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नारनौल बैठक में लापरवाही पर गिरी गाज, समय पर न पहुंचने पर अधिकारी निलंबित

चंडीगढ़ प्रशासनिक कामकाज में लापरवाही और अनुशासनहीनता को लेकर हरियाणा की स्वास्थ्य मंत्री आरती सिंह राव ने सख्त रुख अपनाया है। नारनौल के पीडब्ल्यूडी रेस्ट हाउस में अधिकारियों की एक अहम बैठक के दौरान मंत्री ने बड़ी कार्रवाई करते हुए जिला विकास एवं पंचायत अधिकारी प्रमोद कुमार को सस्पेंड कर दिया है। क्यों गिरी निलंबन की गाज स्वास्थ्य मंत्री आज नारनौल में जिले के विकास कार्यों और प्रशासनिक कामकाज की समीक्षा के लिए अधिकारियों की बैठक ले रही थीं। डीडीपीओ प्रमोद कुमार पर यह सख्त कार्रवाई मुख्य रूप से दो कारणों से की गई। क्षेत्र में चल रहे विभिन्न पंचायत एवं विकास कार्यों में खामियों और अनियमितताओं की बात सामने आई थी, जिसे लेकर मंत्री नाराज थीं। मंत्री द्वारा बुलाई गई इस महत्वपूर्ण समीक्षा बैठक में सभी प्रमुख अधिकारियों को समय पर उपस्थित होना था, लेकिन डीडीपीओ प्रमोद कुमार बैठक में देरी से पहुंचे। लापरवाही और समय की पाबंदी न होने पर मंत्री ने तुरंत प्रभाव से एक्शन लेते हुए उन्हें निलंबित करने के आदेश दे दिए। इस कार्रवाई से पूरे प्रशासनिक अमले में हड़कंप मच गया है। बैठक में इनकी रही मौजूदगी स्वास्थ्य मंत्री द्वारा ली जा रही इस महत्वपूर्ण बैठक में स्थानीय विधायक ओमप्रकाश यादव, जिले के उपायुक्त सहित प्रशासन के सभी वरिष्ठ अधिकारी मौजूद थे। इस कार्रवाई के माध्यम से मंत्री ने स्पष्ट संदेश दिया है कि जनहित के कार्यों में किसी भी प्रकार की कोताही और अनुशासनहीनता बर्दाश्त नहीं की जाएगी।  

हर घर से उठेगा कचरा! गुरुग्राम के 606 करोड़ रुपये के मेगा टेंडर पर बड़ी बैठक

गुरुग्राम. साइबर सिटी में घर-घर कूड़ा कलेक्शन व्यवस्था को स्थायी और बेहतर बनाने पर मंगलवार को फैसला होगा। नगर निगम गुरुग्राम द्वारा जारी 606 करोड़ रुपये के डोर टू डोर कूड़ा कलेक्शन टेंडर को चंडीगढ़ में होने वाली हाई पावर वर्क्स परचेज कमेटी की बैठक में मंजूरी मिलने की संभावना है। वहीं, मंजूरी मिलने के बाद अगले पांच वर्षों के लिए प्राइवेट एजेंसियों को काम सौंप दिया जाएगा, जिससे शहर में कूड़ा उठान व्यवस्था को मजबूती मिलेगी। जैसे ही बैठक में टेंडर पर मुहर लगेगी। एजेंसियां तीन महीने में काम शुरू कर देगी। नगर निगम क्षेत्र में 14 जून 2024 के बाद से कोई स्थायी एजेंसी कार्यरत नहीं है। पिछले करीब दो वर्षों से कूड़ा कलेक्शन का कार्य अस्थायी व्यवस्था के तहत विभिन्न एजेंसियों के माध्यम से कराया जा रहा है। स्थायी एजेंसी नहीं होने के कारण कई क्षेत्रों में समय पर कूड़ा उठान और निगरानी से जुड़ी समस्याएं सामने आती रही हैं। चार जोन को दो क्लस्टर में बांटा नई व्यवस्था के तहत नगर निगम ने शहर के चारों जोनों को दो अलग-अलग क्लस्टर में विभाजित किया है। जोन-1 और जोन-2 को एक क्लस्टर तथा जोन-3 और जोन-4 को दूसरे क्लस्टर में शामिल किया गया है। पहले क्लस्टर के लिए चार निजी एजेंसियों ने आवेदन किया है, जबकि दूसरे क्लस्टर के लिए दो एजेंसियों ने भागीदारी की है। 606 करोड़ रुपये का है टेंडर नगर निगम ने दोनों क्लस्टरों के लिए कुल 606 करोड़ रुपये का प्रविधान किया है। इसमें जोन-एक और जोन-दो के क्लस्टर के लिए 295 करोड़ रुपये तथा जोन-तीन और जोन-चार के क्लस्टर के लिए 311 करोड़ रुपये निर्धारित किए गए हैं। टेंडर आवंटन के बाद संबंधित एजेंसियां अगले पांच वर्षों तक कूड़ा कलेक्शन का कार्य करेंगी। गीले और सूखे कचरे के अलग संग्रह पर रहेगा जोर नई डोर-टू-डोर कूड़ा कलेक्शन व्यवस्था में स्रोत स्तर पर ही गीले और सूखे कचरे को अलग-अलग एकत्र करने पर विशेष फोकस रहेगा। निगम प्रशासन का मानना है कि इससे कचरा प्रबंधन व्यवस्था अधिक प्रभावी होगी और रीसाइक्लिंग को भी बढ़ावा मिलेगा। हाई पावर कमेटी देगी अंतिम मंजूरी नगर निगम के चीफ इंजीनियर विजय ढाका ने बताया कि मुख्यमंत्री की अध्यक्षता वाली हाई पावर वर्क्स परचेज कमेटी में टेंडर सौंपने पर निर्णय होगा। कमेटी की मंजूरी के बाद चयनित एजेंसियों को कार्य आवंटित कर दिया जाएगा और नई व्यवस्था लागू करने की प्रक्रिया शुरू होगी। तीन महीने के अंदर एजेंसियां काम शुरू करेंगी।

ड्रग तस्करों की जमानत कराने वालों पर भी कार्रवाई की मांग, हरियाणा की महापंचायत का बड़ा फैसला

सिरसा. गांव गोरीवाला में सोमवार को दादा भोमिया महाराज के मंदिर में नशे के विरुद्ध महापंचायत हुई। इसमें निर्णय हुआ कि नशा तस्कर की पंचायत या कोई ग्रामीण जमानत नहीं करवाएगा। किसी ग्रामीण ने जमानत करवाई तो उस पर जुर्माना लगेगा व उसका पोस्टर गांव के चौराहे में लटकाकर शर्मसार किया जाएगा। वकीलों ने भी फैसला सुनाया कि वे नशा तस्कर की जमानत नहीं करवाएंगे। पंचायत में बताया कि दादा भोमिया मंदिर में चोरी करने वाला युवक नशा करता है। उसे व उसके परिवार को गांव से बाहर निकाला जाएगा। गांव में नशे का प्रवेश रोकने को लठैत युवा गांव की सीमाओं पर पहरा देंगे। महापंचायत का नेतृत्व कर रहे जयपाल बग्गी ने कहा कि नशे से बढ़ते अपराध को देख निर्णय लिए।

घर-घर कूड़ा उठान व्यवस्था होगी मजबूत, हाई पावर कमेटी लगाएगी टेंडर पर मुहर

गुरुग्राम साइबर सिटी में घर-घर कूड़ा कलेक्शन व्यवस्था को स्थायी और बेहतर बनाने पर मंगलवार को फैसला होगा। नगर निगम गुरुग्राम द्वारा जारी 606 करोड़ रुपये के डोर टू डोर कूड़ा कलेक्शन टेंडर को चंडीगढ़ में होने वाली हाई पावर वर्क्स परचेज कमेटी की बैठक में मंजूरी मिलने की संभावना है। वहीं, मंजूरी मिलने के बाद अगले पांच वर्षों के लिए प्राइवेट एजेंसियों को काम सौंप दिया जाएगा, जिससे शहर में कूड़ा उठान व्यवस्था को मजबूती मिलेगी। जैसे ही बैठक में टेंडर पर मुहर लगेगी। एजेंसियां तीन महीने में काम शुरू कर देगी। नगर निगम क्षेत्र में 14 जून 2024 के बाद से कोई स्थायी एजेंसी कार्यरत नहीं है। पिछले करीब दो वर्षों से कूड़ा कलेक्शन का कार्य अस्थायी व्यवस्था के तहत विभिन्न एजेंसियों के माध्यम से कराया जा रहा है। स्थायी एजेंसी नहीं होने के कारण कई क्षेत्रों में समय पर कूड़ा उठान और निगरानी से जुड़ी समस्याएं सामने आती रही हैं। चार जोन को दो क्लस्टर में बांटा नई व्यवस्था के तहत नगर निगम ने शहर के चारों जोनों को दो अलग-अलग क्लस्टर में विभाजित किया है। जोन-1 और जोन-2 को एक क्लस्टर तथा जोन-3 और जोन-4 को दूसरे क्लस्टर में शामिल किया गया है। पहले क्लस्टर के लिए चार निजी एजेंसियों ने आवेदन किया है, जबकि दूसरे क्लस्टर के लिए दो एजेंसियों ने भागीदारी की है। 606 करोड़ रुपये का है टेंडर नगर निगम ने दोनों क्लस्टरों के लिए कुल 606 करोड़ रुपये का प्रविधान किया है। इसमें जोन-एक और जोन-दो के क्लस्टर के लिए 295 करोड़ रुपये तथा जोन-तीन और जोन-चार के क्लस्टर के लिए 311 करोड़ रुपये निर्धारित किए गए हैं। टेंडर आवंटन के बाद संबंधित एजेंसियां अगले पांच वर्षों तक कूड़ा कलेक्शन का कार्य करेंगी। गीले और सूखे कचरे के अलग संग्रह पर रहेगा जोर नई डोर-टू-डोर कूड़ा कलेक्शन व्यवस्था में स्रोत स्तर पर ही गीले और सूखे कचरे को अलग-अलग एकत्र करने पर विशेष फोकस रहेगा। निगम प्रशासन का मानना है कि इससे कचरा प्रबंधन व्यवस्था अधिक प्रभावी होगी और रीसाइक्लिंग को भी बढ़ावा मिलेगा। हाई पावर कमेटी देगी अंतिम मंजूरी, तीन महीने में शुरू होगा काम नगर निगम के चीफ इंजीनियर विजय ढाका ने बताया कि मुख्यमंत्री की अध्यक्षता वाली हाई पावर वर्क्स परचेज कमेटी में टेंडर सौंपने पर निर्णय होगा। कमेटी की मंजूरी के बाद चयनित एजेंसियों को कार्य आवंटित कर दिया जाएगा और नई व्यवस्था लागू करने की प्रक्रिया शुरू होगी। तीन महीने के अंदर एजेंसियां काम शुरू करेंगी।  

नारनौल में बारिश से राहत, बाकी हरियाणा में जारी रही भीषण लू

हिसार  प्रदेश में सोमवार शाम को अचानक से मौसम में बदलाव हुआ। राजस्थान सीमा के साथ लगते नारनौल में वर्षा हुई। प्रदेश के बाकी सभी जिलों में मौसम साफ होने के साथ ही सोमवार को लू चली। मंगलवार को भी राजस्थान सीमा के साथ लगते 14 जिलों में लू का यलो अलर्ट जारी किया गया है। यह स्थिति आगामी तीन दिनों तक बनी रह सकती है। 11 जून की रात से मौसम में बदलाव हो सकता और तेज आंधी के साथ ओलावृष्टि का अलर्ट जारी किया गया है। सोमवार को भीषण लू चलने के कारण रोहतक सबसे ज्यादा गर्म रहा। यहां का अधिकतम तापमान 45.2 डिग्री तक पहुंच गया। वहीं रविवार देर शाम को आंधी चली। भारत मौसम विज्ञान विभाग के अनुसार सोमवार सुबह से ही प्रदेश में धूप खिलने के कारण लू चल रही थी। शाम को नारनौल में अचानक से मौसम में बदलाव हुआ और हवाओं के साथ वर्षा हुई। इससे वहां पर गर्मी से राहत मिली। वहीं राजस्थान सीमा के साथ लगते बाकी जिलों में लू चलने के कारण गर्मी अधिक रही। इसके चलते रोहतक सबसे गर्म शहर रहा। इसके अलावा हिसार का तापमान 43.6 डिग्री तो अंबाला, करनाल और सिरसा का तापमान 42 डिग्री तक पहुंच गया है। 11 जून तक भीषण लू चलने के कारण तापमान में वृद्धि होने की संभावना है। क्यों अचानक बढ़ा तापमान? मौसम विशेषज्ञों के मुताबिक, हाल ही में सक्रिय रहा पश्चिमी विक्षोभ अब आगे बढ़ चुका है। मैदानी इलाकों पर बना इसका प्रेरित चक्रवाती परिसंचरण भी अब कमजोर पड़ गया है। वहीं, पूर्व-पश्चिम ट्रफ रेखा उत्तर की ओर खिसक गई है। इसके चलते निचले स्तर की हवाओं की दिशा बदलकर गर्म पछुआ (पश्चिमी) हो गई है। शुष्क और गर्म हवाओं के सीधे प्रभाव के कारण करनाल में सोमवार से बुधवार के बीच अधिकतम तापमान 43 डिग्री सेल्सियस के आसपास पहुंच सकता है, जिससे दोपहर के समय लू का प्रकोप रहेगा।

बैंक घोटाला केस में नया मोड़! हरियाणा के दो वरिष्ठ IAS अफसरों की भूमिका पर CBI की नजर

चंडीगढ़ हरियाणा में हुए 661 करोड़ रुपए के कथित बैंकिंग फ्रॉड मामले की जांच अब ऐसे दौर में पहुंचती दिख रही है, जहां एजेंसियां सिर्फ बैंक रिकॉर्ड और वित्तीय लेन-देन पर नहीं, बल्कि उस प्रशासनिक ढांचे को भी समझने में जुट गई हैं जिसके भीतर पूरा घटनाक्रम आकार लेता गया। इसी कड़ी में अब जांच को लेकर एक बड़ा इनपुट सामने आया है। सूत्रों के अनुसार केंद्रीय जांच ब्यूरो (सीबीआई) हरियाणा के दो आईएएस अधिकारियों को सरकारी गवाह बनाए जाने की संभावना पर गंभीरता से विचार कर रही है। जानकारी यह भी सामने आई है कि जिन दो अधिकारियों के नाम पर विचार किया जा रहा है, वे मूल रूप से हरियाणा सिविल सेवा (एचसीएस) से प्रमोट होकर आईएएस बने हैं। प्रशासनिक स्तर पर लंबे अनुभव और विभागीय प्रक्रियाओं की समझ के कारण एजेंसी मान रही है कि उनके पास ऐसी सूचनाएं हो सकती हैं जो इस पूरे मामले की कई अधूरी कड़ियों को जोड़ने में मदद करें। जांच से जुड़े सूत्रों ने क्या कहा? जांच से जुड़े सूत्रों का कहना है कि एजेंसी का मौजूदा फोकस केवल इस बात तक सीमित नहीं है कि सरकारी धन किन खातों तक पहुंचा। अब कोशिश यह समझने की भी है कि सरकारी विभागों के खाते किस प्रक्रिया से संचालित हुए, कथित फर्जी एफडीआर कैसे तैयार हुए, रकम के ट्रांसफर को किस स्तर पर मंजूरी मिली और वित्तीय नियंत्रण व्यवस्था में कहां-कहां चूक या मिलीभगत की संभावना बनी। जांच एजेंसियों का मानना है कि बड़े वित्तीय मामलों में केवल बैंक एंट्री पूरी कहानी नहीं बताती। कई बार फाइलों की आवाजाही, विभागीय आदेश, प्रशासनिक स्वीकृतियां और फैसलों की शृंखला असली तस्वीर सामने लाती है। ऐसे में सिस्टम के भीतर काम कर चुके अधिकारियों की भूमिका महत्वपूर्ण मानी जा रही है। फिलहाल इस पूरे मामले की जांच सीबीआई और प्रवर्तन निदेशालय (ईडी) दोनों स्तरों पर जारी है। पहले ही कई व्यक्तियों और कथित संस्थाओं के खिलाफ कानूनी कार्रवाई आगे बढ़ चुकी है। साथ ही, कुछ अधिकारियों के खिलाफ जांच की अनुमति दिए जाने के बाद मामला प्रशासनिक जवाबदेही के दायरे में भी आ गया है। अब नजर उस संभावित कदम पर टिकी है जिसमें दो आईएएस अधिकारियों को सरकारी गवाह बनाया जा सकता है। पहले पूछताछ हुई, अब गवाही के विकल्प पर मंथन सूत्रों के मुताबिक जिन अधिकारियों को लेकर चर्चा चल रही है, उनसे पहले भी पूछताछ की जा चुकी है। पूछताछ के दौरान उपलब्ध कराए गए दस्तावेज, विभागीय नोटिंग और प्रशासनिक रिकॉर्ड के आधार पर एजेंसी को कुछ ऐसे संकेत मिले हैं जिन्होंने जांच को नया आयाम दिया। बताया जा रहा है कि अब एजेंसी यह आकलन कर रही है कि क्या इन अधिकारियों के पास उपलब्ध जानकारी को औपचारिक रूप से सरकारी गवाही के रूप में उपयोग किया जा सकता है। यदि ऐसा होता है तो जांच को घटनाओं का क्रम समझने, निर्णय लेने वाले स्तरों की पहचान करने और अन्य संभावित भूमिकाओं तक पहुंचने में मदद मिल सकती है। सूत्र यह भी मानते हैं कि अंदरूनी गवाही कई बार उन सवालों के जवाब दे देती है जो दस्तावेजों में सीधे दिखाई नहीं देते। दिल्ली-एनसीआर तक पहुंचा सर्च ऑपरेशन, जांच का दायरा बढ़ा मामले में हाल के दिनों में जांच एजेंसी ने पहली बार हरियाणा और चंडीगढ़ से बाहर जाकर दिल्ली-एनसीआर तक कार्रवाई का विस्तार किया। कई स्थानों पर एक साथ तलाशी अभियान चलाया गया। जांच से जुड़े सूत्रों के अनुसार, इस कार्रवाई के दौरान डिजिटल उपकरण, वित्तीय दस्तावेज, बैंकिंग रिकॉर्ड और कुछ प्रशासनिक सामग्री एजेंसी के कब्जे में आई है। अब इनकी तकनीकी जांच और दस्तावेजी मिलान की प्रक्रिया चल रही है। एजेंसी यह समझने की कोशिश कर रही है कि सरकारी खाते खोलने, धन को अलग-अलग माध्यमों से स्थानांतरित करने और वित्तीय दस्तावेजों के उपयोग के बीच क्या संबंध मौजूद थे। नोएडा लिंक के बाद और गहरे हुए सवाल जांच के दौरान नोएडा स्थित एक निजी कंपनी तक पहुंचने के बाद एजेंसियों ने कथित वित्तीय प्रवाह के दूसरे स्तरों की भी पड़ताल तेज कर दी है। संदेह यह है कि सरकारी स्रोतों से निकलने वाली रकम आगे कई चरणों से होकर अन्य खातों या संरचनाओं तक पहुंची हो सकती है। इस दिशा में जुटाए गए रिकॉर्ड और डिजिटल डेटा का विश्लेषण किया जा रहा है ताकि धन के प्रवाह की पूरी शृंखला को समझा जा सके।  

हरियाणा के सबसे पुराने भूमि विवाद में फिर से होगी जांच, 2 महीने में नया फैसला देने के निर्देश

पंचकूला  पंचकूला जिले की 1394 एकड़ भूमि से जुड़े लंबे समय से चले आ रहे विवाद में अंबाला मंडल के कमिश्नर संजीव वर्मा ने महत्वपूर्ण आदेश पारित किया है। कमिश्नर ने 26 मई 2026 को दिए फैसले में मामले को दोबारा सुनवाई के लिए कलेक्टर एग्रेरियन पंचकूला के पास भेजते हुए निर्देश दिया है कि सभी पक्षों को सुनकर दो माह के भीतर नए सिरे से निर्णय लिया जाए। यह मामला दिवंगत बड़े भू-स्वामी सरदार भगवंत सिंह की भूमि से जुड़ा है। रिकार्ड के अनुसार सरदार भगवंत सिंह के पास पंचकूला क्षेत्र के सात गांवों बरवाला, संगराना, फतेहपुर विरान, भराली, जलौली, बीर बाबूपुर और बीर फिरोजारी में 1396 एकड़ भूमि थी। उनके निधन के बाद भूमि के अधिशेष (सरप्लस) क्षेत्र को लेकर कानूनी लड़ाई दशकों से चली आ रही है। यह भूमि आइटीबीपी के पास जीटी रोड के आसपास पड़ती है। अंबाला के मंडलायुक्त संजीव वर्मा के आदेश में उल्लेख है कि भूमि अधिशेष से संबंधित कार्यवाही 1960 के दशक से लंबित है। इस दौरान मामला कई बार कलेक्टर, कमिश्नर, वित्तायुक्त राजस्व तथा पंजाब एवं हरियाणा हाईकोर्ट तक पहुंचा। हाईकोर्ट ने 24 फरवरी 2023 को भी निर्देश दिया था कि अधिशेष भूमि का मामला पुनर्निर्धारण के सिद्धांत के आधार पर एक वर्ष के भीतर तय किया जाए। राजस्व रिकॉर्ड में सुधारों को रद करने के निर्देश देहरादून निवासी आशा सिंह ने कलेक्टर एग्रेरियन पंचकूला के चार जनवरी 2024 के आदेश को चुनौती दी थी। उनका कहना था कि कलेक्टर ने 11 अप्रैल 2023 के अपने पूर्व आदेश को वापस लेकर राजस्व रिकार्ड में किए गए सुधारों को रद करने का निर्देश दिया था, जबकि यह कदम उच्च न्यायालय के निर्देशों के अनुरूप नहीं था। सुनवाई के दौरान भूमि खरीदने वाले पक्षों ने दावा किया कि वे वर्षों से भूमि के वैध खरीददार हैं और उनके नाम राजस्व रिकार्ड में करीब दो दशक से दर्ज हैं। उनका तर्क था कि ऐसे मामलों में केवल सिविल कोर्ट ही जमाबंदी की प्रविष्टियों में बदलाव कर सकता है। दूसरी ओर अपीलकर्ता पक्ष ने कहा कि हाईकोर्ट के पूर्व आदेशों के अनुसार पूरे भूमि होल्डिंग को मूल भू-स्वामी सरदार भगवंत सिंह के नाम से देखते हुए अधिशेष भूमि का निर्धारण किया जाना चाहिए और उनके कानूनी वारिसों को कानून के तहत मिलने वाले लाभ दिए जाने चाहिएं। सरकारी रिकार्ड में 583 एकड़ पहले से दर्ज राजस्व अधिकारियों की रिपोर्ट के अनुसार कुल भूमि में से 583 एकड़ तीन कनाल 16 मरला भूमि पहले ही राज्य सरकार के नाम दर्ज हो चुकी है, जबकि लगभग 810 एकड़ पांच कनाल सात मरला भूमि निजी व्यक्तियों के नाम पर दर्ज है। मंडलायुक्त संजीव वर्मा ने अपने आदेश में कहा कि उपलब्ध रिकार्ड और न्यायालयों के पूर्व निर्णयों के आधार पर अधिशेष भूमि का मामला पूरे होल्डिंग को ध्यान में रखकर तय किया जाना चाहिए। आदेश में यह भी कहा गया कि शेष 811 एकड़ भूमि को भी राज्य सरकार के नाम दर्ज किए जाने का प्रश्न पुनः विचारणीय है। दो माह में देना होगा नया फैसला अंतिम आदेश में कमिश्नर ने कलेक्टर एग्रेरियन पंचकूला को निर्देश दिया है कि सभी संबंधित पक्षों को सुनवाई का अवसर देकर मामले का दो माह के भीतर नए सिरे से निर्णय करें। साथ ही यह भी टिप्पणी की गई कि हाईकोर्ट के समयबद्ध निर्देशों के बावजूद मामला अनावश्यक रूप से लंबे समय से लंबित है। इस आदेश के बाद हरियाणा के सबसे पुराने और बड़े भूमि विवादों में से एक माने जाने वाले इस मामले में फिर से व्यापक सुनवाई का रास्ता साफ हो गया है।

मुख्यमंत्री सैनी करेंगे ‘सोमनाथ स्वाभिमान पर्व’ की शुरुआत, बुजुर्गों को तीर्थ यात्रा

चंडीगड़ हरियाणा सरकार की ओर से प्रदेश के बुजुर्गों को धार्मिक स्थलों के दर्शन कराने की कड़ी में आज एक बड़ा अध्याय जुड़ने जा रहा है। मुख्यमंत्री नायब सिंह सैनी आज कुरुक्षेत्र पहुंच रहे हैं, जहां वे राज्य सरकार के विशेष उपक्रम 'सोमनाथ स्वाभिमान पर्व' का आगाज करेंगे। इस योजना के तहत कुरुक्षेत्र रेलवे स्टेशन से गुजरात के सुप्रसिद्ध सोमनाथ मंदिर के लिए एक विशेष ट्रेन रवाना की जाएगी। मुख्यमंत्री दोपहर ठीक 1 बजे इस पावन यात्रा को हरी झंडी दिखाकर श्रद्धालुओं को गंतव्य के लिए विदा करेंगे। ऐन वक्त पर बदला मुख्यमंत्री का शिड्यूल, अब ब्रह्मसरोवर पर टेकेंगे माथा कुरुक्षेत्र आगमन के दौरान मुख्यमंत्री के तय कार्यक्रम में आंशिक बदलाव किया गया है। पूर्व निर्धारित कार्यक्रम के अनुसार, मुख्यमंत्री को ऐतिहासिक स्थाणु महादेव मंदिर में पूजा-अर्चना करनी थी। हालांकि, अब नए शिड्यूल के मुताबिक वे सीधे ऐतिहासिक ब्रह्मसरोवर तट पर स्थित सर्वेश्वर महादेव मंदिर पहुंचेंगे। यहां वे विशेष पूजा-अर्चना कर राज्य की सुख-समृद्धि की कामना करेंगे और इसके तुरंत बाद सीधे कुरुक्षेत्र रेलवे स्टेशन के लिए रवाना होंगे। 7 जिलों के श्रद्धालुओं को सौगात, रहने-खाने का पूरा खर्च उठाएगी सरकार इस विशेष तीर्थ यात्रा को लेकर कुरुक्षेत्र समेत पूरे प्रदेश के बुजुर्गों में खासा उत्साह देखा जा रहा है। कुरुक्षेत्र रेलवे स्टेशन से शुरू हो रही इस ट्रेन में केवल स्थानीय ही नहीं, बल्कि पंचकूला, अंबाला, यमुनानगर, कैथल, फतेहाबाद और सिरसा जिलों के चयनित बुजुर्ग श्रद्धालु भी सवार होंगे। कुल 5 दिनों की इस धार्मिक यात्रा के दौरान श्रद्धालुओं के रहने, खाने-पीने और रेलवे स्टेशन से लेकर सोमनाथ मंदिर तक लाने-ले जाने की तमाम जिम्मेदारी और खर्च प्रदेश सरकार खुद उठा रही है।  

परिवार पहचान पत्र से पारदर्शी शासन को बढ़ावा, 2.99 करोड़ नागरिकों का डिजिटल रिकॉर्ड तैयार

चंडीगढ़  हरियाणा में परिवार पहचान पत्र (पीपीपी) योजना केवल एक डिजिटल डाटाबेस नहीं, बल्कि महिला सशक्तीकरण, पारदर्शी प्रशासन और जनकल्याणकारी योजनाओं के प्रभावी क्रियान्वयन का सशक्त माध्यम बनकर उभरी है। राज्य में कुल 77.50 लाख परिवार पहचान पत्र में पंजीकृत हैं, जिनमें से 23.30 लाख परिवारों की मुखिया महिलाएं हैं। यह कुल परिवारों का लगभग 30.07 प्रतिशत है, जो महिलाओं की बढ़ती सामाजिक भागीदारी और नेतृत्व क्षमता की तरफ इशारा कर रहा है। पीपीपी के स्टेट कॉर्डिनेटर डॉ. सतीश खोला के अनुसार परिवार पहचान पत्र लगभग 2.99 करोड़ नागरिकों का एकीकृत डिजिटल रिकार्ड तैयार कर चुका है, जिससे सरकारी योजनाओं और सेवाओं का लाभ पात्र लोगों तक तेजी और पारदर्शिता के साथ पहुंचना सुनिश्चित हुआ है। महिला मुखिया परिवारों की संख्या में फरीदाबाद सबसे आगे महिला मुखिया परिवारों की संख्या में फरीदाबाद सबसे आगे है, जहां 1.61 लाख से अधिक परिवारों की मुखिया महिलाएं हैं। इसके बाद करनाल (1.41 लाख), सोनीपत (1.29 लाख), जींद (1.23 लाख) और गुरुग्राम में (1.22 लाख) परिवारों की मुखिया महिलाएं हैं। राज्यभर में कुल 23 लाख 30 हजार 394 परिवारों में महिलाओं को परिवार के मुखिया के रूप में दर्ज किया गया है। डॉ. सतीश खोला के अनुसार परिवार पहचान पत्र की सबसे बड़ी विशेषताओं में से एक इसकी व्यापक पारिवारिक संरचना है। इस प्रणाली में 105 प्रकार के रिश्तों को दर्ज करने की सुविधा है, जिससे परिवारों का वास्तविक और सटीक डिजिटल रिकार्ड तैयार किया जा रहा है। इससे सरकारी योजनाओं के पात्र लाभार्थियों की पहचान अधिक प्रभावी और पारदर्शी तरीके से संभव हो रही है। पीपीपी के माध्यम से आय, परिवार संरचना और अन्य आवश्यक जानकारियों का डिजिटल सत्यापन होने से नागरिकों को विभिन्न विभागों में बार-बार दस्तावेज जमा कराने की आवश्यकता नहीं पड़ती। सतीश खोला ने नागरिकों से अपील की कि वे अपने परिवार पहचान पत्र में दर्ज जानकारी को समय-समय पर अपडेट करते रहें, ताकि सरकारी सेवाओं और योजनाओं का लाभ उन्हें निर्बाध रूप से मिलता रहे।

PPP से बदली तस्वीर! हरियाणा में लाखों महिलाओं को मिली परिवार की मुखिया की पहचान

चंडीगढ़. हरियाणा में परिवार पहचान पत्र (पीपीपी) योजना केवल एक डिजिटल डाटाबेस नहीं, बल्कि महिला सशक्तीकरण, पारदर्शी प्रशासन और जनकल्याणकारी योजनाओं के प्रभावी क्रियान्वयन का सशक्त माध्यम बनकर उभरी है। राज्य में कुल 77.50 लाख परिवार पहचान पत्र में पंजीकृत हैं, जिनमें से 23.30 लाख परिवारों की मुखिया महिलाएं हैं। यह कुल परिवारों का लगभग 30.07 प्रतिशत है, जो महिलाओं की बढ़ती सामाजिक भागीदारी और नेतृत्व क्षमता की तरफ इशारा कर रहा है। पीपीपी के स्टेट कॉर्डिनेटर डॉ. सतीश खोला के अनुसार परिवार पहचान पत्र लगभग 2.99 करोड़ नागरिकों का एकीकृत डिजिटल रिकार्ड तैयार कर चुका है, जिससे सरकारी योजनाओं और सेवाओं का लाभ पात्र लोगों तक तेजी और पारदर्शिता के साथ पहुंचना सुनिश्चित हुआ है। महिला मुखिया परिवारों की संख्या में फरीदाबाद सबसे आगे महिला मुखिया परिवारों की संख्या में फरीदाबाद सबसे आगे है, जहां 1.61 लाख से अधिक परिवारों की मुखिया महिलाएं हैं। इसके बाद करनाल (1.41 लाख), सोनीपत (1.29 लाख), जींद (1.23 लाख) और गुरुग्राम में (1.22 लाख) परिवारों की मुखिया महिलाएं हैं। राज्यभर में कुल 23 लाख 30 हजार 394 परिवारों में महिलाओं को परिवार के मुखिया के रूप में दर्ज किया गया है। डॉ. सतीश खोला के अनुसार परिवार पहचान पत्र की सबसे बड़ी विशेषताओं में से एक व्यापक पारिवारिक संरचना है। इस प्रणाली में 105 प्रकार के रिश्तों को दर्ज करने की सुविधा है, जिससे परिवारों का वास्तविक और सटीक डिजिटल रिकार्ड तैयार किया जा रहा है। इससे सरकारी योजनाओं के पात्र लाभार्थियों की पहचान अधिक प्रभावी और पारदर्शी तरीके से संभव हो रही है। पीपीपी के माध्यम से आय, परिवार संरचना और अन्य आवश्यक जानकारियों का डिजिटल सत्यापन होने से नागरिकों को विभिन्न विभागों में बार-बार दस्तावेज जमा कराने की आवश्यकता नहीं पड़ती। सतीश खोला ने नागरिकों से अपील की कि वे अपने परिवार पहचान पत्र में दर्ज जानकारी को समय-समय पर अपडेट करते रहें, ताकि सरकारी सेवाओं और योजनाओं का लाभ उन्हें निर्बाध रूप से मिलता रहे।