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ASI द्वारा ब्लैकमेल किए जाने पर TI ने की आत्महत्या, दोषी पाई गई महिला ASI को बर्खास्त किया गया

इंदौर  चर्चित टीआई हाकमसिंह पंवार शूट एंड सुसाइड केस में फंसी महिला एएसआई रंजना खांडे को आखिरकार पुलिस विभाग से बर्खास्त कर दिया गया है। विभागीय जांच में रंजना के खिलाफ गंभीर आरोप साबित हुए हैं। एएसआई पर तत्कालीन टीआई हाकमसिंह का अश्लील वीडियो बनाकर ब्लैकमेल करने का आरोप था। मामले में रंजना के खिलाफ छोटी ग्वालटोली थाने में आपराधिक प्रकरण भी दर्ज है। आत्महत्या से पहले टीआई ने की थी फायरिंग मामला जून 2022 का है, जब भोपाल के श्यामला हिल्स थाने में पदस्थ टीआई हाकमसिंह पंवार ने इंदौर के पुलिस कंट्रोल रूम में खुद को गोली मारकर आत्महत्या कर ली थी। आत्महत्या से पहले उन्होंने एएसआई रंजना खांडे पर फायर किया था, हालांकि वह बाल-बाल बच गईं थी। टीआई के परिजनों ने रंजना पर गंभीर आरोप लगाते हुए कहा था कि वह हाकमसिंह को अश्लील वीडियो के जरिए ब्लैकमेल कर रही थीं। इसके बाद तत्कालीन पुलिस आयुक्त ने एसआईटी (स्पेशल इन्वेस्टिगेशन टीम) गठित कर जांच के आदेश दिए थे। एसआईटी की जांच में तीन और नाम आए सामने एसआईटी जांच के दौरान रंजना खांडे के अलावा उसके भाई कमलेश खांडे, टीआई की तीसरी पत्नी रेशमा शेख उर्फ जग्गू, और कपड़ा व्यवसायी गोविंद जायसवाल का नाम भी सामने आया। जांच रिपोर्ट में चारों के खिलाफ प्रकरण दर्ज करने की सिफारिश की गई। घटना के कुछ ही दिनों बाद रंजना के भाई कमलेश की संदिग्ध परिस्थितियों में मौत हो गई थी। इसके बाद पुलिस ने रंजना और रेशमा को गिरफ्तार किया, जबकि गोविंद जायसवाल ने कोर्ट में सरेंडर किया था। विभागीय जांच में दोषी पाई गईं रंजना मामले में डीसीपी (मुख्यालय) प्रकाश सिंह परिहार ने प्रारंभिक विभागीय जांच की थी। उस समय केवल वेतन वृद्धि रोकने की सजा देकर मामला शांत कर दिया गया था। हालांकि, वर्तमान पुलिस आयुक्त संतोष कुमार सिंह ने मामले की फिर से जांच करवाई। अतिरिक्त पुलिस आयुक्त आर.के. सिंह ने बुधवार को रंजना को पुलिस सेवा से बर्खास्त करने के आदेश जारी किए। जांच रिपोर्ट में यह पाया गया कि रंजना ने अपने पद का दुरुपयोग करते हुए न केवल विभाग की छवि धूमिल की, बल्कि अश्लील वीडियो के माध्यम से टीआई को ब्लैकमेल करने जैसी गंभीर हरकत में भी शामिल थीं। पहले भी विवादों में रही एएसआई रंजना खांडे यह पहली बार नहीं है जब एएसआई रंजना खांडे किसी विवाद में फंसी हों। पुलिस रिकॉर्ड के अनुसार, नवंबर 2013 में उनकी पहली पोस्टिंग डीपीओ धार में हुई थी। वहां उन्होंने अपने ही विभाग के एक कर्मचारी को पुलिस केस में फंसाने की धमकी दी थी, बाद में मामला समझौते से सुलझा लिया गया। खूब आती रहीं शिकायतें इसके बाद भी उनके खिलाफ कई शिकायतें हुईं। एक शिकायत के चलते जब उसे भोपाल ट्रांसफर किया जा रहा था, तब रंजना ने व्यक्तिगत कारणों का हवाला देकर इंदौर में पोस्टिंग ले ली। दिसंबर 2021 में रंजना ने रिटायर्ड एसआई यादव पर गंभीर आरोप लगाए थे, लेकिन वह मामला भी चुपचाप निपटा दिया गया। पुलिस सूत्रों के अनुसार, रंजना पहले भी बुरहानपुर में पदस्थ एक पुलिसकर्मी पर आरोप लगा चुकी हैं। लगातार विवादों में रहने के बावजूद वह कई वर्षों तक पुलिस सेवा में बनी रहीं।  

नगरीय विकास मंत्री विजयवर्गीय ने अपनाया स्वदेशी ‘जोहो मेल’, आम नागरिकों को भी मिलेगा लाभ

भोपाल  नगरीय विकास एवं आवास मंत्री  कैलाश विजयवर्गीय ने आम नागरिकों की सुविधा के लिये अपना स्वदेशी ई-मेल जोहो अकाउंट जारी किया है। इसके लिये उन्होंने नागरिकों से स्वदेशी मेल अपनाकर उनसे जुड़ने का अनुरोध किया है। इसके लिये उन्होंने एक अपील भी जारी की है। प्रिय साथियों, हम रिश्तों के धागों से बंधे हैं। आपसे जुड़ाव ने हमेशा मुझे ताकत दी है। आपके विचार, सुझाव और शुभकामनाएं मेरे काम को दिशा देते रहे हैं। अब इस संवाद को और सहज बनाए रखने के लिए मैंने zoho mail अपनाया है। आप मुझसे सीधे ईमेल के जरिए संपर्क कर सकते हैं। इसके लिए मेरा नया ई-मेल अकाउंट kailashvijayvargiya@zohomail.in है। आपके भरोसे और साथ के लिए मैं हृदय से आभार प्रकट करता हूं।  

27 % आरक्षण होल्ड हटाने का मामला: सुप्रीम कोर्ट ने सुनवाई नवंबर तक टाली, केंद्र ने मांगा और वक्त

भोपाल   एक बार फिर मध्य प्रदेश में ओबीसी आरक्षण दिए जाने के मामले पर सर्वोच्च न्यायालय में सुनवाई टाल दी गई है. पहले इस मुद्दे पर 8 अक्टूबर से नियमित सुनवाई होने वाली थी लेकिन सुनवाई नहीं हो सकी. MP सरकार की तरफ से तुषार मेहता ने इस मामले की सुनवाई को 9 अक्टूबर से  किए जाने का आग्रह किया था, जिसे कोर्ट ने स्वीकार कर लिया था. लेकिन एक बार फिर सुप्रीम कोर्ट में सॉलिसिटर जनरल तुषार मेहता ने कोर्ट से इस सुनवाई के लिए वक्त मांगा है. बता दें कि सुप्रीम कोर्ट इस मामले पर पहले ही नोटिस जारी कर चुका है. वहीं कांग्रेस इस मामले में लगातार सरकार की मंशा पर सवाल उठाती आयी है. शुरू होते ही मांग ली तारीख सुनवाई के लिए सुबह 10.30 बजे जैसे ही बेंच शुरू हुई, सॉलिसिटर जनरल तुषार मेहता ने इसमें समय देने की मांग की। उन्होंने कहा कि अभी कुछ मुद्दों पर आपस में चर्चा करना है, इसलिए छुट्टियों के बाद इसमें समय दे सकें। अनारक्षित पक्ष ने कहा कि बेहतर होगा इसे खत्म किया जाए। इस पर ओबीसी वेलफेयर कमेटी की ओर से कहा गया कि इसे सुना जाए। इस पर मेहता ने कहा कि आगे बढ़ा दिया जाए। अब इस तारीख को होगी सुनवाई सॉलिसिटर जनरल तुषार मेहता ने सुप्रीम कोर्ट में जज के सामने ओबीसी आरक्षण के मामले में और वक्त देने की मांग रखते हुए कहा कि "इसमें कई तकनीकी पक्ष हैं, जिनको समझने के लिए थोड़े और वक्त की जरूरत है. वहीं अब इस मामले की सुनवाई अगले महीने (नवंबर) के पहले हफ्ते में होगी." ओबीसी आरक्षण पर सुप्रीम कोर्ट ने कहा फाइनल हियरिंग होगी सुप्रीम कोर्ट (Supreme Court) ने इस पर कहा कि ठीक है, अभी छुट्टियां लग जाएंगी तो आप बताइए क्या संभावित समय बताएं। मेहता ने कहा कि नवंबर पहले या दूसरे सप्ताह में। इस पर सुप्रीम कोर्ट ने कहा कि दूसरे सप्ताह नवंबर रख रहे हैं लेकिन यह फाइनल हियरिंग होगी। सुनवाई के दौरान हाईकोर्ट में केस वापस करने को लेकर कोई चर्चा नहीं हुई। दो मिनट की सुनवाई में डेट आगे बढ़ गई। ओबीसी कमेटी ने कहा कि हाईकोर्ट के स्टे हटा दीजिए इस पर ओबीसी वेलफेयर कमेटी के अधिवक्ता वरूण ठाकुर ने कहा कि कम से कम हाईकोर्ट के स्टे को हटा दीजिए, एक्ट कहीं भी चैलेंज नहीं है। स्टे हटा दीजिए ताकि एक्ट के तहत भर्ती हो सके। लेकिन इस पर बेंच ने कोई जवाब नहीं दिया। 87 और 13 फीसदी का मामला उलझा मध्यप्रदेश की सियासत में कहा जाता है कि OBC समुदाय जिसके साथ रहेगा सत्ता की चाबी उसके पास रहेगी. यही वजह है कि बीजेपी और कांग्रेस दोनों पिछड़ा वर्ग का हितैषी बनने की कोशिश करती हैं. विपक्ष का आरोप है सरकार गुमराह कर रही है, और सरकार कहती है — हम तो OBC के साथ हैं. दूसरी तरफ मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ऐसे आरोपों को सिरे नकारते हैं. वे कहते हैं कि हमारी सरकार का रुख साफ है. हम ओबीसी को 27℅ आरक्षण देने के स्टैंड पर हम कायम हैं.  मध्यप्रदेश में OBC की आबादी 50 फीसदी से अधिक है, लेकिन ओबीसी वर्ग 27% आरक्षण के पेंच में उलझ गया है.यही आरक्षण युवाओं की गले की फांस बनता जा रहा है.दरअसल मध्यप्रदेश में हो रही भर्ती परीक्षाओं में 87:13 का फॉर्मूला लागू है, इसके तहत 87% रिजल्ट जारी हो रहे हैं जबकि 13% रिजल्ट होल्ड पर हैं आलम ये है कि कई युवा सरकारी नौकरी की राह देखते-देखते ओवर एज हो चुके हैं तो कुछ ने पढ़ाई ही छोड़ दी है. एमपी हाईकोर्ट जाएगा या नहीं यह तय नहीं यह केस अब हाईकोर्ट में वापस जाएगा या नहीं यह तय नहीं हुआ है। सुप्रीम कोर्ट में इस मुद्दे पर गुरुवार को कोई बात नहीं हुई। इसके पहले बुधवार को सुप्रीम कोर्ट ने कहा था कि क्यों ना केस को हाईकोर्ट भेज दें, क्योंकि आरक्षण स्थानीय मुद्दे, टोपोग्राफी, जनसंख्या इन सभी से जुड़ा होता है और यह हाईकोर्ट बेहतर समझ सकता है। इस पर बात आई थी कि हाईकोर्ट ने कई याचिकाओं में स्टे दे दिया है। इस पर सुप्रीम कोर्ट ने कहा था कि हम स्टे वेकेट करके इसे रिवर्ट कर देते हैं। इस पर अनारक्षित पक्ष को आपत्ति थी क्योंकि स्टे हटने का मतलब था कि मप्र में 27 फीसदी ओबीसी आरक्षण (27 percent OBC reservation case) लागू हो जाएगा। पांच मिनट की सुनवाई के बाद तय हुआ कि इस मुद्दे को प्रैक्टिकली देखा जाएगा और 9 अक्टूबर को सुनेंगे, लेकिन फिर सरकार ने समय मांग लिया। सरकार लगातार समय मांग रही है मध्य प्रदेश सरकार इस मामले में लगातार समय मांग रही है। यह मामला साल 2019 से चल रहा है। पहले हाईकोर्ट ने इसमें ओबीसी को 27 फीसदी आरक्षण (27 percent OBC reservation) देने पर रोक लगाई और फिर इसमें सुनवाई की जगह शासन ने ट्रांसफर याचिकाएं सुप्रीम कोर्ट में दायर कर दी। इसके बाद इन्हें खारिज किया गया और हाईकोर्ट फिर भेजा गया लेकिन फिर वहां से सुप्रीम कोर्ट में दूसरी ट्रांसफर याचिकाएं लगाई गई। हाईकोर्ट में हर बार शासन ने यह कहा कि एपेक्स कोर्ट में केस है, इसलिए सुनवाई नहीं हो सकती है। इसके बाद मामला फिर सुप्रीम कोर्ट में सुना गया और सुप्रीम कोर्ट ने सख्ती से कहा कि सरकार 6 साल से सो रही थी, अब अंतरिम राहत नहीं देंगे अंतिम फैसला देंगे। लेकिन 8 अक्टूबर की सुनवाई में सुप्रीम कोर्ट ने अचानक कहा कि क्यों ना इसे हाईकोर्ट भेज दिया। लेकिन 9 अक्टूबर को हाईकोर्ट भेजने पर कोई चर्चा नहीं हुई। ओबीसी कमेटी के आरोप: चुनाव के कारण राजनीति हुई ओबीसी वेलफेयर कमेटी की ओर से अधिवक्ता रामेश्वर ठाकुर ने मीडिया से कहा कि सुप्रीम कोर्ट ने कल कहा था कि स्टे वेकेट करते हुए केस हाईकोर्ट को रिमांड करेंगे। आज (9 अक्टूबर)  सुनवाई के दौरान उम्मीद थी कि स्टे हटकर हाईकोर्ट में केस जाएगा, लेकिन सुबह सॉलिसिटर जनरल तुषार मेहताजी ने मेंशन लेकर मामले की फाइनल सुनवाई का निवेदन किया था। इस पर सुप्रीम कोर्ट ने इसे मानते हुए दूसरे सप्ताह नवंबर में रखा गया है, फाइनल सुनवाई के लिए कहा है। अधिवक्ता वरुण ठाकुर ने कहा कि यह दुर्भाग्यपूर्ण है कि … Read more

कफ सिरप से बच्चों की मौत: सुप्रीम कोर्ट ने ली गंभीर नोटिस, कल जनहित याचिका पर सुनवाई

भोपाल  मध्य प्रदेश और राजस्थान में कफ सिरप पीने से बच्चों की मौत के मामले में दायर जनहित याचिका पर सुनवाई के लिए सुप्रीम कोर्ट सहमत हो गया। अदालत ने दवा सुरक्षा तंत्र में जांच और व्यवस्थागत सुधार की मांग वाली याचिका पर शुक्रवार को सुनवाई करने का फैसला किया है। मुख्य न्यायाधीश बी.आर. गवई, न्यायमूर्ति उज्ज्वल भुयान और न्यायमूर्ति के. विनोद चंद्रन की पीठ ने अधिवक्ता और याचिकाकर्ता विशाल तिवारी की दलीलों पर विचार करते हुए कहा कि यह मामला गंभीर है और तत्काल सुनवाई योग्य है।  राष्ट्रीय स्तर पर जांच और सुधार की मांग याचिका में इन घटनाओं की अदालत की निगरानी में जांच और एक सेवानिवृत्त सर्वोच्च न्यायालय के न्यायाधीश की अध्यक्षता में राष्ट्रीय न्यायिक आयोग या विशेषज्ञ समिति के गठन का अनुरोध किया गया है। इसके अलावा, याचिका में कहा गया है कि जहरीली कफ सिरप से बच्चों की मौत से जुड़े सभी FIRs और जांचों को CBI को ट्रांसफर किया जाए, ताकि पूरे देश में जांच एक समान और निष्पक्ष रूप से की जा सके। राज्यों में जांच बिखरी याचिकाकर्ता ने कहा है कि अलग-अलग राज्यों में जांच होने से जवाबदेही बिखर जाती है, जिससे बार-बार ऐसी घटनाएं होती रहती हैं और खतरनाक दवाएं बाजार में पहुंच जाती हैं। इसलिए एक केंद्रीकृत जांच की जरूरत है जो पूरे सिस्टम में सुधार सुनिश्चित करे। बिक्री से पहले मान्यता प्राप्त प्रयोगशालाओं हो परीक्षण याचिका में केंद्र सरकार को निर्देश देने की मांग की गई है कि वह यह पता लगाए कि दवा सुरक्षा और गुणवत्ता जांच प्रणाली में कौन सी चूक हुई, जिनकी वजह से निम्न गुणवत्ता वाली दवाएं बाजार में पहुंचीं। इसमें अदालत से यह भी आग्रह किया गया है कि आगे किसी भी बिक्री या निर्यात की अनुमति देने से पहले सभी संदिग्ध उत्पादों का एनएबीएल-मान्यता प्राप्त प्रयोगशालाओं के माध्यम से विष विज्ञान परीक्षण अनिवार्य किया जाए।  

मध्यप्रदेश में दिन गर्म, रातें ठंडी: 12 जिलों से मानसून विदा, कुछ हिस्सों में हल्की बारिश संभव

भोपाल मध्यप्रदेश में दिन में तेज धूप खिलेगी और रात में गुलाबी ठंड का अहसास होने लगेगा। मौसम विभाग ने 2 से 3 दिन में पूरे प्रदेश से मानसून की विदाई के संकेत दिए हैं। पूर्वी हिस्से में 3 दिन तक बूंदाबांदी के आसार जरूर है।  मध्य प्रदेश से पूरी तरह से मानसून की विदाई के पहले ही गुलाबी ठंड का अकर दिखने लगा है. शरद पूर्णिमा के अगले दिन से ही प्रदेश के कई जिलों में हल्की ठंड ने दस्तक दे दी है. इस दौरान कई शहरों का न्यूनतम तापमान 20 डिग्री से नीचे लुढ़क गया है. मंगलवार बुधवार की दरमियानी रात इंदौर और राजगढ़ जिले का न्यूनतम तापमान 18 डिग्री से नीचे रिकॉर्ड किया गया. वहीं कुछ जगहों पर लोकल सिस्टम के चलते हल्की बूंदाबांदी भी देखी जा रही है. मौसम वैज्ञानिकों का कहना है कि उत्तर भारत में एक वेस्टर्न डिस्टरबेंस पहुंच रहा है. ऐसे में हवा का रुख भी धीरे-धीरे बदल रहा है, जिसके कारण बादल छाने के बावजूद रात के तापमान में गिरावट हो रही है. सामान्यतः इन दिनों जब बादल छाते हैं तब रात के तापमान में गिरावट नहीं होती. वहीं अगले 48 घंटे के दौरान प्रदेश के कई जिलों से मानसून की विदाई हो सकती है. मौसम वैज्ञानिक दिव्या सुरेंद्रन के अनुसार, वर्तमान समय में दक्षिण पश्चिम मानसून अगले 2 दिनों के दौरान मध्य प्रदेश के कुछ हिस्सों से वापसी कर सकता है. वहीं बीते दिन एक साइक्लोनिक सर्कुलेशन शक्ति आज सुबह एक निम्न दबाव के क्षेत्र में बदला है. साथ ही एक अन्य पश्चिमी विक्षोभ हरियाणा के इलाके में बना हुआ है. ऐसे में अगले 5 दिनों के दौरान प्रदेश के किसी भी हिस्से में तेज बारिश की संभावना नहीं बनी है. अगले 3 दिन धूप-छाव और बूंदाबांदी वाला मौसम मौसम वैज्ञानिकों ने बताया कि अगले 3 दिन धूप-छाव और बूंदाबांदी वाला मौसम रहेगा। पूर्वी हिस्से के जिलों में कहीं-कहीं बूंदाबांदी हो सकती है। वहीं, भोपाल, इंदौर, उज्जैन, ग्वालियर में दिन में तेज धूप खिली रहेगी। इधर, कई शहरों में रात का पारा 18 डिग्री तक पहुंच गया है। 8-9 सितंबर की बात करें तो धार, इंदौर, राजगढ़ में तापमान 17.6 से 17.7 डिग्री के बीच रहा। भोपाल में 19.6 डिग्री, उज्जैन में 19 डिग्री, ग्वालियर में 22.1 डिग्री और जबलपुर में 21 डिग्री सेल्सियस दर्ज किया गया। तापlमान का ताजा हाल अधिकतम तापमान: सतना – 33.6°C (सबसे ज्यादा), खजुराहो (छतरपुर) – 33°C, नर्मदापुरम/मंडला – 32.8°C, उमरिया – 32.5°C, जबलपुर – 32.2°C, न्यूनतम तापमान: इंदौर/राजगढ़ – 17.6°C (सबसे कम), धार – 17.7°C, गिरवर (शाजपुर) – 18.6°C, सीहोर – 18.8°C, उज्जैन/खंडवा – 19°C कैसा रहा बड़े शहरों का पारा जबलपुर – 32.2°C ग्वालियर – 31.4°C उज्जैन – 31°C भोपाल – 30.7°C इंदौर – 30.5°C  

भोपाल: PWD के पूर्व इंजीनियर जेपी मेहरा पर शिकंजा, लोकायुक्त ने मारा छापा

भोपाल  Bhopal में लोकायुक्त (Lokayukta ) की टीम ने गुरुवार सुबह एक बड़ी कार्रवाई की। उन्होंने पीडब्ल्यूडी के पूर्व चीफ इंजीनियर जेपी मेहरा के घर पर छापा मारा। ये छापा भ्रष्टाचार के आरोपों की जांच के तहत मारा गया था, जिसमें कहा जा रहा है कि मेहरा ने विभागीय ठेकों और निर्माण कार्यों में गड़बड़ियां की थीं। छापे की वजह लोकायुक्त की टीम ने इस छापे को गोपनीय सूचना के आधार पर मारा। जानकारी के अनुसार, लोकायुक्त की टीम ने पुलिस बल के साथ जेपी मेहरा के भोपाल स्थित मणिपुरम आवास पर तलाशी शुरू की। जेपी मेहरा पर आरोप है कि उन्होंने अपने कार्यकाल के दौरान पीडब्ल्यूडी में विभागीय ठेकों और निर्माण कार्यों में गड़बड़ियां कीं। इन आरोपों की गंभीरता को देखते हुए लोकायुक्त ने जांच की प्रक्रिया शुरू की, और अब तक की कार्रवाई में कई संदिग्ध दस्तावेज प्राप्त हुए हैं, जो भ्रष्टाचार के मामलों को और ज्यादा मजबूत कर सकते हैं। बता दें मेहरा इसी साल रिटायर हुए हैं। छापे में मिली संपत्ति से जुड़ी जानकारी छापे (Lokayukta raid in MP) के दौरान अधिकारियों को बड़ी संख्या में दस्तावेज मिले, जिनमें केस और प्रॉपर्टी से संबंधित कागजात शामिल थे। जेपी मेहरा के घर लोकायुक्त का छापा में मुंबई में खरीदी गई संपत्तियों से जुड़ी जानकारी भी सामने आई है, जो जांच में महत्वपूर्ण साबित हो सकती है।लोकायुक्त की कार्रवाई जारी है, और इससे जुड़ी जानकारी जल्द ही सार्वजनिक हो सकती है। केस और प्रॉपर्टी से जुड़े दस्तावेज मिले जानकारी के अनुसार, छापे के दौरान लोकायुक्त की टीम को बड़ी संख्या में केस और प्रॉपर्टी से जुड़े दस्तावेज मिले हैं। इनमें मुंबई में खरीदी गई संपत्ति से जुड़े प्रमाण भी शामिल हैं। बताया जा रहा है कि यह छापा गोपनीय सूचना के आधार पर मारा गया है। मेहरा इसी साल फरवरी में रिटायर हुए थे। फिलहाल मणिपुरम स्थित उनके आवास में लोकायुक्त की कार्रवाई जारी है।

मध्य प्रदेश में 9 अक्टूबर से वोटर लिस्ट फ्रीज, एसआईआर की प्रक्रिया इसी पर आधारित

भोपाल   मध्य प्रदेश की राजधानी भोपाल में लगातार वोटरों की संख्या बढ़ रही है. मिली जानकारी के मुताबिक, राजधानी में पिछले 22 सालों में वोटरों की संख्या में दो गुना इजाफा हुआ है. बता दें कि 2003 के आंकड़ों के अनुसार, भोपाल में कुल 11 लाख 81 हजार 531 वोटर थे, लेकिन अब यह संख्या  21 लाख 18 हजार 364 हो गई है. इसके लिए जिले के बूथ लेवल के ऑफिसर डोर-टू-डोर सर्वे करेंगे.  भोपाल में दो बैठकें की गई हैं, जहां निर्वाचन नामवली के विशेष गहन पुनरीक्षण कार्यक्रम के तहत कलेक्टोरेट में स्टेंडिंग कमेटी की बैठक हुई है. इसके अलावा, मान्यता प्राप्त राजनीतिक दलों के प्रतिनिधियों के साथ भी चर्चा हुई.  इन दोनों बैठकों में निर्वाचन नामवली के विशेष गहन पुनरीक्षण को लेकर चर्चा की गई. इसमें फोटोयुक्त प्रारूप मतदाता सूचा का सार्वजनिक प्रकाशन किया गया है. अगर किसी कोई आपत्ति है, तो 17 अक्टूबर तक आवेदन कर सकता है.   हालांकि अभी मध्य प्रदेश में एसआईआर को लेकर कोई दिनांक तय नहीं की गई है, लेकिन बिहार में हुए एसआईआर को माडल मानते हुए निर्वाचन आयोग ने तैयारियां शुरू कर दी हैं। बैठक में एडीएम प्रकाश नायक, उप जिला निर्वाचन अधिकारी भुवन गुप्ता व राजनीतिक दलों के प्रतिनिधि उपस्थित थे। सूची में नहीं होगा संशोधन उप जिला निर्वाचन अधिकारी भुवन गुप्ता ने बताया कि बुधवार को मतदाता सूची के एसआईआर को लेकर मान्यता प्राप्त राजनीतिक दलों के साथ चर्चा की गई। जिसमें बताया गया कि नौ अक्टूबर को मतदाता सूची पर पूरी तरह से रोक लगा दी जाएगी। इसके बाद किसी भी तरह का कोई संशोधन सूची में नहीं किया जा सकेगा। बिहार में हुए मतदाता सूची के एसआईआर को माडल मानते हुए तैयारियां की जा रही हैं। वर्ष 2003 में जिले में चार विधानसभा क्षेत्र थे और कुल 11 लाख 81 हजार 531 मतदाता, 1090 मतदान केंद्र थे। जबकि वर्ष 2025 में सात विधानसभा क्षेत्र, कुल 21 लाख 18 हजार 364 मतदाता और 2029 मतदान केंद्र हैं। 22 साल बाद होगा एसआईआर, बढ़े नौ लाख मतदाता भोपाल जिले में 22 साल पहले वर्ष 2003 में मतदाता सूची का एसआईआर किया गया था, जो अब 2025 में करने की तैयारी है। इन 22 साल में कुल नौ लाख 36 हजार 833 मतदाता जिले में बढ़े हैं। ऐसे में 2003 की सूची में जिन मतदाताओं के नाम हैं उन्हें कोई दस्तावेज नहीं देना होगा। हालांकि सभी मतदाताओं को गणना पत्रक भरकर देना होगा। यह पत्रक सभी बीएलओ घर-घर जाकर मतदाताओं को देंगे। इसको लेकर अभी निर्वाचन आयोग से निर्देश आना बाकी हैं। नगरीय निकाय मतदाता सूची प्रकाशित, 17 तक दावे-आपत्ति मंगवाए भोपाल जिला निर्वाचन कार्यालय द्वारा बुधवार को नगरीय निकाय की फोटोयुक्त मतदाता सूची का अंतिम प्रकाशन किया गया। इस दौरान आयोजित स्टेंडिंग कमेटी की बैठक में राजनीतिक दलों के प्रतिनिधियों को बताया गया कि वह सूची को लेकर सभी तरह के दावे-आपत्ति 17 अक्टूबर तक प्रस्तुत कर सकेंगे। जिनके आधार पर बाद में नगरीय निकाय की सूची में संशोधन किया जा सकेगा। प्रकाशित की गई सूची में भोपाल नगर निगम के 85 वार्डों में 17 लाख 90 हजार 905 मतदाता हैं। जिनमें नौ लाख 18 हजार 527 पुरुष और आठ लाख 72 हजार 914 महिला सहित 164 अन्य मतदाता शामिल हैं। ऐसे मतदाता जिनकी उम्र एक जनवरी 2026 को 18 साल पूरी हो रही है, वह नए मतदाता कार्ड के लिए आवेदन कर सकेंगे। पहचान पत्रों में आधार का जिक्र नहीं सक्सेना इस मामले में कांग्रेस के जिलाध्यक्ष प्रवीण सक्सेना का कहना है कि मध्य प्रदेश में एसआइआर को लागू करने में आधार को शामिल करने संबंधी जानकारी जिला निर्वाचन कार्यालय ने नहीं दी है। सरकार ने समग्र आईडी, वोटर कार्ड, प्रापर्टी, बैंक खाता सहित सभी जरूरी दस्तावेजों को आधार से लिंक कराया है। जबकि भारत निर्वाचन आयोग की सूची में इसे पहचान के दस्तावेजों में शामिल नहीं किया गया है। इसके लिए पार्टी स्तर पर कानूनी लड़ाई लड़ी जाएगी।    

कफ सिरप कांड में बड़ी कार्रवाई, बच्चों की मौत के आरोपी रंगनाथन की गिरफ्तारी

भोपाल / चेन्नई जानलेवा 'कोल्ड्रिफ' कफ सिरप के मामले में मध्य प्रदेश पुलिस को बड़ी सफलता मिली है. पुलिस ने कार्रवाई करते हुए श्रीसन मेडिकल्स (SRESAN MEDICALS) के मालिक रंगनाथन (RANGANATHAN) को हिरासत में ले लिया है. यह कार्रवाई उस दिल दहला देने वाली घटना के बाद हुई है, जिसमें कथित रूप से दूषित कोल्ड्रिफ (Coldrif) कफ सिरप पीने से मध्य प्रदेश में 21 बच्चों की मौत हो गई थी. हिरासत में लिए जाने के बाद रंगनाथन से इस पूरे मामले के संबंध में पूछताछ की जा रही है. इससे पहले, मध्य प्रदेश पुलिस ने इस गंभीर मामले को देखते हुए श्रीसन फार्मास्युटिकल कंपनी के फरार मालिकों पर इनाम घोषित किया था. पुलिस ने आरोपियों की गिरफ्तारी में मदद करने वाले व्यक्ति को 20,000 रुपये का नकद इनाम देने की घोषणा की थी. इसके साथ ही, कंपनी के फरार मालिकों की जल्द गिरफ्तारी सुनिश्चित करने के लिए एक विशेष एसआईटी (SIT) टीम का भी गठन किया गया था, जिसका परिणाम रंगनाथन की हिरासत के रूप में सामने आया है. गोद में दम तोड़ गए मासूम 21 बच्चों की मौत की इस भयावह त्रासदी के बाद कंपनी के मालिक रंगनाथन को चेन्नई में मध्य प्रदेश पुलिस ने गिरफ्तार कर लिया है। इस सिरप के कारण कई राज्यों में बच्चों की मौत की खबरें सामने आ रही हैं, जिसने स्वास्थ्य और नियामक तंत्र पर गंभीर सवाल खड़े किए हैं। पुलिस के अनुसार, कोल्ड्रिफ सीरप में मिलावट की पुष्टि हुई है, जो बच्चों के लिए घातक साबित हुई। मध्य प्रदेश में यह सीरप बड़े पैमाने पर वितरित किया गया था और इसके सेवन के बाद कई बच्चों की हालत बिगड़ गई। पीड़ित परिवारों का गुस्सा और दुख साफ देखा जा सकता है, क्योंकि उन्होंने अपने मासूम बच्चों को खो दिया। छिंदवाड़ा एसपी ने दी जानकारी छिंदवाड़ा के एसपी अजय पांडे ने बताया कि श्रीसन फार्मा के मालिक एस रंगनाथन को कल रात गिरफ्तार कर लिया गया। रंगनाथन की हिरासत के बाद पुलिस और स्वास्थ्य विभाग ने Sresan फार्मा के खिलाफ जांच तेज कर दी है। प्रारंभिक जांच में पता चला है कि सीरप के निर्माण में गुणवत्ता मानकों की अनदेखी की गई थी, जिसके परिणामस्वरूप यह जानलेवा उत्पाद बाजार में पहुंचा। फैक्ट्री से दस्तावेज जब्त मध्य प्रदेश पुलिस ने चेन्नई में कंपनी के कार्यालय पर छापेमारी की और कई दस्तावेज जब्त किए। अधिकारियों का कहना है कि इस मामले में और लोगों की गिरफ्तारी हो सकती है। साथ ही, सीरप के वितरण नेटवर्क और उन दवा दुकानों की भी जांच की जा रही है, जिन्होंने इस उत्पाद को बेचा। लोगों से अपील की गई है कि वे कोल्ड्रिफ सिरप का इस्तेमाल तुरंत बंद करें और अपने बच्चों को तत्काल चिकित्सा सहायता उपलब्ध कराएं। मध्य प्रदेश सरकार का बड़ा आरोप मध्य प्रदेश के स्वास्थ्य राज्य मंत्री नरेंद्र शिवाजी पटेल ने बुधवार को कहा कि राज्य में 21 बच्चों की मौत दूषित कफ सिरप पीने से हुई है और इसके लिए तमिलनाडु सरकार की गंभीर लापरवाही जिम्मेदार है. पटेल ने कहा, “यह तमिलनाडु सरकार की जिम्मेदारी थी कि राज्य से बाहर भेजी जाने वाली दवाओं की जांच करे. मध्य प्रदेश सरकार भी राज्य में आने वाली दवाओं की रैंडम जांच करती है, लेकिन यह सिरप संयोगवश उस सैंपलिंग में शामिल नहीं हो पाया.” पको बता दें कि तमिलनाडु के स्वास्थ्य मंत्री सुब्रमण्यम ने कहा था कि 3 अक्टूबर को दवा नियंत्रक द्वारा लिए गए सैंपल की लैब रिपोर्ट में Coldrif कफ सिरप को मिलावटी (contaminated) घोषित किया गया है. रिपोर्ट सामने आने के बाद कंपनी को तुरंत उत्पादन बंद करने के आदेश जारी किए गए थे. यह फैक्ट्री कांचीपुरम जिले के सुंगुवरचत्रम क्षेत्र में स्थित है और पिछले 14 वर्षों से Coldrif सिरप का निर्माण कर रही थी. यह कंपनी अपने उत्पादों की आपूर्ति कई राज्यों को करती रही है. 

अवैध शराब कारोबार पर कार्रवाई तेज, मैहर पुलिस ने दबोचा आरोपी

मैहर पुलिस अधीक्षक मैहर श्री अवधेश प्रताप सिंह के निर्देशन, अतिरिक्त पुलिस अधीक्षक मैहर  डॉ. चंचल नागर एवं अनु0अधि0 पुलिस अमरपाटन श्रीमती ख्याति मिश्रा के मार्गदर्शन व थाना प्रभारी ताला निरी. महेन्द्र कुमार मिश्रा के नेतृत्व मे सहयोगी स्टाफ द्वारा अवैध शराब की बिक्री से जुड़े आरोपी के विरुद्ध की गई कार्यवाही घटना का संक्षिप्त विवरणः- दिनांक 07.10.25 को थाना ताला पुलिस द्वारा बेला गोविंदगढ़ मार्ग तमरा रोड पर देर रात वाहन चेकिंग के दौरान मोटर साइकिल चालक के कब्जे से 61 लीटर अवैध शराब जप्त की गई।  वाहन चैकिंग के दौरान पुलिस को मोटर साइकिल क्रमांक MP19MQ0323 के चालक विपुल चौरसिया जिसने अपनी मोटरसाईकिल के पीछे बोरी में सामान बांधा हुआ था पर संदेह हुआ। सन्देह के आधार पर पुलिस के द्वारा चालक के वाहन में रखे सामान की तलाशी ली गई तो उसमें  अवैध शराब के कार्टून मिले  ।आरोपी  विपुल चौरसिया पिता शिवप्रसाद चौरसिया उम्र 37 वर्ष निवासी ग्राम झिन्ना थाना ताला जिला मैहर (म.प्र.) के कब्जे से 06  कार्टून में प्रिंस कंपनी की देशी शराब एवं 02  कार्टून में गोआ कंपनी की शराब कुल  61 लीटर 380 एमएल  कीमती 28,420 रुपये की होना पायी गयी   जिसे जप्त कर आरोपी को गिरफ्तार किया गया एवम उसके  विरुद्ध  अपराध क्र. 280/25 धारा 34(2) आबकारी एक्ट का पंजीबद्ध कर आरोपी को न्यायालय पेश किया गया है ।  जप्ती- 1.    देशी प्लेन शराब कुल 61 लीटर 380 ML कीमती 28,420 रुपये 2.    बजाज कंपनी की विक्रांता मोटर साइकिल क्रमांक MP19MQ0323 गिरफ्तार आरोपी- विपुल चौरसिया पिता शिवप्रसाद चौरसिया उम्र 37 वर्ष निवासी ग्राम झिन्ना थाना ताला जिला मैहर (म.प्र.) सराहनीय भूमिका- निरी. महेन्द्र कुमार मिश्रा थाना प्रभारी ताला, उप निरी श्री नागेश्वर मिश्रा , प्र.आर. इच्छालाल तिवारी, प्र.आर. चंदन शुक्ला,आर आशीष मिश्रा, सैनिक नरेंद्र तिवारी सैनिक कमलेंद्र सिंह

जनहित में सख्ती: निर्माण कार्यों की गुणवत्ता जांच को जारी हैं औचक निरीक्षण

लोक निर्माण से लोक कल्याण निर्माण कार्यों की गुणवत्ता सुधार के ‍लिए औचक निरीक्षण की कार्रवाई जारी दो ठेकदारों पर कार्यवाही एवं संबंधित अधिकारियों को नोटिस भोपाल प्रदेश में निर्माण कार्यों की गुणवत्ता सुधार के ‍लिए लोक निर्माण विभाग द्वारा माह में दो बार औचक निरीक्षण किया जाता है इसी क्रम में 06 अक्टूबर को मुख्य अभियंताओं के सात दलों द्वारा रायसेन, कटनी, श्योपुर, खरगौन, मैहर, नीमच एवं दमोह जिलों में कुल 34 कार्यों का रेंडम आधार पर निरीक्षण किया गया। इनमें 21 कार्य लोक निर्माण विभाग (सड़क/पुल), 6 कार्य पीआईयू (भवन), 6 कार्य मध्यप्रदेश सड़क विकास निगम एवं 1 कार्य मध्यप्रदेश भवन विकास निगम के अंतर्गत सम्मिलित थे। निरीक्षण रिपोर्टों की समीक्षा बैठक वीडियों कॉन्फ्रेंसिंग के माध्यम से आयोजित की गई, जिसकी अध्यक्षता प्रबंध संचालक म.प्र. सड़क विकास निगम श्री भारत यादव ने की। बैठक में प्रमुख अभियंता श्री केपीएस राणा, प्रमुख अभियंता श्री एसआर बघेल सहित अन्य वरिष्ठ अधिकारी उपस्थित रहे। समीक्षा के दौरान रायसेन जिले में मुआर मगरमोली-समनापुर-झामर रोड की खराब स्थिति पाए जाने पर संबंधित ठेकेदार मेसर्स आदित्य कंस्ट्रक्शन को नोटिस जारी करने की अनुशंसा की गई। श्योपुर जिले के सेमई-विजयपुर मार्ग के खराब कार्य पर संबंधित अधिकारियों को नोटिस तथा ठेकेदार मेसर्स राज कंस्ट्रक्शन को ब्लैकलिस्ट करने की अनुशंसा की गई। 19 कार्यों में आंशिक सुधार के निर्देश दिए गए। वहीं, खरगोन जिले के बोंद्रानिया-वामनपुरी रोड (लंबाई 12.18 किमी) एवं भिकरखेड़ी-दमखेड़ा रोड के उत्कृष्ट कार्य के लिए कार्यपालन यंत्री, अनुविभागीय अधिकारी, उपयंत्री एवं ठेकेदार की सराहना की गई। बैठक में यह निर्देश दिए गए कि सीएम हेल्पलाइन में प्राप्त शिकायतों का निराकरण शिकायतकर्ता की संतुष्टि तक किया जाए। सड़क मरम्मत के साथ यातायात सुरक्षा, जंगल सफाई, रोड मार्किंग एवं ब्लैकस्पॉट सुधार कार्य शीघ्र पूर्ण किए जाएं। लोकपथ ऐप में दर्ज शिकायतों का समय-सीमा में निराकरण एवं वरिष्ठ अधिकारियों द्वारा वेरिफिकेशन सुनिश्चित किया जाए तथा न्यायालयीन प्रकरणों में समय पर जवाबदावा प्रस्तुत कर न्यायालय निर्देशों का पालन किया जाए।