में बन सकते हैं। अपने सहयोगियों को जेडीयू और बीजेपी की ओर से चार मंत्री पद दिया जाएगा। चिराग पासवान की पार्टी से दो मंत्री बन पाएंगे। जबकि, जीतनराम मांझी की पार्टी को एक और उपेंद्र कुशवाहा की पार्टी को भी एक मंत्री पद मिलेगा। बीजेपी और जेडीयू के बराबर बराबर मंत्री यानी 16–16 पद मिलेंगे। बिहार में जो मंत्री बनने जा रहे हैं, उनमें जेडीयू के नाम लगभग फिक्स हैं। पुराने चेहरों के साथ दो नए लोगों को मौका मिल सकता है। खास वो, जो टीम निशांत के तौर पर सक्रिय हैं। सबसे ज्यादा कयास बीजेपी कोटे के मंत्रियों को लेकर लगाए जा रहे हैं। उनके पास पद कम हैं और दावेदार ज्यादा हैं। माना जा रहा है कि बीजेपी के राष्ट्रीय अध्यक्ष नितिन नवीन और सीएम सम्राट चौधरी की पसंद के नेताओं की लॉटरी लग सकती है।  

चार राज्यों की जीत के बाद BJP का फोकस अब झारखंड पर

 दुमका  देश के 4 राज्यों के विधानसभा चुनाव में जीत के बाद अब भाजपा की नजर झारखंड पर है। आने वाले समय में भाजपा अन्य राज्यों की तरह यहां भी सरकार बनाने का प्रयास करेगी। यह बात भाजपा के सारठ से पूर्व विधायक रणधीर सिंह ने सोमवार को अदालत से बरी होने के बाद कही। उन्होंने कहा कि असम में प्रचंड बहुमत के साथ भाजपा तीसरी बार सत्ता संभालने जा रही है। पांडिचेरी में वापसी की है। ओडिशा में भाजपा सत्ता में आ गई। बंगाल में 15 साल के बाद भाजपा सत्ता में आई है। बिहार में तो पहले ही सरकार अब बन गई। इन विधानसभा चुनाव के नतीजे तो केवल झांकी है, झारखंड अब बाकी है। उन्होंने कहा कि बंगाल में 2021 में ही भाजपा सत्ता में आ जाती। आज केंद्रीय बल ने जिस तरह से जनता को भय मुक्त होकर मतदान का माहौल दिया, अगर पांच साल पहले ऐसा माहौल मिल जाता तो दूसरी बार भाजपा की सरकार बनती। लोगों ने भय मुक्त होकर वोटिंग की और घरों से बाहर निकलने का साहस किया। वहां के मतदाताओं का ही प्रयास है कि पहली बार भाजपा सरकार सत्ता में आई है। अब बंगाल का विकास होगा और बांग्ला देशी से लगने वाली सीमाओं की घेराबंदी की जाएगी। यह वीडियो भी देखें बांग्लादेशी घुसपैठिया को बाहर का रास्ता दिखाकर सभी धर्म के लोगों के साथ मिलकर इसे विकसित राज्य बनाया जाएगा। पश्चिम बंगाल की गिनती अब विकसित राज्यों की श्रेणी में होगी। राज्य में SIR पर रहेगी नजर : प्रदीप कोर्ट से जमानत मिलने के बाद कांग्रेस विधायक प्रदीप यादव ने बंगाल की जीत पर तंज कसते हुए कहा कि अगर प्रशासन किसी पार्टी के एजेंट के रूप में काम करता है तो वहां न्याय बहुत मुश्किल है। हमने जिनके हाथ में न्याय की बागडोर दी है, अगर वहीं एकतरफा होकर काम करने लगे तो हमें यहां आकर सोचना, लगता है कि पागलपन है। कांग्रेस राज्य के SIR पर कमर कसे हुए है। हम हर बूथ पर अपने एजेंट देंगे। प्रयास करेंगे कि किसी का नाम कटे और छटे नहीं। चार राज्यों में भाजपा को मिली जीत का असर झारखंड में नहीं पड़ेगा, लेकिन यह तो वक्त बताएगा। एक सवाल पर कहा कि अगर भाजपा लोकतांत्रिक तरीके से सत्ता में आती तो बधाई क्या मिठाई तक खिला देते। लोकतंत्र की हत्या करने वालों को बधाई देने का मतलब है कि उनके साथ कदम से कदम मिलाकर चलना है। यह तो मानव हिंसा से बड़ी हिंसा है। मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन जिस तरह से लोकतंत्र व संविधान बचाने का प्रयास कर रहे हैं, उससे लगता है कि यहां की जनता उनका साथ देगी। हम सत्य की लड़ाई लड़ रहे हैं। सत्य की जीत होकर रहेगी।

कांके में आयुष और योग आधारित हेल्थ एंड वेलनेस सेंटर की होगी स्थापना

 रांची राज्य सरकार ने देसी चिकित्सा पद्धति को बढ़ावा देने के लिए राज्य स्तरीय हेल्थ एंड वेलनेस सेंटर की स्थापना का निर्णय किया है। इस हेल्थ एंड वेलनेस सेंटर की स्थापना कांके में होगी। इसके लिए रिनपास परिसर में जमीन चिह्नित की गई है। स्वास्थ्य विभाग ने इसके लिए न केवल प्रस्ताव तैयार किया है, बल्कि चालू वित्तीय वर्ष के बजट में राशि का भी प्रविधान किया है। इस सेंटर की स्थापना का उद्देश्य आयुष चिकित्सा पद्धति के साथ-साथ देसी चिकित्सा से जुड़ी अन्य पद्धतियों को बढ़ावा देना है, जिनमें योगा भी प्रमुख है। प्रस्ताव के अनुसार, इस राज्य स्तरीय हेल्थ एंड वेलनेस सेंटर में देसी चिकित्सा पद्धतियों से उपचार के साथ-साथ लोगों को स्वास्थ्य के प्रति जागरुक करने के लिए काउंसिलिंग की भी व्यवस्था होगी। बदलते लाइफ स्टाइल में बेहतर स्वास्थ्य देखभाल के तरीकों से भी लोगों को अवगत कराया जाएगा। यहां मधुमेह, उच्च रक्तचाप, कैंसर आदि की जांच की भी व्यवस्था होगी। बताते चलें कि केंद्र के सहयोग से राज्य के चयनित स्वास्थ्य उपकेंद्रों को हेल्थ एंड वेलनेस सेंटर (आयुष्मान आरोग्य मंदिर) के रूप में अपग्रेड किया गया है। पहली बार राज्य एवं जिला स्तर पर इसके व्यापक स्वरूप में हेल्थ एंड वेलनेस सेंटर की स्थापना राज्य बजट से होगी। 23 जिलों में हेल्थ काटेज की भी स्थापना यह सेंटर एक माडल के रूप में काम करेगा। इसी की तर्ज पर रांची को छोड़कर शेष 23 जिलों में हेल्थ काटेज की भी स्थापना की जाएगी। यह राज्य स्तरीय हेल्थ एंड वेलनेस सेंटर का छोटा रूप होगा। बजट में इसके लिए भी राशि का प्रविधान किया गया है।  

10 हजार की पहली किस्त मिली, लेकिन 20 हजार के लिए नहीं मिल रहीं पात्र महिलाएं

 आरा भोजपुर जिले में मुख्यमंत्री महिला रोजगार योजना के तहत 10-10 हजार की पहली किस्त हासिल करने वाली महिला लाभार्थियों की संख्या चार लाख सत्रह सौ साठ थी। इसके बावजूद जिले में करीब 22 हजार महिलाओं को राशि विलंब से आवेदन करने के कारण नहीं मिल सकी। उन्हें आज भी इस राशि का इंतजार है। वहीं, दूसरी किस्त के लिए योग्य महिला उद्यमी नहीं मिल रही हैं। जिनको 20-20 हजार रुपए दिए जाने हैं। मई माह में राज्य सरकार ने दूसरी किस्त जारी करने का निश्चय किया है। सभी जिले को पत्र देकर दूसरी किस्त के योग्य महिला उद्यमी की सूची सौंपनी है। भोजपुर जिले में भी सूची तैयार हो रही है। इसमें चौंकाने वाली रिपोर्ट आ रही है। सूची तैयार करने की जिम्मेदारी ग्राम संगठनों की है। जिले में 1582 ग्राम संगठन हैं। ग्राम संगठन मानक के अनुसार दूसरी किस्त के लिए योग्य जीविका दीदी को चयन कर रहे हैं। इन्हें मानक के अनुसार कुल लाभार्थी के पांच से छह प्रतिशत महिला उद्यमी मिले हैं। जिला जीविका दीदी के पदाधिकारी मनीष ने बताया कि जिले में पहली किस्त प्राप्त करने वाले अधिकांश महिला उद्यमी अभी अपना रोजगार शुरू नहीं की है। विभाग से मिली जानकारी के अनुसार, जिले में दूसरी किस्त के लिए करीब 24 हजार महिला उद्यमी को मानक के अनुसार योग्य पाया गया है। दूसरी किस्त के लिए तैयार हो रहा आंकड़ा विगत फरवरी माह से जिले में महिला उद्यमियों को चयन करने की प्रक्रिया चल रही है। इसमें महिला उद्यमी से 10 हजार रुपए की राशि, क्या रोजगार में शुरू किया, की जानकारी मांगी जाती है। इस बाबत ग्राम संगठनों ने सात प्रश्न सुनिश्चित किया है। जो महिला उद्यमी उसको पूरा करती हैं, उसी को 20-20 हजार रुपए की किस्त मिलेगी। इनका डेटा पोर्टल पर अपलोड हो रहा है। मुख्यालय भेजने के लिए आज मंगलवार तक अंतिम तिथि निर्धारित थी। आरा सदर प्रखंड में 1 प्रतिशत भी कम योग्य लाभार्थी भोजपुर जिले के सबसे अधिक शहरी इलाका आरा सदर प्रखंड में है। यहां पर मुख्यमंत्री महिला रोजगार योजना के तहत पहली किस्त हासिल करने वाली महिलाओं की संख्या करीब 26 हजार रही है। इन महिलाओं ने मुख्यमंत्री महिला रोजगार योजना के तहत 10-10 हजार रुपए की राशि प्राप्त की है। इस प्रखंड में 120 ग्राम संगठन है। दूसरी किस्त के लिए सर्वे के बाद 234 जीविका दीदी को दूसरी किस्त के लायक पाया गया। यह संख्या कुल लाभार्थियों के एक प्रतिशत से भी कम है।

झारखंड आबकारी नीति विवाद: अनिल टुटेजा पर क्या हैं आरोप?

रांची  झारखंड के शराब घोटाला मामले में IAS अनिल टुटेजा को जमानत मिल गई है। उन पर झारखंड के अधिकारियों के साथ मिलकर आबकारी नीति में बदलाव करवाकर अपने पसंदीदा ठेकेदारों को लाभ पहुंचाने और करोड़ों रुपये का कमीशन कमाने का आरोप है। छत्तीसगढ़ हाई कोर्ट ने उनकी अग्रिम जमानत याचिका स्वीकार करते हुए 50 हजार रुपये के निजी मुचलके और इतनी ही राशि की दो साल्वेंट जमानत पर रिहा करने का आदेश दिया। हालांकि कोर्ट ने ये शर्त रखी है कि अगर IAS ने जांच में किसी भी तरह की बाधा डाली, तो EOW अग्रिम जमानत के आदेश को रद कराने वह अदालत का दरवाजा खटखटा सकती है। हाई कोर्ट ने अपने आदेश में टुटेजा को जांच में सहयोग करने व गवाहों को प्रभावित न करने की सख्त हिदायत भी दी है। अभी जेल से निकलना मुश्किल बता दें कि करीब एक सप्ताह पहले छत्तीसगढ़ के चर्चित डीएमएफ घोटाला और मनी लॉन्ड्रिंग मामले में फंसे अनिल टुटेजा की जमानत याचिका को हाई कोर्ट ने खारिज कर दिया था। ऐसे में उनका जेल से बाहर आना फिलहाल मुश्किल है। आर्थिक अपराध अन्वेषण शाखा (EOW) ने अनिल टुटेजा पर भ्रष्टाचार निवारण अधिनियम की धारा 7 और आईपीसी की धारा 420, 120बी के तहत मामला दर्ज किया है। कारोबारियों को फायदा पहुंचाने के लिए बनाई नीति आरोप है कि टुटेजा और अन्य आरोपितों ने झारखंड में छत्तीसगढ़ के आबकारी मॉडल की तर्ज पर अवैध शराब का कारोबार चलाने के लिए सिंडिकेट बनाया था। सिंडिकेट ने झारखंड की आबकारी नीति में बदलाव करवाकर अपने पसंदीदा ठेकेदारों को लाभ पहुंचाया और करोड़ों रुपये का अवैध कमीशन कमाया। अपनी याचिका में टुटेजा ने ये लगाए आरोप वहीं, अनिल टुटेजा ने कोर्ट को बताया कि यह उसे हमेशा जेल में रखने की साजिश का मामला है। जब भी एक मामले में जमानत मिलने वाली होती है तो जेल में रखने के लिए एक नई FIR दर्ज कर दी जाती है। झारखंड पुलिस ने इसी मामले में अलग से एफआइआर दर्ज की है, लेकिन टुटेजा को आरोपित तक नहीं बनाया गया है। छापेमारी में नहीं मिली कोई अवैध संपत्ति याचिका में कहा है कि बीते पांच साल में पांच अलग-अलग एजेंसियों ने छापेमारी की, लेकिन उनके के पास से एक भी रुपए की बेहिसाब संपत्ति नहीं मिली। जांच एजेंसी के पास कोई डिजिटल सबूत, कॉल रिकॉर्ड या वित्तीय लेनदेन का प्रमाण भी नहीं है, जो उसे झारखंड के अधिकारियों से जोड़ता हो। राज्य सरकार टुटेजा को बताया मास्टरमाइंड छत्तीसगढ़ सरकार की ओर से जमानत का विरोध करते हुए कहा, अनिल टुटेजा चावल मिलिंग, डीएमएफ, कोयला और शराब जैसे कई घोटालों का मास्टरमाइंड है। राज्य सरकार के अधिवक्ता ने कहा कि टुटेजा ने रायपुर में बैठकें कर झारखंड के अधिकारियों के साथ साजिश रची, जिससे सरकारी खजाने को भारी नुकसान हुआ। सिंडिकेट माडल के जरिए बेहिसाब संपत्ति अर्जित की गई।

गर्मी से निपटने की तैयारी तेज, सीएम ने पानी-बिजली पर कड़ा रुख अपनाया

रांची  राज्य में लगातार बढ़ती गर्मी और हीटवेव के खतरे को देखते हुए मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन ने सोमवार को वीडियो कान्फ्रेंसिंग के माध्यम से सभी जिलों के उपायुक्तों और वरीय अधिकारियों के साथ उच्चस्तरीय समीक्षा बैठक की। बैठक में पेयजल आपूर्ति, बिजली व्यवस्था और स्वास्थ्य सेवाओं को लेकर सख्त निर्देश दिए गए। मुख्यमंत्री ने स्पष्ट कहा कि गर्मी के इस दौर में आम लोगों को किसी भी तरह की परेशानी नहीं होनी चाहिए। उन्होंने जिला प्रशासन को निर्देश दिया कि सभी क्षेत्रों में पेयजल की समुचित व्यवस्था सुनिश्चित की जाए। जलापूर्ति योजनाओं, चापाकलों और टैंकरों की नियमित मॉनिटरिंग हो तथा जहां भी जल संकट की सूचना मिले, वहां तत्काल कार्रवाई की जाए। बिजली आपूर्ति को लेकर भी मुख्यमंत्री ने सख्त रुख अपनाया। उन्होंने कहा कि गर्मी के दौरान निर्बाध बिजली आपूर्ति बेहद जरूरी है। ट्रांसफार्मर खराबी, बिजली कटौती और अन्य तकनीकी समस्याओं का त्वरित समाधान सुनिश्चित करने के निर्देश दिए गए। स्वास्थ्य सेवाओं पर विशेष ध्यान देते हुए मुख्यमंत्री ने कहा कि हीटवेव और लू से प्रभावित मरीजों के इलाज के लिए अस्पतालों में पूरी तैयारी रहनी चाहिए। सभी स्वास्थ्य केंद्रों में आवश्यक दवाइयां, ओआरएस, पेयजल और पर्याप्त स्वास्थ्यकर्मियों की उपलब्धता सुनिश्चित करने को कहा गया। ऑफिस से निकलें, जमीनी हकीकत जानें अधिकारी सीएम ने राज्य के सभी उपायुक्तों को नियमित रूप से क्षेत्र भ्रमण करने और जमीनी हकीकत का आकलन करने का निर्देश दिया। उन्होंने कहा कि अधिकारी आम लोगों से सीधे संवाद करें, उनकी समस्याएं सुनें और त्वरित समाधान सुनिश्चित करें। बैठक में प्रशासनिक समन्वय पर भी जोर दिया गया। मुख्यमंत्री ने कहा कि सभी विभाग आपसी तालमेल के साथ काम करें ताकि किसी भी नागरिक को पानी, बिजली या स्वास्थ्य सेवाओं के अभाव में कठिनाई का सामना न करना पड़े। बैठक में मुख्य सचिव अविनाश कुमार, अपर मुख्य सचिव (स्वास्थ्य) अजय कुमार सिंह, अपर मुख्य सचिव (गृह) वंदना दादेल सहित सभी जिलों के उपायुक्त और अन्य वरिष्ठ अधिकारी उपस्थित थे।  

झारखंड में स्मार्ट मीटर योजना जारी, रांची में 100% लक्ष्य की तैयारी

 रांची  केंद्र सरकार ने अप्रैल 2026 में सेंट्रल इलेक्ट्रिसिटी अथॉरिटी के नियमों में बदलाव करते हुए स्मार्ट मीटरों के लिए प्रीपेड बिलिंग को अनिवार्य नहीं रखा है। अब प्रीपेड सुविधा उपभोक्ताओं के लिए वैकल्पिक हो गई है। संचार नेटवर्क वाले इलाकों में स्मार्ट मीटर लगाने का काम समय-सीमा के अनुसार जारी रहेगा। केंद्र ने साफ कहा है कि किसी भी उपभोक्ता पर स्मार्ट प्रीपेड मीटर जबरदस्ती नहीं थोपा जाएगा। इस बीच उत्तर प्रदेश में उपभोक्ताओं के विरोध और बिलिंग संबंधी शिकायतों के कारण अप्रैल 2026 में स्मार्ट मीटर लगाने का काम अस्थायी रूप से रोक दिया गया है। एक तकनीकी समिति की रिपोर्ट आने तक पुराने मीटर बदलने की प्रक्रिया रोक दी गई है (नए कनेक्शन को छोड़कर)। झारखंड में क्या है स्थिति? झारखंड बिजली वितरण निगम लिमिटेड (JBVNL) रिवैंप्ड डिस्ट्रीब्यूशन सेक्टर स्कीम, विश्व बैंक सहायता प्राप्त झारखंड पावर सिस्टम इम्प्रूवमेंट प्रोजेक्ट और राज्य योजनाओं के तहत स्मार्ट मीटर लगाने का काम लगातार आगे बढ़ा रहा है। राज्य में कुल 18.5 लाख स्मार्ट मीटर लगाने का लक्ष्य है, जिसमें 13.41 लाख मीटर केंद्र की योजना के तहत शामिल हैं। जुलाई 2025 तक पूरे राज्य में करीब 7.7 लाख स्मार्ट मीटर लग चुके थे। रांची 100 फीसदी लक्ष्य की ओर JBVNL का लक्ष्य है कि राजधानी रांची को पूर्ण रूप से स्मार्ट प्रीपेड मीटर वाला शहर बनाया जाए। अप्रैल 2026 के अंत तक यहां 100 प्रतिशत स्मार्ट प्रीपेड मीटर का लक्ष्य रखा गया है। वर्तमान में शहर में 3.35 लाख से 3.65 लाख स्मार्ट मीटर लग चुके हैं। इनमें से अधिकांश प्रीपेड मोड में चल रहे हैं। अभी करीब 12,000 मीटर पोस्टपेड मोड में हैं और 13,000 से 16,000 कनेक्शन बाकी हैं। एचईसी क्षेत्र समेत बचे इलाकों में काम तेज गति से चल रहा है। JBVNL अधिकारियों ने बताया कि मीटर लगाना पूरी तरह मुफ्त है। उपभोक्ता मोबाइल ऐप से अपनी बिजली खपत, बैलेंस की जांच और रिचार्ज आसानी से कर सकते हैं। बैलेंस बहुत कम होने पर स्वचालित कटौती का प्रावधान है, इसलिए उपभोक्ताओं को न्यूनतम बैलेंस बनाए रखने की सलाह दी गई है। अनिवार्यता पर केंद्र की नई नीति केंद्र की नई लचीली नीति के बाद झारखंड में भी स्मार्ट प्रीपेड मीटर पूरी तरह जबरदस्ती अनिवार्य नहीं है। फिर भी JBVNL नए कनेक्शन, खराब मीटर बदलने और संचार सुविधा वाले क्षेत्रों में स्मार्ट मीटर को प्राथमिकता दे रहा है। झारखंड राज्य विद्युत नियामक आयोग के मार्च 2026 के आदेश में स्मार्ट मीटर और पुराने मीटर के बीच अलग बिजली दर नहीं रखी गई है। कुछ इलाकों में प्रीपेड मोड चुनने वालों को 3 प्रतिशत रिबेट जैसी छूट भी दी जा रही है। स्मार्ट मीटर से लाभ और चुनौतियां स्मार्ट मीटर से बिजली चोरी कम होने, बिलिंग पारदर्शी बनने और सटीक खपत लेखांकन की उम्मीद है। रांची जैसे शहरों में बिल वसूली की दक्षता बढ़ने के संकेत मिले हैं। लेकिन चुनौतियां भी सामने आई हैं। कुछ उपभोक्ताओं को पुराना बकाया दिखने, बैलेंस संबंधी भ्रम और स्वचालित कटौती की आशंका से परेशानी हुई है। JBVNL इन शिकायतों को प्राथमिकता से सुलझा रहा है और जागरूकता शिविर लगा रहा है। उपभोक्ताओं से अपील की गई है कि वे फर्जी लोगों से सावधान रहें और आधिकारिक सुविधा पोर्टल पर ही आवेदन करें। केंद्र की अप्रैल 2026 की नीति अब राज्यों को ज्यादा लचीलापन दे रही है। यूपी में लगी रोक झारखंड में नहीं है, लेकिन उपभोक्ता शिकायतों को गंभीरता से लेकर सहमति और जागरूकता के साथ आगे बढ़ने की जरूरत है। JBVNL का मुख्य लक्ष्य बिजली घाटा कम करना और बिजली विभाग को आर्थिक रूप से मजबूत बनाना है। केंद्र की योजना के तहत राष्ट्रीय लक्ष्य मार्च 2028 तक बढ़ाया गया है। कुछ जगह विरोध के बावजूद झारखंड में यह बदलाव बिजली व्यवस्था को आधुनिक बनाने की दिशा में बड़ा कदम है, बशर्ते उपभोक्ताओं के हितों का पूरा ख्याल रखा जाए।

मौजमपुर (भोजपुर) में सबसे लंबा 1034 मीटर का पीपा पुल, निविदा प्रक्रिया शुरू

पटना बिहार के तीन जिलों में पीपा पुल बनाया जाएगा। इसकी तैयारी परिवहन विभाग के जल परिवहन द्वारा की जा रही है। स्थानीय स्तर पर छोटे व्यापार आदि को बढ़ावा देने के लिए पटना, भोजपुर, वैशाली जिला में गंगा नदी पर पीपा पुल बनाया जाएगा। इसके लिए जल परिवहन विभाग ने जगह चिह्नित कर ली है। इसमें पटना में चार, भोजपुर और वैशाली जिला में एक-एक पीपा पुल का निर्माण शामिल है। जल परिवहन विभाग ने मौजमपुर भोजपुर के लिए निविदा यानी टेंडर निकाल कर कार्य प्रारंभ कर दिया है। चकौशन वैशाली के साथ पटना में गंगा नदी पर बनने वाले तीन पीपा पुल के लिए निविदा का कार्य प्रगति पर है। कच्ची दरगाह पटना में 943.3 मीटर में बनने वाले पीपा पुल के लिए निविदा जल्द शुरू होगी। जिन जगहों के लिए निविदा प्रक्रिया शुरू की गयी है, वहां निर्माण जल्द शुरू होगा। गंगा पर बनने वाले पीपा पुल के लंबाई का निर्धारण भी कर दिया गया है। मौजमपुर भोजपुर में सबसे लंबा 1034 मीटर में पीपा पुल बनाया जाएगा। इन जगहों पर गंगा नदी में पीपा पुल बनेगा जगह – कुल लंबाई मौजमपुर (भोजपुर) – 1034 मीटर चकौशन (वैशाली) – 935 मीटर दानापुर (पटना) – 972 मीटर ग्यासपुर (पटना) – 924 मीटर कच्ची दरगाह (पटना) – 943 मीटर कच्ची दरगाह (पटना) – 943.3 मीटर पीपा पुल बनाने का मकसद ● गंगा के दोनों ओर बसे लोगों को जोड़ता है, इससे नाव के सहारे निर्भरता कम होती है ● गंगा के बाढ़ क्षेत्र में किसान पुल से खाद, बीच और ट्रैक्टर लेकर खेतों तक जा सकते हैं ● बड़े पुल पर जाम की स्थिति में पीपा पुल छोटे वाहनों के लिए वैकल्पिक रास्ता होता है ● स्थानीय लोगों को व्यापाार, शिक्षा और स्वास्थ्य सेवाओं तक पहुंच को आसान बनाता है

वाराणसी-कोलकाता सिक्स लेन और जल परियोजनाओं को नई रफ्तार, बिहार की कनेक्टिविटी और सिंचाई व्यवस्था में सुधार की उम्मीद

 पटना पश्चिम बंगाल में भारतीय जनता पार्टी की नई सरकार बनने से इसका सीधा और सकारात्मक असर पड़ोसी राज्य बिहार पर देखने को मिलेगा। देश के पांच राज्यों में हुए विधानसभा चुनावों में बंगाल फतह को केवल एक राजनीतिक जीत नहीं, बल्कि बिहार के दूरगामी हितों की जीत के रूप में भी देखा जा रहा है। बिहार में एनडीए की सरकार है और अब बंगाल में भी बीजेपी का मुख्यमंत्री होने से दोनों राज्यों के बीच लंबे समय से चले आ रहे विवादित मुद्दों पर आसानी से सहमति बन सकेगी। इसका सबसे बड़ा फायदा बिहार के सीमावर्ती जिलों को मिलेगा। घुसपैठ और तस्करी पर लगेगी रोक बंगाल की ममता सरकार के दौरान बिहार को घुसपैठ के मुद्दे पर सहयोग नहीं मिल पा रहा था। इसी के कारण सीमावर्ती इलाकों में यह समस्या लगातार गंभीर हो रही थी। लेकिन अब केंद्र, बिहार और बंगाल- तीनों जगह समान विचारधारा वाली सरकार होने से घुसपैठियों के खिलाफ ठोस और संयुक्त कार्रवाई की जा सकेगी। इससे न केवल अवैध रूप से आने वाले लोगों पर नकेल कसेगी, बल्कि सीमा पर होने वाली तस्करी पर भी पूर्ण रूप से रोक लगेगी। वाराणसी-कोलकाता सिक्स लेन परियोजना पकड़ेगी रफ्तार उत्तर प्रदेश के वाराणसी से बिहार और झारखंड होते हुए कोलकाता तक बनने वाले महत्वाकांक्षी 'सिक्स लेन राष्ट्रीय राजमार्ग' को भी अब नई गति मिलेगी। ममता सरकार के कारण बंगाल की लगभग 285 किलोमीटर की इस परियोजना पर कोई ठोस काम नहीं हो सका था, जबकि यूपी, बिहार और झारखंड में प्रक्रिया शुरू हो चुकी थी। नई सरकार के आने से यह बाधा दूर होगी, जिसके बाद सड़क बनने पर बिहार से बंगाल का सफर सिर्फ 7 घंटे में तय किया जा सकेगा। अपर महानंदा सिंचाई और फरक्का बराज पर सकारात्मक पहल इंफ्रास्ट्रक्चर के अलावा जल बंटवारे के मामले में भी बिहार को बड़ा फायदा होने की उम्मीद है। 1978 के समझौते के तहत 'अपर महानंदा सिंचाई परियोजना' से जुड़ी 8 किलोमीटर लंबी नहर का काम अब रफ्तार पकड़ेगा। इससे 67 हजार एकड़ कृषि भूमि को सिंचाई का पानी मिल सकेगा। वहीं, 1996 के समझौते के तहत फरक्का बराज से बांग्लादेश को पानी देने की बाध्यता पर भी राज्य सरकार ने पुनर्विचार का अनुरोध किया था। अब इस दिशा में अच्छी पहल होने की उम्मीद है, जिससे गंगा के पानी में बिहार की भागीदारी बढ़ सकेगी।

मुख्यमंत्री सम्राट चौधरी ने दिल्ली दौरे के बाद पटना में नीतीश कुमार से की मुलाकात, गठबंधन में समन्वय पर चर्चा

पटना बिहार की एनडीए सरकार का मंत्रिमंडल विस्तार 7 मई को होगा। राजधानी पटना के ऐतिहासिक गांधी मैदान में मुख्यमंत्री सम्राट चौधरी के मंत्रिमंडल में शामिल होने वाले नए मंत्री शपथ लेंगे। उन्हें राज्यपाल सय्यद अता हसनैन पद व गोपनीयता की शपथ दिलायेंगे। इस मौके के साक्षी बड़ी संख्या में एनडीए के शीर्ष नेता बनेंगे। रविवार को मुख्यमंत्री सम्राट चौधरी ने दिल्ली में गृहमंत्री अमित शाह के साथ ही भाजपा के शीर्ष नेताओं से मुलाकात की थी। साथ ही बिहार में एनडीए के प्रमुख घटक दलों के नेता जदयू के राजीव रंजन सिंह ललन, हम के जीतन राम मांझी, लोजपाआर के चिराग पासवान से मिलकर रविवार की दोपहर वे पटना पहुंचे। उनकी वापसी के पहले ही पटना जिला प्रशासन के गांधी मैदान में शपथ ग्रहण समारोह की तैयारियां आरंभ कर दीं। बताया जाता है कि इसको लेकर आलाधिकारियों ने एक बैठक कर इसकी रणनीति बनाई। समय और शपथ लेने वाले मंत्रियों की संख्या तय की जा रही है। इधर बिहार में मंत्रिमंडल विस्तार की अटकलों के बीच मुख्यमंत्री सम्राट चौधरी ने सोमवार को अपने पूर्ववर्ती और जनता दल यूनाइटेड (जदयू) के प्रमुख नीतीश कुमार से उनके आवास पर मुलाकात की। सम्राट चौधरी नई दिल्ली से लौटने के तुरंत बाद कुमार के आवास पहुंचे थे। दिल्ली प्रवास के दौरान उन्होंने केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह सहित राष्ट्रीय जनतांत्रिक गठबंधन (राजग) के कई शीर्ष नेताओं से मुलाकात की थी। मुख्यमंत्री ने जदयू अध्यक्ष के साथ हुई मुलाकात की तस्वीरें सोशल मीडिया मंच 'एक्स' पर साझा करते हुए लिखा कि उन्होंने "राजग की शानदार जीत के गौरवपूर्ण क्षण को साझा किया।" यह हालिया विधानसभा चुनावों में पश्चिम बंगाल, असम, पुडुचेरी, तमिलनाडु और केरल में भाजपा और उसके सहयोगियों के प्रदर्शन का संदर्भ था। इससे पहले, सम्राट चौधरी ने जदयू प्रमुख के एक पोस्ट को भी साझा किया था, जिसमें उन्होंने विधानसभा चुनावों में राजग की सफलता पर खुशी जताई थी। इसी बीच, यह चर्चा तेज है कि चुनाव परिणामों के बाद बिहार में मंत्रिमंडल विस्तार का रास्ता साफ हो गया है। पिछले महीने शपथ लेने वाले सम्राट चौधरी के मंत्रिमंडल में फिलहाल केवल दो मंत्री हैं, दोनों ही जदयू से हैं। वरिष्ठ नेता विजय कुमार चौधरी और बिजेंद्र प्रसाद यादव ने शपथ ली थी और दोनों को उपमुख्यमंत्री बनाया गया है। बिहार की 243 सदस्यीय विधानसभा के मंत्रिमंडल में अधिकतम 30 मंत्री हो सकते हैं। संभावित विस्तार में भाजपा और जदयू के अलावा राजग के अन्य घटकों-लोजपा (रामविलास), हम और रालोमो को भी प्रतिनिधित्व मिलने की संभावना है। इन दलों का नेतृत्व क्रमशः केंद्रीय मंत्री चिराग पासवान, जीतन राम मांझी और राज्यसभा सदस्य उपेंद्र कुशवाहा कर रहे हैं। पूर्व प्रदेश भाजपा अध्यक्ष दिलीप जायसवाल से जब सात मई को मंत्रिमंडल विस्तार की अटकलों के बारे में पूछा गया तो उन्होंने कहा, “यह मुख्यमंत्री का विशेषाधिकार है और इस पर टिप्पणी करना उचित नहीं होगा।” इस बीच, शहर के ऐतिहासिक गांधी मैदान में एक बड़ा टेंट लगाया जा रहा है। अधिकारी तैयारियों के बारे में कुछ भी बताने से बच रहे हैं, हालांकि भाजपा के कुछ नेताओं का दावा है कि मंत्रिमंडल विस्तार कार्यक्रम "भव्य आयोजन" होगा, जो राजभवन में हुए सम्राट चौधरी के सादे शपथ ग्रहण समारोह से अलग होगा।