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लूट का सरगना खालिद गिरफ्तार: मंडला में 2 करोड़ की चोरी का मास्टरमाइंड बिहार से हिरासत में

मंडला मध्यप्रदेश के मंडला में आयुषी ज्वेलर्स से 2 करोड़ से अधिक की लूट मामले में बिहार से मास्टरमाइंड को गिरफ्तार कर लिया गया है. गुरुवार देर रात मध्यप्रदेश पुलिस और मुजफ्फरपुर पुलिस की संयुक्त टीम ने सदर, बरूराज और पारू थाना क्षेत्र में छापेमारी कर तीन शातिर अपराधियों को पकड़ा. गिरफ्तार आरोपियों में बरूराज के रामपुरवा अखाड़ा का मास्टरमाइंड खालिद, सदर अतरदह का शशि कुमार और पारू ग्यासपुर का कृष्णा कुमार सिंह शामिल हैं. पुलिस ने घटना में इस्तेमाल खालिद की कार और उनके मोबाइल फोन भी जब्त किए हैं. तीनों आरोपियों को 48 घंटे की ट्रांजिट रिमांड पर लेने के लिए मंडला पुलिस ने कोर्ट में आवेदन दिया है. गिरफ्तार आरोपियों में बरूराज थाना क्षेत्र रामपुरवा अखाड़ा निवासी मास्टरमाइंड मो. खालिद, सदर थाना क्षेत्र के अतरदह वार्ड 31 का शशि कुमार और पारू थाना के ग्यासपुर का कृष्णा कुमार सिंह है। पुलिस ने घटना में इस्तेमाल खालिद की कार भी जब्त की। शुक्रवार काे कोतवाली मंडला थाने के एसआई शफीक खान ने तीनों आरोपियों को 48 घंटे की ट्रांजिट रिमांड पर लेने के लिए कोर्ट में आवेदन दिया। पुलिस ने तीनों के मोबाइल भी जब्त किए हैं। लूटे गए सोना-चांदी के जेवर की बरामदगी के लिए पुलिस लगातार दबिश दे रही है। सीसीटीवी फुटेज से मिला सुराग घटना के बाद पुलिस ने अपराधियों की दो कारों को चिह्नित किया। मोबाइल टावर डंप करने के साथ अपराधियों के भागने की दिशा में कई टोल प्लाजा से सीसीटीवी फुटेज खंगाले। इसमें दोनों कार चिह्नित हुई। कारों मालिकों का पता लगाया गया, जिससे पुलिस सीधे मास्टरमाइंड खालिद तक पहुंची। उसकी गिरफ्तारी के बाद शशि और कृष्णा के बारे में पुलिस काे जानकारी मिली। 55 वर्षीय खालिद ने ही पूरी साजिश रची थी। उसने न केवल बिहार बल्कि मध्यप्रदेश के कई अपराधियों को शामिल किया था। पूछताछ में उसने कई साथियों के नाम और पते बताए, जिन पर गठित पांच विशेष टीम लगातार दबिश बनाए हुए है। SDPO पश्चिमी 1 सुचित्रा कुमारी ने बताया कि मध्यप्रदेश पुलिस ने छापेमारी में तीन को गिरफ्तार किया है। जेवरात बरामद नहीं किए गए हैं। मास्टरमाइंड खालिद का आपराधिक इतिहास पता किया जा रहा है। पारू के ग्यासपुर के कृष्णा ने चलाई थी गोली गिरफ्तार तीनों अपराधियों से मध्यप्रदेश पुलिस ने पूछताछ कर उनका बयान दर्ज किया है। कृष्णा कुमार सिंह ने बताया कि वह ग्यासपुर (पारू) का रहने वाला और मजदूरी करता है। उसकी मुलाकात खालिद से हुई, जिसने उसे बताया कि मंडला में एक ज्वेलर्स दुकान में दो से ढाई किलो सोना रहता है, जिसे लूटना है। बड़ा काम है लाइफ सेट हो जाएगी। 17 नवंबर को खालिद अपनी कार से शशि और कृष्णा के साथ कटनी होते हुए जबलपुर और इंदौर की ओर गया और फिर मंडला पहुंचा। वहां पर स्थानीय शातिरों पंकज ठाकुर, लवकुश, शनि, अजहर आदि से संपर्क हुआ। कृष्णा ने स्वीकार किया कि वारदात के दौरान जब आयुष ने विरोध किया, तो गोली उसने चलाई थी। 20 नवंबर को हुई थी वारदात, विरोध पर व्यवसायी को मारी थी गोली। घटना 20 नवंबर की शाम करीब 7.15 से 7.30 बजे के बीच की है। स्टाफ के सिर पर पिस्टल रखकर कहा- बैग छोड़ दो कटरा मंडला स्थित हनुमान मंदिर के सामने आयुषी ज्वेलर्स में अक्षांश सोनी और उनके भाई आयुष सोनी व्यवसाय करते हैं। दुकान में बॉबी यादव कर्मचारी के रूप में काम करता है। रोज की तरह दुकान बंद करने के लिए सोना-चांदी के आभूषण दो बैग में रखकर बॉबी दुकान के सामने खड़ी कार में रखने जा रहा था। उसी समय मंडला की ओर से एक कार तेजी से आकर रुकी। कार से तीन हथियारबंद अपराधी उतरे, जबकि चालक कार में ही बैठा रहा। अपराधियों में से एक ने बॉबी के सिर पर पिस्टल सटाकर बैग वहां रखने के लिए कहा। डर से बॉबी ने बैग छोड़ दिया। इसके बाद एक अपराधी दुकान में घुसा और आयुष से दुकान में रखा पूरा सोना-चांदी निकालने के लिए कहा। वह सोने-चांदी के आभूषण काे लूटने लगा, जिसका आयुष ने विरोध किया। इसपर अपराधी ने पिस्टल से उसके बाएं पैर के घुटने के नीचे गोली मार दी। आयुष खून से लथपथ होकर गिर गया। इसके बाद अपराधी बैग उठाकर कार फरार हो गए। घायल आयुष को बॉबी और अक्षांश का जिला अस्पताल में इलाज हुआ।

बगलामुखी मंदिर जमीन विवाद में बड़ा फैसला: हाईकोर्ट ने फर्जी डिक्री को शून्य कर दिया, सरकार को मिली संपत्ति पर नियंत्रण

 नलखेड़ा आगर मालवा के नलखेड़ा स्थित प्रसिद्ध मां बगलामुखी मंदिर परिसर से जुड़ी करीब 200 करोड़ रुपए की भूमि पर अब राज्य सरकार का नियंत्रण फिर बहाल हो गया है। मध्य प्रदेश हाईकोर्ट की इंदौर बेंच ने राज्य शासन के पक्ष में फैसला देते हुए सनत कुमार और अन्य याचिकाकर्ताओं की पहली अपील खारिज कर दी। इसके साथ ही वर्ष 1997 में बनाई गई संदिग्ध और फर्जी डिक्री को निचली अदालत द्वारा अवैध घोषित किए जाने का आदेश भी बरकरार रखा गया। दो दशक पुराने विवाद का अंत यह मामला बीस साल से ज्यादा समय से चढ़त-उतार में था। साल 1997 में विपक्षी पक्ष ने महत्वपूर्ण तथ्यों को छिपाकर मंदिर की जमीन पर अपना दावा स्थापित करने की कोशिश की थी। आगर के अपर जिला न्यायाधीश ने 14 मार्च 2007 को उपलब्ध साक्ष्यों के आधार पर उस डिक्री को पूरी तरह अवैध करार दिया था। हाईकोर्ट ने भी अपनी सुनवाई में साफ टिप्पणी की कि यह डिक्री धोखे, दस्तावेजों के दमन और एक संदेहास्पद वसीयत पर आधारित थी, जिसे कानूनी तौर पर स्वीकार नहीं किया जा सकता। कोर्ट ने यह भी रेखांकित किया कि संबंधित वाद में मंदिर या मूर्ति को पक्षकार ही नहीं बनाया गया था, जबकि विवाद सीधा मंदिर की संपत्ति से जुड़ा था। महाधिवक्ता ने मजबूती से रखा शासन का पक्ष मामले में शासन की ओर से अतिरिक्त महाधिवक्ता आनंद सोनी ने अंतिम बहस की। उन्होंने कोर्ट के समक्ष राजस्व अभिलेख, ओकाफ समिति के मूल रिकार्ड, मंदिर की ऐतिहासिक संरचना, पूर्व के न्यायालयीन निर्णय तथा फर्जी दस्तावेज़ों के पूरे क्रम को स्पष्टता से रखा। अदालत ने माना कि धोखाधड़ी के माध्यम से उक्त भूमि पर गलत तरीके से दावा स्थापित करने की कोशिश की गई थी। हाई कोर्ट द्वारा सरकार के पक्ष में अपील निरस्त करने से मंदिर की भूमि सुरक्षित हो गई। देर रात तक चली जेसीबी, हटाया अतिक्रमण फैसला आने के बाद शुक्रवार रात को पुलिस और प्रशासन की टीम ने विभिन्न विभागों के दल के साथ मंदिर की भूमि पर से अतिक्रमण हटाया मौके पर एसडीएम सर्वेश यादव नलखेड़ा एसडीओपी देव नारायण यादव सीएमओ मनोज नामदेव नलखेड़ा सुसनेर पुलिस बल अन्य विभागों की टीम के साथ पहुंचे। जेसीबी की मदद से अतिक्रमण हटाया गया। रात में की गई कार्रवाई से अतिक्रमणकर्ताओ में हड़कंप की स्थिति रही। मामले में मौके पर मौजूद अधिकारियों ने कोई भी जानकारी देने से इंकार किया।    डिक्री धोखे से और दस्तावेजों को छुपाकर प्राप्त की गई थी कोर्ट ने स्पष्ट कहा है कि वर्ष 1997 में प्राप्त डिक्री धोखे से और दस्तावेजों को छुपाकर प्राप्त की गई थी। यह विधिक रूप से टिकाऊ नहीं है। कोर्ट ने यह भी माना कि मंदिर को उस वाद में पक्षकार तक नहीं बनाया गया था, जबकि विवाद स्वयं मंदिर की संपत्ति से संबंधित था। कोर्ट ने यह भी देखा कि प्रस्तुत वसीयतनामा संदेहास्पद था और मूल राजस्व अभिलेख मंदिर/मठ की पारंपरिक गुरू-चेले प्रणाली की पुष्टि करते थे। अपील निरस्त करने से मंदिर की भूमि सुरक्षित हुई मामले में शासन की ओर से अतिरिक्त महाधिवक्ता आनंद सोनी ने अंतिम बहस की। उन्होंने कोर्ट के समक्ष राजस्व अभिलेख, ओकाफ समिति के मूल रिकार्ड, मंदिर की ऐतिहासिक संरचना, पूर्व के न्यायालयीन निर्णय तथा फर्जी दस्तावेज़ों के पूरे क्रम को स्पष्टता से रखा। अदालत ने माना कि धोखाधड़ी के माध्यम से उक्त भूमि पर गलत तरीके से दावा स्थापित करने की कोशिश की गई थी। हाई कोर्ट द्वारा सरकार के पक्ष में अपील निरस्त करने से मंदिर की भूमि सुरक्षित हो गई है। गौरतलब है कि उक्त वादित भूमि राजस्व अभिलेखों के अनुसार ऐतिहासिक रूप से मंदिर/धर्मशाला की रही है। उक्त संपत्ति विधिवत मूर्ति श्रीराम मंदिर व्यवस्थापक कलेक्टर के नाम दर्ज है। न्यायालय ने कहा कि किसी भी कपटपूर्ण दावे अथवा दस्तावेज़ से मंदिर की संपत्ति पर अधिकार स्थापित नहीं किया जा सकता है। दो दशकों से ज्यादा समय से चल रहा था विवाद यह विवाद दो दशकों से अधिक समय से चल रहा था। विपक्षी ने 1997 में महत्वपूर्ण तथ्यों को छिपाकर इस भूमि पर दावा स्थापित करने का प्रयास किया था। आगर के अपर जिला न्यायाधीश ने 14 मार्च 2007 को साक्ष्यों के आधार पर उस डिक्री को अवैध घोषित कर दिया था। उच्च न्यायालय ने भी अपनी टिप्पणी में कहा कि वह डिक्री धोखे, दस्तावेजों के दमन और एक संदेहास्पद वसीयतनामे के आधार पर हासिल की गई थी, जो कानूनी रूप से मान्य नहीं है। कोर्ट ने यह भी जिक्र किया कि मंदिर/मूर्ति को उस वाद में पक्षकार नहीं बनाया गया था, जबकि विवाद सीधे मंदिर की संपत्ति से संबंधित था। राज्य के अभिलेखों ने मजबूत किया केस राज्य की ओर से अतिरिक्त महाधिवक्ता आनंद सोनी ने अंतिम सुनवाई में विस्तृत राजस्व रिकॉर्ड, औकाफ समिति के मूल दस्तावेज, मंदिर की गुरु-चेला परंपरा और पहले के फैसलों सहित संदिग्ध दस्तावेजों की पूरी श्रृंखला कोर्ट में पेश की। कोर्ट ने माना कि ये रिकॉर्ड न केवल मजबूत हैं, बल्कि पूरे छल के प्रकरण को उजागर करते हैं। विवादित भूमि कई वर्षों से सरकारी अभिलेखों में मंदिर और धर्मशाला की संपत्ति के रूप में दर्ज थी, और वर्ष 2006-07 से यह जमीन श्रीराम मंदिर व्यवस्थापक कलेक्टर के नाम विधिवत दर्ज है। अदालत ने यह भी स्पष्ट किया कि कोई भी कपटपूर्ण दस्तावेज मंदिर की संपत्ति पर अधिकार का आधार नहीं बन सकता। साल 1997 में विपक्षी पक्ष ने महत्वपूर्ण तथ्यों को छिपाकर मंदिर की जमीन पर अपना दावा स्थापित करने की कोशिश की थी। हाईकोर्ट के आदेश के बाद प्रशासन की कार्रवाई फैसला आने के तुरंत बाद जिला प्रशासन ने शुक्रवार (28 नवंबर) देर रात मंदिर परिसर की जमीन पर दोबारा अधिकार लेने की प्रक्रिया शुरू कर दी। मौके पर अधिकारियों की टीम पहुंची और भूमि पर शासन का कब्जा फिर से बहाल करने के लिए कार्रवाई आगे बढ़ाई। कई दुकानदार रात में ही अपना सामान हटाते दिखाई दिए, क्योंकि जमीन पर लंबे समय से निजी उपयोग को लेकर तनाव बना हुआ था। रिकॉर्ड में मंदिर/धर्मशाला की संपत्ति के रूप में दर्ज थी राज्य की ओर से अतिरिक्त महाधिवक्ता आनंद सोनी ने अंतिम सुनवाई में हाजिर होकर विस्तृत राजस्व अभिलेख, औकाफ समिति के मूल रिकॉर्ड, मंदिर की पारंपरिक गुरु-चेला प्रणाली और पहले के फैसलों सहित … Read more

चित्रकूट में जमीन विवाद तूल पकड़ा: महंत पर किसान की जमीन हथियाने का आरोप, कोर्ट में मामला लंबित

चित्रकूट में फिर जमीनी खेल, महंत पर किसान की जमीन हथियाने का आरोप कोर्ट में मामला लंबित, फिर भी दबंगों के सहारे कराया जा रहा बाउंड्री का निर्माण सतना   धार्मिक नगरी चित्रकूट में जमीनों का खेल फिर शुरू हो गया। इस बार आरोप अचारी आश्रम के महंत पर लगा है। आरोप है कि किसान की जमीन कब्जाई जा रही है, जबकि मामला कोर्ट में लंबित है। पीडि़़त परिवार का कहना है कि महंत राजनैतिक लोगों का प्रभाव दिखाकर प्रशासनिक अधिकारियों पर दबाव बनाए हुए हैं, जिससे शिकायत होने के बाद भी कोई एक्शन नहीं लिया जा रहा है। मामला कोर्ट में विचाराधीन होने के बावजूद विवादित भूमि पर बाउंड्री खड़ी करवा रहे हैं। इससे पूरे इलाके में आक्रोश का माहौल है। रात के अंधेरे में जेसीबी लगाकर खुदाई की गई वहीं सैकड़ों लोगों को बुलाकर निर्माण कार्य कराया जा रहा है।  जानकारी के अनुसार, नयागांव(हनुमान धारा) पटवारी हल्का की आराजी नंबर 904/3/2 और 904/3/1 में कुल 11 हेक्टेयर के करीब भूमि है। यह जमीन पिछले लगभग 80 वर्षों से दिनेश मिश्रा पिता स्व नवल किशोर मिश्रा और उनके परिवार के नाम राजस्व अभिलेखों में दर्ज है। मिश्रा परिवार का कहना है कि इस भूमि के ठीक बगल में अचारी आश्रम की 56 बीघा जमीन स्थित है, लेकिन आश्रम प्रबंधन ने राजस्व रिकॉर्ड से छेड़छाड़ कर गलत नक्शा प्रस्तुत किया है और अब विवादित हिस्से पर कब्जा जमाने की कोशिश की जा रही है। दिनेश मिश्रा का आरोप है कि रात के अंधेरे में दबंगों को खड़ा कर बाउंड्री वॉल का निर्माण कराया जा रहा है, जबकि यह प्रकरण फिलहाल न्यायालय में विचाराधीन है। शिकायतें कई बार राजस्व और पुलिस अधिकारियों तक पहुंचाई गईं, लेकिन अब तक कोई ठोस कार्रवाई नहीं हुई है।  तो करेंगे अनशन  पीडि़त परिवार में प्रशासन के प्रति गहरा रोष है। भूमिस्वामी दिनेश मिश्रा का कहना है कि यदि जिला प्रशासन ने इस अन्याय को रोकने के लिए शीघ्र हस्तक्षेप नहीं किया तो वे परिवार सहित इसी जगह पर परिवार सहित आमरण अनशन करेंगे। ज्ञात हो कि पिछले दिनों उन्होंने पुलिस अधीक्षक और थाना में आवेदन देकर इस मामले में कार्रवाई की मांग की थी, पुलिस ने अब तक कोई कार्रवाई नहीं की।

मुख्यमंत्री ने चंदेरी इको रिट्रीट के शुभारंभ पर दिया बधाई संदेश

स्वदेशी के महत्व को बढ़ाने वाला कार्यक्रम है चंदेरी इको रिट्रीट : मुख्यमंत्री डॉ. यादव मुख्यमंत्री ने चंदेरी इको रिट्रीट के शुभारंभ पर दिया बधाई संदेश चंदेरी में प्रारंभ हुआ इको रिट्रीट, शिल्प, कला एवं रोमांच का बना संगम केंद्रीय मंत्री  सिंधिया ने की अध्यक्षता प्रमुख फैशन ब्रांड्स के साथ चंदेरी की पारंपरिक बुनाई और अनूठी विरासत को समर्पित फैशन एवं संगीत समारोह तीन माह से अधिक संचालित होगी लग्जरी सुविधाओं से लैस टेंट सिटी मध्यप्रदेश टूरिज्म बोर्ड द्वारा सनसेट डेजर्ट कैम्प के सहयोग से हो रहा आयोजन भोपाल  मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने कहा है कि प्रधानमंत्री  नरेन्द्र मोदी ने स्वदेशी उत्पादों और कारीगरों को भरपूर प्रोत्साहन दिया है। इस नाते मध्यप्रदेश सरकार इस दिशा में भरसक प्रयास करते हुए शिल्पकारों को आगे बढ़ाने का कार्य करेगी। चंदेरी जैसे स्थानों की ख्याति ऐतिहासिक, प्राकृतिक सौन्दर्य, पर्यटन के साथ ही वस्त्र बुनाई के कारण भी है। यहां के बुनकर चंदेरी साड़ियों के निर्माण में लगे हैं, जिसे गुणवत्ता के आधार पर जीआई टैग प्राप्त हुआ है, यह एक अहम उपलब्धि है। मुख्यमंत्री डॉ. यादव शुक्रवार को उज्जैन से चंदेरी में हो रही ईको रिट्रीट आयोजन के लिए भेजे विशेष संदेश में यह विचार व्यक्त किए। मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने कहा कि चंदेरी का इतिहास गौरवशाली है। प्रकृति ने भी इस स्थान को अनेक खूबियां दी हैं, जिससे यह स्थान पर्यटकों को आकर्षित करता है। तीन माह के लिए पर्यटक टेंट सिटी का लाभ ले सकेंगे। इको रिट्रीट की सौगात स्थानीय बुनकरों के लिए भी लाभकारी है। यह स्थान सिने जगत के लिए भी महत्वपूर्ण डेस्टिनेशन बन रहा है। यहां अनेक फिल्मों और वेबसीरीज का फिल्मांकन हो रहा है। फैशन की दुनिया के लोग इको रिट्रीट के माध्यम से यहां पहुंचे हैं। वे लाईव वीविंग देखकर अभिभूत होंगे। मेहनतकश बुनकर अनोखी बुनाई करते हैं। उद्योग और रोजगार वर्ष 2025 में राज्य सरकार ने चंदेरी के शिल्पियों को प्रोत्साहित करने के लिए महत्वपूर्ण कदम उठाया है। इको रिट्रीट के माध्यम से यहां की जग प्रसिद्ध साड़ियों की ब्रांडिंग हो रही है। बॉयर सेलर मीट, हैण्डलूम प्रदर्शन, व्यंजन मेले और लाइट एंड साउंड-शो के माध्यम से चंदेरी का महत्व देश और दुनिया के सामने स्थापित होगा। स्व-सहायता समूहों की आर्थिक प्रगति में भी ये सभी कार्यक्रम उपयोगी सिद्ध होंगे। मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने कहा कि एडवेंचर स्पोर्ट्स के माध्यम से स्थानीय युवक और पर्यटक न सिर्फ आनंद प्राप्त करेंगे, बल्कि खेलों और खिलाड़ियों के प्रोत्साहन की दृष्टि से भी यह महत्वपूर्ण गतिविधि सिद्ध होगी। टेंट सिटी लुभाएंगी पर्यटकों को चंदेरी इको रिट्रीट–2025 के तृतीय संस्करण का आयोजन मध्यप्रदेश टूरिज्म बोर्ड ने चंदेरी जिला प्रशासन एवं सनसेट डेजर्ट कैम्प के सहयोग से किया। चंदेरी इको रिट्रीट की अध्यक्षता केंद्रीय संचार एवं उत्तर–पूर्वी क्षेत्र विकास मंत्री  ज्योतिरादित्य एम. सिंधिया ने की। चंदेरी इको रिट्रीट, कटी घाटी के पास स्थापित टेंट सिटी तीन महीने से अधिक समय तक देश–विदेश के पर्यटकों के लिए खुली रहेगी। चंदेरी की ऐतिहासिक धरोहर हमारे अतीत की समृद्धि का प्रमाण : केन्द्रीय मंत्री  सिंधिया केंद्रीय संचार एवं उत्तर–पूर्वी क्षेत्र विकास मंत्री  सिंधिया ने कहा कि चंदेरी केवल एक भूगोल नहीं है, यह भारत की सांस्कृतिक आत्मा का वह अध्याय है जिसमें, गौरवशाली इतिहास, अद्भुत स्थापत्य और शताब्दियों पुरानी बुनाई परंपरा एक साथ सांस लेती है। प्रधानमंत्री  नरेन्द्र मोदी की 'लोकल फॉर वोकल' और 'लोकल टू ग्लोबल' की संकल्पना को चंदेरी ने साकार किया है। चंदेरी के किले, बावड़ियां, महल और ऐतिहासिक धरोहरें न केवल हमारे अतीत की समृद्धि का प्रमाण हैं, बल्कि बुंदेलखंड की सांस्कृतिक वीरता और सौंदर्यबोध का जीवित साक्ष्य भी हैं। चंदेरी की साड़ी और यहां की हथकरघा परंपरा भारत की सबसे प्रतिष्ठित और विशिष्ट कलाओं में से एक है- इसकी पारदर्शी बुनावट, महीन ज़री-कढ़ाई और पीढ़ियों से चली आ रही पारंपरिक तकनीकें आज भी दुनिया को आकर्षित करती हैं। यहां के बुनकरों ने कठिन परिस्थितियों में भी अपनी कला को न केवल जीवित रखा बल्कि उसे वैश्विक पहचान दिलाई है। चंदेरी केवल स्मृतियों का स्थान नहीं, बल्कि भारतीय शिल्प, परंपरा और सौंदर्यशास्त्र का जीवंत प्रतीक है। चंदेरी आने वाले समय में अपने इतिहास, अपने हैंडलूम और अपनी सांस्कृतिक विरासत के माध्यम से विश्व मानचित्र पर और सशक्त पहचान बनाएगा। फैशन-शो में दिखी चंदेरी की सांस्कृतिक झलक चंदेरी की पारंपरिक बुनाई और अनूठी विरासत को समर्पित फैशन एवं संगीत समारोह – “Threads of Time: The Chanderi Saga” टेंट सिटी में शुभारंभ के बाद आयोजित किया गया। इस कार्यक्रम में चंदेरी वस्त्र की ऐतिहासिक और कलात्मक यात्रा को आधुनिक दृष्टि से प्रस्तुत किया गया। फैशन-शो में FabIndia, Taneria, Itokri, Noize Jeans और Zee’s by Tajwar जैसे प्रमुख फैशन ब्रांड्स ने अपनी विशेष प्रस्तुतियाँ दीं। रोमांचक गतिविधियों का आनंद ले सकेंगे पर्यटक चंदेरी इको रिट्रीट में पर्यटक रोमांचक गतिविधियों का आनंद ले सकेंगे। साथ ही बघेलखंड और बुंदेलखंड के पारंपरिक व्यंजनों का स्वाद भी पर्यटक चख सकेंगे। परिवार एवं बच्चों के लिए किड्स ज़ोन तथा इनडोर–आउटडोर गेम्स की भी व्यवस्था रहेगी। इस अवसर पर नवीन एवं नवकरणीय ऊर्जा मंत्री  राकेश शुक्ला, चंदेरी विधायक  जगन्नाथ सिंह रघुवंशी, मुंगावली विधायक  ब्रजेन्द्र सिंह यादव के अलावा  आलोक तिवारी, अशोकनगर कलेक्टर  आदित्य सिंह, मध्य प्रदेश टूरिज्म बोर्ड के डिप्टी डायरेक्टर (इवेंट एंड मार्केटिंग)  युवराज पडोले, फैब इंडिया के एमडी  विलियम विसेल, टाटा तनेरिया के सीईओ  अम्बुज नारायण उपस्थित रहे।  

मल्हारगढ़ थाने की राष्ट्रीय उपलब्धि पर मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने दी बधाई

मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने मंदसौर जिले के मल्हारगढ़ थाने को उच्च रैंकिंग के लिए दी बधाई गर्व की बात , मल्हारगढ़ देश के सर्वश्रेष्ठ थानों में हुआ शामिल भोपाल मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने मध्यप्रदेश के मंदसौर जिले के मल्हारगढ़ थाने को उच्च रैंकिंग प्राप्त होने पर प्रसन्नता व्यक्त करते हुए बधाई दी है। केंद्रीय गृह एवं सहकारिता मंत्री श्री अमित शाह द्वारा छत्तीसगढ़ की राजधानी रायपुर में आयोजित पुलिस महानिदेशकों और पुलिस महानिरीक्षकों की कॉन्फ्रेंस में देश के श्रेष्ठ पुलिस थानों के रैंकिंग की घोषणा की गई। इस रैंकिंग में पुलिस थाना मल्हारगढ़, जिला मंदसौर को देश भर के पुलिस थानों में 9 वीं रैंक प्राप्त हुई है। केंद्रीय गृह मंत्रालय ने थानों की रैंकिंग के लिये विभिन्न 70 पैमाने तय किए थे। इनमें अपराध का ग्राफ, आपराधिक प्रकरण को सुलझाने की अवधि, स्वच्छता और पुलिसकर्मियों का व्यवहार सहित अन्य पैमाने शामिल थे। मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने जिला पुलिस अधीक्षक मंदसौर सहित संबंधित थाना स्टॉफ और कर्तव्यनिष्ठ अधिकारियों कर्मचारियों से इस उपलब्धि का स्तर बनाए रखने की अपेक्षा करते हुए अन्य थानों के स्टॉफ को भी मंदसौर से प्रेरणा लेकर श्रेष्ठ कार्य का आह्वान किया है। उन्होंने गर्व का अनुभव करवाने वाली इस महत्वपूर्ण उपलब्धि के लिए मध्यप्रदेश पुलिस के वरिष्ठ अधिकारियों को भी बधाई दी है।  

महाकाल का अनोखा अलंकरण: फूलों की 10–15 किलो वजनी ‘अजगर माला’ चढ़ाई

उज्जैन महाकाल मंदिर में इन दिनों भगवान महाकाल को फूलों की बड़ी व भारी माला पहनाई जा रही है। प्रतिदिन होने वाली पांच आरती के अलावा दिनभर भक्तों की ओर से लाई जाने वाली मालाएं भगवान को अर्पित की जा रही है। हालांकि ज्योतिर्लिंग क्षरण मामले में सुप्रीम कोर्ट द्वारा गठित एक्सपर्ट कमेटी ने भगवान को भारी फूल माला तथा अधिक मात्रा में पुष्प अर्पित नहीं करने का सुझाव दिया है। समय-समय पर मंदिर समिति भी एक्सपर्ट कमेटी के सुझावों पर अमल करने का दावा करती रही है, मगर हकीकत कुछ और ही कहानी बयां कर रही है। श्री महाकालेश्वर ज्योतिर्लिंग का क्षरण रोकने के लिए सारिका गुरु ने वर्ष 2017 में सुप्रीम कोर्ट में याचिका लगाई थी। कोर्ट ने आर्कियोलाजिकल सर्वे आफ इंडिया (एएसआइ) और जियोलाजिकल सर्वे आफ इंडिया (जीएसआइ) के विशेषज्ञों की समिति गठित की थी। एक्सपर्ट कमेटी के सदस्य वर्ष 2019 से लगातार ज्योतिर्लिंग क्षरण की जांच कर रहे हैं। विशेषज्ञों ने क्षरण रोकने के लिए अनेक सुझाव दिए हैं।   इनमें भगवान महाकाल के अभिषेक के लिए सादे पानी की जगह आरओ जल का उपयोग करना, भस्म आरती में ज्योतिर्लिंग पर कपड़ा ढंक कर भस्म अर्पित करना, पंचामृत की मात्रा केवल सवा लीटर करना, भगवान के शृंगार में उपयोग होने वाले आभूषणों का वजन कम करना, भगवान महाकाल को भारी फूल माला तथा अधिक मात्रा में पुष्प अर्पित नहीं करना जैसे सुझाव शामिल है। मंदिर समिति एक्सपर्ट कमेटी के सुझाव पर अमल कर रही है। अभिषेक में आरओ जल का उपयोग हो रहा है, आभूषण का वजन कम कर दिया गया है, भस्म आरती में भस्म अर्पण से पहले ज्योतिर्लिंग को कपड़े से ढंका जाता है। लेकिन मानीटरिंग के अभाव में भगवान को फूलों की भारी माला पहनाने का क्रम जरूर जारी नजर आ रहा है। 10 से 15 किलो वजनी है अजगर माला महाकाल मंदिर प्रशासनिक भवन के पास स्थित हार, फूल व प्रसाद की दुकानों पर फूलों की भारी माला का विक्रय किया जा रहा है, इसे अजगर माला कहा जाता है। इसमें एक हजार कमल के फूलों से बनी सहस्त्र कमल तथा विभिन्न किस्म के फूलों से तैयार की गई भारी माला शामिल है। बताया जाता है फूलों की भारी भरकम माला का वजन करीब 10 से 15 किलो रहता है। दिन भर में भगवान को इस प्रकार की 40 से 50 मालाएं पहनाई जा रही है। 500 से 2100 रुपये कीमत महाकाल मंदिर के आसपास दुकानों से विक्रय की जाने वाली अजगर माला 500 से 2100 रुपये में विक्रय की जा रही है। भक्तों द्वारा लाई जा रही भारी माला को दिनभर भगवान को अर्पित किया जाता है। पांच आरती में भी भगवान को भरी भरकम मालाएं ही अर्पित की जा रही हैं।

उमरीखेड़ा मनोरंजन पार्क में नाइट स्टे शुरू, इंदौर के नजदीक खास अनुभव

 इंदौर  इंदौर शहर से महज दस किमी दूर 190 हेक्टेयर में फैले उमरीखेड़ा मनोरंजन पार्क से पर्यटकों के लिए एक अच्छी खबर है। अब यहां नाइट स्टे की सुविधा शुरू कर दी गई है। रात में ठहरने को लेकर वन विभाग ने ऑनलाइन बुकिंग शुरू कर दी। इसके अंतर्गत पहली बुकिंग 29 नवंबर के लिए की गई है। जब पर्यटक खुले आसमान के नीचे प्रकृति के बीच रात बिता सकेंगे। पार्क में नाइट स्टे के लिए तीन तरह की सुविधाएं तैयार की गई हैं, जिसमें मड हाउस, स्विस टेंट और सामान्य टेंट शामिल है। इन सभी की दरें वन विभाग मुख्यालय ने तय कर दी हैं। अधिकारियों का कहना है कि पर्यटकों को दो दिन पहले बुकिंग करवाना अनिवार्य होगा। नाइट स्टे के साथ ही आगंतुक मालवा और निमाड़ के पारंपरिक व्यंजनों का भी स्वाद ले सकेंगे, जो अनुभव को और खास बनाएगा। पार्क में सुंदर पैदल ट्रैक भी बनाया गया पार्क अप्रैल में पर्यटकों के लिए खोला गया था। इसी दौरान इंदौर वनमंडल ने रुकने की सुविधाएं तैयार कर ली थीं और उनकी दरों का प्रस्ताव मुख्यालय को भेजा था। दरें तय करने में कुछ महीनों का समय लगा और आखिरकार अक्टूबर में मंजूरी मिली। मंजूरी मिलते ही बुकिंग शुरू हुई और पहली बुकिंग भोपाल के पर्यटकों द्वारा कराई गई। पार्क में एक सुंदर पैदल ट्रैक भी बनाया गया है, जहां सुबह और शाम प्रकृति की शांति का आनंद लिया जा सकता है। साथ ही वन्यजीवों को भी नजदीक से देखने को मौका मिलेगा। वनमंडल अधिकारी प्रदीप मिश्रा ने बताया कि नाइट स्टे शुरू होने के बाद पर्यटकों में खासा उत्साह देखा जा रहा है। दिसंबर के लिए भी कई पर्यटक मड हाउस बुक करवा चुके हैं। यह रहेंगी नाइट स्टे की दरें     मड हाउस (नान एसी) : 1500 रुपये     ठहरना और दोपहर-रात का भोजन : 3000 रुपये     स्विस टेंट (नान एसी) : 1500 रुपये     ठहरना, चाय-नाश्ता व दोपहर-रात का भोजन : 3000 रुपये     सामान्य टेंट : 750 रुपये     प्रवेश शुल्क, भोजन व अन्य एडवेंचर एक्टिविटी : 350 रुपये  

केंद्रीय प्रतिनियुक्ति पर आईएएस अधिकारियों का पलायन, 4 अब भी प्रयासरत

भोपाल   मध्य प्रदेश में क्या वजह है कि आईएएस अधिकारी केंद्रीय प्रतिनियुक्ति पर जाने में रुचि दिखा रहे हैं। पिछले एक साल में 17 आईएएस अधिकारी केंद्रीय प्रतिनियुक्ति पर गए, केवल तीन ही वापस लौटे और वर्तमान में चार प्रयासरत हैं। हाल ही में केंद्रीय कार्मिक विभाग ने एक और आईएएस अधिकारी अविनाश लवानिया की केंद्र में प्रतिनियुक्ति का आदेश जारी किया है। इसके अलावा, सचिव स्तर के चार अधिकारी स्वतंत्र कुमार सिंह, अभिषेक सिंह, श्रीमन शुक्ला और जॉन किंग्सले भी केंद्रीय प्रतिनियुक्ति के लिए प्रयासरत हैं। जो अधिकारी पहले ही प्रतिनियुक्ति पर केंद्र में जा चुके हैं, उनमें प्रीति मैथिल, प्रियंका दास, सोफिया वली फारुकी, तरुण पिथोड़े, अजीत कुमार, चंद्रमोहन ठाकुर, पंकज जैन, नीरज सिंह, तन्वी सुंदरियाल, प्रवीण सिंह अढ़ायच, निकुंज श्रीवास्तव, ज्ञानेश्वर पाटिल, पवन शर्मा, बक्की कार्तिकेयन, हर्ष दीक्षित और अनुराधा पी. शामिल है। राज्य में वापस लौटे तीन अधिकारी विशेष गढ़पाले, आशीष भार्गव और रूही खान हैं। मंत्रियों और विधायकों के कामकाज की गहन समीक्षा डॉ. मोहन यादव के मध्य प्रदेश में मुख्यमंत्री के रूप में कार्यकाल को 12 दिसंबर को दो वर्ष पूर्ण हो रहे हैं। माना जा रहा है कि इसके बाद मंत्रिमंडल का विस्तार हो सकता है। इसी संदर्भ में संगठन और सत्ता के शीर्ष स्तर पर मंत्रिमंडल के सदस्यों की कार्य पद्धति को लेकर गहन समीक्षा चल रही है। संगठन और सत्ता के शीर्ष स्तर पर पिछले दो वर्षों में उनके विभाग का कामकाज, व्यवहार और छवि को लेकर विशेष समीक्षा की जा रही है। प्रभार के जिलों में मंत्रियों के कार्यों का क्या सकारात्मक परिणाम निकला यह भी परखा जा रहा है। इसी तरह से पार्टी के विधायकों की भी संभाग स्तर पर समीक्षा हो रही है। पार्टी के उच्च स्तर से मिली जानकारी के अनुसार इसी समीक्षा के आधार पर मंत्रिमंडल विस्तार में विधायकों को शामिल किया जाएगा और खराब परफॉर्मेंस वाले मंत्रियों को बाहर किया जाएगा। जनसंपर्क कर्मियों की कलम बंद हड़ताल स्थगित राज्य शासन के एक आदेश के बाद जनसंपर्क विभाग के सभी अधिकारी- कर्मचारी उसका विरोध करते हुए कलम बंद हड़ताल पर चले गए थे। आयुक्त जनसंपर्क के आश्वासन के बाद फिलहाल इसे स्थगित कर दिया गया है। दरअसल विभाग के इतिहास में पहली बार ऐसा हुआ है जब राज्य प्रशासनिक सेवा के अधिकारी को जनसंपर्क संचालनालय भोपाल में अपर संचालक के पद पर पदस्थ किया गया है। विभाग के अधिकारी कर्मचारियों ने इस आदेश को तत्काल प्रभाव से निरस्त करने का आग्रह शासन से किया है और कहा है कि जब तक यह आदेश निरस्त नहीं हो जाता तब तक प्रदेश के सभी अधिकारी कर्मचारी कलम बंद हड़ताल पर रहेंगे। विभाग के अधिकारियों का कहना है कि जनसंपर्क विभाग सरकार की नीतियों को संवेदनशील और प्रभावी तरीके से जनता तक पहुंचाते हैं। यह विभाग सरकार की छवि बनाने के लिए कार्य करता है। यहां प्रशासन के बजाय कार्य की प्रकृति और संस्कृति अलग तरह की है। ऐसे में राज्य प्रशासनिक सेवा के अधिकारी गणेश जायसवाल की पदस्थापना ने कई प्रश्न खड़े कर दिए हैं। लेकिन आज दिन में आयुक्त जनसंपर्क से तीन सत्रों में हुई बैठक और आश्वासन के बाद जनसंपर्ककर्मियों ने फिलहाल हड़ताल को स्थगित कर दिया है।  

विश्व बैंक की मदद से छिंदवाड़ा सीवरेज परियोजना पूरी, कुल लागत 237 करोड़ रुपये

विश्व बैंक की सहायता से छिंदवाड़ा सीवरेज परियोजना का काम पूरा, परियोजना लागत 237 करोड़ रूपये भोपाल नगरीय विकास एवं आवास विभाग के उपक्रम मध्यप्रदेश अर्बन डेवलपमेंट द्वारा विश्व बैंक की सहायता से छिंदवाड़ा सीवरेज परियोजना का काम पूरा कर लिया गया है। परियोजना की कुल लागत 237 करोड़ रुपये है, जिसमें इसके 10 वर्षों के संचालन और रखरखाव का खर्च भी शामिल है। परियोजना के तहत शहर में 28 एमएलडी क्षमता वाला सीवरेज ट्रीटमेंट प्लांट स्थापित किया गया है और 271 किलोमीटर का सीवरेज नेटवर्क बिछाया गया है। सीवरेज ट्रीटमेंट प्लांट से छिंदवाड़ा की 2 लाख से अधिक आबादी को लाभ हो रहा है। आधुनिक तकनीक से तैयार सीवरेज प्लांट में मलजल के शोधन के बाद निकले जल का सिंचाई और अन्य कार्यों में पुन: उपयोग किया जा रहा है। सीवरेज प्लांट के बन जाने से शहर की स्वच्छता में सुधार हुआ है। अब नगर का मलजल सीधे नदियों में पूरी तरह से न मिलने पर सफलता मिली है। सीवरेज प्लांट के निर्माण से शहर के पर्यावरण संरक्षण को और भी मदद मिली है। आधार बेस अटेंडेंस पर प्रशिक्षण कार्यशाला संपन्न नगरीय विकास एवं आवास विभाग के उपक्रम मध्‍यप्रदेश अर्बन डेवलपमेंट कम्‍पनी के मुख्‍यालय में आधार बेस अटेंडेंस सिस्टम पर एक दिवसीय प्रशिक्षण कार्यशाला आयोजित हुई। कार्यशाला में कंपनी में काम कर रहे अधिकारियों और कर्मचारियों को आधार बेस अटेंडेंस सिस्टम की तकनीकी प्रक्रियाओं के बारे में जानकारी प्रदान की गई। इस प्रणाली के लागू होने से गुड गवर्नेंस के साथ कंपनी की कार्यप्रणाली में पारदर्शिता भी आई है। प्रशिक्षण का उद्देश्य अधिकारियों एवं कर्मचारियों को नवीनतम डिजिटल सत्यापन तकनीक से परिचित कराना तथा कार्यक्षमता को मजबूत करना था। प्रशिक्षण के दौरान उपस्थित कर्मचारियों की शंकाओं का समाधान भी किया गया।  

वक्फ बोर्ड की संपत्तियों का रजिस्ट्रेशन धीमा, MP में केवल 10% संपत्तियां ही पंजीकृत

भोपाल  मध्य प्रदेश में पिछले छह महीनों में 15,000 से अधिक वक्फ संपत्तियों में से दस प्रतिशत का भी पंजीकरण केंद्रीय वक्फ पोर्टल, UMEED पर नहीं हो पाया है। राज्य और वक्फ के शीर्ष अधिकारियों ने हमारे सहयोगी अखबार टाइम्स ऑफ इंडिया को यह जानकारी दी। केंद्र सरकार ने सभी राज्यों के लिए 6 दिसंबर तक अपनी वक्फ संपत्तियों को इस पोर्टल पर पंजीकृत करने की समय सीमा तय की थी। केंद्र बढ़ाएगी समय सीमा सरकारी अधिकारियों ने पोर्टल पर सभी जानकारी भरने और वक्फ संपत्तियों को पंजीकृत करने में तकनीकी बाधाओं और रिकॉर्ड की अनुपलब्धता को इसका कारण बताया है। हालांकि, उन्होंने उम्मीद जताई कि केंद्र सरकार 6 दिसंबर की समय सीमा को आगे बढ़ाएगी। केंद्र सरकार ने 6 जून को एक नया केंद्रीय वक्फ पोर्टल लॉन्च किया था। वक्फ बोर्ड के अनुसार, राज्य में 15,000 से अधिक वक्फ संपत्तियां हैं, जिनमें से केवल 1,200 संपत्तियों को ही अब तक केंद्रीय पोर्टल पर पंजीकृत किया गया है, जो दस प्रतिशत से भी कम है। नौ लाख से अधिक हैं संपत्तियां केंद्रीय अल्पसंख्यक कार्य मंत्री किरेन रिजिजू ने जून में बताया था कि भारत में 9 लाख से अधिक सूचीबद्ध वक्फ संपत्तियां हैं। उन्होंने कहा था कि राज्यों को समय-सीमा का सख्ती से पालन करना होगा और बोर्ड को यह सुनिश्चित करना होगा कि उनके पास पंजीकृत सभी वक्फ संपत्तियों का विवरण निर्धारित 6 महीनों के भीतर पोर्टल पर अपलोड किया जाए। रिजिजू ने पोर्टल लॉन्च के बाद कहा था कि सभी पुरानी संपत्तियां जो कानून के अनुसार हैं – जिनका मालिकाना हक है और वैध हैं – उन्हें शामिल किया जाएगा। जो अवैध हैं और बिना किसी दस्तावेज के हैं, उन्हें सूचीबद्ध नहीं किया जाएगा। नई वक्फ संपत्तियां, आगे जाकर, डेटाबेस में शामिल की जाएंगी। तकनीकी समस्या हमारे सहयोगी अखबार टाइम्स ऑफ इंडिया से बात करते हुए, मध्य प्रदेश वक्फ बोर्ड के अध्यक्ष संवर पटेल ने कहा कि पोर्टल में 'वक्फ का तरीका' (संपत्ति को वक्फ के रूप में कैसे सूचीबद्ध किया गया) का कॉलम नहीं है। उन्होंने बताया कि मध्य प्रदेश की कुल वक्फ संपत्तियों में से, 14,164 को सरकारी सर्वेक्षण के माध्यम से वक्फ के रूप में पंजीकृत किया गया था। उस कॉलम की अनुपस्थिति में जहां वक्फ का तरीका परिभाषित किया गया है, केंद्र के पोर्टल पर संपत्ति को सूचीबद्ध करना मुश्किल है। हमें उम्मीद है कि तकनीकी समस्या हल हो जाएगी और 6 दिसंबर की समय सीमा बढ़ा दी जाएगी। राज्य के पिछड़ा वर्ग और अल्पसंख्यक कल्याण विभाग के अधिकारियों ने केंद्र के UMEED पोर्टल के साथ तकनीकी समस्याओं को स्वीकार किया है। उन्होंने यह भी बताया कि वक्फ संपत्ति को पंजीकृत करने के लिए पोर्टल पर भरी जाने वाली सभी आवश्यक जानकारी भी राज्य में ऐसी कई संपत्तियों के लिए उपलब्ध नहीं है। पोर्टल पर पंजीकरण प्रक्रिया में मुतवल्ली (देखभाल करने वाले) द्वारा संपत्ति का विवरण दर्ज करना शामिल है। इसके बाद वक्फ बोर्ड द्वारा सत्यापन और नामित सरकारी अधिकारियों द्वारा अनुमोदन किया जाता है। रिकॉर्ड की जांच के बाद, 'UMEED' पोर्टल में एक प्रविष्टि की जाती है।