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लीनियर इंफ्रास्ट्रक्चर परियोजनाओं में आने वाली कठिनाइयों के समाधान एवं श्रेष्ठ कार्यप्रणालियों पर हुआ विचार-विमर्श

भोपाल  प्रधानमंत्री  नरेन्द्र मोदी की अध्यक्षता में आयोजित होने वाली 6वीं मुख्य सचिव कॉन्फ्रेंस की तैयारियों के संबंध में आज एमपीआरडीसी मुख्यालय, भोपाल में प्रबंध संचालक  भरत यादव की अध्यक्षता में राज्य स्तरीय कार्यशाला आयोजित की गई। “Accelerating Linear Infrastructure Projects: Good Practices and New Ideas” विषय पर आयोजित इस कार्यशाला में लीनियर इंफ्रास्ट्रक्चर परियोजनाओं के क्रियान्वयन में आने वाली बाधाओं की पहचान, उनके समाधान तथा विभिन्न विभागों की श्रेष्ठ कार्यप्रणालियों और नवाचारों को साझा करने पर विस्तृत चर्चा हुई। एमपीआरडीसी के तकनीकी सलाहकार  आर.के. मेहरा ने स्वागत वक्तव्य में कार्यशाला की रूपरेखा प्रस्तुत की। उन्होंने बताया कि विकसित भारत-2047 के लक्ष्यों के अनुरूप लीनियर इंफ्रास्ट्रक्चर परियोजनाओं के निर्माण में आने वाली कठिनाइयों को दूर करने, आवश्यक अनुमतियों में होने वाले विलंब को कम करने तथा विभिन्न विभागों की श्रेष्ठ कार्यप्रणालियों का अध्ययन कर उनके संबंध में नीति आयोग को फीडबैक फॉर्म के माध्यम से जानकारी उपलब्ध कराई जाएगी। इसका उद्देश्य परियोजनाओं के क्रियान्वयन को अधिक सुगम बनाते हुए उन्हें समयबद्ध रूप से पूर्ण करना है। कार्यशाला में वन विभाग के अपर प्रधान मुख्य वन संरक्षक  एच.एस. मोहंता ने परिवेश पोर्टल, वन भूमि के व्यपवर्तन, ईको-सेंसिटिव जोन, जैव विविधता क्षेत्रों, अभयारण्य एवं टाइगर रिजर्व क्षेत्रों में अनुमतियों से संबंधित प्रक्रियाओं एवं व्यावहारिक कठिनाइयों पर विस्तृत जानकारी दी। उन्होंने निर्माण परियोजनाओं के दौरान वृक्षारोपण से संबंधित चुनौतियों के समाधान के लिए भी व्यावहारिक सुझाव प्रस्तुत किए। कार्यशाला में भू-अर्जन, आरओडब्ल्यू/आरओयू, वन स्वीकृति, वन्यजीव स्वीकृति, यूटिलिटी शिफ्टिंग, राज्य स्तरीय अनुमतियां, निर्माण सामग्री एवं अन्य आवश्यक अनुमतियों से संबंधित विषयों पर विस्तृत विचार-विमर्श किया गया। कार्यशाला का मुख्य उद्देश्य लीनियर इंफ्रास्ट्रक्चर परियोजनाओं के क्रियान्वयन में विभिन्न स्तरों पर आने वाली प्रक्रियात्मक एवं व्यावहारिक बाधाओं को चिन्हित कर उनके प्रभावी समाधान तलाशना तथा विभागों के बीच बेहतर समन्वय स्थापित करना रहा। साथ ही, परियोजनाओं को निर्धारित समय-सीमा में पूरा करने के लिए अपनाई जा रही श्रेष्ठ कार्यप्रणालियों और नए विचारों को साझा करने पर भी जोर दिया गया।  

आशी और ऐश्वर्य की उपलब्धि को सराहा, मंत्री सारंग ने कहा- बचपन से निखारेंगे खेल प्रतिभाएं

भोपाल टी.टी. नगर स्टेडियम में गुरुवार को मध्यप्रदेश के सहकारिता, खेल एवं युवा कल्याण मंत्री  विश्वास सारंग ने एशियन गेम्स-2026 में पदक जीतकर लौटे प्रदेश के स्टार खिलाड़ियों आशी चौकसे और ऐश्वर्य प्रताप सिंह तोमर से भेंट कर उनका उत्साहवर्धन किया। दोनों खिलाड़ियों ने शूटिंग में रजत पदक जीतकर देश और मध्यप्रदेश का गौरव बढ़ाया है। मध्यप्रदेश राज्य शूटिंग अकादमी की खिलाड़ी आशी चौकसे ने महिलाओं की 50 मीटर राइफल 3 पोजीशन टीम इवेंट में सिल्वर मेडल जीता, जबकि ऐश्वर्य प्रताप सिंह तोमर ने पुरुषों की 50 मीटर राइफल 3 पोजीशन टीम इवेंट में रजत पदक अपने नाम किया। मंत्री  सारंग ने खिलाड़ियों की उपलब्धियों की सराहना करते हुए कहा कि मध्यप्रदेश के खिलाड़ियों ने एशियन गेम्स में शानदार प्रदर्शन किया है। प्रदेश के खिलाड़ियों ने प्रतियोगिता में कुल आठ पदक हासिल किए हैं। उन्होंने कहा कि ऐश्वर्य और आशी जैसे खिलाड़ी प्रदेश की नई खेल प्रतिभाओं के लिए प्रेरणास्रोत हैं। उपलब्धियों के बाद भी बेहतर करने की सोच जरूरी मंत्री  सारंग ने कहा कि ऐश्वर्य प्रताप सिंह तोमर का यह कहना कि उन्हें अभी और बेहतर करना है, एक खिलाड़ी की सकारात्मक मानसिकता को दर्शाता है। उन्होंने कहा कि बड़े खिलाड़ी अपनी उपलब्धियों से संतुष्ट होकर रुकते नहीं हैं, बल्कि लगातार बेहतर प्रदर्शन का लक्ष्य रखते हैं। उन्होंने उम्मीद जताई कि आशी और ऐश्वर्य आने वाले समय में ओलंपिक स्तर पर भी देश के लिए पदक जीतेंगे। खिलाड़ियों का होगा भव्य सम्मान मंत्री  सारंग ने बताया कि खिलाड़ियों का आज प्रतीकात्मक स्वागत किया गया है। प्रदेश सरकार की ओर से पदक विजेता खिलाड़ियों के लिए भव्य सम्मान समारोह और प्रोत्साहन राशि प्रदान करने का कार्यक्रम आयोजित किया जाएगा। साथ ही खिलाड़ियों के अनुभवों को साझा करने के लिए मीडिया संवाद भी आयोजित किया जाएगा। 6 से 12 वर्ष की उम्र में शुरू होगी प्रतिभाओं की ग्रूमिंग मंत्री  सारंग ने बताया की खेल प्रतिभाओं को शुरुआती उम्र से तैयार करने की दिशा में प्रदेश में विभिन्न खेलों के फीडर सेंटर स्थापित किए जा रहे हैं। मंत्री  सारंग ने बताया कि इन केंद्रों में 6 से 12 वर्ष तक के बच्चों का चयन कर उनकी प्रतिभा को शुरुआती स्तर से विकसित किया जाएगा। इसके बाद 12 वर्ष से अधिक आयु के प्रतिभाशाली खिलाड़ियों को खेल अकादमियों से जोड़ा जाएगा। मंत्री  सारंग ने कहा कि खेल अकादमियों में प्रवेश टैलेंट सर्च के माध्यम से दिया जा रहा है और अकादमियों का संचालन विश्वस्तरीय मानकों के अनुरूप किया जा रहा है। टेक्नोलॉजी और स्पोर्ट्स मेडिसिन पर भी रहेगा जोर मंत्री  सारंग ने अधिकारियों को निर्देश दिए कि खिलाड़ियों और कोचेस से अलग-अलग संवाद कर उनकी आवश्यकताओं और सुझावों को जाना जाए। इन सुझावों के आधार पर प्रदेश के खेल इकोसिस्टम को और मजबूत किया जाएगा। मंत्री  सारंग ने कहा कि खिलाड़ियों के प्रशिक्षण में आधुनिक तकनीक, स्पोर्ट्स साइंस और स्पोर्ट्स मेडिसिन का उपयोग बढ़ाया जाएगा। सरकार का उद्देश्य प्रदेश में ऐसी मजबूत खेल व्यवस्था विकसित करना है, जिससे जमीनी स्तर से प्रतिभाओं की पहचान कर उन्हें राष्ट्रीय और अंतर्राष्ट्रीय स्तर तक पहुंचाया जा सके।    

वृद्धजन हमारी अमूल्य धरोहर, उनके अनुभव और आशीर्वाद से समृद्ध होता समाज : मंत्री श्री कुशवाह

भोपाल  सामाजिक न्याय एवं दिव्यांगजन सशक्तिकरण मंत्री श्री नारायण सिंह कुशवाह ने कहा कि वृद्धजन हमारे परिवार और समाज की अमूल्य धरोहर हैं। उनके जीवन का अनुभव, ज्ञान और आशीर्वाद नई पीढ़ी के लिए मार्गदर्शन का आधार है। वृद्धजनों का सम्मान केवल एक दिन तक सीमित न रहकर हमारे व्यवहार और संस्कारों का हिस्सा होना चाहिए। उन्होंने यह बात अंतर्राष्ट्रीय वृद्ध जन्म दिवस के अवसर पर प्रशासन अकादमी के स्वर्ण जयंती सभागार में आयोजित राज्यस्तरीय कार्यक्रम में कहीं। कार्यक्रम में 500 से अधिक वृद्धिजनों को शाल श्रीफल देकर सम्मानित किया गया कार्यक्रम की अध्यक्षता सांसद श्री आलोक शर्मा ने की तथा विशिष्ट अतिथि के रूप में विधायक श्री भगवानदास सबनानी उपस्थित थे। मंत्री श्री कुशवाह कहा कि कार्यक्रम में ऐसे वयोवृद्ध भी उपस्थित हैं, जिन्होंने अपने जीवन के 100 वर्ष पूरे किए हैं। उनके पास एक शताब्दी का अनुभव है, जिससे समाज और युवा पीढ़ी बहुत कुछ सीख सकती है। 100 वर्ष की आयु पूर्ण कर चुके वरिष्ठजन एक खुली किताब की तरह होते हैं। उनके साथ बैठकर, उनसे संवाद कर उनके जीवन के अनुभव और ज्ञान को आत्मसात किया जा सकता है। वरिष्ठजन परिवार से जुड़े रहें और उन्हें अनावश्यक सामाजिक बंदिशों में न बांधा जाए। जो वृद्धजन स्वस्थ हैं और काम करना चाहते हैं, उन्हें अपनी क्षमता के अनुसार सक्रिय रहने के अवसर मिलना चाहिए। मंत्री श्री कुशवाह ने कहा कि भारत की पारिवारिक व्यवस्था, संस्कार और जीवन-मूल्य पूरी दुनिया के लिए प्रेरणा का विषय हैं। दुनिया के कई विकसित देश भी परिवार, बुजुर्गों के सम्मान और जीवन-मूल्यों से जुड़ी भारतीय परंपराओं से सीख रहे हैं। हमें अपनी इस समृद्ध परंपरा को और मजबूत करते हुए वृद्धजनों के सम्मान और सेवा को जीवन का हिस्सा बनाना चाहिए। उन्होंने कहा कि प्रधानमंत्री श्री नरेन्द्र मोदी और मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव के नेतृत्व में प्रदेश के वृद्धजनों, दिव्यांगजनों तथा अन्य सामाजिक रूप से जरूरतमंद वर्गों की आवश्यकताओं को विभिन्न जनकल्याणकारी योजनाओं के माध्यम से पूरा करने के निरंतर प्रयास किए जा रहे हैं। सरकार का उद्देश्य है कि जरूरतमंद वर्गों तक योजनाओं का लाभ पहुंचे और उन्हें सम्मानजनक एवं बेहतर जीवन के लिए आवश्यक सहयोग उपलब्ध हो। सेवा संकल्प अभियान के अंतर्गत भी वरिष्ठजनों के सम्मान एवं कल्याण को महत्व दिया जा रहा है। कार्यक्रम में स्वास्थ्य परीक्षण और सहायक उपकरणों की उपलब्धता इसी दिशा में किए जा रहे कार्यों का हिस्सा है। उन्होंने सभी वृद्धजनों के स्वस्थ, सुखी एवं दीर्घायु जीवन की कामना की। भोपाल सांसद श्री आलोक शर्मा ने कहा कि वरिष्ठजनों ने अपने अनुभव, योगदान और संस्कारों से परिवार एवं समाज को समृद्ध किया है। उनका सम्मान और गरिमापूर्ण उपस्थिति परिवार तथा समाज की समृद्ध परंपरा का प्रतीक है। उनके जीवन का अनुभव नई पीढ़ी को निरंतर प्रेरणा देता है। विधायक श्री भगवानदास सबनानी ने कहा कि सेवा संकल्प अभियान के अंतर्गत वृद्धजनों का सम्मान समाज में उनके योगदान के प्रति कृतज्ञता व्यक्त करने का अवसर है। उनके अनुभव और आशीर्वाद समाज के लिए अमूल्य हैं। उन्होंने सभी वरिष्ठजनों के प्रति सम्मान व्यक्त करते हुए उनके स्वस्थ एवं सुखी जीवन की कामना की। परशुराम कल्याण बोर्ड के अध्यक्ष पं. श्री विष्णु राजोरिया ने अंतरराष्ट्रीय वृद्धजन दिवस की शुभकामनाएं देते हुए कहा कि माता-पिता और वृद्धजनों की सेवा एवं सम्मान हमारी संस्कृति की महत्वपूर्ण पहचान है। परिवार और समाज में वरिष्ठजनों के अनुभव एवं मार्गदर्शन को सम्मान देना हमारी जिम्मेदारी है। सामाजिक न्याय एवं दिव्यांगजन सशक्तिकरण विभाग की प्रमुख सचिव श्रीमती सोनाली पोंक्षे वायंगणकर ने कहा कि जीवन प्रत्याशा बढ़ने के साथ वरिष्ठजनों के स्वास्थ्य, सामाजिक एवं आर्थिक सुरक्षा से जुड़ी जिम्मेदारियां भी बढ़ी हैं। वृद्धजनों को स्वास्थ्य सुविधाओं, सामाजिक सुरक्षा और साइबर अपराधों से बचाव के प्रति जागरूक करना आवश्यक है। विभाग द्वारा इस दिशा में विभिन्न स्तरों पर कार्य किए जा रहे हैं तथा देखभाल से जुड़े प्रशिक्षण पर भी ध्यान दिया जा रहा है। सामाजिक न्याय एवं दिव्यांगजन सशक्तिकरण विभाग के आयुक्त श्री कृष्ण गोपाल तिवारी ने कहा कि अंतर्राष्ट्रीय वृद्धजन दिवस का उद्देश्य वरिष्ठजनों के योगदान के प्रति कृतज्ञता व्यक्त करने के साथ उनके सम्मान और गरिमापूर्ण जीवन को सुनिश्चित करना है। कार्यक्रम में स्वास्थ्य परीक्षण एवं साइबर जागरूकता जैसी सुविधाओं के माध्यम से वृद्धजनों को आवश्यक जानकारी और सहयोग उपलब्ध कराया गया। उन्होंने कहा कि वरिष्ठजनों को आवश्यक सेवाएं और सहयोग उपलब्ध कराने के लिए विभाग द्वारा निरंतर कार्य किया जा रहा है। कार्यक्रम में 100 वर्ष की आयु पूर्ण करने वाली तीन शतायु माताओं श्रीमती राजूबाई, श्रीमती तुलसीबाई एवं श्रीमती कौशल्या देवी को विशेष शतायु सम्मान प्रदान किया गया। तीनों शतायु माताओं को ₹5,100 की सम्मान राशि एवं शॉल भेंट कर सम्मानित किया गया। कार्यक्रम में महावीर संस्था द्वारा दिव्यांगजनों को कृत्रिम अंग एवं आवश्यक सहायक उपकरण उपलब्ध कराए गए। इससे दिव्यांगजनों को दैनिक जीवन में अधिक सुविधा और आत्मनिर्भरता की दिशा में सहयोग मिलेगा। साथ ही वरिष्ठजनों के लिए स्वास्थ्य परीक्षण की सुविधा भी उपलब्ध कराई गई। स्वास्थ्य विशेषज्ञों द्वारा आवश्यक जांच एवं स्वास्थ्य संबंधी जानकारी प्रदान की गई। कार्यक्रम में जरूरतमंद दिव्यांगजनों को ट्राइसाइकिल वितरित की गईं। इससे उन्हें आवागमन में सुविधा मिलेगी और दैनिक गतिविधियों में अधिक आत्मनिर्भरता प्राप्त होगी। वृद्ध मित्रों ने सक्रिय रूप से अपनी सेवाएं दीं। उन्होंने वरिष्ठजनों की सहायता करने, उन्हें कार्यक्रम स्थल तक पहुंचाने तथा आवश्यक सुविधाएं उपलब्ध कराने में सहयोग किया। कार्यक्रम में प्रमुख सचिव श्रीमती सोनाली पोंक्षे वायंगणकर, आयुक्त श्री कृष्ण गोपाल तिवारी सहित विभागीय अधिकारी, जनप्रतिनिधि, विभिन्न संस्थाओं के प्रतिनिधि तथा बड़ी संख्या में वरिष्ठजन उपस्थित रहे।  

इंदौर में 6 लाख की डकैती से हड़कंप, युवक को चादर से ढककर पीटा; 5 गिरफ्तार

 इंदौर  इंदौर में कानून-व्यवस्था को चुनौती देने वाली एक सनसनीखेज वारदात सामने आई है। शहर के दूधिया स्थित नीलगिरी परिसर में हथियारबंद बदमाशों ने एक रिहाइशी फ्लैट पर धावा बोलकर लाखों रुपये मूल्य के सोने-चांदी के जेवरात और नकदी लूट ली। घटना का सीसीटीवी फुटेज (CCTV Footage) सामने आने के बाद पुलिस ने त्वरित कार्रवाई करते हुए वारदात में शामिल सभी पांचों आरोपियों को गिरफ्तार कर लिया है, जिनमें तीन नाबालिग शामिल हैं। चादर से ढककर की बेरहमी से पिटाई, फिर मचाया तांडव वारदात खुड़ैल थाना क्षेत्र के अंतर्गत नीलगिरी परिसर (ब्लॉक नंबर 01) के फ्लैट नंबर 402 में रहने वाले चौबे परिवार के साथ घटी। पुलिस में दर्ज शिकायत के अनुसार, बीते 27 सितंबर 2026 को पांच बदमाशों की टोली ने योजनाबद्ध तरीके से वारदात को अंजाम दिया… बहाने से खुलवाया दरवाजा: बदमाशों ने पहले झांसा देकर फ्लैट का दरवाजा खुलवाया। बंधक बनाकर मारपीट: अंदर दाखिल होते ही आरोपियों ने पीड़ित को चादर से ढक दिया ताकि वह उनका चेहरा न देख सके और फिर उसके साथ जमकर मारपीट की। लाखों का माल पार: इसके बाद बदमाशों ने अलमारी व घर में रखे सोने-चांदी के आभूषण और नकद रकम समेटी और मौके से रफूचक्कर हो गए। सीसीटीवी फुटेज से खुला राज, चोरी का सामान भी बरामद घटना के बाद पुलिस ने मामला दर्ज कर पड़ताल शुरू की। सोसाइटी परिसर और आसपास लगे सीसीटीवी कैमरों की फुटेज खंगालने पर पांचों संदिग्धों की आवाजाही स्पष्ट दिखाई दी। तकनीकी साक्ष्यों और मुखबिर की सूचना के आधार पर पुलिस ने घेराबंदी कर पांचों आरोपियों को धर दबोचा। पुलिस द्वारा की गई पूछताछ में चौंकाने वाला खुलासा हुआ कि गिरोह के पांच में से तीन सदस्य नाबालिग हैं। पुलिस ने आरोपियों के कब्जे से लूटी गई नकदी और जेवरात भी बरामद कर लिए हैं।

मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने केंद्रीय जल शक्ति मंत्री पाटिल से की भेंट

भोपाल  मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने गुरूवार को केंद्रीय जल शक्ति मंत्री  सी आर पाटील से भेंट कर मध्यप्रदेश में जल जीवन मिशन के प्रभावी क्रियान्वयन और योजनाओं के कार्यों में तेजी लाने से जुड़े विभिन्न विषयों पर चर्चा की। मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने प्रदेश के ग्रामीण क्षेत्रों में हर घर नल से जल पहुंचाने के लक्ष्य को गति देने के लिए केन्द्र सरकार से आवश्यक सहयोग और लंबित विषयों के शीघ्र निराकरण का अनुरोध किया। मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने बैठक में जल जीवन मिशन के लिए केन्द्रांश जारी करने का भी अनुरोध किया। उन्होंने 100 करोड़ रुपये से अधिक लागत वाली योजनाओं के लिए केन्द्रांश की राशि की प्रतिपूर्ति के लिये पोर्टल पर विकल्प प्रारंभ करने का विषय भी रखा। मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने जल जीवन मिशन-2.0 के अंतर्गत मध्यप्रदेश के लिए वर्तमान वित्तीय वर्ष में आवंटित राशि में वृद्धि किए जाने का अनुरोध किया, जिससे प्रदेश में पेयजल योजनाओं के कार्यों को अपेक्षित गति से आगे बढ़ाया जा सके। बैठक में ‘सुजलाम भारत’ ऐप में जियो-टैगिंग से संबंधित तकनीकी कमियों के निराकरण का विषय भी प्रमुखता से रखा गया। मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने कहा कि तकनीकी व्यवस्था को सुचारु बनाने से योजनाओं की निगरानी और प्रगति के प्रभावी आकलन में मदद मिलेगी। मुख्यमंत्री ने केंद्रीय मंत्री से मध्यप्रदेश के हित में इन विषयों पर आवश्यक सहयोग प्रदान करने का अनुरोध करते हुए कहा कि प्रदेश सरकार ग्रामीण परिवारों को नल से स्वच्छ और सुरक्षित पेयजल उपलब्ध कराने के लिए जल जीवन मिशन के कार्यों को प्राथमिकता के साथ आगे बढ़ा रही है।  

अमित शाह 3 अक्टूबर को भोपाल में करेंगे विकास कार्यों का शुभारंभ, गोपालक दीदियों का सम्मान

सेवा संकल्प अभियान अंतर्गत केंद्रीय गृह एवं सहकारिता मंत्री अमित शाह 3 अक्टूबर को आएंगे भोपाल राज्य स्तरीय गोपालक सम्मेलन में पशुपालक दीदियों के सम्मान के साथ विभिन्न विकास कार्यों का करेंगे शुभारंभ व अनुदान राशि का वितरण लखपति गोपालक दीदी योजना पशुपालन के माध्यम से ग्रामीण महिलाओं की बढ़ेगी आय भोपाल  ‘सेवा संकल्प अभियान' के अंतर्गत केंद्रीय गृह एवं सहकारिता मंत्री शाह 3 अक्टूबर को भोपाल आएंगे। वे भोपाल के भेल दशहरा मैदान में आयोजित ‘राज्य स्तरीय गोपालक सम्मेलन' में शामिल होकर उत्कृष्ट कार्य करने वाली गोपालक दीदियों को सम्मानित करेंगे और 'डॉ. भीमराव अंबेडकर कामधेनु योजना' के स्वीकृति पत्रों का वितरण करेंगे। इसके साथ ही वे प्रदेशवासियों को डेयरी प्रसंस्करण, दुग्ध संयंत्र और गुणवत्ता जांच प्रयोगशाला से जुड़ी विभिन्न विकास सौगातों की सौगात देंगे। सम्मेलन में केंद्रीय मंत्री शाह 255 करोड़ रुपये की लागत से उज्जैन में बनने वाले नए डेयरी प्लांट का भूमिपूजन करेंगे। इसके अतिरिक्त, 16.80 करोड़ रुपये की लागत से निर्मित फर्मेंटेड प्रोडक्ट डेयरी प्लांट और एमपी स्टेट को-ऑपरेटिव डेयरी फेडरेशन भोपाल में ‘नेशनल प्रोग्राम फॉर डेयरी डेवलपमेंट' के तहत 12.40 करोड़ रुपये की लागत से बनी अत्याधुनिक प्रयोगशाला एंव मिनी डेयरी संयंत्र शिवपुरी का शुभारंभ किया जाएगा। कार्यक्रम में भोपाल और इंदौर दुग्ध संघ के दुग्ध उत्पादकों को लगभग 12 करोड़ रुपये की बोनस राशि वितरित की जाएगी तथा ‘कृषक कल्याण वर्ष' के अंतर्गत पशुपालन एवं डेयरी विभाग द्वारा विशेष प्रदर्शनी भी लगायी जाएगी। प्रदेश सरकार द्वारा पंजीकृत एवं संचालित गौशालाओं में संरक्षित गोवंश के रखरखाव एवं भरण-पोषण के लिए माह जुलाई और अगस्त 2026 की 101 करोड़ रुपये से अधिक की अनुदान राशि ऑनलाइन डीबीटी के माध्यम से सीधे खातों में हस्तांतरित की जाएगी। यह राशि गौशालाओं में दर्ज गोवंश के समुचित व्यवस्थापन, आहार एवं भरण-पोषण के लिए दी जाती है। राज्य सरकार द्वारा पंजीकृत एवं संचालित गौशालाओं में संरक्षित गोवंश के लिए 40 रुपये प्रति गोवंश प्रतिदिन की दर से अनुदान राशि उपलब्ध कराई जाती है। महिला सशक्तिकरण और ग्रामीण अर्थव्यवस्था को मिलेगा संबल लखपति गोपालक दीदी योजना पशुपालन से जुड़ी ग्रामीण महिलाओं को आर्थिक रूप से सशक्त बनाने की दिशा में महत्वपूर्ण पहल है। बेहतर आनुवंशिक क्षमता वाले पशुओं के माध्यम से दुग्ध उत्पादन में वृद्धि, अतिरिक्त आय के अवसर और पशुपालन की उत्पादकता बढ़ने से ग्रामीण अर्थव्यवस्था को भी मजबूती मिलेगी। योजना का उद्देश्य पशुपालन को केवल पारंपरिक आजीविका तक सीमित न रखते हुए इसे ग्रामीण महिलाओं की आर्थिक आत्मनिर्भरता और समृद्धि का माध्यम बनाना है। प्रदेश सरकार द्वारा ग्रामीण महिलाओं को पशुपालन के माध्यम से आर्थिक रूप से आत्मनिर्भर बनाने और दुग्ध उत्पादन बढ़ाने के उद्देश्य से ‘लखपति गोपालक दीदी योजना’ का संचालन किया जा रहा है। “शून्य पूंजीगत निवेश, अधिकतम आनुवंशिक एवं आर्थिक लाभ” के मूल मंत्र पर आधारित इस योजना से प्रदेश की 2 लाख से अधिक महिलाएं जुड़ी हुई हैं। योजना के तहत अवर्णित (नॉन-डिस्क्रिप्ट) नस्ल की गायों और भैंसों मंप उच्च नस्ल के सीमन से कृत्रिम गर्भाधान को बढ़ावा दिया जा रहा है, जिससे पशुपालकों को बिना अतिरिक्त खर्च के बेहतर आनुवंशिक क्षमता वाले पशु प्राप्त हो रहे हैं। उच्च नस्ल के कृत्रिम गर्भाधान से बढ़ेगा दुग्ध उत्पादन उच्च नस्ल के कृत्रिम गर्भाधान से उत्पन्न होने वाली F1 नस्ल की बछिया अपनी माता की तुलना में लगभग 2.5 से 3 गुना अधिक दूध देने में सक्षम होती है। इससे पशुपालक परिवारों को एक लैक्टेशन में प्रति बछिया 50 से 60 हजार रुपये की अतिरिक्त आय होती है। पूरे जीवनकाल (5 से 6 लैक्टेशन) के दौरान एक बछिया से लगभग 2.5 से 3 लाख रुपये तक की अतिरिक्त कमाई की जा सकेगी। उदाहरण के तौर पर यदि किसी परिवार के पास ऐसी 3 से 4 बछियां होती हैं, तो उनका कुल अतिरिक्त आर्थिक लाभ 10 लाख रुपये से अधिक हो सकता है। यह योजना पशुपालन को पारंपरिक आजीविका से आगे बढ़ाकर ग्रामीण महिलाओं की समृद्धि का मुख्य जरिया बना रही है।  

एमपी ट्रांसको ने ग्वालियर के बिलौआ में 132 केवी सब स्टेशन किया ऊर्जीकृत : ऊर्जा मंत्री तोमर

भोपाल  ऊर्जा मंत्री  प्रद्युम्न सिंह तोमर ने बताया कि मध्यप्रदेश पॉवर ट्रांसमिशन कंपनी (एमपी ट्रांसको) ने ग्वालियर जिले के बिलौआ क्षेत्र में 132 केवी एक्स्ट्रा हाई टेंशन (ईएचटी) सब स्टेशन को सफलतापूर्वक ऊर्जीकृत कर विद्युत पारेषण नेटवर्क से जोड़ दिया है। 50 एमवीए क्षमता वाला यह सब स्टेशन प्रदेश के 418वें ईएचटी सब स्टेशन के रूप में पारेषण प्रणाली का हिस्सा बना है। ऊर्जा मंत्री  तोमर ने बताया कि बिलौआ सब स्टेशन के ऊर्जीकृत होने से बिलौआ औद्योगिक क्षेत्र तथा आसपास के ग्रामीण क्षेत्रों की विद्युत पारेषण व्यवस्था सुदृढ़ होगी। साथ ही क्षेत्र में भविष्य की बढ़ती विद्युत मांग की पूर्ति के लिए आवश्यक पारेषण क्षमता उपलब्ध हो सकेगी। ऊर्जा मंत्री  तोमर ने इस उपलब्धि के लिए एमपी ट्रांसको के अभियंताओं एवं कार्मिकों को बधाई दी। 33 केवी के दो औद्योगिक फीडरों पर लोड प्रदाय प्रारंभ सब स्टेशन के चालू होते ही 33 केवी के दो औद्योगिक फीडरों को भी सेवा में लेते हुए उन पर सफलतापूर्वक लोड प्रदाय कर दिया गया है। इससे क्षेत्र में विद्युत आपूर्ति व्यवस्था को और अधिक विश्वसनीय बनाने में सहायता मिलेगी। ट्रांसफार्मेशन क्षमता बढ़कर हुई 2161 एमवीए बिलौआ सब स्टेशन में 50 एमवीए क्षमता का एक पॉवर ट्रांसफार्मर ऊर्जीकृत होने के साथ ही ग्वालियर जिले की कुल ट्रांसफार्मेशन क्षमता बढ़कर 2161 एमवीए हो गई है। 119 औद्योगिक एवं व्यावसायिक उपभोक्ताओं सहित 70 हजार उपभोक्ता होंगे लाभान्वित इससे क्षेत्र की 119 औद्योगिक एवं व्यावसायिक इकाइयों, लगभग 60 गांवों के घरेलू एवं कृषि उपभोक्ताओं, दो नगर परिषदों तथा बीएसएफ प्रशिक्षण केंद्र को लाभ मिलेगा। कुल मिलाकर लगभग 70 हजार विद्युत उपभोक्ता इस व्यवस्था से लाभान्वित होंगे। ग्वालियर जिले का 12वां ईएचटी सब स्टेशन बिलौआ ग्वालियर जिले का 12वां एक्स्ट्रा हाई टेंशन (ईएचटी) सबस्टेशन है। जिले में इसके अतिरिक्त 220 केवी के महलगांव तथा सिथौली सब स्टेशन सहित 132 केवी वोल्टेज लेवल के मोतीझील, मोहना, हस्तिनापुर, मुरार, तिघरा रोड, डबरा, चीनौर, भितरवार एवं फूलबाग (जीआईएस) सब स्टेशन संचालित हैं।  

केंद्रीय सहकारिता मंत्री 3 अक्टूबर को करेंगे डेयरी प्लांट का डिजिटल भूमि-पूजन

भोपाल  प्रधानमंत्री  नरेन्द्र मोदी के मार्गदर्शन में मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव द्वारा दुग्ध प्रसंस्करण क्षमता के विस्तार और डेयरी क्षेत्र को सुदृढ़ करने की दिशा में लगातार प्रयास किया जा रहा है। उज्जैन एवं आसपास के क्षेत्रों में दुग्ध प्रसंस्करण क्षमता के विस्तार और डेयरी क्षेत्र को सुदृढ़ करने की दिशा में मध्यप्रदेश राज्य सहकारी दुग्ध महासंघ द्वारा 255 करोड़ रुपये की लागत से आधुनिक डेयरी प्लांट स्थापित किया जा रहा है। केंद्रीय सहकारिता एवं गृह मंत्री  अमित शाह 3 अक्टूबर 2026 को भोपाल से इस प्लांट का डिजिटल भूमि-पूजन करेंगे। उज्जैन में स्थापित होने वाला यह अत्याधुनिक डेयरी प्लांट क्षेत्र में दुग्ध प्रसंस्करण, मूल्यवर्धन और विभिन्न डेयरी उत्पादों के उत्पादन को नई गति देगा। परियोजना की कुल लागत में से 170 करोड़ रुपये राज्य शासन द्वारा अनुदान के रूप में प्रदान किए जाएंगे, जबकि शेष 85 करोड़ रुपये दुग्ध संघ द्वारा ऋण के माध्यम से जुटाए जाएंगे।परियोजना को अगले दो वर्ष में पूर्ण करने का लक्ष्य है। प्रस्तावित प्लांट की शुरुआत 3 लाख लीटर प्रतिदिन दूध प्रसंस्करण क्षमता के साथ होगी। भविष्य में इसकी क्षमता को बढ़ाकर 5 लाख लीटर प्रतिदिन तक किया जा सकेगा। इससे उज्जैन और आसपास के क्षेत्रों में बढ़ती दुग्ध उपलब्धता के साथ प्रसंस्करण क्षमता का विस्तार भी संभव होगा। पैक्ड मिल्क से लेकर घी तक का होगा उत्पादन प्लांट में आधुनिक प्रसंस्करण सुविधाओं के साथ विभिन्न प्रकार के डेयरी उत्पादों का उत्पादन किया जाएगा। इसमें 1.50 लाख लीटर प्रतिदिन पैक्ड मिल्क, 25 हजार लीटर प्रतिदिन दही तथा 10 हजार लीटर प्रतिदिन लस्सी/छाछ के उत्पादन की क्षमता होगी। इसके अलावा 10 मीट्रिक टन प्रतिदिन क्षमता का घी प्लांट भी स्थापित किया जाएगा। मध्यप्रदेश राज्य सहकारी दुग्ध महासंघ के प्रबंध संचालक  जयदेव बिस्वास ने कहा, “उज्जैन में आधुनिक डेयरी प्लांट की स्थापना मध्यप्रदेश के डेयरी क्षेत्र के विस्तार की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम है। केंद्रीय गृह एवं सहकारिता मंत्री  शाह द्वारा भोपाल से इस परियोजना का डिजिटल भूमि-पूजन किया जाएगा। इस परियोजना से दुग्ध उत्पादकों से प्राप्त दूध का बेहतर प्रसंस्करण और मूल्यवर्धन सुनिश्चित होगा तथा उपभोक्ताओं को गुणवत्तापूर्ण डेयरी उत्पाद उपलब्ध कराने की क्षमता बढ़ेगी।” उन्होंने कहा, “प्लांट को भविष्य में 5 लाख लीटर प्रतिदिन तक विस्तारित करने का प्रबंध किया गया है। इससे उज्जैन एवं आसपास के क्षेत्रों में दुग्ध उत्पादन, संग्रहण, प्रसंस्करण और विपणन की पूरी श्रृंखला को मजबूती मिलेगी तथा ग्रामीण अर्थव्यवस्था को भी गति मिलेगी।” यह परियोजना आधुनिक प्रसंस्करण सुविधाओं के माध्यम से दुग्ध उत्पादकों से प्राप्त दूध के बेहतर उपयोग और मूल्यवर्धन को बढ़ावा देगी। साथ ही क्षेत्र में डेयरी गतिविधियों के विस्तार से ग्रामीण अर्थव्यवस्था को मजबूती मिलने तथा उपभोक्ताओं तक उच्च गुणवत्ता वाले डेयरी उत्पाद पहुंचाने की दिशा में भी यह महत्वपूर्ण पहल साबित होगी

गर्भवती महिलाओं की हुई गोद भराई, माताओं को वितरित की गईं फूड बास्केट

भोपाल  प्रदेश में चल रहे सेवा संकल्प अभियान के अंतर्गत ‘आंगन मिलन सेवा’ कार्यक्रम के माध्यम से आंगनवाड़ी केंद्रों को पोषण, शिक्षा और सम्मान के सशक्त केंद्र के रूप में विकसित करने की दिशा में गतिविधियां आयोजित की जा रही हैं। इसी क्रम में महिला एवं बाल विकास मंत्री सु निर्मला भूरिया ने गुरुवार को बैरागढ़ स्थित आनंद टी. साहनी स्कूल में आयोजित कार्यक्रम में सहभागिता की। कार्यक्रम में विधायक  रामेश्वर शर्मा भी उपस्थित रहे। मंत्री सु निर्मला भूरिया ने कहा कि आंगनवाड़ी केंद्र केवल बच्चों को पोषण आहार उपलब्ध कराने तक सीमित नहीं हैं, बल्कि वे बच्चों की प्रारंभिक शिक्षा, स्वास्थ्य, पोषण और महिलाओं के सशक्तिकरण से जुड़े महत्वपूर्ण केंद्र हैं। ‘आंगन मिलन सेवा’ के माध्यम से आंगनवाड़ी केंद्रों और समुदाय के बीच सहभागिता को और मजबूत किया जा रहा जिससे प्रत्येक आंगनवाड़ी अपने क्षेत्र के बच्चों और महिलाओं के लिए भरोसेमंद सहयोग केंद्र बन सके। उन्होंने कहा कि ‘आंगन मिलन सेवा’ के माध्यम से आंगनवाड़ी केंद्रों और समुदाय के बीच जुड़ाव को मजबूत करने का प्रयास किया जा रहा है। इसका उद्देश्य बच्चों के पोषण और प्रारंभिक शिक्षा के साथ गर्भवती एवं धात्री माताओं की देखभाल में परिवार और समाज की सक्रिय भागीदारी सुनिश्चित करना है। सेवा संकल्प अभियान के तहत यह पहल आंगनवाड़ी केंद्रों को जनभागीदारी से सशक्त बनाने और ‘सेवा, पोषण एवं सम्मान’ की भावना को घर-घर तक पहुंचाने की दिशा में महत्वपूर्ण कदम है। माँ के भरोसे का केंद्र है आंगनवाड़ी विधायक  रामेश्वर शर्मा ने कहा कि माँ के भरोसे का केंद्र है आंगनवाड़ी केंद्र।केंद्र की कार्यकर्ता और साहियिका माँ जैसी मौसी की जिम्मेदारी निभाती है। बच्चों के पोषण, स्वास्थ्य और प्रारंभिक शिक्षा के साथ गर्भवती एवं धात्री माताओं की देखभाल में आंगनवाड़ी कार्यकर्ताओं की भूमिका अत्यंत महत्वपूर्ण है। ‘आंगन मिलन सेवा’ जैसे कार्यक्रमों से आंगनवाड़ी केंद्रों और आमजन के बीच जुड़ाव और मजबूत होगा। उन्होंने कहा कि समाज की सहभागिता से प्रत्येक आंगनवाड़ी को पोषण, शिक्षा, स्वास्थ्य और सम्मान का सशक्त केंद्र बनाया जा सकता है। इसके लिए जनप्रतिनिधियों और नागरिकों को भी अपनी जिम्मेदारी निभाते हुए आंगनवाड़ी गतिविधियों में सक्रिय भागीदारी करनी चाहिए। कार्यक्रम में बच्चों का स्वास्थ्य परीक्षण भी किया गया। स्वास्थ्य विशेषज्ञों द्वारा बच्चों के स्वास्थ्य से संबंधित आवश्यक जांच की गई तथा उनके पोषण एवं स्वास्थ्य की स्थिति पर ध्यान दिया गया। बच्चों के स्वस्थ विकास के लिए नियमित स्वास्थ्य परीक्षण और संतुलित पोषण के महत्व का संदेश भी दिया गया। मंत्री सु निर्मला भूरिया ने पोषण प्रदर्शनी का अवलोकन किया। प्रदर्शनी में संतुलित एवं पौष्टिक आहार, स्थानीय स्तर पर उपलब्ध पोषक खाद्य पदार्थों तथा मातृ एवं बाल पोषण से संबंधित जानकारी प्रदर्शित की गई। मंत्री सु भूरिया ने प्रदर्शनी के माध्यम से दिए जा रहे पोषण संदेशों की जानकारी ली और स्थानीय एवं पौष्टिक खाद्य पदार्थों को दैनिक आहार में शामिल करने पर जोर दिया। मंत्री सु भूरिया ने गर्भवती महिलाओं को शुभकामनाएं देते हुए स्वस्थ मातृत्व और सुरक्षित प्रसव की कामना की। इस अवसर पर गर्भवती महिलाओं को फूड बास्केट भी वितरित की गईं। फूड बास्केट के माध्यम से गर्भावस्था के दौरान पौष्टिक एवं संतुलित आहार के महत्व का संदेश दिया गया। कार्यक्रम में गर्भवती महिलाओं की गोद भराई की रस्म भी आयोजित की गई। इस अवसर पर 25 से अधिक वर्षों से कार्यरत आंगनवाड़ी कार्यकर्ता और सहायिकाओं को पुष्पहार और शॉल देकर सम्मानित किया गया। कार्यक्रम में मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव के संदेश का श्रवण भी किया गया। मुख्यमंत्री के संदेश में सेवा, पोषण और समाज की सामूहिक सहभागिता के माध्यम से महिला एवं बाल कल्याण को मजबूत करने की भावना को रेखांकित किया गया। कार्यक्रम में आंगनवाड़ी कार्यकर्ताओं एवं सहायिकाओं सहित स्थानीय जनप्रतिनिधि और समुदाय के सदस्य उपस्थित रहे।  

प्रधानमंत्री मोदी ने मध्यप्रदेश में चीता प्रोजेक्ट को मिली ऐतिहासिक सफलता का किया उल्लेख

भोपाल  मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने कहा है कि प्रधानमंत्री  नरेन्द्र मोदी द्वारा देश में चीतों के सफल पुनर्स्थापन के लिए किए जा रहे सामूहिक प्रयासों की सराहना की गई है। प्रधानमंत्री  मोदी से मिली यह सराहना हम सभी को नई ऊर्जा और उत्साह प्रदान करने वाली है। मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने प्रदेशवासियों और वन संरक्षण से जुड़े सभी मैदानी साथियों को एक अक्टूबर से प्रारंभ हुए वन्यजीव सप्ताह-2026 की बधाई दी है। मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने गुरूवार को 'एक्स' पर कहा कि मध्यप्रदेश के लिए यह गौरव का विषय है कि 'प्रोजेक्ट चीता' की सफलता ने वन्यजीव संरक्षण के हमारे संकल्प को और भी मजबूत किया है। सच्चे अर्थों में हमारे वनकर्मियों, अधिकारियों, वैज्ञानिकों और स्थानीय समुदायों के समर्पित प्रयासों को इसका श्रेय जाता है। उन्होंने कहा कि हम सभी मिलकर वन्यजीवों के सुरक्षित आवास और प्रकृति के संतुलन के संरक्षण में अपना योगदान दें। इससे वन्यजीव संरक्षण के साथ ही प्रदेश में वन पर्यटन को भी नई दिशा और गति मिलेगी। मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने बताया कि प्रधानमंत्री  मोदी द्वारा वन्यजीव सप्ताह के संदर्भ में 30 सितम्बर को एक संदेश जारी किया गया है। इस संदेश में उन्होंने कहा है कि पिछले एक दशक में भारत ने वन्यजीव संरक्षण के क्षेत्र में अनेक महत्वपूर्ण उपलब्धियां हासिल की हैं। प्रोजेक्ट चीता की सफलता इसका उल्लेखनीय उदाहरण है। इसके साथ ही, ग्रेट इंडियन बस्टर्ड, गैंडे, घड़ियाल, स्लॉथ बियर, नदी डॉल्फिन और हिम तेंदुए जैसी प्रजातियों के संरक्षण के लिए किए जा रहे प्रयास हमारे संरक्षण कार्यों के व्यापक होते दायरे का प्रमाण हैं। संदेश में प्रधानमंत्री  मोदी ने कहा कि भारत अंतर्राष्ट्रीय बिग कैट एलायंस (आईबीसीए) के माध्यम से बिग कैट प्रजातियों के संरक्षण में वैश्विक सहयोग को आगे बढ़ाने में नेतृत्वकारी भूमिका निभा रहा है। यह मंच बाघ, शेर, तेंदुआ और जगुआर जैसी प्रमुख बिग कैट प्रजातियों के संरक्षण से जुड़े हमारे अनुभवों को अन्य देशों के साथ साझा करने और उनसे सीखने का अवसर प्रदान करता है। वन्यजीवों के सुरक्षित आवागमन और प्रकृति के संतुलन के लिए उनके आवासों का आपस में जुड़ा होना आवश्यक है। केन्द्र सरकार राज्यों के साथ मिलकर वन्यजीव कॉरिडोरों की पहचान और उनके संरक्षण पर निरंतर कार्य कर रही है। हमारी संरक्षण यात्रा को अग्रिम पंक्ति के वनकर्मियों, वैज्ञानिकों और संरक्षणकर्मियों के समर्पण तथा स्थानीय समुदायों की अमूल्य भागीदारी से शक्ति मिलती है। वन्यजीवों के संरक्षण के साथ मानव और वन्यजीवों के बीच सह-अस्तित्व भी आवश्यक है। इस दिशा में समय पर सूचना और त्वरित प्रतिक्रिया, बेहतर निगरानी, वैज्ञानिक प्रबंधन, स्थानीय स्तर पर जागरूकता और राज्यों के बीच बेहतर समन्वय पर विशेष ध्यान दिया जा रहा है। प्रधानमंत्री  मोदी ने अपने संदेश में देशवासियों से अपील की है कि सरकार के प्रयासों के साथ-साथ हम सभी अपने-अपने स्तर पर वन्यजीवों और उनके आवासों की रक्षा में योगदान दें। जब जंगल और वन्यजीव सुरक्षित रहेंगे, तो प्रकृति का संतुलन भी बना रहेगा। यही हमारी आने वाली पीढ़ियों के लिए सबसे मूल्यवान विरासत होगी। मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने भी सभी से वन्यजीवों के संरक्षण में सहयोग देने का आहवान किया है।