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सोशल मीडिया की अपील रंग लाई, सीएम मोहन यादव ने दिव्यांग युवक को दिलाया स्टेडियम में मैच देखने का मौका

भोपाल मध्यप्रदेश के मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने एक बार फिर साबित किया है कि वे जनता के दिलों पर क्यों राज करते हैं। उनका मन जनता की एक आवाज पर पसीज जाता है। दरअसल, एक दिव्यांग ने प्रदेश के मुखिया से जब ये कहा कि उन्हें भारत-न्यूजीलैंड के बीच इंदौर में हो रहे मैच को मैदान से लाइव देखना है, लेकिन टिकट का इंतजाम नहीं हो पा रहा, तो ये सुनते ही सीएम डॉ. यादव ने बिना कोई देर किए उनके लिए टिकट का प्रबंध कर दिया। दिव्यांग ने ये अपील वीडियो के जरिये की थी। इच्छा पूरी होने के बाद दिव्यांग ने सीएम डॉ. यादव को धन्यवाद भी दिया। गौरतलब है कि, भारत-न्यूजीलैंड मैच लाइव देखने की अपील उज्जैन के बड़नगर तहसील के गांव बमनापानी के दिव्यांग अभिषेक सोनी ने की। उन्होंने इस अपील का वीडियो बनाया और सोशल मीडिया पर डाल दिया। इस बात की जानकारी जब मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव को लगी तो उन्होंने दिव्यांग की इच्छा पूरी करने में एक पल नहीं लगाया।   कई बार पेश की मानवता की मिसाल बता दें, जब से मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने मध्यप्रदेश की बागडोर संभाली है, तब से उन्होंने कई बार मानवता की मिसाल पेश की है। उन्होंने एक आम आदमी की तरह जनता से व्यवहार किया है। सीएम डॉ. यादव कभी यूपीआई पेमेंट कर आम खरीदे देखे जा सकते हैं, तो कहीं भी जनता के साथ चाय पीते देखे जा सकते हैं। एक बार वे भुट्टा खरीदने बाजार में उतर गए और बच्चे को दुलार किया। इस वाक्ये की तस्वीरें सोशल मीडिया पर वायरल हुई थीं। इसी तरह एक कार्यक्रम में उन्होंने कहा था कि मुख्यमंत्री आवास किसी मेरा आवास नहीं, बल्कि जनता का आवास है।

आग से जला मेडिकल स्टोर, बीमा क्लेम ठुकराने पर कंपनी को पड़ा महंगा—5.13 लाख भुगतान के निर्देश

भोपाल गाढ़े वक्त में बीमा दावे का भुगतान करने से मना करने की प्रवृत्ति पर उपभोक्ता आयोग ने तगड़ी चोट की है। भोपाल जिला उपभोक्ता आयोग ने अपने एक फैसले में उपभोक्ता को राहत देते हुए उसे पांच लाख 13 हजार रुपये का बीमा दावा भुगतान का आदेश दिया है। मेडिकल स्टोर में आग लगने से उपभोक्ता का सारा माल जल गया, बीमा कंपनी ने नुकसान की भरपाई से पल्ला झाड़ लिया था। ऋण और बीमा का विवरण गांधीनगर निवासी रमेश मेडिकल स्टोर के संचालक मंटू भारती ने अपनी दुकान के लिए बैंक से ऋण लिया था, जिसके तहत उन्होंने टाटा एआईजी से बीमा कराया था। वे नियमित रूप से ढाई हजार रुपये प्रीमियम का भुगतान कर रहे थे। दुकान का बीमा 21 मई 2022 से मई 2024 तक प्रभावी था।   अग्निकांड और नुकसान का आकलन इसी बीमित अवधि के दौरान, 30 जून 2024 की रात करीब दो से तीन बजे के बीच दुकान में भीषण आग लग गई। इस अग्निकांड में दवाइयां और अन्य सामग्री जलने से संचालक को लगभग 10 लाख रुपये का वित्तीय नुकसान हुआ। पीड़ित ने बीमा क्लेम के लिए आवेदन किया। कंपनी द्वारा नियुक्त सर्वेयर ने मौके का मुआयना कर 5.05 लाख रुपये के नुकसान की पुष्टि की थी। इसके बावजूद, बीमा कंपनी ने दस्तावेजों में विसंगति का हवाला देते हुए क्लेम को पूरी तरह खारिज कर दिया। उपभोक्ता आयोग का फैसला और सख्त टिप्पणी न्याय की गुहार लेकर पीड़ित ने मार्च 2025 में उपभोक्ता आयोग में याचिका दायर की। जिला आयोग के अध्यक्ष योगेश दत्त शुक्ल व सदस्य डा. प्रतिभा पांडेय की बेंच ने टाटा एआईजी जनरल इंश्योरेंस कंपनी को आदेश दिया है कि वह गांधी नगर स्थित रमेश मेडिकल स्टोर के संचालक को क्षतिपूर्ति के रूप में 5.13 लाख रुपये का भुगतान करे। आयोग ने सख्त टिप्पणी करते हुए कहा कि एक व्यवसायी का रोजगार छिन गया और कंपनी राहत देने के बजाय कागजी विसंगतियों का बहाना बनाती रही। उपभोक्ता मामले की अधिवक्ता मोना पालीवाल ने कहा कि इस मामले की सुनवाई के दौरान आयोग ने कहा कि जब सर्वेयर ने नुकसान का आकलन कर लिया था, तो कम से कम उतनी राशि का भुगतान तत्काल किया जाना चाहिए था। कागजी विसंगतियों के आधार पर किसी का हक नहीं मारा जा सकता।

पशुपालन एवं पशु कल्याण को लेकर प्रदेश भर में चलेगा एक माह का जागरूकता अभियान

पशुपालकों, किसानों, छात्र-छात्राओं को पशुपालन एवं डेयरी से संबंधित योजनाओं एवं पशु कल्याण के बारे में किया जाएगा जागरूक राज्य, जिला एवं विकासखंड स्तर पर आयोजित की जाएगी विभिन्न गतिविधियां भोपाल भारत सरकार के मत्स्यपालन, पशुपालन एवं डेयरी विभाग द्वारा पशुपालकों, किसानों, छात्र-छात्राओं को पशुपालन एवं डेयरी से संबंधित योजनाओं एवं पशु कल्याण के बारे में जागरूक करने के लिए पशुपालन एवं पशु कल्याण जागरूकता माह का आयोजन किया जा रहा है। जो 13 फरवरी 2026 तक चलेगा। केंद्रीय पशुपालन एवं डेयरी विभाग के निर्देशानुसार प्रदेश में भी पशुपालन एवं पशु कल्याण जागरूकता माह का आयोजन किया जाएगा। एक माह तक चलने वाले कार्यक्रम को लेकर संचालक पशुपालन एवं डेयरी डॉ. पीएस पटेल ने सभी जिलों को निर्देश भी जारी कर दिए हैं। संचालक पशुपालन एवं डेयरी विभाग ने बताया कि यह अभियान राज्य, जिला एवं विकासखण्ड स्तर पर विभिन्न जागरूकता एवं हितग्राही मूलक गतिविधियों के माध्यम से संचालित होगा। अभियान के अंतर्गत पशुकल्याण, पशु चिकित्सा सेवाओं, उन्नत पशुपालन, डेयरी, बकरी एवं मुर्गी पालन से संबंधित योजनाओं के साथ ही केंद्र एवं राज्य सरकार द्वारा पशुपालन से संबंधित चलाई जा रही हितग्राही मूलक योजनाओं के बारे में पशुपालकों को जागरूक किया जाएगा। इसके लिए संगोष्ठियां, ऑनलाइन वेबिनार, युवा संवाद, गोशालाओं एवं पशु कल्याण संस्थानों में कार्यक्रम आयोजित किए जाएंगे। साथ ही स्कूलों एवं कॉलेजों में विभागीय दलों द्वारा भ्रमण कर छात्र-छात्राओं को पशुपालन एवं पशु कल्याण की जानकारी दी जाएगी। जिले एवं विकासखण्ड स्तर पर सभी वेट्स-पेरावेट्स, गोसेवक-मैत्री कार्यकर्ता, कृषि विज्ञान केंद्र, राज्य पशुधन एवं कुक्कुट विकास निगम, दुग्ध संघों के अधिकारी-कर्मचारी, स्वसहायता समूहों के सदस्य एवं पशु-सखी के समन्वय से अभियान का प्रभावी क्रियान्वयन सुनिश्चित किया जाएगा।

कान्हा से वीरांगना दुर्गावती टाइगर रिज़र्व के लिये नर बाघ रवाना

भोपाल वन्यजीव संरक्षण की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम कान्हा टाइगर रिज़र्व से एक नर बाघ को 18 जनवरी को सुरक्षित रूप से वीरांगना दुर्गावती टाइगर रिज़र्व (नौरादेही) के लिए रवाना कर दिया गया है। नर बाघ को पेंच टाइगर रिजर्व के रूखड़ परिक्षेत्र, सिवनी से रेस्क्यू किया गया था। उस समय बाघ शावक की उम्र लगभग 4 से 5 माह थी। इसके पश्चात बाघ को कान्हा टाइगर रिज़र्व के मुक्की स्थित घोरेला रिवाइल्डिंग बाड़ा में पालन-पोषण कर प्राकृतिक शिकार एवं स्वतंत्र विचरण के लिये प्रशिक्षित किया गया। वर्तमान में बाघ की उम्र लगभग 33 से 35 माह है तथा वह पूर्णतः स्वस्थ एवं जंगल में स्वतंत्र जीवन के लिए सक्षम पाया गया है। विशेषज्ञ परामर्श के आधार पर यह निर्णय लिया गया कि बाघ को ऐसे संरक्षित क्षेत्र में छोड़ा जाए जहाँ बाघों का घनत्व कम हो और पर्याप्त आवास उपलब्ध हो। बाघ को वन्यप्राणी चिकित्सकों एवं वैज्ञानिकों द्वारा निश्चेत कर उसके शरीर के आवश्यक जैविक मापदंडों को विधिवत रूप से अभिलेखित किया गया। विशेषज्ञों की सतत निगरानी में तथा निर्धारित मानक प्रोटोकॉल के अनुरूप बाघ का सेटेलाइट रेडियो कॉलर पहनाकर वीरांगना दुर्गावती टाइगर रिज़र्व (नौरादेही) में सुरक्षित स्थानांतरण किया गया। टाइगर रिज़र्व में बाघ के दीर्घकालीन संरक्षण के लिये प्राकृतिक एवं अनुकूल आवास उपलब्ध है, जिससे वह स्वाभाविक रूप से स्वतंत्र विचरण कर सकेगा। यह प्रक्रिया क्षेत्र संचालक, कान्हा टायगर रिजर्व श्री रवीन्द्र मणि त्रिपाठी के मार्गदर्शन में सम्पन्न की गई। इस पूरे स्थानांतरण प्रक्रिया के दौरान उप संचालक (कोर) श्री पुनीत गोयल, उप संचालक (बफर) सुश्री अमीथा के.बी, वन्यप्राणी चिकित्सक, कान्हा टाइगर रिजर्व डॉ. संदीप अग्रवाल, राज्य वन अनुसंधान संस्थान, जबलपुर डॉ. अनिरूद्ध मजूमदार एवं अन्य विशेषज्ञ दल तथा अन्य अधिकारी/कर्मचारी उपलब्ध रहे।  

किसानों की अगली पीढ़ी सड़क पर: पांगरी बांध मुआवजे को लेकर बुरहानपुर में बच्चों का आंदोलन

बुरहानपुर जिले की पांगरी बांध परियोजना के तहत भूमि डूब में जाने से प्रभावित किसानों का आंदोलन लगातार उग्र होता जा रहा है। मुआवजे को लेकर सरकार और प्रशासन से संतोषजनक जवाब न मिलने के कारण किसान लंबे समय से विरोध प्रदर्शन कर रहे हैं। बीते महीनों में किसान पत्थर खाओ आंदोलन, भैंस के आगे बीन बजाओ, अर्ध नग्न प्रदर्शन जैसे अनूठे तरीकों से अपना विरोध जता चुके हैं। आंदोलन में बच्चों की एंट्री रविवार को आंदोलन ने एक नया रूप ले लिया, जब प्रभावित किसानों के छोटे-छोटे बच्चों ने आंदोलन की बागडोर अपने हाथ में ले ली। बच्चों ने हाथों में तख्तियां लेकर मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव के नाम पत्र लिखा और जमीन का दोगुना मुआवजा देने की मांग की। तख्तियों पर “हमें न्याय चाहिए” और “जय जवान जय किसान” जैसे नारे लिखे हुए थे।   प्रशासन पर कानून तोड़ने का आरोप आंदोलन का नेतृत्व कर रहे डॉ. रवि कुमार पटेल ने आरोप लगाया कि प्रशासन भूमि अधिग्रहण कानून को तोड़-मरोड़ कर किसानों के सामने प्रस्तुत कर रहा है। उन्होंने कहा कि प्रभावित किसानों को विधिवत दो गुना मुआवजा और सांत्वना राशि मिलनी चाहिए। प्रशासन की मौजूदा प्रक्रिया कानून के विपरीत है, जिसके खिलाफ कार्रवाई होनी चाहिए। 300 से अधिक परिवार प्रभावित पांगरी मध्यम सिंचाई परियोजना के तहत पांगरी, बसाली और नागझिरी गांवों के 300 से अधिक परिवार प्रभावित हुए हैं। इन गांवों की लगभग 287 हेक्टेयर भूमि बांध के डूब क्षेत्र में चली गई है। यह भूमि गन्ना, केला और कपास जैसी व्यावसायिक फसलों के लिए जानी जाती थी। विस्थापन योजना का अभाव किसानों का आरोप है कि जल संसाधन विभाग ने न तो प्रभावित परिवारों के पुनर्वास और विस्थापन की कोई ठोस योजना बनाई है और न ही परियोजना से जुड़े आवश्यक सर्वे कराए गए हैं। जिला प्रशासन कलेक्टर दर से भूमि का मूल्य और उतनी ही पारितोषिक राशि दे रहा है, जिसे किसान अपर्याप्त बता रहे हैं। दो बार हो चुकी बैठकें, समाधान नहीं डॉ. रवि पटेल के अनुसार मुआवजे को लेकर जिला प्रशासन और जल संसाधन विभाग के अधिकारियों के साथ दो बार बैठक हो चुकी है। किसान जल संसाधन मंत्री और जिले के प्रभारी मंत्री तुलसी सिलावट से भी मुलाकात कर चुके हैं। मंत्री ने अधिकारियों को समस्या सुलझाने के निर्देश दिए थे, लेकिन अब तक कोई ठोस कार्रवाई नहीं हुई है। निर्माण कार्य भी प्रभावित मुआवजा विवाद के चलते बांध के बाद नहरों और अन्य निर्माण कार्य भी प्रभावित हो रहे हैं। किसानों का कहना है कि जब तक उन्हें कानून के अनुसार पूरा मुआवजा नहीं मिलेगा, तब तक उनका आंदोलन जारी रहेगा। इस दौरान नंदू पटेल, राहुल राठौर, संजय चौकसे, माधो नाटो, कालू चौकसे, ओमप्रकाश सहित बड़ी संख्या में किसान मौजूद रहे।

भैरवनाथ मंदिर में उप मुख्यमंत्री की भव्य पूजा-अर्चना

मुख्यमंत्री डॉ. यादव के दौरे की तैयारियों का लिया जायजा भोपाल उप मुख्यमंत्री श्री राजेन्द्र शुक्ल ने रीवा के गुढ़ स्थित नवनिर्मित भैरवनाथ मंदिर में पूजा-अर्चना की। उन्होंने गजमाला अर्पित करके भगवान भैरवनाथ की पूजा की। उप मुख्यमंत्री श्री शुक्ल ने कहा कि भैरवनाथ अत्यंत प्राचीन धार्मिक स्थल है। इसका धार्मिक के साथ-साथ पर्यटन के रूप में विकास किया जा रहा है। यहाँ दिनोंदिन बढ़ती श्रद्धालुओं की संख्या से मंदिर का महत्व अपने आप स्पष्ट हो जाता है। वर्षों से भैरवनाथ की खुले में रखी प्रतिमा पर अब भव्य मंदिर तैयार हो गया है। इसका इसी महीने मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव लोकार्पण करेंगे। भैरवनाथ मंदिर रीवा के प्रमुख पर्यटन स्थल के रूप में विकसित हो रहा है। मुख्यमंत्री डॉ. यादव के दौरे की तैयारियों का लिया जायजा उप मुख्यमंत्री श्री शुक्ल ने मुख्यमंत्री डॉ. यादव के प्रस्तावित दौरे की तैयारियों का जायजा लिया। उन्होंने हेलीपैड, मुख्य कार्यक्रम स्थल तथा मंदिर का निरीक्षण किया। उप मुख्यमंत्री श्री शुक्ल ने कहा कि कार्यक्रम में बड़ी संख्या में आमजन शामिल होंगे। वाहनों की पार्किंग, बैठक व्यवस्था, सुरक्षा व्यवस्था, पेयजल व्यवस्था तथा कार्यक्रम से जुड़े अन्य प्रबंधों पर विशेष ध्यान दें। मुख्यमंत्री डॉ यादव के दौरे की तैयारियों में किसी तरह की कोरकसर बाकी न रखें। मंदिर से जुड़े निर्माण कार्य 25 जनवरी तक हर हाल में पूरे कराएं। उप मुख्यमंत्री श्री शुक्ल ने कहा कि भैरवनाथ मंदिर धार्मिक, ऐतिहासिक और पर्यटन की दृष्टि से अत्यंत महत्वपूर्ण है। इसके विकास से क्षेत्र में पर्यटन को बढ़ावा मिलेगा। विधायक गुढ़ ने मुख्यमंत्री के प्रस्तावित कार्यक्रम की रूपरेखा के संबंध में जानकारी दी। इस अवसर पर जिला पंचायत के मुख्य कार्यपालन अधिकारी श्री मेहताब सिंह गुर्जर, स्थानीय जन प्रतिनिधि और विभागीय अधिकारी उपस्थित रहे।  

सड़क हादसे में मातम: तेज रफ्तार कार ने मजदूरों को रौंदा, दो की गई जान

जबलपुर एमपी के जबलपुर में रविवार दोपहर एक दर्दनाक सड़क हादसा हो गया, जहां एक अनियंत्रित तेज रफ्तार कार ने सड़क किनारे काम कर रहे 13 मजदूरों को कुचल दिया। इस भीषण दुर्घटना में दो मजदूरों की मौके पर ही मौत हो गई, जबकि 11 अन्य गंभीर रूप से घायल हो गए हैं। डिवाइडर रेलिंग लगाने का काम कर रहे थे मजदूर अतिरिक्त पुलिस अधीक्षक पल्लवी शुक्ला के अनुसार, यह घटना बरेला थाना क्षेत्र के अंतर्गत सिग्मा कॉलोनी के सामने एकता चौक के पास दोपहर करीब 2 बजे हुई। उस समय ये सभी मजदूर सड़क पर डिवाइडर रेलिंग लगाने के काम में लगे थे और काम के बीच में लंच कर रहे थे, तभी बेकाबू कार उन्हें रौंदते हुए निकल गई।   एक की हालत बेहद नाजुक, अन्य का इलाज जारी पुलिस ने बताया कि सभी हताहत मजदूर मंडला जिले के रहने वाले हैं। घायलों को इलाज के लिए तुरंत जबलपुर मेडिकल कॉलेज में भर्ती कराया गया है, जहां एक की हालत बेहद नाजुक बनी हुई है। हादसे के बाद कार चालक मौके से फरार हो गया, जिसकी तलाश में पुलिस जुटी हुई है। स्थानीय पुलिस ने मामला दर्ज कर सीसीटीवी फुटेज खंगालना शुरू कर दिया है।

इंडिया एआई मिशन-देश को बना रहा है एआई अवसंरचना की वैश्विक शक्ति : मुख्यमंत्री डॉ. यादव

भोपाल मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने कहा है कि इंडिया एआई मिशन-भारत को राष्ट्रीय स्तर की एआई अवसंरचना विकसित करने की दिशा में आगे बढ़ा रहा है। वैश्विक एआई रैंकिंग-2025 में भारत ने तीसरा स्थान प्राप्त किया है। एआई को उत्पादकता बढ़ाने तथा देश की आईटी प्रतिभा, जनसांख्यिकीय लाभांश और डिजिटल पब्लिक इंफ्रास्ट्रक्चर के प्रभावी उपयोग के लिए रणनीतिक साधन के रूप में अपनाया गया है। स्वदेशी डेटासेट्स, भारतीय भाषाओं पर आधारित फाउंडेशन मॉडल्स, सब्सिडी आधारित कंप्यूटर अवसंरचना और सुरक्षित व भरोसेमंद एआई गवर्नेंस फ्रेमवर्क इंडिया एआई की प्रमुख विशेषताएँ हैं। एआई कोश और जीपीयू इंफ्रास्ट्रक्चर से स्टार्टअप को बढ़ावा उच्च गुणवत्ता वाले डेटासेट्स प्रभावी एआई प्रणालियों की नींव होते हैं। ‘एआई कोश’ प्लेटफॉर्म पर 6,250 से अधिक स्वदेशी क्यूरेटेड डेटासेट्स उपलब्ध हैं, जिनके साथ सैंडबॉक्स टूल्स और निःशुल्क कंप्यूटर एक्सेस प्रदान किया जा रहा है। सब्सिडाइज्ड दरों पर 38 हजार जीपीयू उपयोग में लाए जा रहे हैं। इससे बड़े पैमाने पर एआई नवाचार को गति मिली है। 'इनोवेशन सेंटर' के माध्यम से 12 स्टार्टअप को स्वदेशी एलएलएम और एसएलएम विकसित करने में सहयोग दिया जा रहा है। स्वास्थ्य और नागरिक सेवाओं में एआई के प्रभावी उदाहरण केआरएआई डायग्नोस्टिक्स ने छाती के एक्स-रे से एआई के माध्यम से टीबी स्क्रीनिंग की प्रक्रिया विकसित की है। उदाहरण प्रस्तुत किया। इंडिया एआई के सहयोग से यह तकनीक 105 से अधिक देशों में लागू हो चुकी है और इसे एफडीए की स्वीकृति भी प्राप्त है। कंवर्ज इन (नोकोबा) सरकारी कॉल सेंटर्स और शिकायत निवारण प्रणालियों में एआई एजेंट्स के उपयोग पर काम कर रहा है। व्हाट्सएप आधारित संवाद प्रणाली, शत-प्रतिशत कॉल ऑडिटिंग और एसओपी अनुपालन से परिचालन लागत घटी है और नागरिक संतुष्टि में उल्लेखनीय वृद्धि हुई है। एआई प्रतिभा निर्माण पर विशेष जोर इंडिया एआई मिशन के ‘एआई फॉर ऑल’ कार्यक्रम के अंतर्गत उद्योग-संरेखित पाठ्यक्रम, फेलोशिप्स और देशभर में 570 एआई एवं डेटा लैब्स स्थापित की जा रही हैं। यूजी, पीजी और पीएचडी विद्यार्थियों को स्टाइपेंड, मेंटरशिप और कंप्यूटर एक्सेस उपलब्ध कराया जा रहा है। शासन में जीआईएस और एआई का एकीकृत उपयोग ‘जिला जीआईएस प्लानिंग सिस्टम’ के माध्यम से जमीनी स्तर पर योजना और निगरानी को सशक्त किया जा रहा है। एआई, जीआईएस, ड्रोन और सैटेलाइट इमेजरी के एकीकृत उपयोग से शहरी नियोजन, जल प्रबंधन और खनन निगरानी में पारदर्शिता लाई जा रही है। भारत प्रारंभिक डिजिटलीकरण से आगे बढ़कर अब बड़े पैमाने पर डिजिटल सार्वजनिक सेवा वितरण में उल्लेखनीय प्रगति कर चुका है। आधार, यूपीआई, कोविन, डिजिलॉकर, भाषिणी और ओएनडीसी इस परिवर्तन की मजबूत आधारशिला बन गये हैं। डिजिटल पब्लिक इंफ्रास्ट्रक्चर के साथ एआई के एकीकरण से स्वास्थ्य जांच, बहुभाषी सेवा वितरण और निर्णय समर्थन प्रणालियों में शासन की दक्षता कई गुना बढ़ाई जा सकती है। भाषाई समावेशन डिजिटल समानता का आधार है। नेतृत्व-आधारित परिवर्तन और क्षमता निर्माण एकीकृत बैक-एंड प्लेटफॉर्म्स के लिये आवश्यक हैं। आर्थिक विकास एवं सामाजिक कल्याण के लिए एआई एआई उत्पादकता वृद्धि, रोजगार सृजन, नवाचार और समावेशी विकास का सशक्त माध्यम बन गई है। एआई को केवल तकनीकी समाधान नहीं, बल्कि मानव-केंद्रित और सामाजिक प्रभाव आधारित दृष्टिकोण के साथ अपनाये जाने की आवश्यकता है। कृषि में एआई आधारित मृदा परीक्षण और सलाह प्रणालियों को किसानों की निर्णय प्रक्रिया को सरल बनाने वाला तथा स्वास्थ्य क्षेत्र में एआई आधारित डायग्नोस्टिक्स रोग पहचान में तेजी लाने वाला प्रभावी उपकरण बन गया है। एमएसएमई और टियर-2 व टियर-3 क्षेत्रों में एआई विस्तार के लिए मजबूत डिजिटल अवसंरचना, साझा डेटा प्लेटफॉर्म और उपयुक्त संस्थागत व्यवस्था की आवश्यकता है। सुरक्षित, लचीली और भविष्य के लिये तैयार डिजिटल एवं एआई अवसंरचना के निर्माण पर विशेष ध्यान दिया जा रहा है। एआई अब आकांक्षात्मक तकनीक नहीं, बल्कि सार्वजनिक सेवा वितरण, औद्योगिक प्रतिस्पर्धा और डिजिटल शासन की मूल आवश्यकता बन चुकी है। एआई अवसंरचना है भारत के दीर्घकालिक डिजिटल नेतृत्व की कुंजी सॉवरेन डेटा और कंप्यूटर अवसंरचना के रणनीतिक महत्व की दृष्टि से उच्च प्रदर्शन कंप्यूटिंग, स्वदेशी हार्डवेयर, सुरक्षित डेटा सेंटर और मजबूत सप्लाई चेन को राष्ट्रीय प्राथमिकताओं के अनुरूप विकसित करने की आवश्यकता है। गोपनीयता, अनुपालन, जवाबदेही और जोखिम प्रबंधन को एआई के पूरे जीवनचक्र में अंतर्निहित किया जाना चाहिए। भरोसेमंद और सुरक्षित एआई अवसंरचना भारत के दीर्घकालिक डिजिटल नेतृत्व की कुंजी है।  

सौर ऊर्जा के बढ़ते क्षेत्र से दिनों-दिन कम हो रही है पारंपरिक ऊर्जा संसाधनों पर निर्भरता : मुख्यमंत्री डॉ. यादव

भोपाल मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने कहा है कि मध्यप्रदेश सौर ऊर्जा के क्षेत्र में आगे बढ़ते हुए पारंपरिक ऊर्जा के संसाधनों पर अपनी निर्भरता दिनों दिन कम करता जा रहा है। प्रधानमंत्री श्री नरेन्द्र मोदी ने देश में वर्ष 2070 तक कार्बन फुट-प्रिंट को शून्य तक लाने और समाप्त होते जीवाश्म ईंधन के विकल्प तलाशने के लिए वर्ष 2030 तक 500 गीगावाट (अक्षय) नवीन एवं नवकरणीय ऊर्जा उत्पादन का महत्वाकांक्षी लक्ष्य निर्धारित किया है। इस राष्ट्रीय लक्ष्य को प्राप्त करने में मध्यप्रदेश पूर्ण समर्पण और प्रतिबद्धता के साथ योगदान दे रहा है। राज्य में पिछले 12 वर्षों में नवीन और नवकरणीय ऊर्जा के क्षेत्र में 14 प्रतिशत अभूतपूर्व वृद्धि हुई है, जिससे अब कुल ऊर्जा उत्पादन में सहभागिता 30 प्रतिशत से अधिक हो गई है। मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने कहा कि प्रधानमंत्री श्री मोदी ने गत वर्ष हुई ग्लोबल इन्वेस्टर्स समिट भोपाल में सौर ऊर्जा के क्षेत्र देश में मध्यप्रदेश की महत्वपूर्ण भूमिका को रेखांकित करते हुए बताया कि राज्य वर्तमान में लगभग 31 हजार मेगावाट की विद्युत उत्पादन क्षमता रखता है, जिसमें से 30% हरित ऊर्जा है। हमारे लिये गौरव की बात है कि मध्यप्रदेश के रीवा सोलर पार्क और देश के सबसे बड़े ओंकारेश्वर फ्लोटिंग सोलर प्लांट का भी उल्लेख पूरे देश में हो रहा है। इससे अक्षय ऊर्जा उत्पादन को नई दिशा मिली है। मध्यप्रदेश देश का पहला राज्य है, जिसने टेक्नोलॉजी एग्नोस्टिक रिन्यूएबल एनर्जी पॉलिसी लागू की है। इस नीति में सौर और पवन ऊर्जा को बढ़ावा देने के लिए निवेशकों को अनुकूल और लचीले अवसर प्रदान किए जा रहे हैं, जिससे ऊर्जा उत्पादन के क्षेत्र में नया आयाम जुड़ रहा है। मध्यप्रदेश अपनी भौगोलिक स्थिति और प्राकृतिक संसाधनों की प्रचुरता के कारण देश के अग्रणी ऊर्जा सरप्लस राज्यों में से एक है। राज्य सरकार पर्यावरण संरक्षण और ऊर्जा आत्म निर्भरता को प्राथमिकता देते हुए नवीन एवं नवकरणीय ऊर्जा के क्षेत्र में निरंतर प्रयासरत है। मध्यप्रदेश हरित ऊर्जा हब के रूप में उभर रहा है। वर्तमान में राज्य में 5 बड़ी सौर परियोजनाएँ संचालित हैं, जिनकी कुल उत्पादन क्षमता 2.75 गीगावाट (2,750 मेगावाट) है। सरकार की योजना वर्ष 2030 तक नवकरणीय ऊर्जा उत्पादन क्षमता को बढ़ाकर 20 गीगावाट (20,000 मेगावाट) करने की है। नवकरणीय ऊर्जा में 5.72 लाख करोड़ से अधिक के निवेश से 1.4 लाख से अधिक रोजगार के अवसर उपलब्ध होंगे। मध्यप्रदेश सरकार नवकरणीय ऊर्जा क्षेत्र में 5.21 लाख करोड़ रुपये का निवेश आकर्षित कर रही है, जिससे 1.46 लाख रोजगार सृजित होंगे। राज्य सरकार की यह पहल भारत के 'नेट ज़ीरो कार्बन लक्ष्य वर्ष-2070 को प्राप्त करने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाएगी। मध्यप्रदेश तेजी से नवकरणीय ऊर्जा क्षेत्र में देश का नेतृत्वकर्ता बन रहा है और आत्मनिर्भर भारत व स्वच्छ ऊर्जा मिशन में अग्रणी भूमिका निभाने के लिए तैयार है।  

इंदौर में आज होगा भारत और न्यूजीलैंड के बीच तीसरा वनडे मैच

इंदौर. भारत और न्यूजीलैंड के बीच रविवार को होने वाले वनडे मैच से पहले ही शहर में प्रशंसकों पर क्रिकेट का खुमार चढ़ गया है। इसकी एक झलक शनिवार को देखने मिली। जब से टीमें दोनों टीमें इंदौर पहुंची हैं अपने स्टार खिलाड़ियों को एक झलक पाने के लिए प्रशंसक टीम होटल और स्टेडियम के बाहर नजर आने लगे थे। बता दें कि इस समय भारत और न्यूजीलैंड के बीच तीन मैचों की सीरीज 1-1 से बराबरी पर है और इंदौर में जो भी टीम जीतेगी वह सीरीज पर कब्जा करेगी। ऐसे में इस मैच के लिए रोमांच और भी बढ़ गया है। किसी भी आयोजन को इंदौर की जनता किसी उत्सव की तरह मनाती है और शनिवार को भी नजारें अलग नहीं थे। इस मैच के लिए शहर में उत्सव का माहौल नजर आ रहा है। शनिवार को भी दिनभर होलकर स्टेडियम के आसपास की सड़कें क्रिकेट प्रशंसकों से पटी रहीं। युवाओं की संख्या इसमें ज्यादा थी। कई महिला-पुरुष अपने बच्चों को भी लेकर स्टेडियम की ओर पहुंचे थे कि किसी तरह स्टार खिलाड़ियों की एक झलक मिल जाए। बुजुर्गों की संख्या भी कम नही थी। कई प्रशंसक देर रात तक स्टेडियम के बाहर रोहित शर्मा, विराट कोहली, शुभमन गिल की जर्सी बेच रहे दुकानदारों से पसंदीदा खिलाड़ियों की जर्सी लेते भी दिखाई दिए। प्रशंसकों से घिरी टीम भारतीय टीम दोपहर के सत्र में अभ्यास के लिए होलकर स्टेडियम पहुंची थी। तभी से स्टेडियम में किसी तरह प्रवेश करने के लिए कई प्रशंसक जुगाड़ में लगे रहे। स्थिति यह हो गई कि स्टेडियम के बाहर और रेसकोर्स रोड पर बड़ी संख्या में प्रशंसक नजर आने लगे थे। करीब चार घंटे के अभ्यास के बाद जब भारतीय टीम के खिलाड़ी बस से बाहर निकलकर होटल की ओर जा रहे थे, तो प्रशंसक स्टार खिलाड़ियों की झलक पाने के लिए उमड़ पड़े और टीम बस प्रशंसकों से घिर गई। सभी मोबाइल से फोटो और वीडियो बनाते रहे। वहां मौजूद पुलिसकर्मी भी इन्हें काबू नहीं कर पा रहे थे। बस प्रशंसकों की इस भीड़ में धीमी गति से बमुश्किल बाहर निकली। टीम के स्टेडियम से निकलने के काफी देर बाद तक प्रशंसक वहीं डटे रहे। यह भी जानें 8वां वनडे मैच खेला जाएगा होलकर स्टेडियम में 29वां अंतरराष्ट्रीय वनडे खेला जाएगा इंदौर में 7 मैच हुए हैं इंदौर के होलकर स्टेडियम में अभी तक। सभी में भारतीय टीम ने जीत दर्ज की है। 418 रन भारत ने बनाए थे इंदौर के होलकर स्टेडियम में वेस्टइंडीज के खिलाफ 2011 में। यह भारत का अभी तक का सर्वोच्च स्कोर है। 399 रन बनाए थे भारत ने ऑस्ट्रेलिया के खिलाफ 2023 में, यह होलकर स्टेडियम में भारत का दूसरा सर्वोच्च स्कोर है। 2023 के बाद पहली बार न्यूजीलैंड की टीम इंदौर के होलकर स्टेडियम में वनडे मैच खेलेगी। यह इस स्टेडियम में दोनों के बीच दूसरा मैच है। 90 रनों से जीती थी भारतीय टीम न्यूजीलैंड के खिलाफ खेले गए पिछले वनडे मैच में। मैच के दौरान साफ पानी की चिंता… होलकर स्टेडियम में मैच देखने आने वाले प्रशंसकों सहित तमाम लोगों के लिए स्वच्छ पानी के विशेष प्रबंध किए गए हैं। मध्य प्रदेश क्रिकेट संगठन (एमपीसीए) द्वारा आरओ वाटर के जार स्टेडियम परिसर में लगवाए जा रहे हैं। मैच के दौरान करीब 15 हजार पानी के जार लगाए जाएंगे, जिसमें तीन लाख लीटर पानी की खपत रहेगी। साथ ही कचरा प्रबंधन के लिए भी टीम तैनात की गई है। मैच के दौरान निकलने वाले कचरे से खाद बनाने के लिए परिसर में ही पहले चरण की प्रक्रिया पूरी की जाएगी। मध्य प्रदेश क्रिकेट संगठन (एमपीसीए) के प्रशासनिक अधिकारी रोहित पंडित ने बताया कि स्टेडियम में होने वाले सभी अंतरराष्ट्रीय मैचों के दौरान शुद्ध पेयजल की व्यवस्था की जाती है। इस बार भी आरओ का पानी प्रशंसकों के लिए निश्शुल्क उपलब्ध रहेगा। स्टेडियम परिसर में विभिन्न स्थानों पर पानी के काउंटर लगाए गए हैं, जिससे किसी भी प्रशंसक को परेशान न होना पड़े। स्टेडियम की गैलरी में पानी या अन्य सामग्री ले जाने की अनुमति नहीं होगी। स्टेडियम में मैच के दौरान जो भी कचरा निकलता है उसे भी खाद बनाने में इस्तेमाल किया जाता है। कचरे से खाद बनाने के क्रम में एक चरण स्टेडियम में ही पूरा किया जाता है। इसके लिए भी स्वच्छताकर्मियों की पूरी टीम मुस्तैद रहेगी। हमारा उद्देश्य है कि स्टेडियम में मैच देखने आने वाले बेहतर अनुभव लेकर लौटें।