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प्रवासी पक्षियों पर रहेगी स्मार्ट नजर: सुल्तानपुर में AI कैमरे और ड्रोन करेंगे निगरानी

चंडीगढ़  सुल्तानपुर राष्ट्रीय उद्यान में अब कृत्रिम बुद्धिमता (एआइ) और ड्रोन के माध्यम से पक्षियों की गणना होगी। पहली बार डिजिटल रिकार्ड तैयार किया जाएगा कि आगामी सीजन में कितने प्रवासी पक्षी आए, कब पहुंचे और किन हिस्सों में रुके। साथ ही पता लगाया जाएगा कि कितने समय तक प्रवासी पक्षी रहे और पर्यावरणीय बदलावों का उनकी गतिविधियों पर क्या असर पड़ा। गुरुग्राम जिले में फरुखनगर के पास स्थित सुल्तानपुर राष्ट्रीय उद्यान में अभी तक पक्षियों की गणना प्रत्यक्ष अवलोकन पर आधारित रही है। इसमें पक्षियों की मौजूदगी का केवल एक समय का चित्र सामने आता था। जलभराव, दलदली हिस्से और संवेदनशील क्षेत्र कई बार प्रत्यक्ष गणना को सीमित कर देते हैं। निगरानी टावरों पर लगाए गए एआई आधारित कैमरे नई व्यवस्था में ड्रोन उन हिस्सों का सर्वे भी करेंगे जहां सामान्य टीमें नहीं पहुंच पातीं। इससे पक्षियों की गतिविधि का ज्यादा व्यापक और सटीक रिकार्ड तैयार होने की उम्मीद है। ड्रोन से मिलने वाली तस्वीरें और वीडियो एआइ विश्लेषण के साथ जोड़कर गणना को अधिक विश्वसनीय बनाने की योजना है। उद्यान में दो स्थानों पर बने निगरानी टावरों पर एआइ आधारित कैमरे लगाए जा रहे हैं, जो पार्क की झीलों, जलभराव वाले क्षेत्रों और आसपास के खुले भूभाग को लगातार रिकार्ड करेंगे। इससे पूरे मौसम का व्यावहारिक डेटा तैयार होगा, जिससे पता लगेगा कि कौन सी प्रजाति किस समय सबसे ज्यादा सक्रिय रही, किस हिस्से में आवाजाही बढ़ी या घटी और किन इलाकों का उपयोग कम हुआ। इन कामों में एआई से मिलेगी मदद एआइ सिस्टम दुर्लभ और संवेदनशील प्रजातियों की पहचान के साथ उनके व्यवहार और आवास में बदलाव के संकेत भी रिकार्ड करेगा। देखा जाएगा कि जल क्षेत्र कितना बदला, वनस्पति की स्थिति कैसी रही और किस हिस्से में पक्षियों की गतिविधि कम या ज्यादा हुई। अक्टूबर से शुरू होने वाली डिजिटल निगरानी से यह समझने में मदद मिलेगी कि बदलता मौसम, मानसून में देरी, गर्मी-सर्दी, सिकुड़ते वेटलैंड और बढ़ती मानवीय गतिविधियां प्रवासी पक्षियों को किस तरह प्रभावित कर रही हैं। इसके आधार पर भविष्य में पानी प्रबंधन, वनस्पति नियंत्रण, संवेदनशील क्षेत्रों में आगंतुकों की आवाजाही और संरक्षण की रणनीति तय की जा सकेगी। लगातार बदल रही पक्षियों की संख्या सुल्तानपुर में हर साल 250 से अधिक प्रजातियों के पक्षी होते हैं, जिनमें 100 से ज्यादा प्रवासी प्रजातियां शामिल रहती हैं। हाल के वर्षों के आंकड़े दिखाते हैं कि पक्षियों की संख्या और प्रजातियों की संरचना लगातार बदल रही है। 2025 में यहां 48 प्रजातियों के 2,593 प्रवासी पक्षी दर्ज किए गए, जबकि 2024 में 43 प्रजातियों के 2686 और 2023 में 61 प्रजातियों के 6,036 पक्षी दर्ज किए गए थे।

हाई कोर्ट ने दिए निर्देश, MPHW भर्ती में अनुभव अंक जोड़कर तैयार की जाए नई मेरिट लिस्ट

चंडीगढ़. पंजाब एवं हरियाणा हाई कोर्ट ने हरियाणा में मल्टी-पर्पज हेल्थ वर्कर (पुरुष) भर्ती से जुड़े महत्वपूर्ण मामले में स्पष्ट किया है कि राष्ट्रीय स्वास्थ्य मिशन (एनएचएम) के तहत कार्यरत कर्मचारियों के अनुभव को केवल पदनाम के आधार पर खारिज नहीं किया जा सकता। अदालत ने कहा कि सीनियर ट्रीटमेंट सुपरवाइजर (एसटीएस) और पैरा मेडिकल वर्कर (पीएमडब्ल्यू) के रूप में प्राप्त अनुभव को अनुभव अंक देने से इनकार करना मनमाना और भेदभावपूर्ण है। इसके साथ ही अदालत ने संबंधित अधिकारियों को अभ्यर्थियों के अनुभव अंक जोड़कर उनकी मेरिट स्थिति दोबारा तय करने का निर्देश दिया है। जस्टिस संदीप मौदगिल ने वर्ष 2015 के विज्ञापन के तहत एमपीएचडब्ल्यू (पुरुष) पदों की भर्ती से संबंधित याचिकाओं का निपटारा करते हुए यह आदेश पारित किया। याचिकाकर्ताओं का कहना था कि उन्होंने एनएचएम की विभिन्न योजनाओं के तहत कार्य किया था और हरियाणा कर्मचारी चयन आयोग के समक्ष अनुभव प्रमाणपत्र भी प्रस्तुत किए थे, लेकिन उन्हें चयन मानदंडों के अनुसार अनुभव अंक नहीं दिए गए। उनका तर्क था कि यदि अनुभव अंक जोड़ दिए जाते तो वे अपने-अपने वर्ग में चयन क्षेत्र में आ जाते।राज्य सरकार और आयोग ने अदालत को बताया कि अनुभव अंक केवल उसी क्षमता में कार्य करने वाले उम्मीदवारों को दिए जा सकते हैं, जिन्होंने आरसीएच, एनआरएचएम, एनएचएम परियोजनाओं अथवा स्वास्थ्य विभाग में समान पद पर कार्य किया हो। चूंकि याचिकाकर्ता एमपीएचडब्ल्यू (पुरुष) के बजाय एसटीएस, डीआर-टीबी/एचआईवी समन्वयक, टीबीएचवी अथवा पीएमडब्ल्यू पदों पर कार्यरत रहे थे, इसलिए उन्हें अनुभव अंक देने का प्रश्न नहीं उठता। अदालत ने इस दलील को स्वीकार नहीं किया। न्यायमूर्ति मौदगिल ने कहा कि इसी भर्ती प्रक्रिया में अन्य अभ्यर्थियों को एसटीएस के अनुभव के आधार पर अंक दिए जा चुके हैं। ऐसे में समान परिस्थितियों वाले याचिकाकर्ताओं को इससे वंचित रखना तर्कसंगत नहीं है। अदालत ने स्वास्थ्य विभाग की 12 अगस्त 2024, 29 नवंबर 2024 और 31 जनवरी 2025 की स्पष्टीकरण रिपोर्टों का भी उल्लेख किया, जिनमें एसटीएस और पीएमडब्ल्यू के कार्यों को एमपीएचडब्ल्यू (पुरुष) के दायित्वों के समान बताया गया था। हाई कोर्ट ने कहा कि जब स्वयं विभाग ने कार्यों और जिम्मेदारियों में समानता स्वीकार कर ली है तो केवल पदनाम के आधार पर अनुभव को अस्वीकार नहीं किया जा सकता। अदालत ने यह भी माना कि एसटीएस पद के लिए निर्धारित शैक्षणिक योग्यता एमपीएचडब्ल्यू (पुरुष) से अधिक है और दोनों पदों की जिम्मेदारियां काफी हद तक समान हैं। अदालत ने 5 जून 2019 के परिणाम को याचिकाकर्ताओं के अनुभव अंक नहीं देने की सीमा तक निरस्त करते हुए निर्देश दिया कि उनके एनएचएम अनुभव को जोड़कर मेरिट सूची का पुनर्गणना किया जाए। यदि संशोधित मेरिट में याचिकाकर्ता चयन क्षेत्र में आते हैं तो उन्हें नियुक्ति सहित सभी परिणामी लाभ दिए जाएं। पूरी प्रक्रिया दो माह के भीतर पूरी करने के आदेश दिए गए हैं।

तथ्य छिपाने पर पंजाब-हरियाणा हाई कोर्ट सख्त, जमानत याचिका पर लगा झटका

चंडीगढ़  पंजाब एवं हरियाणा हाई कोर्ट ने करनाल के निसिंग क्षेत्र में 21 वर्षीय युवती से कथित छेड़छाड़ और पीछा करने के मामले में आरोपित की अग्रिम जमानत याचिका खारिज कर दी अदालत ने पाया कि आरोपित ने एफआईआर के अनुवादित संस्करण में एक महत्वपूर्ण आरोप को जानबूझकर हटाकर अदालत के समक्ष अधूरी और भ्रामक तस्वीर पेश की। हाई कोर्ट ने स्पष्ट किया कि ऐसी तथ्यात्मक जानकारी छिपाने वाला व्यक्ति अग्रिम जमानत जैसी विवेकाधीन राहत पाने का हकदार नहीं हो सकता। जस्टिस संदीप मौदगिल ने अपने आदेश में कहा कि यह कोई मामूली भाषाई त्रुटि नहीं, बल्कि अभियोजन के पूरे मामले की नींव से जुड़ा गंभीर आरोप है। अदालत के अनुसार आरोपी ने रिकार्ड का गलत प्रस्तुतीकरण किया और महत्वपूर्ण तथ्य छिपाए, जिससे उसकी नीयत पर सवाल खड़े होते हैं। मामले के अनुसार निसिंग थाना पुलिस ने 14 मई को भारतीय न्याय संहिता की विभिन्न धाराओं के तहत एफआईआर दर्ज की थी। शिकायतकर्ता युवती ने आरोप लगाया था कि 12 मई को वह गांव के मंदिर जा रही थी, तभी आरोपित उसका पीछा करते हुए आया। उसने पीछे से उसकी चप्पल पर पैर रखा, कंधे और निजी अंगों को छुआ तथा विरोध करने पर अभद्र भाषा का इस्तेमाल किया। शिकायत में यह भी कहा गया कि आरोपित काफी समय से उसका पीछा कर रहा था, अशोभनीय इशारे करता था और बाद में उसके घर के आसपास भी घूमता रहा, जिससे वह भयभीत थी। युवती का बयान बाद में न्यायिक मजिस्ट्रेट के समक्ष भारतीय नागरिक सुरक्षा संहिता की धारा 183 के तहत भी दर्ज किया गया, जिसमें उसने अपने आरोप दोहराए।दूसरी ओर आरोपित ने अदालत में दलील दी कि एफआईआर दो दिन की देरी से दर्ज हुई और यह उसे फंसाने के उद्देश्य से दर्ज कराया गया एक जवाबी कदम है। उसने दोनों परिवारों के बीच पुरानी रंजिश का हवाला देते हुए खुद को निर्दोष बताया।हालांकि सुनवाई के दौरान हाई कोर्ट ने पाया कि आरोपित द्वारा पेश किए गए एफआईआर के अंग्रेजी अनुवाद में निजी अंगों को छूने संबंधी आरोप को हटा दिया गया था। अनुवाद में केवल कंधा छूने और अन्य सामान्य आरोपों का उल्लेख किया गया। अदालत ने कहा कि यदि पूरा आरोप निष्पक्ष रूप से सामने रखा जाता तो स्पष्ट होता कि मामला केवल पीछा करने या अभद्र टिप्पणी तक सीमित नहीं है, बल्कि इसमें निजी अंगों से शारीरिक छेड़छाड़ का विशिष्ट आरोप भी शामिल है। अदालत ने कहा कि अग्रिम जमानत मांगने वाले व्यक्ति का दायित्व है कि वह सभी महत्वपूर्ण तथ्यों का पूर्ण और निष्पक्ष खुलासा करे। चूंकि आरोपित ने ऐसा नहीं किया और रिकार्ड के महत्वपूर्ण हिस्से को दबाया, इसलिए वह अदालत के समक्ष साफ हाथों से नहीं आया। इसी आधार पर हाई कोर्ट ने उसकी अग्रिम जमानत याचिका खारिज कर दी।

डॉ. कीर्ति की दोहरी उपलब्धि, NEET PG में टॉप और सेना में कैप्टन बनकर बढ़ाया रोहतक का मान

रोहतक. कभी भारतीय सेना के अधिकारियों के कंधों पर चमकते सितारों को देखकर उनके जैसी वर्दी पहनने का सपना देखने वाली गांव गरनावठी की बेटी डा. कीर्ति बड़क आज खुद भारतीय सेना में कैप्टन बन गई है। खास बात यह है कि कीर्ति बड़क गांव की पहली बेटी के रूप में कैप्टन बनी है। किसान परिवार से संबंध रखने वाली कीर्ति के पिता महावीर खेती करते हैं, जबकि उनकी माता सुनीता रानी गृहिणी है। बचपन से ही कीर्ति का सपना डाक्टर बनने का था। बता दें कीर्ति ने कक्षा 11वीं व 12वीं की पढ़ाई रोहतक के सरकारी स्कूल से की है। वहीं इसके बाद उन्होंने नीट परीक्षा उत्तीर्ण कर मेडिकल क्षेत्र में कदम रखा, लेकिन इसी दौरान उनकी जिंदगी ने नया मोड़ लिया। कीर्ति ने बताया कि इस दौरान उन्होंने मिलिट्री नर्सिंग सर्विस (एमएनएस) की परीक्षा भी पास की थी। किस वजह से सेना में गईं कीर्ति? इस प्रक्रिया के दौरान उन्हें भारतीय सेना के अधिकारियों और जवानों के साथ संवाद करने का अवसर मिला और सेना के अधिकारियों के कंधों पर लगे सितारों ने उन्हें आकर्षित किया। सेना का अनुशासन, सेवा भाव और अधिकारियों के कंधों पर लगे सितारे उन्हें इतने प्रभावित कर गए कि उन्होंने उसी समय तय कर लिया कि एक दिन वह भी सेना में अधिकारी बनेंगी। हालांकि इसके बाद उन्होंने एमएनएस के माध्यम से नर्सिंग क्षेत्र में जाने के बजाय केएमसी मणिपाल से एमबीबीएस की पढ़ाई पूरी की, लेकिन डाक्टर बनने के बाद भी उनका लक्ष्य सेना की वर्दी पहनना ही रहा। इंटर्नशिप के साथ-साथ उन्होंने आर्मी मेडिकल कोर शार्ट सर्विस कमीशन की तैयारी शुरू की और अपने सपने को साकार करने के लिए लगातार मेहनत की। उन्होंने नीट पीजी में आल इंडिया 65वीं रैंक हासिल की। डॉक्टर बनना उनके जीवन का पहला सपना था इसके बाद उनका चयन भारतीय सेना में हुआ। कीर्ति का कहना है कि डॉक्टर बनना उनके जीवन का पहला सपना था, लेकिन भारतीय सेना में अधिकारी बनकर देश के सैनिकों की सेवा करना उनका सबसे बड़ा लक्ष्य था। वह चाहती है कि सीमाओं पर देश की रक्षा करने वाले जवानों को बेहतर चिकित्सा सेवाएं उपलब्ध करवाने में अपना योगदान दे सकें। बता दें कि उनके चचेरे चाचा भारतीय सेना में अपनी सेवाएं दे चुके है। जबकि दादा पंजाब पुलिस में अपनी सेवाएं दे चुके है।

भूजल संकट बढ़ाने में 45 फैक्ट्रियां जिम्मेदार! नारनौल में रेन वाटर हार्वेस्टिंग की अनदेखी

नारनौल. भूजल स्तर में लगातार गिरावट को देखते हुए सरकार वर्षा जल संचयन को बढ़ावा देने के लिए करोड़ों रुपये खर्च कर रही है। औद्योगिक क्षेत्रों, संस्थानों और बड़े भवनों में रेन वाटर हार्वेस्टिंग सिस्टम स्थापित करना अनिवार्य किया गया है, लेकिन नारनौल का एकमात्र औद्योगिक क्षेत्र निजामपुर रोड इन दावों की जमीनी हकीकत बयान कर रहा है। नारनौल के औद्योगिक क्षेत्र में कुल 45 छोटी फैक्ट्रियां संचालित हैं। करीब दो दशक पहले विकसित किया गया यह औद्योगिक क्षेत्र आज भी बुनियादी सुविधाओं के लिए संघर्ष कर रहा है। यहां कई स्थानों पर जल निकासी व्यवस्था कमजोर है। वर्षा के दौरान सड़कों पर पानी जमा होना आम बात है। ऐसे में सवाल उठता है कि जब औद्योगिक क्षेत्र में ड्रेनेज व्यवस्था ही पूरी तरह व्यवस्थित नहीं है तो वर्षा जल संचयन के नियमों का पालन किस स्तर तक हो रहा होगा। कई इकाइयों में रेन वाटर हार्वेस्टिंग से संबंधित कोई स्पष्ट संरचना दिखाई नहीं देती। जल संचयन प्रणाली स्थापित करना आवश्यक अधिकांश वर्षा जल सीधे सड़कों, खाली भूखंडों और नालियों में बह जाता है। जबकि हरियाणा सरकार और संबंधित विभागों के दिशा-निर्देशों के अनुसार निर्धारित क्षेत्रफल से अधिक भूखंडों पर स्थापित औद्योगिक इकाइयों, संस्थानों और व्यावसायिक भवनों में वर्षा जल संचयन प्रणाली स्थापित करना आवश्यक है। इसका उद्देश्य वर्षा के पानी को सीधे जमीन में पहुंचाकर भूजल स्तर को बढ़ाना है। कई मामलों में भवन नक्शा स्वीकृति और अन्य अनुमतियों के दौरान भी रेन वाटर हार्वेस्टिंग की शर्त शामिल रहती है। भूजल संकट वाले जिले में बढ़ रही चिंता महेंद्रगढ़ जिला लंबे समय से गिरते भूजल स्तर की चुनौती का सामना कर रहा है। कई क्षेत्रों में भूजल दोहन लगातार बढ़ रहा है। विशेषज्ञों का कहना है कि यदि औद्योगिक क्षेत्रों में प्रभावी वर्षा जल संचयन व्यवस्था विकसित की जाए तो हर वर्ष लाखों लीटर पानी भूगर्भ में पहुंचाया जा सकता है। औद्योगिक क्षेत्र से जुड़े लोगों का कहना है कि क्षेत्र में कई मूलभूत समस्याएं वर्षों से बनी हुई हैं। जगह-जगह टूटी सड़कें, जल निकासी की समस्या और अधोसंरचना की कमी के बीच उद्योगों को संचालित करना आसान नहीं है। उनका तर्क है कि सरकार को वर्षा जल संचयन के नियमों के साथ-साथ औद्योगिक क्षेत्रों की आधारभूत सुविधाओं को भी मजबूत करना चाहिए। जल संग्रहण व संरक्षण की अनूठी मिसाल उधर, कनीना में जल संकट से उबरने के लिए गांव रामबास के युवाओं ने वर्षा जल संग्रहण एवं संरक्षण का एक प्रेरणादायक उदाहरण प्रस्तुत किया है। युवा पर्यावरण प्रेमी मनोज कुमार रामबास के नेतृत्व में गांव के युवाओं ने मिलकर वर्ष 2022 में एक ऐसे तालाब का निर्माण किया, जिसने न केवल वर्षा जल को संरक्षित किया बल्कि आसपास की गोचर भूमि को भी हरियाली से आच्छादित कर दिया। 35 फीट लंबा और 6 फीट गहरा तालाब तैयार मनोज कुमार ने बताया कि लगातार गिरते भूजल स्तर और पानी की बढ़ती समस्या को देखते हुए उनके मन में वर्षा जल को संरक्षित कर उसका उपयोग पौधारोपण एवं पर्यावरण संरक्षण के लिए करने का विचार आया। इसके बाद गांव के युवाओं ने श्रमदान करते हुए लगभग 35 फीट लंबा और 6 फीट गहरा तालाब तैयार किया। तालाब का निर्माण कम लागत में करने के उद्देश्य से बेकार पड़े कंक्रीट, पुरानी ईंटों तथा अन्य अनुपयोगी निर्माण सामग्री का उपयोग किया गया। पर्यावरण संरक्षण में भी महत्वपूर्ण भूमिका निभा रहे तालाब तक वर्षा जल पहुंचाने के लिए विशेष रूप से जल निकासी मार्ग बनाए गए ताकि बारिश का अधिकतम पानी तालाब में एकत्रित हो सके। बरसात के मौसम में यह तालाब भर जाता है और इसमें संचित पानी लगभग तीन से चार महीने तक बना रहता है। इसी जल का उपयोग आसपास लगाए गए पौधों की सिंचाई के लिए किया जाता है। तालाब के चारों ओर सुरक्षा के लिए फेंसिंग की गई तथा पर्यावरण संरक्षण के उद्देश्य से बेलपत्र, जामुन, लेहसुआ, नीम, कचनार, अमलतास, करोंदा, पापड़ी और अर्जुन सहित अनेक प्रजातियों के पौधे लगाए गए। आज ये पौधे वृक्ष बनने की ओर अग्रसर हैं और क्षेत्र की सुंदरता बढ़ाने के साथ-साथ पर्यावरण संरक्षण में भी महत्वपूर्ण भूमिका निभा रहे हैं। जल संकट जैसी बड़ी समस्या का समाधान स्थानीय स्तर पर स्थानीय लोगों का कहना है कि इस पहल से आसपास की गोचर भूमि में हरियाली बढ़ी है और अनेक पौधे गर्मी के मौसम में भी सुरक्षित रह पाए हैं। वर्षा जल संरक्षण का यह माडल ग्रामीण क्षेत्रों के लिए प्रेरणा का स्रोत बन रहा है। सीमित संसाधनों में युवाओं द्वारा किया गया यह कार्य दर्शाता है कि यदि सामूहिक प्रयास और सकारात्मक सोच हो तो जल संकट जैसी बड़ी समस्या का समाधान स्थानीय स्तर पर भी संभव है। दूसरे गांव के लिए बनी प्रेरणा पर्यावरण प्रेमी मनोज कुमार ने कहा कि जल संरक्षण केवल सरकार की जिम्मेदारी नहीं, बल्कि प्रत्येक नागरिक का कर्तव्य है। यदि हर गांव में वर्षा जल संग्रहण के ऐसे छोटे-छोटे प्रयास किए जाएं तो भूजल स्तर सुधारने के साथ-साथ पर्यावरण संरक्षण को भी नई दिशा मिल सकती है। उन्होंने युवाओं से अधिक से अधिक पौधारोपण करने और वर्षा जल को व्यर्थ बहने से रोकने का आह्वान किया। गांव रामबास की यह पहल आज जल संरक्षण, पर्यावरण संवर्धन और सामुदायिक भागीदारी का एक उत्कृष्ट उदाहरण बनकर उभर रही है, जिससे अन्य गांव भी प्रेरणा ले रहे हैं।

सुषमा गुप्ता की छुट्टी, हरियाणा बाल कल्याण परिषद में बड़ा प्रशासनिक बदलाव

चंडीगढ़. हरियाणा राज्य बाल कल्याण परिषद में बड़ा प्रशासनिक बदलाव किया गया है। परिषद की मानद महासचिव सुषमा गुप्ता को उनके पद से हटा दिया गया है। इस संबंध में हरियाणा के राज्यपाल प्रो. असीम कुमार घोष की ओर से आदेश जारी किए गए हैं। राजभवन से जारी आदेशों के तहत सुषमा गुप्ता की मानद महासचिव पद पर नियुक्ति समाप्त कर दी गई है। इस फैसले को परिषद और सामाजिक क्षेत्र से जुड़े हलकों में महत्वपूर्ण माना जा रहा है। राजभवन की बड़ी कार्रवाई सूत्रों के अनुसार, यह फैसला सीधे राज्यपाल सचिवालय के स्तर पर लिया गया है। आदेश जारी होने के बाद अब हरियाणा राज्य बाल कल्याण परिषद के प्रशासनिक ढांचे में नए सिरे से जिम्मेदारियों का निर्धारण किया जाएगा। हालांकि, जारी आदेशों में सुषमा गुप्ता को हटाने के कारणों का विस्तृत उल्लेख नहीं किया गया है, लेकिन राजभवन की ओर से की गई यह कार्रवाई राजनीतिक और प्रशासनिक दोनों स्तरों पर चर्चा का विषय बन गई है। परिषद में नई नियुक्ति पर नजर मानद महासचिव का पद परिषद के संचालन और विभिन्न बाल कल्याण योजनाओं के समन्वय में अहम माना जाता है। ऐसे में अब नजर इस बात पर है कि सरकार और राजभवन की ओर से इस पद पर अगली नियुक्ति कब और किसे दी जाती है। हरियाणा राज्य बाल कल्याण परिषद राज्य में बच्चों के कल्याण, शिक्षा, संरक्षण और सामाजिक विकास से जुड़े कार्यक्रमों का संचालन करती है। परिषद के मानद महासचिव की भूमिका योजनाओं के क्रियान्वयन, संस्थागत समन्वय और प्रशासनिक निर्णयों में महत्वपूर्ण मानी जाती है।

रोहतक में डॉक्टरों और शिक्षक से लंबी पूछताछ, NEET मामले में नहीं मिले ठोस सबूत

रोहतक  नीट परीक्षा पेपर संबंधित सूचना पर सोनीपत एसटीएफ ने रोहतक के दो चिकित्सकों और एक शिक्षक से करीब 13 घंटे तक गहन पूछताछ की। हालांकि प्रारंभिक जांच में लोक परीक्षा (अनुचित साधनों की रोकथाम) अधिनियम-2024 के उल्लंघन से संबंधित कोई ठोस साक्ष्य नहीं मिलने पर तीनों को छोड़ दिया गया है। जानकारी के अनुसार एसटीएफ को सूचना मिली थी कि नीट परीक्षा के नाम पर प्रश्नपत्र बेचने अथवा अभ्यर्थियों को अनुचित लाभ पहुंचाने की योजना बनाई जा रही है। इसी सूचना के आधार पर टीम ने रोहतक में छापेमारी कर एक निजी अस्पताल से जुड़े दो चिकित्सकों और एक शिक्षक को पकड़ कर पूछताछ की। हालांकि मामला अस्पताल में लेन-देन से संबंधित बताया गया है। पूछताछ के दौरान एसटीएफ ने तीनों के मोबाइल फोन और अन्य इलेक्ट्रानिक उपकरणों की जांच की। जांच एजेंसियों को फोन में परीक्षा की तैयारी से जुड़े प्रश्न और अध्ययन सामग्री तो मिली, लेकिन अब तक ऐसा कोई दस्तावेज या प्रश्नपत्र बरामद नहीं हुआ है जिसे नीट परीक्षा का वास्तविक पेपर माना जा सके। डीएसपी सांपला राकेश कुमार ने बताया कि अभी तक की जांच में किसी प्रकार का आपराधिक मामला दर्ज करने योग्य साक्ष्य सामने नहीं आया है। इसलिए फिलहाल कोई एफआइआर दर्ज नहीं की गई है। हालांकि मामले की जांच अगले 14 दिन तक जारी रहेगी और संबंधित व्यक्तियों को जांच में सहयोग करने के निर्देश दिए गए हैं। मामले के सभी पहलुओं की गहनता से जांच की जा रही है और आवश्यकता पड़ने पर आगे भी पूछताछ की जाएगी।  

NEET परीक्षा से जुड़े इनपुट पर STF का एक्शन, रोहतक में दो डॉक्टर समेत तीन लोग हिरासत में

रोहतक. नीट परीक्षा पेपर संबंधित सूचना पर सोनीपत एसटीएफ ने रोहतक के दो चिकित्सकों और एक शिक्षक से करीब 13 घंटे तक गहन पूछताछ की। हालांकि प्रारंभिक जांच में लोक परीक्षा (अनुचित साधनों की रोकथाम) अधिनियम-2024 के उल्लंघन से संबंधित कोई ठोस साक्ष्य नहीं मिलने पर तीनों को छोड़ दिया गया है। जानकारी के अनुसार एसटीएफ को सूचना मिली थी कि नीट परीक्षा के नाम पर प्रश्नपत्र बेचने अथवा अभ्यर्थियों को अनुचित लाभ पहुंचाने की योजना बनाई जा रही है। इसी सूचना के आधार पर टीम ने रोहतक में छापेमारी कर एक निजी अस्पताल से जुड़े दो चिकित्सकों और एक शिक्षक को पकड़ कर पूछताछ की। हालांकि मामला अस्पताल में लेन-देन से संबंधित बताया गया है। पूछताछ के दौरान एसटीएफ ने तीनों के मोबाइल फोन और अन्य इलेक्ट्रानिक उपकरणों की जांच की। जांच एजेंसियों को फोन में परीक्षा की तैयारी से जुड़े प्रश्न और अध्ययन सामग्री तो मिली, लेकिन अब तक ऐसा कोई दस्तावेज या प्रश्नपत्र बरामद नहीं हुआ है जिसे नीट परीक्षा का वास्तविक पेपर माना जा सके। डीएसपी सांपला राकेश कुमार ने बताया कि अभी तक की जांच में किसी प्रकार का आपराधिक मामला दर्ज करने योग्य साक्ष्य सामने नहीं आया है। इसलिए फिलहाल कोई एफआइआर दर्ज नहीं की गई है। हालांकि मामले की जांच अगले 14 दिन तक जारी रहेगी और संबंधित व्यक्तियों को जांच में सहयोग करने के निर्देश दिए गए हैं। मामले के सभी पहलुओं की गहनता से जांच की जा रही है और आवश्यकता पड़ने पर आगे भी पूछताछ की जाएगी।

हरियाणा कैबिनेट बैठक आज: नई शिक्षक नीति और कई महत्वपूर्ण प्रस्तावों पर होगा फैसला

चंडीगढ़. हरियाणा मंत्रिपरिषद की बैठक सोमवार को होगी, जिसमें कई अहम फैसलों पर मुहर लगेगी। मुख्यमंत्री नायब सिंह सैनी की अध्यक्षता में होने वाली इस बैठक में माध्यमिक शिक्षा विभाग द्वारा तैयार नई शिक्षक नीति को स्वीकृति दी जा सकती है। इसके अलावा विभिन्न विभागों ने भी कुछ नीतियों में संशोधन का प्रस्ताव दिया है, जिस पर चर्चा होगी। पूर्व निर्धारित कार्यक्रम के अनुसार यह बैठक हरियाणा सचिवालय में सुबह 11 बजे होनी थी, लेकिन अचानक से समय में परिवर्तन कर दिया गया है। अब यह बैठक सुबह दस बजे होगी, जिसके लिए सभी मंत्रियों और प्रशासनिक सचिवों को सूचित कर दिया गया है। बैठक में करीब एक दर्जन प्रस्तावों पर विचार किया जाएगा। जिनमें विकास परियोजनाओं, भर्ती प्रक्रियाओं, कृषि, उद्योग तथा बुनियादी ढांचा विकास से जुड़े विषय शामिल हैं। इसके अलावा कुछ सेवानिवृत्त अधिकारियों को भी पुनर्नियुक्ति देने के प्रस्ताव पर चर्चा होगी।

फतेहाबाद के रतिया शहर के लिए 1667 हेक्टेयर में विकास योजना, आबादी 2 लाख पहुंचने का अनुमान

चंडीगढ़  हरियाणा सरकार ने फतेहाबाद जिले के रतिया शहर के लिए वर्ष 2041 तक का नया विकास खाका जारी कर दिया है। प्रस्तावित प्रारूप विकास योजना के तहत रतिया को आने वाले वर्षों की आबादी, आर्थिक गतिविधियों और शहरी जरूरतों को ध्यान में रखते हुए नए स्वरूप में विकसित करने की तैयारी की गई है। सरकार का अनुमान है कि वर्ष 2041 तक रतिया की आबादी दो लाख के करीब पहुंच सकती है, जिसके अनुरूप शहर के विस्तार, सड़क नेटवर्क, सार्वजनिक सुविधाओं और औद्योगिक विकास की रूपरेखा तैयार की गई है। नोटिफिकेशन के अनुसार, इस योजना पर लोगों से आपत्तियां और सुझाव भी मांगे गए हैं। तय अवधि के भीतर प्राप्त सुझावों पर विचार करने के बाद अंतिम स्वरूप तय किया जाएगा। 2011 की तुलना में कई गुना आबादी का अनुमान योजना दस्तावेज के अनुसार वर्ष 2011 में रतिया की आबादी 37,152 दर्ज की गई थी। प्रक्षेपण के आधार पर 2021 में यह 65 हजार से अधिक और वर्ष 2041 तक करीब 2.02 लाख पहुंचने का अनुमान लगाया गया है। इसी संभावित दबाव को देखते हुए विकास योजना तैयार की गई है। सरकार का मानना है कि कृषि आधारित गतिविधियों, व्यापार और बढ़ती शहरी जरूरतों के कारण आने वाले वर्षों में रतिया का स्वरूप तेजी से बदलेगा। 1667 हेक्टेयर क्षेत्र के हिसाब से होगी प्लानिंग प्रारूप विकास योजना में शहर के लिए कुल 1667 हेक्टेयर क्षेत्र का प्रस्ताव रखा गया है। इसमें सबसे बड़ा हिस्सा आवासीय उपयोग के लिए रखा गया है। सरकार ने 634 हेक्टेयर आवासीय क्षेत्र के लिए, 116 हेक्टेयर वाणिज्यिक, 296 हेक्टेयर औद्योगिक, 193 हेक्टेयर परिवहन व संचार, 122 हेक्टेयर सार्वजनिक उपयोगिताएं, 101 हेक्टेयर सार्वजनिक एवं अर्ध-सार्वजनिक उपयोग तथा 205 हेक्टेयर भूमि खुले स्थान और हरित क्षेत्र के लिए प्रस्तावित की गई है। योजना में सड़क ढांचे को भी विस्तार देने का प्रस्ताव है। शहर के विभिन्न सेक्टरों को जोड़ने के लिए नई परिधीय सड़कें और सेक्टर सड़कें प्रस्तावित की गई हैं। प्रमुख सड़कों के साथ हरित पट्टी और भविष्य की यातायात जरूरतों को ध्यान में रखते हुए चौड़ाई का भी प्रावधान किया गया है। योजना में परिवहन और संचार उपयोग के लिए अलग क्षेत्र आरक्षित किया गया है ताकि बढ़ती आबादी के साथ ट्रैफिक और आवाजाही की चुनौतियों को नियंत्रित किया जा सके। पानी, बिजली और सार्वजनिक सेवाओं का भी रोडमैप दस्तावेज में जल आपूर्ति, सीवरेज, ग्रिड सब-स्टेशन और अन्य सार्वजनिक उपयोगिताओं के लिए भी अलग क्षेत्र प्रस्तावित किए गए हैं। भविष्य की जरूरतों को देखते हुए जलापूर्ति और विद्युत ढांचे को मजबूत करने की दिशा में स्थान आरक्षित किए गए हैं। इसके अलावा शिक्षा, स्वास्थ्य और सार्वजनिक संस्थानों के लिए भी अलग प्रावधान किए गए हैं ताकि शहर का विकास केवल आबादी बढ़ाने तक सीमित न रहे बल्कि सुविधाओं के साथ संतुलित ढंग से आगे बढ़ सके। लोगों से मांगे गए सुझाव सरकार ने स्पष्ट किया है कि यह प्रारूप योजना है और अंतिम अधिसूचना से पहले नागरिक, संस्थाएं और अन्य हितधारक अपने सुझाव और आपत्तियां दे सकेंगे। इन्हें निर्धारित प्रक्रिया के तहत परखा जाएगा। रतिया के लिए जारी यह विकास खाका आने वाले डेढ़ दशक की शहरी दिशा तय करेगा और इससे शहर के नियोजित विस्तार, निवेश तथा बुनियादी ढांचे को नई गति मिलने की उम्मीद जताई जा रही है।