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कपड़ा उद्योग में बड़ा निवेश: कोलकाता से आए 14,600 करोड़ के प्रस्ताव, पीएम मित्रा पार्क बनेगा गेम-चेंजर

भोपाल  मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने बुधवार को कोलकाता के जे.डब्ल्यू. मैरियट होटल में आयोजित इन्वेस्ट इन एमपी इंटरैक्टिव सेशन में उद्योगपतियों के साथ वन-टू-वन चर्चा की। इस दौरान प्रदेश को 14,600 करोड़ रुपये के निवेश प्रस्ताव मिले। मुख्यमंत्री ने उद्योग जगत को भरोसा दिलाया कि मध्यप्रदेश अपार संभावनाओं, स्थिरता और निवेशक-हितैषी माहौल के साथ आदर्श निवेश स्थल है।  सीएम ने कहा कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी द्वारा स्वीकृत सात पीएम मित्रा पार्कों में पहला भूमिपूजन 17 सितंबर को मध्य प्रदेश के धार जिले में होने जा रहा है। यह पार्क प्रदेश को टेक्सटाइल सेक्टर में वैश्विक पहचान दिलाएगा। 2,158 एकड़ में विकसित होने वाले इस पार्क में लगभग 3 लाख रोजगार अवसर (1 लाख प्रत्यक्ष और 2 लाख अप्रत्यक्ष) पैदा होंगे। इसमें अत्याधुनिक अधोसंरचना, ग्रीन एनर्जी और प्लग-एंड-प्ले यूनिट्स जैसी सुविधाएं निवेशकों को उपलब्ध कराई जाएंगी। मध्य प्रदेश निवेशकों का भरोसेमंद साथी  डॉ. यादव ने उद्योगपतियों से कहा कि मध्य प्रदेश की रणनीतिक भौगोलिक स्थिति, बेहतर कनेक्टिविटी, विश्वस्तरीय आधारभूत ढांचा और औद्योगिक शांति इसे निवेशकों के लिए आकर्षक गंतव्य बनाती है। उन्होंने बताया कि प्रदेश की ऑर्गेनिक कॉटन उत्पादन क्षमता राज्य को विशेष पहचान देती है। पीएम मित्रा पार्क से टेक्सटाइल और गारमेंट सेक्टर को नई ऊंचाइयां मिलेंगी। मुख्यमंत्री ने कहा कि मध्य प्रदेश में निवेश केवल व्यावसायिक विस्तार नहीं, बल्कि सतत विकास और आत्मनिर्भर भारत की दिशा में भागीदारी है। प्रधानमंत्री के मेक इन इंडिया और विकसित भारत के संकल्प को पूरा करने में प्रदेश हर संभव योगदान देगा। रुइया ग्रुप  4,000 करोड़ का निवेश करेगा रुइया ग्रुप के सीएमडी पवन कुमार रुइया ने मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव को देश के सबसे शिक्षित और दूरदर्शी नेताओं में से एक बताते हुए कहा कि मध्य प्रदेश आज औद्योगिक प्रगति का नया केंद्र बन रहा है। उन्होंने एलान किया कि रुइया ग्रुप प्रदेश में अपने निवेश का विस्तार करेगा, जिससे रोजगार और कौशल विकास को बढ़ावा मिलेगा। इसी तरह, श्याम मेटालिक्स के चेयरमैन पुष्कर अग्रवाल ने कहा कि प्रदेश में कृषि, खनन और ऊर्जा क्षेत्र में अपार संभावनाएं हैं। उन्होंने 4,000 करोड़ रुपये से अधिक का नया निवेश करने की घोषणा की। प्रताप ग्रुप के हर्ष अग्रवाल ने कहा कि मध्य प्रदेश की नीतियां और अधोसंरचना इसे देश में सबसे आकर्षक निवेश स्थल बनाती हैं। निवेशक-हितैषी नीतियां और मजबूत इंफ्रास्ट्रक्चर इंडस्ट्रियल पॉलिसी एंड इन्वेस्टमेंट प्रमोशन विभाग के प्रमुख सचिव राघवेंद्र कुमार सिंह ने सेशन में कहा कि मध्यप्रदेश में 1 लाख एकड़ से अधिक का इंडस्ट्रियल लैंड बैंक, सस्ती बिजली (4.50/यूनिट), मजबूत हवाई और रेल कनेक्टिविटी और सुरक्षित श्रम वातावरण उपलब्ध है। उन्होंने बताया कि प्रदेश कॉपर, मैंगनीज और डायमंड का सबसे बड़ा उत्पादक है, साथ ही सीमेंट उत्पादन में अग्रणी है। नर्मदापुरम के पास औद्योगिक क्षेत्र को 880 एकड़ तक विस्तारित किया गया है। सरकार ग्रीन इंडस्ट्रीज़ को 100% छूट और एक्सपोर्ट यूनिट्स को 50% प्रोत्साहन जैसी सुविधाएं दे रही है। सांस्कृतिक जुड़ाव और निवेश का नया उत्साह सीएम डॉ. यादव ने कोलकाता की समृद्ध सांस्कृतिक परंपरा का उल्लेख करते हुए कहा कि यह शहर विवेकानंद, नेताजी सुभाषचंद्र बोस और रवींद्रनाथ टैगोर जैसे महापुरुषों की धरती है, जिन्होंने देश को नई दिशा दी। उन्होंने कहा कि ऐसे ऐतिहासिक और बौद्धिक केंद्र से संवाद करना मध्यप्रदेश में निवेश को नई ऊर्जा और गति देगा। सेशन में मुख्यमंत्री ने 12 से अधिक उद्योगपतियों से अलग-अलग मुलाकात की। कुल 300 से अधिक प्रतिभागियों ने इस संवाद में हिस्सा लिया। कार्यक्रम में निवेश अवसरों, नीतियों और अधोसंरचना पर आधारित शॉर्ट फिल्म भी प्रदर्शित की गई। पीएम मित्रा पार्क से रोजगार और औद्योगिक प्रगति धार जिले में विकसित हो रहा पीएम मित्रा पार्क 2,000 करोड़ रुपये से अधिक की लागत से स्थापित होगा। इसमें CETP, सोलर प्लांट, महिला कर्मचारियों के लिए आवास, प्लग-एंड-प्ले यूनिट्स, SCADA नियंत्रित यूटिलिटीज़ जैसी आधुनिक सुविधाएं शामिल होंगी। यह परियोजना प्रदेश को वैश्विक वस्त्र महाशक्ति बनाने की दिशा में महत्वपूर्ण आधार सिद्ध होगी। 

हाईकोर्ट की सख्ती: इंदौर हॉस्पिटल में चूहा कांड के बाद पेस्ट कंट्रोल कंपनी का एग्रीमेंट होगा खत्म

इंदौर एमवाय अस्पताल में हुए चूहा कांड में जांच में देरी और ठोस कार्रवाई नहीं होने पर मध्य प्रदेश हाईकोर्ट की इंदौर खंडपीठ बुधवार को स्वयं संज्ञान लेते हुए जनहित याचिका दर्ज की। हाईकोर्ट ने राज्य शासन से 15 सितंबर तक स्टेटस रिपोर्ट पेश करने के निर्देश दिए हैं।  न्यायमूर्ति विवेक रूसिया और न्यायमूर्ति जे.के. पिल्लई की युगल पीठ ने इस गंभीर मामले को नवजातों के मौलिक अधिकारों और सार्वजनिक स्वास्थ्य से जुड़ा मानते हुए स्वतः संज्ञान लिया। कोर्ट ने यह भी नोट किया कि अस्पताल की सफाई और पेस्ट कंट्रोल की जिम्मेदारी निभा रही निजी कंपनी एजाइल सिक्योरिटी के खिलाफ अभी तक कोई ठोस दंडात्मक कार्रवाई नहीं की गई, जबकि उसी की लापरवाही के कारण यह दर्दनाक हादसा हुआ। ऐसे में जनहित याचिका दर्ज होने के बाद, प्रमुख सचिव (लोक स्वास्थ्य एवं सुरक्षा) की ओर से एजाइल कंपनी को हटाने के निर्देश जारी किए गए। साथ ही पीडियाट्रिक सर्जरी विभाग के एचओडी डॉ. बृजेश लाहोटी को पद से हटा दिया गया, जबकि प्रभारी एचओडी डॉ. मनोज जोशी को सस्पेंड कर दिया गया है। स्टेटस रिपोर्ट में हाई कोर्ट ने मांगे ये जवाब     सरकार यह बताए कि मामले में अब तक क्या कार्रवाई हुई है?     वर्तमान स्थिति क्या है?     इस पूरे प्रकरण में अब तक किन-किन जिम्मेदारों पर क्या-क्या कार्रवाई की गई है? चार सदस्यीय जांच समिति ने सौंपी थी रिपोर्ट 3 सितंबर को गठित चार सदस्यीय जांच समिति ने मेडिकल एजुकेशन कमिश्नर तरुण राठी को रिपोर्ट सौंपी थी, जिसके आधार पर प्रमुख सचिव संदीप यादव ने एचएलएल इंफ्राटेक सर्विसेज (HITES) को एजाइल सिक्योरिटी का अनुबंध रद्द करने के निर्देश दिए। एजाइल को अस्पताल की सफाई, सुरक्षा और पेस्ट कंट्रोल की जिम्मेदारी सौंपी गई थी। मामले को शुरू से दबाने की कोशिश मामले में वरिष्ठ अधिकारियों द्वारा शुरू से ही तथ्यों को दबाने की कोशिश की गई। उन्होंने यह दावा किया कि नवजातों की मौत गंभीर बीमारी के कारण हुई है, न कि चूहों के काटने से। बताया गया कि बच्चों के अंग पूरी तरह विकसित नहीं थे। धार निवासी एक दंपती के नवजात की मौत को लेकर भी गलत जानकारी दी गई। तत्कालीन कलेक्टर आशीष सिंह और मेडिकल एजुकेशन कमिश्नर तरुण राठी को भी गलत फीडबैक देकर गुमराह किया गया कि पोस्टमॉर्टम हो गया है और रिपोर्ट में चूहे के काटने का जिक्र नहीं है। इसी आधार पर दोनों अधिकारियों ने मीडिया को गलत जानकारी दी। खुलासे से सामने आया सच मामले की सच्चाई सामने तब आई जब 'दैनिक भास्कर' ने डिजिटल सबूत जुटाकर सीएमओ रूम में वीडियो के जरिए से यह स्पष्ट किया कि नवजात का पोस्टमॉर्टम हुआ ही नहीं था। इसके बाद 6 सितंबर को परिजनों के आने पर पोस्टमॉर्टम कराया गया। सबसे बड़ा खुलासा तब हुआ जब परिजन देर रात शव लेकर गांव पहुंचे और पैकिंग खोलने पर देखा कि चूहे उसके एक हाथ की चार उंगलियां पूरी तरह खा चुके थे। एजाइल पर पहले सिर्फ मामूली जुर्माना लगाया शुरुआत में एजाइल सिक्योरिटी पर केवल 1 लाख रुपए का जुर्माना लगाया गया और भविष्य में ऐसी पुनरावृत्ति न होने की चेतावनी दी गई। जबकि कंपनी शुरू से ही सवालों के घेरे में थी, इसके बावजूद उसका एमओयू रद्द नहीं किया गया और संवेदनशील जिम्मेदारी के बावजूद कोई ठोस कार्रवाई नहीं की गई। छोटे कर्मचारियों पर गिरी गाज, जिम्मेदार एजेंसी बचाई गई पूर्व में डीन डॉ. अरविंद घनघोरिया ने दो नर्सिंग ऑफिसरों को सस्पेंड किया था, जबकि नर्सिंग सुपरिटेंडेंट जोसेफ को हटाया गया और छह अन्य को शोकॉज नोटिस जारी किए गए। इन कर्मचारियों में नाराजगी थी कि मुख्य जिम्मेदारी एजाइल की थी, लेकिन उसे बचाते हुए निचले स्तर के स्टाफ को निशाना बनाया गया। इसके बाद डॉ. महेश कछारिया को असिस्टेंट नर्सिंग सुपरिंटेंडेंट के रूप में नियुक्त किया गया। मामले में कांग्रेस और जयस शुरू से ही विरोध कर रहे थे और मांग कर रहे थे कि डीन और सुपरिटेंडेंट को सस्पेंड किया जाए और एजाइल कंपनी पर कठोर कार्रवाई हो। सुपरिटेंडेंट डॉ. अशोक यादव ने 11 सितंबर को स्वास्थ्य खराब होने का हवाला देकर 15 दिन की छुट्टी मांगी और बुधवार को उन्हें अवकाश पर भेजते हुए डॉ. बसंत निंगवाल को कार्यवाहक सुपरिटेंडेंट नियुक्त किया गया। हालांकि चर्चाएं हैं कि उन्हें छुट्टी के नाम पर हटाया गया है। इसके साथ ही डॉ. मनोज जोशी (प्रभारी एचओडी, पीडियाट्रिक सर्जरी) को सस्पेंड कर दिया गया है। अब तक हुई नई कार्रवाई     डॉ. बृजेश कुमार लाहोटी को एचओडी, पीडियाट्रिक सर्जरी के पद से हटाया गया।     डॉ. अशोक कुमार लाढा को विभाग का प्रभार सौंपा गया।     डॉ. बसंत निंगवाल को प्रभारी सुपरिटेंडेंट नियुक्त किया गया।     डॉ. सुमित सिंह को सुपर स्पेशलिटी अस्पताल की देखरेख की जिम्मेदारी दी गई।     डॉ. रामू ठाकुर को एचओडी, ट्रांसफ्यूजन मेडिसिन विभाग बनाया गया। पेस्ट कंट्रोल पर निगरानी के लिए बनी पांच सदस्यीय समिति इस मामले बुधवार को एमजीएम मेडिकल कॉलेज के डीन डॉ. अरविंद घनघोरिया ने कॉलेज के अधीन संचालित सभी अस्पतालों और विभागों में पेस्ट कंट्रोल कार्यों की मॉनिटरिंग और समस्याओं के समय-समय पर निराकरण के लिए पांच सदस्यीय समिति का गठन किया है। इस समिति में शामिल सदस्य:     डॉ. शैनल कोठारी     डॉ. राजीव लोहोकारे     डॉ. योगिता दीक्षित     डॉ. प्रियंका कियावत     डॉ. पंकज पाराशर देवास की नवजात की मौत पर परिवार को 5 लाख रु. की सहायता उधर, देवास की नवजात बच्ची (रेहाना की बेटी) की चूहों के कुतरने से हुई मौत के मामले में भी प्रशासन ने आर्थिक सहायता दी है। बुधवार को जयस के राष्ट्रीय अध्यक्ष एडवोकेट लोकेश मुजाल्दा अपने कार्यकर्ताओं और मृत नवजात के परिजनों के साथ कलेक्टर शिवम वर्मा से मिले और आर्थिक सहायता की मांग की। उन्होंने बताया कि इससे पहले धार के नवजात के परिवार को 5 लाख रुपए की आर्थिक सहायता दी गई थी। उसी तर्ज पर देवास की बच्ची के परिवार को भी सहायता दी जाए। इसके बाद कलेक्टर के निर्देश पर एडीएम रोशन राय ने सहायता राशि जारी करने की प्रक्रिया पूरी की। परिवार को 2 लाख रु. रेडक्रॉस सोसायटी से और 3 लाख रु. अस्पताल प्रशासन की ओर से चेक के जरिए दिए गए।

औद्योगिक क्षेत्रों में बिजली कटौती पर नियंत्रण, एमपी सरकार ने तय की नई सीमा

 भोपाल  मध्य प्रदेश के सभी औद्योगिक क्षेत्रों में बिजली कटौती के कारण कोई व्यवस्था प्रभावित न हो, इसके लिए अब एक माह में अधिकतम पांच बार या फिर पांच घंटे ही बिजली कटौती की जा सकेगी। इसको लेकर मध्य प्रदेश विद्युत विनियामक आयोग ने औद्योगिक क्षेत्र और 11 केवी फीडर में बिजली कटौती की संख्या व घंटे के मानक तय किए हैं। इसमें संभाग मुख्यालय, जिला मुख्यालय और औद्योगिक क्षेत्रों के लिए अलग-अलग मापदंड हैं। संभाग मुख्यालय और जिला मुख्यालयों में महीने में 25 बार और अधिकतम 15 घंटे तक कटौती तय की गई है। तय मानकों के अनुसार वर्ष 2026-27 तक यह प्रयास किए जा रहे हैं कि बड़े शहरों में उपभोक्ताओं को सालभर में 90 बार ही कटौती की समस्या से रूबरू होना पड़े, वह भी सिर्फ 60 घंटे से ज्यादा नहीं। बिजली कटौती के मानक नए सिरे से तय किए बता दें कि आयोग ने वर्ष 2012 में पहली बार वितरण प्रदर्शन मानक तय किए थे। इसमें वर्ष 2021 में संशोधन किया गया था। अब एक बार फिर आयोग ने बिजली कटौती के मानक नए सिरे से तय कर दिए हैं, जिसका पालन करने के निर्देश बिजली कंपनियों को दिए हैं। बिजली कंपनियों को तय मानकों को पूरा करने के लिए अपने इंफ्रास्ट्रक्चर को मजबूत करने की भी अनुशंसा की गई है। आयोग ने निर्देश दिए हैं कि बिजली कंपनियां इंफ्रास्ट्रक्चर मजबूत करें, तकनीक और प्रशिक्षित मानव संसाधन का उपयोग करें, ताकि तय मानकों को हासिल किया जा सके। आवश्यकता पड़ने पर पूंजीगत व्यय प्रस्ताव आयोग के पास अनुमोदन के लिए भेजे जाएं। एक लाख से अधिक आबादी वाले शहरों के लिए ऐसा रहेगा रोडमैप प्रदेश के एक लाख से अधिक आबादी वाले शहरों के लिए आयोग ने तीन साल का रोडमैप तय किया है। इसके मुताबिक वर्ष 2024-25 के लिए अधिकतम बिजली कटौती 120 बार और 90 घंटे तय है। इसे साल 2025-26 तक साल में अधिकतम 90 बार और 60 घंटे तक समिति करने का लक्ष्य दिया गया है। हालांकि बिजली कंपनियों को प्राकृतिक आपदा जैसे बाढ़, तूफान या फिर ऐसे कारण जिनके लिए आयोग की अनुमति लेना पड़े और वितरण व्यवस्था फेल हो जाए, में इन निर्धारित मानकों से छूट दी गई है।

कलेक्टर की बड़ी कार्रवाई: फर्जी रजिस्ट्री मामले में पांच सर्विस प्रोवाइडर के लाइसेंस रद्द

शहडोल शहडोल। संभागीय मुख्यालय के सुहागपुर उप पंजीयन के द्वारा अपनी सेवानिवृत्ति की आखिरी दिन 28 अगस्त को गलत तरीके से की गई रजिस्ट्री की जांच मामले में पांच सर्विस प्रोवाइडर के लाइसेंस निलंबित किए गए। जांच के दौरान 250 से अधिक ऐसी रजिस्ट्री मिली है जो बिना अनुमति या गलत तरीके से कराई गई हैं। इस मामले को गंभीरता से लेते हुए कलेक्टर डॉ. केदार सिंह ने कार्रवाई की है और अभी मामले की आगे जांच भीचल रही है। 28 अगस्त को ही इस मामले की कलेक्टर की यहां शिकायत की गई थी जिसमें आरोप लगाया गया था कि उप पंजीयक ने पैसे लेकर गलत तरीके से बिना अनुमति रजिस्ट्री की है। उसके बाद कलेक्टर ने एक जांच टीम का गठन किया था और उसकी पहली रिपोर्ट के आधार पर कार्रवाई की शुरुआत की गई है।जिले में भू माफियाओं और अवैध रजिस्ट्री कराने वाले सर्विस प्रोवाइडरों पर जिला प्रशासन ने पहली बार कार्रवाई की है। सर्विस प्रोवाइडर्स की मिलीभगत उजागर कलेक्टर एवं जिला मजिस्ट्रेट डॉ. केदार सिंह ने ज़मीन की रजिस्ट्री में फर्जीवाड़ा, प्रतिबंधित भूमि की खरीद-बिक्री और मृत व्यक्तियों की जगह दूसरे लोगों को खड़ा कर रजिस्ट्री कराने जैसे घोटालों में संलिप्त पाए गए ई-पंजीयन सर्विस प्रोवाइडरों को तत्काल प्रभाव से निलंबित कर दिया है। यह कार्रवाई 10 सितंबर को देर शाम को की गई है। जारी आदेश में स्पष्ट कहा गया है कि जिले में राजस्व प्रकरण न्यायालय में विचाराधीन होने, पावर आफ अटार्नी निरस्त होने, प्रतिबंधित भूमि या मृतक की जमीन बेचने जैसी अवैधानिक रजिस्ट्रियों के गंभीर प्रमाण सामने आए हैं। इन घोटालों में कई बार ग्राम पंचायतों, दलालों और सर्विस प्रोवाइडरों की मिलीभगत भी उजागर हुई है। इन सर्विस प्रोवाइडरों पर कार्रवाई मोहम्मद सैफ अंसारी पर कार्रवाई की गई है। इसके ऊपर आरोप है कि मृतक भोलानाथ अहिरवार की जगह समान शक्ल के व्यक्ति को खड़ा कर दस्तावेज तैयार कराकर रजिस्ट्री कराई है। अभिषेक कुमार गुप्ता ने ग्राम हड़हा, तहसील बुढ़ार की खसरा नंबर 42 से 58 तक की रजिस्ट्री उच्च न्यायालय में प्रकरण विचाराधीन होने के बावजूद रजिस्ट्री करा दिया। साथ ही, ग्राम बुढ़ार और ग्राम कंचनपुर की जमीनों की रजिस्ट्री कलेक्टर की अनुमति और पावर ऑफ निरस्त होने के बावजूद रजिस्ट्री कराया। गंगा सागर सिंह ने ग्राम बुढ़ार और ग्राम कंचनपुर की प्रतिबंधित भूमि का अवैध पंजीयन कराया। प्रीति शुक्ला ने ग्राम सोहागपुर वार्ड नं. 17 में मुख्तियारनामा न होने के बावजूद विक्रय पत्र तैयार कर रजिस्ट्री करा दिया। स्वरूप सरकार ने ग्राम वासिन वीरान पचगांव (विशिष्ट ग्राम) की भूमि का अवैधानिक पंजीयन कराया है। जमीन हड़पने की साजिश कलेक्टर डॉ. सिंह ने इन पांचो पर कार्रवाई करते हुए अपने आदेश में कहा है कि इस तरह की घटनाएं न केवल मध्यप्रदेश भू-राजस्व संहिता 1959 और अन्य कानूनी प्रावधानों का खुला उल्लंघन हैं, बल्कि ये किसानों और भोली-भाली जनता की जमीन हड़पने की साजिश का हिस्सा हैं। इसलिए लाइसेंस की शर्तों का उल्लंघन करने वाले सभी सर्विस प्रोवाइडर निलंबित किए जाते हैं और इनके विरुद्ध आगे कड़ी कार्रवाई भी प्रस्तावित है। शहडोल जिले में लगातार ऐसे आवेदन प्राप्त हो रहे थे, जिनमें विक्रेताओं की सहमति के बिना जमीन बेचे जाने, प्रतिबंधित भूमि के पंजीयन और मृतक के नाम पर रजिस्ट्री होने की शिकायतें दर्ज की गई। जांच में इनकी पुष्टि होने के बाद प्रशासन ने फर्जीवाड़े पर काला कदम उठाया है।

संजय पाठक के वकील का बड़ा कदम, केस से खुद को किया अलग और सोशल मीडिया पर दी जानकारी

जबलपुर  मध्य प्रदेश हाई कोर्ट के न्यायमूर्ति विशाल मिश्रा द्वारा विधायक संजय पाठक द्वारा फोन किए जाने के बाद खुद को उस मामले से अलग किए जाने के बाद नया मोड आया है। अब पाठक के वकील अंशुमान सिंह ने भी खुद को केस से अलग कर लिया है। उन्होंने साफ किया है कि मैंने कोर्ट को लिखा है कि आनंद माइनिंग कॉर्पोरेशन और निर्मला मिनरल्स, जिन दो कंपनियों के केस की मैं पैरवी कर रहा था, उनके किसी रिलेटिव ने जस्टिस मिश्रा को कॉल किया। इस बात का जस्टिस मिश्रा ने एक सितंबर के आदेश में जिक्र किया। इसकी वजह से मैं ये केस छोड़ रहा हूं और मैंने इस बारे में अपने क्लाइंट को बता दिया है। अधिवक्ता सिंह ने यह भी कहा कि उन्हें नहीं पता कि जिन दो कंपनियों की वो पैरवी कर रहे थे, उसमें विधायक संजय पाठक का कितना शेयर है। उनका संजय पाठक से सीधा सरोकार नहीं है। वो कई सारी कंपनियों के केस लड़ते हैं, ऐसे में हर केस के क्लाइंट का किससे क्या रिलेशन है, इस बात की जांच नहीं करेंगे।  

अजीबोगरीब बीमारी: राजगढ़ में महिला का पेट नहीं भरता, हर दिन खाती है 70 तक रोटियां

राजगढ़ मध्य प्रदेश के राजगढ़ में एक महिला को खाने की अजीब बीमारी हो गई है. सुबह से रात तक 60 से 70 रोटियां खाने के बावजूद महिला कमजोरी ही महसूस करती रहती है. महिला की बीमारी ने उसके ससुराल और मायकेवालों को भी परेशानी में डाल दिया है. ससुराल वालों ने राजस्थान के कोटा, झालावाड़, इंदौर, भोपाल, राजगढ़ और ब्यावरा में इलाज करवाया, फिर मायके वालों ने कोटा और राजगढ़-ब्यावरा में उपचार करवाया, लेकिन कोई राहत नहीं मिली. महिला आज भी रोजाना 60 से 70 रोटियां खा रही है. राजगढ़ जिले के सुठालिया कस्बे के पास नेवज गांव की रहने वाली मंजू सौंधिया (28) पहले स्वस्थ थी. तीन साल पहले उसे यह अजीब बीमारी हुई. मंजू के दो बच्चे हैं. पहले वह घर-परिवार के काम करती थी, लेकिन इस बीमारी ने उसका जीना मुश्किल कर दिया. मंजू की दिनचर्या ऐसी है कि वह हर पल रोटी खाती और पानी पीती है. कुछ देर बाद फिर रोटी खाने लगती है.  डॉ. कोमल दांगी ने बताया कि छह महीने पहले मंजू उनके पास आई थी. उसे घबराहट थी, इसलिए उसे भर्ती कर उपचार किया गया. बाद में वह दोबारा आई और कमजोरी की शिकायत की. उसे मल्टीविटामिन दवाएं दी गईं.  डॉक्टर बोले- साइकियाट्रिक डिसऑर्डर है  डॉ. दांगी ने बताया कि यह साइकियाट्रिक डिसऑर्डर है, जिसमें मंजू को लगता है कि उसने खाना नहीं खाया. वह मन को शांत करने के लिए बार-बार रोटी खाती और पानी पीती है. मनोचिकित्सक बोले- कोई मानिसक बीमारी नहीं डॉ. दांगी ने मंजू को भोपाल के मनोचिकित्सक आरएन साहू के पास जाने की सलाह दी. लेकिन जब मनोचिकित्सक को दिखाया गया तो उन्होंने कहा कि कोई मानसिक बीमारी नहीं है. परिवार अब मदद की उम्मीद में इंतजार कर रहा है. रोटी खाने की आदत छुड़ाएं  बताया गया कि अन्य दवाएं लेने पर मंजू को लूज मोशन की समस्या होती है, इसलिए वह दवाएं नहीं ले पा रही. डॉ. दांगी ने परिवार को सलाह दी कि मंजू की रोटी खाने की आदत छुड़ाएं और उसे खिचड़ी, फल या अन्य खाद्य पदार्थ दें ताकि उसकी मानसिक आदत में सुधार हो. पहले मंजू को टाइफाइड हुआ था मंजू के भाई चंदरसिंह सौंधिया ने बताया कि मंजू का विवाह सिंगापुरा के राधेश्याम सौंधिया से हुआ था. उसके 6 वर्ष की बेटी और 4 वर्ष का बेटा है. बच्चे ससुराल में हैं और मंजू मायके-ससुराल आती-जाती रहती है. पहले उसे टाइफाइड हुआ था, जिससे वह ठीक हो गई, लेकिन तीन साल से यह अजीब रोटी खाने की बीमारी उसे सता रही है. कभी वह 20-30 तो कभी 60-70 रोटियां खा लेती है. आर्थिक स्थिति खराब परिजन ने बताया कि ससुराल और मायके वालों ने इलाज करवाया, लेकिन कोई राहत नहीं मिली. इलाज में आर्थिक स्थिति खराब हो गई और अब तक कोई सरकारी मदद नहीं मिली. अब इलाज के लिए पैसे भी नहीं बचे.

चूहों के हमले से मचा हड़कंप: इंदौर अस्पताल में अधीक्षक छुट्टी पर, विभागाध्यक्ष की छुट्टी

इंदौर इंदौर के महाराजा यशवंतराव अस्पताल में चूहों के हमले में दो नवजात बच्चियों की मौत के बाद सरकारी अस्पताल ने शिशु शल्य चिकित्सा विभाग के प्रमुख को उनके पद से हटा दिया, जबकि अधीक्षक अचानक 15 दिन की छुट्टी पर चले गए.   महाराजा यशवंतराव अस्पताल में चूहों के हमले की घटनाओं की जांच करने वाली राज्य स्तरीय जांच कमेटी की रिपोर्ट के आधार पर अस्पताल प्रशासन ने प्रोफेसर डॉ. ब्रजेश लाहोटी को एमवायएच के शिशु शल्य चिकित्सा विभाग के प्रमुख पद से हटा दिया है. लाहोटी की जगह एसोसिएट प्रोफेसर डॉ. अशोक लड्ढा को नियुक्त किया गया है. इसी क्रम में, एमवायएच के अधीक्षक डॉ. अशोक यादव अपने 'बेहद खराब स्वास्थ्य' का हवाला देते हुए 15 दिन की छुट्टी पर चले गए हैं. चूहों के काटने से नवजात शिशुओं की मौत के मामले में एमवायएच प्रशासन पहले ही 6 अन्य अधिकारियों के खिलाफ अनुशासनात्मक कार्रवाई कर चुका है, जिसमें निलंबन और उनके संबंधित पदों से निष्कासन भी शामिल है. बता दें कि 31 अगस्त और 1 सितंबर की दरम्यानी रात को एमवायएच के आईसीयू में चूहों ने जन्मजात विकृतियों से ​​पीड़ित दो नवजात बच्चियों पर हमला कर दिया. बाद में दोनों की मौत हो गई. अस्पताल के अधिकारियों ने चूहों के काटने के बजाय, पहले से मौजूद गंभीर स्वास्थ्य समस्याओं और जन्मजात विकृतियों को इसका कारण बताया. इनमें से एक बच्ची का परिवार देवास जिले में रहता है, जबकि दूसरी नवजात के परिजन धार जिले के रहने वाले हैं. देवास और धार, इंदौर के पड़ोसी जिले हैं. उधर, आदिवासी संगठन 'जय आदिवासी युवा शक्ति (जयस)' शासकीय महात्मा गांधी स्मृति चिकित्सा महाविद्यालय के डीन डॉ. अरविंद घनघोरिया और एमवायएच अधीक्षक यादव को निलंबित करने और मौत के लिए जिम्मेदार अधिकारियों के खिलाफ गैर इरादतन हत्या का मामला दर्ज करने की मांग कर रहा है.

बिजली चोरी मामलों में समाधान का मौका: नेशनल लोक अदालत में होंगे निपटारे

लोक अदालत 13 सितंबर को भोपाल ऊर्जा मंत्री श्री प्रद्युम्न सिंह तोमर ने कहा है कि 13 सितंबर 2025 (शनिवार) को नेशनल लोक अदालत में बिजली चोरी एवं अन्‍य अनियमितताओं के प्रकरणों को समझौते के माध्यम से निराकृत किया जाएगा। उन्होंने विद्युत अधिनियम 2003 धारा 135 के अंतर्गत विद्युत चोरी के लंबित प्रकरणों एवं विशेष न्यायालयों में विचाराधीन प्रकरणों के निराकरण के लिए विद्युत उपभोक्ताओं एवं उपयोगकर्ताओं से अपील की है कि वे अप्रिय कानूनी कार्यवाही से बचने के लिए लोक अदालत में समझौता करने के लिए संबंधित बिजली कार्यालय से संपर्क करें। धारा 135 के अंतर्गत विद्युत चोरी के बनाए गए लंबित प्रकरण एवं अदालत में लंबित प्रकरणों में निराकरण के लिये निम्नदाब श्रेणी के समस्त घरेलू, समस्त कृषि, 5 किलोवॉट तक के गैर घरेलू एवं 10 अश्व शक्ति भार तक के औद्योगिक उपभोक्ताओं में प्रकरणों में ही छूट दी जाएगी। प्रि-लिटिगेशन स्तर पर – कंपनी द्वारा आकलित सिविल दायित्व की राशि पर 30 प्रतिशत एवं आकलित राशि के भुगतान में चूक किये जाने पर निर्धारण आदेश जारी होने की तिथि से 30 दिवस की अवधि समाप्त होने के पश्चात् प्रत्‍येक छः माही चक्रवृद्धि दर अनुसार 16 प्रतिशत प्रतिवर्ष की दर से लगने वाले ब्याज की राशि पर 100 प्रतिशत की छूट दी जाएगी। लिटिगेशन स्तर पर – कंपनी द्वारा आकलित सिविल दायित्व की राशि पर 20 प्रतिशत एवं आकलित राशि के भुगतान में चूक किये जाने पर निर्धारण आदेश जारी होने की तिथि से 30 दिवस की अवधि समाप्त होने के पश्चात् प्रत्येक छःमाही चक्रवृद्धि दर अनुसार 16 प्रतिशत प्रतिवर्ष की दर से लगने वाले ब्याज की राशि पर 100 प्रतिशत छूट दी जाएगी। कंपनी ने कहा है कि नेशनल लोक अदालत में छूट कुछ नियम एवं शर्तों के तहत दी जाएगी जो आकलित सिविल दायित्‍व राशि रू. 10,00,000 (दस लाख ) तक के प्रकरणों के लिए सीमित रहेगी। यह छूट मात्र नेशनल ‘‘लोक अदालत‘‘ 13 सितंबर 2025 को समझौते करने के लिये ही लागू रहेगी। विद्युत अधिनियम 2003 की धारा 126 के लंबित प्रकरणों में भी लोक अदालत की तर्ज पर छूट प्रदान कर प्रकरणों का निराकरण भी लोक अदालत के माह के दौरान किया जाएगा। लोक अदालत की प्रक्रिया के अनुरूप निर्धारित मापदंडों के अधीन 10 लाख रूपए तक की सिविल दायित्व की राशि के समस्त घरेलू, समस्त कृषि, 5 किलोवाट तक गैर घरेलू व 10 अश्वशक्ति के औद्योगिक श्रेणी के लंबित प्रकरणों का आवेदन संबंधित उप महा प्रबंधक को देना होगा, आकलित राशि पर 20 प्रतिशत एवं अधिशासित ब्‍याज राशि के भुगतान में चूक किए जाने पर निर्धारण आदेश जारी होने की तिथि से 30 दिवस की अवधि समाप्त होने पर, इसके पश्चात प्रत्येक 6 माही चक्रवर्ती ब्याज अनुरूप 16 प्रतिशत की दर से लगने वाले ब्याज की राशि पर, 100 फीसदी की छूट दी जाएगी। बशर्ते किसी प्रकरण में धारा 127 के अंतर्गत गठित अपील प्राधिकरण के समक्ष अथवा उच्‍च न्‍यायालय में कोई अपील लंबित न हो।  

सीएम डॉ. यादव ने पीएम मोदी के 17 सितंबर दौरे की तैयारियों का लिया जायज़ा

भोपाल मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने मुख्यमंत्री निवास में बुधवार की रात्रि को प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी के आगामी 17 सितम्बर को धार जिले में आगमन के संबंध में की जा रही तैयारियों की विभागवार जानकारी प्राप्त की। बैठक में मुख्य सचिव अनुराग जैन सहित संबंधित वरिष्ठ अधिकारियों के साथ चर्चा कर आवश्यक निर्देश दिए। मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने कार्यक्रम की रूपरेखा की जानकारी प्राप्त कर पीएम मित्रा पार्क के शिलान्यास सहित "स्वस्थ नारी सशक्त परिवार और पोषण" अभियान के संबंध में निर्देश दिए। प्रदेश में 17 सितम्बर से 2 अक्टूबर तक यह अभियान और स्वच्छता ही सेवा पखवाड़ा मनाया जाएगा। उल्लेखनीय है कि प्रधानमंत्री मोदी की जन्मदिन के अवसर पर मध्यप्रदेश को पीएम मित्रा पार्क की सौगात मिल रही है। यह देश के सात पीएम मित्रा पार्क में से प्रथम पार्क होगा, जहां शीघ्र कार्य प्रारंभ हो रहा है। मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने इस पार्क में विभिन्न औद्योगिक इकाइयों को आमंत्रित किया है। धार जिले सहित मालवा-निमाड़ अंचल के कपास उत्पादक किसानों के जीवन में पीएम मित्र पार्क निर्णायक परिवर्तन लाने का माध्यम बनेगा। बैठक में जानकारी दी गई कि पीएम मित्रा पार्क के माध्यम से एक लाख लोगों को प्रत्यक्ष और दो लाख लोगों को अप्रत्यक्ष रूप से रोजगार मिलेगा। पीएम मित्र पार्क युवाओं, महिलाओं, किसानों और निर्धन वर्ग के कल्याण की दिशा में केंद्र और राज्य सरकार की ठोस पहल है। धार जिले में आयोजित कार्यक्रम में स्वास्थ्य कियोस्क के अंतर्गत विभिन्न गतिविधियों का संयोजन किया गया है।  

यात्रियों के लिए खुशखबरी: नई दिल्ली-भोपाल शताब्दी एक्सप्रेस में बढ़ी सुरक्षा, लगे अत्याधुनिक सिस्टम

ग्वालियर देश की पहली शताब्दी एक्सप्रेस का दर्जा प्राप्त नई दिल्ली से ग्वालियर होते हुए भोपाल के रानी कमलापति स्टेशन तक जाने वाली ट्रेन को नए स्वचालित दरवाजों से लैस कर दिया गया है। दरवाजों को अब इमरजेंसी बटन और वैक्यूम लॉकिंग सिस्टम से जोड़ दिया गया है। गति पकड़ते ही ट्रेन के दरवाजे बंद हो जाएंगे। ट्रेन जब अगले स्टेशन के प्लेटफॉर्म पर पहुंचेगी या आउटर में रुकेगी, तभी ट्रेन के गेट खुल पाएंगे। इसके लिए ट्रेन के रैक में कोई परिवर्तन नहीं किया गया है, सिर्फ दरवाजों को बदलकर उनमें नया सिस्टम लगाया गया है। नए सिस्टम से रुकेंगे हादसे दरअसल, शताब्दी एक्सप्रेस में आरक्षण का सिस्टम कुछ ऐसा है कि एक स्टेशन से दूसरे स्टेशन के बीच बुक होने वाली ज्यादातर सीटें एक ही कोच में आवंटित की जाती हैं। ऐसे में स्टेशन पर उतरने के लिए यात्रियों की भीड़ जुट जाती है। कई यात्री जल्दी उतरने के चक्कर में प्लेटफॉर्म आने से पहले ही दरवाजा खोल देते थे और हादसों का शिकार हो जाते थे। ऐसी घटनाओं को रोकने के लिए नई व्यवस्था की जा रही है। ऐसी ही व्यवस्था हजरत निजामुद्दीन से ग्वालियर होते हुए वीरांगना लक्ष्मीबाई झांसी स्टेशन जाने वाली गतिमान एक्सप्रेस में भी है। चूंकि ये दोनों ट्रेनें एक जैसे रैक के साथ ही संचालित होती हैं, इसलिए इस रूट पर गतिमान के बाद शताब्दी एक्सप्रेस को भी इस सिस्टम से जोड़ा गया है। रेल मंडल झांसी के जनसंपर्क अधिकारी मनोज कुमार सिंह का कहना है कि इस बदलाव से सफर भी सुरक्षित रहेगा और दुर्घटना की आशंका कम होगी। लोको पायलट के पास कंट्रोल, प्लेटफॉर्म की तरफ के गेट ही खुलेंगे इन दरवाजों का कंट्रोल लोको पायलट और गार्ड के पास रखा गया है। यह भी सुनिश्चित किया गया है कि जब ट्रेन किसी स्टेशन पर पहुंचती है, तो सिर्फ उसी दिशा के दरवाजे खुलें जिस तरफ प्लेटफॉर्म रहेगा। दूसरी दिशा के दरवाजों को बिना लोको पायलट की मर्जी के नहीं खोला जा सकता है। इससे इन लक्जरी ट्रेनों में अनावश्यक प्रवेश को भी रोका जा सकता है। बेस किचन हुई शिफ्ट, खाने का समय भी बदला शताब्दी एक्सप्रेस में यात्रा कर रहे यात्रियों के खाने के समय में भी परिवर्तन किया गया है। पहले ग्वालियर में इस ट्रेन का बेस किचन था और यहीं से खाना ट्रेन में भेजा जाता था। ऐसे में यात्रियों को झांसी स्टेशन गुजरने के बाद लगभग साढ़े 11 बजे खाना परोसा जाता था। अब बेस किचन को झांसी में ही शिफ्ट कर दिया गया है। ऐसे में यात्रियों को अब ललितपुर गुजरने के बाद लगभग साढ़े 12 बजे खाना परोसा जाता है। भोपाल से लौटते समय ग्वालियर स्टेशन से ट्रेन गुजरने के बाद खाना परोसना शुरू किया जाता है।