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बंगाल में UCC और 45 दिन में सातवां वेतन, महिलाओं को 3000 रुपये की सहायता… बीजेपी का मेनिफेस्टो जारी किया अमित शाह ने

कोलकाता भारतीय जनता पार्टी ने पश्चिम बंगाल विधानसभा चुनाव के लिए संकल्प पत्र (घोषणापत्र) जारी कर दिया है. गृह मंत्री अमित शाह ने बीजेपी का संकल्प पत्र जारी किया. इस मौके पर अमित शाह ने कहा- ‘पिछला 15 साल बंगाल की जनता के लिए डराने वाले रहे. कम्युनिष्ट शाषण से मुक्ति के लिए बंगाल की जनता ने ममता दीदी को सरकार सौंपा था. पांच साल कम पड़े ऐसा कहकर दूसरा मेंडेट भी प्राप्त किया. इसके बाद अपने सिंडिकेट, गुंडे और घुसपैठिए की मदद से तीसरी बार भी बहुमत हासिल किया. मगर इन 15 साल में बंगाल की जनता ने जिन आशाओं के साथ सत्ता सौंपी थी वो भयभित है, निराश है जनता और मन से परिवर्तन चाहती है।  अमित शाह ने आगे कहा कि पिछले 15 साल में बीजेपी ने रचनात्मक विपक्ष के रूप में मान्यता हासिल की है. आज हम पश्चिम बंगाल विधानसभा में मुख्य विपक्षी दल के रूप में काम कर रहे हैं. इन्हीं 10 सालों में पूरे देश में नरेंद्र मोदी के नेतृत्व में लोकाभिमुक्त शासन कैसे हो सकता है इसका एक उत्कृष्ट उदाहरण स्थापित किया है. ना केवल देश की सारी समस्याओं का निराकरण करने में सफलता प्राप्त करना. इसके अलावा पूरी दुनिया में विकास की रेस में पिछड़े देश को सारे घाटे की भरपाई करते हुए फ्रंट रनर के रूप में स्थापित करने का काम नरेंद्र मोदी ने किया है।  शाह ने आगे कहा कि कश्मीर से कन्याकुमारी और द्वारका से कामख्या तक फैले देश में हर तबके, हर वर्ग, हर जाति के लोगों की सभी आकांक्षाओं को संयोज कर, एक मजबूत शिक्षित और विकसित भारत का रूप देश की जनता के सामने रखा है. इसके लिए हमने 12 साल में अत्यंत प्रयास किया है. पिछले दिनों हमने बंगाल की जनता के सामने चार्चशीट रखी थी, जो इस बात की परिचायक थी कि ममता बनर्जी की सरकार को लेकर पूरे बंगाल में घोर निराशा व्याप्त है. वहीं बीजेपी का संकल्प पत्र भरोसे की शपथ है. हमारा संकल्प पत्र बंगाल का विकसित बनाने का रोडमैप है. बंगाली नये वर्ष के दिन इस संकल्प के हमारी यात्रा प्रचार के जरिए शुरू होगी और गुरुदेव की जन्म जयंती के आसपास ही भय के कोहरे से बाहर आकर भरोसे का शासन बंगाल में प्रस्थापित करेगी. हमें पूरा विश्वास है कि बंगाल की जनता हमें पांच साल सेवा करने का मौका देगी।  बीजेपी के संकल्प पत्र की जरूरी घोषणाएं- :     हमारी सरकार घुसपैठ के प्रति जीरो टॉलरेंस के साथ आगे बढ़ेगी. मैं बंगाल की जनता को भरोसा दिलाना चाहता हूं कि एक बार बीजेपी की पूर्ण बहुमत वाली सरकार बनाइए हम डिटेक्ट, डिलीट और डिपोर्ट पॉलिसी के तहत चुन-चुनकर एक-एक घुसपैठिए को बंगाल के बाहर निकालने का काम करेंगे.     सभी सरकारी कर्मचारियों और पेंशन भागियों के लिए डीए सुनिश्चित किया जाएगा. 45 दिन के अंदर 7वां वेतन आयोग लागू किया जाएगा.     मध्यम वर्ग, लोअर मिडिल क्लास और गरीब में महिलाओं की हालत बहुत दयनीय है. बीजेपी की सरकार बनी तो हर माता-बहन के बैंक खाते में हर महीने एक से पांच तारीख तक 3 हजार रुपये ट्रांसफर करेगी.     नरेंद्र मोदी ढेर सारी योजनाएं जिसमें आयुष्मान भारत समेत तमाम योजनाओं को बंगाल में लागू करेंगे.     महिलाओं के स्वास्थ्य के लिए मुफ्त एनबीटी टीकाकरण, कैंसर की स्क्रिनिंग, हर प्रसूता को इंट्यूशनल डिलिवरी का फायदा हम सुनिश्चत करेंगे.     हम छह माह के अंदर पश्चिम बंगाल के अंदर UCC कॉमन सिविल कोड लागू करेंगे. हम बंगाल में सभी नागरिकों के लिए एक ही कानून लागू करेंगे.     हम सुनिश्चित करेंगे कि बंगाल सीमा के माध्यम से भारत के बाहर एक भी गौर तस्करी ना हो.     एक करोड़ स्वरोजागर और रोजगार पैदा करेंगे. इसके लिए इंडस्ट्री लगाएंगे, स्टॉर्टअप को बढ़ावा देंगे.     बेरोजगार युवाओं को 3 हजार रुपये मासिक सहायता दी जाएगी.     टीएमसी के 15 साल के भ्रष्टाचार को लेकर श्वेतपत्र जारी करेंगे. भ्रष्टाचारियों को जेल की सलाखों में भेजेंगे.     जितनी भी राजनीतिक हिंसा हुई है, चाहे वो किसी भी दल के खिलाफ हुई हों, उसकी जांच के लिए सुप्रीम कोर्ट के रिटायर्ड जज की निगरानी में कमिशन बनाकर सारे केस को त्वरित गति से अंजाम तक पहुंचाया जाएगा।      काननू और व्यवस्था के ऊपर एक श्वेतपत्र जारी करेंगे. इसके दो हिस्से होंगे. पहले पार्ट में पिछले 15 साल में किस प्रकार से कानून व्यवस्था को कैसे पाताल लोक तक गिराया गया. दूसरे पार्ट में कानून व्यवस्थ को सुनिश्चित करने का तरीका बताएंगे.     तीन श्वेतपत्र भ्रष्टाचार के खिलाफ, राजनीतिक हिंसा के खिलाफ और कानून और व्यवस्था को रीस्टोर करने के लिए तीनों श्वेतपत्र बंगाल की बहुत सारी समस्याओं का एक साथ समाधान करेंगे. ऐसा बीजेपी को भरोसा है।      महिला सुरक्षा के लिए बंगाल में ही पुलिस बटालियन, दुर्गा सुरक्षा स्क्वाड और आत्म रक्षा प्रशिक्षण के लिए एक अलग से स्क्वाड बनाया जाएगा।      धान, आलू और आम की खेती के लिए किसानों को उनकी उपज का उचित मूल्य मिल पाए इसके लिए एक योजना लेकर आएंगे. हर किसान का एक-एक दाना धान बंगाल सरकार 3100 रुपये की दर से खरीद लेगी, जिससे धान किसानों को सस्ते दरों पर अपनी फसल ना बेचनी पड़े.     बंगाल की अर्थव्यवस्था को सशक्त बनाने के लिए पहले सौ दिनों में एक रोडमैप लेकर आएंगे.     बंगाल को ब्लयू इकोनॉमी का प्रमुख निर्यातक केंद्र बनाने के लिए जरूरी इंफ्रास्ट्रक्चर को बढ़ाने के लिए एक योजना दी जाएगी.     पुराने चाय बागानों को पुर्नजीवन और दार्जलिंग टी ब्रांड को विश्व प्रसिद्ध बनाने के लिए हम एक कमिशन बनाएंगे. यह कमिशन चाय बागानों के श्रमिक, चाय के उचित मूल्य और विश्व के बाजार में चाय के निर्णात की भावनाओं को तलाशेगा. यह रिपोर्ट एक साल में सरकार को सौंपा जाएगा, ताकि बाकी बचे चार साल में चाय बागानों को खुशहाल बनाया जा सके.     जूट उद्योग के आधुनिकीकरण के लिए भारत सरकार की योजनाओं को हम बंगाल में नीचे तक लागू करवाएंगे.     उत्तर बंगाल के अलग-अलग जिलों में एम्स, आईआईएम, आईआईटी और फैशन डिजाइनिंग के संस्थान खोले जाएंगे.  

डॉ. रमन सिंह ने केन्द्रीय गृह मंत्री अमित शाह को भेजा पत्र, जानिए क्या है मामला

विधानसभा अध्यक्ष डॉ रमन सिंह ने केन्द्रीय गृह मंत्री अमित शाह को लिखा पत्र देश की रियासतों का भारत में विलय करने वाले सरदार पटेल "लौह पुरुष" और नक्सलवाद से देश को मुक्ति दिलाने वाले अमित शाह को लिखा "साध्य पुरुष" रायपुर  आज विधानसभा अध्यक्ष और पूर्व मुख्यमंत्री डॉ रमन सिंह ने केंद्रीय गृहमंत्री अमित शाह को पत्र लिखकर नक्सलवाद से मुक्ति पर जताया उनका आभार उन्होंने पत्र में लिखा कि 31 मार्च 2026 का यह ऐतिहासिक दिन राष्ट्र के लिए एक नई आशा और नई सुबह लेकर आया है। माननीय प्रधानमंत्री श्री नरेंद्र मोदी जी के नेतृत्व और आपके दृढ़ संकल्प से दशकों से नक्सलवाद के कष्ट झेल रही भारत भूमि अब अलोकतांत्रिक विचारधारा से पूरी तरह मुक्त हुई है। संविधान विरोधी शक्तियों ने दशकों से भारत भूमि को भीतर से चोट पहुंचाई है। माओ और लेनिन जैसी लोकतंत्र विरोधी विचारधारा ने नक्सलबाड़ी से लेकर बस्तर तक हजारों निर्दोष लोगों को अपना शिकार बनाया, विकास को बाधित कर आदिवासियों को मुख्यधारा से अलग करने का काम किया और इसका परिणाम हमनें छत्तीसगढ़ की धरती पर देखा है। जिस छत्तीसगढ़ में धान का कटोरा बनने का सामर्थ्य था, उसे भुखमरी और पलायन के दौर से गुजरना पड़ा। इस परिस्थिति के लिए जितनी जिम्मेदार नक्सलवाद की विचारधारा थी, उतनी ही जिम्मेदार तत्कालीन केंद्र सरकार भी रही। उन्होंने आगे लिखा कि मुझे याद है जब मैं मुख्यमंत्री के रूप में राष्ट्रीय स्तर की बैठकों में जाया करता था, तब यूपीए सरकार के मंत्री नक्सलवाद को राज्य की समस्या मानकर स्वयं को किनारे कर लेते थे हालांकि बाद में UPA सरकार के प्रधानमंत्री रहे श्री मनमोहन सिंह जी ने स्पष्ट रूप से यह माना कि नक्सलवाद किसी राज्य की समस्या नहीं बल्कि राष्ट्र की समस्या है और देश की आंतरिक सुरक्षा के लिए बड़ा खतरा है। वो इसे समस्या तो मानते थे लेकिन समाधान नहीं करते थे। छत्तीसगढ़ से जब सलवा जुडूम के तौर पर एक स्वफूर्त आंदोलन उठा तब महेंद्र कर्मा जैसे बस्तर के कांग्रेसी नेताओं ने भी नक्सलवाद का पुरजोर विरोध किया लेकिन उस दौर की केंद्र सरकार ने कभी खुलकर उनका समर्थन नहीं किया। विधानसभा अध्यक्ष डॉ रमन सिंह ने आगे लिखा कि मैं मानता हूं कि यदि उस कालखंड में देश को माननीय प्रधानमंत्री श्री नरेंद्र मोदी जी का नेतृत्व मिला होता और गृहमंत्री के रूप में आपका सहयोग प्राप्त होता तो नक्सलवाद मुक्त भारत के लक्ष्य को हम तब ही पूरा कर लेते लेकिन देर से ही सही पर जब 2014 में माननीय प्रधानमंत्री श्री नरेंद्र मोदी जी ने देश के प्रधानमंत्री पद का दायित्व संभाला उसी दिन से नक्सलवाद के समूल नाश की योजना प्रारंभ हुई और जब 2019 में आप केंद्रीय गृहमंत्री के तौर पर सामने आए तब हम छत्तीसगढ़वासियों का यह विश्वास दृढ़ हो गया कि अब सिर्फ छत्तीसगढ़ ही नहीं बल्कि पूरा देश नक्सलवाद के दंश से मुक्त होगा। 24 अगस्त 2024 को जब आपने देश से नक्सलवाद के समूल नाश की घोषणा की तब मेरे मन में एक बार यह विचार आया कि इतने कम समय में दशकों की समस्या का समाधान कैसे होगा, कहीं आपने इस घोषणा में जल्दबाजी तो नहीं कर दी है लेकिन जब मैंने पीछे पलट कर 5 अगस्त 2019 का वह दिन याद किया जब आपने आजादी के बाद से चली आ रही कश्मीर में धारा 370 की समस्या का किस प्रकार समाधान किया था, तो मेरा विश्वास और दृढ़ हो गया कि यदि देश से नक्सलवाद कोई समाप्त कर सकता है तो वह माननीय प्रधानमंत्री श्री नरेंद्र मोदी जी के नेतृत्व में केवल आप ही कर सकते हैं। आज आपके संकल्प से जब देश से नक्सलवाद समापन का लक्ष्य पूरा हो रहा है तब मैं विशेष रूप से यह कहना चाहता हूं कि इस लक्ष्य की पूर्ति आपकी दृढ़ इच्छाशक्ति, प्रबल रणनीति और संपूर्ण सहयोग के बिना कभी संभव नहीं हो सकती थी। आज मैं पूरे जिम्मेदारी के साथ यह बात लिख रहा हूं कि आजादी के नाद 562 रियासतों का भारत में विलय कराने वाले "लौह पुरुष" सरदार वल्लभ भाई पटेल के उपरांत यदि देश को कोई सबसे मजबूत गृहमंत्री मिला है तो वह आप "साध्य पुरुष" हैं। जिन्होंने राष्ट्रहित में हर असंभव कार्य को संभव किया है, सदियों के बाद जब भारत के इतिहास का उल्लेख होगा तब देश को आंतरिक रूप से सुरक्षित करने में आपके योगदान को स्वर्णिम अक्षरों में अंकित किया जाएगा। अंत में उन्होंने लिखा कि अब जब बस्तर में नक्सलवाद खत्म हो चुका है, यहां विकास का नया दौर शुरू होगा। हमारे आदिवासी भाई-बहनों को रोजगार के बेहतर अवसर मिलेंगे और युवा वर्ग को शिक्षा व कौशल विकास के जरिए आगे बढ़ने का मौका मिलेगा। अब बस्तर के लोग आत्मनिर्भर बनकर सम्मान के साथ जीवन जी सकेंगे और क्षेत्र तेजी से प्रगति की राह पर आगे बढ़ेगा। मैं माननीय प्रधानमंत्री श्री नरेंद्र मोदी जी के नेतृत्व और राष्ट्र के प्रति उनके समर्पण को प्रणाम करते हुए आपके योगदान, आपकी दृढ़ इच्छाशक्ति और राष्ट्र के नव आरंभ पर हृदय से शुभकामनाएं व्यक्त करता हूं और छत्तीसगढ़ की 3 करोड़ जनता की तरफ से आपका आभार व्यक्त करता हूं कि आपने हमारे छत्तीसगढ़ को न सिर्फ नक्सलवाद से मुक्ति दिलाई है बल्कि अब विकास की ओर एक नव दिशा में आगे बढ़ने में मार्ग प्रशस्त किया है।

अमित शाह का आरोप: कांग्रेस ने नक्सलवादियों को संरक्षण दिया, बघेल ने कहा- यह सरासर झूठ है

रायपुर  केंद्रीय गृहमंत्री अमित शाह ने 31 मार्च 2026 को नक्सलवाद के समूह खात्मे का लक्ष्य दिया था और एक दिन पहले संसद से उन्होंने कहा- ''पूरी प्रक्रिया औपचारिक रूप से पूरी होने के बाद देश को सूचित किया जाएगा लेकिन मैं ऐसा बोल सकता हूं कि हम नक्सलमुक्त हो गए हैं।'' उन्होंने आगे कहा- मोदी सरकार की सबसे बडी उपलबद्धि नक्सलमुक्त भारत है। साथ ही आरोप लगाया कि यह काम दो साल पहले ही हो गया होता अगर कांग्रेस साथ देती। छत्तीसगढ़ की तत्कालीन कांग्रेस सरकार ने साथ दिया होता तो 2024 में नक्सलवाद का सफाया हो सकता था। लोकसभा में दिया जवाब सोमवार को लोकसभा में देश से नक्सलवाद पर चर्चा का जवाब देते हुए उन्होंने कहा कि इसके पीछे कांग्रेस की वामपंथी विचारधारा जिम्मेदार है। उन्होंने इस दौरान इंदिरा गांधी से लेकर सोनिया गांधी, राहुल गांधी, पूर्व पीएम मनमोहन सिंह व पूर्व गृह मंत्री पी चिंदबरम के नक्सलवादियों को किसी न किसी रूप में प्रश्रय देने के लिए उठाए गए कदमों का जिक्र किया। शाह के भाषण की 6 बड़ी बातें: 1.बस्तर से नक्सलवाद पूरी तरह खत्म: बस्तर से नक्सलवाद लगभग पूरी तरह खत्म हो चुका है। हर एक गांव में स्कूल खोलने के लिए अभियान चलाया गया। हर गांव में राशन की दुकान, हर तहसील और पंचायत में प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्र (PHC) और सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र (CHC) स्थापित किए गए हैं। लोगों को आधार कार्ड और राशन कार्ड जारी किए गए हैं। उन्हें पांच किलोग्राम अनाज मिल रहा है। 2. नक्सलवाद की वकालत करने वालों से सवाल: जो नक्सलवाद की वकालत कर रहे थे, उनसे पूछना चाहता हूं कि आदिवासियों के पास अब तक विकास क्यों नहीं पहुंचा। बस्तर के लोग इसलिए पीछे रह गए, क्योंकि इस क्षेत्र पर 'लाल आतंक' का साया मंडरा रहा था। आज वह साया हट गया है और बस्तर अब विकास के पथ पर अग्रसर है। 3. 60 साल तो कांग्रेस सरकार में रही: 70 में से 60 साल कांग्रेस की सरकार रही। आपने क्यों नहीं किया विकास। आज आप हिसाब मांग रहे हो। इंदिरा गांधी माओवादी विचारधारा की गिरफ्त में थीं। उनके कार्यकाल में नक्सलवाड़ी से शुरू हुआ आंदोलन 12 राज्यों, 17 प्रतिशत भू-भाग 10 प्रतिशत से ज्यादा आबादी में फैल गया। 4. मनमोहन ने कहा था- माओवादी देश की सबसे बड़ी समस्या : प्रधानमंत्री मनमोहन सिंह ने स्वीकारा था कि जम्मू-कश्मीर और नॉर्थ ईस्ट की तुलना में देश की आंतरिक सुरक्षा में सबसे बड़ी समस्या माओवादी है। 2014 में बदलाव हुआ। धारा 370 हटी, 35-ए हटा, राम मंदिर बना, CAA कानून आ गया है, विधायी मंडलों में महिलाओं को 33% आरक्षण मिल गया है। 5. नक्सलियों की तुलना भगत सिंह की, ये क्या हिमाकत है : कुछ लोगों ने भगत सिंह और भगवान बिरसा मुंडा से तुलना कर दी। ये क्या हिमाकत है। भगत सिंह और बिरसा मुंडा अंग्रेजों से लड़े और आप इनकी तुलना संविधान तोड़कर हथियार हाथ में लेकर निर्दोषों की हत्या करने वालों से कर रहे हैं। इनको अपनों का भी खून बहाने से परहेज नहीं है। 6.कुछ लोगों की मानवता सिर्फ हथियार उठाने वालों के लिए: मैं उन ‘अर्बन नक्सलियों’ से एक सवाल पूछना चाहता हूं, जो इन लोगों के समर्थन में सामने आए हैं। वे कहते हैं कि नक्सली न्याय के लिए लड़ रहे हैं, इसलिए उन्हें मारा नहीं जाना चाहिए। उनसे सहानुभूति रखनी चाहिए। ऐसा लगता है कि आपकी मानवता सिर्फ संविधान का उल्लंघन करने वालों और हथियार उठाने वालों के लिए हैं। यह उन आम नागरिकों तक नहीं पहुंचती, जो इन्हीं हथियारों से मारे जा रहे हैं। चर्चा में कई सदस्यों ने भाग लिया सोमवार को लोकसभा में नियम 193 के तहत वामपंथी उग्रवाद से देश को मुक्त कराने के विषय पर रखी गई चर्चा में कई सदस्यों ने भाग लिया था। करीब छह घंटे तक चली इस चर्चा के बाद केंद्रीय गृह मंत्री ने नक्सलवाद को लेकर जहां 1970 से 2026 तक उठाए गए एक-एक कदमों का जिक्र किया। वहीं बताया कि इनमें से अधिकांश समय कांग्रेस पार्टी ही सत्ता में रही, लेकिन इसके बाद भी यह समस्या खत्म होने के बजाय और बढ़ी है। उन्होंने यह भी साफ किया कि गरीबी के कारण नक्सलवाद इन क्षेत्रों में नहीं पहुंची थी, बल्कि नक्सलवाद के कारण इन क्षेत्रों में गरीबी रही। क्योंकि इन्होंने बैंक, अस्पताल, स्कूल जला दिए थे। हथियारबंद वामपंथियों ने इस क्षेत्रों को अपने सबसे सुरक्षित ठिकाने के लिए रूप में चुना गया था, क्योंकि इन क्षेत्रों में वह छुप सकते थे। जो लोग पिछडेपन का नरेटिव खड़ा कर रहे है, वह पूरी तरह से गलत है। कुछ लोग मारे जा रेह नक्सलियों के लिए लेख लिखते हैं लेकिन उनके बारे में एक शब्द नहीं कहते जो इनकी गोलियों से मारे जाते हैं। अब नक्सलवाद पूरी तरह से खत्म केंद्रीय गृह मंत्री ने कहा कि यदि ये आदिवासी विचारधारा को मानने वाले होते तो इनके आदर्श तिलका मांझी व भगवान बिरसा मुंडा होते, लेकिन इन्होंने अपना आदर्श माओ माना है। ये अपने आदर्श तय करने में भी विदेश से इंपोर्ट करते है। गृह मंत्री शाह ने दावा कि देश से अब नक्सलवाद पूरी तरह से खत्म हो गया है, वैसे तो यह 2024 में ही खत्म हो गया होता, जो बिहार, झारखंड, महाराष्ट्र जैसे राज्यों में सिमट भी गया था लेकिन छत्तीसगढ़ की उस समय कांग्रेस और भूपेश बघेल सरकार नक्सलियों का समर्थन कर रही थी। कांग्रेस सांसदों की इस दौरान आपत्ति पर शाह ने कहा कि बघेल से पूछ लीजिएगा, हम इसके प्रमाण भी दे देंगे। शाह ने मौजूदा समय में नक्सलवादियों का सारा कैडर समाप्त हो चुका है। इनमें से अधिकांश ने सरेंडर कर दिया है, या पकड़े गए या मार दिए गए है। शाह बोले- जो कोई भी हथियार उठाएगा, उसे जवाबदेह ठहराया जाएगा शाह ने कहा कि जो लोग एक सशस्त्र आंदोलन के पैरोकार बनकर यह कहते हैं कि उन्होंने अन्याय के खिलाफ लड़ाई लड़ी। मैं उनसे पूछता हूं। क्या आप संविधान का सम्मान करेंगे या नहीं? यदि किसी के साथ अन्याय होता है, तो उसके लिए अदालतें स्थापित की गई हैं; विधानसभाएं, जिला परिषदें और तहसीलें गठित की गई हैं। मैं यह कहना चाहता हूं कि वह दौर अब खत्म हो चुका है। यह … Read more

शाह की कड़ी चेतावनी: गलत इरादे से भारत आए तो US-यूक्रेनी नागरिकों को नहीं बख्शेंगे

नई दिल्ली केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह ने  स्पष्ट किया कि हाल ही में राष्ट्रीय जांच एजेंसी (NIA) द्वारा गिरफ्तार किए गए विदेशी नागरिकों से भारत को कोई खतरा नहीं था। उन्होंने बताया कि ये लोग आतंकी प्रशिक्षण के लिए भारत का इस्तेमाल केवल म्यांमार पहुंचने के एक 'ट्रांजिट पॉइंट' के रूप में कर रहे थे। विदेशी नागरिकों की गिरफ्तारी और उनकी मंशा हाल ही में NIA ने कोलकाता, लखनऊ और दिल्ली से एक समूह को गिरफ्तार किया था, जिसमें एक अमेरिकी और छह यूक्रेनी नागरिक शामिल थे। टाइम्स ऑफ इंडिया की रिपोर्ट के मुताबिक, गृह मंत्री ने बताया कि यह समूह मिजोरम के रास्ते म्यांमार जाने की फिराक में था। म्यांमार में मौजूद विद्रोही गुटों के शिविरों का इस्तेमाल यूक्रेनी नागरिकों को आतंकी प्रशिक्षण देने के लिए किया जाना था। कैसे पकड़े गए? विदेशी नागरिकों को मिजोरम में प्रवेश करने के लिए 'एडवांस परमिट' (अग्रिम अनुमति) की आवश्यकता होती है। इन लोगों ने यह परमिट नहीं लिया था, जिसके कारण ये सुरक्षा एजेंसियों की पकड़ में आ गए। भारत सरकार का कड़ा रुख यह पहली बार है जब सरकार के किसी शीर्ष अधिकारी ने आधिकारिक तौर पर यह स्पष्ट किया है कि इस समूह का मुख्य लक्ष्य म्यांमार था और भारत महज उनके रास्ते का एक पड़ाव था। अमित शाह ने कहा- इनसे भारत की सुरक्षा को कोई खतरा नहीं था। लेकिन हमारी नीति बिल्कुल स्पष्ट है कि यदि कोई भी विदेशी नागरिक किसी भी गलत काम या इरादे से भारत आता है, तो उसे बख्शा नहीं जाएगा। कोर्ट ने 1 अमेरिकी और 6 यूक्रेनी नागरिकों की रिमांड 10 दिन और बढ़ाई इस बीच नई दिल्ली की एक विशेष एनआईए अदालत ने म्यांमार के हथियारबंद गुटों और प्रतिबंधित भारतीय विद्रोही समूहों को कथित तौर पर हथियार, ड्रोन और ट्रेनिंग मुहैया कराने के आरोप में गिरफ्तार 7 विदेशी नागरिकों की कस्टडी 10 दिनों के लिए बढ़ा दी है। जांच एजेंसी एनआईए ने कुल 7 विदेशी नागरिकों को गिरफ्तार किया है। इनमें से 3 यूक्रेनी नागरिक दिल्ली से, 3 लखनऊ से और 1 अमेरिकी नागरिक कोलकाता से गिरफ्तार किया गया था। आरोपियों के नाम हैं।     मैथ्यू आरोन वान डाइक (अमेरिकी नागरिक)     हुरबा पेट्रो (यूक्रेनी नागरिक)     सिल्वियाक तारास (यूक्रेनी नागरिक)     इवान सुकमानोवस्की (यूक्रेनी नागरिक)     स्टीफंकिव मैरियन (यूक्रेनी नागरिक)     होनचारुक मक्सिम (यूक्रेनी नागरिक)     कामिन्स्की विक्टर (यूक्रेनी नागरिक) क्या हैं मुख्य आरोप? जांच एजेंसी का आरोप है कि ये विदेशी नागरिक वैध वीजा पर भारत आए और फिर संरक्षित क्षेत्र 'मिजोरम' में प्रवेश कर गए। वहां से उन्होंने म्यांमार में घुसपैठ की और जातीय विद्रोही गुटों से संपर्क साधा। इन पर आरोप है कि इन्होंने म्यांमार में ट्रेनिंग ली और फिर वहां के विद्रोही गुटों को ट्रेनिंग दी। ये गुट भारत के प्रतिबंधित विद्रोही समूहों से जुड़े हुए हैं। साथ ही, आरोप है कि वे भारत के रास्ते यूरोप से भारी मात्रा में 'ड्रोन' की खेप लेकर आए थे। इन पर आतंकी हार्डवेयर, हथियार सप्लाई करने और एके-47 (AK-47) राइफल ले जाने वाले अज्ञात आतंकवादियों से सीधे संपर्क में होने का आरोप है। इन सभी के खिलाफ यूएपीए (UAPA) की धारा 18 (आतंकी साजिश) और भारतीय न्याय संहिता (BNS) के तहत मामला दर्ज किया गया है। अदालत में हुई सुनवाई और दलीलें सुरक्षा कारणों को ध्यान में रखते हुए, विशेष एनआईए न्यायाधीश प्रशांत शर्मा के समक्ष इन आरोपियों को एनआईए मुख्यालय में ही पेश किया गया। जांच एजेंसी ने अदालत से 10 दिन की अतिरिक्त कस्टडी की मांग करते हुए बताया कि मामले की पूछताछ के दौरान कुछ और संदिग्ध भारतीयों और विदेशियों के नाम सामने आए हैं। उनके आतंकी गतिविधियों में शामिल होने और राष्ट्रीय सुरक्षा को खतरे में डालने वाले इन पहलुओं की गहराई से जांच के लिए रिमांड की आवश्यकता है। इससे पहले 11 दिन की रिमांड देते हुए अदालत ने टिप्पणी की थी कि यह ऐसा मामला नहीं है जहां एफआईआर में राष्ट्रीय सुरक्षा के खिलाफ अपराधों का कोई जिक्र न हो। यानी इस मामले में सीधे तौर पर यूएपीए की धारा 18 लागू होती है। एनआईए की दलीलों से सहमत होते हुए जज प्रशांत शर्मा ने सातों आरोपियों की कस्टडी 10 दिन और बढ़ा दी है। नक्सलवाद के खात्मे पर सरकार की रणनीति जब गृह मंत्री से नक्सलवाद को खत्म करने के लिए तय की गई 31 मार्च, 2026 की समय सीमा के बारे में सवाल किया गया, तो उन्होंने स्थिति स्पष्ट करते हुए कहा कि सुरक्षा सर्वोपरि है। उन्होंने कहा कि यह हार या जीत का विषय नहीं है, बल्कि इसका मुख्य उद्देश्य हमलों और बम विस्फोटों पर पूरी तरह से रोक लगाना है। उन्होंने पूर्व प्रधानमंत्री डॉ. मनमोहन सिंह के उस बयान का भी जिक्र किया जिसमें उन्होंने नक्सलवाद को देश की सबसे बड़ी आंतरिक सुरक्षा चुनौती बताया था। शाह ने कहा कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के नेतृत्व में नक्सलवाद पर काफी हद तक लगाम लगाई गई है। अब तिरुपति-पशुपतिनाथ कॉरिडोर के अंतर्गत आने वाले सभी आदिवासी और जनजातीय क्षेत्रों में विकास कार्य तेजी से पहुंच रहे हैं।

केंद्र का समर्थन: छत्तीसगढ़ को मिली 15.70 करोड़ की सहायता प्राकृतिक आपदाओं से निपटने के लिए

प्राकृतिक आपदाओं से निपटने में केंद्र का अतिरिक्त सहयोग छत्तीसगढ़ को मिली 15.70 करोड़ रुपये की अतिरिक्त सहायता रायपुर  प्राकृतिक आपदाओं से प्रभावित राज्यों की मदद के लिए केंद्र सरकार ने एक महत्वपूर्ण निर्णय लिया है। केंद्रीय गृह मंत्री  अमित शाह की अध्यक्षता में हुई उच्च स्तरीय समिति ने वर्ष 2025 के दौरान आई बाढ़, फ्लैश फ्लड, बादल फटने, भूस्खलन और चक्रवाती तूफान ‘मोन्था’ जैसी आपदाओं से प्रभावित राज्यों के लिए 1,912.99 करोड़ रुपये की अतिरिक्त केंद्रीय सहायता को मंजूरी दी है। इस निर्णय के तहत छत्तीसगढ़ को 15.70 करोड़ रुपये की सहायता प्रदान की जाएगी। मुख्यमंत्री श्री विष्णु देव साय ने प्राकृतिक आपदाओं से निपटने में केंद्र के इस अतिरिक्त सहयोग के लिए केंद्रीय गृह मंत्री का आभार माना है।                 केंद्र सरकार द्वारा यह सहायता राष्ट्रीय आपदा प्रतिक्रिया कोष (NDRF) से जारी की जाएगी, ताकि प्रभावित राज्यों में राहत, पुनर्वास और पुनर्निर्माण कार्यों को तेजी से आगे बढ़ाया जा सके। समिति के निर्णय के अनुसार छत्तीसगढ़ को 15.70 करोड़ रुपये की अतिरिक्त सहायता स्वीकृत की गई है।               केंद्र सरकार ने कहा है कि प्रधानमंत्री Narendra Modi के नेतृत्व में भारत सरकार प्राकृतिक आपदाओं के समय राज्यों के साथ मजबूती से खड़ी है और हर संभव सहयोग प्रदान कर रही है। आपदा की स्थिति में प्रभावित राज्यों को त्वरित राहत और पुनर्वास कार्यों के लिए आवश्यक संसाधन उपलब्ध कराना केंद्र सरकार की प्राथमिकता है।             गौरतलब है कि यह अतिरिक्त सहायता राज्यों को पहले से उपलब्ध कराए गए संसाधनों के अतिरिक्त है। वित्त वर्ष 2025-26 के दौरान केंद्र सरकार ने राज्यों को आपदा प्रबंधन के लिए बड़ी राशि पहले ही जारी कर दी है। State Disaster Response Fund (SDRF) के तहत 28 राज्यों को 20,735.20 करोड़ रुपये जारी किए गए हैं, जबकि National Disaster Response Fund (NDRF) के तहत 21 राज्यों को 3,628.18 करोड़ रुपये की सहायता दी गई है।                  इसके अलावा आपदा जोखिम को कम करने और दीर्घकालिक सुरक्षा उपायों को मजबूत बनाने के लिए State Disaster Mitigation Fund (SDMF) से 23 राज्यों को 5,373.20 करोड़ रुपये तथा National Disaster Mitigation Fund (NDMF) से 21 राज्यों को 1,189.56 करोड़ रुपये भी जारी किए गए हैं।

राष्ट्रीय आतंकवाद-विरोधी नीति का ऐलान, गृह मंत्रालय ने PRAHAAR के तहत खतरों पर दी जानकारी

नई दिल्ली गृह मंत्रालय (MHA) ने पहली बार नेशनल काउंटर टेररिज्म पॉलिसी (राष्ट्रीय आतंकवाद-विरोधी नीति) जारी की है. 'PRAHAAR' (प्रहार) नाम की इस डॉक्यूमेंटेड पॉलिसी में कहा गया है कि भारत सीमा पार से राज्य-प्रायोजित आतंकवाद से प्रभावित है, जिसमें जिहादी आतंकवादी संगठनों के साथ-साथ उनके मुखौटा संगठन भी भारत में आतंकी हमलों की साजिश, समन्वय, सुविधा और उन्हें अंजाम देने में लगे हुए हैं. मंत्रालय ने  कहा कि CBRNED (केमिकल, बायोलॉजिकल, रेडियोलॉजिकल, न्यूक्लियर, एक्सप्लोसिव, डिजिटल) सामग्री तक पहुंचने और उसका इस्तेमाल करने की आतंकवादी कोशिशों को बाधित करना और रोकना भारत में आतंकवाद विरोधी (CT) एजेंसियों के लिए चुनौती बनी हुई है. साथ ही, यह भी कहा कि सरकारी और गैर-सरकारी कारकों द्वारा ड्रोन और रोबोटिक्स का खतरनाक उद्देश्यों के लिए गलत इस्तेमाल करने का खतरा भी चिंता का एक और विषय है. क्रिमिनल हैकर्स और देश साइबर अटैक के जरिये भारत को निशाना बनाते रहते हैं. काउंटर टेररिज्म पॉलिसी डॉक्यूमेंट में कहा गया है, "भारत अल-कायदा और इस्लामिक स्टेट ऑफ इराक एंड सीरिया (ISIS) जैसे वैश्विक आतंकी समूहों के निशाने पर रहा है, जो स्लीपर सेल के जरिये देश में हिंसा भड़काने की कोशिश कर रहे हैं." आगे कहा गया है कि दूसरे देशों की जमीन से काम करने वाले हिंसक चरमपंथियों ने आतंकवाद को बढ़ावा देने की साजिशें रची हैं. डॉक्यूमेंट में कहा गया है, "सीमा पार से उनके हैंडलर अक्सर पंजाब और जम्मू-कश्मीर में आतंकवाद से जुड़ी गतिविधियों और हमलों को आसान बनाने के लिए ड्रोन समेत नई टेक्नोलॉजी का इस्तेमाल करते हैं. भारत में आतंकी हमलों को अंजाम देने और उन्हें आसान बनाने के लिए लॉजिस्टिक्स और भर्ती के लिए आतंकवादी समूह तेजी से संगठित आपराधिक नेटवर्क का इस्तेमाल कर रहे हैं." गृह मंत्रालय के मुताबिक, प्रोपेगैंडा, संचार, फंडिंग और आतंकी हमले को निर्देशित करने के लिए, ये आतंकवादी समूह सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म के साथ-साथ 'इंस्टेंट मैसेजिंग एप्लीकेशन' का भी इस्तेमाल करते हैं. पॉलिसी में कहा गया है कि एन्क्रिप्शन, डार्क वेब, क्रिप्टो वॉलेट आदि जैसी तकनीक में विकास ने इन समूहों को गुमनाम रूप से काम करने को आसान बनाया है. आतंकवादी हमलों की रोकथाम पॉलिसी डॉक्यूमेंट में कहा गया है कि इंटेलिजेंस ब्यूरो (IB) में जॉइंट टास्क फोर्स ऑन इंटेलिजेंस (JTFI) के साथ मल्टी एजेंसी सेंटर (MAC) का संचालन, देश भर में CT से जुड़े इनपुट्स को अच्छे से और रियल टाइम में शेयर करने और बाद में रुकावट से बचाने के लिए नोडल प्लेटफॉर्म बना रहेगा. इसमें कहा गया है, "आईबी में एमएसी/जेटीएफआई के तंत्र के तहत केंद्रीय एजेंसियों और राज्य पुलिस बलों के साथ सीटी संचालन के लिए घनिष्ठ साझेदारी बनाई गई है." पॉलिसी में आगे कहा गया है कि हाल के दिनों में, गैर-कानूनी हथियार सिंडिकेट और आतंकवादी समूहों के बीच साठगांठ सामने आई है, और इससे निपटने के लिए, अलग-अलग भारतीय राज्यों में इंटेलिजेंस एजेंसियों के साथ-साथ संबंधित सुरक्षा एजेंसियों द्वारा मिलकर दखल दिया जा रहा है. डॉक्यूमेंट में कहा गया है, "भारतीय कानूनों के तहत कानूनी ढांचे के जरिये आतंकी फंडिंग नेटवर्क को बाधित करने पर विशेष जोर दिया गया है." पॉलिसी में आगे कहा गया है कि भारत को जल, जमीन और हवा, तीनों मोर्चों पर आतंकवादी खतरों का सामना करना पड़ रहा है. इसमें आगे कहा गया है, "भारतीय सीमा की सुरक्षा करने वाले बलों (डिफेंस, सेंट्रल आर्म्ड पुलिस फोर्स) के साथ-साथ इमिग्रेशन अथॉरिटीज भारतीय सीमा को सुरक्षित करने के लिए स्टेट-ऑफ-द-आर्ट टूल्स और टेक्नोलॉजी से लैस हैं. भारतीय अर्थव्यवस्था के जरूरी क्षेत्रों जैसे पावर, रेलवे, एविएशन, पोर्ट्स, डिफेंस, स्पेस और परमाणु ऊर्जा को सरकारी और नॉन-स्टेट कारकों से बचाने के लिए क्षमता का विकास किया गया है. प्रतिक्रिया पॉलिसी डॉक्यूमेंट में कहा गया है कि किसी भी हमले पर स्थानीय पुलिस सबसे पहले जवाब देती है, जिसे स्पेशल स्टेट और सेंट्रल एंटी-टेरर फोर्स मदद करती हैं. पॉलिसी में कहा गया है, "आतंक के खतरे के नजरिये से कमजोर राज्यों ने हमलों का जवाब देने के लिए स्पेशल CT फोर्स बनाई हैं. नेशनल सिक्योरिटी गार्ड (NSG) गृह मंत्रालय के तहत नोडल नेशनल काउंटर-टेरर फोर्स है, जो बड़े आतंकी हमलों का जवाब देने में राज्य बल की मदद करने के साथ-साथ ऐसे राज्य बल की क्षमता निर्माण भी करता है." क्षमताओं का एकत्रीकरण पॉलिसी में कहा गया है कि सिक्योरिटी और लॉ एनफोर्समेंट एजेंसियों का आधुनिकीकरण CT रिस्पॉन्स में अहम रोल निभाता है. इसमें कहा गया, "CT एजेंसियों के लिए नई स्किल्स और रणनीति की ट्रेनिंग के अलावा, लेटेस्ट टूल्स, टेक्नोलॉजी और वेपनरी नियमित रूप से हासिल की जाती हैं. ट्रेनिंग इंस्टिट्यूट के ट्रेनिंग मॉड्यूल और इंफ्रास्ट्रक्चर को और आधुनिक बनाने की कोशिश की गई है. साथ ही ट्रेनिंग फैकल्टी को अपग्रेड करके, आतंकी गतिविधियों से निपटने के लिए सर्वोत्तम कार्यप्रणाली पर ट्रेनिंग देने की कोशिश की गई है." भारतीय युवाओं को भर्ती करने की कोशिश में आतंकवादी समूह पॉलिसी डॉक्यूमेंट में कहा गया है कि आतंकवादी समूह लगातार भारतीय युवाओं को भर्ती करने की कोशिश कर रहे हैं. इन कोशिशों को नाकाम करने के लिए, भारतीय इंटेलिजेंस और लॉ एनफोर्समेंट एजेंसियां ​​लगातार आतंकवादी समूहों के इरादों को नाकाम कर रही हैं. एक बार पहचाने जाने के बाद, इन युवाओं पर एक ग्रेडेड पुलिस कार्रवाई की जाती है, जिसका उद्देश्य कई हितधारकों वाली सेटिंग में कट्टरपंथी बनाने और हिंसक अतिवाद की समस्या को पूरी तरह से खत्म करना है. कट्टरपंथी बनाने के स्तर के आधार पर व्यक्ति के खिलाफ कानूनी कार्रवाई शुरू की जाती है. समुदाय और धार्मिक नेताओं की भूमिका इसमें कहा गया है कि समुदाय और धार्मिक नेता, उदारवादी प्रचारक और NGOs कट्टरपंथ और चरमपंथी हिंसा के बुरे नतीजों के बारे में जागरूकता फैलाने में लगे हुए हैं. इसके अलावा, युवाओं को रचनात्मक तरीके से शामिल किया जाता है ताकि यह सुनिश्चित किया जा सके कि शांति और सांप्रदायिक सद्भाव के लिए खतरा बन सकने वाले मुद्दों पर रोक लगाई जा सके. जेलों में कट्टरपंथ को रोकने के लिए, जेल स्टाफ को समय-समय पर सावधान किया जाता है कि वे हार्ड कोर कैदियों द्वारा कमजोर कैदियों को कट्टरपंथी बनाने की हरकतों को रोकें.

नई दिल्ली में 17 फरवरी को होगी ‘एमपी की समीक्षा’, अमित शाह करेंगे समीक्षा सत्र

भोपाल  'केंद्रीय गृह एवं सहकारिता मंत्री अमित शाह 17 फरवरी को नई दिल्ली में सहकारिता सम्मेलन में समीक्षा करेंगे। इसमें राज्यों के सहकारिता विभागों के क्रियाकलापों की समीक्षा के साथ उनके नवाचारों पर भी चर्चा होगी।प्रदेश के सहकारिता विभाग ने भी इसकी तैयारी शुरू कर दी है।सहकारिता मंत्री विश्वास सारंग भी इसमें शामिल होंगे। प्रजेंटेशन तैयार करने के निर्देश उन्होंने विभाग में किए गए नवाचार एवं उपलब्धियों से संबंधित प्रजेंटेशन तैयार करने के निर्देश दिए हैं। उन्होंने कहा है कि केन्द्र सरकार द्वारा चाही गई बिन्दुवार जानकारी तैयार की जाए।  दी हिदायत भी इस बात का रखा जाए खास ख्याल जानकारी पूर्णत: अद्यतन हो, इस बात का विशेष ध्यान रखा जाए। मंत्री ने कहा कि प्रजेंटेशन में सहकारिता विभाग की उपलब्धियों के साथ सीपीपीपी मॉडल, चीता, बीज और नवाचारों का भी समावेश किया जाए।

सस्ता और सरल किराया, सर्ज प्राइसिंग का खत्म! अमित शाह आज करेंगे ‘Bharat Taxi’ का उद्घाटन

 नई दिल्ली Bharat Taxi Cab Service Launch: कैब सर्विस के क्षेत्र में आज एक नया आगाज होने जा रहा है. आज केंद्रीय गृह एवं सहकारिता मंत्री अमित शाह देश की पहली कोऑपरेटिव टैक्सी सर्विस 'भारत टैक्सी' का शुभारंभ करेंगे. ये नई कैब सर्विस सीधे तौर पर प्राइवेट कैब सर्विस प्रोवाइडर्स की मोनोपोली को सीधी चुनौती देगी. क्योंकि सरकार का दावा है कि, भारत टैक्सी में कैब ड्राइवर्स को उनके हक का पूरा पैसा मिलेगा. साथ ही यूजर्स को सर्ज प्राइसिंग और प्राइवेट कैब्स जैसी कंपनियों की मनमानी से भी छुटकारा मिलेगा. अमित शाह ने पिछले साल मार्च में लोकसभा में अपने भाषण में कहा था कि, “हम बहुत जल्द ही ओला और उबर जैसा एक सहकारी टैक्सी प्लेटफॉर्म लाने वाले हैं. इस सहकारी टैक्सी प्लेटफॉर्म से होने वाला मुनाफा किसी धन्नासेठ के पास नहीं जाएगा. ये मुनाफा टैक्सी ड्राइवर के पास जाएगा.” आज देश की राजधानी दिल्ली में स्थित विज्ञान भवन में गृह मंत्री अमित शाह भारत टैक्सी का आधिकारिक तौर पर उद्घाटन करेंगे. बता दें कि, भारत टैक्सी का पायलट प्रोजेक्ट पहले ही शुरू हो चुका है. दिल्ली-एनसीआर में कई कैब ड्राइवर्स इस ऐप बेस्ड सर्विस का प्रयोग कर रहे हैं. अब भारत टैक्सी के सॉफ्ट लॉंच से अब तक टॉप परफॉर्मेंस करने वाले सारथियों (कैब ड्राइवर्स) को कार्यक्रम के दौरान को सम्मानित किया जाएगा. इसके अलावा सारथियों को प्रमाणपत्र देने के साथ-साथ 5 लाख का व्यक्तिगत दुर्घटना बीमा और 5 लाख का पारिवारिक स्वास्थ्य बीमा प्रदान किया जाएगा. सरकार का मानना है कि, ‘सहकार से समृद्धि’ के विज़न से इंस्पायर्ड भारत टैक्सी सिटिजन-सेंट्रिक मोबिलिटी को बढ़ावा देने की दिशा में मील का पत्थर साबित होगा. तो आइये विस्तार से जानते हैं Bharta Taxi देश में मौजूद बाकी प्राइवेट कैब एग्रीग्रेटर्स से किस तरह से अलग होगा. ‘सारथी ही मालिक’  सबसे पहले बता दें कि, भारत टैक्सी के चालकों को ड्राइवर नहीं बल्कि सारथी कहा जाएगा. सरकार का कहना है कि, सारथी ही मालिक होगा. क्योंकि इस सर्विस के दौरान यूजर द्वारा दिए जाने वाले किराए का पूरा पैसा सीधे कैब चालक के खाते में जाएगा. जहां ओला-उबर जैसी कंपनियां राइड के बाद फेयर में से एक मोटा हिस्सा कमिशन के नाम पर काट लेती हैं, वहीं भारत टैक्सी सीधे तौर पर कैब चालकों को बड़ी राहत देगा. ऐसा आमतौर पर देखा जाता है कि, कैब चालक और कंपनियों के बीच फेयर और कमिशन को लेकर झंझट होती रहती है. सर्ज प्राइसिंग से छुटकारा भारत टैक्सी में सर्ज प्राइसिंग से भी राहत मिलेगी. जहां प्राइवेट कैब एग्रीगेटर्स पीक ऑवर या खराब मौसम के समय हैवी रश के नाम पर मनमाना किराया वसूलते हैं, वहीं भारत टैक्सी में इस समस्या से भी निजात मिलेगी. जिसका सीधा फायदा आम ग्राहकों को मिलेगा. बीते 1 जुलाई से मोटर व्हीकल एग्रीगेटर गाइडलाइन (MVAG) 2025 के अनुसार, कैब एग्रीगेटर्स को अब पीक ट्रैफिक ऑवर के दौरान बेस फेयर से दोगुना तक चार्ज करने की अनुमति मिल गई है. जिसके बाद पीक-ऑवर में मोटी रकम वसूलने का खेल और बढ़ गया है. कैब, ऑटो और बाइक सर्विस भारत टैक्सी में यूजर्स को कैब, बाइक और ऑटो तीनों सुविधाओं का लाभ मिलेगा. इससे कम दूरी से लेकर लंबी यात्रा तक हर जरूरत के लिए एक ही प्लेटफॉर्म उपलब्ध होगा. यानी ग्राहक अपने बज़ट और जरूरत के अनुसार कार, ऑटो और यहां तक की बाइक राइड का भी चुनाव कर सकेंगे. सेफ्टी और सिक्योरिटी भारत टैक्सी में यात्रियों की सुरक्षा को प्राथमिकता दी गई है. सभी ड्राइवरों का पुलिस वेरिफिकेशन अनिवार्य होगा, साथ ही ऐप में इमरजेंसी SOS बटन, लाइव लोकेशन शेयरिंग और ट्रिप हिस्ट्री जैसी सुविधाएं भी मिलेंगी, ताकि आप और आपके परिवार निश्चिंत होकर यात्रा कर सकें. इसके अलावा ऐप पर ही यूजर्स को किसी भी तरह की परेशानी होने पर हेल्पलाइन की भी सुविधा भी दी जा रही है. 3 लाख से ज्यादा ड्राइवर जानकारी के अनुसार भारत टैक्सी से अब तक 3 लाख से अधिक ड्राइवर जुड़ चुके हैं. और प्लेटफॉर्म पर प्रतिदिन 10,000 से अधिक राइड्स पूरी की जा रही हैं. पिछले महीने ये आंकड़ा 1.4 लाख ड्राइवर्स का था. इससे साफ है कि, समय के साथ भारत टैक्सी का प्रयोग बढ़ रहा है और ज्यादा से ज्यादा ड्राइवर्स इस सविर्स से जुड़ रहे हैं.  8 सरकारी संस्थाओं का साथ इस सहकार टैक्सी कोऑपरेटिव लिमिटेड को देश की 8 बड़ी सहकारी संस्थाओं के सहयोग से ऑपरेट किया जा रहा है. इनमें अमूल, इफको, कृभको, नाफेड, एनडीडीबी, एनसीईएल, एनसीडीसी और नाबार्ड शामिल हैं. कंपनी के बोर्ड में ड्राइवरों के दो निर्वाचित प्रतिनिधि भी शामिल हैं, जिससे ड्राइवरों के जरूरत की बातें या उनकी डिमांड सीधे सरकार तक पहुंचती है. कैसे डाउनलोड करें मोबाइल ऐप भारत टैक्सी का मोबाइल ऐप लाइव हो चुका है. इसकी बुकिंग सरकारी Bharat Taxi मोबाइल ऐप के जरिए की जा सकती है. इसका राइडर और ड्राइवर दोनों मोबाइल ऐप गूगल प्ले स्टोर और ऐप्पल ऐप स्टोर पर डाउनलोड के लिए उपलब्ध है. यदि आपको कैब सर्विस के लिए राइड का लाभ उठाना है तो Rider App डाउनलोड करें. वहीं इस सेवा जुड़ने के इच्छुक ड्राइवरों को Driver App डाउनलोड करना होगा. यहां ध्यान रखना जरूर है कि, भारत टैक्सी वही ऐप डाउनलोड करें जो सहकार टैक्सी कोऑपरेटिव लिमिटेड द्वारा जारी किया गया है. Bharat Taxi के नाम से ऐप स्टोर और गूगल प्ले स्टोर पर कुछ और कैब सर्विस एप्लीकेशन मौजूद हैं. सही ऐप चुनने के लिए आप उपर दिखाए गए तस्वीर से मोबाइल ऐप के लोगो को मैच करवा सकते हैं.

‘BJP की डबल इंजन सरकार का असर’, यूपी दिवस पर अमित शाह ने दिया शक्तिशाली संदेश

लखनऊ  'जो उत्तर प्रदेश कभी देश को सिर्फ मजदूर (Labour Source) देता था, आज वही राज्य प्रधानमंत्री मोदी के आत्मनिर्भर भारत का सबसे बड़ा 'ग्रोथ इंजन' बन चुका है।' यह हुंकार केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह ने शनिवार को लखनऊ में उत्तर प्रदेश स्थापना दिवस के अवसर पर भरी। शाह ने न केवल विपक्षी दलों पर तीखा प्रहार किया, बल्कि इशारों-इशारों में यह भी साफ कर दिया कि साल 2047 के 'विकसित भारत' के संकल्प को पूरा करने के लिए योगी आदित्यनाथ का नेतृत्व कितना अनिवार्य है। इलेक्ट्रॉनिक निर्यात में UP की 11 प्रतिशत हिस्सेदारी अमित शाह ने समाजवादी पार्टी (SP) और कांग्रेस को आड़े हाथों लेते हुए कहा कि 2017 से पहले इन दलों ने उत्तर प्रदेश को 'बीमारू' राज्य बनाकर छोड़ दिया था। उन्होंने तंज कसते हुए कहा कि, 'कांग्रेस और सपा के दौर में यूपी की पहचान सिर्फ पलायन और अपराध से होती थी। आज स्थिति यह है कि प्रदेश का युवा नौकरी के लिए बाहर नहीं जा रहा, बल्कि हर जिले में रोजगार के अवसर पैदा हो रहे हैं। आज भारत के कुल इलेक्ट्रॉनिक निर्यात में 11 प्रतिशत हिस्सेदारी अकेले उत्तर प्रदेश की है।'  2047 का संकल्प और योगी का नेतृत्व कार्यक्रम के दौरान अमित शाह का सबसे बड़ा बयान यूपी के भविष्य को लेकर आया। उन्होंने कहा, "15 अगस्त 2047 को जब देश अपनी आजादी का शताब्दी वर्ष मनाएगा, तब उत्तर प्रदेश एक पूर्ण विकसित राज्य के रूप में 'विकसित भारत' की आत्मा होगा।" राजनीतिक गलियारों में शाह के इस बयान को इस संकेत के रूप में देखा जा रहा है कि 2047 के इस लंबे विजन को पूरा करने के लिए भाजपा की कमान योगी आदित्यनाथ के हाथों में ही सुरक्षित है। राम मंदिर से महाकुंभ तक: सनातन का उत्थान गृह मंत्री ने कानून-व्यवस्था और सांस्कृतिक राष्ट्रवाद पर जोर देते हुए कहा कि आज यूपी में कनेक्टिविटी सुधरी है और निवेश का माहौल बना है। उन्होंने अयोध्या में राम मंदिर के निर्माण और प्रयागराज में आगामी महाकुंभ को 'सनातन धर्म' की शक्ति का प्रतीक बताया। शाह ने कहा कि यूपी न केवल आईटी और डेटा सेंटर का हब बन रहा है, बल्कि देश की सुरक्षा में भी इसकी भूमिका अब और अधिक महत्वपूर्ण हो गई है। UP: शुभंशु शुक्ला को 'उत्तर प्रदेश गौरव' सम्मान समारोह के दौरान एक खास पल तब आया जब मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ और गृह मंत्री अमित शाह ने ग्रुप कैप्टन शुभंशु शुक्ला को 'उत्तर प्रदेश गौरव' पुरस्कार से सम्मानित किया। अंतरिक्ष अन्वेषण और नवाचार (Innovation and Space Exploration) के क्षेत्र में उनके असाधारण योगदान के लिए उन्हें यह प्रतिष्ठित सम्मान दिया गया, जो बदलते और आधुनिक होते उत्तर प्रदेश की एक नई तस्वीर पेश करता है। सीएम योगी ने किया गर्मजोशी से स्वागत लखनऊ पहुंचते ही मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह का आत्मीय स्वागत किया। दोनों नेताओं के बीच सौहार्दपूर्ण संवाद देखने को मिला। मुख्यमंत्री योगी ने अमित शाह को पुष्पगुच्छ भेंट कर प्रदेश सरकार की ओर से स्वागत किया। यह दृश्य भाजपा नेतृत्व की एकजुटता और संगठनात्मक मजबूती को दर्शाता नजर आया। डिप्टी सीएम और मंत्रियों ने किया अभिनंदन मुख्यमंत्री के साथ ही उपमुख्यमंत्री केशव प्रसाद मौर्य और उपमुख्यमंत्री बृजेश पाठक ने भी अमित शाह का स्वागत किया। इसके अलावा यूपी सरकार के कई वरिष्ठ मंत्री भी एयरपोर्ट पर मौजूद रहे और केंद्रीय गृह मंत्री का गर्मजोशी से अभिनंदन किया। प्रदेश सरकार के मंत्रियों ने स्थापना दिवस जैसे महत्वपूर्ण अवसर पर अमित शाह की उपस्थिति को उत्तर प्रदेश के लिए गौरवपूर्ण बताया। भाजपा संगठन के वरिष्ठ नेताओं की मौजूदगी भाजपा के प्रदेश अध्यक्ष पंकज चौधरी ने भी केंद्रीय गृह मंत्री का स्वागत किया। इसके साथ ही पार्टी के संगठन मंत्री धर्मपाल सिंह और पूर्व प्रदेश अध्यक्ष भूपेंद्र चौधरी ने अमित शाह का अभिनंदन किया। भाजपा संगठन के शीर्ष नेताओं की मौजूदगी से यह साफ संकेत मिला कि यूपी स्थापना दिवस समारोह को पार्टी और सरकार दोनों ही स्तर पर विशेष महत्व दिया जा रहा है। प्रशासनिक अमला भी रहा उपस्थित राज्य के मुख्य सचिव शशि प्रकाश गोयल और पुलिस महानिदेशक (DGP) राजीव कृष्ण ने भी एयरपोर्ट पर अमित शाह का स्वागत किया। प्रशासनिक अधिकारियों की मौजूदगी से सुरक्षा और व्यवस्थाओं को लेकर पूरी सतर्कता दिखाई दी।अमित शाह के दौरे को लेकर राजधानी में सुरक्षा व्यवस्था के पुख्ता इंतजाम किए गए हैं। यूपी स्थापना दिवस समारोह में होंगे शामिल केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह उत्तर प्रदेश के 77 वें स्थापना दिवस समारोह में मुख्य रूप से शामिल होंगे। इस अवसर पर प्रदेश की सांस्कृतिक विरासत, विकास यात्रा और उपलब्धियों को प्रदर्शित किया जाएगा। समारोह में विभिन्न सांस्कृतिक कार्यक्रमों, प्रदर्शनी और विकास से जुड़े प्रस्तुतीकरण की योजना है। अमित शाह के कार्यक्रम में शामिल होने से आयोजन को राष्ट्रीय स्तर की पहचान मिलने की उम्मीद जताई जा रही है। बीजेपी के वरिष्ठ नेताओं की मजबूत मौजूदगी यूपी स्थापना दिवस के अवसर पर भारतीय जनता पार्टी के कई वरिष्ठ नेताओं की मौजूदगी ने राजनीतिक माहौल को और गरमा दिया है। पार्टी सूत्रों के अनुसार, यह आयोजन केवल सांस्कृतिक नहीं, बल्कि विकास और सुशासन के संदेश को आगे बढ़ाने का भी मंच बनेगा। उत्तर प्रदेश की विकास यात्रा पर रहेगा फोकस स्थापना दिवस समारोह के दौरान उत्तर प्रदेश की 77 वर्षों की यात्रा, उपलब्धियां और भविष्य की योजनाओं पर विशेष ध्यान दिया जाएगा। प्रदेश सरकार द्वारा कानून-व्यवस्था, इंफ्रास्ट्रक्चर, निवेश, रोजगार, महिला सशक्तिकरण और सामाजिक कल्याण के क्षेत्रों में किए गए कार्यों को प्रदर्शित किया जाएगा। अमित शाह की उपस्थिति में यह संदेश देने की कोशिश होगी कि उत्तर प्रदेश अब देश के विकास का अहम स्तंभ बन चुका है। राजनीतिक दृष्टि से भी अहम दौरा राजनीतिक जानकारों का मानना है कि अमित शाह का यह दौरा केवल औपचारिक नहीं है, बल्कि आगामी राजनीतिक रणनीतियों के लिहाज से भी महत्वपूर्ण है। स्थापना दिवस समारोह के बहाने केंद्र और राज्य सरकार की उपलब्धियों को साझा करने का अवसर मिलेगा। राजधानी में उत्सव जैसा माहौल अमित शाह के आगमन और यूपी स्थापना दिवस को लेकर राजधानी लखनऊ में उत्सव जैसा माहौल देखने को मिला। सरकारी भवनों को सजाया गया है और कार्यक्रम स्थल पर विशेष तैयारियां की गई हैं। स्थापना दिवस समारोह में बड़ी संख्या में जनप्रतिनिधि, अधिकारी और आम नागरिकों … Read more

आज से शुरू UP दिवस 2026 समारोह, अमित शाह करेंगे उद्घाटन, क्या है खास थीम?

 लखनऊ 'विकसित भारत-विकसित उत्तर प्रदेश' थीम पर आधारित तीन दिवसीय उत्तर प्रदेश दिवस 2026 शनिवार को लखनऊ में नए बने राष्ट्र प्रेरणा स्थल परिसर में शुरू होगा. इस कार्यक्रम का उद्घाटन केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह मुख्य अतिथि के तौर पर करेंगे. यूपी के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने कहा है कि यह कार्यक्रम सिर्फ़ एक सरकारी कार्यक्रम बनकर न रहे, बल्कि एक जन उत्सव बने जिसमें राज्य के हर नागरिक की भागीदारी सुनिश्चित हो. इसलिए कार्यक्रम में राज्य की सांस्कृतिक विविधता और जीवंत भावना के अलावा विकास यात्रा को भी दिखाया जाएगा. मुख्य आकर्षण होगा ODOC इस साल उत्तर प्रदेश दिवस का मुख्य आकर्षण मुख्यमंत्री आदित्यनाथ द्वारा घोषित 'वन डिस्ट्रिक्ट-वन कुज़ीन' (ODOC) योजना होगी. ODOC योजना के तहत राज्य के हर जिले से एक पारंपरिक और मशहूर व्यंजन चुना गया है. इस खास कार्यक्रम में राज्य भर के सभी ODOC व्यंजन एक ही जगह पर उपलब्ध होंगे. यह पहल न सिर्फ़ उत्तर प्रदेश के व्यंजनों की विविधता को दिखाएगी, बल्कि स्थानीय सांस्कृतिक पहचान को भी मज़बूत करेगी. यह यूपी के स्वाद को राज्य की पहचान का प्रतीक बनाने का एक ज़रिया बनेगा. इसके साथ ही 'वन डिस्ट्रिक्ट-वन प्रोडक्ट' (ODOP) योजना के तहत कारीगरों द्वारा बनाए गए उत्पादों की प्रदर्शनी लगाई जाएगी. साथ ही उन्हें यूपी दिवस के मौके पर बेचा भी जाएगा. इसके अलावा GI टैग वाले उत्पादों को भी ट्रेड शो के रूप में प्रदर्शित किया जाएगा. इन लोगों को किया जाएगा सम्मानित उत्तर प्रदेश दिवस समारोह के दौरान 'उत्तर प्रदेश गौरव सम्मान 2025-26' प्रदान किया जाएगा. साथ ही इस साल, शिक्षा, साहित्य, कृषि, महिला सशक्तिकरण और अंतरिक्ष विज्ञान के क्षेत्रों में उल्लेखनीय उपलब्धियां हासिल करने वाली पांच जानी-मानी हस्तियों को भी सम्मानित किया जाएगा. 'मुख्यमंत्री युवा उद्यमी विकास अभियान' के तहत शानदार प्रदर्शन करने वाले जिलों को भी सम्मानित किया जाएगा. इस मौके पर मुख्यमंत्री औपचारिक रूप से ODOC योजना लॉन्च करेंगे और सरदार वल्लभभाई पटेल रोज़गार व औद्योगिक क्षेत्र योजना का उद्घाटन करेंगे. इसके अलावा लोक, शास्त्रीय और समकालीन कला रूपों पर आधारित सांस्कृतिक कार्यक्रम भी आयोजित किए जाएंगे.  हर जिले में होगा कार्यक्रम का प्रसारण कार्यक्रम का प्रसारण सभी जिलों में किया जाएगा. साथ ही कार्यक्रम स्थलों का चयन समयबद्ध ढंग से पूरा करने और जनप्रतिनिधियों की सहभागिता सुनिश्चित करने के लिए उन्हें कार्यक्रमों में आमंत्रित करने पर विशेष जोर दिया गया है. इसके अलावा यह कार्यक्रम फिजी, मॉरीशस, मालदीव, सिंगापुर और थाईलैंड स्थित भारतीय दूतावासों के सहयोग से विदेशों में भी मनाया जाएगा.