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पाम संडे पर ईसाई समाज ने एक स्वर में व्यक्त की श्रद्धा, सभी ने कहा – प्रभु हम आपके सेवक हैं

पाम संडे पर ईसाई समाज ने एक स्वर में व्यक्त की श्रद्धा, सभी ने कहा – प्रभु हम आपके सेवक हैं भोपाल  आज दिनांक 29/ 3/ 2026 को  ईसाई समाज में पाम संडे का दिन खास रहा और  सभी ने एक स्वर में कहा कि प्रभु हम आपके सेवक है   हम पूरी कलीसिया ने मिलकर  देश-विदेश के लिए प्रार्थना करी कि प्रभु देश में शांति बनाए रखें और सभी स्वास्थ्य में प्रसन्न रहे चर्च के लोगों ने खजूर की डालियां हाथ में थाम कर सुभाष पाठक से बेथलम चर्च बरखेड़ी फाटक से चर्च तक रैली निकाली इस माध्यम से उन्होंने पर्यावरण संरक्षण का भी संदेश दिया रैली में शामिल लोग यीशु के बलिदान और उसकी महिमा से जुड़े गीत एवं ह होस्ना के नारे लगाए गए जिसमें रतलाम से आए हुए स्पीकर पास्टर धूलिया ने चर्च के अंदर पाम संडे पर सभी समाज के लोगों के साथ प्रभु का वचन दिया और उन्होंने बताया कि 2000 वर्ष पहले प्रभु यीशु ने यरुशलम में प्रवेश के दिन को याद किया . इस दिन लोगों ने खजूर की डालियां डाली और अपने वस्त्र मार्ग में बिछाकर प्रभु यीशु मसीह के आगमन पर उनका स्वागत किया श्री हैरीस लाल ने बताया कि चर्च में चर्च के बच्चों के द्वारा प्रभु यीशु मसीह को याद करते हुए स्क्रिप्ट करा और होस्नाके नारे लगाएंसभी  भोपाल के सभी गिरजाघर में नारे लगे और इसी प्रकार जुलूस निकाला गया चर्च के अंदर बहुत बड़ी संख्या में ईसाई समाज इकट्ठा हुआ सबने मिलकर युद्ध बंद करने के लिए प्रार्थना की गई और समाज में मिलकर रहने का प्रभु यीशु मसीह से प्रार्थना किया .

MP में मौसम का बदलाव, आज से 4 दिन तक आंधी और बारिश, कई इलाकों में ओले गिरने का अनुमान

भोपाल  मध्य प्रदेश में रविवार से मौसम एक बार फिर करवट लेने जा रहा है। प्रदेश में अगले चार दिन तक आंधी-बारिश का दौर बने रहने के आसार हैं। पश्चिमी विक्षोभ और ट्रफ लाइन की सक्रियता के चलते यह बदलाव देखने को मिलेगा। मौसम विभाग के अनुसार 30 और 31 मार्च को इसका असर सबसे ज्यादा रहेगा, जब कई हिस्सों में तेज गतिविधि दर्ज की जाएगी। ग्वालियर-चंबल क्षेत्र में इस दौरान ओले गिरने की भी संभावना है।शनिवार को प्रदेश के पूर्वी हिस्से में सक्रिय रहे मौसम सिस्टम अब आगे बढ़ रहे हैं, जिससे रविवार से इसका प्रभाव व्यापक होगा। आने वाले 24 घंटे में ग्वालियर, चंबल और उज्जैन संभाग में बारिश के साथ तेज हवाएं चलने का अनुमान है। हवा की गति 40 से 50 किलोमीटर प्रति घंटा तक पहुंच सकती है।   IMD (मौसम केंद्र) के अनुसार, 30 और 31 मार्च को सिस्टम की स्ट्रॉन्ग एक्टिविटी देखने को मिलेगी। इस दौरान ग्वालियर और चंबल संभाग में ओले भी गिर सकते हैं। शनिवार को एमपी के पूर्वी हिस्से में दोनों सिस्टम सक्रिय रहे, जो रविवार को आगे बढ़ेंगे। इस वजह से बारिश का दौर शुरू होगा। अगले 24 घंटे के दौरान ग्वालियर, चंबल और उज्जैन संभाग में बारिश का अलर्ट है। यहां 40 से 50 किलोमीटर प्रतिघंटा की रफ्तार से आंधी भी चल सकती है। मौसम विभाग के अनुसार, 30 मार्च से सिस्टम का असर ज्यादा रहेगा। ग्वालियर, भिंड और दतिया में ओले भी गिर सकते हैं। वहीं, भोपाल, इंदौर, ग्वालियर, चंबल, उज्जैन, सागर, रीवा संभाग के अधिकांश हिस्से में आंधी, बारिश और गरज-चमक वाला मौसम रहेगा। 31 मार्च को भी ऐसा ही अलर्ट है। 1 अप्रैल को सिस्टम कमजोर होने लगेगा। हालांकि, प्रदेश के 20 से ज्यादा जिलों में बारिश होने का अनुमान है। दिनभर बादल छाए रहे शनिवार को मध्य प्रदेश में दिनभर बादल छाए रहे। मौसम विभाग का कहना है कि 30 मार्च से सिस्टम ज्यादा असर दिखाएगा। ग्वालियर, भिंड और दतिया में ओलावृष्टि हो सकती है। वहीं भोपाल, इंदौर, ग्वालियर, चंबल, उज्जैन, सागर और रीवा संभाग के कई जिलों में आंधी, बारिश और गरज-चमक का असर रहेगा। 31 मार्च को भी हालात ऐसे ही बने रहेंगे। 1 अप्रैल से सिस्टम कमजोर पड़ने लगेगा, लेकिन इसके बावजूद 20 से ज्यादा जिलों में हल्की बारिश होने के संकेत हैं। अगले 4 दिन ऐसा रहेगा एमपी में मौसम आंधी-बारिश के चलते दिन के तापमान में गिरावट दर्ज होगी, जिससे लोगों को गर्मी से कुछ राहत मिलेगी। फिलहाल अधिकांश शहरों में अधिकतम तापमान 37 डिग्री सेल्सियस या उससे ज्यादा बना हुआ है। नर्मदापुरम सबसे गर्म बना हुआ है। मौसम विभाग ने आने वाले दो दिनों में तापमान में 2 से 3 डिग्री तक गिरावट का अनुमान जताया है। इससे पहले शनिवार को भी कई शहरों में तापमान में कमी दर्ज की गई। नर्मदापुरम में 1.5 डिग्री गिरावट के साथ पारा 38.5 डिग्री दर्ज किया गया, वहीं खंडवा में भी इतना ही तापमान रहा। रतलाम में 38.2 डिग्री, खरगोन में 38 डिग्री, बैतूल में 37.7 डिग्री, नरसिंहपुर और खजुराहो में 37.6 डिग्री, मंडला में 37.5 डिग्री, धार और सिवनी में 37.2 डिग्री तथा श्योपुर और सागर में 37 डिग्री दर्ज किया गया। बड़े शहरों की बात करें तो जबलपुर में अधिकतम तापमान 37.1 डिग्री, भोपाल में 36.2 डिग्री, इंदौर में 36.5 डिग्री, ग्वालियर में 35.3 डिग्री और उज्जैन में 36.5 डिग्री सेल्सियस रहा। मार्च में चौथी बार बदला मौसम प्रदेश में मार्च के दौरान मौसम बार-बार बदल रहा है। महीने की शुरुआत में तेज गर्मी रही, जबकि दूसरे पखवाड़े में बारिश और आंधी का दौर शुरू हो गया। एक दौर तो लगातार चार दिन तक चला, जिसमें 45 से ज्यादा जिलों में बारिश हुई और 17 जिलों में ओले गिरे। इससे गेहूं, पपीता और केले की फसलों को नुकसान हुआ। इसके बाद 26-27 मार्च को फिर मौसम बदला। 27 मार्च को सतना, रीवा, दतिया और भिंड में बारिश दर्ज की गई। अब रविवार, 29 मार्च से मौसम चौथी बार बदलने जा रहा है। अप्रैल-मई में पड़ेगी भीषण गर्मी मौसम विभाग के अनुमान के अनुसार अप्रैल और मई में गर्मी अपने चरम पर पहुंच सकती है। ग्वालियर, चंबल, जबलपुर, रीवा, शहडोल और सागर संभाग में तापमान 45 डिग्री सेल्सियस के पार जा सकता है। वहीं भोपाल, इंदौर, उज्जैन और नर्मदापुरम संभाग में भी तेज गर्मी पड़ेगी। 

राज्य मंत्री दिलीप जायसवाल ने कटकोना से ऊरा तक मार्ग का किया भूमि पूजन

राज्य मंत्री दिलीप जायसवाल ने कटकोना से ऊरा तक मार्ग का किया भूमि पूजन अनूपपुर   मध्य प्रदेश शासन में कुटीर एवं ग्रामोद्योग राज्य मंत्री (स्वतंत्र प्रभार) दिलीप जायसवाल ने आज जनपद पंचायत अनूपपुर के अंतर्गत ग्राम पंचायत ऊरा से कटकोना मार्ग के निर्माण कार्य का विधिवत भूमिपूजन किया। इस मार्ग की लंबाई लगभग 3.00 किलोमीटर है तथा इसके निर्माण पर 446 लाख रुपये की लागत व्यय की जाएगी। इस अवसर पर राज्य मंत्री दिलीप जायसवाल ने कहा कि ग्रामीण क्षेत्रों में सड़क संपर्क सुदृढ़ होने से आवागमन सुगम होगा तथा क्षेत्र के लोगों को विकास की नई सुविधाएँ प्राप्त होंगी। उन्होंने कहा कि प्रदेश सरकार ग्रामीण अधोसंरचना के विकास के लिए निरंतर प्रयासरत है और गांवों को बेहतर सड़क सुविधाओं से जोड़ना सरकार की प्राथमिकता है। इस अवसर पर जिला पंचायत सदस्य सुभारती केवट, रिंकू मिश्रा, कार्यपालन अभियंता लोक निर्माण विभाग प्रभात लोरिया, मुख्य कार्यपालन अधिकारी जनपद पंचायत अनूपपुर रवि ग्वाल, नायब तहसीलदार मिथिला प्रसाद पटेल सहित अन्य जनप्रतिनिधि, पत्रकारगण एवं ग्रामीण जन उपस्थित थे।

मध्यप्रदेश में 23 सालों में कर्मचारियों को महंगाई भत्ते में 15,345 करोड़ का घाटा, हुआ दावा

भोपाल  मध्यप्रदेश में पिछले 23 सालों में कर्मचारियों को महंगाई भत्ते (DA) के रूप में 15,345 करोड़ रुपए का नुकसान होने का दावा सामने आया है। आरोप है कि कांग्रेस और भाजपा दोनों ही दलों की सरकारों ने केंद्र सरकार की तारीख के अनुसार महंगाई भत्ता नहीं दिया, जिससे लाखों कर्मचारियों को आर्थिक नुकसान उठाना पड़ा। इस मुद्दे में पूर्व मुख्यमंत्रियों दिग्विजय सिंह, कमल नाथ, उमा भारती, बाबूलाल गौर और शिवराज सिंह चौहान के कार्यकाल को लेकर सवाल उठाए गए हैं। मामला सिर्फ कर्मचारियों तक सीमित नहीं है। पेंशनर्स और परिवार पेंशनधारकों को भी समय पर महंगाई राहत (DR) नहीं मिल रही। वर्तमान में मोहन यादव सरकार पर भी आरोप है कि पेंशनर्स को जनवरी 2026 से राहत दी गई, जबकि यह जुलाई 2025 से मिलनी चाहिए थी। पांचवें-छठवें वेतनमान में सबसे ज्यादा नुकसान बताया गया है कि पांचवें और छठवें वेतनमान के दौरान करीब 11,970 करोड़ रुपए का महंगाई भत्ता समय पर नहीं दिया गया। हालांकि भत्ता बाद में दिया गया, लेकिन केंद्र की तय तारीख से देरी के कारण कर्मचारियों को एरियर का पूरा लाभ नहीं मिल पाया। सातवें वेतनमान में 27 महीने का DA रोका सातवें वेतनमान में जुलाई 2019 से सितंबर 2021 तक 27 महीने का 5% महंगाई भत्ता नहीं दिया गया। इस अवधि में राज्य में पहले कमल नाथ की सरकार थी, बाद में शिवराज सिंह चौहान के नेतृत्व में भाजपा सरकार आई, लेकिन भत्ता जारी नहीं किया गया। इससे कर्मचारियों को करीब 3,375 करोड़ रुपए का नुकसान हुआ। दिग्विजय सरकार में 2 साल DA पूरी तरह बंद जनवरी 2002 से दिसंबर 2003 तक, जब दिग्विजय सिंह मुख्यमंत्री थे, उस दौरान करीब 24 महीने तक महंगाई भत्ता नहीं दिया गया। इससे कर्मचारियों को लगभग 1,260 करोड़ रुपए का नुकसान हुआ। भाजपा सरकार में भी देरी से मिला लाभ दिसंबर 2003 के बाद उमा भारती, बाबूलाल गौर और शिवराज सिंह चौहान के कार्यकाल में DA दिया गया, लेकिन केंद्र की दर और तारीख से नहीं। इससे छठवें वेतनमान में करीब 10,710 करोड़ रुपए का नुकसान बताया गया है। कर्मचारी संगठन का आरोप मप्र तृतीय वर्ग कर्मचारी संघ के प्रदेश महामंत्री उमाशंकर तिवारी के मुताबिक, “कांग्रेस और भाजपा—दोनों ही सरकारों ने केंद्र के बराबर समय पर DA नहीं दिया। इसका सीधा असर कर्मचारियों की जेब पर पड़ा है और लाखों रुपए का नुकसान हुआ है।”

मां बिरासिनी धाम बिलासपुर में ऐतिहासिक जवारा जुलूस निकाला गया

मां बिरासिनी धाम बिलासपुर में ऐतिहासिक जवारा जुलूस निकाला गया  उमरिया उमरिया जिले के बिलासपुर तहसील अंतर्गत मां बिरासिनी धाम बिलासपुर में हजारों की संख्या में भव्य जवारा जुलूस निकाला गया।जिसने पूरे गांव को आस्था और भक्ति के रंग में रंग दिया।यह आयोजन इस वर्ष ऐतिहासिक रूप में देखने को मिला।जहां श्रद्धा का जन सैलाब उमर पड़ा। जुलूस में शामिल हजारों जवारे ने सड़कों पर हरियाली की मानव चादर बिछा दी।गांव की गलियां जयकारों से गूंज उठी।और हर ओर भक्ति का अद्भुत माहौल नजर आया।दूर-दूर से आए श्रद्धालुओं ने इस भव्य दिव्य दृष्टि को देखने के लिए भारी संख्या में सहभागिता की। जवारा जुलूस मां बिरासिनी मंदिर से महामाया चौराहा बिलासपुर बस स्टैंड से होते हुए गांव की गलियों से होते हुए बखरी पहुंची।वही जगह-जगह पर नगर वासियों एवं भक्तों के द्वारा ठंडा पानी सरवत वितरण किया गया।अपने सिर पर जवारों को धारण किए बच्चे महिलाएं और युवा नंगे पांव पूरे गांव में घूमते नजर आए। जो आस्था और श्रद्धा का अद्भुत दृश्य प्रस्तुत कर रहा था। चैत्र नवरात्रि के नौ दिनों तक मां की उपासना एवं कन्या पूजन के पश्चात आज मां के दरबार में यह ऐतिहासिक जवारा जुलूस निकाला गया। मंदिर में लगभग 2200 जवारे कलश 151 अखंड ज्योत तेल की और 51 घी की दीपक से पूरा मंदिर परिसर जगमगाया हुआ था। जिससे पूरे गांव को भक्ति में बना दिया नंगे पैर चल रहे हैं श्रद्धालुओं को राहत देने के लिए ग्रामवासी अपने घरों के सामने पानी डालते हुए नजर आए। जिससे जुलूस में शामिल लोगों को ठंडक मिल सके।मां काली के नेतृत्व में निकाली गई अनेक भाव इस जुलूस का मुख्य आकर्षण रही।झांकियां की भव्यता और धार्मिक भावनाओं ने श्रद्धालुओं को भाव विभोर कर दिया।जिससे पूरा वातावरण भक्तिमय हो गया। जुलूस के दौरान श्रद्धालुओं का उत्साह चरम पर रहा। महिलाओं और बुजुर्गों सहित हर वर्ग के लोग ने बढ़ चढ़कर भाग लिया।और आस्था का अद्भुत परिचय दिया। सुरक्षा व्यवस्था को लेकर प्रशासन पूरी तरह सतर्क रही। चप्पे-चप्पे पर पुलिस बल तैनात किया गया था। जिससे पूरा आयोजन शांतिपूर्ण एवं सुव्यवस्थित ढंग से संपन्न हुआ।    

अखिल भारतीय पुजारी महासंघ का पीएम को पत्र, अखाड़ों की परंपरा समाप्त करने की मांग

उज्जैन सनातन हिन्दू धर्म की रक्षा के लिए आद्य शंकराचार्य ने ढाई हजार साल पहले अखाड़ों की स्थापना की थी। तब से लेकर आज तक तेरह अखाड़े अस्तित्व में है, जिन्हें धर्म की सेना कहा जाता है। हालांकि साधु संत अब धर्म से विलग होकर पद,प्रतिष्ठा व ऐश्वर्य की अंधी दौड़ में लग गए हैं। वैसे भी देश व धर्म की रक्षा के लिए भारतीय सेनाएं हैं, ऐसे में अखाड़ों की परंपरा को समाप्त कर दिया जाना चाहिए। अखिल भारतीय पुजारी महासंघ के राष्ट्रीय अध्यक्ष पं.महेश पुजारी ने यह बात प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी को लिखे पत्र में कही है। आगे लिखा हमारे सनातन धर्म में ऋषि, मुनि परंपरा रही है ना कि अखाड़ों की परंपरा। शंकराचार्य ने जब अखाड़ों की स्थापना की थी उस समय देश की परिस्थितयां अलग थी। वर्तमान में देश, धर्म एवं सनातन की रक्षा के लिए भारतीय सेना है ही। पद के लिए हो रही लड़ाई वर्तमान में अखाड़े जप, तप, अनुष्ठान की बजाय व्यवसायिक केंद्र बन चुके हैं और साधु समाज ऐश्वर्य की ज़िंदगी व्यतीत कर पद और प्रतिष्ठा के लिए लड़ रहा है। आए दिन साधु संतों के बीच विवाद के मामले सार्वजनिक हो रहे हैं। यदि साधु समाज आपस में पद, प्रतिष्ठा,संपत्ति के लिए लड़ेंगे तो सनातन धर्म की रक्षा कौन करेगा। साधु संतों ने धर्म मार्ग छोड़ दिया यह देखकर आम हिन्दू धर्मावलंबी व्यथित है, इसलिए अब अखाड़ों की परंपरा को समाप्त कर देना चाहिए।  

श्रीधाम एक्सप्रेस को एलएचबी रैक से मिलेगा नया रिवamp, स्पीड बढ़ने के साथ यात्रियों को मिलेगी और सुविधा

जबलपुर  जबलपुर-हजरत निजामुद्दीन के बीच संचालित होने वाली श्रीधाम एक्सप्रेस की यात्रा जल्द ही और आरामदायक बनेगी। ट्रेन को 30 मई से लिंक हाफमैन बुश (एलएचबी) रैक से दौड़ाने का निर्णय किया गया है। एलएचबी कोच पारंपरिक (आईसीएफ) कोचों की तुलना में अधिक सुविधाजनक एवं सुरक्षित होते हैं। ये वजन में भी हल्के होते हैं। उच्च गति पर संचालन की क्षमता होती है। एलएचबी कोच की नई संरचना और स्वरूप यात्रियों को अधिक सुखद और सुविधाजनक यात्रा अनुभव प्रदान करते हैं। नए रेक से ट्रेन की गति औसतन 20 किलोमीटर प्रतिघंटा तक बढ़ेगी। चाल में वृद्धि की संभावना को ध्यान में रखकर ट्रेन को दिल्ली पहुंचाने की भी मंशा है। दिल्ली पहुंचाने में लेती है सबसे ज्यादा समय जबलपुर-हजरत निजामुद्दीन के बीच एक साप्ताहिक और चार ट्रेन प्रतिदिन संचालित होती हैं। इनमें दिल्ली पहुंचाने में सबसे ज्यादा समय (लगभग 18.30 घंटा) श्रीधाम एक्सप्रेस लेती है। यह ट्रेन इटारसी-भोपाल-बीना के रास्ते संचालित होने के कारण कटनी-सागर-बीना मार्ग के अपेक्षाकृत लगभग 130 किलोमीटर अतिरिक्त दूरी तय करती है। जबलपुर से दिल्ली के बीच सीधे चलने वाली अन्य ट्रेनों के अपेक्षाकृत यात्रा में औसतन साढ़े पांच से साढ़े छह घंटे का अतिरिक्त समय लगाती है। जिसके चलते ट्रेन दोपहर में दिल्ली पहुंचती है। सुपरफास्ट धीमी चाल यात्रियों को परेशान करती है। अब 22 कोच होंगे, स्लीपर के दो कोच घटेंगे श्रीधाम एक्सप्रेस (12192/91) का संचालन पश्चिम मध्य रेल करता है। वर्तमान में ट्रेन का 24 कोच का आइसीएफ रैक है। इसे एलएचबी रैक से परिवर्तित करने के साथ ही ट्रेन का कोच कांबिनेशन बदल जाएगा। थर्ड एसी के एक कोच की एसी इकोनामी कोच लेगा। दो स्लीपर कोच भी कम होंगे। 22 कोच के एलएचबी रेक में एक वातानुकूलित प्रथम श्रेणी, दो वातानुकूलित द्वितीय, पांच वातानुकूलित तृतीय, एक वातानुकूलित तृतीय इकोनॉमी, सात स्लीपर, चार सामान्य श्रेणी के कोच, एक एसएलआरडी एवं एक जनरेटर कार रहेंगे।

MP वित्त विभाग की नई गाइडलाइन: बाबू और अफसर को 10 दिन में फाइलें निपटाने का आदेश

भोपाल  मुख्यमंत्री और मंत्रियों द्वारा समय-समय पर जो घोषणाएं की जाती हैं या मुख्यमंत्री या मुख्य सचिव मानिट (समयसीमा) के जो मामले होते हैं, उन सभी से जुड़ी फाइलें वित्त विभाग में कोई भी अधिकारी एक समयसीमा से अधिक रोककर नहीं रख सकेगा। अधिकतम दस दिनों में फाइलों का निपटारा करके आगे बढ़ानी होंगी। इसके लिए वित्त विभाग ने अपने अधिकारियों-कर्मचारियों के लिए मार्गदर्शिका तैयार की है। इसमें सबके दायित्व को स्पष्ट किया गया है ताकि किसी भी स्तर पर कोई असमंजस की स्थिति ना रहे। विभागीय अधिकारियों के अनुसार मुख्यमंत्री, सांसद, विधायक, केंद्रीय मंत्री सहित विशेष व्यक्तियों से प्राप्त होने वाले पत्रों को तुरंत कार्रवाई करना होगा। इसका रिकॉर्ड भी तैयार किया जाएगा। कैबिनेट की बैठक में रखे जाने वाले विषयों की संक्षेपिका तैयार करना, विभागीय अभिमत समय पर देना, विभिन्न आयोगों से प्राप्त होने वाले प्रतिवेदन व अनुशंसाओं पर कार्रवाई सुनिश्चित करने, समितियों की बैठक समय पर संपन्न करवाना, अवकाश, पेंशन, सामान्य भविष्य निधि से जुड़े मामलों का समयावधि में प्रस्तुतीकरण सुनिश्चित करवाना अपर सचिव और उपसचिव का दायित्व होगा। इसके साथ ही फाइलों के निपटारे की समय सीमा भी स्पष्ट कर दी गई है। इसमें मंत्री परिषद को भेजे जाने वाले प्रकरण, नई योजना के करणप्रकरण में 10 दिन, चिकित्सा की प्रतिपूर्ति के मामलों में अधिकतम पांच दिन, बजट राशि से संबंधित प्रतिबंध में पांच दिन, आहरण सीमा बीस प्रतिशत की कटौती, विदेश यात्रा की अनुमति की फाइल पांच दिन, मंत्री से जुड़ी नस्ती और अनुपूरक बजट के प्रस्ताव की फाइल को तीन दिन में आगे बढ़ाना होगा। मनमाना पर्यवेक्षण शुल्क नहीं ले सकेंगे वहीं, वित्त विभाग में निर्माण कार्यों पर लिए जाने वाले पर्यवेक्षण शुल्क को लेकर भी नई व्यवस्था बना दी है, जो एक अप्रैल 2026 से प्रभावी होगी। 10 करोड़ रुपये से कम लागत वाले निर्माण कार्य की एजेंसी विभाग है तो तकनीकी स्वीकृति पर पर्यवेक्षण शुल्क शून्य रहेगा। जबकि, निर्माण एजेंसी शासन की कोई संस्था है तो यह एक प्रतिशत रहेगा। 10 करोड रुपये से अधिक के निर्माण कार्य में एजेंसी शासन होने पर पर्यवेक्षण शुल्क तीन प्रतिशत और अन्य संस्था होने पर छह प्रतिशत की दर से लिया जाएगा।

एमपी में सख्त कार्रवाई का दौर, 8 कलेक्टर और 7 एसपी निलंबित, सीएम ने लापरवाह अफसरों पर की कार्रवाई

भोपाल  मुख्यमंत्री मोहन यादव की सख्त प्रशासनिक शैली के चलते सवा दो साल में आठ कलेक्टर और सात एसपी को पद से हटाया। उनकी कार्रवाई का में तीन बड़े फैक्टर उभरकर सामने आए हैं। इसमें कानून-व्यवस्था में चूक, भ्रष्टाचार/रिश्वत और प्रशासनिक लापरवाही शामिल हैं। प्रशासनिक लापरवाही सीएम को बिलकुल पसंद नहीं है, इसलिए ऐसे अफसरों पर तुरंत कार्रवाई की गई। यहीं नहीं सीएम ने जनता से बदसलूकी, भ्रष्टाचार के मामले सामने आते ही तुरंत एक्शन लिया है। इसके माध्यम से सीएम ने कड़ा संदेश देने की कोशिश की हैं।  प्रशासनिक ढिलाई पर सख्त एक्शन के कुछ मामले मुख्यमंत्री के एक्शन के सबसे ज्यादा मामले ऐसे रहे, जहां प्रशासनिक लापरवाही या जिम्मेदारी निभाने में ढिलाई सामने आई। हाल ही में सीधी कलेक्टर स्वरोचिष सोमवंशी पर दफ्तर में नियमित नहीं बैठने और जनसमस्याओं की अनदेखी के आरोप लगे, जिसके बाद उन्हें हटा दिया गया।  वहीं, अगस्त 2024 में सागर दीवार हादसे में 9 बच्चे की मौत के बाद कलेक्टर दीपक आर्य, एसपी अभिषेक तिवारी और एसडीएम संदीप सिंह को हटाया गया। जनवरी 2026 में इंदौर के भागीरथपुरा में दूषित पानी कांड में निगमायुक्त दिलीप यादव और अपर आयुक्त रोहित सोनिया को हटाया गया। दिसंबर 2023 गुना बस हादसे में 13 लोगों की मौत के बाद कलेक्टर तरुण राठी, एसपी विजय कुमार खत्री और परिवहन आयुक्त संजय कुमार झा पर कार्रवाई हुई। दिसंबर 2023 में ही हरदा पटाखा फैक्ट्री ब्लॉस्ट मामले में एसपी संजीव कुमार कंचन और कलेक्टर ऋषि गर्ग को हटाया गया। उक्त  मामलों से पता चलता है कि लापरवाही से जुड़ी घटनाओं और मामलों में मोहन सरकार ने सबसे अधिक कड़ा रुख अपनाया और कार्रवाई की। जिन मामलों में जनहानि हुई, उनमें तो संबंधित अधिकारियों को बिलकुल नहीं बख्शा गया।  हिंसा होने या कानून-व्यवस्था बिगड़ने पर भी नपे राज्य में जिन मामलों में कानून-व्यवस्था बिगड़ी या हिंसक घटनाएं हुईं, वहां सबसे तेज और कड़ी कार्रवाई देखने को मिली। मार्च 2025 में मऊगंज के गड़रा हत्याकांड विवाद के दौरान युवक सनी द्विवेदी की हत्या और पुलिस टीम पर हमले में एएसआई रामगोविंद गौतम की मौत के बाद कलेक्टर अजय श्रीवास्तव और एसपी रसना ठाकुर को हटा दिया गया। इसी तरह जून 2024 में सिवनी में 50 से अधिक गोवंश की हत्या के बाद तनावपूर्ण हालात बने। इसके बाद कलेक्टर क्षितिज सिंघल और एसपी राकेश कुमार सिंह पर भी कार्रवाई हुई। इससे साफ है कि जहां भी कानून व्यवस्था बिगड़ी और जनसभावनाएं प्रभावित हुई, वहां सीधे शीर्ष अधिकारियों पर गाज गिरी।   भ्रष्टाचार पर जीरो टॉलरेंस की झलक दिखी भ्रष्टाचार से जुड़े मामलों में भी सरकार का रुख सबसे सख्त नजर आया है, जहां सीधे अधिकारियों को हटाने की कार्रवाई की गई। इसी माह गुना के हवाला रिश्वत कांड में गुजरात के व्यापारी से एक करोड़ रुपये जब्त करने के बाद 20 लाख रुपये लेकर छोड़ देने के आरोप में एसपी अंकित सोनी को हटा दिया गया। वहीं, थाना प्रभारी समेत चार पुलिसकर्मी भी सस्पेंड हुए। जनवरी 2026 अशोकनगर के आनंदपुर साहिब ट्रस्ट मामले में रिश्वत के आरोपों के चलते कलेक्टर आदित्य सिंह को पद से हटाया गया। यह कार्रवाई बिना किसी औपचारिक शिकायत के आधार पर की गई। भ्रष्टाचार के मामलों में सरकार ने बिना किसी जांच के त्वरित और कड़ा फैसला लिया। विवादित मामलों में भी अफसरों पर गाज गिरी प्रदेश में अधिकारियों के व्यवहार और व्यक्तिगत विवाद भी कार्रवाई के कारण बने और उन्हें पदों से हटाया गया। इससे पता चलता है कि सार्वजनिक व्यवहार और छवि भी अब प्रशासनिक जिम्मेदारी का हिस्सा मानी जा रही हैं। शाजापुर कलेक्टर किशोर कान्याल को उनकाे एक बैठक में ड्राइवर से औकात पूछने वाला वीडियो वायरल होने के बाद हटाया गया।  जून 2025 कटनी एसपी अभिजीत रंजन को सीएसपी और उनके परिवार की शिकायतों के बाद पुलिस मुख्यालय अटैच किया गया। भाजपा विधायक नरेंद्र सिंह कुशवाह से हुए सार्वजनिक विवाद के बाद सितंबर 2025 में भिंड कलेक्टर संजीव श्रीवास्तव को हटा दिया गया। 

मां शारदा मंदिर मैहर: 9 दिनों में 10 लाख भक्तों ने किए दर्शन, चौथे दिन रही भीड़ सबसे ज्यादा

 मैहर चैत्र नवरात्रि के पावन अवसर पर मां शारदा धाम में इस वर्ष आस्था का अभूतपूर्व जनसैलाब देखने को मिला। नवरात्रि के पहले दिन से लेकर महानवमी तक नौ दिनों में देशभर से लगभग 10 लाख श्रद्धालुओं ने माता के दरबार में शीश नवाकर आशीर्वाद प्राप्त किया। मंदिर परिसर में भक्तों की सबसे ज्यादा भीड़ चौथे दिन रही।  किस दिन कितने भक्त मंदिर पहुंचे:      पहले दिन: करीब 90 हजार श्रद्धालु     दूसरे दिन: 85 हजार     तीसरे दिन: 1 लाख 30 हजार से अधिक     चौथे दिन: 1 लाख 53 हजार 505     पांचवें दिन: 1 लाख 35 हजार 991     छठे दिन: 78 हजार 838     सातवें दिन: 1 लाख 11 हजार 689     आठवें दिन: 92 हजार 324     नवमी (महानवमी): 97 हजार 202 नवरात्रि मेले के दौरान सुरक्षा के व्यापक इंतजाम किए गए थे। सुरक्षा के लिए  2 एडिशनल एसपी, 8 डीएसपी, 10 इंस्पेक्टर, 15 सब-इंस्पेक्टर और लगभग 560 पुलिस जवान पूरे मेला क्षेत्र में तैनात रहे। 125 सीसीटीवी कैमरे लगाए गए और 2 ड्रोन के माध्यम से भीड़ और गतिविधियों पर निगरानी रखी गई। 16 कार्यपालिक मजिस्ट्रेट तैनात किए गए और कई मेडिकल टीमें सक्रिय रहीं, ताकि किसी भी आपात स्थिति में तत्काल उपचार की व्यवस्था हो सके। मंदिर में  19 से 27 मार्च तक वीआईपी दर्शन पर पूर्ण प्रतिबंध लगाया, जिससे आम श्रद्धालुओं को बिना भेदभाव के दर्शन का अवसर मिल सका।