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आशी और ऐश्वर्य की उपलब्धि को सराहा, मंत्री सारंग ने कहा- बचपन से निखारेंगे खेल प्रतिभाएं

भोपाल टी.टी. नगर स्टेडियम में गुरुवार को मध्यप्रदेश के सहकारिता, खेल एवं युवा कल्याण मंत्री  विश्वास सारंग ने एशियन गेम्स-2026 में पदक जीतकर लौटे प्रदेश के स्टार खिलाड़ियों आशी चौकसे और ऐश्वर्य प्रताप सिंह तोमर से भेंट कर उनका उत्साहवर्धन किया। दोनों खिलाड़ियों ने शूटिंग में रजत पदक जीतकर देश और मध्यप्रदेश का गौरव बढ़ाया है। मध्यप्रदेश राज्य शूटिंग अकादमी की खिलाड़ी आशी चौकसे ने महिलाओं की 50 मीटर राइफल 3 पोजीशन टीम इवेंट में सिल्वर मेडल जीता, जबकि ऐश्वर्य प्रताप सिंह तोमर ने पुरुषों की 50 मीटर राइफल 3 पोजीशन टीम इवेंट में रजत पदक अपने नाम किया। मंत्री  सारंग ने खिलाड़ियों की उपलब्धियों की सराहना करते हुए कहा कि मध्यप्रदेश के खिलाड़ियों ने एशियन गेम्स में शानदार प्रदर्शन किया है। प्रदेश के खिलाड़ियों ने प्रतियोगिता में कुल आठ पदक हासिल किए हैं। उन्होंने कहा कि ऐश्वर्य और आशी जैसे खिलाड़ी प्रदेश की नई खेल प्रतिभाओं के लिए प्रेरणास्रोत हैं। उपलब्धियों के बाद भी बेहतर करने की सोच जरूरी मंत्री  सारंग ने कहा कि ऐश्वर्य प्रताप सिंह तोमर का यह कहना कि उन्हें अभी और बेहतर करना है, एक खिलाड़ी की सकारात्मक मानसिकता को दर्शाता है। उन्होंने कहा कि बड़े खिलाड़ी अपनी उपलब्धियों से संतुष्ट होकर रुकते नहीं हैं, बल्कि लगातार बेहतर प्रदर्शन का लक्ष्य रखते हैं। उन्होंने उम्मीद जताई कि आशी और ऐश्वर्य आने वाले समय में ओलंपिक स्तर पर भी देश के लिए पदक जीतेंगे। खिलाड़ियों का होगा भव्य सम्मान मंत्री  सारंग ने बताया कि खिलाड़ियों का आज प्रतीकात्मक स्वागत किया गया है। प्रदेश सरकार की ओर से पदक विजेता खिलाड़ियों के लिए भव्य सम्मान समारोह और प्रोत्साहन राशि प्रदान करने का कार्यक्रम आयोजित किया जाएगा। साथ ही खिलाड़ियों के अनुभवों को साझा करने के लिए मीडिया संवाद भी आयोजित किया जाएगा। 6 से 12 वर्ष की उम्र में शुरू होगी प्रतिभाओं की ग्रूमिंग मंत्री  सारंग ने बताया की खेल प्रतिभाओं को शुरुआती उम्र से तैयार करने की दिशा में प्रदेश में विभिन्न खेलों के फीडर सेंटर स्थापित किए जा रहे हैं। मंत्री  सारंग ने बताया कि इन केंद्रों में 6 से 12 वर्ष तक के बच्चों का चयन कर उनकी प्रतिभा को शुरुआती स्तर से विकसित किया जाएगा। इसके बाद 12 वर्ष से अधिक आयु के प्रतिभाशाली खिलाड़ियों को खेल अकादमियों से जोड़ा जाएगा। मंत्री  सारंग ने कहा कि खेल अकादमियों में प्रवेश टैलेंट सर्च के माध्यम से दिया जा रहा है और अकादमियों का संचालन विश्वस्तरीय मानकों के अनुरूप किया जा रहा है। टेक्नोलॉजी और स्पोर्ट्स मेडिसिन पर भी रहेगा जोर मंत्री  सारंग ने अधिकारियों को निर्देश दिए कि खिलाड़ियों और कोचेस से अलग-अलग संवाद कर उनकी आवश्यकताओं और सुझावों को जाना जाए। इन सुझावों के आधार पर प्रदेश के खेल इकोसिस्टम को और मजबूत किया जाएगा। मंत्री  सारंग ने कहा कि खिलाड़ियों के प्रशिक्षण में आधुनिक तकनीक, स्पोर्ट्स साइंस और स्पोर्ट्स मेडिसिन का उपयोग बढ़ाया जाएगा। सरकार का उद्देश्य प्रदेश में ऐसी मजबूत खेल व्यवस्था विकसित करना है, जिससे जमीनी स्तर से प्रतिभाओं की पहचान कर उन्हें राष्ट्रीय और अंतर्राष्ट्रीय स्तर तक पहुंचाया जा सके।    

कबड्डी में स्वर्ण जीतकर छत्तीसगढ़ का नाम रोशन करने वाली संजू देवी से बोले अरुण साव- आप पर प्रदेश को गर्व

रायपुर उप मुख्यमंत्री तथा खेल एवं युवा कल्याण मंत्री  अरुण साव ने जापान में इन दिनों चल रहे एशियन गेम्स में स्वर्ण पदक जीतने वाली भारतीय महिला कबड्डी टीम की सदस्य संजू देवी से वीडियो कॉल पर बात कर बधाई दी।  साव ने बातचीत के दौरान संजू देवी की स्वर्णिम सफलता पर खुशी जाहिर करते हुए उनसे कहा कि आपने देश के साथ छत्तीसगढ़ को भी गौरवान्वित किया है। आपकी मेहनत, संघर्ष और खेल के प्रति जुनून प्रदेश की बेटियों और युवा खिलाड़ियों को आगे बढ़ने की प्रेरणा देगा। उप मुख्यमंत्री  साव ने संजू देवी को आगे भी इसी तरह शानदार प्रदर्शन करते हुए प्रदेश और देश का नाम रोशन करने के लिए शुभकामनाएं दीं। उन्होंने कहा कि पूरे प्रदेश को अपनी बेटी की इस उपलब्धि पर गर्व है। बातचीत के दौरान संजू देवी ने आगे बढ़ने और अपने खेल को निखारने के लिए राज्य शासन तथा खेल विभाग की ओर से मिले सहयोग एवं प्रोत्साहन के लिए  आभार जताया।  साव ने कहा कि संजू देवी की यह सफलता उनके समर्पण और लगातार संघर्ष का परिणाम है। खेल के प्रति उनका जुनून प्रदेश के उभरते खिलाड़ियों के लिए प्रेरणादायी है। खासकर खेलों में आगे बढ़ने का सपना देख रही बेटियों को उनकी उपलब्धि नई प्रेरणा देगी। बिलासपुर के बहतराई खेल अकादमी में प्रशिक्षण ले रही कोरबा की संजू देवी भारतीय कबड्डी टीम की महत्वपूर्ण सदस्य है। भारत की ओर से खेलते हुए उन्होंने अंतरराष्ट्रीय मंचों में तीसरी स्वर्णिम सफलता हासिल की है। उन्होंने कबड्डी विश्वकप और एशियन चैंपियनशिप में भी भारत को विजेता बनाने में उम्दा प्रदर्शन किया था।

भोपाल की बेटी आशी चौकसे ने बढ़ाया MP का मान, शूटिंग में रजत पदक

भोपाल  मध्य प्रदेश की बेटी और स्टार शूटर आशी चौकसे ने एशियाई खेलों (Asian Games 2026) में देश का नाम रोशन करते हुए रजत पदक अपने नाम कर लिया है। आशी चौकसे ने यह ऐतिहासिक सफलता महिलाओं की 50 मीटर राइफल 3 पोजिशन (Three Positions) टीम स्पर्धा में भारतीय दल का प्रतिनिधित्व करते हुए हासिल की। इस स्पर्धा में आशी चौकसे के साथ तिलोत्तमा सेन और विदरसा विनोद की तिकड़ी ने शानदार प्रदर्शन करते हुए भारत की झोली में सिल्वर मेडल डाला। तिलोत्तमा सेन और विदर्शा विनोद ने तीसरे और छठे स्थान पर रहकर क्वालिफाई किया। तिलोत्तमा ने स्टैंडिंग राउंड में 97 और 98 के स्कोर के साथ कुल 590 अंक हासिल किए। वह दो चीनी खिलाड़ियों से पीछे रहीं, जिनके स्कोर 594 और 591 थे। विदर्शा का स्टैंडिंग राउंड का प्रदर्शन शानदार रहा (98 और 98)। उन्होंने नीलिंग राउंड के 193 के स्कोर से वापसी करते हुए कुल 588 अंक बनाए और छठे स्थान पर रहीं। स्टैंडिंग राउंड की पहली सीरीज में 93 के स्कोर ने आशी चौकसे को काफी पीछे कर दिया और वह इससे उबर नहीं पाईं। अपनी आखिरी स्टैंडिंग सीरीज में 97 के स्कोर के साथ उन्होंने कुल 585 अंक हासिल किए। 9वीं कक्षा से की थी शूटिंग करियर की शुरुआत भोपाल की रहने वाली आशी चौकसे की निशानेबाजी यात्रा की शुरुआत कक्षा 9वीं में नेशनल कैडेट कोर (NCC) के माध्यम से हुई थी। एनसीसी से मिले शुरुआती अनुभव के बाद उनका चयन 'मध्य प्रदेश राज्य शूटिंग अकादमी' (भोपाल) में हुआ, जहां उन्होंने कोच सुमा शिरूर और वैभव शर्मा के मार्गदर्शन में अपनी तकनीक को निखारा। अंतरराष्ट्रीय मंच पर ऐतिहासिक सफलताएं 2022 (वर्ल्ड कप डेब्यू): बाकू (Baku) में आयोजित ISSF विश्व कप में मिक्स्ड टीम इवेंट में स्वर्ण पदक (Gold) जीतकर अंतरराष्ट्रीय स्तर पर अपनी मजबूत उपस्थिति दर्ज कराई। इसके साथ ही सूहल (Suhl) जूनियर विश्व कप में दो कांस्य पदक (Bronze) जीते। 2023 (एशियाई खेल, हंगझोऊ): हंगझोऊ एशियाई खेलों में आशी ने शानदार प्रदर्शन करते हुए 50m राइफल 3 पोजिशन टीम इवेंट में रजत पदक (Silver) और व्यक्तिगत स्पर्धा में कांस्य पदक (Bronze) अपने नाम किया। 2023 (एशियाई चैंपियनशिप): टीम इवेंट में स्वर्ण पदक जीता। 2024 (एशियाई चैंपियनशिप, जकार्ता): व्यक्तिगत 50m राइफल 3 पोजिशन स्पर्धा में कांस्य पदक हासिल किया।   

एशियन गेम्स में पंजाब का जलवा, परिनाज और सतनाम ने जीते ब्रॉन्ज

अमृतसर. जापान के आइची-नागोया में आयोजित हो रहे 20वें एशियाई खेलों के मंच पर पंजाब के जांबाज खिलाड़ियों ने अपनी अद्भुत प्रतिभा, अदम्य साहस और बेजोड़ खेल कौशल का ऐतिहासिक प्रदर्शन करते हुए पूरे देश में गौरव और उत्साह की एक नई लहर पैदा कर दी है। एथलेटिक्स के रेस ट्रैक से लेकर निशानेबाजी की शूटिंग रेंज तक, और रोइंग के वाटर कोर्स से लेकर हॉकी के मैदान तक, पंजाब की मिट्टी से निकले इन होनहार एथलीटों ने हर जगह अपनी धाक जमाई है। जालंधर, पटियाला, मानसा और संगरूर जैसे जिलों से आए खिलाड़ियों ने न केवल व्यक्तिगत स्तर पर नए मुकाम हासिल किए, बल्कि महत्वपूर्ण मुकाबलों में पदक जीतकर और निर्णायक जीत दर्ज कराकर यह साबित कर दिया कि भारतीय खेल जगत में पंजाब का दबदबा आज भी अटूट है।

एशियन गेम्स में मध्यप्रदेश के जय मीना ने रचा इतिहास

भोपाल  मध्यप्रदेश के प्रतिभावान खिलाड़ी जय मीना ने एशियन गेम्स में इतिहास रच दिया है। जापान के आइची-नागोया में जारी 20वें एशियन गेम्स में जय मीना ने सॉफ्ट टेनिस के पुरुष एकल वर्ग में भारत के लिए ऐतिहासिक कांस्य पदक सुनिश्चित किया। इसके साथ ही वह एशियन गेम्स के इतिहास में सॉफ्ट टेनिस में भारत को पदक दिलाने वाले पहले खिलाड़ी बन गए हैं। सेमीफाइनल में जापान के ताकुया कुरोसाका से हुआ मुकाबला पुरुष एकल के सेमीफाइनल में जय मीना का सामना जापान के ताकुया कुरोसाका (Takuya Kurosaka) से हुआ। जय ने मुकाबले में शानदार जुझारूपन दिखाते हुए कड़ी चुनौती पेश की। हालांकि सेमीफाइनल मुकाबले में उन्हें 2-4 से हार का सामना करना पड़ा। सेमीफाइनल में पहुंचने के साथ ही जय ने भारत के लिए कांस्य पदक पक्का कर इतिहास रच दिया। क्वार्टरफाइनल में रोमांचक जीत के बाद बनाई थी अंतिम चार में जगह जय मीना ने क्वार्टरफाइनल मुकाबले में फिलीपींस के खिलाड़ी के खिलाफ बेहद संघर्षपूर्ण मुकाबले में जीत दर्ज कर सेमीफाइनल में प्रवेश किया था। निर्णायक चरण तक पहुंचे इस मुकाबले में जय के शानदार प्रदर्शन ने उन्हें अंतिम चार में स्थान दिलाया और भारत का पदक सुनिश्चित हुआ। खेल मंत्री श्री विश्वास कैलाश सारंग ने दी बधाई सहकारिता, खेल एवं युवा कल्याण मंत्री श्री विश्वास कैलाश सारंग ने जय मीना को ऐतिहासिक कांस्य पदक जीतने पर हार्दिक बधाई एवं शुभकामनाएं दी हैं। उन्होंने कहा कि जय मीना की उपलब्धि मध्यप्रदेश के साथ-साथ पूरे देश के लिए गर्व का विषय है। सॉफ्ट टेनिस में भारत को एशियन गेम्स का पहला पदक दिलाकर जय ने भारतीय खेल इतिहास में महत्वपूर्ण उपलब्धि दर्ज की है। उनकी यह सफलता प्रदेश के युवा खिलाड़ियों के लिए प्रेरणादायी है। 2022 नेशनल गेम्स में जीता था स्वर्ण जय मीना ने वर्ष 2022 में गुजरात में आयोजित 36वें नेशनल गेम्स में पुरुष एकल का स्वर्ण पदक जीता था। उन्होंने पुरुष टीम और युगल स्पर्धाओं में भी मध्यप्रदेश के पदक अभियान में योगदान दिया। वर्ष 2025 में वे पुरुष एकल के नेशनल चैंपियन बने। लगातार राष्ट्रीय स्तर पर शानदार प्रदर्शन के बाद अब उन्होंने एशियन गेम्स में ऐतिहासिक पदक जीतकर अपनी उपलब्धियों में एक और महत्वपूर्ण अध्याय जोड़ा है। वर्ल्ड चैंपियनशिप में भी रचा था इतिहास जय मीना ने वर्ष 2024 में वर्ल्ड सॉफ्ट टेनिस चैंपियनशिप में अंडर-21 मिश्रित युगल में कांस्य पदक जीतकर भी भारतीय सॉफ्ट टेनिस में ऐतिहासिक उपलब्धि दर्ज की थी। उन्होंने आध्या तिवारी के साथ मिलकर यह पदक हासिल किया था और यह विश्व चैंपियनशिप में भारत की पहली पदक विजेता जोड़ी बनी थी। देवास के स्कूल कोर्ट से शुरू हुआ सफर जय मीना का सफर भी बेहद दिलचस्प रहा है। देवास के Pioneer Public School में पढ़ाई के दौरान उन्होंने पहली बार सॉफ्ट टेनिस कोर्ट देखा। शुरुआत में वे केवल खिलाड़ियों को देखने और बॉल बॉय के तौर पर मदद करने जाते थे। धीरे-धीरे इस खेल के प्रति उनकी रुचि बढ़ी और उन्होंने स्वयं खेलना शुरू किया। स्कूल और जिला प्रतियोगिताओं से आगे बढ़ते हुए उन्होंने राज्य और राष्ट्रीय स्तर पर पहचान बनाई तथा महज 14 वर्ष की उम्र में जापान में अंतरराष्ट्रीय स्तर पर प्रतिस्पर्धा करना शुरू कर दिया था। भारतीय सॉफ्ट टेनिस के इतिहास में दर्ज हुआ नया अध्याय जय मीना का कांस्य पदक भारतीय सॉफ्ट टेनिस के लिए एक ऐतिहासिक उपलब्धि है। एशियन गेम्स के मंच पर भारत के लिए इस खेल का पहला पदक जीतकर जय ने न केवल देश का गौरव बढ़ाया, बल्कि मध्यप्रदेश की खेल प्रतिभा को भी अंतरराष्ट्रीय पहचान दिलाई है। मध्यप्रदेश के खिलाड़ी की यह उपलब्धि प्रदेश में तैयार हो रही प्रतिभाओं की क्षमता को भी रेखांकित करती है। 

दीपिका ने एशियन गेम्स में रचा इतिहास, 11 गोल दागकर बनाया रिकॉर्ड

हिसार. एशियन गेम्स में भारतीय खिलाड़ियों का शानदार प्रदर्शन जारी है। भारतीय महिला हाकी टीम में हिसार की दीपिका सहरावत ने जहां उज्बेकिस्तान के खिलाफ एक मैच में आठ गोल दागकर अपनी अलग पहचान बनाई, वहीं इंडोनेशिया के खिलाफ लगातार दूसरे मैच में तीन गोल कर हैट्रिक लगाई। दीपिका टूर्नामेंट में 11 गोल कर सबसे आगे चल रही है। वहीं दूसरी ओर भारतीय कबड्डी टीम ने सोमवार को अपने अभियान की शुरुआत बांग्लादेश को 42-21 से हराकर की। इस मुकाबले में हिसार के गांव भिवानी रोहिल्ला की मनीषा ने लेफ्ट कवर से डिफेंडर की भूमिका निभाई। वहीं हसनगढ़ की निकिता नैन भी भारतीय टीम का हिस्सा हैं। दीपिका ने आठ गोल कर तोड़ा अपना ही रिकार्ड  भारतीय महिला हाकी टीम ने उज्बेकिस्तान को 19-0 से हराया था। इस मुकाबले में दीपिका सहरावत ने अकेले आठ गोल दागे। इस प्रदर्शन के साथ उन्होंने अपना ही पिछला रिकार्ड पीछे छोड़ दिया।

एशियन गेम्स 2026: यूपी के खिलाड़ियों पर टिकीं नजरें, 7 गोल्ड का रिकॉर्ड तोड़ने की तैयारी

लखनऊ आईची-नागोया में एशिया में खेलों में एशिया का सिरमौर बनने के लिए जोर-आजमाइश शुरू हो गई है। भारतीय दल में करीब दो दर्जन खिलाड़ी उत्तर प्रदेश से भी हैं। राज्य के खिलाड़ी अपना पिछला रिकार्ड पीछे छोड़ने की चाह लिए एशियाई खेलों में पहुंचे हैं। पिछले यानी हांगझोऊ एशियाई खेल में उत्तर प्रदेश के खिलाड़ियों ने कुल सात स्वर्ण समेत 24 पदक जीते थे। इस बार और बेहतर प्रदर्शन की उम्मीद है। पारुल चौधरी पिछले एशियाई खेलों में उत्तर प्रदेश के 39 खिलाड़ियों ने हिस्सा लिया था। इस बार करीब दो दर्जन खिलाड़ी हैं। पदक की सबसे बड़ी आस मेरठ की एथलीट पारुल चौधरी हैं। उन्होंने पिछले एशियाई खेलों में दो स्पर्धाओं में हिस्सा लिया था और एक में स्वर्ण और एक में रजत पदक जीते थे। इस बार वह तीन स्पर्धाओं यानी 1500 मीटर, 5000 मीटर और 3000 मीटर दौड़ में हिस्सा लेंगी। वह 5000 मीटर और 3000 मीटर स्टीपलचेज में एशिया की सर्वश्रेष्ठ एथलीट हैं। उन्हें दो स्वर्ण पदक का प्रबल दावेदार माना जा रहा है। गुलवीर सिंह गुलवीर सिंह लंबी दूरी की दौड़ में एशिया के सर्वश्रेष्ठ एथलीट हैं। ग्लास्गो राष्ट्रमंडल खेल में उन्होंने एक रजत और एक कांस्य पदक जीतकर इतिहास रचा था। पिछले एशियाई खेलों में उन्होंने 10000 मीटर दौड़ में कांस्य पदक जीता था। इस बार गुलवीर तीन स्पर्धाओं यानी 1500 मीटर, 5000 मीटर और 10000 मीटर की दौड़ में हिस्सा लेंगे। तीनों में उनसे पदक की उम्मीद है। 10000 मीटर दौड़ में उनका स्वर्ण अभी से पक्का माना जा रहा है। इनके अलावा एथलेटिक्स में जैवलिन थ्रोअर रोहित यादव, लांग जंपर शैली सिंह और हैमर थ्रो की सबसे युवा राष्ट्रीय रिकार्डधारी अस्मिता यादव भी पदक के दावेदार हैं। प्राची चौधरी 400 मीटर और 4 गुणा 400 मीटर रिले में हिस्सा लेंगी। इसमें रिले में उनसे पदक की पूरी उम्मीद है। राजकुमार पाल पेरिस ओलिंपिक के कांस्य पदक विजेता राजकुमार पाल से पदक की पूरी उम्मीद है। हाकी टीम पिइछले एशियाई खेलों की स्वर्ण पदक विजेता है। इस बार भी उसे स्वर्ण का दावेदार माना जा रहा है। दीप्ति शर्मा और विप्रज निगम पिछले एशियाई खेलों इस बार भारतीय महिला व पुरुष टीम के चैंपियन बनने की पूरी उम्मीद है। ऐसे महिला टीम की सदस्य दीप्ति शर्मा और विप्रज निगम के खाते में पदक आने तय हैं। ये खिलाड़ी भी पदक के दावेदार पिछले बार की चैंपियन कबड्डी टीम की तरफ से स्वर्ण जीतने वाली अर्जुन देशवाल इस बार भी टीम में शामिल हैं। उनसे इस बार भी राज्य को पदक को उम्मीद है। ऐसे ही पिछले एशियाई खेलों के पदक विजेता नौकायन खिलाड़ी अरविन्द कुमार भी पदक के दावेदार हैं। उत्तर प्रदेश पुलिस में कार्यरत राष्ट्रमंडल खेलों की स्वर्ण पदक विजेता जूडोका अस्मिता डे एशियाई खेलों में भी पदक की प्रबल दावेदार मानी जा रही हैं। उन्हें जापान और चीन जैसे देशों से टक्कर लेनी पड़ेगी। ये देश राष्ट्रमंडल खेलों में नहीं होते हैं। भारतीय दल के सबसे उम्रदराज खिलाड़ी 50 वर्षीय निशानेबाज मेराज अहमद खान का यह चौथा एशियाई खेल होगा। यूपी के खिलाड़ियों के पास इस बार पदक जीतने के अच्छे मौके हैं। खासकर पारुल चौधरी, जैवलिन थ्रोअर रोहित यादव और गुलवीर सिंह जैसे खिलाड़ियों से मजबूत प्रदर्शन की उम्मीद की जा सकती है। पारुल ने पिछली बार भी धमाकेदार प्रदर्शन किया था। रोहित लगातार प्रभावित कर रहे हैं। इस बार उत्तर प्रदेश से एथलेटिक्स की सबसे बड़ी टीम गई है, जिसमें 14 खिलाड़ी शामिल है। इसलिए पदक भी अधिक आने चाहिए। जेएस भाटिया, द्रोणाचार्य अवार्डी एवं अंतरराष्ट्रीय           एथलेटिक्स कोच      

सुचीका तरियाल का शानदार प्रदर्शन, एशियन गेम्स में MMA का पहला भारतीय मेडल पक्का

आइची-नागोया एशियन गेम्स 2026 में भारत को मिक्सड मार्शल आर्ट्स (MMA) इवेंट में पहला ऐतिहासिक पदक मिल गया है। 36 साल की भारतीय फाइटर सुचीका तरियाल ने सोमवार को महिलाओं की पारंपरिक 60 किग्रा स्पर्धा में कांस्य पदक अपने नाम किया। हालांकि यह मुकाबला काफी हाई-ड्रामा से भरा रहा। सेमीफाइनल में सिंगापुर की तेओ हुई हून के खिलाफ सुचीका ने जबरदस्त संघर्ष किया और मैच को ओवरटाइम तक ले गईं, लेकिन जजों का अंतिम फैसला सिंगापुर की खिलाड़ी के पक्ष में रहा। फैसला सुनते ही सुचीका अपने आंसू नहीं रोक सकीं और काफी भावुक होकर रिंग से वापस लौटीं। जब मैच के बाद रेफरी ने आधिकारिक विजेता की घोषणा के लिए दोनों खिलाड़ियों को मंच पर बुलाया, तो सुचीका पहले निर्णय से निराश होकर ऊपर जाने के लिए तैयार नहीं थीं। हालांकि, भारतीय कोचों के समझाने के बाद वे अनिच्छा से मंच पर गईं, लेकिन फैसले के बाद आंखों में आंसू लिए वापस लौटीं। गौरतलब है कि एशियन गेम्स 2026 में बीएमएक्स, टेकबॉल, पैडेल, सर्फिंग और वर्चुअल ताइक्वांडो के साथ-साथ MMA को भी पहली बार शामिल किया गया है। सुचीका ने रविवार को क्वार्टरफाइनल में मंगोलिया की अलतांचिमेग बायगल्मा को 2-0 से हराकर ही भारत का पदक पक्का कर लिया था। करियर और MMA में वापसी का सफर सुचीका तरियाल ने साल 2017 में मिक्सड मार्शल आर्ट्स में अपना डेब्यू किया था। इसके बाद उन्होंने एमएमए से लगभग सात साल का ब्रेक लिया और इस दौरान जूड़ो व जू-जित्सु में भारत का प्रतिनिधित्व जारी रखा। साल 2024 में उन्होंने ब्रेव कॉम्बैट फेडरेशन के साथ क्रॉन्ट्रैक्ट पर साइन किया। इसके बाद दिसंबर 2024 में बहरीन में आयोजित ब्रेव सीएफ 92 के जरिए उन्होंने पेशेवर एमएमए रिंग में अपनी शानदार वापसी की थी। छेड़छाड़ की घटना से मिली प्रेरणा हरियाणा के रोहतक की रहने वाली सुचीका की खेल यात्रा काफी प्रेरणादायक रही है। महज 12 साल की उम्र में अपने साथ हुई छेड़छाड़ की एक घटना के बाद उन्होंने आत्मरक्षा के मकसद से जूड़ो सीखना शुरू किया था। इसके बाद उन्होंने पीछे मुड़कर नहीं देखा और 20 से अधिक अंतरराष्ट्रीय प्रतियोगिताओं में देश का प्रतिनिधित्व किया। सुचीका 8 बार की नेशनल जूड़ो चैंपियन हैं। इसके अलावा उन्होंने 2019 राष्ट्रमंडल जूड़ो चैंपियनशिप और 2019 साउथ एशियन गेम्स में स्वर्ण पदक जीता था। 2022 के बर्मिंघम राष्ट्रमंडल खेलों में भी उन्होंने 57 किग्रा वर्ग में बेहतरीन प्रदर्शन किया था, जहां वे बहुत मामूली अंतर से मेडल से चूक गई थीं। खेल के अलावा सुचीका CISF में हेड कांस्टेबल के पद पर तैनात रहीं और बाद में हरियाणा खेल विभाग में जूनियर कोच के रूप में सेवाएं दीं।

नागोया एशियन गेम्स में कमरे पड़े कम, भारतीय खिलाड़ियों को छोटी जगह में करनी पड़ रही एडजस्टमेंट

 नागोया एशियाई खेलों के लिए बहुचर्चित कोस्टा सेरेना क्रूज जहाज में ठहरे कुछ भारतीय खिलाड़ियों को दो लोगों के लिए बने कमरे में तीन खिलाड़ियों को साथ रहना पड़ रहा है। उद्घाटन समारोह से महज दो दिन पहले आवास व्यवस्था को लेकर मेजबान जापान के खिलाड़ियों को भी ऐसी ही समस्याओं का सामना करना पड़ा है। स्थानीय मीडिया की खबरों के मुताबिक, कुछ जापानी खिलाड़ी वैकल्पिक आवास की तलाश कर रहे हैं। ऐसे मामले भी सामने आए हैं जिनमें पुरुष और महिला खिलाड़ियों को साझा कमरे आवंटित किए गए हैं। जापान के उप मिशन प्रमुख हिसाशी मिजुतोरी ने यहां मीडिया से कहा कि ऐसे मामले सामने आए हैं जहां कोच, टीम अधिकारियों और खिलाड़ियों को एक ही कमरे में रखा गया है। कुछ मामलों में केवल संख्या के आधार पर कमरे आवंटित किए गए, जैसे पांच पुरुषों और पांच महिलाओं के समूह को दो लोगों के पांच कमरे देना। होती है मुश्किल जापान टाइम्स के अनुसार, उन्होंने कहा कि कागज पर संख्या सही बैठती है, लेकिन व्यावहारिक तौर पर इससे पुरुषों और महिलाओं को एक साथ रखने, कोच को खिलाड़ियों के साथ रखने या बड़ी मात्रा में चिकित्सा उपकरण रखने वाले ट्रेनर को एक साथ रखने जैसी मुश्किल स्थितियां पैदा होती हैं। भारत के रोइंग, वुशु और टेबल टेनिस दल के खिलाड़ी पहले ही इटली के क्रूज जहाज में पहुंच चुके हैं जो फिलहाल आवास व्यवस्था को लेकर चर्चा के केंद्र में है। करीब 300 मीटर लंबे इस जहाज में 1,500 केबिन हैं। भारतीय दल के एक सदस्य के अनुसार दो खिलाड़ियों के लिए बने कुछ कमरों में तीन खिलाड़ी रह रहे हैं। कमरे छोटे होने के कारण अतिरिक्त खिलाड़ी के रहने से असुविधा बढ़ गई है, लेकिन वे औपचारिक रूप से शिकायत नहीं कर रहे हैं। भारतीय दल के एक सदस्य ने नाम नहीं बताने की शर्त पर कहा कि दो खिलाड़ियों के लिए बने कुछ कमरों में तीन खिलाड़ी रह रहे हैं। कमरे पहले ही छोटे हैं और एक अतिरिक्त खिलाड़ी के कारण असुविधा और बढ़ जाती है। खिलाड़ी इतनी बड़ी प्रतियोगिता में अपना सर्वश्रेष्ठ देना चाहते हैं, लेकिन उन्हें इन परिस्थितियों का सामना करना पड़ रहा है। शिकायत नहीं कर रहे उन्होंने कहा कि लेकिन हम शिकायत नहीं कर रहे हैं और स्थिति के अनुसार खुद को ढाल रहे हैं। भोजन को लेकर कोई समस्या नहीं है। यह भी पता चला है कि कुछ भारतीय अधिकारियों को अपने रहने की व्यवस्था स्वयं करने को कहा गया है। भारतीय रोइंग टीम के सहयोगी स्टाफ के दो सदस्य क्रूज जहाज पर जगह नहीं मिलने के कारण बाहर ठहरे हुए हैं।  

जापान पहुंचे भारतीय खिलाड़ी, आवास के लिए घंटों इंतजार; रोइंग टीम को खाना भी नहीं मिला

नई दिल्ली  भारतीय खिलाड़ी मंगलवार सुबह दो अलग-अलग बैच में जापान के लिए रवाना हुए। पहला दल मंगलवार सुबह और दूसरा कुछ घंटे बाद दोपहर में दिल्ली एयरपोर्ट से रवाना हुआ। बैंकाक में ठहराव के बाद पहला दल बुधवार सुबह करीब आठ बजे जापान के स्थानीय समय के अनुसार नागोया पहुंचा। इसके करीब एक घंटे बाद वे उस क्रूज जहाज पर पहुंचे, जो नागोया में खड़ा है। 12 घंटे से अधिक की थकाऊ यात्रा के बाद खिलाड़ियों को कुछ आराम मिलने की उम्मीद थी। हालांकि, उन्हें आवास मिलने का इंतजार हर गुजरते घंटे के साथ बढ़ता गया और संबंधित अधिकारी समस्या का समाधान नहीं कर सके। भारतीय रोइंग टीम को नहीं मिली रहने की जगह एक भारतीय खिलाड़ी ने बताया कि हम सुबह करीब नौ बजे यहां पहुंचे थे और अब शाम के 6:30 बज चुके हैं, लेकिन हमें अभी तक वादा किया गया आवास नहीं मिला है। वह 30 सदस्यीय भारतीय रोइंग दल का हिस्सा हैं, जिसमें 17 पुरुष और पांच महिला खिलाड़ी शामिल हैं। हालांकि, बताया जा रहा है कि महिला रोइंग टीम को किसी अन्य स्थान पर ठहराया गया है। आयोजन समिति के अनुसार, करीब 4,000 खिलाड़ियों और अधिकारियों को कोस्टा सेरेना नामक क्रूज जहाज पर ठहराया जाना है। यह जहाज करीब 3,000 मीटर लंबा है और इसमें 1,500 केबिन हैं। इसके अलावा खर्च कम करने के लिए खिलाड़ियों और अधिकारियों को लकड़ी के कंटेनर जैसे बने हट्स और सामान्य होटल के कमरों में भी ठहराने की व्यवस्था की गई है। खिलाड़ियों को नहीं मिल रहा खाना भारतीय खिलाड़ी ने कहा कि हमने सोमवार शाम से ठीक से नींद नहीं ली है। पहले हम पुणे स्थित आर्मी रोइंग नोड से दिल्ली के लिए निकले और फिर अगले दिन सुबह जापान की उड़ान पकड़ी। रोइंग टीम के अलावा तीन अन्य भारतीय टीमें भी आवास के बिना इसी सुविधा में फंसी हुई बताई जा रही हैं। खिलाड़ी ने आगे कहा कि हमें अभी तक खाने के लिए भी कुछ नहीं मिला है। आयोजन समिति के सदस्यों ने सिर्फ पानी उपलब्ध कराया है। अभी तक हम घर से लाया हुआ खाना खाकर गुजारा कर रहे हैं। हम बिना खाने के कुछ समय रह सकते हैं, लेकिन हमें आराम की जरूरत है क्योंकि हमारी प्रतियोगिता 19 सितंबर से शुरू हो रही है। भारतीय रोवर्स गुरुवार सुबह से अभ्यास शुरू करने वाले हैं। शूटिंग सहित अन्य दलों के लिए भी स्थिति खराब रोवर्स की स्थिति अकेली नहीं है। शूटिंग सहित अन्य भारतीय टीमों और सुबह यहां पहुंचने वाले भारतीय ओलंपिक संघ के कुछ अधिकारियों को भी वैकल्पिक व्यवस्था तलाशनी पड़ी। जानकारी के मुताबिक, आयोजक अब खिलाड़ियों और अधिकारियों के लिए होटल के कमरे उपलब्ध कराने की कोशिश कर रहे हैं। इसका मतलब है कि खिलाड़ियों को एक ही गेम्स विलेज में नहीं, बल्कि अलग-अलग स्थानों पर ठहराया जा सकता है। कमरों की कमी इसलिए भी पैदा हुई है क्योंकि आयोजकों ने एक जगह पर केंद्रीकृत गेम्स विलेज बनाने के बजाय खर्च कम करने के उद्देश्य से उसकी जगह क्रूज जहाज को चुना। अब यह देखना होगा कि खिलाड़ियों को आवास के लिए और कितनी देर इंतजार करना पड़ता है।