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हरियाणा के बेटे से सुप्रीम कोर्ट तक: Justice Surya Kant की प्रेरक यात्रा

हिसार  हरियाणा के हिसार से निकलकर देश की सर्वोच्च न्यायिक कुर्सी तक पहुंचने वाले जस्टिस सूर्यकांत की कहानी प्रेरणादायक है। साधारण परिवार से आने वाले इन न्यायाधीश ने मेहनत, ईमानदारी और न्याय के प्रति जुनून से सुप्रीम कोर्ट तक का सफर तय किया है। वे 24 नवंबर 2025 को भारत के अगले मुख्य न्यायाधीश (CJI ) बनेंगे और फरवरी 2027 तक इस पद पर रहेंगे। प्रारंभिक जीवन और शिक्षा जस्टिस सूर्यकांत का जन्म 10 फरवरी 1962 को हिसार जिले के पेट्वर गांव में हुआ। उन्होंने प्रारंभिक शिक्षा गांव के स्कूल से पूरी की और 1981 में गवर्नमेंट पीजी कॉलेज, हिसार से स्नातक की डिग्री प्राप्त की। फिर उन्होंने 1984 में महर्षि दयानंद विश्वविद्यालय, रोहतक से कानून (एलएलबी) की पढ़ाई पूरी की। कानूनी करियर और सफलता  1984 में उन्होंने हिसार के जिला न्यायालय में वकालत शुरू की और 1985 में चंडीगढ़ स्थित पंजाब एवं हरियाणा हाईकोर्ट में प्रैक्टिस शुरू की। उन्होंने सांविधानिक, सेवा और नागरिक मामलों में प्रभावशाली दलीलों द्वारा अपनी पहचान बनाई। सामाजिक न्याय के लिए योगदान जस्टिस सूर्यकांत की न्यायिक यात्रा सामाजिक मुद्दों पर केंद्रित रही। वे सार्वजनिक संसाधनों के संरक्षण, भूमि अधिग्रहण, मुआवजे, पीड़ितों के अधिकार, आरक्षण और संवैधानिक संतुलन जैसे विषयों पर संवेदनशील और न्यायसंगत दृष्टिकोण के लिए जाने जाते हैं। उनके फैसलों ने सामाजिक न्याय और नागरिक अधिकारों को मजबूती दी। प्रमुख उपलब्धियां 7 जुलाई 2000: हरियाणा के सबसे युवा एडवोकेट जनरल नियुक्त। 2001: वरिष्ठ अधिवक्ता का दर्जा प्राप्त। 9 जनवरी 2004: पंजाब एवं हरियाणा हाईकोर्ट के स्थायी न्यायाधीश बने। 5 अक्तूबर 2018: हिमाचल प्रदेश हाईकोर्ट के मुख्य न्यायाधीश नियुक्त। आगामी मुख्य न्यायाधीश नियुक्ति केंद्र सरकार ने जस्टिस सूर्यकांत को देश का 53वां मुख्य न्यायाधीश बनाने की प्रक्रिया शुरू की है। मौजूदा मुख्य न्यायाधीश बीआर गवई 23 नवंबर 2025 को सेवानिवृत्त होंगे। नियुक्ति प्रक्रिया पूरी होने के बाद, 24 नवंबर 2025 को जस्टिस सूर्यकांत मुख्य न्यायाधीश पद संभालेंगे। वे 9 फरवरी 2027 तक इस पद पर रहेंगे। नियुक्ति प्रक्रिया का नियम ‘मेमोरेंडम ऑफ प्रोसीजर’ के अनुसार, सुप्रीम कोर्ट का सबसे वरिष्ठ और उपयुक्त न्यायाधीश को मुख्य न्यायाधीश नियुक्त किया जाता है। वर्तमान सीजेआई के सेवानिवृत्त होने से लगभग एक माह पहले विधि मंत्री उनकी सिफारिश मांगते हैं। वर्तमान में जस्टिस सूर्यकांत सुप्रीम कोर्ट में सबसे वरिष्ठ न्यायाधीश हैं। जस्टिस सूर्यकांत की नियुक्ति से भारतीय न्यायपालिका को नई दिशा और मजबूती मिलने की उम्मीद है।

EWS आवास योजना 2025: हरियाणा सरकार की नई पहल, गरीबों के लिए बड़ा तोहफ़ा

चंडीगढ़  हरियाणा सरकार ने राज्य के शहरी गरीबों और निम्न आय वर्ग के परिवारों को सस्ती और स्थायी छत देने की दिशा में बड़ा फैसला लिया है। सरकार ने नई ‘ईडब्ल्यूएस पॉलिसी-2025’ को लागू कर दिया है। इस नीति को प्रदेश के लाखों गरीब परिवारों के लिए आशा की किरण के तौर पर देखा जा रहा है। यह नीति उन लोगों के लिए बनाई गई है जो वर्षों से किराये के मकानों, झुग्गियों या अस्थायी कमरों में रहकर अपने घर का सपना देख रहे थे। अब यह सपना केवल ख्वाहिश नहीं रहेगा, बल्कि सरकार की गारंटी बनेगा। राज्य सरकार का कहना है कि यह नीति ‘हाउसिंग फॉर ऑल’ के लक्ष्य को पूरा करने की दिशा में एक ठोस कदम है। इसका उद्देश्य है कि आवास अब केवल अमीरों की पहुंच तक सीमित न रहे, बल्कि हर मेहनतकश, हर कर्मचारी और हर ज़रूरतमंद परिवार को भी अपना घर मिले। यह नीति हरियाणा टाउन एंड कंट्री प्लानिंग विभाग द्वारा तैयार की गई है और इसे लागू करने की ज़िम्मेदारी ‘हाउसिंग फॉर ऑल’ विभाग को दी गई है। विभाग के अतिरिक्त मुख्य सचिव एसके सिंह की ओर से यह पॉलिसी जारी की है। नई ईडब्ल्यूएस नीति के तहत अब कोई भी रिहायशी कॉलोनी या हाउसिंग प्रोजेक्ट सिर्फ़ अमीरों के लिए नहीं होगा। सरकार ने आदेश दिया है कि हर लाइसेंस प्राप्त कॉलोनी में 20 प्रतिशत प्लॉट और हर ग्रुप हाउसिंग सोसाइटी में 15 प्रतिशत फ्लैट आर्थिक रूप से कमजोर वर्ग (ईडब्ल्यूएस) के लिए अनिवार्य रूप से सुरक्षित रखे जाएंगे। इससे शहरी इलाकों में गरीब और मध्यम वर्गीय परिवार भी मुख्यधारा की कॉलोनियों का हिस्सा बन सकेंगे।   प्लॉट/फ्लैट के साइज व रेट भी तय सरकार ने यह भी तय किया है कि गरीबों को दिए जाने वाले घरों का आकार और दाम उनकी आय और जरूरत के अनुरूप हों। ईडब्ल्यूएस प्लॉट्स का साइज 50 से 125 वर्ग मीटर तक रहेगा। वहीं ईडब्ल्यूएस फ्लैट 200 से 400 वर्ग फुट के होंगे। ईडब्ल्यूएस EWS प्लॉट 600 प्रति वर्ग मीटर और फ्लैट 1.50 लाख या 750 प्रति वर्ग फुट के दर पर दिए जाएंगे। यह पहली बार है जब हरियाणा में गरीबों के लिए इतने सुलभ दामों पर घर उपलब्ध कराने की व्यवस्था की गई है। हाउसिंग फॉर ऑल विभाग करेगा आवंटन ईडब्ल्यूएस नीति के तहत डेवलपर या बिल्डर को अपने हिस्से के प्लॉट और फ्लैट्स ‘हाउसिंग फॉर ऑल’ विभाग को सौंपने होंगे। यह विभाग आगे इन घरों का निर्माण करवाएगा और पात्र लोगों को पारदर्शी प्रक्रिया से आवंटित करेगा। इसके लिए पहले पात्र लोगों से आवेदन मांगे जाएंगे। आवेदन आने के बाद ड्रा के जरिये प्लॉट और फ्लैट‌्स का आवंटन होगा। चयनित और प्रतीक्षा सूची दोनों सार्वजनिक रूप से जारी की जाएंगी ताकि कोई पक्षपात या गड़बड़ी न हो सके। 10 हजार होगी आवेदन फीस आवेदन प्रक्रिया को सरल बनाया है। इसके लिए 10 हजार रुपये आवेदन शुल्क तय किया है। अगर आवेदक को घर मिलता है, तो यह राशि अंतिम भुगतान में समायोजित होगी। अगर चयन नहीं होता, तो यह रकम दो महीने के भीतर बिना ब्याज लौटाई जाएगी। सरकार की ओर से ड्रॉ प्रक्रिया में छह महीने से अधिक देरी होती है, तो आवेदकों को भारतीय स्टेट बैंक की बचत ब्याज दर के अनुसार मुआवजा दिया जाएगा। इस प्रावधान से सरकार ने पारदर्शिता और जवाबदेही सुनिश्चित की है। पांच साल तक बेचने पर पाबंदी ईडब्ल्यूएस घर पाने वाले व्यक्ति को यह घर कम-से-कम पांच साल तक न बेचने या ट्रांसफर करने की शर्त माननी होगी। अगर कोई व्यक्ति यह नियम तोड़ता है तो उसे 100 प्रतिशत जुर्माना देना होगा। यानी जितने में घर मिला था, उतनी ही राशि दंड के रूप में देनी होगी। यह प्रावधान इसलिए रखा गया है ताकि यह योजना केवल असली ज़रूरतमंदों तक पहुंचे न कि निवेश या दलाली का साधन बने। रेंटल हाउसिंग स्कीम भी लागू हरियाणा सरकार ने इस नीति में ‘किराये पर आवास योजना’ (रेंटल हाउसिंग स्कीम) का प्रावधान भी जोड़ा है। इसके तहत कुछ ईडब्ल्यूएस यूनिट्स को किराये पर उपलब्ध कराया जाएगा। इससे फैक्टरी कर्मियों, प्रवासी मजदूरों, सफाई कर्मचारियों और निम्न आय वर्ग के परिवारों को कम किराये में सम्मानजनक आवास मिल सकेगा। अगर ‘हाउसिंग फॉर ऑल’ विभाग डेवलपर को भुगतान में देरी करता है, तो उसे 9 प्रतिशत वार्षिक ब्याज देना होगा। ‘एक व्यक्ति-एक घर’ का नियम पहले कई योजनाओं में एक ही व्यक्ति ने अलग-अलग जगहों से घर हासिल किए थे। नई नीति ने इस गड़बड़ी को रोकने के लिए सभी आवंटन को आधार कार्ड और परिवार पहचान पत्र (पीपीपी) से जोड़ दिया है। ‘हाउसिंग फॉर ऑल’ विभाग का डेटा अब शहरी स्थानीय निकाय विभाग के साथ साझा किया जाएगा ताकि पूरे राज्य में एक एकीकृत हाउसिंग डेटाबेस तैयार हो सके। इससे यह सुनिश्चित होगा कि कोई व्यक्ति एक से अधिक सरकारी घर का लाभ न उठा सके।  

इतिहास रच दिया BSF जवान शिवानी ने, 18 साल की मेहनत को 5 महीनों में किया सच!

चंडीगढ़  एएनआइ सीमा सुरक्षा बल (बीएसएफ) के छह दशक के इतिहास में एक अभूतपूर्व उपलब्धि हासिल करते हुए एक युवा कांस्टेबल को बल में शामिल होने के मात्र पांच महीनों के भीतर बिना बारी के (आउट आफ टर्न) पदोन्नति मिली है। यह एक ऐसा मील का पत्थर है जो भारत के किसी भी केंद्रीय सशस्त्र पुलिस बल में पहले कभी नहीं देखा गया।  उत्तर प्रदेश में दादरी निवासी बढ़ई की बेटी शिवानी ने बीएसएफ में इतनी तेजी से पहचान हासिल करने वाली पहली महिला कांस्टेबल के रूप में इतिहास में अपना नाम दर्ज करा लिया है। 31 अगस्त से आठ सितंबर, 2025 तक ब्राजील में आयोजित 17वीं विश्व वुशु चैंपियनशिप में रजत पदक जीतने की उल्लेखनीय उपलब्धि के बाद उन्हें हेड कांस्टेबल के पद पर पदोन्नत किया गया है। बहुत ही कम लोगों को मिलता है ऐसा दुर्लभ अवसर बीएसएफ शिवानी के असाधारण प्रदर्शन की सराहना करते हुए महानिदे ने कहा, वह बीएसएफ की एक उत्कृष्ट खिलाड़ी है। निश्चित रूप से यह दुर्लभ अवसर है जो बहुत कम लोगों को मिलता है। यह खिलाड़ियों को राष्ट्रीय और अंतरराष्ट्रीय स्तर पर अपनी प्रतिभा दिखाने का अवसर प्रदान करता है। आउट आफ टर्न पदोन्नति के प्रविधान का लाभ उठाकर वे अपनी सेवा में उन्नति प्राप्त कर सकते हैं। यह न केवल उनके लिए, बल्कि उनके परिवारों और समग्र समाज के लिए भी लाभकारी   

हरियाणा SC आयोग का बड़ा कदम, IPS पूरन कुमार की आत्महत्या मामले में DGP से मांगी ATR

चंडीगढ़ हरियाणा के वरिष्ठ IPS अधिकारी वाई पूरन कुमार की आत्महत्या के मामले ने अब प्रशासनिक गलियारों में हलचल मचा दी है। हरियाणा राज्य अनुसूचित जाति आयोग ने इस पूरे प्रकरण पर स्वयं संज्ञान लेते हुए चंडीगढ़ प्रशासन और पुलिस विभाग को कठोर नोटिस जारी किया है। आयोग ने चंडीगढ़ के मुख्य सचिव और डीजीपी से सात दिन के भीतर विस्तृत कार्रवाई रिपोर्ट (एक्शन टेकन रिपोर्ट ATR) मांगी है। आयोग ने इस घटना को जातिगत भेदभाव, मानसिक उत्पीड़न और मानवाधिकार उल्लंघन से जुड़ा गंभीर मामला बताया है। आयोग ने स्पष्ट कहा कि यह सिर्फ आत्महत्या नहीं, बल्कि एक संवेदनशील सामाजिक-प्रशासनिक विफलता का संकेत है। आयोग द्वारा जारी नोटिस में दिवंगत अधिकारी वाई. पूरन कुमार की आत्महत्या से पहले लिखे फाइनल नोट का हवाला देते हुए कहा गया कि वे अनुसूचित जाति समुदाय से थे और लंबे समय से वरिष्ठ अधिकारियों के जातिगत भेदभाव, मानसिक प्रताड़ना और सार्वजनिक अपमान का सामना कर रहे थे। नोट में यह भी उल्लेख है कि उन्हें यह सब वरिष्ठ अफसरों की मिलीभगत और दिशा-निर्देश में झेलना पड़ा। आयोग ने कहा कि यदि यह तथ्य जांच में सही पाए जाते हैं, तो यह SC-एसटी एक्ट, 1989 का स्पष्ट उल्लंघन होगा। इस मामले ने और तूल तब पकड़ा जब दिवंगत अधिकारी की आईएएस पत्नी अमनीत पी. कुमार ने सनसनीखेज आरोप लगाए। उन्होंने कहा कि उनके पति को जानबूझकर मानसिक रूप से प्रताड़ित किया गया और कुछ अधिकारियों ने उन्हें आत्महत्या के लिए उकसाया। आयोग ने इसे ‘अत्याचार और षड्यंत्र’ का गंभीर मामला बताते हुए जांच की दिशा बदलने के संकेत दिए हैं। आयोग ने इस मामले में दर्ज एफआईआर और एसआईटी के गठन से लेकर हर पहलू के बारे में जानकारी मांगी है। एफआईआर किन धाराओं और किन लोगों के खिलाफ दर्ज की गई। क्या आरोपित अधिकारियों को नामजद या गिरफ्तार किया गया है। क्या जांच के लिए विशेष जांच दल (एसआईटी) गठित की है। जांच में देरी के कारण को लेकर भी सवाल किया है। SC-ST एक्ट की धाराओं में ढिलाई पर सख्त रोक हरियाणा SC आयोग ने कहा है कि इस मामले में SC-ST अत्याचार निवारण अधिनियम की धारा 3(2)(v) सहित सभी प्रासंगिक धाराओं को पूरी कठोरता से लागू किया जाए। आयोग ने आदेश दिया है कि जांच रिपोर्ट हर 15 दिन में आयोग को भेजी जाए, ताकि कोई भी पहलू दबाया न जा सके। आयोग ने चेतावनी दी है कि यदि सात दिन के भीतर विस्तृत रिपोर्ट नहीं मिली या जवाब असंतोषजनक हुआ, तो एचएसएससी एक्ट, 2018 की धारा 9 के तहत संबंधित अधिकारियों को व्यक्तिगत रूप से तलब किया जाएगा। आयोग ने यह भी स्पष्ट किया है कि वह इस मामले को उदाहरण के तौर पर मिसाल बनाएगा, ताकि भविष्य में किसी अनुसूचित जाति अधिकारी के साथ इस तरह का व्यवहार दोहराया न जा सके।

दिवाली से पहले खुशखबरी! हरियाणा में सरकारी कर्मचारियों का बढ़ा महंगाई भत्ता

पंचकूला हरियाणा में मुख्यमंत्री नायब सिंह सैनी ने सरकारी कर्मचारियों को दीवाली गिफ्ट दिया है। सरकार ने उनके महंगाई भत्ते में इजाफा किया है। इसके साथ ही राज्य के पेंशनभोगियों/पारिवारिक पेंशनभोगियों के लिए महंगाई भत्ता और महंगाई राहत की दरों में बढ़ोतरी करने का फैसला लिया है। महंगाई भत्ता एवं राहत की दर 55 प्रतिशत से बढ़ाकर 58 प्रतिशत कर दी गई है, जो 1 जुलाई, 2025 से प्रभावी होगी। मुख्य सचिव अनुराग रस्तोगी, जिनके पास वित्त विभाग के अतिरिक्त मुख्य सचिव का दायित्व भी है, द्वारा इस सम्बन्ध में एक पत्र जारी किया गया है। बढ़ी हुई दरों के अनुसार महंगाई भत्ते/राहत का भुगतान अक्टूबर, 2025 के वेतन और पेंशन के साथ किया जाएगा, जबकि जुलाई से सितंबर, 2025 तक का एरियर नवंबर माह में दिया जाएगा।  

बच्चों की सेहत की नई पहल: हरियाणा की आंगनबाड़ियों में पोषण विशेषज्ञ तय करेंगे भोजन का मेन्यू

चंडीगढ़  हरियाणा की आंगनबाड़ियों में अब बच्चों और माताओं के आहार का निर्धारण विशेषज्ञों के हाथों में होगा। महिला एवं बाल विकास विभाग (WCD) में न्यूट्रिशनिस्ट के पदों पर भर्ती के लिए हरियाणा लोक सेवा आयोग ने परीक्षा की तैयारी तेज कर दी है। आयोग ने न सिर्फ परीक्षा की तिथि तय करने की दिशा में कदम बढ़ाया है, बल्कि नया परीक्षा पाठ्यक्रम (सिलेबस) भी जारी किया है। इस भर्ती का उद्देश्य प्रदेश के बच्चों और गर्भवती व स्तनपान कराने वाली महिलाओं के पोषण स्तर में सुधार करना है। अब न्यूट्रिशनिस्ट आंगनबाड़ी केंद्रों में बच्चों और महिलाओं के लिए संतुलित आहार तय करेंगे जिसमें स्थानीय और सस्ते खाद्य पदार्थों से पौष्टिक भोजन तैयार करने पर जोर रहेगा। इस परीक्षा और नियुक्ति के बाद राज्य सरकार का लक्ष्य है कि हर आंगनबाड़ी में एक प्रशिक्षित पोषण विशेषज्ञ तैनात हो, जो माताओं और बच्चों की डाइट को वैज्ञानिक आधार पर सुधार सके। विशेषज्ञ मानते हैं कि इससे राज्य में कुपोषण दर में कमी आएगी और “स्मार्ट न्यूट्रिशन” के मॉडल को जमीनी स्तर पर लागू किया जा सकेगा। यह पद केवल महिला उम्मीदवारों के लिए आरक्षित है। पात्रता के लिए एमएससी (गृह विज्ञान) की डिग्री अनिवार्य रखी गई है। एचपीएससी ने बताया कि परीक्षा में “नॉलेज एंड स्क्रीनिंग टेस्ट” दोनों शामिल होंगे, जिनका उद्देश्य ऐसे उम्मीदवारों का चयन करना है जो न सिर्फ सैद्धांतिक ज्ञान रखती हों, बल्कि मैदान में व्यावहारिक रूप से आंगनबाड़ी स्तर पर बदलाव ला सकें।

महिला सुरक्षा सख्त: Haryana राज्य महिला आयोग ने किए तीन निर्णायक निर्णय

चंडीगढ़ महिलाओं की सुरक्षा को लेकर हरियाणा राज्य महिला आयोग ने तीन बड़े फैसले लिए हैं। इनमें राज्य के हर जिम में महिला ट्रेनर और विश्वविद्यालय, कॉलेज या संस्थान में रात में काम करने वाली महिला कर्मचारियों के लाने-ले जाने वाली कैब में महिला ड्राइवर अनिवार्य होगी। इसके अलावा इच्छुक महिलाओं को कैब ड्राइविंग का प्रशिक्षण भी आयोग की तरफ से निशुल्क दिलाया जाएगा। आयोग ने साफ किया है कि आदेशों की अवहेलना करने वालों पर कानूनी कार्रवाई होगी। महिलाओं की सुरक्षा सुनिश्चित करने के लिए आयोग ने सख्त रुख अपनाया है। हरियाणा राज्य महिला आयोग की अध्यक्ष रेनू भाटिया ने बताया कि राज्य के सभी जिम में अब कम से कम एक महिला प्रशिक्षक का होना अनिवार्य होगा। आयोग के मुताबिक इससे महिलाओं की सुरक्षा, गोपनीयता और आत्मविश्वास में वृद्धि होगी। राज्य महिला आयोग ने तय किया है कि प्रदेश की इच्छुक महिलाओं को कैब ड्राइविंग का प्रशिक्षण दिया जाएगा। इसका उद्देश्य उन्हें आर्थिक रूप से आत्मनिर्भर बनाना और परिवहन क्षेत्र में महिलाओं का प्रतिनिधित्व बढ़ाना है। आयोग का मानना है कि रात में सफर करने वाली महिलाओं के लिए यह कदम सुरक्षा कवच साबित होगा। रेनू भाटिया ने बताया कि दिल्ली और केरल में महिलाओं को ऑटो और टैक्सी ड्राइविंग की ट्रेनिंग दी जाती रही है। इन्हीं अनुभवों से प्रेरणा लेते हुए हरियाणा महिला आयोग ने इस दिशा में ठोस कदम उठाया है। उन्होंने कहा कि आयोग का यह फैसला साफ संदेश देता है कि अब महिलाओं की सुरक्षा पर कोई समझौता नहीं होगा। आयोग सोमवार तक इन तीनों फैसलों पर लिखित आदेश जारी करेगा।   जिम में महिला प्रशिक्षक होने से महिलाएं सहज महसूस करेंगी और अपनी फिटनेस पर खुलकर ध्यान दे सकेंगी। कई बार जिम में महिलाओं के साथ अभद्रता या छेड़छाड़ की घटनाएं सामने आती हैं। नई व्यवस्था लागू होने से ऐसी घटनाओं में कमी आ सकेगी। उन्होंने कहा कि महिला कर्मचारियों को लाने-ले जाने वाली कैब में महिला चालक होने से उन महिलाओं को राहत मिलेगी जो देर रात तक काम करती हैं। इससे कामकाजी महिलाओं में सुरक्षा की भावना मजबूत होगी और महिलाएं निर्भय निर्भय होकर कार्यस्थल पर अपना सर्वश्रेष्ठ योगदान दे सकेंगी।  

1 करोड़ का नेक काम: मनोहर लाल का PM राहत कोष में दान, नए पुस्तकालय का होगा निर्माण

चंडीगढ़  केंद्रीय ऊर्जा एवं शहरी आवासन मंत्री तथा हरियाणा के पूर्व मुख्यमंत्री मनोहर लाल ने रोहतक जिले में स्थित अपने पुश्तैनी गाँव बनियानी में करीब डेढ़ एकड़ जमीन को बेचकर मिली धनराशि प्रधानमंत्री राहत कोष में देने का ऐलान किया है। गाँव बनियानी में मनोहर लाल की पुश्तैनी जमीन में से करीब डेढ़ एकड़ उनके हिस्से में आई थी। मनोहर लाल ने यह जमीन बेच दी है। जिसकी एवज में उन्हें करीब एक करोड़ रुपए मिले हैं। इसके अलावा मनोहर लाल ने अपना पुश्तैनी घर माँ शांति देवी पुस्तकालय के नाम पर दान करने का ऐलान किया है। मनोहर लाल के इस आवास को पुस्तकालय में बदला जाएगा जहां ग्रामीण अंचल के बच्चों को प्रतियोगी परीक्षाओं की तैयारी करने के लिए अनुकूल माहौल मिलेगा। इससे पहले भी केंद्रीय मंत्री अपने हिस्से की जमीन बेचकर प्रधानमंत्री राहत कोष में सहयोग किया था।  

कृषि विभाग हुआ सतर्क, पराली जलाने वालों के लिए हर जिले में अलग नोडल अधिकारी

सिरसा  हरियाणा सरकार द्वारा किसानों को योजनाएं दी जा रही है, जिसका लाभ अब किसान उठाने लगे हैं। यही कारण है कि सिरसा जिले में इस बार पराली के अवशेष जलाने की घटनाओं में बहुत कमी देखने को मिली है। सिरसा जिले के कुछ जगहों को छोड़कर इस बार पराली के अवशेष न जलाकर किसान गांठे बनवा रहे हैं और सरकार द्वारा दी जा रही योजनाओं का लाभ उठा रहे हैं। सिरसा कृषि उपनिदेशक डॉक्टर सुखदेव कंबोज ने इस बारे में जानकारी देते हुए बताया कि इस बार किसान पराली के अवशेष न जलाकर उसकी गांठ बनवा रहे हैं और उन्हें बेचकर मुनाफा भी कमा रहे हैं और सरकार की योजनाओं का लाभ भी ले रहे हैं।  मीडिया से बातचीत करते हुए कृषि उप निदेशक डॉक्टर सुखदेव कम्बोज ने बताया कि सिरसा जिले में इस बार किसानों को जागरूक करने के लिए विभाग की ओर से अलग-अलग जगह पर अभियान चलाए जा रहे हैं। उन्होंने बताया कि स्कूलों में एक और जहां जागरूकता रैलियां निकाल किसानों और ग्रामीणों को जागरूक किया जा रहा है तो वहीं कृषि विभाग के अधिकारी भी धरातल पर उतरकर किसानों को जागरूक कर रहे हैं। यही कारण है कि इस बार पिछले सालों के मुकाबले कम मामले सामने आए हैं। कृषि उप निदेशक ने बताया कि सिरसा जिले में इस बार 3,91,000 हेक्टेयर में धान की रोपाई की गई है, जिसकी अब तक लगभग 25 प्रतिशत तक कटाई की जा चुकी है। उन्होंने बताया कि अधिकारियों की अलग-अलग गांव में ड्यूटी भी लगाई गई हैं। उन्होंने बताया कि गांव स्तर पर ग्रीन और येलो एरिया में हर 50 किसानों पर एक नोडल अधिकारी भी नियुक्त किया गया है। वहीं, ग्रीन जोन ग्रामीण स्तर पर हर 100 किसानों पर एक नोडल अधिकारी नियुक्त किया गया है और गांव में टीमों की ओर से प्रचार प्रसार किया जा रहा है और किसानों को जागरूक भी किया जा रहा है।  पराली जलाने पर 5 किसानों पर FIR  उन्होंने बताया कि इसको लेकर किसान जागरूक भी हुए हैं लेकिन कुछ किसानों द्वारा एक-दो स्थानों पर आगजनी की सूचना मिलने पर अभी तक कुल पांच किसानों पर एफआईआर दर्ज की गई है और उन पर ₹25000 जुर्माना भी किया गया है साथ ही उन किसानों की रेड एंट्री की गई है, जिससे वह किसान सरकार द्वारा दी जा रही योजनाओं का लाभ न ले सके। उन्होंने बताया कि इस बार जिन किसानों ने फसल के अवशेष जलाए हैं। उनकी रेड एंट्री पंजीकरण पर हुई है जिससे किसान सरकार की योजनाओं का लाभ दो साल तक नहीं उठा पाएंगे।  किसानों से की ये अपील उप निदेशक ने किसानों से अपील करते हुए कहा कि अभी 75% धान की कटाई बाकी है किसान पराली के अवशेष न जलाकर सरकार द्वारा दी जा रही योजनाओं का लाभ अवश्य उठाएं। फसल के अवशेष आसानी से बेच सकते हैं इस बार धान के अवशेषों की मांग ज्यादा है और 175 रुपए से लेकर ₹200 पराली बिक रही है।  

Drugs ने बुझाए 2 परिवारों के चिराग, 1 ही दिन में 2 युवकों की मौत, 2 वर्षों में करीब 30 युवक चढ़ चुके नशे की भेंट

रानियां रानियां क्षेत्र के गांव ओटू में नशे की लत ने एक बार फिर दो परिवारों के चिराग बुझा दिए। बुधवार को नशे की ओवरडोज से दो युवकों, सुखचैन (20) और विक्की (19) की मौत ने पूरे गांव को झकझोर दिया। दोनों शिक्षित, कुंवारे और बाजीगर समुदाय से थे। पिछले दो वर्षों में करीब 30 युवा इस लत की भेंट चढ़ चुके हैं, जबकि एक महीने पहले भी दो मौतें हुई थीं। गांव में नशे का जाल इतना गहरा चुका है कि ग्रामीण अब पुलिस प्रशासन की निष्क्रियता पर सवाल उठा रहे हैं। गुरुवार को इस मुद्दे पर ग्रामीण मीटिंग करेंगे, जिसमें नशे के खिलाफ ठोस कदमों पर चर्चा होगी। बुधवार सुबह 6 ले बजे सुखचैन पुत्र दयालूराम का शव ले रानियां ट्रक यूनियन के पास मिला। वह क मंगलवार शाम से लापता था। परिजनों स ने उसे कई जगह ढूंढा, लेकिन सुबह क किसी की सूचना पर शव मिला। उसी के दिन शाम 7 बजे दूसरी दुखद खबर मि आई। विक्की नामक युवक का शव जु गांव अभोली बस अड्डे के पास अचेत नि पड़ा मिला। उसे डॉक्टर के पास ले त जाया गया, लेकिन उसे मृत घोषित अ कर दिया गया। रानियां थाना के क एडिशनल एसएचओ गुरमिंदर सिंह इन ने कहा कि अभी तक थाने में कोई रा शिकायत नहीं आई। शिकायत मिलने अ पर नियमानुसार कार्रवाई होगी।