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हरियाणा के सबसे पुराने भूमि विवाद में फिर से होगी जांच, 2 महीने में नया फैसला देने के निर्देश

पंचकूला  पंचकूला जिले की 1394 एकड़ भूमि से जुड़े लंबे समय से चले आ रहे विवाद में अंबाला मंडल के कमिश्नर संजीव वर्मा ने महत्वपूर्ण आदेश पारित किया है। कमिश्नर ने 26 मई 2026 को दिए फैसले में मामले को दोबारा सुनवाई के लिए कलेक्टर एग्रेरियन पंचकूला के पास भेजते हुए निर्देश दिया है कि सभी पक्षों को सुनकर दो माह के भीतर नए सिरे से निर्णय लिया जाए। यह मामला दिवंगत बड़े भू-स्वामी सरदार भगवंत सिंह की भूमि से जुड़ा है। रिकार्ड के अनुसार सरदार भगवंत सिंह के पास पंचकूला क्षेत्र के सात गांवों बरवाला, संगराना, फतेहपुर विरान, भराली, जलौली, बीर बाबूपुर और बीर फिरोजारी में 1396 एकड़ भूमि थी। उनके निधन के बाद भूमि के अधिशेष (सरप्लस) क्षेत्र को लेकर कानूनी लड़ाई दशकों से चली आ रही है। यह भूमि आइटीबीपी के पास जीटी रोड के आसपास पड़ती है। अंबाला के मंडलायुक्त संजीव वर्मा के आदेश में उल्लेख है कि भूमि अधिशेष से संबंधित कार्यवाही 1960 के दशक से लंबित है। इस दौरान मामला कई बार कलेक्टर, कमिश्नर, वित्तायुक्त राजस्व तथा पंजाब एवं हरियाणा हाईकोर्ट तक पहुंचा। हाईकोर्ट ने 24 फरवरी 2023 को भी निर्देश दिया था कि अधिशेष भूमि का मामला पुनर्निर्धारण के सिद्धांत के आधार पर एक वर्ष के भीतर तय किया जाए। राजस्व रिकॉर्ड में सुधारों को रद करने के निर्देश देहरादून निवासी आशा सिंह ने कलेक्टर एग्रेरियन पंचकूला के चार जनवरी 2024 के आदेश को चुनौती दी थी। उनका कहना था कि कलेक्टर ने 11 अप्रैल 2023 के अपने पूर्व आदेश को वापस लेकर राजस्व रिकार्ड में किए गए सुधारों को रद करने का निर्देश दिया था, जबकि यह कदम उच्च न्यायालय के निर्देशों के अनुरूप नहीं था। सुनवाई के दौरान भूमि खरीदने वाले पक्षों ने दावा किया कि वे वर्षों से भूमि के वैध खरीददार हैं और उनके नाम राजस्व रिकार्ड में करीब दो दशक से दर्ज हैं। उनका तर्क था कि ऐसे मामलों में केवल सिविल कोर्ट ही जमाबंदी की प्रविष्टियों में बदलाव कर सकता है। दूसरी ओर अपीलकर्ता पक्ष ने कहा कि हाईकोर्ट के पूर्व आदेशों के अनुसार पूरे भूमि होल्डिंग को मूल भू-स्वामी सरदार भगवंत सिंह के नाम से देखते हुए अधिशेष भूमि का निर्धारण किया जाना चाहिए और उनके कानूनी वारिसों को कानून के तहत मिलने वाले लाभ दिए जाने चाहिएं। सरकारी रिकार्ड में 583 एकड़ पहले से दर्ज राजस्व अधिकारियों की रिपोर्ट के अनुसार कुल भूमि में से 583 एकड़ तीन कनाल 16 मरला भूमि पहले ही राज्य सरकार के नाम दर्ज हो चुकी है, जबकि लगभग 810 एकड़ पांच कनाल सात मरला भूमि निजी व्यक्तियों के नाम पर दर्ज है। मंडलायुक्त संजीव वर्मा ने अपने आदेश में कहा कि उपलब्ध रिकार्ड और न्यायालयों के पूर्व निर्णयों के आधार पर अधिशेष भूमि का मामला पूरे होल्डिंग को ध्यान में रखकर तय किया जाना चाहिए। आदेश में यह भी कहा गया कि शेष 811 एकड़ भूमि को भी राज्य सरकार के नाम दर्ज किए जाने का प्रश्न पुनः विचारणीय है। दो माह में देना होगा नया फैसला अंतिम आदेश में कमिश्नर ने कलेक्टर एग्रेरियन पंचकूला को निर्देश दिया है कि सभी संबंधित पक्षों को सुनवाई का अवसर देकर मामले का दो माह के भीतर नए सिरे से निर्णय करें। साथ ही यह भी टिप्पणी की गई कि हाईकोर्ट के समयबद्ध निर्देशों के बावजूद मामला अनावश्यक रूप से लंबे समय से लंबित है। इस आदेश के बाद हरियाणा के सबसे पुराने और बड़े भूमि विवादों में से एक माने जाने वाले इस मामले में फिर से व्यापक सुनवाई का रास्ता साफ हो गया है।

मुख्यमंत्री सैनी करेंगे ‘सोमनाथ स्वाभिमान पर्व’ की शुरुआत, बुजुर्गों को तीर्थ यात्रा

चंडीगड़ हरियाणा सरकार की ओर से प्रदेश के बुजुर्गों को धार्मिक स्थलों के दर्शन कराने की कड़ी में आज एक बड़ा अध्याय जुड़ने जा रहा है। मुख्यमंत्री नायब सिंह सैनी आज कुरुक्षेत्र पहुंच रहे हैं, जहां वे राज्य सरकार के विशेष उपक्रम 'सोमनाथ स्वाभिमान पर्व' का आगाज करेंगे। इस योजना के तहत कुरुक्षेत्र रेलवे स्टेशन से गुजरात के सुप्रसिद्ध सोमनाथ मंदिर के लिए एक विशेष ट्रेन रवाना की जाएगी। मुख्यमंत्री दोपहर ठीक 1 बजे इस पावन यात्रा को हरी झंडी दिखाकर श्रद्धालुओं को गंतव्य के लिए विदा करेंगे। ऐन वक्त पर बदला मुख्यमंत्री का शिड्यूल, अब ब्रह्मसरोवर पर टेकेंगे माथा कुरुक्षेत्र आगमन के दौरान मुख्यमंत्री के तय कार्यक्रम में आंशिक बदलाव किया गया है। पूर्व निर्धारित कार्यक्रम के अनुसार, मुख्यमंत्री को ऐतिहासिक स्थाणु महादेव मंदिर में पूजा-अर्चना करनी थी। हालांकि, अब नए शिड्यूल के मुताबिक वे सीधे ऐतिहासिक ब्रह्मसरोवर तट पर स्थित सर्वेश्वर महादेव मंदिर पहुंचेंगे। यहां वे विशेष पूजा-अर्चना कर राज्य की सुख-समृद्धि की कामना करेंगे और इसके तुरंत बाद सीधे कुरुक्षेत्र रेलवे स्टेशन के लिए रवाना होंगे। 7 जिलों के श्रद्धालुओं को सौगात, रहने-खाने का पूरा खर्च उठाएगी सरकार इस विशेष तीर्थ यात्रा को लेकर कुरुक्षेत्र समेत पूरे प्रदेश के बुजुर्गों में खासा उत्साह देखा जा रहा है। कुरुक्षेत्र रेलवे स्टेशन से शुरू हो रही इस ट्रेन में केवल स्थानीय ही नहीं, बल्कि पंचकूला, अंबाला, यमुनानगर, कैथल, फतेहाबाद और सिरसा जिलों के चयनित बुजुर्ग श्रद्धालु भी सवार होंगे। कुल 5 दिनों की इस धार्मिक यात्रा के दौरान श्रद्धालुओं के रहने, खाने-पीने और रेलवे स्टेशन से लेकर सोमनाथ मंदिर तक लाने-ले जाने की तमाम जिम्मेदारी और खर्च प्रदेश सरकार खुद उठा रही है।  

परिवार पहचान पत्र से पारदर्शी शासन को बढ़ावा, 2.99 करोड़ नागरिकों का डिजिटल रिकॉर्ड तैयार

चंडीगढ़  हरियाणा में परिवार पहचान पत्र (पीपीपी) योजना केवल एक डिजिटल डाटाबेस नहीं, बल्कि महिला सशक्तीकरण, पारदर्शी प्रशासन और जनकल्याणकारी योजनाओं के प्रभावी क्रियान्वयन का सशक्त माध्यम बनकर उभरी है। राज्य में कुल 77.50 लाख परिवार पहचान पत्र में पंजीकृत हैं, जिनमें से 23.30 लाख परिवारों की मुखिया महिलाएं हैं। यह कुल परिवारों का लगभग 30.07 प्रतिशत है, जो महिलाओं की बढ़ती सामाजिक भागीदारी और नेतृत्व क्षमता की तरफ इशारा कर रहा है। पीपीपी के स्टेट कॉर्डिनेटर डॉ. सतीश खोला के अनुसार परिवार पहचान पत्र लगभग 2.99 करोड़ नागरिकों का एकीकृत डिजिटल रिकार्ड तैयार कर चुका है, जिससे सरकारी योजनाओं और सेवाओं का लाभ पात्र लोगों तक तेजी और पारदर्शिता के साथ पहुंचना सुनिश्चित हुआ है। महिला मुखिया परिवारों की संख्या में फरीदाबाद सबसे आगे महिला मुखिया परिवारों की संख्या में फरीदाबाद सबसे आगे है, जहां 1.61 लाख से अधिक परिवारों की मुखिया महिलाएं हैं। इसके बाद करनाल (1.41 लाख), सोनीपत (1.29 लाख), जींद (1.23 लाख) और गुरुग्राम में (1.22 लाख) परिवारों की मुखिया महिलाएं हैं। राज्यभर में कुल 23 लाख 30 हजार 394 परिवारों में महिलाओं को परिवार के मुखिया के रूप में दर्ज किया गया है। डॉ. सतीश खोला के अनुसार परिवार पहचान पत्र की सबसे बड़ी विशेषताओं में से एक इसकी व्यापक पारिवारिक संरचना है। इस प्रणाली में 105 प्रकार के रिश्तों को दर्ज करने की सुविधा है, जिससे परिवारों का वास्तविक और सटीक डिजिटल रिकार्ड तैयार किया जा रहा है। इससे सरकारी योजनाओं के पात्र लाभार्थियों की पहचान अधिक प्रभावी और पारदर्शी तरीके से संभव हो रही है। पीपीपी के माध्यम से आय, परिवार संरचना और अन्य आवश्यक जानकारियों का डिजिटल सत्यापन होने से नागरिकों को विभिन्न विभागों में बार-बार दस्तावेज जमा कराने की आवश्यकता नहीं पड़ती। सतीश खोला ने नागरिकों से अपील की कि वे अपने परिवार पहचान पत्र में दर्ज जानकारी को समय-समय पर अपडेट करते रहें, ताकि सरकारी सेवाओं और योजनाओं का लाभ उन्हें निर्बाध रूप से मिलता रहे।

PPP से बदली तस्वीर! हरियाणा में लाखों महिलाओं को मिली परिवार की मुखिया की पहचान

चंडीगढ़. हरियाणा में परिवार पहचान पत्र (पीपीपी) योजना केवल एक डिजिटल डाटाबेस नहीं, बल्कि महिला सशक्तीकरण, पारदर्शी प्रशासन और जनकल्याणकारी योजनाओं के प्रभावी क्रियान्वयन का सशक्त माध्यम बनकर उभरी है। राज्य में कुल 77.50 लाख परिवार पहचान पत्र में पंजीकृत हैं, जिनमें से 23.30 लाख परिवारों की मुखिया महिलाएं हैं। यह कुल परिवारों का लगभग 30.07 प्रतिशत है, जो महिलाओं की बढ़ती सामाजिक भागीदारी और नेतृत्व क्षमता की तरफ इशारा कर रहा है। पीपीपी के स्टेट कॉर्डिनेटर डॉ. सतीश खोला के अनुसार परिवार पहचान पत्र लगभग 2.99 करोड़ नागरिकों का एकीकृत डिजिटल रिकार्ड तैयार कर चुका है, जिससे सरकारी योजनाओं और सेवाओं का लाभ पात्र लोगों तक तेजी और पारदर्शिता के साथ पहुंचना सुनिश्चित हुआ है। महिला मुखिया परिवारों की संख्या में फरीदाबाद सबसे आगे महिला मुखिया परिवारों की संख्या में फरीदाबाद सबसे आगे है, जहां 1.61 लाख से अधिक परिवारों की मुखिया महिलाएं हैं। इसके बाद करनाल (1.41 लाख), सोनीपत (1.29 लाख), जींद (1.23 लाख) और गुरुग्राम में (1.22 लाख) परिवारों की मुखिया महिलाएं हैं। राज्यभर में कुल 23 लाख 30 हजार 394 परिवारों में महिलाओं को परिवार के मुखिया के रूप में दर्ज किया गया है। डॉ. सतीश खोला के अनुसार परिवार पहचान पत्र की सबसे बड़ी विशेषताओं में से एक व्यापक पारिवारिक संरचना है। इस प्रणाली में 105 प्रकार के रिश्तों को दर्ज करने की सुविधा है, जिससे परिवारों का वास्तविक और सटीक डिजिटल रिकार्ड तैयार किया जा रहा है। इससे सरकारी योजनाओं के पात्र लाभार्थियों की पहचान अधिक प्रभावी और पारदर्शी तरीके से संभव हो रही है। पीपीपी के माध्यम से आय, परिवार संरचना और अन्य आवश्यक जानकारियों का डिजिटल सत्यापन होने से नागरिकों को विभिन्न विभागों में बार-बार दस्तावेज जमा कराने की आवश्यकता नहीं पड़ती। सतीश खोला ने नागरिकों से अपील की कि वे अपने परिवार पहचान पत्र में दर्ज जानकारी को समय-समय पर अपडेट करते रहें, ताकि सरकारी सेवाओं और योजनाओं का लाभ उन्हें निर्बाध रूप से मिलता रहे।

HSSC की बड़ी उपलब्धि, दो साल में रिकॉर्ड भर्तियां और 13 हजार नई नौकरियों की तैयारी

चंडीगढ़  हरियाणा कर्मचारी चयन आयोग के चेयरमैन हिम्मत सिंह ने अपने दो साल के कार्यकाल का रिपोर्ट कार्ड पेश किया है। आठ जून 2024 को पदभार संभालने के बाद से हिम्मत सिंह ने 46,951 युवाओं को नौकरी दिलाने में सफलता प्राप्त की है। उन्होंने इस उपलब्धि का श्रेय मुख्यमंत्री नायब सिंह सैनी की सरकार को दिया है। इसके साथ ही, उन्होंने बताया कि आयोग की ओर से लगभग 13 हजार नई भर्तियों की तैयारियां भी चल रही हैं। हिम्मत सिंह ने कहा कि आठ जून 2024 वह दिन था, जब उन्होंने हरियाणा कर्मचारी चयन आयोग के अध्यक्ष के पद की शपथ ली थी। यह शपथ एक नई जिम्मेदारी और नए विश्वास की थी। आयोग के अध्यक्ष के रूप में उन्हें कोई पूर्व अनुभव नहीं था, लेकिन उन्होंने कठिनाइयों का सामना करते हुए लक्ष्य को स्पष्ट रखा। मेहनत करने वाले अभ्यर्थियों को उनका हक दिलाना ही मुख्य उद्देश्य रहा है। चेयरमैन ने बताया कि दो वर्षों के कार्यकाल में आयोग ने पारदर्शी भर्ती प्रक्रिया के माध्यम से करीब 47 हजार अभ्यर्थियों के सपनों को साकार किया है। उन्होंने 'एक परिणाम-25 हजार सपने साकार' के मूल मंत्र के तहत 25 हजार अभ्यर्थियों का परिणाम जारी किया, जो आयोग के इतिहास में सबसे बड़ा परिणाम साबित हुआ। मुख्यमंत्री नायब सिंह सैनी ने भी राज्य में तीसरी बार भाजपा की सरकार बनने पर शपथ लेते ही 25 हजार अभ्यर्थियों का परिणाम जारी करने की घोषणा की थी, जो उन्होंने शपथ लेते ही पूरी की। हिम्मत सिंह के अनुसार अभ्यर्थियों का विश्वास आयोग के लिए प्रेरणादायक है। पिछले वर्ष संपन्न हुई सीईटी ग्रुप सी 2025 परीक्षा को हिम्मत सिंह ने इस यात्रा का ऐतिहासिक पड़ाव बताया। लगभग 13.5 लाख अभ्यर्थियों वाली इस परीक्षा का आयोजन एक बड़ी चुनौती थी। उन्होंने कहा कि इस परीक्षा को पारदर्शिता और सुव्यवस्था के साथ संपन्न कराना कठिन था, लेकिन अभ्यर्थियों के उत्साह ने हमें संबल दिया। आयोग के अधिकारियों, जिला प्रशासन, पुलिस विभाग और अन्य सहयोगियों ने इस परीक्षा को एक उत्सव में बदल दिया। चेयरमैन के अनुसार सीईटी की परीक्षा में 92 प्रतिशत अभ्यर्थियों की भागीदारी ने पूरे देश को सकारात्मक संदेश दिया कि यदि नीयत साफ हो और सभी एक टीम की तरह कार्य करें, तो बड़ी परीक्षाएं भी सफलतापूर्वक संपन्न की जा सकती हैं। उन्होंने कहा कि यह उनके कार्यकाल के दो वर्षों का समापन नहीं, बल्कि युवाओं के सपनों को नई उड़ान देने का एक और मजबूत पड़ाव है। उन्होंने कहा कि आयोग आगे भी नए विज्ञापनों और 13 हजार भर्तियों के माध्यम से युवाओं के सपनों को साकार करने के लिए प्रयासरत रहेगा।

17 जिलों में अटल लाइब्रेरी का विस्तार, ग्रामीण युवाओं को मिलेगा डिजिटल और आधुनिक अध्ययन माहौल

 चंडीगढ़ हरियाणा सरकार ग्रामीण क्षेत्रों में शिक्षा और प्रतिस्पर्धी परीक्षाओं की तैयारी के लिए नया माहौल तैयार करने की दिशा में बड़ा कदम उठाने जा रही है। प्रदेश के 17 जिलों में मंगलवार को एक साथ 350 नई अटल लाइब्रेरी शुरू की जाएंगी। करीब 44 करोड़ रुपये की लागत से तैयार की जा रही यह योजना गांवों में अध्ययन संस्कृति को मजबूत करने और युवाओं को उनके घर के नजदीक बेहतर शैक्षणिक सुविधाएं उपलब्ध कराने के उद्देश्य से शुरू की गई है। हरियाणा सरकार की इस पहल की खास बात यह है कि लाइब्रेरी स्थापित करने के लिए नये भवनों के निर्माण पर खर्च नहीं किया गया है। इसकी बजाय ग्राम पंचायतों के उन भवनों और कमरों का चयन किया गया है जो लंबे समय से खाली पड़े थे या सीमित उपयोग में आ रहे थे। राज्य स्तर पर कराए गए सर्वेक्षण के आधार पर 600 से 1000 वर्ग फुट क्षेत्र वाले उपयुक्त स्थानों की पहचान की गई और उन्हें आधुनिक अध्ययन केंद्रों के रूप में विकसित करने की योजना बनाई गई। किताबों के साथ डिजिटल अध्ययन की भी सुविधा नई अटल लाइब्रेरी केवल पारंपरिक पुस्तकालय नहीं होंगी, बल्कि इन्हें बहुआयामी ज्ञान केंद्र के रूप में विकसित किया जाएगा। यहां स्कूली पाठ्यक्रम की पुस्तकों के अलावा प्रतियोगी परीक्षाओं की तैयारी से जुड़ी सामग्री, सामान्य ज्ञान, व्यक्तित्व विकास, सूचना प्रौद्योगिकी, कौशल विकास तथा बच्चों के लिए विशेष साहित्य उपलब्ध कराया जाएगा इसके साथ-साथ डिजिटल संसाधनों और आनलाइन अध्ययन की सुविधाएं भी विकसित की जाएंगी, ताकि ग्रामीण विद्यार्थी आधुनिक शिक्षा प्रणाली और डिजिटल लर्निंग से जुड़ सकें। सरकार का लक्ष्य है कि गांवों के छात्र भी शहरों की तरह अध्ययन संसाधनों तक आसानी से पहुंच बना सकें। ग्रामीण युवाओं को मिलेगा प्रतिस्पर्धी माहौल योजना का प्रमुख उद्देश्य उन विद्यार्थियों और युवाओं तक बेहतर अवसर पहुंचाना है, जो आर्थिक या भौगोलिक कारणों से शहरों के कोचिंग संस्थानों और अध्ययन केंद्रों तक नहीं पहुंच पाते। हरियाणा सरकार का मानना है कि यदि गांवों में ही गुणवत्तापूर्ण अध्ययन वातावरण उपलब्ध कराया जाए तो प्रतियोगी परीक्षाओं, कौशल विकास कार्यक्रमों और रोजगारोन्मुखी शिक्षा में ग्रामीण युवाओं की भागीदारी बढ़ेगी। अटल लाइब्रेरी के संचालन को प्रभावी बनाने के लिए प्रत्येक गांव में ‘अटल लाइब्रेरी प्रबंधन समिति’ गठित की जाएगी। इस समिति में सरपंच, ग्राम सचिव, स्थानीय शिक्षित नागरिकों तथा युवा संगठनों के प्रतिनिधियों को शामिल किया जाएगा। समिति पुस्तकालय के संचालन, अनुशासन व्यवस्था, पुस्तकों के रखरखाव और करियर मार्गदर्शन जैसी गतिविधियों की निगरानी करेगी। पहले भी शुरू हो चुकी हैं सैकड़ों लाइब्रेरी यह पहल राज्य सरकार के पहले से चल रहे अटल लाइब्रेरी अभियान का विस्तार है। इससे पहले 25 दिसंबर 2025 को अटल सुशासन दिवस के अवसर पर 250 अटल लाइब्रेरी शुरू की गई थीं। इसके बाद विभिन्न जिलों में 268 और लाइब्रेरी संचालित की गईं। अब 350 नई लाइब्रेरी शुरू होने के बाद यह नेटवर्क और अधिक व्यापक हो जाएगा रेवाड़ी में सबसे अधिक 49 लाइब्रेरी इस चरण में जिलावार आंकड़ों पर नजर डालें तो सबसे अधिक 49 अटल लाइब्रेरी रेवाड़ी जिले में शुरू की जाएंगी। इसके बाद करनाल में 45 और भिवानी में 36 नई लाइब्रेरी स्थापित होंगी। हरियाणा सरकार को उम्मीद है कि यह पहल ग्रामीण क्षेत्रों में शिक्षा की गुणवत्ता बढ़ाने के साथ-साथ युवाओं को नई दिशा देने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाएगी।  

श्रद्धालुओं के लिए खुशखबरी! कुरुक्षेत्र से सोमनाथ मंदिर तक शुरू हुई विशेष तीर्थ यात्रा ट्रेन

कुरुक्षेत्र. मुख्यमंत्री नायब सिंह सैनी ने रविवार को कुरुक्षेत्र रेलवे स्टेशन से भगवान शिव के प्रथम ज्योतिर्लिंग सोमनाथ मंदिर गुजरात के दर्शन के लिए श्रद्धालुओं को लेकर जाने वाली विशेष ट्रेन को हरी झंडी दिखाकर रवाना किया। इस दौरान उन्होंने कहा कि कुरुक्षेत्र से सोमनाथ महादेव के दर्शन के लिए विशेष ट्रेन को रवाना करना उनके लिए परम सौभाग्य की बात है। सोमनाथ मंदिर का इतिहास भारत की आस्था, धैर्य और स्वाभिमान का प्रतीक रहा है। उन्होंने बताया कि सोमनाथ मंदिर के पुनर्निर्माण के 75 वर्ष पूरे होने के उपलक्ष्य में देशभर में सोमनाथ स्वाभिमान पर्व मनाया जा रहा है, जो जनवरी 2027 तक चलेगा। इस अवसर पर प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी की उपस्थिति में राष्ट्रीय स्तर पर कार्यक्रम आयोजित किए गए हैं, जबकि हरियाणा में पिहोवा स्थित अरुणाय संगमेश्वर महादेव मंदिर में राज्य स्तरीय आयोजन हुआ। उन्होंने कहा कि केंद्र और राज्य सरकार का उद्देश्य है कि कोई भी श्रद्धालु आर्थिक अभाव के कारण तीर्थ यात्रा से वंचित न रहे। इसी सोच के तहत मुख्यमंत्री तीर्थ यात्रा योजना चलाई जा रही है। इस योजना के तहत पहले भी अयोध्या धाम, प्रयागराज और श्री हजूर साहिब नांदेड़ के लिए विशेष रेल एवं बस सेवाएं संचालित की जा चुकी हैं। मुख्यमंत्री ने रेलवे विभाग तथा आयोजन से जुड़े अधिकारियों का धन्यवाद करते हुए कहा कि श्रद्धालु भगवान सोमनाथ के समक्ष हरियाणा और देश की सुख-समृद्धि तथा खुशहाली के लिए प्रार्थना करें। कार्यक्रम में बड़ी संख्या में श्रद्धालु एवं गणमान्य लोग उपस्थित रहे।

मुख्य सचिव पद की दौड़ तेज, सुमिता मिश्रा बनाम सुधीर राजपाल पर टिकी निगाहें

जालंधर. हरियाणा के मुख्य सचिव अनुराग रस्तोगी का सेवा-विस्तार 30 जून को समाप्त होने जा रहा है। ऐसे में 1990 बैच के भारतीय प्रशासनिक सेवा (आईएएस) के अधिकारियों सुमिता मिश्रा और सुधीर राजपाल को उनके उत्तराधिकारी के रूप में प्रमुख दावेदार माना जा रहा है। सूत्रों ने रविवार को यह जानकारी दी। सुमिता मिश्रा वर्तमान में राजस्व एवं आपदा प्रबंधन विभाग में वित्तीय आयुक्त हैं जबकि सुधीर राजपाल अतिरिक्त मुख्य सचिव (गृह) के पद पर कार्यरत हैं। सूत्रों के अनुसार, दोनों अधिकारी राज्य के शीर्ष प्रशासनिक पद के लिए प्रमुख दावेदारों में शामिल हैं। पूर्व में हालांकि यह देखा गया है कि राज्य के शीर्ष नौकरशाही पद पर नियुक्ति हमेशा केवल वरिष्ठता के आधार पर नहीं की गई है। पिछले वर्ष केंद्र सरकार ने हरियाणा के मुख्य सचिव अनुराग रस्तोगी को एक वर्ष का सेवा-विस्तार प्रदान किया था। उनका कार्यकाल 30 जून, 2025 को समाप्त होना था। जानकारी हो कि रस्तोगी 1990 बैच के आईएएस अधिकारी हैं। फरवरी 2025 में हरियाणा की भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) सरकार ने रस्तोगी को राज्य का नया मुख्य सचिव नियुक्त किया था। रस्तोगी को मुख्य सचिव का पद उस समय मिला था जब 1989 बैच के आईएएस अधिकारी एवं तत्कालीन मुख्य सचिव विवेक जोशी निर्वाचन आयुक्त नियुक्त किए गए थे।  

दीनदयाल लाडो लक्ष्मी योजना: 80% से अधिक अंक पर छात्रों की माताओं को हर महीने 2100 रुपये

हिसार  हरियाणा विद्यालय शिक्षा बोर्ड व सीबीएसई से मान्यता प्राप्त सरकारी स्कूलों में पढ़ने वाले बच्चे 10वीं-12वीं की परीक्षा में 80 प्रतिशत या इससे अधिक अंक प्राप्त किए हैं तो मां को दीनदयाल लाडो लक्ष्मी योजना का लाभ मिलेगा। इस योजना के तहत महिलाओं को हर माह 2100 रुपये की आर्थिक सहायता राशि दी जाएगी। इसके लिए शिक्षा निदेशालय ने प्रदेश के 148 पीएमश्री व माडल संस्कृति स्कूलों की लिस्ट जारी की है। मुख्यालय ने आदेश दिए हैं कि सूची में शामिल स्कूलों में पढ़ने वाले उन विद्यार्थियों की लिस्ट तैयार की जाए जिन्होंने इस साल 10वीं-12वीं कक्षा में 80 प्रतिशत व इससे अधिक अंक प्राप्त किए हैं। हिसार जिले के 12 स्कूलों का नाम इसमें शामिल है। 17 प्वाइंटों पर मांगी होनहार की रिपोर्ट शिक्षा निदेशालय ने इसके लिए 17 बिंदुओं का एक फार्म तैयार किया है। जिसे समस्त डीईओ को जारी कर दिया गया है। प्रति कालम में होनहार के बारे में पूछा गया है, जिसमें नाम, पता, स्कूल का नाम, प्राप्त अंक, जन्म सहित अन्य बिंदुओं पर रिपोर्ट मांगी गई है। उपरोक्त फार्म को कक्षा टीचर व स्कूल मुखिया की तरफ से सत्यापित कर जिला शिक्षा अधिकारी कार्यालय को भेजनी होगी। जिसके बाद रिपोर्ट मुख्यालय भेजी जाएगी। प्रदेश स्तर पर स्कूलों की संख्या अंबाला से 8 स्कूल, भिवानी से 7 स्कूल, चरखी दादरी से 3 स्कूल, फरीदाबाद से 5 स्कूल, फतेहाबाद से 6, गुरुग्राम से 4, हिसार से 12, झज्जर से 7, जींद से 7, कैथल से 6 स्कूल, करनाल से 8, कुरुक्षेत्र से 5, नूंह से 12 स्कूल, पलवल से 7, पंचकूला से 6 स्कूल, पानीपत से 6 स्कूल, रेवाड़ी से 5 स्कूल, रोहतक से 6 स्कूल, सिरसा से 7 स्कूल, सोनीपत से 7 स्कूल और यमुनानगर से 9 स्कूल शामिल हैं, जो कि सरकारी स्कूल की श्रेणी में है।   मुख्यालय की ओर से हमें पत्र मिला था। जिसमें हमसे पीएमश्री व माडल संस्कृति स्कूलों में पढ़ने वाले उन बच्चों के नाम मांगे गए थे, जिन्होंने 10वीं व 12वीं परीक्षा में 80 प्रतिशत व इससे अधिक अंक प्राप्त किए हो। बीईओ को आदेश जारी कर दिए गए हैं।     – रामरतन, जिला शिक्षा अधिकारी, हिसार  

20 रुपये में होगी खाद्य पदार्थों की जांच, मोबाइल लैब्स सड़क पर उतरेंगी

करनाल प्रदेश में खाद्य पदार्थों में मिलावट करने वालों के खिलाफ जल्द ही बड़ा अभियान शुरू होगा। खाद्य एवं औषधि प्रशासन विभाग (एफडीए) ने खाद्य जांच व्यवस्था को मजबूत करने के लिए व्यापक योजना तैयार की है। इसके तहत प्रदेश में आठ नई खाद्य पदार्थ जांच प्रयोगशालाएं स्थापित की जाएंगी। साथ ही आधुनिक उपकरणों से लैस मोबाइल जांच प्रयोगशालाएं भी सड़कों पर उतरेंगी, जहां आम नागरिक मात्र 20 रुपये में अपने खाद्य पदार्थों की गुणवत्ता की जांच करा सकेंगे। विश्व खाद्य सुरक्षा दिवस के उपलक्ष्य में खाद्य एवं औषधि प्रशासन विभाग के प्रदेश के एकमात्र नामित अधिकारी पृथ्वी सिंह ने दैनिक जागरण से विशेष बातचीत की। एनसीआर में 55 करोड़ से मजबूत होगा जांच तंत्र वर्तमान में विभाग के पास सिर्फ दो प्रयोगशालाएं हैं। इसी वर्ष दो नई प्रयोगशालाएं और शुरू की जाएंगी। अगले पांच वर्षों में पूरे प्रदेश में स्वीकृत सभी प्रयोगशालाओं का नेटवर्क तैयार करने का लक्ष्य है। केंद्र सरकार ने राष्ट्रीय राजधानी क्षेत्र (एनसीआर) में खाद्य जांच सुविधाओं को सुदृढ़ करने के लिए 55 करोड़ रुपये का बजट जारी किया है। इससे फरीदाबाद, गुरुग्राम और रोहतक में अत्याधुनिक प्रयोगशालाएं स्थापित की जा रही हैं। इन परियोजनाओं पर तेजी से कार्य चल रहा है। पांच अन्य जिलों को भी मिली मंजूरी केंद्र और राज्य सरकार के संयुक्त सहयोग से नारनौल, हिसार, जींद, सिरसा और यमुनानगर में भी नई प्रयोगशालाएं बनाई जाएंगी। विभाग इन जिलों में भूमि की तलाश की जा रही है। भूमि उपलब्ध होते ही निर्माण प्रक्रिया शुरू कर दी जाएगी। सबसे पहले हिसार में कार्य आरंभ किए जाने की योजना है। करनाल स्थित प्रयोगशाला को भी अत्याधुनिक स्वरूप दिया जा रहा है। इसके लिए करीब 25 करोड़ रुपये के आधुनिक उपकरण खरीदे जा रहे हैं। खरीद प्रक्रिया अंतिम चरण में है। नई व्यवस्था के तहत प्रयोगशाला में सूक्ष्मजीव विज्ञान (माइक्रोबायोलाजी) अनुभाग स्थापित किया जाएगा। इसके अलावा उच्च क्षमता वाली आधुनिक मशीनें लगाई जाएंगी, जो खाद्य पदार्थों में मौजूद अत्यंत सूक्ष्म स्तर की मिलावट का भी पता लगाने में सक्षम होंगी। गांव-गांव पहुंचेगी जांच सुविधा विभाग आम लोगों को सीधे इस अभियान से जोड़ेगा। इसके लिए अत्याधुनिक तकनीक से सुसज्जित मोबाइल खाद्य प्रयोगशालाएं तैयार की जा रही हैं। इन मोबाइल वैन के लिए निविदा प्रक्रिया जारी है। मोबाइल प्रयोगशालाओं के संचालन के बाद नागरिक अपने घरों में उपयोग होने वाले दूध, दाल, मसाले और अन्य खाद्य पदार्थों के नमूनों की मौके पर ही जांच करा सकेंगे। इसके लिए सिर्फ 20 रुपये का शुल्क लिया जाएगा। जांच सुविधा लोगों तक पहुंचने से मिलावटखोरों पर प्रभावी अंकुश लगाया जा सकेगा। साथ ही खाद्य सुरक्षा को नई मजबूती मिलेगी। जानिये सैंपल फेल होने का अर्थ नामित अधिकारी पृथ्वी सिंह ने कहा कि प्रदेश में पांच वर्षों के दौरान फेल हुए 4607 सैंपलों का मतलब सीधे तौर पर जहर या जानलेवा मिलावट होना नहीं है। इनमें से अधिकतर सैंपल तकनीकी कमियों के कारण सब-स्टैंडर्ड (अवमानक) श्रेणी में आते हैं। उदाहरण के लिए, यदि दूध में निर्धारित फैट छह प्रतिशत की जगह 5.9 प्रतिशत मिलता है या पनीर में तय मानक से नमी ज्यादा पाई जाती है, तो वह फेल माना जाता है। मिलावट का यह औसत पूरे देश में लगभग एक समान है। सरकारी लैब में कुछ एडवांस टेस्टों जैसे फसलों पर होने वाले पेस्टिसाइड/केमिकल स्प्रे को पकड़ने की आधुनिक मशीनें नहीं हैं। भारी बजट खर्च करके, एक-एक सैंपल की प्रामाणिक जांच के लिए ₹30 हजार रुपये तक फीस देकर बड़ी निजी लैब से टेस्ट करवाते हैं।