samacharsecretary.com

मध्यप्रदेश में रोजगार का सुनहरा मौका, PM मोदी 17 सितंबर को पीएम मित्रा पार्क का करेंगे उद्घाटन

 धार  प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी 17 सितंबर को मध्य प्रदेश के धार जिले के प्रवास पर आने वाले हैं, और वे यहां पीएम मित्रा पार्क का भूमिपूजन करेंगे। यह देश का पहला पीएम मित्रा पार्क होगा। देश में कुल सात पीएम मित्रा पार्क बनने हैं। 17 सितंबर को ही प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी का जन्मदिन है। इसी दिन वह मध्य प्रदेश को बड़ी सौगात देने वाले हैं। पीएम मित्रा पार्क का करेंगे शिलान्यास मुख्यमंत्री मोहन यादव ने कहा है कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी 17 सितंबर को मध्यप्रदेश आएंगे। प्रधानमंत्री मोदी धार जिले की बदनावर तहसील के ग्राम भैसोला में स्वस्थ नारी, सशक्त परिवार अभियान का शुभारंभ, सेवा पखवाड़ा तथा यहां देश के पहले पीएम मित्रा पार्क का शिलान्यास करेंगे। प्रधानमंत्री मोदी की इस यात्रा से प्रदेश के जनजातीय बहुल मालवा अंचल में किसानों को एक बहुत बड़ी सौगात मिलने जा रही है। टेक्सटाइल इंडस्ट्री को मिलेगी पहचान मुख्यमंत्री यादव ने बताया कि प्रदेश का धार, झाबुआ, उज्जैन और निमांड का खरगोन, बड़वानी सबसे बडा कपास उत्पादक क्षेत्र है। ऐसे में केंद्र सरकार की ओर से मध्यप्रदेश में कॉटन आधारित बडे इंडस्ट्रियल पार्क की स्थापना होने जा रही है, यह देशभर में मंजूर 7 पीएम मित्रा पार्क में से पहला पार्क है जिसका भूमि-पूजन होने जा रहा है। तीन लाख नए रोजगार के अवसर होंगे सृजित पीएम मित्रा पार्क से 1 लाख प्रत्यक्ष और 2 लाख से अधिक अप्रत्यक्ष, कुल मिलाकर 3 लाख रोजगार के अवसर सृजित होंगे। अधिकारियों के साथ हुई बैठक में मुख्यमंत्री यादव ने कहा कि धार में पीएम मित्र पार्क का शिलान्यास प्रदेश की अर्थव्यवस्था को गति प्रदान करने वाला गौरवशाली क्षण होगा। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी का यह दौरा प्रदेश के विकास के लिए मील का पत्थर सिद्ध होगा। CM ने कहा कि प्रधानमंत्री मोदी 17 सितंबर को 'स्वस्थ नारी, सशक्त परिवार' अभियान का शुभारंभ 'सुमन सखी' चैटबॉट को भी लांच करेंगे. इसके अलावा जनजातीय स्व-सहायता समूहों से स्वदेशी उत्पादों की खरीद और यूपीआई से भुगतान, सेवा पर्व समेत आदि कर्मयोगी अभियान का शुभारंभ करेंगे.  PM मोदी 'एक बगिया मां के नाम' अभियान के तहत महिला लाभार्थियों को पौधों का वितरण, एक करोड़ सिकल सेल कार्ड के वितरण सहित स्वदेशी पखवाड़े का शुभारंभ भी करेंगे.  कार्यक्रम में लाड़ली बहनें, स्व-सहायता समूह के सदस्य, स्वास्थ्य और स्वावलंबन योजना के हितग्राही सहित टेक्सटाइल औरगारमेंट क्षेत्र के प्रमुख उद्यमी, युवा उद्यमी, महिला उद्यमी और हितग्राही मौजूद रहेंगे.  अन्य कार्यक्रम भी होंगे वहां बैठक में मुख्यमंत्री यादव ने कहा कि प्रधानमंत्री मोदी 17 सितंबर को स्वस्थ नारी, सशक्त परिवार अभियान का शुभारंभ सुमन सखी चैटबॉट को लॉन्च करेंगे। पीएम मित्रा पार्क का शिलान्यास करेंगे। जनजातीय स्व-सहायता समूहों से स्वदेशी उत्पादों की खरीद और यूपीआई से भुगतान, सेवा पर्व एवं आदि कर्मयोगी अभियान का शुभारंभ करेंगे। प्रधानमंत्री मोदी एक बगिया मां के नाम अभियान के तहत महिला लाभार्थियों को पौधों का वितरण और एक करोड़ सिकल सेल कार्ड के वितरण सहित स्वदेशी पखवाड़े का शुभारंभ भी करेंगे। प्रदेश के विकास के लिए मील का पत्थर सिद्ध होगा पीएम का दौरा पीएम मोदी धार जिले के दौरे पर जनजातीय स्व-सहायता समूहों से स्वदेशी उत्पादों की खरीद और यूपीआई से भुगतान, सेवा पर्व एवं आदि कर्मयोगी अभियान का शुभारंभ करेंगे. इस दौरान एक बगिया मां के नाम अभियान के तहत महिला लाभार्थियों को पौधों का वितरण और एक करोड़ सिकल सेल कार्ड के वितरण सहित स्वदेशी पखवाड़े का शुभारंभ भी करेंगे.

स्वास्थ्य में बड़ा कदम: MP में शुरू होगी ‘सीएम केयर’ योजना, सुपर स्पेशियलिटी ट्रीटमेंट अब आसान

भोपाल मध्य प्रदेश सरकार सीएम केयर नामक नई स्वास्थ्य बीमा योजना( Health Insurance Scheme) शुरू करने जा रही है, जिससे 10 लाख से अधिक कर्मचारियों, अधिकारियों और पेंशनर्स को कैशलेस इलाज की सुविधा मिलेगी। कर्मचारियों के लिए 20 लाख तक और पेंशनर्स के लिए 5 लाख तक इलाज कैशलेस होगा।  मध्य प्रदेश सरकार सीएम केयर योजना प्रारंभ करेगी। इसमें पूरा जोर सुपर स्पेशियलिटी सेवाएं उपलब्ध कराने को लेकर रहेगा। कैंसर, हृदय संबंधी बीमारियों के उपचार के लिए बड़े अस्पताल बनाए जाएंगे। इसमें अगले पांच वर्ष में दो हजार करोड़ रुपये खर्च होंगे। यह अभी प्रारंभिक आकलन है। परियोजना आगे बढ़ने के बाद लागत और बढ़ जाएगी। वित्त विभाग ने भी इस पर सहमति दे दी है। अब शीघ्र ही इसका प्रस्ताव कैबिनेट में लाया जाएगा। योजना के अंतर्गत जबलपुर मेडिकल कॉलेज में बने स्टेट कैंसर इंस्टीट्यूट को 200 बिस्तर से बढ़ाकर 600 बिस्तर का किया जाएगा। प्रदेश स्तर का एक स्टेट कार्डियोलॉजी सेंटर बनेगा, हालांकि इसके लिए अभी स्थान का चयन नहीं किया गया है। इंदौर, भोपाल, ग्वालियर, जबलपुर, रीवा और सागर मेडिकल कॉलेजों में आंकोलॉजी (कैंसर), आंको सर्जरी, कॉर्डियोलॉजी और कॉर्डियक सर्जरी विभाग प्रारंभ किए जाएंगे। मध्य प्रदेश में बढ़ रहे अंगदान सभी जगह 100-100 बिस्तर होंगे। बाद में नेफ्रोलॉजी यानी किडनी रोग और यूरोलॉजी विभाग भी प्रारंभ होंगे। अंग प्रत्यारोपण के लिए भी प्रदेश स्तरीय संस्थान बनाया जाएगा, जिसमें लिवर, किडनी, हार्ट, फेफड़ा और कार्निया ट्रांसप्लांट की सुविधा रहेगी। उल्लेखनीय है कि प्रदेश में लाइव और ब्रेन डेड दोनों तरह के अंगदान बढ़ रहे हैं। सभी सरकारी मेडिकल कॉलेजों में अंग निकालने की सुविधा चरणबद्ध तरीके से प्रारंभ की जा रही है। एक अस्पताल में अंग प्रत्यारोपण प्रारंभ होने से विभिन्न विभागों के बीच बेहतर समन्वय हो सकेगा। प्रदेश में पर्याप्त सुविधाएं नहीं होने के कारण कई बार हार्ट, फेफड़ा आदि को दूसरे राज्यों में भेजना पड़ता है। वर्तमान रिम्बर्समेंट प्रक्रिया  वर्तमान में, कर्मचारियों को इलाज कराने के बाद खर्च की गई राशि के लिए अपने संबंधित विभागों में आवेदन करना पड़ता है। इसके लिए डॉक्टर या मेडिकल बोर्ड की मंजूरी आवश्यक होती है। अस्पताल में भर्ती होने पर 5 लाख तक के क्लेम की मंजूरी संभागीय अस्पताल के डीन की अध्यक्षता वाली कमेटी देती है। 5 लाख से 20 लाख तक के क्लेम के लिए उच्च स्तर की कमेटी निर्णय लेती है। बाह्य रोगी इलाज में एक साल में अधिकतम 20 हजार रुपये तक का रिम्बर्समेंट मिलता है। रिम्बर्समेंट प्रक्रिया की मुख्य समस्याएं लंबा इंतजार: रिम्बर्समेंट मिलने में महीनों लग जाते हैं, जिससे कर्मचारियों को आर्थिक परेशानियों का सामना करना पड़ता है। बजट की कमी: अधिकांश बजट शहरों के कर्मचारियों पर खर्च हो जाता है, जिससे ग्रामीण क्षेत्रों या फील्ड कर्मचारियों तक बजट नहीं पहुंच पाता। आर्थिक दबाव: इलाज के लिए कर्मचारियों को पहले खुद भुगतान करना पड़ता है, जो कई बार मुश्किल हो जाता है। जल्द ही मिलेगी मजूरी  वित्त एवं स्वास्थ्य विभाग ने योजना को लगभग अंतिम रूप दे दिया है । मुख्यमंत्री के साथ अंतिम बातचीत के बाद इसे जल्द ही कैबिनेट से मंजूरी मिल जाएगी । इस योजना के लागू होने से कर्मचारियों की पुरानी मांग पूरी होगी और इलाज की प्रक्रिया में पारदर्शिता एवं सुविधा बढ़ेगी । कैबिनेट में आएगा प्रस्ताव     सीएम केयर योजना के तहत मुख्य रूप से मध्य प्रदेश में सुपर स्पेशियलिटी सेवाओं को सुदृढ़ किया जाएगा। इसमें कई तरह की सेवाओं को शामिल किया जाएगा। अभी इसका प्रस्ताव कैबिनेट में जाना है। इससे सुपर स्पेशियलिटी की सीटें भी बढ़ेंगी। – संदीप यादव, प्रमुख सचिव, स्वास्थ्य एवं चिकित्सा शिक्षा।  

मध्यप्रदेश ने आंगनवाड़ी भवन निर्माण में बनाया रेकॉर्ड, पीएम-जनमन कार्यक्रम में मिली सराहना

 विशेष पिछड़ी जनजाति बैगा, भारिया और सहरिया समुदाय को मिलेगा लाभ भोपाल प्रधानमंत्री जनजाति आदिवासी न्याय अभियान (PM-JANMAN) के अंतर्गत मध्यप्रदेश ने एक और महत्वपूर्ण उपलब्धि हासिल की है। प्रदेश में निवासरत विशेष पिछड़ी जनजाति बैगा, भारिया और सहरिया समुदाय के लिये स्वीकृत 217 आंगनवाड़ी भवनों में से 100 भवनों का तय समय-सीमा से पहले निर्माण कार्य पूर्ण कर लिया गया है। इस उपलब्धि के साथ मध्यप्रदेश योजना के क्रियान्वयन में देश का अग्रणी राज्य बन गया है। निर्धारित लक्ष्य की दिशा में ठोस कदम उठाते हुए प्रथम चरण में बड़ी प्रगति दर्ज करते हुए शेष 117 आंगनवाड़ी भवनों का निर्माण 31 मार्च 2026 तक पूरा कर लिया जाएगा। पीएम जन-मन का लक्ष्य और महत्व भारत सरकार द्वारा वर्ष 2024 से 2026 के बीच संचालित बहुउद्देशीय पीएम-जनमन अभियान का मुख्य उद्देश्य विशेष पिछड़ी जनजातीय समूहों बैगा, भारिया और सहरिया समुदायों को शिक्षा, पोषण, स्वास्थ्य और आधारभूत सुविधाओं से जोड़ना है। इस अभियान में नये आंगनवाड़ी केंद्रों का निर्माण, पक्के भवनों की व्यवस्था और पूरक पोषण आहार का नियमित प्रदाय सुनिश्चित किया जा रहा है। इन आंगनवाड़ी केंद्रों के माध्यम से मातृ एवं शिशु स्वास्थ्य सेवाओं में सुधार होगा, बच्चों को प्रारंभिक शिक्षा एवं पोषण मिलेगा, साथ ही जनजातीय समुदायों के समग्र विकास को प्रोत्साहन मिलेगा। जिलेवार निर्माण और निवेश शिवपुरी जिले में 39, श्योपुर में 37, शहडोल में 29, उमरिया में 23, गुना में 14, डिंडौरी में 12, अशोकनगर में 11, अनूपपुर में 7, मंडला एवं दतिया में 6-6, विदिशा, बालाघाट, ग्वालियर एवं सीधी में 5-5, जबलपुर एवं छिंदवाड़ा में 4-4, मुरैना में 2 तथा कटनी, भिंड और रायसेन में 1-1 आंगनवाड़ी भवन स्वीकृत किए गए हैं। प्रत्येक भवन पर लगभग 12 लाख रुपये का व्यय किया जा रहा है। सामाजिक-आर्थिक विकास का मजबूत आधार यह पहल जनजातीय बहुल इलाकों में नई उम्मीद और बदलाव की शुरुआत है। आंगनवाड़ी भवनों का निर्माण केवल भौतिक संरचना नहीं बल्कि सामाजिक-आर्थिक विकास का मजबूत आधार भी है। इनके माध्यम से जहां बच्चों को बेहतर पोषण और शिक्षा उपलब्ध होगी, वहीं महिलाओं के स्वास्थ्य एवं सशक्तिकरण में भी उल्लेखनीय सुधार आएगा। प्रधानमंत्री जनजाति आदिवासी न्याय अभियान का यह चरण देश में जनजातीय कल्याण के लिए एक आदर्श मॉडल के रूप में देखा जा रहा है और मध्यप्रदेश ने इसे लागू करने में अग्रणी भूमिका निभाई है।  

मोहन भागवत का इंदौर आगमन, 13 सितंबर को करेंगे पुस्तक विमोचन; 8 महीने में चौथा दौरा

इंदौर  RSS (राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ) के प्रमुख डॉ. मोहन भागवत 13 सितंबर को इंदौर में रहेंगे। सरसंघचालक भागवत का यह इंदौर में साल का चौथा दौरा है। इस बार मोहन भागवत इंदौर में पुस्तक विमोचन कार्यक्रम में शामिल होने आ रहे हैं। भागवत 14 सितंबर रविवार शाम तक इंदौर में रहेंगे। रविवार दोपहर 3.15 बजे स्थानीय ब्रिलिएंट कन्वेंशन सेंटर में पुस्तक विमोचन कार्यक्रम में सम्मिलित होंगे। सूत्रों की माने तो मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव, राज्य मंत्रिमंडल के कई सदस्य और कुछ गणमान्य लोग भी समारोह में उपस्थित रहेंगे। बता दें की पटेल ने यह पुस्तक अपनी नर्मदा परिक्रमा के दौरान लिखी थी। उन्होंने दो बार 1994 और 2007 में पैदल नर्मदा परिक्रमा की थी। संघ प्रमुख का यह चौथा दौरा संघ प्रमुख का पिछले 8 महीने में यह चौथा इंदौर का दौरा है। इससे पहले वह 3 जनवरी 2025, 13 जनवरी 2025 और 10 अगस्त 2025 में इंदौर आ चुके हैं। इस साल इन कार्यक्रम में आ चुके हैं संघ प्रमुख     डॉ. मोहन भागवत इस साल सबसे पहले 3 जनवरी को इंदौर आए थे। वह इंदौर में आरएसएस के शताब्दी कार्यक्रम स्वर शतकम में हुए शामिल थे। इस दौरान उन्होंने कहा था कि हर अग्रपंक्ति में हमारा देश होना चाहिए। ऐसा भारत संघ के कार्य से खड़ा होगा और इसलिए संघ कार्य में जो करना आवश्यक होगा, वह मैं करूंगा।     दूसरी बार डॉ. भागवत इंदौर में 13 जनवरी को आए थे। इस दौरान उन्होंने इंदौर में श्री रामजन्म भूमि तीर्थ ट्रस्ट के महामंत्री चंपत राय को देवी अहिल्या राष्ट्रीय पुरस्कार से सम्मानित किया था। तब उन्होंने कहा था कि लोग पूछते थे कि राम मंदिर क्यों जरूरी? रोजगार, गरीबी, स्वास्थ्य और मूलभूत सुविधाओं की बात क्यों नहीं करते। मैं कहता था कि रोजगार, खुशहाली का रास्ता भी राम मंदिर से होकर जाता है। हमने हमेशा समाजवाद, रोजगार, गरीबी की बात की, लेकिन क्या हुआ। हमारे साथ चले जापान-इजराइल आज कहां से कहां पहुंच गए।     तीसरी बार संघ प्रमुख 10 अगस्त यानी रक्षाबंधन के दूसरे इंदौर में आए थे। इस दौरान मोहन भागवत ने 96 करोड़ रुपए की लागत से तैयार हुए कैंसर केयर हॉस्पिटल का उद्घाटन किया था। तब भागवत ने सभी जाति-बिरादरी के प्रमुखों से कमजोर वर्गों को ऊपर उठाने के लिए मिलकर प्रयास करने की अपील की। उन्होंने कहा देश में आज शिक्षा और स्वास्थ्य आम लोगों की पहुंच से बाहर हो गए हैं। इन दोनों ही सेवाओं को कमर्शियल बना दिया गया है।

बदल गया बागेश्वर धाम का शेड्यूल: पंडित धीरेंद्र कृष्ण शास्त्री ने बताई 7 दिन की खास दिनचर्या

छतरपुर बागेश्वर धाम पर आने वाले श्रद्धालुओं को यह जानने के लिए उत्सुकता रहती थी कि कथावाचक पंडित धीरेंद्र कृष्ण शास्त्री का दरबार कब लगेगा। कब उनके दर्शन हो सकेंगे। तो आपको बता दें कि धाम पर अब सात दिन में पांच दिन दरबार लगाया जाएगा। जिसमें नई अर्जी, पुरानी पेशी सहित प्रेतराज का दरबार शामिल हैं। इसे लेकर धाम के कथावाचक पंडित धीरेंद्र कृष्ण शास्त्री ने नई व्यवस्था को लेकर सात दिन की नियमावली बताई है। धीरेंद्र शास्त्री ने शेयर किया वीडियो इस नियमावली के अनुसार ही धाम पर दरबार लगाया जाएगा और अन्य कार्य किए जाएंगे। इस लेकर शास्त्री जी ने एक वीडियो जारी किया है और उस वीडियो में उन्होंने सात दिन की नियमावली बनाई है। आपको बता दें कि धाम पर देशभर से श्रद्धालु रोजाना पहुंचते हैं और शनिवार मंगलवार को तो अत्यधिक भीड़ होती है। अब लोगों को यह जानकारी रहेगी कि वह कब कौन सा दरबार लगाएंगे। रविवार को वह किसी से नहीं मिलेंगे। इस दिन वह धाम की व्यवस्थाओं पर ध्यान देंगे।   यह है धाम की सात दिन की नियमावली सोमवार- नई अर्जी का दरबार लगाया जाएगा। मंगलवार- पुरानी पेशी का दरबार लगाया। बुधवार- नई अर्जी का दरबार लगेगा। जिनके पर्चा नहीं बने उनका दरबार लगेगा। गुरुवार- हर गुरुवार को बागेश्वर धाम पर रहेंगे और श्रद्धालुओं से मिलेंगे। शुक्रवार- नई अर्जी का दरबार लगाया जाएगा। लोगों की समस्याएं बालाजी तक पहुंच सकेंगी। शनिवार- प्रेतराज सरकार का दरबार लगाया जाएगा। रविवार- धाम की व्यवस्थाओं पर ध्यान दिया जाएगा। अन्नपूर्णा की व्यवस्था और अस्पताल की व्यवस्थाओं पर ध्यान देंगे। इस दिन किसी से नहीं मिलेंगे।

चौंकाने वाला मामला: 15 दिन पहले जन्मे जुड़वां बच्चों की मौत, जांच के लिए कब्र से शव निकाला गया

धार ग्राम कछवानिया में 15 दिन पूर्व जन्मे जुड़वां बच्चों की मौत हो गई। तबीयत बिगड़ने पर स्वजन दोनों को धामनोद अस्पताल ले गए थे, जहां से लौटने के बाद आधे घंटे के अंदर दोनों बच्चों की मौत हो गई। स्वजन ने पहले एक शिशु को दफना दिया था, लेकिन बाद में पूरे मामले की जांच के लिए दफनाए गए शव को खोदकर निकाला गया। इंदौर भेजे गए दोनों शव दोनों शवों को पोस्टमार्टम के लिए इंदौर भेजा गया है। धामनोद पुलिस ने मर्ग कायम कर जांच शुरू कर दी है। कछवानिया निवासी शिवकन्या पत्नी विनोद ने 26 अगस्त को धामनोद सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र में जुड़वां शिशुओं को जन्म दिया था। ग्रामीणों और स्वजन ने दोनों बच्चों की मौत पर संदेह जताया और मामले की जांच की मांग की।   पोस्टमार्टम के लिए एमवाय अस्पताल भेजे गए शव बुधवार सुबह तहसीलदार कुणाल अवास्या और धामनोद पुलिस की मौजूदगी में दफनाए गए शिशु के शव को निकाला गया। शवों को धामनोद अस्पताल लाया गया, जहां से उन्हें पोस्टमार्टम के लिए एमवाय अस्पताल इंदौर भेजा गया। धामनोद सीबीएमओ डा. कीर्ति बैरागी के मुताबिक, पीएम रिपोर्ट से ही मौत के कारण का पता हो पाएगा।

फार्मेसी पंजीयन प्रक्रिया होगी पूरी तरह ऑनलाइन, पूरी पारदर्शिता से करें प्रकरणों का निराकरण : उप मुख्यमंत्री शुक्ल

मध्यप्रदेश स्टेट फार्मेसी परिषद की बैठक हुई भोपाल  उप मुख्यमंत्री श्री राजेन्द्र शुक्ल ने कहा कि अब ऑनलाइन प्रणाली से घर बैठे पंजीयन प्रमाणपत्र मेल और डिजिलॉकर के माध्यम से उपलब्ध होंगे। इससे पंजीयन प्रक्रिया सुव्यवस्थित हुई है और लंबित मामलों का निपटारा तेजी से किया जा रहा है। उन्होंने कहा कि लगभग 50 प्रतिशत विद्यार्थियों के आवेदन अपूर्ण हैं, जिन्हें समय पर पूरा करवाना आवश्यक है। उप मुख्यमंत्री श्री शुक्ल होटल पलाश भोपाल में मध्यप्रदेश स्टेट फार्मेसी परिषद की बैठक में शामिल हुए। उप मुख्यमंत्री श्री शुक्ल ने कहा कि प्राइवेट विश्वविद्यालयों एवं महाविद्यालयों की जिम्मेदारी है कि वे सभी विद्यार्थियों की सही जानकारी उपलब्ध कराएँ। यदि गलती छात्रों की है तो उन्हें सुधार के लिये सूचित किया जाए और यदि संस्थान की लापरवाही है तो मान्यता एवं एफिलिएशन पर कार्रवाई करें। उप मुख्यमंत्री ने कहा कि फार्मासिस्ट, पैरामेडिकल और नर्सिंग स्टाफ राज्य की स्वास्थ्य सेवाओं की रीढ़ हैं। विकसित और स्वस्थ भारत के लिए गुणवत्तापूर्ण मानव संसाधन उपलब्ध कराना सरकार की प्राथमिकता है। बैठक में जून 2025 से अगस्त 2025 तक की कार्यप्रगति की समीक्षा की गई। इसमें 3500 से अधिक नए पंजीयन सफलतापूर्वक पूर्ण हुए, 5800 आवेदन प्रक्रिया में लंबित रहे तथा 1650 आवेदन निजी विश्वविद्यालयों की सूची उपलब्ध न होने के कारण शेष रहे। बताया गया कि संपूर्ण कार्यप्रणाली को अब डिजिटल मोड पर स्थानांतरित कर दिया गया है। इसमें समग्र आईडी, डिजिलॉकर, विवाह एवं निवास प्रमाणपत्र तथा एफडीए का एकीकरण किया गया है। नई प्रणाली से स्लॉट बुकिंग एवं परिषद कार्यालय में उपस्थित होकर सत्यापन कराने की आवश्यकता समाप्त होगी और सिस्टम आधारित ऑटो वेरिफिकेशन से प्रमाणपत्र सीधे डिजिलॉकर पर उपलब्ध होंगे। यह पहल परिषद को डिजिटल गवर्नेंस में देश की अग्रणी परिषद बनाएगी। बैठक में परिषद अध्यक्ष श्री संजय कुमार जैन, सदस्य श्री राजू चतुर्वेदी, श्री गौतमचंद धींग, श्री रामरतन गर्ग, श्री सत्येन्द्र सिंह चौहान, श्री देवेंद्र कुमार बजाजत्य, श्री अशोक जैन एवं डॉ. पवन दुबे सहित श्री दिनेश मौर्य (ड्रग कंट्रोलर, म.प्र.), श्री आत्री मुख्य विश्लेषक और चिकित्सा शिक्षा, स्वास्थ्य एवं तकनीकी शिक्षा विभाग के प्रतिनिधि शामिल हुए। परिषद की रजिस्ट्रार श्रीमती भव्या त्रिपाठी ने प्रगति और आगामी योजनाओं का विस्तृत प्रस्तुतीकरण दिया।

टीकमगढ़ परीक्षण संभाग को एम.पी. ट्रांसको की सर्वोत्तम दक्षता ट्रॉफी

भोपाल  मध्यप्रदेश पॉवर ट्रांसमिशन कंपनी (एम.पी. ट्रांसको) के टीकमगढ़ परीक्षण संभाग ने उत्कृष्ट प्रदर्शन कर प्रदेश में पहला स्थान प्राप्त किया है। इस उपलब्धि के लिए टीकमगढ़ को राज्य स्तरीय सर्वोत्तम दक्षता ट्रॉफी से सम्मानित किया गया। जबलपुर मुख्यालय में आयोजित समारोह में एम.पी. ट्रांसको के प्रबंध संचालक श्री सुनील तिवारी ने यह ट्रॉफी टीकमगढ़ टीम को प्रदान की। टीकमगढ़ की ओर से कार्यपालन अभियंता श्री आर.पी. कान्यकुब्ज, सहायक अभियंता श्री जी.पी. राय और श्रीमती चंदा यादव ने यह सम्मान ग्रहण किया। प्रबंध  संचालक श्री सुनील तिवारी ने कहा कि सीमित संसाधनों के बावजूद टीकमगढ़ की टीम की यह उपलब्धि सभी के लिए प्रेरणा है। 

प्रदेश के 9300 हाई एवं हायर सेकण्डरी स्कूलों में 12 सितंबर को उमंग दिवस

बच्चों को जीवन कौशल शिक्षा देने के लिये चलाया जा रहा है कार्यक्रम भोपाल "उमंग है तो जिंदगी में रंग है" इस थीम पर आधारित उमंग दिवस का आयोजन 12 सितम्बर को प्रदेश के 9 हजार 300 हाई एवं हायर सेकेंडरी स्कूलों में किया जा रहा है। इस कार्यक्रम का लाभ 20 लाख से अधिक बच्चों को मिलेगा। इस कार्यक्रम का उद्देश्य विद्यार्थियों को विश्व स्वास्थ्य संगठन (डब्ल्यूएचओ) द्वारा निर्धारित 10 जीवन कौशलों से परिचित करवाना है। कार्यक्रम की मदद से बच्चे जीवन में आने वाले चुनौतियों का सामना मजबूती से कर सकेंगे। कार्यक्रम का एक और उद्देश्य है कि बच्चों को जीवन में आगे बढ़ने के लिए तैयार किया जाये। यह कार्यक्रम स्कूल शिक्षा विभाग एवं संयुक्त राष्ट्र जनसंख्या कोष (यूएनएफपीए) के सहयोग से तैयार किया गया है। जीवन कौशल शिक्षा आधारित करिकुलम और उसके संचालन में की गई पिछले 7 वर्षों की कड़ी मेहनत से बच्चों के जीवन में आए सकारात्मक बदलाव को उत्साह के रूप में मनाना है। कार्यक्रम में बच्चे एक-दूसरे के अनुभवों को साझा करते हैं और अन्य विद्यार्थियों को प्रोत्साहित एवं मार्गदर्शित करते है। उमंग स्कूल हेल्थ एवं वेलनेस कार्यक्रम एक फ्लैगशिप प्रोग्राम है जिसमें गतिविधि आधारित कक्षावार जीवन कौशल शिक्षा के मॉड्यूल हैं जिसे शिक्षा विभाग, स्वास्थ विभाग एवं यूनाईटेड नेशन्स पॉप्युलेशन फंड (यूएनएफपीए) की बराबर भागीदारी से मिलकर चलाया जा रहा है। प्रदेश की सभी शासकीय हाई एवं हॉयर सेकेंडरी स्कूलों में प्रत्येक मंगलवार को एक सत्र लिया जाता है। प्रत्येक शाला से 2 शिक्षकों को (एक पुरुष एवं एक महिला) हेल्थ एवं वेलनेस एंबेसेडर के रूप में प्रशिक्षित किया गया है। राज्य में अब तक लगभग 19 हजार शिक्षकों को प्रशिक्षित किया जा चुका है। यह प्रशिक्षित शिक्षक हेल्थ एंड वैलनेस एम्बेसडर कक्षाओं में जीवन कौशल गतिविधियों का संचालन करते हैं। उमंग दिवस के कार्यक्रम में विभिन्न विभाग के अधिकारी एवं मोटिवेशनल वक्ताओं को भी शिक्षण संस्था में आमंत्रित किया जाएगा, जिससे विद्यार्थी आगे बढ़ाने के लिए और उत्साह पूर्वक कदम बढ़ाने के लिए प्रेरित हो सकें। इस कार्यक्रम में न केवल विद्यार्थियों को बल्कि शाला में उपस्थित प्रत्येक शिक्षक को भी इस विषय से अवगत होने का मौका मिलेगा।  

माँ नर्मदा की उद्गम स्थली में कपिलधारा पहुँच मार्ग का भूमिपूजन

गुणवत्ता से कोई समझौता नहीं होगा : लोक निर्माण मंत्री सिंह भोपाल  लोक निर्माण मंत्री श्री राकेश सिंह ने अमरकंटक में कपिलधारा पहुँच मार्ग का भूमिपूजन किया। माँ नर्मदा की उद्गम स्थली को नमन करते हुए उन्होंने कहा कि यह मार्ग केवल सड़क नहीं बल्कि श्रद्धा और आस्था को आधुनिकता से जोड़ने वाला पथ बनेगा। कपिलधारा जलप्रपात, जिसे ऋषि कपिल की तपोभूमि माना जाता है, हर वर्ष लाखों श्रद्धालुओं और पर्यटकों को आकर्षित करता है। मंत्री श्री सिंह ने बताया कि पाँच किलोमीटर लंबे इस नए पहुँच मार्ग को ऐसा रूप दिया जाएगा, जिससे यह केवल सड़क न लगकर एक पर्यटन स्थल जैसा अनुभव प्रदान करेगा।इस दो लेन चौड़े मार्ग पर पैदल यात्रियों के लिए फुटपाथ, छायादार आश्रय स्थल, कम्पोस्ट शौचालय और सौर ऊर्जा से संचालित दीपक लगाए जाएँगे। मार्ग की बाउंड्री पर कपिल मुनि की तपस्या, राजा सगर के पुत्रों और माँ गंगा के अवतरण की गाथाएँ उकेरी जाएँगी। मंत्री श्री सिंह ने कहा कि यह मॉडल भीमबेटका और भोजपुर जैसे स्थलों पर भी लागू किया जाएगा। समीक्षा बैठक में विभागीय निर्णय लोक निर्माण विभाग की समीक्षा बैठक में प्रदेश के मुख्य अभियंता उपस्थित रहे। बैठक में विभागीय प्रस्तुतियाँ दी गईं। मंत्री श्री सिंह ने गुणवत्ता पर कड़ा रुख अपनाते हुए कहा कि किसी भी प्रकार की ढिलाई बर्दाश्त नहीं की जाएगी। उन्होंने कहा कि कुछ अधिकारियों ने औचक निरीक्षणों में सख़्ती दिखाई है, वहीं कुछ ने बिल्कुल भी कार्रवाई नहीं की। यह रवैया अब स्वीकार्य नहीं होगा। उन्होंने घोषणा की कि अच्छा काम करने वालों को सम्मान और लापरवाही करने वालों को दंड मिलेगा। लोक कल्याण सरोवर योजना पर जोर बैठक में लोक कल्याण सरोवर योजना पर चर्चा हुई। मंत्री श्री सिंह ने निर्देश दिए कि प्रत्येक परिक्षेत्र में 10-10 सरोवरों का चयन कर मुख्य अभियंता स्वयं उनका भौतिक निरीक्षण करें। इन सरोवरों पर सूचना पट्टिकाएँ लगाई जाएँ और इन्हें स्थानीय समाज के लिए उपयोगी धरोहर बनाया जाए। टेक्नोलॉजी आधारित नवाचार मंत्री श्री सिंह ने बताया कि 18 से 20 सितम्बर तक प्रदेश की सभी सड़कों और पुलों का सर्वेक्षण रोड़ ट्रेकिंग एंड सर्वे मोबाइल ऐप से किया जाएगा। यह ऐप मुख्यमंत्री द्वारा अभियंता दिवस पर लोकार्पित किए जाने का प्रस्ताव है। भास्कराचार्य संस्थान द्वारा तैयार मास्टर प्लान रोड मैपिंग टूल पर भी चर्चा हुई, जिसे 1 नवम्बर को मध्यप्रदेश स्थापना दिवस पर लॉन्च करने का लक्ष्य रखा गया है। मंत्री श्री सिंह ने कहा कि इस टूल से सड़क योजना वैज्ञानिक और डेटा आधारित होगी। नर्मदा परिक्रमा पथ का विकास बैठक में नर्मदा परिक्रमा पथ पर प्रस्तुतीकरण भी दिया गया। मंत्री श्री सिंह ने कहा कि यह पथ श्रद्धालुओं के लिए केवल एक रास्ता नहीं होगा, बल्कि आस्था और संस्कृति का अनुभव बनेगा। इसमें ठहरने, भोजन और शौचालय जैसी सुविधाएँ होंगी। घाटों और मंदिरों का जीर्णोद्धार होगा तथा पूरी योजना ईको-फ्रेंडली सिद्धांतों पर आधारित रहेगी। उन्होंने आश्वासन दिया कि संत समुदाय और स्थानीय समाज की राय लेकर ही इस योजना को अंतिम रूप दिया जाएगा। पारदर्शिता और जवाबदेही पर बल समीक्षा बैठक में मंत्री श्री सिंह ने कहा कि विभाग की प्राथमिकता पारदर्शिता और जवाबदेही है। उन्होंने कहा कि “जनता को हर सड़क और भवन में गुणवत्ता और पारदर्शिता का अनुभव होना चाहिए।