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उप मुख्‍यमंत्री जगदीश देवड़ा का आगमन सोमवार को

जबलपुर प्रदेश के उप मुख्‍यमंत्री एवं जबलपुर जिले के प्रभारी मंत्री जगदीश देवड़ा का सोमवार 12 जनवरी की सुबह 5.35 बजे इंदौर-जबलपुर सुपरफास्‍ट एक्‍सप्रेस द्वारा भोपाल से जबलपुर आगमन होगा। देवड़ा यहां सुबह 9 बजे मॉडल स्‍कूल में स्वामी विवेकानन्द की जयंती "युवा दिवस" पर आयोजित सामूहिक सूर्य नमस्‍कार के जिला स्तरीय कार्यक्रम में सहभागिता करेंगे तथा स्‍थानीय कार्यक्रमों में शामिल होने के बाद शाम 5.30 बजे श्रीधाम एक्‍सप्रेस द्वारा भोपाल प्रस्‍थान करेंगे।

बिजली व्यवस्था प्रभावित न हो- इसलिये चालू

220 के वी  सिस्टम में किया गया मेंटेनेंस एम.पी. ट्रांसको की मेंटेनेंस टीम का उल्लेखनीय कार्य जबलपुर मध्यप्रदेश की राजधानी भोपाल की विद्युत आपूर्ति को निर्बाध बनाए रखने के उद्देश्य से मध्यप्रदेश पावर ट्रांसमिशन कंपनी (एम.पी. ट्रांसको) की  ट्रांसमिशन लाइन मेंटेनेंस टीम द्वारा एक सराहनीय तकनीकी कार्य सफलतापूर्वक पूरा किया गया। गत दिवस 400 के.वी. सबस्टेशन सूखी सेवनिया, भोपाल में 220 के.वी. मेन बस के आइसोलेटर के पार्ट्स क्षतिग्रस्त हो गए थे। सामान्य परिस्थितियों में इसकी मरम्मत हेतु शटडाउन लेना आवश्यक था, किंतु इससे राजधानी भोपाल सहित आसपास के क्षेत्रों की विद्युत आपूर्ति प्रभावित होने की आशंका थी। हाट लाइन मेंटेनेंस तकनीक से किया गया महत्वपूर्ण सुधार कार्य इस चुनौतीपूर्ण स्थिति में अतिरिक्त मुख्य अभियंता  श्री प्रदीप राघव ने बिना विद्युत आपूर्ति बाधित किए मेंटेनेंस कार्य संपन्न कराने का निर्णय लिया। उनके  और कार्यपालन अभियंता श्री अनुराग पंत के मार्गदर्शन में ट्रांसमिशन लाइन मेंटेनेंस भोपाल की हॉट लाइन में प्रशिक्षित टीम ने इन्सुलेटेड प्लेटफॉर्म पर बेयर हैंड तकनीक का उपयोग करते हुए, सभी सुरक्षा मानकों का पालन कर 220 के.वी. आइसोलेटर जॉ को सफलतापूर्वक बदला। यह कार्य लाइन मेंटेनेंस स्टाफ श्री जाधव पवार एवं श्री मधुर मौसम के नेतृत्व में किया गया। इस दौरान 400 के.वी. सबस्टेशन भोपाल के सहायक अभियंता श्री आर. के. गायकी एवं वरिष्ठ सबस्टेशन मेंटेनेंस कर्मी श्री रणवीर सिंह का भी महत्वपूर्ण सहयोग रहा। तकनीकी दक्षता के कारण संभव हुआ जटिल कार्य उल्लेखनीय है कि दोनों 220 के.वी. मेन बस पर लगभग 1000 मेगावाट का लोड था, जो एक बस की क्षमता से कहीं अधिक था। यदि 220 के.वी. मेन बस का शटडाउन लिया जाता, तो राजधानी भोपाल सहित अन्य क्षेत्रों में व्यापक विद्युत आपूर्ति बाधित हो सकती थी। एम.पी. ट्रांसको की तकनीकी दक्षता, त्वरित निर्णय क्षमता एवं प्रशिक्षित मानव संसाधन के कारण यह जटिल कार्य बिना किसी व्यवधान के सफलतापूर्वक पूरा किया गया, जिससे राजधानी की विद्युत व्यवस्था सुरक्षित और सुचारू बनी रही। सादर प्रकाशनार्थ शशिकांत ओझा जनसंपर्क अधिकारी मध्यप्रदेश पावर ट्रांसमिशन कंपनी ऊर्जा विभाग मध्यप्रदेश शासन जबलपुर

राज्य ओपन स्कूल शिक्षा बोर्ड के नाम पर साइबर ठगी से रहे सावधान

राज्य ओपन स्कूल शिक्षा बोर्ड ने जारी किया हेल्पलाइन 0755-2671066 नंबर भोपाल प्रदेश में राज्य ओपन स्कूल शिक्षा बोर्ड के परीक्षार्थियों के अभिभावकों से साइबर ठगों द्वारा ठगी किए जाने का मामला सामने आया है। ठगों द्वारा स्वयं को बोर्ड से संबंधित बताकर परीक्षार्थियों को पास कराने के नाम पर धनराशि मांगी जा रही है। धोखाधड़ी की जा रही है। इधर, मामला सामने आने के बाद राज्य ओपन स्कूल शिक्षा बोर्ड ने विद्यार्थियों और अभिभावकों के लिए 0755-2671066 हेल्पलाइन नंबर जारी किया है। साथ ही यह भी स्पष्ट किया है कि जिन नामों से फोन कॉल किए जा रहे हैं, उस नाम का कोई भी व्यक्ति राज्य ओपन स्कूल शिक्षा बोर्ड में कार्यरत नहीं है। इस प्रकार से किसी को पास कराना पूर्णतः असंभव है। परीक्षार्थियों का परिणाम केवल उत्तर पुस्तिकाओं में लिखे गए उत्तरों के मूल्यांकन के आधार पर ही घोषित किया जाता है। राज्य ओपन स्कूल बोर्ड द्वारा ऐसे साइबर ठगों के विरुद्ध प्राथमिकी दर्ज कर वैधानिक कार्यवाही की जा रही है। विद्यार्थियों एवं अभिभावकों से अपील है कि वे इस प्रकार के किसी भी प्रलोभन में न आएं और स्वयं तथा अपने बच्चों को साइबर ठगी से सुरक्षित रखें। किसी भी प्रकार की जानकारी, शिकायत अथवा सत्यापन के लिए बोर्ड द्वारा जारी किए गए हेल्पलाइन पर संपर्क किया जा सकता है।  

आंध्र प्रदेश की प्रसिद्ध पुंगनूर गाय बनी आकर्षण का केंद्र

जम्बूरी मैदान, भोपाल में आयोजित कृषक कल्याण वर्ष–2026 के शुभारंभ अवसर पर पशुपालन एवं डेयरी विभाग द्वारा लगाई गई है विशेष प्रदर्शनी भोपाल मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव के नेतृत्व में प्रदेश सरकार द्वारा किसानों को आत्मनिर्भर एवं सशक्त बनाने के उद्देश्य से मध्यप्रदेश सरकार द्वारा वर्ष 2026 को “कृषक कल्याण वर्ष” के रूप में मनाया जा रहा है। इसी क्रम में रविवार को जम्बूरी मैदान, भोपाल में आयोजित “कृषक कल्याण वर्ष–2026” के शुभारंभ अवसर पर पशुपालन एवं डेयरी विभाग द्वारा विशेष प्रदर्शनी का आयोजन किया गया। प्रदर्शनी में गिर, साहीवाल, थारपारकर तथा आंध्र प्रदेश की प्रसिद्ध पुंगनूर गाय की प्रदर्शनी लगाई गई। पुंगनूर गाय विशेष आकर्षण का केंद्र रही। इस अवसर पर विभाग के अधिकारियों द्वारा कार्यक्रम में उपस्थित किसानों एवं पशुपालकों को दुग्ध उत्पादन बढ़ाने के उद्देश्य से पशु पोषण, पशु स्वास्थ्य एवं नस्ल सुधार के संबंध में जागरूक किया गया। पशुपालन एवं डेयरी विभाग द्वारा जम्बूरी मैदान में 5 से अधिक स्टॉल लगाए गए, जिनके माध्यम से किसानों और पशुपालकों को भारत सरकार एवं राज्य सरकार द्वारा संचालित विभिन्न जनकल्याणकारी योजनाओं की जानकारी दी गई। कार्यक्रम स्थल पर गोबर से निर्मित उत्पादों जैसे राम दरबार, महाकाल प्रतिमा, पंचगव्य उत्पाद, पूजा-पाठ सामग्री एवं सौंदर्य प्रसाधनों की आकर्षक प्रदर्शनी भी लगाई गई। इसके साथ ही विभाग द्वारा मुर्गीपालन एवं पशुपालन को बढ़ावा देने के उद्देश्य से प्रदेश के प्रसिद्ध कड़कनाथ मुर्गा एवं बकरी की विभिन्न प्रजातियों का सजीव प्रदर्शन किया गया। वहीं, सांची दुग्ध संघ द्वारा उत्पादित दुग्ध उत्पादों की प्रदर्शनी भी लगाई गई। स्वावलंबी एवं आत्मनिर्भर गोशालाओं पर विशेष जोर पशुपालन एवं डेयरी विभाग की महत्वपूर्ण स्वावलंबी गोशाला नीति–2025 तथा आत्मनिर्भर गोशाला मॉडल का भी विशेष प्रदर्शन किया गया, जिससे पशुपालकों को गोशालाओं को आर्थिक रूप से सशक्त बनाने की दिशा में प्रेरित किया गया।  

मध्यप्रदेश स्टार्ट अप समिट 2026 पहला दिन

इन्क्यूबेशन इकोसिस्टम को सुदृढ़ करने, कृषि-नवाचार को बढ़ावा देने और स्टार्टअप्स की निवेश-तैयारी पर केंद्रित भोपाल एमएसएमई विभाग द्वारा प्रदेश में स्‍टार्टअप इकोसिस्‍टम को सुदृढ़ करने के लिए किए जा रहे प्रयासों के तहत रविवार को मध्यप्रदेश स्टार्टअप समिट 2026 के पहले दिन का फोकस इन्क्यूबेशन इकोसिस्टम को सुदृढ़ करने, कृषि-नवाचार को बढ़ावा देने तथा स्टार्टअप्स की निवेश-तैयारी को सशक्त करने पर रहा। समिट में देशभर से स्टार्टअप्स, इन्क्यूबेटर्स, निवेशक एवं स्टार्टअप इकोसिस्टम से जुड़े 500 से अधिक हितधारक द्वारा सहभागिता की गई। समिट के पहले सत्र के रूप में “इन्क्यूबेटर सस्टेनेबिलिटी” विषय पर एक विशेष इन्क्यूबेटर मास्टर क्लास आयोजित की गई, जिसमें वैकुंठ प्रसाद एवीपी, आईआईएम बैंगलोर, प्रसाद मेनन, अध्यक्ष, इंडियन स्टार्टअप एंड इन्क्यूबेटर एसोसिएशन , प्रशांत सलवान प्रोफेसर रणनीति एवं अंतरराष्ट्रीय व्यापार, आईआईएम इंदौर तथा शगुन वाघ, सह-संस्थापक एवं प्रबंध निदेशक ने आइडियाबैज़, इन्क्यूबेशन मॉडल, उद्योग सहभागिता, फंडिंग एवं दीर्घकालिक स्थिरता जैसे महत्वपूर्ण विषयों पर विचार साझा किए गए। समिट में “एग्री एफपीओ को स्टार्टअप के रूप में विकसित करना – वैल्यू चेन ट्रांसफॉर्मेशन” विषय पर एक पैनल चर्चा हुई।विशेषज्ञों में किसान उत्पादक संगठनों को नवाचार-आधारित और स्केलेबल उद्यम के रूप में विकसित करने पर विमर्श हुआ। इस सत्र में द्वारिका सिंह, संस्थापक,आई एस ई डी इंडिया,एमानुएल मुर्रे, इन्वेस्टमेंट डायरेक्टर, कैस्पियन, स्टेट हेड डेवलपमेंट सर्विसेज, तथा अनिल जोशी, संस्थापक एवं मैनेजिंग पार्टनर, यूनिकॉर्न इंडिया वेंचर्स द्वारा सहभागिता की गई। सत्र का संचालन मनीषा पांडे, प्रोफेसर, रवीन्द्रनाथ टैगोर विश्वविद्यालय द्वारा किया गया। समिट में स्टार्टअप पिचिंग सेशन में क्वालिफायर राउंड आयोजित हुआ, जिसमें उभरते स्टार्टअप्स ने अपने नवाचार और बिज़नेस मॉडल को विशेषज्ञ जूरी के समक्ष प्रस्तुत किया गया। पहले दिन का समापन स्पीकर्स एवं निवेशकों के साथ विचार विमर्श के साथ हुआ, जिसका उद्देश्य स्टार्टअप्स एवं निवेशकों के मध्य सहयोग और संभावित निवेश अवसरों को बढ़ावा देना है।

मुख्यमंत्री ने ई-विकास, वितरण एवं कृषि उर्वरक आपूर्ति समाधान प्रणाली ऐप का किया शुभारंभ

भोपाल मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने कहा है कि प्रदेश के किसानों के लिए वर्ष 2026 नई उम्मीदों और नए अवसरों का वर्ष होगा। किसान हमारे अन्नदाता हैं, जो अपने परिश्रम से देश और समाज का उदर-पोषण करते हैं। किसानों को आत्मनिर्भर बनाकर उनकी समृद्धि सुनिश्चित करना ही सरकार का एकमात्र ध्येय है। मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने रविवार को भोपाल के जंबूरी मैदान में आयोजित विशाल किसान सम्मेलन में वर्ष 2026 को “कृषक कल्याण वर्ष” के रूप में मनाने की अधिकृत घोषणा की। मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने कहा कि सरकार किसानों की आमदनी बढ़ाने के लिए हर जरूरी कदम उठाएगी। आधुनिक तकनीक, उन्नत बीज, सिंचाई, भंडारण और बाजार तक बेहतर पहुंच के माध्यम से खेती को लाभ का व्यवसाय बनाया जाएगा। उन्होंने कहा कि कृषि केवल आजीविका का एक साधन ही नहीं, बल्कि प्रदेश की अर्थव्यवस्था की रीढ़ है। कृषि क्षेत्र के सशक्तिकरण में कोई कसर नहीं छोड़ी जाएगी। मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने किसान सम्मेलन के दौरान ई-विकास, वितरण एवं कृषि उर्वरक आपूर्ति सामधान प्रणाली (विकास पोर्टल) का शुभारंभ किया। कृषक कल्याण वर्ष 2026 में किसानों की आमदनी बढ़ाने सहित इनकी बेहतरी और खुशहाली के लिए किए जाने वाले प्रयासों के संबंध में एक लघु फिल्म का प्रदर्शन भी किया गया। किसान सम्मेलन में सरकार की विभिन्न योजनाओं, नवाचारों और भावी कार्ययोजना की जानकारी भी किसानों को दी गई। पूरा साल किसानों के कल्याण के लिए समर्पित मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने कहा कि मध्यप्रदेश देश का पहला राज्य है जिसने पूरा साल किसानों के कल्याण के लिए समर्पित किया है। हमारी सरकार खेतों से निकलने वाली पराली से भी किसानों आय बढ़ाने का प्रयास करेगी। मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने हर्ष व्यक्त्करते हुए कहा कि हमारा मध्यप्रदेश देश का एकमात्र ऐसा राज्य है जहां बीते सालों के प्रयासों से खेती का रकबा ढाई लाख हेक्टेयर तक बढ़ गया है। उन्होंने कहा कि मध्यप्रदेश में पार्वती-कालीसिंध-चंबल (पीकेसी) नदी लिंक एवं केन-बेतवा नदी लिंक राष्ट्रीय परियोजना सहित ताप्ती ग्राउंड वाटर रिचार्ज मेगा परियोजना से प्रदेश के 25 जिलों में 16 लाख हेक्टेयर से अधिक अतिरिक्त कृषि रकबा सिंचित हो जाएगा। किसानों के हित में हमने जा कहा, वह करके दिखाया मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने कहा कि किसानों के हित में हमने जो कहा, वह करके दिखाया है। प्रदेश में श्रीअन्न उत्पादन को बढ़ावा देने के लिए डिण्डोरी जिले में मध्यप्रदेश राज्य श्रीअन्न अनुसंधान केंद्र की स्थापना की जाएगी। इससे श्रीअन्न का उत्पादन और पोषण सुरक्षा को नई ऊंचाई मिलेगी। मुख्यमंत्री ने कहा कि ग्वालियर में सरसों अनुसंधान और उज्जैन में चना अनुसंधान केंद्र स्थापित किए जा रहा हैं। इन केंद्रों के जरिए इन फसलों की गुणवत्ता और पैदावार बढ़ाने पर विशेष बल दिया जाएगा। मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने कहा कि हम प्रदेश के 30 लाख से अधिक किसानों को अगले तीन साल में सोलर पावर पम्प देंगे। हर साल 10 लाख किसानों को सोलर पम्प देकर इन्हें अन्नदाता से आत्मनिर्भर ऊर्जादाता बनाएंगे। मुख्यमंत्री ने कहा कि प्रदेश में सिंचाई क्षेत्र का रकबा निरंतर बढ़ रहा है। अभी 65 लाख हेक्टेयर है, इसे बढ़ाकर वर्ष 2028-29 तक 100 लाख हेक्टेयर तक लेकर जाएंगे। किसानों को लौटाएंगे उनका वैभव मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने कहा कि किसान कल्याण वर्ष में सरकार प्रदेश के किसानों के समग्र कल्याण के लिए हर जरूरी कदम उठाएगी। सालभर विभिन्न गतिविधियों के आयोजन के जरिए सरकार के 16 से अधिक विभाग/मंत्रालय आपसी समन्वय से किसानों को उनका वैभव लौटाएंगे। मुख्यमंत्री ने कहा कि सोयाबीन के बाद अब सरसों की फसल को भी हम भावांतर योजना के दायरे में लेकर आएंगे। उन्होंने कहा कि कृषि आधारित उद्योगों के विकास में किसानों की भागीदारी बढ़ाई जाएगी। ऐसे उद्योग लगाने वालों को सरकार सब्सिडी देगी। प्रदेश में बीज परीक्षण कार्य से जुड़ी सभी प्रयोगशालाओं को और अधिक सशक्त कर सभी मंडियों का भी आधुनिकीकरण किया जाएगा। रिक्त पदों पर भर्ती कर कृषि तंत्र को करेंगे मजबूत मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने कहा कि विभागीय अमले की तेज भर्ती के लिए भी हमारी सरकार प्रयासरत है। कृषि विभाग और राज्य कृषि विपणन (मंडी) बोर्ड में सभी श्रेणी के रिक्त पदों की जल्द से जल्द पूर्ति कर प्रदेश में कृषि तंत्र को और भी मजबूत बनाया जाएगा। सरकार माइक्रो इरिगेशन सिस्टम का दायरा बढ़ाने की ओर भी अग्रसर है। किसानों को होने वाली फसल नुकसानी का अब आधुनिक तकनीक से सर्वे कराया जाएगा। इससे किसानों को मुआवजे की राशि जल्द से जल्द मिल सकेगी। किसानों की बेहतरी और खुशहाली के लिए हर सभी कदम उठा रहे हैं। उन्होंने कहा कि किसानों के लिए जीरो प्रतिशत ब्याज दर से ऋण प्रदाय योजना आगे भी जारी रहेगी। किसानों को मिलेगा उनकी उपज और परिश्रम का बेहतर मूल्य मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने बताया कि कृषक कल्याण वर्ष के दौरान कृषि आधारित उद्योगों के विकास के लिए सभी आवश्यक इंतजाम किए जाएंगे, ताकि किसानों को उनकी उपज एवं परिश्रम का बेहतर मूल्य मिल सके और गांवों में ही रोजगार के नए अवसर पैदा हों। इसके साथ ही प्रदेशभर में कृषि उत्सव और किसान मेलों का आयोजन कर किसानों को आधुनिक खेती के गुर सिखाए जाएंगे। प्राकृतिक और जैविक खेती को बढ़ावा देने के साथ खेती-किसानी में नवाचारों को भी प्रोत्साहित किया जाएगा। मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने कहा कि खेतों में पसीना बहाने वाले किसान राष्ट्रसेवा का सर्वोच्च उदाहरण हैं। ऐसे में किसानों की सेवा, संबल और समृद्धि में सहयोग करना सरकार का कर्तव्य और धर्म है। उन्होंने प्रदेश के सभी किसानों से आह्वान करते हुए कहा कि वे नई तकनीकों को अपनाएं, बदलते समय के साथ कदम मिलाकर चलें और खेती को आधुनिक बनाएं। किसान कल्याण वर्ष का भव्य शुभारंभ कर मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने प्रदेश के सभी अन्नदाताओं को भरोसा दिलाया कि किसानों की सुख-समृद्धि में ही सरकार का सुख है। हर कदम पर, हर जरूरत के वक्त सरकार किसानों के साथ खड़ी है। अन्नदाता मध्यप्रदेश के माथे का तिलक मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने कहा कि अन्नदाता मध्यप्रदेश के माथे का तिलक हैं, जिसका तिलक खेत की मिट्टी है, वही मध्यप्रदेश का किसान है। उन्होंने कहा कि किसानों का पसीना प्रदेश की पहचान है। मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने कहा कि कृषक कल्याण वर्ष के शुभारम्भ के साथ हमआत्मनिर्भर और समृद्ध किसान, उन्नत कृषि और मूल्य श्रंखला आधारित ग्रामीण अर्थव्यवस्था … Read more

1101 ट्रैक्टरों की ऐतिहासिक रैली के साथ कृषक कल्याण वर्ष 2026 का शुभारंभ

मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने खुद ट्रैक्टर चलाकर दिया संवेदनशील नेतृत्व का संदेश ट्रेक्टर चलाकर मुख्यमंत्री डॉ. यादव बने किसान भोपाल कृषक कल्याण वर्ष-2026 मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने राजधानी भोपाल से रविवार को कृषक कल्याण वर्ष 2026 का भव्य एवं गरिमापूर्ण शुभारंभ किया। उन्होंने शुभारंभ अवसर पर किसानों की ऐतिहासिक 1101 ट्रेक्टरों की रैली का नेतृत्व किया। विशाल संख्या में ट्रैक्टरों की अनुशासित सहभागिता ने कार्यक्रम को ऐतिहासिक स्वरूप प्रदान किया। ट्रेक्टर रैली में किसानों के उत्साह को देखकर मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने कहा कि यह ट्रैक्टर रैली केवल एक आयोजन नहीं, बल्कि किसानों की एकजुटता, आत्मविश्वास और प्रदेश सरकार की किसान-हितैषी सोच का सशक्त प्रतीक है। यह आयोजन इस बात का संकेत है कि राज्य सरकार कृषि को सर्वोच्च प्राथमिकता देते हुए किसानों के हित में निरंतर और ठोस कदम उठाने के लिए प्रतिबद्ध है। कार्यक्रम में भावुक एवं प्रेरक क्षण तब आया, जब मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने स्वयं ट्रैक्टर की कमान संभाली। ट्रैक्टर चालक से आग्रह कर ट्रैक्टर पर बैठना और उसे चलाना मुख्यमंत्री की सहजत और किसानों के श्रम के प्रति सम्मान को दर्शाता है। मुख्यमंत्री डॉ. यादव की इस सादगी और आत्मीयता ने उपस्थित जनसमुदाय को भावविमोर कर दिया। किसानों ने तालियों की गड़गड़ाहट के साथ किसान बने मुख्यमंत्री डॉ. यादव का अभिनंदन किया। मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने कहा कि सरकार की नीतियों का केंद्र किसान, नारी, युवा और गरीब हैं। इन चारों वर्गों के सशक्तिकरण को ध्यान में रखते हुए प्रदेश सरकार योजनाओं और कार्यक्रमों का निर्धारण कर रही है, ताकि विकास का लाभ समाज के अंतिम व्यक्ति तक पहुँचे। मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने वर्ष 2026 को “कृषक कल्याण वर्ष” के रूप में मनाने की घोषणा की। डनहोंने कहा कि इस दौरान किसानों के हितों पर विशेष ध्यान केंद्रित किया जाएगा। कृषक कल्याण वर्ष के प्रभावी क्रियान्वयन के लिए प्रदेश सरकार के 16 विभाग आपसी समन्वय के साथ कार्य करेंगे, जिससे कृषि से जुड़े सभी आयाम—उत्पादन, लागत, विपणन, आय और कल्याण एक साथ सुदृढ़ हो सकें। मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने बताया कि प्रदेश की कृषि विकास दर 16 प्रतिशत तक पहुँच चुकी है, जो राज्य की कृषि क्षमता और नीतिगत प्रयासों की सफलता दर्शाती है। उन्होंने स्पष्ट किया कि सरकार का लक्ष्य केवल उत्पादन बढ़ाना ही नहीं, बल्कि किसानों की आमदनी में वृद्धि और कृषि लागत में कमी लाने के लिए ठोस एवं व्यावहारिक उपायों को धरातल पर उतारना है। मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने कहा कि कृषि कल्याण वर्ष 2026 के संकल्प की पूर्ति का यह पहला दिन है। पूरे वर्ष विकास एवं मंगल कार्यक्रम निरंतर संचालित किए जाएंगे। सरकार का प्रयास रहेगा कि किसान समृद्ध हों, कृषि टिकाऊ बने और ग्रामीण अर्थव्यवस्था को नई मजबूती मिले।  

प्रदेश में नगरीय निकायों द्वारा बेहतर सुरक्षित एवं निर्बाध जल आपूर्ति की प्रभावी कार्रवाई

भोपाल प्रदेश के नगरीय निकायों द्वारा नागरिकों को बेहतर, सुरक्षित एवं निर्बाध जल एवं सीवर सेवाएँ उपलब्ध कराने के लिए निरंतर प्रभावी कार्रवाई की जा रही है। नागरिकों से अपील की गई है कि किसी भी जल अथवा सीवर संबंधी समस्या की सूचना निर्धारित माध्यमों से अवश्य दें, जिससे समय पर प्रभावी कार्रवाई सुनिश्चित की जा सके। नगरीय विकास एवं आवास आयुक्त श्री संकेत भोंडवे ने बताया कि रविवार 11 जनवरी तक कुल 1176 जल रिसाव (लीकेज) की मरम्मत की गई है तथा अब तक 7619 जल नमूनों की जांच पूर्ण की जा चुकी है। जल नमूना संग्रहण कार्य में 744 सफाई मित्र/अमृत मित्र सक्रिय रूप से कार्यरत हैं और जल परीक्षण के लिये अब तक 704 व्यक्तियों को प्रशिक्षण प्रदान किया गया है। उन्होंने बताया कि कुल 684 ओएचटी/जीएसआर/सम्प की सफाई पूर्ण की जा चुकी है, जिन पर ऑयल पेंटिंग द्वारा सफाई की तिथि एवं अगली प्रस्तावित सफाई की तिथि अंकित की गई है। इसके अतिरिक्त अब तक 1650 छोटे मरम्मत कार्य (माइनर रिपेयर) पूर्ण किए जा चुके हैं। जल से संबंधित कुल 293 शिकायतें प्राप्त हुई हैं, जिनमें से 284 शिकायतों का समाधान कर दिया गया है। वहीं सीवर लाइन लीकेज, मैनहोल ओवरफ्लो आदि से संबंधित कुल 285 शिकायतें प्राप्त हुई हैं, जिनमें से 134 शिकायतों का निस्तारण किया जा चुका है। आयुक्त श्री संकेत भोंडवे ने सभी नगर निगमों एवं शहरी निकायों को निर्देश दिए हैं कि शेष लंबित शिकायतों का तत्काल, गुणवत्ता-पूर्ण एवं समयबद्ध समाधान सुनिश्चित किया जाए। उन्होंने यह भी स्पष्ट किया कि जल की गुणवत्ता और सीवर व्यवस्था में किसी भी प्रकार की लापरवाही स्वीकार्य नहीं होगी तथा फील्ड अमला निरंतर निगरानी एवं त्वरित कार्रवाई की स्थिति में रहेगा। नगरीय विकास एवं आवास विभाग द्वारा शेष शिकायतों के शीघ्र समाधान के लिये संबंधित निकायों को आवश्यक दिशा-निर्देश जारी कर दिए गए हैं। स्वच्छ जल अभियान स्वच्छ जल अभियान में जल सुरक्षा, जल संरक्षण तथा जल से संबंधित शिकायतों के त्वरित निराकरण के उद्देश्य से प्रदेश में ‘जल सुनवाई’की शुरुआत की गई है। इस अभियान के माध्यम से नगर निगमों/शहरी निकायों द्वारा नागरिकों को बेहतर जल एवं सीवर सुविधाएं उपलब्ध कराने के लिये निरंतर कार्य किया जा रहा है।इसी क्रम में प्रदेश की समस्त नगरीय निकायों में 11 जनवरी 2025 तक निम्नलिखित प्रगति दर्ज की गई है—         · जल रिसाव (लीकेज) से संबंधित मरम्मत कार्य : नगर निगम- 547, नगर पालिका परिषद – 315, नगर परिषद- 314         · जल नमूनों की जांच : नगर निगम – 4498, नगर पालिका परिषद – 1496, नगर परिषद – 1625         · जल नमूना संग्रहण कार्य में सफाई मित्र / अमृत मित्र सक्रिय रूप से कार्यरत हैं : नगर निगम- 158, नगर पालिका परिषद- 284, नगर परिषद- 302             · जल परीक्षण के लिये व्यक्तियों को प्रशिक्षण : नगर निगम- 330, नगर पालिका परिषद- 191, नगर परिषद- 183         · ओएचटी/जीएसआर/सम्प की सफाई की जा चुकी है, (ऑयल पेंटिंग द्वारा सफाई की तिथि एवं अगली सफाई की तिथि प्रस्तावित है) : नगर निगम- 212, नगर पालिका परिषद- 194, नगर परिषद- 278         · छोटे मरम्मत कार्य (माइनर रिपेयर) पूर्ण किए गए हैं : नगर निगम- 829, नगर पालिका परिषद- 440, नगर परिषद- 381         · जल संबंधी शिकायतें प्राप्त हुई हैं, जिनका का समाधान कर दिया गया है : नगर निगम कुल 293 शिकायतेंसे 213 शिकायतों का निराकरण।         · सीवर लाइन लीकेज/मैनहोल ओवरफ्लो आदि से संबंधित शिकायतों का निराकरण : नगर निगम कुल 285 शिकायतें में से 134 शिकायतों का निराकरण शेष लंबित शिकायतों के त्वरित समाधान के लिये संबंधित विभागों को आवश्यक निर्देश दिए गए हैं। नागरिकों से अपील की गई है कि जल अथवा सीवर से संबंधित किसी भी समस्या की सूचना निर्धारित माध्यमों से उपलब्ध कराएं, जिससे समयबद्ध एवं प्रभावी कार्रवाई सुनिश्चित की जा सके।  

जबलपुर में अवैध कॉलोनी बनाने पर 5 कॉलोनाइजर को नगर निगम ने दिया नोटिस

जबलपुर. अवैध कॉलोनी बनाने वाले कालोनाइजरों पर जबलपुर नगर निगम ने भी शिकंजा कसना शुरू कर दिया है। इसी कड़ी में नगर निगम की कॉलोनी सेल ने पांच अवैध कॉलोनाइजरों को नोटिस जारी किया है। जबाव सही नहीं पाए जाने पर इन सबके विरुद्ध कड़ी कार्रवाई की जाएगी। एफआइआर भी दर्ज कराई जाएगी। निगमायुक्त रामप्रकाश अहिरवार ने बताया कि अक्सर देखा जाता है कि अवैध कॉलोनियों में बुनियादी सुविधाओं (सड़क, नाली, बिजली) के अभाव के कारण आम जनता को भारी परेशानियों का सामना करना पड़ता है। इस समस्या को जड़ से खत्म करने के लिए त्रि-स्तरीय रणनीति तैयार की है। अवैध निर्माण करने वालों के विरुद्ध तत्काल नोटिस और एफआईआर दर्ज करने के निर्देश दिए गए हैं। अवैध रूप से विकसित की जा रही साइट्स पर चल रहे निर्माण कार्य को तुरंत हटाने की कार्रवाई की जाएगी। जिला पंजीयक को भी दी जाएगी सूचना निगमायुक्त रामप्रकाश अहिरवार ने कॉलोनी सेल की समीक्षा बैठक में स्पष्ट किया कि शहर के भविष्य और नागरिकों की मेहनत की कमाई से खिलवाड़ करने वाले अवैध कॉलोनाइजरों को किसी भी कीमत पर बख्शा नहीं जाएगा। नागरिकों के हितों की सुरक्षा सर्वोपरिआम जन को धोखाधड़ी से बचाने के लिए जिला पंजीयक और संबंधित एसडीएम को सूचित किया जाएगा, ताकि ऐसी कॉलोनियों में रजिस्ट्री और नामांतरण को रोका जा सके। इस बैठक का मुख्य उद्देश्य यह सुनिश्चित करना है कि शहर का विस्तार नियमों के दायरे में हो। जब कॉलोनियां वैध होंगी, तो वहां रहने वाले नागरिकों को नगर निगम द्वारा दी जाने वाली सभी मूलभूत सुविधाएं सुलभता से मिल सकेंगी। बैठक में अपर आयुक्त अरविंद शाह, देवेन्द्र सिंह चौहान एवं प्रभारी कालोनी सेल सुनील दुबे आदि उपस्थित रहे। इन कॉलोनाइजरों को नोटिस ध्रुव भोला पिता संजय नेमा, रूपेश तिवारी, परसवाड़ा रामानुज तिवारी पिता शंकर गोस्वामी, जिलहरी विष्णु कुशवाहा पिता साजिद कुरैशी अमखेरा विजय मोहन दुबे, गढ़ा महेश चन्द्रौल, प्रकाश चंद, प्रदीप कुमार पिता चौहान, ओरिया

भोपाल में छात्रा की मौत के 4 महीने बाद हुआ दुष्कर्म का खुलासा

भोपाल. कोलार थाना क्षेत्र में अगस्त 2025 में एक स्कूली छात्रा द्वारा फांसी लगाए जाने के मामले में नया खुलासा हुआ है। घटना के साढ़े चार महीने बाद आई फारेंसिक साइंस लेबोरेटरी की रिपोर्ट ने पुलिस जांच की दिशा बदल दी है। रिपोर्ट में छात्रा के साथ दुष्कर्म होने की पुष्टि हुई है। पुलिस ने क्या कहा पुलिस के अनुसार 17 वर्षीय मृतका अपनी मां और भाई के साथ कोलार इलाके में रहती थी और कक्षा दसवीं की छात्रा थी। 17 अगस्त को मां और भाई के काम पर जाने के बाद छात्रा घर में अकेली थी। शाम करीब सात बजे जब स्वजन घर लौटे, तो किशोरी फांसी के फंदे पर लटकी मिली। उस समय मौके से कोई सुसाइड नोट नहीं मिला था, जिसके चलते पुलिस इसे सामान्य आत्महत्या मानकर जांच कर रही थी। पोस्टमार्टम के बाद स्लाइड को जांच के लिए एफएसएल भेजा गया था। रिपोर्ट में क्या मिला हाल ही में आई एफएसएल रिपोर्ट में छात्रा के गुप्तांग में अन्य मानव के शुक्राणु पाए गए हैं, जो दुष्कर्म की ओर इशारा करते हैं। इस रिपोर्ट के आधार पर कोलार पुलिस ने अज्ञात आरोपित के खिलाफ दुष्कर्म और पोक्सो एक्ट की धाराओं में मामला दर्ज किया है। पुलिस ने क्या कहा कोलार थाने के एसआइ जितेंद्र केवट ने बताया कि अब नए सिरे से तफ्तीश शुरू की गई है। पुलिस यह पता लगा रही है कि घटना वाले दिन छात्रा के घर कौन आया था या वह कहीं बाहर गई थी। इसके लिए छात्रा के मोबाइल की कॉल डिटेल और आसपास लगे सीसीटीवी कैमरों के फुटेज खंगाले जा रहे हैं। पुलिस का कहना है कि जल्द ही आरोपित को गिरफ्तार किया जाएगा।