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सुप्रीम कोर्ट में हैरान करने वाला मामला: CJI के नाम पर फोन, जस्टिस सूर्यकांत सख्त

नई दिल्ली   सुप्रीम कोर्ट में रोजाना विभिन्न मामलों की सुनवाई होती है। बुधवार को सीजेआई सूर्यकांत ने एक शख्स को तगड़ी फटकार लगाई। सीजेआई ने एक आदेश पारित किया था, जिसके बाद शख्स ने उनके (सीजेआई) के भाई को फोन लगाकर पूछा कि यह आदेश कैसे पारित कर दिया। इस पर सीजेआई भड़क गए और शख्स के वकील से सुप्रीम कोर्ट में कड़े सवाल दागे। उन्होंने पूछा कि क्या अब वह मुझ पर हुक्म चलाएगा। लाइव लॉ के अनुसार, सीजेआई सूर्यकांत ने फोन कॉल करने वाले शख्स के वकील से कहा, ''आपके मुवक्किल के खिलाफ अवमानना ​​की कार्यवाही क्यों नहीं होनी चाहिए? उसने मेरे भाई को फोन करने की हिम्मत कैसे की और यह पूछा कि सीजेआई ने यह आदेश कैसे पारित किया? क्या वह मुझे हुक्म चलाएगा? आप इसकी पुष्टि करें, और फिर एक वकील के तौर पर, सबसे पहले आपको इस मामले से हट जाना चाहिए।'' सीजेआई सूर्यकांत ने चेतावनी देते हुए कहा कि भले ही वह भारत से बाहर कहीं भी छिप जाए, मुझे पता है कि ऐसे लोगों से कैसे निपटना है। दोबारा कभी ऐसी हिम्मत मत करना। मैं पिछले 23 सालों से ऐसे तत्वों से निपटता आ रहा हूं। दरअसल, सीजेआई सूर्यकांत एक ऐसे मामले की सुनवाई कर रहे थे, जिसमें अपर कास्ट की जनरल कैटेगरी से धर्म बदलकर बौद्ध बनने के बाद एक पीजी मेडिकल कॉलेज में एडमिशन के लिए बौद्ध प्रमाण पत्र के तहत मिलने वाले लाभों की मांग की गई थी। इस पर पिछले दिनों सुप्रीम कोर्ट ने हरियाणा के मुख्य सचिव को अल्पसंख्यक प्रमाण पत्र जारी करने के लिए दिशा निर्देश तय करने के लिए कहा था। इसी मामले में सीजेआई ने तब भी कड़ी फटकार लगाई थी। कोर्ट ने तब इसे नए तरीके का फ्रॉड बताया था। यह याचिका निखिल कुमार पुनिया और एकता पुनिया ने दायर की थी। सीजेआई सूर्यकांत ने तब कहा था, "वाह! अब, यह एक नए तरह का धोखा है। हमसे और कुछ मत कहलवाइए।'' इस याचिका पर कड़ा रुख अपनाते हुए, शीर्ष अदालत ने हरियाणा सरकार से जवाब मांगा था और यह स्पष्ट करने को कहा कि वह 'सामान्य श्रेणी' के उन उम्मीदवारों को अल्पसंख्यक प्रमाण पत्र कैसे जारी कर रही है, जो पहले परीक्षाओं में 'गैर-अल्पसंख्यक' आवेदकों के तौर पर शामिल हुए थे। बता दें कि सीजेआई सूर्यकांत इससे पहले भी कई मामलों में कड़ी फटकार लगा चुके हैं। एनसीईआरटी किताब विवाद में सोशल मीडिया पर की गई कुछ गैर जिम्मेदाराना कमेंट्स पर उन्होंने पिछले दिनों सख्ती दिखाई थी। उन्होंने कहा था कि सरकार ऐसी वेबसाइट्स और लोगों की पहचान करके बताए, जिन्होंने ऐसे टिप्पणियों को पब्लिश किया। उन्होंने ऐसी टिप्पणी करने वालों को चेतावनी देते हुए कहा था कि कुछ लोग भले ही देश के बाहर कहीं भी छिपे हुए हों, मैं उन्हें छोड़ने वाला नहीं हूं।  

जस्टिस सूर्यकांत का शपथ ग्रहण होगा ऐतिहासिक, अंतरराष्ट्रीय जज करेंगे समारोह में भाग

नई दिल्ली भारतीय न्यायपालिका के इतिहास में एक अभूतपूर्व और कूटनीतिक दृष्टि से बेहद महत्वपूर्ण क्षण देखने को मिलेगा। दरअसल सोमवार, 24 नवंबर को राष्ट्रपति भवन में होने वाले मुख्य न्यायाधीश (CJI) न्यायमूर्ति सूर्यकांत के शपथ ग्रहण समारोह में दुनिया के कई देशों के मुख्य न्यायाधीश और सुप्रीम कोर्ट के जज शामिल होंगे। बार एंड बेंच से बातचीत में तैयारियों से जुड़े अधिकारियों ने बताया कि यह पहली बार है जब इतने बड़े स्तर पर विदेशी न्यायिक प्रतिनिधि भारत के किसी मुख्य न्यायाधीश के शपथ ग्रहण समारोह में उपस्थित होंगे। 53वें मुख्य न्यायाधीश बनेंगे न्यायमूर्ति सूर्यकांत न्यायमूर्ति सूर्यकांत अपने लंबे और महत्वपूर्ण न्यायिक करियर के बाद भारत के 53वें मुख्य न्यायाधीश के रूप में शपथ ग्रहण करेंगे। उनका कार्यकाल कई अहम संवैधानिक फैसलों, न्यायिक संस्थानों में सुधार और कानूनी सहायता व्यवस्था को मजबूत बनाने की पहलों के लिए जाना जाता है। 2019 में सुप्रीम कोर्ट जज बनने से पहले वे हिमाचल प्रदेश हाई कोर्ट के मुख्य न्यायाधीश रहे। कूटनीतिक महत्व वाला आयोजन भारत सरकार ने विदेशी न्यायिक गणमान्य व्यक्तियों की पूरी सूची जारी की है। इनमें भूटान, केन्या, मलेशिया, मॉरीशस, नेपाल, श्रीलंका और ब्राजील के मुख्य न्यायाधीश, सुप्रीम कोर्ट के न्यायाधीश और उनके परिवारजन शामिल हैं। यह उपस्थिति न केवल भारतीय न्यायपालिका की वैश्विक प्रतिष्ठा को दिखाती है बल्कि भारत के न्यायिक और कूटनीतिक संबंधों में बढ़ती निकटता का संकेत भी देती ह विदेशी न्यायिक प्रतिनिधियों की सूची भूटान     जस्टिस ल्योनपो नोरबू शेरिंग, भूटान के चीफ जस्टिस;     ल्हादेन लोटे, भूटान के चीफ जस्टिस की पत्नी केन्या     जस्टिस मार्था कूमे, केन्या के सुप्रीम कोर्ट की चीफ जस्टिस और प्रेसिडेंट     जस्टिस सुसान न्जोकी न्दुंगु, केन्या की सुप्रीम कोर्ट जज। मलेशिया     जस्टिस तन श्री दातुक नलिनी पथमनाथन, फेडरल कोर्ट ऑफ मलेशिया की जज     पशुपति शिवप्रगसम, फेडरल कोर्ट ऑफ मलेशिया के जज के पति मॉरीशस     जस्टिस बीबी रेहाना मुंगली-गुलबुल, मॉरिशस की चीफ जस्टिस     रेबेका हन्ना बीबी गुलबुल, मॉरिशस के चीफ जस्टिस की बेटी नेपाल     जस्टिस प्रकाश मान सिंह राउत, नेपाल के चीफ जस्टिस     जस्टिस सपना प्रधान मल्ला, जज, नेपाल सुप्रीम कोर्ट     अशोक बहादुर मल्ला, जस्टिस सपना प्रधान मल्ला के पति     अनिल कुमार सिन्हा, नेपाल के सुप्रीम कोर्ट के पूर्व जज और अभी नेपाल सरकार में कानून, न्याय और संसदीय मामलों के मंत्री     उर्सिला सिन्हा, अनिल कुमार सिन्हा की पत्नी। श्रीलंका     जस्टिस पी पद्मन सुरसेना, श्रीलंका के चीफ जस्टिस     सेपालिका सुरसेना, श्रीलंका के चीफ जस्टिस की पत्नी     जस्टिस एस. थुरैराजा, PC, जज, सुप्रीम कोर्ट ऑफ श्रीलंका     शशिकला थुरैराजा, जस्टिस एस. थुरैराजा की पत्नी     जस्टिस अहमद नवाज, जज, सुप्रीम कोर्ट ऑफ श्रीलंका     रिजान मोहम्मद धलिप नवाजा, जस्टिस अहमद नवाजा की पत्नी ब्राजील     एंटोनियो हरमन बेंजामिन, नेशनल हाई कोर्ट ऑफ ब्राजील- सुपीरियर ट्रिब्यूनल डे जस्टिसा के मिनिस्टर न्यायपालिका के वैश्विक सहयोग का संकेत विशेषज्ञों का कहना है कि इस तरह की अंतरराष्ट्रीय उपस्थिति भारतीय न्यायपालिका में बढ़ते विश्वास और न्यायिक आदान–प्रदान की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम है। यह आयोजन भविष्य में न्यायिक सहयोग, तकनीकी आदान-प्रदान और आपसी व्यवहारिक समझ को भी मजबूत कर सकता है। सोमवार का यह आयोजन भारतीय न्यायपालिका के लिए न केवल ऐतिहासिक बल्कि कूटनीतिक दृष्टि से एक महत्वपूर्ण पड़ाव माना जा रहा है।

हरियाणा के बेटे से सुप्रीम कोर्ट तक: Justice Surya Kant की प्रेरक यात्रा

हिसार  हरियाणा के हिसार से निकलकर देश की सर्वोच्च न्यायिक कुर्सी तक पहुंचने वाले जस्टिस सूर्यकांत की कहानी प्रेरणादायक है। साधारण परिवार से आने वाले इन न्यायाधीश ने मेहनत, ईमानदारी और न्याय के प्रति जुनून से सुप्रीम कोर्ट तक का सफर तय किया है। वे 24 नवंबर 2025 को भारत के अगले मुख्य न्यायाधीश (CJI ) बनेंगे और फरवरी 2027 तक इस पद पर रहेंगे। प्रारंभिक जीवन और शिक्षा जस्टिस सूर्यकांत का जन्म 10 फरवरी 1962 को हिसार जिले के पेट्वर गांव में हुआ। उन्होंने प्रारंभिक शिक्षा गांव के स्कूल से पूरी की और 1981 में गवर्नमेंट पीजी कॉलेज, हिसार से स्नातक की डिग्री प्राप्त की। फिर उन्होंने 1984 में महर्षि दयानंद विश्वविद्यालय, रोहतक से कानून (एलएलबी) की पढ़ाई पूरी की। कानूनी करियर और सफलता  1984 में उन्होंने हिसार के जिला न्यायालय में वकालत शुरू की और 1985 में चंडीगढ़ स्थित पंजाब एवं हरियाणा हाईकोर्ट में प्रैक्टिस शुरू की। उन्होंने सांविधानिक, सेवा और नागरिक मामलों में प्रभावशाली दलीलों द्वारा अपनी पहचान बनाई। सामाजिक न्याय के लिए योगदान जस्टिस सूर्यकांत की न्यायिक यात्रा सामाजिक मुद्दों पर केंद्रित रही। वे सार्वजनिक संसाधनों के संरक्षण, भूमि अधिग्रहण, मुआवजे, पीड़ितों के अधिकार, आरक्षण और संवैधानिक संतुलन जैसे विषयों पर संवेदनशील और न्यायसंगत दृष्टिकोण के लिए जाने जाते हैं। उनके फैसलों ने सामाजिक न्याय और नागरिक अधिकारों को मजबूती दी। प्रमुख उपलब्धियां 7 जुलाई 2000: हरियाणा के सबसे युवा एडवोकेट जनरल नियुक्त। 2001: वरिष्ठ अधिवक्ता का दर्जा प्राप्त। 9 जनवरी 2004: पंजाब एवं हरियाणा हाईकोर्ट के स्थायी न्यायाधीश बने। 5 अक्तूबर 2018: हिमाचल प्रदेश हाईकोर्ट के मुख्य न्यायाधीश नियुक्त। आगामी मुख्य न्यायाधीश नियुक्ति केंद्र सरकार ने जस्टिस सूर्यकांत को देश का 53वां मुख्य न्यायाधीश बनाने की प्रक्रिया शुरू की है। मौजूदा मुख्य न्यायाधीश बीआर गवई 23 नवंबर 2025 को सेवानिवृत्त होंगे। नियुक्ति प्रक्रिया पूरी होने के बाद, 24 नवंबर 2025 को जस्टिस सूर्यकांत मुख्य न्यायाधीश पद संभालेंगे। वे 9 फरवरी 2027 तक इस पद पर रहेंगे। नियुक्ति प्रक्रिया का नियम ‘मेमोरेंडम ऑफ प्रोसीजर’ के अनुसार, सुप्रीम कोर्ट का सबसे वरिष्ठ और उपयुक्त न्यायाधीश को मुख्य न्यायाधीश नियुक्त किया जाता है। वर्तमान सीजेआई के सेवानिवृत्त होने से लगभग एक माह पहले विधि मंत्री उनकी सिफारिश मांगते हैं। वर्तमान में जस्टिस सूर्यकांत सुप्रीम कोर्ट में सबसे वरिष्ठ न्यायाधीश हैं। जस्टिस सूर्यकांत की नियुक्ति से भारतीय न्यायपालिका को नई दिशा और मजबूती मिलने की उम्मीद है।