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21 विभागों की भागीदारी के साथ ग्रामीण सेवा शिविर शुरू, एक ही जगह मिलेंगी सभी सरकारी सुविधाएं

जयपुर मुख्यमंत्री श्री भजनलाल शर्मा की मंशा एवं निर्देशों की अनुपालना में प्रदेश के ग्रामीण क्षेत्रों में आमजन को राज्य सरकार की विभिन्न जन-कल्याणकारी एवं फ्लैगशिप योजनाओं का सीधा लाभ पहुँचाने के लिए 12 जून से 15 जुलाई तक "ग्रामीण सेवा शिविर-2026" का आयोजन किया जाएगा। महा-अभियान के तहत राजस्व विभाग के अतिरिक्त 21 अन्य महत्वपूर्ण विभागों की भागीदारी सुनिश्चित की गई है। शिविरों का समय सप्ताह के कार्य दिवसों में प्रातः 9:30 बजे से सायं 6 बजे तक (अथवा कार्य समाप्ति तक) रहेगा। मुख्यमंत्री श्री शर्मा के निर्देशानुसार शिविर में आने वाले प्रत्येक नागरिक का कार्य उसी दिन पूर्ण करने का हरसंभव प्रयास किया जाएगा। यदि सायं 06:00 बजे तक कुछ कार्य अपूर्ण या लंबित रहते हैं, तो विभागवार उनकी सूची संधारित की जाकर समयबद्ध रूप से निस्तारण सुनिश्चित किया जाएगा। शिविर की शुरुआत से समाप्ति तक सभी अधिकारियों और कर्मचारियों की उपस्थिति अनिवार्य रहेगी। डिजिटल मॉनिटरिंग के लिए विशेष पोर्टल तैयार अभियान की पारदर्शिता और दैनिक प्रगति पर नजर रखने के लिए सूचना एवं प्रौद्योगिकी संचार विभाग द्वारा ऑनलाइन पोर्टल तैयार किया गया है। इसमें विभागीय कार्यों की दैनिक प्रगति रिपोर्ट इस पोर्टल पर शिविर प्रभारी के माध्यम से अनिवार्य रूप से अपडेट की जाएगी। इसके साथ ही, अभियान के दौरान निष्पादित होने वाले सभी दस्तावेजों व प्रमाण-पत्रों पर "ग्रामीण सेवा शिविर-2026" की विशेष मोहर अंकित की जाएगी। अभियान में स्थानीय स्तर पर सांसदों, विधायकों, जिला प्रमुखों, प्रधानों और अन्य जनप्रतिनिधियों की सहभागिता सुनिश्चित करने के लिए राजस्व विभाग ​की और से सभी जिला कलक्टर को निर्देशित किया गया है। एक ही स्थान पर मिलेंगी विभिन्न विभागों की सेवाएं ग्रामीण सेवा शिविर में राजस्व विभाग को अभियान का नोडल विभाग बनाया गया है। विभाग द्वारा राजस्व अभिलेखों एवं खातों का शुद्धिकरण, खातों का विभाजन, रास्तों संबंधी प्रकरणों का निस्तारण, नामांतरण (म्यूटेशन), सरकारी एवं चारागाह भूमि से अतिक्रमण हटाने, भूमिहीन किसानों को भूमि आवंटन, खातेदारी अधिकार प्रदान करने, सीमाज्ञान, आबादी विस्तार एवं विभिन्न प्रकार के प्रमाण-पत्र जारी करने की कार्यवाही की जाएगी। ग्रामीण विकास विभाग द्वारा वीबी—जी राम जी योजना का प्रचार—प्रसार एवं प्रधानमंत्री आवास योजना (ग्रामीण) के अंतर्गत पात्र परिवारों को लाभान्वित किया जाएगा। तथा स्वयं सहायता समूहों के गठन,बैंक खाता खुलवाना और बैंक लिंकेज की प्रक्रिया को गति देगा। पंचायती राज विभाग स्वच्छता संबंधी कार्यों, आईएचएचएल ​की स्वीकृतियां,विमुक्त घुमन्तु एवं अर्द्धघुमन्तु श्रेणी के परिवारों को पट्टा वितरण, भूखण्ड आवंटन तथा जन्म-मृत्यु प्रमाण-पत्र जारी करने की सेवाएं उपलब्ध कराएगा। वन विभाग द्वारा वन भूमि संबंधी प्रकरणों का निस्तारण एवं पौधों का निःशुल्क वितरण किया जाएगा। चिकित्सा एवं स्वास्थ्य विभाग मातृ-शिशु स्वास्थ्य जांच, कैंसर एवं सिकल सेल स्क्रीनिंग, टीबी जांच, टीकाकरण तथा आयुष्मान भारत कार्ड वितरण करेगा। पशुपालन विभाग द्वारा पशु स्वास्थ्य शिविर, टीकाकरण एवं मुख्यमंत्री मंगला पशु बीमा योजना के तहत बीमा पॉलिसियां वितरित की जाएगी। पेयजल विद्युत, सड़क एवं अन्य आधाभुत सुविधाओं से जुडी समस्याओं का होगा समाधान ग्रामीण सेवा शिविर में ऊर्जा विभाग द्वारा विद्युत सप्लाई,ट्रांसफार्मर एवं बिजली संबंधी शिकायतों का समाधान किया जाएगा। जबकि कृषि विभाग किसानों को विभिन्न योजनाओं एवं प्रधानमंत्री फसल बीमा योजना की जानकारी उपलब्ध कराएगा। आयोजना विभाग जनधन खाते, सामाजिक सुरक्षा बीमा योजनाओं, अटल पेंशन योजना एवं जनआधार से जुड़े कार्य करेगा। खाद्य एवं नागरिक आपूर्ति विभाग एनएफएसए से संबंधित लंबित प्रकरणों, ई-केवाईसी एवं आधार सीडिंग का निस्तारण करेगा। सामाजिक न्याय एवं अधिकारिता विभाग पेंशन सत्यापन, पालनहार योजना, यूडीआईडी कार्ड, कृत्रिम अंग वितरण एवं मुख्यमंत्री कन्यादान योजना से संबंधित कार्य किए जाएंगे।   इन विभागो की भी रहेगी भागीदारी शिविरों में महिला एवं बाल विकास विभाग लाडो प्रोत्साहन योजना, काली बाई भील सम्बल उड़ान योजना, पन्नाधाय सुरक्षा एवं समान केन्द्र,मुख्यमंत्री सामुहिक विवाह अनुदान योजना,वन स्टॉप सेन्टर,महिला हेल्पलाइन,शिक्षा सेतु,मुख्यमंत्री मातृत्व पोषण, प्रधानमंत्री मातृत्व वंदना योजना, बेटी बचाओ-बेटी पढ़ाओ, महिला सुरक्षा एवं अन्य कल्याणकारी योजनाओं का लाभ पात्र महिलाओं तक पहुंचाएगा। श्रम विभाग निर्माण श्रमिकों के लिए टूलकिट सहायता योजना के आवेदनों का निस्तारण करेगा। आपदा प्रबंधन एवं सहायता विभाग प्राकृतिक आपदाओं से संबंधित सहायता प्रकरणों का निस्तारण करेगा। जल संसाधन विभाग जल निकासी, जलभराव, बांधों एवं अतिक्रमण से संबंधित प्रस्ताव तैयार करेगा। परिवहन विभाग पात्र व्यक्तियों को रोडवेज बसों के लिए रियायती एवं निःशुल्क यात्रा पास जारी किए जाएंगे। सहकारिता विभाग किसानों को फसली ऋण योजनाओं के प्रति जागरूक करेगा तथा पीएम-किसान लाभार्थियों का सत्यापन करेगा। शिक्षा विभाग नामांकन वृद्धि,पालनहार योजना, छात्रवृत्ति समस्याओं के समाधान एवं विद्यालय भूमि से अतिक्रमण हटाने की कार्रवाई की जाएगी। आयुर्वेद विभाग की स्वास्थ्य सेवाएं पहुंचेंगी गांव—गांव शिविरों में आयुर्वेद एवं भारतीय चिकित्सा पद्धति विभाग निःशुल्क स्वास्थ्य जांच शिविर आयोजित कर आवश्यक दवाइयों का वितरण करेगा। सैनिक कल्याण विभाग पूर्व सैनिकों की पेंशन एवं पहचान पत्र संबंधी समस्याओं का समाधान करेगा। जन स्वास्थ्य अभियांत्रिकी एवं भू-जल विभाग पेयजल व्यवस्था, हैंडपंप मरम्मत, जल गुणवत्ता जांच तथा पाइपलाइन लीकेज की समस्याओं का निराकरण करेगा। सार्वजनिक निर्माण विभाग द्वारा ग्रामीण सड़कों एवं राजकीय भवनों की मरम्मत सुनिश्चित की जाएगी। राज्य स्तर पर गठित होगा समन्वय प्रकोष्ठ- अभियान की प्रभावी मॉनिटरिंग एवं दैनिक समीक्षा के लिए प्रमुख शासन सचिव, राजस्व के निर्देशन में राज्य स्तर पर समन्वय प्रकोष्ठ का गठन किया गया है। राज्य सरकार ने आमजन से अपील की है कि वे अपने निकटतम ग्राम पंचायत मुख्यालय पर आयोजित ग्रामीण सेवा शिविरों में पहुंचकर विभिन्न योजनाओं एवं सेवाओं का लाभ प्राप्त करें।

बाढ़-जलभराव से निपटने के लिए 15 जून से 24×7 कंट्रोल रूम सक्रिय

 जयपुर  आपदा प्रबंधन, सहायता एवं नागरिक सुरक्षा मंत्री डॉ. किरोड़ी लाल मीणा ने कहा कि आगामी मानसून के दृष्टिगत प्रदेश में संभावित बाढ़, अतिवृष्टि, जलभराव एवं अन्य प्राकृतिक आपदाओं से प्रभावी ढंग से निपटने के लिए सभी विभाग व्यापक एवं समन्वित तैयारियां सुनिश्चित करें। उन्होंने कहा कि जनसुरक्षा सरकार की सर्वोच्च प्राथमिकता है तथा संभावित आपदा की स्थिति में त्वरित राहत एवं बचाव कार्य सुनिश्चित करने के लिए अभी से पूर्ण तैयारी रखें। शासन सचिवालय के सभागार में गुरुवार को आयोजित राज्य स्तरीय समीक्षा बैठक में डॉ.किरोड़ी लाल मीणा ने कहा कि पिछले वर्षों के अनुभवों एवं संवेदनशील क्षेत्रों के आकलन के आधार पर बाढ़ संभावित एवं जलभराव वाले क्षेत्रों की पुनः पहचान की जाए तथा वहां आवश्यक संसाधनों की अग्रिम उपलब्धता सुनिश्चित की जाए। उन्होंने कहा कि आपदा प्रबंधन में पूर्व तैयारी, समयबद्ध चेतावनी, त्वरित प्रतिक्रिया तथा प्रभावी समन्वय सफलता का आधार है। उन्होंने निर्देश दिए कि राज्य एवं जिला स्तर पर स्थापित आपदा नियंत्रण कक्ष 15 जून से चौबीसों घंटे सक्रिय रहें। राज्य स्तरीय नियंत्रण कक्ष, जिला नियंत्रण कक्ष तथा विभागीय नियंत्रण कक्षों के मध्य बेहतर समन्वय स्थापित किया जाए तथा सभी सूचनाएं समय पर राज्य नियंत्रण कक्ष को प्रेषित की जाएं। आपदा प्रबंधन विभाग द्वारा जारी दिशा-निर्देशों एवं एडवाइजरी की पूर्ण पालना सुनिश्चित की जाए। आपदा प्रबंधन मंत्री ने कहा कि भारतीय मौसम विज्ञान विभाग द्वारा 24 घंटे संचालित वेधशालाओं एवं मौसम निगरानी तंत्र के माध्यम से नियमित मौसम पूर्वानुमान एवं चेतावनियां जारी की जा रही हैं। मौसम संबंधी जानकारी के त्वरित प्रसार के लिए सोशल मीडिया, इलेक्ट्रॉनिक मीडिया, प्रिंट मीडिया, एसएमएस, व्हाट्सएप समूहों तथा अन्य संचार माध्यमों का प्रभावी उपयोग किया जाए। उन्होंने सभी अधिकारियों को सचेत ऐप डाउनलोड कर चेतावनी अलर्ट से अद्यतन रहने के निर्देश दिए। उन्होंने कहा कि मानसून की नियमित निगरानी के लिए वेदर वॉच ग्रुप का गठन किया गया है, जो नियमित बैठकों के माध्यम से वर्षा की स्थिति, संभावित जोखिमों तथा आवश्यक तैयारियों की समीक्षा करेगा। राज्य एवं जिला स्तर पर आपदा प्रबंधन तंत्र, मौसम विभाग, जल संसाधन विभाग तथा जिला प्रशासन के बीच सतत समन्वय बनाए रखा जाएगा।  डॉ. मीणा ने जल संसाधन विभाग को सभी बांधों, जलाशयों एवं एनीकटों के गेटों की मरम्मत, रखरखाव एवं नियमित निरीक्षण सुनिश्चित करने के निर्देश दिए। उन्होंने डाउनस्ट्रीम क्षेत्रों में रहने वाले लोगों के लिए प्रभावी अर्ली वार्निंग सिस्टम विकसित करने, बाढ़ संभावित क्षेत्रों का जोखिम मूल्यांकन करने तथा आवश्यकता पड़ने पर सुरक्षित निकासी की समुचित व्यवस्था सुनिश्चित करने को कहा।  उन्होंने नगरीय विकास विभाग, स्थानीय निकायों एवं पंचायतीराज संस्थाओं को नालों की सफाई, ड्रेनेज तंत्र को सुचारू बनाने, जलभराव वाले क्षेत्रों की पहचान करने तथा डी-वाटरिंग के लिए पर्याप्त पम्पसेट, जनरेटर, रेत की बोरियां एवं अन्य आवश्यक उपकरण उपलब्ध रखने के निर्देश दिए। उन्होंने कहा कि उचित ड्रेनेज व्यवस्था के माध्यम से शहरी एवं ग्रामीण क्षेत्रों में जलभराव की समस्या को न्यूनतम किया जाए।  डॉ. मीणा ने कहा कि बाढ़ प्रबंधन के लिए त्रिस्तरीय तैयारी सुनिश्चित की जाए। इसमें बाढ़ से पूर्व की तैयारी, बाढ़ के दौरान राहत एवं बचाव कार्य तथा बाढ़ के पश्चात पुनर्वास एवं पुनर्स्थापन की कार्ययोजना शामिल हो। जिला कलक्टर बाढ़ संहिता के अनुसार सभी आवश्यक व्यवस्थाएं सुनिश्चित करें। उन्होंने राज्य आपदा मोचन बल एसडीआरएफ, राष्ट्रीय आपदा मोचन बल एनडीआरएफ, सेना, वायुसेना, पुलिस, सिविल डिफेंस, होमगार्ड तथा अन्य सुरक्षा एजेंसियों को पूर्ण सतर्कता बनाए रखने तथा आवश्यकता पड़ने पर त्वरित कार्रवाई सुनिश्चित करने के निर्देश दिए। विशेष बचाव दलों एवं क्विक रिस्पॉन्स टीमों की तैनाती कर आवश्यक उपकरणों, नौकाओं, लाइफ जैकेट, रस्सियों एवं अन्य संसाधनों की उपलब्धता सुनिश्चित की जाए।  बैठक में चिकित्सा एवं स्वास्थ्य विभाग को 24×7 नियंत्रण कक्ष संचालित करने, पर्याप्त दवाइयों एवं जीवनरक्षक औषधियों का भंडारण रखने तथा मोबाइल मेडिकल टीमों की उपलब्धता सुनिश्चित करने के निर्देश दिए गए। साथ ही जलजनित एवं संक्रामक रोगों की रोकथाम के लिए विशेष निगरानी रखने को कहा गया। जन स्वास्थ्य अभियांत्रिकी विभाग को सुरक्षित पेयजल आपूर्ति, क्लोरीनेशन तथा क्षतिग्रस्त जलापूर्ति लाइनों की त्वरित मरम्मत सुनिश्चित करने के निर्देश दिए गए।  ऊर्जा विभाग को विद्युत आपूर्ति व्यवस्था सुचारू बनाए रखने, क्षतिग्रस्त लाइनों एवं ट्रांसफार्मरों की त्वरित मरम्मत तथा राहत शिविरों में निर्बाध विद्युत उपलब्ध कराने के निर्देश दिए गए। जिलों में उपलब्ध हेवी ड्यूटी जनरेटर सेट्स का डेटाबेस तैयार कर आवश्यकता पड़ने पर उनका उपयोग सुनिश्चित करने को कहा गया।  उन्होंने सार्वजनिक निर्माण विभाग को जर्जर भवनों की पहचान करने, रेलवे अंडरपास एवं संभावित जलभराव वाले क्षेत्रों में चेतावनी संकेतक लगाने तथा क्षतिग्रस्त सार्वजनिक परिसंपत्तियों के त्वरित पुनर्स्थापन की कार्ययोजना तैयार करने के निर्देश दिए। सभी विभागों को अपने क्षेत्राधिकार में जर्जर भवनों एवं जोखिम वाले स्थलों का सर्वेक्षण कर आवश्यक कार्रवाई सुनिश्चित करने को कहा।  पशुपालन विभाग को पशुओं के लिए चारा, दवाइयों एवं टीकाकरण की पर्याप्त व्यवस्था रखने तथा पशुपालकों को जागरूक करने के निर्देश दिए गए। वहीं मत्स्य विभाग को मछुआरों, तैराकों एवं विशेषज्ञ गोताखोरों की उपलब्धता सुनिश्चित करने को कहा गया। खाद्य एवं नागरिक आपूर्ति विभाग को संवेदनशील क्षेत्रों के लिए आवश्यक खाद्यान्न एवं अन्य जरूरी वस्तुओं का अग्रिम भंडारण सुनिश्चित करने के निर्देश दिए गए। डॉ. मीणा ने जिला कलक्टरों को राहत शिविरों, निकासी मार्गों, सुरक्षित आश्रय स्थलों, खोज एवं बचाव दलों तथा उपलब्ध संसाधनों का पूर्व परीक्षण करने के निर्देश दिए। जलभराव एवं बाढ़ संभावित क्षेत्रों की मैपिंग, राहत शिविरों का चिन्हीकरण तथा मॉक ड्रिल आयोजित कर तैयारियों की समीक्षा करने को कहा । जिला आपदा प्रबंधन प्राधिकरणों की बैठकें आयोजित कर विभागवार तैयारियों की समीक्षा करने तथा ग्राम स्तर तक चेतावनी एवं सूचना तंत्र को सुदृढ़ बनाने को निर्देशित किया।  आपदा प्रबंधन, सहायता एवं नागरिक सुरक्षा राज्य मंत्री श्री ओटाराम देवासी ने कहा कि राज्य सरकार का उद्देश्य आपदा आने पर राहत पहुंचाने के साथ पूर्व चेतावनी एवं समयबद्ध तैयारी के माध्यम से जनहानि एवं संपत्ति की क्षति को न्यूनतम करना है। उन्होंने कहा कि 15 जून से राज्य एवं जिला आपदा नियंत्रण कक्ष 24×7 सक्रिय रहेंगे तथा हेल्पलाइन सेवाएं भी पूर्ण रूप से कार्यशील रहे। मौसम विभाग, जल संसाधन विभाग, जिला प्रशासन एवं आपदा प्रबंधन तंत्र के मध्य सतत समन्वय स्थापित कर संभावित अतिवृष्टि, जलभराव एवं बाढ़ की परिस्थितियों पर निरंतर निगरानी रखने के निर्देश दिए।  श्री देवासी ने कहा कि संवेदनशील क्षेत्रों की पहचान, राहत शिविरों की तैयारी, … Read more

WDFC बना लॉजिस्टिक्स गेमचेंजर: तेज माल परिवहन, कम लागत और नए रोजगार के अवसर

 जयपुर वेस्टर्न डेडिकेटेड फ्रेट कॉरिडोर (डब्ल्यूडीएफसी) के माध्यम से देश-प्रदेश में औद्योगिक विकास तेजी से फास्ट्रेक पर दौड़ रहा है। इस कॉरिडोर से रेल आधारित लॉजिस्टिक्स अवसंरचना के सुदृढ़ीकरण और आपूर्ति श्रृंखला की विश्वसनीयता में बड़ा सुधार आ रहा है। कॉरिडोर में विशेषकर रेल-पर-ट्रक की सेवा से माल का आवागमन अधिक तेज और सुगम बना है। यह कॉरिडोर राजस्थान में आर्थिक विकास को गति देने एवं रोजगार बढ़ाने के साथ-साथ शहरी एवं ग्रामीण क्षेत्रों में बड़ा सामाजिक बदलाव लाने को तैयार है। जवाहर लाल नेहरू पोर्ट टर्मिनल (जेएनपीटी) से दादरी तक फैले इस वेस्टर्न डेडिकेटेड फ्रेट कॉरिडोर की लम्बाई 1 हजार 506 किमी. एवं लागत 1 लाख 24 हजार करोड़ रुपये से अधिक है। कॉरिडोर का लगभग 39 प्रतिशत हिस्सा राजस्थान से होकर गुजरता है। यह कॉरिडोर राजस्थान को भारत के उत्तरी एवं पश्चिमी बाजारों तक बेहतर संपर्क प्रदान करता है। कॉरिडोर के अंतर्गत जेएनपीटी से न्यू सफाले (वेतरणा) सेक्शन पर हाल ही में सफलतापूर्वक ट्रायल रन हो चुका है। इसके साथ ही, इस कॉरिडोर का काम पूर्ण हो चुका है। वहीं, कई सेक्शन में माल परिवहन पहले से ही प्रारंभ है। अजमेर में 1.5 मिलियन टन क्षमता का कार्गो टर्मिनल शुरू- यह कॉरिडोर राजस्थान के सीकर, रींगस, फुलेरा, ब्यावर, सिरोही से होकर गुजर रहा है। जिससे इन जिलों के साथ-साथ अन्य स्थानों के उत्पादों को राष्ट्रीय एवं अंतर्राष्ट्रीय बाजारों तक पहुंच सुनिश्चित हो सकेगी। हाल ही में अजमेर के सराधना में नए गतिशक्ति मल्टी मॉडल कार्गो टर्मिनल का उद्घाटन हुआ है। इस टर्मिनल में आधुनिक कार्गो हैंडलिंग अवसंरचना, वेयरहाउसिंग सुविधाएं तथा निर्बाध मल्टी-मॉडल कनेक्टिविटी उपलब्ध कराई गई है, जिससे उद्योगों एवं व्यापारियों के लिए माल परिवहन अधिक तेज, सुरक्षित एवं किफायती होगा। यह टर्मिनल प्रति माह लगभग 40 रेक (लगभग 1.5 मिलियन टन प्रति वर्ष) कार्गो हैंडल करने में सक्षम होगा, जिसमें मार्बल, ग्रेनाइट, खनिज तथा अन्य वस्तुएं शामिल हैं। यानि किशनगढ़ के मार्बल को कॉरिडोर के उच्च गति माल परिवहन नेटवर्क के माध्यम से जेएनपीटी, पीपावाव एवं मुंद्रा बंदरगाहों तक पहुंचाया जाएगा। इससे लोकल फॉर ग्लोबल का संकल्प साकार होगा। ट्रेन की लम्बाई लगभग दोगुनी, रफ्तार डेढ़ गुना से अधिक- यह कॉरिडोर लॉजिस्टिक्स अवसंरचना को सुदृढ़ करने के साथ ही माल परिवहन को तेजी से बढ़ाने की दीर्घकालिक पहल है। सामान्य कॉरिडोर की तुलना में 66 प्रतिशत वृद्धि के साथ इस कॉरिडोर की ऊंचाई 7.1 मीटर और 14 प्रतिशत वृद्धि के साथ चौड़ाई 3,660 एमएम रखी गई है। ट्रेन की लम्बाई 1500 मीटर है, जबकि सामान्य कॉरिडोर में 700 मीटर ही होती है। वहीं, डबल कन्टेनर स्टेक और 2.4 प्रतिशत ट्रेन लोड की क्षमता भी इस कॉरिडोर में उपलब्ध है। इस कॉरिडोर में ट्रेन की रफ्तार भी औसतन 25 किमी. से बढ़ाकर 65 किमी. प्रति घण्टे की गई है।  रेल-पर-ट्रक की सुविधा, डीजल की खपत कम- डब्ल्यूडीएफसी की सबसे बड़ी विशेषता रेल-पर-ट्रक (टीओटी) सेवा है। यह रेलवे की दीर्घकालिक माल परिवहन परिवर्तन रणनीति के हिस्सा के रूप में बनाई गई है, जो बहु-मॉडल लॉजिस्टिक्स को सक्षम बनाता है। इस सेवा के तहत माल से लदे ट्रकों को विशेष रूप से संशोधित फ्लैट वैगनों पर समर्पित माल ढुलाई गलियारा के माध्यम से ले जाया जाता है। यह रेल-पर-ट्रक सेवा राजमार्गों की भीड़भाड़ को कम करने, आयातित जीवाश्म ईंधन पर निर्भरता घटाने और राष्ट्रीय लॉजिस्टिक्स लागतों को अनुकूलित करने में मदद करती है। इससे डीजल की खपत घटती है और सड़क अवसंरचना की क्षति में कमी आती है। टीओटी सेवा किसानों और उद्यमियों के लिए लाभकारी है। यह उन्हें अपनी फसलों और उत्पादों का तेजी से परिवहन करने की सुविधा प्रदान करती है। जैसे सीकर के प्याज को खेतों से नजदीकी टीओटी टर्मिनलों तक ले जाया जा सकता है, इसे समर्पित माल ढुलाई गलियारे के माध्यम से तेजी से स्थानांतरित किया जा सकता है, और सड़क मार्ग से दूर के उपभोक्ता केंद्रों तक न्यूनतम रख-रखाव और समय हानि के साथ पहुंचाया जा सकता है। उल्लेखनीय है कि डेडिकेटेड फ्रेट कॉरिडोर एक महत्वाकांक्षी परियोजना है। इसमें पश्चिमी डेडिकेटेड फ्रेट कॉरिडोर के अंतर्गत दादरी से जीएनपीटी एवं पूर्वी डेडिकेटेड फ्रेट कॉरिडोर के तहत लुधियाना से डंकुनी तक जोड़ा गया है। यह परियोजना देश का लगभग 70 प्रतिशत माल परिवहन करने के उद्देश्य से बनाई गई है। डेडिकेटेड फ्रेट कॉरिडोर के दोनों तरफ 150 किलोमीटर का प्रभाव क्षेत्र दिल्ली-मुम्बई इण्डस्ट्रीयल कॉरिडोर के रूप में विकसित किया जा रहा है। इसके अंतर्गत खुशखेड़ा-भिवाड़ी-नीमराना निवेश क्षेत्र और जोधपुर-पाली-मारवाड़ औद्योगिक क्षेत्र विकसित किए जा रहे हैं

5 राज्यों में फैला ड्रग नेटवर्क ध्वस्त, सिरसा में एएनटीएफ ने पकड़ी करोड़ों की खेप

 जयपुर राजस्थान पुलिस की एंटी नारकोटिक्स टास्क फोर्स ने महानिदेशक पुलिस श्री राजीव कुमार शर्मा के निर्देशानुसार कार्रवाई करते हुए नशे के खिलाफ अपने अभियान में एक और ऐतिहासिक सफलता हासिल की है। इस कार्रवाई में मणिपुर से उत्तर भारत के रास्ते राजस्थान लाई जा रही करीब 90 किलोग्राम अवैध अफीम के दूध की खेप जब्त की है। अंतरराष्ट्रीय बाजार में इसकी अनुमानित कीमत 4.50 करोड़ रुपये आंकी गई है। हरियाणा के सिरसा जिले में हरियाणा पुलिस के सहयोग से अंजाम दी गई यह कार्रवाई हाल के वर्षों में एएनटीएफ की सबसे बड़ी और प्रभावशाली कार्रवाइयों में गिनी जा रही है। राजस्थान को नशामुक्त बनाने के लिए प्रतिबद्ध एंटी नारकोटिक्स टास्क फोर्स का कहर अब नशे के सौदागरों पर वज्र बनकर टूटा है। एएनटीएफ महानिरीक्षक पुलिस श्री विकास कुमार ने बताया कि  उत्तर-पूर्वी राज्यों से उत्तर भारत में आ रही नशे की बड़ी खेपों को रोकने के लिए 'मणिपुर मॉड्यूल' पर तकनीकी अन्वेषण शुरू किया गया था। महीनों की अथक मेहनत और 5 राज्यों में फैले जाल को काटकर एएनटीएफ ने यह ऐतिहासिक सफलता हासिल की है। दो महीने तक पकाई खिचड़ी: साए की तरह पीछे लगी रही एएनटीएफ एएनटीएफ को मणिपुर और उत्तर-पूर्वी राज्यों से राजस्थान में भारी मात्रा में मादक पदार्थ लाए जाने का इनपुट मिल रहा था। आईजी श्री विकास कुमार ने अपनी विशेष खुफिया टीमों को तीन बार मणिपुर भेजा, जहां टीमों ने 10-10 दिन कैंप कर पूरे इलाके का सर्वे किया। इस दौरान पाली निवासी सुखराम विश्नोई रडार पर आया, जो लगातार मणिपुर और राजस्थान के चक्कर काट रहा था। इस बार जब सुखराम मणिपुर गया, तो एएनटीएफ की टीमें साए की तरह उसके पीछे लग गईं। शातिर सुखराम लगातार अपने फोन, गाड़ियां और रास्ते बदलता रहा, लेकिन एएनटीएफ का इरादा नहीं बदल सका। मौज-मस्ती, भगवत भक्ति और पुलिस की पहेली मणिपुर से नशे का सौदा फाइनल कर सुखराम अपने ऐश-ओ-आराम के ठिकाने लखनऊ उत्तर प्रदेश पहुंचा। वहां उसने अपनी एक महिला मित्र को बुलाया और उसके साथ नैनीताल तथा प्रसिद्ध कैंची धाम की यात्रा कर जीवन के आनंद लेता रहा। एएनटीएफ इस पहेली को सुलझाने में जुटी रही कि जिस गाड़ी में करोड़ों का नशा होने का शक है, उससे यह जोड़ा खुलेआम घूम कैसे रहा है? आखिरकार, महिला मित्र बस से जयपुर के लिए रवाना हुई और सुखराम अपनी मिजोरम नंबर की कार से अलग रास्ते से जयपुर की तरफ बढ़ा। फोन बदले, गाड़ियां बदलीं, रास्ते बदले… लेकिन नहीं टूटा पुलिस का पीछा जयपुर के नजदीक नाकाबंदी कर एएनटीएफ ने सुखराम को दबोच लिया, लेकिन पूरी कार खंगालने पर भी एक ग्राम अफीम नहीं मिली। दरअसल, सुखराम ने टोल नाके पर पुलिस को देखकर अपने सारे मोबाइल और तकनीकी उपकरण रिसेट कर दिए थे। एएनटीएफ की तकनीकी विंग ने जब सुखराम के रिसेट उपकरणों से डेटा रिकवर किया, तो उसमें एक संदिग्ध ट्रक के फास्टैग कार्ड की डिटेल मिली। गहनता से जांच करने पर पता चला कि इस ट्रक का फास्टैग भुगतान सुखराम खुद कर रहा था और वह ट्रक मणिपुर से असम, पश्चिम बंगाल, बिहार और यूपी होते हुए हरियाणा की सीमा में दाखिल हो चुका था। श्रीनगर और जम्मू का 'कोड वर्ड' एएनटीएफ की हनुमानगढ़, गंगानगर और नागौर की टीमें तुरंत उस ट्रक के पीछे लग गईं। इसी बीच जम्मू में बैठे मुख्य सूत्रधार मगनलीप (काल्पनिक नाम) ने सुखराम के पकड़े जाने के डर से ट्रक ड्राइवर को कोड वर्ड में निर्देश दिया- "रात तक श्रीनगर (जोधपुर) पहुंचना था पर अब जम्मू ही रुकना पड़ेगा, आगे नहीं जाएंगे।" इसका मतलब था कि पुलिस के डर से अब माल राजस्थान नहीं बल्कि रास्ते में ही ठिकाने लगाया जाएगा। इसके बाद ट्रक अचानक राजस्थान सीमा से ठीक पहले हरियाणा के सिरसा इलाके में रुक गया। महिला इंस्पेक्टर का जांबाज नेतृत्व और सिरसा पुलिस की मुस्तैदी इस क्रिटिकल मोड़ पर आईजी विकास कुमार ने खुद मोर्चा संभाला। उन्होंने रात के करीब 03:30 बजे हरियाणा के सिरसा एसपी श्री दीपक सारण को फोन किया। मुस्तैदी दिखाते हुए सिरसा एसपी ने तत्काल अपनी फोर्स को राजस्थान एएनटीएफ की टीम के साथ अटैच किया। इस पूरे धरपकड़ ऑपरेशन की कमान एएनटीएफ की महिला इंस्पेक्टर श्रीमती किरणजीत कौर (हनुमानगढ़ टीम प्रभारी) के हाथ में थी, जो पिछले 36 घंटों से बिना खाए-पिये और बिना सोए पूरी मुस्तैदी से अपने कर्तव्य को अंजाम दे रही थीं। संयुक्त टीम ने घेराबंदी कर संदिग्ध ट्रक को ढूंढ निकाला। ट्रक के नीचे वेल्डिंग कर बनाया था गुप्त कमरा शुरुआती जांच में ट्रक पूरी तरह खाली मिला और ड्राइवर अनजान बनता रहा। लेकिन जब एएनटीएफ की टीम ने ट्रक के निचले हिस्से (चेसिस) की बारीकी से जांच की, तो दंग रह गए। तस्करों ने ट्रक के नीचे लोहे की पत्तियों से वेल्डिंग कर और नट-बोल्ट लगाकर एक गुप्त कमरेनुमा केबिन बना रखा था। जब कटर से उस तहखाने को तोड़ा गया, तो उसके अंदर से 95 पोटलियों में पैक 88.970 किलोग्राम अवैध अफीम बरामद हुई। मौके से आरोपी किशनाराम विश्नोई पुत्र छोगा राम उम्र 44 साल निवासी शिवपुरा जिला पाली को गिरफ्तार किया गया और मुख्य सूत्रधार सुखराम विश्नोई को हिरासत में लिया गया। क्यों रखा गया 'ऑपरेशन जमुहार' नाम? पांच राज्यों में फैले इस नेटवर्क को ध्वस्त करने वाले इस मेगा ऑपरेशन का नामकरण (ज-मु-हा-र) इन राज्यों के शुरुआती अक्षरों को मिलाकर किया गया: ° *ज* – जम्मू (जहां मुख्य सूत्रधार बैठा था) ° *म* – मणिपुर (जहां से नशे की खेप चली) ° *उ* – उत्तर प्रदेश (ट्रांजिट पॉइंट – लखनऊ) ° *हा* – हरियाणा (जहां माल को दबोचा गया) ° *र* – राजस्थान (जहां नशे की सप्लाई होनी थी) ° *शाब्दिक अर्थ:* 'जमुहार' का शाब्दिक अर्थ मुख्य फसल को नुकसान पहुंचाने वाली 'जहरीली घास' होता है, जो मणिपुर से लाए जा रहे अफीम के इस जहर के लिए बिल्कुल सटीक बैठता है। मुख्यालय में किया जाएगा जांबाज टीम को सम्मानित एएनटीएफ महानिरीक्षक श्री विकास कुमार ने बताया कि हाल ही के दिनों की यह सबसे बड़ी और प्रभावशाली कार्रवाई है। 36 घंटों तक बिना आराम किए इस जटिल ऑपरेशन को सफल बनाने वाली महिला निरीक्षक किरणजीत कौर और उनकी पूरी टीम को विशेष कार्यक्रम आयोजित कर एएनटीएफ मुख्यालय, जयपुर में सम्मानित किया जाएगा। एएनटीएफ की आमजन से अपील महानिरीक्षक … Read more

ढिकली गांव में सांपों का कुनबा बरामद, मां के साथ 22 नवजात रसेल वाइपर रेस्क्यू

उदयपुर राजस्थान के उदयपुर शहर के ढिकली गांव से गुरुवार को एक बेहद चौंकाने वाला मामला सामने आया है. यहां एक ट्यूबवेल के चेंबर से रसेल वाइपर प्रजाति के सांपों (Russells Viper Snakes) का पूरा कुनबा बरामद किया गया है. चेंबर के भीतर एक साथ इतने जहरीले सांपों की मौजूदगी की खबर फैलते ही पूरे इलाके में हड़कंप मच गया. सूचना मिलते ही वाइल्ड एनिमल रेस्क्यू सेंटर (WARC) की टीम तुरंत मौके पर पहुंची और एक रेस्क्यू अभियान चलाया. जब टीम ने चेंबर से सांपों को बाहर निकालकर गिनना शुरू किया तो गिनती 1, 2, 3, 4 करते हुए सीधे 23 पर जाकर रुकी. इस सफल रेस्क्यू के बाद सामने आया कि इन सांपों में 22 नवजात बच्चे और उनकी मां शामिल है. अंडे नहीं, सीधे बच्चों को जन्म देती है रसेल वाइपर प्रजाति इस रेस्क्यू के बाद वाइल्ड एनिमल रेस्क्यू सेंटर के संभागीय अध्यक्ष डॉ. चमन सिंह चौहान ने सांपों की इस प्रजाति के बारे में एक विशेष जानकारी साझा की. उन्होंने बताया कि रसेल वाइपर सांपों की अन्य सामान्य प्रजातियों की तरह अंडे नहीं देता, बल्कि यह सीधे बच्चों को जन्म देता है. जीव विज्ञान के अनुसार, इस प्रजाति का प्रजनन काल सामान्यतः नवंबर महीने के आसपास होता है और इसके बाद जून-जुलाई के महीनों में बच्चे जन्म लेते हैं. यही वजह है कि जून के महीने में इस ट्यूबवेल चेंबर के भीतर एक साथ इतने सारे नवजात बच्चे अपनी मां के साथ पाए गए. वन्य जीवों को नुकसान न पहुंचाने की विशेष अपील रेस्क्यू के बाद वाइल्ड एनिमल रेस्क्यू सेंटर की टीम ने स्थानीय लोगों से एक अपील भी की. विशेषज्ञों ने कहा है कि यदि कभी भी किसी के घर या आसपास कोई वन्य जीव या सांप दिखाई दे, तो लोग घबराकर उसे खुद पकड़ने या जान से मारने का प्रयास बिल्कुल न करें. ऐसी किसी भी स्थिति में तुरंत रेस्क्यू टीम को सूचित करना चाहिए ताकि वन्यजीवों को सुरक्षित तरीके से उनके प्राकृतिक आवास में भेजा जा सके.

46 डिग्री तापमान के बीच सक्रिय हुआ नया पश्चिमी विक्षोभ, कई जिलों में येलो अलर्ट

 जयपुर राजस्‍थान में भीषण गर्मी के बीच आज से नया पश्च‍िमी व‍िक्षोभ एक्‍ट‍िव हो रहा है, ज‍िससे आंधी-बार‍िश का दौरा फ‍िर से शुरू होने का अनुमान है. इसकी वजह से तापमान में कमी होगी. लोगों को गर्मी से राहत म‍िलने की उम्‍मीद है. मौसम विभाग ने यह जानकारी दी. बुधवार सुबह राज्‍य के पूर्वी भाग में कहीं-कहीं हल्‍की बार‍िश र‍िकॉर्ड हुई है. जबक‍ि पश्‍च‍िमी राजस्‍थान में भीषण गर्मी रही. श्रीगंगानगर में 46 डिग्री पारा श्रीगंगानगर में सबसे अध‍िक तापमान 46 ड‍िग्री सेल्‍स‍ियस के पार पहुंच गया. गर्मी से लोगों को बुरा हाल हो रहा है. दोपहर 12 बजे तक सड़क पर इक्‍का-दुक्‍का वाहन ही नजर आते हैं. पश्‍च‍िमी राजस्‍थानके बीकानेर और जोधपुर में गर्मी से राहत म‍िलने की उम्‍मीद नहीं है. ज्‍यादातर इलाकों में मौसम शुष्‍क रहेगा. अधिकतम तापमान 44-46 डिग्री दर्ज होने का अनुमान है. कुछ जगहों पर लू चलेगी. 20-30 क‍िलोमीटर प्रत‍ि घंटे की रफ्तार से हवाएं चलेंगी. आंधी-बारिश का दौर फिर बढ़ेगा नए पश्‍चिमी व‍िक्षो से आज कुछ ज‍िलों में आंधी-बार‍िश की गत‍िव‍िधियां फ‍िर बढ़ेंगी. 11 से 14 जून के दौरान बीकानेर, जयपुर, अजमेर, भरतपुर संभाग के कुछ भागों में 50-60 किलोमीटर प्रति घंटे के रफ्तार से तेज आंधी चलेगी.  साथ ही कहीं-कहीं हल्की से मध्यम बारिश हो सकती है.  जैसलमेर: आंधी और हवाओं से मिली थोड़ी राहत, लेकिन दोपहर में फिर बढ़ेगी तपिश,11 से 14 जून के बींच आंधी बारिश का अलर्ट है. आंधी बारिश का येलो अलर्ट राजस्थान में आंधी-बारिश का येलो अलर्ट है. डीग, भरतपुर और धौलपुर जिलों में कहीं-कहीं हल्के से मध्यम मेघगर्जन गरज-चमक के साथ अचानक तेज हवाओं के साथ बारिश की संभावना है. 30-40 किलोमीटर प्रति घंटे की रफ्तार से हवाएं चलेंगी. मौसम विभाग ने लोगों को अलर्ट किया है.

ब्लैक फिल्म, हूटर और फैंसी नंबर प्लेट वालों पर पुलिस सख्त

 जयपुर सड़क सुरक्षा को लेकर राजस्थान पुलिस का विशेष अभियान अब सख्ती के चरण में पहुंच गया है।  पुलिस महानिदेशक श्री राजीव कुमार शर्मा के निर्देशन में चलाए जा रहे प्रदेशव्यापी अभियान के तहत मात्र 6 दिनों में 50,174 वाहनों के खिलाफ कार्रवाई की गई है। अवैध ब्लैक फिल्म, नियम विरुद्ध नंबर प्लेट, अनधिकृत लेखन, मॉडिफिकेशन और हूटर-फ्लैशर लगाने वालों पर पुलिस ने कड़ा शिकंजा कसते हुए छठे दिन  रिकॉर्ड 10,825 चालान बनाए। राजस्थान पुलिस की ‘पहले समझाइश, फिर सख्ती’ नीति के तहत यह अभियान सड़क सुरक्षा और दुर्घटनाओं में कमी लाने की दिशा में लगातार प्रभावी साबित हो रहा है। अतिरिक्त महानिदेशक पुलिस यातायात डॉ. बी.एल. मीणा ने बताया कि डीजी ट्रैफिक श्री अनिल पालीवाल के पर्यवेक्षण में अभियान संचालित है। अभियान 4 जून से शुरू हुआ था, जिसमें अब तक वाहनों के शीशों पर अवैध काली फिल्म लगाने के मामलों में सर्वाधिक 19 हजार 694 वाहनों के विरुद्ध कार्रवाई दर्ज की गई। इसके साथ ही, नियम विरुद्ध नंबर प्लेट एवं पंजीयन चिन्ह प्रदर्शित करने वाले 13 हजार 46 वाहनों पर भी कार्रवाई की गई है। वाहनों पर अनाधिकृत शब्द, पदनाम, प्रतीक एवं अन्य लेखन प्रदर्शित करने के 6 हजार 791 मामलों में पुलिस ने सख्त कार्रवाई की हैं। वहीं 4 हजार 757 वाहनों में अवैध बॉडी अथवा चेसिस मॉडिफिकेशन पाए जाने पर वाहन चालकों के विरुद्ध प्रवर्तन किया गया। अभियान के दौरान अवैध लाल-नीली बत्ती, फ्लैशर, स्ट्रोब लाइट एवं हूटर का उपयोग करने वाले 3 हजार 244 वाहनों पर भी कार्रवाई की गई। साथ ही, प्रेशर हॉर्न एवं एयर हॉर्न का उपयोग करने वाले 2 हजार 642 वाहन चालकों को भी नियमों के उल्लंघन पर दंडित किया गया है।  छठे दिन सर्वाधिक मामले दर्ज अभियान में छठे दिन सर्वाधिक 10 हजार 825 वाहनों पर सख्त कार्रवाई करते हुए चालान बनाए गए। इस दिन 4 हजार 220 वाहनों से ब्लैक फिल्म हटवाई गई। नियम विरुद्ध नंबर प्लेट वाले 2 हजार 449 वाहनों और 1 हजार 784 वाहनों पर अनाधिकृत लेखन पाए जाने पर नियमानुसार प्रवर्तन किया गया। प्रेशर व एयर हॉर्न पर 571,  अनाधिकृत लाल, नीली बत्ती, फ्लैशर, स्ट्रोब लाइट एवं हूटर के लिए 763 वाहनों पर कार्रवाईयां की गई हैं। अभियान के प्रथम दिन 4 जून को 4716, 5 जून को 7300, 6 जून को 9362, 7 जून को 9523, 8 जून को 8448 और छठे दिन 9 जून को 10825 कार्रवाई की गई। सड़क सुरक्षा में 'पहले समझाइश फिर सख्ती' उल्लेखनीय है कि राजस्थान पुलिस सड़क सुरक्षा की दिशा में 'पहले समझाइश, फिर सख्ती' की नीति के अनुरूप आगे बढ़ रही है। इसके सकारात्मक परिणाम सामने आए हैं। डॉ. मीणा ने बताया कि सड़क सुरक्षा को सुदृढ़ बनाने एवं दुर्घटनाओं में कमी लाने के लिए व्यापक स्तर पर प्रवर्तन एवं जागरूकता गतिविधियां संचालित की जा रही है। उन्होंने वाहन चालकों से यातायात नियमों की पालना करने के लिए अपील की है।

जयपुर पुलिस कमिश्नरेट और JDA में बदलाव, कई अधिकारियों को मिली नई जिम्मेदारी

जयपुर राजस्थान सरकार ने प्रदेश के पुलिस विभाग में बड़ा प्रशासनिक फेरबदल किया है.  पुलिस मुख्यालय की ओर से जारी की गई तबादला सूची में 141 उप पुलिस अधीक्षक (DSP) स्तर के अधिकारियों को इधर से उधर किया गया है.  लंबे इंतजार के बाद प्रदेश में यह तबादला सूची जारी की गई है.  प्रदेश में मजबूत कानून व्यवस्था स्थापित करने के लिए अधिकारियों को नई जिम्मेदारी मिली है. यह तबादला सूची अतिरिक्त महानिदेश पुलिस (कार्मिक) बीजू जॉर्ज जोसफ ने जारी की है. इस सूची में जयपुर पुलिस कमिश्नरेट और जयपुर विकास प्राधिकरण (JDA) में भी कई अहम बदलाव किये गये है. रमेश कुमार पारीक, ओम प्रकाश मीणा और सुरेश कुमार स्वामी को JDA में उप पुलिस अधीक्षक के पद पर नियुक्त किया गया है. राजधानी में कानून व्यवस्था को और मजबूत करने के लिए नए सहायक पुलिस आयुक्त (ACP) भी लगाए गए हैं.   और किन अधिकारियों का हुआ तबादला? इसके अलावा हरजी लाल यादव को सहायक पुलिस आयुक्त बस्सी, हेमेन्द्र शर्मा को ACP मानसरोवर, सत्येन्द्र सिंह नेगी को ACP सोडाला और शिवकुमार भारद्वाज को ACP झोटवाड़ा की जिम्मेदारी सौंपी गई है. इसके साथ ही राम सिंह को ACP मेट्रो, जयपुर का कार्यभार दिया गया है. बांदीकुई में DSP रोहिताश देवन्दा के स्थान पर लक्ष्मीकांत शर्मा को नियुक्त किया गया है. लक्ष्मी सुथार को ACP (आदर्श नगर) से सीओ कोटपूतली बहरोड की जिम्मेदारी सौंपी गई है. इस तबादला सूची में लंबे समय से एक ही जगह जमे हुए अधिकारियों को इधर से उधर किया गया है. इस सूची में शामिल अधिकारियों को जल्द ही अपने नए स्थान पर ज्वाइन करने के आदेश दिए गए हैं. इसी संबंध में लिविंग और ज्वाइनिंग संबंधी कागजी कार्रवाई शुरू की गई है. पुलिस विभाग में हुए इस व्यापक फेरबदल का उद्देश्य प्रदेश की प्रशासनिक व्यवस्था को मजबूत करना है. मुबारिक खान को पत्रकारिता में करीब 8 सालों का अनुभव है. उन्होंने राजस्थान की राजनीतिक खबरों के साथ-साथ ट्रांसपोर्ट, एजुकेशन और मेडिकल क्षेत्र से जुड़ी ख़बरों की रिपोर्टिंग की है. 2023 के विधानसभा और 2024 के लोकसभा चुनाव में राजस्थान की अलग-अलग विधानसभा सीटों पर ग्राउंड जीरो से रिपोर्टिंग की. आनंदपाल एनकाउंटर और लॉरेंस बिश्नोई गैंग की मैडम माया पर स्टोरी ने खूब सुर्खियां बटोरी. मुबारिक खान ने राजस्थान यूनिवर्सिटी से स्नातक की पढ़ाई करने के बाद बीजेएमसी में डिप्लोमा प्राप्त किया.

रिहायशी इलाके में धमाका-आग: जयपुर पटाखा फैक्ट्री हादसे से मची अफरा-तफरी

जयपुर राजस्थान की राजधानी जयपुर के खो नागोरियान इलाके में एक घर के अंदर चल रही पटाखा फैक्ट्री में मंगलवार सुबह अचानक आग लग गई. इस भीषण हादसे में 3 लोगों की मौत की खबर है, जबकि 5 लोग गंभीर रूप से झुलस गए हैं. इलाके में अफरा-तफरी का माहौल है और दमकल व प्रशासन की टीमें मौके पर राहत कार्य में जुटी हैं. रिहायशी इलाके में हुआ हादसा आयशा नगर के तलाई क्षेत्र में यह पटाखा फैक्ट्री घनी आबादी के बीच एक मकान में चल रही थी. बताया जा रहा है कि घर में रखे किसी ज्वलनशील पदार्थ ने अचानक आग पकड़ ली. आग इतनी तेजी से फैली कि अंदर काम कर रहे लोगों को बाहर निकलने का मौका ही नहीं मिला. घायलों को SMS अस्पताल किया गया रेफर हादसे में झुलसे 5 लोगों को तुरंत रेस्क्यू कर अस्पताल ले जाया गया. इनमें से कई लोगों की हालत बेहद नाजुक बनी हुई है, जिसे देखते हुए उन्हें जयपुर के सवाई मानसिंह (SMS) अस्पताल शिफ्ट कर दिया गया है. डॉक्टरों की टीम घायलों के इलाज में जुटी हुई है. दमकल की दो गाड़ियां बुझा रही हैं आग घटना की जानकारी मिलते ही पुलिस और दमकल विभाग ने मोर्चा संभाल लिया. मौके पर सिविल डिफेंस की टीम भी रेस्क्यू ऑपरेशन में जुटी है. फिलहाल दमकल की दो गाड़ियां लगातार आग पर काबू पाने का प्रयास कर रही हैं ताकि आग को आस-पास के घरों तक फैलने से रोका जा सके. आधिकारिक आंकड़ों का इंतजार जयपुर जिला कलेक्टर संदेश नायक और एडीएम सहित आला अधिकारी घटनास्थल पर मौजूद हैं और हालात की निगरानी कर रहे हैं. कलेक्टर संदेश नायक ने बताया कि घर के अंदर रखे किसी ज्वलनशील पदार्थ के कारण यह हादसा हुआ. उन्होंने स्पष्ट किया कि कुल मौतों और घायलों का आधिकारिक आंकड़ा रेस्क्यू ऑपरेशन पूरा होने के बाद ही एक प्रेस रिलीज के जरिए जारी किया जाएगा.

सचिवों की समिति की बैठक में बड़ा निर्देश: ई-फाइल प्रक्रिया होगी सरल, शिकायतों का होगा त्वरित निस्तारण

जयपुर मुख्य सचिव श्री वी.श्रीनिवास की अध्यक्षता में मंगलवार को सचिवालय में सचिवों की समिति (Committee of Secretaries) की बैठक आयोजित की गई, जिसमें राज्य सरकार के विभिन्न विभागों के अतिरिक्त मुख्य सचिव, प्रमुख शासन सचिव एवं शासन सचिव उपस्थित रहे। बैठक में विभिन्न विभागों द्वारा संचालित योजनाओं की प्रगति, बजटीय प्रावधानों के विरुद्ध निधियों के उपयोग तथा जनकल्याणकारी कार्यक्रमों के क्रियान्वयन की विस्तृत समीक्षा की गई। मुख्य सचिव ने योजनाओं के प्रभावी एवं समयबद्ध क्रियान्वयन पर संतोष व्यक्त करते हुए अधिकारियों को यह सुनिश्चित करने के निर्देश दिए कि योजनाओं का लाभ अंतिम छोर तक पहुंचे। मुख्य सचिव ने कहा कि प्रशासनिक प्रक्रियाओं में अनावश्यक विलंब समाप्त करने के लिए ई-फाइलों के निस्तारण की प्रक्रिया को और सरल बनाया जाए। उन्होंने निर्देश दिए कि ई-फाइल को जिन विभिन्न स्तरों से होकर गुजरना पड़ता है, उनकी संख्या यथासंभव कम की जाए ताकि निर्णय प्रक्रिया में तेजी आए तथा प्रशासन अधिक दक्ष एवं उत्तरदायी बन सके। उन्होंने विभागों को लंबित मामलों के शीघ्र निस्तारण पर विशेष ध्यान देने के लिए भी कहा। बैठक में मुख्य सचिव ने वंदे गंगा जल संरक्षण जन अभियान जैसे जनभागीदारी आधारित अभियानों में व्यापक जनसहभागिता सुनिश्चित करने हेतु प्रभावी जनजागरूकता एवं आउटरीच कार्यक्रम आयोजिंत करने के निर्देश दिए। उन्होंने कहा कि जल संरक्षण जैसे महत्वपूर्ण विषयों पर समाज की सक्रिय भागीदारी अभियान की सफलता की कुंजी है तथा विभागों को स्थानीय स्तर पर व्यापक संवाद एवं सहभागिता को बढ़ावा देना चाहिए। मुख्य सचिव ने राजस्थान सम्पर्क पोर्टल पर प्राप्त होने वाली शिकायतों के समयबद्ध एवं गुणवत्तापूर्ण निस्तारण पर विशेष बल दिया। उन्होंने निर्देश दिए कि शिकायतों का निपटारा निर्धारित समय सीमा में उचित माध्यम से किया जाए। साथ ही, पोर्टल एवं हेल्पलाइन पर कार्यरत शिकायत निवारण अधिकारियों को आवश्यक प्रशिक्षण प्रदान करने के निर्देश दिए ताकि शिकायतों के प्रभावी एवं त्वरित समाधान की व्यवस्था और अधिक सुदृढ़ हो सके। उन्होंने विधानसभा सदस्यों द्वारा पूछे गए लंबित प्रश्नों के उत्तर भी शीघ्र एवं तथ्यपरक रूप से उपलब्ध कराने के निर्देश दिए। बैठक के दौरान विभिन्न विभागों की कार्य रिपोर्टों की समीक्षा की गई। मुख्य सचिव ने विभागों के बीच बेहतर समन्वय की आवश्यकता पर बल देते हुए कहा कि अंतर्विभागीय विषयों पर प्रभावी सहयोग एवं संवाद से योजनाओं के बेहतर परिणाम प्राप्त किए जा सकते हैं। उन्होंने इज़ ऑफ डूइंग बिज़नस के संबंध में प्रदेश की डी-रेगुलेशन सेल एवं राजनिवेश पोर्टल के उत्कृष्ट प्रदर्शन सहित विभिन्न विभागों द्वारा किए जा रहे उत्कृष्ट कार्यों की सराहना की।