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लोकायुक्त रिपोर्ट: 4 साल में हजारों मामले, कई भ्रष्ट अधिकारी-कर्मचारी जांच के दायरे में

भोपाल  लोकायुक्त में बीते चार वर्षों में मध्यप्रदेश के 1379 अधिकारी-कर्मचारियों के विरुद्ध जांचें चल रही हैं। जांच के दायरे में आए मामलों में 20.97 करोड़ रुपए की वसूली किए जाने के बावजूद 134 प्रकरण अभियोजन स्वीकृति में लंबित हैं। वहीं 39 प्रकरणों में चालानी कार्रवाई की गई है और 208 प्रकरणों में न्यायालय में चालान पेश किए जा चुके हैं। यह जानकारी कांग्रेस विधायक भंवर सिंह शेखावत के सवाल के लिखित जवाब में मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने दी। उन्होंने बताया कि लोकायुक्त संगठन में वर्ष 2022-23 से अब तक 1884 शिकायतें दर्ज हुई हैं, जबकि विशेष पुलिस स्थापना में 1063 आपराधिक प्रकरण पंजीबद्ध किए हैं। इन मामलों में शिकायत एवं जांच शाखा तथा तकनीकी शाखा द्वारा इसी अवधि में 1592 जांच पूरी कर प्रकरणों का निराकरण किया है। वर्तमान में शिकायत एवं जांच शाखा में 1291 तथा तकनीकी शाखा में 88, कुल 1379 प्रकरण जांच के दायरे में हैं। 134 केस अभियोजन स्वीकृति में लंबित लोकायुक्त संगठन की विशेष पुलिस स्थापना द्वारा पंजीबद्ध 1063 आपराधिक प्रकरणों में से 393 प्रकरणों की विवेचना पूरी की जा चुकी है। इनमें 134 प्रकरण अभियोजन स्वीकृति में लंबित हैं। वहीं 39 प्रकरणों में चालानी कार्रवाई की गई है और 208 प्रकरणों में न्यायालय में चालान पेश किए हैं। इसके अतिरिक्त 12 प्रकरणों में न्यायालय में खात्मा पेश किया है, जिनमें आरोपी की मृत्यु अथवा प्रकरण के उन्मोचित होने का आधार रहा। शेष 670 प्रकरण वर्तमान में विवेचनाधीन हैं। 153 मामलों में अनुशासनात्मक कार्रवाई जवाब में यह भी बताया गया कि कुल जांच किए गए मामलों में शिकायत एवं जांच शाखा के 146 तथा तकनीकी शाखा के 7, कुल 153 प्रकरणों में अनुशासनात्मक कार्रवाई की गई है। साथ ही शिकायत एवं जांच के आधार पर 20 करोड़ 97 लाख 17 हजार 905 रुपए की वसूली की गई है। लोकायुक्त संगठन की विशेष पुलिस स्थापना द्वारा न्यायालय में पेश किए गए 208 चालानों में से 7 प्रकरणों में आरोपियों के विरुद्ध दोष सिद्ध हुआ है। इन मामलों में संबंधित आरोपियों के खिलाफ सामान्य प्रशासन विभाग के परिपत्र क्रमांक C-6-2/98/3/1 दिनांक 26 मई 1998 के अनुसार अनुशासनात्मक कार्रवाई करने के निर्देश दिए हैं। कांग्रेस विधायक ने पूछा था यह सवाल कांग्रेस विधायक भंवर सिंह शेखावत ने विधानसभा के माध्यम से राज्य सरकार से पूछा था कि वर्ष 2022-23 से वर्तमान तक लोकायुक्त संगठन में कुल कितने प्रकरण प्राप्त हुए, कितने प्रकरणों का निराकरण किया गया और कितने वर्तमान में लंबित हैं। साथ ही कितने प्रकरणों में दोष सिद्ध हुआ, उनके विरुद्ध क्या कार्रवाई प्रस्तावित की गई तथा लंबित प्रकरणों के शीघ्र निराकरण के लिए शासन द्वारा क्या कार्ययोजना और समय-सीमा निर्धारित की गई है।

दो साल में 128 प्रोजेक्ट पूरे करने का टारगेट, सिंहस्थ तैयारी में खर्च होंगे 3,000 करोड़

उज्जैन  प्रदेश सरकार ने आगामी सिंहस्थ महापर्व को भव्य, सुरक्षित और सुव्यवस्थित बनाने के उद्देश्य से बजट में बड़े पैमाने पर वित्तीय प्रावधान किए हैं। मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव के नेतृत्व में सिंहस्थ क्षेत्र के समग्र विकास और आधारभूत संरचना को मजबूत करने के लिए कुल 13 हजार 851 करोड़ रुपये के विभिन्न कार्य स्वीकृत किए गए हैं। ये राशि पिछले बजट की तुलना में 1055 करोड़ रुपए ज्यादा है। अब तक सरकार सिंहस्थ के लिए 5570 करोड़ रुपए का बजटीय प्रावधान कर चुकी है।वित्त मंत्री जगदीश देवड़ा ने अपने बजट भाषण में जिक्र किया कि सिंहस्थ के लिए पहले से ही 13 हजार 851 करोड़ के काम स्वीकृत किए जा चुके हैं। अलग-अलग विभागों के काम चल भी रहे हैं। वित्त मंत्री के दावों के उलट सरकार के ही आर्थिक सर्वेक्षण में बताया गया है कि घाटों की मरम्मत, पुल, सड़कों के अपग्रेडेशन का काम अभी भी पूरा नहीं हुआ है।आयोजन के लिए बनी कैबिनेट सब कमेटी अब तक 10 विभिन्न विभागों के 128 प्रोजेक्ट्स को मंजूरी दे चुकी है, जिनकी कुल अनुमानित लागत ₹13,752 करोड़ है। इनमें सबसे ज्यादा 42 प्रोजेक्ट नगरीय विकास एवं आवास विभाग के जिम्मे हैं। जिनमें 33 प्रोजेक्ट पर ही काम शुरू हुआ है। इन परियोजनाओं का मुख्य फोकस यातायात व्यवस्था को सुगम बनाना, श्रद्धालुओं की आवाजाही को सुरक्षित करना और शहर की कनेक्टिविटी को बेहतर करना है। स्वीकृत कार्यों में 1,164 करोड़ रुपये की लागत से इंदौर-उज्जैन मार्ग का सिक्स लेन चौड़ीकरण, 1,370 करोड़ रुपये की अनुमानित लागत से इंदौर-उज्जैन ग्रीनफील्ड हाईवे का निर्माण तथा 701 करोड़ रुपये की लागत से उज्जैन बायपास मार्ग का विकास शामिल हैं। इन परियोजनाओं के पूर्ण होने से सिंहस्थ के दौरान लाखों श्रद्धालुओं की आवाजाही में सुविधा होगी और ट्रैफिक दबाव कम होगा। वित्तीय वर्ष 2026-27 के लिए इन कार्यों हेतु 3 हजार 60 करोड़ रुपये का प्रावधान प्रस्तावित किया गया है, जिससे निर्माण कार्यों को गति मिल सके। सरकार का लक्ष्य है कि सिंहस्थ महापर्व के दौरान देश-विदेश से आने वाले श्रद्धालुओं को बेहतर सड़क नेटवर्क, सुगम परिवहन, सुव्यवस्थित प्रवेश मार्ग और सुरक्षित आवागमन की सुविधा उपलब्ध कराई जा सके। सरकार का मानना है कि इन आधारभूत परियोजनाओं से न केवल सिंहस्थ की व्यवस्थाएं सुदृढ़ होंगी, बल्कि उज्जैन और आसपास के क्षेत्रों के दीर्घकालीन शहरी विकास को भी नई दिशा मिलेगी।  समय कम, काम ज्यादा- 26 प्रोजेक्ट अभी कागजों में सिंहस्थ 2028 के शुरू होने में अब महज दो साल का वक्त बचा है, लेकिन स्वीकृत 128 प्रोजेक्ट्स में से केवल 102 पर ही काम शुरू हो पाया है। इसका मतलब है कि 26 महत्वपूर्ण प्रोजेक्ट अभी भी फाइलों में ही अटके हैं। इन लंबित योजनाओं में सड़कें चौड़ी करने, नए पुलों का निर्माण, घाटों का विस्तार, ट्रैफिक व्यवस्था में सुधार, श्रद्धालुओं के लिए आवास जैसे प्रोजेक्ट हैं। साथ ही पेयजल और सीवरेज लाइनों जैसी मूलभूत सुविधाओं का काम भी अभी पूरा नहीं हुआ है। योजनाएं जितनी बड़ी और महत्वपूर्ण हैं, उन्हें पूरा करने के लिए समय उतना ही कम बचा है, जो प्रशासनिक मशीनरी के लिए एक बड़ी चुनौती बन गया है। हाल ही में मुख्य सचिव अनुराग जैन की अध्यक्षता में हुई विभागीय समीक्षा बैठक में यह बात सामने आई कि प्रदेश में पूंजीगत व्यय की सर्वाधिक 2300 करोड़ रुपए की राशि सिंहस्थ मद में ही बची हुई है, जिसे जल्द से जल्द खर्च करने की आवश्यकता है। नगरीय विकास एवं आवास विभाग पर सिंहस्थ की तैयारियों का सबसे बड़ा जिम्मा है। नगरीय विकास विभाग, जिस पर सिंहस्थ की तैयारियों का सबसे बड़ा जिम्मा है, को 2760 करोड़ रुपए की लागत वाले 42 प्रोजेक्ट पूरे करने हैं। लेकिन विभाग अब तक केवल 33 प्रोजेक्ट ही धरातल पर उतार पाया है। शिप्रा का शुद्धिकरण: सरकार की सबसे बड़ी चुनौती सिंहस्थ की आत्मा शिप्रा नदी के पवित्र जल में स्नान से जुड़ी है, और सरकार के लिए सबसे बड़ी चुनौती करोड़ों श्रद्धालुओं को स्वच्छ और निर्मल जल उपलब्ध कराना है। जल संसाधन विभाग इस दिशा में पांच बड़े प्रोजेक्ट्स पर काम कर रहा है, लेकिन उनकी प्रगति की रफ्तार चिंताजनक है।     कान्ह डायवर्शन क्लोज डक्ट: इंदौर से आने वाले कान्ह नदी के प्रदूषित पानी को शिप्रा में मिलने से रोकने के लिए यह ₹914 करोड़ की सबसे महत्वपूर्ण परियोजना है। सितंबर 2027 की डेडलाइन वाले इस प्रोजेक्ट का काम अब तक केवल 52% ही पूरा हो पाया है।     बैराज निर्माण: शिप्रा और कान्ह नदी पर पानी के बहाव को नियंत्रित करने के लिए बैराज बनाए जा रहे हैं। इंदौर में काम 75% पूरा हो चुका है, लेकिन उज्जैन में यह केवल 20% और देवास में महज 5% ही हुआ है।     शिप्रा को प्रवाहमान बनाना: सेवरखेड़ी-सिलारखेड़ी प्रोजेक्ट के तहत ₹614.53 करोड़ की लागत से शिप्रा को प्रवाहमान बनाने का काम चल रहा है, जो अभी 62% ही पूरा हुआ है।     घाट निर्माण: शिप्रा के दोनों ओर 30 किलोमीटर के क्षेत्र में ₹776 करोड़ की लागत से घाटों का निर्माण होना है, लेकिन यह काम अभी केवल 20% ही आगे बढ़ा है।     शिप्रा पर अतिरिक्त बैराज: उज्जैन और देवास जिले में शिप्रा पर बनने वाले अन्य बैराजों का काम भी केवल 15% ही हुआ है, जबकि इनकी डेडलाइन नवंबर 2027 है।     मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने हाल ही में इन प्रोजेक्ट्स की समीक्षा कर काम में तेजी लाने के सख्त निर्देश दिए हैं। केंद्र से मदद की उम्मीद इस महा-आयोजन के वित्तीय बोझ को कम करने के लिए राज्य सरकार पिछले तीन साल से केंद्र से मदद की गुहार लगा रही है। हालांकि केंद्रीय बजट में सीधे तौर पर कोई घोषणा नहीं हुई, लेकिन राज्य सरकार को उम्मीद है कि केंद्र से किस्तों में 6,000 से 7,000 करोड़ रुपए की राशि प्राप्त होगी।

वर्षा और ओलावृष्टि से प्रभावित किसानों के हित में तत्पर है सरकार: कृषि मंत्री कंषाना

वर्षा एवं ओलावृष्टि से प्रभावित किसानों के हित में तत्पर है राज्य सरकार : कृषि मंत्री  कंषाना भोपाल किसान कल्याण एवं कृषि विकास मंत्री  एदल सिंह कंषाना ने कहा है कि राज्य सरकार किसानों के हितों की रक्षा के लिए पूर्ण रूप से प्रतिबद्ध है और हर परिस्थिति में किसानों के साथ मजबूती से खड़ी है। हाल ही में प्रदेश के विभिन्न क्षेत्रों में हुई वर्षा एवं ओलावृष्टि से प्रभावित फसलों के नुकसान की राहत राशि देने के लिए गंभीरता से कार्य किया जाएगा। कृषि मंत्री  कंषाना ने कहा कि जिन-जिन जिलों में वर्षा और ओलावृष्टि की घटनाएं सामने आई हैं, वहां तत्काल प्रभाव से जांच के आदेश दे दिए गए हैं। उन्होंने अधिकारियों को निर्देशित किया है कि सर्वे कार्य पारदर्शिता और संवेदनशीलता के साथ शीघ्र पूर्ण किया जाए, ताकि प्रभावित किसानों को राहत राशि का भुगतान समय पर किया जा सके। मंत्री  कंषाना ने आश्वासन दिया कि किसी भी किसान को नुकसान की स्थिति में अकेला नहीं छोड़ा जाएगा और राज्य सरकार हर संभव सहायता प्रदान करेगी। कृषि मंत्री  कंषाना ने किसानों से अपील की है कि वे धैर्य बनाए रखें तथा स्थानीय प्रशासन के साथ सहयोग करें। सरकार की प्राथमिकता है कि किसानों को शीघ्र राहत प्रदान कर उनकी आर्थिक स्थिति को सुदृढ़ किया जाए। उन्होंने कहा कि राज्य सरकार किसानों के हित में निरंतर कार्य कर रही है और भविष्य में भी किसान कल्याण के लिए हर आवश्यक कदम उठाएगी।  

स्वास्थ्य व्यवस्था पर सवाल: MYH अस्पताल की HIV यूनिट तक पहुंचीं बिल्लियां

इंदौर महाराजा यशवंतराव अस्पताल (एमवायएच) में एक बार फिर लापरवाही का बड़ा मामला सामने आया है। इस बार एचआइवी संक्रमित मरीजों की यूनिट और दवा कक्ष तक बिल्लियों की पहुंच देखी गई। इतना ही नहीं, अस्पताल के ओपीडी परिसर में एक बिल्ली ने तीन बच्चों को जन्म भी दिया। यह मामला ऐसे समय में सामने आया है जब करीब छह महीने पहले इसी अस्पताल के नवजात वार्ड में चूहों द्वारा दो नवजातों को कुतरने से उनकी मौत हो गई थी। ओपीडी में बिल्ली ने दिए तीन बच्चे अस्पताल के बाह्य रोगी विभाग (ओपीडी) में एक बिल्ली ने तीन बच्चों को जन्म दिया। इसके बाद ओपीडी और आसपास के हिस्सों में बिल्लियों की आवाजाही लगातार देखी गई। अस्पताल प्रबंधन ने तीन में से दो बच्चों को रेस्क्यू कर लिया है, जबकि तीसरे को पकड़ने की कार्रवाई जारी है। एचआईवी दवा कक्ष तक पहुंचीं बिल्लियां जानकारी के अनुसार एचआईवी संक्रमित मरीजों को हर महीने मुफ्त दवाएं देने वाले दवा कक्ष में भी बिल्लियों के घूमने और गंदगी फैलाने की शिकायत मिली है। इसी कक्ष में नवजात शिशुओं को दी जाने वाली सेप्ट्रोन दवाएं भी रखी जाती हैं। इससे संक्रमण नियंत्रण और स्वच्छता व्यवस्था पर सवाल खड़े हो गए हैं। एआरटी केंद्र के कर्मचारी करते मिले देखभाल अस्पताल के एआरटी (एंटीरेट्रोवायरल थेरेपी) एकीकृत परामर्श केंद्र के कुछ कर्मचारी बिल्लियों की देखभाल करते नजर आए। इससे दवा कक्ष की सुरक्षा व्यवस्था को लेकर गंभीर चिंताएं जताई जा रही हैं। पुरानी घटनाओं से नहीं लिया सबक करीब छह महीने पहले अस्पताल के नवजात वार्ड में चूहों ने दो बच्चों को कुतर दिया था, जिससे उनकी मौत हो गई थी। उस घटना के बाद भी अस्पताल परिसर में जानवरों की समस्या पूरी तरह खत्म नहीं हो सकी है। लगातार सामने आ रही घटनाओं ने अस्पताल की स्वच्छता और प्रबंधन व्यवस्था पर एक बार फिर सवाल खड़े कर दिए हैं। प्रबंधन की कार्रवाई और जुर्माना मामले संज्ञान में आते ही हाउसकीपिंग कंपनी को परिसर खाली कराने और बिल्लियों को पकड़ने के लिए पिंजरे लगाने के निर्देश दिए गए हैं। एमजीएम डीन डा. अरविंद घनघोरिया ने कहा कि इस मामले में जीरो टालरेंस की नीति अपना रहे हैं। ओपीडी दोपहर दो बजे के बाद बंद हो जाती है, इसलिए संक्रमण का खतरा नहीं है। साथ ही पेस्ट और एनिमल कंट्रोल एजेंसी की जवाबदेही भी तय की जाएगी। कंपनी पर 25 हजार रुपये का जुर्माना लगाया गया है।

अपराधियों तक पहुंची देवास पुलिस, साहस और सूझबूझ की अद्भुत कहानी

देवास कहा जाता है कि पुलिस के हाथ बहुत लम्बे होते हैं। इस कहावत को देवास पुलिस ने चरितार्थ कर दिखाया है। जनवरी में हुई दो लूट की वारदातों के आरोपितों को पुलिस ने देश के पूर्वी तट उड़ीसा और पश्चिमी तट गुजरात से पकड़ा है। आरोपितों से लूट का पूरा माल भी बरामद किया गया और वाहनों को भी जब्त किया गया है। जनवरी महीने में शहर की सर्द शामें यूं तो सामान्य थीं लेकिन 8 जनवरी की शाम राधागंज क्षेत्र में एक वारदात ने माहौल गर्मा दिया। यहां एक बुजुर्ग महिला अपने पोते को स्कूल से लेकर घर जा रही थीं, तभी दो बाइक सवारों ने उनकी चेन लूट ली और पलक झपकते ही ओझल हो गए। घटना के कुछ ही दिन बाद 19 जनवरी को मंदिर जा रहीं उषा नवरंगे भी इसी अंदाज में लुटेरों का शिकार बन गईं। कुछ ही दिनों के अंतर में एक ही तरीके से हुई दो घटनाओं ने पूरे क्षेत्र में दहशत का माहौल बना दिया। पहली घटना राधागंज निवासी रुकमणी शर्मा के साथ और दूसरी घटना उषा नवरंगे के साथ हुई थी। दोनों बुजुर्ग महिलाओं को बीएनपी थाना क्षेत्र के राधागंज में मोटरसाइकिल सवार बदमाशों का शिकार बनी। बदमाशों ने उनके गले से सोने की चेन झपट ली और भाग निकले। मामले की गंभीरता को देखते हुए पुलिस अधीक्षक पुनीत गेहलोद ने इसे प्रतिष्ठा का प्रश्न मान लिया। उन्होंने साफ शब्दों में निर्देश दिए कि चेन लूटने करने वाले आरोपितों को हर हाल में गिरफ्तार किया जाए और महिलाओं में भरोसा लौटाया जाए। एसपी ने स्वयं मानिटरिंग शुरू की, रोजाना प्रगति की समीक्षा की और तकनीकी तथा फील्ड दोनों स्तर पर समंवय बढ़ाया। एएसपी जयवीरसिंह भदौरिया और डीएसपी संजय शर्मा के मार्गदर्शन में चार टीमें गठित की गईं। शहर में जनसहयोग से लगे सैकड़ों सीसीटीवी कैमरों की फुटेज खंगालना शुरू हुआ। करीब 800 से अधिक कैमरों की रिकार्डिंग देखी गई। दिन-रात एक कर पुलिसकर्मी स्क्रीन पर नजरें गड़ाए रहे। मोटरसाइकिल का रूट, संदिग्धों की चाल, कपड़े, भागने का पैटर्न— हर छोटी से छोटी बात को जोड़ा गया। आखिरकार कैमरों की तीसरी आंख ने उन चेहरों की पहचान कर ली जो हर वारदात के बाद गायब हो जाते थे। तकनीकी साक्ष्यों ने पुलिस को मध्यप्रदेश की सीमाओं से बाहर का रास्ता दिखाया। सुराग गुजरात और उड़ीसा तक जा पहुंचे। एसपी गेहलोद ने खुद उड़ीसा के वरिष्ठ अधिकारियों से संपर्क कर स्थानीय सहयोग सुनिश्चित किया। पुलिस की टीमें सादे कपड़ों में 1300 किलोमीटर दूर गंजम जिला पहुंचीं। कई दिन तक हुलिया बदलकर, कभी होटल तो कभी ढाबों में रुकते हुए निगरानी की गई। आखिरकार आरोपित कान्हू चरण बधई निवासी ग्राम झिटीकाबाड़ी जिला गंजम को पकड़ा गया। पूछताछ में खुलासा हुआ कि गिरोह का दूसरा सदस्य गुजरात के सूरत में छिपा है। देवास पुलिस की टीम ने सूरत में भी कई दिनों तक डेरा डाला। स्थानीय गलियों की खाक छानी गई। अंततः वहां से धवल कुमार पारेख और उसकी पत्नी रेखाबाई को गिरफ्तार किया गया। जांच में सामने आया कि पत्नी को गिरोह की हर गतिविधि की जानकारी थी और चोरी का माल ठिकाने लगाने में उसकी अहम भूमिका रहती थी। देश के कई राज्यों में घूमे आरोपी गिरफ्तार आरोपितों ने देवास और रतलाम सहित कई क्षेत्रों में वारदातें करना स्वीकार किया है। जांच में पता चला कि यह अंतरराज्यीय गिरोह गुजरात, राजस्थान, मध्यप्रदेश, तेलंगाना में 50 से अधिक वारदातों को अंजाम दे चुका है। कई बार पकड़े जाने और जमानत पर छूटने के बाद भी उन्होंने अपराध का रास्ता नहीं छोड़ा। देवास पुलिस ने न केवल देवास में हुई वारदातों को ट्रेस किया, बल्कि रतलाम की वारदात का खुलासा भी किया और लूटी गई सोने की चेन और पेंडेंट सहित कुल 6 लाख 45 हजार रुपये का माल बरामद कर लिया।  

7 पद्मश्री एवं 6 संगीत नाटक अकादमी अवॉर्डी नृत्य कलाकारों के साथ ही उदीयमान कलाकारों की प्रस्तुतियाँ

भोपाल. विश्वविख्यात मंदिर की पृष्ठभूमि में आयोजित होने वाला 52वां अंतर्राष्ट्रीय खजुराहो नृत्य समारोह इस वर्ष भी भारतीय शास्त्रीय नृत्य की विविध शैलियों का अद्भुत संगम प्रस्तुत करेगा। इस 7 दिवसीय सांस्कृतिक महोत्सव में देश-विदेश के ख्यातिप्राप्त कलाकार अपनी मनमोहक प्रस्तुतियों से दर्शकों को मंत्रमुग्ध करेंगे। समारोह में भरतनाट्यम, कथक, ओडिसी, कुचिपुड़ी, मणिपुरी और मोहिनीअट्टम जैसी प्रमुख शास्त्रीय शैलियों की प्रस्तुति दी जाएगी। प्राचीन मंदिरों की भव्यता और प्रकाश सज्जा के बीच कलाकारों की अभिव्यक्ति भारतीय संस्कृति की समृद्ध परंपरा को जीवंत करेगी। हर वर्ष की तरह इस बार भी देश-विदेश से बड़ी संख्या में पर्यटक और कलारसिक शामिल होंगे। यह समारोह न केवल सांस्कृतिक आदान-प्रदान को बढ़ावा देता है, बल्कि भारतीय शास्त्रीय नृत्य की वैश्विक पहचान को भी सशक्त करता है। संस्कृति विभाग की उस्ताद अलाउद्दीन खां संगीत एवं कला अकादमी द्वारा भारतीय पुरातत्व सर्वेक्षण, मध्यप्रदेश पर्यटन विभाग, दक्षिण मध्य क्षेत्र सांस्कृतिक केन्द्र, नागपुर एवं जिला प्रशासन – छतरपुर के सहयोग से ‘52वाँ खजुराहो नृत्य समारोह’ 20 से 26 फरवरी, 2026 तक मंदिर परिसर, खजुराहो में आयोजित किया जा रहा है। इस 7 दिवसीय अंतर्राष्ट्रीय ख्याति प्राप्त आयोजन में देश के सुप्रतिष्ठित एवं उदीयमान नर्तक – नृत्यांगनाएं अपनी साधनारत प्रस्तुतियों से भारतीय शास्त्रीय नृत्य की विविध परम्पराओं को मंच पर साकार करेंगी। साथ ही इस समारोह को सांस्कृतिक समागम बनाने की दृष्टि से विविध कला विधाओं से सम्बंधित गतिविधियों को आयोजित किया जा रहा है, ताकि यह समारोह भव्य और स्मरणीय बन सके। ‘नटराज’ थीम : नृत्य, लय और सृजन का प्रतीक मुख्यमंत्री डॉ. यादव के विजन अनुसार इस वर्ष खजुराहो नृत्य समारोह को शास्त्रीय नृत्य की प्रेरणा और आधार ‘नटराज’ की थीम पर केंद्रित किया गया है। यह थीम भारतीय दर्शन, सृजन और लयबद्ध जीवन दृष्टि का प्रतीक है, जो समारोह को एक गहन आध्यात्मिक आयाम प्रदान करेगा। पद्म पुरस्कार प्राप्त, संगीत नाटक अकादमी सम्मानित एवं राष्ट्रीय – राज्य स्तरीय अलंकरणों से विभूषित कलाकारों के साथ उदीयमान प्रतिभाओं को समान मंच प्रदान किया जा रहा है, जिससे नृत्य की गुरु – शिष्य परम्परा और निरंतर एवं सुदृढ़ हो सके। समारोह में कथक की 6, भरतनाट्यम की 4, ओडिसी की 5, मणिपुरी की 2, कथकली की 1, कुचिपुड़ी की 2, मोहिनीअट्टम की 1, सत्रिया की 1 एवं छाऊ नृत्य की 1 प्रस्तुतियाँ होगी। 52वें खजुराहो नृत्य समारोह में प्रथम बार सांस्कृतिक रैली में विभिन्न विधाओं एवं परंपराओं के नृत्य कलाकार खजुराहो के विभिन्न मार्गों से होते हुए मुख्य कार्यक्रम स्थल तक पहुंचेंगे। महोत्सव में देश के 10 से 16 वर्ष आयु वर्ग के युवा शास्त्रीय नृत्य कलाकारों को सहभागिता के लिए एक राष्ट्रीय मंच "राष्ट्रीय बाल नृत्य महोत्सव – 2026" प्रदान किया जा रहा है। प्रस्तुति देने के लिए वरिष्ठ कला गुरुओं द्वारा 31 नृत्य कलाकारों का चयन किया गया है। पर्यटकों और संस्कृति प्रेमियों के लिए खजुराहो नृत्य समारोह के दौरान आनुषंगिक गतिविधियों का संचालन किया जाएगा। इसमें खजुराहो कार्निवाल, ‘नटराज’ प्रदर्शनी में 50 नृत्यरूपों का प्रदर्शन, लयशाला : नृत्य शैलियों के श्रेष्ठ गुरुओं एवं शिष्यों का संगम, कलावार्ता : कलाविदों एवं कलाकारों के मध्य संवाद, आर्ट – मार्ट : चित्रकला प्रदर्शनी, सृजन : पारम्परिक शिल्प निर्माण तकनीक का प्रदर्शन, हुनर : पारम्परिक शिल्पों का प्रदर्शन सह विक्रय और स्वाद : देशज व्यंजन प्रमुख आकर्ष होंगे। खजुराहो पर्यटन की दृष्टि से आकर्षक एवं लोकप्रिय स्थल है। खजुराहो नृत्य समारोह के दौरान मध्यप्रदेश पर्यटन विभाग की ओर से विशेष गतिविधियों का आयोजन किया जा रहा है। विगत वर्षों में भी पर्यटन गतिविधियों ने पर्यटकों को अपनी ओर आकर्षित किया है। इस वर्ष विशेष रूप से घुमन्तू समुदायों के साथ गाँवों की सैर, एक दिवसीय भ्रमण कार्यक्रम (कैम्पिंग गतिविधि), नेचर वॉक, खजुराहो विलेज टूर, ई – बाइक टूर, वॉटर स्पोर्ट्स, हॉट एयर बैलून एवं फेम टूर जैसी रोमांचकारी गतिविधियां आयोजित की जाएंगी। 20 से 26 फरवरी तक की नृत्य प्रस्तुतियां सायं 6:30 बजे से 20 फरवरी, 2026 पद्मश्री ममता शंकर, कोलकत्ता – कथक अनुराधा वेंकटरमन, चेन्नई – भरतनाट्यम शुभदा वराडकर, मुम्बई – ओडिसी 21 फरवरी, 2026 विश्वदीप, दिल्ली – कथक अक्मादल काईनारोवा, कजाकिस्तान – भरतनाट्यम प्रभात मेहतो, झारखंड – छाऊ 22 फरवरी, 2026 एसएनए अवार्डी थोकचोम इवेमुबि देवी, मणिपुर – मणिपुरी पद्मश्री दुर्गाचरण रनवीर, ओडिसा – ओडिसी सत्रिया केन्द्र समूह, असम – सत्रिया 23 फरवरी, 2026 नव्या नायर, चेन्नई – भरतनाट्यम एसएनए अवार्डी कोट्टक्कल नंदकुमार नायर, केरल – कथकली पद्मश्री पद्मजा रेड्डी, हैदराबाद – कुचिपुड़ी 24 फरवरी, 2026 शिंजनी कुलकर्णी, दिल्ली – कथक पद्मश्री इलियाना सिटर, भुवनेश्वर – ओडिसी पद्मश्री कलामंडलम क्षमावेती, केरल – मोहिनीअट्टम 25 फरवरी, 2026 एसएनए अवार्डी शाश्वती सेन, दिल्ली – कथक मोहंती, भुवनेश्वर – ओडिसी एसएनए अवार्डी नयनसखी देवी, मणिपुर – मणिपुरी खुशबू पांचाल, उज्जैन – कथक समूह   26 फरवरी, 2026 सुनयना हजारीलाल, मुम्बई – कथक पद्मश्री प्रतिभा प्रहलाद, बैंगलुरु – भरतनाट्यम एसएनए अवार्डी सुश्री भावना रेड्डी, दिल्ली – कुचीपुड़ी प्रभुतोष पाण्डा, भुवनेश्वर – ओडिसी।  

एजुकेशन मैनेजमेंट सिस्टम से कक्षा 9वीं एवं 11वीं के विद्यार्थियों की वार्षिक परीक्षा के लिए प्रवेश पत्र, परिणाम और अंक सूची होगी तैयार

भोपाल  मध्यप्रदेश के स्कूल शिक्षा विभाग ने परीक्षा प्रबंधन व्यवस्था को अधिक पारदर्शी एवं व्यवस्थित बनाने के उद्देश्य से एक महत्वपूर्ण पहल की है। विभाग ने एजुकेशन मैनेजमेंट सिस्टम (EMS) पोर्टल विकसित किया है। इस पोर्टल के माध्यम से कक्षा 9वीं एवं 11वीं के विद्यार्थियों की वार्षिक परीक्षा के लिए प्रवेश पत्र, परिणाम और अंक सूची तैयार की जाएगी। विभाग द्वारा यह व्यवस्था शिक्षण सत्र 2025-26 से ही शुरू की जाएगी। विभाग ने इसकी तैयारी भी पूरी कर ली है। नई व्यवस्था के शुरू होने से वार्षिक परीक्षाओं की प्रक्रिया अधिक पारदर्शी, सरल एवं समयबद्ध हो सकेगी। साथ ही परीक्षा संबंधी कार्यों में समय की बचत के साथ प्रशासनिक दक्षता भी बढ़ेगी। स्कूल शिक्षा विभाग द्वारा विकसित EMS पोर्टल के माध्यम से सभी विद्यार्थियों के लिए यूनिक रोल नंबर जनरेट किए जाएंगे, जिसके आधार पर परीक्षा के लिए प्रवेश पत्र जारी किए जाएंगे। वार्षिक परीक्षा परिणाम भी पोर्टल पर ही तैयार किए जाएंगे तथा विद्यार्थियों की अंकसूचियां सीधे प्रिंट की जा सकेंगी। इस प्रक्रिया के माध्यम से राज्य, संभाग एवं जिला स्तर पर परीक्षा परिणामों का त्वरित विश्लेषण किया जा सकेगा। साथ ही पोर्टल के माध्यम से द्वितीय परीक्षा की कार्यवाही भी की जा सकेगी। स्कूल शिक्षा विभाग की यह पहल परीक्षा प्रणाली के डिजिटलीकरण की दिशा में महत्वपूर्ण कदम साबित होगी। इससे विद्यार्थियों एवं विद्यालयों दोनों को सुविधा मिलेगी।  

योजना क्रियान्वयन में लापरवाही नहीं चलेगी, 100% उपलब्धि सुनिश्चित करने के निर्देश

भोपाल  मुख्य सचिव  अनुराग जैन ने कहा है कि शासन की जनकल्याणकारी योजनाओं का बेहतर क्रियान्वयन सुनिश्चित करें। आम जनता की समस्याओं का त्वरित समाधान ही सरकार की सर्वोच्च प्राथमिकता है। राज्य के विकास कार्यों को प्रमुखता दे। मुख्य सचिव  जैन ने मंत्रालय में कलेक्टर- कमिश्नर कॉन्फ्रेंस में शासकीय योजनाओं के क्रियान्वयन और विकास कार्यों की प्रगति की समीक्षा करते हुए उक्त निर्देश दिये। मुख्य सचिव  जैन ने कहा कि केंद्र प्रवर्तित योजनाओं और निर्माण कार्यों को समय अवधि में पूर्ण करें। प्राथमिकता वाले क्षेत्रों में योजना बनाकर क्रियान्वयन में शत प्रतिशत उपलब्धि हासिल किया जाना सुनिश्चित करें। मुख्य सचिव  जैन ने ग्रामीण विकास एवं जनजातीय कार्य की समीक्षा करते हुए मुख्यमंत्री वृंदावन ग्राम योजना में चयनित गांवों को बुनियादी सुविधाओं, गौपालन और डेयरी विकास के माध्यम से आत्मनिर्भर और "आदर्श ग्राम" के रूप में विकसित करने के लिए 31 मार्च तक विजन डॉक्यूमेंट को पूर्ण करने के निर्देश दिए। समीक्षा में उन्होंने पंचायत स्तर पर नए राजस्व स्रोतों को विकसित करने पर जोर दिया। मुख्य सचिव  जैन ने जल जीवन मिशन में एकल नल जल योजना की समीक्षा करते हुए रीवा, सिंगरौली, मऊगंज, सीधी, मुरैना और भिंड कलेक्टर्स को कार्य को शीघ्रता से पूर्ण करने के निर्देश दिये। जिला पंचायत और जनपद पंचायत के नवीन स्वीकृत भवनों के लिए निवाड़ी, पांढुर्ना, नीमच, बैतूल, हरदा, अशोकनगर, ग्वालियर, शिवपुरी और भिंड को शीघ्रता से भूमि उपलब्ध कराने के निर्देश दिये। मुख्य सचिव  जैन ने कहा कि शिक्षा और स्वास्थ्य ऐसे क्षेत्र है जो समाज के भविष्य को प्रभावित करते है। प्रदेश और समाज के विकास के लिए इन दोनों क्षेत्र में काम करना आवश्यक है। शिक्षा विभाग की योजनाओं की जिलों में क्रियान्वयन की समीक्षा करते हुए मुख्य सचिव  जैन ने नवीन सत्र में नामांकन बढ़ाने और ड्राप आउट को जीरो करने पर जोर दिया। उन्होंने शाला के बाहर के चिन्हांकित बच्चों में से एजुकेशन पोर्टल 3.0 में दर्ज विद्यार्थियों के प्रोफाइल प्रतिशत बढ़ाने पर जबलपुर संभाग और पन्ना एवं बालाघाट जिले की प्रशंसा की। उन्होंने कहा कि जनगणना का कार्य प्रदेश में किया जाना है, इसलिए जनगणना कार्य की अवधि को ध्यान में रखते हुए शैक्षणिक सत्र संचालित करें ताकि बच्चों की पढ़ाई प्रभावित न हो। मुख्य सचिव  जैन ने कहा कि बच्चों का एलिमेंट्री प्री स्कूल एजुकेशन सबसे महत्वपूर्ण है। यही पढ़ाई उनके आईक्यू में परिलक्षित होती है, इसलिए आगनबाड़ी में 3-6 वर्ष के बच्चों के पंजीयन को बढ़ाये। गाँव में जाकर सैंपलिंग चेकिंग करें पालकों से वन टू वन चर्चा करे। इसके लिए अपने जिलों में शिक्षा, स्वास्थ्य और महिला बाल विकास के अधिकारियों के समन्वय से कार्य कराये। मुख्य सचिव  जैन ने 8 मार्च, महिला दिवस तक सभी शासकीय शालाओं में बालिका शौचालय के निर्माण को पूर्ण करने के लिए विशेष ध्यान देने के निर्देश दिये। मुख्य सचिव  जैन ने शासकीय विद्यालयों के भवनों की आवश्यकतानुसार मरम्मत और निर्माण कार्य को प्राथमिकता देने पर जोर दिया। उन्होंने कहा कि जीर्ण शीर्ण भवनों को डिस्मेंटल कराये और जरूरी होने पर बच्चों को दूसरे भवन में स्थानांतरित भी करें। रोजगार, उद्योग और निवेश से संबंधित केंद्र और राज्य की प्रमुख योजनाओं की समीक्षा करते हुए मुख्य सचिव  जैन ने योजनाओं का लाभ सभी पात्र व्यक्तियों को देने के निर्देश दिये। उन्होंने प्रधानमंत्री विश्वकर्मा योजना, प्रधानमंत्री जीवन ज्योति बीमा योजना, प्रधानमंत्री सुरक्षा बीमा योजना, अटल पेंशन योजना, भगवान बिरसा मुंडा स्वरोजगार योजना, टंट्या मामा आर्थिक कल्याण योजना और संत रविदास स्वरोजगार योजना आदि की जिलों में क्रियान्वयन की स्थिति की समीक्षा की और प्रकरणों के प्रभावी निराकरण के लिए निर्देशित किया। मुख्य सचिव  जैन ने 'एक जिला-एक उत्पाद' योजना की समीक्षा करते हुए कहा कि जिला के उत्पादों को जीआई टैग दिलवाने के प्रयास करें। उत्पादों की मार्केटिंग, पैकेजिंग और ब्रांडिंग पर विशेष ध्यान दे। उन्होंने कहा कि कारीगरों के कौशल संवर्धन पर ध्यान देने की आवश्यकता है। आवश्यकतानुसार एक से अधिक उत्पादों को 'एक जिला-एक उत्पाद' में शामिल करने के लिए भी प्रस्ताव भेजे। मुख्य सचिव  जैन ने डिस्ट्रिक्ट बिजनेस रिफॉर्म एक्शन प्लान की पहल के अंतर्गत जिलो में 'ईज़ ऑफ डूइंग बिजनेस' को सुदृढ़ करने के निर्देश भी दिये। प्रधानमंत्री कृषक मित्र सूर्य योजना की समीक्षा करते हुए मुख्य सचिव  जैन ने कहा कि इसमें जितना अधिक कार्य किया जाएगा प्रदेश के लिए उतना अच्छा होगा। यह बहुत महत्वपूर्ण योजना है। सभी कलेक्टर अपने जिलों में इस कार्य को प्राथमिकता दें। मुख्य सचिव  जैन ने सुशासन, शासकीय योजनाओं के प्रभावी क्रियान्वयन को सुनिश्चित करने, प्रशासनिक दक्षता बढ़ाने, संकल्प से समाधान, सीएम हेल्पलाइन का समय सीमा में निराकरण, कृषक कल्याण वर्ष के अंतर्गत कृषकों को योजनाओं का लाभ देने के लिए महत्वपूर्ण निर्देश दिये। बैठक में संबंधित विभागों के अपर मुख्य सचिव, प्रमुख सचिव, सचिव आदि उपस्थित रहें।  

बिजली कर्मचारियों के साथ मारपीट करने वाले दो आरोपितों के विरूद्ध बिजली कंपनी ने दर्ज कराई एफआईआर

भोपाल  मध्य क्षेत्र विद्युत वितरण कंपनी ने भोपाल शहर वृत्त के पूर्व शहर संभाग अंतर्गत शर्मा कॉलोनी में बिजली कर्मचारियों के साथ मारपीट करने वाले दो आरोपितों के खिलाफ एफआईआर दर्ज कराई है। कंपनी के सुल्तानिया रोड कार्यालय प्रबंधक  धनराज सिंह ने बताया कि शर्मा कालोनी निवासी  अनूप कुमार द्वारा विद्युत देयक बकाया 55,818 रुपए जमा नहीं किया जा रहा था। विद्युत कर्मचारियों द्वारा मीटर सर्विस लाइन निकालने के दौरान मौके पर मौजूद  मनोज कुमार एवं उनके भाई  यशवंत कुमार के द्वारा विद्युत कंपनी के अधिकारी जूनियर इंजिनियर  धनराज सिंह, और कर्मचारी  प्रशांत सिंह,  शाकिब अली,  आदिल,  ज़ीशान एवं गार्ड  उमेश आर्मड के साथ गाली गलौज एवं बदसलूकी की गई। बाहस्त्रोत कर्मचारी आदिल को सर्विस लाइन निकालने के दौरान पत्थर से हमला किया गया, जिस कारण उसके पीठ एवं सर पर चोट आई है। मौके पर हंगामा करके सभी विद्युत कर्मियों को घेर लिया गया था। तदुपरांत शाहजहांनाबाद थाना प्रभारी को कॉल पर अवगत कराने पर पुलिस बल ने बीच बचाव किया एवं मीटर सर्विस लाइन को जप्त किया गया। मध्य क्षेत्र विद्युत वितरण कंपनी द्वारा आरोपितों  मनोज कुमार तथा  यशवंत कुमार के खिलाफ शाहजहांनाबाद थाने में भारतीय न्याय संहिता (बीएनएस) 2023 की धारा 296(ए), 115(2), 132, 351(2), 3(5) में एफआईआर दर्ज कराई गई है। थाना शाहजहांनाबाद ने भी प्रकरण पर संज्ञान लेकर विवेचना शुरू कर दी है। मध्य क्षेत्र विद्युत वितरण कंपनी के प्रबंध संचालक  ऋषि गर्ग ने मैदानी कर्मचारियों और अधिकारियों को ड्यूटी के दौरान असामाजिक तत्वों द्वारा मारपीट / दुर्व्यवहार की घटनाओं को गंभीरता से लेते हुए तुरन्त एफ.आई. आर. कराने के निर्देश दिए हैं। मध्य क्षेत्र विद्युत वितरण कंपनी ने ड्यूटी पर तैनात अधिकारियों/कर्मचारियों से दुर्व्यवहार या मारपीट के मामलों को शासकीय कामकाज में बाधा डालने के तौर पर लिया जाकर तुरंत कानूनी कार्यवाही के निर्देश दिए हैं। कंपनी ने मैदानी अधिकारियों/कर्मचारियों से कहा है कि विद्युत आपूर्ति की स्थिति पर लगातार नजर रखें और जिले के कलेक्टर / पुलिस अधीक्षक से संपर्क कर किसी भी अप्रिय स्थिति में उनसे आवश्यक सहयोग प्राप्त करें।  

खंडवा के डायल-112 हीरोज: संवेदनशीलता और मानवीय सेवा की मिसाल

भोपाल  डायल-112 आपात स्थितियों में त्वरित सहायता के साथ-साथ मानवीय संवेदनशीलता और विश्वास का सशक्त माध्यम बन रही है। खंडवा जिले में डायल-112 जवानों ने सूझबूझ और करुणा का परिचय देते हुए घर की राह भटके 07 वर्षीय दिव्यांग बालक को सुरक्षित उसके परिजनों से मिलाया। 18 फरवरीको खंडवाजिले के थाना मूंदी क्षेत्र अंतर्गत छलायी गाँव के पास सड़क पर एक 07 वर्षीय बालक मिलने की सूचनाडायल-112 राज्य स्तरीय पुलिस कंट्रोल रूमभोपालको प्राप्त हुई। सूचना में बताया गया कि बालक परिजनों के बारे में कुछ भी बताने में असमर्थ है और पुलिस सहायता की आवश्यकता है। सूचना मिलते ही थाना मूंदी क्षेत्र में तैनात डायल-112 एफआरव्ही वाहन को तत्काल मौके के लिए रवाना किया गया। मौके पर पहुँचकर डायल-112 स्टाफ आरक्षक अमित चौहानएवं पायलट नासिर खानने बालक को संरक्षण में लिया। प्रारंभिक बातचीत और निरीक्षण में पाया गया कि बालक बोलने में असमर्थ (दिव्यांग) है तथा अपने परिजनों के संबंध में कोई जानकारी नहीं दे पा रहा है। डायल-112 जवानों ने अत्यंत संवेदनशीलता और धैर्य के साथ बालक की देखभाल सुनिश्चित की। इसके पश्चात डायल-112एफआरव्ही वाहन के साथ बालक को लेकर आसपास के क्षेत्रों में पूछताछ एवं परिजनों की तलाश में जुटे। स्थानीय नागरिकों से संपर्क और पूछताछ के दौरान बालक के परिजनों के परिचित मिले, जिनसे आवश्यक जानकारी प्राप्त कर बालक के परिजनों से संपर्क किया गया। डायल-112 जवान बालक को सुरक्षित एफआरव्ही वाहन से चौकी लेकर पहुँचे, जहाँ पहचान एवं सत्यापन उपरांत बालक को उसके पिता के सुपुर्द किया गया। अपने बच्चे को सकुशल पाकर परिजनों ने डायल-112 जवानों का आभार व्यक्त किया। डायल-112 हीरोज द्वारा प्रदर्शित यह मानवीय सेवा पुलिस के “जन-सेवा, जन-सुरक्षा” के मूल्यों को सुदृढ़ करती है।