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चीनी के भाव में ₹22 की बड़ी गिरावट, त्योहारों से पहले आम लोगों को राहत

सवाईमाधोपुर  त्योहारों का दौर शुरू होने से पहले ही बाजार ने आमजन को राहत की खबर दी है। कभी 72 रुपए प्रति किलो तक पहुंची चीनी अब करीब 50 रुपए किलो में बिक रही है। करीब एक पखवाड़े में ही चीनी के भाव में लगभग 22 रुपए प्रति किलो तक की गिरावट दर्ज की है। ऐसे में त्योहारों पर घरों में बनने वाली मिठाइयों से लेकर बाजार में बिकने वाली मिठाई और अन्य खाद्य सामग्री की लागत पर भी इसका असर पड़ने की उम्मीद है। पिछले कुछ समय में चीनी के दाम लगातार बढ़ते हुए 48 रुपए से 50, 55, 60, 65, 68, 70 और 72 रुपए प्रति किलो तक पहुंच गए थे। बढ़ते भाव के कारण घरेलू रसोई का बजट प्रभावित होने के साथ ही मिठाई कारोबारियों की लागत भी बढ़ गई थी। अब अचानक भाव में आई कमी से बाजार में खरीदारों को राहत मिली है। मिठाई कारोबारियों को भी राहत की उम्मीद त्योहारों के दौरान चीनी की खपत बढ़ जाती है। मिठाई, पेठा, बर्फी, रसगुल्ला सहित कई उत्पादों में चीनी प्रमुख कच्चा माल है। ऐसे में कीमतों में आई कमी से मिठाई कारोबारियों की उत्पादन लागत घट सकती है। वहीं इसका लाभ उपभोक्ताओं तक पहुंचने पर त्योहारों के दौरान मिठाई और अन्य चीनी आधारित उत्पादों के दामों में भी राहत की संभावना रहेगी। आपूर्ति बढ़ी तो भाव पर पड़ा असर कारोबारियों के अनुसार चीनी की उपलब्धता बढ़ाने के लिए सरकार की ओर से स्टॉक सीमा और बिक्री व्यवस्था को लेकर किए गए नियंत्रण का असर बाजार में दिखाई देने लगा है। इसके साथ ही सरकार की ओर से चीनी के आयात को लेकर दिए गए संकेतों से भी बाजार में आपूर्ति बढ़ने की उम्मीद बनी, जिसका दबाव भाव पर पड़ा। पर्याप्त स्टॉक उपलब्ध होने से तेजी पर अंकुश लगा और कीमतें नीचे आने लगीं। मासिक बिक्री कोटा भी बढ़ाया चीनी की उपलब्धता बनाए रखने के लिए मासिक बिक्री कोटा 22 लाख टन से बढ़ाकर 26.50 लाख टन किया गया है। इसके तहत महीने की 15 तारीख तक 13 लाख टन तथा 16 से 30 तारीख तक 13.50 लाख टन चीनी की बिक्री का प्रावधान किया गया है। स्टॉक का समय पर निस्तारण और बाजार में पर्याप्त आपूर्ति बनाए रखने की व्यवस्था का सीधा असर अब खुदरा बाजार के भाव पर दिखाई दे रहा है। 72 से 50 रुपए किलो तक पहुंचा भाव समय                            चीनी का भाव करीब पखवाड़े पहले    72 रुपए प्रति किलो वर्तमान भाव करीब            50 रुपए प्रति किलो गिरावट करीब                     22 रुपए प्रति किलो इनका कहना है चीनी के भाव में पिछले दिनों तेजी से बढ़ोतरी हुई थी और भाव 72 रुपए प्रति किलो तक पहुंच गए थे। अब सरकार की ओर से स्टॉक सीमा तय करने और बाजार में आपूर्ति बढ़ाने के बाद भाव में लगातार गिरावट आई है। वर्तमान में चीनी करीब 50 रुपए किलो बिक रही है। त्योहारों के सीजन में चीनी की मांग बढ़ने के बावजूद भाव कम होने से आम उपभोक्ताओं के साथ मिठाई कारोबारियों को भी राहत मिलेगी। — मोहन मंगल, संरक्षक, खाद्य व्यापार मंडल, बजरिया  

पर्यटन से आगे बढ़ेगा जैसलमेर, रेल कनेक्टिविटी और 5.5 GW ऊर्जा निकासी से बदलेगी तस्वीर

जैसलमेर थार की अर्थव्यवस्था अब केवल किले, रेगिस्तान और पर्यटन तक सीमित नहीं है। रेल नेटवर्क का विस्तार, सीमा तक मजबूत होती सड़कें, बड़े स्तर पर अक्षय ऊर्जा परियोजनाएं और बिजली निकासी का ढांचा जैसलमेर की आर्थिक भूमिका को नया आकार दे रहा है। जैसलमेर पर्यटन केंद्र के साथ परिवहन, ऊर्जा और सीमा कनेक्टिविटी के बड़े क्षेत्रीय नेटवर्क का हिस्सा बन रहा है। रेल : पर्यटन केंद्र से परिवहन नेटवर्क तक जैसलमेर रेलवे स्टेशन का करीब 140 करोड़ रुपए की लागत से पुनर्विकास पूरा हो चुका है। स्टेशन पर 36 मीटर चौड़ा एयर कॉनकोर्स, छह मीटर चौड़ा ऊपरी पैदल पुल, पार्किंग, प्लेटफॉर्म शेल्टर, लिफ्ट और एस्केलेटर जैसी सुविधाएं विकसित की गई हैं। करीब 67 करोड़ रुपए के कोच केयर कॉम्प्लेक्स का भी शुभारंभ हो चुका है। रेल मंत्रालय के अनुसार इससे ट्रेनों की रखरखाव क्षमता बढ़ेगी और अधिक ट्रेनों के संचालन में मदद मिलेगी। साबरमती-जोधपुर एक्सप्रेस का जैसलमेर तक विस्तार किया गया और 23 मई 2026 से साबरमती-जैसलमेर दैनिक सुपरफास्ट सेवा शुरू हुई। वहीं रामदेवरा-पोकरण के बीच 13.38 किलोमीटर नई रेल लाइन की स्वीकृत लागत 189.21 करोड़ रुपए है और परियोजना की लक्ष्य तिथि मार्च 2028 है। यह रामदेवरा-पोकरण क्षेत्र की रेल कनेक्टिविटी को मजबूत करने वाली नई कड़ी है। ऊर्जा : थार की जमीन से बड़े बिजली बाजार तक जैसलमेर-पोकरण क्षेत्र में अक्षय ऊर्जा विस्तार आर्थिक बदलाव का दूसरा बड़ा आधार है। राजस्थान आर्थिक समीक्षा 2025-26 के अनुसार फलोदी-पोकरण सोलर पार्क की कुल क्षमता 750 मेगावाट है, जिसमें 450 मेगावाट कमीशन हो चुकी है। फतेहगढ़ फेज-1बी की क्षमता 1,500 मेगावाट है, जिसमें 1,496 मेगावाट कमीशन हो चुकी है। इस तरह दोनों परियोजनाओं की कुल परियोजना क्षमता 2,250 मेगावाट और कमीशन क्षमता 1,946 मेगावाट है। बिजली उत्पादन के साथ उसे ग्रिड तक पहुंचाने का ढांचा भी महत्वपूर्ण है। केंद्रीय विद्युत मंत्रालय के दस्तावेज में राजस्थान अक्षय ऊर्जा क्षेत्र फेज-4 के 5.5 गीगावाट जैसलमेर-बाड़मेर कॉम्प्लेक्स से बिजली निकासी से जुड़ी ट्रांसमिशन व्यवस्था दर्ज है। इसलिए 5.5 गीगावाट को ट्रांसमिशन क्षमता कहना सही नहीं होगा; यह इतनी अक्षय ऊर्जा की निकासी से जुड़ी व्यवस्था है। सीमा : रणनीतिक सड़क से आर्थिक कनेक्टिविटी तक म्याजलार-जैसलमेर और सुंदर-म्याजलार-अंबासिंह की ढाणी मार्ग के 134 किलोमीटर हिस्से के दो-लेन पेव्ड-शोल्डर उन्नयन की आधारशिला रखी गई है। वहीं तनोट-रामगढ़-जैसलमेर और मोकल-सरकारितला मार्ग के 191 किलोमीटर हिस्से का दो-लेन पेव्ड-शोल्डर उन्नयन पूरा हो चुका है। एनएचएआई के अनुसार इन परियोजनाओं से सीमा तक रक्षा पहुंच मजबूत होने के साथ क्षेत्रीय कनेक्टिविटी और परिवहन में भी सुधार होगा। असली सवाल : जैसलमेर की अर्थव्यवस्था में कितना पैसा रहेगा? बड़े प्रोजेक्ट आर्थिक बदलाव की शुरुआत हैं, अंतिम परिणाम नहीं। असली असर तब दिखेगा, जब निर्माण और संचालन से स्थानीय युवाओं को रोजगार, परिवहन कारोबार को काम, होटल-रेस्तरां को ग्राहक, मरम्मत-आपूर्ति कारोबार को बाजार और छोटे उद्यमों को नई मांग मिले। बेहतर रेल पहुंच पर्यटन कारोबार का दायरा बढ़ा सकती है। ऊर्जा परियोजनाएं तकनीकी सेवाओं, रखरखाव और आपूर्ति क्षेत्र में अवसर बना सकती हैं। सीमा सड़कें परिवहन और लॉजिस्टिक्स को गति दे सकती हैं। इन तीनों का साझा असर जैसलमेर की अर्थव्यवस्था को पर्यटन से आगे ले जाने की क्षमता रखता है। विकास का दूसरा गणित : पानी, जमीन और पर्यावरण विस्तार के साथ चुनौतियां भी बढ़ेंगी। ऊर्जा परियोजनाओं के लिए भूमि, बिजली निकासी के लिए मजबूत ग्रिड और संचालन के लिए कुशल मानव संसाधन जरूरी होंगे। पर्यटन और शहरी गतिविधियां बढ़ने पर पानी, कचरा प्रबंधन और विरासत संरक्षण का दबाव भी बढ़ सकता है।

नागौर-जोधपुर फोरलेन डेढ़ साल से अटका, बीकानेर हिस्से का टेंडर अब जारी

नागौर  बीकानेर से जोधपुर के बीच एनएच-62 के फोरलेन में तब्दील होने पर 100 किमी प्रतिघंटा की रफ्तार से वाहनों को दौड़ने वाली सड़क मिलने में अभी लम्बा इंतजार करना पड़ेगा। केन्द्रीय सड़क परिवहन मंत्रालय ने जोधपुर से नागौर के हिस्से के लिए डेढ़ साल पहले स्वीकृति जारी की, लेकिन वर्क ऑर्डर अभी तक नहीं हुआ है। वहीं तीन महीने पहले मंत्रालय ने नागौर से बीकानेर तक के हिस्से की भी वित्तीय स्वीकृति जारी कर दी, लेकिन कुछ विशेष होता दिख नहीं रहा। जबकि अधिकारी इस मार्ग से अतिक्रमण हटाने सहित अन्य कार्य शुरू होने की बात कह रहे हैं। कुल 212 किलोमीटर फोरलेन पर 2752 करोड़ 65 लाख रुपए खर्च होंगे। फोरलेन के इस हिस्से में 20 से अधिक ओवरब्रिज होने से इस पर आने वाले कस्बों और गांवों को पार करने की राह सुगम होगी और वाहन नागौर शहर में आने की बजाय बाईपास से ही निकल सकेंगे। पत्रिका ने उठाया मुद्दा नागौर-जोधपुर फोरलेन के साथ नागौर शहर के चारों तरफ रिंग रोड की जरूरत को लेकर पत्रिका ने लगातार मुद्दा उठाया। समाचारों के जरिए अधिकारियों और जनप्रतिनिधियों का ध्यान इस ओर दिलाया गया कि शहर से होकर गुजरने वाले दो राष्ट्रीय राजमार्गों पर दिन-रात भारी वाहनों का दबाव रहता है। इसके चलते दुर्घटनाओं का खतरा भी बना रहता है। इसके बाद मामला केन्द्रीय सड़क परिवहन एवं राजमार्ग मंत्री तक पहुंचा और दोनों परियोजनाओं व नागौर में रिंग रोड को मंजूरी मिली। नागौर टू जोधपुर डेढ़ साल से काम अटका नागौर-जोधपुर रोड पर नेतड़ा तक 87 किमी और बीकानेर रोड से लाडनूं रोड को मिलाने वाले 16 किमी के बाईपास की स्वीकृति सड़क परिवहन मंत्रालय ने मार्च 2025 में जारी की। इस पर कुल 1393.34 करोड़ रुपए खर्च होने हैं। डेढ़ साल से प्रोजेक्ट अटका है। बीकानेर टू नागौर टेंडर प्रक्रिया शुरू वर्तमान में दो लेन एनएच-62 का 109.24 किमी नागौर से बीकानेर तक फोरलेन बनेगा। केन्द्रीय मंत्रालय ने जून 2026 में 1359.31 करोड़ रुपए की स्वीकृति जारी की। यहां प्रतिदिन 14 हजार पीसीयू (पैसेंजर कार यूनिट) वाहनों का आवागमन है। विभाग ने 24 सितंबर को 1100.69 करोड़ रुपए का टेंडर निकाला है। कार्य शीघ्र शुरू होगा नागौर-जोधपुर फोरलेन निर्माण के लिए टेंडर प्रक्रिया पूरी हो चुकी है और स्वीकृति पत्र (एलओए) की प्रक्रिया चल रही है। प्रयास है कि इस कार्य को यथाशीघ्र शुरू करवाया जाए। -अनिल धौलिया, एक्सईएन, एनएच, नागौर खंड

CM भजनलाल का आज भरतपुर दौरा, 8 जिलों को 1,109 करोड़ के विकास कार्यों की सौगात

भरतपुर मुख्यमंत्री भजनलाल शर्मा आज भरतपुर और खैरथल-तिजारा जिले के दौरे पर रहेंगे। इस दौरान वे पूर्वी राजस्थान के 8 जिलों को कई बड़ी सौगात देंगे। मुख्यमंत्री भजनलाल शर्मा 1,109 करोड़ रुपए की लागत वाले 345 विकास कार्यों का शिलान्यास एवं लोकार्पण करेंगे। इनमें भरतपुर, डीग, धौलपुर, करौली, सवाईमाधोपुर, अलवर, कोटपुतली-बहरोड़ और खैरथल-तिजारा जिले शामिल हैं। मुख्यमंत्री के दौरे को लेकर प्रशासन की ओर से तैयारियां पूरी कर ली गई हैं। मुख्यमंत्री भजनलाल शर्मा सुबह 11.50 बजे जयपुर से हेलीकॉप्टर से बयाना पहुंचेंगे। मुख्यमंत्री दोपहर 12 बजे उपखण्ड बयाना की ग्राम पंचायत बिडयारी पहुंचकर नायरा पेट्रोल पंप के पास विकास कार्यों का शिलान्यास एवं लोकार्पण करेंगे। साथ ही जनसभा को संबोधित करेंगे। इस मौके पर सीएम भजनलाल शर्मा 8 जिलों को 1,109 करोड़ की सौगात देंगे। वे 345 विकास कार्यों का शिलान्यास-लोकार्पण करेंगे। दोपहर 1 से 2 बजे तक वे कार्यकर्ताओं के साथ संवाद भी करेंगे। इसके बाद मुख्यमंत्री दोपहर 2.45 बजे हेलीकॉप्टर से खैरथल-तिजारा के लिए रवाना होंगे। यहां इस्माइलपुर रोड स्थित होटल ग्रीनलैंड में भाजपा के 'कार्यकर्ता-संवाद' कार्यक्रम में शामिल होंगे। इस दौरान वे पार्टी के पदाधिकारियों और कार्यकर्ताओं के साथ संवाद करेंगे। पार्टी की ओर से मुख्यमंत्री का सम्मान भी किया जाएगा। इस दौरान केंद्रीय मंत्री भूपेंद्र यादव भी मुख्यमंत्री के साथ मौजूद रहेंगे। इन विकास कार्यों का करेंगे शिलान्यास सवयार्ड ग्राम निठार, भुसावर में भूमि समतलीकरण एवं चारदीवारी तथा किसान पथ नगला गुठाकर से नयागाँव की सीमा तक कृषि उपज मण्डी समिति, वैर के निर्माण कार्य (लागत राशि 2.15 करोड़ रुपए) सार्वजनिक निर्माण विभाग के 125 कार्य (लागत राशि 185.20 करोड़ रुपए) ग्रामीण विकास एवं पंचायती राज विभाग के 7 कार्य (लागत राशि 1.56 करोड़ रुपए) स्कूल शिक्षा विभाग के 13 कार्य (लागत राशि 27.72 करोड़ रुपए) यूडब्ल्यूएसएस नदबई का विस्तार कार्य (लागत राशि 6.47 करोड़ रुपए) जल संसाधन विभाग के 6 कार्य (लागत राशि 44.35 करोड़ रुपए) चुली एवं अनियाला में 33 केवी सब स्टेशन के निर्माण कार्य (लागत राशि 2.55 करोड़ रुपए) ट्रोमा सेन्टर एवं MCH अस्पताल का निर्माण कार्य (लागत राशि 160.15 करोड़ रुपए) चिकित्सा एवं स्वास्थ्य विभाग के 20 कार्य (लागत राशि 96.58 करोड़ रुपए) नगरीय विकास विभाग के 3 कार्य (लागत राशि 13.43 करोड़ रुपए) पशु चिकित्सा उपकेन्द्रों बिचपुरी गुजरान, दरगमां एवं बालौती के भवन निर्माण कार्य नवीनीकरण एवं सौंर्दीकरण सड़क, भिवाड़ी से खिजुरीवास टोल, भिवाड़ी (लागत राशि 40 करोड़ रुपए) कठूमर से डेहरा मोड (वाया मसारी, भरीथल होते हुए अटारी) सड़क का चौड़ाईकरण (18 किमी.) (कठूमर, नदबई) -अलवर, भरतपुर (लागत राशि 11 करोड़ रुपए) विधानसभा क्षेत्र थानागाजी में मिसिंग लिंक सड़कों के 16 कार्य (लागत राशि 9 करोड़ रुपए) नयागाँव बोलका से धौलान टहला, राजगढ़ SH-25 तक 11 किमी सड़क निर्माण कार्य (थानागाजी) – अलवर (लागत राशि 5 करोड़ रुपए) इन विकास कार्यों का होगा लोकार्पण     ऊर्जा विभाग के 14 कार्य (लागत राशि 273.48 करोड़ रुपए) जल संसाधन विभाग के 11 कार्य (लागत राशि 128.20 करोड़ रुपए) चिकित्सा एवं स्वास्थ्य विभाग के 11 कार्य (लागत राशि 11.96 करोड़ रुपए) सार्वजनिक निर्माण विभाग के 6 कार्य (लागत राशि 24.84 करोड़ रुपए) उच्च प्राथमिक विद्यालय, नागला केवाल के निर्माण कार्य (लागत राशि 1.10 करोड़ रुपए) ग्रामीण विकास एवं पंचायती राज विभाग के 10 कार्य (लागत राशि 1.24 करोड़ रुपए) राजकीय कन्या महाविद्यालय, बाडी में निर्माण कार्य (लागत राशि 7.50 करोड़ रुपए) राजकीय आयुर्वेद औषधालय धौर एवं कासिमपुर के भवन निर्माण कार्य वन विभाग के 5 कार्य बायो परीक्षण प्रयोगशाला एवं संयुक्त निदेशक कार्यालय के भवन निर्माण कार्य (लागत राशि 2.42 करोड़ रुपए) पशु चिकित्सालय उदई खुद एवं अनियाला के नवीन भवन के निर्माण कार्य सीसी अटल पथ का निर्माण, ईशाक हाउस से सरकारी अस्पताल ग्राम इस्माइलपुर तक (लागत राशि 2 करोड़ रुपए) सीसी अटल पथ का निर्माण, SH-14 राय मोड़ से हरी टेलर से भावनी बड़सिवा, ग्राम ततरपुर (लागत राशि 2 करोड़ रुपए) बी.टी. सड़क निर्माण कार्य, अलावपुर बासवा से चम्मुनी ढाणी से धनियों सैयद रोड अटल प्रगति पथ का निर्माण, नाई हाउस से टाइल ग्राम गुवालड़ा (लागत राशि 2 करोड़ रुपए)

भजनलाल ने कांग्रेस पर साधा निशाना, गहलोत बोले- मुख्य चुनाव आयुक्त को देना चाहिए इस्तीफा

जयपुर जयपुर समेत पूरे प्रदेश में रविवार के दिन भी राजनीतिक पारा अपने चरम पर रहा। आम तौर पर छुट्टी का दिन माने जाने वाले रविवार को राज्य के सियासी गलियारों में वार-पलटवार का दौर पूरे जोर-शोर से चला। मुख्यमंत्री भजनलाल शर्मा ने भाजपा मुख्यालय में एक प्रेस कॉन्फ्रेंस को संबोधित करते हुए कांग्रेस पार्टी और विपक्षी दलों पर संवैधानिक संस्थाओं को कमजोर करने और मनगढ़ंत तथ्य फैलाने के गंभीर आरोप लगाए। वहीं, मुख्यमंत्री के इन बयानों के सामने आने के कुछ ही देर बाद, प्रदेश के पूर्व मुख्यमंत्री अशोक गहलोत ने सोशल मीडिया पर मोर्चा संभालते हुए जोरदार पलटवार किया, जिससे राज्य का राजनीतिक माहौल पूरी तरह गर्मा गया है। CM भजनलाल शर्मा का कांग्रेस पर हमला भाजपा मुख्यालय में मीडिया से बातचीत करते हुए मुख्यमंत्री भजनलाल शर्मा ने विपक्षी दलों, विशेषकर कांग्रेस पार्टी को आड़े हाथों लिया। उन्होंने कहा कि पिछले कुछ दिनों से विपक्षी दल सोची-समझी रणनीति के तहत चुनाव आयोग जैसी स्वतंत्र और संवैधानिक संस्था की छवि को धूमिल करने का प्रयास कर रहे हैं। मुख्यमंत्री ने दो टूक शब्दों में कहा, "जो लोग जनता द्वारा बार-बार नकारे जा चुके हैं, वे अपनी चुनावी हार को छिपाने के लिए अक्सर देश की संवैधानिक संस्थाओं पर हमला बोलते हैं। कांग्रेस पार्टी ने एसआईआर (SIR) को लेकर पूरी तरह एक झूठा नैरेटिव गढ़ा है।" उन्होंने याद दिलाया कि 26 सितंबर को आयोग द्वारा जारी एक संयुक्त बयान में यह स्पष्ट कर दिया गया था कि सभी चुनाव आयुक्तों ने सर्वसम्मति से निर्णय लिए हैं। सीएम भजनलाल ने कांग्रेस को नसीहत देते हुए कहा कि हार के बाद दूसरों पर बेबुनियाद आरोप लगाने के बजाय उन्हें अपनी राजनीतिक गतिविधियों और जनता के बीच काम करने पर ध्यान देना चाहिए। मुख्य चुनाव आयुक्त को इस्तीफा देना चाहिए : गहलोत मुख्यमंत्री की प्रेस कॉन्फ्रेंस के कुछ ही देर बाद पूर्व मुख्यमंत्री अशोक गहलोत ने अपने आधिकारिक सोशल मीडिया हैंडल से एक लंबा-चौड़ा बयान जारी कर भाजपा सरकार और चुनाव आयोग की कार्यप्रणाली पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए। गहलोत ने अपने पोस्ट में लिखा कि पहले कभी ऐसी स्थिति आने पर सभी राजनीतिक दल मिलकर समाधान की बात करते थे, लेकिन अब ऐसा पहली बार हो रहा है कि चुनाव आयोग के भीतर से ही सवाल उठ रहे हैं। उन्होंने कांग्रेस सांसद राहुल गांधी के पुराने बयानों का जिक्र करते हुए कहा कि वे पिछले दो सालों से देश को आगाह कर रहे थे और आज उनकी बातें सच साबित हो रही हैं। गहलोत ने आरोप लगाया कि मुख्य चुनाव आयुक्त पूरी तरह बेनकाब हो चुके हैं और भाजपा नेताओं द्वारा उनका बचाव यह साबित करता है कि दोनों के बीच मिलीभगत है। उन्होंने सीधे तौर पर मांग की कि मौजूदा हालात को देखते हुए मुख्य चुनाव आयुक्त को खुद अपने पद से इस्तीफा दे देना चाहिए। संवैधानिक संस्थाओं की विश्वसनीयता पर छिड़ी जंग इस ताज़ा सियासी टकराव ने यह साफ कर दिया है कि राजस्थान की मुख्य राजनीतिक पार्टियों—भाजपा और कांग्रेस—के बीच वैचारिक और राजनीतिक संघर्ष किसी भी दिन थमने वाला नहीं है। एक तरफ सत्ताधारी पार्टी जहाँ संवैधानिक संस्थाओं की गरिमा बचाने और विपक्ष के दुष्प्रचार को बेनकाब करने का दावा कर रही है, वहीं दूसरी तरफ मुख्य विपक्षी दल इन संस्थाओं की निष्पक्षता पर सवाल उठाकर सरकार को कटघरे में खड़ा कर रहा है। आने वाले दिनों में इस मुद्दे पर सियासी गर्माहट और अधिक बढ़ने के पूरे आसार हैं।

ईसरदा बांध से 1256 गांवों और 6 कस्बों को मिलेगा पानी, 299 किमी पाइपलाइन का काम पूरा

जयपुर ईसरदा बांध से दौसा और सवाईमाधोपुर के गांवों और शहरों तक पानी पहुंचाने की योजना पर काम तेज हो गया है। ईसरदा बांध से पानी फिल्टर प्लांट तक पहुंच चुका है। 225 एमएलडी क्षमता वाले प्लांट की टेस्टिंग चल रही है। करीब 3588 करोड़ रुपए की इस परियोजना के पूरा होने के बाद 1256 गांवों और छह कस्बों को पानी मिलने लगेगा। इससे करीब 35 लाख लोगों को फायदा होगा। परियोजना में 3.06 लाख से ज्यादा घरों तक पानी का कनेक्शन पहुंचाने की योजना है। शहरी इलाकों में नवंबर तक पानी पहुंचाने का लक्ष्य रखा गया है। इसके बाद जिन ग्रामीण इलाकों में पाइपलाइन और पानी की टंकियों का काम पूरा हो चुका है, वहां घरों तक कनेक्शन देकर पानी पहुंचाया जाएगा। 299 किलोमीटर पाइपलाइन पूरी ईसरदा से महुआ तक करीब 341 किलोमीटर लंबी मुख्य पाइपलाइन बिछाने का काम चल रहा है। इसमें से अब तक लगभग 299 किलोमीटर पाइपलाइन बिछाई जा चुकी है। यानी ज्यादातर काम पूरा हो चुका है और बाकी हिस्से में भी तेजी से काम किया जा रहा है। इसके साथ ही ईसरदा और बगड़ी में पानी जमा करने के लिए बनाए जा रहे जलाशयों का काम भी पूरा हो गया है। इस पूरे हिस्से में अब तक करीब 1005.60 करोड़ रुपए खर्च किए जा चुके हैं। अलग-अलग काम, दौसा के 918 गांवों तक पहुंचेगा पानी दौसा जिले में पानी पहुंचाने के लिए अलग-अलग हिस्सों में काम चल रहा है। लालसोट क्षेत्र के 302 गांवों और लालसोट शहर को पानी मिलेगा। यहां 2002 किलोमीटर में से 124.7 किलोमीटर पाइपलाइन बिछ चुकी है। दौसा क्षेत्र के 248 गांवों और दौसा शहर के लिए 1709 किलोमीटर पाइपलाइन बिछनी है, जिसमें 154 किलोमीटर का काम पूरा हो चुका है। पाइप लाइन बिछी, सवाईमाधोपुर के 177 गांव भी जुड़ेंगे बसवा क्षेत्र में 368 गांवों और बांदीकुई शहर को पानी मिलेगा। यहां 2077 किलोमीटर में से 1801 किलोमीटर पाइपलाइन बिछ चुकी है। महुआ क्षेत्र में भी 315 किलोमीटर में से 244 किलोमीटर पाइपलाइन का काम पूरा हो गया है। परियोजना का दायरा सवाई माधोपुर तक भी है। बौंली के 99, मलारना डूंगर के 61 और चौथ का बरवाड़ा के 17 गांवों यानी कुल 177 गांवों को इससे जोड़ा जाएगा।

नींबू ने बिगाड़ा रसोई का बजट, जोधपुर में 80 से 100 से बढ़कर 250 रुपए किलो हुआ भाव

जोधपुर जोधपुर में गर्मी और उमस के बीच आमजन की रसोई से नींबू गायब होने लगा है। भाद्रपद माह में मंडी में नींबू की नई आवक शुरू हो जाती है, जिससे अमूमन कीमतें नियंत्रण में रहती हैं। हालांकि, इस बार मुख्य उत्पादक क्षेत्रों से आवक कम होने और स्थानीय मांग में तेजी आने के कारण नींबू के तेवर तीखे हो गए हैं। रिटेल में नींबू 225 से 250 रुपए प्रति किलोग्राम के रिकॉर्ड स्तर पर बिक रहा है। कीमत सुनकर आवक रह गई जया जोधपुर में गृहणी जया कुमारी ने सब्जी ठेले पर आकर जब नींबू का दाम पूछा तो सब्जी वाले ने कहा कि 250 रुपए किलो। कीमत सुनकर जया कुमारी आवक रह गई। फिर काफी सोच विचार कर कहा एक नींबू दे दो। 10 रुपए का एक नींबू लेकर उन्होंने सब्जी वाले इस बढ़े हुए रेट के बारे में पूछा तो उसने कहा पीछे से ही नींबू का रेट तेज है। उत्पादन पर मौसम की मार जोधपुर में सब्जी मंडी कारोबारियों के अनुसार, इस सीजन में नींबू की फसल पर मौसम की अनिश्चितता का भारी असर पड़ा है। ऐन वक्त पर पैदावार प्रभावित होने से मंडियों में रोजाना आने वाली गाड़ियों की संख्या आधी रह गई है। आवक में गिरावट और गर्मी के कारण बढ़ती मांग से कीमतों में तेजी आई है। रसोई का बजट बिगड़ा एक पखवाड़े पहले तक 80 से 100 रुपए किलो तक बिकने वाला नींबू अब आम आदमी की पहुंच से बाहर होता दिख रहा है। सब्जी विक्रेता सुनील गहलोत का कहना है कि थोक मंडी से ही माल महंगा मिल रहा है, जिसके चलते उन्हें ऊंचे दामों में बेचना पड़ रहा है। नींबू के महंगा होने का असर अब सड़कों और बाजारों में लगने वाले शिकंजी व जूस के ठेलों पर भी साफ नजर आने लगा है, जहां गिलास के दाम बढ़ा दिए गए हैं। सुनील गहलोत ने बताया कि अगले दो-तीन हफ्तों में नई फसल की आवक में सुधार नहीं होता, तब तक कीमतों में गिरावट की उम्मीद कम है।  

राजस्थान में पंचायत चुनाव की तैयारी तेज, भजनलाल शर्मा ने कार्यकर्ताओं को दिया गांव-गांव पहुंचने का संदेश

जयपुर राजस्थान में हाल ही में संपन्न हुए नगर निकाय चुनावों में शानदार और ऐतिहासिक विजय हासिल करने के बाद भारतीय जनता पार्टी (BJP) ने अब पूरी तरह से अपने अगले बड़े राजनीतिक लक्ष्य 'मिशन पंचायती राज चुनाव' की ओर कदम बढ़ा दिए हैं। संगठन को जमीनी स्तर पर और अधिक धार देने और चुनावी तैयारियों का जायजा लेने के लिए मुख्यमंत्री भजनलाल शर्मा ने खुद मोर्चा संभाल लिया है। इसी कड़ी में शनिवार को मुख्यमंत्री भजनलाल शर्मा के प्रतापगढ़ और उदयपुर दौरे रहे, जहां उन्होंने पार्टी कार्यकर्ताओं से सीधा संवाद किया और उन्हें आगामी ग्रामीण चुनावों के लिए पूरी ऊर्जा, समर्पण और अनुशासन के साथ जुटने का स्पष्ट संदेश दिया। मुख्यमंत्री ने कार्यकर्ताओं को संबोधित करते हुए कहा कि कार्यकर्ता किसी भी राजनीतिक संगठन की सबसे बड़ी और मूल शक्ति होते हैं, जो पार्टी की विचारधारा और विकास कार्यों को सीधे आम जनता तक पहुंचाने का काम करते हैं। उन्होंने उदयपुर और प्रतापगढ़ के कार्यकर्ताओं की पीठ थपथपाते हुए कहा कि निकाय चुनावों में जनता का मिला यह आशीर्वाद हमारे कार्यकर्ताओं के अथक परिश्रम, जनसंपर्क और अटूट निष्ठा का प्रत्यक्ष परिणाम है। अब इसी सकारात्मक ऊर्जा और जोश को बरकरार रखते हुए हमें पंचायती राज संस्थाओं के चुनावों में भी विजय का परचम लहराना है। 'समर्पण और अनुशासन के साथ गांव-गांव पहुंचें' प्रतापगढ़ और उदयपुर में आयोजित बैठकों और संवाद कार्यक्रमों के दौरान मुख्यमंत्री भजनलाल शर्मा ने कार्यकर्ताओं से संवाद करते हुए सांगठनिक कसावट पर विशेष जोर दिया। उन्होंने कहा कि आगामी पंचायत और जिला परिषद चुनावों में सफलता हासिल करने के लिए हर कार्यकर्ता को जनसेवा की भावना के साथ मैदान में उतरना होगा। जन-जन का विश्वास: सीएम ने आह्वान किया कि कार्यकर्ताओं को जनता के बीच निरंतर सक्रिय रहना चाहिए और उनकी समस्याओं को समझकर उनका समाधान करवाने का प्रयास करना चाहिए, ताकि जनता का अटूट विश्वास पार्टी के साथ बना रहे। बूथ स्तर पर मजबूती: संगठन को बूथ स्तर तक और अधिक मजबूत बनाने के निर्देश देते हुए उन्होंने कहा कि पार्टी की जीत की नींव हमारा बूथ है, और जब बूथ मजबूत होगा तो विजय अपने आप सुनिश्चित होगी। सरकारी योजनाओं का प्रसार: राज्य सरकार की जनकल्याणकारी नीतियों, विकास कार्यों और फैसलों को समाज के अंतिम छोर पर बैठे व्यक्ति तक पहुंचाने की जिम्मेदारी कार्यकर्ताओं की है, जिसे उन्हें पूरी ईमानदारी से निभाना होगा। सरकार-संगठन का तालमेल- पंचायत चुनाव में जीत की सीढ़ी राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि राजस्थान में भजनलाल शर्मा सरकार के गठन के बाद से ही संगठन और सत्ता के बीच बेहतर समन्वय देखने को मिला है। नगर निकाय चुनावों में मिली जीत ने पार्टी के मनोबल को पहले ही काफी ऊंचा कर दिया है, और अब पंचायती राज चुनावों के जरिए बीजेपी ग्रामीण मतदाताओं के एक बड़े वर्ग को अपने पाले में बनाए रखने की रणनीति पर काम कर रही है। मुख्यमंत्री के इन दौरों और स्पष्ट निर्देशों से साफ है कि पार्टी किसी भी स्तर पर ढिलाई बरतने के मूड में नहीं है। पंचायत चुनावों की तारीखों के नजदीक आने के साथ ही राजस्थान की राजनीतिक सरगर्मी तेज हो गई है, और अब देखना यह होगा कि विपक्षी दल कांग्रेस इस सांगठनिक आक्रामकता का मुकाबला किस प्रकार करते हैं।

छह महीने बाद बीसलपुर बांध में मछली ठेका प्रक्रिया शुरू, सरकार ने निकाला टेंडर

 राजमहल  बीसलपुर बांध में मछली ठेके को लेकर करीब छह माह से चला आ रहा गतिरोध अब खत्म होने की राह पर है। उच्च न्यायालय की ओर से रोक हटाए जाने के बाद मत्स्य विभाग ने बांध में मत्स्य ठेके के लिए नए सिरे से निविदा जारी कर दी है। निविदा में सालाना पांच करोड़ रुपए से अधिक की न्यूनतम राशि निर्धारित की गई है। इससे बांध के जलभराव क्षेत्र में मछली पकड़ने और इससे जुड़ी व्यावसायिक गतिविधियों के फिर से व्यवस्थित होने की उम्मीद है। गौरतलब है कि बीसलपुर बांध में मत्स्य आखेट को लेकर गत मार्च में पूर्व संवेदक की ओर से राशि जमा नहीं करवाने तथा जनहित याचिका के चलते राजस्थान हाईकोर्ट ने करीब छह माह तक यथास्थिति बनाए रखने के आदेश दिए थे। न्यायालय की रोक हटने के बाद विभाग ने अब नए सिरे से टेंडर प्रक्रिया शुरू की है। बीसलपुर बांध में मत्स्य ठेके से सरकार को हर साल करीब पांच से छह करोड़ रुपए का राजस्व मिलता है। ठेका प्रक्रिया अटके रहने से अब तक करीब ढाई से तीन करोड़ रुपए के राजस्व का नुकसान होने का अनुमान है। रोक हटी, फिर भी लैंडिंग सेंटर पर सामान का जमावड़ा राजस्थान हाईकोर्ट की रोक हटे करीब एक सप्ताह बीत चुका है, लेकिन बीसलपुर बांध के मत्स्य लैंडिंग सेंटर पर अभी भी पूर्व संवेदक का सामान जमा है। सेंटर पर दर्जनों नावें, मोटर बोट सहित अन्य सामान पड़े हुए हैं। लंबे समय से सामान नहीं हटाए जाने से लैंडिंग सेंटर के उपयोग और व्यवस्था को लेकर सवाल उठ रहे हैं। नोटिस देकर सामान हटवाने की तैयारी मत्स्य विभाग टोंक के बीसलपुर बांध विकास अधिकारी मदन सिंह ने बताया कि न्यायालय की रोक हटने के बाद टेंडर प्रक्रिया शुरू कर दी गई है। लैंडिंग सेंटर पर पूर्व संवेदक का सामान पड़ा होने के संबंध में जल्द नोटिस जारी कर सामान हटवाने की तैयारी की जा रही है। बीसलपुर बांध की इन मछलियों की मांग अधिक बीसलपुर बांध से मत्स्य विभाग को प्रतिवर्ष 5 करोड़ रुपए से अधिक का राजस्व मिलता है। बांध में मछली पकड़ने का ठेका 5 वर्षों के लिए होता है, जिसमें हर साल 12 फीसदी राशि बढ़ा दी जाती है। मछली पालन का ठेका 2 साल से नहीं हो पाया। मामला हाईकोर्ट मे विचाराधीन होने से सरकार को करीब 10 करोड़ रुपए का नुकसान हुआ है। बीसलपुर बांध में एक मछली एक बार में हजारों अंडे देती हैं। अंडे देने के दौरान मत्स्य विभाग की ओर से मत्स्य आखेट पर रोक लगाई जाती है। विदेशी व फार्मी मछली के तौर पर टाइगर, कोमलकार, सिल्वर, सिलोन, गिलासकार आदि प्रजाति की मछलियां पाई जाती है। जिनका बीज विभाग व ठेकेदार की ओर से डाला जाता है। मंडियों में इनके दाम देशी की अपेक्षा कम लगते हैं। सिंघाड़ा, लैची, बाम, समल आदि होती है, जिसमें कांटे कम होने से अधिक दामों पर बिकती है।

फेस्टिवल स्पेशल ट्रेन का ऐलान, जोधपुर-जयपुर समेत इन शहरों के यात्रियों को मिलेगी सुविधा

 जोधपुर  त्योहारों में घर लौटने और यात्रा करने वाले यात्रियों की सुविधा के लिए रेलवे ने अतिरिक्त ट्रेन चलाने का निर्णय लिया है। सूबेदारगंज से भगत की कोठी के बीच 1 अक्टूबर से फेस्टिवल स्पेशल ट्रेन का संचालन होगा। द्विसाप्ताहिक ट्रेन दोनों दिशाओं में 18-18 फेरे लगाएगी। इससे जोधपुर, जयपुर, आगरा, मथुरा और इटावा सहित मार्ग के यात्रियों को अतिरिक्त रेल सुविधा मिलेगी। जोधपुर मंडल रेल प्रबंधक अनुराग त्रिपाठी ने बताया कि ट्रेन संख्या 04193 सूबेदारगंज-भगत की कोठी फेस्टिवल स्पेशल 1 अक्टूबर से 30 नवंबर तक प्रत्येक सोमवार और गुरुवार को संचालित होगी। यह ट्रेन सूबेदारगंज से शाम 7.25 बजे रवाना होकर अगले दिन शाम 5.40 बजे भगत की कोठी पहुंचेगी। वापसी में ट्रेन संख्या 04194 भगत की कोठी-सूबेदारगंज फेस्टिवल स्पेशल 2 अक्टूबर से 1 दिसंबर तक प्रत्येक मंगलवार और शुक्रवार को चलेगी। भगत की कोठी से यह ट्रेन रात 8.40 बजे रवाना होकर अगले दिन शाम 7.30 बजे सूबेदारगंज पहुंचेगी। ट्रेन का संचालन इलेक्ट्रिक लोकोमोटिव से किया जाएगा। 20 डिब्बों की होगी ट्रेन सीनियर डीसीएम हितेश यादव के अनुसार ट्रेन का दोनों दिशाओं में जोधपुर, गोटन, मेड़ता रोड, डेगाना, मकराना, कुचामन सिटी, नावां सिटी, फुलेरा, जयपुर, गांधीनगर, दौसा, बांदीकुई, राजगढ़, अलवर, मथुरा, आगरा कैंट, फतेहाबाद, इटावा, गोविंदपुरी और फतेहपुर स्टेशनों पर ठहराव रहेगा। ट्रेन में कुल 20 डिब्बे होंगे। इनमें सात एसी थ्री-टियर, सात स्लीपर, चार सामान्य श्रेणी, एक पावर कार और एक गार्ड डिब्बा शामिल है। रामदेवरा मेला स्पेशल ट्रेनों का संचालन बंद जोधपुर. बाबा रामदेव मेले के समापन के साथ रेलवे की ओर से संचालित मेला स्पेशल ट्रेनों का संचालन बंद किया जा रहा है। मेला अवधि में यात्रियों की सुविधा के लिए जोधपुर मंडल ने विभिन्न मार्गों पर पांच जोड़ी स्पेशल ट्रेनों का संचालन किया। भगत की कोठी-रामदेवरा के बीच दो जोड़ी तथा जोधपुर-रामदेवरा के बीच एक जोड़ी मेला स्पेशल ट्रेनें संचालित की गईं। इसके अलावा लालगढ़-रामदेवरा के बीच फलोदी होकर दो जोड़ी स्पेशल ट्रेनों का संचालन हुआ। श्रीगंगानगर-पोकरण के बीच संचालित मेला स्पेशल ट्रेन 26 सितंबर को अपनी अंतिम ट्रिप करेगी। साबरमती-योग नगरी ऋषिकेश ट्रेन परिवर्तित मार्ग से चलेगी जयपुर. गाजियाबाद यार्ड में तकनीकी कार्य के कारण साबरमती-योग नगरी ऋषिकेश ट्रेन परिवर्तित मार्ग से संचालित होगी। रेलवे के अनुसार ट्रेन 19031 साबरमती-योग नगरी ऋषिकेश 4 दिसंबर को साबरमती से प्रस्थान करेगी। यह ट्रेन परिवर्तित मार्ग दिल्ली-दिल्ली शाहदरा-नोली-शामली-टपरी होकर संचालित होगी। यह ट्रेन गाजियाबाद, नया गाजियाबाद, मोदीनगर, मेरठ कैंट, मेरठ सिटी, सकौती टांडा, मुजफ्फरनगर और देवबंद स्टेशनों पर ठहराव नहीं करेगी।