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मोबाइल बना मानसिक स्वास्थ्य के लिए खतरा, 73% लोग डिजिटल डिपेंडेंसी से पीड़ित

 इंदौर  एमजीएम मेडिकल कॉलेज के मनोरोग विभाग द्वारा मोबाइल की लत से परेशान 500 लोगों पर किए गए अध्ययन के बेहद परेशान करने वाले निष्कर्ष सामने आए हैं। इसके अनुसार मोबाइल अब सिर्फ एक तकनीकी उपकरण नहीं रह गया, बल्कि मानसिक स्वास्थ्य के लिए बड़ा खतरा बनता जा रहा है। अध्ययन के अनुसार 73 प्रतिशत लोग मोबाइल की लत यानी डिजिटल डिपेंडेंसी से पीड़ित पाए गए। अत्यधिक मोबाइल उपयोग के कारण लोग बिना एहसास किए मूक अवसाद (साइलेंट डिप्रेशन) का शिकार हो रहे हैं। 80 प्रतिशत प्रतिभागियों में हल्का लेकिन लगातार चलने वाला अवसाद देखा गया। औसतन लोग प्रतिदिन सात घंटे स्क्रीन पर बिताते हैं। यानी साल भर में करीब 1800 घंटे यानी पूरे 75 दिन मोबाइल पर निकल जाते हैं। विशेषज्ञों के अनुसार, मोबाइल न मिलने पर घबराहट (नोमोफोबिया), नींद में कमी, तनाव बढ़ना और बार-बार फोन चेक करने की मजबूरी जैसे व्यवहारगत लक्षण बढ़ते जा रहे हैं। बच्चों और किशोरों में इसका असर और भी गंभीर है। किशोरों में अवसाद का खतरा बढ़ रहा है और 10–14 वर्ष के बच्चों में दिमागी विकास प्रभावित हो रहा है। मानसिक स्वास्थ्य संबंधी समस्याएं विकराल रूप ले लेंगी अत्यधिक मोबाइल चलाने के कारण किशोरों में आत्मविश्वास में कमी और वास्तविक जीवन से दूरी बढ़ रही है। चूंकि, यह उम्र सीखने, समझने और सामाजिक कौशल विकसित करने की होती है, ऐसे में अत्यधिक स्क्रीन टाइम उनके भविष्य पर नकारात्मक प्रभाव डाल सकता है। इसके लिए स्कूलों में एक मॉडल बनाने की आवश्यकता है। समय रहते यदि मोबाइल उपयोग पर नियंत्रण नहीं किया गया, तो जल्द मानसिक स्वास्थ्य संबंधी समस्याएं विकराल रूप ले लेंगी। उपाय     फोन पार्किंग जोन बनाएं     रोजाना मोबाइल उपयोग का समय तय करें।     अनावश्यक एप्स के नोटिफिकेशन बंद कर दें। इससे बार-बार फोन देखने की आदत कम होगी।     इंटरनेट मीडिया एप दिन में 2-3 बार ही खोलें। इनके उपयोग के लिए टाइम लिमिट सेट कर सकते हैं।     रात में सोते समय मोबाइल को अपने बिस्तर से दूर रखें।     दिनभर में कुछ ऐसा समय तय करें, जब मोबाइल से दूर रहेंगे। जैसे खाना खाते समय, पढ़ाई के समय या परिवार के साथ बैठते समय।     खाली समय में मोबाइल के बजाय किताब पढ़ें, संगीत सुनें, वाक पर जाएं।     घर में एक फोन पार्किंग जोन बनाएं, जहां सभी फोन रख दें और बार-बार हाथ में न लें। इन 5 तरीकों से छुड़ाएं बच्चे की फोन लत बच्चों की इन गलतियों को न करें नज़रअंदाज, तुरंत टोके वरना हाथ से निकल जाएगा आपका बच्चा स्क्रीन टाइम करें कंट्रोल  अपने बच्चे के लिए स्मार्टफोन का उपयोग करने के लिए एक सीमित समय निर्धारित करें. उदाहरण के लिए, आप उन्हें दिन में केवल 1-2 घंटे के लिए स्मार्टफोन का उपयोग करने की परमिशन दे सकते हैं. स्मार्टफोन-फ्री एरिया बनाएं अपने घर में एक स्मार्टफोन-फ्री एरिया बनाएं. उदाहरण के लिए, आप अपने डाइनिंग या बेडरूम में स्मार्टफोन का उपयोग बिल्कुल न करें.  ऑफलाइन एक्टिविटीज पर ध्यान दीजिए अपने बच्चे के लिए ऑप्शनल एक्टिविटीज का ऑप्शन दीजिए, जो उन्हें स्मार्टफोन से दूर रखें. उदाहरण के लिए, आप उन्हें खेल, बुक रीडिं, या कला बनाने के लिए प्रोत्साहित कर सकते हैं. निगरानी रखें अपने बच्चे के स्मार्टफोन का उपयोग करने पर निगरानी रखें. आप फोन में पैरेंट्ल कंट्रोल एप्लीकेशन इंस्टॉल कर सकते हैं जिससे आपका बच्चा फोन पर क्या देख रहा है, इसको आसानी से ट्रैक कर सकते हैं.  रात में फोन चलाने से रोकें अपने बच्चे के साथ बातचीत करें और उन्हें स्मार्टफोन की लत के बारे में समझाएं. इसके अलावा रात के समय बच्चे को फोन बिल्कुल न दें. इससे बच्चे की आंख और स्किन दोनों पर बुरा असर पड़ सकता है.  फोन की लत से होने वाले नुकसान      नींद की कमी     अवसाद     चिड़चिड़ापन     ध्यानकेंद्रित करने में परेशानी     आत्मसम्मान की कमी  

विद्यार्थियों के मानसिक स्वास्थ्य को बढ़ावा, मध्यप्रदेश में स्टेट टास्क फोर्स का गठन

भोपाल  कॉलेजों में पढ़ने वाले विद्यार्थियों के मानसिक स्वास्थ्य को लेकर देशभर में बढ़ रही चिंता बढ़ रही है, इसे देखते हुए मध्य प्रदेश सरकार ने इसे प्राथमिकता पर रखा है, उच्च शिक्षा विभाग ने इस दिशा में ठोस और व्यापक कदम उठाने की शुरुआत कर दी है। प्रदेश सरकार ने सुप्रीम कोर्ट और नेशनल टास्क फोर्स (NTF) के निर्देशों के बाद स्टेट टास्क फोर्स (STF) का गठन कर उसे सक्रिय कर दिया है, जो अब पूरे राज्य में विश्वविद्यालयों, महाविद्यालयों और कोचिंग संस्थानों में मानसिक स्वास्थ्य संबंधी उपायों की निगरानी और सुधार की रूपरेखा तय कर रही है। उल्‍लेखनीय है कि NTF द्वारा आयुक्त, उच्च शिक्षा प्रबल सिपाहा को राज्य स्तरीय नोडल अधिकारी नियुक्त किया गया है। उच्च शिक्षा विभाग के अनुसार यह पहल केवल एक औपचारिक प्रक्रिया नहीं, बल्कि “राज्य के विद्यार्थियों के लिए एक सुरक्षित, सहयोगी और दबावमुक्त शैक्षणिक माहौल” तैयार करने की दिशा में सबसे बड़ा प्रशासनिक प्रयास है। STF के हाथ में मानसिक स्वास्थ्य सुधार की कमान NTF के निर्देशों के बाद उच्च शिक्षा विभाग ने एक स्टेट टास्क फोर्स (STF) का गठन किया है । यह राज्य में विद्यार्थियों के मानसिक स्वास्थ्य, परामर्श सेवाओं और रोकथाम उपायों पर केंद्रित नीतिगत हस्तक्षेपों के लिए योजना एवं निर्देश जारी कर रही है। एसटीएफ के अध्‍यक्ष आयुक्त, उच्च शिक्षा प्रबल सिपाहा है। ओएसडी डॉ. उषा के. नायर को इसका सदस्य सचिव नियुक्‍त किया गया है। एसटीएफ में स्कूल शिक्षा, तकनीकी शिक्षा, चिकित्सा शिक्षा, स्वास्थ्य, पुलिस, बाल सुरक्षा, सामाजिक न्याय तथा नगरीय प्रशासन विभागों के प्रतिनिधियों को भी शामिल किया गया है । यह एक बहु-विभागीय तंत्र है जो विद्यार्थियों की चुनौतियों को व्यापक दृष्टि से देखेगा। स्टेट टास्क फोर्स (STF) क्या करेगी? राज्य में मानसिक स्वास्थ्य और परामर्श से जुड़े उपायों की निगरानी, NTF के निर्देशों के अनुपालन का मूल्यांकन, कोचिंग व कॉलेज परिसरों का मानसिक स्वास्थ्य ऑडिट, हेल्पलाइन, काउंसलिंग, मनोसामाजिक समर्थन की व्यवस्था को मजबूत करना, जिला स्तरीय DTF को दिशा देना और उनकी रिपोर्ट की समीक्षा, आत्महत्या रोकथाम से जुड़े जोखिम कारकों की पहचान और सुधार को बढ़ावा, राज्य सरकार को नियमित सिफारिशें और नीतिगत सुझाव शैक्षणिक संस्‍थानों में नोडल अधिकारियों की होगी नियुक्ति सभी सुधारों के समन्वय प्रभावी हो, इसके लिए उच्च शिक्षा विभाग ने राज्य के सभी शासकीय एवं निजी शैक्षणिक संस्‍थानों को नोडल अधिकारी नियुक्‍त करने के निर्देश दिए हैं। इसमें सरकारी विश्वविद्यालय, निजी विश्वविद्यालय, क्षेत्रीय अतिरिक्त संचालकों एवं सभी शासकीय महाविद्यालय शामिल हैं। जिला स्तरीय टास्क फोर्स (DTF) का गठन अनिवार्य राज्य स्तर के प्रयास प्रभावी रूप से जिलों तक पहुँचे इसके लिए उच्च शिक्षा विभाग ने प्रत्येक जिले में जिला स्तरीय टास्क फोर्स (DTF) का गठन भी अनिवार्य कर दिया है। डीटीएफ की अध्यक्षता जिला कलेक्टर करेंगे, जबकि अग्रणी महाविद्यालय के प्राचार्य, जिला शिक्षा अधिकारी और तकनीकी, चिकित्सा तथा स्वास्थ्य विभागों के प्रतिनिधि इसके सदस्य होंगे। ये जिम्मेदारी रहेगी डीटीएफ की      कोचिंग संस्थानों के पंजीयन की निगरानी करना।     परामर्श सेवाओं की उपलब्धता कराना।     STF–NTF निर्देशों के क्रियान्वयन कराना।     शैक्षणिक परिसरों की सुरक्षा पर निगरानी रखना। कोचिंग संस्थानों का अनिवार्य पंजीयन अनिवार्य  उच्च शिक्षा विभाग ने यह सुनिश्चित किया है कि किसी भी जिले में बिना पंजीयन के कोई भी कोचिंग संस्था संचालित न हो। यह कदम विद्यार्थियों पर बढ़ते शैक्षणिक दबाव, अनियमित प्रबंधन और अनुशासनहीन वातावरण को नियंत्रित करने के उद्देश्य से महत्वपूर्ण माना जा रहा है। इसलिए जरूरी हैं ये कदम देशभर में मानसिक तनाव और परीक्षा दबाव से जुड़े मामलों में लगातार वृद्धि हो रही है। उच्च शिक्षा विभाग का मानना है कि समस्या केवल शैक्षणिक नहीं, बल्कि संस्थागत संरचना से भी जुड़ी है, जहाँ गाइडलाइन, परामर्श, निगरानी और संवाद की कमी विद्यार्थियों को अकेला कर देती है। एसटीएफ और डीटीएफ का गठन इसी कमी को दूर करने का प्रयास है।  

नई कलेक्टर गाइडलाइन के तहत 15 जनवरी तक जिले भेजा जाएगा प्रस्ताव, महंगी होगी संपत्ति

भोपाल मध्य प्रदेश में एक बार फिर से प्रापर्टी की दरें बढ़ाने की कवायद शुरू कर दी गई है। इसके लिए वित्तीय वर्ष 2026-27 की कलेक्टर गाइडलाइन (प्रापर्टी की दरें बढ़ाने का प्रस्ताव) बनाने का काम शुरू कर दिया गया है। इस संबंध में महानिरीक्षक पंजीयन अमित तोमर ने बुधवार को आदेश जारी किया है। आदेश के अनुसार नई गाइडलाइन का प्रस्ताव पहले सभी जिलों की उप जिला मूल्यांकन समितियों द्वारा बनाकर 15 जनवरी 2026 तक जिला मूल्यांकन समितियों को भेजना होगा। इसके बाद जिला मूल्यांकन समिति प्रस्तावित गाइडलाइन को लेकर अधिसूचना जारी कर लोगों व राजनीतिक दलों से सुझाव लेगी। 31 मार्च से नई दरें लागू होंगी इन सुझावों पर चर्चा के बाद आवश्यकता होने पर संशोधन कर 30 जनवरी तक प्रस्ताव को अंतिम रूप दिया जाएगा। सभी जिला मूल्यांकन समितियों द्वारा 15 फरवरी तक गाइडलाइन का प्रस्ताव केंद्रीय मूल्यांकन बोर्ड को भेज दिया जाएगा। इस प्रस्ताव पर बोर्ड शासन से चर्चा के बाद 31 मार्च से प्रदेशभर में प्रापर्टी की नई दरें लागू कर देगा। जानकारी के अनुसार प्रदेश में करीब एक लाख 12 हजार में से 74 हजार स्थानों पर प्रापर्टी की खरीद-फरोख्त अधिक होती है। विभिन्न जिलों में इन स्थानों का पंजीयन और राजस्व अधिकारियों द्वारा एआई सहित अन्य माध्यमों से सर्वे कराया जाएगा। इस सर्वे के बाद ही तय होगा कि कितने स्थानों पर प्रापर्टी की दरों में वृद्धि की जानी है। बता दें कि वित्तीय वर्ष 2025-26 में लगभग 60 हजार स्थानों पर प्रापर्टी की दरों में वृद्धि की गई थी। हालांकि आवासीय आरसीसी निर्माण और सभी क्षेत्रों में आरबीसी, टिनशेड, कच्चा कवेलू के लिए प्रचलित निर्माण दरों में कोई वृद्धि नहीं की गई थी। इन बिंदुओं का ध्यान रखना होगा     स्थानों में दरें निर्धारित करने (यथावत, वृद्धि या कमी) नये स्थान व कालोनी जोड़े जाने की स्थिति में दरें प्रस्तावित किए जाने के लिए आवश्यक अनुमतियों की जानकारी एवं दस्तावेजी साक्ष्य उपलब्ध हों।     ऐसे स्थान जहां भूमि अधिग्रहण हो रही है या होने की संभावना है तो स्थानों व अधिग्रहण भूमि के आसपास के क्षेत्रों में होने वाले संभावित विकास को दृष्टिगत रखते हुए दरें प्रस्तावित की जाएं।     मूल्य सूचकांक तथा नगर व ग्राम में हुए और प्रस्तावित विकास को दृष्टिगत रखना होगा।     दरें यथासंभव वास्तवित रूप से प्रचलित दरों के अनुरूप हों।     पिछले सालों की निर्माण के लिए तय लागत दरों को ध्यान में रखते हुए प्लाट आदि की दरें निर्धारित की जाएं।  

भोपाल में डिजिटल लाइफ सर्टिफिकेट शिविर का हुआ सफल आयोजन

बड़ी संख्या में एम.पी. ट्रांसको के पेंशनर्स ने उठाया शिविर का लाभ भोपाल भारत सरकार के डिजिटल इंडिया विजन के तहत ऊर्जा मंत्री श्री प्रद्युम्न सिंह तोमर के निर्देश पर मध्यप्रदेश पावर ट्रांसमिशन कंपनी (एम.पी. ट्रांसको) द्वारा पेंशनर्स की सुविधा के लिए 20 नवंबर को भोपाल स्थित एम.पी. ट्रांसको के प्रशासनिक भवन, बिजली नगर, गोविंदपुरा में डिजिटल लाइफ सर्टिफिकेट शिविर का सफलतापूर्वक आयोजन किया गया। एम.पी. ट्रांसको के मुख्य वित्तीय अधिकारी मुकुल मेहरोत्रा ने बताया कि शिविर में पेंशनर्स को लाइव डेमोंस्ट्रेशन के माध्यम से डिजिटल लाइफ सर्टिफिकेट बनाने की संपूर्ण प्रक्रिया समझाई गई। इससे उपस्थित पेंशनर्स को आधुनिक डिजिटल सुविधाओं का व्यावहारिक ज्ञान प्राप्त हुआ। शिविर का मुख्य उद्देश्य पेंशनर्स को डिजिटल लाइफ सर्टिफिकेट जनरेट करने की सरल एवं त्वरित प्रक्रिया से अवगत कराना और उन्हें एक ही स्थान पर सहज सेवाएँ उपलब्ध कराना था।  

भोपाल आबकारी विभाग द्वारा लगातार की जा रही कार्यवाही

मैं एक और उल्लेखनीय कार्यवाही जिसमे हाई ब्रांड की भारी मात्र मैं विदेशीमदिरा बरामद   भोपाल  आबकारी आयुक्त श्री अभिजीत अग्रवाल ,कलेक्टर भोपाल श्री कोशलेंद्र विक्रम सिंह *के निर्देशन पर सहायक आबकारी आयुक्त श्री वीरेंद्र धाकड़ * के मार्गदर्शन और नियंत्रण कक्ष प्रभारी राम गोपाल भदौरिया के नेतृत्व में भोपाल जिले के आबकारी विभाग द्वारा आज दिनांक 21.11.25 को मुखबिर की सूचना के आधार पर गिन्नौरी मोहल्ला मैं मस्जिद के सामने से आरोपी राहुल यादव के रहवासी मकान से हाई ब्रांड विदेशी मदिरा की कुल  98पेटिया  जिसमे ब्लेंडर्सप्राइड ,ग्लेनलिविट ब्लैवकलेबल, रेडलबेल , जेम्सन, रणथम्भौर, जागरमास्टर,सिग्नेचर ऐब्सलूट वोडका , आइकोनिक, ग्रेगोस, बकार्डी,रॉयल चैलेंज ,हंड्रेडपाइपर,ब्लैकडॉग , इम्पीरियल ब्लू , ब्लैक न वाइट एलसीज़न, ओल्ड मोंक,बैकबेंचर,मैजिक्मोमेंट, ऑफ़िसर्चोईस, ब्लेंडर,मैकडॉवेल मार्क प्यूरिटी आदि ब्रांड शामिल है जप्त की गई है । मदिरा का कुल अनुमानित मूल्य 2060000/-( बीस लाख साठ हज़ार )लाख है मौके पर आरोपित गायत्री यादव को गिरफ्तार कर मध्य प्रदेश आबकारी अधिनियम की धारा 34(1)क 34(2) के तहत प्रकरण कायम कर विवेचना मैं लिया गया है उक्त कार्यवाही व्रत प्रभारी नीरज कुमार दूबे द्वारा कायम किया गया जिसमे भोपाल के सभी मैदानी अधिकारियों का महत्वपूर्ण सहयोग रहा ।आरोपिया का बेटा राहुल यादव के विरुद्ध पूर्व मैं भी 34(2)का प्रकरण दर्ज किया गया है ।सहायक आबकारी आयुक्त श्री वीरेंद्र धाकड़ द्वारा बताया गया की  जिले के आबकारी बल द्वारा निरंतर महत्वपूर्ण कार्यवाहियां की जा रही है जो आगे भी लगातार जारी रहेगी ।

अमृत हरित महाअभियान के लिये संभागवार बैठकें, स्थानीय नर्सरियों को सुदृढ़ करने के निर्देश

भोपाल नगरीय प्रशासन एवं विकास विभाग ने प्रदेश के सभी नगरीय निकायों को वर्ष 2026 के लिये व्यापक पौधरोपण अभियान की कार्ययोजना तैयार करने के निर्देश दिये हैं। इस संबंध में संभागीय स्तर पर कार्यशाला आयोजित करने का सिलसिला शुरू हो गया है। आयुक्त नगरीय प्रशासन श्री संकेत भोंडवे 28 नवम्बर को सागर में अमृत हरित महाअभियान पर केन्द्रित बैठक में तैयार की गई कार्ययोजना की समीक्षा करेंगे। ग्वालियर में अभियान की हुई समीक्षा ग्वालियर में पिछले दिनों नगरीय निकायों के अमृत हरित महाअभियान के नोडल अधिकारी और फील्ड स्टाफ की हुई बैठक में ग्वालियर और चंबल संभाग की तैयार की गई कार्ययोजना पर चर्चा हुई। बैठक के बाद हुई कार्यशाला में अमृत मित्र महिलाओं को पौधों की सुरक्षा का प्रशिक्षण दिया गया। ग्वालियर चंबल संभाग के 59 नगरीय निकायों में पिछले वर्ष 3 लाख 50 हजार विभिन्न किस्मों के पौधों का रोपण हुआ था। कार्यशाला में ग्वालियर नगर निगम आयुक्त श्री संघप्रिय ने वर्ष 2026 के लिये तैयार की जा रही कार्ययोजना की जानकारी दी। जबलपुर में 5 दिसम्बर को और इंदौर में 10 दिसम्बर को कार्यशाला आयोजित की जा रही है। इन कार्यशालाओं में स्वयंसेवी संगठनों के प्रतिनिधियों को भी आमंत्रित किया गया है। नगरीय निकायों द्वारा वर्ष 2026 में सीवरेज, वॉटर ट्रीटमेंट प्लांट और ओवरहेड टेंक के साथ जलसंरचनाओं के आस-पास की भूमि पर व्यापक पौधरोपण की तैयारी किये जाने के लिये कहा गया है। नगरीय निकायों को स्थानीय स्तर पर नर्सरियों को समृद्ध करने के लिये कहा गया है। इन बैठकों में वर्ष-2025 में लगाएं गए पौधों की सुरक्षा संबंधी व्यवस्थाओं की भी समीक्षा की जा रही है।  

खेल मंत्री सारंग की उपस्थिति में होगा बाल वैज्ञानिक प्रदर्शनी का समापन

52वीं राष्ट्रीय बाल वैज्ञानिक प्रदर्शनी का समापन समारोह 22 नवम्बर को भोपाल  भोपाल में 52वीं राष्ट्रीय बाल वैज्ञानिक प्रदर्शनी 2025 का समापन समारोह 22 नवम्बर शनिवार को दोपहर 12 बजे सहकारिता खेल, युवा कल्याण मंत्री श्री विश्वास सारंग की उपस्थिति में क्षेत्रीय शिक्षा संस्थान (आर.आई.ई.) श्यामला हिल्स में होगा। समापन समारोह में महापौर नगर पालिका निगम श्रीमती मालती राय भी उपस्थित रहेंगी। समापन समारोह में केन्द्रीय सचिव स्कूल शिक्षा एवं साक्षरता विभाग श्री संजय कुमार एवं निदेशक राष्ट्रीय नवप्रवर्तन प्रतिष्ठान गांधी नगर गुजरात डॉ. अरविंद सी. रानाडे भी मौजूद रहेंगे। राष्ट्रीय बाल वैज्ञानिक प्रदर्शनी 18 नवम्बर से शुरू हुई थी। प्रदर्शनी में 31 राज्यों और केन्द्रशासित प्रदेशों के लगभग 900 विद्यार्थी एवं शिक्षकों ने संयुक्त रूप से मिलकर विज्ञान पर केन्द्रित प्रोजेक्ट एवं मॉडल प्रस्तुत किये। प्रदर्शनी का उददेश्य युवा पीढ़ी में विज्ञान के प्रति रूचि पैदा करना और वैज्ञानिक विचार विकसित करना था। इस वर्ष की राष्ट्रीय बाल वैज्ञानिक प्रदर्शनी की थीम सतत् भविष्य के लिये विज्ञान एवं प्रौद्योगिकी रखी गई थी।  

मुख्यमंत्री डॉ. यादव का हैदराबाद में निवेश को लेकर रोड-शो

दक्षिण भारत के उद्योगपतियों से निवेश पर होगा विस्तृत संवाद ग्रीन एनर्जी, आईटी, आईटीईएस एवं इएसडीएम सेक्टर के उद्योगपति मध्यप्रदेश में निवेश के अवसरों से होंगे रू-ब-रू भोपाल  मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव मध्यप्रदेश में बड़े औद्योगिक निवेश आकर्षित करने के लिए 22 नवंबर को हैदराबाद में ‘इन्वेस्टमेंट अपॉर्चुनिटीज इन मध्यप्रदेश’ सत्र में दक्षिण भारत के प्रमुख उद्योगपतियों के साथ संवाद करेंगे। यह सत्र उद्योग समूहों के लिए मध्यप्रदेश की नीतियों, आधारभूत संरचना और निवेश के अवसरों को जानने का महत्वपूर्ण मंच बनेगा। मुख्यमंत्री डॉ. यादव हैदराबाद में उद्योग जगत के प्रतिनिधियों के साथ प्रदेश में निवेश विस्तार, नई इकाइयों की स्थापना और विभिन्न सेक्टरों में दी जा रही सुविधाओं पर संवाद करेंगे। मुख्यमंत्री डॉ. यादव ग्रीनको मुख्यालय का भ्रमण करेंगे। साथ ही ग्रीनको समूह के शीर्ष नेतृत्व के साथ बैठक भी होगी, जिसमें ऊर्जा क्षेत्र में संभावित सहयोग और बड़े पैमाने के औद्योगिक निवेश पर चर्चा की जाएगी। मुख्यमंत्री डॉ. यादव इसके बाद द लीला होटल में आयोजित मुख्य सत्र में उद्योगपतियों के साथ वन-टू-वन चर्चा करेंगे, जिनमें आईटी, आईटीआईएस, ईएसडीएम, बायोटेक, मैन्युफैक्चरिंग और एमएसएमई जैसे क्षेत्रों में निवेश योजनाओं और आगामी प्रोजेक्ट्स पर चर्चा होगी। सत्र में बायोटेक क्षेत्र पर केंद्रित एक महत्वपूर्ण राउंड टेबल मीटिंग होगी। इसमें नवाचार आधारित उद्योगों और अनुसंधान-आधारित परियोजनाओं के लिए मध्यप्रदेश में बन रहे अनुकूल वातावरण पर विस्तृत चर्चा होगी। मुख्यमंत्री डॉ. यादव पूरे दिन उद्योगपतियों के साथ संवाद जारी रखेंगे, जिसमें विभिन्न समूह राज्य में अपने निवेश प्रस्तावों और भविष्य की योजनाओं पर विस्तृत विमर्श करेंगे। औद्योगिक नीति एवं निवेश प्रोत्साहन प्रमुख सचिव श्री राघवेन्द्र सिंह निवेशकों के समक्ष मध्यप्रदेश की उद्योग-हितैषी नीतियों, विकसित औद्योगिक कॉरिडोर, सेक्टर-आधारित क्लस्टर्स, औद्योगिक अधोसंरचना और निवेश प्रक्रियाओं को सरल बनाने के प्रयासों की जानकारी साझा करेंगे। उद्योग जगत के प्रमुख प्रतिनिधि भी मध्यप्रदेश को लेकर अपनी अपेक्षाएँ और अनुभव साझा करेंगे। मुख्यमंत्री डॉ. यादव के नेतृत्व में आयोजित यह संवाद आने वाले समय में प्रदेश में नए औद्योगिक निवेश और दीर्घकालिक साझेदारियों को गति देने की दिशा में महत्वपूर्ण साबित होगा। यह कार्यक्रम उद्योग जगत के लिए मध्यप्रदेश को निवेश के विश्वसनीय गंतव्य के रूप में समझने का अवसर प्रदान करेगा। 

समाज के हर वर्ग की सहभागिता से बालाघाट को बनायेंगे आदर्श जिला

बालाघाट में हुई जिला विकास सलाहकार समिति की बैठक भोपाल  स्कूल शिक्षा एवं बालाघाट जिले के प्रभारी मंत्री श्री उदय प्रताप सिंह ने कहा है कि बालाघाट जिले को समाज के हर वर्ग की सहभागिता से आदर्श जिला बनाया जायेगा। उन्होंने कहा कि मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने जिले के समग्र विकास के लिये गहन मंथन के बाद जिला विकास सलाहकार समिति का गठन किया है। समिति में विषय-विशेषज्ञों को शामिल किया गया है, जिनके सुझाव से जिले की विकास गति को तेज रफ्तार मिलेगी। मंत्री श्री सिंह शुक्रवार को बालाघाट में जिला विकास सलाहकार समिति की बैठक को संबोधित कर रहे थे। बैठक में समिति के सदस्यों ने बालाघाट में ट्रांसपोर्ट नगर बनाने, जिला चिकित्सालय में स्वयंसेवी संस्थाओं की मदद से रैन-बसेरा बनाने, सरकारी क्षेत्र में मेडिकल कॉलेज खोलने, जनजातीय बहुल क्षेत्र में खनिज खनन प्रक्रिया को सरल बनाने के संबंध में सुझाव दिये। बैठक में सांसद श्री भारती पारधी, विधायक सर्वश्री राजकुमार कर्राहे, गौरव पारधी, मधु भगत, विवेक विक्की पटेल और श्रीमती अनुभा मुंजारे ने सुझाव दिये। समिति के सदस्य सचिव कलेक्टर श्री मृणाल मीणा ने बताया कि समिति गठन का उद्देश्य जिले के दीर्घकालीन विकास की योजना बनाना, प्रधानमंत्री के वोकल फॉर लोकल को प्रोत्साहित करने और जिले के विकास के लिये रोड मेप तैयार करना है। शहीद जवान आशीष शर्मा को श्रद्धांजलि बैठक के प्रारंभ में बालाघाट जिले में पदस्थ जवान आशीष शर्मा को देश की सेवा करते हुए शहीद होने पर श्रद्धांजलि दी गयी। मंत्री श्री सिंह ने शहीद आशीष के शौर्य का स्मरण किया। युवाओं को वितरित किये गये नियुक्ति पत्र प्रभारी मंत्री श्री सिंह ने जिले के चयनित युवाओं को प्रतिष्ठित कम्पनियों में नौकरी मिलने पर नियुक्ति पत्र वितरित किये। उन्होंने कहा कि प्रतिष्ठित कम्पनी टाटा इलेक्ट्रॉनिक्स एवं टाटा मोटर्स में जॉब मिलना युवाओं के लिये महत्वपूर्ण है। उन्होंने चयनित युवाओं से मन लगाकर काम करने की अपील की। कलेक्टर श्री मृणाल मीणा ने बताया कि जिले में युवाओं को रोजगार से जोड़ने के लिये लगातार रोजगार मेले आयोजित किये जा रहे हैं। सीखो-कमाओं योजना के अंतर्गत जिले में विभिन्न उद्योगों में 400 युवाओं को रोजगार दिलाया गया है।  

डायल–112 के त्वरित सीपीआर से सड़क किनारे अचेत पड़े व्यक्ति को मिला नया जीवन

भोपाल  मध्यप्रदेश पुलिस की डायल–112 सेवा अब केवल आपातकालीन कॉल रिस्पॉन्स तक सीमित नहीं रही, बल्कि आम नागरिकों की सुरक्षा, त्वरित सहायता और जीवन रक्षा का भरोसेमंद माध्यम बन चुकी है। सड़क दुर्घटनाओं, हृदय गति रुकने जैसी गंभीर चिकित्सा आपात स्थितियों में जनता को समय पर सहायता उपलब्ध कराना आज की प्रमुख आवश्यकता है। इसी उद्देश्य से डायल–112 के “फर्स्ट रेस्पॉन्डर्स” को विशेषज्ञ चिकित्सकों द्वारा वैज्ञानिक एवं उन्नत जीवनरक्षक तकनीकों—विशेषकर सीपीआर का प्रशिक्षण प्रदेश के सभी जिलों में प्रदान किया जा रहा है, ताकि वे घटनास्थल पर ही तत्काल प्रभावी प्राथमिक उपचार दे सकें। इसी प्रशिक्षण के परिणामस्‍वरूप भोपाल के टीटी नगर क्षेत्र में हार्ट अटैक से गिरे स्कूटी सवार व्यक्ति को डायल-112 टीम ने समय रहते सीपीआर देकर जीवन बचाया जा सका। 20 नवंबर 2025 की शाम लगभग 6:10 बजे राज्य स्तरीय पुलिस कंट्रोल रूम डायल–112 भोपाल को सूचना प्राप्त हुई कि थाना टीटी नगर क्षेत्र में एक स्कूटी सवार व्यक्ति अचानक सड़क किनारे गिर पड़ा है और अचेत अवस्था में है। सूचना मिलते ही कंट्रोल रूम द्वारा क्षेत्र में तैनात एफआरव्ही वाहन को तत्काल घटनास्थल के लिए रवाना किया गया। कुछ ही मिनटों में डायल–112 की एफआरव्ही टीम मौके पर पहुँची। टीम ने पहुंचकर देखा कि एक व्यक्ति सड़क के किनारे गिरा हुआ है। व्यक्ति अचेत अवस्था में पड़ा था। आसपास उपस्थित लोगों ने भी बताया कि व्यक्ति स्‍कूटी से अचानक गिर पड़ा और कोई प्रतिक्रिया नहीं दे रहा था। स्थिति की गंभीरता को देखते हुए एफआरव्ही स्टाफ ने बिना देर किए सीपीआर देना शुरू किया। कुछ ही मिनटों की सतर्कता और निरंतर प्रयासों से व्यक्ति की धड़कनें सामान्य हुईं। इसी दौरान पीड़ित के परिजन भी घटनास्थल पर पहुँच गए, जिन्हें डायल–112 टीम ने स्थिति से अवगत कराया। डायल-112 कर्मचारियों ने पीड़ित को परिजन के साथ तत्काल नजदीकी अस्पताल पहुंचाया।