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नायब सैनी बोले—किसान मजबूत होगा, तभी विकसित भारत बनेगा

पलवल  मुख्यमंत्री नायब सिंह सैनी ने कहा कि वर्ष 2047 में जब भारत स्वतंत्रता की शताब्दी मनाएगा, तब हरियाणा का किसान आत्मनिर्भर, तकनीक से जुड़ा और वैश्विक बाजार के साथ प्रतिस्पर्धा करने में सक्षम होगा। उन्होंने कहा कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी किसानों को राष्ट्रीय नीति के केंद्र में रखकर देश के कृषि भविष्य को मजबूत कर रहे हैं। मुख्यमंत्री बुधवार को पलवल के नेताजी सुभाष चंद बोस स्टेडियम में आयोजित राज्य स्तरीय समारोह में प्रधानमंत्री किसान सम्मान निधि की 21वीं किस्त जारी कर रहे थे। इस दौरान हरियाणा के 15 लाख 82 हजार किसानों को 316 करोड़ 38 लाख रुपये सीधे उनके बैंक खातों में भेजे गए। मुख्यमंत्री ने तमिलनाडु के कोयंबटूर में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के संबोधन का लाइव प्रसारण भी किसानों के साथ देखा और सुना। सैनी ने किसानों से कहा कि वे पारंपरागत खेती के साथ मूल्य संवर्धित फसलों, प्रोसेसिंग यूनिट्स, एग्री-टूरिज्म, ब्रांडिंग और ‘फार्म-टू-फोर्क’ मॉडल की ओर कदम बढ़ाएं। उन्होंने बताया कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने विकसित भारत के चार स्तम्भ गरीब, महिला, युवा और किसान तय किए हैं और इनमें किसान सबसे महत्वपूर्ण है। हरियाणा सरकार इसी सोच के अनुरूप खेती को लाभकारी बनाने पर लगातार कार्य कर रही है। उन्होंने बताया कि प्राकृतिक खेती और बागवानी को बढ़ावा देने के लिए कई योजनाएं चलाई जा रही हैं। पराली प्रोत्साहन राशि बढ़ाकर 1200 रुपये प्रति एकड़ कर दी गई है। भावांतर भरपाई योजना के तहत पिछले ग्यारह वर्षों में तीस हजार किसानों को 135 करोड़ रुपये का भुगतान किया गया है। उन्होंने कहा कि हरियाणा देश का पहला राज्य है जहाँ सभी फसलों की खरीद न्यूनतम समर्थन मूल्य पर होती है और भुगतान 48 घंटे में किसानों को मिल जाता है। डिजिटल व्यवस्था ने योजनाओं का लाभ सरल और पारदर्शी बना दिया है। कार्यक्रम में लोक निर्माण मंत्री रणबीर सिंह गंगवा, मुख्यमंत्री के पूर्व राजनैतिक सचिव और पलवल के पूर्व विधायक दीपक मंगला, पूर्व विधायक प्रवीण डागर, पूर्व विधायक जगदीश नायर, पूर्व सांसद लेफ्टिनेंट जनरल डीपी वत्स, भाजपा जिलाध्यक्ष विपिन बैंसला, पूर्व जिलाध्यक्ष चरण सिंह तेवतिया, डॉ. हरेन्द्रपाल राणा, कृषि एवं किसान कल्याण विभाग के प्रधान सचिव पंकज अग्रवाल, महानिदेशक राज नारायण कौशिक मौजूद रहे। कार्यक्रम के बाद मुख्यमंत्री नायब सिंह सैनी ब्राह्मण धर्मशाला, पलवल में खेल राज्य मंत्री गौरव गौतम के दादा स्वर्गीय जयपाल गौतम की स्मृति में आयोजित रस्म पगड़ी और प्रेरणा सभा में पहुंचे। उन्होंने तस्वीर पर पुष्प अर्पित करते हुए कहा कि स्वर्गीय जयपाल गौतम का जीवन समाज के लिए प्रेरणा है। सभा में भाजपा प्रदेशाध्यक्ष मोहनलाल कौशिक, हरियाणा भाजा प्रभारी सतीश पुनिया, वरिष्ठ भाजपा नेता अनिल जैन, खाद्य एवं आपूर्ति मंत्री राजेश नागर, मुख्यमंत्री के मीडिया सलाहकार राजीव जेटली, जबलपुर से विधायक अभिलाष पांडे, पूर्व मंत्री सुभाष सुधा, लोनी से विधायक नंद किशोर नंदी, पूर्व राज्यसभा सांसद लेफ्टिनेंट जनरल डीपी वत्स, पूर्व विधायक दीपक मंगला, भाजपा जिलाध्यक्ष विपिन बैंसला, पूर्व जिलाध्यक्ष चरण सिंह तेवतिया और ग्रेट खली सहित कई गणमान्य उपस्थित रहे।

सरकार का बड़ा फैसला: JAG प्रमोशन से पहले IAS ट्रेनिंग जरूरी

चंडीगढ़  केंद्र सरकार ने आईएएस अधिकारियों के लिए अनिवार्य मिड-करियर ट्रेनिंग कार्यक्रम (फेज-थ्री एमसीटीपी) की तिथियों की घोषणा करते हुए साफ कर दिया है कि यह प्रशिक्षण केवल एक पाठ्यक्रम नहीं, बल्कि पदोन्नति से जुड़ी अनिवार्य शर्त है। कार्मिक एवं प्रशिक्षण विभाग की संयुक्त सचिव (प्रशिक्षण) छवि भारद्वाज द्वारा भेजे गए पत्र में स्पष्ट लिखा गया है कि फेज-थ्री पूरा किए बिना किसी भी अधिकारी को जूनियर प्रशासनिक ग्रेड (जेएजी) में नियुक्ति नहीं दी जाएगी। यह प्रावधान आईएएस वेतन नियमों के तहत अनिवार्य है। केंद्र ने स्पष्ट कहा है कि फेज-थ्री एमसीटीपी के लिए आवश्यक तैयारियां – संस्थान, विशेषज्ञ, पाठ्यक्रम और अंतरराष्ट्रीय साझेदार संस्थाएं लंबी प्रक्रिया के बाद तय की जाती हैं। इसलिए नामांकन में देरी या अनुपस्थित रहने को गंभीरता से देखा जाएगा। यह प्रशिक्षण आईएएस अधिकारियों के करियर के सबसे निर्णायक चरणों में से एक माना जाता है, क्योंकि इसके पूरा होने के बाद ही उच्च प्रशासनिक ज़िम्मेदारियों की ओर उनका मार्ग प्रशस्त होता है। यह प्रशिक्षण पांच जनवरी से 30 जनवरी, 2026 तक मसूरी स्थित लाल बहादुर शास्त्री राष्ट्रीय प्रशासन अकादमी में आयोजित होगा। सभी अधिकारियों को चार जनवरी को अकादमी में उपस्थित होना अनिवार्य किया गया है, ताकि प्रशिक्षण के विभिन्न मॉड्यूल – नीति-निर्माण, नेतृत्व विकास और प्रशासनिक रणनीति समय पर प्रारंभ किए जा सकें। 2016 बैच को ‘अंतिम अवसर’ इस राउंड की सबसे अहम बात यह है कि 2016 बैच को फेज-थ्री में भाग लेने का तीसरा और अंतिम अवसर दिया गया है। 2017 बैच के लिए यह दूसरा अवसर और 2018 बैच के लिए पहला अवसर होगा। केंद्र ने साफ शब्दों में कहा है कि 2016 बैच को इस प्रशिक्षण के लिए आगे कोई अवसर उपलब्ध नहीं कराया जाएगा। साथ ही, 2010 से 2015 बैच तक के अधिकारी ‘केस टू केस’ आधार पर शामिल किए जाएंगे, यदि वे सेवा-नियमों के अनुरूप पात्र हों। सेवानिवृत्ति से जुड़े महत्वपूर्ण प्रावधान भी स्पष्ट केंद्र ने राज्यों को यह भी निर्देश दिया है कि जिन अधिकारियों की सेवा 31 दिसंबर, 2029 से पहले समाप्त होने जा रही है, उन्हें नामांकित न किया जाए। प्रशिक्षण के बाद कम से कम तीन वर्ष की शेष सेवा अनिवार्य मानी गई है, ताकि अधिकारी प्रशिक्षण के बाद उसके व्यावहारिक लाभ के साथ उच्च दायित्व निभा सकें। 12 दिसंबर तक करना होगा रजिस्ट्रेशन सभी अधिकारियों को 12 दिसंबर तक ऑनलाइन पंजीकरण पूरा करना होगा। यह पंजीकरण कार्मिक मंत्रालय की वेबसाइट पर ही किया जाएगा। इसके बाद राज्य सरकारों को अपने-अपने अधिकारियों की सहमति और नामांकन 19 दिसंबर तक केंद्र को भेजना अनिवार्य किया गया है। किसी भी प्रश्न के लिए अकादमी ने अपना ईमेल पता साझा किया है। हरियाणा के 26 आईएएस के नाम हरियाणा सरकार की ओर से जारी पत्र में राज्य कैडर के 26 आईएएस अधिकारियों के नाम सूचीबद्ध किए गए हैं, जिन्हें फेज-थ्री एमसीटीपी के लिए पात्र माना गया है। इनमें अम्मा तसनीम (2012), निशांत कुमार यादव (2013), पार्थ गुप्ता (2013), अजय कुमार (2013), प्रदीप दहिया (2013), मनदीप कौर (2013), मुनिश शर्मा (2014), विक्रम (2014), रानी नगर (2014), मोनिका गुप्ता (2014), राहुल हुड्डा (2015), मोहम्मद इमरान रज़ा (2015), उत्तम सिंह (2015), अभिषेक मीणा (2016), राहुल नरवाल (2016), विवेक भारती (2016), हरीश कुमार वशिष्ठ (2016), रणेंद्र सिंह छिल्लर (2016), विश्राम कुमार मीणा (2017), स्वप्निल रविंद्र पाटिल (2017), जिल्हा गुप्ता (2017), वैशाली शर्मा (2017), रचिन गुप्ता (2018), आयुष सिन्हा (2018), अपराजिता (2018) और अखिल पिलानी (2018) शामिल हैं।

हरियाणा में अजब कारनामा: मंत्री ने खोली सड़क, लेकिन निर्माण करना ही भूल गए अधिकारी

फरीदाबाद  हरियाणा के फरीदाबाद में प्रशासन की बड़ी लापरवाही देखने को मिली है, जहां मंत्री से सड़क का उद्घाटन तक करा लिया गया, लेकिन डेढ़ महीने बाद भी सड़क का निर्माण कार्य शुरू नहीं हो सका है। दरअसल बल्लभगढ़–तिगांव–मंझावली मार्ग की कनेक्टिविटी को बेहतर बनाने के लिए तिगांव में करीब डेढ़ किलोमीटर लंबी रोड बननी थी। तीन अक्टूबर को इस रास्ते के निर्माण कार्य का शुभारंभ प्रदेश के राज्य मंत्री राजेश नागर द्वारा नारियल फोड़कर किया गया था। निर्माण कार्य के शुभारंभ के बाद के बाद से अधिकारियों ने यह भी दावा कर दिया था कि कुछ दिनों में काम शुरू हो जाएगा। हालांकि डेढ़ महीने बीत जाने के बाद भी अब तक कार्य शुरू नहीं हो सका है। इस देरी की वजह से रोजाना 30 हजार से अधिक वाहन चालकों को परेशानियों का सामना करना पड़ रहा है। बता दें कि यह मार्ग दर्जनभर से अधिक गांवों को सीधे जोड़ता है। प्रस्तावित फिरनी को सीमेंटेड बनाया जाना है, जिसकी अनुमानित लागत लगभग पांच करोड़ रुपये है।   सात मीटर सड़क चौड़ी की जा चुकी है इसके साथ ही, विभाग की ओर से पानी निकासी के लिए नाली बनाने की जिम्मेदारी भी निर्धारित की गई है। उल्लेखनीय है कि बल्लभगढ़ से तिगांव के सरकारी स्कूल तक सात मीटर सड़क को 16 करोड़ रुपये की लागत से चौड़ा किया जा चुका है। मंत्री राजेश नागर की सिफारिश पर इस सड़क चौड़ीकरण परियोजना को मुख्यमंत्री ने मंजूरी दी थी, जबकि परिवहन मंत्री मूलचंद शर्मा ने अपने कोटे से इसके लिए बजट उपलब्ध कराया था। मंझावली पुल शुरू होते ही बढ़ेगा यातायात दबाव यमुना नदी पर मंझावली पुल का निर्माण पूरा हो चुका है। हरियाणा की ओर से सड़क भी बन गई है, जबकि उत्तर प्रदेश सरकार की ओर से सड़क बनना बाकी है। इसके पूरा होते ही ग्रेटर नोएडा तक आवागमन शुरू हो जाएगा। इससे तिगांव की मुख्य सड़क पर वाहनों का भार कई गुना बढ़ जाएगा। यदि फिरनी का चौड़ीकरण समय पर नहीं हुआ, तो यहां लगातार जाम की स्थिति बनी रह सकती है। ग्रामीणों का कहना है कि फिलहाल भी किसी आयोजन जैसे शादी-ब्याह के समय सड़क पर लंबा जाम लग जाता है, और पुल चालू होने के बाद भारी वाहनों की आवाजाही बढ़ने से समस्या और गंभीर हो जाएगी।

ASI पत्नी नियुक्ति मामला: अगले महीने मिल सकती है बड़ी राहत, सरकार पूरा करेगी मांग

रोहतक जींद के जुलाना निवासी एएसआई संदीप लाठर की पत्नी संतोष को लेक्चरर पद पर अगले माह तक नौकरी दी जाएगी। अगले सप्ताह बैठक कराकर परिवार की यह मांग पूरी कराई जाएगी । मुख्यमंत्री से दोबारा बात कराने की जरूरत पड़ी तो यह प्रयास भी किया जाएगा। यह आश्वासन मंत्री कृष्णलाल पंवार ने एएसआई के परिवार को सोमवार रात एमडीयू में मुलाकात के दौरान दिया।  एएसआई संदीप लाठर के ममेरे भाई लाढ़ौत निवासी संजय ने बताया कि मंत्री से मुलाकात हुई है। उन्होंने कहा कि मुख्यमंत्री के साथ हुई मुलाकात में जिन मांगों पर सहमति बनी थी उन्हें जल्द पूरा किया जाएगा। एएसआई मामले में निष्पक्ष जांच की जा रही है। इसमें जल्दी ही परिवार को भी स्थिति स्पष्ट की जाएगी।  

16 लाख किसानों को बड़ी सौगात: हरियाणा सरकार ने बांटे 15,728 करोड़ रुपये, जानें किस जिले को सबसे ज्यादा लाभ

चंडीगढ़  प्रदेश के लाखों किसानों को बड़ी राहत मिली है। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने तमिलनाडु में आयोजित राष्ट्रीय कार्यक्रम के दौरान प्रधानमंत्री किसान सम्मान निधि की 21वीं किस्त जारी कर दी। इस किस्त के तहत देशभर के करोड़ों किसानों के खातों में मदद राशि भेजी गई, जिसमें हरियाणा के लगभग 16 लाख किसान भी शामिल हैं। मुख्यमंत्री नायब सिंह सैनी इस कार्यक्रम में वर्चुअली जुड़े और किसानों को मिली इस राहत पर खुशी व्यक्त की। सीएम ने बताया कि प्रधानमंत्री की अगुवाई में कृषि क्षेत्र में लगातार सुधार हो रहे हैं और किसान कल्याण को प्राथमिकता दी जा रही है। उन्होनें कहा कि आज हरियाणा के 15 लाख 82 हजार किसानों के बैंक खातों में सम्मान निधि भेजी गई।  वहीं, पलवल जिले के 74,299 किसानों को कुल 14 करोड़ 86 लाख रुपये की राशि प्राप्त हुई है। इसके अतिरिक्त, पूरे राज्य में फसल बीमा योजना के अंतर्गत किसानों को 15,728 करोड़ रुपये की सहायता राशि जारी की गई है, जिससे प्राकृतिक आपदाओं से प्रभावित कई किसानों को राहत मिली है। मुख्यमंत्री ने बताया कि हरियाणा सरकार जैविक खेती को बढ़ावा दे रही है और प्रदेश उन चुनिंदा राज्यों में शामिल है जो 24 फसलों की खरीद MSP पर सुनिश्चित करते हैं। किसानों को समय पर भुगतान मिल सके इसके लिए राज्य सरकार ने ई-खरीद एप्लिकेशन की शुरुआत की है। इस डिजिटल प्लेटफॉर्म की मदद से किसान घर बैठे अपनी फसल बिक्री के लिए ई-गेट पास बनवा सकते हैं और 48 घंटे के भीतर भुगतान प्राप्त कर सकते हैं।

किसानों को सीधा फायदा: हरियाणा के 15 जिलों में जौ-गेहूं के लिए शुरू हुई विशेष सब्सिडी योजना

चंडीगढ़  हरियाणा सरकार ने रबी सीजन में किसानों को मजबूत सहारा देने के लिए एक बड़ा कदम उठाया है। राष्ट्रीय खाद्य सुरक्षा एवं पोषण मिशन के तहत राज्य में जौ और गेहूं की फसलों के लिए बीज वितरण से लेकर प्रदर्शन प्लांट और पौध व मृदा संरक्षण प्रबंधन तक पर अनुदान दिया जाएगा। यह पहल किसानों की उत्पादकता बढ़ाने, बेहतर किस्मों को बढ़ावा देने और मिट्टी की उर्वरता कायम रखने में मदद करेगी। जौं की खेती को बढ़ावा देने के लिए पंचकूला, रोहतक, भिवानी, सिरसा, हिसार, झज्जर और चरखी दादरी जिलों को चुना गया है। इन जिलों में किसानों को उच्च गुणवत्ता वाले बीज, फसल प्रदर्शन इकाइयों और मृदा प्रबंधन तकनीकों पर सरकारी सहायता दी जाएगी। इच्छुक किसान कृषि एवं किसान कल्याण विभाग की वेबसाइट पर जाकर आवेदन कर सकते हैं। इसी तरह गेहूं के लिए अम्बाला, भिवानी, हिसार, झज्जर, मेवात, पलवल, चरखी दादरी और रोहतक जिलों में अनुदान मंजूर किया गया है। इस स्कीम का उद्देश्य अधिक उत्पादन और वैज्ञानिक तरीके से खेती को बढ़ाना है। किसान बिजाई की समय-सारणी के अनुसार ऑनलाइन आवेदन कर सकेंगे। सरकार का मानना है कि उन्नत बीज, आधुनिक कृषि तकनीक और मृदा संरक्षण उपायों से फसल की पैदावार बढ़ेगी और किसानों के लाभ में भी इजाफा होगा। आवेदन प्रक्रिया हुई बेहद आसान दोनों फसलों के लिए किसान विभाग की वेबसाइट पर कुछ सरल चरणों में आवेदन पूरा कर सकते हैं। साथ ही, हर जिले के कृषि विकास अधिकारी, ब्लॉक कृषि अधिकारी, उप-मंडल कृषि अधिकारी और उप कृषि निदेशक के कार्यालयों में जानकारी और सहायता उपलब्ध रहेगी।

मांगों को लेकर MPHW कर्मी नाराज़, ब्लैक बैज के साथ ड्यूटी; 11 ऑनलाइन पोर्टल बंद

चंडीगढ़  हरियाणा में बहु उद्देशीय स्वास्थ्य कर्मचारी (MPHW) वर्ग ने सरकार की उपेक्षा के खिलाफ अब आर-पार की लड़ाई का ऐलान कर दिया है। लंबित मांगों को लगातार अनदेखा किए जाने से नाराज़ कर्मचारियों ने बुधवार को प्रदेशभर में काली पट्टी बांधकर टीकाकरण किया और चेतावनी दी कि जनवरी तक हर बुधवार यही प्रतीकात्मक विरोध जारी रहेगा। एसोसिएशन की प्रदेश अध्यक्ष शर्मिला, महासचिव सहदेव आर्य और उपाध्यक्ष सुदेश रानी ने कहा कि सरकार केवल आश्वासन दे रही है, कार्रवाई नहीं। बार-बार पत्र लिखने और ज्ञापन देने के बावजूद मांगों पर कोई ठोस कदम न उठाए जाने से कर्मचारियों में गहरा रोष है। राज्य प्रेस सचिव संदीप कुंडू ने बताया कि अत्यधिक ऑनलाइन कार्यों का बोझ एमपीएचडब्ल्यू कर्मचारियों को मानसिक तनाव में धकेल रहा है। इसी कारण 25 अक्टूबर से कर्मचारी ऑनलाइन पोर्टलों का बहिष्कार कर चुके हैं। इसके चलते अनमोल, एनसीडी, डिज़ीज़ सर्वेलेंस, निरोगी हरियाणा, आयुष्मान भारत, एनीमिया मुक्त भारत, सुरक्षित नारी सुरक्षित परिवार, यूवीन वैक्सीनेशन समेत कुल 11 प्रमुख पोर्टल ठप पड़े हैं। इन पोर्टलों पर डेटा एंट्री रुकने से कई योजनाओं की जमीनी मॉनिटरिंग गड़बड़ा गई है। कर्मचारियों की प्रमुख मांगें एसोसिएशन ने स्पष्ट किया कि उनकी लड़ाई केवल अधिकारों के लिए है, राजनीतिक नहीं। ऑनलाइन कार्यक्रमों की जवाबदेही तय करना, मानव व तकनीकी संसाधन उपलब्ध करवाना, एमपीएचडब्ल्यू पदनाम में संशोधन, पदोन्नति, प्रमोशनल स्केल व कंफर्मेशन लिस्ट जारी करना, एनएचएम में कार्यरत महिला एमपीएचडब्ल्यू को एफपीएल-6 वेतनमान देने, ड्रेस, एमपीएस व ट्रेवल अलाउंस, रिटायरमेंट बेनिफिट और ग्रेच्युटी, मेवात व पलवल के कर्मचारियों को तबादले का अवसर, मेवात अलाउंस तथा खाली पदों पर नियमित भर्ती करने की उनकी प्रमुख मांग हैं।

क्राइम पर करारा प्रहार: हरियाणा पुलिस ने 24 घंटे में 98 बदमाश दबोचे, 81 हिस्ट्री शीट खोलीं

चंडीगढ़  हरियाणा पुलिस के ऑपरेशन ट्रैकडाउन के तहत 17 नवंबर का दिन हरियाणा की पुलिसिंग हिस्ट्री में ‘रिकॉर्ड-ब्रेकर डे’ के तौर पर दर्ज हो गया है। एक ही दिन में 75 केस दर्ज, 98 कुख्यात अपराधियों की गिरफ्तारी और 256 अन्य अपराधियों को जेल भेजकर पुलिस ने अपनी ताकत का प्रदर्शन किया। मात्र 24 घंटों में 81 हिस्ट्री शीट खोली गईं। यह आंकड़ा पिछले 12 दिनों में खोली गई कुल हिस्ट्री शीट (179) को अचानक 260 तक पहुंचा देता है। ऑपरेशन ट्रैकडाउन के तहत पुलिस हर संदिग्ध और पुराने अपराधियों की प्रोफाइलिंग करके भविष्य के अपराधों की रोकथाम पर फोकस कर रही है। जितनी हिस्ट्री शीटें खुलीं, उतने ही गैंगों की ‘वर्किंग स्टाइल’ जैसी अंदरूनी जानकारियां बाहर आईं, जिन्हें आगे गैंग-फ़्री हरियाणा मॉडल में शामिल किया जाने वाला है। झज्जर जिले ने किया लीड 17 नवंबर का ‘टॉप परफॉर्मर’ झज्जर जिला रहा, जिसने 18 मामलों में 21 कुख्यात अपराधियों को पकड़कर बाकी जिलों के लिए मानक तय कर दिया। इसके बाद करनाल (9 गिरफ्तारियां), कैथल (8) और रोहतक (8) ने भी अच्छी परफॉरमेंस दर्ज की। हिस्ट्री शीट खोलने में सोनीपत सबसे आगे रहा, जिसने 26 हिस्ट्री शीटें खोलकर स्पष्ट संदेश दिया कि अब अपराधियों की पुरानी लोकेशन और चालबाज़ियों को रिकॉर्ड में कैद किया जाएगा। अपराध का ब्रेकडाउन: कौन सबसे ज्यादा फंसा एक दिन में दर्ज हुए कुल 75 मामलों में सबसे अधिक केस आर्म्स एक्ट के रहे। 27 केस और 33 गिरफ्तारियां हुईं। इसके अलावा हत्या का प्रयास के 16 केस में 23, उगाही के 10 केस में 10 और लूट के 6 केस में 10 गिरफ्तारियां हुईं। ये आंकड़े साफ बताते हैं कि पुलिस सीधे उन अपराधियों को निशाना बना रही है, जो कानून-व्यवस्था के लिए सबसे बड़ा खतरा बनते हैं। करनाल: अवैध कब्ज़ा गैंग पर सबसे बड़ी चोट ट्रैकडाउन की अगली बड़ी कड़ी करनाल से सामने आई, जहां जमीन कब्ज़ा करने वाले नेटवर्क को पुलिस ने निशाना बनाया। 18 नवंबर को रमेश और विशाल वालिया को गिरफ़्तार किया गया। ये दो आरोपी 16 नवंबर को यमुना विहार कॉलोनी में प्लॉटों पर कब्ज़ा करने की कोशिश में थे। तफ्तीश में चौंकाने वाला खुलासा हुआ कि मुख्य आरोपी रमेश पर पहले से 6 मुकदमे दर्ज हैं। इनमें 384 आईपीसी (जबरन वसूली), आर्म्स एक्ट, 307 (हत्या का प्रयास) जैसे गंभीर मामले शामिल हैं। दोनों को रिमांड पर लेकर पुलिस अब उनके गैंग की ‘जमीन कब्ज़ा रैकेट’ की पूरी संरचना खंगाल रही है। बबली गैंग पर हुई बड़ी कार्रवाई ट्रैकडाउन के अंतर्गत करनाल पुलिस ने पुरानी रंजिश के मामले में चार और वांछित आरोपियों – बबली, जसराम, प्रदीप और सागर को हिरासत में लिया। ये सभी 26 अप्रैल को मीरा घाटी पार्क में शिकायतकर्ता पर हमला करके फरार हो गए थे। पूछताछ में पता चला कि गैंग लीडर बबली भी 6 मामलों में वांछित है। इनमें 2015 का आर्म्स एक्ट, 2019 का उगाही का मामला भी शामिल है। पुलिस पहले ही इस केस में पांच गिरफ्तारियां कर चुकी थी। अब इन चार की गिरफ्तारी के बाद पूरा गैंग लगभग ध्वस्त माना जा रहा है।   700 बड़े अपराधी सलाखों के पीछे डीजीपी ओपी सिंह ने बताया कि ऑपरेशन ट्रैकडाउन के तहत अब तक कुल 768 कुख्यात अपराधी गिरफ्तार किए गए हैं। इनके अलावा 2980 अन्य अपराधी धर दबोचे गए। पुलिस का कहना है कि ट्रैकडाउन सिर्फ बड़ी मछलियां नहीं पकड़ रहा, बल्कि स्थानीय स्तर पर छोटे लेकिन खतरनाक अपराधियों को भी खत्म कर रहा है, जो भविष्य में बड़े अपराधों की जड़ बनते हैं। अब ‘क्राइम-फ्री ज़ोन मैपिंग’ शुरू सूत्रों के मुताबिक, पुलिस अब हजारों गिरफ्तारियों और हिस्ट्री शीट डेटा को जोड़कर ‘क्राइम-फ्री ज़ोन मैपिंग’ तैयार कर रही है। एक ऐसा डिजिटल सिस्टम जो अपराधियों की मूवमेंट, उनके पुराने ठिकानों और गैंग पैटर्न को हाई-रिस्क ज़ोन से लिंक करेगा। इससे हर जिले की पुलिस को ‘प्री-क्राइम अलर्ट’ मिल सकेगा। यानी ट्रैकडाउन अब सिर्फ एक ऑपरेशन नहीं, एक टेक-इनेबल्ड क्राइम इरैडिकेशन मॉडल बन रहा है।

साइबर फ्रॉड का बढ़ता कहर: हरियाणा में हर महीने 40 करोड़ से अधिक की चोरी

गुरुग्राम  हरियाणा में साइबर फ्रॉड का खतरा लगातार बढ़ रहा है। वर्ष 2024 में राज्य ने डिजिटल धोखाधड़ी के कारण ₹850 करोड़ का नुकसान झेला, जिसमें केवल गुरुग्राम ने कुल मामलों का 20 प्रतिशत हिस्सा दर्ज किया। यह जानकारी पीएस साइबर मानेसर के सब-इंस्पेक्टर विकास बेनीवाल ने “नॉक आउट डिजिटल फ्रॉड” नामक राष्ट्रव्यापी जागरूकता कार्यक्रम में दी, जिसे हरियाणा पुलिस और बजाज फाइनेंस लिमिटेड (बीएफएल) द्वारा संयुक्त रूप से गवर्नमेंट कॉलेज, सिधरावली में आयोजित किया गया। कार्यक्रम में कॉलेज के लगभग 250 छात्र और फैकल्टी सदस्य शामिल हुए। विभिन्न प्रकार की धोखाधड़ी पर विस्तार से बताते हुए बेनीवाल ने कहा, “लोगों के शिकार होने की सबसे बड़ी वजह है—अज्ञानता, लालच और भय। फ्रॉडस्टर डिजिटल अरेस्ट, इन्वेस्टमेंट स्कैम और टास्क-बेस्ड फ्रॉड जैसी तकनीकों का इस्तेमाल करके पीड़ितों को अलग-थलग कर देते हैं, उनकी मनोविज्ञान का फायदा उठाते हैं और उनकी जीवन भर की कमाई साफ कर देते हैं। जब भी कोई व्यक्ति आपसे पैसे या बैंक डिटेल मांगता है, तो बिना किसी संदेह के समझ लें कि वह फ्रॉडस्टर है। जागरूकता ही असली सुरक्षा है।” उन्होंने आगे कहा, “गुरुग्राम में ही 2024 में 25,000 से अधिक साइबरक्राइम मामले दर्ज हुए हैं। साइबर फ्रॉड होने की स्थिति में पीड़ित को तुरंत साइबर पुलिस में शिकायत दर्ज करानी चाहिए, क्योंकि इससे खोए हुए पैसे की रिकवरी की संभावना काफी बढ़ जाती है। पहले तीन घंटे इस तरह के मामलों में ‘गोल्डन पीरियड’ माने जाते हैं।” उन्होंने बताया कि अब तक रिपोर्ट हुए मामलों में 5,000 गिरफ्तारियां की जा चुकी हैं। 2024-25 में हरियाणा पुलिस ने साइबर फ्रॉड मामलों से ₹100 करोड़ की रिकवरी की है। पूरे भारत में इसी अवधि में साइबर धोखाधड़ी के कारण नुकसान ₹22,800 करोड़ से अधिक पहुंच गया है—जो पिछले वर्ष की तुलना में लगभग 40% अधिक है। जागरूकता कार्यक्रम को संबोधित करते हुए, पीएस साइबर मानेसर, हरियाणा के असिस्टेंट सब-इंस्पेक्टर राजेशपाल ने कहा, “हमारा देश तरक्की कर रहा है, और जैसे-जैसे हम मजबूत बन रहे हैं, साइबर फ्रॉड हमारे खिलाफ एक आर्थिक युद्ध का रूप ले चुका है। इसलिए राष्ट्रव्यापी धोखाधड़ी जागरूकता बेहद जरूरी है। आपको सतर्क रहना चाहिए और आकर्षक ऑफर्स, संदिग्ध लिंक और सोशल मीडिया के जाल से खुद को बचाना चाहिए। फ्रॉडस्टर विदेशों से काम करते हैं और हमारी लापरवाही का फायदा उठाते हैं।” उन्होंने कहा, “अपनी बैंक डिटेल साझा न करके, हर कदम से पहले सत्यापन करके और सतर्क रहकर कोई भी आसानी से साइबर फ्रॉड से खुद को बचा सकता है।” पीएस साइबर मानेसर, हरियाणा के असिस्टेंट सब-इंस्पेक्टर सत्येंद्र कुमार ने कहा, “आज साइबर फ्रॉड एक व्यवसाय बन चुका है, जो देशभर में विभिन्न क्लस्टर्स के माध्यम से संचालित होता है। संचार और डिजिटल कनेक्टिविटी बढ़ने के साथ हमारी कमजोरियां भी बढ़ी हैं। सबसे महत्वपूर्ण बात है—जागरूकता। यदि आपको कभी साइबर फ्रॉड का संदेह हो, तो तुरंत 1930 पर कॉल करें, क्योंकि शुरुआती कार्रवाई से ट्रांज़ैक्शन रोकने की संभावना काफी बढ़ जाती है। एक्सेस साझा न करें, संदिग्ध एपीके फाइलों से बचें, और हर प्लेटफॉर्म पर एक ही नंबर लिंक न करें।” इस अवसर पर गवर्नमेंट कॉलेज सिधरावली के प्रोफेसर पी.के. मलिक ने कहा, “भारत का युवा विभिन्न प्रकार के साइबर अपराधों के खिलाफ जागरूकता फैलाने में महत्वपूर्ण भूमिका निभा सकता है। सतर्क और जानकारी पूर्ण रहकर वे अपने परिवारों और समुदायों की रक्षा कर सकते हैं।” बजाज फाइनेंस लिमिटेड (बीएफएल), जो भारत का सबसे बड़ी निजी क्षेत्र की नॉन-बैंकिंग फाइनेंशियल कंपनी है और बजाज फिनसर्व का हिस्सा है, एक राष्ट्रव्यापी वित्तीय साक्षरता और साइबर फ्रॉड जागरूकता कार्यक्रम आयोजित कर रही है। इसका उद्देश्य डिजिटल उपयोगकर्ताओं को विभिन्न तरह के खतरों के बारे में जानकारी देना और वित्तीय सुरक्षा के सर्वोत्तम उपाय सिखाना है। यह राष्ट्रव्यापी अभियान भारतीय रिज़र्व बैंक (RBI) के 2024 के फ्रॉड रिस्क मैनेजमेंट दिशानिर्देशों के अनुरूप है, जिसमें प्रारंभिक पहचान, स्टाफ जवाबदेही और जनसहभागिता को डिजिटल इकोसिस्टम को सुरक्षित बनाने के लिए महत्वपूर्ण माना गया है। यह कार्यक्रम व्यक्तिगत और संवेदनशील जानकारी की सुरक्षा पर महत्वपूर्ण सुझाव प्रदान करता है। इसमें ओटीपी, पिन साझा न करना, संदिग्ध ईमेल, एसएमएस, लिंक, क्यूआर कोड से बचना और अज्ञात स्रोतों से ऐप डाउनलोड न करने की सलाह शामिल है। कार्यक्रम में इंटरैक्टिव वर्कशॉप, डिजिटल अवेयरनेस ड्राइव और प्रमुख शहरों एवं कस्बों में सामुदायिक पहुंच गतिविधियाँ शामिल हैं। यह पहल उन सामान्य वित्तीय धोखाधड़ियों पर ध्यान आकर्षित करती है, जो फर्जी सोशल मीडिया अकाउंट, व्हाट्सऐप ग्रुप और ऐसी वेबसाइटों के माध्यम से की जाती हैं, जो वित्तीय कंपनियों जैसी लगती हैं और उनके कर्मचारियों का झूठा प्रतिरूपण करती हैं।

शादीशुदा महिला और शादी के वादे के तहत संबंध—हाईकोर्ट ने दी अहम संवैधानिक राय

चंडीगढ़  शादी का झांसा देकर बलात्कार के मामले में पंजाब और हरियाणा उच्च न्यायालय ने अहम फैसला सुनाया है। अदालत का कहना है कि यह नहीं माना जा सकता कि एक कानूनी रूप से विवाहित महिला को शादी के नाम पर यौन संबंधों के लिए सहमत किया जा सकता है। कोर्ट ने पाया कि महिला किसी अन्य पुरुष के साथ शारीरिक संबंध बनाने के दौरान शादीशुदा थी।  रिपोर्ट के अनुसार, हाईकोर्ट ने इस मामले में दर्ज FIR को रद्द करने के आदेश दिए हैं। याचिका पर सुनवाई कर रहीं जस्टिस शालिनी सिंह नागपाल ने कहा कि यह नहीं माना जा सकता कि अभियोक्ता (महिला) ने याचिकाकर्ता की तरफ से किए गए वादों के प्रभाव में काम किया। उन्होंने कहा कि इस दौरान महिला याचिकाकर्ता के साथ शारीरिक संबंधों में भी शामिल रही थी। उन्होंने कहा, 'जब एक पूरी तरह से परिपक्व, शादीशुदा महिला शादी के वादे पर यौन संबंधों की सहमति देती है और ऐसा करना जारी रखती है, तो यह शादी का अपमान है। न कि तथ्यों की गलत धारणा के प्रभाव में आकर काम करना। ऐसे मामले में याचिकाकर्ता पर आपराधिक दायित्व तय करने के लिए IPC की धारा 90 नहीं लगाई जा सकती। स्पष्ट तौर पर अभियोक्ता याचिकाकर्ता के साथ 1 साल से ज्यादा समय तक सहमति से संबंध में थी, जिस दौरान वह अपने पति के साथ भी विवाहित रही।' कोर्ट ने कहा, 'अगर याचिकाकर्ता के खिलाफ FIR में दर्ज कराए आरोपों और सीआरपीसी की धारा 164 के तहत दिए बयानों को मान भी लिया जाए, तो यह अकल्पनीय है कि कानूनन रूप से शादीशुदा महिला को शादी के वादे पर यौन संबंधों के लिए सहमत किया जा सकता है। ऐसा लगता है कि अभियोक्ता लंबे समय से याचिकाकर्ता के साथ यौन संबंधों में थी। जब उसकी बहन की याचिकाकर्ता के साथ सगाई हो गई, तो उसे भावनात्मक रूप से धक्का लगा। ऐसे में केस दर्ज कराया गया।' कोर्ट ने पाया कि, 'अभियोक्ता वकील है और यह अच्छी तरह से जानती है कि वह अपने पति साथ वैध विवाह में है। याचिकाकर्ता भी वकील है, जो अभियोजन पक्ष के वकील के खिलाफ केस लड़ रहा है। ऐसे में याचिकाकर्ता के इस स्थिति में होने का सवाल ही नहीं उठता कि वह महिला को शादी के वादे पर शारीरिक संबंधों के लिए सहमत कर पाए।' कोर्ट ने यह भी पाया कि याचिकाकर्ता के खिलाफ IPC की धारा 506 के तहत केस दर्ज है। आरोप हैं कि जब महिला ने याचिकाकर्ता से उसकी बहन के साथ सगाई का विरोध किया, तो उसने महिला को मारने की धमकी दी। कोर्ट ने कहा कि याचिकाकर्ता की तरफ से कहे गए शब्दों का खुलासा नहीं किया गया है। ऐसे में इसके अभाव में यह पता लगाना संभव नहीं है कि याचिकाकर्ता का इरादा अभियोक्ता को डराने का था। साथ ही कोर्ट ने FIR में तारीख, जगहों का जिक्र नहीं होने पर भी गौर किया।