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इंदौर एसआईआर में तार्किक त्रुटि वाले 5.79 लाख मतदाताओं को नोटिस

इंदौर. जिले में चल रहे विशेष गहन पुनरीक्षण (एसआईआर) के तहत दावे-आपत्तियों की सुनवाई जारी है, लेकिन इस बीच निर्वाचन आयोग ने 5.79 लाख मतदाताओं को लेकर तार्किक त्रुटि निकाली है।अब इन मतदाताओं को भी नोटिस जारी किए जाएंगे। इन मतदाताओं का रिकॉर्ड वर्ष 2003 की मतदाता सूची से मैप तो हो गया हैं, लेकिन विवरणों में विसंगतियों के कारण वे संदेह के घेरे में हैं। अब इन विसंगतियों का समाधान किया जाना है। दरअसल निर्वाचन आयोग के साफ्टवेयर द्वारा मतदाताओं के रिकॉर्ड मिलान के दौरान पांच प्रकार की तार्किक त्रुटियां चिन्हित की थी। इसमें वे मतदाता अधिक है, जिनके नाम और माता-पिता के नाम 2003 की मतदाता सूची से मेल नहीं खा रहे है। इसके अलावा शब्दों की गलती, नाम अधूरा होना, उपनाम और जन्मतिथि की त्रुटियां भी सामने आई हैं। ऐसे में आयोग ने इन मतदाताओं को संदेह के घेरे में रखा है। पहले इन मतदाताओं को नोटिस जारी नहीं करने की बात आयोग द्वारा की जा रही थी। बीएलओं द्वारा ही सुधार करने को निर्देश दिए गए थे, लेकिन अब आयोग ने नोटिस जारी कर सुधार करने के निर्देश दिए है। हालांकि यह प्रक्रिया किस तरह होगी, इसको लेकर जल्द ही आयोग बैठक कर दिशा निर्देश जारी करेगा। 24.20 लाख मतदाताओं ने भरे फार्म इंदाैर जिले की मतदाता सूची में शामिल 28.67 लाख मतदाताओं के फार्म भरने का कार्य 11 दिसंबर तक किया गया। इस दाैरान 24 लाख 20 हजार 171 मतदाताओं के फार्म भरकर आए, इसलिए इनकों प्रारूम मतदाता सूची में शामिल किया गया है। इसमें एक लाख 33 हजार 696 मतदाताओं की मैपिंग नहीं हुई थी और अब इनसे दस्तावेज लिए जा रहे है।

उज्जैन व्यापार मेले की चमक से इंदौर के राजस्व में आई 8.79 प्रतिशत की कमी

उज्जैन व्यापार मेले की चमक से कम हुआ इंदौर का राजस्व, 8.79 प्रतिशत की कमी इंदौर. उज्जैन में लगातार दूसरे वर्ष आयोजित हुए व्यापार मेले का सीधा असर इंदौर परिवहन कार्यालय के राजस्व पर दिखाई देने लगा है। व्यापार मेले में छूट लेने की चमक के कारण इंदौर जिले में पंजीकृत होने वाले कई वाहन उज्जैन में पंजीकृत हो गए। इस वजह से वर्ष 2025 में इंदौर परिवहन कार्यालय में वाहन बिक्री में 0.30 प्रतिशत और राजस्व में 8.79 प्रतिशत की गिरावट दर्ज की गई है। 2024 की अपेक्षा बीते साल 77 करोड़ रुपये कम राजस्व प्राप्त हुआ। परिवहन विभाग के आंकड़ों के अनुसार 2025 में इंदौर में 1 लाख 98 हजार 530 वाहन पंजीकृत हुए, जिससे करीब 805 करोड़ रुपये का राजस्व मिला। वहीं 2024 में 1 लाख 99 हजार 82 वाहन पंजीयन के साथ 883 करोड़ रुपये का राजस्व प्राप्त हुआ था। इस तरह एक वर्ष में 552 वाहन कम पंजीकृत हुए, वहीं राजस्व भी 77 करोड़ रुपये कम आया। राजस्व में आई इस गिरावट का मुख्य कारण उज्जैन व्यापार मेले को माना जा रहा है, जहां 20 लाख रुपये से अधिक कीमत वाले कई महंगे वाहन पंजीकृत हुए। यही वजह है कि इंदौर, जो प्रदेश का बड़ा ऑटो मोबाइल बाजार माना जाता है, वहां के राजस्व में कमी आई। मेले के पहले लगातार बढ़ोतरी उज्जैन में दो साल से व्यापार मेला आयोजित किया जा रहा है। इसके बाद से इंदौर के राजस्व में बढ़ोतरी नहीं हो पा रही है। वर्ष 2023 में 2022 की अपेक्षा वाहन बिक्री में 17.58 प्रतिशत और राजस्व में 23.88 प्रतिशत की बढोतरी रही थी। इसके बाद 2024 में व्यापार मेला आयोजित होने के कारण वाहन बिक्री और राजस्व में कुछ कमी हुई। 2023 की अपेक्षा 2024 में वाहन बिक्री में 4.92 प्रतिशत और राजस्व में 1.72 प्रतिशत बढ़ोतरी ही दर्ज की गई। 2025 में बिक्री और राजस्व दोनों में अधिक गिरावट रही।

महू में वंदे भारत मेंटेनेंस के लिए बनेगी 94.50 करोड़ से दो नई पिट लाइन और आधुनिक शेड

महू. भविष्य में इंदौर से संचालित होने वाली वंदे भारत ट्रेन के रखरखाव के लिए महू रेलवे स्टेशन को बड़ा केंद्र बनाने की तैयारी शुरू हो गई है। रेलवे बोर्ड ने यहां दो नई पिट लाइन और अत्याधुनिक तकनीक से लैस शेड के निर्माण को मंजूरी दे दी है। इस महत्वाकांक्षी परियोजना पर करीब 94 करोड़ 50 लाख रुपये खर्च किए जाएंगे। इसके लिए रक्षा संपदा विभाग से 3.48 एकड़ जमीन लेने की प्रक्रिया भी प्रारंभ कर दी गई है। भूमि हस्तांतरण के बाद निर्माण कार्य जल्द शुरू होने की संभावना है। वर्तमान में पश्चिम रेलवे के रतलाम मंडल अंतर्गत महू स्टेशन पर केवल एक पिट लाइन मौजूद है। नई स्वीकृति के बाद दो अतिरिक्त पिट लाइन बनने से कुल तीन पिट लाइन हो जाएंगी। इससे एक साथ कई ट्रेनों कीसर्विसिंग संभव हो सकेगी। निर्माणाधीन आधुनिक शेड में वंदे भारत ट्रेन की साफ-सफाई, नियमित मेंटेनेंस और तकनीकी जांच की जाएगी। इससे ट्रेन संचालन अधिक सुरक्षित और सुचारु होगा। रेलवे अधिकारियों के अनुसार, इस परियोजना के पूरा होने के बाद महू स्टेशन वंदे भारत ट्रेन के मेंटेनेंस हब के रूप में विकसित होगा। इससे क्षेत्र में रोजगार के अवसर भी बढ़ेंगे और महू को रेलवे मानचित्र पर नई पहचान मिलेगी।

ईरानी डेरे के सरदार कुख्यात राजू को रिमांड पर लेने नहीं आई पांच राज्यों की पुलिस

भोपाल. अमन कॉलोनी स्थित ईरानी डेरे के सरदार जिस कुख्यात बदमाश राजू ईरानी को पकड़ने के लिए भोपाल में पांच राज्यों की पुलिस लंबे समय तक डेरा डाले रहती थी, उसके गिरफ्त में आने के बाद कोई भी पुलिस एजेंसी उसे लेने तक नहीं पहुंची। आखिरकार सात दिन की रिमांड पूरी होने के बाद भोपाल पुलिस ने राजू को कोर्ट में पेश किया, जहां से उसे जेल भेज दिया गया। निशातपुरा पुलिस के अनुसार राजू पर कोलकाता, पश्चिम बंगाल, गुरुग्राम, महाराष्ट्र, जयपुर और दिल्ली में कई गंभीर अपराध दर्ज हैं। उस पर लूट, संगठित अपराध, धोखाधड़ी और फरारी जैसे मामलों के आरोप हैं। सूरत क्राइम ब्रांच ने गिरफ्तार किया था अलग-अलग राज्यों की पुलिस लंबे समय से उसकी तलाश में थी और इनपुट मिलने पर भोपाल में कई बार दबिश भी दी गई थी। पिछले सप्ताह सूरत क्राइम ब्रांच ने उसे गिरफ्तार किया था। इसके बाद भोपाल की निशातपुरा पुलिस उसे भोपाल लेकर आई। इसके बाद सात दिनों तक पुलिस ने उससे पूछताछ की, लेकिन अब तक किसी अन्य राज्य की पुलिस ने उसे प्रोडक्शन वारंट के जरिए गिरफ्तार करने में कोई दिलचस्पी नहीं दिखाई। 14 दिन की न्यायिक हिरासत में भेजा इधर, भोपाल पुलिस ने उससे सात दिन की पूछताछ की और फिर शनिवार को न्यायालय में पेश कर 14 दिन की न्यायिक हिरासत में भेज दिया है। राजू लगातार बीमारी का हवाला देकर बचता रहा। पुलिस ने उससे डोजियर भरवा लिया है, जिसमें उसके करीबी रिश्तेदारों और गुर्गों की जानकारी दर्ज की गई है। एडिशनल डीसीपी जोन-3 मलकीत सिंह ने बताया कि आरोपित से जरूरी पूछताछ हुई है। पहले राजू ने कर्नाटक के पते पर बने पासपोर्ट से विदेश जाने की बात स्वीकारी थी। हालांकि इस संबंध में कोई जानकारी नहीं मिली है। 7 से अधिक राज्यों का वांटेड राजू बीते चार सालों में सात से अधिक राज्यों में वांटेड था। उसके खिलाफ मध्य प्रदेश, हरियाणा, दिल्ली, महाराष्ट्र, राजस्थान, उत्तर प्रदेश और पश्चिम बंगाल सहित कई राज्यों में मामले दर्ज हैं। राजू सूरत में अपने साढ़ू के घर में छुपा था।

एक एजेंसी के भरोसे जबलपुर संभाग के हजारों वाहनों की फिटनेस का जिम्मा

जबलपुर. केंद्रीय सड़क परिवहन एवं राजमार्ग मंत्रालय (मोर्थ) के हालिया आदेश ने संभाग भर के वाहन संचालकों की परेशानी बढ़ा दी है। नए निर्देशों के तहत अब व्यावसायिक व सवारी वाहनों की फिटनेस जांच जिला स्तर पर नहीं, बल्कि संभागीय स्तर पर की जाएगी। इसके तहत जबलपुर संभाग के जबलपुर सहित नरसिंहपुर, सिवनी, बालाघाट, छिंदवाड़ा, कटनी, मंडला और डिंडौरी जैसे जिलों के वाहनों को फिटनेस प्रमाणीकरण के लिए जबलपुर स्थित ऑटोमेटेड टेस्टिंग स्टेशन (एटीएस) पहुंचना होगा। परेशानी की बात ये है कि शहर में फिलहाल एक ही एटीएस कार्यशील है ऐसे में संभागीय स्तर पर हजारों वाहनों की फिटनेस जांच करने में व्यावहारिक परेशानियां आना तय है। वाहन चालकों का कहना है कि 200 से 210 किलोमीटर दूर जबलपुर तक वाहन लाना बेहद खर्चीला होगा। फिटनेस प्रमाण पत्र की निर्धारित फीस भले ही करीब एक हजार रुपये हो, लेकिन आवागमन, ईंधन, चालक-खलासी, ठहराव और अन्य खर्चों को जोड़ दिया जाए तो कुल खर्च 10 से 12 हजार रुपये तक पहुंच सकता है। अवैध वसूली बढ़ने का डर परिवहन से जुड़े संगठनों का आरोप है कि सीमित केंद्र और अधिक दबाव की स्थिति में भ्रष्टाचार को बढ़ावा मिल सकता है। पहले भी जबलपुर एटीएस में अनियमितताओं की शिकायतें सामने आ चुकी हैं। ऐसे में नए आदेश से अवैध वसूली और बिचौलियों की भूमिका बढ़ने की आशंका जताई जा रही है। जिला स्तर पर प्रतिमाह औसतन 200 वाहनों की फिटनेस जांच होती थी, जिसमें प्रतिदिन 10 से 12 वाहनों को प्रमाण पत्र जारी किए जाते थे। नए आदेश के बाद जबलपुर, कटनी, नरसिंहपुर, सिवनी, छिंदवाड़ा, बालाघाट, मंडला और डिंडोरी से मिलाकर हर माह करीब 1600 से अधिक वाहन जबलपुर पहुंच सकते हैं। जबकि निलंबित एटीएस कब चालू होगा, इसको लेकर कोई स्पष्ट जानकारी नहीं है। वर्तमान में जो क्रियाशील एटीएस में हर दिन 35 से ज्यादा वाहन फिटनेस के लिए पहुंच रहे हैं। अधिकारियों का पक्ष इस संबंध में जबलपुर आरटीओ संतोष पाल का कहना है कि केन्द्रीय सड़क परिवहन एवं राजमार्ग मंत्रालय से नया आदेश जारी हुआ है। संभागीय स्तर पर पर निर्देश जारी हुए है। वाहन मालिक अब फिटनेस प्रमाण पत्र के लिए जबलपुर आएंगे। ये समस्या भी ऑटो से लेकर कार, ट्रक सभी निजी और कमर्शियल वाहनों की फिटनेस जारी होना है। ऐसे में छिंदवाड़ा या बालाघाट जिले से ऑटो चालक को जबलपुर आना बेहद खर्चीला साबित होगा। एक पूरा दिन वह जबलपुर आने के लिए हजारों रुपये का डीजल फूंकेगा। इसके बाद एक दिन के लिए शहर से बाहर जाने के लिए परमिट बनवाएंगा। इसके बाद यदि एक दिन में जांच पूरी नहीं हुई तो यहां रूकना पड़ेगा। ऐसे में फिटनेस प्रमाणीकरण करना काफी महंगा साबित होगा। जिला परिवहन विभाग को फिटनेस से हटाया गया मोर्थ द्वारा प्रदेश के 42 जिलों के लिए जारी पत्र में जिला परिवहन कार्यालयों को व्यावसायिक और सवारी वाहनों की फिटनेस जांच से पूरी तरह अलग कर दिया गया है। नए आदेश के मुताबिक अब फिटनेस जांच केवल नजदीकी ऑटोमेटेड टेस्टिंग स्टेशन में ही होगी। इसके लिए वाहन मालिकों को ऑनलाइन बुकिंग करानी अनिवार्य होगी। जिला परिवहन विभाग अब फिटनेस से संबंधित कोई भी कार्य नहीं करेगा। शहर में फिलहाल फिटनेस प्रमाणीकरण के लिए केवल कटंगी रोड़ पर स्थित एक निजी एजेंसियां कार्यशील हैं। जानकारों का कहना है कि जबलपुर संभाग के सभी जिलों के वाहन यदि एक ही केंद्र पर जांच के लिए आएंगे तो क्षमता से कहीं अधिक दबाव बनेगा। इससे जांच में देरी, लंबी प्रतीक्षा सूची और अव्यवस्था की आशंका है। पहले से बंद एटीएस फिर भी निर्भरता सबसे बड़ा सवाल यह है कि जिस जबलपुर एटीएस पर पूरे संभाग के वाहनों की निर्भरता तय की गई है, वह स्वयं अनियमितताओं के चलते सस्पेंड है। कुछ समय पहले परिवहन विभाग ने गड़बड़ियों के आरोपों के बाद जबलपुर स्थित ऑटोमेटेड टेस्टिंग स्टेशन का लाइसेंस अस्थायी रूप से निलंबित कर दिया था।

महाकाल मंदिर हुआ डिजिटल, दर्शन, भस्म आरती और दान सभी सेवाएं अब एक वेबसाइट पर उपलब्ध

उज्जैन  देशभर में धार्मिक स्थलों पर श्रद्धालुओं की संख्या लगातार बढ़ रही है। उज्जैन का श्री महाकालेश्वर मंदिर भी इससे अछूता नहीं है। हर दिन हजारों श्रद्धालु बाबा महाकाल के दर्शन के लिए उज्जैन पहुंचते हैं। भीड़, लंबी कतारें, जानकारी की कमी और बुकिंग को लेकर भ्रम ये सभी समस्याएं लंबे समय से श्रद्धालुओं के सामने रही हैं। इन्हीं चुनौतियों को ध्यान में रखते हुए महाकालेश्वर मंदिर प्रबंध समिति ने एक बड़ा और दूरदर्शी कदम उठाया है। मंदिर की नई आधिकारिक वेबसाइट www.shrimahakaleshwar.mp.gov.in लॉन्च कर दी गई है। इस एक प्लेटफॉर्म के जरिए अब दर्शन, पूजन, भस्म आरती, अतिथि निवास बुकिंग और ऑनलाइन दान जैसी सभी सेवाएं उपलब्ध होंगी। यह पहल न सिर्फ श्रद्धालुओं के अनुभव को आसान बनाएगी, बल्कि मंदिर प्रशासन में पारदर्शिता और भरोसा भी बढ़ाएगी। नई सरकारी वेबसाइट से क्या-क्या सुविधाएं मिलेंगी महाकाल मंदिर की इस डिजिटल पहल का सबसे बड़ा फायदा यह है कि श्रद्धालुओं को अलग-अलग प्लेटफॉर्म या दलालों पर निर्भर नहीं रहना पड़ेगा। एक ही वेबसाइट पर सभी जरूरी सेवाएं एक जगह मिलेंगी। इस वेबसाइट पर होम पेज पर जाते ही श्रद्धालुओं को साफ तौर पर ये विकल्प दिखाई देंगे शीघ्र दर्शन, भस्म आरती बुकिंग, विशेष पूजन, अतिथि निवास बुकिंग, ऑनलाइन दान, सरकारी डोमेन gov.in पर बनी यह वेबसाइट साइबर सुरक्षा के लिहाज से भी मजबूत मानी जा रही है। इससे फर्जी वेबसाइट और ठगी की आशंका काफी हद तक कम हो जाएगी। शीघ्र दर्शन बुकिंग का आसान प्रोसेस महाकाल मंदिर में शीघ्र दर्शन की मांग सबसे ज्यादा रहती है। नई वेबसाइट पर इसका प्रोसेस बेहद सरल रखा गया है, ताकि हर उम्र का व्यक्ति इसे आसानी से समझ सके। शीघ्र दर्शन बुक करने के लिए श्रद्धालु को सबसे पहले वेबसाइट के होम पेज पर जाना होगा। वहां शीघ्र दर्शन के विकल्प पर क्लिक करना होगा। इसके बाद मोबाइल नंबर दर्ज कर सबमिट करना होगा। मोबाइल पर आए ओटीपी को वेरीफाई करने के बाद श्रद्धालु अपनी जरूरी जानकारी भरकर उपलब्ध स्लॉट में से अपना समय चुन सकते हैं। इस प्रक्रिया के पूरा होते ही बुकिंग कन्फर्म हो जाती है। श्रद्धालु को न तो लाइन में लगने की चिंता रहेगी और न ही किसी तरह की अव्यवस्था का सामना करना पड़ेगा। भस्म आरती और पूजन बुकिंग अब पूरी तरह ऑनलाइन महाकाल मंदिर की भस्म आरती देश-विदेश में प्रसिद्ध है। इसे देखने और इसमें शामिल होने की इच्छा हर श्रद्धालु की होती है, लेकिन सीमित संख्या के कारण यह हमेशा आसान नहीं होता। नई वेबसाइट के जरिए भस्म आरती बुकिंग को पूरी तरह ऑनलाइन और पारदर्शी बना दिया गया है। श्रद्धालु अब पहले से उपलब्ध तारीख और स्लॉट देखकर बुकिंग कर सकते हैं। इसी तरह विशेष पूजन, रुद्राभिषेक और अन्य धार्मिक अनुष्ठानों की जानकारी भी वेबसाइट पर साफ शब्दों में दी गई है। इससे न सिर्फ श्रद्धालुओं को सुविधा मिलेगी, बल्कि मंदिर प्रशासन को भी व्यवस्थाओं को बेहतर तरीके से संभालने में मदद मिलेगी। भक्त निवास परियोजना: 672 करोड़ की बड़ी योजना महाकाल मंदिर आने वाले श्रद्धालुओं के लिए ठहरने की सुविधा हमेशा एक बड़ा सवाल रही है। इसे ध्यान में रखते हुए श्री महाकालेश्वर भक्त निवास परियोजना पर तेजी से काम किया जा रहा है। मिली जानकारी के अनुसार, यह परियोजना लगभग 672 करोड़ रुपये की लागत से 18.65 एकड़ भूमि पर विकसित की जा रही है। इस विशाल परियोजना में करीब 3,000 कमरे, भोजनालय, पार्किंग और अन्य आधुनिक सुविधाएं शामिल होंगी। नई वेबसाइट के जरिए श्रद्धालु न सिर्फ अतिथि निवास की बुकिंग कर सकेंगे, बल्कि इस परियोजना के लिए दान भी दे सकेंगे। जो लोग कमरों के निर्माण या अन्य सुविधाओं में सहयोग करना चाहते हैं, उनके लिए भी यह पोर्टल एक आसान माध्यम बनेगा। दान और CSR गतिविधियों के लिए पारदर्शी डिजिटल प्लेटफॉर्म महाकाल मंदिर में दान देने की परंपरा सदियों पुरानी है। अब इसे डिजिटल रूप देकर और अधिक पारदर्शी बनाया गया है। वेबसाइट के माध्यम से श्रद्धालु ऑनलाइन दान कर सकेंगे और यह जान सकेंगे कि उनका योगदान किस उद्देश्य के लिए उपयोग किया जाएगा। CSR गतिविधियों के लिए भी यह पोर्टल एक नया और भरोसेमंद डिजिटल चैनल साबित होगा। इससे विकास कार्यों को गति मिलेगी और दानदाताओं का विश्वास भी मजबूत होगा। मंदिर प्रशासन का मानना है कि डिजिटल दान व्यवस्था से हर रुपये का सही उपयोग सुनिश्चित किया जा सकेगा।

मध्य प्रदेश में 165 करोड़ रुपये का बड़ा प्रोजेक्ट शुरू, 324 किमी का निर्माण करेगी मुंबई की कंपनी

 छतरपुर  छतरपुर शहर के तालाबों को स्वच्छ और साफ रखने के लिए वर्ष 2022 में स्वीकृत सीवर प्रोजेक्ट बीते चार साल से अटका हुआ था। तकनीकी और प्रशासनिक अड़चनों के कारण काम समय पर शुरू नहीं हो पाया था लेकिन अब नगर पालिका छतरपुर और मुंबई की कंपनी आरएनबी इंफ्रा के बीच अनुबंध होने के बाद परियोजना को नई दिशा मिली है। ठेकेदार के कर्मचारियों ने नारायणपुरा रोड से अंतिम सर्वे शुरू कर दिया है, जिसे 90 दिनों के भीतर पूरा करने का लक्ष्य रखा गया है। इस प्रोजेक्ट की कुल लागत 165 करोड़ रुपए है। सर्वे के बाद ठेकेदार फाइल का वेरिफिकेशन किसी इंजीनियरिंग कॉलेज से कराएगा और इसके बाद इसे अंतिम अनुमोदन के लिए भोपाल भेजा जाएगा। अनुमोदन मिलते ही कार्य शुरू किया जाएगा। कार्य शुरू होने के बाद प्रोजेक्ट के अंतर्गत होने वाले कार्य शुरू कर दिए जाएंगे।  तीन साल पहले पूरा होने वाला यह प्रोजेक्ट समय पर शुरू नहीं हो पाया। गुजरात की कंपनी द्वारा डीपीआर समय पर तैयार न करने और बार-बार टेंडर निरस्त होने के कारण कार्य रुक गया था। इस कारण शहर के प्रमुख तालाबों प्रताप सागर, संकट मोचन, ग्वाल मंगरा और किशोर सागर में गंदगी, जलकुंभी और जलकुमा डेमली जैसी वनस्पतियां पनप गई हैं। इससे पानी दुर्गंधपूर्ण और अनुपयोगी हो गया है। अलग-अलग क्षेत्रों में होगा सर्वे का कार्य नगर पालिका के उपयंत्री अंकित अरजरिया ने बताया, निर्माण एजेंसी और नगर पालिका के बीच अनुबंध हो गया है। ठेकेदार के कर्मचारियों ने नारायणपुरा रोड से सर्वे कार्य भी शुरू कर दिया है। निर्माण जल्द शुरू करने के लिए ठेकेदार को अलग-अलग क्षेत्र का सर्वे करने कहा गया है, ताकि ड्राइंग जल्दी तैयार हो और अनुमोदन मिल सके। अनुमोदन मिलने के बाद कार्य शुरू कर दिया जाएगा। शहर में तालाबों को स्वच्छ बनाने की योजना… प्रारंभ में नरायणपुरा और राजनगर रोड पर सीवर ट्रीटमेंट प्लांट (एसटीपी) का निर्माण किया जाएगा। इस चरण में आधुनिक तकनीक और उच्च क्षमता वाले उपकरणों का इस्तेमाल किया जाएगा, जिससे शहर के गंदे पानी को प्रभावी ढंग से साफ किया जा सके। इसके बाद फ्लौठा और सौरा तालाब में इंटरमीडिएटर पंपिंग सिस्टम (आईपीएस) लगाया जाएगा। यह सिस्टम तालाबों में जमा गंदे पानी को एक स्थान से दूसरे स्थान तक सुरक्षित रूप से बाहर निकालने का काम करेगा। 3 फेज में होगा प्रोजेक्ट फेज-1- शहर में 5 पानी की टंकियों का निर्माण। फेज-2- शहर के तालाबों का सौंदर्गीकरण और सफाई। फेज-3- 324 किलोमीटर सीवर लाइन बिछेगी, 3 सीवेज ट्रीटमेंट प्लांट और 3 पंपिंग स्टेशन बनेंगे। ये पंपिंग स्टेशन पानी को एक से दूसरे स्थान तक पहुंचाने का कार्य करेंगे।

ग्वालियर में स्थापित होगा नया सेटेलाइट स्टेशन, निर्माण के लिए लोगों से ली जाएगी ज़मीन

ग्वालियर   ग्वालियर रेलवे स्टेशन पर मुसाफिरों की बढ़ रही भीड़ का बोझ हल्का किया जाएगा। इसके लिए बिरलानगर रेलवे स्टेशन को सेटेलाइट स्टेशन (Satellite Station) के तौर पर तैयार करने की पहल शुरू हो रही है। इसके अलावा सिथौली और बिरला नगर के रेलवे स्टेशन का विकास का प्रस्ताव भी रेल मुख्यालय को भेजा गया है। रेल अधिकारियों का कहना है बिरलानगर रेलवे स्टेशन (Birla Nagar Railway Station) को आने वाले दिनों में ग्वालियर का सहायक स्टेशन बनाया जाएगा। इसका ब्लू प्रिंट लगभग तैयार है। इसमें प्लेटफार्म की गिनती, ट्रैक को सुधारने, सिग्लन और रेलों के परिचालन की क्षमता बढ़ाने के साथ मुसाफिरों को जरुरी सुविधाओं का विस्तार का प्लान शामिल किया गया है। इस प्रस्ताव को रेल मुख्यालय में परखा जाएगा। इसमें सबसे अहम कड़ी जगह है। मुख्यालय यह तय करेगा कि भविष्य को देखते हुए कितनी भूमि की जरुरत होगी। यहां पड़ेगी भूमि अधिग्रहण की जरूरत रेल अधिकारियों की नजर में पूरे प्रोजेक्ट में बिरलानगर रेलवे स्टेशन के विस्तार के लिए जमीन की जरुरत होगी इसके लिए प्रदेश शासन के सहयोग लिया जाएगा। सिथौली रेलवे स्टेशन पर प्लेटफार्म की गिनती और मुसाफिरों की सुविधाओं को बढ़ाने का खाका खींचा गया है। इन दोनों रेलवे स्टेशन का दायरा बढने से ग्वालियर रेलवे स्टेशन पर मुसाफिरों दवाब काफी कम होगा। मंजूरी का इंतजार बिरलानगर और सिथौली रेलवे स्टेशन का विस्तार किया जाए इसके लिए प्रस्ताव तैयार किया गया है। आने वाले दिनों में इन दोनों स्टेशन को ग्वालियर स्टेशन का वैकल्पिक और मददगार बनाने की योजना है। रेल मुख्यालय से प्रस्ताव की मंजूरी का इंतजार है।- अनिरुद्ध कुमार, मंडल रेल प्रबंधक 

भोपाल मेट्रो का सफर होगा और भी स्मार्ट, स्मार्ट कार्ड और क्यूआर कोड से मिलेगा सुविधा

भोपाल  नागरिकों के लिए मेट्रो का सफर अब और भी आधुनिक और सुगम होने जा रहा है। आरेंज लाइन प्रायोरिटी कारिडोर के मेट्रो स्टेशन पर आटोमेटिक फेयर कलेक्शन (एएफसी) सिस्टम इंस्टाल करने का काम शुरू हो चुका है। इस प्रणाली के लागू होने से यात्रियों को टिकट काउंटर पर लाइन लगने की जरूरत नहीं होगी, जिससे समय की बचत और यात्रा का अनुभव बेहतर होगा। ज्ञात हो कि इस सिस्टम को इंस्टाल करने के लिए पहले तुर्किये की एक कंपनी को टेंडर दिया था, लेकिन ऑपरेशन सिंदूर के बाद वह समझौता रद होने के बाद से यह सिस्टम इंस्टाल नहीं हो पाए थे। अब दिल्ली मेट्रो की तकनीकी और परिचालन भागीदारी से इस प्रोजेक्ट को नई गति मिली है। दिल्ली मेट्रो के विशेषज्ञों की निगरानी में मप्र मेट्रो रेल कॉर्पोरेशन लिमिटेड (एमपीएमआरसीएल) और दिल्ली मेट्रो (डीएमआरसी) के बीच हुए एमओयू के तहत, दिल्ली मेट्रो के अनुभवी इंजीनियर भोपाल मेट्रो के लिए इस एडवांस सिस्टम को स्थापित कर रहे हैं। वर्तमान में यह काम सुभाष नगर मेट्रो स्टेशन पर चल रहा है। मेट्रो प्रबंधन के अनुसार आरेंज लाइन के आठ मेट्रो स्टेशनों पर इस सिस्टम को इंस्टाल व टेस्ट करने में लगभग दो महीने का समय लगेगा। इंस्टालेशन के बाद फंक्शन ऑपरेटिंग की होगी जांच एएफसी सिस्टम के इंस्टाल होने के बाद इसके फंक्शन आपरेटिंग की जांच की जाएगी, ताकि यात्रियों को तकनीकी समस्या का सामना न करना पड़े। वहीं, ऑरेंज लाइन के दूसरे चरण में बनाए जा रहे मेट्रो स्टेशनों पर भी दिल्ली मेट्रो द्वारा ही एएफसी सिस्टम लगाया जाएगा। यात्री संख्या में गिरावट 21 दिसंबर से आम लोगों के लिए मेट्रो को एम्स से लेकर सुभाष नगर तक चलाया गया। पहले सप्ताह हजारों की संख्या में यात्रियों ने यात्रा की, दूसरे सप्ताह भी यात्रियों की संख्या ठीक रही, लेकिन तीसरे सप्ताह से इसमें गिरावट होना शुरू हो गई। अब रोजाना ढाई-तीन सौ यात्री सफर कर रहे हैं। एएफसी सिस्टम से यात्रियों को होने वाले खास फायदे डिजिटल पेमेंट : यात्री क्यूआर कोड और स्मार्ट कार्ड के माध्यम से सीधे भुगतान कर सकेंगे। भीड़ से मुक्ति : स्टेशनों पर फिजिकल टिकट काउंटरों पर निर्भरता कम होगी, जिससे पीक आवर्स में भीड़ नहीं लगेगी। बेहतर राजस्व प्रबंधन : इस सिस्टम से मेट्रो प्रशासन को सटीक राजस्व डेटा और यात्रियों की संख्या का प्रबंधन करने में मदद मिलेगी ।

लोकभवन 25 से 27 जनवरी तक आम जनता के लिए खुला रहेगा, भ्रमण का समय 11 बजे से 2 बजे तक

लोकभवन 25 से 27 जनवरी तक आमजन के लिए खुलेगा 26 जनवरी को प्रात: 11 से दोपहर 2 बजे तक कर सकेंगे भ्रमण भोपाल राज्यपाल मंगुभाई पटेल के निर्देशानुसार गणतंत्र दिवस के अवसर पर लोकभवन को तीन दिनों के लिए आम नागरिकों के भ्रमण हेतु खोला जा रहा है। नागरिकों के भ्रमण के दौरान सांस्कृतिक कार्यक्रमों और लघु फिल्मों का प्रदर्शन किया जाएगा। आमजनों के लिए चित्र प्रदर्शनी भी लगाई जाएगी। राज्यपाल के प्रमुख सचिव डॉ. नवनीत मोहन कोठारी ने बताया कि इस पहल का उद्देश्य आमजन को लोकतांत्रिक संस्थाओं से जोड़ना तथा गणतंत्र दिवस के महत्व को और अधिक सशक्त बनाना है। उन्होंने बताया कि नागरिक 25 जनवरी से 27 जनवरी 2026 तक निर्धारित समय में लोकभवन का अवलोकन कर सकेंगे।  25 जनवरी और 27 जनवरी  2026 को लोकभवन अपरान्ह 2 बजे से सायं 8 बजे तक खुला रहेगा। वहीं 26 जनवरी 2026 गणतंत्र दिवस को लोकभवन भ्रमण प्रातः  11 बजे से दोपहर 2 बजे तक ही किया जा सकेगा। आम नागरिकों के लिए लोकभवन में प्रवेश एवं निकास की व्यवस्था गेट क्रमांक- 1 से ही सुनिश्चित की गई है।