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खंडवा जिले में तेजी से गिर रहा जलस्तर

खंडवा. इस बार अनियमित मानसून और मावठा नहीं बरसने का असर जिले के जलस्तर पर पड़ रहा है। फसलों को जमीन से पानी खींचकर लगातार सिंचाई करने से भूजल स्तर तेजी से गिर रहा है। इसका मुख्य कारण पर्याप्त बारिश हीं होने से जिले के जलाशयों और तालाब पूरी क्षमता से नहीं भर पाना है। इससे जलस्रोत रिचार्ज नहीं हो पाने से ठंड के सीजन में ही दम तोड़ रहे हैं। किसान सिंचाई के लिए पूरी तरह कूप, नलकूप पर निर्भर हो गए हैं। वहीं छह वर्षों के बाद दिसंबर माह में मावठा नहीं गिरा है। क्योंकि मावठा कुछ हद तक जलस्तर की पूर्ति करने का काम करता आ रहा है। वैसे देखा जाए तो इस बार बारिश के बाद नवंबर माह तक जिले का भू-जलस्तर गत वर्षों की तुलना में आंकड़ों में अच्छा माना जा रहा है। इसके विपरीत किसानों की माने तो लगभग 15 वर्षों के बाद इस बार ऐसी स्थिति निर्मित हो रही है, कि जिले में दिसंबर के अंतिम सप्ताह में अधिकांश कूप और नलकूप जलस्तर गिरने से सिंचाई के लिए पर्याप्त पानी नहीं दे पा रहे हैं। अभी से ही किसान अपने जलस्रोतों से टप्पे पर सिंचाई कर रहे हैं। आंकड़ों को देखें तो गत वर्ष मानसून के दौरान 991.8 मिमी बारिश जिले में हुई थी। इसके विपरीत इस बार 858 मिमी बारिश ही दर्ज की गई। इसमें भी खंड बारिश का असर नजर आया और सबसे कम नया हरसूद में 754 मिमी बारिश हुई, जबकि गत वर्ष यहां 1003 मिमी बारिश दर्ज की गई थी। यही कारण है कि अब जनवरी के पहले सप्ताह में ही किसान सिंचाई को लेकर परेशान नजर आ रहे हैं। जिले के छह तालाब आधे खाली, सिंचाई के लिए नहीं मिल सका पानी वैसे तो इस बार भी मानसून के दौरान जिले में सामान्य बारिश का आंकड़ा पार हुआ, लेकिन अनियमित मानूसन और खंड बारिश के चलते जिले के छह तालाब आधे खाली रह गए। इसलिए यहां से पानी नहीं मिलने से किसान पूरी तरह भूजल पर ही निर्भर हैं। अब जमीन का पानी पूरी तरह खींचने से जलस्तर लगातार गिर रहा है। अर्दला तालाब 8.22 और डाभी तालाब 10 प्रतिशत ही भर सका। इसलिए विभाग द्वारा यहां से सिंचाई के लिए नहर में पानी नहीं छोड़ा गया। सिर्फ बैकवाटर के लोग मोटरपंप के माध्यम से पानी लेने की अनुमति लेकर सिंचाई कर रहे हैं। पंधाना तालाब में 18, कोहदड़ तालाब में 40.75, पलस्यापाटी तालाब में 49.44 और देशगांव तालाब में 63.98 प्रतिशत पानी आया। यहां से विभाग सिंचाई के लिए चने की फसल के लिए पलेवा और एक पानी दे रहा है। इधर, भगवंत सागर सुक्ता बांध में 87.57 प्रतिशत पानी आया था और इसकी कमांड क्षेत्र में आने वाली भूमि की सिंचाई को लेकर पलेवा और तीन बार पानी छोड़ा जा रहा है। साथ ही जिले के 40 ऐसे छोटे तालाब है जो सौ प्रतिशत भर चुके हैं। यहां से भी किसानों को एक पलेवा और तीन बार पानी दिया जा रहा है। गर्मी में पेयजल समस्या कहीं विकराल रूप ना ले बारिश की कमी और जलस्रोतों में लगातार गिर रहा जलस्तर कहीं गर्मी में पेयजल समस्या ना खड़ी कर दे। यह बातें जनवरी में जलस्रोतों की स्थिति को देखते हुए सभी हो सता रही है। क्योंकि फसलों का उत्पादन लेने के लिए किसान लगातार जलाशयों और तालाबों से पानी नहीं मिलने के चलते भूजल का उपयोग कर रहा है और अब वह भी कमजोर हो रहे हैं। आगे तेज गर्मी में अगर जलस्तर अधिक मात्रा में गिरा तो अधिकांश जलस्रोत साथ छोड़ देंगे और पेयजल समस्या विकराल रूप लेकर सामने ना आए। पंद्रह वर्ष में पहली बार हुआ ऐसा लगभग 15 वर्षों से खेत का कुआं दो मोटरपंप चलाने के बाद भी खाली नहीं हो रहा था। लेकिन इस बार दिसंबर के अंतिम सप्ताह में एक मोटरपंप से भी पर्याप्त पानी नहीं दे पा रहा है। इसका मुख्य कारण इस बार बारिश की कमी और एक भी मावठा नहीं गिरना है। ऐसे हालात रहे तो गर्मी में पेयजल समस्या बन सकती है। – सुरेश यादव, हीरापुर बारिश की कमी से पहले ही जलस्तर सामान्य नहीं हुआ इस बार पंधाना क्षेत्र में बारिश कम होने से कई जलस्रोतों का जलस्तर सामान्य से नीचे था। बाद में मावठा से उम्मीद थी तो वही भी नहीं हो सका। अब जनवरी में ही इस बार फसल की सिंचाई करना एक चुनौती बनते जा रहा है। – धर्मेंद्र सावनेर, बलखड़ घाटी गर्मी में पेयजल समस्या बनेगी परेशानी जिस प्रकार जलस्तर लगातार गिर रहा है और वर्तमान में जलाशयों व तालाबों की स्थिति है, इसे देखते हुए अभी तो किसान सिंचाई के लिए परेशान हो रहे हैं लेकिन गर्मी के दिनों में पेयजल एक बड़ी समस्या बनेगी। – रविंद्र पाटीदार, मीडिया प्रभारी संयुक्त कृषक संगठन नहर से भू-जल स्तर रहेगा ठीक किसान सिंचाई के लिए जो भूजल का दोहन करते हैं, मावठा गिरने से इसमें कमी आ जाती है। लेकिन अधिक फर्क नहीं पड़ेगा क्योंकि जगह-जगह नहर शुरू हो गई हैं जो कि भूजल स्तर को ठीक बनाए रखने में सहायक रहेंगी। – वर्षा शिवपुरे, कार्यपालन यंत्री पीएचई विभाग

पेंशन प्रकरणों का प्रदेश स्तर पर 10 दिनों में होगा निराकरण

भोपाल. सेवानिवृत्ति के बाद अब पेंशन प्रकरणों का 10 दिनों में प्रदेश स्तर पर निराकरण होगा। इस नई व्यवस्था से अब सेवानिवृत्ति के बाद पेंशन आदेश (पीपीओ) के लिए इंतजार नहीं करना पड़ेगा। पहले पीपीओ जारी होने में छह माह से एक वर्ष तक लग जाता था और शासकीय सेवक को सेवानिवृत्त के बाद पेंशन कार्यालय के चक्कर काटने पड़ते थे। इसको लेकर मध्य प्रदेश पेंशन संचालनालय ने केंद्रीय कृत व्यवस्था बनाई है। अभी तक जिलों से प्रकरण बनते थे और फिर प्रदेश में आते थे। उसमें विलंब होता था। अब चुकी कैबिनेट ने निर्णय करके जिला कार्यालय बंद कर दिए हैं, ऐसे में प्रदेश स्तर पर ही पूरा काम होगा। इससे समय की बचत होगी। यह नई व्यवस्था पूरी तरह से डिजिटल होगी। जिलों के पेंशन अधिकारी ई-साइन (डिजिटल साइन) से पीपीओ जारी करेंगे। किसी अधिकारी के हाथ से साइन नहीं होंगे। पीपीओ सीधे स्टेट बैंक आफ इंडिया (एसबीआइ) को भेजा जाएगा। प्रदेश में करीब पांच लाख पेंशनर हैं। अब तक पेंशन बढ़ने या घटने पर, नया पीपीओ बनवाने के लिए पेंशनर को दफ्तर और बैंक के चक्कर लगाने पड़ते थे। अब पीपीओ डिजिटली जारी होगा। घर बैठे प्रक्रिया पूरी हो सकेगी। डिजिलाकर में पीपीओ सुरक्षित रहेगा, नया खाता जरूरी नहीं, मौजूदा बैंक खाते में ही राशि आएगी।

सॉफ्टवेयर मैचिंग में 5.70 लाख वोटर्स के पिता और जन्मतिथि व नाम में मिली गड़बड़ी

इंदौर. इंदौर जिले में चल रहे विशेष गहन पुनरीक्षण (एसआईआर) के तहत दावे-आपत्ति की सुनवाई जारी है, लेकिन इस बीच मतदाता सूची को लेकर अजीब स्थिति सामने आई है। जिले में करीब 5.70 लाख मतदाता तार्किक त्रुटि श्रेणी में सामने आए हैं, जिनके रिकार्ड वर्ष 2003 की मतदाता सूची से मैप तो हो गए हैं, लेकिन विवरणों में विसंगतियों के कारण वे संदेह के घेरे में हैं। यह संख्या उन 1.33 लाख मतदाताओं से अलग है, जिनकी वर्ष 2003 से मैपिंग नहीं हुई। दरअसल, निर्वाचन आयोग के सॉफ्टवेयर द्वारा रिकॉर्ड मिलान के दौरान पांच प्रकार की तार्किक त्रुटियां चिह्नित की गई हैं। इनमें सबसे बड़ी संख्या उन मतदाताओं की है, जिनके पिता का नाम 2003 की सूची से मेल नहीं खा रहा। नाम की स्पेलिंग में गलती, नाम का अधूरा होना, सरनेम में बदलाव और जन्मतिथि में अंतर जैसी त्रुटियां भी सामने आई हैं। इन मतदाताओं को आयोग ने संदेह के घेरे में रखा है। हालांकि, इस श्रेणी के मतदाताओं के लिए राहत की बात यह है कि इनको किसी तरह से नोटिस जारी नहीं होंगे यानी यह सूची से बाहर नहीं होंगे। उप जिला निर्वाचन अधिकारी नवजीवन विजय पंवार का कहना है कि आयोग ने कुछ मतदाताओं को तार्किक त्रुटि में शामिल किया है। इनका सुधार बीएलओ द्वारा अपने मोबाइल लॉगिन से किया जाएगा। बीएलओ घोषणा पत्र भरकर उक्त मतदाता की पुष्टि करेंगे। यदि इसमें गलत मैपिंग हुई है तो उसमें सुधार कर नोटिस जारी होंगे। 24.20 मतदाताओं ने भरे फार्म इंदौर जिले की मतदाता सूची में शामिल 28.67 लाख मतदाताओं के फार्म भरने का कार्य चार नवंबर से 11 दिसंबर तक किया गया। इस दौरान 24 लाख 20 हजार 171 मतदाताओं के फार्म भरकर आए, इसलिए इनको प्रारंभ मतदाता सूची में शामिल किया गया है। इसमें एक लाख 33 हजार 696 मतदाताओं की मैपिंग नहीं हुई थी और अब इनसे दस्तावेज लिए जा रहे हैं। वहीं चार लाख 47 हजार 123 मतदाताओं के फार्म नहीं आने से इनका नाम प्रारंभ मतदाता सूची से हटाया गया है। इसमें स्थानांतरित, मृतक और पते पर नहीं मिलने वाले मतदाता शामिल हैं। ये त्रुटियां सामने आईं नाम में त्रुटि : वर्तमान मतदाता सूची में मतदाता का नाम रामलाल दर्ज है, जबकि 2003 की सूची में नाम राम था। पिता का नाम बेमेल : 2003 की सूची में पिता के नाम के साथ सरनेम नहीं था, लेकिन अब नाम के साथ सरनेम दर्ज है। मैपिंग की परेशानी : एक पालक की छह से अधिक नामों से मैपिंग नहीं होना चाहिए, लेकिन कुछ मामलों में अधिक हुई है। उम्र की परेशानी : बच्चों और पिता की उम्र में 15 साल से कम और 50 साल से अधिक का अंतर सामने आ रहा है। दादा की उम्र : कई मतदाताओं के दादा की उम्र में 40 साल से कम का अंतर दिखाई दे रहा है।

इंदौर में भागीरथपुरा कांड पर कांग्रेस ने दिग्विजय सिंह के नेतृत्व में निकली न्याय यात्रा

इंदौर. भागीरथपुरा में दूषित पानी से हुई मौतों के बाद कांग्रेस ताकत दिखाने के लिए आज फिर से सड़क पर उतरी है। आज शहर में न्याय यात्रा निकाली जा रही है। इसमें दिग्विजय सिंह, सज्जनसिंह, मीनाक्षी नटराजन सहित प्रदेश के अलग-अलग क्षेत्रों से कांग्रेस विधायकों सहित अन्य बड़े नेता पहुंचे हैं। जिला और शहर कांग्रेस दावा कर रही है कि भागीरथपुरा के पीड़ितों के लिए न्याय की मांग लेकर निकाली जा रही यात्रा में बड़ी संख्या में लोग जुट रहे हैं। जिला अध्यक्ष विपिन वानखेड़े और शहर अध्यक्ष चिंटू चौकसे के अनुसार सिर्फ कांग्रेस के कार्यकर्ता नहीं बल्कि आम लोग भी यात्रा में शामिल हो रहे हैं। बड़ा गणपति से मौन रैली के रूप में यात्रा शुरू हुई, जिसका राजवाड़ा पर देवी अहिल्या प्रतिमा पर समापन होगा।

शराब के नशे में स्कूल पहुंचे टीचर, किया गया निलंबित

खरगोन. खरगोन जिले के डोंगर चीचली गांव में माध्यमिक शिक्षक के शराब पीकर स्कूल में जाकर बच्चों को धमकाने और उनके घबराकर स्कूल छोड़कर भागने के मामले में जिला कलेक्टर भव्या मित्तल के निर्देश पर कार्रवाई की गई है। जहां संबंधित शिक्षक को निलंबित कर दिया गया है, वहीं इस मामले को वरिष्ठ अधिकारियों के संज्ञान में नहीं लाने पर चार अधिकारियों को शोकाज नोटिस दिया। घटना के मुताबिक 6 जनवरी को केशव शारदे शराब पीकर स्कूल में आए और उनकी हरसकतों से बच्चें घबराकर समय के पहले ही क्लास से बाहर निकल भागे। उल्लेखनीय है कि शिक्षक केशव शारदे ने क्लास में जाकर बच्चों को धमकाया था और कहा था कि 'मैं मेरे बेटे को भी नहीं छोड़ता, मैं छुट्टी पर हूं मेरा कोई कुछ नहीं बिगाड़ सकता है, हेड मास्टर दारू पीते हैं यह किसने बताया है।' जब बच्चे घबरा कर भागने लगे तो केशव शारदे उनके पीछे गए और कहा कि अभी चार ही बजे हैं, फिलहाल छुट्टी नहीं हुई है। घटना का वीडियो सामने आने पर जिला कलेक्टर भव्या मित्तल ने जांच कर प्रतिवेदन सौंपने के निर्देश दिए थे। ग्रामीण और पंचायत प्रतिनिधियों ने मौके पर पहुंचकर पंचनामा भी बनाया था। टीचर को किया निलंबित सहायक आयुक्त आदिवासी विकास खरगोन इकबाल हुसैन आदिल ने बताया कि जांच रिपोर्ट के आधार पर शासकीय एकीकृत माध्यमिक विद्यालय डोंगर चीचली के प्रधान पाठक केशव शारदे को जिला कलेक्टर भव्या मित्तल ने शुक्रवार को निलंबित कर दिया है। इसके साथ ही इस मामले में लापरवाही बरतने पर जन शिक्षक शैलेश वर्मा, ब्लाक रिसोर्स कोआर्डिनेटर (बीआरसी) रंजीत आर्य, ब्लाक एजुकेशन ऑफिसर विष्णु पाटीदार और संकुल प्राचार्य लोकेंद्र सिंह तोमर को शोकाज नोटिस जारी किया गया है। उनके द्वारा समय रहते प्रकरण को वरिष्ठ अधिकारियों के संज्ञान में नहीं लाया गया।

उमरिया में हथियारबंद बदमाशों ने दुकानदार से छीना ज्वैलरी से भरा बैग

उमरिया. इंदवार थाना क्षेत्र की अमरपुर चौकी अंतर्गत बड़ा तालाब के पास शनिवार की रात हथियारों से लैस नकाबपोश बदमाशों ने लूट की सनसनीखेज वारदात को अंजाम दिया है। पीड़ित पुरुषोत्तम उर्फ जग्गी पिता फूलचंद सोनी उम्र करीब 43 वर्ष निवासी सोनी मोहल्ला अमरपुर है। उनकी सेंट्रल ग्रामीण बैंक के पास ज्वेलरी की दुकान है। लुटेरों ने लूट की इस घटना को शनिवार की रात उस समय अंजाम दिया, जब पीड़ित दुकान बंद करके घर की तरफ जा रहा था। दुकान से कुछ दूरी पर लूट खबर है कि कारोबारी शाम के समय दुकान बंद कर सोनी मोहल्ला स्थित अपने घर की ओर जा रहा था। जैसे ही वह बड़ा तालाब के पास पहुंचा, पहले से घात लगाए बैठे हथियारबंद नकाबपोश बदमाशों ने उसे घेर लिया। बदमाशों ने हथियारों की मदद से कारोबारी को जान से मारने की धमकी देते हुए ज्वेलरी से भरा बैग छीन लिया और मौके से फरार हो गए। हैरानी की बात यह है कि यह पूरी वारदात पीड़ित की दुकान से महज 500 मीटर की दूरी पर हुई, जिससे पूरा परिवार खासा दहशत में है। कर रहे थे रैकी वारदात की सूचना मिलते ही देर रात ही पुलिस हरकत में आ गई। बदमाशों को गिरफ्त में लेने गहन जांच शुरू कर दी गई। बदमाशों की तलाश में आसपास के इलाकों में पुलिस सघन सर्चिंग अभियान चला रही है, वहीं संभावित आरोपियों तक पहुंचने के लिए सीसीटीवी फुटेज भी खंगाले जा रहे हैं। इस पूरे वारदात को जिस तरह बदमाशों ने अंजाम दिया है, उससे साफ है कि बदमाश कई दिनों से कारोबारी की रेकी कर रहे थे और तय समय पर वारदात को अंजाम दिए है।

डायल 112 में लगाया एंबुलेंस का साफ्टवेयर बता रहा गलत लोकेशन

भोपाल. आमजन को तत्काल पुलिस सहायता उपलब्ध कराने के लिए प्रदेशभर में दौड़ रहे डायल 112 वाहनों के संचालन के लिए उपयोग होने साफ्टवेयर में फर्जीवाड़ा सामने आया है। संचालन करने वाली कंपनी जीवीके ने कंप्यूटर एडेड डिस्पैच (सीएडी) सिस्टम निविदा शर्तों के अनुसार न लगाकर, ऐसा सिस्टम लगाया है, जिसे 108 एंबुलेंस के लिए तैयार किया गया था। कंपनी ने उसे 112 के हिसाब से बदला है, जिससे समस्याएं आ रही हैं। सीएडी में कोडिंग और डाटा फीडिंग ठीक से नहीं होने के कारण सिस्टम यही पता नहीं कर पा रहा है कि घटनास्थल के पास कौन सा वाहन है और कौन दूरी पर है। पास के वाहन की जगह 40 से 80 किलोमीटर दूर तक के वाहन को घटनास्थल पर पहुंचने के लिए मैसेज पहुंच रहा है, जिसमें गाड़ी के पहुंचने में कई बार आधे घंटे से भी अधिक लग रहे हैं। एक ही वाहन को दो से तीन इवेंट एक साथ मिल रहे हैं। इसका नुकसान जनता को उठाना पड़ रहा है। बता दें कि इसी कंपनी को पहले 108 एंबुलेंस सेवा के संचालन की जिम्मेदारी मिली थी। कंपनी अभी 1200 गाड़ियों का संचालन कर रही है। अब पुलिस मुख्यालय की दूरसंचार शाखा जीवीके कंपनी द्वारा लगाए गए सिस्टम की जगह खुद अपनी जरूरत के अनुसार सीएडी लगाने जा रहा है। इसमें 10 से 11 करोड़ रुपये तक खर्च आएगा। जीवीके कंपनी को किए जाने वाले भुगतान में से ही यह राशि काटी जाएगी। जीवीके कंपनी ने इसी वर्ष अगस्त से काम संभाला था। पांच वर्ष के लिए काम दिया गया है, जिसमें लगभग 972 करोड़ रुपये खर्च होंगे। केस 1 – भोपाल के एमपी नगर जोन एक में पार्किंग विवाद होने पर छह जनवरी को शाम 4: 33 बजे डायल 112 को काल किया गया। 4:48 बजे बजे वाहन में तैनात पुलिसकर्मी की काल आई, लेकिन रास्ते से ही यह कहकर लौट गई कि घटनास्थल हमारे थाना क्षेत्र में नहीं आता, हम काल दूसरे थाने को ट्रांसफर कर रहे हैं। इसके बाद दूसरी गाड़ी आई तब तक लगभग आधे घंटे गुजर गए। केस 2- जबलपुर के गढ़ा से नौ जनवरी को दोपहर दो बजे पूजा पयासी ने फोन कर डायल 112 की मदद मांगी। तीन मिनट में वाहन चालक से संपर्क हुआ। पूजा गढ़ा में थीं, लेकिन एफआरवी मदन महल की भेजी गई। इसमें समय लगा तो कंट्रोल रूम से संदेश देकर गढ़ा थाने के करीब की गाड़ी को टास्क देने की बात लिखकर भेजी गई। जबलपुर में पुलिस सहायता के लिए रोजाना औसतन 300 सूचनाएं आती हैं। इनमें दस प्रतिशत ऐसी होती हैं जिनमें घटना स्थल के पास की जगह दूर की गाड़ी भेजी जाती है। केस 3- रिस्पांस टाइम 12 मिनट बताया, पर 22 मिनट बाद भी नहीं पहुंचा 112 वाहन 19 अक्टूबर को ग्वालियर के सिटी सेंटर स्थित कैलाश विहार में रात करीब साढ़े 12 बजे बदमाश दो युवकों को बुरी तरह पीट रहे थे। घटना के प्रत्यक्षदर्शी ने मोबाइल एप 112 से सूचना दी। रिवर्ट मैसेज में रिस्पांस टाइम 12 मिनट बताया। करीब 22 मिनट बाद सूचनाकर्ता को काल आई कि लोकेशन क्या है। लोकेशन बताने के लगभग पांच मिनट बाद पुलिस पहुंची 112 से पहुंची। तब तक पीटने वाले भाग चुके थे। अच्छे से काम नहीं कर रहा अभी जो साफ्टवेयर उपयोग हो रहा है वह उतना अच्छे से काम नहीं कर रहा है। कुछ कमियां थीं। इसलिए सीएडी में परिवर्तन कर रहे हैं, जिससे जनता को बेहतर इमरजेंसी सेवा मिल सके। नीतू ठाकुर, एसपी, डायल 112

भोपाल गोकशी कांड में ‘सफेद झूठ’ वाली क्लीन चिट देकर पुलिस अब खुद फंसी

भोपाल. राजधानी के स्लाटर हाउस में गोकशी का मामला अब प्रशासनिक भ्रष्टाचार और संदिग्ध संरक्षण की एक ऐसी परतदार कहानी बन गया है, जिसमें पुलिस और नगर निगम के दावे एक-दूसरे की जड़ें काट रहे हैं। जिस मुख्य आरोपित असलम चमड़ा को पुलिस ने अक्टूबर 2025 में 'दूध का धुला' बताकर क्लीनचिट दी थी, आज वही सलाखों के पीछे है और पुलिस अब नगर निगम के गलियारों में जिम्मेदार तलाश रही है। तत्कालीन डीसीपी की रिपोर्ट ने सब कुछ 'ओके' था बता दें कि अक्टूबर 2025 में तत्कालीन डीसीपी आशुतोष गुप्ता की रिपोर्ट ने सब कुछ 'ओके' करार दिया था। तब पुलिस ने केवल बयानों को आधार मानकर जांच की फाइल बंद कर दी थी। आज सवाल खड़ा है कि क्या वह जांच महज औपचारिकता थी? एक्स पर पुराना पत्र साझा हुआ, बैकफुट पर आया प्रशासन राष्ट्रीय बाल अधिकार संरक्षण आयोग के पूर्व अध्यक्ष प्रियंक कानूनगो ने इंटरनेट मीडिया के माध्यम एक्स पर जब पुराना पत्र साझा किया तो प्रशासन बैकफुट पर आ गया। पत्र में न केवल गोकशी, बल्कि बांग्लादेशी रोहिंग्याओं के जुड़ाव और संदिग्ध गतिविधियों की चेतावनी भी थी, जिसे दरकिनार कर दिया गया। निगम ने पल्ला झाड़ा और अब पुलिस की नई 'थ्योरी' नगर निगम अब इस पूरे मामले से पल्ला झाड़ रहा है। निगमायुक्त संस्कृति जैन का कहना है कि निगम ने केवल पीपीपी मोड पर जमीन दी है, संचालन का काम नहीं कर रहा था। दूसरी ओर, जहांगीराबाद पुलिस अब उन डॉक्टरों और अफसरों की सूची मांग रही है जो मांस को प्रमाणित करते थे। सूत्रों की मानें तो रोजाना चार कंटेनर मांस विदेशों में सप्लाई होता था। सवाल यह है कि क्या प्रमाणित करने वाले डॉक्टरों को कंटेनरों में जा रहे 'गोमांस' की भनक नहीं थी? जांच पर सवाल उठे जांच पर सबसे बड़ा सवालिया निशान तब लगा, जब हिंदूवादी संगठनों द्वारा पकड़े गए संदिग्ध कंटेनर को पुलिस ने रिपोर्ट आने से पहले ही छोड़ दिया। जब तक मथुरा से लैब रिपोर्ट आई, तब तक वह मांस मुंबई के रास्ते विदेश रवाना हो चुका था। आखिर किसके दबाव में उस रात कंटेनर को 'एग्जिट' दिया गया?

इंदौर में चेहरा ढंककर आए ग्राहकों को अब ज्वेलरी की दुकानों में एंट्री नहीं

इंदौर. शहर की सभी ज्वेलरी दुकानों में अब मास्क, हिजाब या कपड़े से चेहरा ढंककर आने वाले ग्राहकों को प्रवेश नहीं दिया जाएगा। यदि गहने खरीदना है तो चेहरा खुला रखना होगा। इंदौर चांदी-सोना व्यापारी एसोसिएशन ने शहर की सभी ज्वेलरी दुकानों को निर्देश जारी किए हैं कि मास्क, हिजाब या किसी भी तरह से चेहरा ढंककर आने वाले ग्राहकों को गहने न दिखाए जाएं। यह आदेश एसोसिएशन के अध्यक्ष हुकुम सोनी और मंत्री बसंत सोनी ने व्यापारियों के नाम लिखित पत्र जारी कर दिया है। एसोसिएशन का कहना है कि देश के कई शहरों में पिछले कुछ महीनों में चेहरा ढंककर बदमाशों ने सराफा दुकानों में लूट की वारदातें अंजाम दी हैं। अपराधी सीसीटीवी कैमरों से बचने के लिए मास्क या कपड़ों से चेहरा छिपाकर दुकान में घुसते हैं और वारदात के बाद फरार हो जाते हैं। इसी खतरे को देखते हुए यह कदम उठाया गया है। व्यापारियों का कहना है कि यह फैसला किसी समुदाय विशेष के खिलाफ नहीं, बल्कि पूरी तरह सुरक्षा कारणों से लिया गया है। बिहार में लागू, यूपी-झारखंड में तैयारी इसी तरह का नियम बिहार में लागू किया जा चुका है। झारखंड में भी तैयारी है, जबकि उत्तर प्रदेश के वाराणसी और झांसी के सराफा बाजारों में बुर्का, मास्क वाले ग्राहकों के प्रवेश पर रोक के पोस्टर लगाए जा चुके हैं। बिहार में इस फैसले के बाद तीखा विवाद खड़ा हो गया था। मुस्लिम संगठनों और सामाजिक कार्यकर्ताओं ने इसे धार्मिक भेदभाव बताया। बिहार राज्य अल्पसंख्यक आयोग ने इसे असंवैधानिक करार देते हुए प्रशासन से हस्तक्षेप की मांग भी की, जिसके बाद यह मामला राजनीतिक बहस का मुद्दा बन गया। फैसले से होने वाले फायदे अपराध पर अंकुश अपराधियों की पहचान आसान होगी सीसीटीवी फुटेज से जांच में तेजी आएगी लूट और ठगी की घटनाओं पर अंकुश लगेगा व्यापारियों की सुरक्षा स्टाफ का आत्मविश्वास बढ़ेगा हाई वैल्यू ट्रांजेक्शन में डर कम होगा दुकानों में सतर्कता बढ़ेगी ग्राहकों में भरोसा शोरूम में सुरक्षित माहौल बनेगा परिवार के साथ खरीदारी करने में भरोसा बढ़ेगा विरोध करने वालों की अपनी दलील यह फैसला भारत के संविधान और उसकी संवैधानिक परंपराओं के पूरी तरह खिलाफ है। ऐसी कार्रवाई के जरिए नागरिकों को संविधान द्वारा प्रदत्त धार्मिक स्वतंत्रता और मौलिक अधिकारों से वंचित करने की कोशिश की जा रही है। सुरक्षा के नाम पर हिजाब और नकाब को निशाना बनाना न सिर्फ अनुचित है, बल्कि यह सीधे तौर पर धार्मिक भावनाओं को ठेस पहुंचाने वाला कदम है।

एमपी में निगम-मंडल और एल्डरमैन की नियुक्तियां जल्द होंगी

भोपाल. मध्यप्रदेश में बीजेपी की विभिन्न राजनीति पदों पर जिम्मेदारियां जल्द सौंपी जाएगी। मध्यप्रदेश बीजेपी अध्यक्ष हेमंत खंडेलवाल ने स्पष्ट किया है कि पार्टी के निष्ठावान कार्यकर्ताओं को जल्द सत्ता के विभिन्न पदों पर नियुक्त किया जाएगा। मुख्यमंत्री मोहन यादव और पार्टी नेतृत्व ने मिलकर फैसला लिया है। जिससे प्रदेश के निगम-मंडलों और नगरीय निकायों में एल्डरमैन की नियुक्तियों का रास्ता साफ हो गया है। नाम और पद तय कर सूची तैयार कर ली मीडिया से चर्चा के दौरान प्रदेश अध्यक्ष ने बताया कि नियुक्तियों को लेकर सरकार और संगठन के बीच गहन मंथन हो चुका है। पार्टी को जिस कार्यकर्ता को जहां जिम्मेदारी देना है, वह तय कर लिया गया है। नामों की सूची लगभग तैयार है। जल्द अधिकारिक घोषणा कर दी जाएगी। क्षेत्रीय समीकरण, जातिगत संतुलन पर फोकस लंबे समय से खाली पड़े निगम-मंडलों और एल्डरमैन के पदों पर नियुक्ति के संकेत से जमीनी कार्यकर्ताओं में उत्साह जगा दिया है। माना जा रहा है कि इन नियुक्तियों में क्षेत्रीय समीकरणों, जातिगत संतुलन और आगामी चुनावों की राणनीति का विशेष ध्यान रखा गया है।