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UP Election 2027: विधानसभा चुनाव की तैयारी तेज, लखनऊ में जुटेंगे BJP नेता; अमित शाह करेंगे उद्घाटन

लखनऊ उत्तर प्रदेश में 2027 के विधानसभा चुनाव को लेकर भारतीय जनता पार्टी (BJP) ने अपनी तैयारियां तेज कर दी हैं. पार्टी कल 30 और 31 अक्टूबर को लखनऊ में दो दिवसीय प्रदेश कार्यसमिति की बैठक करेगी. केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह बैठक का उद्घाटन करेंगे, जबकि मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ समापन करेंगे।  बैठक में आगामी विधानसभा चुनाव की रणनीति तैयार करने के साथ संगठन की मौजूदा स्थिति की समीक्षा की जाएगी. सरकार के कामकाज, कानून-व्यवस्था, महिला सुरक्षा, रोजगार और कल्याणकारी योजनाओं के जरिए जनता तक पहुंच बनाने पर भी चर्चा होगी।  2027 चुनाव के लिए तैयार होगा रोडमैप प्रदेश अध्यक्ष पंकज चौधरी की अध्यक्षता में होने वाली इस बैठक में पार्टी के केंद्रीय और प्रदेश पदाधिकारी, सांसद, विधायक, मंत्री और जिलाध्यक्ष शामिल होंगे. इस दौरान राजनीतिक प्रस्ताव के जरिए सरकार की उपलब्धियों को जनता तक पहुंचाने और संगठन को चुनाव के लिए सक्रिय करने की रणनीति बनाई जाएगी. पार्टी का लक्ष्य 2027 के विधानसभा चुनाव के लिए संगठन और सरकार की प्राथमिकताएं तय करना है।   बीजेपी नेता मनीष शुक्ला ने बताया कि सबसे महत्वपूर्ण उत्तर प्रदेश का चुनाव सामने है, इसलिए चुनाव की दृष्टि से पार्टी और संगठन, सरकार किस तरह से आगे बढ़ेंगे, 2027 में 2017 से बड़ी विजय दर्ज हो, प्रचंड बहुमत से विजय दर्ज हो, इसके लिए भी कार्य योजना बनाई जाएगी।  बीजेपी की बैठक पर सपा ने उठाए सवाल बीजेपी की चुनावी तैयारियों के बीच समाजवादी पार्टी (SP) ने बैठक को लेकर निशाना साधा है. सपा का आरोप है कि अगर सरकार ने जनता के लिए काम किया होता, तो उसे इतनी बैठकें करने की जरूरत नहीं पड़ती. सपा ने बीजेपी के खिलाफ जनता में नाराजगी होने का दावा किया है. पार्टी ने कहा कि आगामी चुनाव में पीडीए की सरकार बनेगी।  समाजवादी पार्टी के नेता दीपक रंजन ने कहा कि अब ये कितनी भी बैठकें कर लें, कितनी भी एक्सरसाइज कर लें, अब कुछ होने-वाने वाला नहीं है. जनता बस इनके खिलाफ जो है बटन दबाने का इंतजार कर रही है और PDA की सरकार आने के लिए तैयार है।  एक तरफ जहां बीजेपी प्रदेश कार्यसमिति की बैठक के जरिए आगामी चुनाव के लिए संगठन और सरकार की प्राथमिकताएं तय करने की तैयारी में है. वहीं, समाजवादी पार्टी ने सरकार के कामकाज और जनता की नाराजगी को मुद्दा बनाया है।   

Operation Trident: क्या है अमित शाह का ऑपरेशन ट्राइडेंट? ड्रग नेटवर्क से लेकर हवाला कारोबार तक पर शिकंजा

नई दिल्ली देश में नशे के कारोबार को चलाने वाले नेटवर्क पर सुरक्षा एजेंसियों ने एक बड़ी कार्रवाई की है. इसका नाम है ‘ऑपरेशन ट्राइडेंट’. इस अभियान के तहत असम, मिजोरम और मणिपुर में एक साथ 38 ठिकानों पर छापेमारी की गई. कार्रवाई में 18 लोगों को गिरफ्तार किया गया है. जांच एजेंसियों के मुताबिक करीब 100 करोड़ रुपए के हवाला लेनदेन का खुलासा हुआ है. इसके अलावा 1,424 बैंक खातों को फ्रीज किया गया और 17.82 करोड़ रुपए की संपत्तियां अटैच की गई हैं. तलाशी के दौरान 500 डेटोनेटर और 12 लाख रुपए नकद भी जब्त किए गए. इस कार्रवाई के बाद सवाल उठ रहा है कि आखिर ऑपरेशन ट्राइडेंट क्या है और यह किस तरह अंतरराष्ट्रीय ड्रग्स तस्करी के नेटवर्क पर चोट करता है? यह अभियान 23 अक्टूबर को चलाया गया. इसमें केंद्रीय एजेंसियों और असम, मिजोरम तथा मणिपुर की पुलिस ने मिलकर कार्रवाई की. जांच के मुताबिक संदिग्ध नेटवर्क भारत के साथ म्यांमार और बांग्लादेश की सीमाओं का इस्तेमाल करके नशीले पदार्थों की तस्करी कर रहा था. इस तस्करी मार्ग को ‘डेथ ट्रायंगल कॉरिडोर’ बताया गया है. एजेंसियों की जांच केवल नशीले पदार्थों की बरामदगी तक सीमित नहीं रही. कथित तौर पर तस्करी से जुड़े पैसों के लेनदेन और संपत्तियों की भी पड़ताल की गई. बैंक खाते फ्रीज करने और संपत्तियां अटैच करने का मकसद नेटवर्क की आर्थिक गतिविधियों पर रोक लगाना है. हालांकि पूरे नेटवर्क की भूमिका और गिरफ्तार लोगों के खिलाफ आरोपों की स्थिति आगे की जांच से स्पष्ट होगी।  क्या है ऑपरेशन ट्राइडेंट? ऑपरेशन ट्राइडेंट नशीले पदार्थों की तस्करी और उससे जुड़े कथित पैसें के नेटवर्क के खिलाफ चलाया गया संयुक्त अभियान है. इसमें कई स्थानों पर एक साथ कार्रवाई की गई ताकि नेटवर्क के अलग-अलग हिस्सों की जांच की जा सके. इस कार्रवाई में केंद्रीय एजेंसियों के साथ तीन पूर्वोत्तर राज्यों की पुलिस ने भी सहयोग किया. जांच का अहम पहलू यह है कि एजेंसियां कथित तस्करी के साथ उससे जुड़े धन के स्रोत और इस्तेमाल को भी खंगाल रही हैं. इससे यह पता लगाने में मदद मिल सकती है कि नशे के कारोबार से जुड़ी कमाई किन लोगों और संस्थाओं तक पहुंच रही थी।  38 ठिकानों पर छापेमारी और 18 गिरफ्तार 23 अक्टूबर को असम, मिजोरम और मणिपुर में 38 स्थानों पर तलाशी अभियान चलाया गया. इस दौरान 18 लोगों को गिरफ्तार किए जाने की जानकारी दी गई है. जांच एजेंसियों का दावा है कि यह कार्रवाई एक अंतरराष्ट्रीय नार्को-कार्टेल यानी नशीले पदार्थों की तस्करी करने वाले संगठित नेटवर्क के खिलाफ की गई. तीन राज्यों में एक साथ कार्रवाई का मकसद कथित नेटवर्क से जुड़े लोगों और गतिविधियों का पता लगाना था. गिरफ्तार आरोपियों की व्यक्तिगत भूमिका और उनके खिलाफ मौजूद साक्ष्यों का पूरा विवरण आगे की जांच में स्पष्ट हो सकेगा।  100 करोड़ के हवाला कारोबार पर कैसे हुई चोट? इस अभियान का बड़ा पहलू कथित हवाला लेनदेन का खुलासा है. एजेंसियों के मुताबिक जांच में करीब 100 करोड़ रुपए के लेनदेन का पता चला है. इसके साथ 1,424 बैंक खातों को फ्रीज किया गया और 17.82 करोड़ रुपए की संपत्तियां अटैच की गईं. कार्रवाई के दौरान 12 लाख रुपए नकद भी जब्त किए गए. हवाला के जरिए पैसों का लेनदेन जांच को जटिल बना सकता है क्योंकि इसमें रकम की वास्तविक आवाजाही और उसके स्रोत का पता लगाना महत्वपूर्ण होता है. खातों को फ्रीज करने और संपत्तियां अटैच करने से कथित नेटवर्क की आर्थिक गतिविधियों पर रोक लगाने में मदद मिल सकती है।  500 डेटोनेटर मिलने से जांच का दायरा बढ़ा छापेमारी में 500 डेटोनेटर बरामद किए जाने की जानकारी भी सामने आई है. इनके मिलने के बाद जांच में यह पता लगाना अहम होगा कि वे कहां से आए और किस उद्देश्य से रखे गए थे. फिलहाल उपलब्ध जानकारी से यह निष्कर्ष नहीं निकाला जा सकता कि डेटोनेटर का इस्तेमाल किसी खास घटना के लिए होना था. एजेंसियां बरामद सामग्री और उससे जुड़े लोगों की भूमिका की जांच कर रही हैं. इस बरामदगी ने अभियान में नशीले पदार्थों और वित्तीय लेनदेन के अलावा दूसरे संभावित पहलुओं की पड़ताल को भी महत्वपूर्ण बना दिया है।  भारत-म्यांमार-बांग्लादेश सीमा पर तस्करी का कथित नेटवर्क जांच एजेंसियों के मुताबिक यह नेटवर्क भारत, म्यांमार और बांग्लादेश के सीमावर्ती इलाकों का इस्तेमाल करके नशीले पदार्थों की आवाजाही करता था. इस मार्ग को ‘डेथ ट्रायंगल कॉरिडोर’ कहा गया है. सीमापार तस्करी में कई समूहों और रास्तों की भूमिका हो सकती है. ऐसे मामलों में केवल सामान जब्त करना ही पर्याप्त नहीं होता. एजेंसियों को यह भी पता लगाना पड़ता है कि सप्लाई कहां से शुरू हुई और उसके पीछे कौन लोग काम कर रहे थे. ऑपरेशन ट्राइडेंट में वित्तीय लेनदेन की जांच इसी व्यापक पड़ताल का हिस्सा है।  2029 तक नशे के नेटवर्क खत्म करने का लक्ष्य इस कार्रवाई को 31 दिसंबर 2029 तक देश से नशीले पदार्थों के नेटवर्क खत्म करने के लक्ष्य की दिशा में एक कदम बताया गया है. तीन राज्यों में संयुक्त कार्रवाई और वित्तीय नेटवर्क पर चोट इसी रणनीति का हिस्सा मानी जा रही है. हालांकि किसी एक अभियान से पूरे तस्करी नेटवर्क के खत्म होने की पुष्टि नहीं की जा सकती. इसके लिए आगे की जांच और लगातार कार्रवाई जरूरी होगी. ऑपरेशन ट्राइडेंट का वास्तविक असर इस बात से सामने आएगा कि एजेंसियां कथित नेटवर्क के बाकी सदस्यों तक पहुंच पाती हैं या नहीं और तस्करी के रास्तों तथा पैसों के प्रवाह पर कितनी प्रभावी रोक लगती है। 

पंजाब में नशे के नेटवर्क पर केंद्र सख्त, MHA ने मान सरकार से मांगा जवाब

चंडीगढ़  पंजाब में नशे के खिलाफ लड़ाई अब गंभीर सवालों के घेरे में है. नशे के कारोबार से जुड़े कथित हमलों और आत्महत्या के मामलों पर केंद्र सरकार ने सख्त रुख अपनाया है. गृह मंत्री अमित शाह के मंत्रालय ने पंजाब सरकार से कई घटनाओं पर विस्तृत रिपोर्ट मांगी है. पंजाब की भगवंत मान सरकार को गुरदासपुर में नशे के खिलाफ अभियान चलाने वाले लोगों पर हमला, मानसा में परविंदर सिंह झोटा की हत्या और संगरूर में गुलजार सिंह की कथित आत्महत्या पर जवाब देने के लिए कहा गया है. गृह मंत्रालय ने इन घटनाओं के कानून-व्यवस्था पर पड़ने वाले संभावित असर को लेकर भी चिंता जताई है. मामला इसलिए भी गंभीर है, क्योंकि गुलजार सिंह ने कथित तौर पर अपने इलाके में नशीले पदार्थों की उपलब्धता पर सवाल उठाए थे. उन पर स्थानीय स्तर पर दबाव बनाए जाने के आरोप भी सामने आए हैं. हालांकि, इन आरोपों की स्वतंत्र पुष्टि और जांच के नतीजे सामने आना जरूरी है।  गुरदासपुर में नशे के खिलाफ अभियान चलाने वालों पर हमला गृह मंत्रालय के मुताबिक, गुरुवार रात गुरदासपुर जिले के मारी पनवां गांव में बिक्रमजीत सिंह, निशान सिंह और गुरमुख सिंह पर हमला हुआ. मंत्रालय ने इस घटना को कथित तौर पर नशीले पदार्थों से जुड़े मामले के रूप में दर्ज किया है. इन घटनाओं ने नशे के खिलाफ अभियान चलाने वाले लोगों की सुरक्षा पर सवाल खड़े किए हैं. केंद्र ने पंजाब सरकार से घटना की परिस्थितियों और संबंधित कार्रवाई का ब्योरा मांगा है. हालांकि, हमले के पीछे की पूरी वजह जांच के बाद ही स्पष्ट होगी।  मानसा में हत्या, संगरूर मामला गृह मंत्रालय ने मानसा में परविंदर सिंह झोटा की हत्या का भी संज्ञान लिया है. इसके अलावा संगरूर में गुलजार सिंह की कथित आत्महत्या का मामला भी रिपोर्ट में शामिल है. मंत्रालय के अनुसार, गुलजार सिंह नशे की लत से जूझ रहे एक व्यक्ति के पिता थे. उन्होंने अपने इलाके में नशीले पदार्थों की उपलब्धता पर सवाल उठाए थे. उन्होंने पंजाब के एक मंत्री पर भी आरोप लगाए थे. मंत्रालय ने कहा कि गुलजार सिंह को स्थानीय ग्राम पंचायत द्वारा कथित तौर पर प्रताड़ित किया गया. उन पर दबाव बनाए जाने के आरोप भी हैं. आरोप है कि इसी वजह से उन्होंने आत्महत्या की. इन आरोपों की पुष्टि जांच के बाद ही हो सकेगी।  अमित शाह के दृष्टिपत्र पर भी मांगा जवाब गृह मंत्रालय ने पंजाब सरकार से एक अन्य मुद्दे पर भी रिपोर्ट मांगी है. यह रिपोर्ट केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह द्वारा मुख्यमंत्रियों के साथ साझा किए गए नारकोटिक्स नियंत्रण दृष्टिपत्र से संबंधित है. इस दृष्टिपत्र की अवधि 2026 से 2029 तक है. केंद्र ने राज्य सरकार से पूछा है कि इस दिशा में अब तक क्या कार्रवाई की गई है. इसमें नशीले पदार्थों पर नियंत्रण और संबंधित उपायों की प्रगति का ब्योरा मांगा गया है।  अब पंजाब सरकार की रिपोर्ट पर नजर इन घटनाओं पर केंद्र की कार्रवाई ने पंजाब में नशे की समस्या को फिर चर्चा में ला दिया है. अब राज्य सरकार की रिपोर्ट से घटनाओं की परिस्थितियों और प्रशासनिक कार्रवाई की जानकारी मिलने की उम्मीद है. सबसे अहम सवाल यह है कि नशे के खिलाफ आवाज उठाने वालों की सुरक्षा कैसे सुनिश्चित होगी. साथ ही, सामने आए आरोपों की निष्पक्ष जांच और जिम्मेदार लोगों पर कार्रवाई भी महत्वपूर्ण होगी। 

Meerut Snake Bite Case: अमित कश्यप हत्याकांड में पत्नी और प्रेमी को मिली मौत की सजा

 मेरठ  सांप के डसने से मौत का मामला समझे जा रहे अमित कश्यप हत्याकांड में उसकी पत्नी रविता और प्रेमी अमरदीप को अदालत ने मृत्युदंड की सजा सुनाई। अपर जिला जज कोर्ट संख्या-12 की अदालत ने दोनों को हत्या का दोषी करार देने के बाद यह फैसला सुनाया। करीब डेढ़ साल तक चली सुनवाई में 86 तारीखें लगीं और 12 गवाहों की गवाही हुई। इस हत्याकांड का पर्दाफाश तत्कालीन थाना प्रभारी दारोगा इंदू वर्मा के पोस्टमार्टम कराने के फैसले से हुआ था। परिवार और पत्नी के विरोध के बावजूद कराए गए पोस्टमार्टम में अमित की गला दबाकर हत्या किए जाने की पुष्टि हुई थी। गला दबाकर हत्या, सांप से डसवाने की साजिश मुजफ्फरनगर के तितावी क्षेत्र के सैदपुर निवासी रविता की शादी नौ वर्ष पहले बहसूमा क्षेत्र के अकबरपुर सादात निवासी अमित कश्यप से हुई थी। अमित टाइल और पत्थर लगाने का काम करता था। दंपती के तीन बच्चे हैं। अमित के साथ काम करने वाला अमरदीप पड़ोस में रहता था और रविता को चाची कहकर बुलाता था। इसी रिश्ते की आड़ में दोनों के बीच नजदीकियां बढ़ीं और करीब ढाई वर्ष पहले प्रेम संबंध हो गए। 12 अप्रैल 2025 को अमित पत्नी और बच्चों के साथ शाकंभरी देवी के दर्शन करने गया था। लौटते समय बहसूमा बस स्टैंड पर रविता ने अमित की नजर बचाकर अमरदीप से बात की। इसके बाद दोनों ने अमित की हत्या की साजिश रची। शाम तक सांप की व्यवस्था कर ली गई और अमरदीप ने उसे खेत में छिपा दिया। रात करीब दस बजे खाना खाने के बाद अमित चारपाई पर सो गया। इसके बाद अमरदीप थैले में सांप लेकर पहुंचा। रविता ने अमित के हाथ पकड़ लिए और अमरदीप ने उसका गला दबा दिया। हत्या के बाद दोनों ने शव के नीचे घोड़ापछाड़ सांप छोड़ दिया। सांप की पूंछ अमित की कमर के नीचे दबने से उसने पांच बार काटा। इससे शरीर पर बने निशानों के कारण हत्या को सर्पदंश का रूप देने की कोशिश की गई। पोस्टमार्टम से खुला हत्या का राज 13 अप्रैल 2025 की सुबह रविता ने नाश्ता तैयार किया और बेटे को अमित के पास भेजा। चारपाई पर सांप देखकर बेटे ने शोर मचा दिया। परिवार ने अमित की मौत सांप के डसने से होना मान लिया। शव को बुलंदशहर के गुलावटी ले जाकर झाड़-फूंक भी कराई गई। इसके बाद परिवार अंतिम संस्कार की तैयारी करने लगा। इसी दौरान तत्कालीन थाना प्रभारी दारोगा इंदू वर्मा पुलिस टीम के साथ गांव पहुंचीं। परिवार और रविता पोस्टमार्टम कराने से इन्कार कर रहे थे, लेकिन पुलिस ने पोस्टमार्टम कराया। तीन दिन बाद आई रिपोर्ट में गला दबाकर हत्या किए जाने की पुष्टि हुई। इसके बाद पुलिस ने रविता और अमरदीप को गिरफ्तार कर लिया। 86 तारीखों के बाद सुनाया फैसला अपर जिला जज कोर्ट संख्या-12 में सुनवाई के दौरान 12 गवाहों के बयान दर्ज किए गए। सात अक्टूबर को अदालत ने रविता और अमरदीप को दोषी करार दिया था। इसके बाद अदालत ने दोनों को मृत्युदंड की सजा सुनाई। इस मामले में पोस्टमार्टम रिपोर्ट हत्या का पर्दाफाश करने वाली अहम कड़ी साबित हुई।  

सिंधिया के न्योते पर ग्वालियर पहुंचेंगे अमित शाह, मध्य प्रदेश को मिलेगी करोड़ों की सौगात

ग्वालियर   29 अक्टूबर का दिन ग्वालियर और मध्यप्रदेश के लिए एक बड़ी सौगात लेकर आने वाली है. देश के गृहमंत्री अमित शाह ग्वालियर आने वाले हैं और वे यहां एशिया के सबसे बड़े और ग्वालियर में प्रस्तावित टेलकॉम मैन्युफैक्चरिंग जोन का भूमिपूजन करेंगे. अमित शाह का ये 26 दिनों में मध्य प्रदेश का दूसरा दौरा होगा, इससे पहले वे 3 अक्टूबर को भोपाल आए थे।  ग्वालियर बनेगा एशिया का सबसे बड़ा टेलीकॉम मैन्युफैक्चरिंग जोन हाल ही में केंद्रीय संचार मंत्री ज्योतिरादित्य सिंधिया के प्रयासों से ग्वालियर में एशिया का सबसे बड़ा टेलकॉम मैन्युफैक्चरिंग जोन की सौगात मिली थी. ये देश के लिए एक बड़ा और महत्वपूर्ण प्रोजेक्ट है. इस उद्योगिक प्रोजेक्ट के ज़रिए टेलीकॉम क्षेत्र में ग्वालियर के लिए रोजगार के नए आयाम स्थापित होंगे. 5500 करोड़ रु के निवेश वाली इस परियोजना का ग्वालियर के साडा क्षेत्र में भूमिपूजन करने के लिए केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह का दौरा प्रस्तावित है. हालांकि, पहले ये दौरा 12 अक्टूबर का माना जा रहा था लेकिन तारीखों में बदलाव हुआ है।  अमित शाह ने सिंधिया का आमंत्रण स्वीकारा प्रदेश के ऊर्जा मंत्री प्रद्युम्न सिंह तोमर ने बताया, '' केंद्रीय मंत्री ज्योतिरादित्य सिंधिया ने ग्वालियर के टेलकॉम मैनुफैक्चरिंग जोन के भूमिपूजन के लिए केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह को आमंत्रित किया था, जिस पर उन्होंने 29 अक्टूबर के लिए हामी भरी है. वे तय तारीख पर ग्वालियर दौरे पर रहेंगे और क्षेत्र को बड़ी सौगात देंगे।  'हजारों युवाओं को मिलेगा रोजगार' ऊर्जा मंत्री ने आगे कहा, ''29 अक्टूबर को इस कार्यक्रम में 24 कंपनियों की इकाइयों का भूमिपूजन होगा और इन इकाइयों से करीब 10 हज़ार युवाओं को प्रत्यक्ष और अप्रत्यक्ष रूप से रोजगार मिलेगा. इस टेलीकॉम मैनुफैक्चरिंग जोन का मुख्य फोकस ऑप्टिकल फाइबर, सेमीकंडर और 5जी-6जी तकनीक से जुड़े उपकरणों के निर्माण रिसर्च सुर इंफ्रास्ट्रक्चर पर रहेगा।  'फिर बदलेगी ग्वालियर में उद्योग की तस्वीर' ऊर्जा मंत्री प्रद्युम्न सिंह तोमर का कहना है कि, ये टेलीकॉम मैन्युफ़ैक्चरिंग जोन ग्वालियर क्षेत्र के लिए एक बड़ी उपलब्धि बनेगा और जो ग्वालियर उद्योग विहीन हो गया था, वहां एक बार फिर रोजगार का सृजन होगा। 

गृह मंत्री अमित शाह के कार्यक्रमों पर सुरक्षा का पहरा, नेताओं की गतिविधियों पर पुलिस की नजर

भोपाल  केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह आज भोपाल में हैं। वे 3 अक्टूबर को अनेक कार्यक्रमों में शामिल होंगे। मध्यप्रदेश में नक्सलमुक्ति के बाद केंद्रीय गृह एवं सहकारिता मंत्री अमित शाह का यह पहला मप्र दौरा है। वे उच्च स्तरीय बैठकों के साथ अन्य आयोजनों में हिस्सा लेंगे। अमित शाह आज भौरी स्थित आइसर में 500 करोड़ की लागत वाले अत्रि कैंपस की आधारशिला रखेंगे। वे गोपालक सम्मेलन में संबोधन देंगे। केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह के भोपाल दौरे के मद्देनजर सुरक्षा के व्यापक इंतजाम किए गए हैं। उनके कार्यक्रमों पर विरोध प्रदर्शनों का खतरा मंडरा रहा है। इसे देखते हुए पुलिस कांग्रेस नेताओं की हरेक गतिविधियों पर नजर रख रही है। एक कांग्रेस नेता को उनके कार्यालय में ही हिरासत में भी लिया गया है। शुक्रवार रात 12.15 बजे भोपाल पहुंचे केंद्रीय गृह एवं सहकारिता मंत्री अमित शाह शुक्रवार रात 12.15 बजे भोपाल पहुंचे। केंद्रीय गृह एवं सहकारिता मंत्री अमित शाह रात्रि में भारतीय वायुसेना के विमान से भोपाल आए। सीएम मोहन यादव और बीजेपी प्रदेशाध्यक्ष हेमंत खंडेलवाल ने विमानतल पर उनका स्वागत किया। अमित शाह आज शनिवार को भेल दशहरा मैदान में राज्यस्तरीय गोपालक सम्मेलन को संबोधित करेंगे। इसमें 35 हजार से अधिक गोपालक व सहकारी दुग्ध उत्पादक समितियों के सदस्य शामिल होंगे। वे नए आपराधिक कानूनों के पालन में मप्र की नब्ज भी टटोलेंगे। भौरी के आइसर में अत्रि कैंपस की रखेंगे आधारशिला अमित शाह आज भौरी के आइसर में अत्रि कैंपस की आधारशिला रखेंगे। 52 एकड़ में 'अत्रि' रिसर्च एवं इनोवेशन कैंपस बनेगा। यहां एआई-रोबोटिक्स, क्वांटम टेक्नोलॉजी, सेमीकंडक्टर, मेडिकल डिवाइस, ड्रोन, एडवांस्ड मैटेरियल्स, क्लाइमेट साइंस और रिन्यूएबल एनर्जी जैसे क्षेत्रों में रिसर्च होंगे। 500 करोड़ की लागत होगी। कांग्रेस नेता को उनके कार्यालय में ही हिरासत में लिया उधर, केंद्रीय गृह मंत्री के कार्यक्रम में विरोध प्रदर्शन की आशंका के चलते पुलिस ने कार्रवाई भी शुरू की है। भोपाल भर में सभी वरिष्ठ कांग्रेस नेताओं पर गहरी नजर रखी जा रही है। नरेला में कांग्रेस नेता मनोज शुक्ला को आफिस में नजरबंद किया गया है। गृहमंत्री अमित शाह का भोपाल दौरा शुक्रवार रात भोपाल आए गृहमंत्री अमित शाह अनेक कार्यक्रमों में करेंगे शिरकत केंद्रीय गृहमंत्री के भोपाल दौरे पर पुलिस सतर्क कांग्रेस नेता को किया नजरबंद शहर में आज कई कार्यक्रम 500 करोड़ के अत्रि कैंपस का शिलान्यास करेंगे गृहमंत्री नक्सलमुक्ति के बाद शाह पहली बार मप्र पहुंचे अब नशा मुक्ति का लक्ष्य

केंद्रीय सहकारिता मंत्री 3 अक्टूबर को करेंगे डेयरी प्लांट का डिजिटल भूमि-पूजन

केन्द्रीय सहकारिता एवं गृह मंत्री शाह उज्जैन को देंगे 255 करोड़ रूपये के अत्याधुनिक डेयरी प्लांट की सौगात केंद्रीय सहकारिता मंत्री 3 अक्टूबर को करेंगे डेयरी प्लांट का डिजिटल भूमि-पूजन प्लांट की शुरूआत 3 लाख लीटर प्रतिदिन की क्षमता से होगी, भविष्य में 5 लाख लीटर तक होगा विस्तार उज्जैन  प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी के मार्गदर्शन में मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव द्वारा दुग्ध प्रसंस्करण क्षमता के विस्तार और डेयरी क्षेत्र को सुदृढ़ करने की दिशा में लगातार प्रयास किया जा रहा है। उज्जैन एवं आसपास के क्षेत्रों में दुग्ध प्रसंस्करण क्षमता के विस्तार और डेयरी क्षेत्र को सुदृढ़ करने की दिशा में मध्यप्रदेश राज्य सहकारी दुग्ध महासंघ द्वारा 255 करोड़ रुपये की लागत से आधुनिक डेयरी प्लांट स्थापित किया जा रहा है। केंद्रीय सहकारिता एवं गृह मंत्री अमित शाह 3 अक्टूबर 2026 को भोपाल से इस प्लांट का डिजिटल भूमि-पूजन करेंगे। उज्जैन में स्थापित होने वाला यह अत्याधुनिक डेयरी प्लांट क्षेत्र में दुग्ध प्रसंस्करण, मूल्यवर्धन और विभिन्न डेयरी उत्पादों के उत्पादन को नई गति देगा। परियोजना की कुल लागत में से 170 करोड़ रुपये राज्य शासन द्वारा अनुदान के रूप में प्रदान किए जाएंगे, जबकि शेष 85 करोड़ रुपये दुग्ध संघ द्वारा ऋण के माध्यम से जुटाए जाएंगे।परियोजना को अगले दो वर्ष में पूर्ण करने का लक्ष्य है। प्रस्तावित प्लांट की शुरुआत 3 लाख लीटर प्रतिदिन दूध प्रसंस्करण क्षमता के साथ होगी। भविष्य में इसकी क्षमता को बढ़ाकर 5 लाख लीटर प्रतिदिन तक किया जा सकेगा। इससे उज्जैन और आसपास के क्षेत्रों में बढ़ती दुग्ध उपलब्धता के साथ प्रसंस्करण क्षमता का विस्तार भी संभव होगा। पैक्ड मिल्क से लेकर घी तक का होगा उत्पादन प्लांट में आधुनिक प्रसंस्करण सुविधाओं के साथ विभिन्न प्रकार के डेयरी उत्पादों का उत्पादन किया जाएगा। इसमें 1.50 लाख लीटर प्रतिदिन पैक्ड मिल्क, 25 हजार लीटर प्रतिदिन दही तथा 10 हजार लीटर प्रतिदिन लस्सी/छाछ के उत्पादन की क्षमता होगी। इसके अलावा 10 मीट्रिक टन प्रतिदिन क्षमता का घी प्लांट भी स्थापित किया जाएगा। मध्यप्रदेश राज्य सहकारी दुग्ध महासंघ के प्रबंध संचालक जयदेव बिस्वास ने कहा, “उज्जैन में आधुनिक डेयरी प्लांट की स्थापना मध्यप्रदेश के डेयरी क्षेत्र के विस्तार की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम है। केंद्रीय गृह एवं सहकारिता मंत्री शाह द्वारा भोपाल से इस परियोजना का डिजिटल भूमि-पूजन किया जाएगा। इस परियोजना से दुग्ध उत्पादकों से प्राप्त दूध का बेहतर प्रसंस्करण और मूल्यवर्धन सुनिश्चित होगा तथा उपभोक्ताओं को गुणवत्तापूर्ण डेयरी उत्पाद उपलब्ध कराने की क्षमता बढ़ेगी।” उन्होंने कहा, “प्लांट को भविष्य में 5 लाख लीटर प्रतिदिन तक विस्तारित करने का प्रबंध किया गया है। इससे उज्जैन एवं आसपास के क्षेत्रों में दुग्ध उत्पादन, संग्रहण, प्रसंस्करण और विपणन की पूरी श्रृंखला को मजबूती मिलेगी तथा ग्रामीण अर्थव्यवस्था को भी गति मिलेगी।” यह परियोजना आधुनिक प्रसंस्करण सुविधाओं के माध्यम से दुग्ध उत्पादकों से प्राप्त दूध के बेहतर उपयोग और मूल्यवर्धन को बढ़ावा देगी। साथ ही क्षेत्र में डेयरी गतिविधियों के विस्तार से ग्रामीण अर्थव्यवस्था को मजबूती मिलने तथा उपभोक्ताओं तक उच्च गुणवत्ता वाले डेयरी उत्पाद पहुंचाने की दिशा में भी यह महत्वपूर्ण पहल साबित होगी।  

अमित शाह के भोपाल दौरे से पहले CM मोहन यादव का बड़ा बयान, ‘नशामुक्त’ MP पर फोकस

 भोपाल  मध्यप्रदेश के मुख्यमंत्री डा. मोहन यादव ने एक बार फिर दोहराया है कि केंद्रीय गृहमंत्री अमित शाह के नेतृत्व में मध्यप्रदेश नक्सलमुक्त हुआ है। इसी के साथ ही हमारा राज्य अब शीघ्र नशामुक्ति की ओर अग्रसर है। अमित शाह शुक्रवार रात को भोपाल पहुंचने वाले हैं, शनिवार को भोपाल में कई कार्यक्रमों में शामिल होंगे। डा. मोहन यादव ने यह बात गांधी जयंती के मौके पर संबोधित करते हुए कही। मोहन यादव ने कहा कि केंद्रीय गृह एवं सहकारिता मंत्री अमित शाह शुक्रवार को मध्यप्रदेश की राजधानी भोपाल आ रहे हैं। इस दौरान राज्य में गोपालक सम्मेलन के माध्यम से दुग्ध उत्पादन को बढ़ावा देने तथा आइसर के माध्यम से हमारी युवा पीढ़ी के कौशल विकास को प्रोत्साहन मिलेगा। स्वामी विवेकानंद जी की प्रतिमा का उद्घाटन समेत विभिन्न विकास कार्यों की सौगात प्रदेश को मिलेगी। राज्य स्तरीय गौपाल सम्मेलन भोपाल में राज्य स्तरीय गौपालक सम्मेलन भोपाल में होगा। इसमें विभिन्न विकास कार्यों का शुभारंभ और भूमिपूजन होगा। दुग्ध उत्पादकों को बोनस राशि का वितरण किया जाएगा। गौपालक दीदियों का सम्मान होगा। वहीं डा. भीमराव अंबेडकर कामधेनु योजना के स्वीकृति पत्र का वितरण किया जाएगा। आजादी के बाद मिल रही है पहचान मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने 2 अक्टूबर को महात्मा गांधी और पूर्व प्रधानमंत्री भारत रत्न लाल बहादुर शास्त्री को नमन किया। इसके बाद उन्होंने मीडिया से कहा कि हम सबका सौभाग्य है कि आजादी के बाद प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के नेतृत्व में भारत का लोकतंत्र पूरी दुनिया में सर उठाकर अपनी पहचान बना रहा है। प्रधानमंत्री मोदी महात्मा गांधी की भावनाओं और स्वदेशी के विचार को आगे बढ़ाते हुए देश को आत्मनिर्भरता की दिशा में ले जा रहे हैं। कांग्रेस ने अंग्रेजों की सोच को आगे बढ़ाया उन्होंने कहा कि लंबे समय तक देश पर कांग्रेस ने शासन किया, लेकिन उस दौर में अंग्रेजों की सोच और उनकी व्यवस्थाओं की विरासत को ही आगे बढ़ाया गया। आज प्रधानमंत्री के नेतृत्व में हम "मेक इन इंडिया" और "मेड इन इंडिया" की भावना के साथ स्वदेशी को आगे बढ़ाते हुए आत्मनिर्भर भारत के संकल्प को साकार कर रहे हैं। यह भी हमारे लिए गर्व का विषय है कि आज हम देश की आजादी के दो नायकों की जयंती मना रहे हैं। कैप्टन मछार ने किया सीना गर्व से चौड़ा भारतीय पायलट कैप्टन स्मित मच्छार ने इजरायल के यात्री विमान में अपनी जान की बाजी लगाकर यात्रियों की जान बचाने का अद्भुत साहस दिखाया। उनके इस गौरवपूर्ण कार्य से प्रत्येक भारतीय का सीना गर्व से चौड़ा हो गया है। उन्होंने न केवल यात्रियों की जान बचाई, बल्कि आतंकवादियों के नापाक मंसूबों को भी तार-तार करने का काम किया। यशस्वी प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने भी कैप्टन स्मित मछार को बधाई दी है। हम सभी देश और प्रदेशवासी भी उनके इस अदम्य साहस, शौर्य और मानवता की भावना को नमन करते हैं तथा उन्हें हार्दिक बधाई देते हैं।

महानदी हमें बांटने वाली नहीं, दोनों राज्यों को जोड़ने वाली जीवनधारा : समाधान ऐसा हो जिसमें दोनों राज्यों की जीत हो – मुख्यमंत्री साय

महानदी विवाद के समाधान की दिशा में बड़ी पहल केंद्रीय गृह एवं सहकारिता मंत्री अमित शाह की अध्यक्षता में छत्तीसगढ़ और ओडिशा की उच्चस्तरीय बैठक महानदी हमें बांटने वाली नहीं, दोनों राज्यों को जोड़ने वाली जीवनधारा : समाधान ऐसा हो जिसमें दोनों राज्यों की जीत हो – मुख्यमंत्री साय संवाद, वैज्ञानिक आकलन और आपसी सहमति से न्यायपूर्ण एवं स्थायी समाधान के लिए छत्तीसगढ़ पूरी तरह प्रतिबद्ध : मुख्यमंत्री साय दोनों राज्यों के किसानों, आम नागरिकों और आने वाली पीढ़ियों के हितों को ध्यान में रखकर आगे बढ़ने पर जोर रायपुर   छत्तीसगढ़ और ओडिशा के बीच लंबे समय से चले आ रहे महानदी जल विवाद के सौहार्दपूर्ण और स्थायी समाधान की दिशा में आज नई दिल्ली में महत्वपूर्ण पहल हुई। केंद्रीय गृह एवं सहकारिता मंत्री अमित शाह की अध्यक्षता में कर्तव्य भवन में आयोजित उच्चस्तरीय बैठक में छत्तीसगढ़ के मुख्यमंत्री विष्णु देव साय और ओडिशा के मुख्यमंत्री मोहन चरण माझी ने महानदी से जुड़े विभिन्न विषयों पर विस्तार से चर्चा की और अपने-अपने राज्यों का पक्ष रखा। बैठक में केंद्रीय जल शक्ति मंत्री सी.आर. पाटिल, केंद्रीय जल आयोग के अध्यक्ष, छत्तीसगढ़ और ओडिशा के मुख्य सचिव सहित केंद्रीय जल शक्ति मंत्रालय, केंद्रीय जल आयोग तथा दोनों राज्यों के वरिष्ठ अधिकारी उपस्थित थे। मुख्यमंत्री विष्णु देव साय ने बैठक में छत्तीसगढ़ का पक्ष रखते हुए कहा कि महानदी केवल जल का स्रोत नहीं, बल्कि दोनों राज्यों की सभ्यता, संस्कृति, कृषि और जनजीवन से जुड़ी जीवनधारा है। महानदी छत्तीसगढ़ और ओडिशा को बांटने वाली नहीं, बल्कि दोनों राज्यों को जोड़ने वाली नदी है। इसलिए इसका समाधान भी प्रतिस्पर्धा या टकराव के बजाय सहयोग, विश्वास और सहमति की भावना से निकलना चाहिए। मुख्यमंत्री साय ने कहा कि हमारा प्रयास ऐसा समाधान निकालने का होना चाहिए जिसमें दोनों राज्यों और वहां के नागरिकों के हित सुरक्षित हों। छत्तीसगढ़ न्यायपूर्ण, निष्पक्ष, वैज्ञानिक, पारदर्शी और दीर्घकालिक समाधान का पक्षधर है। ऐसा समाधान दोनों राज्यों के किसानों, आम नागरिकों और आने वाली पीढ़ियों के हितों को ध्यान में रखकर तैयार होना चाहिए। मुख्यमंत्री साय ने कहा कि महानदी का उद्गम छत्तीसगढ़ में होता है और इसके जलग्रहण क्षेत्र का बड़ा हिस्सा प्रदेश में स्थित है। राज्य में कृषि, सिंचाई, पेयजल और विशेष रूप से आदिवासी एवं ग्रामीण अंचलों की विकास आवश्यकताएं महानदी से जुड़ी हुई हैं। इसलिए किसी भी स्थायी समाधान में छत्तीसगढ़ की इन वास्तविक आवश्यकताओं का समुचित ध्यान रखा जाना आवश्यक है। उन्होंने स्पष्ट किया कि छत्तीसगढ़ अपने हितों की बात करते हुए ओडिशा की आवश्यकताओं और हितों का भी पूरा सम्मान करता है। हीराकुंड ओडिशा की जीवनरेखा है और छत्तीसगढ़ उसके महत्व को भलीभांति समझता है। मुख्यमंत्री ने कहा कि छत्तीसगढ़ हीराकुंड जलाशय के हितों और उसके सुचारु संचालन के लिए आवश्यक सहयोग की भावना के साथ आगे बढ़ने को तैयार है। मुख्यमंत्री साय ने कहा कि जल जैसे महत्वपूर्ण प्राकृतिक संसाधन को  साझी समृद्धि का माध्यम बनाना चाहिए। दोनों राज्यों के बीच ऐसा तंत्र विकसित हो, जिसमें जल उपलब्धता, आवश्यकता और उपयोग से संबंधित तथ्य पारदर्शी ढंग से साझा हों और वैज्ञानिक आधार पर निर्णय लिए जाएं। केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह की पहल से समाधान की उम्मीद मुख्यमंत्री साय ने महानदी जल विवाद के समाधान के लिए केंद्रीय गृह एवं सहकारिता मंत्री अमित शाह द्वारा की गई पहल का स्वागत करते हुए कहा कि केंद्र सरकार की मध्यस्थता में दोनों राज्यों के बीच सकारात्मक संवाद से आपसी सहमति का रास्ता निकलने की उम्मीद मजबूत हुई है। उन्होंने सरदार वल्लभभाई पटेल के राष्ट्रीय एकीकरण में योगदान का स्मरण करते हुए कहा कि स्वतंत्रता के बाद सरदार पटेल ने देश को एक सूत्र में पिरोने में ऐतिहासिक भूमिका निभाई। आज राज्यों के बीच वर्षों से लंबित विषयों को संवाद और सहमति के माध्यम से समाधान की दिशा में आगे बढ़ाने के प्रयास भी सहकारी संघवाद और राष्ट्रीय एकता की इसी भावना को मजबूत करते हैं। मुख्यमंत्री ने कहा कि राज्यों के बीच जल संबंधी प्रश्नों का सौहार्दपूर्ण समाधान राज्यों के बीच विश्वास, सहयोग और भावनात्मक जुड़ाव को भी मजबूत करता है। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के नेतृत्व में सहकारी संघवाद की भावना के अनुरूप राज्यों और केंद्र के बीच समन्वय से जटिल विषयों पर समाधान की दिशा में आगे बढ़ने का वातावरण बना है। संवाद और वैज्ञानिक तथ्यों से निकलेगा टिकाऊ समाधान मुख्यमंत्री साय ने कहा कि महानदी से संबंधित विषय में भावनाओं के साथ वैज्ञानिक तथ्यों का भी उतना ही महत्व है। छत्तीसगढ़ को केंद्रीय जल शक्ति मंत्रालय की मध्यस्थता तथा केंद्रीय जल आयोग के निष्पक्ष, वैज्ञानिक और पारदर्शी तकनीकी आकलन पर पूरा भरोसा है। उन्होंने कहा कि जल उपलब्धता, वर्तमान एवं भविष्य की आवश्यकताओं, सिंचाई, पेयजल, पर्यावरणीय जरूरतों और दोनों राज्यों की विकास संबंधी आवश्यकताओं का समग्र अध्ययन करते हुए आगे बढ़ना चाहिए। तकनीकी स्तर पर तथ्य स्पष्ट होंगे और राजनीतिक स्तर पर संवाद एवं विश्वास कायम रहेगा तो निश्चित रूप से ऐसा समाधान निकल सकता है, जो दोनों राज्यों को स्वीकार्य हो और आने वाली पीढ़ियों के हित में भी हो। मुख्यमंत्री ने कहा कि दोनों राज्यों के परामर्श और केंद्र सरकार की मध्यस्थता से जो न्यायसंगत एवं व्यावहारिक समाधान सामने आएगा, छत्तीसगढ़ उसे सकारात्मक भावना से आगे बढ़ाने में पूरा सहयोग करेगा। बस्तर की तरह दृढ़ इच्छाशक्ति और समन्वय से समाधान की दिशा में बढ़ने का विश्वास मुख्यमंत्री साय ने कहा कि छत्तीसगढ़ ने केंद्र और राज्य के बीच मजबूत समन्वय के सकारात्मक परिणामों को बस्तर में करीब से देखा है। नक्सलवाद जैसी दशकों पुरानी चुनौती से निपटने के लिए सुरक्षा, विकास और जनविश्वास को साथ लेकर जिस समन्वित दृष्टिकोण से काम किया गया, उससे बस्तर में व्यापक बदलाव आया है। उन्होंने विश्वास व्यक्त किया कि जटिल और लंबे समय से लंबित विषयों में भी जब स्पष्ट इच्छाशक्ति, निरंतर संवाद और सभी पक्षों के बीच विश्वास हो, तो समाधान की दिशा में निर्णायक प्रगति संभव है। महानदी के विषय पर भी इसी सकारात्मक भावना से दोनों राज्य आगे बढ़ सकते हैं। महानदी विवाद नहीं, सहयोग की धारा बने : मुख्यमंत्री साय मुख्यमंत्री साय ने छत्तीसगढ़ और ओडिशा के बीच गहरे सामाजिक, सांस्कृतिक और ऐतिहासिक संबंधों का उल्लेख करते हुए कहा कि दोनों पड़ोसी राज्यों के लोगों के बीच आत्मीय संबंध सदियों पुराने हैं। दोनों प्रदेशों की जनजातीय संस्कृति, परंपराओं और जीवनशैली … Read more

अमित शाह 3 अक्टूबर को भोपाल में करेंगे विकास कार्यों का शुभारंभ, गोपालक दीदियों का सम्मान

सेवा संकल्प अभियान अंतर्गत केंद्रीय गृह एवं सहकारिता मंत्री अमित शाह 3 अक्टूबर को आएंगे भोपाल राज्य स्तरीय गोपालक सम्मेलन में पशुपालक दीदियों के सम्मान के साथ विभिन्न विकास कार्यों का करेंगे शुभारंभ व अनुदान राशि का वितरण लखपति गोपालक दीदी योजना पशुपालन के माध्यम से ग्रामीण महिलाओं की बढ़ेगी आय भोपाल  ‘सेवा संकल्प अभियान' के अंतर्गत केंद्रीय गृह एवं सहकारिता मंत्री शाह 3 अक्टूबर को भोपाल आएंगे। वे भोपाल के भेल दशहरा मैदान में आयोजित ‘राज्य स्तरीय गोपालक सम्मेलन' में शामिल होकर उत्कृष्ट कार्य करने वाली गोपालक दीदियों को सम्मानित करेंगे और 'डॉ. भीमराव अंबेडकर कामधेनु योजना' के स्वीकृति पत्रों का वितरण करेंगे। इसके साथ ही वे प्रदेशवासियों को डेयरी प्रसंस्करण, दुग्ध संयंत्र और गुणवत्ता जांच प्रयोगशाला से जुड़ी विभिन्न विकास सौगातों की सौगात देंगे। सम्मेलन में केंद्रीय मंत्री शाह 255 करोड़ रुपये की लागत से उज्जैन में बनने वाले नए डेयरी प्लांट का भूमिपूजन करेंगे। इसके अतिरिक्त, 16.80 करोड़ रुपये की लागत से निर्मित फर्मेंटेड प्रोडक्ट डेयरी प्लांट और एमपी स्टेट को-ऑपरेटिव डेयरी फेडरेशन भोपाल में ‘नेशनल प्रोग्राम फॉर डेयरी डेवलपमेंट' के तहत 12.40 करोड़ रुपये की लागत से बनी अत्याधुनिक प्रयोगशाला एंव मिनी डेयरी संयंत्र शिवपुरी का शुभारंभ किया जाएगा। कार्यक्रम में भोपाल और इंदौर दुग्ध संघ के दुग्ध उत्पादकों को लगभग 12 करोड़ रुपये की बोनस राशि वितरित की जाएगी तथा ‘कृषक कल्याण वर्ष' के अंतर्गत पशुपालन एवं डेयरी विभाग द्वारा विशेष प्रदर्शनी भी लगायी जाएगी। प्रदेश सरकार द्वारा पंजीकृत एवं संचालित गौशालाओं में संरक्षित गोवंश के रखरखाव एवं भरण-पोषण के लिए माह जुलाई और अगस्त 2026 की 101 करोड़ रुपये से अधिक की अनुदान राशि ऑनलाइन डीबीटी के माध्यम से सीधे खातों में हस्तांतरित की जाएगी। यह राशि गौशालाओं में दर्ज गोवंश के समुचित व्यवस्थापन, आहार एवं भरण-पोषण के लिए दी जाती है। राज्य सरकार द्वारा पंजीकृत एवं संचालित गौशालाओं में संरक्षित गोवंश के लिए 40 रुपये प्रति गोवंश प्रतिदिन की दर से अनुदान राशि उपलब्ध कराई जाती है। महिला सशक्तिकरण और ग्रामीण अर्थव्यवस्था को मिलेगा संबल लखपति गोपालक दीदी योजना पशुपालन से जुड़ी ग्रामीण महिलाओं को आर्थिक रूप से सशक्त बनाने की दिशा में महत्वपूर्ण पहल है। बेहतर आनुवंशिक क्षमता वाले पशुओं के माध्यम से दुग्ध उत्पादन में वृद्धि, अतिरिक्त आय के अवसर और पशुपालन की उत्पादकता बढ़ने से ग्रामीण अर्थव्यवस्था को भी मजबूती मिलेगी। योजना का उद्देश्य पशुपालन को केवल पारंपरिक आजीविका तक सीमित न रखते हुए इसे ग्रामीण महिलाओं की आर्थिक आत्मनिर्भरता और समृद्धि का माध्यम बनाना है। प्रदेश सरकार द्वारा ग्रामीण महिलाओं को पशुपालन के माध्यम से आर्थिक रूप से आत्मनिर्भर बनाने और दुग्ध उत्पादन बढ़ाने के उद्देश्य से ‘लखपति गोपालक दीदी योजना’ का संचालन किया जा रहा है। “शून्य पूंजीगत निवेश, अधिकतम आनुवंशिक एवं आर्थिक लाभ” के मूल मंत्र पर आधारित इस योजना से प्रदेश की 2 लाख से अधिक महिलाएं जुड़ी हुई हैं। योजना के तहत अवर्णित (नॉन-डिस्क्रिप्ट) नस्ल की गायों और भैंसों मंप उच्च नस्ल के सीमन से कृत्रिम गर्भाधान को बढ़ावा दिया जा रहा है, जिससे पशुपालकों को बिना अतिरिक्त खर्च के बेहतर आनुवंशिक क्षमता वाले पशु प्राप्त हो रहे हैं। उच्च नस्ल के कृत्रिम गर्भाधान से बढ़ेगा दुग्ध उत्पादन उच्च नस्ल के कृत्रिम गर्भाधान से उत्पन्न होने वाली F1 नस्ल की बछिया अपनी माता की तुलना में लगभग 2.5 से 3 गुना अधिक दूध देने में सक्षम होती है। इससे पशुपालक परिवारों को एक लैक्टेशन में प्रति बछिया 50 से 60 हजार रुपये की अतिरिक्त आय होती है। पूरे जीवनकाल (5 से 6 लैक्टेशन) के दौरान एक बछिया से लगभग 2.5 से 3 लाख रुपये तक की अतिरिक्त कमाई की जा सकेगी। उदाहरण के तौर पर यदि किसी परिवार के पास ऐसी 3 से 4 बछियां होती हैं, तो उनका कुल अतिरिक्त आर्थिक लाभ 10 लाख रुपये से अधिक हो सकता है। यह योजना पशुपालन को पारंपरिक आजीविका से आगे बढ़ाकर ग्रामीण महिलाओं की समृद्धि का मुख्य जरिया बना रही है।