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रसोई गैस किल्लत से स्ट्रीट फूड महंगा, रेट में 10–12% तक बढ़ोतरी

पटना  बिहार की राजधानी पटना में होटल, ढाबा और स्ट्रीट फूड व्यवसाय से जुड़े लोगों के लिए मुश्किलें बढ़ गई हैं। मार्च महीने की शुरुआत से ही व्यावसायिक गैस सिलेंडरों की सप्लाई चेन प्रभावित हुई है, जिसका सीधा असर अब शहर की रसोई पर दिखने लगा है। होटल, रेस्टोरेंट, ढाबों और स्ट्रीट फूड विक्रेताओं की मुश्किलें बढ़ गई है। कमर्शियल सिलेंडर की कीमत में बढ़ने से कोयला-लकड़ी के सहारे रेस्टोरेंट होटल होने लगे हैं। जो होटल, रेस्टोरेंट ईरान-अमेरिका जंग शुरू होने के पहले से व्यावसायिक गैस सिलेंडर का उठाव कर रहे थे। इनको भी उनके पूर्व की मांग का 70% ही आपूर्ति की जा रही है। मतलब 30% सिलेंडर के बदले उन्हें वैकल्पिक ऊर्जा साधनों लकड़ी- कोयला भट्टी, इंडक्शन का इस्तेमाल करना पड़ रहा है। पॉकेट पर सीधा वार, खानपान की नई कीमतें गैस की कीमत बढ़ने से 5 रुपए की रोटी 7 रुपए की हो गई है। छोटी दुकानों में 10 रुपए का समोसा अब 15 से 20 रुपए पीस मिल रहा है। एलपीजी की कीमत बढ़ने और नहीं मिलने से स्ट्रीट वेंडरों पर दोहरी मार पड़ी है। चाय की कीमतों में इजाफा हुआ है। चाउमीन वाले 5 से 10 कीमत बढ़ा दिए हैं। इनका कहना है कि ब्लैक में खरीदना नहीं चाहते और गैस खत्म होने के बाद नया सिलेंडर मिलने तक दुकान बंद करनी पड़ती है।     रोटी: पहले 5 रुपए में मिलने वाली रोटी अब 7 रुपए की     समोसा: 10 रुपए वाला समोसा अब बाजार में 15-20 रुपए की     चाय: 10 रुपए से बढ़कर 15-20 रुपए तक पहुंच गई     चाउमीन: दाम में 5-10 रुपए तक का इजाफा देखा जा रहाकु     खाने-पीने की चीजों में औसतन 10-12 प्रतिशत तक की बढ़ोतरी छोटे कारोबारियों की हालत को और भी खराब इस क्राइसिस से छोटे कारोबारियों की हालत तो और भी खराब है। एक चाय विक्रेता ने बताया कि चाय की कीमत पहले ही दस रुपए से बढ़कर 15 रुपए की गई। कुछ दुकानदार 20 रुपए भी कर रहे हैं। लेकिन इससे ग्राहकों की संख्या में कमी आने लगी है। अगर ग्राहकों की संख्या में कमी आई तो कारोबार समेटने या कोई दूसरा रोजगार करने पर विचार करेंगे। इससे खाने-पीने के सामानों की कीमतों में कम से कम 10 से 12 प्रतिशत तक इजाफा तय है। मिठाइयों से लेकर रेस्टोरेंटों के मैन्यू की कीमतों, हॉस्टल के मेस के मैन्यू से लेकर स्ट्रीट फूड तक सब कुछ महंगा लग रहा है। कोयले की मांग बढ़ने से कीमत में इजाफा एलपीजी किल्लत से कोयले की कीमतों में भी इजाफा हुआ है। 18 से 20 रुपए किलो बिकने वाला कोयला की कीमत 30 से 40 रुपए प्रति किलो तक पहुंच गई है। अच्छे और गुणवत्ता वाले कोयले की कीमत इससे भी अधिक लगाई जा रही है। कोयले को लेकर दुकानदार कोयले के थोक व्यापारियों के यहां एडवांस बुकिंग तक करने लगे है। लकड़ी के कोयले की कीमत 40 से 50 रुपए किलो के बीच पहुंच गई है। स्ट्रीट वेंडरों के रोजी-रोजगार पर असर पटना के ढाबों और स्ट्रीट वेंडरों के पास पांच किलोग्राम के छोटा गैर सब्सिडी प्राप्त गैस सिलेंडरों के साथ-साथ घरेलू एलपीजी गैस सिलेंडर है। स्ट्रीट वेंडरों द्वारा घरेलू गैस सिलेंडर का उपयोग करना अवैध है। लेकिन, पटना की छोटी दुकानों में सड़कों पर घरेलू गैस सिलेंडरों का धड़ल्ले से उपयोग हो रहा है। कंकड़बाग में चाउमिन विक्रेता ने बताया कि छोटा गैस सिलेंडर महंगा भी पड़ता है। इसमें वैसा ताव नहीं मिलता है जैसा ताव 14.2 किलोग्राम गैस सिलेंडर में मिलता है। इसलिए हम मजबूरी में घरेलू गैस सिलेंडर का ही उपयोग ठेला पर कर रहे है। ईरान-अमेरिका युद्ध के पहले पटना में लगभग 5 हजार व्यावसायिक गैस सिलेंडर की खपत थी। ये फिलहाल 3000-3500 के बीच रह गई है। ईरान-अमेरिका युद्ध का साइड इफेक्ट बिहार एलपीजी वितरक संघ के महासचिव रामनरेश सिन्हा के मुताबिक ईरान-अमेरिका युद्ध के पहले पटना में लगभग 5 हजार व्यावसायिक गैस सिलेंडर की खपत थी। ये फिलहाल 3000-3500 के बीच रह गई है। पटना के होटलों- रेस्टोरेंटों में एक बार फिर से लकड़ी, कोयला की खपत में इजाफा हो गया है। पटना के रेस्टोरेंट कोयले और लकड़ी का इस्तेमाल करने लगे हैं।  

गैस एजेंसियों पर लंबी वेटिंग, दो दिन का ही बचा सिलेंडर स्टॉक

करनाल  एलपीजी सिलिंडरों के लिए लोगों को अब भी परेशानी का सामना करना पड़ रहा है। कई गैस एजेंसियों पर लोगों को बुकिंग के 15 दिन बाद भी घरेलू सिलिंडर की डिलीवरी नहीं मिल रही है। जब लोग पता करने एजेंसी पहुंचते हैं तो उन्हें कहा जाता है कि अब तक आपकी बुकिंग तिथि का स्लॉट शुरू नहीं हुआ है। स्थिति यह है कि कई एजेंसियों पर अब तक पांच या सात अप्रैल तक की बुकिंग की ही डिलिवरी दी जा रही है। करनाल में भगवाड़िया गैस एजेंसी और तरावड़ी व इंद्री की गैस एजेंसी समेत अन्य में इस समय सिलिंडर आपूर्ति की दिक्कत हो रही है। गीता, संतोष और अर्जुन ने बताया कि उन्होंने सिलिंडर बुक अप्रैल के पहले सप्ताह में कराया था अब तक डिलीवरी नहीं मिली। एजेंसी संचालकों से बात करते हैं तो कहा जाता है कि अभी पिछली बुकिंग की आपूर्ति की जा रही है, नंबर आने पर ही पर्ची जारी करके डिलीवरी दी जाएगी। 42 एजेंसियों के पास महज 17525 सिलिंडरों का स्टाॅक जिले में 42 गैस एजेंसी हैं, जिनके पास वीरवार को महज 17525 सिलिंडरों का स्टॉक है। खपत के अनुसार, यह स्टॉक महज दो दिन का ही है। हालांकि पीछे से रोजाना एजेंसियों में गाड़ी पहुंच रही है। वीरवार को 8182 घरेलू और 333 कॉमर्शियल सिलिंडरों की आपूर्ति दी गई। ट्रांजिट स्टॉक में 5211 सिलिंडर हैं। डीएफएससी मुकेश कुमार का कहना है कि लोगों को घबराने की जरूरत नहीं है, गैस की किल्लत नहीं आने दी जाएगी। यदि शर्त न लगती तो दो गुने से ज्यादा होती बुकिंग एलपीजी फेडरेशन के सदस्य सुभाष गर्ग का कहना है कि अब बुकिंग ज्यादा नहीं आ पा रही हैं। 25 दिन की शर्त से बुकिंग रुकी हैं। इससे जरूरतमंद को सिलिंडर जरूर और निर्धारित समय पर ही मिलेगा। यदि सरकार यह शर्त न लगाती तो वर्तमान समय में बुकिंग दोगुने से ज्यादा हो जाती। इसके बाद लोग घरों में सिलिंडर इकट्ठे कर लेते और किल्लत बढ़ जाती। उनकी एजेंसी में पांच दिन की वेटिंग चल रही है। सहायता के लिए हेल्पलाइन 0184-2285963 डीएफएससी ने बताया कि किसी भी समस्या या जानकारी के लिए नागरिक प्रशासन द्वारा जारी कंट्रोल रूम नंबर 0184-2285963 पर संपर्क कर सकते हैं। सरकार और प्रशासन पूरी तरह सतर्क है और जिले में आवश्यक वस्तुओं की निर्बाध आपूर्ति सुनिश्चित करने के लिए प्रतिबद्ध है।  

सिलेंडर की मारामारी, शादी समारोहों का मेन्यू तक घटा

नई दिल्ली शादियों का सीजन शुरू होते ही गैस सिलेंडर को लेकर मारामारी शुरू हो गई है। जिन घरों में विवाह समारोह हैं उनके लिए सिलेंडर का इंतजाम करना मुश्किल हो रहा है। एजेंसियों के चक्कर लगाने के बाद भी लोगों को व्यावसायिक सिलेंडर नहीं मिल रहे हैं। परेशान लोग पेट्रोलियम मंत्रालय तक शिकायत कर रहे हैं। ईरान-अमेरिका-इजरायल युद्ध शुरू होने से पहले एलपीजी की किल्लत नहीं थी। शादी या अन्य समारोह के लिए लोगों को व्यावसायिक सिलेंडर आसानी से मिल रहे थे। गैस एजेंसी संचालकों ने बताया कि लोग आकर शादी का कार्ड दिखाते थे और जरूरत के अनुसार व्यावसायिक सिलेंडर ले जाते थे। अब गैस कंपनियों की ओर से सख्ती कर दी गई है। मौजूदा समय में कनेक्शन धारकों को भी उनकी जरुरत का सत्यापन करने के बाद सिलेंडर दिए जा रहे हैं। किसी कनेक्शन धारक की औसत खपत अगर महीने में 10 सिलेंडर की है, तो उसे महज 6-7 सिलेंडर ही दिए जा रहे हैं। गैस एजेंसी संचालकों ने बताया कि शादी-समारोह के लिए व्यावसायिक गैस सिलेंडर सिर्फ शादी के कार्ड के आधार पर उपलब्ध करा पाना अब संभव नहीं हो पा रहा है। सोशल मीडिया के जरिये मंत्रालय को बता रहे समस्या सिलेंडर नहीं मिलने से परेशान लोग सोशल मीडिया प्लेटफार्म के जरिये अपनी शिकायतें गैस कंपनियों और मंत्रालय तक पहुंचा रहे हैं। किरण नाम के एक्स हैंडल से की गई शिकायत में बताया गया कि घर में शादी है, लेकिन गैस नहीं मिल रही है। ऐसे ही कई अन्य यूजर्स ने अपनी शिकायतें साझा की हैं। इन सभी शिकायतों पर उत्तर दिया गया है और गैस सिलेंडर दिलाने का प्रयास किया गया है। शादी के लिए सिलेंडर लेने के लिए लोग जनप्रतिनिधियों और अधिकारियों की भी मदद ले रहे हैं। छापेमारी में 2027 सिलेंडर जब्त कालाबाजारी को रोकने के लिए दिल्ली सरकार के विभिन्न विभागों ने अब तक 540 स्थानों पर छापेमारी की है। इसमें 2027 से ज्यादा सिलेंडर जब्त किए गए हैं और 44 एफआईआर दर्ज की गई हैं। उपभोक्ताओं की शिकायतों के निवारण के लिए विकास भवन स्थित खाद्य एवं नागरिक आपूर्ति विभाग में केंद्रीय नियंत्रण कक्ष स्थापित किया गया है। यहां पर शिकायत मिलने के बाद जांच के बाद कार्रवाई की जा रही है। पुलिस की टीमें भी गैस की कालाबाजारी करने वालों के खिलाफ सक्रिय हैं। सगाई-शादी में व्यंजनों की संख्या को कम करना पड़ा गैस सिलेंडर मिलने में हो रही परेशानी का असर अब शादी-विवाह जैसे बड़े आयोजनों पर साफ नजर आने लगा है। गैस की कमी के चलते लोगों को अपने कार्यक्रमों में व्यंजनों की संख्या कम करनी पड़ रही है। जिससे आयोजनों का स्वाद और रंग दोनों फीके पड़ते जा रहे हैं। ज्योति नगर निवासी महेश शर्मा ने बताया कि उनके बड़े बेटे आलोक की शादी 23 अप्रैल को तय है। 21 अप्रैल को सगाई का कार्यक्रम रखा गया है। उन्होंने बताया कि पहले सगाई के लिए करीब 25 व्यंजनों का मेन्यू तय किया गया था, लेकिन गैस की किल्लत के चलते अब इसमें कटौती करनी पड़ी है। महेश ने बताया कि इस बदलाव के लिए वधू पक्ष से भी सहमति ली गई, जिसके बाद उन्होंने भी शादी के मुख्य कार्यक्रम में सात-आठ व्यंजन कम करने का फैसला किया है। दिल्ली के बजाय गांव से करना पड़ रहा आयोजन राजधानी में रहने वाले उत्तराखंड के कुछ लोग शादी समारोह को एलपीजी संकट की वजह से गांव से करने का मन बना चुके हैं। उनका कहना है कि गैस सिलेंडर नहीं मिलने के कारण कैटरिंग संचालक अधिक रुपये की मांग कर रहे हैं। इससे आर्थिक बोझ बढ़ रहा है। आरके पुरम निवासी मोहित सिंह ने बताया कि उनकी बहन की शादी इस माह के आखिरी सप्ताह में है। काफी कोशिश के बाद भी सिलेंडर नहीं मिल रहा है। उन्होंने बताया कि जैसे ही एलपीजी का संकट शुरू हुआ, वैसे ही कैटरिंग संचालक ने अधिक रुपये की मांग कर दी। साथ ही मेन्यू में भी कटौती की बात की थी। ऐसे में उन्होंने बीते माह ही शादी समारोह का आयोजन अपने गांव में करने का निर्णय लिया है। उन्होंने बताया कि गांव में लकड़ी से खाना बनेगा, जिससे कोई परेशानी नहीं होगी। समारोह के लिए ऐसे मिल सकता है गैस सिलेंडर दिल्ली की एलपीजी डीलर्स एसोसिएशन के अध्यक्ष चंद्र प्रकाश ने बताया कि शादी के लिए व्यावसायिक गैस सिलेंडर लेने की प्रक्रिया में कोई बदलाव नहीं हुआ है। अब सिलेंडर तभी मिल पाएगा, जब डीलर्स के पास उपलब्धता होगी। सिलेंडर पाने के लिए शादी का कार्ड लेकर नजदीकी एलपीजी डीलर के कार्यालय जाकर वहां अस्थायी कनेक्शन लेना होगा। इसके बाद प्रत्येक सिलेंडर के लिए तय करीब 2500 रुपये सिक्योरिटी मनी जमा करानी होगी। गैस की कीमत अलग से देनी होगी। अगर डीलर के पास व्यावसायिक सिलेंडर उपलब्ध है, तो वे कार्ड के आधार पर ही सिलेंडर दे देंगे। सिलेंडर लौटाने पर सिक्योरिटी की रकम वापस हो जाएगी।

एलपीजी संकट की मार, रांची में चाय से लेकर समोसे तक सब कुछ हुआ महंगा, पीएनजी की बढ़ी डिमांड

रांची एलपीजी सिलेंडर की किल्लत की मार अब घर से लेकर दुकानों और संस्थानों पर दिखाई देने लगी है. झारखंड की राजधानी रांची में लोग अब एक बार फिर कोयलायुग में वापस लौटने लगे हैं. घरेलू रसोई गैस से लेकर लेकर कॉमर्शियल सिलेंडर मिलने में दिक्कतें आ रही है. इसका असर हर जगहों पर दिखने लगा है. छोटे-बड़े होटलों से लेकर स्ट्रीट फूड दुकानों और कॉलेज कैंटीनों पर भी खासा असर दिखने लगा है. सबसे बड़ा असर यह है कि खाने-पीने की चीजों के दामों में बढ़ोत्तरी हो गयी है. ऐसे में खाद्य से संबंधित व्यावसायिक कार्य करने वाले मालिक डीजल भट्टी, व्यावसायिक इलेक्ट्राॅनिक इंडक्शन, लकड़ी के चूल्हे का प्रयोग कर रहे हैं, ताकि लोगों को आसानी से सभी खाद्य पदार्थ उपलब्ध कराया जा सके.वहीं, कई होटल मालिकों ने ऐसे भोजन को परोसना बंद कर दिया है, जिसे पकाने में अधिक समय लग रहा है. इससे होटल व्यवसाय में भी फर्क पड़ गया है. कई होटलों, रेस्टूरेंटों और कैंटीन में वैकल्पिक के रुप में कोयला वाला चूल्हा अपना लिया है. कई जगहों पर सप्लाई हुई ठप गैस नहीं मिलने के कारण कई ठेले बंद हो गये हैं, तो कई लोकल ब्रेड, बिस्किट, नमकीन, सेव आदि बनाने वालों की सप्लाई पूरी तरह से ठप हो गयी है. जबकि, कुछ वैकल्पिक उपाय से सामानों का निर्माण भी कर रहे हैं. वहीं, जो होटल और ठेले खुले हैं, उन्होंने अपने-अपने सामानों की कीमतें बढ़ा दी हैं. ठेले पर बिकने वाला एक प्लेट इडली 20 रुपये से बढ़ कर 25 रुपये प्रति प्लेट, चालू चाय पांच की जगह सात रुपये और स्पेशल चाय 10 रुपये की जगह 12 रुपये, आठ रुपये का समोसा 10 रुपये हो गया है. इसी प्रकार, धीरे-धीरे अन्य सामानों की कीमतें भी बढ़ रही है. होटलों के मेन्यू में कटौती कॉमर्शियल सिलेंडर की किल्लत के कारण होटलों के मेन्यू में कटौती हो गयी है. होटल प्रताप रेसीडेंसी के प्रोपराइटर त्रिलोचन सिंह ने कहा कि पहले पनीर और चिकन के 10-12 आइटम बनाते थे. गैस की किल्लत के कारण अब मात्र दो-दो आइटम बना रहे हैं. न्यू राजस्थान कलेवालय के प्रोपराइटर निरंजन शर्मा ने कहा कि कोयला और डीजल भट्ठियों से काम कर रहे हैं. इसमें बहुत परेशानी आ रही है. स्टाफ को काम करने में दिक्कतें आ रही हैं. सिलेंडर की दिक्कतों के कारण कई आइटमों की वेराइटी घटा दी गयी है. पहले मिठाइयों की 40-45 वेराइटी रहती थी, अभी 15-20 वेराइटी बना रहे हैं. इसी तरह , नमकीन के आइटम 50 प्रतिशत कम हो गये हैं. खाने में चुनिंदा आइटम बना रहे हैं. वहीं, चाइनीज आइटम पूरी तरह से बंद हो गया है. सिलेंडर की जगह कोयला से हो रहा काम सिलेंडर नहीं मिलने के कारण छोटे-छोटे दुकानदार जैसे फास्ट फूड, मोमो, चाय बनाने वालों को परेशानी हो रही है. इससे कईयों का रोजगार प्रभावित हो गया है. सिलेंडर की दिक्कतों के कारण वे कोयला का प्रयोग कर रहे हैं. दुकानदारों का कहना है कि पहले एक बाेरा कोयला 200 रुपये में मिल रहा था. अब यह 350 रुपये में मिल रहा है. इसे चाय, पकौड़ी, धुसका, पकौड़ी आदि के दाम बढ़ गये है. स्ट्रीट फूड वालों से बातचीत डोरंडा निवासी सुनिता तिग्गा घाघरा बस्ती में चाय पकौड़ी , धुसका, चिकन पकौड़ा का ढेला लगाती थी. कहती हैं कि गैस नहीं मिलने के कारण दुकानें बंद करनी पड़ी. जो अब बंद करना पड़ा. कहती हैं कि गैस की एलपीजी समस्या के कारण दुकान बंद करनी पड़ी. इडली-डोसा में पांच से 10 रुपये की बढ़ोतरी दीपाटोली स्थित साउथ इंडियन स्टॉल में इडली में पांच रुपये की बढ़ोतरी कर दी गयी है. एक प्लेट इडली के दाम 20 रुपये से बढ़ कर 25 रुपये प्लेट हो गये हैं. वहीं, डोसा की कीमत 10 रुपये बढ़ा दी गयी है. प्रोपराइटर परमेश्वर प्रसाद ने कहा कि कोयले की बढ़ी कीमत के कारण व्यंजनों के दर में बढ़ोत्तरी हो गयी है. अब कोयले का प्रयोग अधिक करना पड़ रहा है. चाय की कीमतों में बढ़ोतरी क्यूरेस्टा अस्पताल, कोकर चौक के निकट चाय का स्टॉल लगाने वाले कनक हल्दर ने कहा कि गैस की कमी के कारण चाय की कीमत दो रुपये बढ़ानी पड़ी. चालू चाय पांच की जगह सात रुपये और स्पेशल चाय 10 रुपये की जगह 12 रुपये में बिक्री करनी पड़ रही है. पीएनजी की बढ़ गयी डिमांड वर्तमान में पीएनजी कनेक्शन की डिमांड बढ़ गयी है. हर दिन औसतन लगभग 100 नये उपभोक्ताओं द्वारा रजिस्ट्रेशन एवं सिक्योरिटी डिपोजिट जमा कराया जा रहा है. शहर में लोगों तक पीएनजी का कनेक्शन देने में मैनपावर के रुप में लगभग 50 लोग लगे हुए हैं. इससे हर दिन लगभग 60-75 कनेक्शन हो रहा है. वहीं, वर्तमान में कनेक्शन की संख्या बढ़ाने के लिए काम चल रहा है. इसके लिए मैनपावर को 150 किया जा रहा है. कनेक्शन की संख्या को बढ़ा कर हर दिन लगभग 200 से अधिक करने का लक्ष्य है. कॉलेज के हॉस्टल में विकल्प तैयार रांची के विभिन्न रेसिडेंशियल कॉलेज के हॉस्टल में हजारों छात्र-छात्रायें रहते हैं. जिनका खाना-पीना कॉलेज मेस और कैंटीन के माध्यम से होता है. फिलहाल सभी संस्थानों के हॉस्टल में पर्याप्त गैस सिलेंडर की व्यवस्था है. वर्तमान स्थिति को देखते हुए गैस संकट से निपटने के लिए विकल्प तैयार किये जा रहे हैं. बीआईटी मेसरा में तैयार हो रहा कोयला चूल्हा बीआईटी मेसरा में कुल 14 हॉस्टल हैं, जिनमें लगभग पांच हजार छात्र-छात्राएं रहते हैं. बीआइटी मेसरा के हॉस्टल मेस के लिए वैकल्पिक तैयारी करते हुए 25 टन कोयला मंगाया गया है. साथ ही चूल्हा भी बनाया जा रहा है. हालांकि, सभी हॉस्टल के मेस में पर्याप्त गैस सिलिंडर की सप्लाई हो रही है. संस्थान से मिली जानकारी के अनुसार सभी हॉस्टल में गैस सिलिंडर उपलब्ध हैं और मांग के अनुसार सप्लाई भी हो रही है. लेकिन भविष्य में किसी प्रकार के गैस संकट होने पर मेस पर असर न पड़े और मेस व्यवस्थित चले, इसकी तैयारी की गयी है. एनआईएएमटी रांची में लगाया गया कोयला के चूल्हा एनआईएएमटी रांची के छह हॉस्टल के लिए तीन मेस की व्यवस्था है. जिसमें लगभग 1,000 छात्र- छात्रायें खाना खाते हैं. यहां पर कॉमर्शियल सिलेंडर की सप्लाई बंद हो गयी है. घरेलू सि

500 की गैस हुई 1500 के पार, महंगाई और किल्लत से बेहाल हुए प्रवासी

चंदौली ईरान युद्ध को शुरू हुए एक महीने से ज्यादा का वक्त बीत गया है. एक तरफ जहां युद्ध थमने का नाम नहीं ले रहा है वहीं दूसरी तरफ इस जंग की वजह से भारत में एलपीजी संकट का दौर भी शुरू हो गया है. आलम यह है कि अब दिल्ली, मुंबई सहित गुजरात के शहरों में काम करने वाले यूपी-बिहार के लोग एलपीजी संकट के चलते अपने घरों को वापस लौट रहे हैं. 'आजतक' रिपोर्टर ने उत्तर प्रदेश के पंडित दीनदयाल उपाध्याय जंक्शन पर दिल्ली, मुंबई और गुजरात से बिहार की तरफ वापस जा रहे लोगों से बातचीत की. इस दौरान लोगों ने अपनी-अपनी कहानी बयां की… आपको बता दें कि यह तस्वीर दिल्ली-हावड़ा रेल रूट के सर्वाधिक व्यस्ततम रेलवे स्टेशनों में शुमार पंडित दीनदयाल उपाध्याय जंक्शन की है. नई दिल्ली से चलकर गुवाहाटी होते हुए सिलचर को जाने वाली पूर्वोत्तर संपर्क क्रांति एक्सप्रेस जब यहां पहुंची तो हमने इस ट्रेन में सवार कुछ ऐसे लोगों से बातचीत की जो एलपीजी संकट की वजह से वापस अपने गांव जा रहे थे. यहां पर हमारी मुलाकात बिहार के पूर्णिया जिले के रहने वाले मिथुन कुमार से हुई. मिथुन कुमार गुजरात के हजीरा में एक प्लांट में सरिया शटरिंग का काम करते हैं. मिथुन ने बताया कि मैं गुजरात से आ रहा हूं और यहां पर मैंनें इस ट्रेन को पकड़ा है. गुजरात में भी एलपीजी संकट है. जो गैस हम लोगों को 500 में मिल जाती थी अब वह सीधा ₹1500 में मिल रही है. वहां पर लगभग सभी लोग चूल्हे पर खाना पका रहे हैं. गैस की तंगी की वजह से हम लोग घर वापस जा रहे हैं. क्योंकि गैस की प्रॉब्लम हो रही है और खाना बनाने में दिक्कत हो रही है. जब हमने मिथुन कुमार से पूछा कि वापस कब जाएंगे तो उन्होंने बताया कि जब स्थिति सामान्य हो जाएगी और गैस उपलब्ध होने लगेगी तब वह अपने काम पर वापस जाएंगे. मिथुन ने बताया कि होटल में जो खाना मिल रहा था वह अभी काफी महंगा हो गया है. जो खाना ₹60 में मिलता था वह 100 से 150 रुपए में मिल रहा था. होटल भी बंद पड़ गया था. इसी ट्रेन में हमारी मुलाकात शाहिद आलम नाम के छात्र से हुई. शाहिद मोतिहारी के रहने वाले हैं और दिल्ली के न्यू अशोक नगर में रहकर पढ़ाई करते हैं. शाहिद ने बताया कि गैस न मिलने की वजह से काफी दिक्कत हो रही थी. हम लोग खाना बना नहीं पा रहे थे और होटल में खाना खाना पड़ता था. गैस संकट से होटल भी बंद हो गए. जो खाना हम लोगों को ₹100 मिलता था उसकी कीमत ₹200 और उससे भी ज्यादा हो गई. जहां हम रहते हैं वहां 1 किलो गैस की कीमत ₹450 हो गई है. इस प्रॉब्लम की वजह से हमारे बहुत से साथी हैं जो वापस अपने गांव जा रहे हैं. गैस को लेकर स्थिति काफी खराब है. सरकार की तरफ से कोई सुविधा नहीं मिल पा रही है. गैस की जबरदस्त ब्लैक मार्केटिंग हो रही है. वहीं, पूर्वोत्तर संपर्क क्रांति से ही यात्रा कर रहे बिहार के सुपौल जिला के रहने वाले सत्यनारायण ने बताया कि वह दिल्ली के नरेला में रहकर मजदूरी का काम करते हैं. गैस नहीं मिल रही थी. 1 किलो गैस का साढ़े तीन सौ रुपए मांग रहे थे लेकिन बावजूद इसकी गैस नहीं मिल रही. सत्यनारायण ने आगे बताया कि हमारे साथ के तकरीबन 50-60 आदमी हैं जो काम छोड़कर वापस अपने गांव जा रहे हैं. उन्होंने बताया कि जब तक गैस मिलना शुरू नहीं हो जाएगा तब तक हम लोग काम पर वापस नहीं जा पाएंगे. जलाने के लिए लकड़ी भी नहीं मिल रही है.  लकड़ी की कीमत भी काफी बढ़ गई है. हम लोगों को बहुत कठिनाई हो रही थी इसलिए हम सब वापस चल दिए कि जब तक गैस नहीं मिलेगा तब तक वापस नहीं आएंगे. इसी बीच बिहार के बेगूसराय के रहने वाले प्रवीण से मुलाकात हुई जो दिल्ली में रहकर मजदूरी का काम करते हैं. प्रवीण बताते हैं की मजदूरी काम है और गैस नहीं मिलने की वजह से महंगाई भी बढ़ गई है. जिसकी वजह से हम लोग वापस जा रहे हैं. वहां पर खाना बनाने में दिक्कत आ रही थी. पूर्वोत्तर संपर्क क्रांति में यात्रा कर रहे लोगों से बातचीत के बाद रिपोर्टर ने मुंबई से आसनसोल जाने वाली ट्रेन में यात्रा कर रहे कुछ लोगों से बातचीत की. इस ट्रेन में यात्रा करने वाले लोगों ने भी वही कहानी दोहराई जो दिल्ली से बिहार वापस जा रहे हैं लोगों ने बताई थी. हमारी मुलाकात मुंबई आसनसोल एक्सप्रेस में यात्रा कर रहे मुन्ना मंडल नाम के एक कामगार से हुई. मुन्ना बिहार के भागलपुर जिला के रहने वाले हैं और मुंबई में रहकर मजदूरी का काम करते हैं. मुन्ना ने बताया कि हम लोग मुंबई में रहकर मजदूरी का काम करते हैं गैस नहीं मिल रहा है. जिसकी वजह से हम वापस जा रहे हैं. मुन्ना और उनके साथ ही किराए के मकान में रहते हैं और उनके मकान मालिक ने लकड़ी पर खाना बनाने से मना कर दिया. जिसकी वजह से मजबूर होकर इन लोगों को वापस अपने गांव जाना पड़ा. मुन्ना ने आगे बताया कि इस वजह से हम लोग वापस जा रहे हैं आखिर खाना बनाएंगे तो कैसे बनेंगे. हमारे साथ तकरीबन 20 आदमी हैं जो हम लोग वापस जा रहे हैं. मकान मालिक बोलता है कि मकान खराब हो जाएगा और लकड़ी पर खाना बनाने नहीं दे रहा है. मुन्ना ने बताया कि जब वहां पर सहूलियत से सब चीज मिलने लगेगा तो वापस जाएंगे. इसी ट्रेन से यात्रा कर रहे कटिहार के रहने वाले विकास कुमार मुंबई की एक कंपनी में बेलदार का काम करते हैं. विकास ने बताया कि विदेश में जंग की वजह से गैस नहीं मिल रहा है और हम लोगों को काफी दिक्कत हो रही थी. गैस हम लोगों को नहीं मिलेगा तो खाना कैसे बनाएंगे और ड्यूटी कैसे जाएंगे. हमारे साथ के बहुत लोग हैं जो अपने घरों को वापस लौट रहे हैं. इसी ट्रेन से यात्रा कर रहे मुन्ना कुमार से हमारी मुलाकात हुई. मुन्ना कुमार बिहार … Read more

मध्य प्रदेश में LPG संकट: गैस की कमी से ठंडी पड़ी रसोई, होटल-ढाबे बंद होने के कगार पर, 3 दीनदयाल रसोई हुई बंद

भोपाल  मध्य प्रदेश में एलपीजी गैस का गंभीर संकट सामने आ गया है। घरेलू रसोई से लेकर होटल-ढाबों तक चूल्हे ठंडे पड़ने लगे हैं। एक ओर घरेलू गैस सिलेंडर के लिए आम लोग घंटों लाइन में खड़े हैं, तो दूसरी ओर कमर्शियल सिलेंडर की सप्लाई लगभग बंद होने से होटल-रेस्टोरेंट और ढाबे बंद होने की कगार पर पहुंच गए हैं। इस संकट की बड़ी वजह अंतरराष्ट्रीय हालात को माना जा रहा है। Strait of Hormuz में तनाव और समुद्री मार्ग प्रभावित होने से भारत के एलपीजी आयात पर असर पड़ा है। भारत अपनी एलपीजी जरूरत का बड़ा हिस्सा आयात करता है, ऐसे में सप्लाई चेन पर दबाव बढ़ गया है। प्रदेश के कई शहरों-भोपाल, इंदौर, ग्वालियर, जबलपुर और उज्जैन-से गैस की किल्लत और आम लोगों की परेशानी की खबरें सामने आ रही हैं। राजधानी भोपाल में सबसे ज्यादा परेशानी राजधानी भोपाल में गैस संकट ने लोगों की रसोई पर सीधा असर डाला है। जहांगीराबाद, बोगदा पुल, कोहेफिजा, टीटी नगर और शिवाजी नगर जैसे इलाकों में सिलेंडर की डिलीवरी में देरी हो रही है। जहांगीराबाद की निवासी शीबा खान बताती हैं कि 13 मार्च को मोबाइल पर गैस डिलीवरी का मैसेज आया था, लेकिन तीन दिन बाद भी सिलेंडर नहीं पहुंचा। उन्होंने बताया कि मजबूरी में रिश्तेदारों के यहां खाना बनाना पड़ रहा है और बच्चों को भी परेशानी हो रही है। इसी तरह बोगदा पुल निवासी मोहम्मद रियाज ने गैस नहीं मिलने पर इंडक्शन चूल्हा खरीद लिया। उनका कहना है कि तीन दिन तक घर में गैस नहीं थी, इसलिए बिजली से खाना बनाना पड़ रहा है। शहर में इंडक्शन चूल्हों की मांग अचानक बढ़ गई है और दुकानदारों के अनुसार बिक्री में लगभग 70-80 प्रतिशत तक उछाल आया है। एजेंसियों के बाहर लंबी कतारें गैस एजेंसियों के बाहर सुबह से ही लोगों की लंबी लाइनें लग रही हैं। कई जगह ऑनलाइन बुकिंग सिस्टम भी दबाव के कारण धीमा या क्रैश हो रहा है। लोगों का कहना है कि पहले जहां सिलेंडर 2-3 दिन में मिल जाता था, अब 5-7 दिन तक इंतजार करना पड़ रहा है। इसके अलावा नए नियम के अनुसार अब सिलेंडर की अगली बुकिंग 25 दिन बाद ही संभव है, जिससे परेशानी और बढ़ गई है। कमर्शियल सिलेंडर संकट से होटल-ढाबे संकट में कमर्शियल गैस सिलेंडर की सप्लाई लगभग ठप होने से होटल और ढाबों पर सबसे ज्यादा असर पड़ा है। प्रदेश में 19 किलो वाले सिलेंडर की सप्लाई पिछले कई दिनों से प्रभावित बताई जा रही है। ऑयल कंपनियों-Indian Oil Corporation, Bharat Petroleum और Hindustan Petroleum-के अनुसार उपलब्ध सीमित स्टॉक को प्राथमिकता के आधार पर अस्पताल, रेलवे, सेना और अन्य आपात सेवाओं के लिए सुरक्षित रखा गया है। भोपाल होटल एसोसिएशन के अध्यक्ष तेजकुल पाल सिंह पाली का कहना है कि राजधानी में करीब 1500 से अधिक होटल और रेस्टोरेंट हैं, जहां रोजाना हजारों कमर्शियल सिलेंडर की जरूरत होती है। जिनके पास थोड़ा स्टॉक है, वे कुछ दिन काम चला रहे हैं, लेकिन अगर सप्लाई जल्द शुरू नहीं हुई तो कई होटल बंद हो सकते हैं। ग्वालियर में गैस सिलेंडर की किल्लत के कारण चार में से तीन दीनदयाल रसोई बंद हो गई हैं। इससे जरूरतमंदों को मिलने वाले भोजन की थालियों की संख्या में भारी गिरावट आई है। पहले जहां औसतन 3700 थालियां वितरित होती थीं, वहीं अब यह संख्या घटकर मात्र 1300 रह गई है। वर्तमान में केवल अंतरराज्यीय बस स्टैंड पर स्थित दीनदयाल रसोई ही चालू है। यहीं से सीमित मात्रा में भोजन तैयार कर इंटक मैदान भेजा जा रहा है। झांसी रोड बस स्टैंड की रसोई भी पूरी तरह बंद हो चुकी है। यदि सिलेंडर की आपूर्ति में जल्द सुधार नहीं हुआ, तो अंतरराज्यीय बस स्टैंड की रसोई भी बंद हो सकती है। कई छोटे ढाबों और चाय-नाश्ते की दुकानों ने लकड़ी या कोयले के चूल्हे का सहारा लेना शुरू कर दिया है, लेकिन यह तरीका महंगा और असुविधाजनक है। अन्य शहरों में भी बढ़ी परेशानी सिर्फ भोपाल ही नहीं, बल्कि इंदौर, ग्वालियर, जबलपुर और उज्जैन में भी कमर्शियल गैस की किल्लत की शिकायतें सामने आ रही हैं। व्यापारी संगठनों ने चेतावनी दी है कि यदि जल्द सप्लाई बहाल नहीं हुई तो हजारों लोगों की रोजी-रोटी प्रभावित हो सकती है। सरकार का दावा: घरेलू गैस की कमी नहीं मध्य प्रदेश के मुख्यमंत्री मोहन यादव ने कहा है कि प्रदेश में घरेलू एलपीजी का पर्याप्त स्टॉक मौजूद है। उनके अनुसार पैनिक बुकिंग और अफवाहों के कारण वितरण प्रणाली पर दबाव बढ़ गया है। सरकार ने कालाबाजारी रोकने के लिए सख्ती बढ़ा दी है। हाल ही में भोपाल में एक बंद गोदाम से सैकड़ों सिलेंडर जब्त किए गए। जिला कलेक्टरों को भी स्टॉक की निगरानी और अवैध बिक्री पर कार्रवाई के निर्देश दिए गए हैं। आम आदमी और छोटे कारोबार पर असर एलपीजी संकट का असर सबसे ज्यादा आम लोगों और छोटे कारोबारियों पर दिखाई दे रहा है।     कई घरों में खाना पकाने में मुश्किल     महिलाएं और बच्चे सबसे ज्यादा प्रभावित     चाय-नाश्ता और छोटे ढाबों की कमाई ठप     ब्लैक मार्केट में सिलेंडर की कीमत कई गुना तक बढ़ी विशेषज्ञों का कहना है कि यदि अंतरराष्ट्रीय सप्लाई चेन जल्द सामान्य नहीं हुई तो स्थिति और गंभीर हो सकती है। संकट सिर्फ गैस का नहीं, रोजी-रोटी का एलपीजी की यह किल्लत अब सिर्फ रसोई तक सीमित नहीं रही। यह लाखों परिवारों की रोजी-रोटी और छोटे कारोबार की अर्थव्यवस्था को प्रभावित करने लगी है। लोग अब इंडक्शन और वैकल्पिक ऊर्जा स्रोतों की ओर बढ़ रहे हैं, लेकिन यह अस्थायी समाधान ही है। अगर वैश्विक हालात जल्द नहीं सुधरे, तो आने वाले दिनों में गैस संकट और गहरा सकता है।

LPG संकट से बेहाल MP: होटल में गैस की कमी, मेन्यू में बदलाव; घरेलू सिलेंडर के लिए 8 घंटे की लंबी कतार

भोपाल   प्रदेश के कई जिलों में घरेलू गैस की किल्लत अब आम लोगों की परेशानी बढ़ाने लगी है. शहडोल से लेकर जबलपुर तक गैस एजेंसियों के बाहर सुबह से ही लंबी‑लंबी कतारें देखने को मिल रही हैं. हालात ऐसे हैं कि लोग घंटों लाइन में खड़े रहने के बावजूद सिलेंडर मिलने का इंतजार करते नजर आ रहे हैं. कई जगहों पर एजेंसियों के बाहर भीड़ सड़कों तक फैल गई है, जिससे रोजमर्रा का कामकाज भी प्रभावित हो रहा है. उपभोक्ताओं का कहना है कि समय पर गैस नहीं मिलने से घरों में खाना बनाना तक मुश्किल हो गया है. वहीं प्रशासन और गैस एजेंसी संचालक गैस आपूर्ति सामान्य होने का दावा कर रहे हैं, लेकिन जमीनी हालात इन दावों से अलग तस्वीर पेश कर रहे हैं. अंतरराष्ट्रीय हालात और आपूर्ति में रुकावट को भी इस संकट की एक बड़ी वजह माना जा रहा है. बढ़ती भीड़ और लगातार मिल रही शिकायतों ने प्रशासन की चिंता भी बढ़ा दी है. प्रदेश में रसोई गैस (LPG) का संकट बढ़ता जा रहा है। छह दिन से 50 हजार से ज्यादा होटल और रेस्टॉरेंट को कॉमर्शियल सिलेंडर नहीं मिले हैं। भोपाल, इंदौर के कई होटल, रेस्टॉरेंट में गैस खत्म हो गई है। इसलिए वहां मेन्यू बदला है। कई रेहड़ी भी बंद हो गई है। इधर, घरेलू सिलेंडर को लेकर पूरे प्रदेश में मारामारी है। कॉमर्शियल के साथ घरेलू गैस सिलेंडर को लेकर भी मारामारी मची हुई है। भोपाल, इंदौर, उज्जैन, जबलपुर, ग्वालियर समेत अन्य शहरों में बुकिंग के बावजूद सिलेंडर नहीं मिल रहा है। छोटे बच्चे हो या बुजुर्ग, सब घंटों लाइन में लग रहे हैं। भोपाल में ऐसी तस्वीरें आम हो गई है। शनिवार को 8 घंटे तेज धूप में खड़े होने के बाद सिलेंडर नसीब हुआ। रविवार को भी किल्लत बनी रहेगी। ग्वालियर में हालात सामान्य: प्रशासन ने जारी किए हेल्पलाइन नंबर; कहा– अफवाहों से बचें ग्वालियर जिले में हालात सामान्य हैं। घरेलू गैस सिलेंडर की आपूर्ति को लेकर फैली आशंकाओं के बीच कलेक्टर रुचिका चौहान ने स्पष्ट किया है कि ग्वालियर में गैस का पर्याप्त स्टॉक उपलब्ध है। खाद्य विभाग की टीम निरंतर गैस एजेंसियों का निरीक्षण कर रही है। सभी संचालकों को निर्देश दिए गए हैं कि वे उपभोक्ताओं को सही जानकारी दें। स्टॉक व डिलीवरी में पारदर्शिता बरतें। कलेक्टर ने साफ किया है कि जिले में गैस की कोई कमी नहीं है, इसलिए नागरिक घबराएं नहीं। पुलिस की मौजूदगी में सिलेंडर विरतण इधर घरेलू गैस सिलेंडर को लेकर भी प्रदेश के कई शहरों में अफरा-तफरी का माहौल है। राजधानी भोपाल, इंदौर सहित कई जिलों में लोग गैस एजेंसियों के बाहर सुबह से ही कतार में खड़े दिखाई दे रहे हैं। बुजुर्गों से लेकर महिलाएं और युवा तक सिलेंडर के लिए भागदौड़ कर रहे हैं। कहीं लोग अपने खाली सिलेंडर लेकर घंटों लाइन में खड़े हैं तो कहीं पुलिस की मौजूदगी में गैस सिलेंडरों का वितरण किया जा रहा है, ताकि किसी तरह की अव्यवस्था या विवाद की स्थिति न बने। शनिवार को भोपाल में कई गैस एजेंसियों और गोदामों के बाहर पुलिस की गाड़ियां लगातार गश्त करती नजर आईं। प्रशासन को आशंका थी कि गैस की कमी को लेकर भीड़ में तनाव या हंगामा हो सकता है। शहर की करीब 23 गैस एजेंसियों के बाहर उपभोक्ताओं की भीड़ लगी रही। इस बीच गैस बुकिंग का ऑनलाइन सर्वर भी ठप बताया जा रहा है। उपभोक्ताओं का कहना है कि बुकिंग कराने के बावजूद उन्हें 7 से 8 दिन तक सिलेंडर नहीं मिल पा रहा, जिससे घरेलू रसोई भी प्रभावित हो रही है। जमाखोरी और कालाबाजारी पर होगी कार्रवाई इस बीच राज्य सरकार ने स्थिति को लेकर सफाई दी है। सरकार का कहना है कि प्रदेश में एलपीजी की आपूर्ति सामान्य है और लोगों को घबराने की जरूरत नहीं है। साथ ही प्रशासन को निर्देश दिए गए हैं कि जमाखोरी और कालाबाजारी करने वालों के खिलाफ सख्त कार्रवाई की जाए। इसी को लेकर प्रदेश के कई जिलों में कलेक्टरों को भी निगरानी के निर्देश दिए गए हैं, ताकि वितरण व्यवस्था पर नियंत्रण रखा जा सके। भोपाल में एजेंसियों पर उपभोक्ताओं की कतारें एलपीजी संकट की स्थिति को समझने के लिए द मूकनायक की टीम शनिवार सुबह भोपाल के जिंसी चौराहे स्थित इंडेन गैस एजेंसी पहुंची। यहां सुबह से ही उपभोक्ताओं की लंबी कतार लगी हुई थी। कई लोग अपने खाली सिलेंडर लेकर लाइन में खड़े थे, तो कुछ लोग सिर्फ बुकिंग नंबर लगवाने के लिए एजेंसी के बाहर इंतजार कर रहे थे। लाइन में खड़े लोगों से बातचीत करने पर सामने आया कि गैस बुकिंग की प्रक्रिया भी बड़ी समस्या बन चुकी है। एक ग्राहक ने बताया कि वह पिछले तीन दिनों से गैस सिलेंडर का नंबर लगाने की कोशिश कर रहा है, लेकिन ऑनलाइन बुकिंग नहीं हो पा रही है। उसने बताया कि आज वह सुबह से ही एजेंसी के बाहर लाइन में खड़ा है, ताकि किसी तरह सिलेंडर का नंबर लग सके। जब ऑन कैमरा बुकिंग नम्बर पर ग्राहक ने किया कॉल एक युवक ने मौके पर ही गैस बुकिंग के लिए दिए गए फोन नंबर पर कॉल करके देखा। कॉल करने पर उसे सूचना मिली कि सेवाएं फिलहाल इनकमिंग के लिए बंद हैं। युवक ने बताया कि वह लगातार वेबसाइट और फोन के जरिए बुकिंग करने की कोशिश कर रहा था, लेकिन न तो वेबसाइट काम कर रही है और न ही कॉल के जरिए नंबर लग पा रहा है। मजबूर होकर वह सुबह से एजेंसी के बाहर लाइन में खड़ा है, ताकि सिलेंडर के लिए अपना नंबर दर्ज करा सके। समस्या हो तो यहां करें फोन (कंट्रोल रूम) आम नागरिकों की सुविधा और बुकिंग से जुड़ी समस्याओं के तुरंत निराकरण के लिए जिला प्रशासन ने कंट्रोल रूम का गठन किया है। यदि आपको सिलेंडर मिलने में कोई दिक्कत हो रही है, तो आप इन नंबरों पर संपर्क कर सकते हैं: मोबाइल नंबर 1: 7247560709 मोबाइल नंबर 2: 7000878489 प्रशासन की अपील: नागरिक किसी भी प्रकार की अफवाह पर ध्यान न दें और समस्या होने पर सीधे कंट्रोल रूम को सूचित करें। भोपाल: अब इंडक्शन बना सहारा भोपाल में रसोई गैस की सप्लाई लड़खड़ाने से उपभोक्ताओं की मुश्किलें बढ़ गई हैं। जहांगीराबाद क्षेत्र के मोहम्मद रियाज ने … Read more

LPG आपूर्ति पर संकट: मध्य प्रदेश में सिलेंडर स्टॉक घटा, लाखों उपभोक्ताओं को परेशानी

भोपाल  ईरान, अमेरिका और इजराइल के बीच जारी सैन्य कार्रवाई से पेट्रोलियम की सप्लाई प्रभावित हो रही है। केंद्र के निर्देश के बाद मध्य प्रदेश में कमर्शियल एलपीजी गैस की उपलब्धता को लेकर राज्य सरकार सतर्क हो गई है। प्रदेश के डीलर्स के पास कमर्शियल सिलेंडर का करीब दो दिन का ही स्टॉक बचा है। कमर्शियल सिलेंडर की कमी से प्रदेश के करीब 15 लाख व्यावसायिक उपभोक्ता प्रभावित हो सकते हैं। ऐसी स्थिति को देखते हुए मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने मंत्रियों की अध्यक्षता में एक समिति गठित करने के निर्देश दिए हैं। साथ ही प्रदेश के सभी कलेक्टरों को कमर्शियल संस्थानों के साथ बैठक कर गैस का विवेकपूर्ण उपयोग सुनिश्चित कराने के निर्देश भी दिए गए हैं।  घरेलू उपभोक्ताओं के लिए पर्याप्त स्टॉक सरकार के अधिकारियों के अनुसार प्रदेश में एलपीजी, सीएनजी और पीएनजी गैस की आपूर्ति फिलहाल सामान्य रूप से जारी है। घरेलू उपभोक्ताओं के लिए गैस का पर्याप्त स्टॉक उपलब्ध है। गैस की आपूर्ति में किसी प्रकार की समस्या नहीं है। प्रदेश में एलपीजी उपभोक्ताओं की संख्या लगभग 1 करोड़ 90 लाख के आसपास है, जिनमें से करीब 92 प्रतिशत उपभोक्ता घरेलू श्रेणी के हैं। वहीं, बाकी आठ प्रतिशत यानी करीब 15 लाख कमर्शियल उपभोक्ता हैं।  उद्योग हो सकते हैं प्रभावित  कमर्शियल उपयोग की बात करें तो प्रदेश में एलपीजी का केवल 5 से 7 प्रतिशत उपयोग कमर्शियल क्षेत्र में होता है। अधिकारियों के अनुसार वर्तमान में कमर्शियल उपभोक्ताओं के लिए करीब दो से तीन दिन का स्टॉक उपलब्ध है। वहीं, ऑयल कंपनियों के पास औसतन 6 से 7 दिन का स्टॉक रहता है। उन्होंने बताया कि फिलहाल होटल, रेस्टारेंट और उद्योगों को दूसरे विकल्पों का उपयोग करने के लिए कहा गया है। इसमें सबसे अधिक उद्योगों के प्रभावित होने की बात सामने आर ही है।  शादी-समारोहों पर असर पड़ना तय  कमर्शियल गैस की सीमित उपलब्धता का असर होटल व्यवसाय और शादी-समारोहों की तैयारियों पर पड़ना तय माना जा रहा है। वहीं घरेलू गैस सिलेंडरों को लेकर भी नए नियम लागू किए गए हैं। पहले जहां उपभोक्ता 21 दिन के अंतराल में सिलेंडर बुक कर सकते थे, अब बुकिंग के लिए 25 दिन का अंतराल तय किया गया है। इसके साथ ही एक उपभोक्ता को एक महीने में एक से अधिक सिलेंडर उपलब्ध नहीं कराया जाएगा।   कलेक्टरों को दिए गए निर्देश सरकार ने सभी जिलों के कलेक्टरों को निर्देश दिए हैं कि वे अपने-अपने जिलों में होटल, रेस्टोरेंट और अन्य वाणिज्यिक संस्थानों के साथ बैठक कर उन्हें स्थिति से अवगत कराएं और गैस का विवेकपूर्ण व सीमित उपयोग सुनिश्चित कराएं। आवश्यकता पड़ने पर इलेक्ट्रिसिटी सहित अन्य वैकल्पिक साधनों के उपयोग को भी प्रोत्साहित करने को कहा गया है। वहीं, अस्पताल और शैक्षणिक सेवाओं के लिए कमर्शियल गैस की सप्लाई फिलहाल जारी रहेगी। सरकार ने स्पष्ट किया है कि बाजार में गैस की काला बाजारी रोकने के लिए निगरानी बढ़ाई जा रही है। यदि जरूरत पड़ी तो वैकल्पिक ऊर्जा स्रोतों के उपयोग को भी बढ़ावा दिया जाएगा। पेट्रोल का 15 दिन का स्टॉक  वहीं, अधिकारियों ने बताया कि प्रदेश में पेट्रोल का 15 दिन का स्टॉक हैं। इसके अलावा सप्लाई जारी है। वहीं, पेट्रोलियम डीलर्स एसोसिएशन ने साफ किया है कि फिलहाल पेट्रोल-डीजल की कोई कमी नहीं है। उन्होंने लोगों को अफवाहों से बचने की सलाह दी गई है। मध्य प्रदेश पेट्रोलियम डीलर्स एसोसिएशन के अध्यक्ष अजय सिंह ने कहा है कि प्रदेश में पेट्रोल और डीजल की कोई कमी नहीं है। डिपो में पर्याप्त स्टॉक उपलब्ध है। बता दें मध्य प्रदेश में सालाना पेट्रोल की खपत करीब 1200 मीट्रिक टन और डीजल की खपत करीब 1600 मीट्रिक टन है। मुख्यमंत्री ने बनाई समन्वय समिति मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने पेट्रोलियम से जुड़ी गतिविधियों की समीक्षा की। उन्होंने केंद्र सरकार और प्रदेश के बीच समन्वय के लिए मंत्रिगण की अध्यक्षता में एक समिति गठित करने के निर्देश दिए हैं। यह समिति गैस आपूर्ति से जुड़े मुद्दों पर विभाग और केंद्र सरकार के साथ समन्वय कर आगे की रणनीति तय करेगी। 

देश में गैस संकट: LPG की कमी के बीच सरकार ने लगाया एस्मा, प्राथमिकता सूची जारी

 नई दिल्ली देश में एलपीजी सिलेंडरों की सप्लाई में कमी आ गई है। ईरान में चल रही जंग के चलते ऐसी स्थिति पैदा हुई है। इससे निपटने के लिए मंगलवार को सरकार ने एस्मा लागू कर दिया। ऐसा इसलिए किया गया है ताकि घरेलू गैस सिलेंडरों की कमी ना रहे। इसके अलावा रिफाइनरीज को केंद्र सरकार ने आदेश दिया है कि वे एलपीजी का उत्पादन बढ़ा दें। इसके अलावा कॉर्मशियल सिलेंडरों की बजाय घरेलू गैस सिलेंडरों की सप्लाई में इजाफा किया जाए। सरकार ने अपने आदेश में बताया है कि किन सेक्टरों को 100 फीसदी सप्लाई जारी रहेगी और उसमें किसी तरह की कमी नहीं आने दी जाएगी। आदेश के अनुसार सरकार ने कुछ सेक्टरों को प्राथमिकता में रखने को कहा है। इन्हें 100 फीसदी सप्लाई जारी रहेगी और किसी भी तरह की कटौती नहीं की जाएगी। इन सेक्टरों में पीएनजी, सीएनजी, एलपीजी और अन्य पाइपलाइन सेवाएं शामिल हैं। आदेश में कहा गया है कि फर्टिलाइजर प्लांट्स को उनको होती रही सप्लाई का 70 फीसदी हिस्सा दिया जाए। इसके अलावा चाय उद्योग, मैन्युफैक्चरिंग और अन्य औद्योगिक संस्थानों को भी उनके कोटे की 80 फीसदी तक सप्लाई जारी रखने का आदेश दिया गया है। गैस डिस्ट्रिब्यूशन करने वाली कंपनियों से कहा गया है कि वे कॉमर्शियल और इंडस्ट्रियल जरूरतों के लिए 80 फीसदी तक गैस सप्लाई जारी रखें। इसके अलावा आदेश दिया गया है कि रिफाइनिंग कंपनियां उत्पादन में तेजी लाएं। इसके अलावा एलपीजी की सप्लाई घरेलू सिलेंडरों के इस्तेमाल के लिए पहले की तरह जारी रखने को कहा गया है। सरकार का कहना है कि इस आदेश को सख्ती से लागू किया जाए। उत्पादन से लेकर ट्रांसपोर्ट तक में किसी तरह की कमी नहीं आनी चाहिए। घरेलू गैस सिलेंडरों की बुकिंग पर रहेगा 25 दिन वाला नियम यही नहीं गैस सिलेंडरों की बुकिंग के लिए सरकार ने 25 दिन की तय सीमा भी लागू कर दी है। इसके तहत यदि आपने एक सिलेंडर ले लिया है तो अगले की बुकिंग 25 दिन के बाद ही कर पाएंगे। कुछ अरसे से ऐसी सीमा खत्म हो गई थी, लेकिन इसे लागू कर दिया गया है। सरकार का कहना है कि ऐसा इसलिए किया जा रहा है ताकि कुछ लोग जमाखोरी ना करने लगें। यदि लोगों को ऐसा करने दिया गया तो कालाबाजारी बढ़ सकती है। इसके अलावा अफवाह फैलने के चलते लोग परेशान हो सकते हैं। गौरतलब है कि ईरान में जारी जंग के चलते सप्लाई की कमी देखी जा रही है। हालांकि अमेरिका का कहना है कि अब ईरान में जंग आखिरी चरण में है। ऐसी स्थिति में माना जा रहा है कि जल्दी ही सप्लाई चेन पहले वाली स्थिति में आ सकती है।