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89 किलो अफीम के साथ ट्रक चालक दबोचा गया, सिरसा पुलिस और ANC को मिली बड़ी सफलता

पंचकूला. वर्तमान में हरियाणा के 22 जिलों में से 14 जिले एनसीआर यानी राष्ट्रीय राजधानी क्षेत्र में आते हैं। इनमें से पांच जिले जल्द ही बाहर हो सकते हैं। जी हां, हरियाणा सरकार इस बाबत 16 जून को बड़ा फैसला ले सकती है। ये पांच जिले कौन से हैं, सरकार यह फैसला क्यों ले रही है और यह NCR होता क्या है? आइए इसे पूरे मामले को विस्तार से जानते हैं। क्या है NCR? राष्ट्रीय राजधानी क्षेत्र (NCR) का संदर्भ दिल्ली के पड़ोसी राज्यों के जिलों से संबंधित है। दरअसल, 1951 के बाद दिल्ली में औद्योगिक विकास तेजी से हुआ। जिससे देश की राजधानी में अन्य राज्यों के लोग भी रोजगार और बेहतर सुविधाओं के लिए प्रवास करने लगे। दिल्ली पर इस बढ़ती आबादी और भीड़-भाड़ के दबाव को कम करने के लिए NCR की परिकल्पना की गई। इसी उद्देश्य के साथ साल 1985 में NCR प्लानिंग बोर्ड (NCRPB) का गठन किया गया, ताकि पूरे क्षेत्र का विकास एक व्यवस्थित योजना के तहत हो सके। अत: पड़ोसी राज्यों के कुछ शहर और जिलों में इसका विस्तार (100 KM तक) कर दिल्ली जैसी सुविधाएं और रोजगार के अवसर उपलब्ध कराए जा सके। मौजूदा समय में एनसीआर में तीन राज्यों (हरियाणा, यूपी और राजस्थान) के 24 जिले शामिल हैं। इस सूची में सबसे ज्यादा जिले (14) हरियाणा के हैं, इन्हीं 14 जिलों के पांच जिलों को बाहर करने के प्रस्ताव पर अगले सप्ताह बैठक की जाएगी। हरियाणा के इन पांच जिलों में करनाल, जींद, महेंद्रगढ़, भिवानी और चरखी दादरी शामिल है।। इस बाबत एनसीआर प्लानिंग बोर्ड की 16 जून को होने वाली बैठक में इस प्रस्ताव पर चर्चा होगी। सरकार क्यों ले रही यह फैसला? दिल्ली से 100 किलोमीटर के दायरे से बाहर के जिलों को एनसीआर से बाहर करने के लिए हरियाणा के पूर्व मुख्यमंत्री और वर्तमान में केंद्रीय ऊर्जा और आवास व शहरी मामलों के मंत्री मनोहर लाल ने प्रयास शुरू किए थे। रीजनल प्लान-2041 के तहत एनसीआर सीमा को नए सिरे से तय करने का प्रस्ताव है। हरियाणा सरकार के प्रस्ताव को स्वीकृति मिली तो राज्य का एनसीआर क्षेत्र करीब 60 फीसदी तक सिमट सकता है। बैठक के मसौदे में प्रस्ताव है कि एनसीआर की सीमा राजघाट से 100 किमी के दायरे तक सीमित की जाए। अभी हरियाणा के 14 जिले किसी न किसी रूप में एनसीआर का हिस्सा हैं, जिसका कुल क्षेत्रफल 25 हजार वर्ग किलोमीटर से अधिक है। NCR से बाहर होने की वजह हरियाणा सरकार का तर्क है कि एनसीआर (NCR) के सख्त नियमों के कारण इन 5 जिलों को फायदे से ज्यादा भारी आर्थिक और व्यापारिक नुकसान उठाना पड़ रहा है। दिल्ली से दूर मौजूद जींद या महेंद्रगढ़ जैसे जिलों में औद्योगिक विकास ठप होने की आशंका है। NGT और GRAP के कड़े नियमों के कारण उद्योगों और फैक्ट्रियों पर लगातार सख्त कार्रवाई होती है। इसके साथ ही 10 साल पुराने डीजल और 15 साल पुराने पेट्रोल वाहनों पर रोक से स्थानीय व्यापारियों और किसानों का परिवहन बजट बिगड़ता है। नए फॉर्मूले में क्या होगा? नए फॉर्मूले के लागू होने पर यह क्षेत्र घटकर करीब 10.5 हजार वर्ग किलोमीटर तक रह सकता है। उत्तर प्रदेश और राजस्थान ने उन तहसीलों को भी एनसीआर में शामिल रखने का सुझाव दिया है, जिनका कुछ हिस्सा 100 KM की सीमा में आता है, जबकि हरियाणा का तर्क है कि केवल एनसीआर की सीमा में पूरी तरह आने वाली तहसीलों को ही रखा जाए।

12 वर्ष की उपलब्धियों को जनता तक पहुंचाएगी सरकार, देशभर में लगेंगे जन कल्याण शिविर

करनाल. एडीसी डॉ. राहुल रईया ने कहा कि सरकार के 12 वर्षों के विकास कार्यों, जनकल्याणकारी योजनाओं और उपलब्धियों को आमजन तक पहुंचाने के लिए 20 जून तक जिला में विशेष प्रचार एवं जनसंपर्क अभियान चलाया जाएगा। इस अभियान में विभिन्न प्रकार की गतिविधियां आयोजित की जाएंगी, जिनमें मुख्य रूप से जन कल्याण शिविर, जन प्रतिनिधियों द्वारा अपने लोकसभा एवं विधानसभा में एक दिन व्यतीत करना, प्रदर्शनी, पौधा रोपण, विशेष स्वच्छता अभियान एवं रोजगार मेले आदि शामिल हैं। अभियान को सफल बनाने के लिए सभी संबंधित विभागों के अधिकारी आपसी तालमेल बनाते हुए जिम्मेदारी के साथ कार्य करें। एडीसी डा. राहुल रईया ने इस विशेष अभियान के संबंध में अधिकारियों को बैठक लेकर आवश्यक दिशा निर्देश दिए। इससे पहले मुख्यमंत्री के प्रधान सचिव अरुण गुप्ता ने चंडीगढ़ से वीडियो कांफ्रेंसिंग के माध्यम से सभी जिला उपायुक्तों को विशेष प्रचार अभियान से संबंधित आवश्यक दिशा-निर्देश दिए। एडीसी डॉ. राहुल रईया ने कहा कि पिछले 12 वर्षों में सरकार द्वारा विभिन्न क्षेत्रों में किए विकास कार्यों और जनकल्याणकारी योजनाओं का व्यापक प्रचार-प्रसार किया जाएगा। उन्होंने बताया कि सांसद प्रत्येक विधानसभा में एक दिन व्यतीत करेंगे। इस दौरान वे पौधारोपण एवं स्वच्छता अभियान में भाग लेंगे। इसी प्रकार केंद्र व राज्य सरकार की उपलब्धियों पर आधारित प्रदर्शनी लगाई जाएगी। इसके अलावा शिक्षा विभाग द्वारा विभिन्न प्रकार की प्रतियोगिताएं और उच्च शिक्षा विभाग द्वारा विकसित भारत संकल्प सम्मेलन आयोजित किया जाएगा। कृषि विभाग, बागवानी विभाग और कृषि विज्ञान केंद्र द्वारा संयुक्त प्राकृतिक खेती पर व्याख्यान आयोजित किया जाएगा। साथ ही पशुपालन विभाग द्वारा पशु मेला लगाया जाएगा, जिसमें विभाग की नवीनतम उपलब्धियों, पशुओं के रखरखाव और टीकाकरण की जानकारी दी जाएगी। इसके अलावा ग्रामीण और शहरी क्षेत्रों में विशेष स्वच्छता अभियान भी चलाए जाएंगे। उन्होंने कहा कि यह अभियान सरकार की जनकल्याणकारी नीतियों और विकास कार्यों को आमजन तक पहुंचाने का एक महत्वपूर्ण माध्यम साबित होगा। इस मौके पर एसीयूटी सोहम शैलेंद्र व एआईपीआरओ अनुराग मौजूद रहे।

NCR प्लान-2041 पर मंथन तेज, करनाल समेत 5 जिलों की सदस्यता पर संकट

पंचकूला वर्तमान में हरियाणा के 22 जिलों में से 14 जिले एनसीआर यानी राष्ट्रीय राजधानी क्षेत्र में आते हैं। इनमें से पांच जिले जल्द ही बाहर हो सकते हैं। जी हां, हरियाणा सरकार इस बाबत 16 जून को बड़ा फैसला ले सकती है। ये पांच जिले कौन से हैं, सरकार यह फैसला क्यों ले रही है और यह NCR होता है क्या है? आइए इसे पूरे मामले को विस्तार से जानते हैं। क्या है NCR? राष्ट्रीय राजधानी क्षेत्र (NCR) का संदर्भ दिल्ली के पड़ोसी राज्यों के जिलों से संबंधित है। दरअसल, 1951 के बाद दिल्ली में औद्योगिक विकास तेजी से हुआ। जिससे देश की राजधानी में अन्य राज्यों के लोग भी रोजगार और बेहतर सुविधाओं के लिए प्रवास करने लगे। दिल्ली पर इस बढ़ती आबादी और भीड़-भाड़ के दबाव को कम करने के लिए NCR की परिकल्पना की गई। इसी उद्देश्य के साथ साल 1985 में NCR प्लानिंग बोर्ड (NCRPB) का गठन किया गया, ताकि पूरे क्षेत्र का विकास एक व्यवस्थित योजना के तहत हो सके। अत: पड़ोसी राज्यों के कुछ शहर और जिलों में इसका विस्तार (100 KM तक) कर दिल्ली जैसी सुविधाएं और रोजगार के अवसर उपलब्ध कराए जा सके। मौजूदा समय में एनसीआर में तीन राज्यों (हरियाणा, यूपी और राजस्थान) के 24 जिले शामिल हैं। इस सूची में सबसे ज्यादा जिले (14) हरियाणा के हैं, इन्हीं 14 जिलों के पांच जिलों को बाहर करने के प्रस्ताव पर अगले सप्ताह बैठक की जाएगी। हरियाणा के इन पांच जिलों में करनाल, जींद, महेंद्रगढ़, भिवानी और चरखी दादरी शामिल है।। इस बाबत एनसीआर प्लानिंग बोर्ड की 16 जून को होने वाली बैठक में इस प्रस्ताव पर चर्चा होगी। सरकार क्यों ले रही यह फैसला? दिल्ली से 100 किलोमीटर के दायरे से बाहर के जिलों को एनसीआर से बाहर करने के लिए हरियाणा के पूर्व मुख्यमंत्री और वर्तमान में केंद्रीय ऊर्जा और आवास व शहरी मामलों के मंत्री मनोहर लाल ने प्रयास शुरू किए थे। रीजनल प्लान-2041 के तहत एनसीआर सीमा को नए सिरे से तय करने का प्रस्ताव है। हरियाणा सरकार के प्रस्ताव को स्वीकृति मिली तो राज्य का एनसीआर क्षेत्र करीब 60 फीसदी तक सिमट सकता है। बैठक के मसौदे में प्रस्ताव है कि एनसीआर की सीमा राजघाट से 100 किमी के दायरे तक सीमित की जाए। अभी हरियाणा के 14 जिले किसी न किसी रूप में एनसीआर का हिस्सा हैं, जिसका कुल क्षेत्रफल 25 हजार वर्ग किलोमीटर से अधिक है। NCR से बाहर होने की वजह हरियाणा सरकार का तर्क है कि एनसीआर (NCR) के सख्त नियमों के कारण इन 5 जिलों को फायदे से ज्यादा भारी आर्थिक और व्यापारिक नुकसान उठाना पड़ रहा है। दिल्ली से दूर मौजूद जींद या महेंद्रगढ़ जैसे जिलों में औद्योगिक विकास ठप होने की आशंका है। NGT और GRAP के कड़े नियमों के कारण उद्योगों और फैक्ट्रियों पर लगातार सख्त कार्रवाई होती है। इसके साथ ही 10 साल पुराने डीजल और 15 साल पुराने पेट्रोल वाहनों पर रोक से स्थानीय व्यापारियों और किसानों का परिवहन बजट बिगड़ जाता है। नए फॉर्मूले में क्या होगा? नए फॉर्मूले के लागू होने पर यह क्षेत्र घटकर करीब 10.5 हजार वर्ग किलोमीटर तक रह सकता है। उत्तर प्रदेश और राजस्थान ने उन तहसीलों को भी एनसीआर में शामिल रखने का सुझाव दिया है, जिनका कुछ हिस्सा 100 KM की सीमा में आता है, जबकि हरियाणा का तर्क है कि केवल एनसीआर की सीमा में पूरी तरह आने वाली तहसीलों को ही रखा जाए।

एरोपोनिक तकनीक से सात गुना बढ़ा आलू बीज उत्पादन, दूसरे राज्यों की जरूरतें भी पूरी करेगा हरियाणा

करनाल धान, गेहूं को छोड़ प्रदेश का किसान सब्जी और बागवानी की ओर बढ़ रहा है। कुछ सालों से आलू की खेती में किसानों का रुझान बढ़ रहा है। किसान की आय बढ़ाने के लिए शामगढ़ स्थित आलू प्रौद्योगिकी केन्द्र (पीटीसी) ने ऐरोपोनिक तकनीक अपना सफल शोध किया है। इस तकनीक से एक पौधे से 60 मिनी ट्यूबर (बीज के आलू) मिलेंगे। आलू बीज उत्पादन में आई यह क्रांति कई बड़े राज्यों के लिए गेम चेंजर साबित होगी। हरियाणा अब उत्तर प्रदेश, मध्यप्रदेश, बिहार व पश्चिमी बंगाल जैसे राज्यों की बीज की जरूरत को पूरा करेगा। प्रदेश में करीब 34 हजार हेक्टेयर में आलू की खेती होती है। इसमें पांच प्रमुख किस्में कुफरी उदय, पुखराज, कुफरी मोहन, कुफरी चिपसोना व कुफरी सूर्या, आनंद, पुष्कर शामिल हैं। शामगढ़ केंद्र में आलू की नई किस्म "कुफरी उदय" पर शोध किया गया। इस किस्म के पौधों में ट्यूबर बनने की रफ्तार भी सबसे अधिक पाई गई। साथ ही, मिट्टी में न होने के कारण यह बीज शत-प्रतिशत फंगस रहित, बैक्टेरिया और वायरस मुक्त है। यह है एरोपोनिक तकनीक एरोपोनिक तकनीक खेती की एक आधुनिक विधि है, जिसमें पौधों की जड़ें मिट्टी या पानी के बजाय हवा में रहती हैं। इससे कम पानी, कम जगह में तेज वृद्धि और अधिक उत्पादन मिलता है। क्या है एरोपोनिक तकनीक? इस तकनीक में पौधे को हवा में लटकाकर कंप्यूटर नियंत्रित मशीनों से जड़ों में पोषक तत्वों की बौछारें की जाती हैं। इस व्यवस्था से बीज उत्पादन में सात गुना यानी एक पौधे से बीज के 60 आलू मिले हैं। जबकि परंपरागत और नेट हाउस के अंदर प्रति पौधा केवल आठ मिनी ट्यूबर का उत्पादन ही हो पाता था। नए रिकॉर्ड से उत्तर प्रदेश, मध्यप्रदेश, बिहार व पश्चिमी बंगाल जैसे राज्यों की बीज की जरूरत को पूरा करेगा हरियाणा मिट्टी और कोकोपिट के बिना कुफरी उदय किस्म में एरोपोनिक तकनीक से शोध में आए सुखद परिणाम कृषि की इस तकनीक से हरियाणा में सात गुना बढ़ेगा आलू के बीज का उत्पादन     आठ आलू अब तक एक पौधे से मिलते हैं।     34 हजार हेक्टेयर में प्रदेश में होती है आलू की खेती। उत्तर प्रदेश, मध्य प्रदेश और पश्चिम बंगाल तक फैलेगा नेटवर्क शामगढ़ आलू प्रौद्योगिकी केंद्र करीब 4500 मीट्रिक टन उच्च गुणवत्ता वाला आलू बीज दूसरे राज्यों को भेज रहा है। नए शोध में प्रति पौधा 60 मिनी ट्यूबर मिलने के बाद केंद्र की बीज उत्पादन क्षमता कई गुना बढ़ेगी। अब देश की सबसे बड़ी आलू उत्पादक बेल्ट वाले राज्यों को कवर करने की योजना तैयार की जा रही है। अब हरियाणा अपने किसानों की जरूरतें पूरी करने के साथ-साथ उत्तर प्रदेश, मध्य प्रदेश, पश्चिम बंगाल और दूसरे बड़े राज्यों के किसानों को बड़े पैमाने पर आलू बीज देने में पूरी तरह सक्षम होगा। एरोपोनिक तकनीक में एक पौधे से 60 मिनी ट्यूबर प्राप्त होना हमारे लिए मील का पत्थर है। इससे पहले के शोध में हम केवल 40 मिनी ट्यूबर ही उगाने में कामयाब हो पा रहे थे, लेकिन हमारे विज्ञानियों के गहन अध्ययन, सटीक न्यूट्रिएंट मैनेजमेंट और निरंतर प्रयास से यह बड़ी सफलता मिली है। क्षमता कई गुना बढ़ जाएगी और हम दूसरे राज्यों के लिए बीज उपलब्धता के साथ-साथ निर्यात करने की स्थिति में आ सकते हैं। -डॉ. मनोज भानुकर, उप निदेशक, आलू प्रौद्योगिकी केंद्र शामगढ़ करनाल।  

Sirsa News: रेणू भाटिया के बयान पर भड़के स्वास्थ्य कर्मी, नर्सिंग स्टाफ के समर्थन में किया विरोध

सिरसा. जिला नागरिक अस्पताल में नर्सिंग आफिसर्स की गेट मीटिंग आयोजित की गई। बैठक की अध्यक्षता जिला प्रधान राजकुमार भारद्वाज ने की। नर्सिंग आफिसर के खिलाफ अमर्यादित भाषा का प्रयोग करने वाली महिला आयोग की अध्यक्ष रेणु भाटिया द्वारा इस्तीफा दिए जाने पर नर्सिंग स्टाफ ने हड़ताल वापस ले ली। राजकुमार भारद्वाज ने कहा कि रेणु भाटिया ने अभद्र टिप्पणी कर नर्सिंग अमले की छवि को सार्वजनिक रूप से धूमिल किया है, इसलिए उन्हें सार्वजनिक रूप से माफी मांगनी चाहिए। उन्होंने कहा कि नर्सिंग स्टाफ की वास्तविक ड्यूटी वार्ड में मरीजों की देखभाल की होती है। डाक्टर के साथ हर समय रहना नर्सिंग स्टाफ की ड्यूटी नहीं है। बिना तथ्य और प्रमाण के नर्सिंग स्टाफ को कटघरे में खड़ा करना गलत है। भारद्वाज ने कहा कि जिसने मासूम बच्ची के साथ जघन्य काम किया है, उसे कड़ी से कड़ी सजा मिलनी चाहिए। इस घटना से न केवल हम बल्कि हमारा समाज भी पूरा आहत है और पीड़िता को त्वरित न्याय मिलना चाहिए। सार्वजनिक माफी पर अड़ा नर्सिंग स्टाफ अगर रेणु भाटिया ने सार्वजनिक तौर पर माफी नहीं मांगी तो हमें मजबूरन कोर्ट का दरवाजा खटखटाना पड़ेगा। इस मौके पर अमित जिला महासचिव, मुकेश, गायत्री देवी मैट्रन, सीनियर नर्सिंग आफिसर, अनिता, मीना, रानी, पूजा, नरेश, शशि, गीता, सीमा, नर्सिंग आफिसर हरजित, उर्मिल उपस्थित थे। चेयरपर्सन का कार्यकाल तीन साल का था, लेकिन वह साढ़े 4 साल तक इस पद पर रही। हरियाणा राज्य महिला आयोग अधिनियम 2012 के मौजूदा प्रविधान के अंतर्गत रेनू भाटिया का राज्य महिला आयोग की चेयरपर्सन के तौर पर कार्यकाल नियमानुसार पिछले वर्ष जनवरी, 2025 में ही पूरा हो चुका था। उन्होंने 19 जनवरी 2022 को चेयरपर्सन के रूप में कार्यभार ग्रहण किया था। हरियाणा राज्य महिला आयोग अधिनियम, 2012 की धारा 4(1) में स्पष्ट प्रविधान है कि आयोग की चेयरपर्सन, वाइस-चेयरपर्सन और सदस्यों का कार्यकाल तीन वर्ष से अधिक नहीं हो सकता। इस आधार पर उनका कार्यकाल 18 जनवरी 2025 को पूरा हो गया था। रेणू भाटिया का राजनीतिक सफर वर्ष 2000 में फरीदाबाद में भाजपा टिकट पर पार्षद चुनाव जीती और डिप्टी मेयर भी बनीं। 2010 में पार्षद चुनाव में हार झेलनी पड़ी। हरियाणा भाजपा में प्रदेश प्रवक्ता के पद पर रही। वर्ष 2017 में मनोहर लाल सरकार में महिला आयोग की सदस्य बनीं। मनोहर सरकार ने 19 जनवरी 2022 को महिला आयोग की चेयरपर्सन बनाया। यूं चला घटनाक्रम     29 मई को नाबालिग से दुष्कर्म हुआ।     31 मई को आरोपित डॉक्टर के खिलाफ केस दर्ज हुआ।     1 जून को डॉक्टर की गिरफ्तारी हुई।     6 जून को राज्य महिला आयोग ने अस्पताल प्रबंधन को नोटिस जारी किया।     7 जून को राज्य महिला आयोग अध्यक्ष रेनू भाटिया ने अस्पताल का दौरा किया।     8 जून को कुरुक्षेत्र में नर्सों ने मोर्चा खोला और प्रदर्शन किया।     9 जून को सुबह प्रदेश भर में नर्सिंग ऑफसर्स की 2 घंटे की पेन डाउन स्ट्राइक।     9 जून रात को रेणू भाटिया का इस्तीफा। यह की थी टिप्पणी चेयरपर्सन रेणू भाटिया ने रविवार को निरीक्षण के दौरान खड़ी एक स्टाफ से पूछा था कि क्या आपकी बेटी है। उन्होंने हां कहा तो चेयरपर्सन बोलीं कि उसे किसी अनजान व्यक्ति के साथ अकेला छोड़ सकती है क्या?

चौंकाने वाली रिपोर्ट: यमुनानगर के 592 तालाब बने कचरा घर, 69 जलाशय सूखने की कगार पार

यमुना नगर. जिले में तालाबों और जोहड़ों की बिगड़ती हालत का असर अब भूजल पर साफ दिखाई देने लगा है। जिले के 805 तालाबों में से 592 प्रदूषित हैं, करीब 500 अतिक्रमण की चपेट में हैं। 69 पूरी तरह सूख चुके हैं और 20 से ज्यादा तालाब गायब हो गए। कब्जा कर निर्माण कर लिया गया। इसके कारण वर्षा जल का प्राकृतिक संचयन प्रभावित हो रहा है और सातों ब्लाकों में भूजल स्तर लगातार नीचे जा रहा है। स्थिति की गंभीरता का अंदाजा इसी से लगाया जा सकता है कि रादौर, जगाधरी, सरस्वतीनगर और साढौरा ब्लाक को अटल भूजल योजना में शामिल किया गया है। विशेषज्ञों के अनुसार जिले के कई क्षेत्रों में हर वर्ष भूजल स्तर एक से डेढ़ फीट तक गिर रहा है। तालाब और जोहड़ ग्रामीण क्षेत्रों में जल संरक्षण की सबसे पुरानी और प्रभावी व्यवस्था माने जाते रहे हैं। बरसात का पानी इनमें एकत्र होकर धीरे-धीरे जमीन में समाता था, जिससे भूजल रिचार्ज होता था। लेकिन अब बड़ी संख्या में तालाब अतिक्रमण, गंदगी, सीवरेज और गाद की समस्या से जूझ रहे हैं। कई तालाबों की जलधारण क्षमता भी काफी घट चुकी है। जिले में करीब 500 तालाब अतिक्रमण की चपेट में जिले में करीब 500 तालाब अतिक्रमण की चपेट में बताए गए हैं। इनमें से 256 तालाब गंभीर रूप से अतिक्रमित श्रेणी में हैं। वहीं 592 तालाब प्रदूषित पाए गए हैं। कई स्थानों पर सीवरेज का पानी तालाबों में पहुंच रहा है, जबकि 69 तालाब पूरी तरह सूख चुके हैं। इससे वर्षा का बड़ा हिस्सा बिना रुके नालों और ड्रेनों के जरिए बाहर निकल जाता है। जल संरक्षण के क्षेत्र में काम कर रहे गोविंद भाटिया का कहना है कि तालाब केवल जलाशय नहीं, बल्कि भूजल रिचार्ज का महत्वपूर्ण माध्यम हैं। जब तालाबों में पानी रुकना कम हो जाता है तो उसका सीधा असर भूजल स्तर पर पड़ता है। ग्रामीण क्षेत्रों में पहले जोहड़ सालभर पानी का स्रोत बने रहते थे, लेकिन अब उनकी स्थिति तेजी से बदल रही है। जगाधरी, रादौर, सरस्वतीनगर, व्यासपुर, छछरौली, साढौरा और प्रतापनगर ब्लाकों के ग्रामीण भी जल संकट को महसूस कर रहे हैं। ग्रामीण मोहन वर्मा, प्रवीण कुमार व कुशल पाल सिंह का कहना है कि पहले वर्षा का पानी तालाबों और जोहड़ों में जमा होता था, जिससे आसपास के क्षेत्रों में नमी बनी रहती थी। अब पानी तेजी से बह जाता है और गर्मी के दिनों में जल संकट बढ़ जाता है। इसका असर पशुपालकों पर भी पड़ रहा है। जिन तालाबों से कभी पशुओं को पानी मिलता था, वहां अब या तो पानी नहीं है या उसकी गुणवत्ता खराब हो चुकी है। तालाबों के पुनरुद्धार के लिए अमृत सरोवर योजना के तहत जिले में 42.16 करोड़ रुपये खर्च किए जा चुके हैं। इसके बावजूद 20 परियोजनाएं लंबित हैं। नगर निगम क्षेत्र में 45 तालाबों पर कार्य प्रस्तावित था, लेकिन अब तक दो परियोजनाएं ही पूरी हो सकी हैं। चार ब्लाकों पर विशेष फोकस भूजल स्तर में लगातार गिरावट को देखते हुए अटल भूजल योजना के तहत रादौर, जगाधरी, सरस्वतीनगर और साढौरा ब्लाक चिन्हित किए गए हैं। इन चारों ब्लाकों की 251 ग्राम पंचायतों में जल संरक्षण गतिविधियों पर विशेष ध्यान दिया जा रहा है। इन क्षेत्रों का चयन इसलिए किया गया क्योंकि यहां भूजल का दोहन अधिक और संरक्षण अपेक्षाकृत कम है। जल संरक्षण और वर्षा जल संचयन पर गंभीरता से हो काम भूजल विभाग के आंकड़े बताते हैं कि जिले में पानी लगातार गहराई में जा रहा है। जगाधरी, रादौर, सरस्वतीनगर और बिलासपुर खंडों में वर्ष 2014 से 2018 के बीच भूजल स्तर में लगातार गिरावट दर्ज की गई। इसके बाद भी पानी और नीचे खिसका है। विभागीय आंकड़ों के अनुसार वर्ष 2018 के बाद इन क्षेत्रों में भूजल स्तर एक से सवा मीटर तक और नीचे चला गया है। वर्तमान में व्यासपुर खंड की स्थिति सबसे ज्यादा चिंताजनक है। यहां भूजल 25 मीटर की गहराई पर पहुंच चुका है। रादौर में पानी 18 मीटर, सरस्वतीनगर और प्रतापनगर में 15-15 मीटर, जगाधरी में करीब 14.5 मीटर, साढौरा में 11 मीटर और छछरौली में नौ मीटर गहराई पर उपलब्ध है। वैज्ञानिक डाक्टर राजेश गडिया का कहना है कि जिले में हर साल औसतन एक से डेढ़ फीट तक भूजल स्तर नीचे जा रहा है। यदि जल संरक्षण और वर्षा जल संचयन पर गंभीरता से काम नहीं किया गया तो आने वाले समय में स्थिति और गंभीर हो सकती है।

Jhajjar की रुपांशी का कमाल, अंडर-17 नेशनल रेसलिंग चैंपियनशिप में स्वर्ण पदक जीतकर बढ़ाया मान

झज्जर. एक साधारण हलवाई की बेटी ने उत्तर प्रदेश के गोंडा में आयोजित अंडर-17 राष्ट्रीय कुश्ती चैंपियनशिप में स्वर्ण पदक जीतकर पूरे जिले का नाम चमका दिया है। सिलाना गांव की बेटी रुपांशी (इशु) ने 53 किलोग्राम भारवर्ग के फ्री स्टाइल मुकाबले में देश के शीर्ष पहलवानों को धूल चटाते हुए गोल्ड मेडल पर कब्जा जमाया। राष्ट्रीय स्तर पर इस शानदार उपलब्धि के बाद गांव पहुंचने पर रुपांशी सिलाना का ढोल-नगाड़ों और फूल-मालाओं के साथ जोरदार नागरिक अभिनंदन किया गया। शौक से शुरू हुआ सफर, अब देश को मेडल दिलाने की जिद : चैंपियन पहलवान रुपांशी ने बातचीत के दौरान बताया कि उनके गांव में जब अखाड़ा खुला था, तो वह महज 9 साल की उम्र में शौक-शौक में वहां चली गई थीं। शुरुआत में वह अखाड़े में अकेली लड़की थी, जिसे देखकर लोग कुछ संकोच भी था, लेकिन उनके माता-पिता सहित परिवार ने अपनी बेटी के सपनों को टूटने नहीं दिया। रुपांशी ने कहा, शुरुआत में न्यूं तो कवै थे कि लड़की कुश्ती करेगी, पर मेरे पापा और मम्मी हमेशा मेरे साथ खड़े रहे। आज बहुत खुशी हो रही है, जब मैं गोल्ड मेडल जीतकर आई, तो सारा गाम मेरे स्वागत में खड़ा था। इससे पहले रुपांशी रोहतक में हुई स्टेट चैंपियनशिप में तीसरा स्थान हासिल कर चुकी हैं। पिता बनाते हैं मिठाई, बेटी ने कुश्ती में घोली मिठास रुपांशी के परिवार की पृष्ठभूमि बेहद साधारण है। उनके पिता तिलक राज गांव में ही हलवाई का काम करते हैं और मां घरेलू महिला हैं। दो बहनों और एक बड़े भाई में सबसे छोटी रुपांशी ने अपनी खेल प्रतिभा से साबित कर दिया कि बेटियां किसी भी क्षेत्र में बेटों से कम नहीं हैं। रुपांशी का बड़ा भाई भी खेल में रुचि रखता है। खेल के साथ-साथ पढ़ाई को तरजीह देते हुए रुपांशी ने हाल ही में 12वीं कक्षा की परीक्षा भी 60 प्रतिशत अंकों के साथ उत्तीर्ण की है। कड़ी मेहनत और ठेठ हरियाणवी डाइट का कमाल : रुपांशी रोजाना सुबह और शाम 3-3 घंटे अखाड़े में कड़ा अभ्यास करती हैं। अपनी डाइट को लेकर बताया कि वह पूरी तरह से पारंपरिक और पौष्टिक आहार पर निर्भर हैं, जिसमें दूध, दही, घी, चूरमा और खीर मुख्य रूप से शामिल हैं। अभ्यास के ठीक बाद वह नियमित रूप से बादाम रगड़ा पीती हैं। अब रुपांशी का अगला लक्ष्य 14 जून को होने वाली एशियाई चैंपियनशिप के ट्रायल को पास करना और अंतरराष्ट्रीय स्तर पर देश के लिए पदक जीतना है। गुरुओं की मेहनत और ग्रामीणों का मिला भरपूर आशीर्वाद रुपांशी ने अपनी सफलता का श्रेय कोच अमित कुमार को दिया, जिन्होंने सिलाना अखाड़े में उनकी प्रतिभा को निखारा। इसके साथ ही खलीफा पहलवान कली राम, पहलवान कदम कोच और पहलवान राजबीर उर्फ सांडा आदि खलीफाओं के मार्गदर्शन ने मैट पर मजबूत बनाया। गांव आगमन पर आयोजित ''प्रतिभा सम्मान समारोह'' के दौरान सरपंच राकेश कुमार, पूर्व पार्षद हरेंद्र सिलाना, जोहरी पहलवान, पूर्व सरपंच सूरज मल, धर्मबीर, आजाद सिंह, साहब सिंह, रामफल सिंह, लीलू राम और धर्मेंद्र पहलवान, नरेश सहित भारी संख्या में खेल प्रेमियों ने बेटी को आशीर्वाद दिया और उसके उज्ज्वल भविष्य की कामना की।

हरियाणा सरकार की बड़ी सौगात, 20 वर्षों से शामलात भूमि में रह रहे लोगों को मिलेगा स्वामित्व अधिकार

पंचकूला. मुख्यमंत्री नायब सैनी ने घोषणा की है कि जो परिवार गांव की शामलात भूमि पर 20 वर्षों से मकान बना कर रह रहे हैं, वे मालिकाना हक के लिए अब 16 जनवरी तक आवेदन कर सकते हैं। ऐसे परिवारों से वर्ष 2004 की कलेक्टर दर की डेढ़ गुणा के अनुसार भूमि खरीद की राशि जमा करवाई जाएगी। दस्तावेजी कठिनाइयों के कारण कई पात्र लोग आवेदन नहीं कर सके थे, ऐसे में सरकार ने उन्हें राहत दी है। नायब सिंह सैनी मंगलवार को पंचकूला के इंद्रधनुष आडिटोरियम में आयोजित राज्य स्तरीय सशक्त पंचायत समारोह को संबोधित कर रहे थे। उन्होंने 17 जिलों के 179 गांवों की फिरनियों पर एलईडी स्ट्रीट लाइटों का उद्घाटन भी किया, जिन पर 23 करोड़ 21 लाख रुपये की लागत आई है। इसके साथ ही 17 जिलों में 44 करोड़ से बनी 350 अटल लाइब्रेरियों का भी लोकार्पण किया। छह ग्राम पंचायतें विकास, स्वच्छता और सुशासन के लिए सम्मानित: मुख्यमंत्री नायब सिंह सैनी ने जागृत ग्राम पुरस्कारों के तहत प्रदेश की 6 ग्राम पंचायतों को विकास, स्वच्छता और सुशासन के नए मानदंड स्थापित करने के लिए सम्मानित किया तथा उन्हें 1 करोड़ 66 लाख रुपये की पुरस्कार राशि दी गई। इन पंचायतों में फतेहाबाद की जांडली कलां पंचायत को 51 लाख, चरखी दादरी के झिंझर की पंचायत को 31 लाख, अंबाला के साहा की पंचायत को 21 लाख की राशि प्रदान की गई। द्वितीय श्रेणी में फतेहाबाद के जल्लोपुर की पंचायत को 31 लाख, गदली को 21 लाख तथा करनाल के मर्दानहेड़ी ग्राम पंचायत को 11 लाख रुपये का पुरस्कार दिया गया। उन्होंने विभिन्न योजनाओं के तहत कुल 2,697 करोड़ रुपये से अधिक की राशि जारी की गई। सैनी ने कार्यक्रम के दौरान हर महीने डीबीटी के जरिए दी जाने वाली विभिन्न योजनाओं की किस्त भी रिमोट का बटन दबाकर जारी की।

हरियाणा में बयान से मचा बवाल, रेणू भाटिया पद से हटाई गईं, विवाद की वजह बना बेटियों पर दिया गया बयान

कुरुक्षेत्र. एलएनजेपी अस्पताल में जुड़े नाबालिग से दुष्कर्म मामले में रविवार को निरीक्षण के दौरान नर्सिंग स्टाफ पर की गई विवादित टिप्पणी और नर्सिंग स्टाफ की एकजुटता भरे प्रदर्शन ने हरियाणा महिला आयोग की चेयरपर्सन रेणू भाटिया के साढ़े चार वर्षों के कार्यकाल पर विराम लगा दिया। उन्हें मंगलवार रात को इस्तीफा देना पड़ा। बताया जा रहा है कि इन्हें पद से हटाना था, इसलिए मौका देखकर इस्तीफा ले लिया गया। चेयरपर्सन का कार्यकाल तीन साल का था, लेकिन वह साढ़े 4 साल तक इस पद पर रही। हरियाणा राज्य महिला आयोग अधिनियम 2012 के मौजूदा प्रविधान के अंतर्गत रेनू भाटिया का राज्य महिला आयोग की चेयरपर्सन के तौर पर कार्यकाल नियमानुसार पिछले वर्ष जनवरी, 2025 में ही पूरा हो चुका था। उन्होंने 19 जनवरी 2022 को चेयरपर्सन के रूप में कार्यभार ग्रहण किया था। हरियाणा राज्य महिला आयोग अधिनियम, 2012 की धारा 4(1) में स्पष्ट प्रविधान है कि आयोग की चेयरपर्सन, वाइस-चेयरपर्सन और सदस्यों का कार्यकाल तीन वर्ष से अधिक नहीं हो सकता। इस आधार पर उनका कार्यकाल 18 जनवरी 2025 को पूरा हो गया था। 26 नवंबर 2024 को महिला एवं बाल विकास विभाग की ओर से जारी एक पत्र के माध्यम से रेणु भाटिया का कार्यकाल अगले आदेश तक बढ़ाया गया था, किंतु किसी विभागीय पत्र द्वारा कानून में निर्धारित अधिकतम कार्यकाल की सीमा को पार नहीं किया जा सकता। रेणू भाटिया की ओर से नर्सिंग आफिसर्स पर रविवार को की गई टिप्पणी से देशभर के नर्सिंग आफिसर्स विरोध में उतर आए थे। कुरुक्षेत्र अस्पताल के नर्सिंग स्टाफ ने सोमवार को दो घंटे हड़ताल कर नारेबाजी की थी। हरियाणा नर्सिंग ऑफिसर्स वेलफेयर एसोसिएशन ने मंगलवार को 10 से 12 बजे तक पेन डाउन स्ट्राइक की। रेणू भाटिया का राजनीतिक सफर वर्ष 2000 में फरीदाबाद में भाजपा टिकट पर पार्षद चुनाव जीती और डिप्टी मेयर भी बनीं। 2010 में पार्षद चुनाव में हार झेलनी पड़ी। हरियाणा भाजपा में प्रदेश प्रवक्ता के पद पर रही। वर्ष 2017 में मनोहर लाल सरकार में महिला आयोग की सदस्य बनीं। मनोहर सरकार ने 19 जनवरी 2022 को महिला आयोग की चेयरपर्सन बनाया। यूं चला घटनाक्रम 29 मई को नाबालिग से दुष्कर्म हुआ। 31 मई को आरोपित डॉक्टर के खिलाफ केस दर्ज हुआ। 1 जून को डॉक्टर की गिरफ्तारी हुई। 6 जून को राज्य महिला आयोग ने अस्पताल प्रबंधन को नोटिस जारी किया। 7 जून को राज्य महिला आयोग अध्यक्ष रेनू भाटिया ने अस्पताल का दौरा किया। 8 जून को कुरुक्षेत्र में नर्सों ने मोर्चा खोला और प्रदर्शन किया। 9 जून को सुबह प्रदेश भर में नर्सिंग ऑफसर्स की 2 घंटे की पेन डाउन स्ट्राइक। 9 जून रात को रेणू भाटिया का इस्तीफा। यह की थी टिप्पणी चेयरपर्सन रेणू भाटिया ने रविवार को निरीक्षण के दौरान खड़ी एक स्टाफ से पूछा था कि क्या आपकी बेटी है। उन्होंने हां कहा तो चेयरपर्सन बोलीं कि उसे किसी अनजान व्यक्ति के साथ अकेला छोड़ सकती है क्या?

नर्सिंग कर्मियों में आक्रोश, रेणू भाटिया को पद से हटाने की मांग; हरियाणा में कामकाज प्रभावित

कुरुक्षेत्र. हरियाणा महिला आयोग की चेयरपर्सन रेणू भाटिया की ओर से नर्सिंग ऑफिसर्स पर की गई टिप्पणी से देशभर के नर्सिंग ऑफिसर्स विरोध में उतर आए हैं। कुरुक्षेत्र अस्पताल के नर्सिंग स्टाफ ने सोमवार को दो घंटे हड़ताल कर नारेबाजी की। हरियाणा नर्सिंग ऑफिसर्स वेलफेयर एसोसिएशन की प्रधान विनीता कुमारी ने मंगलवार से विरोधस्वरूप प्रदेश में 10 से 12 बजे तक पेन डाउन स्ट्राइक का आह्वान कर दिया है। रोहतक पीजीआइएमएस की ओर से दो दिनों तक नर्सिंग स्टाफ द्वारा काले बिल्ले लगाकर शांतिपूर्वक प्रदर्शन करने का एलान किया गया है। पद से हटाने की मांग जारी साथ ही ऑल इंडिया गवर्नमेंट नर्सेज फेडरेशन ने मुख्यमंत्री नायब सिंह सैनी को पत्र लिख चेयरपर्सन को हटाने और केस दर्ज करने का अनुरोध किया है। चेयरपर्सन रेणू भाटिया रविवार को डॉक्टर द्वारा नाबालिग से दुष्कर्म करने के मामले में पीड़िता से मिलने एलएनजेपी अस्पताल पहुंची थीं। उन्होंने कहा था कि ऐसे चिकित्सक जिस पर पहले भी आरोप लगे हों, उसके पास नाबालिग को अकेला क्यों छोड़ा गया। उन्होंने नर्सिंग स्टाफ पर सवाल उठाए थे। ऑल इंडिया गवर्नमेंट नर्सेज फेडरेशन की राष्ट्रीय अध्यक्ष रिंकी डांग ने पत्र में कहा कि एलएनजेपी अस्पताल में चिकित्सक पर दुष्कर्म के आरोप हैं। चिकित्सक पर आरोप है कि उसने महिला मरीज की जांच के दौरान महिला अटेंडेंट या किसी दूसरे हेल्थकेयर प्रोफेशनल की मौजूदगी सहित तय प्रोटोकाल का पालन नहीं किया। 'तुरंत पद से हटाया जाए' नर्सिंग प्रोफेशन पर गलत, बेबुनियाद और सम्मान को ठेस पहुंचाने वाली टिप्पणी की थी। इससे नर्सों की भावनाओं को ठेस पहुंची है। नर्सिंग समुदाय ने नर्सों के सम्मान की रक्षा और न्याय की मांग को लेकर आंदोलन शुरू कर दिए हैं। उन्होंने मांग की कि चेयरपर्सन रेणू भाटिया को तुरंत पद से हटाया जाए।