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पहली बार SMS अस्पताल में CRS व HIPEC सर्जरी सफल, कैंसर मरीजों के लिए बड़ी राहत

जयपुर राजस्थान के सबसे बड़े सरकारी चिकित्सा संस्थान एसएमएस मेडिकल कॉलेज, जयपुर ने कैंसर उपचार के क्षेत्र में एक और महत्वपूर्ण उपलब्धि दर्ज की है। कॉलेज के शल्य ऑन्कोलॉजी विभाग ने पहली बार साइटोरिडक्शन सर्जरी (CRS) और हाइपरथर्मिक इंट्रापेरिटोनियल कीमोथेरेपी (HIPEC) प्रक्रिया सफलतापूर्वक संपन्न की गई। यह अत्याधुनिक तकनीक अब राज्य के सरकारी स्वास्थ्य तंत्र में भी उपलब्ध हो गई है, जिससे उन्नत पेरिटोनियल कैंसर से जूझ रहे मरीजों को जीवनदायी उपचार मिल सकेगा। इस अवसर पर विभाग की ओर से एक लाइव सर्जिकल वर्कशॉप भी आयोजित की गई, जिसमें प्रदेशभर से आए चिकित्सकों, सर्जनों और ऑन्कोलॉजी विशेषज्ञों ने भाग लिया। वर्कशॉप का टाइम वर्कशॉप सुबह 7:30 बजे शुरू होकर शाम 3:30 बजे तक चली, जहां प्रतिभागियों को CRS और HIPEC की जटिल प्रक्रिया के हर चरण का लाइव अवलोकन कराया गया। कार्यक्रम का संचालन एसएमएस मेडिकल कॉलेज के शल्य ऑन्कोलॉजी विभागाध्यक्ष और आयोजन सचिव डॉ. सुरेश सिंह ने किया। ये मरीजों का जीवनकाल बढ़ाने कारगर कदम-डॉ. सुरेश सिंह डॉ. सुरेश सिंह ने बताया कि CRS+HIPEC उन्नत कैंसर उपचार की एक विशेष तकनीक है, जो उन मरीजों के लिए अत्यधिक प्रभावी मानी जाती है जिनमें कैंसर पेट की झिल्ली (पेरिटोनियम) तक फैल चुका हो। उन्होंने कहा, “यह उपचार पेरिटोनियल कार्सिनोमैटोसिस वाले चुनिंदा मरीजों में जीवनकाल बढ़ाने और बीमारी नियंत्रण में बेहद कारगर सिद्ध होता है। अब इस सुविधा का सरकारी स्तर पर उपलब्ध होना राजस्थान के लिए एक बड़ी उपलब्धि है।” अत्यधिक महंगी सर्जरी है, लेकिन चिंता की बात नहीं सबसे बड़ी राहत की बात यह है कि राज्य सरकार ने इस जटिल और अत्यधिक महंगी सर्जरी को मुख्यमंत्री आयुष्मान आरोग्य योजना में शामिल कर दिया है। यानी AYUSHMAN कार्ड रखने वाले पात्र मरीजों को CRS और HIPEC का पूरा इलाज बिल्कुल निशुल्क मिलेगा। सामान्यतः इस प्रक्रिया का खर्च निजी अस्पतालों में कई लाख रुपये तक आता है, ऐसे में गरीब और मध्यम वर्गीय मरीजों को इससे बड़ा लाभ मिलेगा। क्या है CRS + HIPEC तकनीक? साइटोरिडक्शन सर्जरी (CRS) एक अत्यधिक जटिल ऑपरेशन है, जिसमें पेट के अंदर फैले हर दृश्य ट्यूमर को सावधानीपूर्वक हटाया जाता है। कई मामलों में ओमेंटम, पेरिटोनियम और प्रभावित आंत के हिस्सों को भी निकाला जाता है ताकि कैंसर के बोझ को अधिकतम रूप से कम किया जा सके। सूक्ष्म कैंसर कोशिकाओं को नष्ट करने में मदद करती है इसके बाद उसी ऑपरेशन में HIPEC किया जाता है। इसमें गर्म कीमोथेरेपी दवा (लगभग 42°C) को एक विशेष HIPEC मशीन की सहायता से 60-90 मिनट तक पेट की गुहा में प्रवाहित किया जाता है। यह दवा सीधे कैंसरग्रस्त क्षेत्र पर प्रभाव डालती है और बचे हुए सूक्ष्म कैंसर कोशिकाओं को नष्ट करने में मदद करती है। इसका सबसे बड़ा लाभ यह है कि दवा पूरे शरीर में नहीं जाती, जिससे दुष्प्रभाव कम होते हैं और उपचार अधिक असरदार बनता है। किन मरीजों को सबसे अधिक लाभ? CRS + HIPEC तकनीक मुख्य रूप से उन्नत ओवरी कैंसर अपेंडिक्स कैंसर कोलन कैंसर पेरिटोनियल मेसोथेलियोमा पेट की झिल्ली में फैले अन्य कैंसरों में उपयोगी मानी जाती है। इस प्रक्रिया ने कई अंतरराष्ट्रीय अध्ययनों में सिद्ध किया है कि यह चुनिंदा मरीजों के जीवनकाल को उल्लेखनीय रूप से बढ़ाती है। राजस्थान के लिए बड़ी उपलब्धि इस अत्याधुनिक सर्जरी के सरकारी अस्पताल में शुरू होने से राज्य के कैंसर उपचार ढांचे को बड़ा मजबूत आधार मिलेगा। अब मरीजों को महंगे निजी अस्पतालों के बजाय एसएमएस जैसे उच्चस्तरीय सरकारी संस्थान में उत्कृष्ट और सुलभ उपचार की सुविधा मिलेगी।

‘पूरा सिस्टम उलझा’, सरकार पर PCC चीफ डोटासरा का तीखा वार

जयपुर राजस्थान कांग्रेस कमेटी के पूर्व अध्यक्ष माणिक्य लाल वर्मा की जयंती के उपलक्ष में आयोजित कार्यक्रम में पहुंचे प्रदेश कांग्रेस अध्यक्ष गोविंद सिंह डोटासरा ने भाजपा सरकार पर तीखा हमला बोला। प्रेस से बातचीत में उन्होंने मुख्यमंत्री भजनलाल शर्मा और उनकी कैबिनेट को कटघरे में खड़ा करते हुए कहा कि मैं तो हाथ जोड़कर मुख्यमंत्री जी से निवेदन करना चाहता हूं कि अपने मंत्रियों की सुनवाई करवा दें, क्योंकि आज उनकी भी कोई नहीं सुन रहा। डोटासरा ने भाजपा की ‘वर्कर्स सुनवाई’ पहल पर व्यंग्य करते हुए कहा कि असली समस्या मंत्रियों की सुनवाई न होना है। उन्होंने आरोप लगाया कि मुख्य सचिव सुधांशु पंत ‘SA लगाकर’ निकल गए और अब मंत्री शिकायत कर रहे हैं कि SA उनकी फाइलें नहीं सुनता, जबकि SA कह रहा है कि मंत्री फाइलें भेजते ही नहीं। “सरकार का पूरा सिस्टम उलझा हुआ है और मंत्री खुद को असहाय महसूस कर रहे हैं,” डोटासरा ने कहा। उन्होंने आगे कहा कि जब मंत्री अपने प्रभारी जिलों में जाते हैं तो उनके पास कार्यकर्ता भी नहीं आते। “इनको फोन करके कार्यकर्ताओं को बुलाना पड़ता है, अपनी ही इज्जत बचाने की गुहार लगानी पड़ती है। इसका साफ मतलब है कि न जनता को विश्वास है, न कार्यकर्ताओं को कि ये कोई सुनवाई करेंगे,” उन्होंने कहा। डोटासरा ने दावा किया कि आज ऐसा परसेप्शन बन चुका है कि मंत्रियों की सुनवाई नहीं हो रही और अब तो मुख्यमंत्री की भी नहीं। ऐसे में आम जनता की सुनवाई होने की संभावना ही खत्म हो जाती है। उन्होंने कहा, “यह कहते हैं कि 24 घंटे मंत्रियों के दरवाजे खुले हैं, पर मैं चुनौती देता हूं। किसी भी मंत्री का दरवाजा वास्तव में खुला दिखा दें।” खाद संकट पर बोलते हुए डोटासरा ने कहा कि किसान खाद के लिए तरस रहे हैं और सरकार उन्हें लाठियां दे रही है। उन्होंने डॉ. किरोड़ी लाल मीणा के हाल ही के स्टिंग पर भी सवाल उठाया और पूछा कि उसका लाभ क्या निकला आज स्थिति यह है कि असली हो या नकली, कोई भी खाद उपलब्ध नहीं है। सरकार को तो असली खाद का ज्ञान ही नहीं, क्योंकि सरकार ही असली नहीं है, उन्होंने तंज कसा।  

IMD अलर्ट: राजस्थान में मौसम पलटेगा, जयपुर-बीकानेर में शीतलहर के आसार

जयपुर राजस्थान में गुरुवार से शीतलहर की चेतावनी जारी कर दी गई है। मौसम विभाग का कहना है कि अगले 24 घंटों में राजस्थान में सर्दी का प्रभाव तेजी से बढ़ने वाला है। हिमालय पर अगले 48 घंटों में पश्चिमी विक्षोभ सक्रिय होगा। इसके प्रभाव से आने वाले एक सप्ताह में तेज सर्दी पड़ने का अनुमान  है। उत्तर भारत से आने वाली बर्फीली हवाओं के कारण राज्य के उत्तर-पूर्वी हिस्सों में तापमान में भी गिरावट दर्ज होगी। मौसम विभाग ने शेखावाटी क्षेत्र में सुबह-शाम कड़ाके की सर्दी पड़ने की संभावना जताई है। गुरुवार से शेखावाटी के सीकर, चूरू और झुंझुनू में शीतलहर का अलर्ट भी जारी किया गया है। खास तौर पर सीकर के फतेहपुर में मौसम में जबरदस्त गलन महसूस की जा रही है।  बीते 24 घंटों में मौसम पूरी तरह साफ रहा, दिन में धूप निकली, लेकिन शाम ढलते ही ठंड तेजी से बढ़ी। बीकानेर के लूणकरणसर में न्यूनतम तापमान 4.7°C रिकॉर्ड किया गया, जो प्रदेश में सबसे कम रहा।फतेहपुर में 6.6°C, गंगानगर 6.9°C, चूरू 9°C, बीकानेर 9.3°C, अलवर 8°C और जैसलमेर में 10°C तापमान दर्ज हुआ। उधर सीकर और पिलानी में मंगलवार को हल्की बढ़ोतरी के साथ न्यूनतम तापमान क्रमशः 12°C और 10.4°C रेकॉर्ड किया गया। दिन में भी ठंडक बनी रही और कई शहरों में अधिकतम तापमान में गिरावट देखी गई। सीकर में 24.5°C, पिलानी में 26.2°C, जयपुर में 26.6°C और अलवर में 26.5°C अधिकतम तापमान दर्ज हुआ। वहीं राष्ट्रीय राजमार्गों की बात करें तो मौसम विभाग ने आज किसी भी राजमार्ग पर कोहरे की चेतावनी जारी नहीं की है। हालांकि जयपुर सीकर राष्ट्रीय राजमार्ग पर शीतलहर चलने का अनुमान जारी किया गया है।

राजस्थानी गौरव का उत्सव: प्रवासी राजस्थानी दिवस 2025 में 33 मेहमान बनेंगे राजकीय अतिथि

जयपुर मुख्यमंत्री भजन लाल शर्मा के दूरदर्शी नेतृत्व में राज्य सरकार द्वारा 10 दिसम्बर को आयोजित ‘प्रवासी राजस्थानी दिवस’ समारोह में उद्योग, व्यापार, शिक्षा, स्वास्थ्य, बैंकिंग, प्रशासन और अन्य विभिन्न क्षेत्रों की 33 जानी-मानी हस्तियां राजकीय अतिथि के तौर पर शामिल होंगी। राजकीय अतिथियों के इस विशिष्ट सूची में वेदांता ग्रुप के चेयरमैन अनिल अग्रवाल, श्री सीमेंट के चेयरमैन हरि मोहन बांगुर, वेलस्पन लिविंग की सीईओ और मैनेजिंग डायरेक्टर दीपाली गोयनका, जेके सीमेंट के ज्वाइंट मैनेजिंग डायरेक्टर माधव सिंघानिया, हिंदुस्तान जिंक की चेयरपर्सन प्रिया अग्रवाल, आनंद ग्रुप की चेयरपर्सन अंजलि सिंह, टीटागढ़ रेल सिस्टम्स के वाइस चेयरमैन, मैनेजिंग डायरेक्टर और सीईओ उमेश चौधरी, DB कॉर्प लिमिटेड के प्रोमोटर और डायरेक्टर गिरीश अग्रवाल, और मोतीलाल ओसवाल फाइनेंशियल सर्विसेज के मैनेजिंग डायरेक्टर और सीईओ मोतीलाल ओसवाल जैसे कई बड़े नाम है। ‘प्रवासी राजस्थानी दिवस’ के तहत अलग-अलग क्षेत्रों में शानदार योगदान और उल्लेखनीय उपलब्धियाँ प्राप्त करने वाले इन 33 विशिष्ट लोगों को राजस्थान सरकार ने राजकीय अतिथि के रूप में इस समारोह में शामिल होने का आमंत्रण दिया है। इसके तहत, उद्योग जगत की कुछ अन्य प्रमुख हस्तियां जिन्हें राजकीय अतिथि के तौर पर इस समारोह में शामिल होने के लिए आमंत्रित किया गया है, उनमें प्रमुख हैं केईआई (KEI) लिमिटेड के चेयरमैन अनिल गुप्ता, चौधरी ग्रुप के चेयरमैन बिनोद चौधरी, नेशनल इंजीनियरिंग इंडस्ट्रीज लिमिटेड के प्रेसिडेंट और सीईओ रोहित साबू, बोरोसिल रिन्यूएबल्स के एग्जीक्यूटिव चेयरमैन श्री प्रदीप कुमार खेरुका, सोमानी सेरामिक्स के चेयरमैन और मैनेजिंग डायरेक्टर श्रीकांत सोमानी, और, बांग्लानाटक डॉट कॉम के फाउंडर डायरेक्टर अमिताव भट्टाचार्य भी शामिल हैं। इसके अलावा, अकादमिक जगत की विशिष्ट हस्तियों में प्रख्यात शिक्षाविद् और बिट्स, पिलानी के वाइस चांसलर प्रो. वी. रामगोपाल राव, आईआईएम उदयपुर के डायरेक्टर प्रो. अशोक बनर्जी, आईआईटी जोधपुर के डायरेक्टर प्रो. अविनाश कुमार अग्रवाल, दिल्ली पब्लिक स्कूल, संयुक्त अरब अमीरात के मैनेजिंग डायरेक्टर दिनेश कोठारी, और नीति आयोग की विशिष्ट फेलो देबजानी घोष भी इस आयोजन में राजस्थान के राजकीय अतिथि के तौर पर ‘प्रवासी राजस्थानी दिवस 2025’ में शामिल होने के लिए आमंत्रित हैं। जल की उपलब्धता राजस्थान के लिए अहम विषय है और इसी दृष्टि से इस क्षेत्र के कई विशेषज्ञ भी इस आयोजन में राजकीय अतिथि के तौर पर शामिल रहेंगे। इनमें हिंदुस्तान जिंक के सीईओ अरुण मिश्रा, इकोलैब इंडिया के मैनेजिंग डायरेक्टर मनीष खंडेलवाल, , वेओलिया वॉटर टेक्नोलॉजीज के सीनियर वाइस प्रेसिडेंट (साउथ एशिया) और इंजीनियरिंग एंड प्रोक्योरमेंट के एशिया-पैसिफिक रीजन लीडर गोपाल मधुभूषण, नेशनल इंस्टीट्यूट ऑफ अर्बन अफेयर्स (NIUA) की डायरेक्टर डॉ. देबोलिना कुंडू, आयन एक्सचेंज (इंडिया) लिमिटेड के मैनेजिंग डायरेक्टर और सीईओ इंद्रनील दत्त जैसी जानी-मानी हस्तियां जल संसाधन पर आयोजित विशेष सत्र में अपने विचार व्यक्त करेंगी। इसके अलावा, इस समारोह में चिकित्सा एवं स्वास्थ्य क्षेत्र की जानी-मानी हस्तियां भी शामिल होंगी। इनमें डॉक्टर्स ऑफ राजस्थान इंटरनेशनल (DoRI) फाउंडेशन के प्रेसिडेंट और यूनिवर्सिटी ऑफ सेंट्रल फ्लोरिडा स्कूल ऑफ मेडिसिन असिस्टेंट प्रोफेसर (न्यूरोलॉजी) डॉ. जयवीर सिंह राठौर, स्टार हॉस्पिटल्स, हैदराबाद के क्लिनिकल डायरेक्टर और विभागाध्यक्ष (सर्जिकल ऑन्कोलॉजी) डॉ. विपिन गोयल, टाटा वन एमजी के चीफ फाइनेंशियल ऑफिसर संजय झावर, और सीके बिड़ला हेल्थकेयर के सीईओ विपुल जैन जैसे विशेषज्ञ स्वास्थ्य क्षेत्र पर होने वाले सत्र में अपने विचार व्यक्त करेंगे। इनके अलावा, ‘प्रवासी राजस्थानी दिवस’ में बैंकिंग और टूरिज्म क्षेत्र के विशेषज्ञों और वरिष्ठ सरकारी अधिकारियों की भी राजकीय अतिथि के रूप में मौजूदगी रहेगी। इनमें एयू स्मॉल फाइनेंस बैंक के फाउंडर, एमडी और सीईओ संजय अग्रवाल, वोल्वो ग्रुप इंडिया के प्रेसिडेंट और मैनेजिंग डायरेक्टर कमल बाली, ईजमाइट्रिप के सह-संस्थापक और सीईओ रिकांत पिट्टी, और विदेश मंत्रालय में ज्वाइंट सेक्रेटरी महावीर सिंघवी शामिल हैं। मुख्यमंत्री भजनलाल शर्मा द्वारा पिछले साल की गयी घोषणा के मद्देनजर 'प्रवासी राजस्थानी दिवस' का यह पहला आयोजन 10 दिसंबर को होने जा रहा है। इस समारोह के मंच पर इन विशिष्ट राजकीय अतिथियों की उपस्थिति एक महत्वपूर्ण अवसर है, जिसके तहत यह मंच राजस्थान और राज्य के प्रवासियों के बीच निरंतर संवाद कायम करने और राजस्थान के विकास और समृद्धि में प्रवासियों के सक्रिय सहयोग स्थापित करने का माध्यम बनेगा। साथ ही, कई सारे प्रवासी राजस्थानियों को उनकी उपलब्धियों हेतु सम्मानित भी किया जाएगा।

लाइसेंस अनिवार्यता से दरगाह में उठी हलचल, सरवर चिश्ती ने किया विरोध

अजमेर अजमेर ख्वाजा गरीब नवाज की दरगाह में जियारत करवाने वाले खादिमों के लिए अब लाइसेंस अनिवार्य करने के दरगाह कमेटी के निर्णय ने बड़ा विवाद खड़ा कर दिया है। केंद्र सरकार और कोर्ट के निर्देशों के आधार पर लागू की जा रही इस नई व्यवस्था के खिलाफ अंजुमन सैयद जादगान के सचिव सैयद सरवर चिश्ती ने तीखा विरोध दर्ज कराया है। उन्होंने इस फैसले को तुगलकी फरमान बताते हुए साफ कहा है कि खादिम समाज इस आदेश को किसी भी हालत में स्वीकार नहीं करेगा। बता दें कि दरगाह नाजिम मोहम्मद बिलाल खान ने 1 दिसंबर को विज्ञापन जारी कर जियारत कराने के लिए लाइसेंस आवेदन प्रक्रिया शुरू कर दी है। 5 जनवरी 2026 अंतिम तिथि तय की गई है। नाजिम का कहना है कि यह कदम पूरी तरह नियमों, कोर्ट निर्देशों और प्रशासनिक प्रक्रिया के अनुरूप है, जिससे किसी के हित प्रभावित नहीं होंगे। लेकिन आदेश के जारी होते ही दरगाह में विरोध की लहर दौड़ गई। आदेश के विरोध में आयोजित बैठक में सैयद सरवर चिश्ती ने नाजिम पर गंभीर आरोप लगाए। उन्होंने कहा कि नाजिम की नियुक्ति ही अवैध है और दरगाह कमेटी का अस्तित्व भी संदेह के घेरे में है। ये तुगलकी फरमान नहीं चलेंगे। उन्होंने यह आरोप भी लगाया कि नाजिम ने बिना चर्चा और संवाद के आदेश लागू कर खादिम समुदाय को अपमानित करने की कोशिश की है। सैयद सरवर चिश्ती ने बताया कि एक्ट में यह स्पष्ट प्रावधान है कि गरीब खादिमों के लिए मेंटेनेंस व्यवस्था सुनिश्चित की जाए, लेकिन दरगाह कमेटी इस दिशा में कुछ नहीं करती। चाबियों का रजिस्टर एक साल से गायब है और यहां दादागिरी की जा रही है,” उन्होंने कहा। चेतावनी देते हुए बोल कि आज हमारी बैठक में कुछ लोग ही आए, लेकिन यदि हमने आवाज दी तो 10 हजार खादिम दरगाह में भर जाएंगे। हमारे लाखों अनुयायी हैं, हमारी सहनशीलता को कमजोरी न समझा जाए।” सरवर चिश्ती ने यह भी आरोप लगाया कि हर साल उर्स से पहले जानबूझकर ऐसे आदेश जारी किए जाते हैं ताकि व्यवस्थाओं में बाधा उत्पन्न हो। “उर्स करीब है और अब नया बखेड़ा खड़ा कर दिया गया है। खादिम समुदाय कमजोर नहीं है। हमें हल्के में लेना बड़ी भूल होगी। दूसरी ओर कलेक्टर लोकबंधु, एसपी वंदिता राणा व अन्य अधिकारियों ने उर्स व्यवस्थाओं का जायजा लेने के दौरान चिश्ती की शिकायतें भी सुनीं। चिश्ती ने प्रशासन के सामने नाजिम पर कार्रवाई की मांग रखते हुए कहा कि दरगाह कमेटी मनमर्जी चलाने की कोशिश कर रही है, जबकि मंत्रालय से लेकर नियमों तक कहीं भी ऐसे आदेश का सीधा उल्लेख नहीं है। दरगाह में लाइसेंस व्यवस्था को लेकर शुरू हुआ यह विवाद उर्स से पहले बड़ा मुद्दा बन चुका है। देखना होगा कि प्रशासन इस तनातनी को कैसे सुलझाता है और क्या खादिमों की आपत्तियों को ध्यान में रखकर कोई नई पहल की जाती है।

दिसंबर में बीसलपुर बांध गेट खुले, 22 साल में बना कीर्तिमान, तीन शहरों में जलभराव

टोंक राजस्थान की राजधानी जयपुर, अजमेर और टोंक जिले की लाइफलाइन ने दिसंबर महीने की शुरूआत में वो कर दिया जो शायद अब तक प्रदेश के किसी भी बड़े बांध ने नहीं किया होगा। बीसलपुर डैम ने इस साल सोमवार को एक ऐसा रिकॉर्ड बनाया हैं जो अब तक कभी नहीं बना। यह रिकॉर्ड है पहली बार दिसंबर माह में भी बांध का गेट खुला रहने का है। इसी के साथ इस साल 7 रिकॉर्ड बन गए हैं। इस साल बांध से इतना पानी छोड़ा गया है, जिससे डैम 3 बार से ज्यादा भर सकता था। इस सीजन में 140.581 टीएमसी पानी निकासी बनास नदी में की जा चुकी है। जबकि इससे पहले 2016 में डेढ़ महीने में 134.238 टीएमसी पानी की निकासी की गई थी। बांध अभी भी लबालब भरा हुआ है। बताया जा रहा है बारिश नहीं हुई तो भी तीन साल तक टोंक, अजमेर और जयपुर की करीब एक करोड़ से ज्यादा लोगों के लिए पेयजल सप्लाई हो सकेगी। 22 साल के इतिहास में पहली बार 131 दिन निकासी करीब 22 साल पहले बना ये डैम जयपुर, टोंक, अजमेर जैसे जिलों की लाइफलाइन है। इसका भरा रहना, इन जिलों के लोगों के लिए अच्छा है। खास बात यह है कि अभी भी बांध से पानी की निकासी की जा रही है। सोमवार को पानी निकासी का 131वां दिन रहा। यह भी पहली बार है जब इतने दिन बांधी से पानी छोड़ा गया है। लबालब है बीसलपुर बांध बांध अपनी पूर्ण भराव क्षमता 315.50 आरएल मीटर भरा हुआ है। अभी भी एक गेट को 10 मीटर खोलकर प्रति सेकेंड 601 क्यूसेक पानी की निकासी की जा रही है। बीसलपुर बांध परियोजना के AEN दिनेश बैरवा ने बताया कि इस साल अब तक 22 साल के बांध के इतिहास में एक सीजन में सबसे ज्यादा पानी निकासी 140 टीएमसी से ज्यादा हो चुकी है और अभी भी पानी निकासी जारी है। साल 2019 में 64 दिन खुले थे गेट इस साल बीसलपुर बांध लबालब होने पर 24 जुलाई को बांध का एक गेट खोला था। फिर पानी बढ़ा तो कुछ दिन बाद अधिकतम 8 गेट इस साल खोले गए थे। इसके बाद पानी की आवक कम होने बांध का एकमात्र गेट खोलकर रखा गया, जिसे 90 दिन बाद 21 अक्तूबर को बंद किया था। इसी के साथ बीसलपुर बांध ने लगातार सबसे अधिक 90 दिन पानी निकासी का रिकॉर्ड बनाया था। वह भी टूट गया है। तेज बारिश से बढ़ी आवक, फिर खुले गेट अक्तूबर महीने के आखिरी सप्ताह में बारिश होने से बांध में फिर से पानी की आवक बढ़ गई थी। इसके चलते पहली बार बांध के अक्तूबर माह के लास्ट वीक में 28 अक्तूबर को दोपहर को बांध का फिर एक गेट खोला गया। जबकि आखिरी गेट को 21 अक्तूबर को बंद कर दिया था। करीब सप्ताह भर बाद ही फिर एक गेट खोल दिया गया। बीसलपुर बांध परियोजना के एक्सईएन मनीष बंसल और जेईएन दिनेश बैरवा ने बताया कि बांध की भराव क्षमता 315.50 आरएल मीटर तक है। पानी की आवक के अनुसार बांध के लेवल को मेंटेन करते हुए निकासी की जा रही है। किस साल कितना पानी बनास नदी में छोड़ा बीसलपुर बांध के गेट अब तक 8 बार खोले जा चुके हैं। पहली बार इसमें 2004 में पानी रोका गया था।उस साल 26.18 टीएमसी पानी निकासी की गई थी। इसी तरह फिर 2006 में 43.25 टीएमसी, 2014 में 11.202 टीएमसी, 2016 में 134.238 टीएमसी, 2019 में 93.605 टीएमसी, 2022 में 13.246 टीएमसी, 2024 में 31.433 टीएमसी और इस साल 135 टीएमसी से ज्यादा पानी की निकासी बनास नदी में की गई है। बांध का कितना पानी किसके लिए आरक्षित बीसलपुर बांध प्रोजेक्ट के एक्सईएन मनीष बंसल ने बताया कि टोंक जिले में सिंचाई के लिए 8 टीएमसी पानी, पेयजल के लिए 16.2 टीएमसी पानी आरक्षित है। इसके अलावा 8.15 टीएमसी वाष्पीकरण व अन्य खर्च माना गया है। बीसलपुर बांध के 18 गेट हैं जो 15 गुणा 14 मीटर की साइज के हैं। बांध की लंबाई 576 मीटर व समुद्रतल से ऊंचाई 322.50 मीटर है। बांध की कुल जल भराव में 68 गांव डूब चुके हैं। इसमें 25 गांव पूर्ण रूप से व 43 गांव आंशिक रूप से डूब क्षेत्र में आते हैं। बांध का जलभराव क्षेत्र 25 किलोमीटर है जिसमें कुल 21 हजार 300 हेक्टेयर भूमि जलमग्न होती है। 83 हजार हेक्टेयर में होती बांध की नहरों से सिंचाई बीसलपुर बांध के निर्माण के साथ ही इसके नहरी तंत्र का निर्माण भी 2004 में पूरा हुआ था। टोंक जिले में सिंचाई के लिए बांध की 2 मुख्य नहरें हैं। एक नहर की कुल लंबाई 51.70 किलोमीटर व दूसरी की 18.65 किलोमीटर है। जिनसे जिले की करीब 83 हजार हेक्टेयर भूमि सिंचित होती है। मुख्य नहर से 69 हजार 393 हेक्टेयर व दूसरी से 12 हजार 407 हेक्टेयर भूमि पर सिंचाई कार्य होता है।

इतिहास में नया अध्याय: दरगाह में खादिमों के लिए शुरू हुई लाइसेंस प्रक्रिया

अजमेर अजमेर ख्वाजा गरीब नवाज की विश्वप्रसिद्ध दरगाह में जल्द ही केवल लाइसेंसधारी खादिम ही जायरीन को जियारत करा सकेंगे। केंद्र सरकार के निर्देश पर दरगाह कमेटी ने 75 वर्षों में पहली बार खादिमों के लाइसेंस की प्रक्रिया औपचारिक रूप से शुरू कर दी है। सोमवार को दरगाह नाजिम मोहम्मद बिलाल खान ने इसका आधिकारिक विज्ञापन जारी किया। इसके लिए 5 जनवरी 2026 तक आवेदन जमा करवाए जा सकेंगे। नाजिम ने बताया कि यह प्रक्रिया केवल दरगाह ख्वाजा साहब से संबद्ध खादिम समुदाय सैयद जादगान एवं शेख जादगान के लिए लागू की जा रही है। सुप्रीम कोर्ट व हाईकोर्ट के आदेशों, केंद्र व राज्य सरकारों के निर्देशों, जिला प्रशासन की रिपोर्टों तथा दरगाह सुरक्षा अंकेक्षण की सिफारिशों के अनुपालन में लाइसेंस प्रणाली लागू की जा रही है। दरगाह ख्वाजा साहब अधिनियम 1955 की धारा 11(एफ) में खादिमों के कर्तव्यों, पहचान, मानक प्रक्रियाओं, सुविधाओं और जायरीन के हित सुनिश्चित करने के विशेष प्रावधान हैं, जिनके अनुसार इस पूरी कार्रवाई को आगे बढ़ाया जा रहा है। दरगाह कमेटी ने पात्र खादिमों से आवेदन आमंत्रित कर दिए हैं। आवेदन-पत्र, नियम और शर्तें कमेटी की वेबसाइट gharibnawaz.minorityaffairs.gov.in से डाउनलोड की जा सकती हैं। इच्छुक आवेदक नाजिम कार्यालय से भी आवेदन प्राप्त कर सकते हैं। पूर्ण रूप से भरे हुए प्रपत्र के साथ आवश्यक दस्तावेजों और स्वप्रमाणित प्रतियों को 5 जनवरी 2026 तक कार्यालय में जमा कराना अनिवार्य होगा। यह पहली बार है जब खादिमों को लाइसेंस देने की औपचारिक प्रक्रिया शुरू की गई है। दरगाह कमेटी के गठन के बाद से अब तक तीन एडमिनिस्ट्रेटर और 37 नाजिम अपने-अपने कार्यकाल पूरे कर चुके हैं, लेकिन इस दौरान किसी ने भी लाइसेंस प्रक्रिया को लागू नहीं किया। कमेटी के पहले एडमिनिस्ट्रेटर अब्दुल रऊफ सिद्दीकी 9 जनवरी 1954 को नियुक्त हुए थे। उनके बाद अनीस मुज्तबा जुबैरी और आले मोहम्मद शाह यूपीएससी 1956 तक एडमिनिस्ट्रेटर रहे। बाद में एडमिनिस्ट्रेटर की जगह नाजिम का पद सृजित किया गया और 1 मार्च 1956 को आले मोहम्मद शाह को ही पहला नाजिम नियुक्त किया गया। मार्च 1956 से मार्च 2025 तक 37 नाजिम दरगाह कमेटी का कार्यभार संभाल चुके हैं, जबकि 28 अध्यक्ष भी अपनी सेवा दे चुके हैं। अंतिम सदर सैयद शाहिद हुसैन रिजवी 4 जून 2023 तक पद पर रहे। कई कार्यकालों में खादिमों को लाइसेंस देने की चर्चा और प्रस्ताव बने, लेकिन प्रक्रिया आगे नहीं बढ़ सकी। अब वर्तमान नाजिम, बीएसएफ से रिटायर्ड मोहम्मद बिलाल खान के प्रयासों से यह ऐतिहासिक कदम संभव हो पाया है। लाइसेंस के मुद्दे पर दरगाह नाजिम ने दो बार खादिमों के साथ बैठक बुलाने की कोशिश की। 24 और 27 नवंबर को आयोजित बैठकों में एक भी खादिम उपस्थित नहीं हुआ। दूसरी ओर, खादिम मोहल्ले में अंजुमन सदर की अध्यक्षता में खादिम समुदाय ने अलग बैठक की और मुद्दे पर चर्चा की। नए बदलाव के बाद दरगाह में जियारत व्यवस्था अधिक सुव्यवस्थित, पारदर्शी और सुरक्षित होने की उम्मीद जताई जा रही है। यह कदम जायरीन की सुरक्षा और सुविधा को प्राथमिकता देने की दिशा में दरगाह प्रशासन का बड़ा प्रयास माना जा रहा है।

बड़ा खुलासा: राजस्थान में जब्त अवैध विस्फोटक, गंभीर खतरे से टला बड़ा हादसा

राजसमंद  दिल्ली में हुए कार बम धमाके के बाद अलर्ट मोड पर चल रही राजस्थान पुलिस ने बड़ी मात्रा में विस्फोटक सामग्री जब्त की है. राजस्थान के श्रीनाथजी थाना पुलिस ने बड़ी सफलता हासिल करते हुए अवैध विस्फोटक सामग्री से भरी एक पिकअप को जब्त किया है. इस पिकअप में इतना विस्फोटक भरा हुआ था कि अगर उसमें ब्लास्ट हो जाता तो वह करीब 10 किलामीटर के इलाके को अपनी चपेट में ले सकता था. यहां विस्फोटक कहां से लाया गया था और कहां ले जाया जा रहा था कि इसकी जांच पड़ताल की जा रही है. प्रारंभिक जानकारी के अनुसार भारी मात्रा में जब्त किया गया यह विस्फोटक आमेट क्षेत्र से नाथद्वारा की तरफ ले जाया जा रहा था. इसकी सूचना पर पुलिस ने मौके पर पहुंचकर विस्फोटक से भरी पिकअप को जब्त कर लिया. पिकअप में भारी मात्रा में भरी विस्फोटक सामग्री को देखकर पुलिस सन्न रह गई. उसने तत्काल पिकअप को जब्त कर आलाधिकारियों को सूचना दी. भारी मात्रा में विस्फोटक की जब्ती से अधिकारी भी अलर्ट मोड पर आ गए और मौके के लिए रवाना हो गए. लंबे चौड़े एरिया में मचा सकता था तबाही पुलिस अधिकारियों की मानें तो पिकअप के अंदर इतनी मात्रा विस्फोटक भरा था कि अगर उसमें ब्लास्ट होता तो लगभग 10 किलोमीटर तक लंबे चौड़े इलाके में तबाही मच सकती थी. पुलिस टीम मौके पर जब्त किए विस्फोटक की काउंटिंग करने में जुटी है. पुलिस अधिकारी अब इस बात की जांच पड़ताल में जुटे हैं कि विस्फोटक सामग्री की नेचर कितनी खतरनाक है. इसे कहां से लाया गया था और कहां ले जाया जा रहा था? इसके साथ ही इस बात की भी जांच की जा रही है कि इसे किस उद्देश्य से ले जाया जा रहा था और इसके पीछे किसका हाथ है? पुलिस इन सभी पहलुओं की गंभीरता जांच कर रही है. पुलिस पिकअप चालक से हुई पूछताछ में जो नाम सामने आए हैं उन्हें ढूंढने में लगी है. राजस्थान में पकड़ा गया था TTP से जुड़ा मौलवी उल्लेखनीय है कि राजस्थान में बीते दिनों सुरक्षा एजेंसियों ने चार संदिग्ध मौलवियों को भी पकड़ा था. उनमें एक मौलवी ओसामा उमर का संबंध आंतकी संगठन तहरीक-ए-तालिबान पाकिस्तान (TTP) के साथ पाया गया था. उसके बाद सुरक्षा एजेंसियां और ज्यादा अलर्ट पर आ गई थी. हालांकि राजस्थान के कई इलाकों में अवैध रूप से पत्थरों के खनन के लिए घातक विस्फोटक का ब्लास्टिंग के लिए इस्तेमाल किया जाता है. यह विस्फोटक किस उद्देश्य के लिए ले जाया जा रहा था इसका खुलासा होना बाकी है.

थार रेगिस्तान में खुला सोने का खजाना, बाड़मेर करेगा चीन का खेल खत्म; देश की टेक्नोलॉजी और डिफेंस को बड़ा बल

बाड़मेर  पश्चिम राजस्थान का बाड़मेर अब सिर्फ थार नहीं बल्कि दुनिया की नई ‘ऊर्जा राजधानी’ बनकर उभर रहा है. सिवाना की धरती में नियोबियम जैसे रेयर अर्थ खनिजों का ऐसा खजाना मिला है, जिसका घनत्व दुनिया के औसत से 100 गुना ज्यादा बताया जा रहा है. इलेक्ट्रिक कार, रॉकेट साइंस, हाई-टेक डिफेंस सिस्टम और परमाणु ऊर्जा में इस्तेमाल होने वाले रेयर अर्थ की खोज की जा रही है. चीन जिस रेयर अर्थ मेटल पर दुनिया को सालों से बांधे बैठा है, अब वही धागा बाड़मेर के हाथ में है. सिवाना की चट्टानों में नियोबियम का ऐसा विशाल भंडार मिला है, जिसे भू वैज्ञानिक ‘भविष्य की तकनीक की रीढ़’ मानते हैं. इलेक्ट्रिक कारों से लेकर मिसाइल, रॉकेट और परमाणु ऊर्जा तक हाई-टेक उद्योग में इस्तेमाल होने वाली यह धातु अब चीन के बजाय भारत की धरती से निकलेगी. 100 गुना अधिक घनत्व वाले रेयर अर्थ का खुलासा भारतीय भूवैज्ञानिक सर्वेक्षण (GSI) की शुरुआती रिपोर्टों ने सिवाना की चट्टानों में नियोबियम और अन्य रेयर अर्थ तत्वों के उच्च घनत्व का खुलासा हुआ है. सिवाना की पहाड़ियों में मिले रेयर अर्थ दुनिया के औसत घनत्व से 100 गुना तक अधिक पाया गया है. अब बाड़मेर न सिर्फ चीन की बढ़त तोड़ देगा बल्कि वैश्विक तकनीकी बाज़ार में भारत को नई ताकत भी देगा. इसके लिए सिवाना के भाटीखेड़ा में एक ब्लॉक का ऑक्शन भी किया जा रहा है. सिवाना में यहां है रेयर अर्थ का भंडार सिवाना के कमठाई, दांता, लंगेरा, राखी, थापन, भाटीखेड़ा, फूलन व डण्डाली में रेयर अर्थ के बड़े भण्डार मिले है. सिवाना के चारों तरफ एक गड्ढेनुमा रचना है, जिसमें ग्रेनाइट और रॉयलाइट व एल्केलाइन आग्नेय चट्टानें हैं. इसे सिवाना रिंग्स कॉम्पलेक्स और मालानी रॉक्स के नाम से भी जाना जाता है. रेगिस्तान में मिले हैं यह रेयर अर्थ बाड़मेर के सिवाना रिंग कॉम्प्लेक्स में गैलेनियम, रूबीडियम, इप्रीयम, थोरियम, यूरेनियम, सीरियम, टिलूरियम, यूरेनियम सहित करीब 15 प्रकार के खनिज हैं जो भू-वैज्ञानिकों के मुताबिक लेंथोनोइट ग्रुप के हैं. इसका उपयोग सुपर कंडक्टर, हाई प्लग्स, मैग्नेट, इलेक्ट्रॉनिक पॉलिसिंग, ऑयल रिफाइनरी में केटिलिस्ट, हाईब्रिड कार कंपोनेंट एवं बैटरी के लिए किया जाता है.  कैंसर दवा, बैटरी, लेजर, एरोस्पेस के लिए भी यह उपयोगी है. चीन को मात देंने के लिए मौजूद है रेयर अर्थ के भंडार सिवाना की पहाड़ियों में करीब 900 अरब से अधिक का खजाना छुपा हुआ है. इससे करीब 6 हजार मेट्रिक टन उत्पादन का अनुमान लगाया जा रहा है. बाड़मेर के वरिष्ठ भू वैज्ञानिक सी.पी. दाधीच के मुताबिक सिवाना रिंग कॉम्प्लेक्स में भाटीखेड़ा ब्लॉक को ऑक्शन किया जाएगा. यहां चीन को मात देने के लिए विशाल रेयर अर्थ के भंडार मौजूद है.

ट्रैक पर इंसानियत: लोको पायलट ने गिद्धों को बचाने कम की ट्रेन की रफ्तार

जैसलमेर राजस्थान के जैसलमेर जिले के लाठी क्षेत्र में एक ऐसी घटना घटी जिसने रेलवे के लोको पायलट की मानवता और वन्यजीव प्रेम की मिसाल कायम कर दी। रेल मंत्री अश्विनी वैष्णव द्वारा हरी झंडी दिखाकर रवाना की गई जोधपुर-जैसलमेर स्वर्णनगरी एक्सप्रेस के लोको पायलट ने ट्रेन की रफ्तार इसलिए धीमी कर दी, क्योंकि रेलवे ट्रैक के ठीक किनारे दुर्लभ भारतीय गिद्धों का एक बड़ा झुंड मृत मवेशी को अपना निवाला बना रहा था। गिद्धों की जान बचाने के लिए ड्राइवर ने न सिर्फ ट्रेन धीमी की, बल्कि लगातार हॉर्न बजाकर उन्हें सुरक्षित उड़ान भरने का मौका दिया। इस घटनाक्रम का वीडियो सोशल मीडिया पर तेजी से वायरल हो रहा है। वीडियो वायरल होने के बाद देशभर के पर्यावरण प्रेमी, पक्षी विशेषज्ञ और आम लोग लोको पायलट की जमकर तारीफ कर रहे हैं। दरसअल शनिवार दोपहर करीब ढाई बजे लाठी स्टेशन से कुछ किलोमीटर आगे पोकरण-जोधपुर रेलखंड पर यह घटना हुई। पटरियों के बिल्कुल पास एक मृत गाय पड़ी थी। मृत गाय पर करीब 50-60 भारतीय गिद्ध जमा थे जो अपना भोजन कर रहे थे। गिद्धों की प्रजाति पहले से ही लुप्तप्राय घोषित है और राजस्थान का थार मरुस्थल इनके अंतिम गढ़ों में से एक है। अचानक तेज रफ्तार ट्रेन देखकर गिद्ध भयभीत हो सकते थे और कई की जान जा सकती थी। लेकिन ट्रेन के लोको पायलट ने दूर से ही स्थिति को भांप लिया। उन्होंने तुरंत इमरजेंसी ब्रेक लगाकर ट्रेन की गति कम की और लंबे-लंबे हॉर्न बजाने शुरू कर दिए। हॉर्न की तेज आवाज सुनकर गिद्ध एक-एक कर आकाश में उड़ने लगे। करीब दो-तीन मिनट तक हॉर्न बजता रहा और जब सारे गिद्ध सुरक्षित उड़कर दूर चले गए, तब जाकर ड्राइवर ने ट्रेन आगे बढ़ाई। इस दौरान ट्रेन में सवार यात्रियों ने पूरा दृश्य अपने मोबाइल में कैद कर लिया। अब सोशल मीडिया पर वायरल हो रहे इन वीडियोज में साफ देखा जा सकता है कि कैसे गिद्ध शांतिपूर्वक उड़ रहे हैं और ट्रेन रुकी हुई है। लाठी की इस घटना ने न सिर्फ एक लोको पायलट की संवेदनशीलता को सलाम किया है, बल्कि पूरे समाज को यह सोचने पर मजबूर कर दिया है कि लुप्तप्राय प्रजातियों को बचाने के लिए हमें कितने छोटे-छोटे कदम उठाने पड़ सकते हैं।